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                <title>ganesh ji - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मनोकामना के रूप में ले जाते हैं पांच कंकर </title>
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                        <![CDATA[प्राचीनकाल से श्रद्धालु अपनी मनोकामना मांगते है तथा इच्छा पूरी होने पर भेंट वगैरह भी चढ़ाते हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/they-take-five-pebbles-as-wishes/article-125242"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(1)91.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शिक्षा और मेडिकल हब कहलाने वाला कोटा शहर अब सिर्फ कोचिंग और किलों के लिए ही नहीं, बल्कि अपनी धार्मिक धरोहरों व पर्यटन नगरी के लिए भी विख्यात हुआ है। इन्हीं में प्रमुख है... पाटनपोल क्षेत्र का सिंहद्वार, जहां पर विराजमान हैं मनसापूर्ण गणेश जी। यह मंदिर श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र है और माना जाता है कि यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना अवश्य पूर्ण होती है।  मुख्य पुजारी राजेश बोहरा व मुकेश बोहरा ने बताया कि कोटा शहर का सुबह पुराना मंदिर है। प्राचीनकाल से श्रद्धालु अपनी मनोकामना मांगते है तथा इच्छा पूरी होने पर भेंट वगैरह भी चढ़ाते हैं। गणेश की सूंड दांयी तरफ है। वैसे मान्यता दोनों तरफ की भी है। उन्होंने बताया कि इस मंदिर का इतिहास काफी पुराना है। वर्तमान में यह कोटा शहर पाटनपोल में स्थित है। यह मंदिर 1612 का बना हुआ है। प्राचीन समय में उस समय चबूतरा पर स्थापित थे। इसके अंदर एक अन्य मूर्ति भी है जो रियायसतकालीन समय से ही यहां स्थापित है। इस मंदिर में मुख्य प्रतिमा मनसापूर्ण गणेश पाटनपोल ही है।</p>
<p><strong>आज भी पारंपरिक शैली में बना है मंदिर</strong><br />मंदिर पारंपरिक शैली में बना है। द्वार पर सुंदर नक्काशी और पत्थरों की कलाकृतियां देखने लायक हैं। गर्भगृह में विराजमान गणेश जी की प्रतिमा अत्यंत मनमोहक है। सुबह और शाम की आरती में जब घंटियों की ध्वनि गूंजती है, तो पूरा वातावरण भक्तिमय हो जाता है।</p>
<p><strong>गणेश चतुर्थी के दिन होते हैं विशेष कार्यक्रम</strong><br />पुजारी मुकेश बोहरा ने बताया कि इस विशेष दिन 24 घंटे मंदिर खुला रहता हैं। यहां देर रात से श्रद्धालुओं की कतारें लग जाती है। प्राचीन से  ही इसका नाम मनसापूर्ण गणेश ही है। वर्तमान में भी इसी के नाम से ही प्रसिद्ध है। मनसापूर्ण गणेश मंदिर की ख्याति कोटा क्षेत्र के अलावा अन्य राज्यों तथा विदेशों भी फैली हुई है। इस मंदिर में दूर-दराज या विदेशों से भी श्रद्धालु आते रहते हैं, ब्रिटेन व यूएसए में कोटा शहर के कई जनें रहते हैं, वो जब कोटा आते हैं पहले मंदिर आकर फिर घर जाते है। यह मंदिर सुबह 5 से  रात्रि11 बजे खुला रहता है। यहां आने वाले श्रद्धालु हमेश मनसापूर्ण गणेश के दर्शनलाभ लेते हैं। गणेश चतुर्थी के दिन मंदिर को आकर्षक फूलों से सजाया जाता है तथा पंचामृत से अभिषेक किया जाता है। उसके स्वर्ण शृंगार करते हैं। आने वाले सभी श्रद्धालु मंदिर में सजी गणेश प्रतिमा के दर्शन करते है। तथा अपना मनोकामना मांगते है। उनके इच्छी पूरी होने पर भेंट भी चढ़ाते है।</p>
<p><strong>धोबी को दिए थे सपने में दर्शन</strong><br />ऐसी किंवदती है कि भट्ट घाट पर धोबी कपड़े धोता था। उसके सपने में गणेश जी आए तब गणेश जी मूर्ति अपने कंधे पर लाकर चबूतरे पर लाकर रख दी तब यही स्थापित हो गई। उस समय काफी जंगल हुआ करता था। पहले सड़क काफी ऊंची थी। आज वर्तमान में सड़क व मंदिर का लेवल भी लगभग बराबर सा हो गया है। राजा-महाराजा से ही मनसापूर्ण गणेश जी पूजा की जा रही है। यहां आने वाले श्रद्धालु मन ही मन में अपनी मनोकामना बोल जाते हैं। जब भी मनोकामना पूरी भी होती है, वापस आकर धोक लगाकर अपनी इच्छानुसार भेंट चढ़ा जाते है।  इतिहासकार फिरोज ने राजा भोज का जिक्र भी किया है। पुराने समय में यहां मुक्तिधाम हुआ करता था। चारों तरफ जंगली इलाका था।</p>
<p><strong>बुधवार को रहती है भीड़</strong><br />मनसापूर्ण गणेश का दिन बुधवार होने के कारण सुबह से ही श्रद्धालुओं की लंबी कतारें लग जाती हैं।शाम को आरती के समय पूरा पाटनपोल क्षेत्र भक्तिमय माहौल में बदल जाता है। कोटा आने वाले पर्यटक सिर्फ किला या चम्बल गार्डन ही नहीं देखते, बल्कि भीतर शहर में स्थित पाटनपोल मनसापूर्ण गणेश  मंदिर में भी दर्शन के लिए आते हैं। पाटनपोल के व्यस्त बाजार क्षेत्र में स्थित होने के कारण यहां हर समय रौनक छाई रहती है। वर्तमान युग में भी इस मंदिर की पवित्रता बनी हुई है। लोग मोबाइल और सोशल मीडिया के दौर में भी यहां पारंपरिक ढंग से पूजा-अर्चना करते हैं। यहां का ट्रस्ट नहीं है। इस मंदिर में पीढी दर पीढ़ी ही पूजा चली आ रही है। यहां अब आठवीं पीढ़ी पूजा कर रही है।  बुधवार के अलावा भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु आते है। यह मनसापूर्ण मंदिर आस्था और विश्वास का प्रतीक है।</p>
<p><strong>मंदिर का है ऐतिहासिक महत्व </strong><br />- सिंहद्वार कोटा के पुराने शहर का द्वार है।<br />- कहा जाता है कि नगर के रक्षार्थ और शुभता के प्रतीक के रूप में यहां मनसापूर्ण गणेश की प्रतिमा स्थापित की गई।<br />- समय के साथ यह स्थान अब मनसापूर्ण गणेश नाम से विख्यात है।<br />ल्ल स्थानीय परंपरा के अनुसार, नगर के लोग किसी भी कार्य की शुरूआत से पहले यहां मनसापूर्ण गणेश के दर्शन से करते है।</p>
<p><strong>श्रद्धालुओं में है अटूट आस्था</strong><br />- गणेश जी को विघ्नहर्ता और मंगलकारी माना जाता है।<br />- यहां आने वाले भक्त मानते हैं कि व्यापार, संतान, शिक्षा या किसी भी मनोकामना की मनसापूर्ण गणेश ही करते है।<br />- कई श्रद्धालु अपनी मनोकामना पूरी होने के बाद अपनी प्रिय चीज व भेंट भी अर्पित करते हैं।<br />- गणेश चतुर्थी पर आकर्षक फूलों व स्वर्ण शृंगार होता है।<br />- मंदिर को फूलों और रोशनियों से सजाया जाता है।<br />- विशेष स्वर्ण श्रृंगार और भव्य महाआरती का आयोजन होता है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 30 Aug 2025 14:44:06 +0530</pubDate>
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                <title>10वीं शताब्दी की नृत्यमग्न और छह भुजाओं वाली गणेश प्रतिमाओं की अनोखी झलक</title>
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                        <![CDATA[दाहिने निचले कोने में दो पुरुष कलाकार पखावज और बांसुरी बजाते हुए अंकित हैं, जो इस दृश्य को जीवंत बनाते हैं।  ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/unique-glimp/article-124889"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(9)15.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीकर के हर्ष पहाड़ी पर हर्षनाथ मंदिर के पास स्थित भैरव मंदिर के भीतर स्थापित 76 गुणा 48 सेमी की यह अद्भुत शिल्पकृति गणेश प्रतिमा कला प्रेमियों और शोधकर्ताओं को मंत्रमुग्ध कर देती है। यह वास्तुशिल्पीय अवयव एक स्तंभित कोष्ठक (पिलास्टर्ड निच) को प्रदर्शित करता है जिसके शीर्ष पर अलंकृत पेडीमेंट है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग, जयपुर सर्किल के अधीक्षण पुरातत्वविद् विनय गुप्ता इस कोष्ठक के भीतर चार भुजाओं से सुसज्जित नृत्यमग्न गणेशजी की छवि उकेरी गई है। गणेश जी बाईं ओर मुख किए हुए हैं। उनके ऊपरी बाएं हाथ में मोदक पात्र है, जबकि ऊपरी दाहिना हाथ नृत्य में संलग्न है, लेकिन क्षतिग्रस्त होने के कारण उसमें धारित वस्तु स्पष्ट नहीं हो पाती। दाहिना हाथ अंकुश धारण किए है और बायां हाथ नृत्य मुद्रा में दर्शाया गया है। उन्होंने बताया कि ये 10वीं शताब्दी की मूर्तियां हैं। </p>
<p><strong>अद्भुत शिल्प में झलकती कला और आस्था</strong><br />विनय गुप्ता ने बताया कि एक अद्वितीय शिल्पकृति में छह भुजाओं वाले गणेश जी को नृत्यमुद्रा में दर्शाया गया है। यह मूर्ति एएसआई के स्टोर में संरक्षित है। ये मूर्ति 54 गुणा 45 सेमी आकार की है। मूर्ति में गणेश जी को कटीसूत्र, कई हार, कंगन, नूपुर और मुकुट धारण किए हुए दिखाया गया है, जो ताज जैसी आकृति में निर्मित है। उनका सूंड दाईं ओर मुड़ा हुआ है। ये मूर्ति भी 10वीं शताब्दी की बताई जाती है। गणेश जी के बाएं हाथ में मोदक पात्र स्पष्ट रूप से अंकित है, जबकि अन्य तीन हाथों का क्षतिग्रस्त होना उनके शस्त्रों और मुद्राओं की पहचान को कठिन बना देता है। एक सर्प उनके उदर पर नाग यज्ञोपवीत के रूप में उकेरा गया है, जो इस मूर्ति को विशेष पौराणिक अर्थ देता है। मूर्ति के निचले बाएं कोने में गणेश जी के वाहन मूषकराज को एक पुरुष आकृति के साथ अंत:क्रिया करते हुए दिखाया गया है। दाहिने निचले कोने में दो पुरुष कलाकार पखावज और बांसुरी बजाते हुए अंकित हैं, जो इस दृश्य को जीवंत बनाते हैं।  </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Wed, 27 Aug 2025 13:00:08 +0530</pubDate>
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                <title>गुरुपुष्य नक्षत्र: गणपति बप्पा का हुआ पंचामृत अभिषेक</title>
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                        <![CDATA[गुरु पुष्य नक्षत्र के खास मौके पर ध्वजाधीश गणेश मंदिर बड़ी चौपड़ पर सुगंधित जल और पंचामृत से अभिषेक आनंद के साथ सम्पन्न हुआ। नवीन पोशाक गणेश जी को सुशोभित कराकर 108 लड्डू गणेश जी को अर्पण किये गए]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/panchamrit-abhishek-of-gurupushya-nakshatra-ganpati-bappa/article-16615"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/om1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। गुरुपुष्य नक्षत्र पर गुरुवार को शहर के गणेश मंदिरों में भगवान गणपति का पंचामृत अभिषेक हुआ। इस दौरान विशेष झांकियां सजाई गई और भक्तों ने दर्शन किए। चांदपोल परकोटा गणेश मंदिर में गुरुपुष्य नक्षत्र और हरियाली अमावस्या के अवसर पर गणेशजी महाराज का सवा मन दूध, दही, शहद, घी और गंगाजल से पंचामृत अभिषेक किया गया। युवाचार्य पंडित अमित शर्मा ने विधि विधान से अभिषेक कराकर नई पोशाक पहनाई गई। प्रथम पूज्य गणेश महाराज का विशेष श्रृंगार कर फूल बंगले में विराजमान कराकर लड्डू का भोग लगाया। इस अवसर पर भक्तों ने सामूहिक गणपति अथर्वशीर्ष और गणपति अष्टोत्तर नामावली के पाठ के साथ 108 मोदक का भोग लगाया। श्रद्धालुओं को रक्षा सूत्र बांध हल्दी की गांठ बांटी गई। <br /><br /><strong>108 मोदकों का भोग लगाया</strong><br /><br />गुरु पुष्य नक्षत्र के खास मौके पर ध्वजाधीश गणेश मंदिर बड़ी चौपड़ पर सुगंधित जल और पंचामृत से अभिषेक आनंद के साथ सम्पन्न हुआ। नवीन पोशाक गणेश जी को सुशोभित कराकर 108 लड्डू गणेश जी को अर्पण किये गए। इसी तरह दूसरे गणेश मंदिरों में पुष्य नक्षत्र पर विशेष धार्मिक आयोजन हुए। बता दें कि मोती डूंगरी गणेश मंदिर में पुष्यनक्षत्र शुक्रवार को उदियात तिथि से मनाया जाएगा।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 28 Jul 2022 16:46:19 +0530</pubDate>
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                <title>विक्की-कैटरीन करेंगे रणथंभौर गणेश जी के दर्शन, सुखी दाम्पत्य का लेंगे आशिर्वाद</title>
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                        <![CDATA[आज भी हस्तियों का पहुंचने का सिलसिला जारी]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/sawai-madhopur/%E0%A4%B5%E0%A4%BF%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%9F%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%B0%E0%A4%A3%E0%A4%A5%E0%A4%82%E0%A4%AD%E0%A5%8C%E0%A4%B0-%E0%A4%97%E0%A4%A3%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%9C%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A6%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B6%E0%A4%A8--%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%96%E0%A5%80-%E0%A4%A6%E0%A4%BE%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B2%E0%A5%87%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%87-%E0%A4%86%E0%A4%B6%E0%A4%BF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%A6/article-2992"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/vicky_kat-2.jpg" alt=""></a><br /><p>सवाईमाधोपुर। विक्की-कैटरीना की शादी को लेकर हर किसी में उत्सुकता है कि विक्की-कैट की शादी में क्या-क्या और कैसे-कैसे होगा। ऐसे में इनके फ्रैंड्स के लिए हम बता दे कि दोनों वर वधु (विक्की कौशल-कैटरीना कैफ) शादी से पहले कर  सवाई माधोपुर किले पर रणथंभौर गणेश जी के दर्शन करने जा सकते है। ऐसे में खास मेहमानों के साथ विक्की-कैट टाइगर सफारी भी करने का प्रोग्राम है। </p>
<p><strong>आज और कल होंगे प्री-वेडिंग फंक्शंस</strong><br />विक्की-कैटरीना की शादी की रस्में 7 दिसंबर को होने वाली संगीत सेरेमनी से शुरू होंगी। जिसकी तैयारियां सिक्स सेंसेस होटल में लगभग पूरी हो चुकी हैं। होटल को लाइटों से सजाया भी गया है। इसके अगले दिन 8 दिसंबर को सुबह कपल की हल्दी सेरेमनी और शाम को आफ्टर पार्टी होगी। 9 दिसंबर की दोपहर सेहरा बंदी की रस्म के बाद कपल सात-फेरे लेंगे। जिसके बाद डिनर और पूल पार्टी होगी।इस दौरान कई बॉलीवुड की हस्तियां कैटरीना विक्की  कौशल की शादी में पहुंचे है।  इस दौरान बॉलीवुड की हस्तियों में सुनील शेट्टी, करण जौहर, नेहा धूपिया ,अंगद बेदी, कबीर खान, मिनी माथुर, सरवरी बाग  सिंगर गुरदास मान, सिमरन कौर, विकी कौशल का भाई सनी कौशल  रितिक रोशन  अनुष्का शर्मा कई बॉलीवुड हस्तियां सवाई माधोपुर चौथ का बरवाड़ा कैटरीना कैफ वे कौशल की शादी में पहुंचे हैं</p>
<p><strong>कई बॉलीवुड  की बड़ी हस्तियां  कैटरीना कैप  व  विक्की कौशल की शादी समारोह में पहुंचे</strong><br />सवाई माधोपुर विक्की कौशल और कटरीना कैफ शादी के लिए सोमवार देर रात  सिक्स सेंसेस फोर्ट पहुंच गए। कैटरीना कैफ और विक्की कैशल के परिजन शाम को जयपुर एयरपोर्ट पहुंचे। जिसके बाद यह सड़क के रास्ते वेडिंग वेन्यू पहुंचे। सोमवार रात  11 बजकर 10 मिनट पर कैटरीना कैफ की कारों का काफिला बाउंसर और पुलिस सुरक्षा के साथ होटल सिक्स सेंसस बरवाड़ा फोर्ट पहुंचे। सोमवार देर रात कटरीना कैफ की मां सुजैन टरकोटे, बहन स्टेफनी, क्रिस्टीन, नताशा, मेलिसा, सोनिया, इजाबेल और भाई माइकल पहुंचें। विक्की कौशल के साथ उनके पापा श्याम कौशल, मां वीना और भाई सनी होटल पहुंचे। जहां होटल के फतेह दरवाजे पर मेहमानों का स्वागत गुलाब के फूलों की बारिश से किया गया। गेस्टों का सारंगी, रावण हत्था जैसे लोक वाद्यों और राजस्थानी लोकगीतों की धुनें के साथ किया गया। जिसके बाद सलभी गेस्टों का कोविड प्रोटोकॉल के तहत टेम्परेचर चेक किया गया।<br /><strong><br />कैटरीना विक्की कौशल के देखने के लिए उमड़ी भीड़ </strong><br />कैटरीना कैफ और विक्की कौशल को देखने के लिए चौथ का बरवाड़ा कस्बे के लोग खासा उत्साहित दिखाई दिये। दोनों की एक झलक पाने के लिए लोगो की भीड़ घंटो तक खड़ी रही, लेकिन टोयोटा की 3 लग्जरी गाड़ी वेलफायर सभी तरफ से पैक होने और रात के अंधेरे के कारण लोगों को कैटरीना और विक्की कौशल की झलक नहीं दिख सकी, जिस पर लोगों कैटरीना कैफ और विक्की कौशल की कारों का काफिला देखकर खुश हुए। चौथ का बरवाड़ा फाटक पर ट्रेन क्रॉसिंग के कारण माइकल की कार यहां काफी देर रूकी रही। जिससे लोगों को माइकल के फोटो केप्चर करने का मौका मिल गया। <br /><br /><br /><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>सवाई माधोपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 07 Dec 2021 17:03:53 +0530</pubDate>
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