यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद महंगाई से 7.1 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे आए

यूएनडीपी का अनुमान है कि युद्ध शुरू होने के बाद पहले तीन महीनों में 5.16 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए

यूक्रेन युद्ध शुरू होने के बाद महंगाई से 7.1 करोड़ लोग गरीबी रेखा के नीचे आए

दुबई। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण दुनिया भर में 7.1 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं। यूएनडीपी का अनुमान है कि युद्ध शुरू होने के बाद पहले तीन महीनों में 5.16 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए और वे प्रति दिन 1.90 डॉलर या उससे भी कम पैसे में जीवन यापन कर रहे हैं।

दुबई। संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) ने बृहस्पतिवार को एक रिपोर्ट में कहा कि यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद खाद्य पदार्थों और ऊर्जा की कीमतों में भारी वृद्धि के कारण दुनिया भर में 7.1 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे चले गए हैं। यूएनडीपी का अनुमान है कि युद्ध शुरू होने के बाद पहले तीन महीनों में 5.16 करोड़ से अधिक लोग गरीबी रेखा के नीचे आ गए और वे प्रति दिन 1.90 डॉलर या उससे भी कम पैसे में जीवन यापन कर रहे हैं। इसके साथ ही विश्व की कुल जनसंख्या का करीब नौ प्रतिशत हिस्सा गरीबी रेखा के नीचे हो गया। इसके अलावा करीब दो करोड़ लोग रोजाना 3.20 डॉलर से कम पैसे में जीवन यापन कर रहे हैं। कम आमदनी वाले देशों में, परिवार अपनी घरेलू आय का 42 प्रतिशत हिस्सा भोजन पर खर्च करते हैं। लेकिन पश्चिमी देशों द्वारा रूस के खिलाफ प्रतिबंध लगाए जाने से ईंधन और मुख्य खाद्य पदार्थों जैसे गेहूं, चीनी और खाना पकाने के काम आने वाले तेल की कीमतें बढ़ गईं। यूक्रेन के बंदरगाहों के अवरूद्ध हो जाने और कम आय वाले देशों को अनाज निर्यात नहीं कर पाने के कारण कीमतों में और वृद्धि हुई। इससे लाखों लोग जल्दी ही गरीबी रेखा से नीचे चले गए। यूएनडीपी प्रशासक अचिम स्टीनर ने रिपोर्ट जारी होने के मौके पर कहा कि जीवन यापन के खर्च पर पड़ने वाला प्रभाव काफी गंभीर है और हाल के समय में ऐसी स्थिति नहीं देखी गई। रूस-यूक्रेन युद्ध के कारण जिस गति से लोग प्रभावित हुए, वह महामारी के चरम के दौर की आर्थिक पीड़ा से भी अधिक गंभीर है। यूएनडीपी ने कहा कि फरवरी के अंत में यूक्रेन पर रूसी हमले के बाद सिर्फ तीन महीनों में 7.1 करोड़ से अधिक लोगों ने गरीबी को महसूस किया जबकि कोविड महामारी के दौरान करीब 18 महीने के लॉकडाउन के दौरान 12.5 करोड़ लोगों ने इस दर्द को महसूस किया था।

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