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                <title>disappointed - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>पारंपरिक दीपक कला को महंगाई डायन मार रही</title>
                                    <description><![CDATA[लगातार घट रही दीयों व मिट्टी के बर्तनों की मांग से कुम्हारी कला से जुड़े कुम्हार हतोत्साहित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/inflation-is-killing-traditional-lamp-art/article-60871"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/paramparik-dipak-kala-ko-mehngayi-dayan-maar-rhi...karwar,-bundi-news-30-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>करवर। जिले भर में चाक पर मिट्टी के दीपक बनाते कुम्हार का दर्द यही है कि वर्तमान समय के युवा इलेक्ट्रॉनिक्स युग के चकाचौंध में इलेक्ट्रॉनिक्स लाइटों की बढ़ती मांगों से भारतीय संस्कृति, मिट्टी के दिए से दीपावली मनाने की परंपरा विलुप्त सी होती जा रही है। ऐसे में लोग दीपावली पर रोशनी के लिए मिट्टी के दिए ही जलाए, जिससे विलुप्त होती जा रही कुम्हारों की कला जीवित हो सके। करवर कस्बे में वर्तमान में करीब 70 कुम्हार परिवार रहते हैं जिनमें से 8 ही पुश्तैनी धंधे को कर रहे हैं बाकी परिवार नौकरी सहित अन्य कार्य करने में रुचि दिखाने लगे। </p>
<p><strong>चायनिज उत्पादों ने छिनी कुम्हारों की रोजी</strong><br />दिवाली आते ही लोगों को घरों में मिट्टी के बर्तनों की जरूरत महसूस होने लगती है। मगर इसे बनाने वाला कुम्हार वर्ग मायूस है। आधुनिकता और महंगाई की मार सबसे ज्यादा इसी वर्ग पर पड़ी है। चाइनिज झालरों की चमक से मद्धिम पड़ते मिट्टी के दीयों की लौ से यह तबका पुश्तैनी धंधा बचाने को संघर्ष कर रहा है। कलश, दीया और मिट्टी के बर्तन का चलन लंबे समय से है। लेकिन चायनिज झालर ने मिट्टी के दीयों की मांग कम कर दी है। सस्ता और आकर्षक होने के कारण झालर ने आज हर घरों तक पैठ बना ली है। पूजा घरों में व अनुष्ठान के समय ही मिट्टी के दीपक घी या तेल से अनिवार्य रूप से जलाए जाते हैं। पहले कुम्हारों के घरों पर दीपावली के एक हफ्ते पहले से बच्चों के लिए मिट्टी के खिलौने, कलश, दीया व करवाचौथ से पहले करवा आदि को खरीदने के लिए ग्रामीणों की भीड़ जुटती थी। बदलते परिवेश में अब केवल परंपरा निभाई जा रही है। जो कुम्हारों के लिए घातक सिद्ध हो रही है। लगातार घट रही दीयों व मिट्टी के बर्तनों की मांग से कुम्हारी कला से जुड़े कुम्हार हतोत्साहित हो रहे हैं। </p>
<p><strong>मिट्टी के बर्तन बनाने में यह आता है खर्चा</strong><br />उपयोगी मिट्टी बड़ी मुश्किल से मिलती है, एक मिट्टी की ट्रोली 4 से 5 हजार में आतीं हैं। लकड़ी 70 प्रति किलो, लकड़ी का बुरादा 20 किलो 100 रुपए में मिलता है, जिससे मिट्टी से मटकी, धड़ा, दीपक, करवा, फालसा,कलश, बजौरा, गोलक, बच्चों के खिलौने सहीत अनेक मिट्टी से निर्मित वस्तुएं बनाई जाती है, जिसमें पूरे परिवार की मेहनत लगती है।</p>
<p><br /><strong>दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाने के कई कारण</strong><br />क्षेत्र के बुजुर्गों का ऐसा मानना है। दीपावली पर्व पर मिट्टी के दिए जलाने के कई कारण होते हैं। सबसे बड़े कारण में एक यह है कि बढ़ते कीट के प्रकोप को समाप्त करने के लिए मिट्टी के दिए उपयोगी है। मिट्टी के जलते दिए से कीट मकोड़े दिए की ओर आकर्षित होते हैं और जलती दिए में जाकर किट मकोड़े जल जाते हैं। इससे कीट का प्रकोप काफी हद तक कम हो जाता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />महंगाई की मार ने धीरे-धीरे कुम्हारी कला की व्यवसाय को बंद करने पर मजबूर कर दिया है। कुम्हारी कला को जीवित रखने के लिए इन्हें प्रोत्साहित करने की जरूरत है। ऐसा नहीं किया गया तो कुम्हारी कला जल्द ही लुप्त हो जाएगी।<br /><strong>- बलवीर प्रजापति,जिलाध्यक्ष बूंदी </strong></p>
<p>महंगाई की मार ने धीर-धीरे कुम्हारी कला की व्यवसाय को बंद करने पर मजबूर कर दिया है। कुम्हारी कला को जीवित रखने के लिए इन्हें प्रोत्साहित करने की जरूरत है। ऐसा नहीं किया गया तो कुम्हारी कला जल्द ही लुप्त हो जाएगी।<br /><strong>- पप्पू लाल प्रजापति, कुम्हार कारीगर </strong></p>
<p>अगर राज्य सरकार सामूहिक रूप से बर्तन बनाने के लिए जगह देने सहित गेस, इलेक्ट्रॉनिक भट्टी व शेड के साथ मिट्टी के बर्तनों में मदद करती है तो इस काम को विमुख होकर अन्यत्र जा रहें युवाओं का पलायन रोका जा सकता है।<br /><strong>- हीरालाल प्रजापति, राष्ट्रीय कुम्हार महासभा, जिला अध्यक्ष बूंदी</strong></p>
<p>अमावस्या के दिन मिट्टी के बर्तन में तेल डालकर काजल तैयार करते हैं। जो आंख के लिए औषधि है। जो काम मिट्टी का दीपक कर सकता है वह बिजली के झालर और बल्ब नहीं कर सकते। अनुष्ठान आदि तभी पूरा होता है जब उसमें मिट्टी के दीपक जलाए जाते हैं। इससे वातावरण में फैले कीट-पतंगों का नाश होता है।<br /><strong>- गोविंद पंडित, करवर</strong></p>
<p>महंगाई और मेहनत के हिसाब से मिट्टी के बर्तनों की कीमत नहीं मिल पाती है। महंगाई के दौर में भी 1 रुपये प्रति दीया, 10 रुपये में करवा व 20 रुपये में कलश बिक रहा है। ऐसे में लागत भी नहीं निकल पाती। जहां पहले घरों में चार सौ पांच सौ दीये खरीदे जाते थे वहीं अब कुछ दीये खरीद कर रस्म अदायगी की जाती है।<br /><strong>- श्योजी लाल प्रजापति, कुम्हार कारीगर</strong></p>
<p>हीरालाल प्रजापति प्रजापति समाज वर्षों से मिट्टी के बर्तन बनाने का कार्य करता आ रहा है, पर अब धीरे-धीरे समाज के लोगों का इस पारंपरिक धंधे से मोह भंग हो रहा है ,क्योंकि एक तो मिट्टी उपलब्ध नहीं हो पाती और बर्तनों को पकाने के लिए लकड़ियों की जरूरत होती है जो की कठिनाई से प्राप्त की जाती है और सरकार की उदासीनता के कारण यह धंधा चौपट होता जा रहा है।       <br /><strong>- हनुमान प्रजापति,करवर </strong></p>
<p>हीरालाल प्रजापति हीरालाल प्रजापति चाक के सहारे परिवार का गुजारा नामुमकिन है। यही कारण है कि इस पुश्तैनी पेशे को युवा छोड़ रहा है।<br /><strong>- हेमन्त प्रजापति, कुम्हार कारीगर </strong></p>
<p>हीरालाल प्रजापति मिट्टी का व्यवसाई करने वाला कुम्हार समाज गांवों से शहरों की ओर पलायन कर रहा हैं, पुश्तैनी व्यवसाय मिट्टी के बर्तन बनाना अब मुनाफे का नहीं रहा, उपयोगी मिट्टी सहीत इंधन सब महंगा हो गया इस लिए युवा इस धंधे को छोड़ कर अन्य कामों को करने लगे, सरकार की ओर से नुकसान की भरपाई व सब्सिडी सहित बीमा योजना का लाभ इनको मिलना चाहिए आजादी से पूर्व व आजादी के बाद भी कबीरदास जी की उक्ति सत्य सार्थक हो रही है ,"माटी कहे कुम्हार से तु क्यों रौंदें मोए एक दिन ऐसा आएगा मैं रौंदूंगी तोए" वह दिन दूर नहीं।<br /><strong>- कजोडी लाल प्रजापति, राष्ट्रीय कुम्हार महासभा प्रदेश उपाध्यक्ष</strong></p>
<p>हीरालाल प्रजापति दीपावली पर मिट्टी के दीपक जलाने की परम्परा भी बचीं रहें और कुम्हार की रोटी रोजी भी चलती रहें, कुंभकार की आर्थिक स्थिति को मजबूती देने के लिए सरकार को इस लघु उद्योग के रूप में बढ़ावा दिया जाना चाहिए, इससे उसकी कला जीवित रह सकेगी, वही कुम्हार को भी चाहिए कि वह अपनी कलाओं को आधुनिकता के रंग ढंग में रंग कर कर अपनी पीढ़ियों को इसके लिए प्रक्षेपित करे ताकि दीपावली के त्योहार पर उनके चेहरे खिले घरों में दीपक जले और इन सबके बीच सब की खुशियों का दीपपर्व मनाई जा सके।<br /><strong>- शशि शर्मा, रिटायर्ड अध्यापिका,करवर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 19:22:07 +0530</pubDate>
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                <title>इस बार व्यापारियों को रास नहीं आ रहा दशहरा मेला</title>
                                    <description><![CDATA[ मेला परिसर में जगह आवंटन नहीं होने से पुलिस वाले शाम के समय मेला प्रागंण से बाहर निकाल रहे जिससे भारी परेशानी हो रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-time-traders-are-not-liking-dussehra-fair/article-60698"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/gan1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। दशहरा मेला धीरे धीरे परवान चढ़ रहा है लेकिन इस बार छोटे व्यापारियों को 130 वां दशहरा मेला रास नहीं आ रहा है। व्यापारियों को कहना है कि पिछले साल की अपेक्षा इस बार छोटे व्यापारियों का धंधा नहीं होने से निराश नजर आ रहे है। रावण दहन से लेकर आज चार दिन होने आए लेकिन इन चार दिन में हजार रुपए रोज का भी माल नहीं बिक रहा है। ऐसे में इस बार खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा है। मेला परिसर में जगह आवंटन नहीं होने से पुलिस वाले शाम के समय मेला प्रागंण से बाहर निकाल रहे जिससे भारी परेशानी हो रही है। दशहरा मेला में आए व्यापारियों की परेशानी उन्हीं की जुबानी।</p>
<p><strong>15 दिन में 2 हजार के आइटम ही बिके</strong><br />इस बार का दशहरा मेला फ्लाप दिखाई दे रहा है। दिल्ली से यहां चीनी मिट्टी के आइटम बेचने के लिए 15 दिन पहले आए लेकिन इस बार मेले में ना तो कोई बड़ा कार्यक्रम हो रहा ना ही कोई बड़े कलाकार आ रहे है। मेला देखने जो लोग आ रहे वो झूला चकरी का आनंद लेकर निकल जा रहे है। पिछले अच्छा धंधा हुआ इस बार तो 15 दिन में 2 हजार रुपए के ही आइटम ही बिके है। इस बार तो खर्चा निकालना मुश्किल हो रहा है। मेला भी इस बार कार्यक्रम नहीं होने से 12.30 ही खत्म हो रहा है। आचार संहिता की भेंट चढ़ता नजर आ रहा इस बार का मेला। <br /><strong>- गोविंदराम, चीनी मिट्टी के आइटम के विक्रेता</strong></p>
<p><strong>एलईडी और सजावटी लाइट के ग्राहक नहीं</strong><br />दस साल का था तब से मैनपुरी यूपी से इस दशहरा मेला में अपने पिता के साथ सजावटी सामान, इलेक्ट्रानिक आइटम, एलएडी लाइट बेचते आ रहे है। आज में 26 साल का हो गया लेकिन पहली बार दशहरा मेला में ग्राहकी नहीं हो रही है। पिछले साल प्रतिदिन डेढ से दो हजार का माल आसानी से बिक जाता था। शुरुआत चार दिन में दो बार माल मंगवा लेते थे लेकिन इस बार लोग माल कम पूछपरख ज्यादा करने आ रहे है। मेले पर इस बार सारे कार्यक्रम निरस है। जिससे पब्लिक कम आ रही है। माल कैसे बिकेगा यह चिंता सता रही है।<br /><strong>- विवेक, इलेक्ट्रानिक आइटम विक्रेता</strong></p>
<p><strong>चार दिन में हजार रुपए का माल भी नहीं बिका</strong><br />आगरा से दशहरा मेला में हर साल गजक रेवडी, आगरा का पेठा बेचने के लिए 30 से अधिक लोग आते है। रावण दहन से आज चार दिन हो गए लेकिन हजार रुपए का माल भी नहीं बिका पिछले साल रावण दहन से ही तीन से साढे तीन हजार रुपए रोज का माल बिक जाता था। इस बार मेले में आचार संहिता से कार्यक्रम नहीं हो रहे जिससे लोग कम आ रहे है। मेले में जो लोग आ रहे वो झूला चकरी का आनंद लेकर निकल जाते है। इस बार खर्चा निकलना मुश्किल हो रहा है। पुलिस परेशान कर रही । पिछली बार 1965 की रसीद काटी इस बार अभी तक जगह तक आवंटन नहीं की है। ऐसे शाम के समय पुलिस वाले मेला परिसर बाहर निकाल देते है।<br /><strong>- राजवीर, गजक रेवडी विक्रेता </strong></p>
<p><strong>छह साल में पहली बार आ रही परेशानी</strong><br />जोधपुर व जयपुर से आर्टिफिशियल ज्वैलरी व श्रृंगार प्रसाधन की सामग्री बेचने करीब 20 परिवार को इस बार मेले में माल बेचने में परेशानी आ रही है। खरीदार कम और पूछपरख वाले ज्यादा आ रहे है। पिछले छह साल से अनवरत इस दशहरा मेला में माल बेचने आ रहे है पहली बार मेला सूना नजर आ रहा है। 5 लाख माल लेकर एक एक महिला आई है लेकिन अभी तक किसी ने हजार से डेढ हजार रुपए का माल नहीं बेचा है। उधार में माल लेकर आए है। समय पर माल नहीं बिका तो क्रेडिट खराब होने का डर है। <br /><strong>- योगेशी बाई, आर्टिफिशियल ज्वैलरी विक्रेता</strong></p>
<p><strong>पानी पुरी चाट बेचना भी हो गया मुश्किल</strong><br />ग्वालियर से करीब 25 लोग पानी पुरी, पताशा चाट का ठेला लेकर आए है। लेकिन मेला इस बार फीका ही नजर आ रहा है। पिछले साल दशहरा मेला शुरू होते ही 3 से 4 हजार रुपए के पताशा चाट कचोरी बेच देते थे। इस बार रोज 500 रुपए का धंधा हो रहा है। ऐसे में घर किराया ओर खाने का खर्चा भी नहीं निकल रहा है। जगह नहीं मिलने से कल पुलिस वालों ने डंडे मारकर मेला परिसर से बाहर निकाल दिया। पताश तोड दिए जिसे तीन हजार का नुकसान हुआ। दो दिन ओर इंतजार करेंगे ग्राहकी नहीं बढ़ी तो घर लौट जाएंगे। घाटा खाकर धंधा करने से अच्छा ग्वालियर में माल बेचेंगे। इस बार दीपावली फीकी मनेंगी।     <br /><strong>- राम खिलावन, चाट पानी पुरी विक्रेता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 28 Oct 2023 14:01:07 +0530</pubDate>
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                <title>चुनाव नतीजों से कांग्रेस  निराश, नेता बोले: ये पार्टी और लोकतंत्र के लिए ठीक नहीं</title>
                                    <description><![CDATA[उन्होंने कहा कि अभी फाइनल नतीजे आने बाकी है लेकिन ट्रेंड बता रहा है कि नतीजे हमारे पक्ष में नहीं हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/congress-disappointed-with-the-election-results--the-leader-said--this-is-not-good-for-the-party-and-democracy/article-5903"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/bjp10.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पांच राज्यों में विधानसभा चुनाव परिणाम के रुझानों को लेकर कांग्रेस नेताओं ने निराशा जाहिर की है। नेताओं ने माना है कि कांग्रेस अच्छा प्रदर्शन नहीं कर रही है। यह पार्टी के लिए और देश के लोकतंत्र के लिए ये ठीक नहीं है।</p>
<p><br />विधानसभा के बाहर मीडिया से बातचीत करते हुए कैबिनेट मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने नतीजों पर निराशा और हैरानी जताई। उन्होंने कहा कि अभी फाइनल नतीजे आने बाकी है लेकिन ट्रेंड बता रहा है कि नतीजे हमारे पक्ष में नहीं हैं। उन्होंने कहा ये ट्रेंड लोकतंत्र के लिए भी अच्छे नहीं हैं। गोवा और उत्तराखंड में भी कांग्रेस नहीं आ रही। कोई भी राजनीतिक पार्टियां गलती करे तो जनता उस को चुनौती देती हैं, बीजेपी को बिना काम के वोट मिल रहे हैं। बीजेपी जो वादे करके सत्ता में आई उन को ही भूल गई। पेट्रोल डीजल के दाम कम नहीं किए। चुनाव परिणाम के बाद एक बार फिर बीजेपी महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाएगी। महंगाई और बेरोजगारी के मुद्दों पर भाजपा को सबक सिखाने का यह अच्छा मौका था लेकिन जनता ने जो बहुमत दिया है वह शिरोधार्य है। भाजपा जब जब महंगाई और बेरोजगारी बढ़ाएगी तब-तब राहुल गांधी के नेतृत्व में कांग्रेस सड़कों पर उतरकर खून पसीना बहाएगी। मंत्री शांति धारीवाल के बयान पर खाचरियावास ने कहा कि शांति धारीवाल सीनियर नेता है। उन्होंने अपने बयान पर माफी मांग ली है। वो राजस्थान की संस्कृति को समझते हैं। बीजेपी उनसे इसलिए चिढ़ती है, क्योंकि धारीवाल बेबाक तरीके से बीजेपी को जवाब देते हैं। शांति धारीवाल कहना चाह रहे थे कि प्रदेश में रेप के मामले सबसे अधिक दर्ज हुए हैं लेकिन भाजपा ने इसे बिना बात के ही मुद्दा बना लिया। उनके मतलब को भाजपा ने तोड़ मरोड़ कर पेश किया इससे बीजेपी के पाप धुलने वाले नहीं हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Mar 2022 16:17:17 +0530</pubDate>
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                <title>माकन कोरोना पॉजिटिव हुए तो नियुक्ति की आस वाले कांग्रेसियों के चेहरे मायूस</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत और माकन दोनों ही कोरोना पॉजिटिव के बाद अपने आवासों पर क्वारंटाइन हो गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%95%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A5%8B%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%AA%E0%A5%89%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%9F%E0%A4%BF%E0%A4%B5-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%8F-%E0%A4%A4%E0%A5%8B-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%86%E0%A4%B8-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9A%E0%A5%87%E0%A4%B9%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%B8/article-3883"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/makan_gehlot_corona.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत के बाद प्रदेश कांग्रेस प्रभारी अजय माकन के कोरोना पॉजिटिव आने से सत्ता-संगठन में नियुक्ति की आस लगाए बैठे कार्यकर्ताओं में मायूसी छा गई है। गहलोत और माकन दोनों ही कोरोना पॉजिटिव के बाद अपने आवासों पर क्वारंटाइन हो गए। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविन्द सिंह डोटासरा ने भी गहलोत के सम्पर्क में रहने के चलते अभी सतर्कता के तौर पर लोगों से मुलाकात कम कर रखी है।  इस महीने में सियासी और संगठन नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस नेताओं और कार्यकर्ताओं को काफी उम्मीदें बनी हुई हैं। पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा ने भी संभावित नौ जनवरी को दिल्ली जाकर माकन से मिलकर नियुक्ति प्रक्रिया आगे बढ़ाने की तय किया था।  चूंकि अब माकन खुद पॉजिटिव आने पर क्वारंटाइन हो चुके हैं, ऐसे में डोटासरा और माकन की कई दिनों तक मुलाकात संभव नहीं है। राजनीतिक नियुक्तियों को लेकर कई कार्यकर्ता और नेता मुख्यमंत्री अशोक गहलोत से मिलना चाहते थे और कई दिनों से लॉबिंग करने में जुटे थे। गहलोत के भी क्वारंटाइन होने से ये मुलाकातें संभव नहीं हैं, लिहाजा कांग्रेस कार्यकर्ताओं की मायूसी इन नेताओं के पूरी तरह स्वस्थ होने तक बढ़ गई है। <br /><br /><strong><br />दिल्ली तक लॉबिंग तेज, मगर हालातों से मजबूर</strong><br />सत्ता और संगठन में नियुक्तियों को लेकर कांग्रेस कार्यकर्ताओं, नेताओं, विधायकों और वरिष्ठ नेताओं ने जयपुर से लेकर दिल्ली तक अपनी लॉबिंग तेज कर रखी है। कई नेता और कार्यकर्ता तो पिछले डेढ़ दो महीने से बार बार दिल्ली के चक्कर काटकर बडेÞ नेताओं से मिलने के लिए समय मांग रहे हैं। खुद माकन के कार्यालय पर समय मांगने वालों की लम्बी लाइन है। लॉबिंग करने की मेहनत वाले कार्यकर्ता कोरोना हालातों के बीच मजबूर नजर आ रहे हैं। अभी इनके पास इंतजार के अलावा कोई रास्ता नहीं है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Jan 2022 14:29:10 +0530</pubDate>
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                <title>शाह का शाही स्वागत, नहीं रुका काफिला, कार्यकर्ता मायूस</title>
                                    <description><![CDATA[कार्यकर्ताओं के सम्मान में जरूरी बात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61ac8667d9e45/article-2944"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/whatsapp-image-2021-12-05-at-15.35.03.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। देश के गृहमंत्री और बीजेपी के कद्दावर नेता अमित शाह रविवार को जयपुर दौरे पर रहें। लेकिन जयपुर के बीजेपी कार्यकर्ताओं को मायूसी ही हाथ लगी। दरअसल घंटों इंतजार करने के बाद भी बीजेपी कार्यकर्ताओं के बीच ना अमित शाह पहुंचे, ना ही गाड़ी से बाहर निकलकर कार्यकर्ताओं का स्वागत-अभिंदन स्वीकार किया। </p>
<p>उल्लेखिनिय है कि केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह  विशेष विमान से जैसलमेर से जयपुर पहुंचे। शाह का स्वागत राजस्थान के टॉप लिडर्स ने किया। फिर उसके बाद केंद्रीय मंत्री अमित शाह का काफिला एयरपोर्ट से निकलकर कार्यक्रम स्थल JECC, सीतापुरा की ओर रवाना हो गया। केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह के साथ प्रभारी अरुण सिंह और सतीश पूनियां एक ही गाड़ी में मौजूद थे। बड़ी संख्या में सुरक्षा इंतजाम के बीच अमित शाह ने अपनी गाड़ी में बैठे-बैठे ही कार्यकर्ताओं का अभिवादन स्वीकार किया। भाजपा के सभी मोर्चों पर कार्यकर्ताओं की ओर से अपने-अपने अलग-अलग मंच बनाए गए थे। उन्हें उम्मीद थी कि अमित शाह का काफिला रुकेगा, उनका अभिवादन स्वीकार करेगा, लेकिन काफिला नहीं रुका और आगे बढ़ गया। लेकिन कार्यकर्ताओं का उत्साह कम नहीं हुआ। कार्यकर्ता पूरे जोशोखरोश से अमित शाह के समर्थन में नारेबाजी करते रहे। लेकिन मन में मलाल रहा कि जिनके इंतजार में वे सुबह से खड़े थे उनके बीच नहीं आएं। खैर राजनीति में ये सब तस्वीरें देखने को मिलती रहती है। लेकिन सवाल ये खड़ा होता है कि जब शाह के इस कार्यक्रम को 2023 के विधानसभा चुनावों से जोड़ कर देख रही है तो आम कार्यकर्ताओं को कैसे नजर अंदाज किया जा सकता है। जो घर-घर जाकर बीजेपी के लिए वोट मांगता है।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 05 Dec 2021 15:41:10 +0530</pubDate>
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