एक बड़ा फैसला

राजद्रोह के आरोप में कोई नया मामला दर्ज नहीं करें

एक बड़ा फैसला

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अप्रत्याशित रूप से एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए राजद्रोह कानून को स्थगित कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने केन्द्र और राज्यों को निर्देश दिया जब तक केन्द्र सरकार कानून पर फिर से गौर न कर ले, तब तक राजद्रोह के आरोप में कोई नया मामला दर्ज नहीं करें।

आखिरकार सुप्रीम कोर्ट ने अप्रत्याशित रूप से एक ऐतिहासिक फैसला देते हुए राजद्रोह कानून को स्थगित कर दिया। इसके साथ ही अदालत ने केन्द्र और राज्यों को निर्देश दिया जब तक केन्द्र सरकार कानून पर फिर से गौर न कर ले, तब तक राजद्रोह के आरोप में कोई नया मामला दर्ज नहीं करें। जिन लोगों पर राजद्रोह का मामला चल रहा है और जो जेल में हैं, वे जमानत के लिए अदालत में अपील कर सकते हैं। मामले की अगली सुनवाई जुलाई के तीसरे सप्ताह में होगी, उम्मीद है तब तक केन्द्र सरकार भी राजद्रोह कानून पर पुनर्विचार की प्रक्रिया को पूरा कर लेगी। राजद्रोह कानून के 162 साल के इतिहास में पहली बार सुप्रीम कोर्ट ने इसके इस्तेमाल पर रोक लगाई है। प्रधान न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि राजद्रोह के सभी मामलों पर रोक लगाकर नागरिकों के अधिकार की रक्षा जरूरी बन जाती है। फिलहाल अभी अदालत ने इस कानून को सिर्फ स्थगित किया है, इसलिए इसकी कानूनी वैधता खत्म नहीं हुई है। धारा 124 ए पूर्ववत बनी हुई है। अब सवाल यह है कि जब केन्द्र सरकार ने तीन माह में कानून पर पुनर्विचार करने का अदालत से वादा कर लिया था, तो फिर अदालत ने कानून को स्थगित करने का फैसला क्यों लिया।

इसकी जो भी वजह रही हो, लेकिन केन्द्र सरकार को यह फैसला उचित नहीं लगा। इसके लिए कानून मंत्री किरण रिजिजू की फैसले पर टिप्पणी पर्याप्त है। उन्होंने कहा कि सभी को अपनी लक्ष्मण रेखा की पालना करनी चाहिए। यह सही है कि केन्द्र सरकार इस कानून को यथावत बनाए रखना चाहती थी, लेकिन अदालत ने सरकार को इस कानून पर पुनर्विचार करने का आग्र्रह किया था। सरकार को यह भी लग रहा था कि कहीं अदालत इस कानून को खत्म नहीं कर दे। बहरहाल, सुप्रीम कोर्ट के फैसले से उम्मीद जगी है कि अब केन्द्र सरकार भी कुछ सकारात्मक तरीके से इस ब्रिटिशकालीन राजद्रोह कानून की समीक्षा करेगी। दरअसल, इस कानून के बेजा इस्तेमाल को लेकर लोगों का मानना है कि लोकतांत्रिक व्यवस्था के तहत राजनीतिक संवाद में आलोचना होना आम बात है। यह लोकतांत्रिक प्रक्रिया का हिस्सा है। वर्तमान में यह कानून काफी सख्त है और फिर इसका राजनीतिक दुरुपयोग भी गंभीर चिंता का विषय है। हालांकि, बाहरी खतरों से देश की अखण्डता और संप्रभुता की रक्षा के लिए प्रभावी कानून जरूरी है।

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