मुसीबत ना बन जाएं बीमारियां

बारिश के दिनों में बाहर के खाने के साथ साथ बाहर पानी को पीने से भी बचें।

मुसीबत ना बन जाएं बीमारियां

बारिश के दिनों में डायरिया या जिसे इन दिनों स्टमक फ्लू कहा जाता है। इसका भी बड़ा खतरा रहता है। यह भी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियां हैं। यह बैक्टीरिया गंदगी में पनपता है और भोजन या पानी की बदौलत इंसान की आंतों में जब पहुंच जाता है, तो वहां ये सूजन पैदा कर देता है।

बारिश के मौसम में बाहर ही नहीं घर का खानपान भी कई बार कई तरह से दूषित हो जाता है। ऐसे में जिसे हम आम बोलचाल की भाषा में जोंडिस या पीलिया कहते हैं, उसकी आशंका बढ़ जाती है। लेकिन इसे मेडिकल की भाषा में हेपेटाइटिस नामक लिवर संक्रमण से संबोधित किया जाता है और यहां इसे हेपेटाइटिस ए और ई से कैटेगराइज किया जाता है।  टाइफाइड का भी इन दिनों खतरा आम दिनों से ज्यादा रहता है। टाइफाइड दरअसल सल्मोनल्ला एंटेरिका सेरोटाइप टाइफी नाम बैक्टीरिया की वजह से होता है। यह गंभीर संक्रामक रोग है। यह बैक्टीरिया इंसान के मल में जीवित रहता है। कई जगहों में बारिश के दिनों में जब पीने के पानी में सीवेज के पानी की मिलावट हो जाती है तो भोजन या पानी के जरिये यह बैक्टीरिया हमारे शरीर तक पहुंच जाता है। यह बैक्टीरिया इसलिए खतरनाक है, क्योंकि महीनों तक जीवित रहता है और बहुत तेजी से फैलता है। अगर एक बार कोई व्यक्ति टाइफाइड की गिरफ्त में आ जाए तो अच्छे  इलाज के बावजूद इससे छुटकारा पाने में दो हफ्ते तक लग जाते हैं। इसलिए बारिश के दिनों में बाहर के खाने के साथ साथ बाहर पानी को पीने से भी बचें।


बारिश के दिनों में डायरिया या जिसे इन दिनों स्टमक फ्लू कहा जाता है। इसका भी बड़ा खतरा रहता है। यह भी बैक्टीरिया से होने वाली बीमारियां हैं। यह बैक्टीरिया गंदगी में पनपता है और भोजन या पानी की बदौलत इंसान की आंतों में जब पहुंच जाता है, तो वहां ये सूजन पैदा कर देता है। इस कारण हमें भूख लगनी बंद हो जाती है और अगर हम कुछ जबरदस्ती खाते हैं तो वह पचता नहीं है। इसका नतीजा भयानक हो सकता है। इसलिए बारिश के दिनों में अगर भूख न लग रही हो तो तुरंत डॉक्टर से मिलना चाहिए। इन दिनों की एक और खास बीमारी है डेंगू।  एडीज प्रजाति के मच्छरों द्वारा फैलायी जाने वाली यह बीमारी इंसान के शरीर में फ्लैवी वायरस के प्रवेश कर जाने से होती है।


  इस मौसम में मच्छरों से खासतौर पर बचना चाहिए। इसके लिए अगर संभव हो तो मच्छरदानी लगाकर ही सोएं। फुल बाजू वाले कपड़े पहनें और अपने रिहायस के इर्दगिर्द कभी भी पानी न जमा होने दें। मच्छरों से बचाव के अलावा यह भी जरूरी है कि इस मौसम में पानी को जितना हो सके उबालकर पीया जाए।  दरवाजों, खिड़कियों आदि में नेट्स की व्यवस्था के चलते मच्छरों और मक्खियों के घर में प्रवेश से बचें और हां, मलेरिया, टायइफाइट और हेपेटाइटस से बचे रहने के लिए टिका जरूर लगवाएं।

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