जानें राज-काज में क्या है खास

जानें राज-काज में क्या है खास

राजकाज से जाने प्रदेश की अंदर की बातें........

चर्चा बड़बोले रत्नों की
सूबे इन दिनों राज के बड़बोले रत्नों की चर्चा जोरों पर है। रत्नों का भी कोई सानी नहीं, कब और किस समय तथा कौनसे स्थान पर अपना मुंह खोले दे, पता नहीं है। उनका बोलने का अंदाज भी निराला है, कई बार तो राज की मौजूदगी में एक-दूसरे को नीचा दिखाए बिना नहीं रहते। अब देखो ना कई रत्न तो खुद को बैलगाड़ी वालों से भी ज्यादा समझ कर गलतफहमी पालते हैं, जिन्होंने इस बार तो राज को भी ब्लेकमेल करने में कोई कसर नहीं छोड़ी। राज का काज करने वाले भी लंच केबिनों में बतियाते हैं कि कई बार तो राज करने वाले भी अपने इन बड़बोले रत्नों की वजह से परेशानी में पड़े बिना नहीं रहते। अब ईमानदारी का पाठ पढ़ाने वाले इन रत्नों को कौन समझाए कि यह पब्लिक है, सब जानती है।


बहाने राजनीति के

सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा वालों के ठिकाने पर बहानों की राजनीति काफी चर्चा में हैं। चर्चा है कि राजनीति के कई बहाने होते हैं, इसमें जो माहिर होता है, वह घाटे से सौ कोस दूर रहता है। दोस्त और दुश्मन को बदलने के लिए कोई न कोई बहाना होता है। अब देखो ना, जो दशरथ फूटी आंख नहीं सुहाता था, उसकी आड़ में सत्ता के लिए अटल के बहाने संघ से नजदीकियां बढ़ने लगी थी। अब 13 साल तक अटलजी को भूल चुके भाई लोग फिर हैप्पी बर्थ डे की राग अलाप रहे हैं।


शेखावाटी में नई तलाश

भगवा भाई लोगों की नजर अब शेखावाटी के तीन जिलों पर टिकी है। मैडम के झुंझनूं में पगफेरे  के बाद से नए समीकरण की जोरों से तलाश है। गुजरे जमाने में छाया की तरह साथ रहने वाले बन्नाजी के साथ कई छुटभयै भी अब साइड में होते नजर आ रहे हैं। मैडम की इस यात्रा के भी भाई लोग अपने अपने हिसाब से मायने निकाल रहे हैं। भाई लोगों के साथ दिल्ली वालों के भी समझ में आ गया कि गुटबाजी कभी खत्म होने वाली नहीं है, सो अपने हिसाब से ही राजनीति करने में भलाई है।

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तलाश पेशेवरों की
इतिहास गवाह है कि कोई भी राज पेशेवरों और बुद्धिजीवियों के बिना नहीं चल सकता। अब यह उन पर निर्भर करता है कि वे राज को किस रास्ते पर चलाते हैं। उनसे राय लेने का भी राज का अलग ही अंदाज होता है। यह राज भी मीडिया, वन, पर्यावरण, खान और उद्योग के क्षेत्रों में प्रबुद्ध और विशेषज्ञों की तलाश में जुटा है। अब जिन लोगों को यह जिम्मा सौंपा है, वो समझ नहीं पा रहे हैं कि राज को किस लाइन के लोगों की जरूरत है।


चर्चा एनआरआईज की

आजकल सूबे में दोनों तरफ की राजनीति को लेकर चिंतन मंथन हो रहा है। एनआरआईज को लेकर चिंतकों में बहस जोरों पर है। हाथ वालों ने अपने पहले राज में राजस्थानियों को बुलाकर जो प्रस्ताव बनाए थे, उनको भगवा वालों ने किनारे कर दिया था, तो रिसर्जेंट के नाम पर 169000 करोड़ के आए प्रस्तावों को भुला कर हाथ वालों ने चक्रवर्ती ब्याज समेत बदला ले लिया था। अब इस पर दोनों तरफ से बोलती बंद है। चिंतकों में बहस इस बात की है कि आखिर कब तक एनआरआईज के साथ मजाक चलती रहेगी।


एक जुमला यह भी

नए साल में पिंकसिटी में होने वाली समिट की चर्चा जोरों पर है। राज के साथ काज करने वाले भी मेहमानों की खातिरदारी में कोई कसर नहीं छोड़ना चाहते। इसके लिए मीनू और वेन्यू बार बदल रहे हैं। बड़ी चौपड़ पर चर्चा है कि राज को भव्यता नहीं, बल्कि दिव्यता दिखाने की आवश्यता है। 22 को शनि महाराज का दिन है, सो लालबत्ती के हर चौराहे पर चार-चार शनि के सेवकों की फौज के सामने सब तैयारियां फीकी हैं।

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     एल. एल. शर्मा
(यह लेखक के अपने विचार हैं)

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