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                <title>कोटा - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>888 में से 229 सैंपल फेल, 10.75 लाख का वसूला जुर्माना</title>
                                    <description><![CDATA[155 प्रकरण न्यायालय में पेश किए  अब तक 55 मामलों में निर्णय आ चुका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/229-out-of-888-samples-fail--fines-worth-10-75-lakh-collected/article-150920"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले में शुद्ध के लिए युद्ध अभियान के तहत खाद्य विभाग ने मिलावटखोरों के खिलाफ व्यापक कार्यवाही देखने को मिली । जनवरी 2025 से मार्च 2026 तक की 15 माह की अवधि में विभाग द्वारा की गई कार्रवाई के आंकड़े चौकाने वाले हैं। इस दौरान विभाग ने कुल 888 नमूने संग्रहित किए, जिनमें से 229 सैंपल फेल पाए गए। मिलावटखोरी के इन मामलों में सख्त रुख अपनाते हुए विभाग ने अब तक 10 लाख <br />75 हजार रुपये का जुर्माना वसूला है।</p>
<p><strong>दूध और घी-तेल के नमूनों पर रहा फोकस</strong><br />खाद्य विभाग की टीम ने इस अवधि में सबसे ज्यादा शिकंजा डेयरी उत्पादों और तेल-घी के कारोबारियों पर कसा। आंकड़ों के अनुसार, विभाग ने दूध के 54 और दूध से निर्मित खाद्य पदार्थों के 203 नमूने लिए। वहीं, मिलावट की आशंका को देखते हुए घी व तेल के 194 सैंपल भरे गए। इसके अतिरिक्त अन्य मिठाइयों के 37 तथा 400 अन्य खाद्य पदार्थों के सैंपल लेकर जांच के लिए प्रयोगशाला भेजे गए। इनमें से बड़ी संख्या में खाद्य सामग्री अमानक पाई गई, जिससे आम जनता की सेहत के साथ खिलवाड़ हो रहा था।</p>
<p><strong>न्यायिक प्रक्रिया में तेजी, 55 में फैसला</strong><br />नमूनों के फेल आने के बाद विभाग ने केवल नोटिस तक ही कार्रवाई सीमित नहीं रखी, बल्कि 155 प्रकरण न्यायालय में पेश किए। विभागीय सक्रियता का ही परिणाम है कि अब तक 55 मामलों में निर्णय भी आ चुका है, जिसमें दोषियों पर भारी आर्थिक दंड लगाया गया है। प्रशासन की इस सख्त कार्रवाई से मिलावट करने वाले गिरोहों में हड़कंप मचा हुआ है।</p>
<p><strong>25 प्रतिशत से अधिक सेम्पल को मिला चैलेन्ज</strong><br />कुल लिए गए नमूनों में से लगभग 25.7% नमूने मानकों पर खरे नहीं उतरे। जिसको लेकर विभाग की कार्यवाहियों पर मिलावट के विरुद्ध सक्रियता की आवश्यकता को दर्शाता है। वहीं मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. नरेन्द्र नागर का कहना है कि सेम्पल लेते समय परी तरह गाईड़ लाईन की पालना की जाती है। पूरी टीम मौके पर जाती है। अनुभव व तकनीकी टीम के द्वारा संस्तुति के बाद ही सेम्पल लिया जाता है।</p>
<p><strong>67% में अदालती कार्यवाही</strong><br />भेजे गये खाद्य पदार्थो के सेम्पल की बात करें तो यहां फेल हुए 229 नमूनों में से 155 मामलों को तुरंत न्यायालय में प्रस्तुत कर दिया है। जाेकि अभी विचारधीन है। ऐसे में विभाग द्वारा कार्यवाहियों के बाद न्यायालय में मामले की चुनौतियाें को लेकर किये गये प्रयासों में भी तेजी देखनें में आयी है। ऐसे में की गयी कार्यवाहियों की बात करें तो अदालत के द्वारा निर्णित मामलों के आधार पर देखा जाए तो औसतन 19,545 का जुर्माना प्रति उल्लंघनकर्ता लगाया गया।</p>
<p><strong>सघन जांच अभियान रहेगा जारी</strong><br />खाद्य सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि स्वास्थ्य से समझौता किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। आने वाले गर्मी के दिनों में भी घी, तेल और दूध से बनी मिठाइयों की सैंपलिंग का दायरा और बढ़ाये जाने की बात कही जा रही है। डॉ. नागर ने बताया कि उपभोक्ताओं को गुणवत्तापूर्ण वस्तुएं उपलब्ध करवाने के लिये विभाग की कार्यवाहियां जारी रहेंगी।</p>
<p>सेम्पल लेते समय परी तरह गाईड़ लाईन की पालना की जाती है। कार्यवाही करने के दौरान पूरी सर्तकता से कागजी कार्यवाही करवायी जाती है। हमारी विधि टीम भी कार्यवाहियों के लिये तैयारी करती है।<br /><strong>-डॉ. नरेन्द्र नागर, मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थय अधिकारी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:21:47 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों की सरकारी जमीन अभी भी अतिक्रमियों के कब्जे में, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[केडीए लगातार कार्रवाई कर करवा रहा जमीनों को अतिक्रमण मुक्त।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-land-worth-crores-still-under-the-control-of-encroachers/article-150917"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(5)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>केस एक:</strong> कोटा विकास प्राधिकरण के अतिक्रमण निरोधक दस्ते ने 13 अप्रैल को नदी पार क्षेत्र के तीरथ गांव में कार्रवाई करते हुए करीब 22 करोड़ रुपए की सरकारी जमीन को अतिक्रमण से मुक्त कराया है।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>केडीए की अतिक्रमण निरोधक टीम ने 11 अप्रैल को नदी पार क्षेत्र के नांता, बालिता, गिरधरपुरा, गामछ में अतिक्रमण के खिलाफ कर करीब 10 करोड़ की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया।</p>
<p><strong>केस तीन:</strong> कोटा विकास प्राधिकरण की अतिक्रमण निरोधक टीम ने इसी साल 16 जनवरी को तालेड़ा क्षेत्र के तुलसी गांव में केडीए की जमीन पर हो रहे अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की। जिससे करीब 2.50 करोड़ की जमीन को अतिक्रमियों के कब्जे से मुक्त कराया।</p>
<p>ये तो वे उदाहरण हैं जो हाल ही में कोटा विकास प्राधिकरण के अतिक्रमण निरोधक दस्तों ने कार्रवाई करते हुए सरकारी जमीनों को अतिक्रमण से मुक्त कराया है। इनके अलावा भी शहर में सभी क्षेत्रों में बड़ी मात्रा में ऐसी सरकारी जमीनें हैं जिन पर अभी भी अतिक्रमियों के कब्जे हैं। करोड़ों-अरबों रुपए की बेशकीमती जमीनों पर बरसों से अतिक्रमण हो रहा है। जिन पर न तो अधिकारियों का ध्यान रहा और न ही पुलिस का। शहर में सबसे अधिक सरकारी जमीनों पर नदी पार क्षेत्र में अतिक्रमण व कब्जे हो रहे हैं।</p>
<p><strong>देवली अरब समेत कई जगह पर हुई कार्रवाई</strong><br />केडीए की ओर से पिछले कुछ समय से अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई की जा रही है। यह कार्रवाई स्थायी रूप से और सरकारी व केडीए की जमीनों पर किए गए बरसों से अतिक्रमण के खिलाफ की जा रही है। केडीए की ओर से 9 अप्रैल को देवली अरब क्षेत्र में कार्रवाई कर 0.16 हैक्टेयर भूमि को अतिक्रमण मुक्त कराया। जिसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपए से अधिक है। इसी तरह से खेड़ा जगपुरा में 5.38 हैक्टेयर यानि करीब 33 बीघा जमीन को मुक्त कराया। इसकी कीमत करीब 15 करोड़ रुपए बताई जा रही है। वहीं कंसुआ के शिव सागर थेगड़ा में भी सरकारी भूमि पर किए गए अतिक्रमण के खिलाफ कार्रवाई कर जमीन को मुक्त कराया। जिसकी कीमत करीब दो करोड़ रुपए है।</p>
<p><strong>राम नगर में 35 भूखंड करवाए मुक्त</strong><br />केडीए अधिकारियों के अनुसार अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। उसी के तहत गत दिनों राम नगर पत्थर मंडी में प्राधिकरण की योजना क्षेत्र में कार्रवाई करते हुए करीब 35 भूखंडों व पार्क को अतिक्रमण से मुुक्त करवाया। जिनकी कीमत करीब 40 करोड़ रुपए से अधिक है।वहीं धाकडख़ेड़ी व कंवरपुरा में भी बरसों से हो रहे अतिक्रमण को हटाकर 25 करोड़ की भूमि को मुक्त कराया गया।</p>
<p><strong>नए गांव व एरिया शामिल होने से मिली जमीन पर है अतिक्रमण</strong><br />केडीए के तहसीलदार सुरेन्द्र शर्मा ने बताया कि नगर विकास न्यास से कोटा विकास प्राधिकरण बनने के बाद शहर व आसपास के कई गांव व नए एरिया शामिल हुए हैं। जिनकी जमीन भी केडीए के खाते में आई है। ऐसे में वहां भी बड़ी संख्या में अतिक्रमण हो रहे हैं। शम्भूपुरा व बूंदी तक का क्षेत्र केडीए में शामिल हुआ है। यह पृूरा क्षेत्र नदी पार में आता है। ऐसे में इस क्षेत्र में ही करीब 12 हजार बीघा नई जमीन शामिल होने से यहां सबसे अधिक अतिक्रमण हो रहा है। इनके अलावा अन्य क्षेत्रों में भी स्थायी अतिक्रमण हो रहे हैं। जिनके खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />केडीए सीमा में शामिल हुए नए एरिया में अधिक अतिक्रमण के मामले आ रहे हैं। केडीए टीम द्वारा अतिक्रणम के संबंध में नियमित सर्वे किया जा रहा है। उस सर्वे व अन्य लोगों के माध्यम से अतिक्रमण की जानकारी मिल रही है। उन जानकारियों के आधार पर हर महीने का शेड्यूल बनाकर अतिक्रमण के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जा रही है। हाल ही में की गई कार्रवाई से करोड़ों की जमीन को अतिक्रमण मुक्त कराया गया है। उन जमीनों पर केडीए की ओर से प्लानिंग की जाएगी। जिससे केडीए की आय हो सके।<br /><strong>- मुकेश कुमार चौधरी, सचिव कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:20:42 +0530</pubDate>
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                <title>वसूली पर ध्यान, खतरे में यात्रियों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[टैक्स देने के बाद भी एनएच-27 पर जोखिमभरा सफर, न डिवाइडर न पौधे, वाहन चालकों पर हाई बीम का कहर। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/focus-on-revenue-collection--passengers--lives-at-risk/article-150915"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(6)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा-बारां फोरलेन के हालात इतने बदतर हो रहे हैं कि हर दिन हजारों लोगों की जान दांव पर लगी रहती है। एनएचएआई का सिर्फ टोल वसूली पर ही फोकस है लेकिन सुरक्षा मानकों की पूरी तरह से अनदेखी की जा रही है।हालात यह हैं, एनएच-27 स्थित पोलाईकलां से कोटा मार्ग पर न व्यवस्थित डिवाइडर हैं और न ही पौधे, ऊपर से हाई बीम का कहर अलग से बना हुआ है, जिससे वाहन चालकों की जान दांव पर लगी रहती है। टोल टैक्स चुकाने के बावजूद यात्रियों को सुरक्षित सफर नहीं मिल रहा। जिम्मेदारों की लापरवाही से हाल ही में एनएच-52 पर हुए दर्दनाक बस हादसा जैसा खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>हाई बीम से चौंधिया रहीं आंखें, बढ़ रहा खतरा</strong><br />फोरलेन पर पोलाई कलां से आगे कोटा की ओर डिवाइडर सड़क से बिलकुल सटे हुए हैं। जिनमें कई जगह पौधे नहीं हैं तो कई जगह सूख गए। जिससे कोटा से बारां जाने वाले भारी वाहनों की तेज हाई बीम लाइट सामने से दूसरी लेन से कोटा आने वाले वाहन चालकों की आखों पर सीधे पड़ती है। तेज रोशनी से आंखें चौंधिया जाती हैं। इससे कुछ क्षण के लिए विजिबिलिटी खत्म हो जाती है और हादसे का खतरा कई गुना बढ़ जाता है।</p>
<p><strong>रात का सफर जोखिम भरा</strong><br />वाहन चालक शोयब खान, आकाश मेहरा, राजीव सेन का कहना है कि बारां से कोटा फोरलेन पर पोलाईकलां से आगे का रास्ता बेहद जोखिमभरा है। करीब पांच किमी की सड़क पर जगह-जगह से डिवाइडर आधे-अधूरे बने हुए हैं, वह भी नेशनल हाइवे आॅथोरिटी के मापदंड के अनुरूप नहीं है। इन पर न तो पीली लाइनिंग हो रही और न ही सुरक्षा दीवार है। इसके अलावा पौधे नहीं होने से वाहनों की तेज रोशनी सीधे आंखों पर पड़ती है। जिससे कुछ दिखाई नहीं देता और रफ्तार से चल रहे वाहन अनियंत्रित होकर डिवाइडर पर चढ़ने का खतरा बना रहता है। जबकि, पहले घने पौधे थे, जो हाई बीम की रोशनी को रोकते थे, लेकिन अब उनकी अनुपस्थिति से रात में सफर बेहद जोखिम भरा हो गया है।</p>
<p><strong>रोड लाइनिंग नहीं, लेन का अंदाजा मुश्किल</strong><br />गत वर्ष एनएचएआई द्वारा पोलाईकलां से कोटा टर्न तक डामर सड़क बनाई थी लेकिन उस पर सफेद लाइनिंग नहीं की गई। इससे वाहन चालकों को अपनी लेन समझने में दिक्कत होती है और ओवरटेक के दौरान दुर्घटना की आशंका बढ़ जाती है। वहीं,पूरे मार्ग पर स्ट्रीट लाइटें नहीं होने से सड़क पर अंधेरा पसरा रहता है। ऐसे में हाई बीम की रोशनी और भी ज्यादा घातक हो जाती है।</p>
<p><strong>कट से पहले चेतावनी लाइट भी नदारद</strong><br />वाहन चालक कमलेश दीक्षित व यश कुमार का कहना है कि नेशनल हाइवे पर कुछ जगहों पर कट होते हैं, जिसका संकेत देने के लिए लाइट लगी होती है, जिससे 100 से 150 मीटर पहले ही कट होने की जानकारी चालक को मिल जाती है। इस दौरान वह स्पीड कम कर सकता है। लेकिन, पोलाईकलां से कोटा तक केवल एक ही लाइट लगी है। इसके अलावा पूरे रोड पर कही इस तरह की लाइटें लगी हुई नहीं है। ऐसे में स्पीड से गुजरने वाले वाहनों को एकाएक कट का पता नहीं लग पाता।</p>
<p><strong>डिवाइडरों की ऊंचाई नहीं, मवेशियों का खतरा</strong><br />डिवाइडर सड़क से सटे हुए हैं, जिनकी ऊंचाई नहीं होने से मवेशियों का डिवाइडर पार कर सड़क पर आने का खतरा बना रहता है। इससे वाहन अनियंत्रित होकर दूसरी लेन में जा सकते हैं, जिससे गंभीर हादसा होने का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>दोहरी मार झेल रहे वाहन चालक</strong><br />जिम्मेदारों की लापरवाही से एनएच-27 पर वाहन चालक दोहरी मार झेल रहे हैं, एक तरफ टोल टैक्स वसूली और दूसरी-सुरक्षा सुविधाओं का अभाव। जबकि, प्रतिदिन हजारों लोग इस मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे।</p>
<p>कोटा से बारां 104 किमी सड़क पर आवश्यक कार्य स्वीकृत हैं। जिसमें डिवाइडर बनाना, पौधे लगवाना, स्ट्रीट लाइटिंग व रोड लाइनिंग सहित अन्य कार्य शामिल हैं। अभी, बारां साइड पर काम चल रहा है, जल्द ही कोटा साइड का भी काम शुरू हो जाएगा।<br /><strong>-संदीप अग्रवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Apr 2026 15:19:32 +0530</pubDate>
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                <title>कछुआ चाल से चल रहा सीवरेज के प्रोपर्टी कनेक्शन का काम, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम की ओर से शहर में सीवरेज लाइन डालने का 90 फसदी काम पूरा ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/property-connection-work-for-sewerage-system-progressing-at-a-snail-s-pace/article-150787"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)16.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अमृत 2.0 के तहत एक ओर जहां सीवरेज की नई लाइनें डाली जानी हैं वहीं उन लाइनों से घरों को जोड़ते हुए प्रोपर्टी कनेक्शन भी किए जाने हैं। लेकिन हालत यह है कि शहर में 21 हजार 800 घरों में कनेक्शन किए जाने हैं। जिनमें से अभी तक मात्र 9 हजार घरों के ही कनेक्शन हुए हैं।अमृत 2.0 के तहत पांच चरण में काम होने हैं। जिनमें से एक सीवरेज लाइनें डालना, दूसरा उन लाइनों से प्रोपर्टी कनेक्शन करना। तीसरा सीवरेज पम्पिंग स्टेशन, सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट और ट्रीटमेंट प्लांट को सोलर सिस्टम से जोडऩा। हालांकि ये सभी काम एक साथ चल रहे हैं। कई काम की गति को फिर भी ठीक है लेकिन संवेदक फर्म द्वारा प्रोपर्टी कनेक्शनकरने का काम धीमी गति से किया जा रहा है।</p>
<p><strong>लाइन डालने का 90 फीसदी काम हुआ</strong><br />नगर निगम की ओर से शहर में सीवरेज लाइन डालने का काम भी किया जाना है। यह लाइनें करीब 262 कि.मी. एरिया में बिछानी है। जिसमें से 250 कि.मी. से अधिक यानि करीब 90 फसदी काम पूरा किया जा चुका है। शेष काम प्रगति पर है।</p>
<p><strong>प्रोपर्टी कनेक्शन हुए कम</strong><br />निगम की ओर से सीवरेज लाइनों से घरों को जोडऩे के लिए कनेक् शन का काम भी किया जाना है। जानकारी के अनुसार निगम को 21 हजार 800 घरों में प्रोपर्टी कनेक् शन करने का लक्ष्य दिया गया है। लेकिन संवेदक फर्म द्वारा किए गए सर्वे में कई घर ऐसे हैं जहां अभी कोई नहीं रह रहा है। ऐसे घरों व एरिया को छोड़ते हुए करीब 17 हजार से अधिक कनेक् शन होने हैं। उनमें भी 3 हजार से अधिक कनेक् शन ऐसे हैं जिन पर लोगों द्वारा आपत्ती या विरोध करने के कारण नहीं हो पा रहा है। शेष 13 हजार 500 में से अभी तक करीब 9 हजार ही कनेक् शन हुए हैं।</p>
<p><strong>निगम आयुक्त ने काम की गति बढ़ाने को किया था पाबंद</strong><br />नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने गत दिनों अमृत 2.0 के तहत शहर में किए जा रहे विभिन्न कार्यो, धाकडख़ेड़ी स्थित 20 एमएलडी एसटीपी के अपग्रेडेशन कार्य और आरयूआईडीपी से निगम को हस्तांतरित किए गए 40 एमएलडी एसटीपी का निरीक्षण किया था। इस दौरान बारां रोड की विभिन्न कॉलोनियों में चल रहे कार्यों का निरीक्षण भी किया। यहां प्रोपर्टी कनेक्शन की धीमी गति को देखते हुए उन्होंने संवेदक को पाबंद किया था कि काम की गति बढ़ाते हुए प्रतिदिन 40 से 50 प्रोपर्टी कनेक्शन देने के लक्ष्य के साथ काम किया जाए।</p>
<p><strong>अपग्रेडेशन काम समय पर पूरा करने के निर्देश</strong><br />आयुक्त मेहरा ने धाकडखेड़ी में 20 एमएलडी एसटीपी के अपग्रेडेशन कार्य को मानकों के अनुरूप तय समय में पूरा करने के निर्देश दिए थे।<br />आयुक्त मेहरा ने बताया कि प्रोपर्टी कनेक् शन की धीमी गति पर संवेदक को इसे बढ़ाने के लिए पाबंद किया हुआ है। हालांकि पूर्व में किए गए निरीक्षण के बाद इनकी संख्या बढ़ी है। वहीं लाइनें बिछाने का काम 90 फीसदी पूरा हो गया है। धाकडख़ेड़ी में एसटीपी के पास ही सोलर सिस्टम बनाया जाना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Apr 2026 14:27:46 +0530</pubDate>
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                <title>नाबालिग से दुष्कर्म के मामले में आरोपी को 20 साल की जेल, जानें पूरा मामला </title>
                                    <description><![CDATA[बालिका को बहला फुसलाकर ले गया था।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/accused-sentenced-to-20-years-in-prison-for-rape-of-a-minor/article-150698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-01/court-hammer04.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नाबालिग बालिका को बहला फुसलाकर अपहरण करने तथा दुष्कर्म करने के मामले में पोक्सो कोर्ट  चार के न्यायाधीश विक्रम सिंह ने आरोपी को दोषी करार देते हुए गुरुवार को बीस साल के कठोर कारावास की सजा सुनाते हुए  52 हजार रुपए के अर्थ दंड से दंडित किया है। जामुनिया निवासी  महेन्द्र(23)  पुत्र मोहन, के खिलाफ पीड़िता के परिजनों ने ग्रामीण इलाके के एक पुलिस थाने में मुकदमा दर्ज कराया था। इस पर पुलिस ने धारा 363, 366ए  भारतीय दण्ड संहिता एवं धारा 5(एल)/6, 5(एम)/6 लैंगिक अपराधों से बालकों का संरक्षण अधिनियम 2012 में मुकदमा दर्ज किया था। अनुसंधान के दौरान बालिका को दस्तयाब कियाऔर उसके बयानों और मेडिकल रिपोर्ट के आधार पर मामले में रेप की धारा को जोड़ते हुए कोर्ट में  चालान  पेश किया था।<br /> <br />विशिष्ट लोक अभियोजक वन्दना नागर ने बताया कि 19 फरवरी 2024 को पीड़िता के पिता ने रिपोर्ट दी  जिसमें बताया  कि उसके तीन बेटी और एक बेटा है।  बड़ी बेटी की कुछ दिनों पूर्व शादी की थी।  दूसरी बेटी  पीड़िता अपनी बड़ी बहन के पास ही रह रही थी।  18 फरवरी को वह दिन में चार बजे घर से बिना बताए चली गई।  सब जगह  तलाश करने  पर भी उसका  कोई सुराग नहीं मिला । तब पिता ने महेन्द्र पर  बहला फुसलाकर ले जाने की रिपोर्ट दर्ज कराई  । इस पर पुलिस ने अनुसंधान के दौरान आरोपी महेन्द्र को गिरफ्तार  कर बालिका को दस्तयाब किया।  उसके खिलाफ न्यायालय में चालान पेश किया। ट्रायल के दौरान लोक अभियोजन पक्ष की और से कई गवाहों के बयान कोर्ट में दर्ज करवाए गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 17:06:38 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा रोज 70 क्विंटल गन्ना रस पी रहा, भीषण गर्मी में मीठी राहत का बना सहारा</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में चार दर्जन से अधिक मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-consumes-70-quintals-of-sugarcane-daily/article-150645"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(1)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी के तेवर अब तीखे होने लगे हैं। अप्रैल के मध्य में ही तेज धूप और बढ़ती तपन ने आमजन का जीना मुहाल कर दिया है। ऐसे में राहत की तलाश में लोग पारंपरिक और प्राकृतिक पेय पदार्थों की ओर रुख कर रहे हैं। इनमें गन्ने का रस सबसे आगे है। शहर में इन दिनों गन्ने के रस की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और रोजाना करीब 70 क्विंटल गन्ना रस के रूप में खप रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों, बस स्टैंड, रेलवे स्टेशन के आसपास, कॉलोनियों और मुख्य चौराहों पर गन्ने के रस के ठेले और दुकानें बड़ी संख्या में नजर आ रही हैं।</p>
<p><strong>दोपहर बाद ग्राहकों की अधिक भीड़</strong><br />एक अनुमान के अनुसार शहर में चार दर्जन से अधिक मशीनें लगातार संचालित हो रही हैं। इन मशीनों पर दिनभर गन्ना पिरोया जा रहा है और ग्राहकों को ताजा व ठंडा रस परोसा जा रहा है। सुबह के समय जहां ग्राहकों की संख्या सीमित रहती है, वहीं दोपहर बाद जैसे-जैसे तापमान चरम पर पहुंचता है, गन्ने के रस की दुकानों पर भीड़ उमड़ने लगती है। कई स्थानों पर ग्राहकों को अपनी बारी का इंतजार भी करना पड़ रहा है। शाम के समय तो हालात ऐसे हो जाते हैं कि ठेलों के आसपास खड़े होने तक की जगह नहीं मिलती।</p>
<p><strong>मशीनों की बढ़ी संख्या, नए ठेले भी लगे</strong><br />गर्मी की बढ़ती मांग को देखते हुए कई नए विक्रेताओं ने भी गन्ने का रस बेचना शुरू कर दिया है। शहर में नई चरखियां लगाई गई हैं, जिससे प्रतिस्पर्धा भी बढ़ी है और ग्राहकों को ज्यादा विकल्प मिल रहे हैं। कुछ विक्रेता नींबू, अदरक और पुदीना मिलाकर स्वादिष्ट और हेल्दी रस भी परोस रहे हैं। शहर में बने आरओबी के नीचे काफी जगह होने व पर्याप्त छाया रहने से यहां कई छोटी मोटी दुकानों, थडिय़ों के साथ गन्ने की चरखियां भी आराम से चल रही हैं। इसके अलावा हाइवे पर जहां अंडरब्रिज व ओवरब्रिज हैं, उनके नीचे भी पर्याप्त छाया होने व वाहनों का स्टैण्ड होने या न होने पर गर्मी में बाइक, कारों व अन्य वाहनों से यात्रा करने वाले लोग कुछ पलों के लिए छांव में विश्राम के साथ गन्ने के रस से हलक तर कर लेते हैं।</p>
<p><strong>ग्राहकी से दुकानदारों के खिले चेहरे</strong><br />डीसीएम रोड स्थित गन्ने का ठेला लगाने वाली महिला दुकानदार सरोज व गोमती ने बताया कि यह सीजन उनके लिए सबसे ज्यादा कमाई का समय होता है। इस बार गर्मी जल्दी और तेज आई है, जिससे बिक्री भी उम्मीद से ज्यादा हो रही है। कई दुकानदार सुबह से लेकर देर रात तक लगातार काम कर रहे हैं। भीषण गर्मी के इस दौर में गन्ने का रस न केवल प्यास बुझाने का साधन बना हुआ है, बल्कि शहरवासियों को ताजगी और ऊर्जा भी प्रदान कर रहा है। मीठी ठंडक के रूप में यह पारंपरिक पेय एक बार फिर लोगों की पहली पसंद बन गया है।</p>
<p><strong>यहां से हो रही गन्ना की आवक</strong><br />कोटा में गन्ने का उत्पादन बहुत बड़े स्तर पर नहीं होता, इसलिए यहां इस्तेमाल होने वाला ज्यादातर गन्ना बाहर से मंगवाया जाता है। उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा गन्ना उत्पादक राज्य होने के कारण कोटा में बड़ी मात्रा में गन्ना यहां के जिलों (जैसे सहारनपुर, मुजफ्फरनगर, मेरठ) से ट्रकों के जरिए आता है। महाराष्ट्र से भी कुछ व्यापारियों द्वारा गन्ना सप्लाई किया जाता है, हरियाणा और पंजाब सीमित मात्रा में, लेकिन सीजन के हिसाब से यहां से भी गन्ना आता है। श्रीगंगानगर और हनुमानगढ़ जिलों में कुछ हद तक गन्ना उत्पादन होता है, वहां से भी कोटा तक सप्लाई आती है। गन्ना आमतौर पर ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए थोक मंडियों तक लाया जाता है। वहां से रस बेचने वाले दुकानदार और ठेले वाले इसे खरीदकर अपने-अपने क्षेत्रों में ले जाते हैं।</p>
<p>गन्ने का रस शरीर को तुरंत ऊर्जा देने के साथ ही डिहाइड्रेशन से बचाने में मददगार होता है। इसमें प्राकृतिक शर्करा, खनिज और पानी की अच्छी मात्रा होती है। यही वजह है कि लोग कोल्ड ड्रिंक्स और पैकेज्ड पेय की बजाय गन्ने के रस को प्राथमिकता देते हैं।<br /><strong>-डॉ. संजय शायर, सीनियर फिजिशियन</strong></p>
<p>शहर में इन दिनों गन्ने के रस की मांग में जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है और रोजाना करीब 70 क्विंटल गन्ना रस के रूप में खप रहा है। गन्ना ट्रकों और पिकअप वाहनों के जरिए थोक मंडियों तक लाया जाता है। वहां से दुकानदार और ठेले वाले खरीदकर ले जाते हैं।<br /><strong>- विकास कुमार, गन्ना के थोक व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:35:29 +0530</pubDate>
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                <title>अतिक्रमण से संकरा हुआ छावनी का मुख्य मार्ग, थडियों व दुकानों के सामान से यातायात हो रहा बाधित</title>
                                    <description><![CDATA[अतिक्रमण के कारण 35 फीट चौड़ा रोड एक तिहाई भी नहीं रह गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cantonment-s-main-thoroughfare-narrowed-by-encroachment/article-150643"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अतिक्रमण करने वालों के हौंसले इतने अधिक बुलंद हो रहे हैं कि उन्हें किसी की परवाह नहीं है। यही कारण है कि छावनी रामचंद्रपुरा के मुख्य मार्ग पर इतना अधिक अतिक्रमण हो गया है कि मुख्य मार्ग ही संकरा रह गया। जिससे वहां शाम के समय जाम व यातायात में बाधा उत्पन्न होने की समस्या होने लगी है। छावनी वार्ड 59 के लोगों का कहना है कि छावनी में रामचंद्रपुरा ही नहीं वहां से कई अन्य कॉलोनियों, थेगड़ा, कैथून, रायपुरा व डीसीएम तक जाने का रास्ता है। लेकिन यहां मुख्य मार्ग पर ही सब्जीमंडी क्षेत्र और आस-पास बड़ी संख्या में लोगों ने थडिय़ां लगा ली है। किसी ने ठेला लगा रखा है कई दुकानदारों ने अपनी दुकानों के सामानों को सड़क के बाहर तक रखा हुआ है। फूल माला से लेकर मटके वालों तक और होजरी का सामान बेचने वालों से लेकर खाद्य सामग्री बेचने तक की अस्थायी दुकानें लग चुकी हैं। वहीं गर्मी के कारण दुकानों के बाहर तक छाया के लिए तिरपाल व शेड तक लगा लिए हैं।</p>
<p>लोगों का कहना है कि अतिक्रमण के कारण 35 फीट चौड़ा रोड एक तिहाई भी नहीं रह गया है। जिससे शाम के समय यहां ट्रैफिक अधिक होने पर अक्सर जाम की समस्या रहने लगी है। कई बार तो वाहनों के आपस में टकराने से हादसे व विवाद तक की स्थिति बन रही है। स्थानीय लोगों के अलावा वहां से गुजरने वाले वाहन चालकों व राहगीरों तक को परेशानी हो रही है।</p>
<p>स्थानीय लोगों का कहना है कि यहां से चार पहिया वाहन निकलना तो दूर कई बार तो दो पहिया वाहन तक और ई रिक् शा तक नहीं निकल पाते हैं। जिसका खामियाजा स्थानीय लोगों को ही भुगतना पड़ रहा है। जबकि पास में ही पुलिस चौकी भी है। उसके बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।</p>
<p>इधर नगर निगम अधिकारियों का कहना है कि छावनी के अंदरूनी इलाके में मुख्य मार्ग पर अतिक्रमण के खिलाफ पूर्व में कई बार कार्रवाई की जा चुकी है। अतिक्रमण करने वालों को पाबंद भी किया गया था। लेकिन अस्थायी अतिक्रमण करने वाले फिर से वहां आ गए हैं। इसकी जानकारी कर शीघ्र ही कार्रवाई की जाएगी। नगर निगम के अतिक्रमण निरोधक दस्ता प्रभारी का कहना है कि केवल छावनी ही नहीं शहर में जहां भी अतिक्रमण हो रहा है वहां नियमित रूप से और समय-समय पर कार्रवाई भी की जा रही है। साथ ही अतिक्रमियों को पाबंद भी किया जा रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 16 Apr 2026 14:30:20 +0530</pubDate>
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                <title>दहेज की मांग को लेकर आत्महत्या के लिए उकसाने का मामला: आरोपी पति को 5 साल की कैद</title>
                                    <description><![CDATA[मकान, कार और दुकान कोटा में दिलाने की मांग आरोपी करते थे ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-of-abetment-to-suicide-over-dowry-demands-accused-husband-sentenced-to-5-years-in-prison/article-150542"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दहेज की मांग को लेकर आत्महत्या के लिए उकसाने के पांच साल पुराने मामले में बुधवार को एडीजे  महिला उत्पीडन क्रम दो के न्यायाधीश ने विवाहिता के पति को दोषी मानते हुए 5 साल की सजा सुनाई है।  न्यायाधीश ने आरोपी पति हरीश कुमार नंदवाना को छह हजार रुपए के अर्थदंड से दंडित किया है।<br /> <br />अपर लोक अभियोजक रामेत सैनी ने बताया कि फरियादी राधाकृष्णपुरम कोटा निवासी रमेश कुमार शर्मा ने महिला पुलिस थाना कोटा शहर में रिपोर्ट दी थी जिसमें बताया था कि उसकी पुत्री दीपिका नन्दवाना (28) का विवाह  10 मई 2014 को आरोपी हरीश कुमार नंदवाना पुत्र शंकरलाल नंदवाना निवासी कपासन जिला चित्तौड़गढ़ के साथ हुआ था।  शादी के बाद   से ही दामाद हरीश कुमार , समधी शंकर लाल व ननद संतोष बाई, लक्ष्मी बाई ,देवर राहुल दहेज की मांग को लेकर बेटी को बहुत परेशान करते थे और  मारपीट भी करते थे।   ससुराल वालो को  समय -समय पर काफी समझाइश की गई ,  लेकिन वे  लोग दहेज की मांग करते रहे थे।  28 जून 2021  की रात करीब डेढ़-दो बजे के बीच  दामाद हरीश कुमार  बेटी को  मेरे घर  लेकर आया और बाहर ही ऑटो में छोड़कर चला गया। साथ ही  धमकी दी कि  उसे कोटा में ही एक मकान,  एक दुकान तथा एक कार दिलवाओ तभी तुम्हारी पुत्री को रखूंगा, अन्यथा   नहीं रखूंगा।  इस पर दामाद को  परिवार के अन्य सदस्यों ने  रोकने का प्रयास किया, लेकिन वह नहीं रुका था। </p>
<p>पीड़ित  का आरोप है कि हरीश और उसके परिवार वाले लगातार मोबाइल पर  कोटा में मकान, दुकान, कार की मांग करते रहे ।  25 सितंबर 2021 की शाम को बेटी दीपिका के पास दामाद हरीश कुमार  का फोन आया और दीपिका  रोने लगी थी । इसके बाद  7.30-8.  बजे  बेटी दीपिका  ने कमरे में पंखे से साफी से फंदा लगाकर  आत्महत्या कर ली।  उस समय  हम घर के बाहर बैठे थे।  काफी देर तक   जब  दीपिका बाहर नहीं आई और उसे आवाज दी, लेकिन कोई जवाब नहीं मिलने पर  खिड़की का कांच तोड़कर देखा तो वह पंखे से लटक रही थी। इसके बाद उद्योग नगर पुलिस को सूचना दी ।   पुलिस ने आकर उसे फंदे से उतारा और एमबीएस अस्पताल लेकर गए। वहां चिकित्सकों ने मृत घोषित कर दिया। </p>
<p>पीड़ित ने आरोप लगाया कि उनकी पुत्री  दीपिका को  पति , सास, ससुर, देवर, ननद द्वारा  दहेज की मांग को लेकर परेशान करते थे  इस  कारण उसने आत्महत्या की ।  पुलिस ने दहेज प्रताड़ना सहित आत्महत्या के लिए उकसाने का मुकदमा दर्ज किया अनुसंधान के दौरान पुलिस ने आरोपी पति हरीश को गिरफ्तार किया।  वह जमानत पर चल रहा था। अनुसंधान के दौरान पुलिस ने आरोपी पति को दोषी मानते हुए कोर्ट में चालान पेश किया। ट्रायल के दौरान अभियोजन पक्ष की और से 15 गवाहों के बयान कराए गए और 19 दस्तावेज पेश किए गए। न्यायाधीश ने दोनों पक्षों को सुनने के बाद आरोपी पति हरीश कुमार नंदवाना को दोषी मानते हुए दहेज प्रताडना में तीन साल और आत्महत्या करने के लिए प्रेरित करने पर पांच साल की सजा सुनाई है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 17:26:28 +0530</pubDate>
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                <title>अब गैस सिलेंडर को भी कंकू पत्री का न्यौता, आयोजक जुटे गैस सिलेंडरों की व्यवस्था करने में </title>
                                    <description><![CDATA[आखातीज पर शादियों की रहेगी धूम: रसद विभाग में आवेदन करने पहुंच रहे आयोजक।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now--even-gas-cylinders-receive-a-formal-invitation/article-150493"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। जैसे-जैसे अक्षय तृतीया (आखातीज) नजदीक आ रही है, शहर में विवाह समारोह की तैयारियां तेज हो गई हैं। इस बार बड़ी संख्या में शादियों के मुहूर्त होने से हर तरफ उत्सव का माहौल है, लेकिन इन खुशियों के बीच एक दिलचस्प तस्वीर भी सामने आ रही है कि अब गैस सिलेंडर को भी कंकू पत्री (निमंत्रण) देने की नौबत आ गई है। अमेरिका-इजरायल और ईरान के बीच चल रहे युद्ध के कारण गैस संकट की स्थिति बनी हुई है। यहां पर पर्याप्त मात्रा में कामर्शियल सिलेंडरों की सप्लाई नहीं हो पा रही है। इसका असर शादी समारोह पर भी पड़ रहा है। आगामी दिनों में आखातीज के अबूझ सावे पर काफी संख्या शादी समारोह के आयोजन होंगे। ऐसे में आयोजक गैस सिलेंडरों की व्यवस्था करने में जुट गए हैं।</p>
<p><strong>पहले गणेश जी, फिर गैस सिलेंडर को निमंत्रण</strong><br />शहर में परंपरा के अनुसार विवाह आयोजक सबसे पहले भगवान गणेश को कंकू पत्री देकर शुभ कार्य की शुरूआत कर रहे हैं, लेकिन बदलते हालात में अब गैस सिलेंडर भी आयोजन का अहम हिस्सा बन गया है। यही कारण है कि आयोजक मजाकिया अंदाज में कह रहे हैं कि गणेशजी के बाद अब सिलेंडर को भी न्यौता देना पड़ रहा है। सरकार के निर्देश के अनुसार शहरी क्षेत्र में शादी के आयोजकों को तीन गैस सिलेंडर उपलब्ध कराए जाएंगे। इसके लिए आयोजकों को शादी के कार्ड के साथ रसद अधिकारी कार्यायल में आवेदन करना होगा। इसके बाद सम्बंधितों को गैस सिलेंडरों की सप्लाई की जाएगी।</p>
<p><strong>रसद कार्यालय बना बुकिंग सेंटर</strong><br />आखातीज को लेकर पिछले एक सप्ताह से रसद विभाग का कार्यालय मानो बुकिंग सेंटर में तब्दील हो गया है। रोजाना शादी समारोह से जुड़े परिवार कार्यालय में आवेदन करने के लिए पहुंच रहे हैं। हर कोई समय रहते गैस सिलेंडर की व्यवस्था सुनिश्चित करना चाहता है, ताकि शादी में रसोई व्यवस्था प्रभावित न हो। सरकार द्वारा शहरी क्षेत्रों में विवाह समारोह के लिए अधिकतम तीन गैस सिलेंडर देने के निर्देश हैं, लेकिन बड़े आयोजनों में यह संख्या कम पड़ सकती है। कैटरिंग से जुड़े लोगों का कहना है कि एक बड़े विवाह में कई बार इससे अधिक सिलेंडरों की जरूरत पड़ती है, जिससे अतिरिक्त इंतजाम करने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>जुगाड़ में भी जुटे आयोजक</strong><br />सिलेंडर की बढ़ती मांग को देखते हुए आयोजक हर संभव प्रयास कर रहे हैं। कोई पहले से बुकिंग कर रहा है तो कोई निजी संपर्कों के जरिए अतिरिक्त सिलेंडर की व्यवस्था में लगा है। कई लोग गांव या रिश्तेदारों से भी सिलेंडर मंगाने का प्रयास कर रहे हैं। विवाह आयोजकों का कहना है कि खाने-पीने की व्यवस्था सबसे महत्वपूर्ण होती है और गैस सिलेंडर की कमी से पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। यही वजह है कि कई लोग वैकल्पिक जुगाड़, जैसे अतिरिक्त सिलेंडर की व्यवस्था या निजी स्तर पर संपर्क साधने में भी जुटे हुए हैं।</p>
<p><strong>बाजारों में बढ़ी रौनक</strong><br />आखातीज के चलते शहर के बाजारों में भी जबरदस्त रौनक देखने को मिल रही है। ज्वैलरी, कपड़े, सजावट और कैटरिंग से जुड़े कारोबारियों के यहां ग्राहकों की भीड़ उमड़ रही है। मैरिज गार्डन और बैंक्वेट हॉल पहले से ही बुक हो चुके हैं। आखातीज पर अबूझ सावा होता है। इस कारण इस दिन विवाह समारोह की धूम रहती है। ऐसे में हर कोई पहले से ही शादी समारोह से जुड़ी सभी तैयारियां कर लेना चाहता है। बाजारों में इन दिनों खरीदारी की रौनक बनी हुई है।</p>
<p>भोजन व्यवस्था किसी भी समारोह का प्रमुख हिस्सा होती है और गैस सिलेंडर की कमी से पूरा कार्यक्रम प्रभावित हो सकता है। इसी कारण वे समय से पहले आवेदन कर गैस सिलेंडर की व्यवस्था करने में जुटे हुए हैं।<br /><strong>-राजेन्द्र, शादी आयोजक</strong></p>
<p>गैस की सप्लाई सुचारू हो रही है। इस पर विशेष ध्यान दिया जा रहा है, ताकि आमजन को परेशानी नहीं हो। शादी समारोह को लेकर इन दिनों कार्यालय में आवेदन आ रहे हैं।<br /><strong>-कुशाला बिलाला, जिला रसद अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 14:53:16 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - कोटा में जल्द दौड़ेंगी फायर फाइटिंग बाइक्स</title>
                                    <description><![CDATA[फायर बाइक्स की आवश्यकता का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रकाशित किया है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---firefighting-bikes-to-soon-hit-the-streets-of-kota/article-150466"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(8)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में अग्निशमन व्यवस्था को और सुदृढ़ बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए जल्द ही सडणकों पर फायर फाइटिंग बाइक्स दौड़ती नजर आएंगी। जिससे तंग गलियों में भी तेजी से आग पर काबू पाया जा सकेगा।यह जानकारी नगर निगम आयुक्त ओमप्रकाश मेहरा ने दी। अग्निशमन सेवा सुरक्षा सप्ताह के शुभारम्भ पर मंगलवार को आयुक्त मेहरा ने बताया कि अग्निशमन बेड़े को मजबूत करने के लिए संसाधनों में निरंतर वृद्धि की जा रही है। तंग गलियों में त्वरित कार्रवाई के लिए फायर फाइटिंग बाइक्स खरीदी जाएंगी।आयुक्त ने बताया कि वहीं रोशनी की बेहतर व्यवस्था के लिए दो लाइटिंग टावर भी जल्द शामिल किए जाएंगे। फायर बाइक्स व लाइटिंग टावर की स्वीकृति शीघ्र ही डीएलबी से मिलने की संभावना है। वहां से स्वीकृति मिलते ही इन दोनों को क्रय किया जाएगा।</p>
<p><strong>मुख्यालय को भेजा हुआ है प्रस्ताव</strong><br />कोटा शहर में जहां बड़ी -बड़ी दमकलें और बहुमंजिला इमारतों की आग बुझाने के लिए विदेशी हाइड्रोलिक लेडर दमकलें तक निगम के फायर अनुभाग में हैं। वहां पुराने शहर की तंग गलियों में लगनी वाली आग को काबू करने में आने वाली परेशाने को दूर करने के लिए फायर बाइक्स नहीं हैं।हालांकि नगर निगम के फायर अनुभाग की ओर से कई साल पहले ही डीएलबी को चार फायर बाइक्स का प्रस्ताव भेजा हुआ है। लेकिन अभी तक वहां से फायर बाइक्स नहीं आई है।</p>
<p><strong>दो की आवश्यकता</strong><br />सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि पहले दो नगर निगम होने से चार फायर बाइक्स का प्रस्ताव भेजा हुआ था। लेकिन वर्तमान में दो ही फायर बाइक्स की आवश्यकता है। करीब 15 से 17 लाख कीमत की इन फायर बाइक्स की डीएलबी से स्वीकृति मिलते ही उन्हें क्रय किया जाएगा।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि शहर में हर बार गर्मी के सीजन में तंग गलियों में आग बुझाने में परेशानी को देखते हुए फायर बाइक्स की आवश्यकता का मुद्दा दैनिक नवज्योति ने कई बार प्रकाशित किया है। समाचार पत्र में 10 मार्च को पेज 3 पर इस  बार भी तंग गलियों में नजर नहीं आएंगी फायर बाइक शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। समाचार प्रकाशित होने के बाद निगम अधिकारी व फायर अनुभाग अधिकारियों ने इस संबंध में कार्रवाई को गति दी। जिसके बाद अब फायर बाइक्स क्रय करने की संभावना बनी है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Apr 2026 12:02:00 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सीएचसी में मदर लैब शुरू नहीं होने से मरीज परेशान, नहीं मिल रहा उन्नत जांच सुविधाओं का लाभ </title>
                                    <description><![CDATA[मदर लैब के लिए मशीनें सीएचसी पहुंची लेकिन भवन अधूरा होने से  स्थापित नहीं की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patients-inconvenienced-as--mother-lab--fails-to-launch-at-chc--denied-access-to-advanced-diagnostic-facilities/article-150420"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/111200-x-600-px)-(16).png" alt=""></a><br /><p>कैथून। कैथून सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में स्वीकृत बीपीएचयू भवन का निर्माण तय समय पर पूरा नहीं होने से मदर लैब शुरू नहीं हो सकी है, जिससे मरीजों को मुफ्त जांच सुविधाओं का लाभ नहीं मिल पा रहा है। जानकारी के अनुसार कैथून सीएचसी में बीपीएचयू यूनिट वर्ष 2023 में स्वीकृत हुई थी, जिसके लिए 75 लाख रुपए मंजूर किए गए थे। योजना के अनुसार वर्ष 2024 तक भवन निर्माण पूरा कर हैंडओवर होना था, लेकिन अब तक निर्माण कार्य अधूरा पड़ा है। इसके चलते मदर लैब शुरू नहीं हो सकी और क्षेत्र के हजारों मरीज उन्नत जांच सुविधाओं से वंचित हैं। कैथून सीएचसी में आसपास के गांवों से सैकड़ों मरीज रोजाना उपचार के लिए आते हैं। भवन तैयार नहीं होने से कैंसर मार्कर, बायोप्सी और हार्मोनल टेस्ट सहित 145 प्रकार की जटिल जांचें शुरू नहीं हो पा रही हैं।</p>
<p><strong>मशीनें पहुंचीं, लेकिन स्थापना रुकी</strong><br />जानकारी के अनुसार मदर लैब के लिए ऑटोमैटिक बायोकेमिस्ट्री एनालाइजर, कोबास C-801 और इलेक्ट्रोलाइट एनालाइजर जैसी मशीनें सीएचसी पहुंच चुकी हैं, लेकिन भवन अधूरा होने के कारण इन्हें स्थापित नहीं किया जा सका। योजना के तहत पीएचसी और आयुष्मान आरोग्य मंदिरों से सैंपल लेकर मदर लैब भेजे जाने थे और रिपोर्ट ऑनलाइन मरीजों को उपलब्ध कराई जानी थी।</p>
<p><strong>विधायक से लगाई गुहार</strong><br />भाजपा नगर मंडल अध्यक्ष हरिओम पुरी और देवेंद्र शर्मा ने मदर लैब शुरू कराने को लेकर विधायक कल्पना देवी से चर्चा की। इस पर विधायक ने संबंधित अधिकारियों को जल्द निर्माण कार्य पूरा कर लैब शुरू कराने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p><strong>शिफ्टिंग की चर्चा से बढ़ी चिंता</strong><br />स्थानीय स्तर पर यह चर्चा भी है कि मदर लैब को कैथून के बजाय कोटा में कहीं अन्य स्थान पर शिफ्ट किया जा सकता है। इस पर हरिओम पुरी ने लैब को कैथून में ही संचालित रखने और मशीनों को अन्यत्र नहीं भेजने की मांग की है। साथ ही लोगों ने चेतावनी दी है कि यदि लैब को कहीं और स्थानांतरित किया गया तो इसका विरोध किया जाएगा।</p>
<p>ठेकेदार द्वारा समय पर कार्य पूरा नहीं करने से परियोजना रुकी हुई है। ठेकेदार को कई बार मौखिक रूप से निर्देश दिए गए हैं और उच्च अधिकारियों को पत्र भी भेजे गए हैं। जिला स्वास्थ्य समिति की बैठक में जिला कलक्टर को भी इस स्थिति से अवगत कराया जा चुका है।<br /><strong>-डॉ. राजेश सामर, चिकित्सा अधिकारी प्रभारी, सीएचसी, कैथून</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Apr 2026 17:43:52 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा के बैंकों में पड़े 60 करोड़ का धणी धोरी नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[दस साल से बंद पड़े खातों का खंगाला जा रहा रिकॉर्ड, अब तक लौटाए 3 करोड़।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/60-crore-lying-in-kota-banks-has-no-claimant/article-150187"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/1200-x-600-px)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  शिक्षा नगरी के विभिन्न बैंकों में करीब 60 करोड़ रुपए की ऐसी जमा - राशि है, जिसका कोई दावेदार नहीं आया है। तकनीकी भाषा में इसे अनक्लेम्ड डिपॉजिट कहा जाता है। हालांकि, केंद्र के निदेर्शों के बाद अब बैंक इन पैसों को उनके असली हकदारों तक पहुंचाने के लिए मिशन मोड पर काम कर रहे हैं। इनमें से करीब मार्च माह तक विभिन्न बैंकों ने करीब 3 करोड़ से अधिक की राशि हकदारों को लौटा दी है।बाकी राशि के लिए बैंक खाताधारकों व असली वारिसों तक पहुंचने के लिए बैंकों में पुराने रिकॉर्ड खंगाले जो रहे हैं। लीड़ बैंक मैनेजर दिलीप कौर ने बताया कि इस दौरान कई रोचक और भावुक कर देने वाले किस्से सामने आ रहे हैं। शहर सहित आसपास के गांवों में निवास करने वाले कुछ ऐसे परिवार हैं जिनके माता-पिता के लाखों रुपए बैंकों जमा है लेकिन बच्चों को मालूम नहीं है। वे दुनिया को अलविदा कहने के पहले परिजन को बता नहीं सके। बैंक वाले घर पहुंचे तब उन्हें पता चला। वहीं करीब त्रैमासिक बैठक में भी खाताधारकों को खोजने के लिए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए जाते हैं। वहीं फिल्ड़ में कार्यरत स्टॉफ व बैंक बीसी के माध्यम से भी उनको खोजने के प्रयास किए जाते हैं।</p>
<p><strong>केस 1- परिवार की तो लॉटरी लग गई</strong><br /> हरिश कुमार ने बताया शहर की एक शाखा का स्थानांतरण दूसरे जगह हो गया मेरे पिता बैंक में लेन -देन करते थे, तो हमे कुछ भी पता नहीं था। पासबुक तो थी, पर उसमें एंट्री अधूरी थीं। खाते में 10 साल तक लेन-देन न होने पर बैंक ने नियमानुसार पैसा आरबीआई भेज दिया था। अभियान में जब बैंक कर्मी पुराने पते पर पहुंचे, तो परिवार आश्चर्य में पड़ गया। उन्हें पता चला कि उनके दिवंगत परिजन के खाते में 12 लाख रुपए जमा हैं। फिर हमने जरूरी दस्तावेज बैंक में जमा करवाये और बैंक ने खाते में ट्रांसफर किए।</p>
<p><strong>केस-2  रिश्तेदारों के माध्यम से खोजा </strong><br />बैंक में कार्यरत कर्मचारी ने बताया कि सुल्तानपुर के एक परिवार के बैंक खातों में करीब तीन लाख रुपये जमा थे। उनको पता नहीं था। हमे पता चलने के बाद हमनें उनको खोजना शुरू किया। जिसमें हमने सबसे पहले बैंक बीसी के माध्यम से सुल्तानपुर में खाताधारक को खोजने की शुरूआत की पर पता चला नहीं चला। उसके बाद उनके रिश्तेदारों के माध्यम से उनको खोजा फिर पता चला कि खाताधारक की मृत्यु हो गई। उसके बाद उनके पुत्रों को करीब उनकी राशि तीन लाख रुपये सौंपी गई।</p>
<p><strong>केस -3 खुशी का ठिकाना नहीं रहा</strong><br />वहीं शहर की नयापुरा स्थित बैंक शाखा के कर्मचारियों ने बताया कि एक खाताधारक के करीब तीन से चार लाख रुपये थे जो कि रखे हुए थे। खाताधारक की मृत्यु हो जाने पर उनके पुत्रों को पता नहीं था। हमने बीएलओं के माध्यम से उनसे संपर्क किया तो पता चला की वहां परिवार अब गुवाहाटी शिफ्ट हो गया। फिर उनसे संपर्क कर उनको बैंक बुलाया गया। उसके बाद उनकी राशि उनको ट्रांसफर की गई।</p>
<p><strong>सार्वजनिक स्थानों से लेकर समाजजन तक से करते है संपर्क</strong><br />बैंक में कार्यरत कर्मचारियों ने बताया कि हम सबसे पहले पासबुक पर अंकित पते पर जाकर उनके बारे में जानकारी जुटते हैं। उसके बाद कुछ इधर-उधर शिफ्ट हो जाते है तो आसपास के लोग से उनके बारे में जानकारी करते है साथ ही उनके रिश्तेदारों के भी नंबर लेकर उनसे संपर्क करते हैं। जिसके बाद उनसे बातचीत करके उनको मामला बताते हैं।</p>
<p><strong>बैंक खाते राशि करोड़ में</strong><br />बीओबी 11140 4 करोड़ 30 लाख<br />बीओआई 17406 3 करोड़ 22 लाख<br />सीबीआई 29111 5 करोड़ 43 लाख<br />एसबीआई 32033 16 करोड़ 83 लाख<br />आईसीआईसीआई 22502 9 करोड़ 44 लाख<br />पीएनबी 35872 9 करोड़ 18 लाख<br />केनरा बैंक 3346 90 लाख<br />एचडीएफसी 17617 71 लाख<br />आरजीबी 38946 4 करोड़ 92 लाख<br />बैंक आॅफ महाराष्टÑ 53 14 लाख<br />नोट: अन्य बैंकों में भी राशि जमा है जिनका विवरण यहाँ नहीं दिया गया है। दी गई खाता संख्या और राशि अनुमानित है।</p>
<p><strong>इनका कहना </strong><br />बैंक खाताधारकों को ढूढ़ने के लिए हर संभव प्रयास कर रही। खाताधारकों की मृत्यु हो जाने पर उनकी नॉमिनी को आवश्यक दस्तावेज देखकर व जांच परख कर पैसा लौटाया जा रहा हैं।<br /><strong>-दिलीप कौर, लीड़ बैंक मैनेजर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Apr 2026 14:35:12 +0530</pubDate>
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