राजकाज में क्या खास

कुछ भाई लोगों के चेहरों पर तो चिन्ता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी

राजकाज में क्या खास

राज का काज करने वाले लंच केबिनों में बतियाते हैं कि सियासी संकट में लंबे हाथ मार चुके कुछेक नवरत्नों पर एमएलएज भी भारी पड़ रहे हैं, तभी तो पब्लिक में भी रत्नों के अवगुणों की ज्यादा पब्लिसिटी कर रहे हैं।

चिन्ता में राज के नवरत्न

इन दिनों सूबे के राज के नवरत्न चिन्ता में डूबे हुए हैं। उनकी रातों की नींद और दिन का चैन सौ कोसों दूर हैं। कुछ भाई लोगों के चेहरों पर तो चिन्ता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं। उनकी नींद उड़ना भी लाजमी है, चूंकि मामला सात पीढ़ियों का जुगाड़ हाथ से खिसकने से जुड़ा हुआ है। राज का काज करने वाले लंच केबिनों में बतियाते हैं कि सियासी संकट में लंबे हाथ मार चुके कुछेक नवरत्नों पर एमएलएज भी भारी पड़ रहे हैं, तभी तो पब्लिक में भी रत्नों के अवगुणों की ज्यादा पब्लिसिटी कर रहे हैं। जब से रिशफलिंग की हवा चली है, तब से राज के नवरत्न भी कुर्सी बचाने के लिए सवामणियां कर रहे हैं।

सर्वे ने उड़ाई नींद

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पिछले दिनों आए एक सर्वे से सूबे के कई नेताओं की नींद उड़ी हुई है। उड़े भी क्यों नहीं, मामला भविष्य से जुड़ा हुआ है। सर्वे से हाथ वाले भाई लोगों की नींद उड़ना तो समझ में आता है, लेकिन भगवा वालों के चेहरे कुछ ज्यादा ही लटके हुए हैं। लटकने का कारण भी साफ है कि राज की कुर्सी के सपने देखने वाले भाई लोगों ने दिल्ली वाले छोटा भाई और मोटा भाई के कान भरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे, मगर सूबे की पब्लिक की राय को नजरअंदाज करना भी तो आसान नहीं है। अगर सर्वे पर अमल हुआ, तो कइयों के मंसूबों पर पानी फिरता नजर आएगा। अब समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी हैं।

कपडेÞ बदलने का राज

नेताओं की भी कभी कभी कपड़े बदलने की मजबूरी होती है। वे कभी गांधी टोपी के साथ खादी का कुर्ता और पायजामा पहनते हैं, तो मौका मिलने में निकर में भी आ जाते हैं। इन दिनों उदयपुर शहर वाले गुलाब जी भाईसाहब की बदली डेÑस सूबे की सबसे बड़ी पंचायत में भी चर्चा का विषय बनी रही। किसी ने दिल की बात पूछी तो भाईसाहब ने भी सहज भाव से पीड़ा को बाहर निकाल दिया। उनका कहना था कि अब तो नेताओं की छवि सुनकर वर्दी पहनने का मन ही नहीं करता। नाम से पहले एक दो गाली का संबोधन जरूर सुनने को मिलता है। 

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दबदबा नागपुर का

भगवा में आमूलचूल परिवर्तन के संकेतों को लेकर कइयों के चेहरों पर चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी है। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में आने वालों में चर्चा है कि पिछली बार से सबक लेते हुए इस बार किसी भी असंतुष्ट को निराश नहीं करेंगे। आथूणी और अगूणी के रूठे नेताओं की मान मनुहार कर उनके जनाधार के क्षेत्र में पहले सीटों का बंटवारा कर दिया जाएगा। आखिर में भगवा में नागपुर का दबदबा ही रंग जो जमाएगा।

एक जुमला यह भी

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सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी ब्यूरोक्रेसी को लेकर है। इस बार चर्चा है कि अब ब्यूरोके्रसी चार्ज हो गई है, तभी तो राज की सवा सौ योजनाओं का असर दिखाई देने लगा है। राज का काज करने वाले साहब लोग लंच केबिनों में बतियाते हैं कि अब काम के अलावा कोई चारा नहीं। सो भाग-भाग कर काम करते दिखाई देने लगे हैं।

एल. एल. शर्मा, पत्रकार

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