<?xml version="1.0" encoding="utf-8"?>        <rss version="2.0"
            xmlns:content="http://purl.org/rss/1.0/modules/content/"
            xmlns:dc="http://purl.org/dc/elements/1.1/"
            xmlns:atom="http://www.w3.org/2005/Atom">
            <channel>
                <atom:link href="https://dainiknavajyoti.com/modern/tag-10195" rel="self" type="application/rss+xml" />
                <generator>Dainik Navajyoti Rising Rajasthan RSS Feed Generator</generator>
                <title>modern - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
                <link>https://dainiknavajyoti.com/tag/10195/rss</link>
                <description>modern RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>साल भर की पढ़ाई ही दिलाएगी सफलता, घबराएं नहीं</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[एग्जाम टिप्स: टीचर बोले पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीक एआई का भी लिया जाता सहारा ।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-year-long-study-will-lead-to-success--don-t-panic/article-142588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बोर्ड परीक्षाओं की पदचाप के बीच विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव को देखते हुए शिक्षा विशेषज्ञों ने सफलता के मूल मंत्र साझा किए हैं।वहीं दैनिक नवज्योति की खास रिपोर्ट में पढ़िए शिक्षकों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा कोई हौवा नहीं है; इसमें वहीं सवाल पूछे जाते हैं। जो छात्रों ने वर्षभर अपनी कक्षाओं में शिक्षकों से पढ़े हैं। उन्होंने जोर दिया कि नई अध्ययन सामग्री के पीछे भागने के बजाय छात्र अपने शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए पाठ्यक्रम और विषयवस्तु पर ही पूरा भरोसा रखें और उसी का गहन अभ्यास करें। समय प्रबंधन और छोटे लक्ष्यों से हासिल होगी जीत परीक्षा के दौरान समय का सही नियोजन ही सफलता की कुंजी है। वहीं टीचरों ने बताया कि समय-समय पर डिजिटल क्लास रूम में बच्चों को बैठकर आधुनिक तकनीकी से रूबरू करवाया जाता व पढ़ाई करवाई जाती।</p>
<p><strong>लिखकर याद करने का फॉमूर्ला </strong><br />अक्सर छात्र कठिन विषयों को देखकर तनाव में आ जाते हैं। इसके समाधान के लिए कठिन विषय वस्तुओं का बार-बार दोहरान करना आवश्यक है। जो हिस्से याद करने में कठिन लगें, उन्हें छोटे-छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखकर याद करें। हाथ से लिखे नोट्स मस्तिष्क में लंबे समय तक स्थायी रहते हैं।</p>
<p><strong>संवाद और आत्मविश्वास है जरूरी </strong><br />पढ़ाई के पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें और कठिन विषयों को पहले निपटाएं। पढ़ाई के बीच 5-10 मिनट का ब्रेक लें। पौष्टिक भोजन करें, पर्याप्त पानी पीएं। परीक्षा की रात अच्छी नींद लें, क्योंकि यह एकाग्रता और सोचने की क्षमता को बेहतर बनाती है। खुद पर विश्वास रखें और अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें। परिणाम के बारे में चिंता न करें। यदि तनाव हावी हो रहा है,तो दोस्तों,परिवार या शिक्षकों से बात करें। वहीं पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जाता हैं।<br /><strong>-सुनीता मेहरा, प्रिंसिपल महा. गांधी गवर्नमेंट स्कूल, महावीर नगर फर्स्ट कोटा </strong></p>
<p><strong> वर्षभर जो पढ़ा उसमें से ही प्रश्न पूछे जाते</strong><br />बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने के दौरान ये याद रखें कि जो आपने वर्षभर पढ़ा उस में से ही प्रश्न आते। अत: जो शिक्षकों ने पढ़ाया है उन्ही विषयवस्तुओं को आप अच्छे से पढ़ें। परीक्षा में कोई भी प्रश्न अनुत्तरित ना छोड़े। परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन अतिमहत्वपूर्ण है। प्रतिदिन विषयवार छोटे-छोटे उद्देश्य बनायें, उनको प्राप्त करें। जिससे आपका विषय पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा।कठिन विषयवस्तुओं का दोहरान करें। जो याद नहीं हो पा रहा उसे छोटे छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखें। मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें।वहीं समय-समय पर आधुनिक तकनीक जिसमे एआई समेत अन्य तकनीकों का सहारा लिया जाता।<br /><strong>- रूपेश गुप्ता, विज्ञान विषय, महा. गांधी राज. विद्या.,मल्टीपर्पज, गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong> संस्कृत व्याकरण का जुलाई से ही शुरू हो जाता है अभ्यास </strong><br />बोर्ड परीक्षा के नाम से छात्र-छात्राओं में भय व्याप्त हो जाता है। हम छात्रों को सत्र के प्रारंभ से ही बोर्ड पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन और प्रश्नोत्तर की तैयारी करवाते हैं। तीनों परख व प्री बोर्ड के प्रश्नों की संभावित बोर्ड प्रश्नों को आधार बनाकर प्रश्न पत्र तैयार करते हैं। संस्कृत विषय में व्याकरण महत्वपूर्ण है।जुलाई माह से ही पिछली कक्षाओं के व्याकरण को दोहराते हुए बोर्ड के निर्धारित पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर अधिक से अधिक बार पाठ्यक्रम को दोहराने का प्रयास करवाया जाता हैं। जिससे विद्यार्थी आत्मविश्वास से पूर्ण, विद्यार्थी तनाव मुक्त होकर परीक्षा देते हैं।<br /><strong>- नरेन्द्र कन्सूरिया, व्याख्याता संस्कृत, राउमावि, शिवपुरा</strong></p>
<p><strong>चार्ट और क्लास टेस्ट से होती है तैयारी </strong><br />कृषि विज्ञान में बोर्ड परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए विषयों का विस्तृत अध्ययन करे। उसके बाद घर में पुन: पढ़कर नोट्स बनाने को कहा जाता हैं। साथ ही समय-समय पर बच्चों के क्लास टेस्ट लिए जाते हैं। कृषि विज्ञान में विभिन्न फसलों जैसे खाद्यान्न फसलों दलहनी फसलों तिलहनी फसलों तथा विभिन्न सब्जियों की खेती की संपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान दी जाती हैं। ताकि विद्यार्थी आसानी से याद कर सकें। वैसे विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान विषय दैनिक जीवन की जरूरतों से जोड़कर पढ़ाया व समझाया जाता हैं। समय-समय पर विद्यार्थियों को चार्टस बनाकर विभिन्न जानकारी दी जाती हैं।<br /><strong>- तृप्ति पालीवाल व्याख्याता, कृषि विज्ञान रा.उ.मा.बि, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>स्व-चिंतन' से सुधारें अपनी गलतियां</strong><br />विज्ञान वर्ग की में अध्यापिका होने के चलते में ये ही कहूंगी की परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे मार्क्स स्कोर करने के लिये आत्मविश्वास सर्वोपरि है। पूर्व बोर्ड परीक्षा के सॉल्व प्रश्नों को हल करके स्व-चिंतन करते हुए गलतियों को सुधार करने का प्रयास करें। मुख्य विषय वस्तु के शॉर्ट नोट्स का दोहरान मन मे करते रहे। तनाव रहित रहे, पर्याप्त नींद लें। रात को पढ़े गए का सुबह उठ कर दोहरान करे।<br /><strong>-नेहा गुप्ता विज्ञान अध्यापक, कोटा शहर</strong></p>
<p><strong>पूर्व परीक्षा के प्रश्नों को हल करे</strong><br /> स्टूडेंट को ्रपूरे साल ही सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ने की सलाह देते है। परीक्षा नजदीक आने के दौरान ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करे। दिमाग को शांत रखे एवं आसपास का माहौल व्यवस्थित रखने की कोशिश करे। पढ़ाई के साथ साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।<br />पूर्व वर्ष के परीक्षा प्रश्न पत्र हल करे जिससे परीक्षा से पहले स्वयं के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।<br /><strong>- दीपिका चाँदसिन्हा,वरिष्ठ अध्यापक हिन्दी,राजकीय उच्च मा.वि. सकतपुरा</strong></p>
<p><strong>एकाग्रता और स्वयं के नोट्स से मिलेगी सफलता </strong><br />परीक्षा माध्यम से ही विद्यार्थी वर्षभर की मेहनत का फल प्राप्त करना है। सतर्क रहते हुए विषयवस्तु का अध्ययन करना इस समय विद्यार्थियों को सिर्फ अपने अध्ययन पर ही ध्यान केन्द्रित करना है। नियमित निंद्रा लें, और समय का ध्यान रखें।इस समय एकान्त में एवं एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करें। स्वयं के बनाये नोट्स पढ़ें। बड़े उत्तरों को याद करने के लिए मुख्य-मुख्य बिन्दु याद रखें। साथ ही परीक्षा के हॉल में समय का भी ध्यान रखें।<br /><strong>- महेश सुमन,वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत</strong></p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-year-long-study-will-lead-to-success--don-t-panic/article-142588</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-year-long-study-will-lead-to-success--don-t-panic/article-142588</guid>
                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:55:49 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-02/%2812200-x-600-px%29-%289%29.png"                         length="1159456"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मकर संक्रांति कल: बाज मारेगा झपट्टा, डोरेमोन करेगा बचाव</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[आसमां में दिखेगी आॅपरेशन सिन्दूर की झलक- बाजारों में थीम वाली पतंगों का क्रेज।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/makar-sankranti-tomorrow--the-eagle-will-swoop--doraemon-will-save-the-day/article-139441"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px-(1)34.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मकर संक्रांति पर्व बुधवार को परंपरागत उल्लास और उत्साह के साथ मनाया जाएगा। पर्व को लेकर शहर में रौनक बनी हुई है। सुबह से ही छतों पर पतंगबाजी का दौर शुरू हो जाएगा और दिन चढ़ते-चढ़ते आसमान रंग-बिरंगी पतंगों से भर जाएगा। इस दौरान पतंगों के बीच जबरदस्त घमासान देखने को मिलेगा। इस बार पतंग बाजार में नई-नई डिजाइन और थीम वाली पतंगों ने लोगों का ध्यान खींचा है। बाजारों में बाज, डोरेमोन, ड्रैगन, आॅपरेशन सिंदूर और नव वर्ष थीम पर बनी पतंगें खास आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं। बच्चों में कार्टून कैरेक्टर वाली पतंगों की जबरदस्त मांग है, वहीं युवा वर्ग देशभक्ति और आधुनिक डिजाइन वाली पतंगों को ज्यादा पसंद कर रहा है।</p>
<p><strong>घरों में बनने लगे तिल के व्यंजन</strong><br />मकर संक्रांति के मौके पर रंगीन पतंगों, पारंपरिक व्यंजनों और उत्साह से भरा यह पर्व शहर को एक बार फिर त्योहार के रंग में रंग देगा। मकर संक्रांति पर्व को लेकर घर-घर में भी तैयारियां पूरी कर ली गई हैं। तिल के लड्डू, गजक, रेवड़ी और खिचड़ी जैसे पारंपरिक व्यंजन बनाए जा रहे हैं। इसके चलते तिल के दामों में इजाफा हो गया है। ग्राहकों ने बताया कि बाजार में तिल से बनी सामग्री भी काफी महंगी हो गई है। ऐसे में इस पर्व पर महंगाई का सामना करना पड़ रहा है। यह पर्व साल में एक बार आता है। इस कारण तिल के व्यंजन बनाना भी जरूरी है। मकर संक्रांति पर्व पर सुबह स्नान-दान और सूर्य पूजा के बाद लोग पतंगबाजी का आनंद लेंगे।</p>
<p><strong>लुभा रहीं रंगीन और प्रिंटेड पतंगें</strong><br />शहर के घंटाघर, कैथूनीपोल, लाडपुरा, गुमानपुरा और दादाबाड़ी क्षेत्र के बाजारों में पिछले एक सप्ताह से पतंग, मांझा और फिरकी की दुकानों पर खरीदारों की भीड़ नजर आई। दुकानदारों के अनुसार इस बार रंगीन और प्रिंटेड पतंगों की बिक्री में बढ़ोतरी हुई है। पतंगों की कीमत डिजाइन और आकार के अनुसार 20 रुपए से लेकर 150 रुपए तक है। वहीं सूती और नायलॉन डोर की मांग भी अधिक रही। दुकानदार शोभित ने बताया कि हर साल बाजार में नई थीम वाली पतंगे बिकने के लिए आती है। इस बार आॅपरेशन सिन्दूर और नववर्ष वाली पतंगों की डिमांड अधिक है। युवा वर्ग इन पतंगों को ज्यादा पसंद कर रहा है। शहर के प्रमुख बाजारों में सोमवार को दिनभर पतंगों की खरीदारी का दौर चलता रहा।</p>
<p>इस बार बच्चों और युवाओं में थीम वाली पतंगों का खास क्रेज है। डोरेमोन और ड्रैगन की पतंगें तेजी से बिक रही हैं। बिक्री पिछले साल से बेहतर रहने की उम्मीद है।<br /><strong>- रमेश अग्रवाल, पतंग विक्रेता</strong></p>
<p>हर साल मकर संक्रांति पर दोस्तों के साथ पतंगबाजी करता हूं। इस बार आॅपरेशन सिंदूर थीम की पतंग अलग ही आकर्षण लिए हुए है, इसलिए वही खरीदी है।<br /><strong>- रोहित शर्मा, निवासी गुमानपुरा</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/makar-sankranti-tomorrow--the-eagle-will-swoop--doraemon-will-save-the-day/article-139441</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/makar-sankranti-tomorrow--the-eagle-will-swoop--doraemon-will-save-the-day/article-139441</guid>
                <pubDate>Tue, 13 Jan 2026 15:59:02 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2026-01/1200-x-600-px-%281%2934.png"                         length="1920934"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title> दैनिक नवज्योति कार्यालय में रंगोली बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन, रंगों की भाषा में बोली छात्राओं की कला</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[दीपावली थीम पर दैनिक नवज्योति कार्यालय में रंगोली बनाओ प्रतियोगिता आयोजित। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/students--art-spoke-in-the-language-of-colors/article-130016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/8899.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। रंगोली, भारतीय लोक परंपरा की एक प्राचीन कला है, जो आज भी घरों, मंदिरों और सामाजिक आयोजनों में प्रमुखता से स्थान रखती है। दीपावली के पावन अवसर पर दैनिक नवज्योति कार्यालय में रंगोली बनाओ प्रतियोगिता का आयोजन किया गया, जिसमें छात्राओं ने अपनी रचनात्मकता और कलात्मक प्रतिभा का सुंदर प्रदर्शन किया। प्रतियोगिता में राजकीय कन्या कला महाविद्यालय एवं राजकीय विधि महाविद्यालय की छात्राओं ने भाग लिया। प्रतिभागियों ने दीपावली थीम पर रंगोली बनाते हुए पारंपरिक लोक कला और आधुनिक शैलियों का संगम प्रस्तुत किया। प्रतियोगिता में राजकीय विधि महाविद्यालय की छात्रा हिमांशी अग्रवाल ने प्रथम स्थान प्राप्त किया। प्रतियोगिता में कुल पांच छात्राएं विजेता रही।</p>
<p><strong>प्रतियोगिता का परिणाम</strong><br />प्रतियोगिता में राजकीय विधि महाविद्यालय की एलएलबी तृतीय वर्ष  की छात्रा  हिमांगी अग्रवाल  को प्रथम पुरस्कार, राजकीय कन्या कला महाविद्यालय की बीए तृतीय वर्ष की छात्रा भूमिका वैष्णव को द्वितीय पुरस्कार और  एमए की छात्रा द्रोपती लोधा ने तृतीय पुरस्कार प्राप्त किया है । वहीं, सांत्वना पुरस्कार राजकीय कन्या कला महाविद्यालय की बीए प्रथम वर्ष  की छात्राएं जाह्नवी शर्मा एवं अंजू देवी ने प्राप्त किया।</p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/students--art-spoke-in-the-language-of-colors/article-130016</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/students--art-spoke-in-the-language-of-colors/article-130016</guid>
                <pubDate>Sat, 18 Oct 2025 13:03:03 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/8899.png"                         length="493972"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तेज रफ्तार जिंदगी पर लगाम की जरूरत, सोशल मीाडिया और रील कल्चर हिला रहा दिमाग</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बच्चों की नहीं पैरेन्ट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए। ]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-fast-paced-life-needs-to-be-curbed--social-media-and-reel-culture-are-disrupting-minds/article-129169"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/copy-of-news-(15)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। दैनिक नवज्योति कार्यालय में होने वाली मासिक परिचर्चा की श्रंखला में बुधवार को मानसिक स्वास्थ्य सप्ताह के तहत मानसिक स्वास्थ्य (मॉडर्न लाइफ स्टाइल एन्ड मेन्टल इनस्टेबिलिटी) विषय पर परिचर्चा की गई। परिचर्चा में हिस्सा लेने वाले प्रतिभागियों ने कहा कि यह मुद्दा भावनात्मक, मनोवैज्ञानिक और सामाजिक स्थितियों से जुड़ा मुद्दा है। तनाव, डिप्रेशन,  एंग्जाइटी,  नशा और अंत में पागलपन तक आदमी पहुंच जाता है।  संयुक्त परिवारों का विघटन ने इस समस्या को विस्तृत रूप दे दिया है। इसके साथ साथ आर्थिक असुरक्षा, प्रतिस्पर्धा, एकाकीपन, पारिवारिक तनाव, घरेलू हिंसा,और जागरुकता की कमी मुख्य कारण है। इसके साथ मॉर्डन लाइफ स्टाइल में सोशल मीडिया का रील कल्चर बड़ा कारण बन रहा है। अब बच्चा,किशोर, युवा बुजुर्ग सब एकाकीपन के शिकार होकर मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित कर रहे हैं। तेज रफ्तार जिंदगी ने सबकुछ उलट पुलट कर दिया है।   परिचर्चा में जहां सीनियर साइकेटिस्ट, न्यूरो, पीडियाट्रिक, फिजिशियन, न्यूट्रिशियन काउंसलर, डायटीशियन, रिसर्चर, आयुर्वेद, योगा,के साथ मानसिक स्वास्थ्य के क्षेत्र में काम करने वाले ब्रहम्माकुमारी संस्थान,आर्ट आॅफ लिविंग और रामलाल जी सिहाग के संस्थान से जुडे सदस्यों ने भी हिस्सा लिया।  प्रस्तुत हैं परिचर्चा के अंश... </p>
<p><strong>एकांत में बैठकर खुद को जानने से कम होगा तनाव</strong><br />मानसिक बीमारियां व तनाव का कोई एक कारण नहीं है। परिवार के लोगों का बच्चों पर शुरुआत से ध्यान नहीं देना और उसका खान-पान सही नहीं होना। खेलने के लिए समय नहीं होने और पढ़ाई का बोझ और परिवार की बच्चों से बढ़ती अपेक्षाएं तनाव बढ़ाती है। जिससे मानसिक बीमारियां बढ़ती है। बच्चे अपनी भावनाएं व्यक्त नहीं कर पाते हैं। जिससे गलत संगत में पढ़ने पर भी तनाव बढ़ता है। मैंटल हैल्थ पहले सरकार की प्राथमिकता में नहीं था। लेकिन अब इसे विश्व स्तर पर दिवस व सप्ताह के रूप में मानने से जागरूकता बढ़ी है। हालांकि इस तरह की बीमारियों की पहचान जितनी जल्दी हो सके उतना समय पर उपचार संभव है। वैसे एकांत में बैठकर खुद के बारे में जानने और कमियों को दूर करके भी मानसिक तनाव को कम किया जा सकता है।   <br /><strong>-डॉ. एम.एल. अग्रवाल सीनियर मेंटल हेल्थ काउंसलर , प्रेसिंडेंट होप सोसाइटी  </strong></p>
<p><strong>नींद क्वालिटी बिगड़ने से बढ़ रही मानसिक बीमारियां</strong><br />एकल परिवार होने से जहां माता पिता के पास बच्चों के लिए समय ही नहीं है। समय मिलता भी है तो वे बच्चों को डांटने के सिवाय कुछ नहीं करते। उन्हें पुचकारने वाला परिवार को कोई बड़ा सदस्य नहीं है। ऐसे में बच्चे अपना अधिकतर समय टीवी या मोबाइल पर बिताने लगे है। जिससे अधिक समय स्क्रीन पर रहने से बच्चे हो या बड़े उनकी नींद क् वालिटी बिगड़ गई है। पर्याप्त नींद नहीं ले पाने से भी मानसिक तनाव व बीमारियां बढ़ रही है। 1990 के बाद इस तरह की बीमारियों के उपचार की बेहतर दवाएं उपलब्ध हैं लेकिन लोग भ्रम के कारण उनका सेवन नहीं कर पाते हैं। मानसिक तनाव व बीमारियों को कम करने के लिए परिवार को आपस में समय देना होगा।<br /><strong>-डॉ. विनोद कुमार दड़िया आचार्य एवं विभागाध्यक्ष मनोचिकित्सा मेडिकल कॉलेज </strong></p>
<p><strong>अपेक्षा व उपेक्षा के कारण बढ़ रहा तनाव</strong><br />वर्तमान में करीब 90 फीसदी लोग मानसिक तनाव व बीमारियों से ग्रसित है। सभी के  कारण अलग-अलग हो सकते हैं। मोबाइल  समय की जरूरत है। संयुक्त परिवार और कामकाजी तनाव जैसे सभी मुद्दे तो रहेंगे। उन पर नियंत्रण कैसे किया जिससे मानसिक स्वास्थ्य पर असर नहीं पड़े। लोग अपनी अपेक्षा बच्चों पर थोपते हैं। मैं कहता हूं कि बच्चों की नहीं पैरेन्ट्स की काउंसलिंग होनी चाहिए।  इस पर बात हो लेकिन परिवार का उस पर नियंत्रण रखना होगा। उम्र बढ़ने के साथ कई बार बीमारियां बढ़ती जाती है। घर में बुजुर्ग व बच्चों से सम्पर्क बनाए रखना होगा। ऐसा करने से सभी एक दूसरे की बातें व भावनाएं व्यक्त कर सकेंगे तो उनका तनाव कम होगा और बीमारियां भी नहीं होंगी।  अपेक्षा और उपेक्षा यह दो तनाव के बड़े कारण हैं।  इन दोनों से बचकर भी तनाव व बीमारियों को कम किया जा सकता है। <br /><strong>-डॉ. एस.एन. गौतम, आचार्य एवं विभागाध्यक्ष न्यूरो सर्जरी विभाग मेडिकल कॉलेज कोटा </strong></p>
<p><strong>मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का आधार</strong><br />मानसिक स्वास्थ्य हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा है। यह केवल कार्य क्षमता का विषय नहीं, बल्कि जीवन को संतुलित और उपयोगी बनाने की प्रक्रिया है।  मानसिक बीमारी किसी कमजोरी का संकेत नहीं है। लगभग 50 प्रतिशत मानसिक बीमारियों की शुरूआत 15 वर्ष की उम्र तक हो जाती है, जबकि 75 प्रतिशत 24 वर्ष तक पहुँच जाती हैं। वास्तव में मानसिक विकास मां के गर्भ से ही प्रारंभ हो जाता है और किशोरावस्था इसका सबसे महत्वपूर्ण चरण होता है। मानसिक स्वास्थ्य की नींव घर से रखी जाती है। आज के दौर में एकल परिवारों के बढ़ने से बच्चों को दादा-दादी या नाना-नानी का भावनात्मक सहयोग नहीं मिल पाता, जिससे वे मानसिक रूप से कमजोर हो सकते हैं।  बच्चों का मानसिक, शारीरिक, भावनात्मक और यौन स्वास्थ्य समान रूप से सशक्त होना आवश्यक है।<br /><strong>-डॉ. अविनाश बंसल, नवजात शिशु एवं किशोर स्वास्थ्य विभाग, भारत विकास परिषद चिकित्सालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>बच्चों से मित्रवत व्यवहार करना होगा</strong><br />परिवार में माता पिता जो खुद नहीं कर सके वह अपने बच्चों से पूरी करवाना चाहते हैं। जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ने से वे तनाव में रहने लगते है। बच्चे अपनी भावनाएÞं परिवार में शेयर नहीं कर पाते। उनकी इच्छाओं को दबा दिया जाता है। जिससे तनाव और तनाव से मानसिक बीमारियां बढ़ती है। बच्चों से परिजनों को मित्रवत व्यवहार करना होगा। जिससे वे अपनी बात उनसे खुलकर कह सके। पैसा नहीं बच्चे सबसे बड़ा धन हैं। जिसने इसे प्रमुखता दी वहां तनाव व मानसिक बीमारियों को काफी हद तक कम किया जा सकता है। <br /><strong>-डॉ. रोशनी मिश्रा, असिस्टेंट गवर्नर रोटरी क्लब कोटा राउंड टाउन </strong></p>
<p><strong>गर्भ संस्कार से श्रेष्ठ संतान का निर्माण होता है</strong><br />चार हजार साल पहले भी हमारे ऋषि-मुनियों ने बताया था कि श्रेष्ठ संतान का निर्माण गर्भ के भीतर ही होता है। हर माता-पिता स्वस्थ और संस्कारी संतान की इच्छा रखते हैं। गर्भावस्था में मां का आहार-विहार, विचार और भावनाएं सीधे बच्चे पर असर डालते हैं। पांचवें माह में गर्भ में मन का निर्माण होता है और छठे माह में बुद्धि का विकास शुरू होता है। ऐसे में मां यदि नकारात्मक या हिंसक विचार रखती है, नशे या मारधाड़ जैसी प्रवृत्तियों में रहती है, तो उसका प्रभाव गर्भस्थ शिशु के मन पर पड़ता है। आचार्य चरक ने स्मृति नष्ट होने को प्रज्ञा अपराध कहा, जो सभी रोगों की जड़ है।  प्रकृति स्वयं सबसे बड़ी चिकित्सक है। त्योहार, आहार और परंपराएं हमारे स्वास्थ्य से जुड़ी हैं।<br /><strong>-डॉ. नित्यानंद शर्मा, प्राचार्य, आयुर्वेद योग नेचुरोपैथी महाविद्यालय, कोटा</strong></p>
<p><strong>बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य के लिए स्नेह जरूरी</strong><br />आज के व्यस्त जीवन में माता-पिता दोनों के कार्यरत होने के कारण बच्चों का अकेलापन बढ़ता जा रहा है। बच्चों को माता-पिता से संवाद, स्नेह या ध्यान नहीं मिलता, तो वे वही अपनापन घर से बाहर तलाशने लगते हैं। संयुक्त परिवार की यही विशेषता रही है कि वहां बच्चों का न सिर्फ शारीरिक, बल्कि मानसिक विकास भी संतुलित रूप से होता है। परिवार के अन्य सदस्यों के बीच रहने से बच्चे को सामाजिक व्यवहार, अनुशासन और भावनात्मक सुरक्षा मिलती है। वहीं एकल परिवारों में माता-पिता की व्यस्तता के कारण बच्चे स्क्रीन तक सीमित होते जा रहे हैं। माता-पिता को चाहिए कि जब वे घर पर हों, तो बच्चों के साथ समय बिताएं, उनसे परिवार से जुड़ी बातें करें और उनकी इच्छाओं का सम्मान करें। <br /><strong>-डॉ. मिथिलेश खींची, मनोचिकित्सक, सहआचार्य,  मेडिकल कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>विजुअलाइजेशन से बढ़ेगा कॉन्संट्रेशन, बच्चे होंगे डिप्रेशन से दूर</strong><br />आज की जनरेशन मोबाइल के ज्यादा उपयोग से पढ़ाई से भटकती जा रही है।  मोबाइल को पूरी तरह दूर करना संभव नहीं है, लेकिन विजुअलाइजेशन तकनीक से इसका समाधान निकाला जा सकता है। बच्चे आंख बंद करके अपने लक्ष्य की कल्पना करें। जैसे परीक्षा में अच्छा प्रदर्शन करना या इंटरव्यू में आत्मविश्वास से उत्तर देना। इससे मानसिक एकाग्रता बढ़ती है और भय दूर होता है। एक छात्र ने बताया कि लगातार सिगरेट छोड़ने की कोशिश के बाद विजुअलाइजेशन अपनाने के बाद धीरे-धीरे कम करने के बाद छोड़ दी। कई छात्रों ने इस तकनीक से मोबाइल की लत भी छोड़ दी है। कुछ ने तो विजुअलाइजेशन की मदद से अपने सपनों की फील्ड, जैसे डेंटल कॉलेज में प्रवेश भी पाया। बच्चों को सकारात्मक विजुअलाइजेशन अपनाना चाहिए, जिससे वे तनाव और डिप्रेशन से दूर रह सकें।<br /><strong>-डॉ. समर्थ उपाध्याय, फिजिशियन, यूसीएचसी, विज्ञान नगर, कोटा</strong></p>
<p><strong>अपने अंदर की शक्ति को पहचानना आवश्यक</strong><br />मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी शक्ति उसके अंदर ही छिपी होती है। मेडिटेशन वह माध्यम है जो हमारे अशांत मन को शांत करता है। जब मन शांत होता है, तभी हम अपने अंदर की शक्ति से जुड़ पाते हैं। यह जुड़ाव मन की चार्जिंग के समान है। यदि हमारा मन सकारात्मक विचारों से भरा होगा तो हमारे चारों ओर सकारात्मक वाइब्रेशन फैलेंगे, और यदि मन नकारात्मक रहेगा तो नकारात्मक ऊर्जा ही उत्पन्न होगी। आज डॉक्टर भी मेडिटेशन को मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य के लिए आवश्यक बता रहे हैं, क्योंकि मन से वाइब्रेशन निकलते हैं जो हमारे शरीर और वातावरण को प्रभावित करते हैं। जब हम पॉजिटिव थॉट्स देते हैं, तो हमारा मन मजबूत और पावरफुल बनता है।  मेडिटेशन हमें यह समझने में मदद करता है कि कब धैर्य रखना है और कब कर्म करना है—यही आत्मज्ञान की दिशा है।<br /><strong>-ब्रह्माकुमारी उर्मिला दीदी, सेवाकेंद्र प्रभारी, कोटा संभाग</strong></p>
<p><strong>मोटिवेशन के साथ मेडिटेशन जरूरी</strong><br />वर्तमान में जिस तरह की प्रतिस्पर्धा एक दूसरे में बढ़ती जा रही है। वह तनाव का बड़ा कारण है। सही खानपान नहीं होना और पर्याप्त नींद नहीं आना भी मानसिक तनाव व बीमारियों को बढ़ाने का कारण है। ऐसे में तनाव व मानसिक बीमारियों को कम करने के लिए मोटिवेशन के साथ ही मेडिटेशन भी जरूरी है। व्यक्ति के शरीर के अंदर की जो शक्ति है उसे कुंडलिनी के माध्यम से जागृत किया जाता है। जिससे एक बिन्दु पर ध्यान केन्द्रित होने पर अन्य जगह से ध्यान हटने पर तनाव व मानसिक बीमारियों से बचा जा सकता है। <br /><strong>-राजेश गौतम, प्रेस सचिव आध्यात्म विज्ञान सत्संग केन्द्र </strong></p>
<p><strong>बच्चों को चाहिए बचपन, ना कि  सुविधाएं</strong><br /> रूट कॉस्ट यानी समस्या की जड़ पर बात बहुत कम लोग करते हैं। अक्सर बच्चे घर में रहकर भी अकेलापन महसूस करते हैं। माता-पिता से दूरी बढ़ने के कारण वे बाहरी दुनिया में अपनापन तलाशने लगते हैं। बच्चों को केवल सुविधाएं नहीं, बल्कि भावनात्मक सुरक्षा और ध्यान की जरूरत होती है। उन्हें रियल स्टोरी या जीवन की सच्ची घटनाओं से समझाया जाए, तो वे चीजों को बेहतर तरीके से महसूस करते हैं। पहले दादा-दादी की सीख और स्नेह बच्चों की मानसिक मजबूती का आधार थे, पर अब वह कमी साफ झलकती है। हमें समस्या के मूल पर कामकरने की जरूरत है। <br /><strong>-रिद्धिमा नरसिंघानी,  स्टूडेंट आयुर्वेद योग नेचुरोपैथी महाविद्यालय</strong></p>
<p><strong>मानसिक स्वास्थ्य में योग का महत्व</strong><br />लगातार समय की कमी, काम का दबाव और सामाजिक अपेक्षाएं व्यक्ति को मानसिक थकान और तनाव की ओर ले जाती हैं। ऐसे में योग एक अत्यंत प्रभावी और आवश्यक साधन बनकर उभरता है। योग केवल शारीरिक स्वास्थ्य ही नहीं बल्कि मानसिक और भावनात्मक संतुलन भी प्रदान करता है। यह तनाव, चिंता और अवसाद जैसी समस्याओं को कम करने में मदद करता है और जीवन की गुणवत्ता को बढ़ाता है। योग में मानसिक स्वास्थ्य के लिए कई प्राणायाम उपयोगी माने गए हैं।  नियमित अभ्यास से मानसिक शांति, ऊर्जा और समग्र स्वास्थ्य में सुधार होता है। योग आधुनिक जीवन के लिए एक सशक्त और संतुलित जीवन का आधार है।<br /><strong>-निमीषा कसेरा, योग प्रशिक्षक,कोटा </strong></p>
<p><strong>असुरक्षा मतलब मानसिक तनाव</strong><br /> बाहरी नकारात्मक परिस्थितियां केवल तभी हमारे स्वास्थ्य पर असर डालती हैं, जब हम अंदर से कमजोर होते हैं। ठीक उसी तरह जैसे पानी में तैरता जहाज तब डूबता है जब पानी उसके अंदर चला जाता है, हमारी मानसिक स्थिति भी तभी प्रभावित होती है जब हम अंदर से असुरक्षित हों। युवाओं के संदर्भ में, विशेषकर नीट और आइआइटी की तैयारी कर रहे कोटा के छात्र, माता-पिता की जिम्मेदारी अत्यधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। मानसिक स्वास्थ्य की मजबूती और सकारात्मक सोच ही बच्चों की सफलता और संतुलित जीवन की कुंजी है।<br /><strong>-दीपक शर्मा, काउंसलर एवं आर्ट आॅफ लिविंग प्रशिक्षक, कोटा</strong></p>
<p><strong>सोशल मीडिया से दूरी जरूरी</strong><br />माता-पिता दोनों के कामकाजी होने के कारण बच्चों का अधिकांश समय आया के साथ बीतता है। ऐसे में उनके भीतर सही संस्कारों का विकास होता था। न्यूक्लियरी फैमिली में बच्चों का ध्यान सोशल मीडिया की ओर अधिक बढ़ रहा है, जिससे एकाग्रता और भावनात्मक संतुलन प्रभावित हो रहा है। मानसिक शांति और संतुलन के लिए ध्यान लगाना आवश्यक है। मनुष्य के जीवन में सबसे बड़ी शक्ति उसके अंदर ही छिपी होती है। हमें अपने भीतर की पॉवर को जानना और अपनी विकृतियों को पहचानना होगा। तभी बच्चों में संस्कार मजबूत होंगे और वे मानसिक विकृतियों से दूर रहेंगे।<br /><strong>-अंशुल मेहंदीरत्ता, अधीक्षक नारी निकेतन, कोटा</strong></p>
<p><strong>प्रारम्भिक शिक्षा में शामिल हो ध्यान</strong><br />मानसिक बीमारियों का सबसे बड़ा कारण ही तनाव है। तनाव बच्चे से लेकर बड़े सभी को अलग-अलग कारणों से हो सकता है। परिवार में एक दूसरे के लिए समय नहीं है। ऐसे में लोग अपनी बात कहने के लिए दूसरों का सहारा लेते हैं। लेकिन उससे मन शांत नहीं हो सका। ध्यान व सुदर्शन क्विया मन को शांत करने के साथ ही तनाव को कम करती है। ध्यान करने से मन में अच्छे विचार आते है। जब अच्छे विचार आएंगे तो सकारात्मकता बढ़ेगी। इसलिए आवश्यक है कि ध्यान को प्रारम्भिक शिक्षा में शामिल किया जाए। <br /><strong>-योगेन्द्र हरसोरा, अपेक्स मैंबर आर्ट आॅफ लिविंग </strong></p>
<p><strong>मानसिक स्वास्थ्य पर डाइट का सीधा असर</strong><br />जैसा खाए अन्न, वैसा होय मन यह कहावत आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में और भी ज्यादा सटीक बैठती है। मानसिक स्वास्थ्य में डाइट की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।  फ्रोजन या प्रोसेस्ड फूड शरीर ही नहीं, मन पर भी असर डालता है। जब भोजन का पाचन होता है, तो न्यूरॉन्स और हार्मोन्स सक्रिय होते हैं जो खुशी का अनुभव कराते हैं। परंतु अगर भोजन असंतुलित या कृत्रिम तत्वों से भरा हो, तो यह प्रक्रिया बाधित होती है और व्यक्ति अवसाद की ओर बढ़ सकता है।  फाइबरयुक्त, हल्दी और प्राकृतिक प्रोटीन से भरपूर भोजन करें, छाछ और घर का बना खाना अपनाएं तथा बाहर का फैटी और कृत्रिम स्वाद वाला भोजन सीमित करें। यही संतुलित डाइट मन को स्वस्थ रख सकती है।<br /><strong>-डॉ. नीरजा श्रीवास्तव, प्रो.गवर्नमेंट कॉलेज, कोटा</strong></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-fast-paced-life-needs-to-be-curbed--social-media-and-reel-culture-are-disrupting-minds/article-129169</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-fast-paced-life-needs-to-be-curbed--social-media-and-reel-culture-are-disrupting-minds/article-129169</guid>
                <pubDate>Thu, 09 Oct 2025 15:21:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2025-10/copy-of-news-%2815%292.png"                         length="468297"                         type="image/png"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जियोलोजी विंग बनेगी आधुनिक, ओडिशा मॉडल का होगा अध्ययन</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ओडिशा की बेस्ट प्रेक्टिसेज का अध्ययन कराकर राज्य के लिए व्यावहारिक प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। राजस्व अर्जन में भी साल दर साल प्रगति हो रही है।]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/geology-wing-will-be-made-modern/article-41172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/333-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। स्टेट जियोलोजिकल प्रोग्रामिंग बोर्ड की बुधवार को शासन सचिवालय में 57 वीं बैठक हुई, जिसमें सामने आया है कि पेट्रोल-प्राकृतिक गैस के खोज व दोहन के साथ ही अब देश-दुनिया के नक्शे पर जैसलमेर सीमेंट हब के रुप में विकसित हो रहा है। वहीं प्रदेश में यूरेनियम, रेयर अर्थ एलिमेंट्स, लाईम स्टोन, लिग्नाइट, आयरन ओर, कॉपर, जिंक, गारनेट आदि के नित नए भंडार खोजे जा रहे हैं। जिलोलॉजिकल विंग को अब आधुनिक बनाया जाएगा ताकि प्रदेश में खनन खोज और दोहन के काम में तेजी आ सके। 2023-24 में खनिज लाईम स्टोन, फेरस मेटल, डेकोरेटिव स्टोन, औद्योगिक खनिज एवं अन्य खनिजों की खोज के लिए 31 विभिन्न परियोजनाओं के माध्यम से कार्य किया जाएगा। खान विभाग के एसीएस डॉ. सुबोध अग्रवाल ने बैठक की अध्यक्षता करते हुए कहा कि सेमी प्रेसियस स्टोन के भंडारों के कार्य को भी गति दी जानी है। एक्सप्लोरेशन और मेजर व माइनर ब्लॉक्स तैयार करने के कार्य में जियोलोजी विंग के कार्यों के बारे में बताते हुए कहा कि समन्वित प्रयासों से आज खनिज खोज में राजस्थान देश का अग्रणी प्रदेश बन गया है। ओडिशा की बेस्ट प्रेक्टिसेज का अध्ययन कराकर राज्य के लिए व्यावहारिक प्रक्रिया को अपनाया जाएगा। राजस्व अर्जन में भी साल दर साल प्रगति हो रही है। मेजर और माइनर ब्लॉकों की अधिक से अधिक नीलामी से वैध खनन को बढ़ावा मिला है तो राजस्व और रोजगार में बढ़ोतरी हुई है।  </p>
<p><strong>पोटाश के खोज कार्य में आएगी तेजी  </strong></p>
<p>खान विभाग के निदेशक संदेश नायक ने बताया कि राज्य के आर्थिक व औद्योगिक विकास के साथ ही कृषि क्षेत्र में खनिज क्षेत्र द्वारा महत्वपूर्ण भूमिका निभाई जा रही है। रॉक फास्फेट के विपुल भंडारों के साथ ही जिप्सम आदि से मिनरल फर्टिलाइजर तैयार हो रहे हैं। वहीं अब पोटाश के खोज कार्य को और अधिक गति दी गई है। इस क्षेत्र से जुड़ी संस्थाओं, शोधकर्ताओं और अधिकारियों से एक्सप्लोरेशन से आॅक्शन तक का एग्रेसिव प्लान बनाने पर जोर दिया। खोज कार्यों को लेकर जीएसआई से अनिंध्य भट्टाचार्य और अमित ने बताया कि जीएसआई द्वारा एक्सप्लोरेशन कार्यक्रम संचालित करते हुए रिपोर्टस राज्य सरकार को दी जा रही है। जीएसआई द्वारा भी जियोफिजिकल, जियोकेमिकल, ग्राउंड जियोफिजिकल और एरो जियोफिजिकल कार्य हो रहा है। प्रदेश में बहुमूल्य खनिजों के भंडार खोजे गए हैं और खोज कार्य जारी है। स्टेट जियोलोजिकल प्रोग्रामिंग बोर्ड के कोआर्डिनेटर व एडीजी एनपी सिंह ने बताया कि आरएसएमईटी के सहयोग से प्रदेश में एक्सप्लोरेशन कार्य को और अधिक गति दी जा रही है। </p>
<p> </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/geology-wing-will-be-made-modern/article-41172</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/geology-wing-will-be-made-modern/article-41172</guid>
                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 10:51:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2023-03/333-copy6.jpg"                         length="191758"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Jaipur ]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का: साजीदेहड़ा का आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन फिर हुआ शुरू</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[साजी देहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन के बंद होने का मुद्दा दैनिक नव’योति ने उठाया था। 16 मई के अंक में पेज 5 पर ‘ एक को संभाल नहीं पा रहे, नया कर रहे तैयार, शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि निगम द्वारा 5 करोड़ के आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन को नहीं संभाल पाए। जिससे वह बंद हो गया है। जबकि निगम द्वारा दूसरा ट्रांसफर स्टेशन ट्रांसोर्ट नगर में भी बनाया जा रहा है। उसके शुरु होने पर भी वही समस्या होगी। उसके बाद निगम अधिकारी हरकत में आए और ट्रेचिंग ग्राउंड की व्यवस्था सुधारने के बाद इस ट्रांसफर स्टेशन को फिर से चालू कर दिया। 
]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/modern-waste-transfer-station-of-sajidehra-started-again/article-10465"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/modern-waste-transfer-station.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । नगर निगम कोटा दक्षिण क्षेत्र में लम्बे समय से बंद पड़ा आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन एक बार फिर से चालू हो गया है। उससे कचरे का परिवहन होने लगा है। साजी देहड़ा स्थित धार का अखाड़ा के पास नगर निगम का आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन काफी समय से बंद था। वहां से कचरे का परिवहन नहीं हो रहा था। यहां आने वाले कचरा नयागांव में नगर विकास न्यास के खाली भूखंड पर डाला जा रहा था। यहां से कचरे का परिवहन ट्रेचिंग ग्राउंड में कचरा डालने में कंटेनर के सीसी रोड से आगे तक जने में आ रही परेशानी को देखते हुए बंद किया था। लेकिन अब फिर से उस आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन पर कोटा दक्षिण क्षेत्र का कचरा ट्रॉलियों व टिपरों से आ रहा है। साथ ही वहां से कचरा कंटेनरों के माध्यम से हाईजनिक तरीके से नांता स्थित निगम के ट्रेचिंग ग्राउंड में डाला जा रहा है। ट्रेचिंग ग्राउंड में कंटेनरों से कचरा डालने में जो समस्या आ रही थी। नगर निगम ने उसका समाधान करते हुए कचरे को वहां से हटाने के लिए एक अतिरिकत जेसीबी मशीन लगा दी है। <br /><br /><strong>नवज्योति ने उठाया था मुद्दा</strong><br />गौरतलब है कि साजी देहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन के बंद होने का मुद्दा दैनिक नव’योति ने उठाया था। 16 मई के अंक में पेज 5 पर ‘ एक को संभाल नहीं पा रहे, नया कर रहे तैयार, शीर्षक से समाचार प्रकाशित किया था। जिसमें बताया था कि निगम द्वारा 5 करोड़ के आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन को नहीं संभाल पाए। जिससे वह बंद हो गया है। जबकि निगम द्वारा दूसरा ट्रांसफर स्टेशन ट्रांसोर्ट नगर में भी बनाया जा रहा है। उसके शुरु होने पर भी वही समस्या होगी। उसके बाद निगम अधिकारी हरकत में आए और ट्रेचिंग ग्राउंड की व्यवस्था सुधारने के बाद इस ट्रांसफर स्टेशन को फिर से चालू कर दिया। <br /><br /><strong>इनका कहना है</strong><br /> साजी देहड़ा स्थित आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन से कचरे का परिवहन फिर से शुरू कर दिया है। इसके लिए ट्रेंिचंग ग्राउंड में आ रही समस्या का समाधान करते हुए वहां एक अतिरिक्त जेसीबी मशीन लगाई है। जब कंटेनर कचरा खाली करता है तो वहां से जेसीबी उसे पीछे की तरफ हटा देती है। साथ ही वहां 100 गुणा 100 मीटर का एक प्लेटफार्म भी बनाया जा रहा है। जिससे कंटेनर आसानी से मुड़ सके। <strong>- राजपाल सिंह, आयुक्त, नगर निगम कोटा दक्षिण</strong><br /><br /></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/modern-waste-transfer-station-of-sajidehra-started-again/article-10465</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/modern-waste-transfer-station-of-sajidehra-started-again/article-10465</guid>
                <pubDate>Thu, 26 May 2022 11:57:29 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-05/modern-waste-transfer-station.jpg"                         length="42274"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[kota]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एक्शन में गहलोत  :डॉ. अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य के 5 पदों के सृजन की मंजूरी, जोधपुर में आधुनिक बस स्टैण्ड के लिए 10 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[
मुख्यमंत्री ने संशोधित प्रस्ताव को दी मंजूरी :अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं में खर्च होंगे 98 करोड़, 11 शिक्षण संस्थानों में चल रहे  टेक्नीकल एजुकेशन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम 31 मार्च तक संचालित करने की मंजूरी, विद्या संबल योजना के अन्तर्गत गेस्ट फेकल्टी को मानदेय भुगतान के लिए 14 करोड़ मंजूर]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61e5454a2a104/article-4031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/gehlot1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने विद्या संबल योजना के अन्तर्गत गेस्ट फेकल्टी को मानदेय भुगतान के लिए 14 करोड़ रुपए के अतिरिक्त बजट प्रावधान को स्वीकृति दी है। गहलोत के इस निर्णय से महाविद्यालयों में रिक्त पदों के विरूद्ध गेस्ट फेकल्टी के रूप में कार्यरत 800 सहायक आचार्यों को मानदेय का भुगतान हो सकेगा।</p>
<p><strong>डॉ. अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय में सहायक आचार्य के 5 पदों के सृजन की मंजूरी</strong><br /> मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय जयपुर में सहायक आचार्य के 5 पदों के सृजन को मंजूरी दी है। गहलोत ने अंग्रेजी, समाजशास्त्र, अर्थशास्त्र, राजनीति विज्ञान तथा इतिहास विषय के सहायक आचार्य के एक-एक अतिरिक्त पद सृजित किए जाने की स्वीकृति दी है। मुख्यमंत्री के इस निर्णय से विश्वविद्यालय में शैक्षणिक गतिविधियों के संचालन में सुगमता होगी। </p>
<p><strong><br />संस्कृत महाविद्यालय दौसा में व्याख्याता के 4 पदों का सृजन</strong><br />मुख्यमंत्री ने राजकीय आचार्य संस्कृत महाविद्यालय दौसा में आचार्य स्तर पर संचालित विषयों के लिए व्याख्याता के 4 पदों के सृजन को स्वीकृति दी है।  गहलोत के इस निर्णय से शास्त्री स्तर से नवक्रमोन्नत हुए इस महाविद्यालय में आचार्य स्तर की कक्षाओं का अध्यापन संभव हो सकेगा।</p>
<p><strong>जोधपुर में आधुनिक बस स्टैण्ड के लिए 10 करोड़ की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति</strong><br /> मुख्यमंत्री  अशोक गहलोत ने जोधपुर में पावटा फल सब्जी मंडी क्षेत्र में आधुनिक बस स्टैण्ड निर्माण के लिए 10 करोड़ रूपये की अतिरिक्त वित्तीय स्वीकृति प्रदान की है। गहलोत की इस मंजूरी से पैदल यात्रियों, दुपहिया एवं चौपहिया वाहनों के बस स्टैण्ड परिसर में आवागमन, ऑटो एवं टैक्सी स्टैण्ड, बसों के माइनर मेंटीनेंस के लिए मिनी वर्क शॉप सहित अन्य विकास कार्य सुचारू रूप से हो सकेंगे। उल्लेखनीय है कि इस आधुनिक बस स्टैण्ड के निर्माण के लिए पूर्व में 38 करोड़ रूपये की स्वीकृति प्रदान की जा चुकी है। अब मुख्यमंत्री ने अतिरिक्त विकास कार्यों के लिए 10 करोड़ रूपये की राशि और मंजूर की है।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री ने संशोधित प्रस्ताव को दी मंजूरी :अल्पसंख्यक समुदाय के विकास के लिए विभिन्न योजनाओं में खर्च होंगे 98 करोड़</strong><br /><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने अल्पसंख्यक समुदाय के समावेशी विकास के लिए गठित 100 करोड़ रूपए के विकास कोष से विभिन्न योजनाओं में 98 करोड़ 55 लाख रूपए व्यय करने के संशोधित प्रस्ताव को मंजूरी प्रदान की है।<br />प्रस्ताव के अनुसार अल्पसंख्यक समुदाय के लोगों के परम्परागत हुनर विकास के लिए 50 लाख, अल्पसंख्यक शिल्पकारों को विपणन प्रोत्साहन एवं सहायता के लिए 1 करोड़ 25 लाख, जयपुर में अंग्रेजी माध्यम के आवासीय विद्यालय के निर्माण के लिए 21 करोड़ 80 लाख, अल्पसंख्यक लोगों को रोजगारोन्मुख बनाने के लिए अन्तर्राष्ट्रीय भाषाओं के प्रशिक्षण हेतु 2 करोड़, वक्फ भूमि या सार्वजनिक भूमि पर बने कब्रिस्तान, मदरसों एवं विद्यालयों में चारदीवारी निर्माण के लिए 5 करोड़ रूपए व्यय किए जाएंगे।</p>
<p><br />इसी प्रकार 15 राजकीय अल्पसंख्यक छात्रावासों में ई-अध्ययन कक्ष विकसित करने पर 58 लाख, अल्पसंख्यक बाहुल्य बस्तियों में आधारभूत संरचना विकास के लिए 44 करोड़, इन्दिरा गांधी शहरी क्रेडिट कार्ड योजना में ऋण पर ब्याज अनुदान के लिए 5 करोड़, मौलाना आजाद विश्वविद्यालय, जोधपुर में अल्पसंख्यकों के उत्थान हेतु शोध पीठ की स्थापना के लिए 2 करोड़, अल्पसंख्यक कृषकों को सोलर पंप अनुदान योजना के लिए 15 करोड़ 42 लाख तथा अल्पसंख्यक मेधावी युवा प्रोत्साहन योजना के लिए 1 करोड़ रूपए व्यय करने की स्वीकृति प्रदान की गई है। गहलोत की इस मंजूरी से अल्पसंख्यक समुदाय को कौशल विकास, शैक्षणिक गतिविधियों एवं रोजगार के बेहतर अवसर सुलभ हो सकेंगे। साथ ही, इन समुदायों के समग्र विकास में सुगमता होगी।<strong><br /></strong></p>
<p><strong> टेक्नीकल एजुकेशन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम 31 मार्च तक संचालित करने की मंजूरी</strong><br />मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने प्रदेश के 11 शिक्षण संस्थानों में चल रहे टेक्नीकल एजुकेशन क्वालिटी इम्प्रूवमेंट प्रोग्राम के तृतीय चरण को 31 मार्च, 2022 तक संचालित करने की मंजूरी दी है। साथ ही इस परियोजना के संचालन के लिए 9 करोड़ रूपये के अतिरिक्त बजट प्रावधान की भी स्वीकृति दी है। उल्लेखनीय है कि यह परियोजना 30 सितंबर, 2021 तक शत-प्रतिशत केन्द्रीय सहायता के माध्यम से संचालित थी। मुख्यमंत्री ने इस परियोजना को 31 मार्च, 2022 तक राज्य निधि से संचालित करने का महत्वपूर्ण निर्णय करते हुए 9 करोड़ की राशि स्वीकृत की है।</p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p><br /><br /></p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61e5454a2a104/article-4031</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61e5454a2a104/article-4031</guid>
                <pubDate>Mon, 17 Jan 2022 16:48:09 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2022-01/gehlot1.jpg"                         length="93104"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Administrator]]>
                    </dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>जैसलमेर में जय जवान : बीएसफ के 57वें स्थापना दिवस की हुंकार :  सर्वोच्च आधुनिक तकनीक मजबूत होगी BSF</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[बीएसएफ को विश्व की सर्वोच्च आधुनिक तकनीक से किया जायेगा मजबूत-शाह]]>
                    </description>
                
                                    <content:encoded>
                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%AB-%E0%A4%95%E0%A5%87-57%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0----%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%A4-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-bsf/article-2941"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/bsf3.jpg" alt=""></a><br /><p>जैसलमेर। बीएसफ के 57वें स्थापना दिवस के अवसर पर रविवार को जैसलमेर के पूनम स्टेडियम में भव्य समारोह आयोजित हुआ। कार्यक्रम में गृह मंत्री अमित शाह मौजूद रहें। अमित शाह ने इस मौके पर सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) का शांति एवं युद्ध के समय समर्पित होकर काम करने का बड़ा योगदान बताते हुए कहा कि विश्व में उपलब्ध सबसे उच्च तकनीक बीएसएफ को मिलेगी और ड्रोन हमलों से निपटने के लिए स्वदेशी ड्रोन प्रतिरोधक तकनीक तैयार की जा रही है। उन्होंने कहा कि जहां-जहां सीमा पर अतिक्रमण करने का प्रयास हुआ। हमने  तुरंत जवाबी कार्रवाई की है। हमारे जवान और सीमा को कोई हलके में नहीं ले  सकता। जब उरी और पुलवामा में हमला हुआ। तब एक मजबूत निर्णय लेते हुए  एयरस्ट्राइक का निर्णय लिया। शाह ने कहा कि ड्रोन प्रतिरोधी तकनीक को तैयार किया जा रहा है। इस पर काम जारी है और दुनिया की सबसे उच्च तकनीक बीएसएफ को  दी जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि बीएसएफ शांति हो या युद्ध हमेशा समर्पित रहा हैं और वैश्विक महामारी कोरोनाकाल में इसने अपना योगदान दिया। इसी तरह बल ने पर्यावरण सरंक्षण सहित अन्य कई बड़े काम किये है। उन्होंने जवानों को बहुत बधाई देते हुए उनकी हौंसला अफजाई की। उन्होंने कहा कि भारतमाला प्रोजेक्ट से पूरे देश में सड़कों का जाल बिछाया जा हैं और प्रधानमंत्री सीमाओं के प्रहरियों के प्रति हमेशा संवदेशनील रहे है और केन्द्र सरकार ने सशस्त्र बलों के परिवारजनों को पूर्ण स्वास्थ्य कवर प्रदान किया गया जिसके तहत एक कार्ड के द्वारा इसके परिजन आसानी से इसका लाभ ले सकते है। उन्होंने कहा कि वह शनिवार को भारत माला प्रोजेक्ट में बनी सड़क से बल की अंतिम चौकी जाकर आये हैं, उससे लगता है कि देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का यह कितना बड़ा निर्णय है।<br /> <br /> उन्होंने कहा कि आज बल का 57वां स्थापना दिन और पहली बार सीमा के जिले में स्थापना दिन मनाने का मोदी सरकार ने निर्णय लिया है। इस परंपरा को हमेशा के लिए जारी रहना चाहिए। सीमा सुरक्षा के लिए जवानों को अपना लक्ष्य तय करना चाहिए। शाह ने कहा कि हजारों जवानों ने अलग-अलग जगह पर बलिदान दिए हैं। इसमें बीएसएफ सबसे आगे हैं। उन्होंने शहीदों को श्रद्धांजलि देते हुए कहा कि बल का गौरवपूर्ण इतिहास है। आज दुनिया की सबसे बड़ी सीमाओं की सुरक्षा करने वाली हमारा बीएसएफ है। फिर चाहे वो राजस्थान हो या गुजरात। नदियां हो या रेगिस्तान। सेना और सीमा सुरक्षा बल ने लौंगेवाला में एक पूरी टैंक की बटालियन को खदेड़ दिया था जो आज भी ट्रेनिंग सेंटरों में सिखाया जाता है।<br /> <br /> इससे पहले  शाह ने वाहन में परेड का निरीक्षण किया और परेड की सलामी ली। इस अवसर पर बीएसफ ने डॉग-शो, अस्त्र-शस्त्र हैंडलिंग प्रदर्शन, पैरा एडवेंचर प्रदर्शन एवं सीमा भवानी (महिला) एवं जांबाज दल द्वारा मोटरसाइकिल के साथ प्रदर्शन किया।<br /> <br />  </p>]]>
                    </content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%AB-%E0%A4%95%E0%A5%87-57%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0----%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%A4-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-bsf/article-2941</link>
                <guid>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%9C%E0%A5%88%E0%A4%B8%E0%A4%B2%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A4%AF-%E0%A4%9C%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A8---%E0%A4%AC%E0%A5%80%E0%A4%8F%E0%A4%B8%E0%A4%AB-%E0%A4%95%E0%A5%87-57%E0%A4%B5%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0----%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%8B%E0%A4%9A%E0%A5%8D%E0%A4%9A-%E0%A4%86%E0%A4%A7%E0%A5%81%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%95-%E0%A4%A4%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%95-%E0%A4%AE%E0%A4%9C%E0%A4%AC%E0%A5%82%E0%A4%A4-%E0%A4%B9%E0%A5%8B%E0%A4%97%E0%A5%80-bsf/article-2941</guid>
                <pubDate>Sun, 05 Dec 2021 14:29:32 +0530</pubDate>
                                    <enclosure
                        url="https://dainiknavajyoti.com/media/2021-12/bsf3.jpg"                         length="82419"                         type="image/jpeg"  />
                
                                    <dc:creator>
                        <![CDATA[Administrator]]>
                    </dc:creator>
                            </item>

            </channel>
        </rss>
        