स्ट्रोक यूनिट वार्ड में चूहों ने बनाए घर, गैलरी में घूमते हैं श्वान

एमबीएस में महिला की आंखों की पलकें कुतरने का मामला, फंगस और सीलन फैला रहा बीमारियां, अस्पताल में पेस्ट कंट्रोल अभियान नहीं दिखाई देता

स्ट्रोक यूनिट वार्ड में चूहों ने बनाए घर, गैलरी में घूमते हैं श्वान

अस्पताल में लावारिस जानवर, कुत्ते वार्डों में बेरोक टोक घूमते है। अस्पताल प्रशासन दावा कर रहा है उनके यहां पेस्टीसाइट कंट्रोल प्रोग्राम चल रहा है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल में कॉक्रोच, मच्छर और चूहों ने अपना स्थाई बसेरा बना लिया है।

कोटा। संभाग का सबसे बड़ा एमबीएस अस्पताल अपनी अव्यवस्थाओं को लेकर हमेशा सुर्खियों में बना रहता है। अस्पताल में मरीजों का इलाज कम दर्द ज्यादा मिलता है। संभाग के बड़े अस्पताल में मरीज यह सोचकर आता है कि यहां सरकार की ओर से बेहतर और इलाज मिलेगा लेकिन यहां की लचर व्यवस्था देखकर मरीज और तीमारदार अपने को ठगा सा महसूस करते हैं। अस्पताल का सर्वर आए दिन ठप पड़ जाता है। जिससे मरीजों को पर्ची बनाने के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। आए दिन संविदा कर्मचारी हड़ताल करते हैं जिससे मरीजों को पर्ची और जांच के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। गर्मी के चलते अस्पताल में आए दिन पुरानी लाइनों में लोड से फाल्ट आ जाते हैं जिससे मरीजों के ऑपरेशन तक बाधित हो जाते हैं। वार्ड में गर्मी से मरीज परेशान ही नजर आते हैं। अधिकांश वार्ड में पंखे नहीं होने से तीमारदार स्वयं इसकी व्यवस्था करते हैं। अस्पताल में लावारिस जानवर, कुत्ते वार्डों में बेरोक टोक घूमते हंै। अस्पताल प्रशासन दावा कर रहा है उनके यहां पेस्टीसाइट कंट्रोल प्रोग्राम चल रहा है। जबकि जमीनी हकीकत यह है कि अस्पताल में कॉक्रोच, मच्छर और चूहों ने अपना स्थाई बसेरा बना लिया है।

स्ट्रोक यूनिट वार्ड में गेट को चूहों ने कुतर कर बना लिया रास्ता
अस्पताल के स्ट्रोक यूनिट वार्ड की हालत बिल्कुल खराब है। यहां चूहों ने जगह जगह अपने बिल बना लिए। यह यहां बिल बनाकर उत्पात मचा रहे हैं। आईसीयू वार्ड के गेट को चूहों ने कुतर रखा है जिससे वे अंदर आसानी से प्रवेश कर जाते है। लकड़ी के गेट से छत तक पहुंच जाते हैं। चूहों ने यहां सिलिंग को कुतर कर अपना आशियना बना लिया है। पोस्ट आॅपरेटिव वार्ड में चूहे पकड़ने के लिए बॉक्स रखा है। इसका सही से उपयोग हो जाता तो हॉस्पिटल में चूहों का आतंक नहीं होता। इसी हॉस्पिटल में चूहों ने मरीज की आंख को कुतर दिया था।

टूटी सिलिंग दे रही हादसों को न्यौता
स्ट्रोक यूनिट वार्ड में जगह- जगह सिलिंग टूटी हुई है। जिसके गिरने का हमेशा खतरा बना हुआ है। बुधवार को लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला भी टूटी सिलिंग और गिरते प्लास्टर  को लेकर नाराजगी जता चुके हैं।

अस्पताल के गलियारों में घूमते श्वान
एमबीएस अस्पताल में निर्माण कार्य के चलते जगह जगह से द्वार टूटे हुए हैं जिसके चलते लावारिस मवेशी,  कुत्ते वार्डो के गलियारों तक पहुंच रहे हैं। ऐसे में पूरा अस्पताल अन हाइजेनिक बना हुआ है।

दीवारों पर फंगस-सीलन
स्ट्रोक यूनिट वार्ड में लगी सिलिंग जगह जगह से टूटी हुई है। वहीं दीवारों पर एसी के पानी से सीलन आ रही है। वहीं दीवारों पर ब्लैक फंगस लगा हुआ है जो बीमारियों को न्यौता दे रहा है। स्ट्रोक यूनिट वार्ड में दरकती सिलिंग से निकलते तारों से कभी भी हादसा हो सकता  है। बर्न वार्ड में 17 साल पुराना सेंट्रल एसी लगा हुआ है। वह ठीक नहीं हो सकता है। एक एसी की मोटर खराब है। आॅर्थो वार्ड में सर्दी के दिनों में भी इंचार्ज ने डक्ट को चालू रखा था। इसलिए वह खराब हो गई है। इसके रिपेयरिंग के टेंडर कर रखे हैं लेकिन अभी तक मरम्मत नहीं हुई।

अस्पताल में जांच व पर्ची कांउटर पर लगती है कतारें
एमबीएस अस्पताल में अव्यवस्थाएं इस कदर फैली  है कि अस्पताल प्रशासन चाहकर भी उन्हें दूरुस्त नहीं कर पा रहा है। पर्ची कांउटर से लेकर जांच कांउटर तक लगी कतारों से मरीजों को घंटो इंतजार करना पड़ रहा है। भर्ती की पर्ची बनाने के लिए मरीज को स्ट्रेचर पर ही पर्ची बनने तक इंतजार करना पड़ रहा है।

अस्पताल में पेस्टीसाइड के कंट्रोल अभियान चला रखा है। अस्पताल में जहां चूहे घुसने वाले स्थान हैं को  को चिंहित कर उनकी मरम्मत कराई जाएगी। इसके निर्देश दिए जा चुके है।
- डॉ. समीर टंडन उप अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा

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