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                <title>कोटा - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कोटा के सीवी गार्डन में घुसा लेपर्ड, मॉर्निंग वॉकर्स में मची भगदड़; क्रेन की मदद से साढ़े तीन घंटे में हुआ रेस्क्यू</title>
                                    <description><![CDATA[ 35 फीट ऊंचे पेड़ पर चढ़ा लेपर्ड: तीन बार चूका निशाना, क्रेन से पास पहुंचकर चौथे डार्ट में किया ट्रैंकुलाइज।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/leopard-enters-kota-s-cv-garden--causing-panic-among-morning-walkers--rescued-after-three-and-a-half-hours-with-the-help-of-a-crane/article-165017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)31.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नयापुरा इलाके में छत्र विलास गार्डन में बुधवार सुबह लेपर्ड घुस आया। लेपर्ड को अचानक अपने बीच देख मॉर्निंग वॉक कर रहे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। लेपर्ड दौड़ते 35 फीट ऊंचे जामुन के पेड़ पर चढ़ गया। मौके पर मौजूद पुलिस उपाधीक्षक अंकित जैन व सुभाष मिश्रा की सूचना पर  वन विभाग और नयापुरा थाने की पुलिस  मौके पर पहुंची और गार्डन को खाली करवाकर लोगों को बाहर किया। इसके बाद रेस्क्यू आॅपरेशन शुरू किया गया। साढ़े तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद लेपर्ड को रेस्क्यू किया जा सका। वेटनरी डॉक्टर्स की टीम लेपर्ड को नयापुरा स्थित चिड़ियाघर ले गई। जहां उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है। वन अधिकारियों का कहना है कि लेपर्ड की उम्र करीब 2 वर्ष है और वह आर्मी एरिया के जंगलों से भटकता हुआ गार्डन में पहुंच गया। </p>
<p><strong>पुलिस ने गार्डन करवाया खाली</strong><br />तेंदुए की मौजूदगी की सूचना मिलते ही पुलिस व वन विभाग की टीम ने सीवी गार्डन में मौजूद लोगों को बाहर निकाल दिया। सुरक्षा के लिहाज से गार्डन के गेट बंद कर दिए गए। इसके बाद टीम ने पेड़ पर बैठे तेंदुए की निगरानी शुरू कर दी। वन विभाग की टीम तेंदुए को सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू करने की तैयारियां शुरू की गई। </p>
<p><strong>तीन बार निशाना चूका, चौथे डॉट में हुआ ट्रैकुलाइज</strong><br />रेस्क्यू आॅपरेशन के दौरान वन विभाग की टीम के साथ सीसीएफ और दो एसीएफ समेत करीब 10 से 12 वनकर्मियों की टीम लेपर्ड को ट्रैंकुलाइज करने में जुटी रही। लेपर्ड 35 फीट ऊंचे पेड़ की डाल पर बैठा हुआ था। वेटनरी डॉक्टर अखिलेश पांडेय ने ट्रैंकुलाइज करने के लिए डॉट लगाए लेकिन ऊंचाई अधिक होने और पेड़ घना होने के कारण निशाना नहीं लग पाया। इस दरमियान तीन डॉट किए गए लेकिन हर बार निशाना चूक गया। इस बीच नगर निगम से क्रेन मंगवाई गई। जिसकी मदद से निश्चित दूरी पर चिकित्सक ने ट्रैंकुलाइज गन से डॉट किया। चौथे प्रयास में सफलता मिली और लेपर्ड को सुरक्षित रेस्क्यू कर लिया गया। </p>
<p><strong>पहले भी शहर में नजर आ चुका है तेंदुआ</strong><br />वन विभाग के अनुसार इससे पहले भी माला फाटक रोड स्थित आर्मी एरिया और स्वास्थ्य विभाग कार्यालय के पास लेपर्ड नजर आ चुका है। उस समय वन विभाग ने पिंजरा भी लगाया था, लेकिन वह ट्रैप नहीं हो सका। अब सीवी गार्डन में लेपर्ड दिखाई देने के बाद एक बार फिर वन विभाग की टीम सक्रिय हो गई है।</p>
<p>सवा सात बजे सूचना मिली थी, इस पर तुरंत दो वन्यजीव चिकित्सकों के साथ रेस्क्यू टीम सीवी गार्डन रवाना कर दिया था। टीम को तेंदुआ पेड़ पर बैठा हुआ दिखाई दिया। साढ़े तीन घंटे की कड़ी मशक्कत के बाद उसे सुरक्षित तरीके से रेस्क्यू कर लिया गया। चिकित्सकों की निगरानी में उसका स्वास्थ्य परीक्षण किया जा रहा है।<br /><strong>-प्रमोद धाकड़,डीएफओ वन्यजीव विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 08 Sep 2026 15:29:38 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती में 52 सरकारी कॉलेज, 51 में पीटीआई ही नहीं, स्पोर्ट्स कैलेंडर जारी</title>
                                    <description><![CDATA[15 सितंबर से 15 दिसंबर तक 43 खेलों का आयोजन, प्रशिक्षक और मैदान के अभाव में प्रतिभाएं परेशान।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sports-calendar-released-for-hadauti-region--yet-51-out-of-52-government-colleges-lack-physical-training-instructors--ptis/article-164908"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कॉलेज आयुक्तालय ने विद्यार्थियों को खेलों में आगे बढ़ाने के लिए 43 खेलों का कैलेंडर जारी कर दिया है, लेकिन हाड़ौती के सरकारी कॉलेजों में खेल प्रतिभाओं की पहली सीढ़ी ही गायब है। संभाग के 52 सरकारी कॉलेजों में से 51 में नियमित शारीरिक शिक्षक (पीटीआई) नहीं हैं। अधिकतर कॉलेजों के पास अपना खेल मैदान तक नहीं है। ऐसे में विश्वविद्यालय के कैलेंडर में शामिल रग्बी, ताइक्वांडो, मलखंब, स्क्वैश, जिम्नास्टिक, तीरंदाजी जैसे खेलों में विद्यार्थी बिना प्रशिक्षक और पर्याप्त संसाधनों के कैसे तैयारी करें, यह बड़ा सवाल है। स्थिति यह है कि कॉलेजों में खेल प्रतियोगिताओं का समय आते ही कुछ महीनों के लिए संविदा पर पीटीआई लगाए जाते हैं। प्रतियोगिताएं खत्म होते ही इन्हें हटा दिया जाता है। सालभर नियमित प्रशिक्षण नहीं मिलने से खिलाड़ी राज्य और राष्ट्रीय स्तर तक पहुंचने की दौड़ में पिछड़ जाते हैं।</p>
<p><strong>कैलेंडर में प्रोफेशनल गेम्स, कॉलेजों में प्रशिक्षक तक नहीं</strong><br />खेल कैलेंडर में हैंडबॉल, शतरंज, मलखंब, कबड्डी, तीरंदाजी, वॉलीबॉल, बैडमिंटन, रग्बी, ताइक्वांडो, गतका, कराटे, योग, बेसबॉल, मुक्केबाजी, हॉकी, सॉफ्टबॉल, स्क्वैश और जिम्नास्टिक सहित 43 खेल शामिल किए गए हैं। इनमें कई खेल ऐसे हैं, जिनमें केवल मैदान में उतरना पर्याप्त नहीं होता। तकनीक, फिटनेस, नियमित अभ्यास और प्रशिक्षित कोच का मार्गदर्शन जरूरी है। लेकिन, सरकारी कॉलेजों में खेलों की जिम्मेदारी संभालने के लिए न तो नियमित पीटीआई है और न ही मानकों के अनुरूप मैदान।</p>
<p><strong>तीन महीने चलेगा खेलों का महासंग्राम</strong><br />अंतर-महाविद्यालयी खेल प्रतियोगिताओं का आयोजन 15 सितंबर से 15 दिसंबर तक किया जाएगा। करीब तीन महीने चलने वाली इन प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय से संबद्ध लगभग 240 महाविद्यालयों एवं संस्थानों के नियमित विद्यार्थी हिस्सा ले सकेंगे। प्रतियोगिताओं में बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ी आगे खेलो इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स, आॅल इंडिया यूनिवर्सिटी गेम्स और इंटर-जोन प्रतियोगिताओं में विश्वविद्यालय का प्रतिनिधित्व करेंगे।</p>
<p><strong>विद्यार्थी बोले-सुविधाओं के अभाव में दम तोड़ रही प्रतिभाएं</strong><br />हमारे कॉलेज में खेल मैदान है लेकिन पीटीआई ही नहीं। 43 तरह के गेम्स हैं, बिना कोच के बारीकियां कैसे सीखेंगे। खेल उपकरण स्टोर रूम में धूल खा रहे हैं और नियमित छात्रों को प्रैक्टिस के लिए सामान मांगने पर नेशनल या राज्य स्तरीय सर्टिफिकेट की शर्त रखी जा रही है।<br /><strong>-चित्रांशा कंवर, छात्रा गवर्नमेंट कॉलेज कोटा</strong></p>
<p>विद्यार्थियों से प्रवेश शुल्क के साथ स्पोर्ट्स मद में फीस भी ली जाती है, इसके बावजूद खेल सुविधाएं नहीं मिलती। जब गेम्स आते हैं तो कॉलेज प्रशासन संविदा पर तीन से चार माह के लिए पीटीआई लगाते हैं और प्रतियोगिता की समाप्ती के बाद उन्हें हटा देते हैं।<br /><strong>-आशीष मीणा, पूर्व छात्रसंघ अध्यक्ष राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>मैं आर्चरी खेलता हूं। कॉलेज में इस गेम्स के इक्यूपमेंट अच्छी स्थिति में नहीं है। प्रतियोगिताओं में कॉलेज का प्रतिनिधित्व करते हैं और मेडल जीतने की कोशिश करते हैं, लेकिन मार्गदर्शन और सुविधाएं नहीं मिलने हमारी तैयारी धरी रह जाती है।<br /><strong>-केशव मीणा, राजकीय महाविद्यालय कोटा</strong></p>
<p>कॉलेज परिसर में आयुक्तालय के दिशा-निर्देशानुसार स्पोर्ट्स ग्राउंड विकसित करने का प्रयास कर रहे हैं।<br /><strong>-प्रो. शालिनी भारती, प्राचार्य गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>हमारे पास ग्राउंड है, लेकिन निकाय चुनाव के चलते कॉलेज अधिग्रहण कर लिया गया। चुनाव ड्यूटी में लगे विभिन्न विभागों के कर्मचारियों का आना-जाना रहता है, जिससे छात्राओं की स्पोर्ट्स प्रेक्टिस प्रभावित होती है। मजबूरन, उन्हें स्टेडियम जाना पड़ता है।<br /><strong>-प्रो. अजय विक्रम सिंह, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>महाविद्यालय में जो सुविधाएं उपलब्ध हैंउसका उपयोग किया जा रहा है। इसके अलावा शहर में सार्वजनिक मैदान हैं, वहां भी प्रेकिटस कर सकते हैं। महाविद्यालय प्रशासन विकास समिति से खेल प्रशिक्षक लगाकर खिलाडि़यों को प्रेक्टिस करवाई जाती है ।<br /><strong>-प्रो. नवीन मित्तल,क्षेत्रीय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 15:04:40 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : मुकुंदरा टाइगर रिजर्व के दो वन रक्षकों को मिली चार्जशीट</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने उजागर किया था वन अपराध, वनप्रेमियों का सवाल एक को सस्पेंड कर दूसरे को बख्शा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news--two-forest-guards-from-mukundra-tiger-reserve-issued-charge-sheets/article-164901"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(3)18.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मुकुंदरा हिल्स टाइगर रिजर्व के कोर एरिया से अवैध रूप से वन उपज से भरे वाहन को पैसे लेकर छोड़ने के मामले में दो वन रक्षकों पर गाज गिरी है। कोलीपुरा रेंज के वन रक्षक गोविंद मेरोठा व रामावतार गुर्जर के खिलाफ चार्जशीट देने की कार्रवाई की गई है। दैनिक नवज्योति ने 25 मई को टाइगर रिजर्व से वन अपराध में पकड़ी गाड़ी, पैसे लेकर छोड़ी...शीर्षक से खबर प्रकाशित कर वन अपराध में कर्मचारियों की संलिप्ता उजागर की थी। इसके बाद डीएफओ मुथुएस ने जांच के आदेश जारी कर वन रक्षक गोविंद मेरोठा को सरस्पेंड कर दिया था। ढाई माह चली जांच के बाद अगस्त में दोनों वनरक्षकों को चार्जशीट दी गई।</p>
<p><strong>एकतरफा कार्रवाई से मंशा पर उठे सवाल</strong><br />मामले में दोनों वनरक्षकों को चार्जशीट देने से पहले एक ही वन रक्षक को सस्पेंड करने की कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई। हुआ यूं, घटना के समय वन रक्षक गोविंद व रामावतार दोनों ही मौके पर मौजूद थे। परिवादी हेमराज गुर्जर ने दोनों वनरक्षकों पर पैसे लेकर बिना रसीद दिए वन उपज से भरे वाहन को छोड़ने की लिखित शिकायत दी थी। इस पर मामला उजागर होने के बाद डीएफओ ने वनरक्षक गोविंद मेरोठा को सस्पेंड कर दिया था। जिसके सस्पेंशन आॅर्डर में बताया गया कि वन रक्षक मेराठा को प्रकरण दर्ज करने व कम्पाउंड करने का अधिकार नहीं था। इसके बावजूद अधिकार क्षेत्र से बाहर जाकर कॉर्मिशियल वाहन को बहुत कम राशि में कम्पाउंड कर दिया गया। जबकि, एफआईआर काटने और कम्पाउंड करने वाला वन रक्षक रामावतार गुर्जर था। जिसका सबूत सूचना का अधिकार में मांगी गई एफआईआर की कॉपी से हुआ। जिसमें रामावतार के हस्ताक्षर हो रहे हैं। इससे मुकुंदरा प्रशासन की अपने ही स्टाफ पर पक्षपातपूर्व कार्रवाई सवालों के घेरे में आ गई।</p>
<p><strong>यह है मामला</strong><br />बोराबास क्षेत्र स्थित भैरुपुरा गांव से 19 मई की रात 2 बजे बिल्व पत्र के छिलके से भरी मेटाडोर चित्तौड़ नीमच मंडी जा रही थी। जिसे कोलीपुरा रेंज के वनकर्मियों ने बालाजी हनुमान मंदिर के पास रोका था और 28 हजार रुपए लेकर बिना रसीद दिए वाहन छोड़ दिया। पीड़ित परिवादी सांवता गुर्जर व हेमराज ने अगले दिन कोलीपुरा व बोराबास क्षेत्रीय वन अधिकारी कार्यालय में घटना की लिखित शिकायत दी। उन्होंने आरोप लगाया था कि पैसे देने के बाद भी वनकर्मचारी गोविंद व रामावतार ने हमें रसीद देने से इंकार कर दिया।</p>
<p>मुख्य अभियुक्त को छोड़ सह अभियुक्त को सस्पेंड करना मुकुंदरा प्रशासन की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई को दर्शाता है। मुकुंदरा उप वन संरक्षक द्वारा अपने ही स्टाफ के प्रति इस तरह की पक्षपातपूर्ण कार्रवाई करेंगे तो इसका असर भविष्य में टाइगर मॉनिटरिंग पर पड़ेगा। क्योंकि, मॉनिटरिंग फिल्ड स्टाफ करता है। सस्पेंड दोनों को ही किया जाना चाहिए था।<br /><strong>-तपेश्वर सिंह भाटी, एडवोकेट एवं वन्यजीव प्रेमी</strong></p>
<p>तत्कालीन एसीएफ की जांच रिपोर्ट आने के बाद दोनों वन रक्षकों को चार्जशीट दे दी है। मामले में नियमानुसार कार्रवाई की जा रही है।<br /><strong>-मूथूएस डीएफओ मुकुंदरा टाइगर रिजर्व</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 15:03:46 +0530</pubDate>
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                <title>चार से पांच बच्चों वाले प्रत्याशी भी हैं चुनाव मैदान में, कांग्रेस के 63,भाजपा के 70 प्रत्याशी दो से अधिक बच्चों वाले</title>
                                    <description><![CDATA[नगर निगम कोटा चुनाव में 133 प्रत्याशियों के हैं दो से अधिक बच्चे।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/candidates-with-four-to-five-children-are-also-in-the-electoral-fray--63-congress-and-70-bjp-candidates-have-more-than-two-children/article-164900"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निकाय चुनाव में दो से ज्यादा बच्चे वाले लोगों के चुनाव लडऩे पर लगी पाबंदी हटने के साथ ही नगर निगम कोटा के चुनाव में ऐसे कई प्रत्याशियों की जैसे बाढ़ आ गई है। कांग्रेस ने 100 में से 63 प्रत्याशी तो भाजपा ने 70 प्रत्याशी 2 से अधिक बच्चों वाले चुनाव मैदान में उतारे हैं। हैं। भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर ऐसे 133 प्रत्याशियों को टिकट दिया गया है। इस बार चुनाव मैदान में दो ही नहीं तीन, चार और पांच तक बच्चे वाले भी अपना भाग्य आजमा रहे हैं।<br />नगर निगम कोटा के 100 वार्डों के लिए दूसरे चरण में 11 सितम्बर को मतदान होना है। मतदान से पहले की सभी चुनावी प्रक्रियाएं पूरी कर ली गई है। प्रत्याशियों के नामांकन पत्रों की जांच व चुनाव चिन्ह आवंटन के बाद प्रत्याशियों की फाइनल सूची तैयार हो गई है। अब चुनाव मैदान में कुल 373 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। जिनमें से भाजपा-कांग्रेस के 200 और शेष अन्य दलों के व निर्दलीय प्रत्याशी हैं।</p>
<p><strong>कांग्रेस से अधिक भाजपा के प्रत्याशी</strong><br />जानकारी के अनुसार निगम चुनाव में भाजपा व कांग्रेस के अधिकृत 200 प्रत्याशियों में से 133 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनके 2 से अधिक और 5 तक बच्चे हैं। इनमें भी कांग्रेस की तुलना में भाजपा के प्रत्याशी अधिक है। जानकारी के अनुसार दो से अधिक बच्चों वाले जहां कांग्रेस के 63 प्रत्याशियों को टिकट मिले हैं वहीं भाजपा के 70 प्रत्याशी हैं।<br />हालांकि निर्दलीयों में भी ऐसे कई प्रत्याशी हो सकते हैं जिनके 2 से अधिक बच्चे होंगे लेकिन उनकी अधिकृत जानकारी नहीं है।</p>
<p><strong>3 बच्चों वाले 26 प्रत्याशी</strong><br />इस बार 26 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनके 3 बच्चे हैं। इनमें भाजपा के सबसे अधिक 18 प्रत्याशी हैं और कांग्रेस के भी 8 प्रत्याशी हैं।</p>
<p><strong>चार बच्चों वाले 7 प्रत्याशी</strong><br />दो से अधिक बच्चों वालों के चुनाव लडऩे की पाबंदी हटी तो स्थिति कुछ ओर ही देखने को मिली। पहले जहां लोग अधिक बच्चे होने पर इस तथ्य को छिपाकर रखते थे वहीं अब इसे खुलेआम बता रहे हैं। भाजपा और कांग्रेस दोनों दलों में 7 प्रत्याशी ऐसे हैं जिनके 4-4 बच्चे हैं। इनमें भी कांग्रेस के 5 और भाजपा के 2 प्रत्याशी हैं। कांग्रेस के वार्ड 10,19,26,61 व 63 से चुनाव मैदान में प्रत्याशियों के 4 बच्चे हैं। जबकि भाजपा में वार्ड 11 व 98 से चुनाव मैदान में प्रत्याशी के 4 बच्चे हैं। इनमें भी अधिकतर महिला प्रत्याशी हैं।</p>
<p><strong>वार्ड 30 से भाजपा प्रत्याशी के 5 बच्चे</strong><br />वर्तमान में जहां अधिकतर लोगों के एक या दो ही बच्चे होते हैं। वहीं ऐसे लोग भी हैं जिनके 5 बच्चे हैं। नगर निगम कोटा के चुनाव में भाजपा की एक महिला प्रत्याशी ऐसी हैं जिनके 5 बच्चे हैं। भाजपा की वार्ड 30 से प्रत्याशी हैं जिनके 5 बच्चे हैं। महिला प्रत्याशी बीवीरामजी योजना में मैट का काम करती हैं और उनके पति पेंटर हैं।</p>
<p><strong>19 प्रत्याशी अविवाहित भी</strong><br />निगम चुनाव में इस बार भाजपा व कांग्रेस दोनों प्रमुख दलों की सूची में 19 अविवाहित प्रत्याशी भी चुनाव मैदान में हैं। जिनमें कांग्रेस के 16 व भाजपा के 3 प्रत्याशी हैं। वहीं चुनाव मैदान में नवविाहित प्रत्याशी भी हैं। जिनमें से कांग्रेस में 4 और भाजपा में 2 प्रत्याशी है। जिनकी कुछ समय पहले ही शादी हुई है।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल:</strong><br />नगर निगम के कुल वार्ड -100<br />चुनाव मैदान में कुल प्रत्याशी-373<br />भाजपा-कांग्रेस के प्रत्याशी-200<br />निर्दलीय व अन्य दलों के प्रत्याशी-173<br />दो से अधिक बच्चों वाले प्रत्याशी-133<br />दो से अधिक वाले भाजपा प्रत्याशी-70<br />दो से अधिक बच्चों वाले कांग्रेस प्रत्याशी-63<br />तीन बच्चों वाले भाजपा प्रत्याशी-18<br />तीन बच्चों वाले कांग्रेस प्रत्यशी-8<br />चार बच्चों वाले भाजपा प्रत्याशी-2<br />चार बच्चों वाले कांग्रेस प्रत्याशी-5<br />पांच बच्चों वाले भाजपा प्रत्याशी-1<br />पांच बच्चों वाले कांग्रेस प्रत्याशी-0<br />अविवाहित भाजपा प्रत्याशी-3<br />अविवाहित कांग्रेस प्रत्याशी-16<br />नवविवाहित भाजपा प्रत्याशी-2<br />नवविवाहित कांग्रेस प्रत्याशी-4</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 15:02:56 +0530</pubDate>
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                <title>47 इतना छोटा और 34 इतना बड़ा वार्ड कैसे</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड 34 में सबसे अधिक 23,779 मतदाता हैं, जबकि वार्ड 47 में सबसे कम 3,805 मतदाता हैं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-ward--municipal-corporation--voters--elections--election-department/article-164896"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(2)18.png" alt=""></a><br /><p> कोटा।  नगर निगम कोटा के 100 वार्डों के लिए 11 सितम्बर को होने वाले मतदान में इस बार 8 लाख 26 हजार 923 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। इस बार 100 में से 65 वार्ड ऐसे हैं जिनमें मतदाताओं की संख्या 5 से 10 हजार के बीच है।कोटा में पहले जहां दो नगर निगम और वार्डों की संख्या 150 थी। वहीं सरकार बदलने के बाद कोटा में फिर से एक नगर निगम बनाया गया। साथ ही वार्डों की संख्या घटाकर 100 कर दी गई। ऐसे में पांच साल पहले हुए परिसीमन के बाद इस बार फिर से नए सिरे से परिसीमन किया गया। परिसीमन से पहले जहां वार्ड छोटे व मतदाताओं की संख्या कम थी। वहीं परिसीमन के बाद वार्ड बड़े हो गए और मतदाताओं की संख्या बढ़ गई। इसके बाद भी कई वार्ड तो बहुत कम मतदाता वाले हैं और कई वार्ड अधिक मतदाता वाले।</p>
<p>जिला निर्वाचन कार्यालय से प्राप्त जानकारी के अनुसार कोटा में वार्ड 34 मतदाताओं के हिसाब से सबसे बड़ा है। यहां सबसे अधिक 23779 मतदाता हैं। जबकि सबसे छोटा वार्ड 47 है। जहां मतदाताओं की संख्या सबसे कम 3805 है। सबसे बड़े व सबसे छोटे वार्ड में करीब 20 हजार मतदाताओं का अंतर है।</p>
<p><strong>सबसे बड़े व सबसे छोटे तीन-तीन वार्ड</strong><br />निर्वाचन विभाग से प्राप्त जानकारी के अनुसार नगर निगम में इस बार मतदाताओं के हिसाब से सबसे बड़े तीन वार्डों में वार्ड 34 में 23779 मतदाता है। वहीं वार्ड 20 में 17859 व वार्ड 26 में 16407 मतदाता हैं।इधर सबसे छोटे तीन वार्डों में वार्ड 47 में 3805, वार्ड 40 में 3833 और वार्ड 1 में 3858 मतदाता हैं।</p>
<p><strong>4 से 5 हजार वाले 9 वार्ड</strong><br />निगम के 100 वार्डों में से 9 वार्ड ऐसे हैं जिनमें मतदाताओं की संख्या 4 से 5 हजार के बीच है। वार्ड 2, 56,78,79,86,93, 98, 99 व वार्ड 100 है।</p>
<p><strong>10 हजार से अधिक के 23 वार्ड</strong><br />नगर निगम में नए सिरे से हुए परिसीमन के बाद जहां वार्डों में मतदाताओं के बीच काफी अंतर रहा है। ऐसे में 23 वार्ड ऐसे हैं जिनमें मतदाताओं की संख्या 10 हजार से अधिक है। इनमें वार्ड 35, 6,7.9.18,20,21,24,26,29,31,32,34,36,37,42,45,51,60,62,65 व 68 शामिल हैं।वहीं 65 वार्ड ऐसे हैं जिनमें मतदाताओं की संख्या 5 से 10 हजार के बीच है।</p>
<p><strong>वार्ड 76 में सबसे अधिक 9 थर्ड जेंडर</strong><br />निगम के 100 वार्डों में थर्ड जेंडर के कुल 33 मतदाता हैं। इनमें सपसे अधिक 9 थर्ड जेंडर मतदाता वार्ड 76 में है। जबकि वार्ड 49 व 62 में 3-3, वार्ड 27,30 व 77 में 2-2 थर्ड जेंडर मतदाता है। जबकि 11 वार्ड ऐसे हैं जिनमें 1-1 ही थर्ड जेंडर है। स्थिति यह है कि 100 में से मात्र 18 वार्डों में ही कुल 33 थर्ड जेंडर है। जबकि 82 वार्डों में एक भी थर्ड जेंडर मतदाता नहीं है।</p>
<p><strong>महिला-मतदाता भी बराबर</strong><br />इस बार निगम चुनाव में जहां कुल 8 लाख 26 हजार 923 मतदाता अपने मताधिकार का उपयोग करेंगे। उनमें पुरुषों की संख्या महिला मतदाताओं से कुछ अधिक जरूर है लेकिन महिला मतदाता भी लगभग समान ही है। पुरुष मतदाताओं की संख्या 4 लाख 19 हजार 216 है और महिला मतदाताओं की संख्या 4 लाख 7 हजार 674 मतदाता हैं। वहीं 33 थर्ड जेंडर हैं।</p>
<p><strong>छोटे वार्डों में सम्पर्क आसान</strong><br />जानकारों के अनुसार निगम के जो वार्ड छोटे हैं या कम मतदाता वाले हैं। उनमें प्रत्याशियों का और जीतने के बाद पार्षदों का अपने मतदाताओं व वार्ड के लोगों से सम्पर्क आसानी से हो सकेगा। जबकि बड़े व अधिक मतदाताओं वाले वार्डों में सभी मतदाताओं तक पहुंचकर सम्पर्क करना मुश्किल होगा।</p>
<p><strong>निगम में 4 विधानसभा शामिल</strong><br />निगम के 100 वार्डों में कोटा की चार विधानसभाएं शामिल हैं। कोटा उत्तर के 30, कोटा दक्षिण के 40, लाड़पुरा के 24 और रामगंजमंडी विधानसभा के 6 वार्ड शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Sep 2026 15:02:04 +0530</pubDate>
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                <title>सरकारी स्कूलों को पीपीपी मोड पर क्यों नहीं चलाया जा सकता?</title>
                                    <description><![CDATA[सरकारी संसाधनों के साथ निजी भागीदारी से शिक्षा व्यवस्था को मिल सकती है नई दिशा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/why-can-t-government-schools-be-run-on-the-ppp-mode/article-164733"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(5)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश में आईआईटी, आईआईएम और दिल्ली विश्वविद्यालय जैसे उच्च शिक्षण संस्थानों ने उत्कृष्टता के मानक स्थापित किए हैं, लेकिन स्कूली शिक्षा के क्षेत्र में सरकारी स्कूलों की गुणवत्ता को लेकर लगातार सवाल उठते रहे हैं। आज यदि छात्रों और अभिभावकों को सरकारी और निजी स्कूलों में से चुनने का विकल्प दिया जाए, तो बड़ी संख्या में लोग निजी स्कूलों को प्राथमिकता देते हैं। इसका मुख्य कारण बेहतर शिक्षा, आधुनिक सुविधाएं और प्रभावी प्रबंधन माना जाता है। बच्चों को समान अवसर और अच्छी शिक्षा मिल सके, इसी उद्देश्य से शिक्षा का अधिकार (RTE) अधिनियम भी लाया गया था। लेकिन अब चुनौती केवल बच्चों को स्कूल तक पहुंचाने की नहीं, बल्कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा सुनिश्चित करने की है।</p>
<p><strong>निजी भागीदारी से शिक्षा में सुधार</strong><br />यदि सरकारी स्कूल गुणवत्तापूर्ण शिक्षा देने में अपेक्षित परिणाम नहीं दे पा रहे हैं, तो उन्हें पीपीपी यानी पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप मॉडल पर चलाने पर विचार किया जा सकता है। सरकार का बुनियादी ढांचा और संसाधन बरकरार रखते हुए निजी क्षेत्र की विशेषज्ञता, आधुनिक तकनीक, शिक्षण पद्धतियां और प्रबंधन क्षमता जोड़ी जा सकती हैं। इससे सरकारी स्कूलों में निजी स्कूल जैसा बेहतर शैक्षणिक वातावरण विकसित हो सकता है और बच्चों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए निजी स्कूलों का रुख करने की आवश्यकता कम होगी। इससे सरकारी स्कूलों की कार्यसंस्कृति और शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा तथा आम परिवारों को महंगे निजी स्कूलों पर निर्भरता भी कम होगी।<br />इस मुद्दे पर दैनिक नवज्योति ने शहर के लोगों की प्रतिक्रिया जानी। इसमें शिक्षाविदों, डॉक्टरों, चार्टर्ड अकाउंटेंट्स और समाजसेवियों ने अपनी राय रखी।</p>
<p>सरकारी स्कूलों में विद्यार्थियों की संख्या अधिक होने के कारण गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के परिणाम अपेक्षित रूप से दिखाई देने में समय लग रहा है सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए कई महत्वपूर्ण बदलाव किए गए हैं, जिनका प्रभाव आने वाले समय में स्पष्ट रूप से दिखाई देगा। आईआईएम जैसे संस्थानों में परिणाम सीधे नजर आते हैं, जबकि सरकारी स्कूलों में सुधार एक सतत प्रक्रिया है। सरकारी स्कूलों का स्तर लगातार सुधर रहा है और यह कहना उचित नहीं होगा कि वहां गुणवत्तापूर्ण शिक्षा नहीं मिल रही। सभी वर्गों और सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों से आने वाले बच्चों को सामान्य शैक्षिक स्तर तक पहुंचाना बड़ी उपलब्धि है, विशेषकर उन बच्चों के लिए जिन्हें घर पर पढ़ाई में पर्याप्त सहयोग नहीं मिल पाता। सरकारी स्कूलों के अधिकांश बच्चे 50 प्रतिशत तो अच्छा डिजर्व करते हैं। निजी स्कूलों में भी कई बार चयन प्रक्रिया के कारण बेहतर परिणाम दिखते हैं। गिने चुने नामी प्राइवेट स्कूलों को छोड़ दें तो वहीं, कुछ निजी स्कूलों के बच्चों में भी बुनियादी गणितीय ज्ञान और सवाल हल करने की क्षमता का अभाव देखने को मिलता है।सरकारी स्कूलों में निरंतर हो रहे सुधार भविष्य में समाज में सकारात्मक परिवर्तन की दिशा तय करेंगे।<br /><strong>-आशा मंडावत, संयुक्त निदेशक, शिक्षा विभाग</strong></p>
<p>शिक्षा का स्तर सुधारने के लिए सरकारी स्कूलों को पीपीपी मोड पर देना चाहिए। निजी क्षेत्र को पर्याप्त अधिकार और जिम्मेदारी मिलने पर ही गुणवत्ता में अपेक्षित सुधार संभव है। सरकारी शिक्षकों की क्षमता बढ़ाने के लिए सरकार की ओर से प्रशिक्षण दिया जाता है, लेकिन प्रशिक्षण की गुणवत्ता में सुधार की आवश्यकता है प्राइवेट सेक्टर को प्रशिक्षण देना चाहिए । गुणवत्ता सुनिश्चित करने के लिए टेस्ट की व्यवस्था होनी चाहिए। सरकार स्कूलों में डिजिटल बोर्ड, स्मार्ट बोर्ड और कंप्यूटर जैसी सुविधाएं उपलब्ध करा रही है। सरकारी शिक्षकों से शिक्षण कार्य के अलावा अन्य गैर-शैक्षणिक कार्य नहीं करवाए जाने चाहिए, ताकि वे पूरी तरह बच्चों की शिक्षा और गुणवत्ता सुधार पर ध्यान केंद्रित कर सकें।<br /><strong>- प्रोफ़ेसर (डॉ.) अमित सिंह राठौर, निदेशक ओम कोठारी इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट</strong></p>
<p>पीपीपी मॉडल के माध्यम से सरकारी स्कूलों के विकास को नई दिशा मिल सकती है। इससे शिक्षा के साथ-साथ बच्चों के सर्वांगीण विकास पर भी ध्यान दिया जा सकेगा। सरकारी स्कूलों में योग्य शिक्षक हैं, लेकिन आज के समय में आधुनिक तकनीक, खेल, गतिविधियों और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की भी जरूरत है। पीपीपी मॉडल से स्कूलों में निजी संस्थानों जैसी आधुनिक सुविधाएं विकसित की जा सकती हैं। इससे स्कूल भवनों और परिसंपत्तियों का बेहतर रखरखाव होगा तथा रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे। इसका लाभ बच्चों, अभिभावकों और समाज को मिलेगा। इसके लिए सरकार को शिक्षा बजट में भी आवश्यक वृद्धि करनी चाहिए।<br /><strong>- गौरव सेन झाला, निदेशक, सेन्ट्रल एकेडमी शिक्षान्नतर</strong></p>
<p>पीपीपी मोड पर स्कूलों के संचालन से शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार होगा। साथ ही, बुनियादी ढांचे का विकास होगा और जिन संसाधनों की वर्तमान में कमी है, उनकी उपलब्धता भी बेहतर हो सकेगी।<br /><strong>-डॉ. पवन सिंघल, कार्डियोलॉजिस्ट</strong></p>
<p> सरकारी स्कूलों को पीपीपी मोड पर संचालित करने से शिक्षा कुछ महंगी हो सकती है, लेकिन इससे गुणवत्ता में सुधार की संभावना है। अभिभावकों की आर्थिक भागीदारी बढ़ने से वे बच्चों की पढ़ाई के प्रति अधिक जिम्मेदार और सजग हो सकते हैं। कई एनजीओ और भामाशाह पहले से सरकारी स्कूलों को गोद लेकर शिक्षा के क्षेत्र में योगदान दे रहे हैं। पीपीपी मॉडल में सरकार, निजी संस्थाओं और जनता की भागीदारी बढ़ेगी, जिससे स्कूलों की स्थिति बेहतर हो सकती है। सरकार नीति और संसाधन उपलब्ध कराए तथा समाज सक्रिय भूमिका निभाए तो शिक्षा की गुणवत्ता में सुधार संभव है। शिक्षा ही देश के विकास की आधारशिला है।<br /><strong>- ऋतु बोहरा, सीए</strong></p>
<p>सरकारी स्कूलों को पीपीपी मोड पर देने से सबसे अधिक नुकसान बच्चों का होगा। निजी हाथों में जाने से स्कूलों का स्वरूप व्यावसायिक हो सकता है और फीस बढ़ने की संभावना रहेगी। शिक्षा के व्यावसायीकरण के बजाय सरकार को मौजूदा व्यवस्था को बेहतर बनाने पर ध्यान देना चाहिए। निजी स्कूलों में अभिभावक बच्चों की पढ़ाई और शिक्षकों की कार्यप्रणाली को लेकर अधिक सजग रहते हैं। इसी तरह सरकारी स्कूलों के अभिभावकों को भी जागरूक और सक्रिय किया जाना चाहिए, ताकि वे शिक्षकों के शिक्षण कार्य की नियमित निगरानी कर सकें। सरकारी स्कूलों में शिक्षा की गुणवत्ता सुधारने के लिए अभिभावकों की भागीदारी और प्रभावी मॉनिटरिंग जरूरी है।<br /><strong>- दीप्ति राजावत, अध्यक्ष, रोटरी क्लब पद्मिनी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Sep 2026 12:31:09 +0530</pubDate>
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                <title>आधी रात गूंजेंगे शंख-नगाड़े, मंदिरों में जन्मेंगे नंदलाल, बृजनाथजी समेत शहर के प्रमुख मंदिरों में जन्माष्टमी की तैयारियां पूरी</title>
                                    <description><![CDATA[वल्लभकुल परंपरा के अनुसार होंगे विशेष दर्शन, गीता भवन से इस्कॉन मंदिर तक सजे मंदिरों में आधी रात मनाया जाएगा कान्हा का जन्मोत्सव।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/conch-shells-and-drums-will-resound-at-midnight-as-nandlal--is-born-in-the-temples--preparations-for-janmashtami-are-complete-at-the-city-s-prominent-temples--including-brijnathji/article-164670"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(3)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।जन्माष्टमी के पर्व पर शुक्रवार को शहर के गढ़ पैलेस स्थित बृजनाथ मंदिर पर  सुबह ठाकुरजी का पंचामृत से अभिषेक किया गया। पुराने कोटा शहर में महाप्रभुजी के बड़े मंदिर, मथुराधीशजी, बृजनाथजी, फूल बिहारीजी, दाऊजी सहित अन्य मंदिरों में वल्लभकुल सम्प्रदाय की परंपराओं के अनुसार जन्माष्टमी मनाई जाएगी। मंदिरों को आकर्षक रूप से सजाया गया है।<br />बृजनाथजी मंदिर के पुजारी राजेन्द्र श्रृंगी ने बताया की  मंदिर में सुबह 6.30 बजे मंगला, दोपहर 12 बजे पंचामृत, 1.15 बजे शृंगार, 1.30 बजे तिलक, 2.30 बजे राजभोग, रात 8 बजे उत्थापन, 8.30 बजे संध्या भोग और 10 बजे जागरण के दर्शन होंगे। मध्यरात्रि 12 बजे जन्म दर्शन होंगे।</p>
<p>वहीं मथुराधीशजी का बड़ा मंदिर मे शुक्रवार सुबह 5 बजे पंचामृत, १ बजे तिलक, 11 बजे राजभोग, शाम 5.30 बजे उत्थापन, 6 बजे भोग, 6.30 बजे आरती, 7 बजे शयन तथा रात 10 बजे जागरण के दर्शन होंगे। रात 12 बजे ठाकुरजी के जन्म के दर्शन करवाए जाएंगे। वहीं  जन्माष्टमी पर शहर के गीता भवन, टीलेश्वर महादेव मंदिर, तलवंडी स्थित राधाकृष्ण मंदिर, किशोरपुरा स्थित इस्कॉन मंदिर, रंगबाड़ी स्थित बांके बिहारी मंदिर व मुकुंदरा विहार स्थित नंदग्राम, मथुराधीश मंदिर व पाटनपोल स्थित मथुराधीशजी मंदिर सहित करीब एक दर्जन मंदिरों में बाल गोपाल के जन्म के साथ ही गूंजेगे शंख और ढोल-नगाड़ों की आवाज व आतिशबाजी के साथ रात्रि 12 बजे कान्हा का जन्मोत्सव धूमधाम से मनाया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:31:30 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन में कोयले पर पड़ी मानसून की मार, 5 महीनों में लगा 45.34 लाख रूपये डेमरेज चार्ज</title>
                                    <description><![CDATA[पांच माह में 470 रेक पहुंचे, 81 की अनलोडिंग में हुई देरी; अगस्त में ही 38.55 लाख की पेनल्टी, 403 घंटे लेट हुए 45 रेक
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/monsoon-impacts-coal-operations-at-kota-super-thermal-power-station--%E2%82%B945-34-lakh-demurrage-charged-over-5-months/article-164668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा सुपर थर्मल पावर स्टेशन (ङळढर) में कोयले की आपूर्ति लेकर पहुँचने वाली मालगाड़ियों (रेक) को निर्धारित समय पर खाली न कर पाने के कारण प्लांट को भारी आर्थिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। चालू वित्तीय वर्ष में अप्रैल से अगस्त तक के पांच महीनों के दौरान कोयला अनलोडिंग में हुई देरी पर रेलवे ने कुल 45,34,006 रूपयें का का डेमरेज चार्ज (पेनल्टी) लगाया है। रेलवे नियमों के अनुसार एक पूरी मालगाड़ी (रेक) को खाली करने के लिए लगभग 7-8 घंटे का निर्धारित समय दिया जाता है। इस समय सीमा से अधिक समय लगने पर रेलवे प्रति घंटे के हिसाब से डेमरेज चार्ज वसूलता है।</p>
<p><strong>महीने वार स्थिति मानसून के साथ बढ़ता गया जुर्माना</strong><br />कोटा थर्मल में 60 वैगन के रेक को खाली करने के लिए 7-8 घंटे का समय निर्धारित है, जिसके बाद प्रति घंटे डेमरेज चार्ज लगता है। चालू वित्तीय वर्ष के 5 महीनों (अप्रैल से अगस्त) में आए 470 रेकों में से 81 लेट हुए, जिससे 482 घंटे की देरी और 45.34 लाख रूपये का जुर्माना दर्ज हुआ।</p>
<p><strong>अप्रैल: </strong>76 रेकों में से केवल 3 लेट (5 घंटे की देरी), जुर्माना: 43,500 रूपये<br /><strong>मई: </strong>प्रबंधन शानदार रहा; 88 रेक समय पर खाली, पेनल्टी शून्य।<br /><strong>जून:</strong> 92 में से 5 रेक लेट (11 घंटे की देरी), जुर्माना: 94,200रूपये<br /><strong>जुलाई: </strong>मानसून शुरू; 122 में से 28 रेक लेट (63 घंटे की देरी), जुर्माना: 5,41,155 रूपये<br /><strong>अगस्त: </strong>स्थिति गंभीर; 92 में से 45 रेक लेट (403 घंटे की रिकॉर्ड देरी), रिकॉर्ड जुर्माना: 38,55,151 रूपये (कुल पेनल्टी का 85%)।</p>
<p><strong>देरी के मुख्य कारण</strong><br />थर्मल प्रशासन की और से कोयला खाली करने में लगने वाले अतिरिक्त समय के बारें में सफाई देते हुए बताया कि यह देरी किसी लापरवाही का नतीजा नहीं है,बारिश, चिपचिपा कोयला और रेक बंचिंग जैसे व्यावहारिक और प्राकृतिक कारण हैं।<br /><strong>बारिश और चिपचिपा कोयला: </strong>माइनिंग साइट और रास्ते में भारी बारिश के कारण कोयला गीला और चिपचिपा (स्टिकी) हो जाता है, जिससे वैगनों से उसे बाहर निकालने में सामान्य से कई गुना अधिक समय लगता है।<br /><strong>रेक बंचिंग :</strong> कई बार रेलवे ट्रैफिक के कारण एक साथ कई रेक प्लांट में पहुंच जाते हैं, जिससे अनलोडिंग सिस्टम पर अचानक भारी दबाव पड़ता है।<br /><strong>तकनीकी खामियां: </strong>कई बार कोयले के वैगनों के दरवाजे जाम हो जाते हैं और समय पर नहीं खुलते, जिससे अनलोडिंग प्रक्रिया बाधित होती है।</p>
<p><strong>अभी जुर्माने में मिल सकती है राहत</strong><br />थर्मल प्लांट प्रबंधन के मुताबिक डेमरेज चार्ज लगाना रेलवे का एक ऑटोमेटेड सिस्टम है। हालांकि, जो देरी थर्मल प्लांट के नियंत्रण से बाहर के कारणों (जैसे भारी बारिश या रेलवे ट्रैफिक) से होती है, उसका पूरा डेटा और कारण बताकर हमारे उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया जाता है। वर्तमान मामले में भी प्लांट प्रबंधन द्वारा रेलवे के साथ पेनल्टी वेवर की नियमानुसार प्रक्रिया अपनाई जा रही है।</p>
<p>रेल्वे प्रशासन ने इसे रेल्वे की फ्रेट पॉलिसी का हिस्सा बताते हुए बताया कि रेल्वे द्वारा किसी भी संस्थान को परिवहन के टाईम बाउण्ड़ में वैगन पहुचायां जाता है। ऐसे में रेल्वे द्वारा विभागीय देरी के चलते पेनल्टी आरोपित की जाती है। यह सभी रेल्वे द्वारा माल ढ़लाई से जुड़े सेक्टर में लागू होता है। अधिकारियों का यह भी कहना है कि कोटा के सकतपुरा के अलावा छबड़ा और झालावाड़ सहित अन्य प्राइवेट साइडिंग्स पर भी रेलवे का यही नियम लागू होता है, और वहां भी बारिश के मौसम में अनलोडिंग प्रभावित होने से डेमरेज चार्ज लगने की संभावना बनी रहती है।</p>
<p>अनलोडिंग में देरी लापरवाही नहीं, बल्कि बारिश में कोयला चिपचिपा होने, रेक बंचिंग और वैगनों के दरवाजे जाम होने जैसे व्यावहारिक कारणों से हुई है। हमारे नियंत्रण से बाहर रहे कारणों का पूरा डेटा और विवरण देकर उच्च स्तर पर अपील की जा रही है। नियमानुसार पेनल्टी वेवर प्रक्रिया अपनाई जा रही है।<br /><strong>-शिखा अग्रवाल चीफ इंजिनियर कोटा सुपर थर्मल पावर</strong></p>
<p> डेमरेज चार्ज लगाना रेलवे की फ्रेट पॉलिसी का एक निर्धारित हिस्सा है। रेलवे समयबद्ध (टाइम बाउंड) तरीके से संस्थानों को वैगन उपलब्ध कराता है, और समय सीमा से ज्यादा वक्त लगने पर नियमानुसार जुर्माना आयद किया जाता है। यह नियम केवल कोटा थर्मल ही नहीं ढुलाई से जुड़ी सभी सरकारी व प्राइवेट साइडिंग्स सभी पर लागू होता है।<br /><strong>-सौरभ जैन वरिष्ठ मण्ड़ल वाणिज्य प्रबन्धक रेल्वे,कोटा मण्ड़ल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Sep 2026 14:06:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>वादे वही, नेता बदलते रहे...अंतिम पांच वार्डों की पड़ताल में भी समस्याओं का अंबार</title>
                                    <description><![CDATA[दैनिक नवज्योति की ऑडिट रिपोर्ट में सामने आई कहीं जर्जर सड़कें तो कहीं गंदे नाले, सामुदायिक भवन और सुलभ शौचालय का भी अभाव।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/same-old-promises--changing-leaders----a-mountain-of-problems-found-during-the-inspection-of-the-final-five-wards/article-164572"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम के नए सौ वार्डों की पड़ताल के अंतिम चरण में दैनिक नवज्योति की टीम मंगलवार को शेष पांच वार्डों में पहुंची और वहां की व्यवस्थाओं का जमीनी जायजा लिया। क्षेत्रवासियों से बातचीत में एक बार फिर मूलभूत सुविधाओं की कमी और विकास कार्यों को लेकर नाराजगी सामने आई। लोगों का कहना था कि चुनाव आते हैं तो विकास के बड़े-बड़े वादे किए जाते हैं, लेकिन चुनाव समाप्त होने के बाद समस्याएं जस की तस बनी रहती हैं। क्षेत्रवासियों ने तंज कसते हुए कहा, “नेता जी बदलते रहेंगे, लेकिन वादे वही रहेंगे।”</p>
<p>दैनिक नवज्योति की टीम ने सौ वार्डों में विकास और समस्याओं की पड़ताल के दौरान शहर के विभिन्न इलाकों की तस्वीर सामने लाई है। अंतिम पांच वार्डों में पहुंचने पर भी हालात बहुत अलग नजर नहीं आए। कहीं जर्जर सड़कें लोगों की परेशानी बढ़ा रही हैं तो कहीं नालों की सफाई नहीं होने से गंदगी और दुर्गंध का सामना करना पड़ रहा है। कई क्षेत्रों में सामुदायिक भवन और सार्वजनिक शौचालय जैसी मूलभूत सुविधाओं का भी अभाव है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों से उन्हें उम्मीद रहती है कि वे क्षेत्र की छोटी-बड़ी समस्याओं का समाधान करवाएंगे। हालांकि कई इलाकों में वर्षों से चली आ रही समस्याएं आज भी लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।</p>
<p><strong>वार्ड 99 में सुविधाओं का अभाव</strong><br />क्षेत्रवासियों ने बताया कि इलाके में आज भी सामुदायिक भवन और सुलभ शौचालय जैसी सुविधाओं का अभाव बना हुआ है। लोगों को सामाजिक एवं पारिवारिक कार्यक्रमों के आयोजन के लिए परेशानी उठानी पड़ती है। सार्वजनिक शौचालय नहीं होने से भी क्षेत्रवासियों को दिक्कतों का सामना करना पड़ता है। क्षेत्र में कई स्थानों पर नालियां भी नहीं बनी हुई हैं। इसके चलते घरों से निकलने वाले पानी की उचित निकासी नहीं हो पाती और लोगों को अपने स्तर पर व्यवस्था करनी पड़ती है। बारिश के दौरान यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है। क्षेत्रवासियों ने बताया कि लंबे समय से इन सुविधाओं की मांग की जा रही है, लेकिन अब तक अपेक्षित समाधान नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>बालाकुंड में विकास की रफ्तार बेहद धीमी</strong><br />वार्ड नंबर 96 के अंतर्गत आने वाले बालाकुंड क्षेत्र में विकास कार्यों की स्थिति को लेकर लोगों ने नाराजगी जताई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि इलाके में विकास कार्य न के बराबर हुए हैं। नियमित सफाई व्यवस्था नहीं होने के कारण कई स्थानों पर गंदगी पसरी रहती है। लोगों ने बताया कि क्षेत्र की कई सड़कों की हालत खराब है और आवश्यक स्थानों पर सीसी रोड का निर्माण भी नहीं हुआ है। क्षतिग्रस्त सड़कों से प्रतिदिन आवागमन करने वाले लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। स्थानीय निवासियों के अनुसार वर्षों से घरों के सामने कचरा संग्रहण पॉइंट बने हुए हैं, लेकिन इनका स्थायी और उचित समाधान अब तक नहीं किया गया।</p>
<p><strong>वार्ड 97 में जर्जर सड़कों से परेशान लोग</strong><br />वार्ड नंबर 97 के अंतर्गत आने वाले जवाहर नगर क्षेत्र में भी जर्जर सड़कें लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं।बारिश के दिनों में हालात और भी खराब हो जाते हैं। टूटी सड़कों और गड्ढों में पानी भरने से दुर्घटना की आशंका बनी रहती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़क निर्माण और मरम्मत कार्यों की मांग लंबे समय से की जा रही है, लेकिन समस्या का पूर्ण समाधान नहीं हो पाया है।</p>
<p><strong>गंदे नाले और दुर्गंध ने बढ़ाई मुश्किलें</strong><br />वार्ड 97 में नालों की नियमित सफाई नहीं होने की शिकायत भी सामने आई। लोगों के अनुसार नालों में कचरा जमा होने से पानी की निकासी प्रभावित होती है और आसपास दुर्गंध फैलती रहती है। बारिश के दौरान कई बार नाले ओवरफ्लो होने लगते हैं, जिससे गंदा पानी सड़कों और आसपास के क्षेत्रों में फैल जाता है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद सुदर्शन गौतम</strong><br />कार्यकाल से पहले क्षेत्र में नालों के ओवरफ्लो होने से गंदा पानी सड़कों और आसपास के इलाकों में भर जाता था। क्षेत्रवासियों को राहत दिलाई गई। करीब 10 करोड़ रुपए की लागत से क्षेत्र में सीसी सड़कों का निर्माण कराया गया। वर्तमान में भी विकास कार्य जारी हैं और पार्कों का निर्माण व विकास कराया जा रहा है। वार्ड में सामुदायिक भवन का निर्माण भी करवाया गया।</p>
<p><strong>पूर्व वार्ड पार्षद नवीन यादव</strong><br />क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या वर्षों से लंबित पट्टों की थी। लोगों को लंबे समय से पट्टे नहीं मिले थे, जिसके लिए प्रयास कर अनेक लोगों को पट्टे दिलवाए गए। वार्ड की गलियों में सीसी रोड और नालियों का निर्माण कराया गया। उन्होंने बताया कि क्षेत्रवासियों के राशन कार्ड भी बनवाए गए। हालांकि वार्ड में आज भी पार्क, सामुदायिक भवन और डिस्पेंसरी जैसी मूलभूत सुविधाओं का अभाव बना हुआ है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद कुलदीप प्रजापति</strong><br />कार्यकाल से पहले वार्ड में साफ-सफाई की स्थिति बेहद खराब थी, जिसमें सुधार के लिए विशेष प्रयास किए गए। क्षेत्र में सीवेज कार्य करवाने के साथ पार्कों का जीर्णोद्धार भी कराया गया। जहां आवश्यकता और संभावना थी, वहां रोड लाइटें लगवाई गईं। उन्होंने बताया कि वार्ड में सामुदायिक भवन और सुलभ कॉम्प्लेक्स जैसी सुविधाओं का अभी भी अभाव है।</p>
<p><strong>वार्डवासी करतार सिंह</strong><br />सड़कें क्षतिग्रस्त होकर लोगों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई हैं। साफ-सफाई व्यवस्था भी संतोषजनक नहीं है और जगह-जगह बने कचरा पॉइंट क्षेत्र की सुंदरता को बिगाड़ने के साथ लोगों की परेशानी बढ़ा रहे हैं। उनका कहना है कि नियमित सफाई और सड़कों की मरम्मत के लिए जिम्मेदार विभाग को गंभीरता से कार्य करना चाहिए, ताकि क्षेत्रवासियों को मूलभूत सुविधाएं मिल सकें।</p>
<p><strong>वार्डवासी संतोष कुमार</strong><br />क्षेत्र में कई सड़कें क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं, लेकिन उनकी समय पर मरम्मत नहीं होने से लोगों को आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। उन्होंने कहा कि वार्ड के नालों की नियमित और समयबद्ध सफाई भी नहीं होती। बारिश के दौरान यह समस्या और अधिक गंभीर हो जाती है तथा गंदा पानी जमा होने की आशंका बनी रहती है।</p>
<p><strong>वार्डवार नंबर व क्षेत्र</strong><br />-वार्ड नंबर 96 में संपूर्ण बालाकुंड एवं अग्रसेन नगर का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 97 में दानबाड़ी, संपूर्ण जवाहर नगर, डिस्ट्रिक्ट सेंटर, तलवंडी सेक्टर-सी एवं तलवंडी एसएफएस कॉलोनी का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 98 में गणेश तालाब, बसंत विहार सेक्टर-2 एवं 3 का संपूर्ण क्षेत्र तथा बसंत विहार का आंशिक क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 99 में महावीर नगर विस्तार योजना-6 एवं सेक्टर-5 का संपूर्ण क्षेत्र, अग्रसेन नगर, गुर्जर बस्ती एवं गणेश तालाब सेक्टर-1 सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 100 में तीन बत्ती चौराहा मुख्य मार्ग, बसंत विहार का आंशिक क्षेत्र, केशवपुरा मूर्तिधाम सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:26:00 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का : 4.08 करोड़ की लागत से बनी जीएनएम हॉस्टल की नई बिल्डिंग शुरू</title>
                                    <description><![CDATA[ बजट आने तक 25 बेड से शुरू होगा संचालन, दूर-दराज व गरीब छात्राओं को मिलेगी प्राथमिकता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news-report--new-gnm-hostel-building--cost--%E2%82%B94-08-crore--becomes-operational/article-164571"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर स्थित जीएनएम हॉस्टल की नई बिल्डिंग को आखिरकार शुरू करने की कवायद पूरी हो गई है। लंबे समय से बंद पड़ी इस बिल्डिंग को चालू करने के आदेश जारी होने के बाद सफाई कार्य युद्धस्तर पर पूरा किया गया है। बजट स्वीकृति की प्रक्रिया जारी रहने तक पुराने हॉस्टल से मंगाए गए 25 बेडों के सहारे फिलहाल फर्स्ट फ्लोर के 10 कमरों का आज से  संचालन शुरू किया जा रहा है। नई बिल्डिंग में छात्राओं के लिए लाइट, पंखे और पेयजल जैसी बुनियादी सुविधाएं पूरी तरह चालू कर दी गई हैं।</p>
<p><strong>साल भर पहले हैंडओवर अब शुरू</strong><br />दैनिक नवत्योति ने 25 अगस्त काे प्रकाशित ''बजट और नियमों के पेंच में उलझी नर्सिंग कॉलेज की छात्राओं की सुविधाएं'' शीर्षक से प्रकाशित खबर में 4.08 करोड़ की लागत से नर्सिंग कॉलेज के लिए नए बनाएं गये हॉस्टल के पुरा होने के बाद एनआरएचएम ने करीब1 साल पहले तत्कालीन प्रिन्सीपल काे बिल्डिंग सौप दी थी। लेकिन संचालन के लिए जरूरी बैड़ व किचन की सुविधा के न होने के कारण इसे शुरू नही किया जा सका था। जिसके बाद एमबीएस असपताल के अधीक्षक ने उक्त मामले पर कमेटी बना कर इसे शुरू करने के लिए कवायद शुरू की थी।</p>
<p><strong>दूर-दराज की गरीब छात्राओं को मिलेगी प्राथमिकता</strong><br />जीएनएम संस्थान के तीनों सेमेस्टर में लगभग 180 सीटे है। जिनमें से ज्यादातर छात्राएं बाहर की अध्ययनरत हैं,जबकि इस नए हॉस्टल की कुल क्षमता 50 छात्राओं की है। हॉस्टल आवंटन में दूर-दराज के क्षेत्रों से आने वाली और आर्थिक रूप से कमजोर (गरीब) छात्राओं को प्राथमिकता दी जाएगी। जर्जर व असुरक्षित हो चुके पुराने हॉस्टल में रह रही 3 जीएनएम छात्राओं को सबसे पहले इस नई बिल्डिंग में शिफ्ट किया जाएगा।</p>
<p><strong>सुरक्षा दीवार के लिए एनएचएम को लिखा पत्र</strong><br />नर्सिंग कॉलेज के प्रिंसिपल ने बताया कि हॉस्टल की पीछे की बाउंड्री वॉल छोटी होने से सुरक्षा को लेकर चिंता बनी हुई है। आउटर हिस्से से चोरी की वारदातों को देखते हुए प्रशासन ने 27 तारीख को एनएचएम को पत्र भेजकर बाउंड्री वॉल को 2-2 फीट ऊंची कराने की मांग की है। </p>
<p><strong>वार्डन व महिला गार्ड संभालेंगी व्यवस्था</strong><br />हॉस्टल का जिम्मा लंबे समय से कार्यरत वार्डन नीलम रावत संभाल रही हैं। सुरक्षा के लिहाज से 4 गार्ड तैनात रहेंगे। इसके अलावा पुराने हॉस्टल में छात्राओं के साथ रह रही अनुभवी महिला गार्ड को भी नई बिल्डिंग में ही शिफ्ट किया जा रहा है, जिससे छात्राओं की सुरक्षा चाक-चौबंद रहे।</p>
<p>बजट आने तक हॉस्टल की क्षमता बढ़ाने के लिए प्रशासन अपने स्तर पर प्रयास कर रहा है। हमने अन्य लोगों से भी सहयोग की अपील की है जिससें की अधिक से अधिक छात्राओं को नए हॉस्टल में रहने की सुविधा मिल सके।<br /><strong>- हरिप्रसाद अग्रवाल, प्रिंसिपल जीएनएम नर्सिंग कॉलेज एमबीएस</strong></p>
<p> प्रशिक्षण संस्थान के प्रिंसीपल ने हॉस्टल के संचालन में आ रही कमियाें को उपलब्ध संसाधनों से हॉस्टल चलाने के लिए निर्देश मांगे थे नया बजट आने तक व छात्राओं को सुविधा उपलब्ध करवाने के लिए हॉस्टल शुरू करने के लिए अनुमति दी गई है।<br /><strong>-डॉ. राकेश सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Sep 2026 15:20:23 +0530</pubDate>
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                <title>विकास के दावों के बीच बदहाल वार्ड, समस्याओं से जूझ रहे क्षेत्रवासी </title>
                                    <description><![CDATA[टूटे झूलों और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव से पार्क बदहाल, श्रीनाथपुरम में सामुदायिक भवन की दरकार।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wards-in-poor-condition-despite-development-claims--residents-grappling-with-issues/article-164479"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(3)5.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के छह वार्डों में विकास कार्यों और स्थानीय समस्याओं को लेकर की गई जमीनी पड़ताल में लोगों की नाराजगी सामने आई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि वे अपने पार्षद और जनप्रतिनिधियों से सबसे अधिक उम्मीद मूलभूत सुविधाएं उपलब्ध कराने की रखते हैं। यदि पानी, सड़क, सफाई, बिजली और सुरक्षा जैसी बुनियादी समस्याओं का समाधान ही नहीं हो सकता तो फिर चुनाव लड़ने और जनता से वोट मांगने का क्या औचित्य है। वार्ड क्षेत्र में आने वाले केशवपुरा में नाले की समस्या कई वर्षों से बनी हुई है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि बारिश के दिनों में स्थिति और अधिक खराब हो जाती है तथा गंदा पानी क्षेत्र में फैलने से लोगों को परेशानी उठानी पड़ती है। वहीं श्रीनाथपुरम में सामुदायिक भवन की समस्या बनी हुई है। लोगों ने बताया कि इन समस्याओं से कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अभी तक कोई स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p><strong>अपने खर्चे से भरवा रहे सड़क के गड्ढे</strong><br />केशवपुरा क्षेत्र की मुख्य सड़कों की हालत भी बदहाल बनी हुई है। जगह-जगह गड्ढे और सड़क के क्षतिग्रस्त हिस्से वाहन चालकों के लिए परेशानी का सबब बन गए हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाने से वाहन चालकों को सड़क की वास्तविक स्थिति दिखाई नहीं देती, जिससे दुर्घटनाओं की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय निवासियों ने बताया कि कई बार सड़क मरम्मत की मांग करने के बावजूद जिम्मेदार विभागों की ओर से अपेक्षित कार्रवाई नहीं हुई। हालात यह हैं कि कुछ स्थानों पर क्षेत्रवासियों ने स्वयं अपने पैसे खर्च कर सड़कों के गड्ढे भरवाए हैं। लोगों का कहना है कि नगर निगम और जनप्रतिनिधियों की जिम्मेदारी होने के बावजूद आम नागरिकों को अपनी समस्याओं के समाधान के लिए खुद आगे आना पड़ रहा है। क्षेत्रवासियों ने क्षतिग्रस्त सड़कों की जल्द मरम्मत करवाने की मांग की है।</p>
<p><strong>पार्क में टूटे झूले, सुरक्षा व्यवस्था पर भी सवाल</strong><br />वार्ड क्षेत्र के केशवपुरा सेक्टर-6 में स्थित पार्क भी उपेक्षा का शिकार है। स्थानीय लोगों ने बताया कि पार्क तो बना हुआ है, लेकिन बच्चों के मनोरंजन के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। पार्क में नए झूले नहीं लगाए गए हैं, जबकि पहले से लगे कई झूले टूटे और क्षतिग्रस्त हालत में पड़े हैं। इससे बच्चों को खेलने के लिए सुरक्षित स्थान नहीं मिल पा रहा है। क्षेत्रवासियों का आरोप है कि उचित रखरखाव और निगरानी के अभाव में पार्क धीरे-धीरे असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। शाम के समय यहां संदिग्ध गतिविधियां होने से आसपास रहने वाले परिवारों में भी चिंता बनी रहती है। लोगों ने पार्क में टूटे झूलों को हटाकर नए झूले लगाने, पर्याप्त रोशनी की व्यवस्था करने और नियमित निगरानी के साथ सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम करने की मांग की है। क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि और जिम्मेदार विभाग समय रहते इन समस्याओं का समाधान करें तो आम लोगों को राहत मिल सकती है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद अनुराग गौतम</strong><br />कार्यकाल के दौरान वार्ड में कराए गए विकास कार्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि पहले जहां अधिकांश सड़कें डामर की थीं, वहां सीसी रोड का निर्माण कराया गया। पार्कों में ओपन जिम स्थापित करवाए गए और आमजन की सुविधा के लिए जनता क्लिनिक खुलवाया गया। सफाई व्यवस्था की नियमित मॉनिटरिंग की गई तथा सुलभ कॉम्प्लेक्स का जीर्णोद्धार भी कराया गया। हालांकि वार्ड में आज भी नगर निगम की ओर से सामुदायिक भवन का अभाव बना हुआ है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद बालचंद शर्मा</strong><br />कार्यकाल के दौरान वार्ड में मूलभूत सुविधाओं के विस्तार को प्राथमिकता दी गई। क्षेत्र में कई सीसी रोड का निर्माण करवाया गया और पेयजल व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए नई पानी की पाइपलाइन डलवाई गई। धार्मिक स्थलों के संरक्षण के लिए मंदिरों का जीर्णोद्धार भी कराया गया। उन्होंने कहा कि वार्ड में समस्याएं जरूर थीं, लेकिन जनप्रतिनिधि के रूप में हमेशा वार्डवासियों की शिकायतों का समाधान कराने का पूरा प्रयास किया गया।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद कुलदीप गौतम</strong><br />कार्यकाल से पहले करीब 20 वर्षों तक व्यायामशाला के बाहर बना कचरा पॉइंट क्षेत्रवासियों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ था, जिसका समाधान कराया गया। संतोषी नगर सब्जी मंडी में व्यवस्थाओं को सुधारते हुए सीसी रोड का निर्माण करवाया गया तथा वार्ड में पेयजल आपूर्ति बेहतर करने के लिए पानी की पाइपलाइन भी डलवाई गई। हालांकि उन्होंने माना कि वार्ड क्षेत्र में नालों और जल निकासी की समस्या आज भी बनी हुई है।</p>
<p><strong>वार्डवासी राजेंद्र शर्मा</strong><br />क्षेत्र की बदहाल व्यवस्थाओं पर नाराजगी जताते हुए बताया कि वार्ड क्षेत्र में पार्क तो बना हुआ है, लेकिन वहां लगे झूले टूट चुके हैं और पार्क की स्थिति लगातार खराब होती जा रही है। देखरेख के अभाव में यह पार्क असामाजिक तत्वों का अड्डा बनता जा रहा है। उन्होंने कहा कि वार्ड में सामुदायिक भवन का भी अभाव है। साथ ही क्षेत्र में पर्याप्त सुरक्षा व्यवस्था नहीं होने से स्थानीय लोगों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>वार्डवासी ओम बंजारा</strong><br />क्षेत्र की मुख्य सड़क लगातार क्षतिग्रस्त होती जा रही है और जगह-जगह बड़े गड्ढे बन गए हैं। सड़क पर बने कई स्पीड ब्रेकर भी टूट चुके हैं, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी के साथ दुर्घटना का खतरा बना रहता है। उन्होंने कहा कि इस गंभीर समस्या से कई बार जनप्रतिनिधियों और संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन अब तक कोई स्थायी समाधान नहीं होने से क्षेत्रवासियों में नाराजगी बनी हुई है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 90 से 95 का क्षेत्रवार विवरण</strong><br /><strong>-वार्ड नंबर 90:</strong> इस वार्ड में श्रीनाथपुरम सेक्टर-बी का अधिकांश भाग, अग्निशमन केंद्र, श्रीनाथपुरम, श्रीनाथपुरम सेक्टर-ए, बालाजी मार्केट, एलआईसी भवन सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>-वार्ड नंबर 91:</strong> वार्ड क्षेत्र में टीचर कॉलोनी सेक्टर-1 व सेक्टर-2, रंगविहार, कंपीटीशन कॉलोनी तथा अंबेडकर बस्ती सहित आसपास के इलाके शामिल हैं।</p>
<p><strong>-वार्ड नंबर 92: </strong>इस वार्ड में केशवपुरा सेक्टर-6 और केशवपुरा सेक्टर-7 का क्षेत्र शामिल है।</p>
<p><strong>-वार्ड नंबर 93:</strong> वार्ड क्षेत्र में रामजानकी मंदिर, तेजाजी पार्क, राजपूत सेक्टर, आशिक केशवपुरा, केशवपुरा सेक्टर-4 तथा कुम्हारों का मोहल्ला शामिल है।</p>
<p><strong>-वार्ड नंबर 94:</strong> इस वार्ड में इंदिरा विहार का आधा क्षेत्र जवाहर नगर थाने के पीछे का इलाका तथा तलवंडी सेक्टर-2 और सेक्टर-3 सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p><strong>-वार्ड नंबर 95: </strong>वार्ड क्षेत्र में आशिक केशवपुरा सेक्टर-4 व सेक्टर-6, गुजराती बस्ती, हरिजन बस्ती, भील बस्ती तथा सुनारों का मोहल्ला शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Sep 2026 14:58:18 +0530</pubDate>
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                <title>करोड़ों के दावों के बीच मूलभूत सुविधाओं को तरसते वार्ड, बारिश में नाले बन रहे आफत</title>
                                    <description><![CDATA[नालों की सफाई नहीं होने से ब्रजराज कॉलोनी, मस्जिद चौक और नेहरू कॉलोनी में जलभराव, घरों तक पहुंच रहा गंदा पानी ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/wards-deprived-of-basic-amenities-despite-claims-of-multi-crore-investments--drains-turn-into-a-menace-during-rains/article-164345"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-09/111200-x-600-px)-(11).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के चार वार्डों की ऑडिट में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। वार्ड क्षेत्र में रहने वाले लोग आज भी मूलभूत सुविधाओं के लिए परेशान हैं। कहीं नालों की सफाई नहीं होने से बारिश के दिनों में जलभराव की समस्या विकराल हो जाती है तो कहीं पार्क, डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन जैसी जरूरी सुविधाएं तक उपलब्ध नहीं हैं। सफाई व्यवस्था की स्थिति भी कई इलाकों में संतोषजनक नहीं है।</p>
<p><strong>नाले जाम, बारिश में घरों तक पहुंचता है गंदा पानी</strong><br />वार्ड क्षेत्र की ब्रजराज कॉलोनी और नेहरू कॉलोनी में नालों की नियमित सफाई नहीं होने की समस्या सामने आई। क्षेत्रवासियों का कहना है कि बारिश के दौरान नालियां और नाले जाम हो जाते हैं। पानी की निकासी नहीं होने के कारण सड़कों पर गंदा पानी भर जाता है और कई बार यह पानी घरों तक पहुंच जाता है। जलभराव के कारण लोगों को आवाजाही में परेशानी होती है। लंबे समय से नालों की सफाई और स्थायी जल निकासी की मांग की जा रही है, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>पार्क, डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन की दरकार</strong><br />ऑडिट के दौरान कई क्षेत्रों में लोगों ने बताया कि वार्ड में बच्चों और बुजुर्गों के लिए पर्याप्त पार्क नहीं हैं। वहीं जरूरत के बावजूद डिस्पेंसरी और सामुदायिक भवन जैसी सुविधाएं भी कई जगह उपलब्ध नहीं हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि छोटी-छोटी समस्याओं के समाधान के लिए भी उन्हें जिम्मेदार जनप्रतिनिधियों के चक्कर लगाने पड़ते हैं। सफाई व्यवस्था को लेकर भी लोगों में नाराजगी है। जगह-जगह गंदगी और नियमित सफाई नहीं होने से परेशानी बढ़ रही है।</p>
<p><strong>करोड़ों के काम हुए तो नजर क्यों नहीं आते?</strong><br />क्षेत्रवासियों का कहना है कि जब वे समस्याओं को लेकर पार्षद से सवाल करते हैं तो जवाब मिलता है कि वार्ड में करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए गए हैं। लोगों का सवाल है कि यदि इतने बड़े स्तर पर काम हुए हैं तो वे नजर क्यों नहीं आ रहे? उनका कहना है कि पार्षद का चुनाव इसलिए होता है कि वह अपने क्षेत्र की समस्याओं को समझे और प्राथमिकता के आधार पर उनका समाधान करवाए। लेकिन चुनाव जीतने के बाद कई बार जनप्रतिनिधियों का व्यवहार बदल जाता है और लोगों की शिकायतों पर अपेक्षित गंभीरता नहीं दिखाई देती।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद अनूप कुमार</strong><br />वार्ड में सामुदायिक भवन का अभाव है। हालांकि क्षेत्र में सुलभ कॉम्पलेक्स का निर्माण करवाया गया है। उन्होंने कहा कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद वार्ड की साफ-सफाई व्यवस्था बिगड़ गई है। कई बार शिकायत करने के बावजूद नगर निगम के अधिकारी समस्याओं के समाधान को लेकर गंभीरता नहीं दिखाते, जिससे लोगों को परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद नीलोफर</strong><br />वार्ड में करीब 25 वर्षों से अतिक्रमण की समस्या बनी हुई थी, जिसका समाधान करवाया गया। मंदिरों का जीर्णोद्धार कराया गया। वर्षों पुरानी कचरा पॉइंट की समस्या खत्म कर वहां पार्क विकसित करवाया। वहीं करीब 40 वर्षों से सफाई और मरम्मत का इंतजार कर रहे नालों की रिपेयरिंग करवाकर व्यवस्था में सुधार किया गया।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद ममता कंवर</strong><br />पूर्व पार्षद ममता कंवर ने बताया कि वार्ड में पार्क की कमी है। उनके कार्यकाल के दौरान जरूरत के अनुसार नालियों का निर्माण करवाया गया। उन्होंने कहा कि वार्डवासियों की समस्याओं को प्राथमिकता देते हुए समय-समय पर उनके समाधान का प्रयास किया जाता रहा। वर्तमान में वार्ड में कोई बड़ी समस्या नहीं है, हालांकि मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने की जरूरत है।</p>
<p><strong>वार्डवासी शिवा मद्रासी</strong><br />क्षेत्र की सबसे बड़ी समस्या नाले की है। नियमित सफाई नहीं होने से नाला जाम हो जाता है। बारिश के दौरान नाले का गंदा पानी ओवरफ्लो होकर घरों तक पहुंच जाता है। वार्ड में सामुदायिक भवन भी नहीं है। इसके अलावा साफ-सफाई व्यवस्था का भी अभाव होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर व क्षेत्र</strong><br />-वार्ड नंबर 21 में काली बस्ती, हनुमान बस्ती, थर्मल पावर स्टेशन, चंबल कॉलोनी, लक्ष्मी मैरिज गार्डन, समय विद्या निकेतन स्कूल, मुन्ना टेलर्स, सीनियर लेडीज टेलर्स, असगर अली का मकान, रोज ब्यूटी पार्लर, हरिजन बस्ती, कुंदकुंद आवासीय योजना, फॉरेस्ट चौकी, पंचशील कॉलोनी, समस्त दुर्गा नगर, सुभाष नगर, सगसजी महाराज, न्यू थर्मल कॉलोनी, जी-मार्ट, मस्जिद, नेवालाल मैरिज गार्डन, बजरंगपुरा एवं आरएसईबी कार्यालय क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 41 में हरिजन बस्ती, राजभवन क्षेत्र, जेके लोन अस्पताल, आयुर्वेदिक अस्पताल, इस्माइल चौक, बग्गी खाना, ब्रजराज कॉलोनी, नेहरू कॉलोनी, मस्जिद चौक, एमबीएस अस्पताल, सिविल लाइंस, कोलीपाड़ा का आंशिक क्षेत्र, प्रकाश क्लिनिक सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />-वार्ड नंबर 42 में शीतला माता मंदिर, गोरी आश्रम, हरिजन बस्ती, बापू बस्ती, रामदेवजी का मंदिर, देवनारायण मंदिर, बीड़ के बालाजी, सरकारी स्कूल, न्यू सरस्वती विद्या मंदिर, जय अम्बे टेंट हाउस एवं राजपूत किराना स्टोर सहित आसपास का क्षेत्र शामिल है।<br />-वार्ड नंबर 43 में पुरानी कुन्हाड़ी व हवेली, चंबल पुलिया का निचला हिस्सा, रिद्धि राज टावर, बूंदी सिलिका, बिजासन माताजी का मंदिर, डी-मार्ट, विजय वीर स्टेडियम, बालापुरा का संपूर्ण क्षेत्र, सेक्टर कार्यालय, रोडवेज वर्कशॉप, कंकरेश्वर महादेव मंदिर, रजत सिटी ग्रुप मल्टी सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Sep 2026 12:31:47 +0530</pubDate>
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