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                <description>could not RSS Feed</description>
                
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                <title>पांच साल से आशियाने का इंतजार कर रहे 300 परिवार </title>
                                    <description><![CDATA[  नगर विकास न्यास एक तरफ तो बिल्डरों व धनाढ्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहा है। उन्हें डेढ़ साल में पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर व अल्प आय वर्ग के लोगों के लिए अपनी ही एक आवासीय योजना को पांच साल में भी अमली जामा नहीं पहना सका है। न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योजना में करीब 300 परिवार आशियाने का पांच साल से इंतजार कर रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/300-families-waiting-for-shelter-for-five-years/article-9869"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/46546545465.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर विकास न्यास एक तरफ तो बिल्डरों व धनाढ्य लोगों को लाभ पहुंचाने के लिए बड़ी-बड़ी योजनाएं बना रहा है। उन्हें डेढ़ साल में पूरा करने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ आर्थिक रूप से कमजोर व अल्प आय वर्ग के लोगों के लिए अपनी ही एक आवासीय योजना को पांच साल में भी अमली जामा नहीं पहना सका है। न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योजना में करीब 300 परिवार आशियाने का पांच साल से इंतजार कर रहे हैं। तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में नगर विकास  न्यास द्वारा देवली अरब रोड़ पर पार्थ अपार्टमेंट नाम से आवासीय योजना लांच की गई थी।  मुख्यमंत्री जन आवास योजना के तहत  वर्ष 2015 में बनी इस योजना में आर्थिक रूप से कमजोर आय वर्ग व अल्प आय वर्ग के परिवारों को आवास उपलब्ध करवाने थे। न्यास की इस योजना में बड़ी संख्या में लोगों ने आवेदन भी किए। न्यास ने लॉटरी भी निकाल दी। लेकिन उसके बाद न्यास के अधिकारियों ने उस योजना की तरफ देखा तक नहीं। जबकि जिन लोगों के नाम लॉटरी में निकले थे वे न्यास कार्यालय व अधिकारियों के चक्कर काट-काट कर थक गए। लेकिन न्यास अधिकारी उन्हें सिर्फ आश्वासन ही देते रहे, मकान नहीं दे सके। <br /><br /><strong>296 आवास बनने हैं योजना में</strong><br />न्यास की पार्थ अपार्टमेंट योेजना में 296 मकान बनने हैं। इनमें से आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए 216 और अल्प आय वर्ग के लिए 80 मकान शामिल हैं। इस योजना में जी प्लस 3 योजना के तहत मकान बनने हैं। <br /><br /><strong>वर्ष 2017 में लांच की थी योजना</strong><br />नगर विकास न्यास के तत्कालीन चैयरमेन राम कुमार मेहता व सचिव मोहनलाल यादव के समय में वर्ष 2017 में यह योजना लांच की गई थी। 17 जनवरी 2017 को योजना में आवेदन जमा करना शुरू किया गया था। जिसमें आवेदन जमा करवाने की अंतिम तिथि 18 फरवरी थी। बड़ी संख्या में लोगों ने 300 रुपए में आवेदन पुस्तिका खरीदी थी। दो तरह के आवासों में से छोटे आवासों के लिए दो हजार रुपए व बड़े आवासों के लिए साढ़े तीन हजार रुपए प्रशासनिक शुल्क के रूप में भी जमा किए थे। साथ ही छोटे आवासों के 10 हजार व बड़े आवासों के 20 हजार रुपए  भी जमा कराए थे। गरीबों की लाखों रुपए की राशि से यूआईटी ने कमाई कर ली।  लेकिन मकानों का इन्तजार बढ़ता ही गया। <br /><br /><strong>जमीन के विवाद ने अटकायी योजना</strong><br />सूत्रों के द्वारा नगर विकास न्यास ने जिस जमीन पर यह योजना लांच की थी। उस जमीन पर किसी एक समाज व पंथ विशेष की आपत्ति होने से विवाद चल रहा था। जिससे यह योजना अटकी हुई थी। न्यास की गलती की सजा जनता को भुगतनी पड़ रही है। सूत्रों का तो यह भी कहना है कि जिस समय योजना लांच की गई थी उस समय भाजपा की सरकार थी। लेकिन वर्ष 2018 में सरकार बदल कर कांग्रेस की आ गई। न्यास अध्यक्ष भी बदल गए। इस कारण से वर्तमन सरकार व न्यास अधिकारियों ने भी उस योजना में रूचि नहीं दिखाई। लेकिन मकानों का इंतजार करने वालों ने जब बार-बार न्यास अधिकारियों पर दबाव बनाया तब जाकर अब न्यास अधिकारी जागे। उन्होंने कुछ समय पहले ही आवंटन पत्र जारी किए हैं। साथ ही राशि जमा करवाना शुरू किया है। <br /><br /><strong>अभी भी खाली जमीन, निर्माण तक शुरू नहीं</strong><br />न्यास की यह योजना देवली अरब रोड पर मेन रोड के पास है। लेकिन पांच साल बीतने के बाद अभी तक भी वहां सिर्फ खाली जमीन ही है। उस जगह पर झाड़ झंखाडं उगे हुए हैं। सिर्फ चार दीवारी बनी हुई है। कुछ नींव खुदी हुई है व योजना का बोर्ड लगा हुआ है। साथ ही उस जमीन पर गोबर के छाने थापे जा रहे हैं। न्यास द्वारा जिस बिल्डर को आवास बनाने का कांट्रेक्ट दिया है। उसने वहां अभी तक भी काम शुरू नहीं किया है। ऐसे में यदि अब भी काम शुरू होगा तो जी प्लस 3 के 296 मकान बनने में करीब दो साल से अधिक का समय लगेगा। ऐसे में आवंटियों को अभी करीब दो साल और इंतजार करना पड़ सकता है। <br /><br /><strong>पीड़ितों की जुबानी</strong><br />पार्थ अपार्टमेंट योजना में आवेदन करने वाले बालाजी नगर निवासी अमित जैन ने बताया कि उन्हें मकान की जरूरत है। न्यास की योजना में सस्ते मकान के लालच में 15 फरवरी 2017 को आवेदन के साथ 23 हजार 500 रुपए जमा करवाए थे। इसमें से 3500 रुपए प्रशासनिक शुल्क के हैं जो वापस नहीं मिलेंगे। जबकि 20 हजार रुपए मकान की लागत में शामिल हो जाएंगे। न्यास ने 5 साल से मकान नहीं दिया। न्यास कार्यालय और अधिकारियों के चक्कर  काट-काट कर थक गए । कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलता। कुछ समय पहले ही योजना के आवंटन पत्र जारी किए। दो किश्तों में 75-75 हजार रुपए के हिसाब से 1.50 लाख रुपए भी जमा करवा चुके हैं। बाकी रकम भी किश्तों में देनी है। जैन ने बताया कि अभी भी मकान की जगह खाली जमीन  है। स्वयं के मकान के इंतजार में 6 हजार रुपए महीना किराए के मकान में परिवार के साथ रह रहा हूं। नयापुरा निवासी सुरेश अग्रवाल व महावीर नगर निवासी राजेश सोनी ने बताया कि वे कई बार देवली अरब रोड पर जगह देखकर आ चुके हैं। वहां अभी तक तो काम भी शुरू नहीं हुआ है। मकान बनने में न जाने कितने साल लगेंगे।<br /><br /><strong>नहीं दिया जवाब</strong><br />योजना के बारे में जानने के लिए न्यास के विशेषाधिकारी आर.डी मीना व न्यास सचिव राजेश जोशी को दो से तीन बार फोन किए लेकिन उन्होंने मोबाइल रिसीव नहीं किए। वाट्सअप पर मैसेज किए तो उनका भी जवाब नहीं दिया। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong> <br />लैंड डिस्प्यूट के कारण योजना में मकान बनाने में देरी हुई है। अब कुछ समय पहले ही वह मामला सुलझा है। बिल्डर को मकान बनाने का कार्यादेश जारी कर दिया है। साथ ही लॉटरी में निकले आवंटियों को आवंटन पत्र भी कुछ समय पहले ही जारी किए हैं। आवंटन पत्र मिलने के बाद लोगों ने राशि जमा करवाना शुरू कर दिया है। योजना में मकान बनने में करीब दो साल का समय लगेगा। <br /><strong>- आर.के. राठौर, अधीक्षण अभियंता, नगर विकास न्यास आवासीय योजना</strong><br /><br /><strong>यह थी आवासों की लागत</strong><br />न्यास द्वारा उस समय लांच की गई पार्थ अपार्टमेंट योजना में आर्थिक दृष्टि से कमजोर आय वर्ग के लिए 4.20 लाख रुपए में और अल्प आय वर्ग के लिए 6.30 लाख रुपए आवास की लागत निर्धारित की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 16 May 2022 15:38:37 +0530</pubDate>
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                <title>राजनीतिक दांवपेच के चलते नहीं हो पायी RPSC चेयरमैन की नियुक्ति</title>
                                    <description><![CDATA[सीनियर मेम्बर डॉ. राठौड़ को  सौंपा चार्ज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5%E0%A4%AA%E0%A5%87%E0%A4%9A-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9A%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%B9%E0%A5%8B-%E0%A4%AA%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%80-rpsc-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A4%AE%E0%A5%88%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF/article-2891"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/shiv-kumar-rathor-rpsc1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजनीतिक दांवपेच के चलते राजस्थान लोक सेवा आयोग के नए अध्यक्ष का अटक गया। इसके चलते राज्य सरकार ने भी फिलहाल कुछ दिनों के लिए इस नियुक्ति को टाल दिया और राज्य सरकार ने गुरुवार को राजस्थान लोक सेवा आयोग के वरिष्ठतम सदस्य डॉ. शिवसिंह राठौड़ को अध्यक्ष पद का अतिरिक्त कार्यभार सौंप दिया। राज्यपाल कलराज मिश्र से मंजूरी मिलने के बाद कार्मिक विभाग ने आदेश जारी कर दिए। आयोग के अध्यक्ष पद पर कार्यरत डॉ. भूपेन्द्र सिंह का कार्यकाल बुधवार को पूरा होने पर वह सेवानिवृत्त हो गए। इस पद के लिए वरिष्ठ आईपीएस अफसरों के साथ ही कुछ आईएएस अफसरों ने भी लॉबिंग की थी। कुछ गैर अधिकारियों ने भी प्रेशर पॉलिटिक्स की राजनीति चलाई थी। पहले कयास लगाए जा रहे थे कि बुधवार की देर शाम तक इस पद पर किसी न किसी की नियुक्ति हो जाएगी, लेकिन देर रात तक किसी के आदेश नहीं हो पाए थे। आखिरकार राज्य सरकार ने वरिष्ठतम सदस्य डॉ. राठौड़ को कार्यभार सौंपने का निर्णय लिया और पत्रावली को राजभवन भेजा, जहां से सुबह की मंजूरी मिल गई। डॉ. राठौड़ आयोग के वरिष्ठतम मेम्बर है और परम्परा के अनुसार उन्हें चार्ज सौंपा गया है। वह 31 अक्टूबर 2016 से आयोग के सदस्य है। राठौड़ का कार्यकाल भी 29 जनवरी को पूरा होने जा रहा है।</p>
<p><br /> <strong>ऐसा आठवीं बार हुआ:</strong><br /> राजस्थान लोक सेवा आयोग के 72 साल के इतिहास में ऐसा आठवीं बार हुआ है, जब अध्यक्ष की नियुक्ति नहीं हो पाई और वरिष्ठतम सदस्य को कार्यभार सौंपा गया। आयोग की स्थापना 20 अगस्त 1949 को हुई थी। सबसे पहले चार दिसम्बर 1958 को वरिष्ठतम सदस्य एलएल जोशी को अध्यक्ष पर का कार्यभार सौंपा गया था। उसके बाद 28 नवम्बर 1989 को एससी सिंगारिया, 26 मार्च 2004 को एसएस टांक, चार जुलाई 2006 को एचएन मीणा, 21 अगस्त 2012 को हबीब खान गोरान, 24 सितम्बर 2014 को आरडी सैनी और 11 जुलाई 2017 को श्यामसुन्दर शर्मा को अध्यक्ष का कार्यभार सौंपा जा चुका है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 02 Dec 2021 17:36:43 +0530</pubDate>
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