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                <title>सादेड़ा विद्यालय की जर्जर छत से विद्यार्थियों का शिक्षण प्रभावित,  बरसात में टपकती छत</title>
                                    <description><![CDATA[दीवारों और फर्श में सीलन की समस्या गंभीर हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-dilapidated-roof-of-sadeda-school-is-affecting-students--education--with-the-roof-leaking-during-the-rainy-season/article-129017"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(1)19.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। सादेड़ा के राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय का भवन जर्जर हालत में होने के कारण बरसात में कक्षाओं की छत से पानी टपकने लगा है। इससे विद्यार्थियों का शिक्षण प्रभावित हो रहा है और शिक्षक जोखिम भरे हालात में शिक्षा दे रहे हैं। रविवार रात की बारिश के बाद सोमवार को भी सात कक्षाओं की छत से पानी टपकता रहा, जबकि केवल एक कक्ष सुरक्षित है। लेकिन संबंधित विभाग के जिम्मेदार भवन की सुध नहीं ले रहा है। विद्यालय में कुल 12 कक्षाएं संचालित हैं, जिनमें 300 छात्र-छात्राएं पढ़ते हैं। 7 कक्षा कक्ष की छत से पानी टपकने के कारण कई छात्र बरामदे में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। कुछ कक्षाओं की दीवारों में दरारें हैं और आरसीसी की छत के प्लास्तर टूटकर टेबल पर गिर रहा है। कई जगहों पर आरसीसी सरिया साफ दिखाई देने लगा है। बरसात के समय प्रार्थना स्थल भी उपयोग के योग्य नहीं रहता। छात्र-छात्राएं और शिक्षक टपकती छत के नीचे पढ़ाई और शिक्षण कर रहे हैं। दीवारों और फर्श में सीलन की समस्या गंभीर हो गई है। निरीक्षण टीम और संबंधित विभाग अब तक इस जर्जर स्थिति का कोई समाधान नहीं कर पाए हैं। ग्रामीण और विद्यालय परिवार चिंतित हैं कि जिम्मेदार हादसे का इंतजार कर रहे हैं। शालाओं में सुरक्षा की दृष्टि से तत्काल मरम्मत आवश्यक है। स्थानीय लोगों ने उच्चाधिकारियों से आग्रह किया है कि शीघ्र निरीक्षण कर आवश्यक सुधार किया जाए, ताकि विद्यार्थी और शिक्षक सुरक्षित वातावरण में शिक्षा ग्रहण कर सकें।</p>
<p><strong>इधर निरीक्षण पर भी सवाल</strong><br />पंचायत समिति नैनवां से निरीक्षण पर आए संबंधित अधिकारियों के निरीक्षण पर भी सवाल उठ रहे है। आखिर निरीक्षण में असुरक्षित भवन को गंभीरता से क्यों नहीं देखा है। भवन के चौतरफा कक्षाकक्षों की सुरक्षा को लेकर साफ-सफाई के निर्देश क्यों नहीं दिए है। मौके पर आकर निरीक्षण नहीं किया या औपचारिकता पूर्ण की यह भी सवाल खड़े हो रहे है। ऐसे में शाला परिसर के खतरे के साएं में शिक्षा ग्रहण करने को मजबूर किया जा रहा है।</p>
<p><strong>शाला में देखरेख का अभाव</strong><br />शाला में जिम्मेंदार अधिकारी जागरूक नहीं होने से शाला में कक्षा-कक्षों के पिछली दीवारों में बड़े-बडेÞ पेड़-पौधों हो चूके है,जो कक्षाकक्षो की दीवारो को भी खतरा बढता जा रहा है। ऐसे लगाता है कि यह विद्यालय भवन नहीं जंगल में पेड़ पनपे हुए है।</p>
<p><strong>शाला स्तर पर दो बार ब्लॉक शिक्षाधिकारी को लिखित में अवगत</strong><br />शाला ने दो बार शाला के भवन को लेकर लिखित-पत्र के माध्यम से अवगत कराया गया है। लेकिन समस्या अभी भी बनी हुई है। मरम्मत करवाने के नाम पर रेती व सीमेंट बिछा दी जाती है। दीवारो में सीलन आना जारी है। पट्टियों पर वजन बढ़ने से पट्टियों के टूटने का भी खतरा बढ़ रहा है। लेकिन सक्षम अधिकारी ने बारिश के समय मौके पर आकर स्थिति को नहीं जान रहे है। शाला के परिसर के मुख्य गेट पर बरसाती पानी जमा होने से कीचड़ की समस्या रहती है जिसको लेकर सादेड़ा ग्राम पंचायत को भी लिखित पत्र देकर समस्या से अवगत कराया जा चूका है। मगर समस्या का समाधान अभी तक नहीं हुआ है। सोमवार को बारिश के पानी व कीचड़ भरी डगर से छात्र-छात्राएं गुजरते हुए नजर आए है। </p>
<p><strong>यह कहा वाइस प्रिंसिपल ने</strong><br />मैं सादेड़ा विद्यालय में नया आया हूँ। पहले क्या हुआ इसका मुझे पता नहीं है। इस समय बारिश चल रही है, जो एक कक्ष के अलावा सभी कक्ष की छत टपक रही है। छात्र-छात्राओं को बारिश से बचाने के लिए सामूहिक में कक्षाए रखनी पड़ती है। बारिश होते ही समस्या बढ जाती है, सभी कक्षाओं को एडजस्ट करना मुश्किल हो रहा है। <br /><strong>-हरनन्दा मीणा, वाइस प्रिंसिपल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय सादेड़ा। </strong></p>
<p> सादेड़ा विद्यालय का निरीक्षण किया गया था। पहले मरम्मत की राशि आई थी, मार्च में जिस विद्यालय में राशि आई, वहां संबंधित ग्राम पंचायत ने मरम्मत की थी। जिसमें पिचेहतर प्रतिशत मरम्मत वाले विद्यालयों में छत टपकने की समस्या आ रही है। शाला का जल्द ही मौके पर आकर उच्च निरीक्षण करेंगे, मौके पर कमियां नजर आएंगी, तो उन्हें दुरूस्त करवाया जाएगा।<br /><strong>-अनिल जैन, सीबीईओ, नैनवां। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Oct 2025 16:15:18 +0530</pubDate>
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                <title>जयपुर में 178 इमारतें जर्जर, हजारों जान जोखिम में : नगर निगम नोटिस देकर कर लेता है खानापूर्ति, खतरनाक भवनों को जमींदोज करने में ढिलाई क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[पिंकसिटी की खूबसूरती के बीच छिपा खतरा हर पल लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-jaipur-178-buildings-dilapidated-thousands-of-lives-at-risk/article-126121"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(3)2.png" alt=""></a><br /><div>जयपुर। पिंकसिटी की खूबसूरती के बीच छिपा खतरा हर पल लोगों की जान पर भारी पड़ रहा है। शहर के परकोटे में 178 इमारतें जर्जर हालत में हैं, जिनमें हजारों लोग रह रहे हैं। नगर निगम जयपुर हेरिटेज प्रशासन को इसकी पूरी जानकारी होने के बावजूद कोई ठोस कदम नहीं उठाया जा रहा है। हर साल बारिश के मौसम में नगर निगम इन इमारतों के मालिकों व रहवासियों को नोटिस जारी कर अपनी जिम्मेदारी पूरी मान लेता है, लेकिन नोटिस देने के बाद कोई निरीक्षण या वैकल्पिक व्यवस्था नहीं की जाती। अत: लोग मजबूरी में इन्हीं खतरनाक इमारतों में रहने को विवश हैं। मानसून शुरू होने से पूर्व निगम हेरिटेज प्रशासन ने जर्जर इमारतों का सर्वे कराया। भवन मालिकों को नोटिस देकर अधिकारी नींद में सो गए और लोगों की सुरक्षा के लिए आगे कोई कार्रवाई नहीं की, जिसका नतीजा दो लोगों की मौत के रुप में सामने आया है। निगम अधिकारियों की कारगुजारी देखो कि 5 सितंबर की मध्य रात्रि की घटना के बाद 4 तारीख में दूसरा नोटिस रिकार्ड में तैयार कर दिया।   </div>
<div> </div>
<div><strong>कागजी खानापूर्ति में लगे अधिकारी</strong></div>
<div>शहर में जर्जर इमारतों को लेकर निगम हेरिटेज के अधिकारी घटना के बाद कागजी खानापूर्ति में लग गए और आयुक्त ने जोन उपायुक्त ने इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट मांगी। इसमें जोन उपायुक्त दिलीप भंभानी ने बताया कि जर्जर इमारत को चिह्नित कर इसकी मरम्मत के लिए भवन स्वामी को 13 अगस्त को नोटिस जारी कर दिया था। अब घटना के बाद कुछ घंटे पूर्व कागजी खानापूर्ति के नाम पर 4 सितंबर को एक और नोटिस बना दिया। जोन उपायुक्त ने अपनी रिपोर्ट में बताया कि शुक्रवार एवं शनिवार की मध्य रात्रि करीब एक बजे यह बिल्डिंग गिर गई। इसके बाद एसडीआरएफ, पुलिस, निगम प्रशासन एवं जिला प्रशासन ने मौके पर जाकर राहत कार्य किए। </div>
<div> </div>
<div><strong>हादसे के बाद निगम ग्रेटर भी जागा</strong></div>
<div>शहर के चारदीवारी क्षेत्र बारिश के चलते जर्जर भवन के गिरने से हताहत हुए लोगों के बाद नगर निगम जयपुर ग्रेटर के अधिकारी भी जागे हैं और निगम ग्रेटर क्षेत्र की जर्जर इमारतों को दुबारा सर्वे कराएगा। निगम ग्रेटर आयुक्त डॉ. गौरव सैनी के निर्देश के बाद जोन की टीम ने शनिवार को फील्ड में रहकर जोनवार जर्जर भवनों का पुन: सर्वे किया तथा चेतावनी बोर्ड, बैनर लगाए और जर्जर भवनों में रह रहे रहवासियों को नोटिस भी दिए गए। इसके साथ ही उन्हें किसी भी प्रकार की अनहोनी या दुर्घटना होने की चेतावनी भी दी गई।</div>
<div> </div>
<div><strong>जर्जर इमारतों को नोटिस देकर इतिश्री </strong></div>
<div>निगम हेरिटेज आयुक्त डॉ. निधि पटेल ने बताया कि हवामहल आमेर जोन में 40 भवनों को जर्जर होने पर चिह्नित किया गया है और सभी को एक बार नोटिस देने के बाद दुबारा नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। इसके साथ ही जोन में 6 सामुदायिक केन्द्रों को भी जर्जर हालात में चिह्नित किया गया है। इनमें 17 कमरे है। इसी प्रकार किशनपोल जोन में 79 जर्जर इमारतों को चिह्नित किया गया है। इसमें से तीन जर्जर भवनों को ध्वस्त किया गया और शेष 76 में से 32 भवन मालिकों ने निगम हेरिटेज के नोटिस के बाद स्वयं के स्तर पर मरम्मत करवा ली और शेष 44 भवन मालिकों को फिर से नोटिस देने की कार्रवाई की जा रही है। किशनपोन जोन में तीन सामुदायिक केन्द्रों के 12 कमरों को भी जर्जर हालात में माना है। सिविल लाइन जोन में 24 भवनों का जर्जर हालात में चिह्नित कर 10 को नोटिस जारी किए है। जोन में 5 सामुदायिक भवनों के 17 कमरों को निगम ने जर्जर माना है। इसी प्रकार आदर्श नगर जोन में किए गए सर्वे में 35 भवनों का जर्जर भवन के रूप में चिह्नित किया है। 10 भवन मालिकों ने नोटिस के बाद स्वयं के स्तर पर मरम्मत करने की निगम को सहमति दी थी लेकिन मरम्मत नहीं कराने पर फिर से नोटिस जारी करने की कार्रवाई की जा रही है। आदर्श नगर जोन में 13 सामुदायिक केन्द्रों के 37 कमरों को भी जोन स्तर पर जर्जर हालात में मानकार रिपोर्ट मुख्यालय को भिजवाई है। </div>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 07 Sep 2025 13:02:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>बसों की कमी का दंश झेल रहे यात्री, बस चालकों की नहीं रूक रही मनमानी </title>
                                    <description><![CDATA[हरनावदाशाहजी में सोमवार सुबह मनोहरथाना से बारां जाने वाली एक मात्र रोडवेज बस जिसमें सवारियां ठूंस - ठूंस कर भरने के बावजूद छत के उपर भी सवारियों को बैठे देखा गया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/passengers-are-suffering-due-to-lack-of-buses/article-114748"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(8)6.png" alt=""></a><br /><p>हरनावदाशाहजी। हरनावदाशाहजी में सोमवार सुबह मनोहरथाना से बारां जाने वाली एक मात्र रोडवेज बस जिसमें सवारियां ठूंस - ठूंस कर भरने के बावजूद छत के उपर भी सवारियों को बैठे देखा गया। इससे यह जाहिर होता है कि क्षेत्र में यातायात के प्रयाप्त साधन नहीं है। लोगों ने डबल इंजन की सरकार पर सवाल खड़े करते हुए अतिरिक्त बसों के संचालन करने की मांग की है। लोगों का कहना है कि सरकारी बस चालकों द्वारा खुलेआम ट्रैफिक नियमों की उल्लंघन कर सवारियों को बसों की छतों पर बैठाकर उनकी जान को जोखिम में डाला जा रहा है।  लोगों की कीमती जान से खिलवाड़ करने वाले इन बस चालकों पर किसी प्रकार कार्रवाई नहीं की जा रही है। हालांकि बारां जिला ट्रैफिक पुलिस का दावा है कि ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करने वालों के समय-समय पर चालान किए जाते हैं। बावजूद भी ग्रामीण क्षेत्रों में बस चालकों की मनमानियां रुकने का नाम नहीं ले रही हैं। बस चालक सभी नियम कायदों को दरकिनार करते हुए सरेआम ट्रैफिक नियमों की उल्लंघना कर रहे हैं। नियमों की अवहेलना करते हुए बस चालक लापरवाही से बसों को ओवरलोड करके लोगों को बसों की छतों पर बैठाकर उनकी जान को जोखिम में डाल रहे हैं। </p>
<p><strong> रोडवेज की नई बसों का संचालन शुरू करने की मांग</strong><br />ईधर कस्बे में रोडवेज बसों की कमी क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का सबब बनी हुई है। कस्बे सहित क्षेत्रवासियों की डबल इंजन की सरकार से मांग है कि क्षेत्र में रोडवेज की नई बसों का संचालन शुरू किया जाए। वहीं अरसे से बंद पड़ी बारां-इंदौर, बारां-भोपाल समेत कोटा, बारां, झालावाड़, बूंदी आगार की नई बसों का संचालन शुरू करने की मांग की है।</p>
<p><strong> जिम्मेदारों का बस संचालन पर नही ध्यान</strong><br />कस्बे से जुड़े सड़क मार्गों पर पर्याप्त यात्री भार मिलने के बावजूद रोडवेज बसों का नियमित संचालन कराने पर जिम्मेदारों का ध्यान नहीं है। पहले यहां रात्रिकालीन बसों का पर्याप्त संचालन था, लेकिन परिचालकों की ओर से यात्री भार कम दशार्ने के कारण बसों का संचालन बंद कर दिया गया। क्षेत्रवासियों ने नई रोडवेज बसों के संचालन की मांग की है।</p>
<p><strong>यात्रियों को महंगा पड़ रहा अवैध वाहनों का किराया</strong><br />रोडवेज बसों के अभाव में यात्रियों को निजी वाहनों में अधिक किराए देकर यात्रा करनी पड़ रही है। कस्बे से अकलेरा तक 15 किमी का किराया ऑटो, मिनीडोर या जीपों में 30 रुपए चुकाने पड़ रहे हैं जबकि इसी दूरी में रोडवेज बस का किराया 20 रुपए है। कस्बे से अकलेरा तक नई सड़क बनकर तैयार हो गई है। वहीं कस्बे से मनोहरथाना तक रोड चौड़ाई करण का कार्य भी पूर्ण हो चुका है। कस्बे से वाया बंजारी सेतकोलू रोड के चौड़ाईकरण का कार्य भी प्रगति पर है। <br /> <br /><strong>अकलेरा रेलवे स्टेशन से कस्बे तक का लगता अधिक किराया </strong><br />यात्रियों के अनुसार झालावाड़ जिले के अकलेरा के रेलवे स्टेशन से कस्बे तक आने का निजी साधनों में 50 रुपए का किराया चुकाना पड़ रहा है जबकि कोटा से अकलेरा तक ट्रेन का किराया 35 रुपए</p>
<p><strong>सफर महंगा और हो रहा कष्टदायक</strong><br />रोडवेज बसों के अभाव में लोगों का सफर महंगा और कष्टदायक बना हुआ है। कस्बे में पहले कोटा, बूंदी, झालावाड़ एवं बारां आगार की आधा दर्जन से अधिक बसों का नियमित संचालन होता था। इनमें बारां-इंदौर, बारां-भोपाल बस का संचालन अचानक से बंद हुआ, जिसके बाद दोबारा शुरू नहीं हुआ।</p>
<p>मनोहरथाना से संचालित रोडवेज बसों को वाया हरनावदाशाहजी से चलाया जाए तो निश्चित ही यात्रीभार बढ़ेगा। इससे क्षेत्र के लोगों को भी राहत मिलेगी।<br /><strong>-  सुनील सोनी, समाजसेवी </strong></p>
<p>ओवरलोड अवैध वाहनों पर अंकुश लगना चाहिए। साथ ही रोडवेज बसें सुचारु रूप से संचालित हो। हरनावदाशाहजी कस्बे से इंदौर, भोपाल के लिए रोडवेज बसें फिर से चलाई जाए।<br /><strong>-  नितिन जैन, रेडिमेड कपड़ा व्यापारी </strong></p>
<p>इन दिनों कस्बे में रोडवेज की बसों की कमी है। बारां डिपो की एकमात्र बस बारां-मनोहरथाना और एक-एक बस कोटा व झालावाड़ डिपो की चल रही है जो यात्रीभार के मुकाबले बहुत कम है। अतिरिक्त बसों का संचालन होना चाहिए।<br /><strong>- यश पंचोली,  युवा नेता </strong></p>
<p>हरनावदाशाहजी-अकलेरा नई सड़क बन गई है। कोटा से अकलेरा तक आने वाली दो-तीन रोडवेज बसों का संचालन हरनावदाशाहजी तक कर दिया जाए तो यात्रियों को राहत मिल सकेगी।<br /><strong>- आशू मंसूरी, कस्बा निवासी </strong></p>
<p>हरनावदाशाहजी होते हुए बारां के लिए फिलहाल एक रोडवेज बस संचालित है। जुलाई तक रोडवेज के बेड़े में नई बसें आने की उम्मीद है। बारां मनोहरथाना जो बस संचालित है। उसमें सवारियों से मना करने के बावजूद भी पीछे से छत पर चढ़ जाते हैं। चालक परिचालक को पाबंद कर कार्यवाही की जाएगी। <br /><strong>-  योगेंद्र सिंह, मैनेजर, बारां डिपो</strong><br /> <br />बसों में ओवरलोड सवारियां बैठाना गलत है। इस पर सख्ती बरती जाकर चालक परिचालक के विरुद्ध कार्रवाही की जाएगी। <br /><strong>- अजय कुमार मीणा, चीफ मैनेजर कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 May 2025 15:43:29 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>काला धुआं छोड़ रहे वाहन बांट रहे बीमारियां </title>
                                    <description><![CDATA[ हाल ही में मनाए गए ट्रैफिक पुलिस द्वारा मनाए गए यातयात माह में भी वाहनों से निकलने वाले धुएं की जांच नहीं की गई।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-emitting-black-smoke-are-spreading-diseases/article-70072"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/kala-dhua-chord-rhe-vahan-bant-rhe-bimariya...kota-news-14-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर की सड़कों पर बेधड़क खटारा वाहन दौड़ रहे हैं। उनसे निकलने वाला काला धुआं राहगीरों को गंभीर बीमारियां बांट रहा है। सांस के अटैक से लेकर आंखों में सूजन तक खतरा बढ़ रहा है। इसके बावजूद न तो ट्रैफिक पुलिस द्वारा कार्रवाई की जा रही और न ही आरटीओ द्वारा इन वाहनों के पोल्यूशन सर्टिफिकेट जांचे जा रहे।  हालात यह हैं, व्यस्तम चौराहों से कार, लोडिंग वाहन व सिटी बसें काला धुआं छोड़ते गुजर रहे हैं और ट्रैफिक पुलिस आंखें मूंदे पड़ी है। जबकि, ट्रैफिक पुलिस को मोटर व्हीकल एक्ट के तहत ऐसे वाहन चालकों क खिलाफ कार्रवाई करने का अधिकार है, फिर भी कार्रवाई नहीं की जा रही।</p>
<p><strong>हवा में घुल रही करोड़ों लीटर कार्बनडाई आॅक्साइड</strong><br />वन विभाग के रिटायर्ड डीएफओ जयराम पांड्ेय के अनुसार, कार का इंजन एक लीटर पेट्रोल या डीजल बर्न करने पर 2 किलोग्राम कार्बनडाई आॅक्साइड साइलेंसर से धुंए के रूप में बाहर निकालता हैं। यदि, 2 किलोग्राम कार्बनडाई आॅक्साइड को लीटर में कनवर्ड करें तो लगभग 1 हजार लीटर होता है। जिसे आरटीओ में रजिस्टर्ड प्रति 56 हजार कारों में मौजूद एक लीटर ईघन के हिसाब से 56 हजार लीटर ईधन से गुणा करते हैं तो 5 करोड़ 60 लाख लीटर कार्बनडाई आॅक्साइड साइलेंसर से धुए के रूप में पर्यावरण में घुल जाता है, जो पर्यावरण के साथ स्वास्थ्य के लिए भी हानिकारक है। यदि, यह कैलकुलेशन आरटीओ में रजिस्टर्ड कुल पांच लाख वाहनों के साथ करें तो कार्बनडाई आॅक्साइड का आंकड़ा कई गुना बढ़ जाता है। </p>
<p><strong>जिले में रजिस्टर्ड हैं 5.69 लाख से अधिक वाहन</strong><br />परिवहन विभाग से मिली जानकारी के अनुसार कोटा जिले में कुल 5 लाख 69 हजार 607 वाहन पंजीकृत हैं। इनमें से अधिकतर वाहन 15 साल की अवधि पार हैं। नियमों के अनुसार अवधि पार वाले वाहनों को रिन्यू नहीं करवाए जाने पर रजिस्ट्रेशन निरस्त किए जाने का प्रावधान है। हाल ही में मनाए गए ट्रैफिक पुलिस द्वारा मनाए गए यातयात माह में भी वाहनों से निकलने वाले धुएं की जांच नहीं की गई।  </p>
<p><strong>सांस का अटैक से आंखों में सूजन तक का खतरा</strong><br />खटारा वाहनों से निकलने वाला काला धुआ अपने पीछे गंभीर बीमारियां छोड़ रहा है, जिससे राहगीरों पर सांस के अटैक से लेकर आंखों में सूजन तक कई गंभीर बीमारियों का खतरा रहता है। इसका सबसे ज्यादा खतरा सड़कों पर तैनात ट्रैफिक पुलिस के जवानों पर अधिक रहता है। इसके बावजूद यातायात पुलिस द्वारा कोई कार्रवाई नहीं की जाती। </p>
<p><strong>नगर निगम की सिटी बसें छोड़ रही काला धुआ</strong><br />नगर निगम की ओर से संचालित की जा रही सिटी बसें भी काला धुआं छोड़ रही है। यह बसें शहर के प्रमुख मार्गों से गुजर रही है। जहां ट्रैफिक पुलिस के जवान तैनात रहते हैं, इसके बावजूद इनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की जाती। नाम न छापने की शर्त पर बस चालक ने बताया कि प्रदूषण जांच तो छोड़ों लंबे समय से इन बसों की सर्विस तक नहीं हुई है। इसके अलावा खटारा लोडिंग वाहन भी एयरोड्रम सर्किल, घोड़ा सर्किल, सीएडी व कोटाड़ी चौराहा सहित प्रमुख मार्गों से बेधड़क दौड़ रहे हैं। इसके बावजूद कार्रवाई नहीं हो रही। </p>
<p><strong>इन बीमारियों की जद में रहता जीवन </strong><br />चिकित्सा विशेषज्ञों के अनुसार, वाहनों से निकलने वाले धुएं में अनगिनत नैनो पार्टिकल्स होते हैं, जिनके हवा के साथ शरीर में प्रवेश करने से कई बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। जिसमें  खांसी, सिर में दर्द, जी-मिचलाना, घबराहट होना, आंखों में जलन, दिल से संबंधित बीमारियां, दिमाग, फेफड़े, हृदय, गुर्दे, फेफड़े के कैंसर, सांस अटैक, दमा, एलर्जी सहित कई बीमारियों का खतरा बना रहता है। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विशेषज्ञ</strong><br /><strong>सांस के अटैक से फेफड़ों के कैंसर तक का खतरा</strong><br />धुएं में बहुत सारे कैमिकल्स होते हैं, जो हवा के साथ शरीर में जाने से दमा, अस्थमा, एलर्जी, खांसी, सांसों का अटैक, फेफड़ों का कैंसर सहित कई श्वांस से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ जाता है। हालांकि, दमा बीड़ी पीने से होता है लेकिन यह रोग उन लोगों को भी होता है जो बीड़ी नहीं पीते। वहीं, हैवी ट्रैफिक एरिया में ड्यूटी करने वाले पुलिसकर्मियों में सीओपीडी बीमारी हो सकती है। यह फेफड़ों को परमानेंट डेमेज करती है। मास्क का उपयोग करना चाहिए। <br /><strong>- डॉ. राजेंद्र ताखर, श्वांस रोग विशेषज्ञ, मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>आंखों में आ जाती सूजन </strong><br />धुएं के सम्पर्क में आने से आंखों में एलर्जी रिएक्शन बढ़ता है। जिससे आंखों का लाल होना, पानी आना और सूजन तक आ सकती है। इससे बचाव के लिए चशमा या हेलमेट का उपयोग करें। <br /><strong>- डॉ. यूनूस खान, नेत्र रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p>धुएं में मौजूद नैनो पार्टिकल्स शरीर को कई तरह से हानि पहुंचाते हैं। मुख्यत: सांस व फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का खतरा बढ़ता हैं। इम्यूनिटी कमजोर होने से बार-बार बीमार होना सहित कई समस्याएं उत्पन्न होती है।  <br /><strong>- डॉ. विनोद पंकज, शिशु रोग विशेषज्ञ</strong></p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />ट्रैफिक पुलिस द्वारा अनफिट व काला धुआ छोड़ने वाले वाहन चालकों के खिलाफ लगातार कार्रवाई की जाती है। इसके लिए समय-समय पर अभियान भी चलाया जाता है। <br /><strong>- राजेश ढाका, उपाधीक्षक, यातायात पुलिस कोटा</strong></p>
<p>आरटीओ का फोकस हाइवे पर रहता है, जबकि शहर में ट्रैफिक पुलिस द्वारा ऐसे वाहन चालकों के खिलाफ कार्रवाई की जाती है। मोटर व्हीकल एक्ट के तहत कार्रवाई करती है। वहीं, 15 साल पुराने वाहनों के रजिस्ट्रेÑशन नहीं करवाए जाने पर उनका पंजीयन निरस्त किया जाता है। पॉल्यूशन सर्टिफिकेट की भी नियमित जांच की जाती है।<br /><strong>- प्रमोद लोढ़ा, जिला परिवहन अधिकारी, आरटीओ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 14 Feb 2024 15:05:27 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>बोरखेड़ा फ्लाई ओवर और एलबीएस मार्ग की  सड़क पर भी हुए गड्ढ़े</title>
                                    <description><![CDATA[शहर में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए न्यास की ओर से शहर में अंडरपास व फ्लाई ओवर बनाए गए। साथ ही कई बायपास रोड भी निकाले गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/potholes-also-appeared-on-borkheda-flyover-and-lbs-marg-road/article-64872"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/borkheda-flyover-or-lbs-marg-ki-sadak-par-bhi-gaddhe...kota-new-23.12.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास ने शहर में हजारों करोड़ रुपए के विकास कार्य करवाए। उनमें से कई काम विधानसभा चुनाव से पहले ही पूरे हुए हैं। लेकिन हालत यह है कि बोरखेड़ा फ्लाई ओवर व एलबीएस मार्ग की सड़क का नया निर्माण होने के बावजूद उन पर गड्ढ़े हो गए हैं और गंदगी व अतिक्रमण जनता के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं।  शहर में बढ़ते यातायात के दबाव को कम करने के लिए न्यास की ओर से शहर में अंडरपास व फ्लाई ओवर बनाए गए। साथ ही कई बायपास रोड भी निकाले गए। ये काम तो जनता को राहत देने के लिए अच्छा प्रयास रहा। लेकिन काम में गुणवत्ता का ध्यान नहीं रखने का परिणाम है कि नया निर्माण होने के बावजूद कुछ ही समय में इनकी दुर्दशा होने लगी है। </p>
<p><strong>बोरेखड़ा फ्लाई ओवर की होने लगी दुर्दशा</strong><br />न्यास की ओर से बारां रोड पर बोरखेड़ा में फ्लाई ओवर का निर्माण किया गया है। बोरखेड़ा आरओबी को जोड़ते हुए इस फ्लााई ओवर का निर्माण किया गया है। बोरखेड़ा आरओबी से लेकर चौराहे को  पार करते हुए कृषि विवि के मुख्य द्वार के पास तक बने इस फ्लााई ओवर की लम्बाई करीब 11 सौ मीटर है। 111 करोड़ की लागत से बने इस फ्लाई ओवर को कुछ समय पहले ही शुरू किया गया है। लेकिन इसकी अभी से दुर्दशा होने लगी है। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस फ्लाई ओवर के बनने से करीब दो साल तक इस क्षेत्र के दुकानदारों का व्यापार तो प्रभावित हुआ ही। साथ ही इस क्षेत्र की जनता को भी परेशानी का सामना करना पड़ा। उसके बाद भी इस फ्लाई ओवर की सड़क पर अभी से गड्ढ़े होना व डामर उखड़ने से वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।</p>
<p> <br /><strong>सुंदरता में भी ग्रहण लग </strong><br />एसपी कार्यालय से बोरखेड़ा की तरफ जाने वाली सड़क पर बड़ा गड्ढ़ा हो गया है। जिसे पेचवर्क कर सही करने का प्रयास किया गया लेकिन उससे न तो दुर्घटना का खतरा टला और इसकी सुंदरता में भी ग्रहण लग गया। साथ ही बोरखेड़ा से अंटाघर की तरफ आने वाली सड़क का डाम उखड़ा होने से वाहन स्लिप हो रहे हैं। यहां एक श्वान मृत पड़ा हुआ है। जिसकी दुर्गंध से वाहन चालकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वाहन चालकों ने बताया कि इस फ्लाई ओवर पर फेली गंदगी व मृत श्वान की दुर्गंध बीमारी का कारण बन रहे हैं।  स्थानीय लोगों का कहना है कि फ्लाई ओवर पर गति सूचक व संकेतक बोर्ड लगाए गए हैं लेकिन वाहनों की गति सीमा का कोई ध्यान नहीं रखता। तेजी से आने वाले वाहन कई बार दुर्घटना का शिकार हो रहे हैं। </p>
<p><strong>एलबीएस मार्ग</strong><br />न्यास द्वारा अभय कमांड सेंटर के पास से दादाबाड़ी तिराहे तक बाईपास रोड निकाला गया है। इसे लाल बहादुर शास्त्री मार्ग दिया गया है। इस मार्ग को भी हाल ही में शुरू किया गया है। लेकिन इसकी दोनों तरफ की सड़क पर बड़े-बड़े गड्ढ़े हो गए हैं। यहां मोड़ अधिक होने से पहले से ही वाहन चालकों को दुर्घटना का खतरा बना हुआ है। वहीं ऐसे में गड्ढ़े से वाहन को सुरक्षित निकलना किसी चुनौती से कम नहीं है। साथ ही हर समय दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।  यहां पूरी सड़क पर किनारे कचरे के झेर लगे हुए हैं। दादाबाड़ी तिराहे से अभय कमांड की तरफ आने वाली सड़क पर विज्ञापन बोर्ड रखकर अतिक्रमण किया हुआ है। हालांकि यहां 20 कि.मी. की गति व धीमा चलने के संकेतक बोर्ड लगाए हुए हैं। लेकिन उसकी पालना नहीं हो रही है। मोड पर भी तेजी से वाहन आने से दुर्घटना का खतरा बना हुआ है।</p>
<p><strong>बीच चौराहे पर मौत का खतरा</strong><br />हाल ही में बनी इस सड़क के साथ ही दादाबाड़ी तिराहे का भी विकास किया गया है। यहां भी डामर की नई सड़क बनाई गई थी। करोड़ों रुपए खर्च करने के बाद भी हालत यह है कि दादाबाड़ी तिराहे की मुख्य सड़क पर बीच में इतना बड़ा गड्ढ़ा हो रहा है। जिससे बचने के प्रयास में रोजाना दुर्घटनाएं हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि दिन के समय तो यह फिर भी नजर आ जाता है। रात के समय तो यहां चारों तरफ से आने वाले वाहन अक्सर टकराते रहते हैं। गड्ढ़े को यदि समय रहते सही नहीं किया गया तो कभी भी बड़ा हादसा होने से कई लोगों की जान भी जा सकती है। लोगों का कहना है कि निमाण कार्य में न्यास के इंजीनियरों ने ध्यान नहीं दिया। जिससे काम की गुणवत्ता सही नहीं होने से सड़क की अभी से यह हालत हुई है। </p>
<p>इधर न्यास सचिव का कहना है कि वैसे तो नया काम होने से सड़कें सही हैं। यदि फिर भी कहीं कोई कमी रह गई है या सड़क पर गड्ढ़े हो गए हैं तो उन्हें सही करवा दिया जाएगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 24 Dec 2023 09:41:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नाले के अभाव में सड़क पर फैला कीचड़, मंडराया बीमारियों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[सड़क के किनारे नालियों का निर्माण नहीं किया गया। जिसकी वजह से हमारे घरों व पीछे से खेतों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। जिसकी वजह से गंदगी व कीचड़ बना रहता है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/due-to-lack-of-drain--mud-spread-on-the-road--danger-of-diseases-loomed/article-33965"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/naale-k-abhav-mei-sadak-par-faila-kheechad,-mandraya-bimariyo-ka-khatra..sunel-news..02.01.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>सुनेल। सुनेल बाइपास मार्ग पर झालरापाटन की ओर बायपास मार्ग पर आबादी क्षेत्र है, लेकिन यहां पर बाइपास निर्माण के दौरान सड़क के दोनों ओर नालियों का निर्माण नहीं किया गया है, जिसकी वजह से लोगों के घरों का पानी निकल कर सड़कों पर बह रहा है। जिससे वहां पर गंदगी व बदबू फैल रही है। जिससे मोहल्लेवासियों को बीमारियों का खतरा भी सदैव बना रहता है। हालत यह है कि सड़क के समीप नाला निर्माण नहीं होने की वजह से आसपास के खेतों का पानी भी बरसात में बहकर सड़क पर आता है, जिसकी वजह से आने जाने वाले राहगीरों को भी भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है। कई बार तो सड़क पर कीचड़ होने से राहगीर गिरकर चोटिल हो जाते है। वहीं सड़क पर पानी भरा रहने की वजह से मोहल्लेवासियों को भी परेशानी उठानी पड़ती है।  मोहल्लावासी मांगीलाल नागर, रामबाबू , उदयराम ,किशोर किशन लाल ने बताया कि इस सड़क के किनारे नालियों का निर्माण नहीं किया गया। जिसकी वजह से हमारे घरों व पीछे से खेतों का पानी सड़कों पर बहता रहता है। जिसकी वजह से गंदगी व कीचड़ बना रहता है। वहीं इसकी वजह से बीमारियां भी फैल रही है। हमारी मांग है कि बायपास मार्ग पर नाले का निर्माण किया जाए, ताकि पानी की निकासी सही तरीके से हो सके।</p>
<p><br /> बाइपास मार्ग का निरीक्षण कर वहां का प्रस्ताव व एस्टीमेट बनाकर भिजवाया जाएगा तथा जल्द से जल्द समस्या का समाधान करवाने का प्रयास करेंगे। <br /><strong>- विक्रम, सहायक अभियंता सार्वजनिक निर्माण विभाग सुनेल।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jan 2023 15:43:51 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>अगर आप धूल से एलर्जिक हैं, तो इम्यून सिस्टम को है खतरा </title>
                                    <description><![CDATA[ अगर आप धूल से एलर्जिक हैं, तो इसका मतलब आपके इम्यून सिस्टम को खतरा है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम अच्छा होता है, वे भी कई बार डस्ट एलर्जी की चपेट में आ जाते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/health/-if-you-are-allergic-to-dust--your-immune-system-is-at-risk/article-12033"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/kk1.jpg" alt=""></a><br /><p> <br /><strong>धूल से होने वाली एलर्जी का मतलब है</strong> जब सांस के जरिए धूल में मौजूद कण शरीर में पहुंच जाते हैं। इस एलर्जी की वजह से नाक बहना, छींक आना, बुखार और सांस लेने में तकलीफ होने लगती है। अगर आप धूल से एलर्जिक हैं, तो इसका मतलब आपके इम्यून सिस्टम को खतरा है। जिन लोगों का इम्यून सिस्टम अच्छा होता है, वे भी कई बार डस्ट एलर्जी की चपेट में आ जाते हैं। अगर आपको बार-बार धूल की वजह से जÞुकाम या गला खराब होता है, तो इसका मतलब आपका इम्यून सिस्टम कमजोर है।</p>
<p><strong>आपकी लाइफस्टाइल</strong>, डाइट और वर्कआउट रुटीन इम्यूनिटी को मजबूत बनाने का काम करते हैं। ऐसे कई सुपरफूड्स हैं, जिनमें कई पोषक तत्व होते हैं, जो शरीर पर बुरा असर नहीं करते। अदरक के समान लहसुन भारतीय और दक्षिणी एशियाई व्यंजनों में नियमित रूप से उपयोग किया जाने वाला एक लोकप्रिय सुपरफूड है। इसमें कमाल की इम्यूनिटी बूस्टिंग और एंटी-इंफ्लामेटरी गुण होते हैं।</p>
<p><strong>अदरक एक और पॉपुलर सुपरफूड है</strong>, जिसमें कई तरह की हीलिंग प्रोपरटीज होती हैं। धूल से होने वाला कंजेशन और सूजन को अदरक कम करने का काम करता है। प्याज में क्वेरसेटिन नामक तत्व होता है। यह घटक हिस्टामाइन के उत्पादन को कम करने में मदद करता है। हिस्टामाइन एक यौगिक है, जो शरीर एलर्जी की प्रतिक्रिया के रूप में जारी करता है जो सूजन, भीड़ आदि का कारण बनता है।</p>
<p><strong>शहद एक और ऐसा सुपरफूड है</strong>, जो कई तरह के फायदों से भरपूर है। इसके एंटी.इंफ्लामेटरी गुण एलर्जी के लक्षणों को कम करने का काम करते हैं। दही जैसे अन्य फूड्स जो प्रोबायोटिक से भरपूर होते हैं, शरीर को कई रैडिकल्स और इंफेक्शन से लड़ने की ताकत देते हैं। इसमें एंटी.इंफ्लामेटरी गुण भी होते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 13 Jun 2022 16:03:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अरनेठा मेगा हाईवे पर डामरीकरण में लापरवाही से हादसों का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कस्बे के मेगा हाइवे पर पिछले कुछ दिनों से हो रहे डामरीकरण सड़क निर्माण कार्य में लापरवाही देखने को मिली हैं। हाईवे पर अधूरा निर्माण कार्य छोड़ने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/risk-of-accidents-due-to-negligence-in-asphaltization-on-arnetha-mega-highway/article-11215"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/sadak.jpg" alt=""></a><br /><p>अरनेठा। कस्बे के मेगा हाइवे पर पिछले कुछ दिनों से हो रहे डामरीकरण सड़क निर्माण कार्य में लापरवाही देखने को मिली हैं। हाईवे पर अधूरा निर्माण कार्य छोड़ने से आए दिन दुर्घटनाएं हो रही है। <br /><br />पूर्व सरपंच मोहनलाल सामरिया ने बताया परिवार के साथ आवश्यक कार्य से कापरेन गया था। जाते समय व वापस आते समय बाइक दो जगह गिरते गिरते बची हैं। ईश्वर का शुक्रिया  किसी प्रकार की चोट नही हैं। वर्तमान समय में सड़क पर जो डामरीकरण कार्य हो रहा हैं उसमे भारी लापरवाही की जा रही हैं। मेगा हाइवे  के दोनों किनारे सफेद पट्टी के बाहर किसी प्रकार डामर नही करके उसको वैसा का वैसा ही गड्डे दार जर्जर छोड़ा जा रहा हैं बल्कि मशीनी सफाई के दौरान कुछ कंक्रीट,धूल मिट्टी को उस किनारे पर और छोड़ा जा रहा हैं जो विभाग की बहुत बड़ी लापरवाही हैं। ज्यादातर दुपहिया वाहन उस सफेद पट्टी के अंदर ही चलते हैं जो फिसल कर गिर रहे हैं और चोटिल हो रहे हैं। डामर करने वाली मशीन ठीक प्रकार से दबाने से सड़क उबड़ खाबड़ हो चुकी है। जिससे दुपहिया वाहन चलाते समय चालक और बाइक पर बैठे व्यक्तियों को झटके लगते है। <br /><br />दूर से देखने पर सड़क निर्माण कार्य आपको अच्छा दिख सकता हैं लेकिन जब पास जाकर गौर करके देखोगे आपको अनेक जीवन से खिलवाड़ वाली कमियां नजर आएगी। मुख्य बिंदु हैं मेगा हाइवे पर जिस प्रकार की क्वालिटी दिखनी चाहिए वो नजर नही आ रही हैं। प्रशासन व जिम्मेदारों  से आग्रह हैं एक बार मेगा हाइवे का सूक्ष्म दृष्टि से निरीक्षण करे और आमजन के जीवन से जुड़ा हुआ। मुद्दा देखकर उचित कार्यवाही करे। ताकि बड़ी दुर्घटनाओं को टाला जा सके ।<br /><br />मैंने संबंधित अधिकारी को बोल दिया है। सफाई पूरी चौड़ाई में करेंगें। डामरीकरण की पहली परत ट्रैफिक वाली 7 मीटर चौड़ाई में व अगली परत पूरी 10 मीटर चौड़ाई में ही करेंगें।  <strong>-वीके जैन, एसई पीडब्लूडी विभाग, बूंदी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/risk-of-accidents-due-to-negligence-in-asphaltization-on-arnetha-mega-highway/article-11215</link>
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                <pubDate>Fri, 03 Jun 2022 15:44:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एक बेड पर तीन तीन मरीज, संक्रमण का खतरा बढ़ा</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के बड़े अस्पताल जेकेलोन में मौसमी बीमारियों के साथ उल्टी दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या दुगनी हो गई है। संभाग का बड़ा अस्पताल होने से यहां कोटा के अलावा बूंदी,बारां, झालावाड़ से मरीज रेफर होकर आते है। ऐसे में एक बेड पर तीन बच्चों को लेटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/three-patients-on-one-bed--increased-risk-of-infection/article-10485"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/jk-lone-ek-bed-par-teen-kota-news-26.5.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।  मई माह की शुरुआत के साथ ही संभाग के बड़े अस्पताल जेकेलोन में मौसमी बीमारियों के साथ उल्टी दस्त और बुखार के मरीजों की संख्या दुगनी हो गई है। संभाग का बड़ा अस्पताल होने से यहां कोटा के अलावा बूंदी,बारां, झालावाड़ से मरीज रेफर होकर आते है। ऐसे में एक बेड पर तीन बच्चों को लेटाकर ड्रिप चढ़ाई जा रही है। वहीं अस्पताल प्रशासन इसको सामान्य स्थिति बता रहा है। जबकि हकीकत ये है कि अस्पताल के जनरल वार्ड में एक बेड पर दो और तीन बच्चों के साथ उनकी मां भी लेटी है। ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ गया है। अस्पताल में मरीजों के साथ आए तीमारदार भी वार्ड में रूके होने से अस्पताल में भीड़ के हालत बने हुए है। <br /><br /><strong>एक बेड पर दो से तीन बच्चों का हो रहा इलाज</strong><br />जेकेलोन अस्पताल में नवजात शिशुओं के साथ इन दिनों मौसमी बीमारियों से ग्रसित मरीजों की संख्या में भी इजाफा हुआ है। अस्पताल के जनरल वार्ड में एक बेड पर दो और तीन बच्चों को लेटाकर इलाज किया जा रहा है। शहर में गर्मी बढ़ने के साथ ही उल्टी दस्त, पेट दर्द, बुखार के मरीजों की संख्या बढ़ गई है। अस्पताल के सभी वार्ड इन दिनों फुल चल रहे है। <br /><br /><strong>मरीजों के साथ आए तीमारदारों का होेता है जमावड़ा</strong><br />जेकेलोन के सभी वार्ड में मरीजों संख्या से ज्यादा संख्या तीमारदारों की नजर आ रही है। एक बेड पर पहले ही दो बच्चे सो रहे उसकी देखभाल के लिए मां और उसके साथ दो से तीन तीमारदार वार्ड में बैठ हुए जिससे गर्मी के चलते वार्ड में सफकैशन जैसे हालात बने हुए है। अभी कोरोना संक्रमण गया नहीं हुआ ऐसे में संक्रमण फैलने का खतरा बना हुआ।  अस्पताल में पहले गंभीर रूप होने पर ही जेकेलोन अस्पताल में बच्चे आते उस पर लोगों के जमावड़े से वार्ड अनहाईजेनिक हो रहा है । जिससे संक्रमण के हालात बन सकते है। <br /><br /><strong>पर्ची काउंटर  पर मरीजों को  करना पड़ रहा इंतजार</strong><br />जेकेलोन अस्पताल में पर्ची काउंटर से लेकर जांच और दवा काउंटर हर जगह लाइनों से मरीजों को दोजार होना पड़ रहा है। पर्ची बनाने के लिए एक मरीज को 15 से 20 मिनट कतार में इंतजार करना पड़ रहा है। अस्पाताल में निर्माण कार्य चलने से पहले ही मुख्य द्वार बंद ऐसे में मरीजों को घूमकर अस्पताल पहुंचना पड़ता   है। अस्पताल के प्रवेश द्वार पर नालिया टूटी होने से लोगों गंदे पानी से होकर अस्पताल में प्रवेश करना पड़ता जिससे हर समय संक्रमण का खतरा बना हुआ है। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br />मौसमी बीमारियों के मरीजों की संख्या में मई पहले पखवाडे के साथ ही बढोत्तरी हुई है। अस्पताल में पर्याप्त सुविधा है। बेड की अभी कोई परेशानी नहीं है। तीमारदारों की भीड़ को कम करने के लिए सुरक्षा गार्ड को पाबंद किया जाएगा। <br /><strong>- डॉ. एच एल मीणा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 15:12:12 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>देश में 80 से 90% दूध मिलावटी, घातक बीमारियों का खतरा, हाई कोर्ट में रखी रिपोर्ट में हुआ खुलासा</title>
                                    <description><![CDATA[विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियां कैंसर आदि का शिकार हो सकते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/chandigarh--80-to-90--of-milk-adulterated-in-the-country--the-risk-of-fatal-diseases--revealed-in-the-report-placed-in-the-high-court/article-10299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/milk.jpg" alt=""></a><br /><p>चंडीगढ़। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) तथा केंद्र सरकार के मंत्रालयों की रिपोर्ट का हवाला देते हुए दाखिल जनहित याचिका में बताया गया कि देश में मिल रहे दूध व दूध से जुड़े 80 से 90 प्रतिशत उत्पाद मिलावटी हैं। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने इसे रोकने के लिए उठाए कदमों की जानकारी दी। इस जानकारी को रिकार्ड में रखते हुए पंजाब एवं हरियाणा हाई कोर्ट ने आगे भी इसी प्रकार जांच जारी रखने का आदेश दिया है। सर्विंग इन आगेर्नाइजेशन इन लीगल इनिशिएटिव संस्था ने एडवोकेट कीरत पाल सिंह के माध्यम से याचिका दायर कर बताया कि प्रकाशित एक आर्टिकल में बताया है कि भारत के 70 प्रतिशत से अधिक दुग्ध उत्पाद राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा मानकों पर सही नहीं उतरे हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन की रिपोर्ट में कहा गया है कि अगर भारत के दुग्ध उत्पादों की जांच नहीं की गई तो 2025 तक 87 प्रतिशत भारतीय घातक बीमारियां कैंसर आदि का शिकार हो सकते हैं।</p>
<p> </p>
<p>विज्ञानं एवं तकनीकी मंत्रालय की रिपोर्ट के अनुसार 89.2 प्रतिशत दुग्ध उत्पादों में किसी न किसी तरह की मिलावट पाई है। हाई कोर्ट को बताया गया कि भारत दुग्ध उत्पाद के मामले में विश्व के अग्रणी देशों में शामिल है, लेकिन यहां मिलावटी दुग्ध उत्पाद कहीं ज्यादा है। अगर आंकड़ों को देखें तो तो देश में 14 करोड़ लीटर दूध का उत्पादन होता है, जबकि खपत 65 करोड़ लीटर है। उत्पादन और खपत के बीच अंतर से साफ है कि मांग मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों से पूरी की जा रही है।  केंद्र सरकार समय-समय पर मिलावटी दूध और दुग्ध उत्पादों की जांच के निर्देश जारी करती है बावजूद इसके इन निदेर्शों का पालन सख्ती से नहीं हो रहा। याची ने हाई कोर्ट से अपील की कि केंद्र सहित राज्य सरकारों को निर्देश जारी कर दूध और दुग्ध उत्पादों की नियमित जांच सुनिश्चित की जाए और आम लोगों को जागरूक किया जाए कि वह कैसे मिलावटी दुग्ध उत्पादों की जांच कर सकते हैं। हरियाणा, पंजाब व चंडीगढ़ ने जवाब दाखिल करते हुए बताया कि नियमित जांच जारी है। हाईकोर्ट ने जांच को भविष्य में भी ऐसे ही जारी रखने का आदेश देते हुए याचिका का निपटारा कर दिया।<br /><br /><strong>नकली दूध बनाने में घातक पदार्थों का होता है इस्तेमाल</strong><br />हाई कोर्ट को बताया गया कि नकली दूध बनाने में घातक डिटर्जेंट, कास्टिक सोडा, सफेद पेंट, हाईड्रोपेरॉक्साइड, वनस्पति तेल, फर्टिलाइजर जैसे घातक पदार्थों का इस्तेमाल होता है। यह सभी पदार्थ मानवीय स्वास्थ्य के लिए घातक हैं और कैंसर जैसे कई घातक रोगों का कारक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 16:38:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>40 से 60 वर्ष के लोगों को एटिपिकल पार्किंसनिज्म का खतरा ज्यादा</title>
                                    <description><![CDATA[जब मस्तिष्क के अन्य हिस्सों में भी न्यूरोडीजेनेरेशन होने लगे तब उसे एटिपिकल पार्किंसनिज्म कहा जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--health-news--people-aged-40-to-60-are-at-higher-risk-of-atypical-parkinsonism/article-9999"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/atipycal-parkinsonism.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। एटिपिकल पार्किंसनिज्म एक प्रकार का न्यूरोडिजेनरेटिव डिसऑर्डर है। जब मस्तिष्क के अन्य हिस्सों में भी न्यूरोडीजेनेरेशन होने लगे तब उसे एटिपिकल पार्किंसनिज्म कहा जाता है। नारायणा मल्टीस्पेशियलिटी हॉस्पिटल जयपुर के न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. मधुकर त्रिवेदी ने बताया कि एटिपिकल पार्किंसनिज्म और पार्किंसन डिजीज को पहचानना और दोनों का अलग-अलग इलाज करना इसलिए जरूरी है, क्योंकि टिपिकल पार्किंसन डिजीज के मरीजों पर लेवोडोपा दवा का असर काफी अच्छा होता है, लेकिन एटिपिकल पार्किंसनिज्म डिजीज वाले मरीजों पर ये दवा उतनी असरदार नहीं होती है। इसलिए हम मरीज के कुछ सामान्य टेस्ट और उसकी हिस्ट्री के आधार पर यह पता लगा लें की उसे दोनों में से कौन सी बीमारी है। अधिकतर एटिपिकल पार्किंसनिज्म 40 से 60 वर्ष की आयु वाले लोगों में देखा जाता है। अधिकांश लोगों में इसे पूरी तरह से रोक पाना संभव नहीं होता है।</p>
<p><br /><strong>लक्षण:</strong> टिपिकल पार्किंसन शरीर के एक हिस्से से शुरू होती है, जबकि एटिपिकल पार्किंसनिज्म पूरे शरीर पर असर करता है। हाथों में कंपन की शिकायत कम होती है। याददाश्त कमजोर हो सकती हैं। यह ज्यादा तेजी से बढ़ता है।<br />इलाज: एटिपिकल पार्किंसनिज्म के शुरुआत में मरीज को लेवोडोपा दवा देते हैं और लक्षणों के आधार पर कुछ और दवाइयां दी जाती है। इसमें फिजियोथैरेपी और फिजिकल एक्टिविटी बहुत महत्वपूर्ण है। मरीज को प्रोटीन युक्त खाना देना चाहिए, जिससे कि उनका वजन कम ना हो।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 May 2022 16:50:54 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>पाइप टूटने से दूषित पानी पीने को मजबूर शहरवासी,बीमारियां फैलने का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[ शहर के वार्ड 45 में गलियां कीचड से सनी हुई है। वहीं वार्डवासी दूषित पानी पीने को मजबूर है। कॉलोनी की कई गलियों में पानी भरा हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/citizens-forced-to-drink-contaminated-water-due-to-pipe-break--risk-of-spreading-diseases/article-7845"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/dushit-paani-baran.jpg" alt=""></a><br /><p>बारां। शहर के वार्ड 45 में गलियां कीचड से सनी हुई है। वहीं वार्डवासी दूषित पानी पीने को मजबूर है। कॉलोनी की कई गलियों में पानी भरा हुआ है। जहां पैदल तो क्या लोग वाहनों से भी बडी मुश्किल से निकल पा रहे हैं। घरों के आगे बरसों से कीचड युक्त पानी भरा हुआ है। नगर परिषद द्वारा आधी गली में सीसी व नाली तो बनाई, लेकिन आगे सीसी रोड व नाली नहीं बनाने से पानी निकासी नहीं हो रही है। इस कारण घरों का पानी रोड पर जमा हो रहा है। <br /><br /> हिन्दू जागरण मंच के राष्ट्रीय अध्यक्ष महेश खुराना ने वार्ड नंबर 45 शिव कॉलोनी का दौरा किया। जहां मूलभुत सुविधाओं के नाम पर कुछ नहीं था। लगभग वार्ड पार्षद के चुनाव बीते डेढ साल हो गए, लेकिन वार्ड में विकास के नाम पर कुछ नहीं किया है। वहीं नगर परिषद सभापति कहते हैं कि वार्डों में विकास कार्यों के लिए बजट नहीं है। गली में गंदगी, मक्खी, मच्छर पनपने से वार्डवासियों को मलेरिया, डेंगू आदि महमारी फैलने की पूर्ण संभावना है। खुराना ने कहा कि नालियों से पीने के पानी के पाइप जा रहे हैं। कई पाइप तो क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। ऐसे में दूषित पानी पीना पड रहा है और लोग बीमार हो रहे हैं। वहीं वार्ड में देखा कि लोगों के घरों के पास से 11केवी लाइन के तार निकल रहे हैं। इनसे भी दुर्घटना की आशंका रहती है। एक घर के पास ट्रांसफार्मर लगा हुआ है, जिस पर सैकडों  तार एक दूसरे से जुडे हुए हैं। ऐसे में इन तारों से चिंगारियां निकलने पर कभी भी बडा हादसा होने की आशंका रहती है। वार्डवासियों ने कहा कि पूर्व में इस समस्या से नगर परिषद सभापति को अवगत करा दिया गया है। साथ ही मंत्री प्रमोद जैन भाया को भी समस्या से अवगत कराया, लेकिन समस्या जस की तस बनी हुई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 14:37:26 +0530</pubDate>
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