दुर्लभ हिप आर्थरोस्कोपी कर 9 साल की बच्ची को दिया नया जीवन

बच्ची को दांयी हिप जॉईंट में गंभीर इंफेक्शन था जो धीरे-धीरे उसके हिप के जोड़ को खराब कर रहा था।

दुर्लभ हिप आर्थरोस्कोपी कर 9 साल की बच्ची को दिया नया जीवन

इंफेक्शन को रोकने के लिए ऑर्थोपेडिक, जॉईंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स आर्थरोस्कोपी सर्जन डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल के नेतृत्व में आर्थरोस्कोपी सर्जरी द्वारा हिप जोड़ की सफाई की गई और प्रभावित टिश्यू बायोप्सी के लिए भेजा गया।

जयपुर। जयपुर में एक हॉस्पिटल की ऑर्थोपेडिक्स टीम ने एक और उपलब्धि अपने नाम दर्ज की है। हाल ही में अस्पताल में नवीनतम हिप आर्थरोस्कोपी सर्जरी द्वारा एक 9 साल की बच्ची का ऑपरेशन कर उसे नया जीवनदान दिया गया। बच्ची को दांयी हिप जॉईंट में गंभीर इंफेक्शन था जो धीरे-धीरे उसके हिप के जोड़ को खराब कर रहा था। इंफेक्शन को रोकने के लिए ऑर्थोपेडिक, जॉईंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स आर्थरोस्कोपी सर्जन डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल के नेतृत्व में आर्थरोस्कोपी सर्जरी द्वारा हिप जोड़ की सफाई की गई और प्रभावित टिश्यू बायोप्सी के लिए भेजा गया। हिप आर्थरोस्कोपी एक जटिन एवं दुर्लभ सर्जरी है और देश के चुनिंदा केन्द्रों में ही की जाती है।

बच्ची को 2-3 हफ्तों से दांहिने हिप जोड़ में तेज़ दर्द और बुखार था जिसके चलते वो ठीक से चल-फिर भी नहीं पा रही थी। दर्द दिन ब दिन बढ़ता ही जा रहा था। जब उसे धौलपुर से  जयपुर रैफर किया गया तो डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल ने पाया कि बच्ची के हिप जोड़ में गंभीर इंफेक्शन हो गया था - जिसका अगर तुरंत ईलाज नहीं किया जाता तो बच्ची का हिप जोड़ स्थायी रूप से खराब हो जाता। ऐसे मामलों में अक्सर ओपन सर्जरी की जाती है जिसमें 5 से 6 सेमी. का चीरा लगता है, निशान हो जाते है, जहां सर्जरी होती है उसके आसपास फाईब्रोसिस हो जाता है और हिप जोड़ तक जाने वाला खून का प्रवाह भी प्रभावित हो सकता है।

नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल, जयपुर के ऑर्थोपेडिक, जॉईंट रिप्लेसमेंट एवं स्पोर्ट्स आर्थरोस्कोपी सर्जन डॉ. हेमेन्द्र अग्रवाल ने बताया कि हिप के लिए आर्थरोस्कोपी सर्जरी करना मुश्किल और कौशलपूर्ण प्रोसिज़र है। बच्ची की उम्र और हिप आर्थरोस्कोपी में आयें नये एडवांसेज को देखते हुए हमने इस प्रकार हिप जोड़ की सफाई करने का निर्णय लिया जो काफी सफल रहा। बच्ची को केवल कुछ टांके लगे और हिप के टिश्यूज को कोई नुकसान नहीं पहुंचा जिससे मरीज की रिकवरी काफी जल्दी हो गयी और वह दर्दमुक्त होकर फिर से खेलने-कूदने लायक हो गयी। हिप आर्थरोस्कोपी चुनिंदा मामलों में ही की जा सकती है इसलिए केस का चुनाव भी उतना ही महत्वपूर्ण है।

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