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                <title>sanatan dharma - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दुर्भाग्य है धर्मयुद्ध के लिए निकलना पड़ रहा: शंकराचार्य स्वामी ने कहा गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने की मांग को लेकर धर्मयुद्ध यात्रा जारी</title>
                                    <description><![CDATA[शंकराचार्य अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती की 'धर्मयुद्ध यात्रा' रायबरेली से लखनऊ की ओर बढ़ रही है। उन्होंने उत्तर प्रदेश सरकार को गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए दिए गए 40 दिनों के अल्टीमेटम में अब केवल दो दिन शेष होने की चेतावनी दी है। वह जल्द ही उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मिलकर अपनी रणनीति साझा करेंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/it-is-unfortunate-that-one-has-to-leave-for-the/article-145732"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/pratapgarh-shankaracharya.png" alt=""></a><br /><p>रायबरेली। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा कि काशी से शुरू हुई उनकी धर्मयुद्ध यात्रा आगे लखनऊ तक जारी रहेगी और उत्तर प्रदेश सरकार को गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए दिए गए 40 दिन के समय में अब केवल दो दिन शेष रह गए हैं।</p>
<p>शंकराचार्य से जुड़े यश पांडेय ने रविवार को बताया कि एक रात के प्रवास के बाद शंकराचार्य की धर्मयुद्ध यात्रा रायबरेली से आगे बढ़ गई है और वह अगले पड़ाव के लिए उन्नाव रवाना हो गए। आगे उनका लखनऊ पहुंचकर उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य से मुलाकात का कार्यक्रम प्रस्तावित है।</p>
<p>बताया गया कि शंकराचार्य शनिवार को रायबरेली पहुंचे थे, जहां उन्होंने भाजपा समर्थित विधायक मनोज पांडेय के भतीजे यश पांडेय के आवास पर रात्रि विश्राम किया। रविवार सुबह लगभग 10 बजे वह उन्नाव के लिए रवाना हो गए। प्रस्थान से पहले सुबह उन्होंने मीडिया से बातचीत की।</p>
<p>मीडिया से बातचीत में शंकराचार्य ने कहा कि उन्होंने वाराणसी से शंखनाद कर धर्मयुद्ध यात्रा की शुरुआत की है, जिसका उद्देश्य सनातन धर्म और गोमाता की रक्षा के मुद्दे को लेकर जनजागरण करना है। उन्होंने कहा कि प्रदेश सरकार को गोमाता को राष्ट्रमाता घोषित करने के लिए 40 दिन का समय दिया गया था, जिसमें अब केवल दो दिन शेष रह गए हैं। यदि इस अवधि में कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया तो लखनऊ में आगे की रणनीति तय की जाएगी।</p>
<p>उन्होंने कहा कि देश की बहुसंख्यक जनता ने गोमाता की रक्षा और सनातन धर्म के संरक्षण की अपेक्षा के साथ सरकारों को समर्थन दिया, लेकिन अब तक गो रक्षा से संबंधित ठोस कानून लागू नहीं हो पाया है। इस दौरान शंकराचार्य ने अपने ऊपर लगाए गए आरोपों का भी खंडन करते हुए कहा कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई सामने आ सके। उन्होंने कहा कि उनकी धर्मयुद्ध यात्रा का उद्देश्य सनातन धर्म की रक्षा और समाज में फैली भ्रम की स्थिति को दूर करना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 08 Mar 2026 18:28:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>11 दिन बाद शंकराचार्य का विरोध प्रदर्शन खत्म, इस बात पर बनी सहमति</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज में शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 11 दिन बाद विरोध समाप्त किया। काशी रवाना होते हुए बोले, सनातन धर्म और गौहत्या रोकने की लड़ाई जारी रहेगी। समर्थकों ने जताया भरोसा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/shankaracharyas-protest-ends-after-11-days-consensus-reached/article-141037"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px)-(2)6.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। शंकराचार्य स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद ने 11 दिन बाद आखिरकार विरोध प्रदर्शन खत्म कर दिया है। बता दें कि इससे पहले कल मंगलवार को 10वें दिन गुजरात के पूर्व मुख्यमंत्री शंकर सिंह वाघेला शंकराचार्य का समर्थन करने पहुंचे थे।</p>
<p>बता दें कि 11 वे दिन आज शंकराचार्य प्रयागराज माघ मेले को छोड़कर काशी के लिए रवाना हुए तो उन्होंने आखिर में कहा-यह वक्त बताएगा किसकी हार हुई है किसकी जीत हुई है। हम सनातन धर्म की लड़ाई और गौ हत्या बंद हो इसे लेकर लड़ते रहे हैं और लड़ते रहेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 28 Jan 2026 14:12:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>माघ मेला प्रशासन ने जारी किया स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस, जानें क्यों?</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज माघ मेला प्रशासन ने स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद को नोटिस जारी कर उनके 'शंकराचार्य' पद की वैधता पर सवाल उठाए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/magh-mela-administration-issued-notice-to-swami-avimukteshwaranand-know-why/article-140236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)6.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। प्रयागराज मेला प्राधिकरण ने उच्चतम न्यायालय की नोटिस का हवाला देते हुये स्वामी अविमुक्तेश्वरा नंद सरस्वती को नोटिस जारी कर 24 घंटे में जवाब मांगा है। मेला प्रशासन द्वारा ज्योतिष पीठ का शंकराचार्य न माने जाने को लेकर स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती का जवाब भी सामने आया है। उन्होंने साफ कहा है कि शंकराचार्य वह है जिसे बाकी अन्य तीन पीठों के शंकराचार्य मान्यता देते हैं। उन्होंने दावा किया है कि बाकी दो पीठों द्वारका पीठ और श्रृंगेरी पीठ के शंकराचार्य उन्हे शंकराचार्य कहते हैं। </p>
<p>स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद सरस्वती ने कहा है कि पिछले माघ मेले में उन्हे साथ लेकर दोनों शंकराचार्य स्नान कर चुके हैं। उन्होंने कहा है कि जब श्रृंगेरी और द्वारका के शंकराचार्य यह कह रहे हैं कि वह ही शंकराचार्य हैं, तो आखिर किस प्रमाण की आवश्यकता है कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं। </p>
<p>उन्होंने कहा, क्या अब यह प्रशासन तय करेगा कि हम शंकराचार्य हैं कि नहीं। क्या उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री या भारत का राष्ट्रपति तय करेगा कि शंकराचार्य कौन है। भारत के राष्ट्रपति को भी यह अधिकार नहीं है कि वह यह तय करें कि शंकराचार्य कौन है। शंकराचार्य का निर्णय शंकराचार्य करते हैं। हम निर्णीत हैं क्योंकि पुरी के शंकराचार्य ने हमारे बारे में कुछ नहीं कहा है। उन्होंने न तो यह कहा कि वह शंकराचार्य नहीं है और ना ही यह कहा कि शंकराचार्य हैं। पुरी के शंकराचार्य इस मामले में मौन हैं। इस विवाद में सुप्रीम कोर्ट में भी जो हलफनामा उनकी ओर से दाखिल किया गया है। उसको लेकर यह भ्रम फैलाया गया कि उन्होंने विरोध किया है लेकिन जब हम लोगों ने हलफनामे की उच्चतम न्यायालय से कापी निकाली तो उसमें यह लिखा गया है कि हमसे कोई समर्थन मांगा नहीं इसलिए हमने समर्थन नहीं दिया है। </p>
<p>अविमुक्तेश्वरानंद ने कहा, दो शंकराचार्य का प्रत्यक्ष और लिखित व व्यव हारिक समर्थन मुझे प्राप्त है।इसके साथ ही तीसरे पीठ के शंकराचार्य की मौन स्वीकृति हमारे साथ है। ज्योतिष पीठ का आखिर और कौन शंकराचार्य है यह बताइए। निर्विवाद रूप से ज्योतिष पीठ के हम शंकराचार्य हैं। अगर इस पर कोई विवाद दिखता है तो इसका मतलब वह दूषित भावना वाला है। उन्होंने चुनौती देते हुए कहा है कि अगर कोई यह कहता है कि मैं ज्योतिष पीठ पर शंकराचार्य हूं तो वह आकर मुझसे बात करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 20 Jan 2026 14:39:35 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>विदेशी किशोरों ने अपनाया सनातन धर्म, सीख रहे हिन्दू साधना पद्धति</title>
                                    <description><![CDATA[ सनातन धर्म का डंका दुनिया भर में बज रहा है। विदेशी किशोरों पर संन्यास का क्रेज छाया है। वे माथे पर तिलक, सिर पर मोटी चोटी और मोती-रामनामी ओढ़कर प्रभु श्रीराम, भगवान शिव और श्रीकृष्ण को समझने का प्रयास कर रहे हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/foreign-teenagers-adopted-sanatan-dharma-and-are-learning-hindu-spiritual/article-101523"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(1)48.png" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। सनातन धर्म का डंका दुनिया भर में बज रहा है। विदेशी किशोरों पर संन्यास का क्रेज छाया है। वे माथे पर तिलक, सिर पर मोटी चोटी और मोती-रामनामी ओढ़कर प्रभु श्रीराम, भगवान शिव और श्रीकृष्ण को समझने का प्रयास कर रहे हैं। विदेशी किशोरों ने सनातन धर्म से प्रभावित होकर संस्कृति और संस्कार बदल लिया है। सनातन धर्म का डंका सात समंदर पार तक बज रहा है, इसका विश्व समुदाय के सामने जीता-जागता उदाहरण महाकुंभ में आए बाल और किशोर संन्यासी हैं। संगम की रेती पर अमेरिका, रूस और जर्मनी के कई बालकों और किशोरों ने सनातन धर्म से प्रभावित होकर अपनी संस्कृति और संस्कार दोनों बदल दिए हैं। रूस की राजधानी मास्को से आए दिमित्रो और डेनियल संन्यास धारण कर संगम में डुबकी लगाकर वेद की ऋचाओं का पाठ कर रहे हैं। वह संतों के सानिध्य में देव भाषा संस्कृत भी सीख रहे हैं, ताकि वेद के श्लोकों का शुद्ध उच्चारण कर सकें। 11 वर्षीय दिमित्रों और 13 वर्षीय डेनियल ही नहीं ऐसे 50 से अधिक विदेशी बालक और किशोर महाकुंभ के दो स्नान पर्व बीतने तक सनातन संस्कृति को पूरी तरह अपना कर संन्यासी बन चुके हैं। </p>
<p>यह विदेशी किशोर संन्यासी बनकर कल्पवासियों के बीच की कठिन जीवन शैली से लेकर नागाओं के धूना रमाने की साधना तक को करीब से जानने का प्रयास कर रहे हैं। सेक्टर-19 के अपने शिविर में दिमित्रो चार बजे भोर में ही उठ जाते हैं। यह रिक्शे से हर रोज प्रात: संगम स्नान के बाद सूर्य भगवान को अर्घ्य देकर पूजा करते हैं। वह बताते हैं कि कल्पवास कर रहे देवरिया निवासी रामायण तिवारी से वह पूजा पद्धति सीख रहे हैं। इसी अमेरिका के न्यूयार्क निवासी उद्यमी एडम्मा के पुत्र 15 वर्षीय पुत्र लियाम ने भी महाकुंभ में हिन्दू धर्म अपना लिया है। जींस, कोट-पैंट में न्यूयार्क से आए लियाम ने अब सफेद धोती पहनने, लपेटने के साथ ही रामनामी ओढ़कर ध्यान और प्रभु का नाम जप शुरू कर दिया है। लियाम ने संगम पर केश मुंडन कराकर मोटी चोटी रख ली है। वह भी रोज रिक्शे से संगम में डुबकी लगाने जाते हैं। वह दुर्गा चालीसा, हनुमान चालीसा के साथ ही वेद पाठ का अभ्यास कर रहे हैं। इसी तरह जापान की महामंडलेश्वर केको आईकाव्य उर्फ कैला माता के शिविर में रूस, जापान और नेपाल के बालक और किशोर संन्यासी के अंश में ध्यान-साधना में रम गए हैं।</p>
<p>जूना अखाड़े के महंतों, महामंडलेश्वरों के शिविरों में 50 से अधिक विदेशी बालक और किशोर संन्यासी बनकर ध्यान-साधना कर रहे हैं। ऐसे कई किशोर संन्यासी बनने के बाद तीन पहर गंगा स्नान भी कर रहे हैं। महाकुंभ क्षेत्र में बने 12 राज्यों के पवेलियन भारत की एकता का संदेश दे रहे हैं। यहां दादरानागर हवेली, नागालैंड, लेह, छत्तीसगढ़ आदि राज्यों की संस्कृति का संगम हो रहा है। प्रदेश सरकार देश-विदेश के लोगों को महाकुंभ का आमंत्रण भेजा गया है। राज्यपालों, मुख्यमंत्रियों, मंत्रियों को आमंत्रण दिए गए। इसका असर दिखने लगा है। सेक्टर सात में 12 राज्यों के पवेलियन बनाए गए हैं। इन राज्यों की खूबियों को प्रदर्शित किया गया। नागालैंड का चांगलो, लेह का शोंडोल लोक नृत्य समेत दादरानगर हवेली, छत्तीसगढ़, गुजरात, एमपी, आंध्र प्रदेश, उत्तराखंड और राजस्थान की संस्कृति का संगम देखने को मिल रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Jan 2025 11:58:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>सनातन धर्म सुरक्षित तो दुनिया सुरक्षित : योगी आदित्यनाथ</title>
                                    <description><![CDATA[योगी ने कहा '' आज बांग्लादेश में क्या हो रहा है, पाकिस्तान में क्या हुआ था, इससे पहले अफगानिस्तान में क्या हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/if-sanatan-dharma-is-safe-then-the-world-is-safe/article-98231"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/yogi-adityanath-16600668021.jpg" alt=""></a><br /><p>अयोध्या। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि वसुधैव कुटुंबकम् का आवाहन करने वाले सनातन धर्म की सुरक्षा में पूरी दुनिया की सुरक्षा निहित है। योगी ने रामनगरी अयोध्या के अशर्फी भवन आश्रम में आयोजित भव्य अष्टोत्तरशत 108 श्रीमछ्वागवत पाठ और पंच नारायण महायज्ञ में वैदिक मंत्रोच्चार के साथ प्रदेशवासियों के सुख, शांति और समृद्धि की कामना करते हुए आहुतियां अर्पित की। उन्होने कहा कि अगर विश्व मानवता को बचाना है तो सनातन धर्म का सम्मान करना होगा। यह धर्म सभी के कल्याण की बात करता है। उन्होंने वसुधैव कुटुंबकम् का संदर्भ देते हुए कहा कि यह केवल सनातन धर्म है, जिसने हर जाति और मजहब के लोगों को विपत्ति के समय शरण दी है। मुख्यमंत्री ने कहा कि सनातन धर्म ही भारत का राष्ट्रीय धर्म है, और इसे सुरक्षित रखना हम सभी का कर्तव्य है। धर्म और संस्कृति के माध्यम से समाज में सकारात्मकता और शांति का प्रसार होता है। ऐतिहासिक मंदिरों पर आक्रमण की घटनाओं का जिक्र करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि जो लोग इन पवित्र स्थलों को नष्ट करने का काम करते थे, उनका कुल और वंश नष्ट हो गया।</p>
<p>योगी ने कहा कि औरंगजेब के परिवार के लोग आज रिक्शा चला रहे हैं। यह उनकी दुर्गति है। अगर उन्होंने पुण्य किए होते और मंदिरों को न तोड़ा होता, तो क्या उनकी ऐसी स्थिति होती। विश्व शांति की स्थापना केवल सनातन धर्म के माध्यम से हो सकती है। यह शाश्वत धर्म है, जो सृष्टि के आरंभ से ही चला आ रहा है। मुख्यमंत्री ने कहा कि विरासत और विकास के बीच बेहतर समन्वय होना चाहिए। उन्होंने अयोध्या में हो रहे विकास कार्यों का जिक्र करते हुए कहा कि डबल इंजन की सरकार ने संतों के मार्गदर्शन में अयोध्या के वैभव को पुन: स्थापित करने का कार्य किया है। रामलला के भव्य मंदिर का निर्माण और अयोध्या धाम का विकास इसका जीवंत उदाहरण है। योगी ने कहा कि यह यज्ञ न केवल आत्मशुद्धि और पर्यावरण शुद्धि का माध्यम है, बल्कि यह सनातन धर्म की रक्षा और समाज में सकारात्मक ऊर्जा का प्रसार भी करता है। उन्होंने कहा कि यह आयोजन मां सरयू के पवित्र अंचल और भगवान श्रीराम की जन्मभूमि पर हो रहा है, जो इस यज्ञ को और भी विशेष बनाता है।<br />उन्होने कहा कि जिन गलतियों की वजह से भारत को गुलामी की बेड़यिां झेलनी पड़ीं और हमारे धर्म स्थलों का अपमान हुआ, उन्हें दोबारा नहीं दोहराया जाना चाहिए। उन्होंने भारतवासियों से सनातन धर्म की रक्षा और संरक्षण के लिए एकजुट होकर काम करने का आह्वान किया। </p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि भारत तब तक भारत है जब तक यहां सनातन धर्म सुरक्षित है। उन्होंने जोर देकर कहा कि इस धर्म के संरक्षण और संवर्धन के लिए सभी को मिलकर कार्य करना होगा। उन्होंने यह भी कहा कि युगों-युगों से सनातन धर्म ने सृष्टि के साथ तालमेल बनाकर खुद को जीवंत बनाए रखा है। उन्होंने कहा कि भविष्य में इसे किसी भी प्रकार की विकृतियों या विसंगतियों से बचाने के लिए हमें सतर्क रहना होगा। भारत तब तक भारत है जब तक भारत के अंदर सनातन धर्म सुरक्षित है। इसकी रक्षा के लिए इसके संरक्षण के लिए हम सभी को मिलकर के कार्य करना होगा। यह एक शाश्वत धर्म है, सृष्टि के साथ चला हुआ धर्म है हो सकता है कि किसी कालखंड में कुछ विसंगतिया आई हो लेकिन, विसंगती का परिमार्जन भी हमारे ऋषि मुनि संतो के माध्यम से समय-समय परमहापुरुषों के द्वारा दिखाए गए मार्ग का अनुसरण करते हुए हम करेंगे। कहीं भी हम आपसी उन फूट का, आपसी बंटवारे का, आपसी विभाजन की गलतियों को पूरे देश और पूरे धर्म को नहीं भुगतने देंगे, इस संकल्प के साथ हमें आगे बढऩा होगा।</p>
<p>योगी ने कहा '' आज बांग्लादेश में क्या हो रहा है, पाकिस्तान में क्या हुआ था, इससे पहले अफगानिस्तान में क्या हुआ। मैं पूछना चाहता हूं उन लोगों से वह कौन लोग थे जिन्होंने देश के अंदर सनातन धर्म से जुड़े हुए उन मान बिंदुओं को नष्ट करने का काम किया था, और क्यों किया था, उसके पीछे की नियत क्या थी। उसके पीछे की नियति थी अपने कुकृत्यों को अंजाम दे करके पूरी धरती को नर्क बनाने की। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि काशी में काशी विश्वनाथ मंदिर, अयोध्या में श्रीराम जन्मभूमि, मथुरा में श्रीकृष्ण जन्मभूमि, संभल में कल्की अवतार की हरिहर भूमि, भोज में ज्ञान के अधिष्ठात्री देवी मां सरस्वती के पावन मंदिर जैसे पवित्र स्थलों को अपवित्र करने वालों का आज कोई अस्तित्व नहीं है। यह उनके पापों का परिणाम है। उन्होंने कहा '' हमें यह सुनिश्चित करना होगा कि भविष्य में कोई भी ऐसी स्थितियां उत्पन्न न हो, जिनसे हमारे धर्म स्थलों को अपमानित होना पड़े। मुख्यमंत्री ने पंचनारायण महायज्ञ के आयोजन के लिए जगद्गुरु रामानुजाचार्य पूज्य स्वामी शंकराचार्य महाराज और उनकी टीम का धन्यवाद किया। उन्होंने कहा कि यह आयोजन न केवल धार्मिक दृष्टीकोण से महत्वपूर्ण है, बल्कि यह समाज में सकारात्मक ऊर्जा का संचार भी करता है। उन्होंने विश्वास व्यक्त करते हुए कहा कि इस यज्ञ का पुण्य पूरे भारतवासियों को प्राप्त होगा। इस महायज्ञ में कैबिनेट मंत्री सूर्यप्रताप शाही, स्वतंत्र देव सिंह, जेपीएस राठौर राज्यमंत्री (स्वतंत्र प्रभार), महापौर महंत गिरीशपति त्रिपाठी, धर्म-अध्यात्म से जुड़े कई प्रतिनिधि और वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 20 Dec 2024 17:54:12 +0530</pubDate>
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                <title>राघवाचार्य महाराज का देवलोकगमन से मन बहुत व्यथित है, सनातन धर्म के लिए एक अपूरणीय क्षति: CM भजनलाल</title>
                                    <description><![CDATA[शोक की इस घड़ी में ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि पुण्यात्मा को अपने धाम में स्थान दें। उनके अनुयायियों को संबल प्रदान करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/raghavacharya-maharajs-mind-is-very-distressed-due-to-his-departure/article-89029"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/cm-bhajan-lal-sharma.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने रैवासा पीठाधीश्वर पूज्य संत  श्री श्री 1008 राघवाचार्य महाराज के देवलोकगमन पर श्रद्धांजलि अर्पित की है। सीएम ने कहा कि रैवासा पीठाधीश्वर पूज्य संत  श्री श्री 1008 राघवाचार्य जी महाराज के देवलोकगमन का दुखद समाचार मिला।</p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि आज वे हमारे बीच नहीं है, यह सोचकर ही मन बहुत व्यथित है। उनका जाना सनातन धर्म के लिए एक अपूरणीय क्षति है। श्री राम जन्मभूमि पर मंदिर निर्माण के लिए चले आंदोलन से उनका गहरा जुड़ाव रहा। इस निमित्त वे जेल भी गए।संस्कृत भाषा और वेद-वेदांग के वे उच्च कोटि के विद्वान थे । धर्म-अध्यात्म के साथ-साथ समाज हित से जुड़े कार्यों के लिए  आजीवन समर्पित रहे । </p>
<p>मुख्यमंत्री ने कहा कि आध्यात्मिक मूल्यों के जागरण और सांस्कृतिक शिक्षा के क्षेत्र में उनका अमूल्य योगदान रहा।महाराज श्री का त्याग, तपस्या और धर्म के प्रति समर्पण सदैव हम सबके लिए प्रेरणास्त्रोत रहेगा। मैं शोक की इस घड़ी में ईश्वर से प्रार्थना करता हूं कि पुण्यात्मा को अपने धाम में स्थान दें। उनके अनुयायियों को संबल प्रदान करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 30 Aug 2024 11:10:55 +0530</pubDate>
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                <title>सनातन धर्म के संरक्षण में साधु-संतों का विशेष योगदान, यज्ञ से होती है आत्मा की शुद्धि: भजनलाल शर्मा</title>
                                    <description><![CDATA[भजनलाल शर्मा ने कहा कि यज्ञ का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। यह पर्यावरण को संरक्षित करने का प्रमुख माध्यम है। यज्ञ करने वाले और उसमें शामिल होने वाले व्यक्तियों की आत्मा शुद्ध हो जाती है और उनका सर्वांगीण विकास होता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/special-contribution-of-saints-and-sages-in-preserving-sanatan-dharma--yagya-purifies-the-soul--bhajanlal-sharma/article-71712"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/transfer-(14).jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि साधु-संतों के कारण भारतीय संस्कृति का संवर्द्धन एवं संरक्षण हुआ है। उनके विशेष योगदान से आज भारतीय संस्कृति के मूल्य विश्वभर में अपनी अलग पहचान रखते हैं। शर्मा रविवार को गोविंद देव जी मंदिर परिसर में बाबा बालकनाथ आश्रम द्वारा महामृत्युजंय महायज्ञ के उपलक्ष्य पर आयोजित कलश यात्रा को सम्बोधित कर रहे थे।<br /><br />शर्मा ने कहा कि यज्ञ का भारतीय संस्कृति में महत्वपूर्ण स्थान है। यह पर्यावरण को संरक्षित करने का प्रमुख माध्यम है। यज्ञ करने वाले और उसमें शामिल होने वाले व्यक्तियों की आत्मा शुद्ध हो जाती है और उनका सर्वांगीण विकास होता है। उन्होंने कहा कि भारतीय महिलाएं धार्मिक कार्यक्रमों में अग्रणी रूप से भाग लेती रही हैं और उनसे समाज के सभी वर्गों को प्रेरणा लेने की आवश्यकता है। इससे पहले शर्मा ने बाबा बालकनाथ की तस्वीर पर पुष्पांजलि अर्पित कर उनका स्मरण किया। उन्होंने बस्तीनाथ जी महाराज का शॉल ओढ़ाकर अभिनन्दन किया। मुख्यमंत्री ने एक महिला के सिर पर कलश रखकर और पूजन कर यात्रा की विधिवत शुरुआत भी की।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री ने गोविंद देव जी मंदिर में की पूजा-अर्चना</strong><br />मुख्यमंत्री ने गोविंद देव जी मंदिर में पूजा-अर्चना कर देश और प्रदेश की खुशहाली और समृद्धि की कामना की। उन्होंने यहां छप्पन भोग झांकी के दर्शन भी किए। इस अवसर पर उन्होंने उपस्थित श्रद्धालुओं से आत्मीयता से मुलाकात की। मुख्यमंत्री को अपने साथ पाकर कई श्रद्धालुओं ने उनके साथ सेल्फी भी ली। इस अवसर पर गृह राज्यमंत्री जवाहर सिंह बेढम, विधायक कुलदीप धनकड़ और कैलाश वर्मा, पूर्व विधायक रामहेत यादव सहित जनप्रतिनिधि एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालु उपस्थित रहे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 03 Mar 2024 17:06:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तमिलनाडु सीएम के बेटे ने सनातन धर्म को बीमारी बताया, डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की तुलना</title>
                                    <description><![CDATA[ भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए कथित बयान को लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ पर हमला बोलते हुए आज कहा कि राहुल गांधी की ‘मुहब्बत की दुकान’ में सनातन धर्म से नफरत का सामान कैसे बिक रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/tamil-nadu-cm-son-calls-sanatan-dharma-a-disease--compares-it-with-dengue-malaria-and-corona/article-56190"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/udaynidhi.jpg" alt=""></a><br /><p>एजेंसी/नई दिल्ली। तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन ने सनातन धर्म की तुलना डेंगू, मलेरिया और कोरोना से की है। उदयनिधि ने कहा कि मच्छर, डेंगू, फीवर, मलेरिया और कोरोना ये कुछ ऐसी चीजें हैं, जिनका केवल विरोध नहीं किया जा सकता, बल्कि उन्हें खत्म करना जरूरी होता है। उदयनिधि तमिलनाडु के युवा मामलों के मंत्री भी हैं। उनके इस बयान से कांग्रेस ने किनारा कर लिया है। वहीं भाजपा ने कहा कि इनकी हकीकत यही है। इंडिया गठबंधन के नेताओं को बताना चाहिए कि क्या वे इस बयान का समर्थन करते हैं। उदयनिधि स्टालिन के खिलाफ  एक वकील ने दिल्ली पुलिस में एफआईआर दर्ज कराई है। उदयनिधि ने शनिवार को सनातन उन्मूलन कार्यक्रम में ये बातें कहीं। उन्होंने कार्यक्रम के नाम की भी तारीफ  की। उन्होंने कहा कि सनातन क्या है, सनातन शब्द संस्कृत से आता है। ये समानता और सामाजिक न्याय के खिलाफ है। सनातन का अर्थ होता है कि स्थायी यानी ऐसी चीज जिसे बदला नहीं जा सकता। जिस पर कोई सवाल खड़े नहीं कर सकता।<br /><br />भाजपा अध्यक्ष जे पी नड्डा ने उदयनिधि स्टालिन के सनातन धर्म पर दिए कथित बयान को लेकर विपक्षी दलों के गठबंधन ‘इंडिया’ पर हमला बोलते हुए आज कहा कि राहुल गांधी की ‘मुहब्बत की दुकान’ में सनातन धर्म से नफरत का सामान कैसे बिक रहा है। एनडीए गठबंधन जहां प्रधानमंंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में भारत को विकसित बना रहा है, वहीं परिवारवादी गठबंधन ‘घमंडिया गठबंधन’ के सबसे बड़े सदस्य द्रमुक के नेता और तमिलनाडु के मुख्यमंत्री स्टालिन के बेटे उदयनिधि स्टालिन हमारे धर्म संस्कारों संस्कृति पर आघात पहुंचा रहे हैं। <br /><br />सनातन धर्म को किसी भी कीमत पर खत्म नहीं किया जा सकता है। ये धर्म सदियों से चला आ रहा है और सदियों तक चलता रहेगा। उदयनिधि को सनातन का असल मतलब नहीं पता है। वे जो भी कह रहे हैं वो बिल्कुल गलत है।<br />- आचार्य सतेन्द्र दास, प्रमुख पुजारी, राम जन्मभूमि</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Sep 2023 09:47:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>योग केवल राष्ट्र ही नहीं, विश्वव्यापी होगा और योगधर्म के साथ पूरे विश्व में सनातन धर्म की प्रतिष्ठा बढ़ेगी : स्वामी रामदेव</title>
                                    <description><![CDATA[ स्वामी रामदेव ने कहा कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग वैश्विक स्तर पर मनाया जाएगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/yoga-will-not-only-be-national-but-worldwide-and-with/article-44948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/manoj-(630-×-400-px)-(11).jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। योगऋषि स्वामी रामदेव महाराज के कुशल नेतृत्व तथा पतंजलि विश्वविद्यालय, भारत स्वाभिमान (महिला विंग) और जी-20 के सहयोगी संगठन डब्ल्यू-20 के संयुक्त तत्वाधान में आयोजित विशाल महिला सम्मेलन का आयोजन इंदिरा गांधी स्टेडियम, नई दिल्ली में किया गया। सम्मेलन में देश के विभिन्न राज्यों से लगभग 5500 महिलाओं ने प्रतिभाग किया। इस अवसर पर योगऋषि स्वामी रामदेव महाराज ने महिलाओं के शारीरिक, मानसिक और आध्यात्मिक स्वास्थ्य के लिए योग का प्रशिक्षण दिया।</p>
<p>कार्यक्रम में योगऋषि स्वामी रामदेव ने कहा कि 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग वैश्विक स्तर पर मनाया जाएगा। इससे पूर्व योग का आगाज हम दिल्ली से करना चाहते हैं और यह संदेश देना चाहते हैं कि योग केवल राष्ट्र ही नहीं विश्वव्यापी होगा और योगधर्म के साथ पूरे विश्व में सनातन धर्म की प्रतिष्ठा बढ़ेगी। उन्होंने कहा कि देश की 60 करोड़ तथा पूरे विश्व की लगभग 400 करोड़ माताओं-बहनों का आशीर्वाद मेरे साथ है। </p>
<p><strong>पंतजलि लेकर आ रहा है बड़ी सेवा योजना </strong><br />स्वामी महाराज ने बड़ी घोषणा करते हुए कहा कि जल्द ही एनसीआर क्षेत्र में पतंजलि बड़ी सेवा योजना लेकर आ रहा है। उन्होंने बताया कि एनसीआर में 10 हजार बच्चों के लिए रेजिडेंशियल ग्लोबल गुरुकुल, एक लाख विद्यार्थियों के लिए ग्लोबल यूनिवर्सिटी तथा 20 से 25 हजार बच्चों के लिए डे-बोर्डिंग स्कूल की भावी योजना है। इनमें 200 से ज्यादा देशों के बच्चे पढ़कर अपने देश जाएंगे।  कार्यक्रम में पतंजलि योग समिति की मुख्य महिला केन्द्रीय प्रभारी साध्वी आचार्या देवप्रिया ने कहा कि महिलाएं ही योग के माध्यम से समाज व राष्ट्र में परिवर्तन लाएंगी। सम्मेलन में भारतीय शिक्षा बोर्ड के कार्यकारी अध्यक्ष एन.पी.सिंह ने कहा कि आज समाज में महिला सशक्तिकरण की आवश्यकता नहीं है क्योंकि जो मां अपने गर्भ में नौ महीने बच्चे को रखकर, असहनीय पीड़ा सहकर जीवन को उत्पन्न कर सकती है उसे सशक्तिकरण की आवश्यकता नहीं है। कार्यक्रम में डब्ल्यू-20 की अध्यक्षा डॉ.संध्या पुरेचा ने कहा कि नारी विश्व निर्मात्री है। विश्व की रक्षा करने वाली है तथा नारी ही सबका मूल है। इस अवसर पर स्वामी महाराज ने उपस्थित मातृशक्ति व जनसमूह को भ्रामरी, ताड़ासन तथा वृक्षासन आदि का अभ्यास कराया। कार्यक्रम को सफल बनाने में एस.के.तिजारावाला, परमिंदर गुलिया, भाई डबास, मोतीलाल, सविता, संध्या आदि का विशेष सहयोग रहा। कुमारी व्याख्या ने शिव ताण्डव स्त्रोत पर नृत्य प्रस्तुति दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 08 May 2023 10:37:49 +0530</pubDate>
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                <title>वसीम रिजवी का नाम अब होगा जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी : वसीम रिजवी ने अपनाया सनातन धर्म</title>
                                    <description><![CDATA[विवादित बयानो को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने अपनाया सनातन धर्म]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/61adef108da32/article-2969"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/wasim-rizvi-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>लखनऊ।  अपने विवादित बयानो को लेकर अक्सर चर्चा में रहने वाले शिया सेंट्रल वक्फ बोर्ड के पूर्व अध्यक्ष वसीम रिजवी ने सोमवार को सनातन धर्म स्वीकार कर लिया।  रिजवी ने यह जानकारी खुद एक वीडियो जारी कर दी। गाजियाबाद स्थित डासना में एक मंदिर में यति नरसिंहानंद सरस्वती ने उन्हें विधिवत सनातन धर्म स्वीकार कराया।<br /> <br /> रिजवी ने कहा कि धर्म परिवर्तन की यहां पर कोई बात नहीं है, जब मुझको इस्लाम से निकाल दिया गया, तब यह मेरी मर्जी है कि मैं किस धर्म को स्वीकार करूं। सनातन धर्म दुनिया का सबसे पहला धर्म है और इतनी उसमें अच्छाइयां  हैं जो किसी दूसरे धर्म  में नहीं है। इस्लाम को मैने कभी धर्म नहीं माना। हर शुक्रवार को जुमे की नमाज में मेरे और यति निरसिंहानंद के सर पर ईनाम की राशि बढ़ा दी जाती है। इसलिए मै अपनी मर्जी से आज सनातन धर्म अपना रहा हूं। इस मौके पर यति नरसिंहानंद सरस्वती ने कहा कि वसीम रिजवी त्यागी बिरादरी से जुड़ेंगे। रिजवी का नाम अब जितेंद्र नारायण सिंह त्यागी होगा।<br /> <br /> गौरतलब है कि रिजवी अक्सर इस्लाम को लेकर विवादित बयानबाजी करते रहे हैं। उन्होने कई बार खुद पर जानलेवा हमला किये जाने की आशंका जतायी है। रिजवी का कहना है कि उन्होने कुरान की 26 आयतों को न्यायालय में चुनौती दी है। जिसके चलते मुस्लिम कट्टरपंथी उनकी हत्या करना चाहते हैं। <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Dec 2021 17:36:14 +0530</pubDate>
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