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                <title>गैजेट्स - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>गैजेट्स RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>शुक्रवार से शुरू होगी सैमसंग गैलेक्सी ए57 और ए37 की बिक्री : कैशबैक और ईएमआई के ऑफर, खरीदने से पहले जानें क्या है फीचर्स और कीमत</title>
                                    <description><![CDATA[सैमसंग ने भारत में गैलेक्सी A57 5G और A37 5G लॉन्च कर दिए हैं। 50MP नाइटोग्राफी कैमरा, AI फीचर्स और गोरिल्ला ग्लास विक्टस सुरक्षा से लैस ये फोन ₹41,999 से शुरू हैं। 'ट्रिपल जीरो स्कीम' के तहत बिना डाउन पेमेंट और ₹1,625 की EMI पर इन्हें अपना बनाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/sale-of-samsung-galaxy-a57-and-a37-will-start-from/article-149733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/galaxy.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। देश के प्रमुख उपभोक्ता इलेक्ट्रॉनिक्स ब्रांड सैमसंग ने अपने नये गैलेक्सी ए57 5जी और गैलेक्सी ए37 5जी स्मार्टफोन की बिक्री शुक्रवार 10 अप्रैल से शुरू करने की घोषणा की है। कंपनी ने गुरुवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया कि नयी ए सीरीज विशेषकर युवाओं को ध्यान में रखकर तैयार की गयी है। गैलेक्सी ए57 5जी तीन रंगों - ऑसम नेवी, ऑसम आइसीब्लू और ऑसम लिलैक - में उपलब्ध होगा। इसकी कीमत 8जीबी/256जीबी वेरिएंट के लिए 56,999 रुपये और 12जीबी/256जीबी वेरिएंट के लिए 62,499 रुपये रखी गयी है।</p>
<p>वहीं, गैलेक्सी ए37 5जी ऑसम लैवेंडर, ऑसम ग्रेग्रीन और ऑसम चारकोल रंगों में आयेगा, जिसकी शुरुआती कीमत 8जीबी/128जीबी वेरिएंट के लिए 41,999 रुपये, 8जीबी/256जीबी वेरिएंट के लिए 47,499 रुपये और 12जीबी/256जीबी वेरिएंट के लिए 52,999 रुपये है। गैलेक्सी ए57 और गैलेक्सी ए37 5जी पर 'ट्रिपल जीरो स्कीम' का ऑफर दिया गया है, जिसमें बिना डाउन पेमेंट, बिना ब्याज और बिना झंझट की सुविधा मिलती है। ये स्मार्टफोन सैमसंग की वेबसाइट, सैमसंग के एक्सक्लूसिव और पार्टनर स्टोर्स तथा अन्य ऑनलाइन प्लेटफॉर्म्स पर उपलब्ध होंगे।</p>
<p>इसके अलावा, अपग्रेड बोनस तथा कई अन्य ऑफर भी दिये जा रहे हैं। इनमें यूपीआई से भुगतान पर तीन हजार रुपये का कैशबैक, 24 महीने तक की शून्य लागत पर ईएमआई और 3,000 रुपये का अपग्रेड बोनस शामिल है। ईएमआई 1,625 रुपये प्रति माह से शुरू होगा।<br />दोनों स्मार्टफोन में 50 मेगा पिक्सल का मुख्य कैमरा दिया गया है, जिसमें बेहतर इमेज प्रोसेसिंग के साथ 'नाइटोग्राफी' फीचर भी है, जिससे कम रोशनी में भी साफ और डिटेल्ड तस्वीर ली जा सकती है। इसके अलावा, इनमें अल्ट्रा-वाइड और मैक्रो लेंस के साथ 12एमपी का एचडीआर फ्रंट कैमरा भी दिया गया है, जो फोटो और वीडियो में बेहतर तथा संतुलित आउटपुट देता है। एआई आधारित फीचर्स जैसे बेस्ट और ऑब्जेक्ट इरेजर की मदद से यूजर आसानी से फोटो एडिट कर सकते हैं और ग्रुप फोटो को और बेहतर बना सकते हैं।</p>
<p>इनमें आगे और पीछे गोरिल्ला ग्लास विक्टस की सुरक्षा दी गई है। साथ ही आईपी68 रेटिंग के चलते ये पानी और धूल से भी सुरक्षित रहते हैं। दोनों स्मार्टफोन में छह एंड्रॉयड अपडेट और छह साल तक सिक्योरिटी अपडेट का सपोर्ट मिलेगा। गैलेक्सी ए57 5जी में एक्सीनोस 1680 प्रोसेसर दिया गया है, जो पिछले मॉडल के मुकाबले 33 प्रतिशत बेहतर एनपीयू परफॉर्मेंस और 15 प्रतिशत ज्यादा सीपीयू तथा जीपीयू परफॉर्मेंस देता है। गैलेक्सी ए37 5जी में एक्सीनोस 1480 प्रोसेसर मिलता है, जिसमें एनपीयू परफॉर्मेंस में 162 प्रतिशत तक का बड़ा सुधार देखने को मिलता है। साथ ही सीपीयू में 15 प्रतिशत और जीपीयू में 19 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है। दोनों स्मार्टफोन्स में एलपीडीडीआर5एक्स रैम और यूएफएस 3.1 स्टोरेज दी गयी है, जिससे ऐप जल्दी खुलते हैं और फाइल ट्रांसफर की स्पीड भी बेहतर होती है। दोनों मॉडलों में 5000 एमएएच की बैटरी दी गई है, जो सामान्य इस्तेमाल में दो दिन तक चल सकती है। साथ ही, दोनों स्मार्टफोन 45वाट फास्ट चार्जिंग को सपोर्ट करते हैं, जिससे बैटरी को तेजी से चार्ज किया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Apr 2026 15:57:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>व्हाट्सएप पर एक मार्च से लागू हो जाएगा सिम बाइंडिंग: पहले की तरह नहीं काम करेगा ऐप, सिम कार्ड के बिना नहीं चलेगा व्हाट्सएप</title>
                                    <description><![CDATA[1 मार्च 2026 से व्हाट्सएप और टेलीग्राम जैसे ऐप्स के लिए सिम बाइंडिंग अनिवार्य। मोबाइल सिम के बिना ऐप्स नहीं करेंगे काम। साइबर धोखाधड़ी रोकने के लिए व्हाट्सएप वेब को हर 6 घंटे में करना होगा पुनः लॉगिन। डिजिटल सुरक्षा और राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया ये कदम। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/sim-binding-will-be-implemented-on-whatsapp-from-march-1/article-144778"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/whatsapp.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। 1 मार्च 2026 से देश में एक नया नियम लागू होने वाला है जो व्हाट्सएप, टेलीग्राम, सिग्नल, स्नैपचैट, शेयरचैट, जियोचैट, अराटाई और जोश जैसे मैसेजिंग ऐप्स को सिम से जोड़कर चलाने को मैंडेटरी कर देगा। मतलब अब आप बिना अपने असली मोबाइल सिम के इन ऐप्स को नहीं चला पाएंगे। रिपोर्ट्स के मुताबिक सरकार ने साफ कहा है कि इस नियम में कोई छूट नहीं मिलेगी और जिस किसी ऐप ने इसे लागू नहीं किया, उस पर कड़ी कार्रवाई होगी। इससे व्हाट्सएप यूजर्स में चिंता साफ नजर आ रही है।</p>
<p><strong>व्हाट्सएप वेब यूजर्स ध्यान दें</strong></p>
<p>नए नियम के अनुसार अगर आप  WhatsApp Web और Telegram Web का इस्तेमाल करते हैं तो हर 6 घंटे में दफ कोड स्कैन करते हुए फिर से लॉग-इन करना होगा। वरना आपका वेब सेशन बंद हो जाएगा। सरकार ने कहा है कि यह कदम साइबर धोखाधड़ी और नकली अकाउंट रोकने के लिए जरूरी है। अब ऐप केवल उसी नंबर से काम करेगा, जिसका सिम आपके फोन में असली रूप से मौजूद है।</p>
<p><strong>नियम क्यों लागू हो रहा है?</strong></p>
<p>मोबाइल नंबर और ऐप के बीच नकली कनेक्शन से होने वाले फ्रॉड, फर्जी लोगों के प्रोफाइल, फोन-घोटालों में इस नियम को जरूरी बताया जा रहा है। Department of Telecommunications ने दिशा-निर्देश जारी किए हैं कि व्हाटसएप प्लेटफॉर्म्स को यह नियम 90 दिनों के भीतर लागू करना होगा। 28 फरवरी इसके आखिरी दिन के रूप में तय किया गया है। सरकार का कहना है कि इससे डिजिटल अपराध को ट्रेस करना आसान होगा तथा राष्ट्रीय सुरक्षा मजबूत होगी।</p>
<p><strong>मानने होंगे नियम </strong></p>
<p>WhatsApp पेरेंट कंपनी मेटा पहले से जेडीवी-बाइंडिंग फीचर पर काम कर रही है। कुछ बीटा वर्ज़न्स में यह फीचर दिखना भी शुरू हो गया है जो यूजर से पूछता है कि क्या फोन में वही एक्टिव रकट मौजूद है जिसके साथ WhatsApp रजिस्टर्ड किया हुआ है। अगर एक्टिव सिम मौजूद नहीं मिलता है तो ऐप लिमिटेड मोड में चलेगा या बंद हो जाएगा जब तक आप सही सिम डालकर उसे वेरिफाई नहीं कर लेते। इसी तरह टेलीग्राम और सिग्नल को भी अपने सिस्टम में यह चेक जोड़ना होगा।</p>
<p><strong>यूजर्स में डर क्यों है?</strong></p>
<ul>
<li>यह नियम यूजर्स के लिए नया है। इससे कई लोगों को परेशानी हो सकती है:</li>
<li>अगर फोन का सिम हट जाता है, तो व्हाट्सएप काम करना बंद कर सकता है।</li>
<li>यह नियम विदेश में रहने वाले यूजर्स को भी प्रभावित करेगा क्योंकि उन्हें हर बार भारतीय सिम फोन में लगाना पड़ेगा।</li>
<li>व्हाट्सएप वेब हर 6 घंटे में दोबारा लॉग-इन मांगेगा, जो रोजाना काम में मुश्किल खड़ी कर सकता है।</li>
<li>कई लोग सिम बदलकर ऐप इस्तेमाल करते थे, अब यह संभव नहीं रहेगा।</li>
</ul>
<p><strong>सुरक्षा या प्राइवेसी? एक्सपर्ट्स की राय</strong></p>
<p>सरकार का कहना है कि यह कदम डिजिटल सुरक्षा बढ़ाने के लिए है। नकली अकाउंट, फेक नम्बर और फ्रॉड मामलों में इससे मदद मिलेगी। बहुत से साइबर एक्सपर्ट भी यह बताते हैं कि सिम-बाइंडिंग सुरक्षा का एक एक्स्ट्रा लेयर देगा। लेकिन कुछ प्राइवेसी एक्सपर्ट्स का यह भी मानना है कि इससे यूजर की प्राइवेसी पर असर भी पड़ सकता है। खासकर विदेश में काम या यात्रा करते समय। पर सरकार ने स्पष्ट किया है कि नियम सुरक्षा को प्राथमिकता देता है।</p>
<p><strong>यूजर्स को क्या करना चाहिए?</strong></p>
<ul>
<li>अगर आप WhatsApp का रोजाना इस्तेमाल करते हैं, तो 1 मार्च से पहले यह सुनिश्चित कर लें:</li>
<li>आपका वही सिम फोन में लगे रहे, जिस नंबर से आपने ऐप रजिस्टर्ड किया है।</li>
<li>अगर आपने सिम ज्यादा बदलते हैं, तो अब प्रमाणीकरण हर बार करना पड़ेगा।</li>
</ul>
<p>1 मार्च के बाद यह सिस्टम लागू होने की खबर है। अगर ऐप कंपनियां इसे समय पर लागू नहीं करती हैं, तो उनके ऊपर कानूनी कार्रवाई, जुर्माना और टेक्निकल ब्लॉक भी हो सकता है। सरकार की तरफ से कहा गया है कि यह डिजिटल धोखाधड़ी और फ्रॉड से लड़ने की दिशा में एक बड़ा कदम है, लेकिन इसका असर यूजर्स की रोजमर्रा की जिंदगी पर भी पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 12:18:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>Google और UIDAI ने मिलाया हाथ, जल्द Maps पर दिखेंगे ऑथराइज्ड 60 हजार से अधिक AADHAR केंद्र</title>
                                    <description><![CDATA[UIDAI ने Google Maps के साथ की साझेदारी। 60,000 से अधिक अधिकृत आधार केंद्रों को ऑनलाइन खोजने की दी सुविधा। नागरिक मोबाइल या नामांकन अपडेट जैसी सेवाओं, दिव्यांग सुविधाओं और समय की जानकारी मिलेगी। पारदर्शी और विश्वसनीय सेवाएं होगी सुनिश्चित। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/google-and-uidai-join-hands-more-than-60-thousand-authorized/article-144766"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/google.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। UIDAI ने Google के साथ साझेदारी कर Google Maps पर अधिकृत आधार केंद्र दिखाने का फैसला किया है। इलेक्ट्रॉनिक्स और आईटी मंत्रालय के अनुसार इस सुविधा से लोग अपने नजदीकी सत्यापित आधार केंद्रों का पता, उपलब्ध सेवाएं और जरूरी जानकारी आसानी से देख सकेंगे।</p>
<p>Google Maps के जरिए वयस्क और बाल नामांकन, पता या मोबाइल नंबर अपडेट जैसी सेवाओं की जानकारी मिलेगी। साथ ही दिव्यांग-अनुकूल सुविधाएं, पार्किंग और संचालन समय भी देखा जा सकेगा। आने वाले महीनों में यह सुविधा शुरू होगी, जिससे देशभर के 60 हजार से अधिक आधार केंद्रों तक पहुंच आसान बनेगी।</p>
<p>संगठन का लक्ष्य आधारधारकों के लिए सेवाओं को सरल बनाना है। इस साझेदारी से अधिकृत आधार केंद्रों तक पहुंच अब तेज और पारदर्शी होगी। UIDAI के साथ सत्यापित आधार केंद्रों का इंटीग्रेशन होने से लाखों लोगों को भरोसेमंद सेवाएं आसानी से मिल सकेंगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Feb 2026 11:19:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>आज से एआई वीडियो पर सख्ती AI-Generated का लेबल अनिवार्य: नए आईटी एक्ट में एआई वीडियो, फर्जी और डीपफेक कंटेंट पर लगेगी लगाम, सरकार ने 10 फरवरी को जारी किए थे नए नियम</title>
                                    <description><![CDATA[केंद्र सरकार ने एआई-जनित डीपफेक को नियंत्रित करने के लिए नए दिशा-निर्देश लागू किए हैं। अब सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को भ्रामक कंटेंट की शिकायत पर उसे 3 घंटे के भीतर हटाना अनिवार्य होगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/from-today-strictness-on-ai-videos-ai-generated-label-mandatory-new/article-143863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/ai-video.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। डिजिटल दौर में तेजी से बढ़ रहे आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित वीडियो, खासकर डीपफेक और मॉर्फ्ड कंटेंट, को नियंत्रित करने के लिए केंद्र सरकार ने नए आईटी नियमों के तहत सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। ये दिशा-निर्देश मुख्य रूप से इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय द्वारा सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम, 2000 के प्रावधानों और आईटी नियम 2021 में किए गए संशोधनों के आधार पर लागू किए जा रहे हैं। सरकार का उद्देश्य एआई तकनीक के दुरुपयोग, फर्जी खबरों और डीपफेक वीडियो के प्रसार पर रोक लगाना है। भारत सरकार ने आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई), डीपफेक और भ्रामक कंटेंट के बढ़ते खतरों को देखते हुए आईटी नियम 2021 में महत्वपूर्ण संशोधन किया है। फरवरी 2026 में जारी नई गाइडलाइंस के तहत एआई से बने वीडियो को लेकर कड़े नियम लागू किए गए हैं। </p>
<p><strong>एआई डीपफेक को लेकर सरकार के नए नियम</strong></p>
<p>केंद्र सरकार ने AI-Generated कंटेंट को लेकर नए दिशानिर्देश जारी किए, जिनका पालन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को करना होगा। सरकार ने 10 फरवरी को नए नियम जारी किए हैं, जो 20 फरवरी से लागू होंगे। केंद्र सरकार ने सूचना प्रौद्योगिकी (मध्यस्थ दिशा-निर्देश और डिजिटल मीडिया आचार संहिता) नियम, 2021 में संशोधन किया है। इन नियमों के तहत अब अक से बने या बदले गए कंटेंट को भारत के डिजिटल कानूनों के दायरे में औपचारिक रूप से शामिल किया गया है।</p>
<p><strong>3 घंटे में हटेगा फर्जी गलत अक कंटेंट</strong></p>
<p>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को डीपफेक या भ्रामक अक कंटेंट को तीन घंटे के अंदर हटाना होगा। अब 36 घंटे की जगह, सिर्फ 3 घंटे में एक्शन लेना होगा। इसके अलावा 15 दिन की विंडो घटाकर 7 दिन कर दी गई है और  24 घंटे की डेडलाइन को घटाकर 12 घंटे किया गया है।</p>
<p><strong>किन वीडियो पर यह नियम नहीं लागू होंगे? </strong></p>
<p>सभी एआई वीडियो पर लेबल लगाना जरूरी नहीं है। कुछ मामलों में छूट दी गई है:<br />रूटीन एडिटिंग : वीडियो की क्वालिटी सुधारने, कलर एडजस्टमेंट, बैकग्राउंड नॉइज कम करने, या क्रॉप करने जैसे मामूली बदलावों पर यह नियम लागू नहीं होगा।<br />शैक्षिक/तकनीकी उद्देश्य : यदि एआई का उपयोग केवल सीखने-सिखाने के उद्देश्य, दस्तावेज बनाने या वीडियो के तकनीकी पहलुओं (जैसे सबटाइटल) को बेहतर बनाने के लिए किया गया है और उससे कोई गलतफहमी पैदा नहीं होती है।<br />गैर-भ्रामक सामान्य सुधार: जो बदलाव कंटेंट का अर्थ नहीं बदलते, उन्हें छूट है। <br />फिल्म, वेब सीरीज या मनोरंजन के लिए बनाए गए एआई इफेक्ट्स, यदि स्पष्ट रूप से काल्पनिक हों, तो उन पर कोई प्रतिबंध नहीं होगा।<br />व्यंग्य, पैरोडी या कलात्मक प्रस्तुति, जिसमें किसी को भ्रमित करने का इरादा न हो, नियमों के दायरे से बाहर मानी जा सकती है।<br />हालांकि, यदि इन श्रेणियों के वीडियो भी किसी व्यक्ति की प्रतिष्ठा, निजता या सार्वजनिक व्यवस्था को नुकसान पहुंचाते हैं, तो उन पर कार्रवाई संभव होगी।</p>
<p><strong>नियम न मानने पर क्या होगा?</strong></p>
<p>यदि कोई प्लेटफॉर्म इन नियमों का पालन नहीं करता है, तो उसे मिलने वाली सेफ हार्बर सुरक्षा (जिसके तहत प्लेटफॉर्म्स पर यूजर के कंटेंट के लिए कानूनी कार्रवाई नहीं होती) छीन ली जा सकती है। सरकार ने यह भी साफ किया है कि अगर प्लेटफॉर्म्स इन नए नियमों के तहत एआई कंटेंट पर कार्रवाई करते हैं, तो धारा 79 के तहत मिलने वाली सुरक्षा उन पर लागू रहेगी यानी वे केवल यूजर के पोस्ट के लिए कानूनी रूप से जिम्मेदार नहीं ठहराए जाएंगे।</p>
<p><strong>यह क्यों किया जा रहा है? </strong></p>
<p>डीपफेक पर लगाम: मशहूर हस्तियों और सामान्य लोगों के चेहरे/आवाज का इस्तेमाल कर बनाए जा रहे फर्जी वीडियो से देश में अव्यवस्था और बदनामी फैल रही थी।<br />पारदर्शिता: सरकार का लक्ष्य यह सुनिश्चित करना है कि डिजिटल दुनिया में यूजर को यह पता चले कि वह असली वीडियो देख रहा है या एआई से बना नकली। </p>
<p><strong>नए आईटी नियमों (एआई वीडियो के लिए गाइडलाइन) में क्या है? </strong></p>
<p>अनिवार्य लेबलिंग : एआई या किसी अन्य तकनीक से बने फोटो, वीडियो या आॅडियो (जिसे सिंथेटिक कंटेंट कहा गया है) पर अब स्पष्ट और प्रमुख रूप से AI-Generated का लेबल लगाना अनिवार्य है।<br />3 घंटे में हटाया जाएगा : कोई एआई-जनित वीडियो या डीपफेक किसी की मानहानि करता है, अश्लील या भ्रामक है, तो सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स को सरकार या कोर्ट के आदेश के बाद 3 घंटे के भीतर हटाना होगा।<br />यूजर की जवाबदेही: कंटेंट अपलोड करते समय यूजर को खुद बताना होगा कि क्या सामग्री एआई-जनित है। प्लेटफॉर्म्स को भी इसे चेक करना होगा।<br />अनट्रेसेबल मेटा डेटा : प्लेटफॉर्म्स को यह सुनिश्चित करना होगा कि एआई कंटेंट में ऐसी जानकारी हो जिससे यह पता चले कि यह असली नहीं है। <br />चुनाव, दंगा, सांप्रदायिक तनाव या राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े मामलों में भ्रामक वीडियो को तुरंत ब्लॉक किया जाए।<br />शिकायत निवारण तंत्र: हर प्रमुख सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म को भारत में नोडल अधिकारी नियुक्त करना होगा।<br />डीपफेक पर सख्ती: किसी व्यक्ति की अनुमति के बिना उसकी छवि या आवाज का एआई से उपयोग करने पर कार्रवाई की जाएगी।<br />बच्चों से जुड़ा कंटेंट: नाबालिगों से संबंधित एआई वीडियो पर विशेष निगरानी और त्वरित हटाने की व्यवस्था लागू होगी। बच्चों के मामले में सरकार अधिक संवेदनशील और सख्त है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Feb 2026 11:25:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म के लिए केंद्र सरकार ला रही नया आईटी नियम: AI Misinfo, Deepfake जांच के दायरे में</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार ने इंटरनेट पर डीपफेक और गुमराह करने वाले AI से बने कंटेंट से निपटने के लिए एक नए कानून को नोटिफाई किया है। इसके तहत प्लेटफॉर्म और यूज़र्स को ऐसी सामग्री साफ तौर पर बतानी होगी जो असली नहीं है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/central-government-is-bringing-new-it-rules-for-social-media/article-142672"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)-(15)4.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सरकार ने डीपफेक और भ्रामक एआई कंटेंट पर रोक लगाने के लिए सख्त आईटी नियम अधिसूचित किए हैं। नए कानून के तहत एआई से बने या बदले गए फोटो, वीडियो और ऑडियो को स्पष्ट रूप से लेबल करना अनिवार्य होगा। इंस्टाग्राम और एक्स जैसे प्लेटफॉर्म को भी ऐसे कंटेंट पर साफ चेतावनी देनी होगी, ताकि यूजर्स गुमराह न हों। शिकायत निवारण की समयसीमा घटाकर दो घंटे में शिकायत स्वीकार और सात दिन में समाधान तय किया गया है। इन कदमों का उद्देश्य ऑनलाइन पारदर्शिता बढ़ाना, एआई के दुरुपयोग को रोकना और डिजिटल धोखाधड़ी पर तेजी से कार्रवाई करना है।</p>
<p><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 18:29:34 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>भारत के टेक फ्यूचर की झलक ‘2NM चिप’: भारत पहली बार टेक्नोलॉजी के डिजाइन मैप पर मजबूती से उभरा, अश्विनी वैष्णव की उंगलियों के बीच दिखी 2ल्ले चिप  </title>
                                    <description><![CDATA[केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 2एनएम चिप दिखाई। क्वालकॉम द्वारा भारत में डिजाइन यह उपलब्धि देश को वैश्विक सेमीकंडक्टर हब बनने की दिशा में आगे बढ़ाती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/glimpse-of-indias-tech-future-2nm-chip-india-emerged-strongly/article-142394"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/11-(700-x-400-px)-(630-x-400-px)7.png" alt=""></a><br /><div>नई दिल्ली। हाल ही में केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव की एक तस्वीर ने भारत के तकनीकी क्षेत्र में एक नई दिशा को चिह्नित किया है, जिसमें उनकी दो उंगलियों के बीच एक छोटी सी 2 नैनोमीटर चिप को देखा जा सकता है। यह चिप भारत के लिए एक महत्वपूर्ण तकनीकी मील का पत्थर साबित हो सकती है, खासकर तब जब इसे दुनिया की सबसे बड़ी सेमीकंडक्टर निमार्ता कंपनियों में से एक, क्वालकॉम द्वारा बेंगलुरु, चेन्नई और हैदराबाद स्थित अपने इंजीनियरिंग केंद्रों में डिजाइन किया गया है। इस चिप के डिजाइन का सफल टेप-आउट (अंतिम डिजाइन चरण) हाल ही में घोषित किया गया है, जो भारत के सेमीकंडक्टर क्षेत्र में बड़ी उपलब्धि है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप क्या है और क्यों है खास?</strong></div>
<div> </div>
<div>2एनएम चिप को नेक्स्ट-जेनरेशन सेमीकंडक्टर तकनीकी के रूप में जाना जा रहा है। यह चिप ट्रांजिस्टर डेंसिटी (ट्रांजिस्टर की संख्या) के मामले में अत्यधिक प्रभावी हैं, जिससे अधिक डेटा प्रोसेसिंग और कम ऊर्जा खपत संभव होती है। विशेष रूप से, यह चिप्स मौजूदा 5एनएम और 3एनएम चिप की तुलना में बेहतर प्रदर्शन करती हैं। आधिकारिक तौर पर दावा किया जा रहा है कि 2एनएम चिप का उपयोग होने के बाद ऊर्जा खपत में 45% तक की कमी आएगी। यह चिप न केवल स्मार्टफोन्स, बल्कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक), इंटरनेट ऑफ थिंग्स और अन्य स्मार्ट गैजेट्स में भी इस्तेमाल हो सकती हैं। </div>
<div> </div>
<div><strong>भारत के लिए यह सफलता क्यों महत्वपूर्ण है?</strong></div>
<div> </div>
<div>क्वालकॉम द्वारा 2एनएम चिप का विकास भारत में करना एक बहुत बड़ा कदम है। भारत, जो पहले से ही वैश्विक मैन्युफैक्चरिंग हब बनने की ओर अग्रसर है, अब सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग में भी खुद को स्थापित करने की ओर बढ़ रहा है। क्वालकॉम के अनुसार, भारत में स्थित बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई उनके लिए अमेरिका के बाद दूसरा सबसे बड़ा इंजीनियरिंग टैलेंट पूल है। केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का मानना है कि यह भारत के डिजाइन इकोसिस्टम की बढ़ती क्षमता का प्रमाण है।</div>
<div> </div>
<div><strong>इस चिप का प्रभाव</strong></div>
<div> </div>
<div>आने वाले समय में 2एनएम चिप का प्रभाव सिर्फ स्मार्टफोन्स तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इनका उपयोग कई अन्य क्षेत्रों में भी होगा:</div>
<div>स्मार्टफोन्स: आगामी प्रीमियम स्मार्टफोन्स में इन चिप का उपयोग किया जाएगा।</div>
<div>आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (अक): एआई ऐप्लिकेशंस के लिए यह चिप बहुत कारगर साबित हो सकती हैं, क्योंकि वे बड़े पैमाने पर डेटा प्रोसेसिंग में मदद करती हैं।</div>
<div>इंटरनेट ऑफ थिंग्स : स्मार्ट होम डिवाइस, स्मार्ट वियरेबल्स और अन्य उपकरणों में भी इन चिप का प्रभावी उपयोग होगा।</div>
<div>ऑटोमोटिव इंडस्ट्री: स्वचालित वाहन और कनेक्टेड कारों में भी इन चिप का इस्तेमाल हो सकता है, जो इन तकनीकों को और अधिक सक्षम बनाएगा।</div>
<div>डेटा सेंटर: 2एनएम चिप की ऊर्जा दक्षता और प्रोसेसिंग स्पीड डेटा सेंटर   ऑपरेशंस को अधिक प्रभावी बनाएगी।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत की तकनीकी क्रांति</strong></div>
<div> </div>
<div>भारत का सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग क्षेत्र एक नई दिशा में आगे बढ़ रहा है। क्वालकॉम जैसी कंपनियों के बेंगलुरु, हैदराबाद और चेन्नई में स्थापित इंजीनियरिंग केंद्रों में इस तकनीक का विकास भारत के बढ़ते तकनीकी सामर्थ्य का प्रतीक है। भारत के पास अब विश्व स्तरीय डिजाइनिंग टैलेंट, उच्च गुणवत्ता वाली इंजीनियरिंग टीम और विशाल मैन्युफैक्चरिंग इन्फ्रास्ट्रक्चर है, जो उसे वैश्विक सेमीकंडक्टर उद्योग में प्रमुख खिलाड़ी बना सकता है। अगर भारत इस क्षेत्र में अपनी स्थिति मजबूत करता है, तो वह न केवल अमेरिका और चीन के समकक्ष खड़ा हो सकता है, बल्कि सेमीकंडक्टर डिजाइनिंग और मैन्युफैक्चरिंग के क्षेत्र में एक वैश्विक नेता के रूप में उभर सकता है।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप अब तक कहाँ बन रही हैं?</strong></div>
<div> </div>
<div>2 नैनोमीटर चिप एक नई तकनीक हैं, जो सेमीकंडक्टर उद्योग में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर हैं। अभी तक इस तकनीक पर काम कर रही कुछ प्रमुख कंपनियां और उनकी फैक्ट्रियां हैं, जहां यह चिप्स विकसित या निर्माण की प्रक्रिया में हैं।</div>
<div> </div>
<div>दुनिया की नंबर-1 चिप मैन्युफैक्चरर</div>
<div>लोकेशन: ताइवान</div>
<div>स्टेटस: सबसे आगे</div>
<div>उत्पादन: 2025 से</div>
<div>क्लाइंट्स लाइन में माना जा रहा है कि 18 के प्रोसेसर यहीं बनेंगे</div>
<div> </div>
<div><strong>दक्षिण कोरिया</strong></div>
<div> </div>
<div>टेक्नोलॉजी पर फोकस</div>
<div>लोकेशन: साउथ कोरिया</div>
<div>उत्पादन लक्ष्य: 2025</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका और यूरोप</strong></div>
<div> </div>
<div>अपनी 2एनएम तकनीक को 20ए / 18ए नाम से पेश कर रहा है</div>
<div> </div>
<div>लोकेशन: अमेरिका, जर्मनी, आयरलैंड</div>
<div>फोकस: हाई-परफॉर्मेंस कंप्यूटिंग, सर्वर और अक</div>
<div>स्टेटस: एडवांस टेस्टिंग स्टेज</div>
<div> </div>
<div><strong>अमेरिका - रिसर्च लेवल</strong></div>
<div> </div>
<div>कइट ने सबसे पहले 2ल्ले चिप का प्रोटोटाइप दिखाया</div>
<div>लोकेशन: न्यूयॉर्क रिसर्च लैब</div>
<div>उत्पादन नहीं, सिर्फ टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट</div>
<div>कइट की रिसर्च का फायदा ळरटउ और रें२४ल्लॅ को भी मिलता है</div>
<div>भारत में 2एनएम चिप कहां बन रही है?</div>
<div> </div>
<div>भारत में मैन्युफैक्चरिंग नहीं, लेकिन डिजाइन हो रहा है</div>
<div> </div>
<div>लोकेशन: बेंगलुरु, हैदराबाद, चेन्नई</div>
<div>काम: 2एनएम चिप का डिजाइन और टेप-आउट</div>
<div>मैन्युफैक्चरिंग: ताइवान या साउथ कोरिया में होगी</div>
<div>यह भारत के लिए बहुत बड़ी उपलब्धि मानी जा रही है</div>
<div>2एनएम चिप बनाना इतना मुश्किल क्यों है?</div>
<div> </div>
<div><strong>टेक्नोलॉजी चैलेंज</strong></div>
<div> </div>
<div>एक मशीन की कीमत: 1.5 लाख करोड़ से ज्यादा</div>
<div>एक फैब प्लांट की लागत: 20-25 लाख करोड़।</div>
<div> </div>
<div><strong>2एनएम चिप के निर्माण की चुनौतियां</strong></div>
<div> </div>
<div>2एनएम चिप्स का निर्माण अत्यधिक जटिल प्रक्रिया है, क्योंकि इस तकनीक में बहुत छोटे ट्रांजिस्टर होते हैं जो मौजूदा तकनीकी प्रक्रियाओं की तुलना में बहुत अधिक सटीकता और अत्याधुनिक उपकरणों की आवश्यकता होती है। इसके निर्माण में इस्तेमाल होने वाली सामग्री, जैसे कि हाई-प्रीसीजन मटेरियल और उन्नत पैटर्निंग तकनीक, चिप्स की निर्माण प्रक्रिया को और भी जटिल बनाती हैं।</div>
<div> </div>
<div><strong>भारत में 2एनएम चिप कब बनेगी?</strong></div>
<div> </div>
<div>भारत में अभी 2एनएम चिप नहीं बन रही, फिलहाल यह डिजाइन, टेस्टिंग में मजबूत हो रहा है</div>
<div>मैन्युफैक्चरिंग में आने में 5-7 साल लग सकते हैं।</div>
<div>अभी यह चिप केवल ताइवान, दक्षिण कोरिया और अमेरिका में बन रही है।</div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 Feb 2026 11:32:40 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>फ्रांस-जर्मनी और ऑस्ट्रिया अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपनाएंगे ओपन-सोर्स </title>
                                    <description><![CDATA[फ्रांस, जर्मनी समेत कई यूरोपीय देश डेटा सुरक्षा और राष्ट्रीय हितों के चलते अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर स्वदेशी व ओपन-सोर्स तकनीक अपनाने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/france-germany-and-austria-will-abandon-american-software-and-adopt/article-141999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(10).png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूरोप के कई देश अब अमेरिकी टेक कंपनियों पर अपनी निर्भरता कम करना चाहते हैं। फ्रांस, जर्मनी और ऑस्ट्रिया जैसे देश ने अमेरिकी सॉफ्टवेयर छोड़कर अपने या ओपन-सोर्स विकल्प अपनाने का फैसला किया है। इसका मकसद है डेटा सुरक्षा, गोपनीयता और डिजिटल आजादी। फ्रांस में सरकारी कर्मचारियों को अब जूम और माइक्रोसॉफ्ट टीम्स जैसे अमेरिकी वीडियो कॉलिंग टूल्स छोड़ने होंगे। साल 2027 तक करीब 25 लाख सरकारी कर्मचारी फ्रांस के अपने वीडियो कॉन्फ्रेंस सिस्टम वीआईएसआई का इस्तेमाल करेंगे।</p>
<p>फ्रांसीसी सरकार का कहना है कि गैर-यूरोपीय सॉफ्टवेयर पर निर्भर रहना डेटा और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए खतरा हो सकता है। सरकार चाहती है कि संवेदनशील बातचीत और सरकारी जानकारी यूरोप के अंदर ही सुरक्षित रहे। फ्रांस के सिविल सर्विस मंत्री डेविड अमिएल ने कहा कि वैज्ञानिक जानकारी, संवेदनशील डेटा और रणनीतिक नवाचारों को गैर-यूरोपीय कंपनियों के हाथ में नहीं छोड़ा जा सकता।</p>
<p><strong>अमेरिका-यूरोप तनाव से बढ़ी चिंता</strong></p>
<p>यूरोप में यह चिंता तब और बढ़ी जब अमेरिका की ट्रंप सरकार ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय के एक अधिकारी पर प्रतिबंध लगाए। इसके बाद माइक्रोसॉफ्ट ने उस अधिकारी की ईमेल सेवा बंद कर दी। इससे यह डर पैदा हुआ कि अमेरिकी कंपनियां कभी भी सेवाएं रोक सकती हैं। हालांकि, माइक्रोसॉफ्ट का कहना है कि उसने आईसीसी की सेवाएं पूरी तरह बंद नहीं की और वह यूरोपीय सरकारों के साथ मिलकर डेटा सुरक्षा पर काम कर रहा है। कंपनी का दावा है कि उसका डेटा यूरोप में ही रहता है और यूरोपीय कानूनों के तहत सुरक्षित है। फिर भी यूरोप में यह भावना मजबूत हुई कि अगर किसी देश या कंपनी पर बहुत ज्यादा निर्भरता होगी तो उसे हथियार की तरह इस्तेमाल किया जा सकता है।</p>
<p><strong>जर्मनी-ऑस्ट्रिया और डेनमार्क के भी बदले रास्ते</strong></p>
<p>जर्मनी के श्लेसविग-होल्सटीन राज्य ने पिछले साल 44 हजार कर्मचारियों की ईमेल सेवाएं माइक्रोसॉफ्ट से हटाकर ओपन-सोर्स सिस्टम पर ले गईं। ऑस्ट्रिया की सेना ने रिपोर्ट लिखने और दस्तावेज बनाने के लिए अपनाया है। इसकी एक वजह यह भी है कि माइक्रोसॉफ्ट अब ज्यादा डेटा क्लाउड पर ले जा रहा है, जबकि लिबर ऑफिस आमतौर पर ऑफलाइन चलता है।</p>
<p><strong>पहले आजादी-बाद में बचत</strong></p>
<p>डेनमार्क की सरकार और कोपेनहेगन व आरहूस जैसे शहर भी ओपन-सोर्स सॉफ्टवेयर आजमा रहे हैं। उनका कहना है कि विदेशी कंपनियों पर निर्भरता भविष्य में जोखिम बन सकती है। यूरोपीय नेताओं का मानना है कि तकनीक के मामले में किसी एक देश या कंपनी पर निर्भर रहना खतरनाक है। यही वजह है कि अब यूरोप में पहले आजादी, बद में बचत की सोच बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 11:39:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इतिहास बनने जा रहा है लाल LPG सिलेंडर: हल्के, सुरक्षित और जंग-मुक्त प्लास्टिक सिलेंडर से बदलेगी रसोई की ताकत</title>
                                    <description><![CDATA[दशकों से, लोहे से बने लाल LPG सिलेंडर भारतीय रसोई पर हावी रहे हैं। जंग लगने और लीकेज से अक्सर सुरक्षा को खतरा रहता था। आग लगने की स्थिति में, ज़्यादा अंदरूनी दबाव के कारण लोहे के सिलेंडर फट जाते थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/history-is-going-to-be-made-in-red-lpg-cylinder/article-141475"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(16)1.png" alt=""></a><br /><p>मुंबई। भारतीय रसोई में दशकों से इस्तेमाल हो रहे लाल रंग के लोहे के LPG सिलेंडर अब इतिहास बनने जा रहे है। क्योंकि इन सिलेंडरों में जंग लगना, भारी वजन और आग लगने की स्थिति में फटने का खतरा बना रहता है जो कि उपभोक्ताओं के लिए एक चिंता का विषय रहा है। इन समस्याओं को दूर करने के लिए केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने गोवा में हाई-डेंसिटी पॉलीथीन (HDP) से बने इस नए LPG सिलेंडर को औपचारिक रूप से लॉन्च किया। बता दें कि यह सिलेंडर भारत पेट्रोलियम कॉरपोरेशन लिमिटेड द्वारा बाजार में उतारा गया है।  बीपीसीएल के कार्यकारी निदेशक एवं बिजनेस हेड टीवी पांडियन के अनुसार, यह सिलेंडर HDP और फाइब्रॉइड कंपोजिट सामग्री से बना है, जिससे यह जंग-मुक्त और अधिक टिकाऊ बनता है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार, हम अभी तक जो भी सिलेंडर उपयोग में ले रहे हैं वो करीब 14.2 किलोग्राम का होता है और खाली सिलेंडर का वजन करीब 17 किलोग्राम होता है, जिससे कुल वजन 30 से 33 किलोग्राम तक पहुंच जाता है। इसके विपरीत, भारत गैस लाइट सिलेंडर का खाली वजन मात्र 5.9 किलोग्राम है और इसमें 10 किलोग्राम गैस आती है। इस तरह कुल वजन केवल 15.9 किलोग्राम होता है। बता दें क सरकार की इस नई पहल से महिलाओं और डिलीवरी कर्मियों दोनों को बड़ी राहत मिलेगी।</p>
<p>सुरक्षा के लिहाज से आग लगने की स्थिति में यह फटने के बजाय पिघलकर गैस को धीरे-धीरे बाहर निकलने देता है, जिससे बड़े हादसे का खतरा कम हो जाता है। इसमें पारदर्शी स्लॉट भी दिए गए हैं, जिससे उपभोक्ता आसानी से गैस का स्तर देख सकते हैं। अगर हम कीमत की बात करें तो इस नए सिलेंडर की कीमत करीब 2,500 रुपये रखी गई है, जबकि सुरक्षा जमा राशि लगभग 3,350 रुपये होगी। मौजूदा मेटल सिलेंडर के बदले इसे लेने पर केवल 300 रुपये अतिरिक्त जमा देने होंगे। शुरुआत में यह सिलेंडर गोवा सहित 10 शहरों में उपलब्ध होगा, जिसके बाद इसे सभी मेट्रो शहरों में विस्तार दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 19:02:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जियो की एआई पहल: उत्तराखंड के 3000 से ज्यादा छात्रों, शिक्षकों को दिया एआई का प्रशिक्षण</title>
                                    <description><![CDATA[रिलायंस जियो ने उत्तराखंड में 'एआई फॉर एवरीवन' के तहत 400 से अधिक संस्थानों में 3000 छात्रों-शिक्षकों को एआई प्रशिक्षण दिया, साथ ही 5जी यूजर्स को जेमिनी प्रो मुफ्त मिला।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/jios-ai-initiative-provided-ai-training-to-more-than-3000/article-141236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>देहरादून। उत्तराखंड में पढऩे वाले छात्रों को भविष्य की तकनीकों से जोडऩे के लिए रिलायंस जियो ने 'एआइ फॉर एवरीवन' मिशन के तहत बड़ा कदम उठाया है। इस पहल के माध्यम से राज्य के 400 से अधिक स्कूलों और कॉलेजों में 3000 से ज्यादा छात्रों और शिक्षकों को कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) की ट्रेनिंग दी जा चुकी है।</p>
<p>जियो की इस पहल के तहत छात्रों और शिक्षकों को गूगल जैमिनी प्रो से परिचित कराया गया, जहां उन्हें पढ़ाई, नोट्स बनाने, असाइनमेंट लिखने, कोडिंग, प्रोजेक्ट आइडिया और इंटरव्यू तैयारी जैसे कामों में एआई के व्यावहारिक इस्तेमाल की जानकारी दी गई। नोटबुक एलएम और जेमिनी लाइव जैसे टूल्स ने छात्रों को उनकी पसंदीदा भाषा में सीखने का अनुभव दिया।</p>
<p>छात्रों और युवाओं को डिजिटल कौशल से जोडऩे के लिए जियो अपने सभी असीमित 5 जी यूजर्स को 35,100 रुपये मूल्य वाला गूगल जेमिनी प्रो प्लान 18 महीने के लिए पूरी तरह मुफ्त दे रहा है। इस प्लान में नवीनतम जेमिनी 3 प्रो मॉडल समेत एआई-आधारित इमेज जनरेशन टूल्स नैनो बनाना प्रो और वीडियो जनरेशन टूल्स बीईओ 3.1, नोटबुक एलएम और दो टीबी क्लाउड स्टोरेज शामिल है। प्लान को 'माई जियो एप' के जरिए सक्रिय किया जा सकता है। इसके साथ ही छात्र चार हफ्ते का फ्री ऑनलाइन 'जियो एआई क्लास रूम' कोर्स भी पूरा कर सकते हैं, जिससे उन्हें एआई तकनीकों की व्यावहारिक समझ मिलेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 16:54:20 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एयरटेल ने उपयोगकर्ताओं को दिया नए साल का तोहफा, 5जी नेटवर्क का किया विस्तार</title>
                                    <description><![CDATA[भारती एयरटेल ने मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के 87 जिलों में 2,400 से ज्यादा नए 5G साइट्स लगाकर 3.6 करोड़ ग्राहकों के लिए हाई-स्पीड कनेक्टिविटी सुनिश्चित की है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/airtel-gives-new-year-gift-to-users-expands-5g-network/article-140094"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/airtel.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। भारत की अग्रणी दूरसंचार सेवा प्रदाता भारती एयरटेल ने पिछले एक साल में मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में 2,400 से अधिक नये 5जी साइट्स लगाये हैं। कंपनी ने सोमवार को एक प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि दोनों राज्यों के 87 जिलों में कंपनी के इस नेटवर्क विस्तार से अब व्यस्त शहरों, तेजी से विकसित हो रहे कस्बों और दूरदराज के गांवों में भी 3.6 करोड़ ग्राहकों को भरोसेमंद हाई-स्पीड नेटवर्क मिल रहा है। ग्राहक बेहतर स्ट्रीमिंग, तेज डाउनलोड, निर्बाध ऑनलाइन काम और पढ़ाई, तथा अधिक विश्वसनीय डिजिटल भुगतान का लाभ उठा सकते हैं।</p>
<p>इंदौर, भोपाल, ग्वालियर, जबलपुर, रीवा, उज्जैन, सागर, रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग, देवास, कोरबा और राजनांदगांव सहित कई प्रमुख जिलों के ग्राहक इस विस्तारित नेटवर्क से सीधे लाभान्वित होंगे। यह विस्तृत कवरेज हाई-स्पीड 5जी सेवाओं तक निर्बाध पहुंच सुनिश्चित करेगा, जिससे आम लोगों, छात्रों, छोटे कारोबारियों और सरकारी संस्थानों की रोजमर्रा की डिजिटल जरूरतों को बेहतर समर्थन मिलेगा।</p>
<p>मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ के लिए एयरटेल के मुख्य कार्यकारी अधिकारी रितेश अग्रवाल ने कहा, मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ एयरटेल के लिए महत्वपूर्ण रणनीतिक बाजार हैं। यह विस्तार देश के हर कोने को जोडऩे की हमारी अटूट प्रतिबद्धता को दर्शाता है।</p>
<p>उन्होंने कहा कि दोनों राज्य आगे भी एयरटेल के प्रमुख फोकस क्षेत्र बने रहेंगे। इनमें अपनी उपस्थिति को और सुदृढ़ करने के उद्देश्य से एयरटेल ने उन ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क घनत्व बढ़ाने के लिए महत्वपूर्ण निवेश किया है, जहां पहले कनेक्टिविटी सीमित थी। इसमें गांवों, राजमार्गों, सीमावर्ती क्षेत्रों और उन आर्थिक गलियारों में साइट्स की संख्या बढ़ाना शामिल है, जहां डिजिटल अपनाने की गति तेजी से बढ़ रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 15:43:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>विंडोज 11 अपडेट संकट: शटडाउन बग ने बढ़ाई यूजर्स की मुसीबत, माइक्रोसॉफ्ट ने जारी किया इमरजेंसी फिक्स</title>
                                    <description><![CDATA[Microsoft ने हाल ही में साल का पहला Windows 11 अपडेट जारी किया। हालांकि, साल 2026 के पहले Windows 11 अपडेट से कुछ यूज़र्स को अप्रत्याशित परेशानी हुई क्योंकि इससे प्रभावित कंप्यूटर ठीक से बंद या रीस्टार्ट नहीं हो पा रहे थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/windows-11-update-crisis-shutdown-bug-increases-users-problems-microsoft/article-140075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/windows-11.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। माइक्रोसॉफ्ट के साल 2026 के पहले सुरक्षा अपडेट ने विंडोज 11 यूजर्स के लिए एक अजीबोगरीब समस्या खड़ी कर दी है। हाल ही में जारी किए गए Patch Tuesday अपडेट के बाद कई कंप्यूटर ठीक से शटडाउन या हाइबरनेट नहीं हो पा रहे हैं। इस बग के कारण सिस्टम बंद होने के बजाय खुद-ब-खुद रीस्टार्ट हो जाता है, जिससे विशेष रूप से लैपटॉप यूजर्स की बैटरी खत्म होने और डेटा खोने का खतरा बढ़ गया है।</p>
<p><strong>समस्या की मुख्य वजह: 'सिक्योर लॉन्च'</strong></p>
<p>माइक्रोसॉफ्ट के अनुसार, यह समस्या मुख्य रूप से Windows 11 वर्जन 23H2 को प्रभावित कर रही है। जांच में पाया गया कि जिन डिवाइस में Secure Launch इनेबल है, वे इस बग का शिकार हो रहे हैं। इसके अलावा, कुछ यूजर्स ने रिमोट डेस्कटॉप कनेक्शन और ऑथेंटिकेशन फेल होने की भी शिकायत की है।</p>
<p><strong>माइक्रोसॉफ्ट का समाधान </strong></p>
<p>स्थिति की गंभीरता को देखते हुए, माइक्रोसॉफ्ट ने 17 जनवरी, 2026 को आनन-फानन में एक आउट-ऑफ-बैंड इमरजेंसी अपडेट जारी किया है।</p>
<p>KB5077797: विंडोज 11 वर्जन 23H2 के लिए शटडाउन और रिमोट डेस्कटॉप बग को ठीक करने के लिए।</p>
<p>KB5077744: विंडोज 11 के नवीनतम वर्जन 25H2 के लिए।</p>
<p>कंपनी ने सलाह दी है कि जिन आईटी एडमिनिस्ट्रेटर ने अभी तक जनवरी का मुख्य सुरक्षा अपडेट इंस्टॉल नहीं किया है, वे सीधे इस नए OOB अपडेट को 'माइक्रोसॉफ्ट अपडेट कैटलॉग' से डाउनलोड कर लागू करें। यदि आप अभी तुरंत सिस्टम बंद करना चाहते हैं और बग का सामना कर रहे हैं, तो कमांड प्रॉम्प्ट में shutdown /s /t 0 टाइप कर फोर्स शटडाउन कर सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Jan 2026 13:26:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक्स यूजर्स के लिए बड़ी खबर! अश्लील कंटेंट की चिंताओं के बीच कंपनी ने नियमों को किया और भी सख्त, जानें पूरा मामला</title>
                                    <description><![CDATA[एक्स ने आपत्तिजनक एआई कंटेंट रोकने हेतु ग्रोक के लिए नए नियम बनाए हैं, जिसमें असली लोगों की तस्वीरों के संपादन पर रोक शामिल है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/big-news-for/article-139691"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/twitter.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स ने अश्लील और आपत्तिजनक कंटेंट की शिकायतों के बाद अपने नियमों को सख्त करते हुए कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) चैटबॉट ग्रोक के लिए नए सुरक्षा नियम लागू किए हैं।</p>
<p>एक्स ने नए नियमों के तहत असली लोगों की आपत्तिजनक कपड़ों में तस्वीरों को संपादित करने पर रोक लगाना, चित्र बनाने की सुविधा सिर्फ पेड उपभोक्ताओं तक सीमित करना और ऐसे इलाकों में जियोब्लॉकिंग शुरू करना शामिल है जहां ऐसा कंटेंट गैर-कानूनी है, जो उपभोक्ता सुरक्षा और कानूनी पालन के प्रति प्लेटफॉर्म की प्रतिबद्धता को मजबूत करता है।</p>
<p>एक्स ने कहा, हमने ग्रोक खाते को बिकनी जैसे आपत्तिजनक कपड़ों में असली लोगों की तस्वीरों को संपादित करने से रोकने के लिए तकनीकी उपाय लागू किए हैं। गौरतलब है कि यह प्रतिबंध सभी उपभोक्ताओं पर लागू होता है, जिसमें पेड उपभोक्ता भी शामिल हैं।ग्रोक के जरिए चित्र बनाना और संपादित करना अब सिर्फ पेड खाते तक सीमित है। एक्स ने कहा कि इस कदम से टूल का गलत इस्तेमाल करने वाले किसी भी व्यक्ति की पहचान करने और उसे जवाबदेह ठहराने में मदद मिलेगी। ऐसे क्षेत्रों में उपभोक्ताओं को ऐसे चित्र बनाने से रोकने के लिए जियोब्लॉकिंग उपाय भी शुरू किए गए हैं जहां यह कानून द्वारा प्रतिबंधित है।</p>
<p>कंपनी ने कहा कि उसने ऐसे क्षेत्रों में ग्रोक के जरिए बिकनी, अंडरवियर या इसी तरह के कपड़ों में असली लोगों के चित्र बनाने से सभी उपभोक्ताओं को रोकने के लिए जियोब्लॉकिंग उपाय शुरू किए हैं, जहां ऐसी गतिविधि गैर-कानूनी है। एक्स ने देकर कहा कि ये बदलाव उसके मौजूदा सुरक्षा ढांचे को नहीं बदलते हैं। सभी एआई जेनरेटेड कंटेंट को एक्स नियमों का पालन करना जारी रखना होगा। भले ही उपभोक्ता अनपेड हों या पेड।  </p>
<p>प्लेटफॉर्म ने कहा कि उसकी सुरक्षा टीमें अतिरिक्त सुरक्षा उपाय लागू करने, उल्लंघन करने वाले या गैर-कानूनी कंटेंट को हटाने के लिए तुरंत कार्रवाई करने, जरूरत पडऩे पर खाते को स्थायी रूप से निलंबित करने और स्थानीय सरकारों और कानून प्रवर्तन एजेंसियों के साथ सहयोग करने के लिए लगातार काम कर रही हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 16:00:06 +0530</pubDate>
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