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                <title>दुनिया - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>दुनिया RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान समझौता: 60 दिनों में अंतिम डील पर सहमति, पीएम शरीफ ने बतौर मध्यस्थ 'इस्लामाबाद एमओयू' पर किए दस्तख़त</title>
                                    <description><![CDATA[पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने अमेरिका और ईरान के बीच मध्यस्थता समझौते पर हस्ताक्षर किए। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और मसूद पेजेशकियन की सहमति वाले इस समझौते के तहत दोनों देश दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य खोलने पर राजी हुए हैं। इसके तहत ईरान को $300 बिलियन का पुनर्निर्माण कोष मिलेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-iran-agreement-final-deal-agreed-in-60-days-pm-sharif/article-157379"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/pm.png" alt=""></a><br /><p>इस्लामाबाद। पाकिस्तान के प्रधानमंत्री शहबाज शरीफ ने बतौर मध्यस्थ ईरान और अमेरिका के बीच इस्लामाबाद समझौता ज्ञापन पर दस्तखत किए। पाकिस्तानी मीडिया ने प्रधानमंत्री कार्यालय के बयान का हवाला देते हुए कहा कि पाकिस्तान की तरफ से मध्यस्थता के अंतिम समर्थन दस्तावेज पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप और ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन के दस्तखत पहले से ही मौजूद थे। बयान के मुताबिक शांति समझौते को तय समय से पहले पूरा हुआ बताया गया, जिसमें दोनों पक्ष दुश्मनी खत्म करने और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने पर राजी हुए। इसमें आगे दावा किया गया कि समझौता पहले ही लागू हो चुका था। राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने फ्रांस में पैलेस ऑफ वर्सेल्स में अमेरिका-ईरान समझौता की एक कॉपी पर दस्तखत करके अपनी जी-7 यात्रा पूरी की।</p>
<p>एक अमेरिकी अधिकारी ने कहा कि इसके बाद अमेरिका ने दस्तखत किए गए समझौते की एक फोटो ईरानियों को भेजी। इसके बाद ईरान के राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियन ने दस्तावेज पर दस्तखत किए। यह समझौता अमेरिका और ईरान को 60 दिनों के अंदर एक अंतिम समझौता करने का वायदा करता है। इसमें यह भी कहा गया है कि अमेरिका छूट देगा ताकि ईरान तेल निर्यात कर सके और इसमें होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने के प्रावधान बताए गए हैं। यह अमेरिका और क्षेत्रीय साझेदारों को ईरान के लिए 300 बिलियन डॉलर का पुनर्निर्माण कोष बनाने का भी वायदा करता है। अधिकारियों ने समझौते को दुश्मनी खत्म करने और क्षेत्रीय स्थिरता वापस लाने के मकसद से एक बड़ी कूटनीतिक कामयाबी बताया।</p>
<p>बयान में कहा गया कि समझौता में खास समुद्री रास्तों को फिर से खोलने के प्रावधान शामिल हैं और इसमें बड़े आर्थिक पुनर्निर्माण और प्रतिबंध से जुड़े प्रतिबद्धता की रूपरेखा है। विवरण हालांकि अभी साफ नहीं हैं और स्वतंत्र रूप से इसकी पुष्टि नहीं की गई है। इसमें कहा गया कि ईरान के परमाणु कार्यक्रम पर बातचीत 60 दिनों के लिए जारी रहेगी, जिसे आपसी सहमति से बढ़ाया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:32:31 +0530</pubDate>
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                <title>ईरान का बड़ा ऐलान: यूरेनियम रहेगा देश में, अमेरिका से समझौते के बीच बधाई बड़ा बयान</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने स्पष्ट किया है कि वह संवर्धित यूरेनियम को देश से बाहर नहीं भेजेगा, बल्कि देश के भीतर ही इसकी सांद्रता कम (डाउन-ब्लेंडिंग) करेगा। अमेरिका के साथ हुए हालिया समझौते के तहत, वाशिंगटन 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटाने पर सहमत हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/irans-big-announcement-uranium-will-remain-in-the-country-amidst/article-157369"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/024.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान के विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता इस्माइल बघाई ने कहा है कि ईरान अपनी इस बात पर कायम है कि देश से संवर्धित यूरेनियम बाहर नहीं ले जाया जाएगा। बघाई ने कहा, "हमने शुरू से ही कहा है कि संवर्धित सामग्री देश से बाहर नहीं ले जाई जाएगी। एक विकल्प ईरान के भीतर ही इसकी सांद्रता कम करना (डाउन-ब्लेंडिंग) है। यह कोई नया विकल्प नहीं है।" उनका यह बयान संघर्ष खत्म करने के लिए अमेरिका के साथ समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर की घोषणा के बाद दिया। उम्मीद है कि इसके बाद ईरान के परमाणु कार्यक्रम और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को लेकर बातचीत होगी। </p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, अमेरिका अंतिम समझौते के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से अपने सैनिक हटा लेगा और तब तक अतिरिक्त बल तैनात नहीं करेगा। समझौते के चौथे पैराग्राफ में लिखा है, "अमेरिका अंतिम समझौते पर हस्ताक्षर के 30 दिनों के भीतर ईरान से सटे इलाकों से सैनिक हटाने का भी वादा करता है।" साथ ही, दस्तावेज़ के नौवें पैराग्राफ के अनुसार, समझौते पर हस्ताक्षर के बाद अमेरिका इस क्षेत्र में अतिरिक्त बल नहीं भेजेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 17:14:25 +0530</pubDate>
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                <title>सर्जियो गोर का भारत दौरा: अमित शाह से की मुलाकात, आतंकवाद के खिलाफ सहयोग पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति ट्रंप की मुलाकात के बाद अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने अमित शाह से नई दिल्ली में मुलाकात की। दोनों नेताओं ने आतंकवाद, नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने और सीमा सुरक्षा मजबूत करने पर विस्तार से रणनीतिक चर्चा की। भारत व्यापक वैश्विक साझेदारी के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/sergiy-gore-visits-india-meets-amit-shah-discusses-tackling-terrorism/article-157371"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/amit-shah.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। फ्रांस में अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी की मुलाकात के बाद भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर ने गुरुवार को यहां केन्द्रीय गृह मंत्री अमित शाह से मुलाकात की और दोनों नेताओं ने विशेष रूप से आतंकवाद तथा नशील पदार्थों की तस्करी से निपटने के मुद्दों पर बात की। गोर ट्रंप और मोदी की मुलाकात के दौरान बुधवार रात फ्रांस के शहर एवियन में ही थे और वहा से सीधे यहां आये हैं।</p>
<p>अमित शाह ने गोर के साथ मुलाकात के बाद सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में मुलाकात की जानकारी दी। दोनों ने विशेष रूप से सुरक्षा के क्षेत्र में, खासकर आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए दोनों देशों के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। गृह मंत्री ने कहा, "आज नयी दिल्ली में भारत में अमेरिकी राजदूत सर्जियो गोर से मुलाकात की। सुरक्षा के क्षेत्र में, खासकर आतंकवाद और नशीले पदार्थों की तस्करी से निपटने के लिए, भारत और अमेरिका के बीच सहयोग को और मजबूत करने पर विस्तार से चर्चा हुई। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में, भारत 'भारत- अमेरिका व्यापक वैश्विक रणनीतिक साझेदारी' को आगे बढ़ाने और यह सुनिश्चित करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है कि दोनों देशों के लोगों को इस द्विपक्षीय रिश्ते का लाभ मिले।</p>
<p>गोर ने भी सोशल मीडिया पर अपनी पोस्ट में कहा, "गृह मंत्री अमित शाह के साथ बहुत अच्छी बैठक हुई। हमने आतंकवाद से निपटने, अपने लोगों को नशीले पदार्थों और अवैध ड्रग्स से बचाने, अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने और दोनों देशों में अपराधियों को सज़ा दिलाने के लिए सहयोग बढ़ाने पर सार्थक चर्चा की।" अमेरिका और भारत के अधिकारी नियमित रूप से सीमाओं को सुरक्षित करने, अपराधियों को सजा दिलाने और युवाओं को नशीली दवाओं से बचाने के लिए रणनीतिक बैठकें करते रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
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                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 16:02:24 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जी-7 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी : AI के लिए प्रस्तुत किया 'मानव' विजन, सुरक्षा और समावेशिता पर दिया जोर</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जी-7 सम्मेलन में एआई के लिए भारत का 'मानव' विजन प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि एआई का विकास सुरक्षा, गति और जनहित पर आधारित होना चाहिए। पीएम ने डीपफेक और साइबर खतरों से निपटने के लिए वैश्विक सहयोग और 'ग्लोबल साउथ' तक तकनीक पहुंचाने का आह्वान किया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/development-of-artificial-intelligence-should-be-based-on-the-basic/article-157305"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modii.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने जी-7 देशों के सामने कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बारे में भारत के 'मानव' विजन का उल्लेख करते हुए कहा है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए। जी-7 देशों के 52 वें शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के लिए फ्रांस यात्रा पर गये पीएम मोदी ने बुधवार रात फ्रांस के एवियन में "इंश्योरिंग ए सेफ, रैपिड एंड एफिशिएंट रोल आउट ऑफ आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस" विषय पर आयोजित आउटरीच सत्र को संबोधित किया।</p>
<p>पीएम मोदी ने कहा कि एआई एक परिवर्तनकारी शक्ति है जिसमें मानव सभ्यता की दिशा को फिर से परिभाषित करने की क्षमता है, लेकिन इसे लोगों को सशक्त बनाने वाला भी होना चाहिए। उन्होंने विस्तार से बताया कि इसी व्यापक सोच के साथ भारत ने हाल ही में एआई इम्पैक्ट समिट की मेजबानी की थी। प्रधानमंत्री ने एआई के लिए भारत के 'मानव' विजन को रेखांकित किया, जो इस बात पर जोर देता है कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का विकास समावेशिता, सुरक्षा और जनहित के मूल सिद्धांतों पर आधारित होना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि भारत ने हमेशा साइबरस्पेस को एक वैश्विक सार्वजनिक संपत्ति के रूप में देखा है और लोकतांत्रिक देशों की ऐसी एआई मॉडल तक पहुंच होनी चाहिए जो उनके महत्वपूर्ण सूचना बुनियादी ढांचे को सुरक्षित कर सकें और उन्हें साइबर खतरों से निपटने में मदद कर सकें। उन्होंने एआई विकास के लिए एक एकीकृत दृष्टिकोण का आह्वान किया, जिसमें सुरक्षा, गति और दक्षता पर एक साथ ध्यान दिया जाए।</p>
<p>इस संबंध में, उन्होंने चार सुझाव दिए: एआई सिस्टम को 'सेफ-बाय-डिजाइन' (निर्माण के स्तर पर ही सुरक्षित) होना चाहिए। एआई के इस्तेमाल के साथ-साथ सामान्य मानक, परीक्षण फ्रेमवर्क और नियामक दिशानिर्देश होने चाहिए। डीपफेक, गलत सूचना और साइबर धोखाधड़ी से निपटने के लिए प्रभावी वैश्विक सहयोग होना चाहिए और एक समावेशी दुनिया सुनिश्चित करने के लिए एआई का लाभ 'ग्लोबल साउथ' के देशों तक पहुँचना चाहिए।</p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने संबोधन का समापन करते हुए कहा कि कृत्रिम बुद्धिमत्ता का उद्देश्य मानव क्षमता का विस्तार करना, मानवीय विकल्पों को सशक्त बनाना और मानव गरिमा की रक्षा करना होना चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि भारत इन उद्देश्यों को बढ़ावा देने के लिए अपने सहयोगियों के साथ मिलकर काम करना जारी रखेगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 14:08:33 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अमेरिका-ईरान युद्ध 4 महीने बाद थमा : ट्रंप और पजेशकियान ने शांति समझौते पर किए हस्ताक्षर, परमाणु हथियारों पर सख्त रोक</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका और ईरान ने 14 सूत्रीय शांति समझौते पर हस्ताक्षर कर चार महीने पुराने संघर्ष को खत्म करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया। समझौते के तहत ईरान परमाणु हथियार नहीं बनाएगा, जबकि उसके पुनर्निर्माण के लिए 300 अरब डॉलर का कोष बनेगा। होर्मुज जलडमरूमध्य फिर खुलेगा और क्षेत्रीय तनाव कम होने की उम्मीद बढ़ी है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/america-iran-war-stopped-after-4-months-trump-and-pajeshkian-signed/article-157321"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)27.png" alt=""></a><br /><p>पेरिस। अमेरिका और ईरान ने युद्ध खत्म करने के लिए समझौता ज्ञापन (एमओयू) पर हस्ताक्षर कर दिया। इस समझौत पर अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प ने बुधवार को फ्रांस के राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ बैठक के दौरान पेरिस के वर्सेल्स पैलेस में हस्ताक्षर किये, जबकि ईरान के राष्ट्रपति पजेशकियान ने तेहरान में हस्ताक्षर किये। दोनों नेताओं के हस्ताक्षर के बाद भारतीय समय के मुताबिक गुरुवार सुबह 5 बजे से यह समझौता प्रभावी हो गया। रिपोर्ट के अनुसार 14 सूत्रीय समझौते में कहा गया है कि ईरान के पास कभी भी परमाणु हथियार नहीं होंगे। साथ ही इसमें ईरान के पुनर्निर्माण और आर्थिक विकास के लिए 300 अरब डॉलर के कोष का प्रावधान किया गया है। हालांकि अमेरिका के लिए इसमें योगदान देना अनिवार्य नहीं है। यह समझौता अमेरिका-ईरान और इजरायल के बीच टकराव शुरू होने के 4 महीने बाद हुआ है।</p>
<p>ट्रंप प्रशासन ने इस समझौते को प्रदर्शन-आधारित बताया है, जिसका मतलब है कि ईरान को तभी फायदा होगा, जब वह अपने वादों का पालन करेगा। रिपोर्ट के अनुसार समझौते के तहत ईरान में युद्ध समाप्त होगा और लेबनान में भी संघर्ष खत्म करने की बात कही गयी है। साथ ही होर्मुज जलडमरूमध्य को दोबारा खोलने और अमेरिका की नौसैनिक नाकेबंदी समाप्त करने की बात कही गयी है।</p>
<p>फ्रांस के राष्ट्रति इमैनुएल मैक्रों ने सोशल मीडिया पर ट्रम्प के इस समझौते पर हस्ताक्षर करते हुए वीडियो पोस्ट करते हुए बुधवार को लिखा, राष्ट्रपति ट्रंप ने आज रात वर्सेल्स में ईरान और अमेरिका के बीच समझौते पर हस्ताक्षर कर दिये। यह समझौता हमेशा रहने वाली शांति का रास्ता बनाता है और होर्मुज जलडमरूमध्य को फिर से खोलने की इजाजत देता है। यह हमारे देशवासियों के लिए सही दिशा में एक जरूरी कदम है जिससे जल्द ही एनर्जी की कीमतों में कमी आएगी।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 13:08:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>G-7 शिखर सम्मेलन के बाद पेरिस पहुंचे पीएम मोदी: भारतीय समुदाय ने किया गर्मजोशी से स्वागत, राष्ट्रपति मैक्रों के साथ 'वीवानेट' में होंगे शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[जी-7 सम्मेलन के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी देर रात पेरिस पहुंचे, जहां प्रवासी भारतीयों ने उनका गर्मजोशी से स्वागत किया। पीएम मोदी आज फ्रांस के बिजनेस लीडर्स से मुलाकात करेंगे और राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ 'वीवानेट' कार्यक्रम को संबोधित करेंगे। उन्होंने भारत-फ्रांस साझेदारी को वैश्विक प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण बताया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/pm-modi-arrives-in-paris-after-attending-the-g-7-summit/article-157308"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(10)1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी-7 शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेने के बाद बुधवार देर रात फ्रांस के शहर एवियन से राजधानी पेरिस पहुंचे। पेरिस में पीएम मोदी का भारतीय प्रवासी समुदाय ने गर्मजोशी के साथ स्वागत किया। प्रधानमंत्री ने बुधवार रात सोशल मीडिया पर एक पोस्ट में कहा,"कुछ ही समय पहले पेरिस पहुँचा और वहाँ भारतीय प्रवासी समुदाय ने मेरा गर्मजोशी से स्वागत किया। भारत और फ्रांस को और निकट लाने में उनके प्रयासों पर मुझे गर्व है। भारत-फ्रांस साझेदारी हमारे ग्रह की प्रगति के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है।"</p>
<p>पीएम मोदी का आज पेरिस में बिजनेस लीडर्स से मुलाकात का कार्यक्रम है। बाद में वह राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के साथ 'वीवानेट' कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और लोगों को संबोधित करेंगे। वहीं, देर शाम स्वदेश रवाना होने से पहले वह भारतीय समुदाय के लोगों को संबोधित करेंगे। पीएम मोदी 13 जून को फ्रांस और स्लोवाकिया की छह दिन की यात्रा पर रवाना हुए थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 11:36:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ईरान की इजरायल को दोटूक, लेबनान में संघर्ष विराम उल्लंघन पर दी कड़ी सैन्य कार्रवाई की चेतावनी</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी 'शरारत' बंद नहीं की, तो उसे कड़े परिणाम भुगतने होंगे। ईरान-अमेरिका शांति समझौते के बीच, तेहरान ने इजरायल पर 84 बार संघर्ष विराम उल्लंघन का आरोप लगाते हुए कब्जे वाले क्षेत्रों से पूरी तरह पीछे हटने की मांग की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/cant-tolerate-it-anymore-iran-accuses-israel-of-ceasefire-violations/article-157251"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/iran-israel.png" alt=""></a><br /><p>तेहरान। ईरान ने चेतावनी दी है कि यदि इजरायल ने दक्षिणी लेबनान में अपनी ‘शरारत’ बंद नहीं की, तो उसे ईरानी सशस्त्र बलों की ‘कड़ी’ प्रतिक्रिया के लिए तैयार रहना होगा। ईरान के मुख्य सैन्य कमान ‘खातम अल-अंबिया सेंट्रल हेडक्वार्टर्स’ ने मंगलवार को एक आधिकारिक बयान में कहा कि जब से अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने युद्ध समाप्ति की घोषणा की है, तब से इजरायली सेना ने दक्षिणी लेबनान में 84 बार संघर्ष विराम का उल्लंघन किया है और वह अब भी ‘पीड़ित लेबनानी लोगों के खिलाफ अपराध और उनकी हत्या’ जारी रखे हुए है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, ईरान, अमेरिका और पाकिस्तान ने सोमवार तड़के लेबनान सहित पश्चिम एशिया क्षेत्र में सभी मोर्चों पर युद्ध समाप्त करने के लिए एक समझौता ज्ञापन को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। ईरान और अमेरिका शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में इस समझौता ज्ञापन पर आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर करने वाले हैं। मंगलवार को तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ एक बैठक में ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने लेबनान में युद्ध की समाप्ति को ईरान-अमेरिका शांति समझौते का एक 'अटूट' हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि तेहरान के दृष्टिकोण से, इस समझौते के दो पक्ष हैं, एक तरफ अमेरिका और इजरायल हैं, तो दूसरी तरफ ईरान और हिजबुल्लाह है।</p>
<p>अराघची ने कहा, “युद्ध की समाप्ति का मतलब इजरायली कब्जे का खत्म होना भी है। जब तक इजरायली सेना इस युद्ध में कब्जाये गये लेबनानी क्षेत्रों से पीछे नहीं हटती, तब तक युद्ध की समाप्ति पूरी नहीं मानी जाएगी।” अराघची ने यह टिप्पणी इजरायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू के उस बयान के बाद की है, जिसमें नेतन्याहू ने सोमवार को एक संवाददाता सम्मेलन में कहा था कि इजरायली सेना लेबनान, सीरिया और गाजा पट्टी में अपने नियंत्रण वाले ‘सुरक्षा क्षेत्रों’ में तब तक बनी रहेगी, जब तक आवश्यक होगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 18:32:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तुर्की की हवाई सुरक्षा होगी मजबूत, कोन्या में तैनात होगी इटली की एसएएमपी-टी (SAMP-T) मिसाइल रक्षा प्रणाली</title>
                                    <description><![CDATA[तुर्की ने नाटो की रक्षा योजना के तहत कोन्या में इटली की एसएएमपी-टी मिसाइल प्रणाली तैनात करने की घोषणा की है। फ्रांस और इटली द्वारा विकसित यह सतह से हवा में मार करने वाली प्रणाली बैलिस्टिक मिसाइल खतरों से रक्षा करेगी। इसका उद्देश्य गठबंधन की हवाई सुरक्षा को मजबूत करना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/t%C3%BCrkiyes-big-announcement-samp-t-missile-defense-system-will-be-deployed/article-157252"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/023.png" alt=""></a><br /><p>अंकारा। तुर्की ने घोषणा की है कि देश की हवाई क्षेत्र सुरक्षा को बढ़ाने के लिए कोन्या प्रांत में इटली की एसएएमपी-टी मिसाइल रक्षा प्रणाली तैनात करेगा। तुर्की के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को एक बयान में कहा कि यह कदम उत्तरी अटलांटिक संधि (नाटो) की स्थायी रक्षा योजनाओं  के तहत उठाया जा रहा है और इसका उद्देश्य गठबंधन की हवाई सुरक्षा को मजबूत करना है। इटली द्वारा संचालित इस प्रणाली को कोन्या में तीसरे मुख्य जेट बेस कमांड पर तैनात किया जाएगा।</p>
<p>रिपोर्टों के मुताबिक, फ्रांस और इटली द्वारा संयुक्त रूप से विकसित एसएएमपी-टी एक सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली है, जिसे बैलिस्टिक मिसाइलों सहित कई तरह के खतरों को रोकने के लिए डिजाइन किया गया है। नाटो ने पहले ही अदाना प्रांत के इंसिलिक एयर बेस पर एक अतिरिक्त पैट्रियट मिसाइल बैटरी तैनात कर दक्षिण-पूर्वी तुर्की में अपनी उपस्थिति को मजबूत किया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 17:25:02 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कांगो में इबोला का कहर: 837 संक्रमित; 196 मौतें, WHO ने जताई गंभीर चिंता</title>
                                    <description><![CDATA[कांगो (DRC) में इबोला का प्रकोप तेजी से फैल रहा है, जहां पुष्ट मामले 837 और मृतकों की संख्या 196 हो गई है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) ने चेतावनी दी है कि सशस्त्र हिंसा और बुनियादी ढांचे की कमी के कारण पड़ोसी देशों में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/ebola-havoc-in-congo-837-infected-196-deaths-who-expressed/article-157248"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/ibola.png" alt=""></a><br /><p>किंशासा। मध्य अफ्रीकी देश कांगो लोकतांत्रिक गणराज्य (डीआरसी) में इबोला के पुष्ट मामलों की संख्या 837 पहुंच गयी है, जबकि मृतकों की संख्या बढ़कर 196 हो गयी है। इस बीच स्वास्थ्य अधिकारियों और अंतर्राष्ट्रीय भागीदारों ने चेतावनी दी है कि सामुदायिक स्तर पर लगातार फैलने और भौगोलिक विस्तार के कारण यह प्रकोप लगातार गंभीर होता जा रहा है। कांगो स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी ताजा आंकड़ों के अनुसार, इस बीमारी से मृत्यु दर 23.4 प्रतिशत रही। इस बीमारी का मात देकर 49 मरीज स्वस्थ हो चुके हैं, जबकि 376 मरीजों को अभी क्वारंटीन किया गया है।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, बुंडिबुग्यो इबोला वायरस के कारण फैला यह प्रकोप मुख्य रूप से प्रमुख प्रभावित क्षेत्रों, विशेषकर इतूरी प्रांत के बुनिया, मोंगब्वालु और र्वाम्परा में केंद्रित है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) द्वारा मंगलवार को प्रकाशित एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रभावित स्वास्थ्य क्षेत्रों का बढ़ता भौगोलिक दायरा, शहरी और खनन से जुड़े क्षेत्रों में लगातार हो रहा प्रसार, कुछ प्रांतों में संपर्कों की निगरानी की कम दर और प्रभावित क्षेत्रों में जारी असुरक्षा के कारण राहत अभियान जटिल हो रहे हैं। इससे कांगो के भीतर और पड़ोसी देशों में इसके और फैलने का खतरा बढ़ गया है।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने कहा कि इतूरी और उत्तरी कीवू प्रांतों में सामुदायिक स्तर पर लगातार प्रसार, मामलों और मौतों की बढ़ती संख्या तथा निरंतर भौगोलिक विस्तार के कारण स्थिति और खराब होती जा रही है। रिपोर्ट में कहा गया कि नए प्रभावित क्षेत्रों में इसका फैलना शुरुआती केंद्रों से आगे निरंतर विस्तार को दर्शाता है। डब्ल्यूएचओ के अनुसार, पड़ोसी देश युगांडा में इस अवधि के दौरान कोई नया पुष्ट मामला सामने नहीं आया है।</p>
<p>कांगो में संक्रमण से लगातार जुड़े महामारी संबंधी संपर्कों के कारण हालांकि सीमा पार प्रसार और द्वितीयक संक्रमण का खतरा बना हुआ है। अफ्रीका रोग नियंत्रण और रोकथाम केंद्र ने कल अपनी दैनिक रिपोर्ट में बताया कि युगांडा में अब तक 19 मामलों की पुष्टि हो चुकी है, जिनमें दो मौतें शामिल हैं। उत्तरी कीवू में प्रांतीय स्वास्थ्य अधिकारियों ने बताया कि सोमवार देर रात एक महिला और उसका बच्चा, जो इबोला से संक्रमित पाए गए थे, उन्हें 'हथियारबंद लोग' अपने साथ ले गए।</p>
<p>डब्ल्यूएचओ ने कहा कि प्रभावित क्षेत्रों में सामुदायिक विरोध सहित कई कारणों से राहत प्रयासों में बाधाएं आ रही हैं। प्रभावित क्षेत्र देश के संघर्षग्रस्त पूर्वी हिस्से में स्थित हैं, जहां सशस्त्र हिंसा, विस्थापन और कमजोर स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे ने राहत कार्यों के सामने लगातार चुनौतियां खड़ी की हैं। उल्लेखनीय है कि डीआरसी ने 15 मई को इस ताजा इबोला प्रकोप की घोषणा की थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 15:14:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>इंडोनेशिया में भूकंप के जोरदार झटके: एक की मौत, 40 अन्य घायल, सैकड़ों घर और इमारतें क्षतिग्रस्त</title>
                                    <description><![CDATA[इंडोनेशिया के सेंट्रल सुलावेसी में आए 6.7 तीव्रता के शक्तिशाली भूकंप ने भारी तबाही मचाई है। हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गई और 40 लोग घायल हुए हैं। भूकंप से 67 से अधिक घर, पुल और सड़कें क्षतिग्रस्त हुई हैं। प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य शुरू कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/strong-earthquake-hits-indonesia-one-dead-40-others-injured-rescue/article-157232"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/china-earthquake.png" alt=""></a><br /><p>जकार्ता। इंडोनेशिया के सेंट्रल सुलावेसी प्रांत में तेज भूकंप के कारण हुए हादसे में एक व्यक्ति की मौत हो गयी तथा 40 अन्य लोग घायल हुए हैं। इंडोनेशिया की राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन एजेंसी के अनुसार मंगलवार को आये भूकंप की तीव्रता रिक्टर स्केल पर 6.7 मापी गयी। भूकंप से 300 से ज़्यादा लोग प्रभावित हुए हैं। एजेंसी ने बताया कि कम से कम 25 लोगों को मामूली चोटें आयीं और 13 लोग गंभीर रूप से घायल हुए हैं। साथ ही, कई ज़िलों में लगभग 110 परिवार या 312 लोग प्रभावित हुए।</p>
<p>रिपोर्ट के अनुसार, शुरुआती आकलन में कम से कम 67 क्षतिग्रस्त घरों, पूजा के छह स्थानों, दो पुलों, दो दफ्तरों की इमारतों और पालू, सिगी और पोसो को जोड़ने वाली एक प्रांतीय सड़क के आंशिक रूप से ढहने की जानकारी मिली है। अधिकारियों ने आपातकालीन राहत कार्य शुरू कर दिये हैं। सिगी में अधिकारियों ने नोकिलालाकी उप जिला दफ्तर में एक फील्ड कमांड पोस्ट बनाया है। पोसो ज़िला सामान्य अस्पताल में आपातकालीन मेडिकल टेंट लगाये गये हैं। एजेंसी ने लोगों से शांत रहने और आधिकारिक अपडेट का पालन करने की अपील की है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 12:46:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वैश्विक पटल पर भारत की साख : पिछले 10 वर्षों में पीएम मोदी को मिले 33 सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मान, आइए डालते हैं एक नज़र</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछले दशक में विभिन्न देशों द्वारा 33 प्रतिष्ठित राजकीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है। सऊदी अरब के 'किंग अब्दुलअजीज सैश' से लेकर स्लोवाकिया के 'ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस' तक, ये पुरस्कार भारत के बढ़ते वैश्विक प्रभाव और मजबूत कूटनीतिक संबंधों का जीवंत प्रमाण हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/in-the-last-decade-prime-minister-modi-received-33-international/article-157218"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/modi1.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पिछले दस वर्षों में दुनिया के विभिन्न देशों द्वारा 33 प्रतिष्ठित नागरिक और राजकीय सम्मानों से नवाजा जा चुका है। ये सम्मान न केवल प्रधानमंत्री मोदी के नेतृत्व और वैश्विक प्रभाव को दर्शाते हैं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत की बढ़ती साख और मजबूत होते कूटनीतिक संबंधों का भी प्रमाण हैं। इन 33 सर्वोच्च अंतरराष्ट्रीय सम्मानों के अलावा प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को विभिन्न वैश्विक संस्थाओं और संगठनों द्वारा भी अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कारों से सम्मानित किया जा चुका है। ये सम्मान भारत की बढ़ती वैश्विक भूमिका, मजबूत कूटनीतिक संबंधों और प्रधानमंत्री मोदी की अंतरराष्ट्रीय स्वीकार्यता को दर्शाते हैं। आइए एक नजर डालते हैं। उन 33 प्रमुख सम्मानों पर जो विभिन्न देशों ने प्रधानमंत्री मोदी को प्रदान किए हैं।</p>
<ol>
<li>
<p>अप्रैल 2016 में सऊदी अरब ने प्रधानमंत्री मोदी को अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘किंग अब्दुलअज़ीज़ सैश’ प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>वर्ष 2016 में अफगानिस्तान ने उन्हें देश का सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘स्टेट ऑर्डर ऑफ गाजी अमीर अमानुल्लाह खान’ दिया।</p>
</li>
<li>
<p>फरवरी 2018 में फिलिस्तीन ने ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द स्टेट ऑफ फिलिस्तीन’ सम्मान से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>वर्ष 2019 में संयुक्त अरब अमीरात ने अपना सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ जायद’ प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>रूस ने 2019 में प्रधानमंत्री मोदी को ‘ऑर्डर ऑफ सेंट एंड्रयू द एपोस्टल’ से सम्मानित करने की घोषणा की, जिसे उन्होंने जुलाई 2024 में प्राप्त किया।</p>
</li>
<li>
<p>मालदीव ने 2019 में ‘ऑर्डर ऑफ द डिस्टिंग्विश्ड रूल ऑफ निशान इज्जुद्दीन’ सम्मान प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>बहरीन ने 2019 में प्रधानमंत्री मोदी को ‘किंग हमाद ऑर्डर ऑफ द रेनेसां’ से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>अमेरिका ने 2020 में प्रतिष्ठित ‘लीजन ऑफ मेरिट’ अवॉर्ड प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>दिसंबर 2021 में भूटान ने प्रधानमंत्री मोदी को सर्वोच्च नागरिक सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द ड्रुक ग्यालपो’ देने की घोषणा की, जो मार्च 2024 में प्रदान किया गया।</p>
</li>
<li>
<p>मई 2023 में पलाऊ गणराज्य ने ‘एबाकल अवॉर्ड’ से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>फिजी ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ फिजी’ सम्मान प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>पापुआ न्यू गिनी ने ‘ग्रैंड कम्पेनियन ऑफ द ऑर्डर ऑफ लोगोहू’ सम्मान से नवाजा।</p>
</li>
<li>
<p>जून 2023 में मिस्र ने अपना सर्वोच्च राजकीय सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ नाइल’ प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>जुलाई 2023 में फ्रांस ने ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द लीजन ऑफ ऑनर’ सम्मान दिया।</p>
</li>
<li>
<p>अगस्त 2023 में ग्रीस ने ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ ऑनर’ से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>नवंबर 2024 में डोमिनिका ने ‘डोमिनिका अवॉर्ड ऑफ ऑनर’ प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>नवंबर 2024 में नाइजीरिया ने ‘ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द नाइजर’ सम्मान दिया।</p>
</li>
<li>
<p>गुयाना ने नवंबर 2024 में प्रधानमंत्री मोदी को ‘द ऑर्डर ऑफ एक्सीलेंस’ से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>बारबाडोस सरकार ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘ऑनरेरी ऑर्डर ऑफ फ्रीडम ऑफ बारबाडोस’ प्रदान करने का निर्णय लिया, जिसे मार्च 2025 में औपचारिक रूप से ग्रहण किया गया।</p>
</li>
<li>
<p>दिसंबर 2024 में कुवैत ने ‘मुबारक अल-कबीर ऑर्डर’ से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>मार्च 2025 में मॉरिशस ने अपना सर्वोच्च राष्ट्रीय सम्मान ‘ग्रैंड कमांडर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार एंड की ऑफ द इंडियन ओशन’ प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>अप्रैल 2025 में श्रीलंका ने सर्वोच्च सम्मान ‘श्रीलंका मित्र विभूषण’ से नवाजा।</p>
</li>
<li>
<p>जून 2025 में साइप्रस ने ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द ऑर्डर ऑफ मकारियोस-III’ सम्मान प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>जुलाई 2025 में घाना ने ‘ऑफिसर ऑफ द ऑर्डर ऑफ द स्टार ऑफ घाना’ सम्मान दिया।</p>
</li>
<li>
<p>जुलाई 2025 में त्रिनिदाद एवं टोबैगो ने ‘ऑर्डर ऑफ द रिपब्लिक ऑफ त्रिनिदाद एंड टोबैगो’ से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>जुलाई 2025 में ब्राजील ने ‘ग्रैंड कॉलर ऑफ द नेशनल ऑर्डर ऑफ द सदर्न क्रॉस’ प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>नामीबिया ने जुलाई 2025 में ‘ऑर्डर ऑफ द मोस्ट एंशिएंट वेल्वित्चिया मिराबिलिस’ सम्मान से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>दिसंबर 2025 में इथियोपिया ने अपना सर्वोच्च सम्मान ‘ग्रेट ऑनर निशान ऑफ इथियोपिया’ प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>दिसंबर 2025 में ओमान ने प्रधानमंत्री मोदी को ‘ऑर्डर ऑफ ओमान – फर्स्ट क्लास’ से सम्मानित किया।</p>
</li>
<li>
<p>फरवरी 2026 में इजराइल ने ‘मेडल ऑफ द नेसेट’ सम्मान प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>मई 2026 में स्वीडन ने ‘रॉयल ऑर्डर ऑफ पोलर स्टार कमांडर ग्रैंड क्रॉस’ से सम्मानित किया, जो किसी विदेशी राष्ट्राध्यक्ष या सरकार प्रमुख को दिया जाने वाला सर्वोच्च सम्मान है।</p>
</li>
<li>
<p>नॉर्वे ने ओस्लो यात्रा के दौरान ‘ग्रैंड क्रॉस ऑफ द रॉयल नॉर्वेजियन ऑर्डर ऑफ मेरिट’ प्रदान किया।</p>
</li>
<li>
<p>जून 2026 में स्लोवाकिया ने प्रधानमंत्री मोदी को अपने सर्वोच्च सम्मान ‘ऑर्डर ऑफ द व्हाइट डबल क्रॉस (फर्स्ट क्लास)’ से सम्मानित किया।</p>
</li>
</ol>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:50:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>ईरान-अमेरिका के बीच अंतिम समझौते को लेकर बातचीत होगी शुरू, अराघची ने कहा- युद्ध का तुरंत और स्थायी अंत समझौते का सबसे बड़ा मुद्दा</title>
                                    <description><![CDATA[ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची ने बताया कि युद्ध समाप्ति समझौते पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में हस्ताक्षर होंगे, जिसके बाद अंतिम परमाणु और प्रतिबंध संबंधी समझौते के लिए 60 दिन की वार्ता शुरू होगी। समझौते में युद्धविराम, हॉर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिकी नाकेबंदी हटाने, क्षतिपूर्ति और लेबनान में संघर्ष समाप्त करने जैसे अहम मुद्दे शामिल हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/talks-will-start-between-iran-and-america-regarding-the-final/article-157219"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)22.png" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">तेहरान। ईरान के विदेश मंत्री सैयद अब्बास अराघची ने कहा है कि युद्ध को समाप्त करने के लिए दोनों पक्षों के एक समझौता ज्ञापन पर हस्ताक्षर किए जाने के बाद शुक्रवार से ईरान और अमेरिका के बीच अंतिम समझौते को लेकर बातचीत शुरू होगी। ईरान की आधिकारिक समाचार एजेंसी इरना ने यह जानकारी दी है। अराघची ने तेहरान में विदेशी राजनयिकों के साथ बैठक के दौरान इस शांति समझौते के बारे में विस्तार से बताया। यह समझौता पाकिस्तान की मध्यस्थता से रविवार को ईरान और अमेरिका के बीच तय हुआ था। ईरान के विदेश मंत्री ने कहा कि एक अंतिम समझौते तक पहुँचने के लिए ईरान और अमेरिका के बीच नए दौर की बातचीत संभवत: शुक्रवार से शुरू होगी, जिसका स्थान अभी तय होना बाकी है। उन्होंने समझाया कि अमेरिका और इजरायल के आपराधिक हमलों के कारण दोनों देशों के बीच समझौता होना काफी मुश्किल हो गया था, इसलिए आखिरकार बातचीत को दो चरणों में बांटने का फैसला किया गया।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विदेश मंत्री ने बताया कि पहला चरण युद्ध की समाप्ति, हॉर्मुज जलडमरूमध्य, अमेरिकी नौसैनिक नाकेबंदी को हटाने, ईरान की रोकी गई संपत्तियों और युद्ध से हुए नुकसान की भरपाई जैसे मुद्दों पर सहमति पत्र को अंतिम रूप देने से जुड़ा था। वहीं दूसरे चरण में, परमाणु मुद्दों और ईरान पर लगे प्रतिबंधों को हटाने के लिए अंतिम समझौते पर पहुँचने के लिए 60 दिनों तक बातचीत जारी रहेगी। अराघची ने जोर देकर कहा कि पहले चरण में सबसे महत्वपूर्ण काम युद्ध की समाप्ति की घोषणा है। उन्होंने कहा कि उनके फैसले के मुताबिक, सोमवार सुबह जब समझौता निश्चित हुआ, तभी युद्ध खत्म होने का एलान भी कर दिया गया था, लेकिन इस समझौते की आधिकारिक शुरुआत शुक्रवार से होगी।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">विदेश मंत्री ने कहा कि लेबनान सहित सभी मोर्चों पर युद्ध का तुरंत और स्थायी अंत शायद इस समझौते का सबसे बड़ा मुद्दा है। उन्होंने बताया कि लेबनान में चल रहा युद्ध और दक्षिण लेबनान के खिलाफ इजरायल के हमले, ईरान के खिलाफ चल रहे युद्ध से जुड़ चुके थे और ये दोनों मोर्चे एक-दूसरे पर निर्भर हो गए थे। अराघची ने लेबनान में युद्ध की समाप्ति को इस शांति समझौते का एक अटूट हिस्सा बताया। उन्होंने कहा कि युद्ध की समाप्ति का मतलब इजरायली कब्जे का खत्म होना भी है। जब तक इजरायली सेना इस युद्ध में कब्जाए गये लेबनानी क्षेत्रों से पीछे नहीं हटती, तब तक युद्ध की पूरी तरह से समाप्ति नहीं मानी जाएगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि अब से ईरान, लेबनान पर इजरायल के किसी भी सैन्य हमले या वहां के क्षेत्रों पर जारी कब्जे को इस शांति समझौते का उल्लंघन मानेगा।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';">उल्लेखनीय है कि हफ्तों चली बातचीत के बाद अमेरिका, पाकिस्तान और ईरान ने सोमवार तड़के युद्ध समाप्त करने के समझौते को अंतिम रूप देने की घोषणा की थी। इस पर शुक्रवार को स्विट्जरलैंड में आधिकारिक रूप से हस्ताक्षर किये जायेंगे। इससे पहले 28 फरवरी को इजरायल और अमेरिका ने तेहरान और अन्य ईरानी शहरों पर संयुक्त हमले किए थे। इसके जवाब में ईरान ने इजरायल और क्षेत्र में मौजूद अमेरिकी ठिकानों पर ताबड़तोड़ मिसाइल और ड्रोन हमले किए थे।</span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"><span style="font-family:'Nirmala UI', 'sans-serif';"> </span></p>
<p class="MsoNormal"> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 11:45:22 +0530</pubDate>
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