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                <title>कोटा - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>कोटा RSS Feed</description>
                
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                <title>करोड़ों का राजस्व फिर भी नहीं मिल रहीं सुविधाएं, बंद विश्राम गृह और खराब सीसीटीवी से किसान परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[बारिश होने पर उपज भीगने का खतरा, वाटर कूलर बंद, जगह-जगह लग रहे गंदगी के ढेर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-generating-crores-in-revenue--facilities-are-lacking--farmers-distressed-by-a-closed-rest-house-and-non-functional-cctv-cameras/article-157356"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। कोटा जिले की ए-ग्रेड कृषि उपज मंडी इटावा हर वर्ष करीब 10 करोड़ रुपए का राजस्व अर्जित करती है। राजस्थान और मध्यप्रदेश के 500 से अधिक गांवों के किसान यहां अपनी उपज बेचने आते हैं। लेकिन सुविधाओं के अभाव और अव्यवस्थाओं के चलते किसानों, व्यापारियों और पल्लेदारों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। मंडी परिसर में जगह-जगह गंदगी के ढेर लगे हुए हैं। नालियां कचरे से अंटी पड़ी हैं, जिससे बदबू फैल रही है। कलेवा योजना स्थल के आसपास भी गंदगी के ढेर लगे होने से किसान भोजन करने में असहज महसूस करते हैं। मंडी में लगे अधिकांश सीसीटीवी कैमरे लंबे समय से खराब पड़े हैं। किसानों और व्यापारियों का आरोप है कि उपज चोरी होने की घटनाएं लगातार सामने आती रहती हैं, लेकिन कैमरे बंद होने से चोरों तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>खुले में नीलामी, बारिश में भीगती है उपज</strong><br />समर्थन मूल्य पर खरीद के कारण नीलामी शेड का उपयोग अन्य कार्यों में होने से किसानों की उपज की नीलामी खुले में करनी पड़ती है। इससे गर्मी और बारिश दोनों मौसम में किसानों और व्यापारियों को परेशानी उठानी पड़ती है। बारिश होने पर उपज भीगने का खतरा बना रहता है। नीलामी क्षेत्र में पेयजल और शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। जिससे विशेष रूप से महिला किसानों को कठिनाइयों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>बंद पड़ा किसान विश्राम गृह</strong><br />किसानों के ठहरने के लिए बना विश्राम गृह रखरखाव के अभाव में जर्जर हो चुका है और उस पर ताला लगा हुआ है। अधिक आवक के दिनों में किसानों को रात खुले में गुजारनी पड़ती है। वहीं मंडी परिसर मैं लगाए गए वाटर कूलर बंद पड़े हैं। ऐसे में किसानों और मजदूरों को सीधेनल का पानी पीना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>अंधेरे में डूबी मंडी, टूटेे बिजली पोल बने खतरा</strong><br />मंडी में कई स्थानों पर रोड लाइटें खराब पड़ी हैं, जिससे रात के समय अंधेरा छाया रहता है। बिजली कटौती होने पर जनरेटर की व्यवस्था होने के बावजूद समय पर संचालन नहीं होने से व्यापारियों और किसानों को परेशानी उठानी पड़ती है। कई स्थानों पर बिजली के पोल भी क्षतिग्रस्त हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>इनका कहना  है</strong><br />जगह-जगह गंदगी फैली हुई है और शौचालय व पेयजल जैसी मूलभूत सुविधाएं भीउपलब्ध नहीं हैं। <br /><strong>- चंदालाल मीणा, खेड़ली बेरीसाल निवासी</strong></p>
<p>नीलामी खुले में होती है, चारों तरफ गंदगी है और किसानों के लिए विश्राम गृह की सुविधा भी उपलब्ध नहीं है।<br /><strong>- बद्रीलाल नागर, रजोपा निवासी</strong></p>
<p> किसानों को पेयजल औरं शौचालय जैसी सुविधाओं के लिए भी भटकना पड़ता है, जबकि यहां राजस्थान और मध्यप्रदेश के सैकड़ों गांवों के किसान आते हैं।<br /><strong> - राकेश बैरवा, रणोदिया निवासी</strong></p>
<p>मंडी में सफाई,पेयजल, प्रकाश और सुरक्षा व्यवस्था की स्थिति बेहद खराब है तथा शिकायतों के बावजूद कार्रवाई नहीं होती।<br /><strong>- जोधराज गुर्जर, अध्यक्ष, पल्लेदार एसोसिएशन</strong></p>
<p> सीसीटीवी कैमरे खराब होने से चोरी की घटनाएं बढ़ रही हैं। नवीन शेड और अन्य सुविधाओं की मांग कई बार की जा चुकी है, लेकिन समाधान नहीं हुआ।<br /><strong>- हरिशंकर मंगल, अध्यक्ष, मंडी व्यापार संघ</strong></p>
<p> करोड़ों रुपए की आय के बावजूद किसानों को मूलभूत सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं। <br /><strong>- उमाशंकर नागर, सह जिला प्रचार प्रमुख, भारतीय किसान संघ</strong></p>
<p> मानसून से पहले नालियों की सफाई करवाई जाएगी। मंडी में सफाई कार्य जारी है। पेयजल, शौचालय, सीसीटीवी कैमरे और अन्य समस्याओं का निरीक्षण कर उन्हें जल्द ठीक कराने के प्रयास किए जाएंगे। किसान विश्राम गृह की मरम्मत के लिए बजट प्रस्ताव भी भेजे जा चुके हैं।<br /><strong>- रवि सिंह पंवार, मंडी सचिव</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:19:11 +0530</pubDate>
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                <title>ऑक्सीजोन व रिवर फ्रंट पर भी मिले मॉर्निंग वॉक की सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[ सुबह घूमने वालो को 100 रुपये का टिकट पड़ रहा भारी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/morning-walk-facilities-sought-at-oxyzone-and-river-front/article-157348"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)28.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के मध्य हरियाली से आच्छादित ऑक्सीजोन पार्क में सुबह के समय ताजी हवा लेने और चम्बल नदी के किनारे बने विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल पर नदी की सुंदरता को निहारने की सुविधा सुबह के समय शहर में मॉर्निंमग वॉकर को भी मिलनी चाहिए। यह मांग है शहर के उन लोगों की जो सुबह के समय आस-पास के गार्डन में मॉर्निंग वॉक के लिए जाते हैं। विज्ञान नगर निवासी एडवोकेट अमजद खान ने बताया कि शहर के बीच पहले जहां आई एल कॉलोनी थी। वहां हरियाली व मोर अधिक थे। उसकी जगह पर अब ऑक्सीजोन सिटी पार्क बनाया गया है। यह नए कोटा में रहने वालों के लिए एक तरह से वरदान है। लेकिन यहां प्रवेश के लिए सौ रुपए का टिकट लगाया गया है। जिससे इस पार्क में मॉर्निंग वॉक करने जाने वालों को नि:शुल्क प्रवेश की सुविधा नहीं दी गई है। ऐसे में इसके आस-पास रहने वाले लोगों को इसका लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि सुबह दो से तीन घंटे यहां जो लोग मॉर्निंग वॉक करना चाहते हैं उन्हें सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p>तलवंडी निवासी अजय कुशवाह का कहना है कि शहर में जिस तरह से चम्बल गार्डन व नयापुरा स्थित सीबी गार्डन में सुबह 9 बजे तक मॉर्निंग वॉक को नि:शुल्क प्रवेश देकर सैर करने की सुविधा दी हुई है। उसी तरह की सुविधा ऑक्सीजोन पार्क में भी दी जानी चाहिए। यह शहर के लिए ऑक्सीजोन के रूप में वरदान है लेकिन स्थानीय लोगों को इसमें जाने के लिए टिकट लेना पड़ रहा है। जबकि सुबह कुछ समय के लिए यहां नि:शुल्क सैर की सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p><strong>नदी के किनारे व गार्डन का लाभ मिले</strong><br />वहीं पुराने शहर में रहने वाले लोगों का कहना है कि पहले लोग चम्बल नदी के किनारे घूम सकते थे। लेकिन रिवर फ्रंट बनने से वहां आमजन का प्रवेश बंद कर दिया गया है। रिवर फ्रंट पर गार्डन भी बनाए गए हैं। ऐसे में सुबह के समय दो से तीन घंटे के लिए जो लोग सैर करने जाना चाहते हैं उन्हें नि:शुल्क प्रवेश दिया जाए।</p>
<p>पाटनपोल निवासी अजय सक्सेना का कहना है कि शहर में रिवर फ्रंट जैसा पर्यटन स्थल कहीं नहीं है। लेकिन लोगों को सुबह के समय इसका नि:शुल्क लाभ नहीं मिल पा रहा है। जबकि मॉर्निंग वॉकर के लिए भले ही मासिक पास जारी कर दिया जाए जिससे ही प्रवेश मिले लेकिन यह सुविधा शुरु की जानी चाहिए। कैथूनीपोल निवासी विवेक पाल का कहना है कि सुबह के समय बड़ी संख्या में लोग सैर के लिए गार्डन जाते हैं। लेकिन रिवर फ्रंट के भीतर बने गार्डन का लाभ मार्निंग वॉकर को नहीं मिल पा रहा है। जबकि केडीए को यहां सुबह के समय नि:शुल्क सुविधा दी जानी चाहिए।</p>
<p><strong>पौधों को पानी व सफाई में 4 घंटे का समय लगता</strong><br />ऑक्सीजोन पार्क का संचालन करने वालों का कहना है कि यह पार्क पर्यटन स्थल के रूप में विकसित किया गया है। यहां लाखों छोटे-बड़े पौधे लगाए गए हैं। ऐसे में इन पौधों को नियमत पानी देने व इनकी सार संभाल में सुबह 4 घंटे का समय लगता है। सुबह 6 से 10 बजे तक यह काम होता है। इस दौरान पूरा गा र्डन व इसके भीत की सड़कें गीली व मिट्टी से सनी रहती है़। ऐसे में वहां इस समय में लोगों को प्रवेश नहीं दिया जा सकता। सुबह 10 बजे बाद यह लोगों के लिए खोल दिया जाता है। यदि इसकी नियमित देखभाल नहीं होगी तो दिन में फिर नहीं हो सकती। उस समय गार्डन में लोग आने लगते हैं।</p>
<p><strong>निर्माण के समय प्रावधान ही नहीं किया</strong><br />इधर केडीए आयुक्त बचनेश कुमार अग्रवाल का कहना है कि लोगों की मांग तो जायज है। लेकिन इन दोनों ही स्थलों के निर्माण के समय यहां मॉर्निंग वॉकर के लिए नि:शुल्क प्रवेश का प्रावधान ही नहीं किया गया। जिससे अब ऐसा कर पाना मुश्किल है। उन्होंने कहा कि शहर में कई अन्य बड़े गार्डन हैं जहां हरियाली के साथ ही नदी के किनारे का भी नि:शुल्क आनंद लिया जा सकता है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 15:15:27 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का :  दो घन्टे में ही हुआ चकाचक, लोग बोले अब भी तो हुई सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[पांच दिन के 'नर्क' के बाद मरीजों को मिली सीवरेज की गंदगी से मुक्ति।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---area-cleaned-up-in-just-two-hours--people-remark--%22so--cleaning--was--possible-after-all-%22/article-157240"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)32.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल परिसर में आखिरकार पांच दिनों बाद प्रशासनिक सुस्ती टूटी। दरअसल यहां स्थित सेन्ट्रल लैब के बाहर सीवरेज चैम्बरर्स ओवर फ्लो होकर सड़क पर उफन रहे थे। यह हालात पिछले पांच दिनों से बने हुये थे । जिसे मंगलवार को नगर निगम की टीम ने उफन रहा सीवरेज और सेप्टिक टैंक का मलबा साफ कर दिया। जिससे पिछले कई दिनों से नर्क भुगत रहे मरीजों और तीमारदारों ने बड़ी राहत की सांस ली। सवाल यह उठता है कि जब नगर निगम और सुपर सकर मशीन के जरिए यह काम मात्र दो घंटे में मुमकिन था, तो इसके लिए पांच दिनों तक मरीजों को परेशान क्यों किया गया? प्रशासन को अपनी इस 'लेट-लतीफी' की कार्यप्रणाली को बदलना होगा ताकि भविष्य में किसी भी संवेदनशील वार्ड या लैब के बाहर ऐसे हालात दोबारा पैदा न हों।</p>
<p><strong>खबर पर तत्काल हुआ असर</strong><br />'दैनिक नवज्योति' द्वारा मामले को प्रमुखता से उठाते हुये मंगलवार को ''सेन्ट्रल लैब के मेन एन्ट्री के बाहर फैली सीवरेज की गन्दगी'' शीर्षक से प्रकाशित की थी जिसके बाद हरकत में आये एमबीएस प्रशासन ने सफाई के लिये आनन फानन में नगर निगम की टीम को मौके पर बुलवाकर परिसर में दुर्गंध व बीमारी के कारण बन रही सीवरेज के पानी को साफ करवाया गया करीब 2 घन्टे की मशक्कत के बाद पुरा पानी साफ हो गया। जिसके बाद यहां इलाज कराने आये लोगों ने भी राहत की सांस ली।</p>
<p><strong>'सुपर सकर' से दो घंटे में चोक चेंबर किए दुरुस्त</strong><br />गत शुक्रवार से ही मुख्य सड़क और वहां लगे सीमेंटेड ब्लॉक पूरी तरह बदबूदार पानी में डूबे हुए थे। मंगलवार सुबह जब नगर निगम का सफाई निरीक्षक दस्ता और अस्पताल का अमला हरकत में आया, तो हालात तेजी से बदले। सफाई कर्मियों ने सुपर सकर मशीन की मदद से चोक हो चुके मुख्य चेंबरों की सफाई शुरू की। कड़ी मशक्कत के बाद सड़क पर जमा गंदा पानी और कीचड़ पूरी तरह साफ हो सका।</p>
<p><strong>गंदगी बढ़ा रही थी बीमारी, वहां अब मिली राहत</strong><br />अस्पताल का यह वही मुख्य मार्ग है जहां रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन गंभीर बीमारियों की जांच के लिए सैंपल देने आते हैं। पिछले पांच दिनों से यहां फैली गंदगी न केवल अस्पताल की सुंदरता पर बदनुमा दाग थी, बल्कि वहां उठ रही तीव्र दुर्गंध से मरीजों का दम घुट रहा था। स्वास्थ्य के मंदिर में ही संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ था, लेकिन मंगलवार दोपहर बाद यहां के हालात पूरी तरह बदले नजर आए।</p>
<p><strong>भुक्तभोगियों ने कहा- 'देर आए, दुरुस्त आए'</strong><br />गंदगी साफ होने के बाद अस्पताल आने वाले लोगों के चेहरों पर सुकून दिखाई दिया मरीज मकसूद (60 वर्ष) ने बताया, कल जब मैं यहां सैंपल देने आया था, तो पैर रखने तक की जगह नहीं थी, इसी दूषित पानी के बीच से मजबूरन गुजरना पड़ा था। आज प्रशासन चेता है और सफाई हुई है, यह काम पहले दिन ही हो जाना चाहिए था। तीमारदार राहुल शर्मा ने कहा, यहां फैली गंदगी को देखकर मन खराब हो जाता था। आज जब दोबारा यहां आया तो सफाई देखकर बड़ी राहत मिली कि अब लोगों को इस नर्क से होकर नहीं गुजरना पड़ेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 17 Jun 2026 14:16:53 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका और ईरान शांति समझौते से पटरी पर लौटेगा कोटा का व्यापार-उद्योग</title>
                                    <description><![CDATA[होर्मुज स्ट्रेट खुलने की सम्भावना से समाप्त हुई आशंका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/us-iran-peace-agreement-set-to-put-kota-s-trade-and-industry-back-on-track/article-157133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । अमेरिका और ईरान के बीच प्रस्तावित शांति समझौते और होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना से उद्योग जगत की आशंका समाप्त हो गई है। इससे अब देश के अन्य राज्यों के साथ ही कोटा का उद्योग-वयापर फिïर से पटरी पर लौटेगा। एक बार फिर से आयात व निर्यात को बढ़ावा मिलने से कोटा स्टोन व मसाला उद्योग को बल मिलेगा। वहीं डीजल पेट्रोल पर्याप्त मात्रा में मिलने से कीमतों में आए उछाल से राहत मिलने की संभावना है।</p>
<p>अमेरिका और ईरान व इजराइल के बीच लम्बे समय तक चले युद्ध ने पूरे देश में हाहाकार मचा दिया था। वहीं युद्ध के बीच होर्मुज स्ट्रेट को बंद कर दिया गया था। जिससे कोटा समेत अन्य स्थानों से ईरान व अमेरिका को होने वाला निर्यात व वहां से होने वाला आयात सब अटक गया था। यहां तक की पेट्रोलियम गैस व तेल तक की सप्लाई बंद हो गई थी। ऐसे में पूरे देश में पेट्रोल-डीजल के दाम बढऩे के साथ ही एक ओर जहां उद्योग व व्यापार प्रभावित हुआ था। वहीं बाजार में हर वस्तु की कीमत आसमान छूने लगी। खाद्य पदार्थ से लेकर सोने-चांदी तक लोहे व स्टील से लेकर एल्यूमीनियम तक और कैमिकल व फर्टिलाइजर्स तक का उद्योग प्रभावित हुआ। इनकी सप्लाई नहीं होने से कीमतें काफी अधिक बढ़ गई थी। वहीं कोटा से विदेशों को निर्यात होने वाला कोटा स्टोन, मसाला, कैमिकल, धनिया और आटे का निर्यात एक तरह से ठप सा हो गया था। वहीं विदेशों से आने वाला प्लास्टिक सामान से लेकर अन्य आवश्यक वस्तुओं का आयात भी बंद हो गया था। जिससे बाजार में हर वस्तु की कीमतें बढ़ गई थी।वहीं हाल ही में अमेरिका व ईरान के बीच शांति समझौते का डील डन ड्राफ्ट सामने आने के बाद न केवल शेयर मार्केट में उछाल आया है। वरन् व्यापार उद्योग को भी फिर से बूस्टअप मिला है।</p>
<p><strong>उद्योग जगत की आशंका समाप्त, कीमतें होंगी नियंत्रित</strong><br />कोटा व्यापार महासंघ के महासचिव व होटल फैडरेशन के कोटा संभाग अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना से लम्बे समय से व्यापार उद्योग जगत में बनी आशंका समाप्त होगी। होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से आयात व निर्यात अटका हुआ था। कोटा से बड़ी मात्रा में कोटा स्टोन, चावल, धनिया, मसाले व आटे समेत अन्य वस्तुओं का विदेशों को निर्यात होता है। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से यह माल निर्यात नहीं हो रहा है। जहाजों में माल अटका होने से खराब हो गया या वापस लौट आया। जिससे व्यापार व उद्योग जगत को भारी नुकसान का सामना करना पड़ा था। वहीं कैमिकल व फर्टिलाइजर्स भी कोटा में नहीं आ पा रहा था। लेकिन अब होर्मुज स्ट्रेट खुलने से इन सभी उद्योग व व्यापार से जुड़े व्यापारियों व उद्योगपतियों की आशंका समाप्त हो गई है। साथ ही ये सभी उद्योग फिर से पटरी पर लौट आए़ंगे। पर्याप्त मात्रा में पेट्रोल-डीजल व गैस मिलने से कीमतें भी नियंत्रित हो जाएंगी।</p>
<p><strong>नुकसान की भरपाई में समय लगेगा</strong><br />दी एसएसआई एसोसिएशन के संस्थापक अध्यक्ष व उद्योगपति गोविंद राम मित्तल ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत को काफी नुकसान हुआ है। इससे तेल व पेट्रोलियम की सप्लाई बाधित होने के कारण इससे जुड़े सभी उद्योग व व्यापार प्रभावित हुए। आयात निर्यात बंद हो गया था। ऐसे में पेट्रोल-डीजल व कैमिकल से जुड़े उद्योगपतियों ने आशंका के चलते नए उद्योग नहीं लगाए। जिनके लगे हुए उद्योग से उन्हें माल की सप्लाई नहीं हो सकी। उद्योगों में तैयार माल का निर्यात नहीं हो सका था। जिससे हजारों-करोड़ रुपए का नुकसान भारत को उठाना पड़ा। वहीं कोटा में भी तेल की कीमतें बढऩे से महंगाई बढ़ गई। हर व्यक्ति उससे प्रभावित हुआ। अब तक जितना नुकसान हुआ है। उसकी भरपाई करने में ही एक से दो साल का समय लग जाएगा। हालांकि अब होर्मुज स्ट्रेट खुलने की संभावना से उद्योग व व्यापार को एक उम्मीद जगी है। जिस तरह से कैंसर रोग में कीमो थैरेपी काम करती है उसी तरह की राहत मिलने की संभावना है। वहीं इससे ईरान में रोजगार के अवसर खुलने से कोटा व देश से वहां जाने वालों को लाभ होगा।</p>
<p><strong>तेल की पर्याप्त सप्लाई से स्थिति होगी सामान्य</strong><br />कोटा पेट्रोलियम डीलर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष तरूमीत सिंह बेदी ने बताया कि होर्मुज स्ट्रेट के बंद होने से सबसे अधिक प्रभाव पेट्रोलियम व तेल पर पड़ा था। लेकिन अब इसके खुलनी की संभावना से स्थिति सामान्य हो जाएगी। जब देश में पर्याप्त मात्रा में तेल व गैस की सप्लाई होने लगेगी तो उद्योगों को पर्याप्त तेल मिल सकेगा। साथ ही तेल की कीमतें बढऩे से प्राइवेट पेट्रोल पम्पों पर तेल महंगा हो गया था। ऐसे में लोग सरकारी पम्पों पर जा रहे थे। वहां तेल की राशनिंग हो रही थी। लेकिन होर्मुज स्ट्रेट खुलने से जब तेल की सप्लाई होने लगेगी तो इससे जुड़ी सभी उद्योग व व्यापार को भी पर्याप्त सप्लाई हो सकेगी। प्राइवेट पम्पों को भी तेल मिलने लगेगा। जिससे वहां भी कीमतें कम हो जाएगी। साथ ही हर वस्तल की कीमत कम होने पर स्थिति सामान्य हो जाएगी। होर्मुज स्ट्रेट से बंद होने से देश के अन्य प्रदेशों के साथ ही इसका असर कोटा पर भी पड़ रहा था। लेकिन अब कोटा में भी सभी सामान्य हो जाएगा।</p>
<p><strong>शिपिंग और बीमा लागत घटने से व्यापार की रफ्तार बढ़ेगी</strong><br />मिडिल ईस्ट में संघर्ष का असर भारत के व्यापार पर भी पड़ा था। मिडिल ईस्ट के देशों को होने वाला निर्यात प्रभावित हुआ था। इंजीनियरिंग सामान, पेट्रोलियम उत्पाद, कपड़ा, खाद्य सामग्री और केमिकल जैसे सेक्टर्स को झटका लगा था। अब हालात सामान्य होने की उम्मीद के साथ निर्यातकों को राहत मिल सकती है। शिपिंग और बीमा लागत घटने से व्यापार की रफ्तार फिर बढ़ सकती है। उद्योग जगत का मानना है कि मिडिल ईस्ट में स्थिरता आने से भारतीय कंपनियों के लिए नए अवसर भी खुलेंगे।<br /><strong>-अनिल मूूंदड़ा, जिलाध्यक्ष कैट कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Jun 2026 14:18:06 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी विभागों पर करोड़ों रुपयों का पानी का बिल अब तक बकाया, मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[वित्तीय वर्ष की समाप्ति के बाद राजस्व वसूली का लक्ष्य अधूरा, विभाग 30 करोड़ राजस्व की ही कर सका वसूली।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-bills-worth-crores-remain-outstanding-against-government-departments/article-157017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(4)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पानी की हर बूंद का हिसाब रखने वाला जलदाय विभाग खुद अपने ही राजस्व की रक्षा करने में नाकाम रहा। वित्तीय वर्ष 2025-26 में विभाग को 78 करोड़ रुपए राजस्व वसूली का लक्ष्य दिया गया था, लेकिन पूरे वर्ष की कवायद के बाद विभाग महज 30 करोड़ रुपए ही वसूल कर सका। नतीजतन, सरकार को करीब 48 करोड़ रुपए के राजस्व का नुकसान हो गया। गंभीर बात यह है कि सरकारी विभागों, औद्योगिक संस्थानों और हजारों उपभोक्ताओं पर वर्षों से करोड़ों रुपए पानी के बिल बकाया हैं, इसके बावजूद जिम्मेदार अधिकारी प्रभावी वसूली अभियान चलाने के बजाय नोटिस जारी करने की औपचारिकता निभाकर इतिश्री करते रहे। इस स्थिति ने विभागीय कार्यप्रणाली, निगरानी व्यवस्था और अधिकारियों की जवाबदेही पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं।</p>
<p><strong>कमजोर राजस्व प्रबंधन से सरकार को करोड़ों का नुकसान</strong><br />जलदाय विभाग की लापरवाही और कमजोर राजस्व प्रबंधन का खामियाजा सरकार को करोड़ों रुपए के नुकसान के रूप में भुगतना पड़ रहा है। हालात यह हैं कि वित्तीय वर्ष की शुरुआत से ही जल विभाग टारगेट हासिल करने में रुचि नहीं दिखाता, पूरे वर्ष कुंभकरणीय नींद की आगोश में रहता है, जैसे ही वित्तीय वर्ष समाप्त होने की कगार पर पहुंचता है तब अफसरों की नींद टूटती है और टारगेट पूरा करने के लिए अफसर दौड़ते हैं लेकिन चुनिंदा महीनों में करोड़ों का राजस्व वसूली का लक्ष्य पूरा होना तो दूर आधा भी हासिल नहीं कर पाते। इसी का नतीजा है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 समाप्ति के बाद भी विभाग केवल 30 करोड़ रुपए की ही वसूली कर पाया और 48 करोड़ रुपए का लक्ष्य अधूरा रह गया, जिससे सरकारी खजाने को बड़ा नुकसान पहुंचा है।</p>
<p><strong>सरकारी विभागों व उपभोक्ताओं पर 48 करोड़ बकाया</strong><br />जलदाय विभाग से मिली जानकारी के अनुसार, सरकारी विभागों, स्वायत्त संस्थाओं, औद्योगिक इकाइयों और बड़ी संख्या में उपभोक्ताओं पर पानी के बिलों की करोड़ों रुपए की बकाया राशि वर्षों से बकाया चल रही है। इसके बावजूद जल अधिकारियों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जाती। जबकि, सबसे ज्यादा पानी का बिल सरकारी महकमों पर बकाया चल रहा है। फिर भी उनके खिलाफ न तो कनेक्शन काटने की कार्रवाई की गई और न ही बकाया वसूली के लिए कोई विशेष अभियान चलाया गया। परिणामस्वरूप बकाया राशि लगातार बढ़ती जा रही है और हर साल विभाग का राजस्व लक्ष्य अधूरा रह जाता है।</p>
<p><strong>नगर निगम और केडीए पर 103 करोड़ का बकाया</strong><br />जल अधिकारियों का कहना है कि राजस्व वसूली की राह में सबसे बड़ा अडंगा सरकारी महकमा ही है, जो करोड़ों रुपए बकाया राशि पर कुंडली मार बैठा है। जिसकी वजह से जलदाय विभाग का टारगेट पूरा होना असंभव बना हुआ है। इनमें सबसे बड़े बकायदार नगर निगम व केडीए है। दोनों विभागों पर कई वर्षों का 103 करोड़ रुपए पानी का बिल बकाया चल रहा है। जबकि, हमने 16 फरवरी को नोटिस भी दे चुके हैं और हर सोमवार को कलक्टर की अध्यक्षता में होने वाली अंतरविभागीय बैठकोें में भी मामले को उठाते हैं, इसके बावजूद न तो नगर निगम और न ही केडीए द्वारा बकाया जमा करवाया गया। नगर निगम कोटा उत्तर-दक्षिण पर 63 करोड़ तो केडीए पर 40 करोड़ रुपए पानी का बिल वर्षों से लंबित चल रहा है।</p>
<p><strong>गत वर्ष 36 करोड़ की हुई थी राजस्व वसूली</strong><br />गत वित्तीय वर्ष में विभाग को राजस्व वसूली का लक्ष्य 73 करोड़ रुपए मिला था। जिसमें से अधिकारी केवल 36 करोड़ का ही राजस्व हासिल कर सके थे, जबकि, 37 करोड़ रुपए बकाया रह गए थे। इस वर्ष 48 करोड़ रुपए का राजस्व बकाया रह गया।</p>
<p><strong>नोटिसों तक सीमित रही कार्रवाई</strong><br />नाम न छापने की शर्त पर विभागीय अधिकारियों ने बताया कि अधिकांश मामलों में जलदाय विभाग केवल नोटिस जारी कर इतिश्री कर लेता है। इसका सबसे बड़ा उदारहण फरवरी माह का है, विभाग ने केडीए व नगर निगम को बकाया जमा करवाने का नोटिस जारी किया था लेकिन बकायादारों से वसूली सुनिश्चित करने के लिए न तो नियमित फॉलोअप किया जाता है और न ही जवाबदेही तय की जाती है। यही कारण है कि बड़े बकायादारों में भुगतान को लेकर किसी प्रकार का दबाव महसूस नहीं होता।</p>
<p><strong>मॉनिटरिंग व्यवस्था पर सवाल</strong><br />राजस्व वसूली विभाग की सबसे महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों में से एक मानी जाती है, लेकिन लक्ष्य और उपलब्धि के बीच 48 करोड़ रुपए का अंतर विभागीय मॉनिटरिंग और जल अफसरों की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाता है। केडीए व नगर निगम के अलावा, पुलिस, शिक्षा विभाग सहित अन्य कई सरकारी विभाग शामिल हैं, जिनके लाखों से करोड़ों का बकाया चल रहा है।</p>
<p><strong>जवाबदेही तय हो तो रफ्तार पकड़े वसूली अभियान</strong><br />जानकारों का मानना है कि बकाया वसूली के लिए विशेष अभियान चलाने, बड़े बकायादारों की सूची सार्वजनिक करने और जिम्मेदारों के अधिकारियों की जवाबदेही तय करने से ही स्थिति में सुधार संभव है। अन्यथा हर वर्ष सरकार को करोड़ों रुपए के राजस्व नुकसान का सामना करना पड़ता रहेगा।</p>
<p>सरकार से मिलने वाला वित्तीय राजस्व लक्ष्य शत-प्रतिशत पूरा करने के हमारी ओर से लगातार प्रयास किए जाते हैं। सबसे बड़े बकायादार केडीए व नगर निगम है। जिन्हें बकाया पानी का बिल जमा करवाने के लिए हर साल नोटिस दिया जाता है ओर जिला कलक्टर के समक्ष भी मामला उठाते हैं। गत 16 फरवरी को भी हमने दोनों नगर निगम व केडीए को इस संबंध में नोटिस जारी किए थे।<br /><strong>-दीपक कुमार झा, एक्सीईएन जलदाय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 15 Jun 2026 14:15:08 +0530</pubDate>
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                <title>नाबालिग से दुष्कर्म के आरोपी को 20 साल की कठोर कैद, 50 हजार रुपए जुर्माना </title>
                                    <description><![CDATA[आरोपी  धमकाता था किसी को बताया तो उसे व उसके माता पिता को जान से मार देगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/accused-in-minor-s-rape-case-sentenced-to-20-years-of-rigorous-imprisonment-and-fined-50-000-rs/article-156908"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-11/court-hammer041.jpg" alt=""></a><br /><p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us">कोटा। नाबालिग बालिका से<span>  </span>दुष्कर्म<span>  </span>के मामले में पोक्सो क्रम संख्या-4 के न्यायाधीश विक्रम सिंह ने शनिवार को<span>  </span>आरोपी<span>  </span>को दोषी मानते हुए बीस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। न्यायाधीश ने<span>  </span>उड़िया बस्ती निवासी आरोपी ललित (43) को 50 हजार रुपए के अर्थ दंड से भी दंडित किया है। आरोपी के खिलाफ पीड़ित बालिका की मां ने पुलिस थाना अनंतपुरा में मुकदमा दर्ज कराया था।</span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"><span> </span>विशिष्ट लोक अभियोजक वीरेंद्र सिंह भानावत ने बताया कि पीड़िता की मां ने<span>  </span>19 मई 2025 को रिपोर्ट में जानकारी दी कि वह थाना क्षेत्र में अपने परिवार के साथ रह रही है। उसकी 14 वर्षीय पुत्री<span>  </span>कुछ घबराई हुई थी।<span>  </span>उसने बच्ची से घबराने व सहमे रहने का कारण पूछा तो उसने बताया था कि एक दिन वह घर पर अकेली<span>  </span>छत पर सो रही थी तभी वहां पर ललित आया और उसके साथ दुष्कर्म किया और धमकाया कि अगर इस बारे में किसी को कुछ बताया तो उसे व उसके माता पिता को जान से मार देगा। </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"> </span></p>
<p class="MsoNormal" style="margin-bottom:0.0001pt;"><span lang="en-us" style="font-family:Mangal, serif;" xml:lang="en-us"><span> </span>पीड़िता का आरोप है कि ललित जब भी उसकी पुत्री को अकेला<span>  </span>देखता<span>  </span>तो डरा धमकाकर उसके साथ तीन साल से<span>  </span>दुष्कर्म कर रहा है। उसने उसे 18 मई को भी डरा धमका बुलाया और उसके साथ दुष्कर्म किया था। रिपोर्ट पर पुलिस ने आरोपी के खिलाफ<span>  </span>धारा 65 (1), 64(2) (एम), 332 (बी) भारतीय न्याय संहिता 2023 एवं धारा 5(एल )/6, 3/4(2) पोक्सो एक्ट 2012 में मुकदमा दर्ज किया था । अनुसंधान<span>  </span>के दौरान पुलिस ने पीड़िता का मेडिकल करवाकर बयान दर्ज कराए । इसके बाद<span>  </span>आरोपी ललित को गिरफ्तार किया था।<span>   </span>पुलिस ने आरोपी को दोषी करार देते हुए न्यायालय में 6 अगस्त 2025 को आरोप-पत्र पेश किए। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की ओर से अदालत में 13 गवाहों के बयान लेखबद्ध करवाए गए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी ललित को दोषी करार देते हुए बीस साल के कठाेर कारावास और 50 हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है। </span></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 17:22:32 +0530</pubDate>
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                <title>दो पल के सुकून का मिटा दिया नामो-निशां, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[यह कैसा सिविक सैंस: सड़क किनारे फुटपाथ पर लगाई अधिकतर बैंचे हुई गायब।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/all-traces-of-a-peaceful-respite-have-been-wiped-out/article-156884"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(5)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। तत्कालीन नगर विकास न्यास(केडीए) की ओर से राहगीरों की सुविधा के लिए सड़क किनारे फïुटपाथ पर लगाई गई लकड़ी की अधिकतर बैंचे गायब हो गई है। हालत यह है कि बैंचों को चोरी करने वालों ने उनके नामो निशां तक मिटा दिए हैं। पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय में तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से शहर में विकास व सौन्दर्यीकरण के कार्य करवाए गए थे। जिसके तहत चौराहों व मुख्य मार्गों पर भी आमजन की सुविधा को ध्यान में रखते हुए जहां रोशनी के लिए डेकोरेटिव लाइटें लगाई थी। वहीं राहगीरों को कुछ समय आराम से बैठने के लिए फुटपाथ पर लकड़ी की बैंचे भी लगाई थी। जिनका फ्रेम लोहे का था। स्टेशन रोड पर सर्किट हाउस से सूचना केन्द्र व राजकीय महाविद्यालय के सामने से होते हुए आकाशवाणी कॉलोनी मुख्य मार्ग से बड़ तिराहे तक और किशोर सागर तालाब के किनारे समेत कई जगह पर ऐसी दर्जनों बैंच लगाई गई थी। जिन पर उस समय लाखों रुपए खर्च किए गए थे।</p>
<p><strong>धीरे-धीरे हुई दुर्दशा</strong><br />इन बैंचों को लोहे की एंगल से जमीन में गाड़कर फिïक्स किया गया था। जिससे कोई इन्हें नुकसान नहीं पहुंचा सके। लेकिन इनके लगने के कुछ समय तक तो ये सभी रही। लोगों ने इन बैंचों पर दोनों तरफ बैठने का आनंद भी लिया। तालाब किनारे तो लोग इन बैंच पर बैठकर पानी की लहरों, फव्वारों व तालाब में तैरे घोड़ों तक का आनंद लेते रहे हैं। कुछ समय तक तो ये बैंचे सही रही। लेकिन समय के साथ धीरे-धीरे इनकी दुर्दशा होने लगी। सबसे पहले तालाब किनारे लगी बैंचों के पहले एक दो लकड़ी के पाटे गायब हुए। फिर उनकी एंगल गायब हुई। कई जगह से तो आधी बैंच गायब हुई। लेकिन इस पर किसी ने ध्यान नहीं दिया। नतीजा रह रहा है कि शहर का मुख्य व व्यस्ततम मार्ग होने के बावजूद स्टेशन रोड पर सर्किट हाउस से बड़ तिराहे तक और केएसटी के फुटपाथ पर लगी सभी बैंचें फ्रेम समेत जड़ से ही गायब हो गई हैं। इन्हें चोरी करने वालों ने इनके नामों निशां तक मिटा दिए हैं। जिससे पहले इन बैंचों पर बैठने का आनंद ले चुके लोग तक हैरान हैं।</p>
<p><strong>अनदेखी के चलते हुए जनता के धन की हुई बर्बादी</strong><br />लोगों का कहना है कि कोटा विकास प्राधिकरण ने तो शहर वासियों को बैठने व कुछ देर आराम करने की सुविधा दी थी। जिससे सुबह के समय गार्डन में सैर करने आने वाले लोग तक इन बैंचों पर बैठने का आनंद लेते थे। लेकिन शुरुआत में इनकी दुर्दशा होने पर ही ध्यान नहीं दिया गया। जिससे अनदेखी के चलते जनता की कमाई से खर्च किए गए लाखों रुपए बर्बाद हो गए।</p>
<p>आकाशवाणी कॉलोनी निवासी महेश शर्मा ने बताया कि नगर निगम व कोटा विकास प्राधिकरण लोगों की सुविधा पर व शहर को सुनदर बनाने पर लाखों-करोड़ों रुपए खर्च कर रहा है। लेकिन लोग विशेष रूप से असामाजिक तत्व व स्मैकची इन्हें नुकसान पहुंचा रहे हैं।</p>
<p>नयापुरा निवासी लालचंद नागर ने बताया कि उन्होंने इन बैंचों पर कई बार बैठकर आराम किया है। लेकिन अब वे नजर ही नहीं आ रही है। पुलिस व प्रशासन को चाहिए कि सीसीटीवी कैमरों के आधार पर सरकारी सप्ति को नुकसान पहुंचाने वालों का पता लगाकर उन्हें दंडित किया जाए। साथ ही उनके नाम सार्वजनिक किए जाएं। जिससे लोगों को पता चले कि आखिर ऐसा कौन कर रहे हैं।</p>
<p><strong>कई बार पुलिस को दी शिकायत</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि सरकारी सम्पति को विशेष रूप से लोहे की रैलिंग,डेकोरेटिव लाइटें व बिजली की केबल समेत अन्य को चोरी व नुकसान पहुंचाने वालों के खिलाफ कार्रवाई के लिए पुलिस अधिकारियों को कई बार लिखित शिकायत दी जा चुकी है। लेकिन अभी तक किसी के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई है। जिससे ऐसा करने वालों को हौंसले बुलंद हो रहे हैं।</p>
<p><strong>अधिकारियों ने साधी चुप्पी</strong><br />शहर के मुख्य मार्गों व फुटपाथ पर लगाई गई बैंचों के गायब होने के बारे में जब केडीए अधिकारियों से बात करनी चाहिए तो किसी ने भी स्पष्ट जानकारी नहीं दी। सभी ने इस संबंध में चुप्पी साध ली।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 15:29:00 +0530</pubDate>
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                <title> बड़ा सवाल - कहां गायब हो रहा पानी, इतना पानी की 31 लाख की आबादी पले, यहां तो 15 लाख में भी पानी का टोटा</title>
                                    <description><![CDATA[प्रति व्यक्ति 345 लीटर प्रतिदिन जल उपलब्धता, जो BIS मानक (135 लीटर) से दोगुने से अधिक और राष्ट्रीय औसत से लगभग तीन गुना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-big-question--where-is-the-water-vanishing--there-is-enough-water-here-to-sustain-a-population-of-3-1-million--yet-even-a-population-of-1-5-million-faces-a-water-shortage/article-156880"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(7)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा नगरी कोटा में पानी की उपलब्धता और उसकी असल सप्लाई के बीच एक ऐसा चौंकाने वाला गणित सामने आया है, जो न केवल पानी के अत्यधिक दोहन को दर्शाता है, बल्कि सिस्टम की लाचारी और आमजन की लापरवाही को भी उजागर करता है। ब्यूरो ऑफ इंडियन स्टैंडर्ड (BIS) नई दिल्ली के स्वच्छता मानकों के मुताबिक, हॉस्टलों या सामान्य रिहायशी इलाकों में प्रति व्यक्ति 135 लीटर पानी (LPHD) की आवश्यकता होती है। लेकिन कोटा में प्रति व्यक्ति आबादी के अनुपात को देखा जाए, तो यहाँ 345 लीटर प्रति व्यक्ति की भारी-भरकम खपत सामने आ रही है। यह राष्ट्रीय औसत से दोगुने से भी ज्यादा है, जो पानी के प्रति गंभीर लापरवाही का सबसे बड़ा सबूत है।</p>
<p><strong>मेट्रो शहर जैसी क्षमता, फिर भी मांग और आपूर्ति में बड़ा फेरबदल</strong><br />जलदाय विभाग के दावों और आंकड़ों को देखें, तो कोटा शहर में स्वच्छ पानी उपलब्ध कराने के लिए भारी-भरकम इंफ्रास्ट्रक्चर मौजूद है। शहर में पानी की कुल उत्पादन क्षमता 517 मिलियन लीटर प्रतिदिन (MLD) है, जिसमें से वर्तमान में 425 MLD पानी का रोजाना उत्पादन किया जा रहा है:<br />अकेलगढ़ प्लांट: 64 MLD के 3 और 75 MLD का 1 संयंत्र (कुल 267 MLD)<br />श्रीनाथपुरम प्लांट: 50 MLD<br />नदी पार क्षेत्र: 130 MLD और 70 MLD के दो संयंत्र (कुल 200 MLD)<br />यदि राष्ट्रीय मानक के हिसाब से गणना की जाए, तो यह 425 MLD पानी करीब 31 लाख 45 हजार की आबादी की दैनिक जरूरतों को पूरा करने के लिए काफी है। लेकिन विडंबना देखिए कि मात्र 15 लाख की आबादी (फ्लोटिंग पापुलेशन सहित) वाले कोटा शहर में यह पानी भी कम पड़ता दिखाई दे रहा है। वर्तमान में यहाँ औसतन 280 लीटर प्रति व्यक्ति प्रतिदिन के हिसाब से पानी की सप्लाई का गणित बैठ रहा है, जो कि किसी भी बड़े मेट्रो शहर की तुलना में बहुत अधिक है।</p>
<p><strong>आखिर कहाँ जा रहा है चम्बल का पानी?</strong><br />इतने बड़े पैमाने पर उत्पादन होने के बाद भी कोटा की प्यास पूरी तरह क्यों नहीं बुझ पा रही है? 'दैनिक नवज्योति' के विश्लेषणात्मक आंकलन में इसके पीछे कुछ बेहद गंभीर कारण सामने आए हैं।</p>
<p><strong>अस्पतालों और हॉस्टल हब में पानी का गणित</strong><br />कोटा में पानी की सबसे ज्यादा खपत वाले क्षेत्रों में अस्पताल और यहाँ का मशहूर कोचिंग-हॉस्टल एरिया शामिल है।<br />अस्पतालों का हाल: कोटा के एमबीएस अस्पताल,न्यू मेडिकल कॉलेज, सुपर स्पेशलिटी विंग सहित अन्य सरकारी चिकित्सा संस्थानों को मिला लिया जाए, तो यहाँ करीब 2,500 बेड्स की क्षमता है। चिकित्सा मानकों के अनुसार, अस्पताल में प्रति बेड 450 लीटर पानी की आवश्यकता होती है। इस लिहाज से अस्पतालों में प्रतिदिन 11 लाख लीटर पानी की खपत हो रही है।</p>
<p><strong>हॉस्टल और पीजी हब</strong><br />कोटा में वर्तमान में 3,800 से अधिक रजिस्टर्ड हॉस्टल और 40,000 से अधिक पीजी संचालित हैं। कुन्हाड़ी, राजीव गांधी नगर, तलवंडी, जवाहर नगर और विज्ञान नगर जैसे पॉश और कोचिंग इलाकों में स्थित इन हॉस्टलों में हजारों छात्र रह रहे हैं। यहाँ पानी की मांग सबसे ज्यादा रहती है।</p>
<p><strong>सप्लाई नेटवर्क से बाहर 150 कॉलोनियां</strong><br />शहर की 150 से अधिक कॉलोनियां और कई आधुनिक मल्टी-स्टोरी बिल्डिंग्स आज भी पीएचईडी की मुख्य पाइपलाइन सप्लाई से बाहर हैं। इनमें बून्दी रोड़, बारां रोड़ थेकड़ा,रायपुरा व अनन्तपुरा के अलावा नान्ता, सीन्ता क्षेत्र की 3 दर्जन से अधिक मल्टी स्टोरीज है व कॉलोनियां है जो पुरी तरह आबाद है लेकिन सरकार के नियमानुसार पानी की आपुर्ति से अभी तक दुर है।</p>
<p><strong>चम्बल के पानी को चखा तक नहीं</strong><br />लैंडमार्क (कुन्हाड़ी) व कोरल पार्क जैसे बड़े हॉस्टल एरिया जहां 60 हजार से अधिक हॉस्टल छात्र रहते है। यहां छात्रों ने तो अभी तक कोटा व चम्बल के पानी के स्वाद को चखा ही नहीं। यह एरिया तो आज भी पानी की मुख्य लाइन से वंचित हैं और निजी साधनों व टैंकरों पर निर्भर हैं। यानी जो पानी कागजों में सप्लाई हो रहा है, वह असल में इन नलों तक पहुँच ही नहीं पा रहा। मुख्य शहर के अलावा कोचिंग क्षेत्रों में कोरल व लैण्ड़ मार्क जैसे इलाकों में तो आज तक जलदाय विभाग ने सप्लाई दी ही नहीं।</p>
<p><strong>185 हजार उपभोक्ता कनेक्शन,लाइन लॉस और लीकेज</strong><br />425 MLD पानी ट्रीट होने के बाद जब प्लांट से निकलता है, तो पुरानी पाइपलाइनों में लीकेज और अवैध कनेक्शनों के कारण पानी का एक बड़ा हिस्सा जमीन में समा जाता है या बर्बाद हो जाता है। दीपक झा ने बताया कि अब तक शहर में विभाग के द्वारा जारी किये गये कुल कनेक्शन 1 लाख 85 हजार है। ऐसे में यदि प्रति परिवार 6 लोग भी जोडें तो यह आंकडा 11 लाख व्यक्तियों का हो जाता है। जबकि हमारी क्षमता 31 लाख से अधिक लोगो को पानी की सुविधा देने की है। इतना पानी आखिर जा कहां रहा है। यह तो बडी बात है। इस और हमारी टीम काम कर रही है।</p>
<p><strong>अत्यधिक दोहन और जागरूकता की कमी</strong><br />चम्बल नदी के मुहाने पर बसे होने के कारण कोटा के लोगों में पानी को सहेजने की प्रवृत्ति कम देखी गई है। फुल फ्लशिंग टॉयलेट्स और हॉस्टलों में पानी की अनियंत्रित बर्बादी के कारण प्रति व्यक्ति खपत 345 लीटर तक पहुँच गई है।<br /><strong>-शैलेन्द्र कुमार सक्सेना उपभोक्ता दादाबाड़ी</strong></p>
<p>कोटा में पानी की कोई कमी नहीं है, कमी है तो सिर्फ बेहतर प्रबंधन और वितरण प्रणाली की। यदि जलदाय विभाग लीकेज को रोकने और टेल-एंड (आखिरी छोर) तक पानी पहुँचाने में कामयाब हो जाए, तथा नागरिक पानी की बर्बादी रोकें, तो कोटा का यह पानी आने वाले कई सालों तक की आबादी के लिए अमृत साबित हो सकता है। फिलहाल, 15 लाख की आबादी में मेट्रो जितना पानी खपा देने का यह रहस्य सिस्टम पर कई बड़े सवाल खड़े करता है।<br /><strong>- राजू सोनी उपभोक्ता नांता</strong></p>
<p>हमारे यहां पिछले सालों में करीब 1 दर्जन मल्टी स्टोरीज ने पीएचडी की पाईप लाईन से कनेक्शन के लिये आवेदन किया था हमनें जैसे ही डिमाण्ड़ नोट जारी किया उसके बाद से केवल 3 मल्टी स्टोरीज ने ही पैसे जमा कराये बाकि के आवेदन अभी आगे नहीं बढ़ सके है। हमारी तरफ से जैसे ही अमृत 2.0 का काम आगे बढता है वैसे ही अन्य इलाकों को भी पानी के लिये जोडा जायेगा।<br /><strong>-दीपक झा अतिरिक्त मुख्य अभियन्ता पीएचईडी कोटा</strong></p>
<p>कोटा में प्रति व्यक्ति पानी की खपत 380 लीटर तक पहुंचना जल संसाधनों के अत्यधिक दोहन और भविष्य के बड़े संकट का सीधा संकेत है। पीने के साफ पानी से सड़कें धोना और खुले नलों से होने वाली बर्बादी पर्यावरण और जल सुरक्षा के लिहाज से एक नासूर बन चुकी है।<br />पानी की उपलब्धता से ज्यादा पानी के महत्व से लोगों को जोडना होगा। पानी की बर्बादी पर सभी को मुखरता से आवाज उठानी ही होगी। सरकार 1 लीटर पानी तैयार करने मे जितना समय और पैसा लगा रही है उतने से भी कम यदि सही वितरण और सख्ती से प्रबंधन पर लगा दे तो सारी परेशानी दूर हो जाए सभी को पर्याप्त व शुद्ध पानी मिल जाए।<br /><strong>-अनिल रावत वरिष्ठ वैज्ञानिक केन्दीय प्रदूषण नियंत्रक बोर्ड</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Jun 2026 15:26:40 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल की चौखट पर बिखरती गृहस्थियां : मंगल सूत्र-मकान गिरवी, टैक्सी बिकी, नौकरी छूटी</title>
                                    <description><![CDATA[बढ़ते कर्ज और टूटती उम्मीदों के बीच अनिश्चित भविष्य की लड़ाई लड़ रहा प्रसूताओं का परिवार
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/households-crumbling-at-the-hospital-doorstep---mangalsutras--and-homes-mortgaged--taxis-sold--jobs-lost/article-156782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मेडिकल कॉलेज की सुपर स्पेशियलिटी अस्पताल के आईसीयू में भर्ती प्रसूताओं की सांसों को बचाने की जंग जितनी कठिन है, उससे कहीं ज्यादा मुश्किल लड़ाई अस्पताल के बाहर उनके परिवार लड़ रहे हैं। अब यह परिस्थितियां सिर्फ इलाज तक सीमित नहीं रही बल्कि यह उन घरों की कहानी है जहां आर्थिक तंगी के बीच चूल्हे ठंडे पड़ गए। नवजात बच्चे मां की बजाए रिश्तेदारों की गोद में पल रहे और मजदूर पिता, अस्पताल व बिखरती गृहस्थी के बीच टूट रहा है। परिवार की आखिरी जमा पूंजी, जेवर, मंगलसूत्र, मकान, वाहन और भविष्य तक गिरवी रखे जा चुके हैं। अस्पताल की चौखट पर बैठे इन परिवारों की जिंदगी मानो ठहर गई है। उनकी सुबह डॉक्टरों की रिपोर्ट से शुरू होती है और रात इस चिंता के साथ खत्म होती है कि अगले दिन मरीज की डाइट, घर का राशन और बच्चों की जरूरतों के लिए पैसे कहां से आएंगे। इन परिवारों के लिए अब सबसे बड़ी चिंता इलाज के साथ गृहस्थी बचाने की हो गई है। वे मदद की गुहार लगा रहे हैं लेकिन न सरकार सुन रही है और न ही प्रशासन। दर्द बयां करते हुए परिजनों की आंखें भर आती हैं। पेश है खबर के प्रमुख अंश...</p>
<p><strong>पत्नी के जेवर गिरवी रखे तब राशन आया, अब वो भी खत्म</strong><br />किशोरपुरा गांव निवासी नरेश की पत्नी पिंकी पिछले 38 दिनों से आईसीयू में भर्ती है। नरेश कहते हैं, मैं मजदूरी करके परिवार चलाता था, लेकिन डेढ़ महीने से अस्पताल में हूं। काम-धंधा छूट गया। घर में 50 किलो गेंहू कर्ज लेकर डलवाए थे, अब वह भी खत्म हो गए। मजबूरी में पत्नी के जेवर गिरवी रख राशन व इलाज में होने वाले खर्च का इंतजाम किया था, लेकिन अब वह सहारा भी खत्म होने वाला है। गांव में दो मासूम बेटियां, बुजुर्ग माता-पिता और छोटा भाई हैं। पत्नी के लिए दूध, दलिया, अंडे, पनीर, जूस और अन्य प्रोटीनयुक्त डाइट का इंतजाम करना पड़ता है। साथ ही मरीज के साथ रहने वाले दो लोगों का भोजन, डायपर और अन्य जरूरतों में अब तक 50 हजार रुपए से अधिक खर्च हो चुके हैं। पत्नी कब ठीक होगी, कोई नहीं बता रहा। डॉक्टर तीन महीने का समय बता रहे हैं, लेकिन तब तक परिवार क्या खाएगा, बच्चों को क्या खिलाऊंगा।</p>
<p><strong>कमाई का एक ही जरिया थी टैक्सी,वह भी बिक गई</strong><br />4 मई की घटना मोहन की जिंदगी के लिए नासूर बन गई। धन्नी बाई के पति मोहन टैक्सी चलाकर परिवार का गुजारा करते थे, लेकिन वह भी इलाज और घर खर्च के लिए बिक गई। उन्होंने बताया कि यह सिर्फ टैक्सी नहीं बल्कि मेरी रोजी-रोटी थी। डेढ़ माह से पत्नी अस्पताल में भर्ती है, मैं काम पर नहीं जा पा रहा। आमदनी भी ठप हो गई। मां हॉस्टल की मैस में काम करती थीं, वह भी छूट गया। दोनों की कमाई से घर चलता था, लेकिन अब दोनों ही बेरोजगार हैं। घर पर बीमार पिता और दो छोटी बेटियां हैं, जिनकी देखरेख के लिए बहन ससुराल छोड़ यहां आई है। घर का राशन, पिता की दवाइयां, पत्नी की डाइट, जरूरी चीजों के लिए कर्जा लिया था, लेकिन काम-धंधे छूट जाने से चुका नहीं सका। ऐसे में टैक्सी कार बेचकर परिवार चलाना पड़ रहा है। नवजात बच्चे की देखभाल करने वाला भी कोई नहीं है। उसे बारां बहन के घर भेजा है। बेटियों के स्कूल खुलने वाले हैं। फीस, किताबें और अन्य खर्च सामने हैं। सोचकर ही आंखें भर आती हैं कि आगे क्या होगा।</p>
<p><strong>अभी तक 45 हजार खर्च, अब फिर से कर्जा लेना पड़ा</strong><br />बरड़ा बस्ती निवासी सुशीला के पति ओम प्रकाश कहते हैं, मैं मजदूर हूं। आर्थिक स्थिति बहुत खराब है। पत्नी की तबीयत ठीक नहीं है। पिछले डेढ़ माह से मैं और दो मासूम बेटियां अस्पताल की चौखट पर हैं। काम-धंधे छूट गए। डॉक्टर्स के कहने पर पत्नी को डाइट में दूध, दलिया, अंडे, पनीर, अनार, सेव बाजार से लाकर देने होते हैं। इसके अलावा बेटियां व मेरा दो वक्त का भोजन भी बाहर से लाना पड़ता है। प्रतिदिन 300 से 400 रुपए खर्च हो रहा है। अब तक 45 से 50 हजार रुपए खर्च हो चुके हैं, अब गिरवी रखने के लिए कुछ नहीं बचा, सिवाए बाइक के, अब वह भी गिरवी रख पैसों का इंतजाम करने जा रहा हूं। लेकिन, हम रोज खाने-कमाने वाले लोग हैं, तीन माह तक बिना रोजगार के कैसे परिवार संभालेंगे। डॉक्टर्स मरीज को घर ले जाने की बात कहते हैं लेकिन कल रात को ही सुशीला की तबीयत खराब हो गई, वह उल्लिटयां कर रही है, हाथ-पैर सुन्न हो जाते हैं। भरी गर्मी में भी सर्दी से कांपती है। ऐसे हालात में कैसे घर ले जाऊं। सरकार व प्रशासन कोई भी मदद नहीं कर रहा। भीख मांगने की नौबत आ गई। आत्मा रोती है लेकिन सुनने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>मंगल सूत्र और मकान गिरवी, 2.50 लाख का हुआ कर्जा</strong><br />कसार निवासी किरन के पति सोनू कहते हैं, पत्नी के इलाज में 2.50 लाख का कर्जा हो गया फिर भी किरन पूरी तरह ठीक नहीं है। 8 मई को मेडिकल कॉलेज अस्पताल ने निजी हॉस्पिटल रैफर किया। यहां मेडिसीन में ही 1.50 लाख रुपए खर्च हो गए। वहीं, बच्चे की जांचों का खर्चा भी अलग था। हॉस्पिटल में परिवार के 5-6 लोग रहते थे, रोजाना का भोजन की 500 रुपए का आता था। इस तरह से 8 दिन में ही निजी हॉस्पिटल में 1.80 लाख रुपए खर्च हो गए। प्रशासन व मेडिकल कॉलेज ने कोई मदद नहीं की। पत्नी का मंगल सूत्र व मकान गिरवी रख पैसों का इंतजाम करना पड़ा। 16 मई को छुट्टी कर दी गई। लेकिन तबीयत फिर से बिगड़ गई। 18 मई को ही मेडिकल कॉलेज के एसएसबी में लाए। यहां 10 जून तक भर्ती रही। यहां डाइट, परिवार के सदस्यों का भोजन, पार्किंग सहित अन्य चीजों में 35 से 40 हजार खर्च हो गए।</p>
<p><strong>नौकरी छूटी, जमा पूंजी खत्म अब ब्याज पर 80 हजार लिए</strong><br />रागिनी के पति लोकेश प्राइवेट नौकरी करते थे। 4 मई के बाद से ही वह अस्पताल में हैं। उन्होंने कहा, एक महीने से ज्यादा समय बीत गया लेकिन पत्नी की तबीयत में सुधार नहीं हुआ। पूरे महीने नौकरी पर नहीं जा सका, तनख्वाह कटी और नौकरी भी चली गई। घर में जो जमा-पूंजी थी वो भी अस्पताल, पार्किंग, मरीज की डाइट सहित अन्य जरूरी कार्यों में खर्च हो गए। घर में माता-पिता, दो बेटियां, एक नवजात है। कमाने वाला मैं अकेला हूं लेकिन बेरोजगार होने से परिवार चलाना मुश्किल हो गया। घर का राशन भी खत्म हो गया। मजबूरी में ब्याज पर 80 हजार रुपए लिए, तब जाकर घर पर राशन आ सका। डॉर्क्ट्स तीन माह तक इलाज जारी रहने की बात कहते हैं, इतने दिनों हम बेरोजगारी की हालत में यहां रहेंगे तो परिवार कैसे चलेगा। सरकार को मदद के लिए आगे आना चाहिए।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:35:36 +0530</pubDate>
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                <title>यह कैसी गुणवत्ता जांच, प्रयोगशाला पर ही बरसों से ताला</title>
                                    <description><![CDATA[निगम ने कई साल पहले हाड़ौती उद्यान में प्रयोगशाला स्थापित की थी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/what-kind-of-quality-check-is-this--the-laboratory-has-remained-locked-for-years/article-156781"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की ओर से करवाए जाने वाले निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जांच के लिए निगम की प्रयोगशाला तो है लेकिन उस पर बरसों से ताला लटका हुआ है। जिससे निगम की निजी प्रयोगशाला में जांच करवानी पड़ रही है। नगर निगम की ओर से शहर में सड़क व अन्य निर्माण कार्य संवेदकों के माध्यम से करवाए जा रहे हैं। निर्माण कार्य के दौरान उपयोग होने वाली सामग्री की गुणवत्ता का पता लगाने के लिए निर्माण सामग्री की जांच प्रयोगशाला में करवाई जाती है। इसके लिए नगर निगम की ओर से कई साल पहले हाड़ौती उद्यान में प्रयोगशाला स्थापित की थी। उस समय यहां जांच के लिए उपकरण व तकनीकी स्टाफ भी लगाए गए थे। जिससे कुछ समय तक तो इसका उपयोग हुआ। लेकिन उसके बाद इस पर एक बार ताला लगा तो उसके बाद से खुला ही नहीं।</p>
<p>वर्तमान में हालत यह है कि प्रयोगशाला पर बरसों से ताला ही लटका हुआ है। नगर निगम के अधिकारियों ने कुछ समय पहले इसे खोलकर देखा था तो अधिकतर जांच उपकरण या तो खराब हो गए हैं या फिर चोरी हो गए। जिससे इस प्रयोगशाला में निर्माण सामग्री की गुणवत्ता जाच ही नहीं की जा रही। निर्माण कार्य में उपयोग होने वाली सामग्री की जांच निगम अभियंताओं व अधिकारियों को निजी प्रयोगशालाओं में राशि खर्च करके करवानी पड़ रही है।</p>
<p><strong>निगम आयुक्त ने किया था निरीक्षण</strong><br />नगर निगम आयुक्त ओम प्रकाश मेहरा ने कुछ समय पहले निगम अधिकारियों व अभियंताओं के साथ इस प्रयोगशाला का निरीक्षण किया था। उस समय वहां की स्थिति देखकर वे भी दंग रह गए थे। उन्होंने अभियंताओं से कहा कि जब निगम के पास प्रयोगशाला है तो इसे चालू किया जाए। लेकिन उसके बाद भी काफी समय हो गया अभी तक इसे चालू नहीं किया गया है। अभी भी प्रयोगशाला के मुख्य द्वार पर ताला ही लटका हुआ है।</p>
<p><strong>सार्वजनिक निर्माण विभाग की है लैब</strong><br />इधर शहर में सार्वजनिक निर्माण विभाग की अपनी प्रयोगशाला है। जहां उनके द्वारा करवाए जाने वाले निर्माण कार्यों की सामग्री की गुणवत्ता जांच करवाई जा रही है। जबकि निगम की प्रयोगशाला होने के बावजूद उसका उपयोग नहीं हो पा रहा है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कुछ समय पहले प्रयोगशाला का निरीक्षण किया था। उस समय जानकारी मिली कि यहां जांच के लिए उपयकरण व मशीनशरी की आवश्यकता है। इस पर इसे चालू करने के लिए आवश्यक कार्यवाही करने व उपकरण व मशीनरी खरीदने के आदेश दिए थे। उसके बाद टेंडर प्रक्रिया में समय लगा। लेकिन यह फाइनल होने के बाद मशीनरी व उपकरण क्रय करने का कार्यादेश जारी किया जा चुका है। करीब दस लाख की लागत से एक सप्ताह में उपकरण आ जाएंगे। जिससे दस दिन के भीतर प्रयोगशाला को शुरु किया जा सकेगा।<br /><strong>- ओम प्रकाश मेहरा, आयुक्त ,नगर निगम कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:34:20 +0530</pubDate>
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                <title>सुरक्षा का सफर प्रहरी पैनिक में : राजस्थान रोडवेज के पैनिक बटन फेल, रामभरोसे यात्री  </title>
                                    <description><![CDATA[निर्भया फंड से करोड़ों खर्च पर धरातल शून्य,बसों में सीसीटीवी के तार कटे और फर्स्ट एड बॉक्स खाली।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/safety-measures-falter---panic--systems-fail/article-156780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(2)7.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिस दिल्ली के निर्भया कांड की तर्ज पर महिला सुरक्षा के लिए रोडवेज बसों में शुरू की गई 'पैनिक बटन' योजना दम तोड़ती नजर आ रही है। दैनिक नवज्योति की विशेष रिपोर्ट और आधिकारिक आंकड़ों में यह चौंकाने वाला खुलासा हुआ है कि जिन उपकरणों को यात्रियों की सुरक्षा की गारंटी माना गया था, वे या तो तकनीकी लापरवाही की भेंट चढ़ चुके हैं या पूरी तरह बंद पड़े हैं।<br />आधिकारिक आंकड़ों के मुताबिक, वर्तमान में कुल 50 गाड़ियों (2017 और उसके बाद के मॉडल) में पैनिक बटन लगे हैं, जबकि पुरानी कंडम श्रेणी की गाड़ियों में यह सुविधा ही नहीं है। अनुबंधित 18 गाड़ियों को मिलाकर यह संख्या 68 होती है। विभाग का दावा है कि इनमें से केवल 39 विभागीय और 14 अनुबंधित बसों में पैनिक बटन चालू स्थिति में हैं, जिनकी रिपोर्ट हर दो-तीन दिन में ऐप के जरिए मुख्यालय भेजी जाती है। धरातल पर वास्तविकता यह है कि अमूमन केवल 36 से 40 बसों में ही यह सिस्टम ऑन रहता है।</p>
<p><strong>बटन दबाया पर नहीं आया कोई रिस्पॉन्स, स्टाफ काट देता है वायर</strong><br />पड़ताल में सामने आया कि पैनिक बटन का डिवाइस स्टीयरिंग के पास होने से कई बार गाड़ी स्टार्ट न होने या लाइट की समस्या आने पर ड्राइवर खुद ही वहां के वायर को छेड़कर सिस्टम बंद कर देते हैं। बूंदी डिपो की चित्तौड़गढ़ जाने वाली बस के स्टाफ ने बेफिक्री से कहा— लोग बार-बार बटन दबा देते थे और हमारे पास हेड ऑफिस से फोन आने लगते थे, इसलिए हमने इसे बंद ही कर दिया।</p>
<p><strong>फर्स्ट एड बॉक्स के लिए नई नोटशीट</strong><br />आपातकालीन स्थिति के लिए रखे गए फर्स्ट एड बॉक्स गायब या टूटे होने से खाली पड़े हैं। अब इस अव्यवस्था को सुधारने के लिए विभाग ने एक नई नोटशीट चलाई है, जिसके तहत प्राथमिक उपचार किट को सीधे कंडक्टर के पास सुरक्षित रखवाया जाएगा।</p>
<p><strong>अग्निशामक यंत्र भी नदारद</strong><br />करीब 45 बसों में आग बुझाने वाले अग्निशामक यंत्र (फायर एक्सटिंग्विशर) तक गायब मिले। ग्रामीण रूट की बसों के हालात तो और भी बदतर हैं, जहां तकनीकी सुविधाएं तो दूर, फटी सीटों के नीचे का फर्श तक टूटा हुआ नजर आया। राहत की बात केवल इतनी है कि जयपुर और मध्य प्रदेश (एमपी) रूट पर चालान की सख्ती को देखते हुए हाल ही में खरीदे गए नए फायर एक्सटिंग्विशर (अग्निशामक यंत्र) लगभग सभी गाड़ियों में रखवाए गए हैं। हालांकि, ग्रामीण रूटों पर चलने वाली अनुबंधित और पुरानी बसों में ये व्यवस्थाएं अब भी बदहाल हैं।</p>
<p><strong>टेंडर खत्म होने से सीसीटीवी बंद</strong><br />बसों में लगे सीसीटीवी कैमरों और स्क्रीन्स का टेंडर खत्म हो चुका है, जिसके चलते वर्तमान में ये पूरी तरह बंद पड़े हैं। बसों में लगे सीसीटीवी कैमरों और स्क्रीन्स के टेंडर खत्म होने से उनके कनेक्शन काट दिए गए हैं।</p>
<p><strong>अच्छा, हमें तो पता ही नहीं था कि यह बटन इतने काम का है!</strong><br />नयापुरा बस स्टैंड पर जब टीम ने महिला यात्रियों से बात की, तो अधिकांश ने इस सुरक्षा तकनीक के बारे में अनभिज्ञता जताई। 18 यात्रियों (8 महिलाएं, 10 पुरुष) में से केवल 2 को ही इसकी जानकारी थी। यात्री नितिन नांता और गोविंद सिंह गौड़ ने कहा कि इस सुरक्षात्मक तकनीक के बारे में यात्रियों को जागरूक करने के लिए रोडवेज टिकट पर पैनिक बटन के इस्तेमाल का उल्लेख होना चाहिए। साथ ही, हिंडोली की यात्रा कर रहे धर्मराज गौड़ ने बताया कि कई बसों में यह बटन सामान रखने वाले रैक (लगेज रैक) के नीचे छिपा होता है, जिससे यह दिखाई ही नहीं देता। सभी बसों में यह एक ही तय स्थान पर होना चाहिए।</p>
<p><strong>टिकट पर मिले जानकारी</strong><br />गोविन्द सिंह गौड ने बताया कि आम जनता को जागरूक करने के लिए रोडवेज की यात्रा टिकट पर पैनिक बटन की जानकारी का उल्लेख होना चाहिए। साथ ही टिकट चेकर (टीटीई) को सफर के दौरान बुजुर्गों और महिलाओं को इसके इस्तेमाल के बारे में खुद बताना चाहिए।</p>
<p>बूंदी से चित्तौड़ की बस में सफर कर रही गीता ने बताया कि मैने पहले इसके बारे अखबार में पढा यह महिलाओं के लिये तो बहुत ही काम का है साथ ही बुजुर्ग व आपात स्थिति में भी काम का है हालांकि रोडवेज की बसों में यह दिखता तो है लेकिन काम करता है या नहीं इस बारें में नहीं पता। धनराज मीणा ने बताया कि इस तरह की चीजे न केवल सुरक्षा की गारन्टी है बल्कि इनके होने से मानसिक शांति के साथ यात्रा करने का आनन्द भी आता है।</p>
<p>बसों में पैनिक बटन की स्थिति की लगातार मॉनिटरिंग की जाती है। हर दो से तीन दिन में इसकी रिपोर्ट मुख्यालय भेजी जा रही है। वर्तमान में जो तकनीकी खामियां या वायर कटने की समस्याएं सामने आई हैं, उन्हें तुरंत दुरुस्त करने के निर्देश दिए गए हैं। स्टाफ द्वारा जानबूझकर बटन बंद करने के मामले की जांच करवाकर सख्त कार्रवाई की जाएगी। इसके अलावा, फर्स्ट एड बॉक्स को अब सीधे कंडक्टर की कस्टडी में सुरक्षित रखने की नई व्यवस्था शुरू की जा रही है ताकि यात्रियों को समय पर प्राथमिक उपचार मिल सके।<br /><strong>- सुचिता गुप्ता, प्रबंध निदेशक (एमडी), राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Jun 2026 14:32:51 +0530</pubDate>
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                <title>साल के अंत तक ग्रीन फील्ड एयरपोर्ट पर पहुंच जाएगा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[जलदाय विभाग की ओर से  डाली जा रही है पाइपलाइन ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/water-to-reach-the-greenfield-airport-by-the-end-of-this-year/article-156651"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/111200-x-600-px)-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा-बूंदी ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट पर पहले और दूसरे फेज का निर्माण कार्य तो चल ही रहा है। वहीं एयरपोर्ट पर पानी पहुंचाने के लिए पाइप लाइन डालने का काम भी तेजी से किया जा रहा है। इस साल के अंत तक एयरपोर्ट पर पानी पहुंचने की संभावना है। एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफ इंडिया की ओर से शम्भूपुरा में 440.646 हैक्टेयर भूमि पर एयरपोर्ट का निर्माण किया जाना है। यह कार्य दो फेज में किया जा रहा है। पहले फेज में जहां रनवे निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है। वहीं फेज दो के तहत टर्निनल बिल्डिंग निर्र्माण का काम भी शुरु हो गया है। दोनों काम को अलग-अलग कम्पनियों द्वारा किया जा रहा है। जिससे काम तेजी से व समय पर पूरा हो सके। वहीं एयरपोर्ट तक पानी पहुंचाने के लिए जलदाय विभाग की ओर से पाइप लाइन डालने का काम भी किया जा रहा है।</p>
<p><strong>17.46 करोड़ से डलेगी लाइन</strong><br />एयरपोर्ट तक पानी पहुंचाने के लिए करीब 17.46 करोड़ रुपए खर्च होंगे। जलदाय विभाग व एयरपोर्ट अथोरिटी ऑफï इंडिया के बीच अक्टूबर 2025 में इसका एमओयू भी हो गया था। एमओयू के तहत सकतपुरा स्थित मिनी अकेलगढ़ से ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट तक 21 कि.मी. पाइप लाइन डाली जाएगी। </p>
<p>जलदाय विभाग के अधीक्षण अभियंता दीपक कुमार झा ने बताया कि पाइप लाइन डालने का काम शुरु हो गया है। सकतपरिा स्थित मिनी अकेलगढ़ से कैनाल के सहारे-सहारे खुदाई कर पाइप लाइन डाली जा रही है। अभी तक करीब 4 कि.मी. लाइन डाली जा चुकी है। जबकि 4 कि.मी. लाइन डालने का काम तेजी से किया जा रहा है। खुदाई होते ही उसमें भी पाइप बिछा दिए जाएंगे। झा ने बताया कि कैनाल के सहारे होते हुए हाइवे से एयरपोर्ट तक पाइप लाइन डालने का काम पूरा होने में करीब 6 माह का समय लगेगा। इस साल के अंत तक यह काम पूरा होने के बाद एयरपोर्ट तक पानी पहुंचा दिया जाएगा।</p>
<p>इधर एयरपोर्ट अधिकारियों का कहना है कि रनवे समेत टर्मिनल बिल्डिंग निर्माण का काम तेजी से किया जा रहा है। बरसात शुरु होने से पहले काफी काम हो जाएगा। निर्माण कार्य की बारीकी से मॉनिटरिंग की जा रही है। जिससे दिसम्बर 2027 तक काम पूरा होकर यहां से हवाई सेवा शुरु की जा सकेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 11 Jun 2026 14:37:20 +0530</pubDate>
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