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                <title>'रहना है तेरे दिल में' का रीमेक क्यों नहीं चाहते आर माधवन... जाने कारण</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता आर माधवन अपनी फिल्म 'रहना है तेरे दिल में' का रीमेक नहीं चाहते हैं।  फिल्म 'रहना है तेरे दिल में' साल 2001 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म को गौतम वासुदेव मेनन ने लिखा और निर्देशित किया था। इस फिल्म में आर माधवन के साथ दीया मिर्जा और सैफ अली खान लीड रोल में थे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/reasons-why-r-madhavan-doesn-t-want-a-remake-of-rehna-hai-tere-dil-mein/article-13165"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/rehnaa-hai-terre-dil-mein.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता आर माधवन अपनी फिल्म 'रहना है तेरे दिल में' का रीमेक नहीं चाहते हैं।  फिल्म 'रहना है तेरे दिल में' साल 2001 में रिलीज हुई थी। इस फिल्म को गौतम वासुदेव मेनन ने लिखा और निर्देशित किया था। इस फिल्म में आर माधवन के साथ दीया मिर्जा और सैफ अली खान लीड रोल में थे। <br /><br />आर माधवन ने 'रहना है तेरे दिल में' के रीमेक के बारे में पूछे जाने पर कहा, ''मुझे लगता है कि यह मूर्खता है। मैं इसे छूना नहीं चाहूंगा। मैं इसे एक प्रोड्यूसर के रूप में नहीं करूंगा। मैं अपने दिल की गहराइयों से उन सभी को शुभकामनाएं देता हूं। बहुत से लोगों के लिए इससे बहुत सारी यादें जुड़ी हुई हैं। ऑडियंस के लिए यह एक मूवी से बढ़कर है। कुछ मायनों में ये एंथम की तरह है।''<br /><br />माधवन ने कहा, ''मैं उस तरह का आदमी नहीं हूं, जो अक्सर पीछे मुड़कर देखता है और जो कुछ हुआ है, उसके बारे में अपनी लाइफ का मूल्यांकन करता है। मैं वास्तव में बहुत ही लिव-इन-द-मोमेंट टाइप का लड़का रहूं। इसलिए मैं आभारी हूं कि मेरे पास काम करने की क्षमता है और मैं जो चाहता हूं, उसे करने के लिए जनता का प्यार है, लेकिन मैं इस पर घमंड नहीं करता हूं। मैं इसके लिए बस आभारी हूं।''</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 16:38:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>  नहीं चाहिए ‘अग्निपथ’ </title>
                                    <description><![CDATA[आरएलपी की अगुवाई में जमकर हंगामा, रास्ता रोकने की कोशिश, पुलिस ने भांजी लाठियां]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/dont-want-agneepath/article-12386"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/dhr.jpg" alt=""></a><br /><p>अजमेर। केंद्र सरकार की ओर से सेना में भर्ती के लिए लॉन्च की गई ‘अग्निपथ’ योजना के विरोध में गुरुवार को राष्ट्रीय लोकतांत्रिक पार्टी (RLP) के प्रदेश कार्यकारिणी सदस्य विजय पाल राव व मेड़ता विधायक इंदिरा देवी के नेतृत्व में पार्टी कार्यकर्ताओं के साथ ही सेना भर्ती की तैयारी कर रहे सैकड़ों युवाओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर जमकर प्रदर्शन किया। युवाओं ने बस स्टैण्ड के बाहर हंगामा भी किया। इस दौरान इनकी पुलिस से धक्का-मुक्की भी हुई। भीड़ को तितरबितर करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजनी पड़ीं। इधर एडीएम सिटी को राष्टÑपति के नाम का ज्ञापन देकर इस योजना को वापस लेने की मांग की गई।</p>
<p>सदस्य विजयपाल व विधायक इंदिरा ने बताया कि रक्षा मंत्री कह रहे हैं कि अग्निपथ योजना से सेना में नई ऊर्जा का संचार होगा और युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे। जबकि हकीकत यह है कि सेना में संविदा आधारित भर्ती की यह योजना किसी भी रूप से देश के युवाओं और सेना के हित में नहीं है। ऐसे में सरकार को इस निर्णय पर पुनर्विचार कर इसे अमलीजाम नहीं पहनाना चाहिए। उन्होंने कहा कि बीते दो साल से सेना भर्ती रैली नहीं होने से युवाओं के सपने को गहरा आघात पहुंचा है। ऐसे में युवाओं को सेना में भर्ती के लिए दो साल की आयु में शिथिलता देने के साथ ही जल्द भर्ती निकाली जानी चाहिए। साथ ही सेना की अधूरी भर्ती प्रक्रिया को जल्द शुरू किया जाए। विजयपाल ने कहा कि यदि सरकार इस योजना को वापस नहीं लेती है तो पार्टी आंदोलन करेगी और जरूरत पड़ी को संसद का घेराव भी करेगी। ज्ञापन देने वालों में पार्टी के प्रदेश उपाध्यक्ष जगदीश लांबा, सदस्य प्रेमाराम खोकर, जिलाध्यक्ष धर्मेंद्र राव आदि शामिल थे।</p>
<p><strong>पहले से पुलिस जाब्ता मुस्तैद</strong></p>
<p>रैली के रूप में पहुंचे युवाओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर पीएम मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। किसी भी अनहोनी से बचने के लिए यहां भारी पुलिस जाप्ता तैयार रहा। प्रदर्शन के बाद युवाओं ने कलेक्ट्रेट के बाहर बैठकर रास्ता जाम करने की कोशिश की। लेकिन पुलिस ने उन्हें हटा दिया। </p>
<p><strong>पुलिस व युवाओं के बीच धक्का-मुक्की</strong></p>
<p>बाद में युवाओं ने बस स्टैण्ड के बाहर भी जाम लगाने का प्रयास किया। ऐसे में पुलिस और युवाओं में धक्का-मुक्की भी हई। युवाओं को तितरबितर करने के लिए पुलिस को लाठियां भांजने के साथ ही इनके पीछे दौड़ लगानी पड़ी। इस दौरान एक युवक को पुलिस ने पकड़ कर जीप में डाल दिया, हालांकि बाद में उसे छोड़ दिया। इसके बाद भी युवा जयपुर रोड सेंट्रल जेल के बाहर एकत्रित होकर प्रदर्शन करने लगे। मामले की गंभीरता को देखते हुए जिला प्रशासन और पुलिस के आलाअफसर मौके पर पहुंचे और इन्हें समझा बुझाकर रवाना किया। इसके बाद जिला और पुलिस प्रशासन ने राहत की सांस ली।</p>
<p><strong>पदाधिकारी ज्ञापन देकर चलते बने, प्रदर्शनकारी डटे रहे</strong></p>
<p>ताज्जुब की बात यह है कि पार्टी के सभी पदाधिकारी और विधायक इंदिरा देवी प्रशासन को ज्ञापन देकर चलते बने, जबकि प्रदर्शनकारी युवा एक से दो घंटे तक यही डटे रहे और हंगामा करते रहे। बताया जा रहा है कि पार्टी पदाधिकारियों और युवाओं में कहासुनी हुई। पदाधिकारियों के जाने से युवाओं में पार्टी के खिलाफ गुस्सा दिखा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 13:18:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>लद्दाख़, कश्मीर व पूर्वोत्तर राज्य घूमने की चाह रखते है आप... तो पढ़े यह खबर.. IRCTC गर्मियों में कराएगा पहाड़ों की सैर</title>
                                    <description><![CDATA[ आइआरसीटीसी ने मई-जून में इन स्थलों पर घूमने के लिए पैकेज बनाए है। इन पैकेज के अंतर्गत हवाई यात्रा, होटलों में आवास , भोजन तथा घूमने फिरने की सभी सुविधाएँ दी जाएँगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--if-you-want-to-visit-ladakh--kashmir-and-northeast-states----then-read-this-news---irctc-will-make-you-visit-the-mountains-in-summer/article-9474"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/91.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इस बार लद्दाख़, कश्मीर व पूर्वोत्तर राज्य घूमने की चाह रखने वाले सैलानियों की संख्या कई गुना बड़ गई है। इस बार गर्मियों की छुट्टियाँ बिताने के लिए पर्यटकों ने भारतीय रेलवे खानपान एवं पर्यटन निगम (IRCTC) से सबसे अधिक लद्दाख़ घूमने की डिमांड की है। कश्मीर व पूर्वोत्तर राज्यों की सैर करने वालों की संख्या भी काम नहीं है। इसे देखते हुए आइआरसीटीसी ने मई-जून में इन स्थलों पर घूमने के लिए पैकेज बनाए है। इन पैकेज के अंतर्गत हवाई यात्रा, होटलों में आवास , भोजन तथा घूमने फिरने की सभी सुविधाएँ दी जाएंगी। <br /><br /><strong>- ये हैं टूर और पैकेज</strong><br />28 मई से 27 जून तक डिस्कवर लद्दाख़ विद आइआरसीटीसी के तहत लेह, शाम वैली, नुब्रा वैली, तुरटुक, पंगोंग लेक की सैर करवाई जाएगी। इसके लिए पाँच रात/ छः दिन का 42,270 का पैकेज है। <br /><br />2 जून को दार्जिलिंग गंगटोंक कालिंपोंग नोर्थ ईस्ट पैकेज  के तहत कालिंपोंग, गंगटोंक एवं दार्जिलिंग घुमाया जाएगा। इस टूर में छः रात/सात दिन के पैकेज का खर्चा 40,990 रुपय है। 28 मई से 4 जून तक एनचैटिंग कश्मीर पैकेज के तहत श्रीनगर, सोनमर्ग, पहलगाम और गुलमर्ग की सैर कराई जाएगी। इस पैकेज के तहत पाँच रात/छः दिन का खर्चा 28,250 रुपय प्रति टुरिस्ट रखा गया है। आइआरसीटीसी के संयुक्त महाप्रबंधक/पर्यटन योगेन्द्र गुर्जर ने बताया की गर्मियों में पर्यटकों का रुझान पहाड़ों और ठंडे प्रदेशों की तरफ़ ज़्यादा रहता है। इसी को ध्यान में रखते हुए ये टूर आयोजित किए जा रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 May 2022 14:53:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूस और यूके्रन के विवाद की क्या है असली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[रूस और यूक्रेन के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली। पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर रूस और यूक्रेन में युद्ध क्यों हो रहा है? यह विवाद शुरू कहां से हुआ और क्यों अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध भी नाकाम रहे।  विवाद यह है कि यूक्रेन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो का सदस्य देश बनना चाहता है और रूस इसका विरोध कर रहा है। नाटो अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच एक सैन्य गठबंधन है, इसलिए रूस नहीं चाहता कि उसका पड़ोसी देश नाटो का मित्र बने। <br /> <br /> <strong>यूक्रेन का इतिहास </strong><br /> यूक्रेन के नाटो देश में शामिल होने की वजह 100 साल पुरानी है, जब अलग देश का अस्तित्व भी नहीं था। 1917 से पहले रूस और यूक्रेन रूसी साम्राज्य का हिस्सा थे। 1917 में रूसी क्रांति के बाद, यह साम्राज्य बिखर गया और यूक्रेन ने खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया. हालांकि यूक्रेन मुश्किल से तीन साल तक स्वतंत्र रहा और 1920 में यह सोवियत संघ में शामिल हो गया। यूक्रेन के लोग हमेशा से खुद को स्वतंत्र देश मानते रहे। 1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तो यूक्रेन सहित 15 नए देशों का गठन हुआ। सही मायनों में यूक्रेन को साल 1991 में आजादी मिली। हालांकि, यूक्रेन शुरू से ही समझता है कि वह रूस से कभी भी अपने दम पर मुकाबला नहीं कर सकता और इसलिए वह एक ऐसे सैन्य संगठन में शामिल होना चाहता है जो उसकी आजादी को महफूज रख सके। नाटो से बेहतर संगठन कोई और नहीं है जो यूक्रेन की रक्षा कर सके।<br /> <br /> रूस के सामने चुनौती यह है कि उसके कुछ पड़ोसी देश पहले ही नाटो में शामिल हो चुके हैं। इनमें एस्टोनिया और लातविया जैसे देश हैं, जो पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे। अब अगर यूक्रेन भी नाटो का हिस्सा बन गया तो रूस हर तरफ से अपने दुश्मन देशों से घिर जाएगा और अमेरिका जैसे देश उस पर हावी हो जाएंगे। अगर यूक्रेन नाटो का सदस्य बन जाता है और रूस भविष्य में उस पर हमला करता है तो समझौते के तहत इस समूह के सभी 30 देश इसे अपने खिलाफ हमला मानेंगे और यूक्रेन की सैन्य सहायता भी करेंगे।</p>
<p><br /> रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन ने एक बार कहा था कि यूक्रेन को खोना रूस के लिए एक शरीर से अपना सिर काट देने जैसा होगा।  यही वजह है कि रूस नाटो में यूक्रेन के प्रवेश का विरोध कर रहा है। यूक्रेन रूस की पश्चिमी सीमा पर स्थित है। जब 1939 से 1945 तक चले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूस पर हमला किया गया तो यूक्रेन एकमात्र ऐसा क्षेत्र था जहां से रूस ने अपनी सीमा की रक्षा की थी। अब अगर यूक्रेन नाटो देशों के साथ चला गया तो रूस की राजधानी मास्को, पश्चिम से सिर्फ 640 किलोमीटर दूर होगी। <br /> <br /> <strong>विवाद का असली विलेन कौन?</strong><br /> रूस और यूक्रेन के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है। अमेरिका ने अपने 3000 सैनिकों को यूक्रेन की मदद के लिए भेजा है और उनकी तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि वे यूक्रेन की मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। सच्चाई यह है कि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, यूक्रेन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी छवि मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। पिछले साल अमेरिका को अफगानिस्तान से अपनी सेना बुलानी पड़ी थी। ईरान में अमेरिका कुछ हासिल नहीं कर पाया और प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया  मिसाइल परीक्षण भी कर रहा है। इन घटनाओं से अमेरिका की सुपर पॉवर इमेज को नुकसान पहुंचा है। यही वजह है कि बाइडेन यूक्रेन-रूस विवाद के साथ इसकी भरपाई करना चाहते हैं।<br /> <br /> अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने भी यूक्रेन का समर्थन किया है। इन देशों का समर्थन कब तक चलेगा यह एक बड़ा सवाल है क्योंकि यूरोपीय देश अपनी गैस की एक तिहाई जरूरत के लिए रूस पर निर्भर हैं। अब अगर रूस इस गैस की आपूर्ति बंद कर देता है तो इन देशों में भयानक पॉवर क्राइसिस होगा।<br /> <br /> <strong>किसके साथ खड़ा है भारत?</strong><br /> रूस-यूक्रेन के विवाद में भारत की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण है। रूस और अमेरिका दोनों भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत अभी भी अपने 55 फीसदी हथियार रूस से खरीदता है जबकि अमेरिका के साथ भारत के संबंध पिछले 10 वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। जिस देश में यूक्रेन ने सबसे पहले फरवरी 1993 में एशिया में अपना दूतावास खोला वह भारत था। तब से भारत और यूक्रेन के बीच व्यापारिक, रणनीतिक और राजनयिक संबंध मजबूत हुए हैं। यानी भारत इनमें से किसी भी देश को परेशान करने का जोखिम नहीं उठा सकता। रूस ने अब तक भारत-चीन सीमा विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया है।</p>
<p><br />  अगर भारत यूक्रेन का समर्थन करता है तो वह कूटनीतिक रूप से रूस को चीन के पक्ष में ले जाएगा। शायद यही कारण है कि हाल ही में जब अमेरिका सहित 10 देश संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन पर एक प्रस्ताव लेकर आए भारत ने किसी के पक्ष में मतदान नहीं किया। भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि इस समय यूक्रेन में करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें से 18 हजार मेडिकल के छात्र हैं। यूक्रेन और रूस के रिश्ते को समझना बहुत मुश्किल है। यूक्रेन के लोग स्वतंत्र रहना चाहते हैं, लेकिन पूर्वी यूक्रेन के लोगों की मांग है कि यूक्रेन को रूस के प्रति वफादार रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/what-is-the-real-reason-behind-the-dispute-between-russia-and-ukraine--why-does-ukraine-want-to-join-nato/article-4968</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 12:24:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>नाइजीरिया ने कचरे में फेंके दस लाख टीके, कहा: नहीं चाहिए दान</title>
                                    <description><![CDATA[सिर्फ दो फीसदी लोगों को लगी है वैक्सीन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%9C%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A4%9A%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AB%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B8-%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%96-%E0%A4%9F%E0%A5%80%E0%A4%95%E0%A5%87--%E0%A4%95%E0%A4%B9%E0%A4%BE--%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%8F-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%A8/article-3494"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/45.jpg" alt=""></a><br /><p>अबुजा।  दुनिया में कोरोना वैक्सीन को लेकर एक असंतुलन पैदा हो रहा है। यह असंतुलन लोगों तक वैक्सीन की पहुंच को लेकर है। कोरोना का नया वेरिएंट ओमीक्रॉन सामने आने के बाद वैक्सीन की मांग और ज्यादा बढ़ गई है। कुछ देश अपने निवासियों को एक और दो बूस्टर डोज लगा रहे हैं तो कई जगह अभी लोगों को पहली खुराक का ही इंतजार है। इस बीच खबर आई कि नाइजीरिया ने बुधवार को एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन की 1 मिलियन से अधिक खराब हो चुकीं खुराकों को नष्ट कर दिया। अधिकारियों ने कहा कि उनकी अंतिम तिथि के बाद उन्हें इस्तेमाल नहीं किया जा सकता है। नाइजीरिया की एनपीएचसीडीए के प्रमुख फैसल शुएब ने कहा कि अफ्रीका के सबसे अधिक आबादी वाले देश में स्वास्थ्य अधिकारियों के पास दान में दी गई खुराकों को लेकर बहुत कम विकल्प बचे थे। इन खुराकों की शेल्फ लाइफ बहुत ज्यादा नहीं बची थी।<br /> <strong><br /> फरवरी तक एक चौथाई से अधिक आबादी के टीकाकरण का लक्ष्य</strong><br /> उन्होंने कहा कि विकसित देशों ने इन टीकों की खरीद की और इन्हें जमा किया। जब ये खराब होने वाले थे तो इन्हें दूसरे देशों को दान कर दिया। पिछले हफ्ते शुएब ने कहा था कि नाइजीरिया अब इस तरह के दान को स्वीकार नहीं करेगा। नाइजीरिया के 20 करोड़ 60 लाख लोगों में से केवल 2 प्रतिशत लोगों को पूरी तरह से टीका लगाया गया है। स्वास्थ्य अधिकारियों ने फरवरी तक एक चौथाई से अधिक आबादी का टीकाकरण करने का महत्वाकांक्षी लक्ष्य निर्धारित किया है।<br /> <br /> <strong>सिर्फ 20 फीसदी डोज बूस्टर</strong><br /> द्रोस ने इससे पहले स्वस्थ वयस्कों को इस साल के अंत तक बूस्टर खुराक देने पर रोक लगाने की अपील की थी ताकि असमान वैश्विक टीका वितरण से निपटा जा सके। उन्होंने कहा कि अभी प्रतिदिन लगाई जा रही टीके की 20 प्रतिशत खुराक बूस्टर हैं। उन्होंने कहा कि अमीर देशों में धड़ल्ले से बूस्टर खुराक लगाए जाने से कोविड-19 महामारी लंबे समय तक रहने की संभावना बनेगी, ना कि यह खत्म होगी।</p>
<p><br /> <strong>डब्ल्यूएचओ ने दी चेतावनी</strong><br /> विश्व स्वास्थ्य संगठन प्रमुख ने चेतावनी दी है कि अमीर देशों में धड़ल्ले से बूस्टर खुराक लगाए जाने से कोविड-19 महामारी के लंबे समय तक रहने की संभावना बनेगी। साथ ही, कहा कि कोई भी देश इस तरीके से महामारी की गिरफ्त से बाहर नहीं निकल पाएगा। डब्ल्यूएचओ महानिदेशक द्रोस अदहानोम गेब्रेयेसस ने बुधवार को कहा कि इस साल टीके ने कई लोगों की जान बचाई है लेकिन उनके असमान वितरण ने कई लोगों की जान ले भी ली। उन्होंने कहा कि अधिक टीकाकरण कवरेज वाले देशों को टीके की आपूर्ति बढ़ाने से वायरस को फैलने और अपना स्वरूप बदलने का कहीं अधिक अवसर मिलेगा।  टेड्रोस ने कहा कि कोरोना वायरस संक्रमण के कारण अस्पतालों में भर्ती या मरने वाले लोगों के एक बड़े हिस्से को टीका नहीं लगा है।  विश्व स्वास्थ्य संगठन की यह चेतावनी ऐसे समय पर आई है जब इजरायल अपने नागरिकों को वैक्सीन की चार खुराक लगा रहा है। वहीं कई अफ्रीकी देशों में बड़ी आबादी को पहली खुराक भी नहीं मिल पाई है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Dec 2021 12:27:41 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[देश-प्रदेश की सियासत से लेकर प्रशासन की वो बातें जो जानना चाहते है आप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A4/article-2955"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/qutub-minar,delhi,india.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>निशाना कहां?</strong><br /> जब वक्त बुरा हो। तो सबसे पहले, अपने ही अपमान करने पर आमादा होते। साथ में, अविश्वास की खाई भी बढ़ती। करीब छह दशकों तक देश पर शासन करने वाली कांग्रेस का आजकल हाल ऐसा ही। ‘ग्रैंड ऑल्ड पार्टी’ से ही निकली ममता दीदी। कह रहीं संप्रग जैसा अब कुछ नहीं। यहां तक कि राहुल गांधी के विदेश दौरों को राजनीति के प्रति उनकी गंभीरता से जोड़ रहीं। कांग्रेस से ही निकले शरद पवार उन्हें उकसा रहे। बचे खुचे चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर। जो कल तक कांग्रेस में आने को आतुर थे। अब वह भी गांधी परिवार पर सवाल उठा रहे। लेकिन पॉलिटिकल प्रोसेस में मंजकर निकली ममता दीदी इतनी अपरिपक्व भी नहीं। बंगाल जैसे 42 सीटों वाले राज्य की क्षत्रप की राष्ट्रीय महत्वाकांक्षाओं की अपनी सीमाएं। उसके बावजूद कांग्रेस से ही सीधा पंगा। शायद दीदी की नजर कांग्रेस के ‘जी-23’ पर। जहां से गांधी परिवार को छोड़कर आगे बढ़ते हुए कांग्रेस संगठन पर! इसीलिए एक-एक करके हर राज्य में कांग्रेस के बड़े विकट उड़ा रहीं...</p>
<p><br /> <strong>पांच और 12 दिसंबर!</strong><br /> मरुधरा में पांच दिसंबर हो गई और 12 दिसंबर महत्वपूर्ण होने जा रही। मानो 2023 की कांग्रेस और भाजपा दोनों को ही जल्दी। पांच दिसंबर को हुए भाजपा जनप्रतिनिधि सम्मेलन की अगुवाई अमित शाह ने की। शाह मोदी सरकार में मंत्री। उनका संगठन के कामकाज से सीधा कोई वास्ता नहीं। उसके बावजूद उनकी मौजूदगी 2023 की तैयारियों का साफ संकेत। क्योंकि 2018 में वह खुद पार्टी अध्यक्ष थे। उनका जयपुर आना कई को इशारा होगा। इसी प्रकार, कांग्रेस की 12 दिसंबर जयपुर में मोदी सरकार के खिलाफ  रैली। प्रदेश में कांग्रेस का राज। इसलिए भीड़ जुटाने की जिम्मेदारी सीएम गहलोत की। उनके मंत्रिमंडल में पायलट समर्थक मंत्रियों को हाल ही में समायोजित किया गया। उसके बावजूद इधर-उधर से असंतोष के सुर आ रहे। ऐसे में, कहीं यह रैली गहलोत एवं पायलट के बीच शक्ति परीक्षण साबित होकर न रह जाए! क्योंकि मंच पर सोनिया गांधी, राहुल गांधी और प्रियंका गांधी होंगे। क्या साल 2023 की जंग की नींव भी इसी रैली में पड़ेगी?</p>
<p><strong><br /> पंजाब में चुनावी बिसात ..</strong><br /> तो पंजाब में चुनावी बिसात आगे बढ़ रही। कांग्रेस अपने प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के नाज नखरों से हलकान। उनकी सीएम चन्नी से पटरी बैठ नहीं रही। पूर्व पीसीसी जाखड़ ने भी नई टीम के साथ काम करने से मना कर दिया। आम आदमी पार्टी की रणनीति भी बिखर रही। कल तक ‘आप’ सत्ता में आने के मंसूबे पाल रही थी। लेकिन अब जमीन पर लगातार हालात बदल रहे। दिल्ली के सीएम केजरीवाल के पंजाब में फैरे बढ़ गए। वह सीएम चन्नी के खिलाफ तीखी बयानबाजी कर रहे। यह रणनीति का हिस्सा। लेकिन वह दलित समुदाय से। सो, हमलावर होने की भी सीमा। इधर, कल तक जो भाजपा अकाली दल से गठबंधन टूटने के बाद पुछल्ली दिख रही थी। अब वह केन्द्र में आती दिख रही। भाजपा ने अकालियों को पंजाब एवं दिल्ली तोड़ना शुरु कर दिया। पूर्व सीएम अमरिन्दर सिंह के साथ आने में बस चुनाव आचार संहिता की घोषणा का इंतजार। क्या कांग्रेस विधायक कैप्टन साहब के साथ आएंगे?</p>
<p><strong><br /> निलंबन के बहाने!</strong><br /> क्या मोदी सरकार ने 12 विपक्षी राज्यसभा सांसदों का सदन से निलंबन करवाकर संप्रग को उलझा दिया? जिसकी अगुवाई कांग्रेस कर रही। संसद के शीतकालीन सत्र की शुरूआत में जो हुआ। उससे तो यही लग रहा। मतलब विपक्ष की लाइन और लैंथ पहले ही दिन सरकार ने बिगाड़ दी? उच्च सदन में भाजपा अभी सहयोगियों एवं बाहर से मुद्दों के आधार पर समर्थन देने वाले क्षेत्रीय दलों पर निर्भर। जबकि कांग्रेस विपक्षी दलों के साथ अभी भी सरकार का कामकाज अटकाने की स्थिति में। तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की प्रक्रिया जिस तेजी से संसद में पूरी की गई। उस पर कांग्रेस ने सवाल उठाए। विपक्षी दल और किसान आंदोलन की अगुवाई कर रहे नेता पीएम मोदी के कदम से सन्न। मानो पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव से पहले ‘तुरुप का पत्ता’ जैसा मुद्दा चला गया। उपर से सदन में कृषि कानूनों पर बोलने का अवसर भी गया। कहीं, निलंबन प्रकरण सरकार के लिए बिगड़े हालात मैनेज करने का जरिया तो नहीं बना?</p>
<p><br /> <strong>बयान पर बयान...</strong><br /> जब से गहलोत मंत्रिमंडल का पुनर्गठन हुआ। तभी से कुछ न कुछ बयान ऐसे आ रहे। मानो सब कुछ सामान्य नहीं। नॉर्मलसी तो भाजपा के खेमे में भी नहीं। वहां 2023 की अगुवाई को लेकर रस्साकशी जैसे हालात। लेकिन यहां अभी भी बड़े नेता उलझने में मशगूल दिखाई दे रहे। मंत्री नहीं बनाए जाने से नाराज एक नेताजी ने इसकी योग्यता पूछ डाली। बसपा से कांग्रेस में आए एक विधायकजी कैबिनेट मंत्री नहीं बनाए जाने से रूठे रहे। प्रभारी अजय माकन और पीसीसी डोटासरा को मशक्कत करनी पड़ी। एक सलाहकार बने नेताजी तो अपने को कैबिनेट मंत्री स्तर का बता बैठे। एक अन्य निर्दलीय विधायकजी सचिन पायलट पर बरस पड़े। कहा, पायलट के कारण ही उनके साथी मंत्री नहीं बने। अभी संसदीय सचिव बनाए जाने बाकी। इसी बीच, सीएम बोले, छह-आठ माह बाद फिर से विस्तार करेंगे। ऐसे में आकांक्षियों को आस। एक दर्जन से ज्यादा जिलाध्यक्ष घोषित हो गए। मतलब 12 दिसंबर को भीड़ जुटाने में प्रतिस्पर्धा रहेगी। भाजपा की भी 16 को रैली।-दिल्ली डेस्क</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Dec 2021 12:02:38 +0530</pubDate>
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