हर वर्ष 40 हजार मकानों की खरीद बिक्री

रियल एस्टेट में भारी बूम , मकानों की खरीद फरोख्त में आई खासी तेजी

हर वर्ष 40 हजार मकानों की खरीद बिक्री

कोरोना काल के बाद एक बार फिर से यह उद्योग पनपने लगा है। हर व्यक्ति व परिवार को मकान की जरूरत है। सरकार भी हर परिवार को छत मुहैया करवा रही है। ऐसे में जैसे ही कोरोना संक्रमण का खतरा कम हुआ वैसे ही लोग फिर से अपने मकान के सपने को साकार करने में जुट गए। रियल एस्टेट कारोबारी व बिल्डर्स को भी काम मिल गया है।

कोटा । कोरोना काल  में दो साल तक रियल एस्टेट एक तरह से ठप सा हो गया था। लेकिन दो साल बाद एक बार फिर से इसमें बूम आया है।  जरूरतमंद लोगों द्वारा मकान बनाने और मकान की रजिस्ट्री  करवाई जा रही है। जिससे इसमें भी काफी वृद्धि हुई है। कोटा में रीयल एस्टेट का कारोबार काफी बेहतर रहा है। यहां एक के बाद एक लगातार बहुमंजिला इमारतों का निर्माण हो रहा है। जिनमें आवासीय से लेकर व्यवसायिक तक शामिल हैं। नगर विकास न्यास द्वारा तो आवासीय कॉलोनियां विकसित की ही जा रही हैं। उसके अलावा भी बिल्डर्स  व रियल एस्टेट के बड़े कारोबारी भी नई-नई प्लानिंग बना रहे हैं।  जिससे कोटा में मकानों व जमीनों की कीमतों में भी काफी उछाल आया है। कोटा में तेजी से बढ़ रहे रियल एस्टेट पर कोरोना काल में दो साल तक रोक सी लग गई थी। हालांकि इस दौरान हर व्यवसाय प्रभावित हुआ था। लेकिन कोरोना काल के बाद एक बार फिर से यह उद्योग पनपने लगा है। हर व्यक्ति व परिवार को मकान की जरूरत है। सरकार भी हर परिवार को छत मुहैया करवा रही है। ऐसे में जैसे ही कोरोना संक्रमण का खतरा कम हुआ वैसे ही लोग फिर से अपने मकान के सपने को साकार करने में जुट गए। रियल एस्टेट कारोबारी व बिल्डर्स को भी काम मिल गया है। दीपावली के पहले से ही इस कारोबार में वृद्धि होना शुरू हो गई थी जो उसके  एक महीने बाद तक जारी है। 

कोटा में हर साल बिक रहे करीब 40 हजार से अधिक मकान 
कोटा के दोनों रजिस्ट्रार कार्यालयों का वित्तीय वर्ष 2022-23 का लक्ष्य 226 करोड़ 44 लाख रुपए है। जिसमें से वित्तीय वर्ष के 7 माह में ही कार्यालय ने 191 करोड़ 15 लाख का लक्ष्य प्राप्त कर लिया है। करीब दो सौ करोड़ रुपए की आय अभी तक रजिस्ट्रार कार्यालय मकानों की रजिस्ट्री से कर चुका है। जानकारों के अनुसार वैसे तो रजिस्ट्री डीएलसी दर व प्रोपर्टी की कीमत के हिसाब से होती है। लेकिन यदि एक मकान की औसत रजिस्ट्री करीब 50 हजार रुपए भी आंकी जाए तो दो सौ करोड़  के हिसाब से कोटा में हर साल करीब 40 हजार से अधिक मकानों की खरीद फरोख्त हो  चुकी है।  महीने का आंकलन किया जाए तो हर महीने करीब 3 से 4 हजार मकान बिक रहे हैं। जबकि अभी तो वित्त वर्ष के 5 महीने शेष हैं। 

रजिस्ट्रार कार्यालय में लक्ष्य से अधिक आय
मकान बनाने वाले हर व्यक्ति को उसकी रजिस्ट्री करवाना आवश्यक होता है। रजिस्ट्री प्रोपर्टी की कीमत के हिसाब से होती है। कोटा में दो उप रजिस्ट्रार कार्यालय हैं। जिनमें पिछले तीन साल के रिकॉर्ड का आंकलन करने पर पता चला कि  रजिस्ट्री का जो विभाग का लक्ष्य था उससे काफी अधिक आय हो चुकी है। रजिस्ट्रार कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार वित्त वर्ष 2020-21 में जहां उप रजिस्ट्रार प्रथम का लक्ष्य 91 करोड़ 6 लाख रुपए था वहीं आय 59 करोड़ 85 लाख रुपए हुई थी। यानि लक्ष्य का करीब 65 फीसदी आय हुई थी। वहीं उप रजिस्ट्रार कार्यालय द्वितीय का इसी अवधि का लक्ष्य 120 करोड़ 7 लाख रुपए था जबकि आय 70 करोड़ 9 लाख रुपए यानि करीब 58.38 फीसदी ही लक्ष्य प्राप्त हुआ था। जबकि वित्त वर्ष 2021-22 में उप रजिस्ट्रार कार्यालय प्रथम का लक्ष्य 88 करोड़ 11 लाख रुपए था जिसकी एवज में आय हुई 92 करोड़ 56 लाख यानि 105.5 फीसदी। वहीं उप रजिस्ट्रार कार्यालय द्वितीय में इसी अवधि का लक्ष्य था 96 करोड़ 47 लाख और आय हुई थी 102 करोड़ 97 लाख यानि 106.73 फीसदी। 

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यहां 7 माह में ही लक्ष्य से काफी अधिक
रियल एस्टेट कारोबार में बूम का अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि पिछले वर्षों की तुलना में वर्तमान वित्त वर्ष 2022-23 में उप रजिस्ट्रार कार्यालय प्रथम का लक्ष्य 108 करोड़ 10 लाख रुपए है। जबकि अप्रेल से अक्टूबर तक के 7 माह में इस कार्यालय में लक्ष्य से काफी अधिक 113 करोड़ 45 लाख रुपए की रजिस्ट्री कर 104.95 फीसदी आय प्राप्त कर ली है। हालांकि उप रजिस्ट्रार कार्यालय द्वितीय का इसी अवधि का लक्ष्य 118 करोड़ 54 लाख रुपए है। उसकी एवज में अभी तक 77 करोड़ 70 लाख रुपए यानि 65.66 फीसदी लक्ष्य प्राप्त किया जा चुका है। अभी तो वित्त वर्ष को पूरा होने में 5 माह का समय शेष है। 

बिल्डर्स समूहों में भी उत्साह
कोरोना काल के दो साल बाद रियल एस्टेट में आए बूम से बिल्डर्स समूहों में भी उत्साह है। उनमें भी कारोबार बढ़ने से एक बार फिर से काम करने की उम्मीद जगी है। जबकि कोरोना काल के दो साल तक अधिकतर लोग द्वारा प्रोपर्टी खरीेदना बेचना बंद कर दिया था। नए मकान बनना बंद से हो गए थे। जिससे बिल्डर्स में भी निराशा सी छा गई थी।

कोरोना काल के बाद रियल एस्टेट में वृद्धि हुई है। हर व्यक्ति अपने घर के सपने को साकार करना चाहता है। इस कारण से लोग मकान खरीदना व बनाना चाह रहे हैं। लोगों के साथ ही बिल्डर्स में भी फिर से काम करने की उम्मीद जगी है। 
-आई.एल. सैनी, निदेशक, सुमंगलम् ग्रुप 

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कोरोना काल के बाद लोगों में एक बार फिर से प्रोपर्टी खरीदने के प्रति रूझान बढ़ा है। हालांकि अधिकतर जरूरतमंद लोग ही प्रोपर्टी खरीद व बेच रहे हैं। दीपावली के समय में लोगों ने प्रोपर्टी व्यवसाय में इनवेस्ट किया है। जिससे इसमें पिछले सालों की तुलना में उछाल आया है। 
-सुशील जैन, निदेशक, ओरियंट बिल्डर्स 

कोरोना काल के दो साल बाद एक बार फिर से  रीयल एस्टेट कारोबार में वृद्धि हुई है। पहले जहां लोग इनवेस्ट के हिसाब से प्रोपर्टी खरीद कर रख रहे थे। वहीं अब लोग जरूरत के हिसाब से ही प्रोपर्टी में इनवेस्ट कर रहे हैं। प्रोपर्टी खरीदने के बाद उसकी रजिस्ट्री भी करवा रहे हैं। जिससे पिछले सालों की तुलना में इस साल में इस कारोबार में उत्साह है। 
-अभिषेक गुप्ता, निदेशक, आकांक्षा दीप हाइट्स 

कोरोना काल में सब कुछ ठप सा हो गया था। दो साल तक तो लोगों ने न तो कोई प्रोपर्टी खरीदी और न ही बेची। जिससे रजिस्ट्री भी बहुत कम हुई थी। कोरोना काल के वित्त वर्ष 2020-21 में रजिस्ट्रार कार्यालय का लक्ष्य  पूरा नहीं हो पाया  था। जबकि उसके बाद दो साल से वित्त वर्ष 2021-22 व 2022-23 में आय से काफी अधिक लक्ष्य प्राप्त हो चुका है। जबकि अभी 5 माह का समय शेष है। इससे अंदाजा लगाया जा सकता है कि रीयल एस्टेट बढ़ा है और लोग  प्रोपर्टी खरीद रहे हैं तभी तो उसकी रजिस्ट्री करवाने आ रहे हैं। 
-बाल कृष्ण तिवारी, उप महानिरीक्षक, पंजीयन एवं मुद्रांक 

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