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                <title>कम सैलरी, अधूरी ट्रेनिंग, कमजोर मनोबल, रूसी सैनिकों की बगावत का इतिहास पुराना, यूक्रेन में भी नहीं मान रहे ऑर्डर्स</title>
                                    <description><![CDATA[कमजोर मनोबल के साथ कब तक लड़ेंगे रूसी सैनिक?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/kyiv--moscow--low-salary--incomplete-training--weak-morale--history-of-uprising-of-russian-soldiers-is-old--orders-are-not-being-obeyed-even-in-ukraine/article-7319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/sainik.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव/मॉस्को। हाल के दिनों में ऐसी खबरें आई हैं कि यूक्रेन में आगे बढ़ने से रोक दी गई और कई सैन्य नाकामियों का सामना कर रही रूसी सेना ने अपने खुद के उपकरण नष्ट कर दिए हैं और उसने युद्ध लड़ने और आदेशों का पालन करने से इनकार कर दिया है। एक खबर में यहां तक कहा गया है कि उन्होंने अपने ही कमांडर पर हमला कर दिया। नाटो का अनुमान है कि दो महीने से भी कम वक्त में इस संघर्ष के दौरान करीब 15,000 रूसी सैनिक मारे गए है, जो अफगानिस्तान में नौ वर्षों में मारे गए सोवियत संघ (अब विघटित हो चुके) के सैनिकों के बराबर है। ऐसा बताया जा रहा है कि सैनिकों का मनोबल गिर गया है। ऐसी स्थिति में रूसी सैनिकों के विद्रोह करने की संभावना है। लड़ाई छोड़कर भागने से सेना का शारीरिक और मनोवैज्ञानिक उत्साह कम हो जाएगा, जबकि पाला बदलने या दुश्मन की सेना में शामिल होने से यूक्रेन को मदद मिल सकती है। यह पहली बार नहीं है जब रूसी या सोवियत सैनिकों ने किसी संघर्ष में आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है। रूस-जापान युद्ध के दौरान रूसी सैनिकों ने जून 1905 में विद्रोह कर दिया था जो इतिहास की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है।<br /><br /><strong>पहले भी बगावत कर चुके हैं रूसी सैनिक</strong><br />सुशिमा की लड़ाई में रूसी नौसेना का ज्यादातर बेड़ा नष्ट हो गया था और उसके पास कुछ गैर-अनुभव वाले लड़ाके बचे थे। बांसा मांस परोसे जाने समेत काम करने की खराब स्थितियों का सामना कर रहे 700 नाविकों ने अपने अधिकारियों के खिलाफ ही विद्रोह कर दिया था। द्वितीय विश्वयुद्ध में जोसेफ स्टालिन ने आत्मसमर्पण करने की ओर बिल्कुल बर्दाश्त न करने वाली नीति लागू करते हुए सैनिकों के बीच आज्ञाकारिता सुनिश्चित करने की कोशिश की थी। चेचन्या के साथ रूस के पहले संघर्ष (1994-96) में बड़ी संख्या में सैनिक जंग का मैदान छोड़कर भाग गए थे।<br /><br /><strong>कमजोर मनोबल के साथ कब तक लड़ेंगे रूसी सैनिक?</strong><br />युद्ध में पाला बदलना और मैदान छोड़कर भागना आम है। युद्ध की मुश्किलें, लड़ाई में खराब प्रदर्शन और युद्ध की वजह की वैचारिक प्रतिबद्धता के कम होने से सैनिक जंग का मैदान छोड़कर भाग सकते हैं। लेकिन रूसी सैनिक पहले ही मनोबल गिरने और सहयोग न मिलने की स्थिति को महसूस कर रहे हैं। अध्ययन से पता चलता है कि सैनिकों का मनोबल कम है, खासतौर से जिन्हें आधुनिक तकनीक नहीं आती हैं।<br /><br /><strong>अमेरिका की तुलना में 200 फीसदी कम वेतन पाते हैं रूसी सैनिक</strong><br />ऐसी खबरें हैं कि रूसी सेना अपनी संरचना में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है लेकिन इसके बावजूद रूस की अपनी सेना ने 2014 में बताया कि उसके 25 प्रतिशत से अधिक कर्मी अपनी इंफेंट्री के उपकरण नहीं चला पाए। हालांकि, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बदलावों के नतीजन सेना का बजट बढ़ गया लेकिन सैनिकों की तनख्वाह नहीं बढ़ी। अनुबंधित सैनिकों को उनके अमेरिकी समकक्षों के मुकाबले 200 प्रतिशत कम वेतन दिया जाता है।<br /><br /><strong>अपने सैनिकों का दिल नहीं जीत पा रहा रूस</strong><br />इन सभी कारणों से सैनिकों का मनोबल गिरा है और पाला बदलने तथा मैदान छोड़कर भागने की आशंका भी बढ़ी है। इससे निपटने के लिए रूसी जनरल अग्रिम मोर्चे पर जाकर लड़ रहे हैं ताकि सैनिकों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके कारण कम से कम सात जनरल की मौत हो गई है, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से रूसी सेना में जनरलों की सबसे अधिक मृत्यु दर है। रूस न केवल यूक्रेन के लोगों के दिल और दिमाग जीतने में नाकाम रहा है, बल्कि अब वह अपने सैनिकों का मन जीतने के लिए संघर्ष करता प्रतीत हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 13:09:34 +0530</pubDate>
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                <title>देश में चल रहे माहौल में युवा मनोबल ऊंचा बनाए रखें: सीएम</title>
                                    <description><![CDATA[महारैली के लिए यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई पदाधिकारियों को सौंपी जिम्मेदारी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9A%E0%A4%B2-%E0%A4%B0%E0%A4%B9%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A5%8C%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%B5%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A5%8B%E0%A4%AC%E0%A4%B2-%E0%A4%8A%E0%A4%82%E0%A4%9A%E0%A4%BE-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%8F-%E0%A4%B0%E0%A4%96%E0%A5%87%E0%A4%82--%E0%A4%B8%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%AE/article-2933"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/cm.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> जयपुर</strong>। 12 दिसंबर को जयपुर में होने वाली महंगाई के खिलाफ महारैली की तैयारियों को लेकर मुख्यमंत्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने कांग्रेस के अग्रिम संगठनों यूथ कांग्रेस और एनएसयूआई के पदाधिकारियों की शनिवार को सीएमआर में बैठक लेकर जिम्मेदारी सौंपी है। इस दौरान गहलोत ने कहा कि देश में चल रहे वर्तमान माहौल में युवा मनोबल ऊंचा बनाए रखें, पार्टी और देश के लिए निरंतर कार्य करते रहें। यूपीए को लेकर ममता बनर्जी के बयान पर कहा कि वे वाजपेयी सरकार में मंत्री रही है, जो नेता दोनों ओर जाते हैं, उन्हें देश स्वीकार नहीं करेगा। देश कांग्रेस के बगैर नहीं चल सकता। महारैली के लिए यूथ कांग्रेस को दस हजार और एनएसयूआई को सात हजार कार्यकर्ताओं को जयपुर लाने की जिम्मेदारी सौंपी है। शनिवार को एनएसयूआई एवं यूथ कांग्रेस के पदाधिकारियों तथा जिलाध्यक्षों ने मुख्यमंत्री निवास पर मुलाकात की। साथ ही 12 दिसंबर को जयपुर में हो रही महंगाई हटाओ महारैली के संबंध में चर्चा की। इस दौरान प्रदेश कांग्रेस के अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा एवं एनएचयूआई, यूथ कांग्रेस के प्रदेश प्रभारी साथ रहे। यूथ कांग्रेस की प्रदेश प्रभारी पलक वर्मा, सह प्रभारी मंजू तोमर, एनएचयूआई के प्रदेश प्रभारी गुरजोत सिंह संधु, यूथ कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष गणेश घोघरा, एनएसयूआई प्रदेश अध्यक्ष अभिषेक चौधरी उपस्थित रहे।<br /> <strong><br /> भाजपा नेता संसाधनों का दुरुपयोग कर झूठी बयानबाजी करते रहते हैं: गहलोत</strong><br />  मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने बीजेपी कार्यसमिति की बैठक और केन्द्रीय गृहमंत्री के दौरे को लेकर कहा है कि 2018 में हमारी सरकार बनने के बाद प्रदेश में हुए आठ विधानसभा चुनाव में से छह में कांग्रेस को जीत मिली है। यह हमारे सुशासन पर जनता का भरोसा है। दुनिया की सबसे बड़ी पार्टी बनने का दावा करने वाली भाजपा की इन चुनावों में जमानत तक जब्त हुई और तीसरे व चौथे स्थान पर रही। गहलोत ने कहा कि हार से घबराकर एवं बौखलाकर भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष, केन्द्रीय मंत्री एवं अन्य नेता संसाधनों का दुरुपयोग कर झूठी बयानबाजी करते रहते हैं। प्रदेश भाजपा का कार्यकारिणी प्रस्ताव झूठ का पुलिंदा है। किसान कर्जमाफी, किसान मित्र ऊर्जा योजना, कोविड प्रबंधन समेत हर मुद्दे पर इसमें केवल असत्य लिखा है। यह तथ्य और तर्को से परे है। कल अमित शाह आकर इस झूठ के पुलिंदे पर मुहर लगाएंगे। प्रदेश की जनता समझदार है। वो भाजपा का चाल, चरित्र और चेहरा पहचान चुकी है। पूर्व में भी गृहमंत्री को राजस्थान की जनता ने करारा जवाब दिया है और इस बार भी इनके झांसे में नहीं आएगी, चाहे कितना भी दुष्प्रचार कर लें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Dec 2021 11:22:26 +0530</pubDate>
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