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                <title>पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनवाएं, दस्तावेज भी रखें</title>
                                    <description><![CDATA[एमसीएक्स व सट्टा बाजार ला रहा अस्थिरता,सोच समझ कर करें निवेश, अस्थिर मार्केट में धैर्य बनाए रखें
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/make-sure-to-prepare-a-will-for-ancestral-jewelry-and-keep-the-documents/article-147801"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)62.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दे श में जिस तरह से पिछले कुछ समय से सोने-चांदी के भाव में तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है और पूरा बाजार अस्थिर बना हुआ है। उससे एक मध्यमवर्गीय परिवार से लेकर निवेशक तक के मन में सोने-चांदी की खरीद को लेकर  शंका का भाव बना हुआ है। इस संबंध में मंगलवार को दैनिक नवज्योति कार्यालय में टॉक शो का आयोजन किया गया। जिसमें शहर के सरार्फा,निवेशक, सलाहकार व अर्थशास्त्रियों से लेकर महिलाओं तक ने अपने विचार व्यक्त किए। जिनमें यही निष्कर्ष निकला कि बाजार जब स्थिर हो तभी सोने-चांदी में निवेश करें, जिससे लाभ होगा ही होगा। सोने-चांदी में निवेश सुरक्षित है। यह भविष्य  के लिए लाभकारी है।  टॉक शो में बरसों से सोने-चांदी का व्यापार करने वाले सरार्फा व्यापारियों ने अपनी-अपनी राय व्यक्त की। सभी का कहना था कि सोने-चांदी के भाव में जल्दी उतार-चढ़ाव होना अंतरराष्ट्रीय बाजार और डॉलर पर निर्भर है। वहीं पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनवाकर रखें और जितना भी सोना-चांदी खरींदें उसके बिल या दस्तावेज भी होना आवश्यक है। </p>
<p><strong>हड़बड़ी में निवेश करना गलत</strong><br />अंतरराष्ट्रीय बाजार डॉलर पर निर्भर है। जब सोने-चांदी में निवेश करना हो तो सोच-समझकर व जानकारी लेकर ही करना चाहिए। फिलहाल ईटीएप अच्छा विकल्प है। लोगों को छदम डिमांड के प्रति अवेयर रहना चाहिए। दूसरा जो कर रहा है उसके पीछे नहीं दौड़ना चाहिए। हड़बडी में निवेश करने से कई बार निर्णय गलत भी हो सकता है।  सोने में निवेश करना वैसे तो सुरक्षित है लेकिन यह निवेश तभी करें जब बाजार स्थिर हो या पिछले पांच साल में सबसे न्यूनतम स्तर पर रहा हो। भाव जिस तेजी से बढ़ते हैं उसी तेजी से कम भी होते हैं। ऐसे में कई लोग भाव बढने पर सोना-चांदी बेचने लगते हैं और भाव गिरने पर खरीदने लगते हैं।<br /><strong>-पंकज लड्ढ़ा, कंसलटेंट एवं इनवेस्टमेंट गुरु</strong></p>
<p><strong>एमसीएक्स अस्थिरता का कारण</strong><br />यदि बात की जाए तो एमसीएक्स दिन के साथ -साथ रातभर भी चलता हैं। वहीं जब तक सट्टा बाजार बंद नहीं हो जाता हैं तब तक यहीं शायद इसी तरह  की स्थिति रह सकती हैं। सट्टा बाजार में कुछ पैसे लगाकर भी लोग सोना चांदी खरीद लेते हैं। जिससे  भाव बढ़ते चढ़ते रहते हैं। यह बड़े निवेशकों का खेल है।  अस्थिर बाजार में फिजिकल सोना चांदी तो होता नहीं है। पहले पचास सौ रूपए भी भाव में उतार चढ़ाव होता था तो लगता था यह क्या है। लेकिन अब विश्व व्यापी स्तर पर बड़े खिलाड़ी ऐसा करवाते हैं।  सोने-चांदी के दामों में वृद्धि होने के कारण बाजार में इनकी डिमांड में कमी आई है। <br /><strong>-रमेश कुमार सोनी, अध्यक्ष स्वर्ण रजत कला उत्थान समिति </strong></p>
<p><strong>सोच-समझकर ही करें निवेश</strong><br />जिस तरह से कोई भी नया काम करने से पहले उसके बारे में जानकारी ली जाती है। उसी तरह से सोने-चांदी में निवेश करते समय पूरी जानकारी व सलाह के बाद ही निवेश करना चाहिए। सेंटीमेंट के आधार पर निवेश करना सही नहीं है।  निवेश एक जगह पर नहीं विविधता में करना चाहिए।  अंतरराष्ट्रीय स्तर पर जिस तरह का माहौल बना हुआ है उसमें तेल और कैश जिसके पास है वही जीत में है। सोने-चांदी का भविष्य सुरक्षित है। लेकिन इसमें तभी निवेश करें जब  बाजार स्थिर हो।  बाजार में अस्थिरता कुछ समय के लिए है। इसका कारण डॉलर व अंतरराष्ट्रीय बाजार है।  -प्रोफेसर गोपाल सिंह, अर्थशास्त्री </p>
<p><strong>बाजार अस्थिरता के मुख्य कारण </strong><br />1.वैश्विक प्रभाव का सीधा असर<br />2. रुपये की कमजोरी<br />3. त्योहार और शादी सीजन की मांग<br />4. ऊंचे भाव के कारण मांग में गिरावट<br />5. स्थानीय बाजार में खरीद क्षमता कम होना<br />6.सट्टेबाजी और एमसीएक्स ट्रेडिंग <br />7.चांदी की औद्योगिक मांग<br />8.ग्राहकों का इंतजार (वेट एंड वाच ट्रेंड)</p>
<p><strong>सही जानकारी का अभाव</strong><br />देश दुनिया में जिस तरह से सोने-चांदी के भाव में तेजी से बदलाव हो रहा है। उससे अधिकतर युवाओं के मन में आशंका बनी हुई है। युवा अधिकतर सोशल मीडिया पर चलने वाली खबरों से प्रभावित हो रहा है। जबकि सही जानकारी का अभाव होने से गलत समय पर निवेश होना खतरनाक हो रहा है। अंतरराष्ट्रीय बाजार में जिस तरह की स्थिति बनी हुई है।  उससे करीब 90 फीसदी लोगों को समझ ही नहीं आ रहा कि वे क्या करें। निवशकों के लिए हालात खराब हैं। स्थिरता का इन्तजार करें।   <br /><strong>-नुपुर खंडेलवाल, सीएस</strong></p>
<p><strong>आम आदमी की रेंज से हो रहा बाहर</strong><br />मैं करीब नौ साल से सोने-चांदी की दुकान का संचालन करती हूं। अभी इनके भाव बढ़ने के कारण मार्केट में लोअप मिडिल और लोअर क्लास की ग्राहकी पर काफी असर पड़ा हैं। अब खरीद के लिए लोग कम आते हैं।  इनके भाव स्थिर रहें तो ग्राहक का लेने का मन करता हैं। वहीं मैं ग्राहकों को  यही कहना चाहूंगी कि वे जब भी ज्वैलरी खरीदे हमेशा हॉलमार्क वाली ही खरीदें । जिससे फ्रॉड होने की संभावना नहीं रहती हैं। आप जब भी उसे निकालेंगे उस पर बाजार भाव का पैसा मिलेगा। <br /><strong>-मधुबाला माहेश्वरी, ज्वैलरी व्यापारी सिल्वर पैलेस</strong></p>
<p><strong>हड़बड़ी में न तो खरीदें और न ही बेचें</strong><br />सोने-चांदी के भाव में जिस तेजी से उतार-चढ़ाव हो रहा है उससे बाजार में अस्थिरता बनी है। लेकिन यह लेकिन यह अधिक समय तक नहीं रहेगी। फिर भी सोने-चांदी में निवेश करने से पहले व्यक्ति हो या निवेशक उसे अपनी हैसियत देखकर ही निवेश करना चाहिए। एक बार निवेश करने के बाद इसमें धैर्य रखने की जरूरत होती है। हड़बड़ी में न तो खरीदें और न ही बेचें। सोने-चांदी का भविष्य सुनहरा है। इसमें निवेश भी सुरक्षित है। लेकिन पूरी जानकारी लेने के बाद और सही समय पर ही निवेश करें। <br /><strong>-सुरेन्द्र गोयल विचित्र, अध्यक्ष सरार्फा बोर्ड</strong></p>
<p><strong>पुश्तैनी जेवरात की वसीयत जरूर बनाएं</strong><br />सोना-चांदी सबसे सुरक्षित धन के रूप में माना जाता है। घर में महिलाएं आर्थिक सुरक्षपर विवाहित महिला 500 ग्राम तक, अविवाहित महिला 250 ग्राम तक और पुरुष 100 ग्राम तक सोना-चांदी रख रखता है। लेकिन इनका पक्का बिल होना चाहिए। वहीं जिन लोगों को विरासत में या पुश्तैनी सोना व जेवरात मिलते हैं उनकी वसीयत जरूर होनी चाहिए। जिससे वे किसी भी मुसीबत में नहीं पड़ सकेंगे। जेवरात की वसीयत सादा कागज पर भी बनाई जा सकती है। इसके लिए नोटरी की आवश्यकता नहीं होती। <br /><strong>-नरेन्द्र डाबी, कानूनी सलाहकार</strong></p>
<p><strong>कमोडिटी पर लगे लगाम</strong><br />भारतीय संस्कृति में हमेशा से ही सोने- चांदी खरीदने का चलन रहा हैं। अस्थिरता और उतार चढ़ाव ने लोगों के जीवन पर काफी प्रभाव डाला है। भाव नियंत्रण पर सरकार को ठोस कदम उठाने चाहिए।  क्योकि कमोडिटी में एक लाख लगाकर इंसान एक किलो सोना खरीद सकता हैं। यह गलत है। जिसके चलते कमोडिटी पर लगाम होना चाहिए जिससे इनके भावों में वृद्धि को रोका जा सकता हैं और जिससे ग्राहकों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़ेगा हैं। <br /><strong>-मनीष कुमार मूंदड़ा , एक्सपोर्टर, राधा माधव आॅरनामेन्ट  </strong></p>
<p><strong>बड़े खिलाड़ी ला रहे अस्थिरता</strong><br />आप देख सकते हैं। जब से सोने -चांदी में वायदा की लेन-देन एमसीएक्स   में आया तब से इनमें अस्थिरता रहने लगी। पहले हम देखते थे कि जब आॅफ सीजन होता था तब भाव कम होते थे और सीजन में बढ़ जाते थे। पर अब ऐसा नहीं होता हैं। पहले चुनावी साल में अधिकतर इन धातुओं के भाव बढ़ जाते थे। पर अब कुछ नहीं कह सकते हैं।  सन 1965 के आसपास सिल्वर व 1974 में सोना की वायदा बाजार में ी एंट्री हुई।   सन 2005 में  इंडिया में एमसीएक्स की एंट्री हुई।  1980 से 2002 तक इंडिया की करैंसी में डिफे्ररेंट  रहा। वहीं अभी करीब चाइना और इंडिया ही इनका सबसे  बड़ा बाजार हैं।  <br /><strong>-सीताराम सोनी, पूर्व अध्यक्ष स्वर्ण रजत कला उत्थान समिति  </strong></p>
<p><strong>सोने में निवेश सुरक्षित है</strong><br />सोने में निवेश करना सुरक्षित है। लेकिन यह सोच समझकर ही करना चाहिए। अपनी जमा पूंजी या एफडी तोड़कर सोने में निवेश करना गलत है। जिस तरह से बाजार में स्थिति बनी हुई है यह वायदा बाजार के कारण है। सोना -चांदी सही समय पर ही खरीदना चाहिए जब बाजार स्थिर हो। भाव में तेजी से उतार-चढ़ाव को अंजाम देने में एक लॉबी काम करती है। सोना हमेशा हॉल मार्क वाला ही खरीदना चाहिए। जिससे उसकी वैद्यता बनी रहती है। <br /><strong>-विवेक कुमार जैन, दिव्यांश हालमार्किंग</strong></p>
<p><strong>महंगाई बढने से कम हुई सोने की खरीद</strong><br />सोने-चांदी के भावों में जिस तरह से तेजी हुई है।  इससे महंगाई बढ़ी है। इस महंगाई के दौर में सोने-चांदी की खरीद कम हो गई है। हर परिवार में बेटी की शादी पर परिवार वाले उसे अपनी हैसियत के हिसाब से जेवरात देते हैं। महंगाई के इस दौर में सरकार को चाहिए कि बेटी की शादी  में दिए जाने वाले जेवरात पर छूट का प्रावधान किया जाए। जैसे रजिस्ट्री में महिलाओं को छूट दी जाती है वैसा कुछ नियम बनाया जाना चाहिए।  विशेष रूप से सोने-चांदी की खरीद पर जीएसटी में कमी हो। <br /><strong>-भारती मूंदड़ा, गृहिणी</strong></p>
<p><strong>विश्व स्तर पर काम कर रही लॉबी</strong><br />सोने-चांदी के भाव में जिस तरह से तेजी से बदलाव हो रहा है। इसका कारण अधिकतर वायदा बाजार है। वर्तमान में इस क्षेत्र में जो उतार-चढ़ाव हो रहा है उसमें विश्व स्तर की लॉबी काम कर रही है। यह लॉबी 2024 से ही चल रही है। डॉलर के मुकाबले रूपया कमजोर हुआ है। सोने-चांदी का भाव डॉलर पर निर्भर करता है। एमसीए बाजार पर सरकार का नियंत्रण नहीं है।ऐसे में बाजार में अस्थिरता बनी हुई है। <br /><strong>-अरूण कुमार जैन, अध्यक्ष सरार्फा थोक विक्रेता व्यावसायिक संघ  </strong></p>
<p><strong>महिलाओं की आर्थिक सुरक्षा प्रभावित</strong><br />सोना-चांदी महंगी होने के बाद भी थोड़ी-थोड़ी बचत करके ही इनको खरीद सकते हैं। वहीं कुछ मां -बाप की आर्थिक स्थिति सहीं है तो वहां थोड़ा-थोड़ा करके भी दे सकते हैं। और इसमें इनवेस्ट भी कर सकते हैं। भारत में महिलाओं को  हर मां -बाप आर्थिक सुरक्षा के लिए स्त्री धन के रूप में अपनी बेटी को शादी में भारतीय परंपरा अनुसार जो जरूरी गहने होते हैं वह देते  हैं। बाजार की उथल पुथल से इसमें कमी आ गई है। भाव बढ़ने से लोग खरीद करने से पहले सोचते हैं। <br /><strong>-आरती डाबी, समाज सेविका , न्याय विज्ञान संस्थान</strong></p>
<p><strong>युवा पीढ़ी का सोना -चांदी से मोह भंग</strong><br />सोने चांदी के प्रति मोह में कमी आई है। अब लोग सोना चांदी केवल इनवेस्टमेंन्ट कोे लिए खरीदते और बेचते हैं।  वहीं अब सोने-चांदी की रेट बढ़ जाती है। तब इनको बेचा जाता हैं। वहीं कई बार लगातार रेट कम होने से जनता को भ्रम पैदा हो जाता हैं। हमारे घर में बीते दिनों में इनकी खरीदारी की अब इनके भाव में कमी - बढ़ोतरी होने के हम कई बार सही निर्णय नहीं ले पाते हैं। युवा पीढ़ी सोना - चांदी नहीं खरीद रही। आज का  युवा  आर्टिफिशीयल ज्वैलरी की तरफ ज्यादा ध्यान दे रहे हैं। <br /><strong>-दीप्ति मेवाड़ा, पे्रसिडेंट, जेडीबी कामर्स कॉलेज </strong></p>
<p><strong>हॉलमार्क की जागरूकता जरूरी</strong><br />भाव बढ़ने के कारण अब ग्राहकी कम हो गई। अभी करीब हम सोने पर 20 और 22 कैरेट  पर हॉलमार्क लगा रहे हैं। डायमंड पर करीब 14 कैरेट पर हॉलमार्क लगाया जाता हैं। हाल मार्क में छह डिजिट की लोगों को जानकारी नहीं होती है। इसकी जानकारी होना चाहिए। अक्सर लोग ज्वैलरी में  में बारीक या छोटे नग लगाते है तो वह भी वजन में काउंट होते हैं जब कि पुराने सोने की स्थिति में उनहों गला कर लिया जाता है। <br /><strong>-योगेश सोनी, हॉलमार्क सेन्टर व्यापारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 25 Mar 2026 12:22:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>जापान की 11 कम्पनियां राजस्थान में करेगी 1338 करोड़ का निवेश</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में जापान की कम्पनियों ने प्रमुखता से निवेश किया और जापानी निवेश राजस्थान में उद्यमियों के लिये प्रेरणा स्रोत रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/alwar/alwar-11-companies-will-invest-1338-crores-in-state/article-13877"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/46546546554.jpg" alt=""></a><br /><p>अलवर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि राजस्थान में जापान की कम्पनियों ने प्रमुखता से निवेश किया और जापानी निवेश राजस्थान में उद्यमियों के लिये प्रेरणा स्रोत रहा है। अब जापान की कम्पनियों को बाड़मेर में बन रहे पैट्रोकैमिकल कॉम्पलैक्स, इनवेस्ट राजस्थान और स्किल डवलपमेंट सेंटर के निर्माण में निवेश कर एक अध्याय और लिखना चाहिए। गहलोत नीमराना स्थित डाईकिन जापानीज इंस्टीट्यूट ऑफ  मैन्यूफेक्चरिंग एक्सिलेंस में हुए एमओयू सेरेमनी को संबोधित कर रहे थे। गहलोत ने कहा कि जापानी जोन उद्यमियों में चर्चा का विषय रहता है। जापान की 11 कम्पनियों द्वारा किए गए एमओयू से 1338 करोड़ रुपए का निवेश आएगा। उन्होंने जापान की कम्पनियों से आह्वान किया कि वह पचपदरा में बन रही रिफाइनरी के पैट्रोकैमिकल कॉम्पलैक्स में भी निवेश करे। ग्रामीण क्षेत्रों के युवाओं को भी रोजगार देने के लिए स्किल डवलपमेंट सेंटर खोले। इनमें जो भी अपेक्षित सहयोग होगा। सरकार द्वारा दिया जायेगा।</p>
<p><strong>2008 में 10 जापान की कंपनियां थीं, अब 170</strong><br />भारत में जापान के राजदूत सुजुकी सतोशी ने कहा कि भारत और जापान का रिश्ता केवल द्विपक्षीय नहीं है अपितु असाधारण है। इसीलिए इसे स्पेशल स्ट्रेटेजिक एंड ग्लोबल पार्टनरशिप कहते हैं। गत मार्च में भारत और जापान के प्रधानमंत्रियों के बीच समिट में इस बात पर संतोष जताया कि 2014 में घोषित किए गए 3.5 ट्रिलियन जापनीज येन (लगभग 2 लाख करोड़) के निवेश का लक्ष्य प्राप्त कर चुके हैं। अब उन्होंने 5 ट्रिलियन जापनीज येन (लगभग 3 लाख करोड़ रुपए) को आगामी 5 वर्षों में जापान द्वारा भारत में निवेश करने का कार्य शुरू कर दिया है। गुरुवार को हुए एमओयू से लगभग 1300 करोड़ रुपए का निवेश होगा, जो कि 22 बिलियन येन है। प्रदेश में 2008 में जापान की कम्पनियों की संख्या 10 थी, जो 2021 में बढ़कर 170 हो गई है।</p>
<p><strong>राज्य में निवेश के नए आयाम स्थापित</strong><br />उद्योग मंत्री शकुन्तला रावत ने कहा कि मुख्यमंत्री की दूरदर्शिता से ही राज्य में निवेश के नये आयाम स्थापित हो रहे हैं। उद्योग विभाग ने हाल ही में प्रत्येक जिले में रोड शो करेंगे, जिससे वहां के पारम्परिक उद्योगों को प्रोत्साहन मिलेगा। अतिरिक्त मुख्य सचिव उद्योग वीनू गुप्ता व रीको के अध्यक्ष कुलदीप रांका ने राज्य सरकार द्वारा जापान की कम्पनियों को दिए जा रहे सहयोग की जानकारी दी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अलवर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Jul 2022 12:50:33 +0530</pubDate>
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                <title> अमेरिकी स्कूल में गोलीबारी मामला: बच्चों की सुरक्षा पर अधिक निवेश करना चाहिए: ट्रम्प</title>
                                    <description><![CDATA[ ट्रम्प ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित 40 अरब डॉलर के यूक्रेन सहायता पैकेज का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की। इस सहायता पैकेज पर राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हस्तारक्ष किए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/-america--should---invest---more----protecting---school-children--trump/article-10655"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/trump.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>वाशिंगटन। </strong> अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा कि देश के बच्चों को स्कूलों में हो रही गोलीबारी से बचाने के लिए और अधिक निवेश चाहिए। ट्रम्प ने टेस्सास प्रांत के ह्यूस्टन शहर में नेशनल राइफल एसोसिएशन (एनआरए) के वार्षिक सम्मेलन के दौरान शुक्रवार को कहा कि जब अमेरिका यूक्रेन को 40 अरब डालर का सहायता पैकेज दे सकता है तो उसे बच्चों को सुरक्षित रखने के लिए हर संभव प्रयास करना चाहिए।  <br /><br /> ट्रम्प ने हाल ही में अमेरिकी कांग्रेस द्वारा पारित 40 अरब डॉलर के यूक्रेन सहायता पैकेज का जिक्र करते हुए यह टिप्पणी की। इस सहायता पैकेज पर राष्ट्रपति जो बाइडेन ने हस्तारक्ष किए हैं।उन्होंने टेक्सास के उवाल्डे में एक प्राथमिक विद्यालय में छात्रों के समूह पर की गई गोलीबारी को 'जंगली और बर्बर अत्याचार बताते हुए कहा इस घटना ने हर अमेरिकी की अंतरात्मा को झकझोर है।उल्लेखनीय है कि इस गोलीबारी की घटना में 19 बच्चों और दो शिक्षकों की मौत हो गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 May 2022 13:19:00 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>भारत में इलेक्ट्रिक वाहन के लिए 104.4 अरब रुपए का निवेश करेगी सुजुकी </title>
                                    <description><![CDATA[वाहन निर्माता कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन (एसएमसी) भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और बैटरी के स्थानीय विनिर्माण के लिए 104.4 अरब रुपए का निवेश करेगी और इसके लिए उसने गुजरात के साथ करार किया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/company-will-invest-104-4-arab-for-electric-vehicles-in-india/article-6425"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/firing-copy11.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। वाहन निर्माता कंपनी सुजुकी मोटर कॉरपोरेशन (एसएमसी) भारत में इलेक्ट्रिक वाहन (ईवी) और बैटरी के स्थानीय विनिर्माण के लिए 104.4 अरब रुपए का निवेश करेगी और इसके लिए उसने गुजरात के साथ करार किया है। कंपनी ने बयान में बताया कि वह इलेक्ट्रिक वाहनों और बैटरी के स्थानीय विनिर्माण के लिए 10,440 करोड़ रुपये का निवेश करेगी।</p>
<p>एसएमसी सुजुकी मोटर गुजरात में इलेक्ट्रिक वाहनों की विनिर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए 31 अरब रुपए और इलेक्ट्रिक वाहनों की बैटरी विनिर्माण का एक संयंत्र स्थापित करने के लिए 7300 करोड़ रुपये का निवेश करेगी। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 20 Mar 2022 17:31:56 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>मुख्यमंत्री ने की इन्वेस्ट समिट की तैयारियों की समीक्षा, 1454 एमओयू-एलओआई को धरातल पर उतारें: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[अभी तक 6 लाख 16 हजार 462 करोड़ के हुए 1454 एमओयू व एलओआई]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61d3ec6bc83d3/article-3780"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/cm-meeting.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने कहा कि कोविड की विषम परिस्थितियों से प्रभावित अर्थव्यवस्था को गति देने के साथ निवेश और रोजगार बढ़ाने में इन्वेस्ट राजस्थान समिट महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी। सभी विभाग सहयोग और समन्वय की भावना से कार्य करें, ताकि अभी तक जो निवेश प्रस्ताव आए हैं वे धरातल पर उतर सकें। गहलोत सोमवार को मुख्यमंत्री निवास पर हुई बैठक में 24 व  25 जनवरी को होने वाली स्टेट इन्वेस्टर समिट की तैयारियों की समीक्षा कर रहे थे। मुख्यमंत्री गहलोत ने कहा कि समिट की तैयारियां अच्छी हों और निवेशकों को विभिन्न स्वीकृतियां प्राप्त करने में आसानी हो, यह सुनिश्चित किया जाए।</p>
<p><br />  उन्होंने 15 जनवरी तक संबन्धित विभागों से जुड़े एमओयू एवं एलओआई करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि अभी तक जो एमओयू एवं एलओआई किए गए हैं, उनकी क्रियान्विती समयबद्ध रूप से हो। उद्योगों के लिए जमीन आवंटन के मामले में राजस्व विभाग प्रो-एक्टिव होकर कार्य करे। साथ ही जिला कलक्टर स्तर पर निवेश के प्रस्तावों के जुड़ी प्रक्रिया समय पर पूरी की जाए। समिट के दौरान सोशल डिस्टेंसिंग एवं अन्य कोविड प्रोटोकॉल की पालना का ध्यान रखा जाए। उन्होंने इस समिट को वर्चुअल मोड पर भी रखने के निर्देश दिए ताकि अधिक से अधिक निवेशक और उद्यमी समिट से<br /> जुड सकें। <br /> <br /> <strong>चार लाख लोगों को मिलेगा रोजगार </strong><br /> बैठक में उद्योग विभाग के सचिव आशुतोष एटी पेडनेकर ने बताया कि अभी तक 6 लाख 16 हजार 462 करोड़ रुपए के कुल 1454 एमओयू व एलओआई हो चुके हैं, जिनके माध्यम से चार लाख से अधिक लोगों को रोजगार मिलेगा। समिट के उद्घाटन में राजस्थान पैट्रो जोन (पीसीपीआईआर), रिडको, फिनटैक पार्क, नए औद्योगिक जोन एवं नए औद्योगिक क्षेत्रों की लॉचिंग होगी। साथ ही राज्य सरकार की करीब 13 नई नीतियां लॉन्च की जाएंगी। समिट की पूर्व पिछले दो माह में देश एवं देश से बाहर संभावित निवेशकों से संपर्क किया गया है। <br /> <strong><br /> बैठक में ये रहे मौजूद </strong><br /> बैठक में कृषि मंत्री लालचंद कटारिया, खाद्य एवं नागरिक आपूर्ति मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, राजस्व मंत्री रामलाल जाट, उद्योग मंत्री शकुन्तला रावत, परिवहन मंत्री बृजेन्द्र सिंह ओला, ऊर्जा मंत्री भंवर सिंह भाटी, कृषि विपणन मंत्री मुरारी लाल मीणा, अतिरिक्त मुख्य सचिव ऊर्जा सुबोध अग्रवाल, राज्य प्रदूषण नियंत्रण मंडल की अध्यक्ष वीनू गुप्ता, अतिरिक्त मुख्य सचिव गृह अभय कुमार, प्रमुख शासन सचिव वित्त अखिल अरोरा सहित विभिन्न विभागों के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित थे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 04 Jan 2022 12:25:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>मोदी का इलेक्शन प्लान : भारत के बुनियादी ढांचे पर 100 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश का लक्ष्य</title>
                                    <description><![CDATA[विधान सभा चुनावों की ओर बढ़ रहे उत्तराखंड में 18000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%AE%E0%A5%8B%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%87%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8-%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%A2%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-100-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A1%E0%A4%BC-%E0%A4%B0%E0%A5%81%E0%A4%AA%E0%A4%AF%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%85%E0%A4%A7%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%AF/article-2931"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/modi1.jpg" alt=""></a><br /><p> देहरादून। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को कहा कि भारत, आधुनिक बुनियादी ढांचे पर 100 लाख करोड़ रुपए से अधिक के निवेश के इरादे से आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि आज भारत की नीति, गति शक्ति की है, दोगुनी-तीन गुनी तेजी से काम करने की है। उन्होंने कहा कि सड़क और संपर्क सुविधाओं के विकास से क्षेत्र में पर्यटन, तीर्थाटन और अन्य आर्थिक गतिविधियों का विकास होता है, अर्थव्यवस्था मजबूत होती है।<br /> <br />  मोदी विधान सभा चुनावों की ओर बढ़ रहे उत्तराखंड में 18000 करोड़ रुपये की परियोजनाओं का शिलान्यास एवं लोकार्पण करने के बाद यहां एक जनसभा को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि उनकी सरकार ने उत्तराखंड में एक लाख करोड़ रुपये की परियोजनाएं स्वीकृत की हैं। यहां की सरकार उन योजनाओं को 'जमीन पर उतार रही है। आज  यहां 18000 करोड़ की योजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया जा रहा है। मोदी ने कहा कि इस शताब्दी की शुरुआत में, तत्कालीन अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार ने भारत में कनेक्टिविटी (सम्पर्क सुविधाएं) बढ़ाने का अभियान शुरू किया था। प्रधानमंत्री ने इस बात पर अफसोस जाहिर किया कि वाजपेयी सरकार के समय शुरू किए गए राजमार्ग विकास अभियान को उसके बाद आयी सरकार ने बिखेर दिया। <br /> <br /> उन्होंने कहा, '' लेकिन उनके बाद 10 साल देश में ऐसी सरकार रही, जिसने देश का, उत्तराखंड का, बहुमूल्य समय व्यर्थ कर दिया। दस साल तक देश में इंफ्रास्ट्रक्चर के नाम पर घोटाले हुए, घपले हुए।''<br /> <br />  प्रधानमंत्री ने कहा कि उनकी सरकार ने बुनियादी संरचनाओं के विकास का काम फिर तेजी से आगे बढ़ाया है। उन्होंने कहा,'' इससे देश का जो नुकसान हुआ, उसकी भरपाई के लिए हमने दोगुनी गति से मेहनत की और आज भी कर रहे हैं।आज मुझे बहुत खुशी है कि दिल्ली-देहरादून आर्थिक गलियारा परियोजना का शिलान्यास हो चुका है।'' <br /> <br /> इससे उत्तराखंड तथा दिल्ली के बीच पडऩे वाले बागपत से शामली तक के जिलों में आर्थिक विकास को गति मिलेगी। उन्होंने कहा कि यह राजमार्ग परियोजना जब ये बनकर तैयार हो जाएगी तो, दिल्ली से देहरादून आने-जाने में जो समय लगता है, वह करीब-करीब आधा हो जाएगा। उन्होंने कहा कि केदार घाटी इस बात का उदाहरण है कि सड़क सम्पर्क बढऩे से पर्यटन और तीर्थाटन में तेजी आती है। केदारनाथ त्रासदी से पहले, 2012 में पांच लाख 70 हजार लोगों ने दर्शन किया था। ये उस समय एक रिकॉर्ड था। मोदी ने कहा कि सीमावर्ती पहाड़ी क्षेत्रों के इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी पहले की सरकारों ने उतनी गंभीरता से काम नहीं किया, जितना करना चाहिए था। <br /> <br /> उन्होंने कहा कि बॉर्डर के पास सड़कें बनें, पुल बनें, इस ओर उन्होंने ध्यान नहीं दिया जबकि कोरोना काल शुरू होने से पहले, 2019 में 10 लाख से ज्यादा लोग केदारनाथ जी के दर्शन करने पहुंचे थे, यानी केदार धाम के पुनर्निर्माण ने न सिर्फ श्रद्धालुओं की संख्या बढ़ाई बल्कि वहां के लोगों को रोजगार-स्वरोजगार के भी अनेक अवसर उपलब्ध कराए हैं, हमारे पहाड़, हमारी संस्कृति, आस्था के गढ़ तो हैं ही, ये हमारे देश की सुरक्षा के भी किले हैं।<br /> <br /> प्रधानमंत्री ने कहा कि देश में आज जो सरकार है, वह दुनिया के किसी देश के दबाव में नहीं आ सकती। उन्होंने कहा कि पहाड़ों में रहने वालों का जीवन सुगम बनाना देश की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में से एक है। मोदी ने कहा कि दुर्भाग्य से दशकों तक जो सरकार में रहे, उनकी नीति-रणनीति में दूर-दूर तक ये चिंतन कहीं था ही नहीं। साल 2007 से 2014 के बीच जो केंद्र की सरकार थी, उसने सात साल में उत्तराखंड में केवल 288 किलोमीटर नेशनल हाईवे बनाए। उन्होंने कहा, '' हमारी सरकार ने अपने सात साल में उत्तराखंड में दो हजार किलोमीटर से अधिक लम्बाई के नेशनल हाईवे का निर्माण किया है।''<br /> <br /> उन्होंने कहा, '' वन रैंक-वन पेंशन हो, आधुनिक अस्त्र-शस्त्र हो, आतंकवादियों को मुंहतोड़ जवाब देना हो, जैसे उन लोगों ने हर स्तर पर सेना को हतोत्साहित करने की कसम खा रखी थी।''</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 04 Dec 2021 16:37:33 +0530</pubDate>
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