दो साल कोरोना में गंवाए, अब फिर शुरू होगा राजस्थान खेल परिषद का सेंट्रल कोचिंग कैंप

अच्छे खिलाड़ियों को तरसता कोचिंग का ‘माउंट’

दो साल कोरोना में गंवाए, अब फिर शुरू होगा राजस्थान खेल परिषद का सेंट्रल कोचिंग कैंप

कभी खिलाड़ियों का सपना हुआ करता था खेल परिषद के माउंट आबू कैंप का हिस्सा बनना लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते आबू शिविर अब अपनी चमक खो बैठा है।

 जयपुर। कभी खिलाड़ियों का सपना हुआ करता था खेल परिषद के माउंट आबू कैंप का हिस्सा बनना लेकिन अधिकारियों की अनदेखी के चलते आबू शिविर अब अपनी चमक खो बैठा है। प्रदेश के पूर्व ओलंपियन और आबू शिविर के चीफ डायरेक्टर रह चुके गोपाल सैनी का तो यहां तक कहना है कि अब यह शिविर सिर्फ सेर-सपाटे का जरिया बनकर रह गया है। न अच्छे कोच आते हैं और न अच्छे खिलाड़ी दिलचस्पी दिखाते हैं। विश्वव्यापी कोरोना महामारी के कारण दो साल गंवाने के बाद परिषद का माउंट आबू कैंप इस बार 19 मई से आयोजित किया जाएगा। सेंट्रल कोचिंग कैंप का दूसरा हिस्सा जयपुर में 21 मई से शुरू होगा। राजस्थान खेल परिषद के सचिव राजूलाल के अनुसार 20 खेलों के 14 से 17 साल उम्र के खिलाड़ी 5 मई तक आवेदन कर सकते हैं।

आबू शिविर में 8 खेल
माउंट आबू शिविर में आठ खेलों से जुड़े खिलाड़ी भाग ले सकेंगे। इनमें हैंडबाल, कबड्डी, वालीबाल, बास्केटबाल, क्रिकेट, एथलेटिक्स, बॉक्सिंग और तीरन्दाजी के बालक और बालिका खिलाड़ी शामिल होंगे। राजस्थान खेल परिषद ने शिविर के लिए चयनित खिलाड़ियों के साथ ही परिषद की ओर से संचालित उक्त खेलों की एकेडमियों के खिलाड़ियों को भी शिविर में शामिल करने का निर्णय लिया है। ऐसे में आबू शिविर में हिस्सा लेने वाले खिलाड़ियों की संख्या 500 तक हो सकती है।
                                                                                                                                                उपाध्यक्ष होता है सेंट्रल कैंप का चीफ डायरेक्टर
खेल परिषद के आबू और जयपुर में लगने वाले सेंट्रल कोचिंग कैंप का चीफ डायरेक्टर परिषद का वाइस चेयरमैन होता है। 1992 में जब मूलचन्द चौहान परिषद के अध्यक्ष और मेजर एसएन माथुर उपाध्यक्ष थे, तब दोनों के बीच अधिकारों को लेकर चला विवाद तत्कालीन खेलमंत्री भंवरलाल शर्मा तक पहुंचा। स्टेंडिंग कमेटी के निर्णय के बाद तब आदेश जारी हुए कि परिषद की कोचिंग विंग का प्रभारी वाइस चेयरमैन होगा। तब से एसएन माथुर, गोपाल सैनी, मोहम्मद यासीन और निजाम कुरैशी जब मनोनीत उपाध्यक्ष रहे तब कोचिंग विंग का प्रभारी और सेंट्रल कोचिंग कैंप का चीफ डायरेक्टर उन्हें ही बनाया गया था।

मोहन्ती ने बुलाए थे एक्सपर्ट कोच
खेल परिषद के सेंट्रल कोचिंग कैंप का स्तर सुधारने के लिए परिषद के अध्यक्ष रहे जेसी मोहन्ती ने 2015 और 2016 में एक्सपर्ट कोच बुलाए थे। तब हॉकी में मेजर ध्यानचन्द के बेटे अशोक कुमार, टेबल टेनिस में इंडिया टीम के चीफ कोच रहे भवानी मुखर्जी, कुश्ती के द्रोणाचार्य अवार्डी महा सिंह, जूडो के ओलंपियन अकरम खान, इंडियन वालीबाल टीम के चीफ कोच श्रीधरन और पूर्व महिला क्रिकेटर रुमेली धर को सेंट्रल कैंप में कोचिंग के लिए बुलाया गया था।

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