राजकाज

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जानें राज-काज में क्या है खास

गानों के मायने

    जब से छोटे पायलट ने 51 साल पुरानी राजकपूर की फिल्म मेरा नाम जोकर का गाना गाया है, जबसे हाथ वाले कई भाई लोग इसके मायने निकालने में रात-दिन एक कर रहे हैं। छोटे साहब ने भी यह गाना यॅूं ही नहीं गाया, बल्कि सोच समझकर गाया है। इसके लिए उनको कई महीनों से मौके की तलाश थी। अब देखो ना इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर आने वाला हर वर्कर इस गाने के तार सियासी संकट से जोडेÞ बिना नहीं रहता। अब इन भाई लोगों को कौन समझाए कि यह तो 51 सदाबहार गाना है, इसे कोई भी गा सकता है। जब साहब इस गाने को गा रहे थे, तो उसी से एक फर्लांग दूर हाथ वाले कुछ भाई लोगों की मौजूदगी में एक नेताजी उसी फिल्म के गाने के बोल जाने कहां गए वो दिन गुनगुना रहे थे।

बदले-बदले से साहब
    ब्यूरोक्रेसी में एक बड़े साहब की अचानक बदली बॉडी लेंग्वेज को देखकर कइयों का माथा ठनका हुआ है। सचिवालय में हर कोई आने वाला अफसर भी इस बदली बॉडी लेंग्वेज की चर्चा किए बिना नहीं रहते। तुला राशि वाले साहब भी इलाहाबाद से ताल्लुकात रखते हैं और सीनियरटी में टॉप हैं। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि राज करने वालों ने 16 महीने पहले हुई चूक को ठीक करने के मानस को भांप कर कुछ साहब लोग इसे बाहर तक फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहे। जब से यह चर्चा आठ नंबर से निकल सचिवालय के गलियारों तक पहुंची है, तब से साहब की बॉडी लेंग्वेज बदली-बदली सी नजर आने लगी है। चर्चा तो यहां तक है कि राज ने भी साहब को आठ महीने अपनी मुराद पूरी करने पक्का आश्वासन दे दिया है, लेकिन तीन मोहतरमाओं के फेर में खुलकर नहीं बोल पा रहे हैं।

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यह पब्लिक है, सब जानती है
    खादी वालों का कोई सानी नहीं है। हर बात को अपने हिसाब से लेते हैं, चाहे वह पब्लिक के फायदे की हो या नुकसान की। अब देखो ना गुजरे संडे को पिंकसिटी में बन्नाओं ने एकजुटता तो अपने समाज के लिए दिखाई थी, लेकिन दोनों दलों के नेता अपने-अपने हिसाब से मायने निकालने में जुट गए हैं। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि मारवाड़ से ताल्लुकात रखने वाले एक भगवाधारी नेता ने तो दिन में ही कुर्सी के सपने देखना शुरू कर दिया। शेखावाटी की धरा में पैदा हुए हाथ वाले नेता उनसे भी एक कदम आगे निकले और खुद को बड़ा नेता मानने में कोई कंजूसी नहीं की। अब इन दोनों तरफ के नेताओं को कौन समझाए कि यह पब्लिक है, सब जानती है, अंदर क्या है, बाहर क्या है, सब पहचानती है।


मंत्री का हिन्दी प्रेम
    राज में सबसे बुजुर्ग रत्न के हिन्दी प्रेम के आगे काज करने वाले भी बेबस हैं। फोरेस्ट डवलपमेंट के मामले में काज करने वालों ने अंग्रेजी में नोट क्या लिखा, शामत मोल ले ली। हिन्दी प्रेमी मंत्री की जोरदार लताड़ के आगे सबकी सिटीपिटी गुम हो गई। बाद में हिन्दी में नोट तैयार कर बताने पर 73 साल के बाबा के तेवर थोडेÞ बहुत ढीले पडेÞ। असलियत जानने वाले नुमाइंदे बाहर आकर अपनी हंसी को नहीं रोक पाते।


मुंह खोलने से नींद उड़ी
    जोधपुर वाले भाईसाहब ने करप्शन को लेकर अपना मुंह क्या खोल दिया, राज का काज करने वालों की नींद उड़ गई। नींद उड़ना भी लाजमी है, चूंकि मामले का ताल्लुक धन से है। लंच केबिन में चर्चा है कि जोधपुर वाले अशोक जी का इशारा कहीं उन रिचेस्ट ब्यूरोक्रेट्स की तरफ तो नहीं है, जो कई सालों से हिट लिस्ट में हैं। लेकिन ब्यूरोक्रेसी के सामने सब बौने हैं, कायदे कानून वहीं बनते, सो गली भी वहीं निकलती है। एडल्ट बच्चों की आड़ में मंत्रियों के तरह वो भी बच निकलने में पीछे नही रहेंगे।

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उल्टा-पुल्टा
    इन दिनों पीसीसी चीफ ने भारती भवन वालों की नींद उड़ा रखी है। उड़े भी क्यू नहीं, किसान पुत्र होने के बाजजूद लक्ष्मणगढ़ वाले डोटासरा साहब ने भाई साहबों की तर्ज पर कैडर को फॉलो कर हाथ वाली पार्टी में जान फूंकने में लगे हैं। कुंभ राशि वाले साहब की इस नई शुरुआत से हाथ वालों को फायदा मिलने के गणित में उलझे भारती भवन वालों के चेहरों पर चिंता की लकीरें इस बात को लेकर है कि किसान पुत्र होकर भी कैडरबेस कार्यकर्ता तैयार करने के पीछे कोई न कोई राज तो है ही।

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