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                <title>parole - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>चार बच्चों के हत्यारे के साथ विवाह बंधन में बंधेगी प्रिया सेठ</title>
                                    <description><![CDATA[बड़ौदा मेव में हत्या मामलों में उम्रकैद की सजा काट रहे प्रिया सेठ और हनुमान प्रसाद पैरोल पर आज विवाह करेंगे। खुली जेल में हुई नजदीकियों के बाद यह शादी राज्यभर में चर्चा का विषय बनी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/priya-seth-will-tie-the-knot-with-the-murderer-of/article-140655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(22).png" alt=""></a><br /><p>अलवर। राजस्थान में अलवर जिले के बड़ौदा मेव कस्बे में इन दिनों एक शादी काफी चर्चित हो रही है। प्राप्त जानकारी के अनुसार बड़ौदा मेव कस्बे के होली चौक मोहल्ले में उम्र कैद की सजा काट रहे प्रिया सेठ एवं हनुमान प्रसाद आज विवाह बंधन में बंधेंगे। यह घर हनुमान प्रसाद का है। उच्च न्यायालय के निर्देश के बाद दोनों को पैरोल मिली है। उन दोनों का विवाह चर्चा में आने का मुख्य कारण यह है कि दोनों ही हत्या के मामले में उम्र कैद की सजा काट रहे हैं। हनुमान प्रसाद एक व्यक्ति और उसके चार बच्चों की हत्या करने के मामले में उम्र कैद की सजा भुगत रहा है।         </p>
<p>प्राप्त जानकारी के अनुसार पाली जिले की रहने वाली प्रिया सेठ ने अपने प्रेमी दीक्षांत कामरा का कर्ज उतारने के लिए झोटवाड़ा के रहने वाले दुष्यंत शर्मा को डेटिंग ऐप के जरिए प्रेमजाल में फंसाया था। साजिश के तहत दो मई, 2018 को उसने दुष्यंत को मिलने के लिए बुलाया और अपने बजाज नगर स्थित फ्लैट पर ले गयी। फ्लैट पर योजना के अनुसार उसका प्रेमी दीक्षांत एवं उसका साथी लक्ष्य वालिया पहले से उनका इंतजार कर रहे थे। तीनों ने दुष्यंत को बंधक बना लिया और उसके पिता से 10 लाख की फिरौती मांगी। पिता ने तीन लाख रुपये दुष्यंत के खाते में जमा करवा दिये। इसके बाद दुष्यंत को छोडऩे पर पकड़े जाने के डर से तीनों ने उसकी गला दबाकर हत्या कर दी। दुष्यंत की पहचान छिपाने के लिए उसके चेहरे को क्षत-विक्षत कर दिया और उसका शव एक सूटकेस में बंद करके आमेर की पहाडिंयों में फेंक दिया। </p>
<p>मृतक दुष्यंत के पिता के आमेर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराने पर पुलिस ने तीन मई, 2018 को दुष्यंत का शव बरामद किया था। पुलिस ने जल्द ही मामले का पर्दाफाश करके चार मई को प्रिया, दीक्षांत एवं लक्ष्य वालिया को गिरफ्तार कर लिया था। पाली निवासी प्रिया सेठ एक पढ़े-लिखे एवं शिक्षित परिवार से थी। उसके दादा प्रधानाचार्य रहे थे, जबकि पिता महाविद्यालय में व्याख्याता थे। उसकी मां सरकारी विद्यालय में शिक्षिका रहीं थी। दसवीं और बाहरवीं कक्षा में अच्छे अंक लाने के आधार पर माता-पिता ने उसे आगे की पढ़ाई के लिए जयपुर भेजा था। वहीं से वह गलत राह पर चली गयी।    </p>
<p>जयपुर में प्रिया अपने एक रिश्तेदार के घर पर रहकर पढ़ रही थी, लेकिन वह गलत संगत में पड़ गयी तो वह एक पेइंग गेस्ट हाउस में रहने लगी थी। महंगे शौक पूरा करने के लिए उसने युवकों को अपने जाल में फांसना शुरू किया और बाकायदा एक वेबसाइट बनाकर रुपये ऐंठने लगी थी। </p>
<p>इसी दौरान प्रिया की दोस्ती श्रीगंगानगर निवासी एवं मुंबई में मॉडलिंग करने वाले दीक्षांत कामरा से हो गयी और दोनों जयपुर में लिव इन में रहने लगे। मृतक दुष्यंत ने प्रिया सेठ से एक डेटिंग एप के जरिए मुलाकात की थी और उसने स्वयं को दिल्ली का रहने वाला बताया था। प्रिया के सामने उसने स्वयं को करोड़पति बताया था। इससे प्रभावित होकर प्रिया ने उससे बड़ी रकम ऐंठने की योजना बनायी थी। उसने अपनी योजना में कर्ज में डूबे अपने प्रेमी दीक्षांत और उसके दोस्त को भी शामिल कर लिया था। अंतत: तीनों ने दुष्यंत की हत्या कर दी थी। चौबीस मई, 2024 को जयपुर की अदालत ने प्रिया सेठ, दीक्षांत और लक्ष्य वालिया को हत्या का दोषी मानकर आजीवन कारावास की सजा सुनायी। आरोपी लक्ष्य वालिया के पिता का देहांत हो चुका है और वह अपनी मां की इकलौती संतान है।</p>
<p>दूल्हा बनने जा रहे हनुमान प्रसाद ने दो अक्टूबर 2017 को शिवाजी पार्क में ताइक्वांडो खिलाड़ी संतोष शर्मा के पति बनवारी लाल और उसके चार बच्चों की हत्या की थी। नींद की गोलियों से बेहोश करके चाकू से गला रेत दिया था। हत्या करने के बाद बड़ौदा मेव निवासी हनुमान ट्रेन से उदयपुर भाग गया था। उस वक्त वह शारीरिक शिक्षक की तैयारी कर रहा था। पुलिस ने उसको दो दिन बाद गिरफ्तार कर लिया था। उस दौरान जांच में सामने आया था कि संतोष और हनुमान के बीच प्रेम संबंध थे। संतोष उस समय हनुमान से 10 वर्ष बड़ी थी और दोनों ही ताइक्वांडो जानते थे। तभी वह उसके संपर्क में आयी थी। उस वक्त प्रेम इतना परवान चढ़ा कि दोनों ने शादी करने का मन भी बना लिया था। इसके लिये संतोष ने अपने पति और बच्चों को ठिकाने लगाने के लिए हनुमान को तैयार किया था।</p>
<p>प्रिया सेठ जहां 33 वर्ष की है, वहीं हनुमान प्रसाद 32 वर्ष का है। दोनों की शादी का बाकायदा कार्ड छपा है। जयपुर की खुली जेल में सजा भुगत रहे हनुमान प्रसाद और प्रिया सेठ के बीच नजदीकियां बढ़ी। दोनों के बीच प्रेम हुआ और बताया जा रहा है कि दोनों करीब छह महीने से रिश्ते में हैं। अब वे शादी के बंधन में बंधने जा रहे हैं। यह शादी राज्य में चर्चा का विषय बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Jan 2026 18:29:31 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बंदियों के पैरोल की राह पर नए कानून ने लगाया ग्रहण</title>
                                    <description><![CDATA[राज्य की जेलों में फैलती अव्यवस्था को सुधार व मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 129 साल पुराने कानून को बदल दिया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-new-law-eclipsed-the-path-of-prisoners--parole/article-52285"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/bandiyo-ki-perol-ki-raah-pr-naye-kanoon-ne-lgaya-grhan...kota-news-20-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जेल में सजाकाट रहे बंदियों के पैरोल पर जाने के  बाद फरार होने के बढ़ते मामलों को देखते हुए जेल प्रशासन ने अब नए कानून के तहत नए नियम लागू कर दिए हैं। इसके साथ ही अब पैरोल पर जाने वाले सजाप्ता बंदियों को नए कानूनी नियम के तहत लंबा इंतजार करना होगा। जबकि पुराने कानून में पहले सजाप्ता बंदी को मात्र चौथाई सजा काटने के बाद ही पैरोल की अर्जी को जेल प्रशासन मंजूर कर लेता था, लेकिन अब पचास प्रतिशत सजा काटने के बाद ही पैरोल की अर्जी लगाई जा सकेगी। साथ कानून में बदलाव के नियमानुसार रेप के साथ मर्डर करने वाले तथा डकैती सहित अंति गंभीर आरोप में संलिप्त सजाप्ता बंदियों की पैरोल पर पूर्ण रुप से प्रतिबंध लगा दिया गया है।</p>
<p><strong>सजा के बाद खुलेंगे रोजगार के अवसर</strong> <br />राज्य की जेलों में फैलती अव्यवस्था को सुधार व मजबूत करने के लिए राज्य सरकार ने 129 साल पुराने कानून को बदल दिया है। इसके लिए द राजस्थान कारागार विधेयक 2023 बनाया गया है। इस नए कानून के तहत राज्य की समस्त जेलों में बदियों की व्यवस्थाआें को और मजबूत बनाया जाएगा।  इस बदलाव से बंदियों के लिए सुधारात्मक उप बंध, मूलभूत मानवाधिकारों के हक, उनके कौशल विकास और व्यवसायिक प्रशिक्षण कार्यक्रम को सुनिश्चित किया जाएगा। अब यह विधेयक बंदियों के साथ-साथ जेलों में कार्यरत अधिकारियों व कर्मचारियों के लिए भी उपयोगी होगा। इस के तहत कारागार विभाग द्वारा बंदी सुधार के लिए विभिन्न नवाचार किए जाएंगे। ताकि सजा पूरी होने के बाद उन्हें रोजगार मिल सके। इसके लिए नए कानून में प्रावधान किया गया है। इसके अलावा खुली बंदी शिविर, कौशल विकास कार्यक्रम एवं जेलों में पेट्रोलपंप खोलना आदि रोजगार के साधन को नावाचार होंगे। </p>
<p><strong>सजायाफ्ता कैदियों की आधी सजा के बाद पैरोल </strong><br />पुराने नियम 1958 में सजायाप्ता बंदी सजा मिलने की समय सीमा के चौथाई सजा काटने के बाद ही बीच में ही पैरोल का आवेदन कर पैरोल प्राप्त कर लेता था, लेकिन नए नियम में ऐसा नहीं कर सकता है। इसके लिए उसे सजा की समय सीमा का आधा समय जेल में ही बिताना होगा। उसके बाद ही उसे पैरोल पर आवेदन कर सकता है तथा पैरोल पर छोड़ा जा सकता है। साथ  उन्होेंने बताया कि इस नियम में 29 जून 2021 से पहले के सजायाप्ता बंदियों पर अभी पुरारा कानून ही लागू रहेगा तथा  30 जून 2021 के बाद सजायाप्ता बंदियों पर नया कानून दा राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज आॅन पैरोल रुल्स 2021 लागू होगा। इस कानून के बदलाव से अब बंदी जिस जेल में रहेगा उस जिले का जिला कलक्टर पैरोल की सुनवाई कर सकता है, जबकि पुराने नियम में ऐसा था कि बंदी के रहने वाले स्थान के जिला स्तर पर निर्णय लिया जाता था। जेलों में 23 मार्च को सुप्रीम कोर्ट के आदेशानुसार सात साल व उससे कम की सजा का सामना कर रहे कैदियों या सात साल तथा उससे कम की सजा वाले अपराधों के मुकदमोंं का सामना कर रहे बंदियों की रिहाई पर विचार किया जा सकता है। </p>
<p><strong>पोक्सो और रेप के कैदियो की रिहाई पर रोक </strong><br />जेल अधीक्षक परमजीत सिंह सिद्धू ने बताया कि दा राजस्थान प्रिजनर्स रिलीज आॅन पैरोल रुल्स 1958 के अंतर्गत गठित जिला स्तरीय परामर्शदायी समिति ऐसे नियमित पैरोल प्रार्थना पत्र पर निर्णय लेती है। इस दौरान सजाप्ता बंदी को कम से कम सजाप्ता अवधि के 1/4 प्रतिशत सजा को काटने के बाद पैरोल का आवेदन किया जाता रहा है। अब नए  नियमों के तहत पोक्सो और रेप तथा गंभीर आरोपों में सजायाप्ता कैदी की रिहाई पर रोक लगा दी गई है। जबकि पुराना 1958 का नियम है कि एक तय समय सीमा के बाद ही कैदी पैरोल की मांग कर सकता है तथा उसे पैरोल दी जा सकती है। नया नियम 2021 में रोक लगा दी गई है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Jul 2023 15:42:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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                <title>मिर्धा अपहरण कांड : हरनेक सिंहको स्थाई पैरोल पर रिहा करने के आदेश</title>
                                    <description><![CDATA[अदालत ने पैरोल कमेटी के गत 14 जुलाई के उस आदेश को रद्द कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%A3-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A1---%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87%E0%A4%95-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%88-%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%B2-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B9%E0%A4%BE-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-2863"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/hc.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान हाइकोर्ट ने प्रदेश के चर्चित राजेन्द्र मिर्धा अपहरण कांड के आरोप में आजीवन कारावास की सजा भुगत रहे हरनेक सिंह को स्थाई पैरोल पर रिहा करने के आदेश दिए हैं। इसके साथ ही अदालत ने पैरोल कमेटी के गत 14 जुलाई के उस आदेश को रद्द कर दिया है, जिसमें कमेटी ने हरनेक सिंह को पैरोल पर रिहा करने से इनकार कर दिया था। न्यायाधीश प्रकाश गुप्ता और न्यायाधीश उमाशंकर व्यास की खंडपीठ ने यह आदेश हरनेक सिंह की पैरोल याचिका पर दिए। अदालत ने कहा की स्थाई पैरोल के दौरान यदि याचिकाकर्ता किसी अवांछित गतिविधि में शामिल होता है तो स्थाई पैरोल को वापस लेकर उसकी सजा पूरी कराई जा सकती है। याचिका में कहा गया की मामले में उसे गत 6 अक्टूबर 2017 को आजीवन कारावास की सजा दी गई थी। वहीं वह करीब 15 साल पांच माह से जेल में बंद है। उसे प्रथम और द्वितीय पैरोल के अलावा कोरोना में स्पेशल पैरोल पर भी रिहा किया गया था। पैरोल की रिहाई का उसने कोई दुरुपयोग नहीं किया और तय समय पर वापस जेल में समर्पण भी किया था। वहीं जेल में उसका चाल चलन भी संतोषजनक है। याचिकाकर्ता की ओर से पैरोल कमेटी के समक्ष स्थाई पैरोल के लिए प्रार्थना पत्र दिया गया था, लेकिन कमेटी ने सिर्फ इस आधार पर पत्र को निरस्त कर दिया की उसे मिर्धा अपहरण कांड में सजा हुई थी। ऐसे में उसे स्थाई पैरोल पर रिहा किया जाए।</p>
<p><br /> क्या थी घटना : गौरतलब कि पूर्व केन्द्रीय मंत्री रामनिवास मिर्धा के बेटे राजेन्द्र मिर्धा का गत 17 फरवरी 1995 को सी-स्कीम स्थित घर से अपहरण हो गया था। आतंकियों ने मिर्धा का अपहरण खालिस्तान लिबरेशन फ्रंट के मुखिया देवेन्द्रपाल सिंह भुल्लर को रिहा करने के लिए किया था। मामले में दयासिंह को आजीवन कारावास और उसकी पत्नी सुमन को पांच साल की सजा हुई थी। वहीं पंजाब पुलिस ने हरनेक सिंह को वर्ष 2004 में गिरफ्तार कर फरवरी 2007 में राजस्थान पुलिस को सौंपा था। अदालत ने 7 अक्टूबर 2017 को हरनेक सिंह को आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी। जबकि एक आरोपी नवनीत कादिया की मौके पर एनकाउंटर में मौत हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Dec 2021 13:10:39 +0530</pubDate>
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