बालिकाओं में आत्म रक्षा व आत्म-अनुशासन विकसित कर रहा जूडो

कोटा में कई महिला खिलाड़ी नेशनल, इंटरनेशनल की कर रही तैयारी

बालिकाओं में आत्म रक्षा व आत्म-अनुशासन विकसित कर रहा जूडो

कोटा में महिला जूडो को अपने प्रगति रथ पर अग्रसर है। महिलाए आत्म रक्षा से लेकर आत्म- अनुशासन का पाठ जूडो के माध्यम से सीख रही है। जूडो में महिलाए पुरुषों से कम नहीं है। यहां की बेटिया कई राष्टÑीय खिलाड़ी है और अब नेशनल और इंटरनेशन जूडो प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रही है।

कोटा । कोटा में महिला जूडो को अपने प्रगति रथ पर अग्रसर है। महिलाएं आत्म रक्षा से लेकर आत्म- अनुशासन का पाठ जूडो के माध्यम से सीख रही है। जूडो में महिलाए पुरुषों से कम नहीं है। यहां की बेटिया कई राष्ट्रीय खिलाड़ी है और अब नेशनल और इंटरनेशन जूडो प्रतियोगिताओं के लिए तैयारी कर रही है। कोटा में अभी तक बालिकाए आत्म रक्षा के लिए ही जूडो सिखा करती थी अब राष्ट्रीय खेलों में भी अपना वर्चस्व कायम करने में जुटी हुई है। जूडों की खिलाड़ियों ने बताया कि जूडो गेम एक शानदार और गतिशील लड़ाई वाला खेल है जो शारीरिक कौशल और मानसिक दृढ़ता दोनों की मांग करता है। इसमें ऐसे तरीके शामिल हैं जो आपको खड़े होने की मुद्रा से अपने विरोधियों को उनकी पीठ पर उठाने और डंप करने देते हैं। जमीन पर, इसमें अपने प्रतिद्वंद्वी को जमीन पर पिन करने, उन्हें नियंत्रित करने और जब तक वे जमा नहीं करते तब तक चोक होल्ड या संयुक्त ताले का उपयोग करने के तरीके शामिल हैं। अभी हाल ही में राष्ट्रमंडल खेल में जूडो में भारत की तूलिका मान ने महिलाओं के 78 किग्रा फाइनल में सिल्वर मेडल जीतने । बाद से ही कोटा की बेटियों में जूडो को लेकर जोश दूगना हो गयाहै। यह राष्ट्रमंडल खेलों में जूडो में भारत का तीसरा पदक है। कोटा की बेटिया भी राष्ट्र मंडल तक जाने का सपना संजो रही है।

नेशनल प्रतियोगिता की कर रहे तैयारी
जूडो कोच गोपाल सिसोदिया ने बताया कि राष्ट्रमंडल खेल में जूडो में भारत महिला वर्ग बेहतर प्रदर्शन से कोटा की खिलाड़ियों में खासा उत्साह है। सुशीला देवी लिकमाबाम ने महिलाओं के 48 किग्रा वर्ग में रजत पदक जीता जबकि पुरुषों के 60 किग्रा में विजय कुमार यादव ने कांस्य पदक हासिल किया। भारत ने अब तक राष्ट्रमंडल खेल में जूडो में 11 पदक जीते हैं। इनमें से चार पदक 2014 के संस्करण में आए थे, जिनमें दो रजत और दो कांस्य शामिल हैं।कोटा में भी कई राष्ट्रीय खिलाड़ी है जो नेशनल इंटरनेशनल की तैयारी कर रहे है, कोटा में श्री हरदौल व्यायाम शाला में जूडो के लगभग 5 से 10 खिलाड़ी नियमित अपना अभ्यास करते है।

ये है जूडो नियम और जूडो तकनीक
जूडो कोच गोपाल सिसोदिया ने बताया कि तीन रेफरी एक जूडो प्रतियोगिता का संचालन करते हैं, जो एक जूडो मैट पर होती है। लक्ष्य एक इप्पॉन, या एक पूर्ण बिंदु स्कोर करना है, जो चार अलग-अलग तरीकों से किया जा सकता है और मैच को तुरंत खत्म कर सकता है। एक तरीका यह है कि सिर और कंधे पर नियंत्रण बनाए रखते हुए प्रतिद्वंद्वी को 25 सैकंड के लिए पीठ पर पिन किया जाए। जीतने के लिए एक अन्य तकनीक आर्म लॉक का उपयोग करना है, जिसमें सीधे हाथ की कोहनी पर दबाव डालना या प्रतिद्वंद्वी के सामने आने तक एक समकोण पर मुड़े हुए हाथ को घुमाना शामिल है।

नियमित अभ्यास से आता बेहतर जूडो
जूडो खेल आत्म अनुशासन का खेल है जो आत्म रक्षा के साथ आपके जीवन को  फुर्तिला बनाता है। नियमित अभ्यास से बेहतर जूडो खिलाडी बना जा सकता है। मैं जूडो की ऑल इंडिया यूनिवर्सिटी खिलाड़ी हूं।  श्री हरदौल व्यायाम शाला में कोच गोपाल सिसोदिया के पास प्रेक्टिस कर नेशनल की तैयारी कर रही हूं। महिलाओं को आत्म रक्षा के साथ कॅरियर बनाने में जूडो अहम भूमिका निभाता है। - संगीता कश्यप, जूडो खिलाड़ी

नेशनल में गोल्ड लाने का लक्ष्य
अब जूडो आत्म रक्षा तक ही सिमित नहीं रहा है। इसमें बेटिया राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय पहचान बना रही है। मैं कोच गोपाल सिसोदिया के पास पिछले 5 वर्षों से अभ्यास कर रही हूं और इस बार नेशनल में गोल्ड लेकर आऊंगी। यही मेरा गोल है। - मृणाली प्रजापति, जूडो खिलाड़ी

 कई खिलाड़ियों ने नाम किया रोशन
 जूडो जापानी में  कोमल विधि कहलाता है। यह एक जापानी मार्शल आर्ट है जिसकी स्थापना 1882 में जिगोरो कानो ने की थी। इसे जिउ-ओल्ड जित्सु के तरीकों से विकसित किया गया था। यह दुनिया में सबसे अधिक प्रचलित मार्शल आर्ट है, साथ ही फुटबॉल के बाद दुनिया का दूसरा सबसे लोकप्रिय खेल है। लड़ाकू खेलों में आत्म-अनुशासन विकसित किया जाता है, जो अपने और दूसरों के सम्मान पर बनाया जाता है। हरदौल मल्लखंब एकेडमी  कई खिलाड़ी जूडो के राष्ट्रीय खिलाड़ी है, मृणाली प्रजापति ,रौनक राठौर, संगीता कश्यप  ने नेशनल में कोटा का नाम रोशन किया।- गोपाल सिसोदिया, जूडो कोच

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