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                <title>कोटा - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>कोटा RSS Feed</description>
                
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                <title>मरीजों को समय पर चिकित्सा सुविधा उपलब्ध कराना हमारी प्राथमिकता : बिरला</title>
                                    <description><![CDATA[मेडिकल कॉलेज, जेके लोन और रेलवे अस्पताल के मरीजों को मिलेगी निशुल्क परिवहन सेवा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/providing-timely-medical-facilities-to-patients-is-our-priority-%E2%80%93-birla/article-163332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/6622-copy52.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने बुधवार को कोटा स्थित कैंप कार्यालय से अत्याधुनिक एडवांस्ड लाइफ सपोर्ट सिस्टम से लैस तीन एम्बुलेंस को जनसेवा के लिए समर्पित की। भारतीय अक्षय ऊर्जा विकास संस्था लिमिटेड के सीएसआर सहयोग तथा सांसद निधि के माध्यम से इंडियन रेड क्रॉस सोसाइटी द्वारा उपलब्ध कराई गई ये एम्बुलेंस कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल, जेके लोन अस्पताल और रेलवे अस्पताल में मरीजों की निशुल्क आवाजाही के लिए उपलब्ध रहेंगी।</p>
<p>इस अवसर पर बिरला ने कहा कि कोटा-बून्दी में स्वास्थ्य सेवाओं को और मजबूत करना तथा मरीजों को बेहतर उपचार के साथ अधिक से अधिक सुविधाएं निशुल्क उपलब्ध कराना प्राथमिकता है। उन्होंने कहा कि जरूरत के समय मरीज को समय पर अस्पताल पहुंचाना बेहद महत्वपूर्ण होता है। नई एम्बुलेंस से गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में सुविधा मिलेगी और जरूरतमंद परिवारों को राहत मिलेगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवाओं में संसाधनों की उपलब्धता बढ़ाने के साथ यह भी जरूरी है कि उनका लाभ आमजन को आसानी से मिले। इसी दिशा में कोटा-बून्दी क्षेत्र में चिकित्सा सुविधाओं को लगातार बेहतर बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p>इस दौरान कोटा मंडल रेल प्रबंधक अनिल कालरा, मेडिकल कॉलेज के प्रिंसिपल डॉ. नीलेश जैन, जेके लोन अस्पताल की अधीक्षक डॉ. निर्मला शर्मा सहित रेलवे तथा चिकित्सा विभाग के अधिकारी एवं कर्मचारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 15:52:17 +0530</pubDate>
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                <title>कार की &quot;बत्ती &quot; में नशे का तहखाना, खुला राज तो निकली 18.2 किलो अफीम</title>
                                    <description><![CDATA[चित्तौड़गढ़ से पीछा कर कोटा तक लाया गया संदिग्ध वाहन,चालक और वाहन मालिक की तलाश जारी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/hidden-stash-of-narcotics-found-in-car-s-tail-light--18-2-kg-of-opium-discovered-upon-inspection/article-163329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/hpvxbmjasaalyj5.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । केंद्रीय नारकोटिक्स ब्यूरो (सीबीएन) राजस्थान यूनिट ने मादक पदार्थों की तस्करी के खिलाफ बड़ी कार्रवाई करते हुए 18.200 किलोग्राम अवैध अफीम जब्त की है। साथ ही तस्करी में इस्तेमाल की जा रही कार को भी जब्त किया गया है। अफीम कार की पिछली लाइट में बनाए गए विशेष गुप्त खाने में 29 छोटे पैकेटों में छिपाकर रखी गई थी।</p>
<p><strong>बाड़मेर ले जाई जा रही थी अफीम की खेप</strong><br />डीएनसी नरेश बुंदेल ने बताया कि सूचना मिली थी कि राजस्थान नंबर की एक कार में अवैध अफीम की खेप को बाड़मेर क्षेत्र की ओर ले जाया जा रहा है। सूचना के आधार पर चित्तौड़गढ़ डिवीजन-2 की टीम ने संदिग्ध मार्गों पर निगरानी और नाकाबंदी शुरू की। इसी दौरान सफेद रंग की संदिग्ध कार नजर आई, लेकिन चालक टीम को देखकर अचानक दिशा बदलकर तेज गति से भाग गया।</p>
<p><strong>टीम को गच्चा देकर गायब हुई कार, जवानों ने बिछाया जाल</strong><br />इस पर टीम ने कार का पीछा किया, लेकिन कुछ दूरी के बाद वाहन नजरों से ओझल हो गया। संदिग्ध मार्ग दो दिशाओं में बंटने के कारण टीम को दो दलों में विभाजित कर आसपास के क्षेत्रों में तलाश शुरू की गई। लगातार तलाशी के दौरान एक टीम को संदिग्ध कार दूर से दिखाई दी। मौके पर पहुंचने पर कार में कोई व्यक्ति नहीं मिला। टीम ने वाहन के आसपास निगरानी के लिए सादे कपड़ों में जवान तैनात किए और चालक के लौटने का इंतजार किया।</p>
<p><strong>मौके पर नहीं मिला कुछ, कोटा कार्यालय में खुला राज</strong><br />दूसरी टीम ने वाहन के चालक और मालिक का पता लगाने का प्रयास किया, लेकिन कोई व्यक्ति कार पर दावा करने नहीं पहुंचा। मौके पर वाहन की तलाशी लेने पर भी कोई संदिग्ध वस्तु नहीं मिली। इसके बाद कार को विस्तृत जांच के लिए सीबीएन कार्यालय कोटा लाया गया। वहां कार मैकेनिक की मदद से वाहन की बारीकी से जांच की गई तो पिछली लाइट में विशेष रूप से बनाया गया गुप्त खाना मिला। इसे खोलकर जांच करने पर 29 छोटे पैकेट बरामद हुए, जिनमें कुल 18.200 किलोग्राम अवैध अफीम मिली।</p>
<p><strong>टाटा नेक्सॉन जब्त, एनडीपीएस एक्ट में मामला दर्ज</strong><br />सीबीएन ने सभी कानूनी औपचारिकताएं पूरी करने के बाद अफीम और तस्करी में इस्तेमाल टाटा नेक्सॉन को एनडीपीएस एक्ट, 1985 की संबंधित धाराओं के तहत जब्त कर लिया। मामले में आगे की जांच जारी है। जांच एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि अफीम की खेप कहां से लाई गई थी और इसे कहां पहुंचाया जाना था। साथ ही तस्करी से जुड़े नेटवर्क और वाहन के चालक की पहचान के प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>तस्करों का नया पैंतरा: बत्ती में बनाया गुप्त ठिकाना</strong><br />सीबीएन की कार्रवाई में यह सामने आया कि तस्कर पुलिस की नजर से बचने के लिए वाहनों में विशेष गुप्त खाने तैयार कर रहे हैं। इस मामले में भी मौके पर तलाशी में कुछ नहीं मिला, लेकिन सीबीएन कार्यालय में मैकेनिक और तकनीकी जांच के दौरान बैक लाइट के पीछे छिपाया गया यह पूरा नेटवर्क बेनकाब हो गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 15:28:18 +0530</pubDate>
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                <title>नए वार्ड, पुरानी समस्याएं : 10 से 15 किलोमीटर में फैले वार्ड, सुविधाएं अब भी दूर</title>
                                    <description><![CDATA[चंद्रेसल का मुख्य मार्ग बदहाल व अंधेरा बना परेशानी का कारण।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/new-wards--old-problems--wards-spanning-10-to-15-kilometers--amenities-remain-out-of-reach/article-163317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/6622-copy49.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के नए परिसीमन के बाद वार्डों की तस्वीर भले ही बदली हो, लेकिन वार्ड नंबर 9 में कोई खास बदलाव नजर नहीं आता। पहले जितना क्षेत्र वार्ड में शामिल था, लगभग वही क्षेत्र अब भी वार्ड नंबर 9 का हिस्सा है। करीब 15 किलोमीटर के दायरे में फैले इस वार्ड में दूरी के साथ समस्याओं का दायरा भी बड़ा है। कहीं सड़कें जवाब दे रही हैं तो कहीं पानी की समस्या लोगों को परेशान कर रही है। अर्जुनपुरा क्षेत्र में सड़क की हालत खराब है और रात के समय पर्याप्त रोड लाइट नहीं होने से लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है। सबसे गंभीर स्थिति श्मशान तक जाने वाले रास्ते की है। रास्ता खराब होने के साथ श्मशान की व्यवस्थाएं भी बदहाल बताई जा रही हैं। ऐसे में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचने वाले लोगों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।</p>
<p>वार्डवासियों को अब उम्मीद है कि निगम प्रशासन सड़क, पानी, प्रकाश व्यवस्था और अतिक्रमण जैसी मूलभूत समस्याओं को प्राथमिकता से लेकर समाधान की दिशा में ठोस कदम उठाएगा। लोगों का कहना है कि शहर का हिस्सा होने के बावजूद यदि किसी क्षेत्र में आज भी सड़क, रोशनी और बुनियादी सुविधाओं के लिए इंतजार करना पड़े, तो विकास की तस्वीर अधूरी ही मानी जाएगी।</p>
<p><strong> शिकायतों के बाद भी नहीं बदली तस्वीर</strong><br />अर्जुनपुरा क्षेत्र में मूलभूत सुविधाओं को लेकर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क की स्थिति लंबे समय से खराब है। बारिश के दौरान परेशानी और बढ़ जाती है। श्मशान तक पहुंचने वाला मार्ग भी दुरुस्त नहीं होने से बुजुर्गों और महिलाओं को विशेष परेशानी होती है। इसके अलावा अतिक्रमण और सड़क संबंधी शिकायतें भी लगातार सामने आती रहती हैं।</p>
<p><strong>चंद्रेसल का मुख्य मार्ग भी बदहाल, रोड लाइट भी नहीं</strong><br />वार्ड नंबर 10 में आने वाले चंद्रसाल ग्राम की स्थिति भी लोगों के लिए चिंता का कारण बनी हुई है। गांव में जाने वाला मुख्य मार्ग क्षतिग्रस्त हो रहा है। सड़क की खराब हालत के साथ इस मार्ग पर रोड लाइट की सुविधा भी पर्याप्त नहीं है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शाम ढलने के बाद मार्ग पर अंधेरा छा जाता है। ऐसे में वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी होती है। लोगों ने बताया कि अंधेरे का फायदा उठाकर इस मार्ग पर कई बार लूटपाट की वारदातें भी हो चुकी हैं। केवल वार्डों का परिसीमन बदलने से समस्याएं खत्म नहीं होंगी। जरूरत इस बात की है कि नए दायरे के हिसाब से विकास और निगरानी भी मजबूत कि जाए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर, क्षेत्र व जनसंख्या</strong><br />-वार्ड नंबर 6 जनसंख्या 12,951 क्षेत्र: मीरा बस्ती, मवासा पुलिया क्षेत्र, संजय नगर, भीमपुरा ग्राम, कोर्ट मोहल्ला, सम्मलेश्वर मंदिर, नयाखेड़ा मोहल्ला, वैद्ययनाथ मंदिर, गाड़ीगाल आदि।</p>
<p>-वार्ड नंबर 7 जनसंख्या 12,732 क्षेत्र: न्यू कॉलोनी, हरिजन बस्ती, कृषि उपजमंडी, किशनपुरा बस्ती, बूटा सिंह कॉलोनी, मेला बस स्टैंड, अहिरवाड़ा, आजाद नगर आदि क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>-वार्ड नंबर 8 जनसंख्या 12,710 क्षेत्र: धाकड़खेड़ी, चण्डीन्दा, भोजपुरा, आरामपुरा, जालखेड़ा, खेड़ा रसूलपुर, चैनपुरा आदि क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>-वार्ड नंबर 9 जनसंख्या 11,284 क्षेत्र: अर्जुनपुरा, दसलाना, झालीपुरा, जगन्नाथपुरा, बोरखंडी छोटी व बड़ी, मण्डानिया, आदि क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>-वार्ड नंबर 10 जनसंख्या 11393 क्षेत्र: बड़ा सोगरिया, मधुबन कॉलोनी, रोटेदा ग्राम, चंदेशल ग्राम, मानसिंह बस्ती आदि शामिल है।</p>
<p>पार्षद कार्यकाल में कई क्षेत्रों में सड़क सहित विभिन्न विकास कार्य करवाए गए। निगम प्रशासन ने सीवरेज लाइन डालने के दौरान पहले से बनी सड़कों को तोड़ दिया। सीवरेज लाइन डाले हुए करीब तीन साल बीत चुके हैं, लेकिन अब तक कई जगह कनेक्शन नहीं दिए गए हैं। इससे लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-मनोज सैनी ,पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में लगभग सभी मूलभूत सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को दूर करने का प्रयास किया गया है। वार्डवासियों की ओर से समय-समय पर सामने आने वाली समस्याओं का प्राथमिकता से समाधान कराया गया। उनका कहना है कि क्षेत्र के विकास और लोगों को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने के लिए लगातार काम किया गया है।<br /><strong>- सोनम,पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में सामुदायिक भवन की सुविधा नहीं है और सड़क की समस्या सबसे ज्यादा बनी हुई है। कई जगह लोगों को आने-जाने में परेशानी होती है। समस्या को लेकर कई बार लिखित और मौखिक रूप से शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। लोगों को उम्मीद है कि नगर निगम क्षेत्र की समस्याओं को गंभीरता से लेकर सड़क और अन्य मूलभूत सुविधाओं में सुधार कराएगा।<br /><strong>-महेंद्र गुर्जर ,वार्डवासी </strong></p>
<p>वार्ड काफी बड़े दायरे में फैला हुआ है, इसलिए यहां समस्याओं का दायरा भी बड़ा है। अलग-अलग क्षेत्रों में अलग-अलग तरह की परेशानियां सामने आती हैं, लेकिन सबसे बड़ी समस्या पानी की रहती है। कई बार लोगों को पानी की समस्या से जूझना पड़ता है। बड़े वार्ड में रहने वाले लोगों को समय पर सुविधाएं मिलें, इसके लिए प्रशासन को नियमित रूप से क्षेत्रों का निरीक्षण कर समस्याओं का समाधान करना चाहिए।<br /><strong> -विजय शर्मा,वार्डवासी</strong></p>
<p>पहले वार्ड की पार्षद ईना मीणा थीं,आमजन को छोटे-छोटे कामों के लिए भी परेशान होना पड़ा। यहां तक कि एक साइन करवाने के लिए भी लोगों को इधर-उधर दौड़ लगानी पड़ती थी। जनप्रतिनिधि से उम्मीदें थीं, लेकिन वार्ड में समस्याओं का अंबार लगा रहा और लोगों की सुनवाई तक नहीं हुई।<br /><strong>-शरद कुशवाह,वार्डवासी  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 14:27:12 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीर, कहीं टीनशेड के नीचे तो कहीं मंदिर परिसर में चल रहे स्कूल</title>
                                    <description><![CDATA[कहीं टीनशेड के नीचे तो कहीं मंदिर परिसर में चल रहे स्कूल, न कक्षा-कक्ष, न ब्लैक बोर्ड और न बैठने की समुचित व्यवस्था।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/an-attempt-to-mask-the-dismal-state-of-affairs/article-163314"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/6622-copy48.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सरकारी स्कूलों में बाहरी लोगों के प्रवेश और विद्यार्थियों व स्कूल की भौतिक व्यवस्थाओं के फोटो-वीडियो बनाने को लेकर शिक्षा विभाग की सख्ती के बीच ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों की बदहाल तस्वीरें सामने आर्इं, जो शिक्षा विभाग की मंशा पर सवाल खड़े कर रही हैं। कहीं, मंदिर परिसर में तो कहीं टीनशेड के नीचे स्कूल चल रहे हैं। किसी स्कूल में ब्लैक बोर्ड तक नहीं है, तो किसी में जर्जर कक्षों पर ताला लगाकर बच्चों को बरामदे व खुले स्थान पर बैठाना पड़ रहा है।</p>
<p>इधर, शिक्षा विभाग का तर्क है कि विद्यार्थियों की सुरक्षा, गरीमा व निजता बनाए रखने के लिए बाहरी व्यक्तियों का प्रवेश व फोटो-वीडियो बनाने पर रोक लगाई गई है। उधर, ग्रामीणों का आरोप है कि सरकारी स्कूलों की बदहाली, अभावों से जूझते बच्चों की तस्वीरें समाज के बीच न आए, इसलिए विभाग ने यह आदेश जारी किए हैं। कोटा जिले के तीन सरकारी स्कूलों के हालात बेहद चौंकाने वाले मिले हैं, पेश है खबर के प्रमुख अंश....</p>
<p><strong>उदपुरा : मंदिर के आंगन में चल रहा स्कूल</strong><br />सुल्तानपुर पंचायत समिति के उदपुरा गांव का राजकीय प्राथमिक विद्यालय पिछले करीब डेढ़ माह से ठाकुरजी के मंदिर परिसर में टीनशेड के नीचे संचालित हो रहा है। उदपुरा निवासी उप सरपंच नरेश कुमार ने बताया कि स्कूल भवन जर्जर होने के कारण बच्चों को यहां शिफ्ट किया गया है। बारिश में टीनशेड के नीचे पढ़ाई ठप हो जाती है। कॉपी-किताबें भीग जाती है। ग्रामीणों के अनुसार, उदपुरा स्कूल भवन की बिल्डिंग अंदर से जर्जर है। छत की पट्टियां टूटी हुई है। कुछ दिनों पहले पीडब्ल्यूडी के अधिकारियों ने स्कूल का सर्वे किया था, जिसमें भवन को असुरक्षित बताते हुए यहां स्कूल संचालित नहीं करने की सलाह दी गई थी। इसके बाद से बच्चों की कक्षाएं मंदिर परिसर में लग रही हैं। ग्रामीण शुभम कुमार कहते हैं, उदपुरा स्कूल कक्षा पांचवीं तक संचालित है। जिसमें कुल 15 बच्चों का नामांकन है।</p>
<p><strong>कोटड़ापुरा : तीन कक्षाएं टीनशेड के नीचे</strong><br />सुल्तानपुर पंचायत समिति के कोटड़ापुरा राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय की स्थिति भी चिंताजनक है। यहां कक्षा छह, सात और आठवीं के बच्चों की कक्षाएं टीनशेड के नीचे संचालित खुले में टीनशेड के नीचे चलती है। बच्चों के लिए नियमित कक्षा-कक्ष उपलब्ध नहीं होने के साथ पढ़ाई के लिए ब्लैक बोर्ड तक की व्यवस्था नहीं है। ग्रामीणों के अनुसार, दीवार पर वैकल्पिक ब्लैक बोर्ड बनाया गया था, लेकिन दीवार का प्लास्टर जगह-जगह से उखड़ने के कारण वह भी क्षतिग्रस्त हो गया। ऐसे में टीनशेड के नीचे पढ़ने वाले बच्चों को बुनियादी शैक्षणिक सुविधा तक नहीं मिल पा रही है।</p>
<p><strong>प्राध्यापक कक्ष में चलती तीन कक्षाएं</strong><br />स्कूल में केवल दो छोटे कमरे हैं। इनमें से एक को मतदान केंद्र के रूप में उपयोग किया जाता है। जिसमें पोषाहार बनाया जाता है और खाद्य सामग्री भी रखी जाती है। दूसरा कमरा प्राध्यापक का है। जिसमें एक साथ तीन कक्षाएं-कक्षा पहली, दूसरी और तीसरी संचालित होती हैं। ऐसे में शेष कक्षाओं के बच्चों को खुले में बैठना पड़ता है।</p>
<p><strong>70 बच्चे, पांच शिक्षक</strong><br />कोटड़ापुरा स्कूल में करीब 70 बच्चों का नामांकन और पांच शिक्षक हैं।</p>
<p><strong>सोहनपुरा : प्लास्टर गिरा, बाल-बाल बचे बच्चे</strong><br />मंडाना क्षेत्र के राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय सोहनपुरा में मंगलवार को कक्षा-कक्ष की छत का प्लास्टर गिर गया था। गनीमत रही कि उस समय बच्चों की छुट्टी हो चुकी थी। स्कूल में कुल तीन कक्षा-कक्ष हैं। इनमें से दो कक्ष जर्जर होने के कारण बंद हैं। इसके चलते बच्चों को बरामदे और खुले स्थान में बैठाकर पढ़ाना पड़ता है। कक्षा एक से आठवीं तक संचालित इस स्कूल में करीब 65 बच्चों का नामांकन है।</p>
<p><strong>बदहाली की तस्वीरें सामने आना जरूरी या रोक?</strong><br />स्थानीय निवासी एडवोकेट शिव प्रकाश का कहना है, शिक्षा विभाग ने स्कूल परिसरों में बाहरी व्यक्तियों के प्रवेश और विद्यार्थियों तथा भौतिक संसाधनों के फोटो-वीडियो बनाने को लेकर सख्त दिशा-निर्देश जारी किए हैं। इन निर्देशों को लेकर अभिभावकों और ग्रामीणों में यह सवाल उठ रहा है कि स्कूल की कमियां सामने नहीं आएगी तो सुधार कैसे होगा। सवाल यह नहीं कि तस्वीर कौन ले रहा है, सवाल यह है कि स्कूल की हालत ऐसी क्यों है?, उदपुरा, कोटड़ापुरा और सोहनपुरा के हालात यही सवाल सामने रखते हैं कि बच्चों को सुरक्षित और बेहतर स्कूल भवन कब मिलेंगे?</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ऐसा नहीं है, बच्चों की सुरक्षा, निजता व गरीमा को देखते हुए यह निर्णय लिया गया है। प्रिंसिपल की अनुमति के बिना वीडियो-फोटो नहीं लिए जा सकते।<br /><strong>-अनिल पोरवाल, मुख्य जिला शिक्षाधिकारी</strong></p>
<p>विद्यालय में किसी के आने-जाने पर व फोटो-वीडियो बनाने पर हमने कोई प्रतिबंध नहीं लगाया है। लेकिन, बच्चों की सुरक्षा का जिम्मा हमारा है। हमारे यहां कुछ भी छिपा नहीं है। किसी भी अनाधिकृत व्यक्ति के स्कूल में घुस आने से बच्चों की निजता बाधित होती है।<br /><strong>-मदन दिलावर, शिक्षा मंत्री</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 19 Aug 2026 14:25:13 +0530</pubDate>
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                <title>शहर में शामिल, फिर भी गांव जैसे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[बोले- नगर निगम में शामिल होने के बाद भी नहीं मिलीं शहर जैसी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/included-in-the-city--yet-conditions-resemble-a-village/article-163224"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(6)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कोटा शहर की सीमा में शामिल होने के बावजूद वार्ड नंबर 1 से 5 तक के कई इलाकों की तस्वीर आज भी गांव जैसी नजर आती है। शहर का हिस्सा होने के बावजूद यहां रहने वाले लोगों को सड़क, पानी, बिजली, नाली और स्ट्रीट लाइट जैसी मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। कई जगह मुख्य सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। बारिश के दिनों में हालात और खराब हो जाते हैं। सड़क पर जमा गंदा पानी पैदल राहगीरों के साथ वाहन चालकों के लिए भी परेशानी का कारण बन रहा है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपनी समस्याओं के समाधान और क्षेत्र के विकास की उम्मीद में जनप्रतिनिधि चुने, लेकिन उम्मीद के मुताबिक काम नहीं हो पाया। कई इलाकों में आज भी विकास कार्यों की दरकार है। लोगों का कहना है कि नगर निगम क्षेत्र में आने के बाद भी यदि मूलभूत सुविधाएं नहीं मिलें तो शहर और गांव में अंतर ही क्या रह जाता है।</p>
<p><strong>कहीं सड़क बदहाल तो कहीं नालियों का पानी सड़कों पर</strong><br />इन वार्डों के कई क्षेत्रों में सड़कें लंबे समय से क्षतिग्रस्त हैं। जगह-जगह गड्ढे होने से वाहन चालकों को परेशानी होती है। कई स्थानों पर नालियों की समुचित व्यवस्था नहीं होने के कारण घरों और गलियों का पानी सड़क पर आ जाता है। इससे लोगों को पैदल निकलने में भी परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि कई बार संबंधित अधिकारियों तक शिकायत पहुंचाने के बावजूद स्थायी समाधान नहीं हुआ। स्ट्रीट लाइटों की स्थिति भी चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि कई स्थानों पर पोल तो लगे हैं, लेकिन लाइटें नियमित रूप से नहीं जलतीं। रात के समय अंधेरा रहने से लोगों को परेशानी होती है। ग्रामीण क्षेत्र से शहर का हिस्सा बने इन इलाकों में तेजी से विकास की जरूरत है, लेकिन सुविधाओं का विस्तार उस गति से नहीं हुआ है।</p>
<p><strong>शहर जैसी सुविधाओं की उम्मीद, विकास अंतिम छोर तक पहुंचे</strong><br />क्षेत्रों के लोगों की सबसे बड़ी मांग अब शहर जैसी मूलभूत सुविधाओं की है। लोगों का कहना है कि केवल वार्ड सीमा में शामिल करना पर्याप्त नहीं, बल्कि विकास का लाभ भी अंतिम छोर तक पहुंचना चाहिए। मुख्य सड़कों की मरम्मत, नालियों की नियमित सफाई, जलभराव का स्थायी समाधान और खराब स्ट्रीट लाइटों को दुरुस्त करना प्राथमिकता होनी चाहिए। स्थानीय लोगों को ऐसे प्रतिनिधि की उम्मीद है, जो उनके बीच रहकर समस्याएं सुने और अधिकारियों से समन्वय कर समाधान करवाए। लोगों का कहना है कि अब गांव जैसी बदहाली नहीं, बल्कि शहर जैसी सुविधाएं चाहिए।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर और क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 1-</strong> शंभूपुरा, गिरधरपुरा एवं गोवर्धनपुरा ग्राम<br /><strong>वार्ड नंबर 2-</strong> कबीर आश्रम, विजय राजे सिंधिया चौराहा, ज्ञान सरोवर कॉलोनी, नयागांव उर्फ दौलतगंज, रोझड़ी का आंशिक भाग, पटवार ट्रेनिंग स्कूल, मोदी इंस्टीट्यूट, कौटिल्य कॉलेज आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 3- </strong>ग्राम आमली, रथकांकरा, बंधा, धरमपुरा की समस्त राजस्व सीमा, देवनारायण योजना, रोझड़ी राजस्व ग्राम का आंशिक भाग, धरमपुरा रोड की समस्त कॉलोनियां<br /><strong>वार्ड नंबर 4- </strong>रानपुर, पुनिया देवरी, रानपुर एजुकेशन एरिया, रेतिया चौकी, लखावा, जगपुरा, खेड़ा जगपुरा, भीमपुरा, उमेदपुरा, भामाशाह मंडी, रानपुर औद्योगिक क्षेत्र, कोयला तलाई आदि<br /><strong>वार्ड नंबर 5-</strong> कंवरपुरा ग्राम, श्रीराम नगर, कच्ची बस्ती, कहारों की बस्ती, डीसीएम कॉलोनी, डीसीएम श्रीराम फैक्ट्री, श्रीराम कॉलोनी, उमेदगंज गांव का संपूर्ण क्षेत्र, राजनगर का आंशिक क्षेत्र, मानसरोवर कॉलोनी, कोटा क्लब, गायत्री विहार एवं रायपुरा क्षेत्र शामिल है।</p>
<p>घर-घर पाइपलाइन पहुंचाने के साथ सड़क निर्माण, स्कूल निर्माण और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करवाया गया। वार्डवासियों की सुविधा के लिए पट्टे बनवाने का काम भी किया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड के लोगों की समस्याओं को सुनकर उनका समाधान करवाने का हरसंभव प्रयास किया गया और जरूरत के अनुसार विकास कार्यों को गति दी गई।<br /><strong>-पवन मीणा,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>पार्षद कार्यकाल के दौरान राजनीतिक फेरबदल के कारण उनके साथ भेदभाव किया गया, जिसके चलते वार्ड में प्रस्तावित कई विकास कार्य पूरे नहीं हो सके। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि के रूप में उनकी प्राथमिकता हमेशा वार्डवासियों को मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध करवाना और उनकी समस्याओं का समय पर समाधान करना रही।<br /><strong>- सोनू भील,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्ड की स्थिति आज भी गांव जैसी बनी हुई है। नगर निगम क्षेत्र में शामिल होने के बावजूद यहां मूलभूत सुविधाओं का अपेक्षित विकास नहीं हो पाया है। जनप्रतिनिधियों के साथ निगम के अधिकारियों ने भी वार्ड की समस्याओं पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया। इसके कारण स्थानीय लोगों को सड़क, सफाई और अन्य जरूरी सुविधाओं को लेकर लगातार परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>-कपिल गुर्जर,वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सड़कें लगातार क्षतिग्रस्त हो रही हैं और जगह-जगह बड़े गड्ढे बने हुए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भरने से वाहन चालकों और राहगीरों को काफी परेशानी होती है। उन्होंने बताया कि वार्ड में रोड लाइटें तो लगाई गई हैं, लेकिन कई जगह रात के समय ये जलती नहीं हैं। इससे अंधेरा रहने के कारण लोगों को आवागमन में परेशानी होती है और दुर्घटना की आशंका भी बनी रहती है।<br /><strong>- भागचंद,वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 18 Aug 2026 14:31:12 +0530</pubDate>
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                <title>श्रीनाथपुरम में बीएसएनएल ऑफिस बना मवेशियों का तबेला</title>
                                    <description><![CDATA[शिकायतों के बाद भी नहीं हुई कार्रवाई।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/bsnl-office-in-shrinathpuram-turns-into-a-cattle-shed/article-163139"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । श्रीनाथपुरम् ए क्षेत्र स्थित बीएसएनएल ऑफिस इन दिनों मवेशियों का तबेला बना हुआ है। जिससे वहां गंदगी रहने से स्थानीय लोगों के लिए यह परेशानी का कारण बना हुआ है।श्रीनाथपुरम् ए विकास समिति के पदाधिकारियों का कहना है कि यहां बीएसएनएल का आौफिस है। जिसमें गाय भैसों का जमघट रहने से यह तबेला बना हुआ है। यहां दिनभर गाय-भैसों के रहने से गोबर व अन्य गंदगी रहने लगी है। जिससे स्थानीय लोगों के लिए यह परेशानी बनी हुई है।</p>
<p>स्थानीय निवासी पी.पी. गर्ग ने बताया कि कॉलोनी के बीच स्थित ऑफिस व उसके आस-पास बड़ी संख्या में पशु पालकों के पशु घूमते रहते हैं। वे दूध निकालने के बाद उन्हें खुला छोड़ देते हैं। जिससे वे जगह-जगह पर गंदगी कर रहे हैं। साथ ही बीच सड़क पर भी बैठ जाते हैं। जिससे वहां रहने वालों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।उन्होंने बताया कि इस संबंध में कई बार बीएसएनएल अधिकारियों को भी अवगत करवा दिया कि इन पशुओं को यहां से हटवाया जाए लेकिन हर बार आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिल रहा। हालत यह है कि बड़ी संख्या में मवेशी गंदगी फेलाने के साथ ही हादसों का भी कारण बने हुए हैं। लेकिन इन मवेशियों को यहां से नहीं हटाया जा रहा है।</p>
<p>हालांकि कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि शहर से पशु पालकों व उनके बाड़ों को हटा दिया गया है। उन्हें बंधा धर्मपुरा स्थित देव नारायण आवासीय योजना में शिफ्ट किया गया है। उसके बाद भी यदि पशु पालक शहर में रह रहे हैं और उनके पशुओं से लोगों को परेशानी हो रही है तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 15:43:07 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नामी इलाकों में समस्याओं का अंबार, सुविधाएं बदहाल</title>
                                    <description><![CDATA[वार्डवासियों की शिकायत-चुनाव के समय नजर आते हैं जनप्रतिनिधि, बाद में मिलना मुश्किल ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/heaps-of-problems-and-poor-amenities-in-prominent-areas/article-163138"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(4)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की पहचान केवल कोचिंग और शिक्षा से ही नहीं, बल्कि यहां की विकसित और नामी कॉलोनियों से भी है। श्रीनाथपुरम, आरके पुरम, रंगबाड़ी, महावीर नगर और मेडिकल कॉलेज जैसे इलाके शहर के प्रमुख क्षेत्रों में गिने जाते हैं। लेकिन इन इलाकों में जब जमीनी हकीकत जानने के लिए पड़ताल की गई तो तस्वीर कुछ अलग नजर आई। वार्ड नंबर 50 से 54 तक किए गए दौरे में लोगों ने सफाई, सड़क, पानी, स्ट्रीट लाइट और सुरक्षा से जुड़ी समस्याएं सामने रखीं। लोगों का कहना है कि शहर के प्रमुख इलाकों में यदि बुनियादी सुविधाओं को लेकर ही परेशानी रहे तो यह चिंता का विषय है।वार्डों का क्षेत्रफल बढ़ने के साथ अब जनप्रतिनिधियों और निगम प्रशासन की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। लोगों का कहना है कि बड़े क्षेत्र में समस्याओं की नियमित निगरानी के लिए मजबूत व्यवस्था जरूरी है। केवल शिकायत आने के बाद कार्रवाई करने के बजाय अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को नियमित निरीक्षण करना चाहिए।</p>
<p><strong>परिसीमन के बाद बड़े हुए वार्ड, लेकिन समस्याओं का दायरा भी बढ़ा</strong><br />-वार्ड नंबर 50 में श्रीनाथपुरम स्टेडियम, जीएडी क्वार्टर्स, श्रीनाथपुरम के विभिन्न सेक्टर, हजीरा बस्ती, श्याम नगर, अकेलगढ़ और आरटीयू क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 51 में आरके पुरम ए, बी व ई, बॉम्बे योजना, काला बादल, सामुदायिक भवन और संपूर्ण मेडिकल कॉलेज क्षेत्र आता है।<br />-वार्ड नंबर 52 में हरिओम नगर, कच्ची बस्ती, वीर सावरकर नगर, लुहार बस्ती, पीएचईडी कार्यालय और रंगबाड़ी योजना के सेक्टर 4 व 5 शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 53 में महावीर नगर तृतीय के सेक्टर 2 से 9 तक का क्षेत्र आता है।<br />-वार्ड नंबर 54 में पारिजात सेक्टर 10 व 11, महावीर नगर द्वितीय का पूरा क्षेत्र तथा महावीर नगर तृतीय का सेक्टर 1 व 4 क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>सफाई सड़क व्यवस्था को लेकर सबसे ज्यादा नाराजगी</strong><br />पड़ताल के दौरान कई वार्डों में लोगों ने सफाई व्यवस्था को लेकर नाराजगी जताई। वार्डवासियों का कहना है कि कई जगह नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी की समस्या बनी रहती है। खाली जगहों और बस्तियों के आसपास सफाई व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। लोगों ने निगम से नियमित मॉनिटरिंग की मांग की है। इन वार्डों में सड़कें भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। कई जगह सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं लंबे समय से मरम्मत की जरूरत महसूस की जा रही है। लोगों का कहना है कि सड़कें केवल आवागमन का माध्यम नहीं, बल्कि शहर के विकास की तस्वीर भी होती हैं। नामी कॉलोनियों में सड़कों की स्थिति बेहतर होनी चाहिए। सड़क खराब होने से वाहन चालकों के साथ पैदल चलने वालों को भी परेशानी होती है।</p>
<p><br /><strong>लाइट-पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं की कमी</strong><br />स्ट्रीट लाइट और पानी जैसी मूलभूत सुविधाओं को लेकर भी अपनी समस्याएं बताईं। उनका कहना है कि रात के समय पर्याप्त रोशनी नहीं होने से सुरक्षा को लेकर चिंता बनी रहती है। वहीं पानी की व्यवस्था में कहीं भी समस्या हो तो उसका सीधा असर परिवारों पर पड़ता है। निगम और संबंधित विभागों को सुनिश्चित करना चाहिए कि पानी, सड़क, सफाई और रोशनी जैसी सुविधाएं नियमित और बेहतर तरीके से उपलब्ध हों।</p>
<p><strong>चुनाव के समय दिखते हैं, बाद में मिलना मुश्किल</strong><br />इन सभी समस्याओं के बीच वार्डवासियों की सबसे बड़ी नाराजगी जनप्रतिनिधियों की नियमित मौजूदगी को लेकर है। लोगों का कहना है कि चुनाव के समय नेता और जनप्रतिनिधि घर-घर पहुंचते हैं, लोगों की समस्याएं सुनते हैं और समाधान का भरोसा देते हैं। लेकिन चुनाव के बाद वही जनप्रतिनिधि नजर नहीं आते और उनसे मिलना मुश्किल हो जाता है।</p>
<p><strong>दिन में एक बार वार्ड का दौरा करें जनप्रतिनिधि</strong><br />जनप्रतिनिधियों को अपने वार्ड में नियमित रूप से दौरा करना चाहिए। कम से कम दिन में एक बार क्षेत्र का चक्कर लगाकर सफाई, सड़क, पानी, बिजली और सुरक्षा की स्थिति देखी जाए तो काफी समस्याएं मौके पर ही सामने आ सकती हैं।<br />लोगों का कहना है कि परिसीमन के बाद वार्ड भले ही बड़े हो गए हों, लेकिन जनता की उम्मीदें भी उतनी ही बड़ी हैं। श्रीनाथपुरम, आरके पुरम, रंगबाड़ी और महावीर नगर जैसे क्षेत्रों की पहचान कोटा शहर से जुड़ी है। ऐसे में इन इलाकों में अव्यवस्थाएं शहर की छवि पर भी असर डालती हैं।</p>
<p>भाजपा सरकार बनने के बाद से कांग्रेस पार्षदों वाले वार्डों के साथ विकास कार्यों में भेदभाव किया जा रहा है। जिन इलाकों में वास्तव में विकास की जरूरत है, वहां काम नहीं करवाए जा रहे, जबकि जहां पहले से सड़कें और पार्क बने हुए हैं, उन्हें बिना जरूरत तोड़कर दोबारा निर्माण कराया जा रहा है। बनी-बनाई सड़कों को उखाड़ने और हाल ही में विकसित पार्कों को फिर से तोड़कर बनाने से जनता के पैसों की बर्बादी हो रही है।<br /><strong>- शालिनी गौतम , पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>मेरे कार्यकाल में मेने वार्ड में सड़क और सफाई के कार्यों को प्राथमिकता दी थी। बालाजी नगर में सड़क और नालियों का निर्माण करवाया गया। इसके अलावा वार्ड के अन्य क्षेत्रों में भी जरूरत के अनुसार सड़क और नाली निर्माण सहित कई विकास कार्य करवाए गए।<br /><strong>-रेखा यादव, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में सड़क, नाली और सफाई व्यवस्था को दुरुस्त करने सहित कई विकास कार्य करवाए गए। वार्डवासियों की ओर से समय-समय पर बताई गई समस्याओं का भी अपने स्तर पर समाधान करवाने का प्रयास किया गया।<br /><strong>-नंदकंवर हाड़ा , पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में बिजली की समस्या बनी रहती है। वहीं पानी भी कम दबाव से आता है, जिससे लोगों को काफी परेशानी होती है। कई बार पार्षद को समस्या से अवगत करवाया, लेकिन अभी तक इसका स्थायी समाधान नहीं हो सका है। अब लोगों को इंतजार है कि समस्या का समाधान कब होगा।<br /><strong>-हिमांशु शर्मा, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड में सफाई व्यवस्था बिगड़ी हुई है। हालांकि पूर्व पार्षद के कार्यकाल में कई विकास कार्य करवाए गए, लेकिन कार्यकाल समाप्त होने के बाद समस्याएं बढ़ती जा रही हैं। सफाई व्यवस्था में सुधार के साथ अन्य मूलभूत समस्याओं के समाधान की भी जरूरत है।<br /><strong>-रतन कुमारी,वार्डवासी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 15:42:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>डिजिटल दौर में लौटेगी चिट्ठी की खुशबू</title>
                                    <description><![CDATA[डाक विभाग कर रहा प्रकृति संरक्षण की पहल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-charm-of-letter-writing-returns-in-the-digital-age/article-163135"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। डिजिटल दौर में सोशल मीडिया और मैसेजिंग एप ने भले ही चिट्ठी लिखने की परंपरा को पीछे छोड़ दिया हो, लेकिन भारतीय डाक विभाग अब इसी पुरानी परंपरा को नए संदेश और नए उद्देश्य के साथ जीवंत करने जा रहा है। प्रकृति संरक्षण और पर्यावरण जागरूकता को लेकर डाक विभाग की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इस बार प्रतियोगिता का विषय एक चिट्ठी धरती मां के नाम : प्रकृति की रक्षा, मेरा वादा रखा गया है। प्रतियोगिता में विद्यार्थी, युवा और आम नागरिक अपनी भावनाओं को कागज पर उतारकर धरती मां के प्रति अपना संकल्प व्यक्त कर सकेंगे। डाक विभाग की यह प्रतिष्ठित पत्र लेखन प्रतियोगिता 31 अक्टूबर तक चलेगी। प्रतियोगिता का उद्देश्य केवल पत्र लेखन की कला को बढ़ावा देना नहीं, बल्कि पर्यावरण संरक्षण को लेकर समाज के हर वर्ग में संवेदनशीलता और जागरूकता पैदा करना भी है।</p>
<p><strong>दो आयु वर्गों में होगी प्रतियोगिता</strong><br />प्रतियोगिता को दो प्रमुख आयु वर्गों में बांटा गया है। 18 वर्ष तक और 18 वर्ष से अधिक आयु वर्ग के प्रतिभागी इसमें हिस्सा ले सकेंगे। दोनों वर्गों में प्रतिभागियों को अंतरदेशीय पत्र अथवा लिफाफा श्रेणी में अपनी बात लिखनी होगी। प्रतियोगिता में केवल हस्तलिखित पत्र ही स्वीकार किए जाएंगे। टाइप किए गए, कंप्यूटर से प्रिंट निकाले गए अथवा फोटोकॉपी किए हुए पत्र मान्य नहीं होंगे। अंतरदेशीय पत्र श्रेणी में अधिकतम 500 शब्द, जबकि लिफाफा श्रेणी में अधिकतम 1000 शब्द लिखने की सीमा निर्धारित की गई है। प्रतिभागी हिंदी, अंग्रेजी अथवा अपनी स्थानीय/क्षेत्रीय भाषा में पत्र लिख सकेंगे।</p>
<p><strong>धरती मां के नाम होगा भावनाओं का इजहार</strong><br />प्रतिभागियों को पत्र के माध्यम से प्रकृति और पर्यावरण के प्रति अपने विचार साझा करने होंगे। इसमें पेड़-पौधों की रक्षा, जल संरक्षण, प्रदूषण नियंत्रण, प्लास्टिक के कम उपयोग, जैव विविधता संरक्षण, स्वच्छ पर्यावरण और आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित धरती जैसे विषयों को प्रमुखता दी जा सकती है। खास बात यह होगी कि प्रतिभागी केवल पर्यावरण की समस्या नहीं बताएंगे, बल्कि ह्यप्रकृति की रक्षा के लिए मैं क्या करूंगाह्ण के रूप में अपना व्यक्तिगत संकल्प भी चिट्ठी में लिख सकेंगे। युवाओं की अधिक से अधिक भागीदारी सुनिश्चित करने के लिए डाक विभाग की ओर से स्कूलों और महाविद्यालयों का दौरा किया जाएगा। यहां पर्यावरण संरक्षण को लेकर जागरूकता कार्यशालाएं, सेमिनार और प्रेजेंटेशन आयोजित किए जाएंगे। साथ ही विशेष ह्यढाई आखर लेटर बॉक्सह्ण भी लगाए जाएंगे, ताकि विद्यार्थी और अन्य प्रतिभागी आसानी से अपनी प्रविष्टियां जमा कर सकें।</p>
<p><strong>सर्वश्रेष्ठ पत्रों पर पुरस्कारों की बरसात</strong><br />सर्कल स्तर पर चयनित प्रतिभागियों के लिए भी आकर्षक पुरस्कार रखे गए हैं। प्रत्येक श्रेणी में प्रथम पुरस्कार 25 हजार रुपए, द्वितीय पुरस्कार 10 हजार रुपए और तृतीय पुरस्कार 5 हजार रुपए दिया जाएगा। ऐसे में प्रतियोगिता युवाओं के लिए अपनी लेखन प्रतिभा दिखाने के साथ-साथ पर्यावरण संरक्षण का संदेश समाज तक पहुंचाने का भी बड़ा अवसर बनेगी। स्कूल स्तर पर भाषा विशेषज्ञों, शिक्षाविदों और वरिष्ठ पत्रकारों की एक मूल्यांकन समिति बनाई जाएगी। समिति चयनित प्रविष्टियों में से प्रत्येक श्रेणी के तीन सर्वश्रेष्ठ पत्रों, यानी कुल 12 पत्रों को सर्कल स्तर पर भेजेगी। डाक विभाग का मानना है कि चिट्ठी केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि भावनाओं, विचारों और संकल्पों को स्थायी रूप से अभिव्यक्त करने का माध्यम भी है।</p>
<p>डिजिटल युग में चिट्ठी लिखना अपने आप में अलग अनुभव होगा। धरती मां के नाम पत्र लिखकर पर्यावरण के प्रति अपनी भावनाएं व्यक्त करने का मौका मिल रहा है। प्रकृति संरक्षण आज सबसे जरूरी विषयों में से एक है। प्रतियोगिता के माध्यम से युवाओं को पर्यावरण के लिए कुछ करने का संकल्प लेने की प्रेरणा मिलेगी।<br /><strong>-विकास कुमार, युवा</strong></p>
<p>डाक विभाग की ओर से राष्ट्रीय स्तर पर ढाई आखर पत्र लेखन प्रतियोगिता आयोजित की जा रही है। इस बार प्रतियोगिता का विषय एक चिट्ठी धरती मां के नाम : प्रकृति की रक्षा, मेरा वादा रखा गया है। प्रतियोगिता में विद्यार्थी, युवा और आम नागरिक अपनी भावनाओं को कागज पर उतारकर धरती मां के प्रति अपना संकल्प व्यक्त कर सकेंगे।<br /><strong>- ओमप्रकाश सेन, जनसम्पर्क निरीक्षक, डाक विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 15:41:23 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का- लखावा प्लांटेशन में भ्रष्टाचार पर एनजीटी सख्त, दोषी अफसरों पर कठोर कार्रवाई और वसूली के निर्देश</title>
                                    <description><![CDATA[कोर्ट ने फोरेस्ट सचिव व हॉफ को दिए निर्देश, दो सप्ताह में देनी होगी कार्रवाई की रिपोर्ट ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--ngt-takes-a-stern-view-of-corruption-at-the-lakhava-plantation--orders-strict-action-against-guilty-officials-and-recovery-of-funds/article-163133"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)73.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा वन मंडल के लखावा प्लांटेशन में हुए भ्रष्टाचार व सरकारी धन के गबन के मामले में राष्ट्रीय हरित अधिकरण (एनजीटी) ने सख्त रुख अपनाया है।14 अगस्त को हुई सुनवाई में मामले को बेहद गंभीर मानते हुए राजस्थान फोरेस्ट के प्रमुख सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक (हॉफ) को तत्काल हस्तक्षेप कर जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई करने व दो सप्ताह में अनुपालना रिपोर्ट पेश करने के निर्देश दिए हैं।</p>
<p>एनटीजी ने अपने आदेश में स्पष्ट किया कि यह कार्रवाई बिलों को पास करने में किए गए गबन और पर्यावरण नियमों के उल्लंघन में सरकारी धन के दुरुपयोग के संबंध में की जानी चाहिए। चूंकि, यह राजकीय कोष और सार्वजनिक धन का नुकसान है, इसलिए हर हाल में इसकी रक्षा की जानी चाहिए। वहीं, जाली बिल बनाकर उन्हें तैयार करने, निकालने और प्रस्तुत करने में जो राशि गलत तरीके से उपयोग या गबन की गई है, उसकी वसूली करने के साथ-साथ दोषियों को दंडित भी किया जाना चाहिए।</p>
<p><strong>सरकारी धन की हर हाल में हो सुरक्षा</strong><br />एनजीटी ने लखावा प्लांटेशन में हुए सरकारी धन के दुरुपयोग पर चिंता जताते हुए फोरेस्ट सचिव व हॉफ को सरकारी धन की हर हाल में हो सुरक्षा सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही सरकार द्वारा कैम्पा फंड में दिए जाने वाले बजट-अनुदान का सही उपयोग हो, ऐसी नियंत्रण व्यवस्था की जानी चाहिए।</p>
<p><strong>ऐसी कार्रवाई करें, दोबारा न हो ऐसा गबन</strong><br />एनजीटी ने उम्मीद जताई कि फोरेस्ट सचिव और प्रधान मुख्य वन संरक्षक द्वारा पर्यावरण हित में तत्कालीन दोषी अधिकारियों के खिलाफ प्रभावी अनुशासनात्मक कार्रवाई करेंगे। कार्रवाई ऐसी होनी चाहिए, जिससे भविष्य में इस तरह के मामले दोबारा सामने न आएं। अधिकरण ने दोनों अधिकारियों को दो सप्ताह के भीतर अनुपालना रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए हैं। मामले की अगली सुनवाई 9 सितंबर को होगी। तब तक राज्य सरकार को एनजीटी के निर्देशों पर की गई कार्रवाई की स्थिति स्पष्ट करनी होगी।</p>
<p><strong>नवज्योति ने उजागर किया था भ्रष्टाचार</strong><br />दैनिक नवज्योति ने 23 मई 2024 से 29 जनवरी 2026 तक सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कर लखावा प्लांटेशन में हुए भ्रष्टाचार और सरकारी धन का गबन उजागर किया था। जिसके बाद वन विभाग ने मुख्यालय जयपुर से अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा) केसी मीणा को कोटा भेज प्लांटेशन की जांच करवाई थी। उनकी रिपोर्ट में न केवल नवज्योति की खबर पर मोहर लगी बल्कि विभाग की आंख खोलने के लिए नवज्योति को आई ओपनर माना था।</p>
<p><strong>एपीसीसीएफ की रिपोर्ट में प्लांटेशन फेल मिला</strong><br />एनजीटी के समक्ष रखी जांच रिपोर्ट के अनुसार, अतिरिक्त प्रधान मुख्य वन संरक्षक (वन सुरक्षा) ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि लखावा-8 में पूरे क्षेत्र का निरीक्षण करने के बावजूद 100 पौधे भी नहीं मिले, जबकि 8 हजार पौधे लगाने का दावा किया गया था। उन्होंने रिपोर्ट में वृक्षारोपण को पूरी तरह असफल बताया।</p>
<p><strong>21.42 लाख का गबन, सरकार के साथ धोखा</strong><br />कोटा पीएंडएम गणना दल के उप वन संरक्षक ने 30 सितंबर से 4 अक्टूबर 2024 के बीच दोबारा लखावा-8 प्लांटेशन की जांच की। रिपोर्ट में पौधों के रखरखाव के नाम पर खर्च हुए 21 लाख 42,106 रुपए को सरकार के साथ धोखा, गबन बताया गया। इसमें काम प्रमाणित करने वाले वन अधिकारियों, फर्जी बिल तैयार कर भेजने वाले कर्मचारियों और वन सुरक्षा समिति के अध्यक्ष से राशि वसूलने की बात कही गई।</p>
<p><strong>गबन छिपाने को भरी गर्मी में लगाए पौधे</strong><br />13 अक्टूबर 2025 की रिपोर्ट में कुछ वृक्षारोपण नवंबर-दिसंबर 2023 और मार्च-जून 2024 में किए जाने का उल्लेख था। भरी गर्मी में पौधारोपण कैसे हुआ, जांच अधिकारियों ने इस पर सवाल उठाया। रिपोर्ट में यह आशंका भी दर्ज की गई कि या तो पौधे लगाए ही नहीं गए या फिर उनके नाम पर फर्जी बिल निकाले गए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 15:40:37 +0530</pubDate>
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                <title>मंडाना थाना क्षेत्र के मांदलिया गांव का मामला : इंजेक्शन लगाने के बाद  बालक ने तोड़ा दम, निजी क्लिनिक संचालक के खिलाफ एफआईआर</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा के मांदलिया गांव में बुखार से पीड़ित 10 वर्षीय कुलदीप मेघवाल की निजी क्लिनिक में उपचार के बाद तबीयत बिगड़ने से मौत। परिजनों ने क्लिनिक संचालक पर लापरवाही का आरोप लगाते हुए मंडाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। पुलिस ने मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-of-mandalia-village-of-mandana-police-station-area-child/article-163107"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)71.png" alt=""></a><br /><p>कोटा/ मंडाना। क्षेत्र के मांदलिया गांव में बुखार से पीड़ित 10 वर्षीय बालक की निजी क्लिनिक में उपचार के दौरान तबीयत बिगड़ने के बाद मौत हो गई। परिजनों ने निजी क्लिनिक संचालक पर उपचार में लापरवाही का आरोप लगा मंडाना थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई है। पुलिस ने बच्चे का मेडिकल बोर्ड से पोस्टमार्टम कराया है।</p>
<p>मृतक बालक के पिता राजमल मेघवाल ने पुलिस को दी रिपोर्ट में बताया कि उनका 10 वर्षीय पुत्र कुलदीप मेघवाल श्रावण अमावस्या पर परिवार के साथ पीहर गया था। वहां से मांदलिया गांव लौटने के बाद  उसे हल्का बुखार हुआ। मां उसे बड़े बच्चे के साथ गांव में निजी क्लिनिक चलाने वाले डॉ. रिषभ कुमार जैन के पास लेकर गई। परिजनों के अनुसार क्लिनिक पर डॉक्टर ने बालक को इंजेक्शन लगाया। इंजेक्शन लगाने के बाद ही उसकी तबीयत अचानक अधिक बिगड़ गई और उसे उल्टी-दस्त होने लगे। कुछ देर क्लिनिक पर रखने के बाद डॉक्टर ने बालक को मंडाना अस्पताल ले जाने की सलाह दी। परिजन बालक को मंडाना अस्पताल लेकर पहुंचे, जहां चिकित्सकों ने उसकी स्थिति देख कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के लिए रेफर कर दिया। कोटा पहुंचने पर चिकित्सकों ने बालक को मृत घोषित कर दिया।</p>
<p><strong>सीएमएचओ ने क्लिनिक बंद कराया :</strong></p>
<p>ब्लॉक सीएमएचओ डॉ. प्रभाकर व्यास ने बताया कि मामले की जानकारी मिलने के बाद निजी क्लिनिक संचालक डॉक्टर को चिकित्सा कार्य से संबंधित आवश्यक दस्तावेज उपलब्ध कराने के लिए पाबंद किया गया है। फिलहाल क्लिनिक बंद करवाया गया है। दस्तावेजों की जांच के बाद कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Aug 2026 12:59:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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                <title>मंडी का जाम, सफाई-पानी की किल्लत, आवारा कुत्ते बने परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[बिना पार्षद के अधर में अटकीं जनसमस्याएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/traffic-jams-caused-by-the-market--shortages-of-water-and-sanitation-services--and-the-menace-of-stray-dogs/article-162943"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(2)44.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के नए परिसीमन के बाद शहर के वार्डों की तस्वीर बदल गई है। वार्डों की सीमाएं बदलने के साथ लोगों को उम्मीद है कि व्यवस्थाएं भी बेहतर होंगी, लेकिन जमीनी हकीकत में समस्याएं अब भी जस की तस नजर आ रही हैं। कहीं सड़कें क्षतिग्रस्त हैं तो कहीं बिना मानक के बनाए गए ब्रेकर लोगों के लिए परेशानी बने हुए हैं। कई कॉलोनियों में पानी की समस्या है, जबकि जगह-जगह झूलते बिजली के तार हादसे का खतरा बढ़ा रहे हैं। स्टेशन क्षेत्र की मस्जिद गली में लगने वाली मंडी के कारण लंबे समय तक जाम लगा रहता है। वहीं भीमगंज मंडी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को लेकर लोग परेशान हैं। वार्डवासियों का कहना है कि समस्याओं को लेकर शिकायतें तो होती हैं, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकलता और फिलहाल वार्ड पार्षद भी नहीं हैं। ऐसे में लोग अपनी समस्या लेकर नगर निगम पहुंचें भी तो आखिर सुनवाई और जिम्मेदारी किसकी तय होगी?</p>
<p><strong>आवारा कुत्तों का बढ़ता आतंक, रात में घर से निकलना मुश्किल</strong><br />वार्ड में आवारा कुत्तों की बढ़ती संख्या से वार्डवासी परेशान हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि गली-मोहल्लों में दिनभर कुत्तों के झुंड घूमते रहते हैं, जिससे बच्चों, बुजुर्गों और राहगीरों में डर बना रहता है। रात के समय स्थिति और गंभीर हो जाती है। लोगों के अनुसार कई बार वाहन चालकों पर आवारा कुत्ते हमला कर चुके हैं, जिससे हादसे की आशंका बनी रहती है। वार्डवासियों का आरोप है कि समस्या को लेकर नगर निगम में कई बार शिकायत की जा चुकी है, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। लोगों ने निगम से अभियान चलाकर आवारा कुत्तों की समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।</p>
<p><strong>मस्जिद गली में जाम से राहगीरों होती परेशानी</strong><br />स्टेशन क्षेत्र में मस्जिद गली में लगने वाली मंडी स्थानीय लोगों और राहगीरों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। मंडी के दौरान सड़क पर भीड़ और वाहनों का दबाव बढ़ जाता है, जिससे कई बार लंबे समय तक जाम की स्थिति बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि मंडी के लिए व्यवस्थित व्यवस्था और यातायात प्रबंधन किया जाए तो समस्या काफी हद तक कम हो सकती है।</p>
<p><strong>पार्षद नहीं, अब शिकायत लेकर जाएं कहां?</strong><br />परिसीमन के बाद वार्ड तो नए बन गए, लेकिन फिलहाल पार्षद नहीं हैं। ऐसे में स्थानीय लोगों के सामने अपनी समस्याएं रखने को लेकर असमंजस की स्थिति है। वार्डवासियों का कहना है कि नगर निगम में शिकायत करने के बाद भी यह स्पष्ट नहीं रहता कि समस्या के समाधान की जिम्मेदारी किसकी है। लोगों की मांग है कि चुनाव और नई व्यवस्था तक निगम को प्रत्येक वार्ड में शिकायतों की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए स्पष्ट व्यवस्था करनी चाहिए।</p>
<p><strong>झूलते तार दे रहे हादसे को न्योता</strong><br />वार्डों के कई क्षेत्रों में बिजली के झूलते तार भी बड़ी समस्या हैं। तार कई जगह नीचे तक लटक रहे हैं। इससे हादसे का खतरा बना रहता है। लोगों ने बिजली निगम से ऐसे तारों को व्यवस्थित करने और जर्जर विद्युत व्यवस्था को दुरुस्त करने की मांग की है।</p>
<p><strong>नए वार्ड और वार्ड नंबर के क्षेत्र</strong><br /><strong>वार्ड नंबर 11: </strong>नया भदाना, बेरवा का मोहल्ला, रिद्धि-सिद्धि नगर, समस्त सरस्वती कॉलोनी, आदर्श कॉलोनी, अंबेडकर नगर, जगदंबा कॉलोनी, पुराना भदाना, भदाना की टापरियां, आरके कॉलोनी, शहीद भगत सिंह कॉलोनी, बाबा कॉलोनी।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 12: </strong>बापू कॉलोनी, शास्त्री कॉलोनी, बोहरा की बगीची, कैलाशपुरी, गणेशपुरा, राजीव नगर, कच्ची बस्ती, पार्वती कॉलोनी, प्रताप कॉलोनी, मिल वाले बाबा, गोपाल मिल, महावीर कॉलोनी।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 13:</strong> मस्जिद गली, सब्जी मंडी, रेलवे स्टेशन क्षेत्र, नेहरू नगर, हरिजन बस्ती, तेलघर, इमामबाड़ा, संजय नगर, हुसैनी नगर।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 14: </strong>संपूर्ण चोपड़ा फार्म, मानसिंह बिल्डिंग, राधा-कृष्ण मंदिर, शंकर भवन, लालबाई माता मंदिर, विजयवर्गीय मेडिकल, दानमलजी का आहता क्षेत्र।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 15: </strong>मॉडल टाउन, आदर्श कॉलोनी, तिलक कॉलोनी, विवेकानंद कॉलोनी, सुरपीन होटल, मिलिट्री क्षेत्र, भीमगंज मंडी थाना, अजय आहूजा स्कूल, नगर निगम सेक्टर कार्यालय, जवाहरलाल नेहरू स्कूल, आर्य समाज, चर्च, निर्मला स्कूल, इनामी भवन, राजेंद्र होटल, आनंद विहार, मुर्गी फार्म हाउस, शांति नगर, सॉयल कंजर्वेशन क्षेत्र।</p>
<p>जब उन्होंने चुनाव लड़ा था, तब वार्ड में महज 10 से 20 प्रतिशत तक ही विकास कार्य हुए थे। इसके बाद उन्होंने अपने कार्यकाल में करीब 90 प्रतिशत विकास कार्य करवाए। वार्डवासियों के राशन कार्ड और आधार कार्ड बनवाने से लेकर हर गली में सड़क निर्माण तक, उन्होंने जनसुविधाओं से जुड़े कार्य प्राथमिकता से करवाए।<br /><strong>- संदीप नायक, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>पार्षद बनने के बाद शुरुआती ढाई साल में वार्ड में तेजी से विकास कार्य करवाए गए। इसके बाद सरकार बदलने के साथ ही विकास कार्य लगभग ठप हो गए। उनका आरोप है कि अधिकारी आम पार्षदों की समस्याओं पर ध्यान नहीं देते थे और उन्हीं कार्यों को प्राथमिकता मिलती थी, जिनके लिए कैंप कार्यालय से फोन आता था।<br /><strong>- हेमलता गौतम, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>पूर्व पार्षद के कार्यकाल में वार्ड में करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए गए। सफाई व्यवस्था को लेकर समय-समय पर समस्या जरूर रही, लेकिन शिकायतों के बाद इसमें भी सुधार करवाया गया।<br /><strong>-प्रदीप राठौर, वार्डवासी</strong></p>
<p>वार्ड नंबर 15 में आने वाले भीमगंज मंडी क्षेत्र में सफाई व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि नियमित सफाई नहीं होने से जगह-जगह गंदगी दिखाई देती है। उनका कहना है कि सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग होनी चाहिए, ताकि क्षेत्र में गंदगी जमा नहीं हो।<br /><strong>-गोपाल लाल, वार्डवासी</strong></p>
<p>नए वार्डों में शामिल कई क्षेत्रों में पेयजल की समस्या भी सामने आ रही है। स्थानीय लोगों के अनुसार कई बार पानी की पर्याप्त आपूर्ति नहीं होने से परेशानी होती है। वहीं कई इलाकों की सड़कें क्षतिग्रस्त हैं। लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत में गुणवत्ता का ध्यान रखा जाए। कई स्थानों पर बिना मानक के बने ब्रेकर भी वाहन चालकों के लिए परेशानी बने हुए हैं।<br /><strong>-जेडी सिकरवार, वार्डवासी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 15:13:07 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा मेडिकल कॉलेज हादसा : 15 दिन में आनी थी रिपोर्ट, 3 माह से इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[कैथेटर सहित 6 मेडिकल डिवाइसों की जांच रिपोर्ट अटकी, अस्पतालों में  हो रही किल्लत, भेजा रिमाइंडर।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-medical-college-incident--report-due-in-15-days--wait-stretches-to-3-months/article-162941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)67.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।मेडिकल कॉलेज में मई माह के दौरान हुई प्रसूताओं की मौत और उसके बाद मरीजों में ठंड लगकर बुखार  आने के मामलों में चल रही विभागीय व कानूनी जांच प्रक्रिया अब तक अधूरी है। घटना के बाद 8 और 9 मई को विभिन्न दवाओं और सर्जिकल आइटम्स (मेडिकल डिवाइसेज) की सैंपलिंग कर 12 मई को सेंट्रल लेबोरेटरी, कोलकाता भेजी गई थी, जिसकी जांच रिपोर्ट घटना के तीन महीने बीत जाने के बाद भी नहीं आ सकी है। इस देरी को लेकर कोटा ड्रग कंट्रोल विभाग द्वारा कोलकाता स्थित प्रयोगशाला को रिमाइंडर पत्र भी जारी किया गया है, ताकि नमूनों की जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द प्राप्त हो सके।</p>
<p><strong>दवाओं की आ चुकी है 'स्टैंडर्ड' रिपोर्ट</strong><br />सहायक औषधि नियंत्रक (अऊउ) प्रहलाद कुमार मीणा ने बताया कि घटना के बाद टीम द्वारा कुल 22 प्रकार की दवाओं व 7 सर्जिकल सामानों के सैंपल लिए गए थे। इनमें से लगभग सभी दवाओं की जांच रिपोर्ट आ चुकी है, जिन्हें लैब द्वारा 'स्टैंडर्ड' (मानक) घोषित किया गया है।</p>
<p><strong>7 सर्जिकल डिवाइसेज की रिपोर्ट बकाया,</strong><br />कोलकत्ता से 7 प्रकार के मेडिकल डिवाइसेज (सर्जिकल आइटम्स) की जांच रिपोर्ट अभी भी कोलकाता लैब से प्राप्त होना बाकी है। जांच के लिए भेजे गए सर्जिकल सामानों में मुख्य रूप से कैथेटर (बैच संख्या: ५‘2510284) और आईवी ड्रिप सेट (बैच संख्या: 0725 ्र५ ि७09 / ७07) शामिल हैं।</p>
<p><strong>अस्पतालों में हो रही किल्लत</strong><br />5 मई को दैनिक नवज्योति मे प्रमुखता से मेडिकल कॉलेज में हो रही प्रसुताओं की मौत व किडनी फैल्योर की खबर के बाद प्रशासनीक स्तर पर हुई कार्यवाही व जांचों में संदिग्ध पाये गई दवाइयों व सर्जिकल आईटम के स्टोक को होल्ड पर रखा गया था। जिसके बाद से अस्पतालों में नई सप्लाई नही मिल पा रही है। जिसके चलते शहर के अन्य अस्पतालों में केनुला, आई वी सेट, डिस्पोजल सीरिंज सहित सभी प्रकार के सर्जीकल की भारी किल्लत खडी हो गई है। जिसके चलते मरीजों को एमबीएस जैसे अस्पताल में भी कई काउन्टरों पर चक्कर काटने पड़ रहे है।</p>
<p><strong>केस नं 1- जेके लोन में फ्ल्यूड का बैच होल्ड पर</strong><br />10 अगस्त को प्रसुता की मौत व एक साथ कई प्रसुताओं को ड्रिप लगाने के बाद कपंकपी लगने की शिकायत के बाद, सस्पेक्टेड लिस्ट में रखे गए आरएल (फछ) के ढ5050791 बैच की पूर्व में हुई जांच भी मानक पाई गई थी, जिसे बाद में विभाग द्वारा प्रयोग से होल्ड पर रखवा कर अन्य कंपनी पेन्कीटागन की दवा सप्लाई करवाई गई है। अधीक्षक जेके लोन निर्मला शर्मा ने मेडिकल कॉलेज के दवा व औषधि भण्डार को पत्र भी लिखा है।</p>
<p><strong>केस नं 2- सुल्तानपुर में 3 दवाओं के बैच किये थे होल्ड</strong><br />गौरतलब है कि सुल्तानपुर सीएचसी में भर्ती मरीजों जिनमें दस्त की शिकायत पर भर्ती दिनेश गोचर व अन्य शामिल थे। को आईवी फ्लूड चढ़ाते ही अचानक तेज कंपकंपी, घबराहट और चक्कर आने लगे थे। इसके बाद हरकत में आए चिकित्सा विभाग ने फछ (बैच नंबर 2514017233), ऊठर (बैच नंबर ररइ95) और ठर (बैच नंबर र1इ179) की सप्लाई व इस्तेमाल पर पूरे राजस्थान में तत्काल प्रभाव से रोक लगा दी थी। यह संदिग्ध स्टॉक कोटा संभाग के 193 पीएचसी और 77 सीएचसी सहित जेकेलोन व एमबीएस जैसे बड़े अस्पतालों में भी सप्लाई हो चुका था, जिसे अब सील कर दिया गया है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आरएमसीएल की सप्लाई की ज्यादातर सप्लाई के आईटम अभी उपलब्ध नही हो पा रहे है। वहीं कुछ अभी जांच रिर्पोट नहीं आने के कारण होल्ड पर है ऐसे में हमारी आवश्यकताओं के अनुसार लोकल परचेस के जरीये मरीजों की आवश्यकताओं की पूर्ति की जा रही है।<br /><strong>- डॉ. राकेश कुमार शर्मा अधीक्षक एमबीएस अस्पताल </strong></p>
<p>कोलकाता लैब भेजे गए 7 मेडिकल डिवाइसेज (सर्जिकल आइटम्स) को छोड़कर बाकी सभी दवाओं के नमूनों की रिपोर्ट आ चुकी है, जो मानक पाई गई हैं। बकाया रिपोर्ट के लिए कोलकाता प्रयोगशाला को रिमाइंडर भेजा गया है।<br /><strong>-प्रहलाद कुमार मीणा, सहायक औषधि नियंत्रक (अऊउ), कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 14 Aug 2026 15:12:00 +0530</pubDate>
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