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                <title>राज नहीं, राष्ट्र रक्षा का काम करती है सेना,पेंशन बचाने के लिए लाए अग्निपथ योजना: हुड्डा</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर। अग्निपथ योजना के विरोध में रविवार को पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा और राज्यसभा सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने पार्टी मुख्यालय ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए योजना को तुरंत वापस लेने की मांग की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/army-does-the-job-of-protecting-the-nation--not-raj--has-brought-agneepath-scheme-to-save-pension-hooda/article-13056"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/dipendra-hudda_new.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अग्निपथ योजना के विरोध में रविवार को पीसीसी चीफ गोविन्द सिंह डोटासरा और राज्यसभा सांसद दीपेन्द्र सिंह हुड्डा ने पार्टी मुख्यालय ने केन्द्र सरकार पर निशाना साधते हुए योजना को तुरंत वापस लेने की मांग की।</p>
<p><br />पीसीसी में मीडिया से बात करते हुए हुड्डा ने कहा कि अग्निपथ योजना को तुरंत केंद्र सरकार वापस ले। योजना ना तो देश के हित में है ना युवाओं के हित में है। केंद्र सरकार को अहंकार छोडकर युवाओं के भी मन की बात सुननी चाहिए। कृषि कानून के  मामले में केंद्र सरकार के अपने फैसले को वापस लिया, लेकिन तब तक 700 किसानों की मौत हो चुकी थी। अग्निपथ योजना को लेकर न संसद में बहस की गई  न ही एक्सपर्ट से बात की गई। सेना के कई रिटायर्ड  अधिकारी भी इस योजना का विरोध कर रहे है। इस योजना के चलते सेना के जवानों में  कमी आएगी। हुड्डा ने कहा कि अगर सैनिक अपने भविष्य को लेकर चिंतित रहेगा, तो फिर वो देश की सुरक्षा किस मन से करेगा। सेना में एक साल की ट्रैनिंग दी जाती है, लेकिन अब 6 माह की ट्रेनिंग जाएगी, इससे भी सेना कमजोर होगी। जिस सेना को विश्व की सर्वश्रेष्ठ सेना माना जाता था उसके साथ अब छेडख़ानी हो रही है। प्रधानमंत्री को बताना चाहिए है कि आखिर सेना में क्या कमी है? केंद्र सरकार के विभागों में करीब 25 लाख पद खाली हैं। भूतपूर्व सैनिकों को आज भी अन्य विभागों की नोकरी में प्राथमिकता दी जाती है, अगर अब चार साल के बाद जो युवा रिटायर होगा उसे क्या सरकार रोजगार देगी।</p>
<p><br /><strong>सेना पर नहीं करे राजनीति:</strong><br />भाजपा हर विषय पर राजनीति करती है, लेकिन सेना के नाम पर राजनीति नही होनी चाहिए। महगांई और बेरोजगारी जैसे बड़े  मुद्दों से ध्यान हटाने के लिए भाजपा इन तरह की चीजों को लेकर आती है। अग्निपथ के विरोध में कल सोमवार को देशव्यापी आंदोलन होगा। हर विधानसभा क्षेत्र में सुबह10 बजे से धरने प्रदर्शन होंगे।</p>
<p><br /><strong>सिर्फ पेंशन रोकने के लिए लाए योजना:</strong> <br />देश की सेना में अगर रिफॉर्म करने की बात हो , सेना को मजबूत करने की बात हो, इससे कांग्रेस को कोई आपत्ति नही है, लेकिन इस पर संसद में चर्चा होनी चाहिए। ये सिर्फ सैनिकों की पेंशन रोकने के लिए यह योजना लायी गयी है। देश के रक्षा बजट में भारी कटौती की गई है। वो भी ऐसे समय मे जब चीन और पाकिस्तान एक साथ हो। ऑपरेशन लोटस को लेकर दीपेंद्र हुड्डा ने कहा, बीजेपी को राजस्थान में मुंह की खानी पड़ी थी महाराष्ट्र में हमारा गठबंधन मजबूत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jun 2022 14:49:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सरकार वादे पर खरा नहीं उतरी तो समाज करेगा आंदोलन : बैंसला</title>
                                    <description><![CDATA[ 29 मई 2007 को दौसा के पाटोली-पीपलखेड़ा गांव के पास गुर्जर आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए गुर्जर समाज के सैकड़ों लोग करणपुर स्थित स्थल पर एकत्रित हुए।विजय बैंसला ने सरकार को ललकारते हुए हाथ जोड़कर समाज की मांगों को पूर्ण करने का निवेदन किया। उन्होंने कहा कि सरकारी भर्तियों का क्रियान्वयन अभी तक नहीं हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/government-does-not-live-up-promise-society-agitate--says-bansla/article-10779"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/12-copy2.jpg" alt=""></a><br /><p> <strong>महुवा।</strong> 29 मई 2007 को दौसा के पाटोली-पीपलखेड़ा गांव के पास गुर्जर आरक्षण आंदोलन में मारे गए लोगों को श्रद्धांजलि देने के लिए गुर्जर समाज के सैकड़ों लोग रविवार को करणपुर स्थित स्थल पर एकत्रित हुए। जिन्होंने वहां श्रद्धांजलि सभा का आयोजन करते हुए उन्हें नम आंखों से श्रद्धा सुमन अर्पित किए। इस दौरान वहां श्रद्धा सुमन अर्पित करने पहुंचे गुर्जर नेता विजय बैंसला ने सरकार को ललकारते हुए हाथ जोड़कर समाज की मांगों को पूर्ण करने का निवेदन किया।</p>
<p><span style="color:#000000;"><strong>सरकारी भर्तियों का क्रियान्वयन अभी तक नहीं हुआ : बैंसला</strong></span></p>
<p>उन्होंने कहा कि सरकारी भर्तियों का क्रियान्वयन अभी तक नहीं हुआ है। उन्होंने कहा कि आंदोलन के दौरान दर्ज किए मुकदमों का सरकार ने निस्तारण नहीं किया है, बल्कि हमारे लोगों को गिरफ्तार करने की धमकियां दी जा रही है। सरकार में दम है तो उन्हें गिरफ्तार करें। हम भी यही चाहते हैं एक बार सरकार यह कदम तो उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार ने बैकलॉग पूरा करने का आश्वासन दिया था, लेकिन हुआ कुछ भी नहीं। उन्होंने सरकार को फिर चेताया कि सरकार हमारे धैर्य की परीक्षा नहीं लें। बल्कि जो समाज की मांगे हैं उन्हें पूर्ण करने के लिए आगे आए। विजय बैंसला ने कहा कि प्रक्रियाधीन भर्तियों में बैकलॉग के माध्यम से भर्ती करने का आश्वासन दिया गया था और यह आश्वासन घोषणा पत्र में दिया गया था। इसके बावजूद भी सरकार साढ़े 3 साल के कार्यकाल में अपने वादे पर खरी नहीं उतरी है। बैंसला ने कहा कि करीब सवा वर्ष का समय बचा है सरकार अपना वादा पूरा कर दे, नहीं तो समाज आंदोलन के लिए तैयार हो जाएगा। इस दौरान विधायक ओमप्रकाश हुड़ला ने गुर्जर समाज के प्रति समर्पण भावना रखते हुए कहा कि अगर गुर्जर समाज सोसाइटी का निर्माण कर लेता है तो छात्रावास निर्माण के लिए विधायक कोष से 31 लाख रुपए देंगे। उन्होंने महुआ में स्व कर्नल किरोड़ी सिंह बैंसला के नाम से सड़क मार्ग बनवाने की भी घोषणा की। इस दौरान पूर्व जिला प्रमुख अजीत सिंह महुआ, एडवोकेट भवर सिंह ,महेंदर खेड़ला, हरदेव पावटा, भूरा भगत ने भी सैकड़ों लोगों के साथ श्रद्धा सुमन अर्पित किए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 May 2022 15:30:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>ऐतिहासिक फैसला</title>
                                    <description><![CDATA[हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है: HC]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/sectarian--historic-verdict--karnataka-high-court--while-dismissing-five-petitions-seeking-permission-to-wear-the-hijab-in-the-classroom--has-ruled-that-the-hijab-is-neither-a-mandatory-part-of-islam-nor-does-its-non-wearing-violate-any-religious-right/article-6303"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/hijab.jpg" alt=""></a><br /><p>कर्नाटक हाई कोर्ट ने कक्षा में हिजाब पहनने की अनुमति देने की अपील करने वाली पांच याचिकाओं को खारिज करते हुए फैसला दिया है कि हिजाब न तो इस्लाम धर्म का अनिवार्य अंग है और न ही इसके न पहनने से किसी प्रकार के धार्मिक अधिकार का हनन होता है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि हिजाब न पहनने से निजता व शिक्षा के मूल अधिकार का हनन नहीं होता है। तीन न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि स्कूल वर्दी का नियम एक उचित पाबंदी है और संवैधानिक रूप से मान्य है। वर्दी के मामले में छात्राओं की आपत्ति उचित नहीं है। वास्तव में यह ऐसा रूढिवादीता फैसला है, जिसका मुस्लिम समाज के प्रगतिशील तबके को स्वागत करना चाहिए। यह एक ऐसा फैसला भी है, जिसके बाद हिजाब विवाद यहीं समाप्त हो जाना चाहिए, लेकिन लगता है ऐसा नहीं होगा क्योंकि याचिका दायर करने वाली छात्राओं के वकील ने कहा है कि मामले को सुप्रीम कोर्ट लेकर जाएंगे। दरअसल, कर्नाटक स्थित उड्डी के दो सरकारी प्री-यूनिवर्सिटी कॉलेजों की कुछ छात्राओं ने कॉलेज प्रबंधन द्वारा कक्षाओं में हिजाब पहनने पर रोक लगाने के खिलाफ अदालत में याचिका दायर की थी। इससे पहले फरवरी के मध्य में हिजाब विवाद को लेकर कर्नाटक में फिर पूरे देश में विवाद खड़ा हो गया। जब इस मामले का विरोध हुआ तो कुछ छात्र भगवा शॉल डालकर प्रदर्शन करने लगे। इस दौरान पांच राज्यों में हो रहे विधानसभा चुनावों में भी इस मुद्दे को लेकर राजनीति गर्म रही। तब इस विवाद के मूल में राजनीतिक निहितार्थ की बात कही गई। इसे लेकर मामले की सुनवाई कर रही पीठ ने भी कहा कि अकादमिक सत्र के बीच में अचानक यह मुद्दा क्यों उठा? लगता है कि इसके पीछे किसी का हाथ है। निस्संदेह, अशांति पैदा करने व सद्भाव को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया गया। इस विवाद को लेकर आंदोलन में जगह-जगह पथराव, तोड़फोड़ की घटनाएं शुरू हो गईं। स्कूल-कॉलेज बंद तक करने की नौबत आ गई। धार्मिक स्वतंत्रता व निजता के अधिकार को लेकर बहस शुरू हो गई। लेकिन अंतत: अदालत ने इस सबसे इनकार कर दिया। लेकिन हिजाब की रस्म को जिस तरह मजहबी-चोला पहनाकर इस्लाम के मुल्ला व फतवा जारी करने वालों ने मुस्लिम महिलाओं के साथ न्याय नहीं किया। जबकि आज महिलाओं को सशक्त बनाने की जरूरत है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Mar 2022 13:03:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>पति की खानदानी प्रॉपर्टी में पत्नी को कितना हक</title>
                                    <description><![CDATA[ तलाक का समय किसी भी कपल के लिए कई तरह के टेंशन वाला होता है,पति-पत्नी न केवल एक दूसरे से कानूनी लड़ाई लड़ रहे होते हैं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक तौर पर भी उनके लिए यह मुश्किल समय होता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/how-much-right-does-the-wife-have-in-her-husband-s-family-property/article-5335"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/property.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>पति की खानदानी प्रॉपर्टी में पत्नी को कितना हक</strong></span><br />कानूनी रूप से महिलाओं को अपने पति की प्रॉपर्टी पर कई तरह के अधिकार मिले हैं, लेकिन इसके लिए कई बातों को ध्यान में रखना होता है। एक महिला बेटी या बहू होने के अलावा एक पत्नी भी होती है, सामाजिक तौर पर आप महिलाओं को मिलने वाले अधिकार के लिए अपने विचार रख सकते हैं, उसपर बहस कर सकते हैं, लेकिन कानूनी तौर पर महिलाओं को कई तरह के अधिकार मिले हैं, बहुत कम लोगों को इन अधिकारों के बारे में पता होता है।<br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>प्रॉपर्टी से जुड़े अधिकार</strong></span><br />कानूनी रूप से केवली पहली पत्नी ही नहीं बल्कि दूसरी पत्नी को भी कई तरह के अधिकार मिलते हैं, हालांकि,इसके लिए कुछ शर्तों को भी पूरा करना होता है। तलाक का समय किसी भी कपल के लिए कई तरह के टेंशन वाला होता है,पति-पत्नी न केवल एक दूसरे से कानूनी लड़ाई लड़ रहे होते हैं, बल्कि मानसिक और भावनात्मक तौर पर भी उनके लिए यह मुश्किल समय होता है।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong> पति के नाम प्रॉपर्टी  </strong></span><br />अगर पति-पत्नी के आपसी सहमति से तलाक होता है और प्रॉपर्टी पर पति का नाम है तो पत्नी को हिस्सेदारी नहीं मिल सकती है, मान लीजिए पत्नी उस घर में रह रही है, जिसे पति ने खरीदा है और यह उनके नाम पर है तो तलाक के बाद पत्नी इस प्रॉपर्टी पर दावा नहीं कर सकती है, भारतीय कानून के तहत प्रॉपर्टी पर उन्हीं का अधिकार होता है, जिसके नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर्ड है, इस तरह के मामले में पत्नी अपने पूर्व पति से मेंटेनेंस की मांग कर सकती है ,लेकिन प्रॉपर्टी में कानूनी रूप से दावा नहीं कर सकती है।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>मालिकाना हक</strong></span>  <br />आज के दौर में अधिकतर कपल्स दोनों के नाम पर प्रॉपर्टी रजिस्टर कराते हैं,इस तरह की प्रॉपर्टी पर मालिकाना हक पति-पत्नी दोनों के पास होता है, तलाक के बाद दोनों को अपनी-अपनी हिस्सेदारी पर कानूनी दावा करने का अधिकार है, हालांकि इस दावे के लिए जरूरी है कि पत्नी यह दिखाए कि उन्होंने प्रॉपर्टी की खरीदारी में योगदान दिया है, अगर पत्नी ने प्रॉपर्टी खरीदने में योगदान नहीं दिया है लेकिन इसके बाद भी प्रॉपर्टी उनके नाम भी रजिस्टर्ड है तो संभव है कि वो इसपर दावा न कर सकें। ज्वाइंटली मालिकाना वाली प्रॉपर्टी में पत्नी उतनी हिस्सेदारी की ही मांग कर सकती है, जितने के लिए उन्होंने खरीदारी में योगदान दिया है,ऐसे में जरूरी है कि महिलाएं भी इस तरह की प्रॉपर्टी को लेकर अपना डॉक्युमेंट्स दुरुस्त करें,अगर कपल्स चाहें तो शांतिपूर्वक अपने स्तर पर इसे लेकर समझौता कर सकते हैं,जो कोई भी प्रॉपर्टी अपने पास रखना चाहता है वो दूसरे व्यक्ति की हिस्सेदारी को खरीद सकता है।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>अगर कपल्स अलग हो  </strong></span><br />यह ध्यान देना है कि जब तक कोर्ट ने पति-पत्नी के बीच तलाक पर मुहर नहीं लगाया है, तब तक दोनों के बीच कानूनी रिश्ता कायम रहता है कोर्ट का फैसला आने तक पति की प्रॉपर्टी पर पत्नी का ही हक होता है,ऐसी भी स्थिति हो सकती है कि इस दौरान पति किसी और महिला के साथ रहने लग रहा या उनसे शादी कर ले, इस स्थिति में महिला के पास पहली पत्नी और उनके बच्चों को इस प्रॉपर्टी पर पूरा हक होगा।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>पति की प्रॉपर्टी पर</strong> </span> <br />पति की प्रॉपर्टी पर महिला के पास बराबर का हक होता है ,अगर पति ने अपने वसीयत में इस प्रॉपर्टी पर से पत्नी का नाम हटा दिया है तो पत्नी का कोई हक नहीं बनेगा, इसके सिवाय पति की खानदानी प्रॉपर्टी पर पत्नी का हक होगा, पत्नी के पास अधिकार होगा कि वो अपने ससुराल में रहे।</p>
<p><br /> <span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>दूसरी पत्नी का अधिकार</strong></span> <br />अगर कोई व्यक्ति अपनी पहली पत्नी से कानूनी रूप से अलग हुए बिना ही दूसरी शादी कर लेता है तो दूसरी पत्नी और उससे होने वाले बच्चे के अधिकार सीमित हो जाते हैं,कानूनी रूप से तलाक पूरा होने तक पहली पत्नी का ही अधिकार होता है, हिन्दू विवाह अधिनियम 1955 के तहत कोई व्यक्ति एक समय में एक से अधिक विवाह नहीं कर सकता है।</p>
<p><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#000080;"><strong>पहली पत्नी की मृत्यु</strong></span></p>
<p>अगर पहली पत्नी की मृत्यु हो जाती है या तलाक के बाद कोई व्यक्ति दूसरी शादी कर लेता है तो दूसरी पत्नी को सभी तरह के अधिकार मिलते हैं, इसमें पति के प्रॉपर्टी पर अधिकार भी शामिल है, ऐसी स्थिति में दूसरी पत्नी को अपने पति की खानदानी प्रॉपर्टी पर भी अधिकार होगा,इस प्रकार किसी व्यक्ति के दूसरी पत्नी का कानूनी अधिकार इस बात पर निर्भर करता है कि उनकी शादी कानूनी रूप से वैध है या नहीं। इस प्रकार भारत में कानूनी रूप से पति की प्रॉपर्टी पर पत्नी का अधिकार कई तरह की बातों पर निर्भर करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/opinion/how-much-right-does-the-wife-have-in-her-husband-s-family-property/article-5335</link>
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                <pubDate>Wed, 02 Mar 2022 14:46:10 +0530</pubDate>
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                <title>रूस और यूके्रन के विवाद की क्या है असली वजह</title>
                                    <description><![CDATA[रूस और यूक्रेन के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<br /><p>नई दिल्ली। पूरी दुनिया में चर्चा का विषय बना हुआ है कि आखिर रूस और यूक्रेन में युद्ध क्यों हो रहा है? यह विवाद शुरू कहां से हुआ और क्यों अमेरिका और संयुक्त राष्ट्र के प्रतिबंध भी नाकाम रहे।  विवाद यह है कि यूक्रेन उत्तरी अटलांटिक संधि संगठन यानी नाटो का सदस्य देश बनना चाहता है और रूस इसका विरोध कर रहा है। नाटो अमेरिका और पश्चिमी देशों के बीच एक सैन्य गठबंधन है, इसलिए रूस नहीं चाहता कि उसका पड़ोसी देश नाटो का मित्र बने। <br /> <br /> <strong>यूक्रेन का इतिहास </strong><br /> यूक्रेन के नाटो देश में शामिल होने की वजह 100 साल पुरानी है, जब अलग देश का अस्तित्व भी नहीं था। 1917 से पहले रूस और यूक्रेन रूसी साम्राज्य का हिस्सा थे। 1917 में रूसी क्रांति के बाद, यह साम्राज्य बिखर गया और यूक्रेन ने खुद को एक स्वतंत्र देश घोषित कर दिया. हालांकि यूक्रेन मुश्किल से तीन साल तक स्वतंत्र रहा और 1920 में यह सोवियत संघ में शामिल हो गया। यूक्रेन के लोग हमेशा से खुद को स्वतंत्र देश मानते रहे। 1991 में जब सोवियत संघ का विघटन हुआ तो यूक्रेन सहित 15 नए देशों का गठन हुआ। सही मायनों में यूक्रेन को साल 1991 में आजादी मिली। हालांकि, यूक्रेन शुरू से ही समझता है कि वह रूस से कभी भी अपने दम पर मुकाबला नहीं कर सकता और इसलिए वह एक ऐसे सैन्य संगठन में शामिल होना चाहता है जो उसकी आजादी को महफूज रख सके। नाटो से बेहतर संगठन कोई और नहीं है जो यूक्रेन की रक्षा कर सके।<br /> <br /> रूस के सामने चुनौती यह है कि उसके कुछ पड़ोसी देश पहले ही नाटो में शामिल हो चुके हैं। इनमें एस्टोनिया और लातविया जैसे देश हैं, जो पहले सोवियत संघ का हिस्सा थे। अब अगर यूक्रेन भी नाटो का हिस्सा बन गया तो रूस हर तरफ से अपने दुश्मन देशों से घिर जाएगा और अमेरिका जैसे देश उस पर हावी हो जाएंगे। अगर यूक्रेन नाटो का सदस्य बन जाता है और रूस भविष्य में उस पर हमला करता है तो समझौते के तहत इस समूह के सभी 30 देश इसे अपने खिलाफ हमला मानेंगे और यूक्रेन की सैन्य सहायता भी करेंगे।</p>
<p><br /> रूसी क्रांति के नायक व्लादिमीर लेनिन ने एक बार कहा था कि यूक्रेन को खोना रूस के लिए एक शरीर से अपना सिर काट देने जैसा होगा।  यही वजह है कि रूस नाटो में यूक्रेन के प्रवेश का विरोध कर रहा है। यूक्रेन रूस की पश्चिमी सीमा पर स्थित है। जब 1939 से 1945 तक चले द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान रूस पर हमला किया गया तो यूक्रेन एकमात्र ऐसा क्षेत्र था जहां से रूस ने अपनी सीमा की रक्षा की थी। अब अगर यूक्रेन नाटो देशों के साथ चला गया तो रूस की राजधानी मास्को, पश्चिम से सिर्फ 640 किलोमीटर दूर होगी। <br /> <br /> <strong>विवाद का असली विलेन कौन?</strong><br /> रूस और यूक्रेन के विवाद में अमेरिका की अहम भूमिका है। अमेरिका ने अपने 3000 सैनिकों को यूक्रेन की मदद के लिए भेजा है और उनकी तरफ से यह आश्वासन दिया गया है कि वे यूक्रेन की मदद के लिए हर संभव प्रयास करेंगे। सच्चाई यह है कि मौजूदा अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन, यूक्रेन का इस्तेमाल सिर्फ अपनी छवि मजबूत करने के लिए कर रहे हैं। पिछले साल अमेरिका को अफगानिस्तान से अपनी सेना बुलानी पड़ी थी। ईरान में अमेरिका कुछ हासिल नहीं कर पाया और प्रतिबंधों के बावजूद उत्तर कोरिया  मिसाइल परीक्षण भी कर रहा है। इन घटनाओं से अमेरिका की सुपर पॉवर इमेज को नुकसान पहुंचा है। यही वजह है कि बाइडेन यूक्रेन-रूस विवाद के साथ इसकी भरपाई करना चाहते हैं।<br /> <br /> अमेरिका के अलावा ब्रिटेन और फ्रांस जैसे देशों ने भी यूक्रेन का समर्थन किया है। इन देशों का समर्थन कब तक चलेगा यह एक बड़ा सवाल है क्योंकि यूरोपीय देश अपनी गैस की एक तिहाई जरूरत के लिए रूस पर निर्भर हैं। अब अगर रूस इस गैस की आपूर्ति बंद कर देता है तो इन देशों में भयानक पॉवर क्राइसिस होगा।<br /> <br /> <strong>किसके साथ खड़ा है भारत?</strong><br /> रूस-यूक्रेन के विवाद में भारत की स्थिति भी बहुत महत्वपूर्ण है। रूस और अमेरिका दोनों भारत के लिए महत्वपूर्ण हैं। भारत अभी भी अपने 55 फीसदी हथियार रूस से खरीदता है जबकि अमेरिका के साथ भारत के संबंध पिछले 10 वर्षों में काफी मजबूत हुए हैं। जिस देश में यूक्रेन ने सबसे पहले फरवरी 1993 में एशिया में अपना दूतावास खोला वह भारत था। तब से भारत और यूक्रेन के बीच व्यापारिक, रणनीतिक और राजनयिक संबंध मजबूत हुए हैं। यानी भारत इनमें से किसी भी देश को परेशान करने का जोखिम नहीं उठा सकता। रूस ने अब तक भारत-चीन सीमा विवाद पर तटस्थ रुख अपनाया है।</p>
<p><br />  अगर भारत यूक्रेन का समर्थन करता है तो वह कूटनीतिक रूप से रूस को चीन के पक्ष में ले जाएगा। शायद यही कारण है कि हाल ही में जब अमेरिका सहित 10 देश संयुक्त राष्ट्र में यूक्रेन पर एक प्रस्ताव लेकर आए भारत ने किसी के पक्ष में मतदान नहीं किया। भारत के लिए चिंता की बात यह भी है कि इस समय यूक्रेन में करीब 20,000 भारतीय फंसे हुए हैं जिनमें से 18 हजार मेडिकल के छात्र हैं। यूक्रेन और रूस के रिश्ते को समझना बहुत मुश्किल है। यूक्रेन के लोग स्वतंत्र रहना चाहते हैं, लेकिन पूर्वी यूक्रेन के लोगों की मांग है कि यूक्रेन को रूस के प्रति वफादार रहना चाहिए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/world/what-is-the-real-reason-behind-the-dispute-between-russia-and-ukraine--why-does-ukraine-want-to-join-nato/article-4968</link>
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                <pubDate>Fri, 25 Feb 2022 12:24:40 +0530</pubDate>
                
                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>सरकार को उत्सव मनाने का अधिकार नहीं अपने किए वादे पूरे नहीं किए: पूनिया</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत सरकार के 3साल पूरे होने पर बीजेपी प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया ने कसा तंज]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/61bc5cad7b896/article-3298"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/gehlot_puniya.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सरकार के 3 साल पूरे होने पर भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया ने मीडिया से बातचीत में कहा है कि राजस्थान की सरकार को 3 साल पूरे होने पर उत्सव मनाने का कोई अधिकार नहीं है । उन्होंने कहा कि सरकार ने 3 साल में अपने किए वादे की पूरे नहीं किए कांग्रेस के चुनावी घोषणा पत्र में और राहुल गांधी ने 10 दिन में किसानों की कर्ज माफी की घोषणा की थी। लेकिन आज तक किसानों को इसका इंतजार है। वहीं प्रदेश में सरकारी भर्तियां अटकी हुई है, युवाओं को रोजगार देने का वादा भी पूरी तरह से विफल रहा है। राजस्थान बेरोजगारी हिसाब से देश में शीर्ष पर है। प्रदेश में बेरोजगारों को भत्ता देने का वादा भी झूठा ही साबित हुआ। प्रदेश में 30लाख बेरोजगार हैं। जिनमें से केवल डेढ़ लाख लोगों को बेरोजगारी भत्ता दिया गया है। प्रदेश में कानून व्यवस्था की भी दयनीय स्थिति है। राजस्थान अपराधों की राजधानी बन गया है। सरकार 3 साल तक आपसी अंतर कलह में फंसी रही और इसके चलते जनता के  गवर्नेंस के काम नही हुए। सरकार 40 दिन तक बाड़े बंदी में रही।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Dec 2021 16:14:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>भाजपा मुद्दों की राजनीति नहीं करके धर्म और बंटवारे की राजनीति करती है: डोटासरा</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेसजनों ने अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%AD%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A8%E0%A4%B9%E0%A5%80%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A7%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%AC%E0%A4%82%E0%A4%9F%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A4%A4%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%88--%E0%A4%A1%E0%A5%8B%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%BE/article-2959"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/dotasra.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा ने भाजपा पर एक बार फिर से निशाना साधा है। गृह मंत्री अमित शाह की जयपुर में सभा में दिए बयानों पर भी आपत्ति जाहिर की है। पीसीसी में सोमवार को अंबेडकर की पुण्यतिथि पर पुष्पांजलि कार्यक्रम के बाद डोटासरा ने मीडिया से बात करते हुए कहा कि देश में इस समय महंगाई बड़ा मुद्दा है। इस मुद्दे से देश का हर आम आदमी, महिलाएं और नौजवान परेशान है। आम आदमी को सोनिया गांधी और राहुल गांधी पर भरोसा है कि वह केंद्र सरकार के खिलाफ इस मुद्दे पर उनकी आवाज उठाएंगे। इसीलिए जयपुर में महंगाई हटाओ रैली आयोजित की जा रही है। डोटासरा ने मोदी सरकार और भाजपा नेताओं पर निशाना साधते हुए कहा कि मोदी सरकार को सत्ता में आये 7 साल हो गए। जिन मुद्दों की बात उन्होंने की थी वो एक भी पूरा नही किया । वे आज भी राम मंदिर, 370 और हिंदुस्तान पाकिस्तान की बात करते रहे। भाजपा मुद्दों की राजनीति नही करती है, वो झूठे वादे ओर धर्म के आधार पर बांटने की राजनीति करती है। मोदी सरकार ने किसानों को 12 महीने तक परेशान रखा और अब बैक डोर से कृषि कानून बिल वापस ले लिए। उत्तर प्रदेश में केंद्रीय गृह राज्य मंत्री के बेटे ने किसानों को कुचल कर मार दिया था लेकिन केंद्रीय गृह राज्य मंत्री ने अभी तक इस्तीफा नहीं दिया है। राजस्थान में भाजपा का जब शासन था यो 56 प्रतिशत गरीब और महिलाओं को कोर्ट से मामले दर्ज करवाने पड़ते थे आज 16 प्रतिशत रह गयी है। आज राजस्थान में मामले दर्ज होते है, चाहे उनमें बाद मे एफआर क्यों न लगे। महंगाई हटाओ रैली पर डोटासरा ने कहा कि आज देश में महंगाई एक बड़ा मुद्दा है इसीलिए हम राष्ट्रीय स्तर की यह रैली जयपुर में आयोजित कर रहे हैं इस रैली में देश के कोने-कोने से लोग आएंगे खासकर महिलाओं में इस रैली में आने के लिए बहुत उत्सुकता है। ओमिक्रोन वायरस के फैलने के डर के सवाल पर कहा कि हम रैली में सोशल डिस्टेंसिंग सेनीटाइजर मास्क आदि प्रोटोकॉल का पूरा ध्यान रखेंगे इसके लिए बाकायदा कांग्रेस कार्यकर्ताओं और नेताओं को जिम्मेदारी सौंपी गई है।</p>
<p><strong>कांग्रेसजनों ने अंबेडकर को श्रद्धांजलि अर्पित की</strong><br /> भारत रत्न और संविधान के निर्माता डॉ भीमराव अंबेडकर की पुण्यतिथि पर सोमवार को प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय पर पुष्पांजलि कार्यक्रम आयोजित हुआ। इस अवसर पर प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष गोविंद सिंह डोटासरा, प्रदेश महिला कांग्रेस अध्यक्ष रेहाना रियाज, पीसीसी प्रवक्ता आर सी चौधरी, पूर्व राज्यसभा सांसद अश्क अली टाक, पूर्व महापौर ज्योति खंडेलवाल, सादिक चौहान, राजेश चौधरी, सुशील शर्मा, नवरंग सिंह,मंजू शर्मा, राजू खान, शरीफ खान सहित अनेक कांग्रेस जनों ने अंबेडकर के चित्र पर पुष्प अर्पित कर श्रद्धांजलि दी।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Dec 2021 12:48:38 +0530</pubDate>
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