नए कोटा में लाइनों की कमी से होती है पानी की किल्लत

उपाय बस लाइनों का नवीनीकरण और व्यवस्थित जल वितरणउपाय बस लाइनों का नवीनीकरण और व्यवस्थित जल वितरण

नए कोटा में लाइनों की कमी से होती है पानी की किल्लत

पुराने कोटा में नए प्लांट से जलापूर्ति होने से नहीं होती प्रेशर की समस्या।

कोटा। गर्मियों का मौसम आने को है और शहर में पानी की किल्लत फिर देखने को मिलने वाली है। वैसे तो शहर चंबल नदी के किनारे बसा है जहां पानी की बिल्कुल भी कमी नहीं है। लेकिन इसके बाद भी 21 वीं सदी के रजतकाल में शहर के कई ईलाकों में पानी को लेकर भारी किल्लत देखने को मिलती है। जिसमें शहर का नया और पटरी पार ईलाका सबसे ज्यादा प्रभावित रहता है। जहां प्रेशर से लेकर जलापूर्ति में अनिरंतरता देखने को मिलती है। ऐसे में लाखों की आबादी वाले इन क्षेत्रों में लोग पानी को लेकर हर साल परेशानी में रहते हैं। वहीं विभाग द्वारा किए जा रहे प्रयास भी ना काफी साबित हो रहे हैं।

पुराने में कोटा में नए प्लांट और नई लाइनों से समस्या कम
शहर के पुराने इलाकों में जलापूर्ति का कार्य सकतपुरा स्थित 130 और 70 एमएलडी क्षमता से नए बने प्लांटों से किया जाता है। विभाग कि अधिकारियों ने बताया कि पुराने कोटा में पुरानी खराब पाइप लाइनों को बदलने के साथ नया प्लांट का निर्माण किया जा चुका है, जिससे पानी का लीकेज कम होता है। वहीं मिनी अकेलगढ़ प्लांट में आने इलाके का समुद्री स्तर, विस्तार और क्षेत्रफल कम होने के कारण जलापूर्ति करने में कम प्रेशर और संसाधनों की आवश्यकता होती है। जिस कारण पुराने कोटा में जलापूर्ति की समस्या कम देखने को मिलती है। इसके अलावा नए जल संयंत्रों में लगी मोटरों की क्षमता अधिक होने से भी पानी की सप्लाई के नए कोटा के मुकाबले कम बाधाएं आती हैं।

नए कोटा में अव्यवस्थित वितरण और संसाधन की कमी
शहर में सकतपुरा स्थित 130 एमएलडी के मिनी अकेलगढ़ प्लांट के निर्माण से पहले अकेलगढ़ स्थित 270 एमएलडी प्लांट से ही शहर की जलापूर्ति को पूरा किया जाता था। लेकिन समय के साथ बढ़ती आबादी के चलते शहर के नदी पार क्षेत्र में 130 एमएलडी के नए प्लांट का निर्माण किया गया। जिसके बाद कुछ हद तक पानी की समस्या का निदान हुआ लेकिन शहर के बढ़ते आकार और क्षेत्रफल के अनुरूप जलदाय विभाग के पाइप लाइन, पम्प हाउस जलाशय जैसे संसाधनों के न बढ़ने के कारण पानी की समस्या में इजाफा होता गया। नए कोटा क्षेत्र का विस्तार और क्षेत्रफल अधिक होने से कई इलाकों में आज भी पाइप लाइन मौजूद नहीं हैं, साथ ही जिन इलाकों में पाइप लाइन है वो पुरानी हो चुकी हैं जिनसे लीकेज की समस्या बनी रहती है। इसके अलावा नए कोटा क्षेत्र के कोचिंग एरिया में जलापूर्ति के लिए उच्च जलाशय मौजूद नहीं जिससे पानी का व्यवस्थित वितरण नहीं हो पाता है।

लाइनों का नवीनीकरण और व्यवस्थित जल वितरण ही उपाय
शहर के इलाकों में जलापूर्ति को लेकर होने वाली समस्यों के निवारण के लिए लाइनों का नवीनीकरण और पानी का व्यवस्थित वितरण ही कारगर साबित होगा। जलदाय विभाग के अधिकारियों के अनुसार कोटा की जलापूर्ति के पैर्टन में मौजूद विसंगतियों का सर्वे कर उन्हें दूर करने की योजना पर काम किया जा रहा है जिसे कुछ हद तक अमृत 2.0, स्मार्ट सिटी योजना और 15वीं वित्तीय आयोग के तहत होने वाले निर्माण कार्यों से दूर किया जा सकेगा। ह्यं पानी की किल्लत हर साल की रहती है उसमें कोई बदलाव नहीं आया है। हर गर्मी में पानी के लिए परेशान होना पड़ता है। विभाग को इतने सालों में भी समस्या का पता नहीं चला तो ये अधिकारियों की गलती है।
- मोहनलाल प्रजापत, डीसीएम

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हर साल विभाग को पाइप लाइनों और प्रेशर को लेकर शिकायत करते हैं लेकिन हर साल एक जैसी तस्वीर रहती है उसमें कोई बदलाव नहीं आता, जनता को तो हर बार पानी के लिए इधर उधर भटकना पड़ता है।
- गायत्री सुमन, प्रेमनगर

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इनका कहना है
शहर में पानी को समस्या के समाधान के लिए 50 और 70 एमएलडी के दो नए प्लांटों के निर्माण किया जा चुका है। कोचिंग क्षेत्र में पाइप लाइन को बदला जा रहा है साथ ही अमृत योजना 2.0, स्मार्ट सिटी योजना और 15वीं वित्तीय आयोग योजना में पाइप लाइनों का नवीनीकरण करने के साथ नई लाइनें जोड़ी जाऐंगी। 
- प्रद्यूमन बागला, अधीक्षण अभियंता, जलदाय विभाग

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