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                <title>कोटा - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>कोटा RSS Feed</description>
                
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                <title>घर में घुसकर जानलेवा हमला करने वाले 3 इनामी बदमाश गिरफ्तार, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[ बच्चों के विवाद की रंजिश में तलवार और लोहे के पाइप से किया था हमला।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/three-wanted-criminals--who-had-barged-into-a-home-and-launched-a-life-threatening-attack--have-been-arrested/article-161333"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(6)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। भीमगंजमंडी  पुलिस ने घर में घुसकर तलवार और लोहे के पाइप से जानलेवा हमला करने के मामले में फरार चल रहे तीन इनामी बदमाशों को गिरफ्तार किया है। तीनों आरोपियों पर कोटा शहर पुलिस अधीक्षक ने 10-10 हजार रुपये का इनाम घोषित किया था। पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि गिरफ्तार आरोपियों में मोहम्मद अल्फेज (20) पुत्र मोहम्मद अख्तर निवासी संजय नगर, फरदीन (19) पुत्र अशरत अली निवासी मस्जिद की गली, रंगपुर रोड तथा अली हुसैन (22) पुत्र मोहसिन हुसैन निवासी संजय नगर शामिल हैं। </p>
<p>पुलिस के अनुसार 24 जुलाई 2026 की तड़के करीब 2 से 3 बजे के बीच तीनों आरोपी बाइक पर सवार होकर पीड़ित के घर पहुंचे। आरोपियों ने घर के बाहर खड़ी कार पर तलवार और लोहे के पाइप से हमला कर उसे क्षतिग्रस्त कर दिया तथा बाहर खड़ी बजाज बाइक का लॉक भी तोड़ दिया। इसके बाद वे घर में घुस गए और जान से मारने की नीयत से पीड़ित पर हमला कर दिया। पीड़ित जान बचाकर भागने लगा तो आरोपियों ने उसे दोबारा पकड़कर मारपीट की और मौके से फरार हो गए।</p>
<p>पीड़ित ने रिपोर्ट में बताया कि कुछ दिन पहले बच्चों के विवाद को लेकर दोनों पक्षों में झगड़ा हुआ था, जिसकी रंजिश में वारदात को अंजाम दिया गया। भीमगंजमंडी थाना पुलिस ने मामला दर्ज कर आरोपियों की तलाश शुरू की। अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक सुभाषचंद मिश्रा के निर्देशन तथा पुलिस उपाधीक्षक डॉ. पूनम के सुपरविजन में थानाधिकारी रामविलास मीना के नेतृत्व में विशेष टीम गठित की गई। मुखबिर सूचना और तकनीकी साक्ष्यों के आधार पर टीम ने लगातार दबिश दी। गिरफ्तारी से बचने के लिए आरोपी अपने पैतृक घरों में न रहकर रिश्तेदारों के यहां ठिकाने बदल-बदलकर छिप रहे थे, लेकिन पुलिस ने लगातार पीछा कर तीनों को गिरफ्तार कर लिया। फिलहाल आरोपियों से पूछताछ की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 17:17:17 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा पुलिस की  बड़ी कार्रवाई : 14 किलो अफीम डोडा के साथ तस्कर गिरफ्तार, एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज</title>
                                    <description><![CDATA[झालावाड़ और मध्य प्रदेश से पंजाब ले जाई जा रही थी मादक पदार्थ की खेप।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-police-action--smuggler-arrested-with-14-kg-of-opium-husk--case-registered-under-the-ndps-act/article-161323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर पुलिस ने ऑपरेशन गरुड़ व्यूह फेज-2 के तहत बड़ी कार्रवाई करते हुए 14 किलोग्राम अवैध अफीम डोडा के साथ एक तस्कर को गिरफ्तार किया है। आरोपी मध्य प्रदेश और झालावाड़ क्षेत्र से मादक पदार्थ की खेप लेकर पंजाब जा रहा था, जिसे किशोरपुरा थाना पुलिस ने दबोच लिया।</p>
<p>पुलिस अधीक्षक तेजस्वनी गौतम ने बताया कि अवैध हथियारों एवं मादक पदार्थों की रोकथाम तथा अपराधियों की धरपकड़ के लिए चलाए जा रहे विशेष अभियान ऑपरेशन गरुड़ व्यूह के तहत किशोरपुरा थाना पुलिस की टीम ने एसआई दुर्गाशंकर के नेतृत्व में गश्त के दौरान कार्रवाई की। इस दौरान आरोपी सुखमेन्दर सिंह (22) पुत्र चमकौर सिंह, निवासी ग्राम चक फतेह सिंह वाला, थाना नथाना, जिला भठिंडा (पंजाब) को गिरफ्तार किया गया। तलाशी लेने पर आरोपी के कब्जे से 14 किलोग्राम अवैध अफीम डोडा बरामद किया गया। प्रारंभिक पूछताछ में सामने आया कि आरोपी यह खेप झालावाड़ और मध्य प्रदेश क्षेत्र से लेकर पंजाब जा रहा था। पुलिस ने आरोपी के विरुद्ध एनडीपीएस एक्ट की धारा 8/15 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। प्रकरण की जांच दादाबाड़ी थाना प्रभारी बलदेवराम को सौंपी गई है। पुलिस अब यह पता लगाने में जुटी है कि मादक पदार्थ की खेप किससे खरीदी गई थी और इसे किन लोगों तक पहुंचाया जाना था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 16:32:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा के सरकारी महाविद्यालयों में न मैदान, न पीटीआई; कैसे चमकेंगे कोटा के खिलाड़ी ?</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशिक्षक उपलब्ध कराए कॉलेज प्रशासन।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/no-grounds--no-ptis-in-kota-s-government-colleges--how-will-kota-s-athletes-shine/article-161297"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कब तक बोझ संभाला जाए, द्वंद कहां तक पाला जाए,युद्ध कहां तक टाला जाए, तू भी है राणा का वंशज , फैंक जहां तक भाला जाए। कवि की यह लाइनें कोटा के खिलाड़ियों पर पूरी तरह लागू होती हैं। नेशनल लेवल तक छात्र-छात्राओं को प्रतिभा दिखाने का मौका मिलता भी है तो खेल मैदान, प्रशिक्षक,सुविधाओं का अभाव उन्हें पीछे धकेल देता है। छात्र गेम्स की बारीकियां तो दूर सही तरीका भी नहीं सीख पाते। ऐसे में खिलाड़ी कैसे राज्य व नेशनल लेवल प्रतियोगिता के लिए तैयार होंगे। कोटा विश्वविद्यालय की ओर से हर साल अंतर महाविद्यालय व विश्वविद्यालय प्रातियोगिताओं का आयोजन किया जाता है। इसके लिए विश्वविद्यालय द्वारा अगस्त माह में स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी किया जाता है। लेकिन, हर साल कॉलेज विद्यार्थियों को स्पोर्ट्स ग्राउंड व प्रशिक्षक की कमी से जूझना पड़ता है।</p>
<p><strong>स्पोर्ट्स कैलेंडर से पहले खेल सुविधाएं दें</strong><br />राजकीय महाविद्यालय कोटा के छात्रों का कहना है कि कोटा विश्वविद्यालय द्वारा स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी करने से पहले कॉलेज प्रशासन को खेल सुविधाएं उपलब्ध करवानी चाहिए। मैदान में घास उगी हुई है और कई स्थानों पर पानी भरा होने से नियमित अभ्यास प्रभावित हो रहा है। कॉलेज प्रशासन को मैदान की सफाई, मरम्मत, जल निकासी और स्थायी पीटीआई की व्यवस्था सुनिश्चित करनी चाहिए ताकि खिलाड़ी विश्वविद्यालय एवं राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताओं की बेहतर तैयारी कर महाविद्यालय का नाम रोशन कर सकें।</p>
<p><strong>न तो पीटीआई है और न ही सामग्री</strong><br />कोटा यूनिवर्सिटी का स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी होने वाला है, लेकिन राजकीय महाविद्यालय कोटा में खिलाड़ियों के लिए बुनियादी सुविधाओं का अभाव है। हमारे पास न तो पीटीआई है और न ही सामग्री। ऐसी स्थिति में खिलाड़ियों को तैयारी करने में काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। कॉलेज प्रशासन को व्यवस्थाओं में सुधार करना चाहिए।<br /><strong>-चित्रांक्षा कंवर, छात्रा राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>कॉलेज में नियमित शारीरिक शिक्षक नहीं है। हर साल अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। जब गेम्स आते हैं तो कॉलेज प्रशासन संविदा पर तीन से चार माह के लिए पीटीआई लगाते हैं और प्रतियोगिता की समाप्ती के बाद उन्हें हटा देते हैं। सालभर प्रशिक्षक नहीं होते। ऐसे में खिलाड़ियों की नियमित प्रेक्टिस नहीं हो पाती।<br /><strong>-आशीष मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>राजकीय महाविद्यालय कोटा के मैदान में बड़ी-बड़ी घास उगी हुई है, जिससे खिलाड़ियों को अभ्यास में परेशानी होती है। मैदान की तत्काल सफाई और आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराई जानी चाहिए।<br /><strong>-हेमंत मीणा, छात्र राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>राजकीय कला महाविद्यालय कोटा में पिछले कई सालों से शारीरिक शिक्षक का पद खाली पड़ा है। वहीं, कैम्पस में खेल मैदान भी नहीं है। लेकिन, पास में ही बरसों पुराना स्टेडियम है, जो केडीए के अधीन है। वर्तमान में उसमें जंगल उगा हुआ है। इसका जिर्णोद्धार के लिए केडीए को कई बार पत्र लिख महाविद्यालय को सौंपने की मांग की है लेकिन अब तक कोई जवाब नहीं आया। न तो गेम्स सिखाने वाला है और न ही खेलने के लिए मैदान है। खिलाड़ी प्रतियोगिता की तैयारी नहीं कर पाते।<br /><strong>-रिद्धम शर्मा, प्रदेश सचिव एनएसयूआई, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />सरकार हर जगह खेल मैदान व पीटीआई उपलब्ध करवाने का प्रयास कर रही है। वैसे भी आरपीएससी के तहत शारीरिक शिक्षकों की भर्ती अंतिम चरण में है। जल्द ही सरकार के स्तर पर पीटीआई की महाविद्यालयों में पोस्टिंग हो सकेगी।<br /><strong>-प्रो. विजय पंचौली, क्षेत्रिय सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>
<p>कोटा विश्वविद्यालय द्वारा अगस्त के प्रथम सप्ताह में स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी कर दिया जाएगा। जिसके तहत अंतर महाविद्यालय प्रतियोगिता का आगाज अगस्त के आखिरी सप्ताह से हो जाएगा। प्रतियोगिताएं जनवरी माह तक जारी रहेंगी। इनमें से चयनित छात्रों की टीमें अखिल भारतीय व पश्चिम क्षेत्र अंतर विश्वविद्यालय खेलों में भाग लेंगे। यह प्रतियोगिताएं देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों द्वारा आयोजित की जाती है।<br /><strong>- डॉ. विजय सिंह, सचिव स्पोर्ट्स बोर्ड एवं निदेशक शारीरिक शिक्षा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 14:36:29 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : 10 महीने बाद एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी में गूंजा 'पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम', पूछताछ केंद्र पर भीड़ घटी</title>
                                    <description><![CDATA[खबर के प्रकाशित होने के बाद अस्पताल प्रशासन ने सुधारा सिस्टम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---public-announcement-system--operational-again-in-mbs-hospital-s-new-opd-after-10-months--congestion-at-the-inquiry-counter-reduced/article-161274"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(1)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी में पिछले 10 महीने से बंद पड़ा 'पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम' आखिरकार फिर से चालू हो गया है। सिस्टम शुरू होने से अब अस्पताल आने वाले हजारों मरीजों और उनके परिजनों सहित ड्यूटी पर तैनात सुरक्षाकर्मियों को भी राहत मिल रही है। पहले जहां हर नये आगन्तुकों को अस्पताल के काउन्टरों की जानकारी लेने के लिए पूछताछ केन्द्र पर बैठे व्यक्ति के सामने कतार में लगना पडता था। वही अब लोगों को सामान्य जानकारीयांं यहां से प्रसारित होने लगी है।</p>
<p><strong>मेन हाल में भीड़ न लगाए,जेब कतरों से सावधान</strong><br />भीड़ में अपने कीमती सामान पर्स व मोबाइल का ध्यान रखें, प्रवेश हॉल में बेवजह भीड़ न लगाए जैसी उद्घोषणाएं अब यहां से शुरू हो गई है। ऐसे में अस्पताल में आने वाले प्रत्येक व्यक्ति को सतर्क करने के साथ-साथ भीड़ नियंत्रण में भी अहम भूमिका निभा रही हैं।</p>
<p><strong>सिस्टम बंद होने से मरीजों को हो रही थी भारी परेशानी</strong><br />पिछले 10 महीने से पब्लिक अनाउंसमेंट सिस्टम बंद रहने के कारण दूर-दराज से आने वाले और पहली बार पहुंचे मरीजों को भारी परेशानी झेलनी पड़ रही थी। पर्ची कटवाने से लेकर डॉक्टर का कमरा ढुंढने, एक्स-रे, जांच लैब की जानकारी के लिए भी परेशानी होती थी। साथ ही सामान्य जानकारी के लिए भी हर व्यक्ति को पूछताछ कक्ष के बाहर अपनी बारी का इंतजार करना पड़ता था।</p>
<p><strong>सिस्टम चालू होने से मिला यह फायदा</strong><br />जानकारी के अभाव व अस्पताल में होने वाले इलाज के विभिन्न चरणों के कारण मरीजों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ता था। आम तौर पर डॉ. की उपलब्धता व कमरा नम्बर, विभिन्न काउन्टरों की जानकारी के अलावा ओपीडी के बाहर होने वाली जांचों व दवा की उपलब्धता के लिए भी लोग कई बार एक दुसरे से पूछते रहते थे। ऐसे में इससे प्रसारित सामान्य जानकारीयों से काफी हद तक लोगों को लाभ मिलने लगा है।</p>
<p><strong>खबर का हुआ असर</strong><br />अस्पताल में बंद पडे उद्घोषणा केन्द्र के माईक व आमजन को हो रही परेशानी के विषय पर 10 जुलाई को ''पूछते पूछते गंगा जी जाने जैसे हालात'' शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी जिसके बाद अस्पताल प्रशासन ने सोमवार को इसे ठीक करवाया गया है।<br />पहले यहां हर छोटी जानकारी के लिए पूछताछ केन्द्र पर जाना पडता था। आज अनाउसमेंट सेवा बहाल होने से अब काउंटरों पर सही कतार जुटाना बेहद आसान हो गया है। साथ ही, लाउडस्पीकर के माध्यम से लगातार प्रसारित हो रही सामान्य जानकारियों और पूछताछ के कारण मरीजों को बार-बार पूछताछ केंद्र पर भटकना नहीं पड़ रहा है।<br /><strong>-दीपक परिजन नान्ता</strong></p>
<p><strong>प्रशासन का पक्ष</strong><br />मामला जानकारी में आने के तुरंत बाद संबंधित को निर्देशित कर सिस्टम को ठीक करवा दिया गया है। यह अब पूरी तरह कार्य कर रहा है। इससे अस्पताल आने वाले हर मरीज को सही व स्पष्ट जानकारी मिल पा रही है। पूछताछ केंद्र के अलावा अन्य आवश्यक जानकारी देने में भी यह बहुत उपयोगी है।<br /><strong>— डॉ. राकेश सिंह, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Jul 2026 11:57:12 +0530</pubDate>
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                <title>सवा करोड़ खर्च, फिर भी अधर झूल में तैर रहा  स्विमिंग पूल</title>
                                    <description><![CDATA[ 5 से 8 फीट गहराई से बच्चों और नए तैराकों की सुरक्षा पर चिंता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/%E2%82%B91-25-crore-spent--yet-the-swimming-pool-project-remains-in-limbo/article-161184"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पुलिस लाइन में जवानों और उनके परिवारों के लिए वर्ष 2019 में शुरू की गई आधुनिक स्विमिंग पूल परियोजना करीब सात वर्ष बाद भी शुरू नहीं हो सकी है। इस परियोजना पर अब तक लगभग सवा करोड़ रुपए खर्च किए जा चुके हैं, लेकिन सुविधा आज भी उपयोग के लिए उपलब्ध नहीं है। ऐसे में निर्माण की गुणवत्ता, तकनीकी मानकों और प्रशासनिक निगरानी पर सवाल खड़े हो रहे हैं। परियोजना के तहत 40 फीट चौड़ा और 82 फीट लंबा स्विमिंग पूल, चेंजिंग रूम, शॉवर रूम, टॉयलेट, बाउंड्री वॉल, सीसी रोड और फिल्ट्रेशन प्लांट का निर्माण कराया गया। बावजूद इसके पूल का संचालन शुरू नहीं हो सका। सबसे बड़ी आपत्ति इसकी गहराई को लेकर है। पूल की गहराई 5 से 8 फीट रखी गई है, जबकि विशेषज्ञों के अनुसार प्रशिक्षण के लिए शुरुआती हिस्सा कम गहराई वाला होना चाहिए, ताकि बच्चे और नए तैराक सुरक्षित अभ्यास कर सकें।</p>
<p><strong>पूर्व एसपी ने भी जताई थी आशंका</strong><br />राष्ट्रीय स्तर के तैराक प्रमोद यादव का कहना है कि प्रशिक्षण आधारित स्विमिंग पूल की गहराई सामान्यतः साढ़े तीन फीट से शुरू होकर छह फीट तक होनी चाहिए। तत्कालीन पुलिस अधीक्षक अमृता दुहन ने भी अधिकारियों को पूल में कम गहराई वाला भाग बनाने का सुझाव दिया था, लेकिन उनके तबादले के बाद मामला आगे नहीं बढ़ा।</p>
<p><strong>जवानों को सुविधा का इंतजार</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के निदेशक अभियांत्रिकी रविंद्र माथूर ने बताया कि पहले चरण में 77 लाख रुपए और दूसरे चरण में करीब 50 लाख रुपए की राशि से निर्माण कार्य कराया गया। हालांकि सवाल यह बना हुआ है कि करोड़ों रुपये खर्च होने के बावजूद जवानों और उनके परिवारों को अब तक इस सुविधा का लाभ क्यों नहीं मिल पाया। वहीं पुलिस लाइन में रहने वाले जवानों का कहना है कि नई बैरकों की अधिक आवश्यकता है, क्योंकि वर्तमान बैरकें जर्जर हो चुकी हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />पुलिस जवानों व उनके परिजनों के लिए करीब एक डेढ़ साल पूर्व पुलिस लाइन में स्विमिंग पूल का निर्माण कराया गया था, लेेकिन टक्निकल कमी के कारण शुरु नहीं किया जा सका है। स्विमिंग पूल एक तरफ गहरा ज्यादा है, जिससे छोटे बच्चों के स्नान करने में मुश्किल हाेगी तथा जानमाल की दृष्टि से भी उचित नहीं है। हमने नगर निगम को भी अबगत करवा दिया है। इस बारे में नगर निगम या फिर पीडब्ल्यूडी के अधिकारी बता पाएंगे।<br /><strong>- तेजस्विनी गौतम, कोटा सिटी एसपी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jul 2026 14:29:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>करोड़ों का नया बस स्टैंड, फिर भी यात्रियों का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[डीसीएम रोड स्थित रोडवेज बस स्टैंड में पूछताछ केंद्र और टिकट काउंटर पर ताला ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/a-multi-crore-new-bus-stand--yet-it-awaits-passengers/article-161097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(1)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।करोड़ों रुपए की लागत से अत्याधुनिक सुविधाओं के साथ तैयार किया गया डीसीएम रोड स्थित नया रोडवेज बस स्टैंड आज भी अपनी पहचान और यात्रीभार के लिए संघर्ष कर रहा है। भवन भव्य है, परिसर व्यवस्थित हैं और यात्रियों के लिए आवश्यक सुविधाएं भी उपलब्ध हैं, लेकिन इसके बावजूद यहां दिनभर सन्नाटा पसरा रहता है। दूसरी ओर पुराना बस स्टैंड बदहाल अवस्था में भी यात्रियों से गुलजार रहता है। यही कारण है कि रोडवेज की अधिकांश बसें नए बस स्टैंड से औपचारिक रूप से रवाना होने के बाद भी सवारियां भरने के लिए नयापुरा पहुंचती हैं। रोडवेज के कर्मचारियों का कहना है कि नया बस स्टैंड बनने के वर्षों बाद भी उसे पूरी तरह संचालन का केंद्र नहीं बनाया जा सका। इसका सबसे बड़ा कारण यात्रियों की सुविधा से अधिक यात्रीभार कम होने का डर माना जा रहा है। यदि पुराने बस स्टैंड को पूरी तरह बंद कर दिया गया तो बड़ी संख्या में यात्री रोडवेज के बजाय बीच रास्ते स्थित निजी बस संचालकों का रुख कर सकते हैं, जिससे रोडवेज को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ सकता है।</p>
<p><strong>पर्याप्त लोकल परिवहन उपलब्ध नहीं</strong><br />डीसीएम रोड स्थित नए बस स्टैंड पर पर्याप्त पार्किंग, बड़े प्लेटफॉर्म, प्रतीक्षालय और अन्य सुविधाएं मौजूद हैं, लेकिन यहां तक पहुंचने के लिए पर्याप्त लोकल परिवहन उपलब्ध नहीं है। यात्रियों को पर्सनल ऑटो या अन्य निजी साधनों का सहारा लेना पड़ता है, जिनका किराया अपेक्षाकृत अधिक होने के कारण लोग यहां आने से बचते हैं। इसके विपरीत नयापुरा बस स्टैंड शहर के मध्य में स्थित होने से हर क्षेत्र से आसानी से पहुंचा जा सकता है। यही वजह है कि यात्री स्वाभाविक रूप से पुराने बस स्टैंड को ही प्राथमिकता देते हैं और रोडवेज भी इस वास्तविकता को देखते हुए अपनी अधिकांश सेवाओं का केंद्र वहीं बनाए हुए है।</p>
<p><strong>योजना और व्यवस्था के बीच फंसा नया बस स्टैंड</strong><br />विशेषज्ञों का मानना है कि केवल भवन निर्माण से किसी बस स्टैंड को सफल नहीं बनाया जा सकता। इसके लिए बेहतर लोकल कनेक्टिविटी, सिटी बस सेवा, ई-रिक्शा और ऑटो की नियमित उपलब्धता, सभी बसों का अनिवार्य संचालन तथा यात्रियों को जागरूक करने जैसी व्यवस्थाएं भी जरूरी हैं। जब तक इन कमियों को दूर नहीं किया जाएगा, तब तक करोड़ों रुपए की लागत से बना यह आधुनिक बस स्टैंड अपनी पूरी क्षमता के अनुरूप उपयोग में नहीं आ सकेगा। फिलहाल स्थिति यही है कि नया बस स्टैंड सुविधाओं के बावजूद यात्रियों का इंतजार कर रहा है, जबकि नयापुरा बस स्टैंड आज भी कोटा रोडवेज की धड़कन बना हुआ है।</p>
<p><strong>108 बसों का संचालन, अधिकांश खाली होती है रवाना</strong><br />रोडवेज कंडक्टर बद्रीलाल राठौर ने बताया कि नए बस स्टैंड से प्रतिदिन करीब 108 बसों का संचालन होता है, लेकिन इनमें से अधिकांश बसें बिना यात्रियों के ही रवाना होती हैं। बसें सीधे नयापुरा बस स्टैंड पहुंचती हैं, जहां कुछ ही देर में यात्रियों से पूरी तरह भर जाती हैं। उनका कहना है कि यह स्थिति वर्षों से बनी हुई है। उन्होंने बताया कि नए बस स्टैंड का टिकट काउंटर भी बंद हो चुका है और अब टिकटों का वितरण भी नयापुरा बस स्टैंड से ही किया जा रहा है। यदि लंबी दूरी और विशेष रूप से रात्रिकालीन बसों का स्थायी ठहराव नए बस स्टैंड पर किया जाए तथा अन्य जिलों की रोडवेज बसों को भी यहां से संचालित किया जाए तो निश्चित रूप से यहां यात्रीभार बढ़ सकता है।</p>
<p><strong>व्यापारियों पर भी पड़ रहा असर</strong><br />नए बस स्टैंड पर संचालित कैंटीन की संचालक रेणु मेहरा ने बताया कि यहां यात्रियों की संख्या बेहद कम होने से व्यवसाय चलाना मुश्किल हो गया है। उनका कहना है कि दुकान का मासिक किराया 8 हजार रुपए है, लेकिन जितनी आमदनी होती है, उसका अधिकांश हिस्सा किराया और खर्चों में ही निकल जाता है। बचत के नाम पर कुछ भी नहीं बचता। उनका कहना है कि जब तक बसों का पूरा संचालन और यात्रियों की आवाजाही नए बस स्टैंड पर नहीं होगी, तब तक यहां कारोबार का भविष्य भी अंधकारमय रहेगा।</p>
<p>रोडवेज के मुख्य प्रबंधक अजय मीना से संजय नगर स्थित नए बस स्टैंड के मुद्दे पर पक्ष जानने के लिए दैनिक नवज्योति की ओर से कई बार फोन पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, लेकिन उन्होंने कॉल रिसीव नहीं की। इसके बाद उन्हें आधिकारिक रूप से संदेश भी भेजा गया, लेकिन उसका भी कोई जवाब प्राप्त नहीं हुआ।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:27:27 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शिक्षा विभाग : स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी फिर भी खिलाड़ियों के हाथ खाली</title>
                                    <description><![CDATA[दो साल से नहीं मिला खेल मद का बजट और सामग्री।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/education-department--sports-calendar-released--yet-players--hands-remain-empty/article-161095"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । राजस्थान माध्यमिक शिक्षा विभाग की ओर से सत्र 2026-27 के राज्य स्तरीय विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगिता का वार्षिक पंचांग जारी कर दिया है। लेकिन, स्कूलों को पिछले दो साल से स्पोर्ट्स एक्यूपमेंट खरीदने के लिए बजट तक नहीं मिला। बिना बजट व खेल सामग्री के प्रतिभाओं को राज्य स्तरीय टूर्नामेंट के लिए तैयार करना शारीरिक शिक्षकों के लिए मुश्किल हो रहा है। हालांकि, शिक्षकों को भामाशाहों के सहयोग से खेल सामग्री का जुगाड़ करना पड़ता है। इधर, शिक्षाविदें का कहना है, अभी तक स्कूलों को खेल मद की राशि और आवश्यक खेल सामग्री तक उपलब्ध नहीं हुई, जिसके अभाव में विद्यार्थियों को अभ्यास करने में काफी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>जिला व राज्य स्तरीय प्रतियोगिता का शेड्यूल</strong><br />स्कूल स्तर के 17 व 19 वर्ष के छात्र-छात्रा वर्ग के 33 प्रकार के गेम्स निर्धारित किए गए हैं। जिन्हें आयोजित कराने के लिए चार समूहों में विभाजित किया गया है। इस बार स्कूल स्तर की खेल प्रतियोगिताएं 25 अगस्त से पहले सम्पन्न करवानी होंगी। इसके बाद जिला स्तर की सभी प्रतियोगिताएं 29 अगस्त से 17 अक्टूबर तक होंगी। राज्य स्तर की प्रतियोगिताएं 9 सितंबर से 29 अक्टूबर तक करवाई जाएंगी।</p>
<p><strong>भामाशाहों के भरोसे स्कूलों में अभ्यास</strong><br />सरकारी विद्यालयों में फुटबॉल, वॉलीबॉल, क्रिकेट, एथलेटिक्स सहित विभिन्न खेलों की आवश्यक सामग्री का अभाव बना है। कई जगह खिलाड़ी सीमित संसाधनों के साथ अभ्यास कर रहे हैं, जबकि कई विद्यालयों में शारीरिक शिक्षकों को ग्रामीणों, भामाशाहों और स्थानीय सहयोग से खेल सामग्री जुटाकर खिलाड़ियों तैयार करना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>गत वर्ष प्रतियोगिताएं खत्म होने के बाद मिला था किट</strong><br />शिक्षाविद् मोहर सिंह का कहना है कि वर्ष 2025 में विद्यालयों को खेल सामग्री की किट मार्च माह के आसपास उपलब्ध कराई गई थी, जबकि तब तक राष्ट्रीय स्तर तक की अधिकांश प्रतियोगिताएं समाप्त हो चुकी थीं। सामग्री की गुणवत्ता को लेकर भी सवाल उठे थे। इसके बाद विभाग ने विद्यालयों से सामग्री को संतोषजनक बताते हुए रिपोर्ट तो मंगवा ली, लेकिन उसके बाद से न तो नई खेल सामग्री उपलब्ध कराई गई और न ही खेल मद की राशि जारी हुई।</p>
<p><strong>दो वर्षों से नहीं मिला रहा नियमित बजट</strong><br />शरीरिक शिक्षकों के अनुसार, पिछले दो वर्षों से सरकारी विद्यालयों को न तो नियमित खेल मद की राशि मिल रही है और न ही आवश्यकता के अनुरूप खेल सामग्री उपलब्ध हो रही है। इससे पहले उच्च माध्यमिक विद्यालयों को 25 हजार रुपए, उच्च प्राथमिक विद्यालयों को 10 हजार रुपए तथा प्राथमिक विद्यालयों को 5 हजार रुपए खेल गतिविधियों के लिए दिए जाते थे। वर्तमान में विद्यालयों के पास अन्य मद से भी खेल सामग्री खरीदने के लिए पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है।</p>
<p><strong>इस बार भामाशाहों से भी सहयोग मांगना मुश्किल</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर कुछ स्कूलों के पीटीआई ने बताया कि हॉकी जैसे खेलों की सामग्री काफी महंगी होती है। बजट नहीं मिलने से टीम तैयार करना कठिन हो रहा है। गत वर्ष भी बजट नहीं मिला। अब तक भामाशाहों और व्यक्तिगत परिचितों के सहयोग से काम चलाया जाता था, लेकिन इस बार कमजोर मानसून के कारण उनसे भी सहयोग की उम्मीद कम है। ऐसे में सरकार को जल्द खेल मद का बजट जारी करना चाहिए।</p>
<p><strong>समय पर बजट उपलब्ध कराना शिक्षा परिषद की जिम्मेदारी फोटो है दोनों में</strong><br />राज्य के सरकारी स्कूलों में पढ़ रहे विद्यार्थियों को शारीरिक शिक्षक उनकी रुचि के खेलो में तैयार करते है लेकिन दूसरी और इन खिलाड़ियों के खेलों की सामग्री के लिए राज्य स्कूल शिक्षा परिषद की ओर से पिछले दो सत्रों से बजट ही नहीं मिल रहा। ऐसे में खिलाड़ी कैसे तैयार होंगे। शिक्षा मंत्री मामले को संज्ञान में लेते हुए दो सत्रों की बजट राशि इस माह जारी करवाई जाएं ताकि, खेल सामग्री समय पर खरीदी जा सके, जिसका आगामी विद्यालयी खेलकूद प्रतियोगताओं में उपयोग हो सकें।<br /><strong>-मोहर सिंह सलावद, प्रदेशाध्यक्ष, शिक्षक संघ रेसट</strong></p>
<p>राजकीय विद्यालयों को पिछले दो साल से स्पोट्स मद में बजट नहीं दिया जा रहा। जबकि, खेल बजट की आवश्यकता अब पहले से कहीं अधिक है। क्योंकि, नई शिक्षा नीति विद्यार्थियों के सर्वांगीण विकास पर जोर देती है, लेकिन कई स्कूलों में खेल सामग्री, मैदान और आवश्यक संसाधनों का अभाव है। प्रत्येक विद्यालय को पर्याप्त और नियमित स्पोर्ट्स बजट उपलब्ध कराया जाए, तो ग्रामीण क्षेत्रों की छिपी हुई खेल प्रतिभाओं को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने का अवसर मिलेगा। सरकार को पिछले व वर्तमान सत्र का बजट जल्द जारी करना चाहिए।<br /><strong>-राजेंद्र सिंह, जिलाध्यक्ष शिक्षक संघ रेसटा</strong></p>
<p>पिछले सत्र में बजट दिया है, जिससे खेलकूद उपलब्ध कराई गई है। स्पोर्ट्स एक्यूपमेंट यानी खेल सामग्री की कमी नहीं है। रही बात नए सत्र के बजट की तो वह जल्द ही स्कूलों को मिलेगा।<br /><strong>-सतीश कुमार गुप्ता, विशेषाधिकारी शिक्षा मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:26:14 +0530</pubDate>
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                <title>हर बार आग लगने के बाद जांच व सर्वे, फिर भी हो रही घटनाएं</title>
                                    <description><![CDATA[चार मंजिला कमर्शियल बिल्डिंग में नहीं है आग से सुरक्षा के इंतजाम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-repeated-surveys-and-inspections-following-fire-incidents--such-events-continue-to-occur/article-161076"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में गर्मी के सीजन में ही नहीं इस बार तो बरसात व सर्दी के सीजन तक में आग लगने की कई घटनाएं हुई। हर बार बड़ी घटना होने के बाद फायर अनुभाग की ओर से सर्वे व जांच कर नोटिस तो दिए जा रहे हैं। उसके बाद भी आग लगने की घटनाएं हो रही है। गुमानपुरा थाना क्षेत्र स्थित घोड़ा चौराहे पर शनिवार को जिस चार मंजिला कमर्शियल बिल्डि़ंग में आग लगी। उस में जूतों के शोरूम, ऑफिस, बैंक व आवासीय मकान तक हैं। उन शोरूम व गोदाम में बड़ी मात्रा में माल भरा हुआ है। साथ ही ऑफिस व बैंक समेत अधिकतर शोरूम में एसी लगे हुए हैं। जिनमें शॉर्ट सर्किट से आग लगने का खतरा हमेशा बना हुआ है। उसके बावजूद भी इस चार मंजिला बिल्डि़ंग में आग से सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं है।यही कारण है कि एक छोटी सी चिंगारी ने इतना विकराल रूप ले लिया जिससे लाखों रुपए का सामान तो जलकर खाक हुआ ही बिल्डिग़ को भी नुकसान हुआ है। वहीं गनीमत रही कि इस बिल्डिंग में रहने वाले परिवार की महिलाओं व बच्चों को समय रहते सुरक्षित बाहर निकाल लिया वरना बड़ा हादसा हो सकता था।</p>
<p><strong>बंद ऑफिस में हुआ था शॉर्ट सर्किट</strong><br />बिल्डिंग के दुकानदारों का कहना है कि यहां पहली मंजिल पर एक ऑफिस संचालित होता है। लेकिन वह कभी -कभी ही खुलता है। यह ऑफिस पिछले कई दिन से बंद है लेकिन इसकी लाइट चालू थी। इसी ऑफिस में शॉर्ट सर्किट से चिंगारी निकली। जिससे वहां रखे सोफे व अन्य सामान ने आग पकड़ी और वह तेजी से फेली। हालांकि दुकानदारों का कहना है कि आग लगने पर उन्होंने अपनी दुकानों की लाइटें बंद कर दी थी। लेकिन बिल्डिग की लाइट बंद नहीं होने से आग लगने के बाद काफी देर तक बिजली एसी में शॉर्ट सर्किट के धमाके होते रहे। वहीं नगर निगम के सीएफओ राकेश व्यास का कहना है कि उनकी दमकलें आने पर सबसे पहले लाइट बंद करवाई। उसके बाद बिल्डिग़ में लोगों के फंसे होने की जानकारी करने के बाद तुरंग आग बुझाना शुरु कर दिया था।</p>
<p><strong>मॉल में आग के बाद किया था सर्वे</strong><br />गौरतलब है कि विज्ञान नगर थाना क्षेत्र स्थित सिटी मॉल के एक शोरूम में गत दिनों आग लगने के बाद नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से शहर में सभी मॉल और कमर्शियल बिल्डिंग में आग से सुरक्षा के इंतजामों की जांच व सर्वे किया गया था। करीब आधे से भी अधिक बिल्डिंग में सुरक्षा के इंतजाम नहीं थे। साथ ही प्रवेश व निकास की भी अलग-अलग व्यवस्था नहीं थी। इस पर निगम की ओर से ऐसे सभी बिल्डिग सचालकों व प्रबंधकों को नोटिस देकर सुधार के निर्देश दिए थे। लेकिन उस सर्वे में इस बिल्डिंग को शामिल नहीं किया गया था।</p>
<p><strong>बिल्डिंग में नहीं हैं आग से सुरक्षा के इंतजाम</strong><br />नगर निगम कोटा के सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि घोड़ा चौराहा स्थित जिस चार मंजिला कमर्शियल बिल्डिग़ में आग लगी वहां आग से सुरक्षा के इंतजाम तक नहीं है। यदि वहां सिस्टम होते तो दमकलों के पहुंचने से पहले कुछ हद तक आग को बढऩे से रोका जा सकता था। व्यास ने बताया कि कम्यूनिकेशन गेप के चलते समय पर सूचना नहीं मिली। सूचना मिलते ही तुरंत दमकलें पहुंच गई थी। शुरु में विरोध करने वाले दुकानदारों ने आग बुझाने के दौरान किए गए फायरमैन की सराहना की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 14:25:04 +0530</pubDate>
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                <title>एआई एजेंट: क्या ग्रामीण शिक्षा में ला सकते हैं नई क्रांति?</title>
                                    <description><![CDATA[ शिक्षकों की कमी के बीच नई उम्मीद, मानवीय मार्गदर्शन रहेगा सबसे अहम।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ai-agents--can-they-spark-a-revolution-in-rural-education/article-161075"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नई शिक्षा नीति और डिजिटल तकनीक पर लगातार जोर दिया जा रहा है, लेकिन आज भी हजारों सरकारी स्कूल और कॉलेज शिक्षकों की कमी से जूझ रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में यह चुनौती अधिक गंभीर है, जहाँ संसाधनों और गुणवत्तापूर्ण अध्ययन सामग्री का अभाव विद्यार्थियों की पढ़ाई को प्रभावित करता है। ऐसे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) आधारित एजेंट शिक्षा के क्षेत्र में एक नई संभावना बनकर उभर रहे हैं। हालांकि एआई शिक्षक का विकल्प नहीं, बल्कि पढ़ाई का प्रभावी शैक्षणिक सहायक बन सकता है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि सरकार पाठ्यक्रम आधारित एआई एजेंट विकसित कर विद्यार्थियों तक पहुँचाए, तो वे घर बैठे विषयों को समझने, अभ्यास करने, शंकाओं का समाधान पाने और परीक्षा की तैयारी में मदद कर सकते हैं। इससे विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा तक बेहतर पहुँच मिल सकती है।</p>
<p><strong>शिक्षक की भूमिका रहेगी सबसे अहम</strong><br />एआई एजेंट विद्यार्थियों को अभ्यास, पुनरावृत्ति और तकनीकी दक्षता विकसित करने में मदद कर सकते हैं, लेकिन नैतिक शिक्षा, व्यक्तित्व विकास और मानवीय मार्गदर्शन के लिए शिक्षक की भूमिका हमेशा केंद्रीय रहेगी। इसलिए एआई एजेंट को शिक्षक का प्रतिस्थापन नहीं, बल्कि एक मजबूत सपोर्ट सिस्टम के रूप में देखा जाना चाहिए।</p>
<p><strong>सोशल मीडिया से पढ़ाई की ओर</strong><br />यदि मोबाइल में पाठ्यक्रम आधारित एआई एजेंट उपलब्ध हों, तो विद्यार्थियों का समय सोशल मीडिया के बजाय पढ़ाई, होमवर्क और परीक्षा की तैयारी में अधिक उपयोग हो सकता है। सही नीति और गुणवत्तापूर्ण सामग्री के साथ एआई एजेंट ग्रामीण क्षेत्रों के लाखों विद्यार्थियों तक बेहतर शिक्षा पहुँचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। इसी विषय पर दैनिक नवज्योति ने शिक्षा विशेषज्ञों की राय जानी।</p>
<p>शिक्षक को कोई भी रिप्लेस नहीं कर सकता। स्टडी मटेरियल आॅनलाइन यूट्यूब पर उपलब्ध कराया हुआ है, जिसे कहीं का भी विद्यार्थी पढ़ सकता है। यदि सरकार एआई एजेंट जैसी तकनीक को शिक्षा के क्षेत्र में लागू करती है, तो यह एक बहुत अच्छी पहल होगी।<br /><strong>-नवीन मित्तल, क्षेत्रीय सहायक निदेशक कॉलेज आयुक्तालय कोटा</strong></p>
<p> ग्रामीण क्षेत्रों में, जहां शिक्षकों की कमी एक बड़ी चुनौती है, वहां एआई एजेंट शिक्षा के क्षेत्र में प्रभावी सहायक और समाधान बन सकते हैं। एआई एजेंट छात्रों के प्रश्नों का सरल भाषा में उत्तर देकर उन्हें इस प्रकार समझा सकता है, मानो कोई शिक्षक स्वयं पढ़ा रहा हो।  यदि पाठ्यक्रम के अनुरूप एआई शिक्षा ऐप विकसित किया जाए, जिसकी सामग्री विशेषज्ञों द्वारा तैयार की जाए, तो छात्रों को पाठ्यपुस्तक आधारित अध्ययन सामग्री हर समय उपलब्ध हो सकेगी। ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा की गुणवत्ता बढ़ाने और समान शैक्षिक अवसर उपलब्ध कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।<br /><strong>- प्रो. हरीश शर्मा,कंप्यूटर इंजीनियरिंग विभाग, आरटीयू, कोटा</strong></p>
<p>क्लासरूम टीचिंग का कोई विकल्प नहीं हो सकता और इसे कभी बंद नहीं किया जाना चाहिए। शिक्षक केवल पाठ्यक्रम ही नहीं पढ़ाते, बल्कि विद्यार्थियों को जीवन से जुड़े अनेक महत्वपूर्ण मूल्य भी सिखाते हैं। तकनीक के इस दौर में एआई एजेंट एक प्रभावी सहायक की भूमिका निभा सकते हैं। मोबाइल के माध्यम से विद्यार्थी कभी भी मार्गदर्शन प्राप्त कर सकते हैं। विशेषकर उन क्षेत्रों में, जहाँ किसी कारणवश नियमित कक्षाएं या शिक्षक उपलब्ध नहीं हैं।  इससे विशेषकर आर्थिक रूप से कमजोर और ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यार्थियों को लाभ मिलेगा।<br /><strong>-प्रो.सीमा चौहान, प्रिंसिपल राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p>यह एआई का दौर है। इसका प्रभाव बच्चों की पढ़ाई पर भी पड़ेगा। सिलेबस कवर करने, अभ्यास करने और तकनीकी एक्सपोजर देने में एआई व अन्य डिजिटल तकनीकें निश्चित रूप से मददगार हैं। हालांकि, स्कूल में शिक्षक की कमी केवल डिवाइस के माध्यम से पूरी नहीं की जा सकती। शिक्षक का विकल्प तकनीक पूरी तरह नहीं बन सकती। यदि सरकार एआई आधारित ऐसी कोई सुविधा विकसित कर बच्चों को उपलब्ध कराती है, तो इसका निश्चित रूप से उन्हें लाभ मिलेगा। <br /><strong>- आर.एस. तंवर, प्रिंसिपल, पीएमश्री केंद्रीय विद्यालय क्रमांक-1, कोटा</strong></p>
<p>हर छात्र की सीखने की क्षमता अलग होती है। एआई एजेंट विद्यार्थियों को उनकी जरूरत के अनुसार व्यक्तिगत रूप से सीखने में मदद कर सकते हैं। किसी भी विषय को बार-बार समझाकर कमजोर छात्रों का आत्मविश्वास बढ़ा सकते हैं। शिक्षक के लिए प्रत्येक छात्र को व्यक्तिगत रूप से पर्याप्त समय देना हमेशा संभव नहीं होता,, जबकि एआई एजेंट 24 घंटे उपलब्ध रह सकता है। शिक्षक और एआई का संतुलित उपयोग शिक्षा को अधिक प्रभावी, व्यक्तिगत और गुणवत्तापूर्ण बना सकता है।<br /><strong>- सावित्री गुप्ता, निदेशक, शिवज्योति बाल विद्या निकेतन सीनियर सेकेंडरी स्कूल, गुमानपुरा</strong></p>
<p>कई बच्चे ऐसे होते हैं जिनमें पढ़ाई को लेकर उत्सुकता तो होती है, लेकिन संसाधनों की कमी के कारण उन्हें उचित मार्गदर्शन नहीं मिल पाता। ऐसे विद्यार्थियों के लिए एआई एजेंट किसी वरदान से कम नहीं होगा।  ग्रामीण क्षेत्रों में न तो ऐसी सुविधाएं आसानी से उपलब्ध होती हैं और न ही हर परिवार ट्यूशन का खर्च उठा सकता है। ऐसे में एआई एजेंट विद्यार्थियों की शंकाओं का समाधान कर उन्हें सीखने और विषयों को बेहतर ढंग से समझने में मदद करेगा।<br /><strong>- डॉ रानू अग्रवाल, फाउंडर एवं डायरेक्टर- पैरेंटिंग अलाय प्रिस्कूल, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:33:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का : टूटी नालियों व खुले चैंबरों की मरम्मत का काम शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[प्राथमिकता के आधार पर अति-खतरनाक व इमरजेंसी पॉइंट्स पर कार्य शुरू।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--repair-work-on-broken-drains-and-open-manholes-begins/article-161057"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के निचले और घने रिहायशी इलाकों में आमजन व राहगीरों के लिए मुसीबत का सबब बनी टूटी नालियां, खुले चैंबर और खराब सड़कें की अब नगर निगम ने सुध लेना शुरू कर दिया है। गोवर्धनपुरा क्षेत्र में क्रॉस रोड टूटी नालियों के रिपेयरिंग का काम शुुरू होने के कारण स्थानीय निवासीयों और वाहन चालकों कों आए दिन हो रही परेशानी व दुर्घटनाओं से राहत मिलेगी। दरअसल क्षेत्र में रास्ते पर नालियों के ढक्कन पूरी तरह टूट जाने से वाहन गिरकर पलट रहे थे। स्थानीय निवासियों द्वारा कई बार अवगत कराए जाने के बावजूद स्थानीय जमादार से लेकर निगम अधिकारी तक लगातार बजट न होने का रटा-रटाया जवाब देकर पल्ला झाड़ लेते थे।</p>
<p><strong>बजट आने के बाद होंगे बड़े काम</strong><br />एईएन विनोद मेहरा ने बताया कि मेन्टिनेंस के लिए लोकल स्तर पर संवेदक को एडवांस काम करने के लिए तैयार किया गया है, क्षेत्र में काम कराने के लिए एस्टीमेट बनाकर दिया गया है। जैसे ही पैसा आएगा काम शुरू हो जाएगा। वही नगर निगम की एक्सईएन शिल्पा चित्तौड़ा ने बताया कि फिलहाल आमजन की परेशानियों को देखते हुए निगम की टीम ने अति-खतरनाक और इमरजेंसी पॉइंट्स को चिह्नित कर प्राथमिकता के आधार पर काम शुरू करवा दिया है।</p>
<p><strong>कई बार दुर्घटनाग्रस्त हो चुके थे वाहन</strong><br />गोरधनपुरा क्षेत्र में स्टील ब्रिज नहर से चौथ माता मंदिर मार्ग की दुर्दशा इन टूटी नालियों के कारण 14 जुलाई को भी एक ई-रिक्शा नाली पर से गुजरते समय पलट गया था, जिसके नीचे दबने से चालक बोरखेड़ा निवासी रफीक के पैर में गंभीर चोट आई थी। इसके अलावा लोडिंग से सामान गिरने और कारें फंसने जैसी घटनाएं भी लगातार सामने आ रही थीं। कोटड़ी, गोवर्धनपुरा, छावनी, रामचंद्रपुरा और दाल मिल रोड सहित स्टील ब्रिज नहर से चौथ माता मंदिर मार्ग की दुर्दशा को प्रमुखता से सामने रखा था। क्षेत्र के स्थानीय निवासी नरेश सुमन ने चिंता जताते हुए बताया था कि स्टील ब्रिज नहर से चौथ माता मंदिर वाले रास्ते पर तीन-चार क्रॉस रोड नालियों के ढकान टुटे पड़े थे। इससे वाहन चालक गिरकर घायल हो रहे थे तथा रात के अंधेरे में बच्चों के गिरने व चोटिल होने का खतरा बना हुआ था।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong><br />जनहित से जुड़े इस गंभीर मुद्दे को 'खुले चेम्बर,टुटी नालियां,खतरनाक सडकें' शीर्षक में 'बजट या जानलेवा, जनता के जान-माल के काम तो होने ही चाहिए' उप शीर्षक में प्रमुखता से उजागर किया था। खबर के प्रकाशित होने के बाद नगर निगम प्रशासन ने दुर्घटना संभावित क्षेत्रों में मरम्मत कार्य शुरू करवा दिया। नगर निगम द्वारा कार्य शुरू करवाए जाने पर स्थानीय निवासी नरेश सुमन, गोलू प्रजापति और बालचंद मेहरा ने 'दैनिक नवज्योति' का आभार व्यक्त किया।</p>
<p>स्थानीय निवासियों को सुगम व सुरक्षित रास्ते के लिए सभी आवश्यक स्थानों पर रिपेयरिंग करवाई जा रही है। अभी हमारे द्वारा ज्यादा जरूरी स्थानों को चिन्हित करवाकर काम शुरू करवाया गया है। आगे बजट स्वीकृत होने पर अन्य शेष विकास व मरम्मत कार्य भी करवाए जाएंगे।<br /><strong>-शिल्पा चित्तौडा, एक्सईएन नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 12:01:21 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : कोटा-बूंदी को मिलेंगे 18 करोड़ के दो मंजिला 4 नए कॉलेज</title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान में डी-रेगुलेशन और राजनिवेश सिंगल विंडो पोर्टल के सकारात्मक परिणाम सामने आने लगे हैं। जून में ₹1.03 लाख करोड़ के निवेश प्रस्ताव मिले। अप्रैल-जून के दौरान 30,017 आवेदन आए, जिनमें 17 हजार से अधिक का निस्तारण हुआ। सरकार का दावा है कि सरल मंजूरी प्रक्रिया से निवेश, उद्योग और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--kota-bundi-to-get-four-new-two-story-college-buildings-worth-%E2%82%B918-crore/article-161054"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। वर्षों से स्कूलों और अन्य सरकारी भवनों में संचालित हो रहे कोटा-बूंदी के चार नए राजकीय महाविद्यालय अब जल्द ही अपने स्थायी और आधुनिक भवनों में नजर आएंगे। सरकार ने इन चारों कॉलेजों के लिए कुल 18 करोड़ रुपए का बजट स्वीकृत किया है। प्रत्येक महाविद्यालय पर 4.50 करोड़ रुपए खर्च किए जा रहे हैं और सभी भवन दो मंजिला बनाए जा रहे हैं। निर्माण कार्य शुरू हो चुका है। यदि, काम तय समय पर पूरा हुआ तो अगले शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को नए भवनों में पढ़ाई का अवसर मिलेगा।</p>
<p>दरअसल, इन महाविद्यालयों के स्थायी भवन नहीं होने से छात्र-छात्राओं और शिक्षकों को लंबे समय से कई परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। कॉलेज कहीं स्कूलों के कमरों में तो कहीं सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र और जलदाय विभाग की इमारतों में संचालित हो रहे थे। दैनिक नवज्योति ने इस मुद्दे को लगातार प्रमुखता से उठाया, जिसके बाद सरकार ने चारों कॉलेजों के लिए बजट जारी कर निर्माण कार्य शुरू कराया।</p>
<p><strong>कैथून में 2.4 एकड़ में बन रहा कन्या महाविद्यालय</strong><br />कैथून में राजकीय कला कन्या महाविद्यालय का निर्माण 2.4 एकड़ भूमि पर 4.50 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है। फिलहाल फाउंडेशन का कार्य चल रहा है। दो मंजिला भवन बनने के बाद छात्राओं को आधुनिक सुविधाओं वाला परिसर मिलेगा। वर्तमान में यह कॉलेज कस्बे में पीएम-श्री राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय के कुछ कमरों में संचालित हो रहा है।</p>
<p><strong>दीगोद कॉलेज का 45 प्रतिशत निर्माण पूरा</strong><br />कॉलेज एजुकेशन सोसायटी के अधीन संचालित दीगोद महाविद्यालय की नई बिल्डिंग का करीब 45 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। पहली मंजिल तैयार हो गई है, जबकि दूसरी मंजिल के लिए पिलर खड़े कर दिए गए हैं। वर्ष 2025 में शुरू हुए इस निर्माण कार्य में पिछले साल भारी बारिश के कारण करीब चार माह तक काम प्रभावित रहा। अब निर्माण तेजी से आगे बढ़ रहा है और अगले शैक्षणिक सत्र तक भवन तैयार होने की उम्मीद है।</p>
<p><strong>चेचट कॉलेज का निर्माण अंतिम चरण की ओर</strong><br />अलोद रोड स्थित राजकीय महाविद्यालय चेचट का निर्माण तेजी से चल रहा है। करीब 55 प्रतिशत कार्य पूरा हो चुका है। 14 बीघा भूमि पर बन रहे इस कॉलेज का दो मंजिला ढांचा तैयार हो चुका है और फिलहाल फिनिशिंग का काम चल रहा है। नोडल प्राचार्य संजय गुर्जर के अनुसार, अगले शैक्षणिक सत्र से विद्यार्थियों को नए भवन में पढ़ाई कराने का लक्ष्य है।</p>
<p><strong>डाबी गर्ल्स कॉलेज को मिलेगा आधुनिक परिसर</strong><br />डाबी के राजकीय कन्या महाविद्यालय के लिए सरकार ने 2.9300 हैक्टेयर भूमि आवंटित की है। यहां भवन निर्माण का फाउंडेशन कार्य शुरू हो चुका है। कॉलेज में आधुनिक लाइब्रेरी, कंप्यूटर लैब, खेल मैदान सहित छात्राओं के लिए बेहतर शैक्षणिक सुविधाएं विकसित की जाएंगी।</p>
<p><strong>स्थायी भवन से बदलेगी उच्च शिक्षा की तस्वीर</strong><br />नए भवन बनने के बाद विद्यार्थियों को पर्याप्त कक्षाएं, प्रयोगशालाएं, पुस्तकालय, कंप्यूटर लैब और अन्य आवश्यक सुविधाएं एक ही परिसर में मिलेंगी। इससे न केवल पढ़ाई का माहौल बेहतर होगा, बल्कि ग्रामीण और कस्बाई क्षेत्रों के विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा का लाभ भी मिलेगा।</p>
<p>कस्बाई क्षेत्रों में विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा उपलब्ध कराने के लिए सरकार लगातार प्रयास कर रही है। कैथून, दीगोद, चेचट और डाबी में दो मंजिला नए महाविद्यालयों के निर्माण के लिए जमीन और बजट उपलब्ध कराया गया है। प्रत्येक कॉलेज का निर्माण 4.50 करोड़ रुपए की लागत से किया जा रहा है।<br /><strong>- प्रो. नवीन मित्तल, क्षेत्रीय सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Jul 2026 11:26:00 +0530</pubDate>
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                <title>स्टार्टअप स्केलिंग के लिए सिस्टम की पैचिदगियां बड़ी चुनौती, एकल विंडो की जरूरत, आइडिया, टैलेंट, फंड और मजबूत तकनीक जरूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ यूनिकार्न के लिए प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन प्रभावी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/systemic-complexities-pose-a-major-challenge-for-scaling-startups--a-single-window-system-is-needed--alongside-ideas--talent--funding--and-robust-technology/article-160693"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)86.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्टार्टअप को स्केल करने के लिए केवल फंडिंग ही पर्याप्त नहीं है। आइडिया, सही टीम, मजबूत तकनीक, प्रभावी प्रबंधन, बाजार की समझ और वित्तीय अनुशासन अपनाने पर ही स्टार्ट अप हाडौती में सफल हो सकते हैं और राष्ट्रीय स्तर पर अपना स्थान बना सकते हैं। यह बात उभर कर आई दैनिक नवज्योति की बुधवार को हुई मासिक परिचर्चा में। दैनिक नवज्योति कार्यालय में आयोजित इस टॉक शो का विषय था हाडौती में स्टार्टअप स्केलअप होने के लिए किस तरह की चुनौतियां हैं( चैलेंजज इन स्केलिंगअप स्टार्ट अप इन हाडौती) । इस टॉक शो में इंडस्ट्री,व्यापार,नये और पुराने स्टार्टअप के फाउंडर,कोटा व्यापार संघ से जुडे सदस्य,एसएसआई के मैंबर, आई स्टार्ट के मेंटोर,चार्टर एकाउंटेंट, कंपनी सैकेट्री, सरकारी और प्राइवेट एजेसियों से जुड़े लोगों  ने हिस्सा लिया। प्रस्तुत हैं टॉक शो के उसके अंश-</p>
<p><strong>यह हैं स्टार्टअप स्केलअप के चैलेंज</strong><br />- स्टार्टअप के विस्तार के लिए पूंजी की कमी<br />- टैलेंट और कर्मचारियों की कमी<br />-राष्ट्रीय अथवा अंतरराष्ट्रीय बाजार तक पहुंचाना आसान नहीं होता<br />- तकनीकी प्रणाली मजबूत नहीं होने पर सेवा की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती <br />-मजबूत प्रबंधन टीम बनाने की आवश्यकता <br /> -नकदी प्रवाह का प्रबंधन<br /> -स्ट्रेटीजी तैयार हो, बाजार में बड़ी कंपनियां भी प्रवेश कर सकती हैं<br />- उत्पाद या सेवा की गुणवत्ता मेंग्राहक संतुष्टि बनाए रखना बड़ी चुनौती<br />- टैक्स, डेटा सुरक्षा, श्रम कानून, लाइसेंस और अन्य सरकारी नियमों का पालन बड़ी चुनौती<br />-सही समय पर, नियंत्रित और टिकाऊ विस्तार</p>
<p><strong>न्यूक्लियर पावर अपॉर्च्युनिटी</strong><br />हाड़ौती में न्यूक्लियर पावर की प्रचुरता है। इससे संबंधित स्टार्टअप पर फोकस कर उसे शुरू किया जाए तो उसका अधिकतम लाभ प्राप्त किया जा सकता है। इस क्षेत्र में कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप पूरे देश में अपनी पहचान बना सकते हैं और यहां से विकसित राजस्थान की दिशा में आगे बढ़ा जा सकता है। लेकिन अधिकतर लोगों को इसकी जानकारी ही नहीं है। साथ ही स्टार्टअप शुरू करने व इन्हें प्रोत्साहित करने के सरकारी नियम तो बने हुए हैं उसमें कई तरह की छूट का प्रावधान भी किया गया है लेकिन उनका वास्तविक रूप में लाभ नहीं मिल पा रहा है। यदि शत प्रतिशत लाभ मिलने लगे तो कोई कारण नहीं हैं कि स्टार्टअप स्केलअप नहीं कर सकें। साथ ही युवाओं को रोजगार व उनकी आय के साधन भी मिलने लगेंगे।<br /><strong>-गोविंद राम मित्तल, फाउंडर प्रेसिडेंट द एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>पूरी रिसर्च से शुरू करें स्टार्टअप</strong><br />स्टार्टअप शुरू करना किसी बिजनेस से कम नहीं है। इसके लिए पहले पूरी तैयारी करने की जरूरत होती है। किसी भी काम के बारे में पूरी जानकारी करने के बाद ही शुरू करने पर उसमें सफलता मिलने की संभावना अधिक रहती है। हालांकि सरकार की ओर से स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो अच्छी बनाई गई हैं। लेकिन सरकारी सिस्टम में कई कमियां हैं जिनके कारण युवा चाहकर भी अपना स्टार्टअप शुरू करने के बाद उसे आगे नहीं बढ़ा पाते हैं। चीन में उद्योग बढने का कारण वहां सुुविधाएं अधिक है। जबकि तुलनात्मक रूप से भारत में उद्योग, व्यापार या स्टार्टअप को शुरू करने व आगे बढ़ाने में सुविधाएं बाधक बन जाती हैं।<br /><strong>-अशोक माहेश्वरी ,प्रेसिडंट होटल फेडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा डिवीजन</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप की स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर</strong><br />स्टार्टअप को शुरू हुए दस साल हो गए हैं। देशभर में अब तक दो लाख स्टार्टअप हो चुके हैं। हाड़ौती में 560 व कोटा में 490 स्टार्टअप हैं। नवम्बर 2025 के एक ही महीने में एक साथ 150 स्टार्टअप शुरू हुए थे। लेकिन बहुत कम स्टार्टअप ऐसे है जो व्यापक स्तर पर अपनी पहचान बना सके हैं। राजस्थान के दो ही स्टार्टअप देशभर में अपनी पहचान बना पाए हैं। स्टार्टअप स्केल की समस्या स्थानीय स्तर पर ही नहीं है पूरे देश की समस्या है। स्टार्टअप स्केल प्रोडक्ट पर निर्भर करता है। प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होगी तो उसका मार्केट भी उतना ही बड़ा होगा। स्टार्टअप शुरू करने से पहले उससे संबंधित सभी पहलुओं की तैयारी करनी पड़ती है तभी सफलता संभव है।<br /><strong>-कोस्तुभ भट्टाचार्य, मेंटोर स्टार्टअप कंसलटेंट आई स्टार्ट राजस्थान</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप स्केलअपन में फंड मैनेजमेंट बड़ी समस्या</strong><br />स्टार्टअप का मतलब ही नए सिरे से किसी व्यवसाय को शुरू करना है। एक बार हिम्मत कर युवा स्टार्टअप शुरू कर भी देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए फंड की आवश्यकता होती है। जबकि फंडिंग ही नहीं होने से युवा अपने स्टार्टअप को आगे नहीं बढ़ा पाते। हालांकि स्टार्टअप को आगे बढ़ाने के लिए कनेक् शन भी होने चाहिए। उन्हें भी फंडिंग व कनेक् शन की समस्या का सामना करना पड़ा था लेकिन देर से ही सही समाधान भी मिला। अब वे गुजरात, मध्य प्रदेश व दिल्ली समेत कई जगह पर अपना काम कर रहे हैं।<br /><strong>-शुभम शर्मा फाउंडर सीबीएस प्लीवर स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>मार्केट की स्वीकार्यता बड़ी चुनौती</strong><br />कोई भी स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है। लेकिन उसकी मार्केट में एक्सेबिलिटी भी होनी चाहिए। युवाओं द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जा रहा है उसकी मार्केट में डिमांड होगी तो वह ग्रो करेगा वरना परेशानी होती है। हालत यह है कि कई स्टार्टअप इसलिए भी आगे नहीं बढ़ पाते कि उनके द्वारा जो प्रोडक्ट तैयार किया जाता है उसका प्रमोशन नहीं होने से मार्केट नहीं मिल पाता। आरएनडी भी बड़ी समस्या रहती है। मार्केट के साथ उसका प्रमोशन उतना ही जरूरी है।<br /><strong>-सिद्धार्थ गुप्ता ,ट्रेजरार डिवी. चैम्बर आॅफ कामर्स</strong></p>
<p><strong>बेस्ट टैलेंट की कमी</strong><br />कोटा में स्टार्टअप तो कई शुरू हो रहे हैं। लेकिन ऐसे स्टार्टअप जो देश में अपनी पहचान बनाएं ऐसा स्टार्टअप शुरू करने के लिए यहां तकनीकी विशेषज्ञ या इंजीनियर ही नहीं है। टेलेंट व काम करने वालों की कमी है। लोग स्टार्टअप शुरू तो कर देते हैं लेकिन उसे आगे बढ़ाने के लिए काम की गम्भीरता व जुनून भी होना चाहिए। बाहर से तकनीकी विशेषज्ञ मंगवाने पर उनकी कीमत अधिक चुकानी पड़ती है। साथ ही महिलाओं को स्टार्टअप शुरू करने या उनके प्रोडक्ट को मार्केट में पहचान दिलाने में कई तरह की समस्याओं का सामना करना पडता है।<br /><strong>-नेहा गुप्ता फाउंडर गेन बुक स्टार्टअप</strong></p>
<p><strong>माकेर्टिंग और प्रमोशन के साथ रिसर्च की जरूरत</strong><br />स्टार्टअप शुरू करने से पहले जो भी प्रोडक्ट तैयार किया जाए उसकी पूरी जानकारी होनी चाहिए। प्रोडक्ट तैयार करने व उसकी माकेर्टिंग और प्रमोशन के लिए फंड की आवश्यकता होती है। लेकिन स्टार्टअप के सामने सबसे बड़ी समस्या ही फंड की रहती है। साथ ही जिस स्तर का स्टार्टअप होना चाहिए उसमें काम करने के लिए उस स्तर का टेलेंट नहीं मिल पाता है। जिससे स्टार्टअप एक सीमित दायरे तक ही रह जाते हैं। कोटा व हाड़ौती के स्टार्टअप को आगे बढ़ाने की जरूरत है। जिससे युवाओं को रोजगार के साथ ही उनके प्रोडक्ट की डिमांड भी बढ़े।<br /><strong>-सीए सुधांशु उपाध्याय सैकेट्री आईसीएआई</strong></p>
<p><strong>कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बन रही</strong><br />जिस तरह से कई विभागों में सीएसआर का फंड दिया जाता है। उसी तरह का फंड यदि स्टार्टअप को दिया जाए तो उन्हें आर्थिक सम्बल मिलेगा। स्टार्टअप को फंडिंग के लिए एक सिस्टम बनाने की आवश्यकता है। वहीं दूसरी तरफ स्टार्टअप शुरू करना तो आसान है लेकिन उसके ग्रो करने में कई सरकारी औपचारिकताएं बाधक बनती हैं। उन सिस्टम को सुधारने की जरूरत है। स्टार्टअप में प्रोडक्ट उत्पादन पर फोकस किया जाएगा तो अधिक लोगों को रोजगार भी दिया जा सकेगा।<br /><strong>-अमित सिंघल, डायरेक्टर इंडेक्सल इंजीनियरिंग</strong></p>
<p><strong>नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप ग्रो तेजी से करेंगे</strong><br />समय के साथ बदलाव बहुत जरूरी है। फिर चाहे व कोई प्रोडक्ट हो या शिक्षा का क्षेत्र। शिक्षा के क्षेत्र में भी नए-नए स्टार्टअप शुरू किए जा सकते हैं। लेकिन उनमें मेन पावर के साथ ही एआई का अधिक उपयोग किया जाएगा तो उनकी डिमांड व उपयोगिता अधिक होगी। एआई आधारित प्रोडक्ट की डिमांड अधिक होने से उस काम को करने वाले अधिक युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। नई तकनीक पर आधारित स्टार्टअप की कोटा व हाड़ौती में ही नहीं पूरे देश में डिमांड रहेगी तो स्टार्टअप ग्रो भी तेजी से करेंगे।<br /><strong>-सुदर्शन माथुर ,डायरेक्टर एलबीएस एजुकेशन ग्रुप</strong></p>
<p><strong>सिंगल विंडो सिस्टम लागू किया जाए </strong><br />स्टार्टअप को प्रमोट करने के लिए नियम व नीतियां तो बनी हुई हैं लेकिन सिस्टम में कई कमियां हैं। माइंड सेट ही नहीं है। जिनके कारण स्टार्टअप शुरू करने वालों को कई परेशाननियों का सामना करना पड़ता है। सरकारी सिस्टम में सुधार करने की जरूरत है। साथ ही सिंगल विंडो सिस्टम को लागू किया जाए तो युवाओं को सुविधा होगी और स्टार्टअप अधिक सुगमता से काम कर पाएंगे।<br /><strong>-समीर सूद, सैकेट्री एसएसआई एसोसिएशन</strong></p>
<p><strong>स्टार्टअप पर वर्तमान हालात की मार</strong><br />देश दुनिया में जो हालात हैं उससे स्टार्टअप भी अछूते नहीं हैं। इन पर असर पड़ रहा है। मार्केट ग्रोथ में 40 फीसदी कमी आई है। मैने नोएड़ा में वर्क किया पर वहां पर काफी कर्मचारी कोटा सहित अन्य जगहों के कर्मचारी मेरे पास काम करते थे। जिसमे कुछ तो इंटर करने के लिए आते थे तो कुछ अपना टैलेंट एक्सप्लोर करने के लिए आते थे।मेरी मैंटलिटी हमेशा से रही है कि मैं कोटा में ही रहकर काम करूं, इसके लिए मेरे प्रयास हमेशा ही रहत ेथे कि अधिक से अधिक पैसा बाहर से लाने की कोशिश करता हूं। अभी युद्ध से सहित अन्य विभिन्न कारणों से स्टार्टअप फील्ड और अन्य फील्ड में करीब 40 प्रतिशत गिरावट र्दज की गई हैं। इसके चलते हमने बड़ी-बड़ी कंसल्टेंसी कंपनियों को अभी रूक रखा हैं।<br /><strong>-सिद्धार्थ वशिष्ठ ,फाउंडर रिपोर्टस एन्ड इनसाइज बिजनस रिसर्चर </strong></p>
<p><strong>पानी बिजली कोचिंग बड़ी संभावनाएं </strong><br />कोटा में भारी संभावना है। हाड़ौती में पानी, बिजली सहित अन्य व्यवस्था यहां पर हैं। यहां तीन लाख बच्चे आते हैं। इसे टैलेंट में बदलना होगा। यह एक  अपॉर्चुनिटी है। कुछ समय पहले हमारी एसोसिएशन ने हाड़ौती में रोजगार और बिजनेस को लेकर क्या संभावना हैं। साथ ही हाड़ौती के लिए क्या कुछ कर सकते हैंं पर गंभीर चर्चा की। रोजगार बढ़े और अधिक से अधिक से लोग लाभांवित हो इसके लिए क्या करना चाहिए। पैरेंटस यहां पर केवल मेडिकल की शिक्षा प्राप्त करने के लिए भेज रहे हैं। पर हमे कुछ ऐसा करना चाहिए जिससे बच्चा यहां पर मेडिकल के साथ ही डिजिटल शिक्षा, स्किल डवलपमेंट सहित अन्य फील्ड में भी वहां शिक्षा प्राप्त कर सके। क्यो कि अभी पैरेंटस शहर में बच्चे को डर-डर के यहां पर भेज रहा हैं।<br /><strong>-राजेश गुप्ता , प्रेसिडंट डिवीजनल चैम्बर आॅफ कामर्स</strong></p>
<p><strong>मार्केट और सेल में खुद उतरना पड़ता है </strong><br />मैंने बिजनेस की शुरूआत पापड़ व मंगोड़ी बनाने सहित अन्य कार्य से की जिसमें घर-घर जाकर पापड़ बेचे। फिर शुरूआत में मेरे साथ एक महिला जुड़ी इस तरीके से मेरे साथ महिलाएं जुड़ती गई। अब करीब मेरे पास 80 महिलाएं काम करती हैं। शुरूआत में बिजनेस में लोन लेने के लिए भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा। ग्राहक भी प्रोडक्ट नहीं खरीदते थे उनको समझना पड़ता था। तब जाकर प्रोडक्ट कि सेल बढ़ी, उसके बाद मैंने लड्डू गोपाल कि पोशाक बनाना शुरू तो उसके बारे में इधर-उधर से जानकारी जुटाई और इस कार्य को आगे बढ़ाया। बहुत सी बार वर्कस को सुविधाएं देने के बाद भी वहां हमारे साथ कार्य नहीं करना चाहता है। तो इस दौरान हमको विभिन्न परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।<br /><strong>- भावना करमचंदानी .बिजनस वुमन</strong></p>
<p><strong>सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित हो</strong><br />स्टार्टअप के लिए इकोसिस्टम भी तेजी से उभर रहा है। सरकार और विभिन्न संस्थाओं के प्रयासों से नवाचार को बढ़ावा मिला है। स्टार्टअप्स को बनाए रखने के लिए बेहतर प्रशिक्षण और उद्योग का एक्सपोजर देना होगा। सीएसआर फंडिंग का एक हिस्सा स्टार्टअप्स के लिए भी निर्धारित होना चाहिए, जिससे उन्हें शुरूआती स्तर पर अवसर मिल सके। सरकार को, उद्योग, निवेशकों, शिक्षण संस्थानों और स्टार्टअप्स से जोड़ने वाला एकीकृत डिजिटल पोर्टल विकसित किया जाना चाहिए, जहाँ अपनी समस्या साझा करें और स्टार्टअप्स के लिए समाधान प्रस्तुत कर सकें।<br /><strong>- आयुष त्यागी, मेंटोर आई स्टार्टअप राजस्थान</strong></p>
<p><strong>फंड राइजर्स के लिए प्रयास ज़रूरी<br /></strong>मैंने पिछले सालों में करीब तीस हजार लोगों को रोजगार दिया साथ ही कई कंपनियों के साथ हम कार्य करते हैं। इसके तहत एमएसएमई संस्था प्राय सरकारी योजनाओं की विभिन्न सूचनाएं सहित अन्य सूचनाएं उद्योगों को उपलब्ध करती हैं। साथ ही विभिन्न सरकारी कार्यालय और उद्योगों केबीच संस्था सेतु का काम करती हैं। साथ ही हमारा प्रयास है कि 18-25 वर्ष तक का बच्चा कोटा शहर में रहकर की कार्य करें। साथ ही एमएसएमई के माध्यम से शॉर्ट टैंक से बातचीत करके शहर के उद्योगों को शॉर्ट टैंक से रिवॉर्ड लेकर आ रहे हैं।<strong><br />-दीपक मेहता , एसएसई एसोसिएशन अध्यक्ष</strong></p>
<p><strong>फंड के लिए विश्वास हासिल करना चुनौती<br /></strong> देखा जाएं तो स्टार्टअप में बेसिकली सबसे ज्यादा समस्या फंडिग की आती है क्योकि एंट्ररप्रेन्योर अभी बिजनेस बिल्ड करना चाहते हैं जिसको लेकर उनको परेशानी का सामना करना पड़ता हैं।साथ ही जो पुरानी कंपनियां है फंडिग के लिए उनको प्राथमिकता मिलती हैं। जो पुराने बिजनेस करने वाले है वहां अपना कार्य का तरीका नहीं बदल पा रहे हैं। स्टार्टअप को फंड्स के लिए जल्द कोई तैयार नहीं होता। इस क्षेत्र में आप उतर रहे हैं तो मार्केट रिसर्च बहुत जरूरी है। टैलेंट और लिक्विट केपिटल पर भी ध्यान देना पड़ेगा।<strong><br />-दीक्षा दुग्गड़,कंपनी सचिव आईसीएसआई कोटा</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jul 2026 15:29:50 +0530</pubDate>
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