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                <title>कोटा - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>कोटा RSS Feed</description>
                
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                <title>बारिश बनी एमबीएस अस्पताल की सबसे बड़ी परीक्षा : बदहाल ड्रेनेज व्यवस्था बनी मरीजों की मुसीबत</title>
                                    <description><![CDATA[ नई बिल्डिंग, सेंट्रल लैब और अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले रास्तों पर भरता है पानी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rain-poses-the-biggest-challenge-for-mbs-hospital--poor-drainage-system-causes-trouble-for-patients/article-159324"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)20.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मानसून की पहली बारिश के साथ ही वर्षों पुरानी जलभराव की समस्या फिर सामने आने लगती है। अस्पताल की नई बिल्डिंग के बाहर, सेंट्रल लैब, अधीक्षक कार्यालय तक जाने वाले मार्ग सहित कई स्थानों पर थोड़ी सी बारिश के बाद ही पानी भर जाता है। मरीजों, उनके परिजनों और अस्पताल स्टाफ को पानी से होकर गुजरना पड़ता है। कई बार स्ट्रेचर और व्हीलचेयर निकालने तक में परेशानी होती है, जिससे गंभीर मरीजों को समय पर उपचार तक पहुंचाने में दिक्कत आती है।</p>
<p>अस्पताल प्रशासन ने पिछले कुछ समय में पुरानी बिल्डिंग से पर्ची काउंटर, जांच काउंटर और इमरजेंसी ओपीडी जैसी महत्वपूर्ण सेवाओं को नई बिल्डिंग में स्थानांतरित कर दिया है। इससे मरीजों को आधुनिक सुविधाओं का लाभ मिला है और एक ही स्थान पर अधिकांश सेवाएं उपलब्ध होने लगी हैं। लेकिन बारिश के दौरान नई बिल्डिंग के बाहर जलभराव होने से मरीजों को इन सुविधाओं तक पहुंचने में परेशानी उठानी पड़ती है। हालांकि पुरानी बिल्डिंग में अब मुख्य रूप से भर्ती मरीजों को रखा जाता है, लेकिन बारिश के मौसम में वहां भी सीलन, पानी टपकने और आसपास जलभराव जैसी समस्याएं सामने आती हैं।</p>
<p><strong>मोर्चरी तक पहुंचने वाला रास्ता बना सबसे बड़ी चिंता</strong><br />एमबीएस अस्पताल से मोर्चरी की ओर जाने वाला मार्ग लंबे समय से जर्जर हालत में है। सड़क जगह-जगह से उखड़ चुकी है और बड़े-बड़े गड्ढे बन चुके हैं। बारिश के दौरान इन गड्ढों में पानी भर जाता है, जिससे उनकी गहराई का अंदाजा लगाना भी मुश्किल हो जाता है। ऐसे में एंबुलेंस, शव वाहन, अस्पताल के अन्य वाहन और पैदल आने-जाने वाले लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। हालात इतने खराब हो जाते हैं कि कई बार मोर्चरी तक पहुंचना भी चुनौती बन जाता है। शव लेकर आने वाले परिजनों को भी कीचड़ और जलभराव के बीच से गुजरना पड़ता है। अस्पताल परिसर का यह मार्ग वर्षों से मरम्मत का इंतजार कर रहा है, लेकिन अब तक स्थायी समाधान नहीं हो सका है।</p>
<p>डॉक्टरों की सेवाएं और चिकित्सा सुविधाएं बेहतर हैं, लेकिन बारिश के मौसम में अस्पताल परिसर की स्थिति चिंता बढ़ा देती है।<br /><strong>-सुशिला बाई, मरीज</strong></p>
<p>- नई बिल्डिंग बनने से सुविधाएं तो बढ़ी हैं, लेकिन बारिश के समय बाहर पानी भर जाता है। बुजुर्ग और गंभीर मरीजों को अस्पताल तक पहुंचाने में काफी परेशानी होती है।<br /><strong>सुरज सिंह, मरीज</strong></p>
<p>सेंट्रल लैब और जांच काउंटर तक जाने में पानी और कीचड़ से होकर गुजरना पड़ता है। प्रशासन को ड्रेनेज व्यवस्था स्थायी रूप से सुधारनी चाहिए। मोर्चरी की सड़क इतनी खराब है कि बारिश में गड्ढे दिखाई ही नहीं देते। एंबुलेंस तक हिचकोले खाती हुई गुजरती है। अस्पताल परिसर की सड़कें जल्द से जल्द बनाई जानी चाहिए।<br /><strong>- श्वेता गुर्जर, मरीज</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मानसून को देखते हुए अस्पताल परिसर की सभी प्रमुख नालियों की सफाई करवाई जा रही है ताकि पानी की निकासी बाधित न हो। संबंधित विभागों को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं और लगातार निगरानी रखी जा रही है। उन्होंने बताया कि स्थायी समाधान के लिए केडीए को ड्रेनेज निर्माण का कार्य सौंप दिया गया है। फिलहाल वर्क ऑर्डर जारी होने की प्रक्रिया चल रही है। जैसे ही कार्यादेश मिलेगा, सबसे पहले अस्पताल परिसर में आधुनिक ड्रेनेज सिस्टम विकसित किया जाएगा। इसके बाद क्षतिग्रस्त और जर्जर सड़कों का पुनर्निर्माण कराया जाएगा, जिससे मरीजों और उनके परिजनों को राहत मिल सके।<br /><strong>- डॉ. आर.के. सिंह, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 09 Jul 2026 14:36:30 +0530</pubDate>
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                <title>ताकि पिकनिक पैनिक न बनें, रील्स से बनाएं दूरी</title>
                                    <description><![CDATA[ वन विभाग की चेतावनी: प्रतिबंधित क्षेत्रों में बिना अनुमति गए तो लगेगा 25 हजार का फटका।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/don-t-let-a-picnic-turn-into-a-panic--steer-clear-of-making--reels/article-159323"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की पहली फुहारों के साथ ही कोटा और पूरे हाड़ौती अंचल के प्राकृतिक पर्यटन स्थलों पर पर्यटकों और पिकनिक प्रेमियों की भीड़ उमड़ने लगी है। हालांकि हाडौती में मानसून अभी पुरी तरह से सक्रिय नहीं हुआ है लेकिन लोग वीकेंड पर परिवार और दोस्तों के साथ प्रकृति के बीच समय बिताने और पिकनिक की तैयारियों में जुट गए हैं। इस मस्ती के बीच जरा सी लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है।अक्सर देखा जाता है कि लोग सेल्फी, इंस्टाग्राम रील्स और लाइव वीडियो बनाने के चक्कर में इतने मशगूल हो जाते हैं कि अपनी सुरक्षा और एहतियात पूरी तरह भूल बैठते हैं। रील्स का यह नशा हादसों का सबसे बड़ा कारण बन रहा है।</p>
<p>सुरक्षा के लिहाज से वन विभाग और स्थानीय प्रशासन ने कई खतरनाक और संवेदनशील प्राकृतिक स्थलों को पूरी तरह से प्रतिबंधित (नो-एंट्री ज़ोन) घोषित कर दिया है। वन विभाग ने इस मानसून सीजन में अवैध एंट्री करने वालों के खिलाफ सख्त कदम उठाए हैं। किसी भी प्रतिबंधित वन क्षेत्र में बिना अनुमति अवैध प्रवेश करने पर 25 हजार तक का जुर्माना वसूला जाएगा। शाम 6 बजे के बाद या अंधेरा होने पर यदि कोई इन प्रतिबंधित क्षेत्रों में घूमता हुआ पाया गया, तो उसे गिरफ्तार कर सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p><strong>'तीसरी आंख' (कैमरा ट्रैप) से निगरानी</strong><br />वन विभाग ने जंगल के संकरे और गुप्त रास्तों पर कैमरा ट्रैप और गश्ती दल तैनात किए हैं। जैसे ही कोई व्यक्ति अवैध रूप से प्रवेश करता है, उसकी तस्वीर कैमरे में कैद हो जाती है।</p>
<p><strong>पूरी तरह प्रतिबंधित स्थल</strong><br />भंवरकुंज: वन विभाग ने यहाँ पौधारोपण कर इसे पूरी तरह बंद कर दिया है।<br />गेपरनाथ: यहाँ वन विभाग की चौकी है; यह आम दिनों में बंद रहता है और केवल सावन में दर्शनार्थियों के लिए सशर्त खोला जाता है।<br />नाहरसिंह माताजी: रावतभाटा रोड स्थित इस क्षेत्र में बाघों (टाइगर) का मूवमेंट होने और सुरक्षा कारणों से प्रवेश वर्जित है।</p>
<p><strong>इन पिकनिक स्थलों पर लौटेगी रौनक</strong><br /><strong>1. पाड़ाझर वॉटरफॉल (भैंसरोड़गढ़)</strong><br />कोटा से लगभग 65 किमी दूर स्थित भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य के जंगलों में स्थित 35 मीटर ऊँचा प्राकृतिक झरना और प्राचीन पाड़ाझर महादेव मंदिर जानेे के लिए भैंसरोड़गढ़ अभयारण्य क्षेत्र होकर जाया जाता है। यह स्थान एडवेंचर और आउटरीच केम्पेन के लिये ज्यादा फैमस है। यहां केवल निजी साधन से ही पहुचां जा सकता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />यहाँ कोई दुकानें नहीं हैं, खाना-पानी साथ लाएँ। रास्ता कच्चा व फिसलन भरा है। यहां ज्यादा बरसात के दिनों मे रास्तें में बाईक खराब होने के अलावा छिपने की कोई जगह नहीं होना भी बड़ी परेशानी का कारण हो सकता है।<br />जंगली जानवरों का आवास होने से दिन के समय समूह में ही जाना सुरक्षित है।<br /><strong>2. चट्टानेश्वर महादेव</strong><br />कोटा से लगभग 25 किमी दूर केबलनगर के पास अरावली पहाड़ियों के बीच बहता झरने के पास स्थित है। प्राचीन शिव प्रतिमा और लगभग 3600 वर्ष पुराने प्रागैतिहासिक शैलचित्रों काे देखने के लिये यहां वर्षपर्यन्त लोग आते है। लेकिन बरसात के मौसम में यह स्थल पुरी तरह पिकनिक स्पाॅट बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />एनीकट पर काई जमने से भारी फिसलन रहती है। यहाँ घुटनों तक दलदल व कीचड़ होने से हादसे होते हैं, इसलिए पानी में गहराई तक जाने से बचें।<br /><strong>3. आलनिया डैम</strong><br />कोटा-झालावाड़ रोड़ पर शहर से 25 किमी की दूरी पर शांत जलराशि, शानदार सूर्यास्त (सनसेट) और मानसून में बांध पर चलने वाली चादर प्रकृति प्रेमियाें के साथ साथ परिवार के साथ पिकनिक मनाने वाले लोगों के लिये मुफीद स्थान है।<br /><strong>4. बरधा बांध</strong><br />कोटा से बूंदी मार्ग पर स्थित लगभग 35 किमी की सडक दुरी पर स्थित 'हाड़ौती का मिनी गोवा' के नाम से जाने जाने वाला यह स्थल मानसून में हाडौती के लोगों के लिये किसी बीच से कम नहीं । बांध की 4 फीट चौड़ी दीवार पर चढ़कर लोग वहां से गिरते पानी के बीच खडे होकर फोटाे खिंचवाते है। 22 फीट की ऊंचाई से गिरते पानी के नीचे नहाने का आनन्द लेने की हाेड़ में उमडता लोगों का हुजुम किसी समुद्री किनारें जमा हुई भीड़ का नजारा बन जाता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानियां</strong><br />यहां आसपास गांव होने से खाने पीने की दुकाने मिल जाती है। दीवार पर फिसलन और कीचड़ के कारण बहने का खतरा रहता है। यहाँ सुरक्षा के लिए एसडीआरएफ की टीम तैनात रहती है।<br /><strong>5. रामेश्वरम् महादेव (बूंदी)</strong><br />शहर से 60 कि. मी. दुर रामेश्वरम् महादेव पहाड़ों की कंदरा में स्थित प्राकृतिक गुफा मंदिर है। जहाँ स्वयंभू शिवलिंग पर निरंतर जलधारा से साक्षात जलाभिषेक होता है।<br /><strong>सुविधाएं व सावधानी</strong><br />धार्मिक आस्था का बड़ा केंद्र। गुफा और सीढ़ियों में नमी व फिसलन से सतर्क रहें।</p>
<p><strong>आपात स्थिति में काम आएगा मोबाइल</strong><br />मानसून में पिकनिक पर जाते समय मोबाइल आपदा के समय मदद बुलाने में बहुत काम आता है, बशर्ते इसका इस्तेमाल रील्स बनाने की जगह सतर्कता के लिए किया जाए। हाड़ौती के अधिकांश पिकनिक स्पॉट्स घने जंगलों या घाटियों में स्थित हैं, जहाँ नेटवर्क गायब हो जाता है। ऐसे में पिकनिक पर निकलते समय अपने साथ इमरजेंसी किट और एहतियात अवश्य रखें। पिछले दिनों देखने में आया है कि लोग ऐसी जगहों पर जहां खड़े रहना तक मुश्किल हो वहां जाकर रील्स बना रहे है। फिसलन वाली जगहों पर या पीछे गहरा पानी, झरना, या बैकग्राउण्ड़ दिखानेे के चक्कर में लोगों ने खतरें को कई गुणा बढ़ा दिया था। रील्स बनाते समय व्यक्ति में एकाग्रता व संतुलन के साथ साथ सुरक्षा के प्रति भारी उपेक्षा ही हादसों का कारण बनती है।<br /><strong>-विष्णु श्रृंगी, गोताखाेर नगर निगम कोटा</strong></p>
<p><strong>आपदा प्रबंधन और रेस्क्यू टीमें मुस्तैद</strong><br />सिविल डिफेंस और एसडीआरएफ (SDRF) की टीमों को मानसून के दौरान भंवरकुंज, गेपरनाथ, अलनिया और बरधा डैम जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में मुस्तैद किया गया है। प्रशासन ने आमजन से अपील की है कि वे केवल अधिकृत व सुरक्षित स्थानों पर ही पर्यटन का आनंद लें और मानसून की मस्ती में अपनी सुरक्षा का ध्यान प्राथमिकता से रखें।<br /><strong>- राकेश व्यास, उपायुक्त, नगर निगम</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हमारे द्वारा सभी संभावित खतरें वाले स्थानों काे चिन्हित करके वहां लगातार निगरानी की जाती है। पिकनिक सींजन में सभी एंट्री पर आधुनिक ट्रेकिंग सिस्टम एक्टिव रहता है। आमजन से अपील है कि केवल स्वीकृति प्राप्त स्थानों पर ही जायें व रील्स व आदि के लिये खतरे व पानी से दुरी बनाये रखें।<br /><strong>-मुथू एस, डीसीएफ मुकून्दरा हिल्स एण्ड़ टाईगर रिजर्व</strong></p>
<p>पिकनिक के दौरान बरसात या बाहर के पानी में नहाने से आपके शरीर को इन्फेक्शन हो सकता है। इसलिये घर पर आकर दौबारा से साफ पानी से नहायें ध्यान रहे पानी साफ ही पियें जिससे पानी जनित बिमारी न हो। मेडिकल फर्स्ट एड के अलावा जरूरी दवाईया अवश्य साथ रखें।<br /><strong>- डॉ. चन्द्रप्रकाश कलवार, चिकित्सा प्रभारी (क्रिटिकल केयर) सीएचसी कुन्हाड़ी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <title>गड्ढे और मवेशी = बरसात में खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[गड्ढों में हिचकोले व मवेशियों  से दुर्घटना की संभावना
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/potholes-and-cattle---danger-during-the-rainy-season/article-159244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)23.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । बरसात का सीजन शुरु हो गया है। ऐसे में सड़कों पर हो रहे गड्ढ़े और मवेशियों का जमघट खतरा बने हुए हैं।मानसून ने तो दस्तक दे दी है। लेकिन अभी तक तेज बरसात नहीं हुई है। उससे पहले ही शहर की सड़कों पर बीच में बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। अभी तो ये गड्ढ़े नजर भी आ रहे हैं। लेकिन बरसात के समय में इनमें पानी भरने पर एक ओर जहां इनकी गहराई नजर नहीं आएगी। वहीं दूसरी तरफ बरसाती पानी भरने से ये गड्ढ़े और बड़ा रूप लेकर लोगों के लिए हादसों का खतरा बन जाएंगे। वहीं रात के समय अंधेरा होने पर तो ये नजर भी नहीं आएंगे। जिससे दुर्घटनाओं की संभावना अधिक हो जाएगी।</p>
<p>सीएडी से दादाबाड़ी के बीच नए बने एलबीएस मार्ग पर बीच सड़क काफी बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। बरसाती पानी भरने से इनका आकार बढ़ता जा रहा है। आने वाले समय में ये और भी बड़े हो सकते हैं। इसी तरह से दादाबाड़ी छोटा चौराहे के पास मेन रोड पर बड़ा गड्ढ़ा है। जिस पर से दो पहिया ही नहीं चार पहिया वाहन तक हिचकलो खाते हुए निकल रहे हैं। इसी तरह सरोवर टॉकीज के सामने स्थित मंदिर के पीछे व तालाब के किनारे की सड़क का काद्दफी हिस्सा खस्ताहाल हो रहा है। जिससे वहां से चार पहिया वाहन तक निकलते समय असंतुलित हो रहे हैं। जिससे अभी हादसों का खतरा बना हुआ है। जबकि बरसात में यहां हालत अधिक खराब होने से लोगों के लिए जान जोखिम में डालने वाले साबित हो जाएंगे।<br />चम्बल की बड़ी पुलिया पर महाराणा प्रताप सर्किल के पास भी कई जगह पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो रहे हैं। शहर में ऐसी कई और भी जगह हहैं जहां मेन रोड की हालत ही खराब हो रही है। जबकि गली मौहल्लों की सड़कों की हालत तो बदतर स्थिति में है।</p>
<p><strong>बरसात में बढ़ा मवेशियों का जमघट</strong><br />शहर को कैटल फ्री बनाने की दिशा में किया गया प्रयास अभी तक साकार नहीं हो पाया है। हालत यह है कि अभी भी मुख्य मार्गों पर निराक्षित मवेशियों के जमघट लगे हुए देखे जा सकते हैं। किशोरपुरा थाने के सामने का क्षेत्र हो या दादाबाड़ी का। डीसीएम रोड पर नई धानमंडी मेन रोड का क्षेत्र हो या नयापुरा में एमबीएस रोड। हर जगह पर दिन हो या रात बीच राह में मवेशियों का जमघट लगा रहता है। ऐसे में बरसात के समय में ये हादसों का कारण बन सकते हैं। तेजी से आते वाहनों की चकाचौंथ रोशनी में बरसाती पानी के कारण ये मवेशी दूर से नजर नहीं आने पर दुर्घटनाओं का कारण बन सकते हैं। हालांकि कुछ समय से मवेशी कम नजर आ रहे थे। लेकिन बरसाती सीजन शुरु होने के साथ ही ये बीच राह सड़कों पर फिर से नजर आने लगे हैं।</p>
<p><strong>बरसात से पहले सही करवाएंगे गड्ढ़े</strong><br />कोटा विकास प्राधिकरण के अधिकारियों का कहना है कि समय-समय पर सड़कों के गड्ढ़ों को पेचवर्क के माध्यम से सही कराया गया है। अभी भी जहां गड्ढ़े अधिक खतरनाक होंगे उन्हें बरसात शुरु होने से पहले सही करवा दिया जाएगा।</p>
<p>वहीं निगम अधिकारियों का कहना है कि सड़कों से मवेशियों को लगातार पकड़ा जा रहा है। बरसात में लोग इन्हें पशु पालक खुला छोड़ देते हैं। जिससे ये सड़कों पर अधिक नजर आते हैं। फिर भी जहां अधिक मवेशी होंगे और हादसों का खतरा रहेगा उन्हें भी पकड़ा जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:48:15 +0530</pubDate>
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                <title>छह मोबाइल वैन के भरोसे लाखों मवेशी</title>
                                    <description><![CDATA[एक एक वैन पर कई गांवों का बोझ, समय पर उपचार करने में आ रही दिक्कत।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/lakhs-of-cattle-dependent-on-just-six-mobile-vans/article-159243"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)14.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कृषि के साथ पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है, लेकिन कोटा जिले में पशुओं की सेहत खुद बदहाल व्यवस्था के भरोसे चल रही है। जिले के हजारों गांवों और लाखों मवेशियों के उपचार की जिम्मेदारी केवल छह मोबाइल पशु चिकित्सा वैन पर टिकी हुई है। ऐसे में जब एक साथ कई गांवों से शिकायतें आती हैं तो वैन समय पर नहीं पहुंच पाती। इसका खामियाजा पशुपालकों को आर्थिक नुकसान और पशुओं को समय पर इलाज नहीं मिलने के रूप में भुगतना पड़ रहा है। ग्रामीण क्षेत्रों में गाय, भैंस, बकरी और अन्य पशु परिवार की आय का प्रमुख स्रोत हैं। दूध उत्पादन, खेती और पशुपालन से जुड़ी आजीविका इन्हीं पर निर्भर है। ऐसे में यदि पशु बीमार हो जाए तो उसके उपचार में हुई थोड़ी-सी देरी भी पशुपालक के लिए भारी पड़ सकती है। कई मामलों में गंभीर रूप से बीमार पशुओं को समय पर उपचार नहीं मिलने से उनकी मौत तक हो जाती है।</p>
<p><strong>पशुपालकों को करना पड़ता इंतजार</strong><br />सरकार ने ग्रामीण क्षेत्रों में पशुओं के उपचार के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा वैन की सुविधा शुरू की थी ताकि चिकित्सक गांव-गांव जाकर उपचार कर सकें, लेकिन कोटा जिले में केवल छह वैन होने के कारण प्रत्येक वैन को प्रतिदिन कई गांवों में दौड़ लगानी पड़ती है। शिकायतों की संख्या अधिक होने से कई पशुपालकों को घंटों इंतजार करना पड़ता है, जबकि कई मामलों में अगले दिन तक नंबर आता है। दूर-दराज के गांवों में खराब सड़कें और लंबी दूरी भी बड़ी चुनौती बनी हुई हैं। एक गांव से दूसरे गांव तक पहुंचने में काफी समय लग जाता है। यदि बीच में कोई गंभीर आपातकालीन मामला आ जाए तो पहले से दर्ज शिकायतों का निस्तारण और अधिक देर से हो पाता है।</p>
<p><strong>बरसात में और बिगड़ जाती है स्थिति</strong><br />मानसून के दौरान हालात और अधिक चुनौतीपूर्ण हो जाते हैं। कच्चे रास्तों पर कीचड़ और जलभराव के कारण मोबाइल वैन को कई गांवों तक पहुंचने में दिक्कत होती है। ऐसे समय में पशुओं में संक्रमण और मौसमी बीमारियां भी बढ़ जाती हैं, जिससे शिकायतों का दबाव और बढ़ जाता है। पशुपालकों का कहना है कि सरकार ने सुविधा तो शुरू की, लेकिन संसाधन पर्याप्त नहीं बढ़ाए। पशुओं की संख्या लगातार बढ़ रही है, जबकि मोबाइल वैन की संख्या वर्षों से लगभग स्थिर बनी हुई है। उनका कहना है कि प्रत्येक तहसील में अलग-अलग मोबाइल पशु चिकित्सा वैन उपलब्ध कराई जाए ताकि उपचार समय पर मिल सके।</p>
<p><strong>कोटा जिले में पशुओं की संख्या</strong><br />गाय-216343<br />भैंस-240628<br />भेड़-22434<br />बकरी-137387<br />घोड़ा-534<br />सूअर-6619<br />ऊंट-1862<br />बंदर-286<br />कुल पशु-626093</p>
<p>कई बार सुबह शिकायत दर्ज कराते हैं, लेकिन वैन शाम तक पहुंचती है। गंभीर बीमारी होने पर इतनी देर इंतजार करना मुश्किल हो जाता है। दूध देने वाली भैंस बीमार हो जाए तो रोजाना नुकसान होता है। सरकार को गांवों की संख्या के हिसाब से और मोबाइल वैन उपलब्ध करानी चाहिए।"<br /><strong>-रामलाल मीणा, पशुपालक, चेचट</strong></p>
<p>चेचट और रामगंजमंडी तहसील में दर्जनों गांव आते हैं। इनके लिए केवल एक ही मोबाइल वैन संचालित की जा रही है। गांवों के बीच दूरी अधिक होने से प्रतिदिन केवल चार से पांच स्थानों पर ही पहुंचा जा सकता है। जबकि शिकायतों की संख्या रोजाना करीब दस तक रहती है।<br /><strong>-डॉ. दीपक मीणा, पशु चिकित्सक, मोबाइल वैन </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jul 2026 16:43:34 +0530</pubDate>
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                            </item>
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                <title>हादसों के बाद भी नहीं सुधरे हालात</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में मकानों के ऊपर व पास से निकल रही हैं हाइटेंशन लाइनें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/conditions-remain-unchanged-despite-accidents/article-159102"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा ।  <strong>केस एक:</strong> अनंतपुरा थाना क्षेत्र स्थित बरड़ा बस्ती में एक दिन पहले हाइटेंशन लाइन का इंसुलेटर टूटने से फेले करेंट से एक महिला की मौत हो गई और करीब 10 लोग बुरी तरह से झुलस गए। वहीं हादसे में दो गायों की भी मौत हो गई।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र स्थित काली बस्ती में मार्च 2024 में धार्मिक यात्रा के दौरान झंडा हाईटेंशन लाइन से छू जाने के कारण लगे करेंट से करीब एक दर्जन लोग झुलस गए थे। हादसे में तीन लोगों की मौत भी हो गई थी।</p>
<p><strong>केस तीन:</strong> कुन्हाड़ी थाना क्षेत्र के सकतपुरा काली बस्ती में ही जुलाई 2025 में छत पर कपड़े सुखाते समय करंट लगने से एक महिला की मौत हो गई थी। वहीं महिला को बचाने के प्रयास में उनके पति भी करंट लगने से झुुलस गए थे।</p>
<p>ये तो कुछ उदाहरण मात्र हैं। उन घटनाओं व हादसों को बताने के लिए जो हाइटेंशन लाइनों के कारण हुए हैं। शहर में ऐसे कई मामले हो चुके हैं। पिछले करीब दो साल में ही आधा दर्जन से अधिक मामले हाइटेंशन लाइनों से करंट लगने के हो चुके हैं। जिनमें करीब 10 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और दर्जनों लोग झुलस चुके हैं। इतना सब कुछ होने के बावजूद अभी तक भी हालात नहीं सुधरे हैं। अभी भी शहर के इलाके हो या आस-पास के ग्रामीण इलाके। वहां मकानों के ऊपर व पास से 33 केबी व 11 केबी की हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। जिनसे रोजाना हजारों लोगों की जान खतरे में है। उसके बाद भी न तो ये लाइनें शिफ्ट हो रही हैं और न ही लोग वहां से हट रहे हैं। नतीजा हजारों लोगों के सिर पर रोजाना जान का खतरा मंडरा रहा है।</p>
<p><strong>हर जगह है हाइटेंशन लाइनें</strong><br />शहर के इलाके हो या ग्रामीण क्षेत्र के हाइटेंशन लाइनें हर जगह पर है। फिर चाहे वह अनंतपुरा स्थित बरड़ा बस्ती हो या शिवपुरा क्षेत्र। दादाबाड़ी का वक्फ नगर हो या कुन्हाड़ी का नांता क्षेत्र। इतना ही नहीं डीसीएम क्षेत्र के प्रेम नगर व गोविंद नगर या काली बस्ती। रेलवे कॉलोनी, भीमगंजमंडी, नयापुरा, पाटनपोल समेत शहर के सभी क्षेत्रों में हाइटेंशन लाइनें गुजर रही है। इनमें से अधिकतर जगह पर ये लाइनें मकानों के ऊपर से व मकानों के नजदीक से गुजर रही हैं।</p>
<p><strong>बरसात में अधिक खतरा</strong><br />हाइटेंशन लाइन से हर समय खतरा है। इन लाइटों में इतना अधिक करंट होता है कि वह करीब 3 से साढ़े तीन फीट से कम की दूरी पर लोगों को अपनी चपेट में ले सकते हैं। ऐसे में जिन घरों के ऊपर व पास से ये लाइनें गुजर रही हैं उनके लिए बरसात में खतरा अधिक है। बरसात के समय ऐसी जगह पर करंट फेलने व करंट लगने की घटनाएं अधिक होने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>ऊर्जा मंत्री ने दिए थे लाइन शिफ्ट करने के निर्देश</strong><br />करीब दो साल पहले सकतपुरा की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइन से हुए हादसे में तीन लोगों की मौत व एक दर्जन लोगों के झुलसने की घटना के बाद मौके पर पहुंचे ऊर्जा मंत्री हीरालाल नगर ने यहां से हाइटेंशन लाइनें शिफ्ट करने के आदेश दिए थे। लोगों का कहना है कि अभी तक भी वहां से लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। ऐसा एक ही जगह पर नहीं कई जगह पर है लेकिन लाइनें वहीं के वहीं है।</p>
<p><strong>खतरनाक लाइनें हों शिफ्ट</strong><br />लोगों का कहना है कि हाइटेंशन लाइनों से आए दिन हादसे हो रहे हैं। ऐसे में इन खतरनाक लाइनों को शिफ्ट किया जाना चाहिए। कुन्हाड़ी निवासी मोहन सिंह सोलंकी का कहना है कि नदी पार क्षेत्र की काली बस्ती में हाइटेंशन लाइनों से कई बार हादसे हो चुके हैं उसके बाद भी लाइनें शिफ्ट नहीं हुई है। जबकि चाहे मकान बाद में बने हों लेकिन हाइटेंशन लाइनों को शिफ्ट करना बिजली विभाग का काम है। शिवपुरा निवासी महेश कुमार नागर का कहना है कि हाइटेंशन लाइनें शहर से दूर व आबादी क्षेत्र से नहीं गुजरनी चाहिए। हालांकि कई लोगों ने मकान बाद में बनाए जिससे लाइनें उनके मकान के पास से निकल रही है। लेकिन मकान बनने के बाद जब लोग वहां रहने लगे हैं तो उन लाइनों को शिफ्ट करने के प्रयास किए जाएं। जिससे लोगों की जान को खतरा नहीं हो।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />लोगों को लाइट की सुविधा चाहिए तो इसके लिए जीएसएस से ट्रांसफार्मर तक लाइट हाइटेंशन के माध्यम से ही आती है। बिना हाइटेंशन के लाइट की सुविधा निर्बाध रूप से मिलना मुश्किल है। लेकिन हाइटेंशन लाइनें पहले डली हुई है। लोगों ने मकान बाद में बनाए हैं। जिससे वे लाइनों के नजदीक पहुंचे है। अनंतपुरा की बरड़ा बस्ती में अवैध खनन के कारण इंसुलेटर टूटने से हादसा हुआ है। हाइटेंशन लाइनों से एक निर्धारित मानक दूरी बनाए रखना आवश्यक है। विभाग की ओर से समय-समय पर लोगों को नोटिस व चेतावनी दी जाती है। लेकिन उसके बाद भी जहां अधिक लोगों के जानमाल को नुकसान का खतरा रहता है। वहां से अन्य स्थानों पर हाइटेंशन लाइन शिफ्ट की जा सकती है। लेकिन उसका आधा खर्चा लोगों को वहन करना होता है। साथ ही लाइन के साथ ही खम्बे शिफ्ट करने की जगह भी होनी चाहिए। पूर्व में कई जगह पर ऐसा किया भी गया है।<br /><strong>- शिवचरण जांगिड़, अधीक्षण अभियंता जेवीवीएनएल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:29:55 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>खिलाड़ियों के सपनों पर बदहाल मैदान मार रहे किक : खेल प्रतिभाओं को नहीं मिल रहा 'होम ग्राउंड'</title>
                                    <description><![CDATA[प्रतिभाओं को अवसर नहीं मिला तो सपने भी अधूरे रह जाएंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/dilapidated-grounds-are-crushing-players--dreams--sporting-talent-lacks-a--home-ground/article-159101"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)15.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । देश में फुटबॉल के प्रति बढ़ते उत्साह और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय खिलाड़ियों के प्रदर्शन के बावजूद कोटा शहर में फुटबॉल की बुनियादी सुविधाएं आज भी गंभीर संकट से जूझ रही हैं। शहर में खेल मानकों के अनुरूप एक भी ऐसा फुटबॉल मैदान नहीं है, जहां राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिताएं आयोजित कराई जा सकें। मैदानों की बदहाल स्थिति, सीमित संसाधन और खेल सुविधाओं के अभाव का सीधा असर उभरती प्रतिभाओं पर पड़ रहा है। शहर में करीब चार से पांच ऐसे मैदान हैं जहां फुटबॉल खेली जा सकती है, लेकिन अधिकांश मैदान जर्जर अवस्था में हैं। सबसे अधिक चिंता का विषय वोकेशनल ग्राउंड है, जिसकी हालत पिछले करीब दो वर्षों से खराब बनी हुई है। यही वह मैदान है, जहां से कभी अंतरराष्ट्रीय स्तर तक पहुंचे खिलाड़ियों ने अपने खेल की शुरुआत की थी। आज उसी मैदान पर गड्ढे, उबड़-खाबड़ सतह और अव्यवस्थाओं के कारण नियमित अभ्यास तक मुश्किल हो गया है।</p>
<p><strong>एक मैदान पर कई खेल, खिलाड़ियों की तैयारी पर पड़ रहा असर</strong><br />शहर के नयापुरा स्थित उम्मेद सिंह स्टेडियम और श्रीनाथपुरम स्टेडियम में फुटबॉल खिलाड़ी अभ्यास तो करते हैं, लेकिन इन मैदानों पर अन्य खेलों के खिलाड़ी भी अभ्यास करते हैं। इसके अलावा समय-समय पर आयोजित होने वाले सामाजिक एवं सरकारी कार्यक्रमों के कारण मैदान कई दिनों तक खिलाड़ियों के लिए उपलब्ध नहीं रह पाते। ऐसे में फुटबॉल खिलाड़ियों को नियमित अभ्यास का अवसर नहीं मिल पाता। शहर में सरकारी स्तर पर महिला वर्ग के दो और पुरुष वर्ग के सात से आठ फुटबॉल कोच कार्यरत हैं, जबकि निजी स्तर पर भी आठ से दस कोच खिलाड़ियों को प्रशिक्षण दे रहे हैं। बावजूद इसके खिलाड़ियों के लिए समुचित खेल मैदान और आधुनिक सुविधाओं वाली सरकारी फुटबॉल अकादमी का अभाव दिखाई देता है।</p>
<p><strong>सुविधाओं के अभाव में घट रहा रुझान, राष्ट्रीय प्रतियोगिताओं का सपना अधूरा</strong><br />खेल विशेषज्ञों का मानना है कि फुटबॉल ऐसा खेल है जो बच्चों में टीम भावना, अनुशासन, नेतृत्व क्षमता और शारीरिक फिटनेस विकसित करता है। लेकिन शहर में सुविधाओं के अभाव के कारण बच्चों का रुझान धीरे-धीरे व्यक्तिगत खेलों की ओर बढ़ने लगता है। कई प्रतिभाशाली खिलाड़ी बेहतर सुविधाओं की तलाश में दूसरे शहरों का रुख करने को मजबूर हो रहे हैं। वर्तमान में कोटा में ऐसा कोई मैदान उपलब्ध नहीं है, जहां राष्ट्रीय स्तर की फुटबॉल प्रतियोगिता आयोजित कराई जा सके। यदि खेल अवसंरचना को समय रहते विकसित नहीं किया गया तो शहर की प्रतिभाएं आगे बढ़ने से पहले ही संसाधनों के अभाव में दम तोड़ देंगी।</p>
<p><strong>खेल मानकों के अनुरूप एक भी फुटबॉल मैदान नहीं</strong><br />-4–5 मैदान हैं, लेकिन अधिकांश जर्जर हालत में।<br />-वोकेशनल ग्राउंड करीब 2 साल से बदहाल।<br />-राष्ट्रीय स्तर की प्रतियोगिता कराने लायक मैदान का अभाव।<br />-सरकारी फुटबॉल अकादमी नहीं।<br />-लड़कों के लिए केवल हॉस्टल, सुविधाएं सीमित।<br />-महिला वर्ग के 2 और पुरुष वर्ग के 7–8 सरकारी कोच।<br />-8–10 निजी कोच खिलाड़ियों को दे रहे प्रशिक्षण।<br />-एक ही मैदान पर कई खेल और अन्य कार्यक्रम होने से अभ्यास प्रभावित।</p>
<p><strong>खिलाड़ी बोले...</strong><br />बारिश के बाद मैदानों की स्थिति इतनी खराब हो जाती है कि कई दिनों तक अभ्यास नहीं हो पाता। अच्छी सुविधाएं मिलें तो हम भी बड़े स्तर पर शहर का नाम रोशन कर सकते हैं।<br /><strong>- हर्षित शर्मा, युवा फुटबॉल खिलाड़ी</strong></p>
<p>प्रतियोगिताओं से पहले नियमित अभ्यास सबसे जरूरी होता है, लेकिन मैदान उपलब्ध नहीं होने से हमारी तैयारी प्रभावित होती है।<br /><strong>-आदित्य मीणा, खिलाड़ी</strong></p>
<p>कोटा शिक्षा नगरी के साथ खेल नगरी भी बन सकता है, लेकिन इसके लिए आधुनिक फुटबॉल मैदान और खेल सुविधाओं का विकास जरूरी है। जब तक खिलाड़ियों को बेहतर मैदान और सुविधाएं नहीं मिलेंगी, तब तक शहर से राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के फुटबॉलर तैयार करना मुश्किल होगा। खेलों में निवेश भविष्य की पीढ़ी में निवेश है। जरूरत इस बात की है कि खेल मैदानों को केवल जमीन का टुकड़ा नहीं, बल्कि प्रतिभाओं की प्रयोगशाला माना जाए। यदि प्रशासन और सरकार समय रहते फुटबॉल मैदानों का विकास, आधुनिक सुविधाएं और समर्पित अकादमी उपलब्ध कराएं तो कोटा की धरती एक बार फिर राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर के बहतरिन फुटबॉल खिलाड़ी तैयार कर सकती है।<br /><strong>-राहुल शर्मा, खेल प्रेमी</strong></p>
<p>लड़कों के लिए केवल हॉस्टल की व्यवस्था है, लेकिन सरकारी फुटबॉल अकादमी नहीं है। हॉस्टल परिसर में बना फुटबॉल मैदान भी पिछले दो वर्षों से खराब स्थिति में है। कई बार संबंधित अधिकारियों को अवगत कराया गया, लेकिन आज तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हुई। यदि मैदान विकसित हो जाए तो शहर से राष्ट्रीय स्तर के और अधिक खिलाड़ी तैयार हो सकते हैं।<br /><strong>-तीरथ सांगा, जिला फुटबॉल संघ सचिव</strong></p>
<p>शहर में मैदान तो हैं, लेकिन किसी की भी स्थिति खेल योग्य नहीं है। बड़े मैदानों पर कई खेल एक साथ संचालित होते हैं, जिससे फुटबॉल का नियमित अभ्यास प्रभावित होता है। फुटबॉल टीम गेम है और इसके लिए समर्पित मैदान की आवश्यकता होती है।<br /><strong>-मीनू सोलंकी, सरकारी फुटबॉल कोच</strong></p>
<p>शहर में फुटबॉल खिलाड़ियों के लिए खेल मानकों के अनुरूप मैदान उपलब्ध नहीं है। खेल विभाग के अधीन एक भी खेल मैदान नहीं है। शहर के अधिकांश मैदान या तो यूआईटी (नगर विकास न्यास) अथवा नगर निगम के अधिकार क्षेत्र में आते हैं। इस समस्या को लेकर संबंधित अधिकारियों से कई बार आग्रह किया जा चुका है, लेकिन अब तक कोई ठोस समाधान नहीं निकल पाया है। मैदानों के अभाव में खिलाड़ियों को लगातार परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है, हालांकि विभाग इस दिशा में लगातार प्रयासरत है।<br /><strong>-वाई बी सिंह, जिला खेल अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Jul 2026 14:18:53 +0530</pubDate>
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                <title>बारिश के बाद महाराज ब्रजराज सिंह स्टेडियम में भरा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[खेल गतिविधियां प्रभावित, खिलाड़ियों ने की स्थायी निकासी व्यवस्था की मांग।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-maharaj-brajraj-singh-stadium-following-rainfall/article-159008"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)4.png" alt=""></a><br /><p>बपावरकलां। क्षेत्र में हुई अच्छी बारिश के बाद महाराज ब्रजराज सिंह स्टेडियम में जलभराव की स्थिति बन गई है। मैदान में कई स्थानों पर पानी भर जाने से खेल गतिविधियां प्रभावित हो रही हैं और खिलाड़ियों को अभ्यास करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।बारिश के कारण स्टेडियम परिसर में पानी जमा होने से निर्माण कार्य भी प्रभावित हुआ है। स्थानीय लोगों का कहना है कि हर वर्ष बरसात के दौरान स्टेडियम में जलभराव की समस्या सामने आती है, जिससे खिलाड़ियों के साथ-साथ आमजन को भी असुविधा होती है। ग्रामीणों ने संबंधित विभाग एवं ग्राम पंचायत से पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था करने की मांग की है, ताकि भविष्य में बारिश के दौरान खेल गतिविधियां बाधित न हों।</p>
<p>अधिक बारिश होने के कारण स्टेडियम में पानी भर गया है। जल्द ही पानी की निकासी की स्थायी व्यवस्था जाएगी, की ताकि भविष्य में इस तरह की समस्या दोबारा उत्पन्नं नहो।<br /><strong>- मुरलीधर वैष्णव, ग्राम विकास अधिकारी, बपावरकलां </strong></p>
<p>स्टेडियम में जल निकासी की व्यवस्था शीघ्र कर दी जाएगी, जिससे बारिश का पानी मैदान में जमा नहीं होगा खिलाड़ियों को और नियमित अभ्यास के लिए बेहतर सुविधा मिल सकेगी।<br /><strong>- घनश्याम सुमन, ग्राम पंचायत प्रशासक, बपावरकलां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 15:20:20 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>मदद की राह में 90 डिग्री मोड़ से घिसटने को मजबूर 'आमीन'</title>
                                    <description><![CDATA[कागजों पर सुगम्य भारत, दिव्याशा केन्द्र में फर्श पर 62 फीट की यातना!
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-aamin--forced-to-drag-himself-along-the-ground-due-to-a-90-degree-turn-blocking-his-path-to-assistance/article-158996"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल परिसर स्थित 'प्रधानमंत्री दिव्याशा केंद्र', जिसका उद्देश्य दिव्यांगों के जीवन को सुगम बनाना और उन्हें सहायक उपकरण प्रदान करना है, वहां खुद दिव्यांगों के लिए एक बड़ी परेशानी पैदा हो रही है। केंद्र की दोषपूर्ण एंट्री और रैम्प के कारण, गुरुवार को अपनी इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल की मरम्मत की गुहार लगाने आए दिव्यांग अब्दुल आमीन को जो यातना झेलनी पड़ी, वह सिस्टम की नासमझी व संवेदनहीनता की पोल खोलती है। परिसर स्थित प्रधानमंत्री दिव्याशा केन्द्र पर सहायता के लिए जाने वाले दिव्यांगो मेन एंट्री के लिये बनायें गये रेम्प से ट्राई साईकिल को अन्दर ले जाने में परेशानी के कारण दिव्यांगों को गाडी से उतकर शरीर घिसटते हुए अन्दर तक जाना पड़ रहा है। आम जन बुजूर्ग, खास तौर पर दुर्घटना या जन्मजात विकृतियों से ग्रसित व्यक्तियों के जीवन में सामान्यता लाने व सुविधा हेतु उपकरण वितरित किये जाते है। यहां आने वाले लोगों की डिसएबीलिटी के सर्टिफिकेट, व असेसमेन्ट के आधार पर उन्हे आवश्यक उपकरण दिये जाते है।</p>
<p><strong>90 डिग्री का घुमाव बना मुसीबत</strong><br />अब्दुल आमीन अपनी इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल के पहिये में आए बेंड और टूटे स्पोक (ताड़ियां) की शिकायत करने केंद्र पहुंचे थे। लेकिन, केंद्र के मुख्य द्वार के बाहर बनी रेम्प व 90 डिग्री के तीखे घुमाव ने उनकी राह रोक दी। भारी-भरकम इलेक्ट्रिक ट्राईसाइकिल को इस संकरे और मुड़े हुए रास्ते से अंदर ले जाना नामुमकिन था। आमीन ने बताया, पहले भी गाड़ी अंदर ले जाने की कोशिश की थी, लेकिन बैटरी होने और तीखे मोड़ के कारण वह नहीं चढ़ पाई। बड़ी मुश्किल से किसी की मदद लेनी पड़ी थी। इसलिए अब गाड़ी बाहर सड़क पर ही छोड़कर आता हूँ।</p>
<p><strong>62 फीट घिसट कर लगाई गुहार</strong><br />रोड़ पर गाड़ी खडी करने के बाद अब्दुल ने 62 फीट की दुरी तय की तब जाकर केन्द्र प्रभारी जितेन्द्र कुमार को अपनी परेशानी सुना पाये।तस्वीरें गवाह हैं कि कैसे अब्दुल आमीन, जिनकी ट्राईसाइकिल बाहर खड़ी रह गई, अपनी शिकायत दर्ज कराने के लिए केंद्र की रैम्प पर हाथों के सहारे शरीर को घिसटते हुए आगे बढ़े। यह सफर आसान नहीं था। उन्हें सड़क से 12 फीट लंबी रैम्प, फिर 8 फीट का घुमाव, उसके बाद 22 फीट लंबा हॉल और अंत में इंचार्ज के कमरे तक 20 फीट की दूरी— कुल मिलाकर 62 फीट की दूरी घिसटकर तय करनी पड़ी। सुविधा केंद्र के फर्श पर घिसटता एक दिव्यांग, वहां मौजूद बैरिकेड्स और मुड़ी हुई रैम्प की व्यथा खुद बयां कर रहा था।</p>
<p><strong>आप की परेशानी सुनी, मै स्पोक मंगा दुंगा</strong><br />गाडी में आ रही मैकेनिकल परेशानी व स्पेयर की शिकायत सुनने के बाद केन्द्र प्रभारी ने अब्दुल से थोड़े दिन बाद स्पोक मंगवाने की बात कही स्पोक आने पर दुबारा आने की बात कहते हुए कहा कि यह सब स्पेयर आगे से मंंगाने पडेंगे। यहां हमारे पास तो नये सामान देने की परमिशन है। रिपेयरिंग व स्पेयर आर्डर पर ही आते है।<br /><strong>-अमीत कुमार केन्द्र प्रभारी</strong></p>
<p> मेरी साईकिल के पहिये का बेंड निकलवाने गया तो मिस्त्री बोला की इस साईज के स्पोक मार्केट मे नहीं मिल रहे है आपने जहां से साईकिल ली है वहीं से स्पेयर मंगवाले इसी लिये मै यहां आया था। मेरी गाडी को अन्दर जाने में परेशानी होती है। यह रेम्प सीधा होना चाहिये।<br /><strong>-अब्दुल आमीन, पीडित दिव्यांग</strong></p>
<p>प्रधानमंत्री दिव्याशा केन्द्र सेन्टर गर्वंमेन्ट का उपक्रम है हमारे कार्यक्षेत्र में नही आता है। फिर भी यदि दिव्यांगो की परेशानी है तो हम बात करेंगें। किसी भी ऑफिस तक व्हील चेयर की पहुंच आसानी से होनी चाहिये।<br /><strong>- कृष्णा सविया संयुक्त निदेशक सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 14:21:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाइटेंशन लाइन हादसे ने ली महिला की जान, 3 बच्चों समेत 9 लोग करंट से झुलसे</title>
                                    <description><![CDATA[अचानक 33 केवी हाइटेंशन लाइन का इंसुलेटर धमाके साथ टूटने से पोल के साथ जमीन और घरों में करंट दौड़ गया। इससे एक महिला सहित दो गायों की मौत हो गई तथा तीन बच्चों सहित नौ जने झुलस गए। महिला पुुरुष और बुजुर्ग शामिल। घायलों को न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/high-tension-line-accident-took-the-life-of-a-woman/article-158988"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। अनंतपुरा क्षेत्र के बरड़ा बस्ती में रविवार को अचानक 33 केवी हाइटेंशन लाइन का इंसुलेटर धमाके साथ टूटने से पोल के साथ जमीन और घरों में करंट दौड़ गया। इससे एक महिला सहित दो गायों की मौत हो गई तथा तीन बच्चों सहित नौ जने झुलस गए। जिनमें महिला पुुरुष और बुजुर्ग शामिल हैं। घायलों को न्यू मेडिकल कॉलेज अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अचानक बस्ती के घरों में करंट दौड़ने के बाद लोग घरों से निकलकर बाहर भागे और अपनी जान बचाई। गनीमत रही कि बरसात नहीं होने से जमीन गीली नहीं थी, जिससे यहां  हादसा होने से बच गया।  प्रत्यक्षदर्शी ने बताया कि दोपहर करीब साढ़े 12 बजे अचानक बरड़ा बस्ती में धमाके की आवाज आई।  तभी अचानक से घरों की दीवारों तथा लोहे के उपकरणो में करंट दौड़ गया और लोग जान बचाने के लिए घरों से निकलकर भागने लगे। वहां जमीन पर दो गाय झुलसी पड़ी थी और बाद में दोनों की मौत हो गई। घर में करंट आने से सलमा पत्नी आफाक की मौत हो गई। फाल्ट होने से बिजली बंद हो गई। </p>
<p><strong>इन्हें किया गया अस्पताल में भर्ती</strong><br />पुलिस निरीक्षक रमेश कविया ने बताया कि बरड़ा बस्ती में दो मकानों के ऊपर से एक 33 केवी की हाइटेंशन लाइन जा रही थी। इस दौरान हाइटेंशन लाइन का इंसुलेटर टूट गया और तार पोल से टकराकर जमीन पर आ गया। इस दौरान जमीन पर करंट आने से दो गायों और महिला सलमा की मौत हो गई। जबकि अरसिल (9) पुत्र अफाक, अफाक (33)पुत्र इशाक बेग, इशाक वेग (60) पुत्र कल्लू , नशीवन (50) पत्नी इशाक वेग, जोया (19)पुत्री समीर, आलिया (12) पुत्री समीर, सीमा (50) पत्नी राजू, अयोध्या बाई (49), भूरी बाई (25 ) पत्नी असफाक निवासी बरड़ा बस्ती को झुलसने पर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। जहां उनका उपचार चल रहा है </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jul 2026 13:27:17 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>असर खबर का : वन विभाग ने एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी को थमाया नोटिस, दर्ज की एफआईआर</title>
                                    <description><![CDATA[ विशेषज्ञ बोले-एफसीए कानून का उल्लंघन वन अफसरों की मिलीभगत का परिणाम।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-the-report--forest-department-issues-notice-to-airport-construction-agency-and-registers-an-fir/article-158837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/1200-x-600-px)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट की प्रत्यावर्तित जमीन के बाहर वन भूमि पर 50 विद्युत पोल लगाने व पत्थरों का भारी मात्रा में अवैध स्टॉक करने के मामले में शुक्रवार को वन विभाग हरकत में आ गया। विभाग ने एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी के खिलाफ नोटिस जारी कर दिया है। वहीं, क्षेत्रिय वन अधिकारी डाबी द्वितीय द्वारा वन अधिनियम में एफसीए उल्लंघन के मामले में एफआईआर कर केस दर्ज किया है। कार्रवाई से निर्माण एजेंसी में हड़कम्प मच गया। गौरतलब है कि बूंदी वन मंडल की डाबी रेंज के रामपुरिया नाका क्षेत्र स्थित जाखमुण्ड वनखंड में निर्माण एजेंसी द्वारा बिना अनुमति के वन भूमि पर विद्युत पोल लगवाए और जगह-जगह पत्थरों का स्टॉक कर वन अधिनियम 1980 का उल्लंघन किया। जिसका खुलासा गत 24 जून को डाबी सहायक वन संरक्षक द्वारा किए गए निरीक्षण के बाद जारी हुए निरीक्षण नोट से हुआ।</p>
<p><strong>मामला खुला तो मचा हड़कम्प</strong><br />दैनिक नवज्योति के 3 जुलाई के प्रकाशित अंक में एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी ने लांघी वन सीमा, लगा दिए 50 बिजली पोल,खबर प्रकाशित होने के बाद वन विभाग में हड़कम्प मच गया। वन अधिकारी दिनभर कार्रवाई में जुटे रहे। जांच में पाया गया कि यह गतिविधियां वन संरक्षण अधिनियम-1980 के प्रावधानों का उल्लंघन हैं, जिसके बाद कार्रवाई की गई।</p>
<p><strong>पर्यावरणविदों ने उठाए वन अधिकारियों की भूमिका पर सवाल</strong><br />पर्यावरणविदों का कहना है कि वन क्षेत्र में 50 बिजली के पोल लगाना, उनमें विद्युत आपूर्ति शुरू करना और 8 से 10 फीट ऊंचे पत्थरों के बड़े-बड़े ढेर जमा करना स्थानीय वन अधिकारियों की जानकारी या मिलीभगत के बिना संभव नहीं है। उनका तर्क है कि डाबी रेंज में प्रथम और द्वितीय श्रेणी के रेंजरों के अलावा नाकेदार, वन रक्षक, सहायक वनपाल और फॉरेस्टर समेत कई अधिकारी-कर्मचारी तैनात रहते हैं। ऐसे में इतनी बड़ी अवैध गतिविधियां बिना विभागीय जानकारी के होना गंभीर सवाल खड़े करता है। ऐसे में गार्ड से रेंजर तक की भूमिका की जांच की जाना चाहिए।</p>
<p><strong>केएमएल मैप और जीपीएस से वन अपराध का खुलासा</strong><br />एसीएफ द्वारा जारी निरीक्षण नोट के अनुसार, उन्होंने मौके पर ही सर्वेयर से एयरपोर्ट के लिए प्रत्यावर्तित वन भूमि का केएमएल मैप मंगवाया। जीपीएस कोर्डिनेट्स व लोकेशन का मिलान करने पर स्पष्ट हुआ कि पत्थरों का स्टॉक और बिजली के पोल एयरपोर्ट के लिए हस्तांतरित भूमि में नहीं, बल्कि उससे बाहर वन विभाग की भूमि पर हैं।</p>
<p><strong>गार्ड से रेंजर तक की भूमिका की हो जांच</strong><br />पूरे मामले में गार्ड से लेकर रेंजर स्तर तक की भूमिका की निष्पक्ष जांच होनी चाहिए और दोषी पाए जाने वालों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में वन भूमि पर अतिक्रमण और एफसीए कानून के उल्लंघन की घटनाओं पर रोक लग सके। इतनी बड़ी मात्रा में वन भूमि पर अवैध पत्थरों का स्टॉक जमा करना व विद्युत पोल लग जाना, बिना अफसरों की जानकारी या मिली भगत के संभव नहीं है।<br /><strong>-बाबूलाल जाजू, प्रदेश प्रभारी पीपुल फॉर एनिमल्स</strong></p>
<p><strong>नोटिस देकर एफआईआर दर्ज की</strong><br />इस मामले में एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी के खिलाफ कार्रवाई करते हुए नोटिस जारी कर दिया है। वहीं, वन अधिनियम के तहत एफआईआर दर्ज की है।<br /><strong>-मनीष शर्मा, रेंजर द्वितीय डाबी, बूंदी वन मंडल</strong></p>
<p>नोटिस मिलने की जानकारी मिली है। अभी मैं बहार हूं, लौटकर आने के बाद मामले में कुछ कह पाएंगे।<br /><strong>-जितेंद्र कुमार, लाइजनिंग ऑफिसर एयरपोर्ट निर्माण एजेंसी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Jul 2026 13:31:11 +0530</pubDate>
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                <title>एक्सपोर्ट ठप: 200 करोड़ का चावल बीच राह में अटका</title>
                                    <description><![CDATA[समुद्री जलमार्ग पर आवागमन बाधित होने से चावल उद्योग प्रभावित।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/exports-stalled--rice-worth-%E2%82%B9200-crore-stuck-in-transit/article-158760"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/12200-x-600-px)13.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मिडिल ईस्ट के तनाव का असर हाड़ौती के चावल उद्योग पर भी पड़ा है। भारत से 25 से 30 फीसदी तक चावल का निर्यात केवल ईरान में ही होता है, जिसमें हाड़ौती का बासमती चावल सबसे ज्यादा वहां भेजा जाता है। समुद्री जलमार्ग पर जहाजों का आवागमन बाधित होने के कारण हाड़ौती से बासमती चावल के निर्यात से जुड़ी सारी प्रक्रिया थम गई है। हालांकि अब अमेरिका व ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है, लेकिन अभी तक कारोबार शुरू नहीं हो पाया है। ऐसे में हाड़ौती का करीब 200 करोड़ का बासमती चावल का कारोबार मझधार में अटका हुआ है। करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है। एक्सपोर्टर्स की ओर से विदेश में पहले से किए हुए बासमती चावल के सौदे भी खत्म होने की कगार पर हैं। निर्यात रुक जाने और जलमार्ग बंद होने से उठाव नहीं हो रहा है। इन हालातों के चलते एक्सपोर्टर से लेकर व्यापारी और मिल मालिक भी परेशान हो गए हैं। दूसरी तरफ मंडियों में धान के दाम गिर गए हैं, जिससे किसानों को भी परेशानी हो रही है।</p>
<p><strong>कुछ माल गोदाम तो कुछ बंदरगाहों पर अटका</strong><br />चावल एक्सपोर्टरों के अनुसार हाड़ौती की लगभग सभी राइस मिलों के पास अभी तक करीब 40 से 50 करोड़ के सौदे हैं, लेकिन यह सब कुछ अटक गए हैं। इनका माल मिल मालिकों के पास गोदाम में तैयार है। इसी तरह से 40 से 50 करोड़ का माल कांडला पोर्ट पर पड़ा हुआ है। इनका भुगतान भी आना बाकी है। एक महीने का प्रोडक्शन इन्होंने तैयार किया हुआ है। दो महीने का कच्चा माल भी उनके पास है। यह सब कुछ मिलाकर 200 करोड़ से ज्यादा का व्यापार फिलहाल अटक गया है। इसके अलावा माल खरीदा हुआ है, जिसका भुगतान करना शेष है। ऐसे में सकुर्लेशन पूरी तरह से ठप हो जाने पर मिलर्स को बड़ी हानि होने की संभावना बनी हुई है।</p>
<p><strong>इन देशों में निर्यात होता है चावल</strong><br />भामाशाहमंडी सहित कोटा संभाग के अन्य जिले बारां और बूंदी की मंडियों में बासमती चावल बिकने के लिए ज्यादा आता है, जिसमें से करीब 90 फीसदी चावल एक्सपोर्ट होता है। मिडिल ईस्ट में ईरान, इराक, दमाम, जेद्दा, बहरीन, कुवैत, ओमान, कतर, सऊदी अरब व संयुक्त अरब अमीरात में भारत से चावल जाता है। भारत के कुल निर्यात का 25 से 30 फीसदी केवल ईरान में ही जाता है, जबकि 5 से 10 फीसदी यूएसए और यूके में जाता है। वहां तनाव जैसे हालात होने से सब रुक गया है। हाड़ौती में वर्तमान में 30 से आिक राइस मिल हैं, इनमें धान से तैयार चावल पड़ा हुआ है, लेकिन अब खरीददार नहीं हैं। एक्सपोर्ट होने वाला एक महीने का माल उनके पास है, जबकि तीन माह का उनके पास कच्चा माल है, ऐसे में इनके दाम लगातार कम होने से नुकसान मिल मालिकों को हो रहा है। मिल में आगे आॅर्डर नहीं आने के चलते काम बंद करने की स्थिति आ गई है।</p>
<p><strong>दामों में आ रहा उतार-चढ़ाव</strong><br />थोक चावल व्यापारी अंकित अग्रवाल ने बताया कि एक्सपोर्ट होने वाली 17-18 वैरायटी के दाम 5200 से 7100 के बीच चल रहे थे, जो अब 6350 के आसपास रह गए हैं। उम्मीद की जा रही थी कि यह बढ़कर 7500 के आसपास हो जाएंगे। इसी तरह से वैरायटी 1509 के दाम 5200 से लेकर 6800 के बीच थे, इसके दाम 5750 रह गए हैं। वैरायटी 1847 के दाम 4900 से 6600 प्रति क्विंटल के बीच रहते हैं, यह 5800 रुपए प्रति क्विंटल के आसपास हैं। इनके दाम 6300 के आसपास पहुंच जाने का अनुमान था, हालांकि, 1509 से नीचे की क्वालिटी होने के बावजूद भी इसके दाम ऊंचे हो गए हैं।</p>
<p><strong>फैक्ट फाइल</strong><br />-200 करोड़ का कारोबार हुआ प्रभावित<br />-30 फीसदी चावल का निर्यात केवल ईरान में<br />-30 से अधिक राइस मिल हाड़ौती में<br />-47 लाख क्विंटल चावल होता है निर्यात</p>
<p>मिडिल ईस्ट में चले युद्ध के कारण बासमती चावल का कारोबार पूरी तरह से प्रभावित हुआ है। अब अमेरिका और ईरान के बीच युद्ध विराम हो गया है, लेकिन अभी तक समुद्री जलमार्ग पर आवागमन सुचारू नहींं हो पाया है। इस कारण करोड़ों का माल बंदरगाहों पर अटका पड़ा है।<br /><strong>- भूपेन्द्र सोनी, प्रमुख व्यापारी, भामाशाहमंडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 03 Jul 2026 14:21:24 +0530</pubDate>
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                <title>'नो-वर्क' पॉलिसी - बरसात सिर पर लेकिन अभी तक नहीं हो पाई नालों की सफाई</title>
                                    <description><![CDATA[छावनी क्षेत्र के 4 वार्डो पर मंडराया बाढ़ का खतरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-no-work--policy--monsoon-is-imminent--yet-drain-cleaning-remains-undone/article-158667"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/021.gif" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम की घोर लापरवाही और अधिकारियों की उदासीनता के चलते इस मानूसन में छावनी क्षेत्र के कई वार्डों में बाढ़ के हालात बनने तय हैं। छावनी क्षेत्र के मुख्य नालों की सफ़ाई पिछले दो से तीन साल से नहीं हुई है, जिससे वर्तमान में ये नाले पूरी तरह कचरे और सीवरेज की गंदगी से पट चुके हैं। यदि तेज़ बारिश होती है, तो आठ से ज़्यादा वार्डों का निकासी पानी रुक जाएगा और पूरा इलाका जलमग्न हो जाएगा। पूर्व पार्षदों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि निगम की स्वास्थ्य शाखा केवल कागज़ी खानापूर्ति कर रही है। धरातल पर न तो लेबर लगाई गई है और न ही मशीनों से सफ़ाई सुनिश्चित की गई है। हद तो यह है कि अधिकारी अब जनता की समस्याओं को सुनने के बजाय 'पार्षद पद पर नहीं होने' का बहाना बनाकर ज़िम्मेदारियों से पल्ला झाड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>बस्तियों में घुसेगा सीवरेज, व बाढ़ का पानी</strong><br />इस मौखे के मुहाने से नहर के दुसरी और तक बनें नाले में ही सिवरेज लाईन डाल दी गई है। जिससे नाले की गहराई और कम हाे गई है। सफ़ाई न होने से नाला पूरी तरह चोक है। यदि मूसलाधार बारिश होती है,तो यह ढाई फीट का मोखा इतने बड़े क्षेत्र का पानी निकालने में पूरी तरह अक्षम साबित होगा। पानी सीधे छावनी, रामचंद्रपुरा,गोपेश्वर महादेव मंदिर, राजपूत कॉलोनी,शमशान घाट से क्षमा कॉलाेनी छावनी सब्जी मण्डी और पुलिसचौकी के आसपास की घनी बस्तियों में घुस जाएगा, जिससे लाखों की संपत्ति का नुकसान और महामारी फैलने का अंदेशा है। स्थानीय निवासी दिनेश कुमार कहते है कि निगम की यह 'नो-वर्क' पॉलिसी जनता के लिए जानलेवा साबित हो सकती है।</p>
<p><strong>3 साल से अटके टेंडर, 2.5 फीट के मोखे पर टिका 5 वार्डों का भविष्य</strong><br />एक छोटे मोखे पर भारी दबाव: छावनी क्षेत्र के वार्ड नंबर 15, 42 रामचंद्रपुरा, 43 समा कॉलोनी और 44 सहित लगभग 5 वार्डों के बरसाती पानी की निकासी नहर के नीचे बने मात्र ढाई (2.5) फीट के एक आर्च नुमा मोखे से होती है।</p>
<p><strong>2 निकास लेकिन वॉटर लेवल गलत</strong><br />स्थानीय निवासी हरदयाल नागर बताते है कि यहां 60 फीट की दुरी पर ही नहर के नीचे से 2 निकास थे। वर्तमान चालू मोखे के पैरेलल बने हुये दूसरे चैनल का वॉटर लेवल ऊपर कर दिया गया है। जिससे पानी टकराकर वापस रामचंद्रपुरा और छावनी की बस्तियों में बैक मारता है। सबसे निचला इलाका होने के कारण वार्ड 42 रामचंद्रपुरा में नालियां ओवरफ्लो हो रही हैं और गलियों में रिटर्न पानी भर रहा है।</p>
<p><strong>तीन साल से सफ़ाई ठप</strong><br />वार्ड 42 के निवर्तमान पार्षद ऐश्वर्य श्रृंगी ने बताया कि मेरे वार्ड में नहर के सहारे बने नाले की लम्बाई 600 मीटर के लगाभग है। जिसमें आकर पुरे क्षेत्र का पानी आकर गिरता है। इसी नाले के बीच में पानी के निकास के लिये बने मौखे स्थित है। पिछले साल भी हमनें 30 अप्रेल को तीनों वार्डो 15, 43 व 49 के पार्षदाें ने सामुहिक लेटर नगर निगम को लिखा था। बावजूद इसके 2-3 सालों से कोई टेंडर नहीं हुआ है। पिछले साल पार्षदों ने अपने स्तर पर जमादारों से हाथ की लेबर लगवाकर जैसे-तैसे कचरा साफ करवाया था।</p>
<p><strong>अधिकारियों का रवैया उदासीन</strong><br />स्वास्थ्य निरीक्षक  को लगातार फोटो और शिकायतें भेजने के बाद भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। वार्ड 43 के पार्षद इसरार अहमद ने निगम अधिकारीयों पर उदासीनता का आरोप लगाते हुये बताया कि अधिकारी फोन उठाना बंद कर चुके हैं। और शिकायत करने पर तंज कसते हैं कि अब आप पार्षद ही नहीं रहे हो। यहाँ तक कि पेड़ छंटाई जैसे आपातकालीन कामों में भी कांग्रेस-बीजेपी की राजनीति देखकर काम किया जा रहा है।</p>
<p>दो साल पहले भी सफाई न होने के कारण यह मौखे चौक हो गये थे जिसके कारण लोगों के घरों मेें 5 फीट तक पानी भर गया था। यह आम लोगों के जान माल के नुकसान का कारण बनें उससे पहले ही प्रशासन को समय रहते सफाई करवानी चाहिये।<br /><strong>-बृजेश महावर स्थानीय निवासी</strong></p>
<p>नाले की सफाई नहीं होने के कारण थोड़ी सी बारिश में पानी ओवरफ्लो होकर गलियों में भर जाता है। सामान्य दिनाें में भी निचली बस्तियों में नालिया उफान पर रहती है। यहां स्थित देवनारायण मंदिर में तक नालियों का गंदा पानी भर जाता है। निगम प्रशासन का कोई ध्यान नहीं है।<br /><strong>-नवीश गोचर स्थानीय निवासी रामचन्द्रपुरा</strong></p>
<p><strong>मानव श्रम के लिये टेण्डर पर होगी सफाई</strong><br />निगम अधिकारियों ने बताया कि ऐसी जगहों पर मशीनों का पहुंचना संभव नहीं हाेता है। ऐसे मे अलग से मानव श्रम लगवाना पड़ता है। इसके लिये टैण्ड़र की प्रक्रिया पुरी की जा चुकी है। मानसून पूर्व जल्द ही नालों सफाई करवाने की रूपरेखा बना ली गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Jul 2026 15:10:01 +0530</pubDate>
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