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                <title>opd - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>कल से बदलेगा अस्पतालों में ओपीडी का समय : सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक सेवा, आंगनबाड़ी केंद्रों का भी नया शेड्यूल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में एक अक्टूबर से ओपीडी का समय बदल जाएगा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/opd-time-in-hospitals-will-change-from-tomorrow-from-9/article-128329"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/sms.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में एक अक्टूबर से ओपीडी का समय बदल जाएगा। अब राजधानी जयपुर के एसएमएस अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में ओपीडी का समय शीतकालीन सत्र के अनुसार सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक का रहेगा। यह समय 31 मार्च तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान राजकीय अवकाश के दिन सुबह 9 बजे से 11 बजे तक ओपीडी समय रहेगा।</p>
<p> वर्तमान में ग्रीष्मकालीन समय सारिणी के अनुसार सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी संचालित हो रही है। इसके साथ ही आंगबाड़ी केन्द्रों के समय में भी बदलाव किया गया है। अब यह सुबह 10 बजे से 2 बजे तक खुलेंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 16:06:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>प्रदेश में कल से अस्पतालों में बदलेगा OPD का समय : एसएमएस समेत सभी सरकारी अस्पतालों में बदलाव, आंगबाड़ी केन्द्रों के समय में भी किया गया बदलाव </title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में ग्रीष्मकालीन समय सारिणी के अनुसार सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी संचालित हो रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/opd-time-will-change-in-hospitals-in-the-state-from/article-128283"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/sms.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश के सभी सरकारी अस्पतालों में एक अक्टूबर से ओपीडी का समय बदल जाएगा। अब राजधानी जयपुर के एसएमएस अस्पताल सहित अन्य सरकारी अस्पतालों और डिस्पेंसरियों में ओपीडी का समय शीतकालीन सत्र के अनुसार सुबह 9 बजे से दोपहर 3 बजे तक का रहेगा। यह समय 31 मार्च तक प्रभावी रहेगा। इस दौरान राजकीय अवकाश के दिन सुबह 9 बजे से 11 बजे तक ओपीडी समय रहेगा।</p>
<p>वर्तमान में ग्रीष्मकालीन समय सारिणी के अनुसार सुबह 8 बजे से दोपहर 2 बजे तक ओपीडी संचालित हो रही है। इसके साथ ही आंगबाड़ी केन्द्रों के समय में भी बदलाव किया गया है। अब यह सुबह 10 बजे से 2 बजे तक खुलेंगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 30 Sep 2025 10:20:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का - एमबीएस अस्पताल की ओपीडी अब नीचे हुई शिफ्ट, अब मरीजों को पर्ची बनवाने दवा लेने में होगी सुविधा</title>
                                    <description><![CDATA[नई व्यवस्था होने से मरीजों कों अब नहीं होगी सीढ़ियां चढ़ने में परेशानी।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---mbs-hospital-s-opd-has-now-been-shifted-downstairs/article-127342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/untitled-design-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के सबसे बड़े एमबीएस अस्पताल में मौसमी बीमारियों से पीड़ित मरीजों को बड़ी राहत दी गई है। अब इन रोगियों को दूसरी मंजिल तक चढ़ने की परेशानी नहीं झेलनी पड़ेगी। अस्पताल प्रशासन ने भीड़ और अव्यवस्था के चलते गुरुवार को मौसमी बीमारियों की सामान्य ओपीडी को ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट कर दिया है। नई ओपीडी अब इमरजेंसी वार्ड के पास कमरा नंबर 11 में संचालित की जा रही है। दैनिक नवज्योति में बेकाबू हुई ओपीडी, डॉक्टरों को कमरा छोड़ना पड़ा शीर्षक हैडिंग से प्रकाशित की थी, उसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने मौसमी बीमारियों की ओपीडी को ग्राउण्ड फ्लोर पर शिफ्ट करने के निर्देश जारी किए। बता दें कि  मंगलवार को दोपहर करीब 12 बजे दूसरी मंजिल स्थित कमरा नंबर 201 में हालात अचानक बिगड़ गए थे। मौसमी बीमारियों की ओपीडी में मरीजों की भीड़ इतनी बढ़ गई कि हालात काबू से बाहर हो गए। डॉक्टरों को दिखाने की जल्दी में कई मरीज और परिजन एक साथ कमरे में घुसने लगे। हालात बेकाबू  होने पर भीड़ का दबाव इतना बढ़ा कि डॉक्टरों को नाराज होकर कमरा छोड़ना पड़ा। इस दौरान डॉक्टरों ने परिजनों से शांति बनाए रखने की अपील भी की थी। अस्पताल अधीक्षक डॉ. धर्मराज मीणा के निर्देश पर ओपीडी प्रभारी व दो गार्डों ने व्यवस्थाओं को संभाला था।</p>
<p><strong>ओपीडी पर्ची और दवा काउंटर भी पास</strong><br />सामान्य ओपीडी को इमरजेंसी वार्ड के पास कमरा नंबर 11 में शिफ्ट किया गया है। इस बदलाव से एक और बड़ी सुविधा यह होगी कि मरीजों को पर्ची बनवाने और दवा लेने के लिए अलग से ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ेगा। पर्ची काउंटर और दवा वितरण केंद्र पास ही हैं, जिससे मरीजों का समय और मेहनत दोनों बचेंगे।</p>
<p><strong>मौसमी बीमारियों का बढ़ता दबाव</strong><br />सितंबर के महीने में बदलते मौसम के कारण अस्पताल में बुखार, वायरल, डेंगू, मलेरिया, सर्दी-खांसी और गले के संक्रमण के मरीजों की संख्या तेजी से बढ़ रही है। हर दिन सैकड़ों मरीज एमबीएस की ओपीडी में पहुंच रहे हैं। इस बढ़ती भीड़ को संभालना दूसरी मंजिल पर संभव नहीं हो पा रहा था। ऐसे में ग्राउंड फ्लोर पर शिफ्ट करना मरीजों और परिजनों दोनों के लिए राहत का कदम साबित होगा। नई व्यवस्था से अब मरीजों को सीढ़ियां चढ़ने की परेशानी नहीं होगी, वहीं डॉक्टर को दिखाने के लिए लाइन भी व्यवस्थित तरीके से लग सकेगी।</p>
<p><strong>मरीजों को मिलेगी राहत</strong><br />नई व्यवस्था से मरीजों और परिजनों ने राहत महसूस की है। परिजनों का कहना है कि पहले दूसरी मंजिल तक बुजुर्गों और बच्चों को ले जाना बहुत मुश्किल होता था। साथ ही ओपीडी के बाहर भीड़ और धक्का-मुक्की की वजह से परेशानियां झेलनी पड़ती थीं। लिफ्ट के लिए भी इंतजार करना पड़ता था। अब ग्राउंड फ्लोर पर ओपीडी होने से इलाज के लिए पहुंचना और कागजी प्रक्रिया पूरी करना पहले से कहीं आसान हो गया है।</p>
<p>ओपीडी ग्राउण्ड फ्लोर इमरजेंसी के पास कमरा नं. 11 में शिफ्ट कर दी है। सामान्य ओपीडी के मरीजों को अब दूसरी मंजिल पर नहीं जाना पड़ेगा। वहीं व्यवस्था के रूप में गार्ड भी तैनात है। मंगलवार को बेकाबू होने से कुछ समय के लिए व्यवधान आया था। बाद में सब सामान्य हो गया था। अभी मौसमी बीमारियों के चलते मरीज की ओपीडी बढ़ी है। मरीजों की सुविधा के लिए इस ओपीडी को नीचे शिफ्ट किया है।<br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अस्पताल अधीक्षक, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 19 Sep 2025 17:54:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>एमबीएस अस्पताल: मरीजों को सीढ़ियों से जाना पड़ रहा तीसरी मंजिल पर,  नई ओपीडी की 7 में से 5 लिफ्ट बंद</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लिफ्ट का इस्तेमाल बढ़ गया है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/five-out-of-seven-lifts-of-the-new-opd-are-closed--only-two-lifts-are-working/article-103798"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(8)8.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी को आधी अधुरी सुविधाओं के साथ शुरू करने का खामियाजा यहां इलाज कराने आए मरीजों को भुगतना पड़ रहा है। अस्पताल की नई ओपीडी में कहने को तो सात लिफ्ट लगी है लेकिन वर्तमान में दो ही लिफ्ट चालू कर रखी है। एक लिफ्ट गंभीर मरीजों को लाने ले जाने के लिए काम में ले रहे है। जो दो लिफ्ट चल रही है वो भी आए दिन बीच में अटक जाती है। मजबूरी मरीजों को कभी पहली मंजील से दूसरी तक सीढ़ी जाना पड़ता है तो कभी  दूसरी मंजील पर अटकने पर तीसरी पर जाने के लिए सीढ़ियों का इस्तेमाल करना पड़ रहा है। दो ही लिफ्ट चलने से सबसे ज्यादा परेशानी बुजुर्ग व दुर्घटना में घायल व्यक्तियों आ रही है। वहीं अस्पताल प्रशासन का कहना है सभी लिफ्ट चालू ओपीडी में भीड़ को देखते हुए लिफ्ट का संचालन किया जाता है। अनावश्यक लिफ्ट चलाने से विद्युत भार बढ़ता ।  उल्लेखनीय है कि तीमारदारों के ऊपर नीचे आने जाने के लिए 7 लिफ्ट लगी है। जिनमें 3 फ्रंट व 3 बेक व 1 बीच में लगी है।  वैसे तो 7 लिफ्ट पर 7 लिफ्टमैन लगा रखे हंै। लेकिन काम में दो ही ली जाती हैं।</p>
<p><strong>सात में से दो लिफ्टही चल रही है</strong><br />ओपीडी में जांच कराने आए विशाल वर्मा ने बताया कि कहने को यहां सात लिफ्ट लगी हुई है। लेकिन यहां मुश्किल से एक से दो लिफ्ट ही चलती है। जो भी आए दिन बंद हो जाती जिससे मरीजों को सीढ़ियों से दूसरी व तीसरी मंजील पर जाना पड़ता है। लिफ्ट एक, दो और तीन ही चल रही है। जिसमें दो व तीन पर तीमारदार आ जा रहे है एक से गंभीर मरीज ले जाते है। </p>
<p><strong>नेत्र विभाग में जाना किसी सजा से कम नहीं</strong><br />नई ओपीडी में सारे डॉक्टरों चैबंर पहली दूसरी व तीसरी मंजील पर है। आंख दिखाने जाना हो लिफ्ट नहीं चले तो तीसरी मंजील पर चढ़ना किसी सजा से कम नहीं है। यहां आए दिन लिफ्ट अटकती एक लिफ्ट अटकने के बाद दोबारा शुरू नहीं होती है। </p>
<p><strong>बिजली गुल होते ही अटक जाती है लिफ्ट</strong><br />शहर के एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लिफ्ट का इस्तेमाल बढ़ गया है। जिससे लिफ्ट आए दिन खराब हो रही है। अस्पताल में लिफ्ट मरीजों का भार नहीं उठा पा रही जिससे दूसरी मंजिल पर जाने के लिए मरीजों को सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। जब भी बिजली गुल होती है, झटके से लिफ्ट अटक जाती है। </p>
<p><strong>आए दिन खराब होती लिफ्ट</strong><br />तीन मंजिला इमारत पर अलग अलग फ्लोर पर ओपीडी संचालित हो रही है। आए दिन लिफ्ट खराब होने से मरीजों को आए दिन सीढ़ियों से जाना पड़ता है।  सबसे ज्यादा दुर्घटना में घायल मरीजों को अस्थि रोग विभाग में जाने में परेशानी होती है। मरीजों को सीढ़ियों के द्वारा ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने जाना पड़ा। मौसमी बीमारियों के प्रकोप बढ़ने के साथ अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके साथ अस्पताल में लगी लिफ्ट मरीजों के बोझ से हाफने लगी है। जिससे गंभीर मरीजों को भी सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है।<br /><strong>- रामनारायण बैरवा, कुन्हाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ओपीडी सारी लिफ्ट चालू है। मरीजों की ओपीडी में संख्या कम होने पर एक दो तीन नंबर लिफ्ट चालू रखी जाती है। ओपीडी में मरीज बढ़ने पर सभी लिफ्टों को चालू कर दिया जाता है। लोग अनावश्यक पूर नीचे घूमते इसलिए आवश्यकता के अनुसार इनका प्रयोग किया जा रहा है। <br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Feb 2025 18:27:42 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आज से बदल गया है एसएमएस सहित राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में ओपीडी का समय</title>
                                    <description><![CDATA[समस्त राजकीय अवकाश व रविवार के दिन सभी अस्पतालों में आउटडोर समय सुबह 9 से 11 बजे तक रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/opd-timings-have-changed-in-all-government-hospitals-of-the/article-92074"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/opd.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य के सभी सरकारी अस्पतालों में आज से आउटडोर (ओपीडी) का समय बदल गया है। सवाई मानसिंह अस्पताल सहित मेडिकल कॉलेजों से जुड़े सभी अस्पतालों में वर्तमान में ग्रीष्मकालीन समय सारिणी के अनुसार सुबह आठ से दो बजे तक ओपीडी का समय है, लेकिन शीतकालीन समय सारणी के अनुसार अब एक अक्टूबर से 31 मार्च तक ओपीडी सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक का समय रहेगा।</p>
<p>वहीं जिला अस्पताल, सीएचसी और पीएचसी में भी आउटडोर एकल पारी में सुबह 9 से दोपहर 3 बजे तक संचालित होंगे। समस्त राजकीय अवकाश व रविवार के दिन सभी अस्पतालों में आउटडोर समय सुबह 9 से 11 बजे तक रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Oct 2024 15:32:50 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस ओपीडी की लिफ्ट खराब </title>
                                    <description><![CDATA[संभाग के सबसे बड़े अस्पताल के हालात। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/mbs-opd-lift-is-out-of-order/article-86982"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/mbs-opd-ki-lift-khrab...kota-news-06-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े अस्पताल एमबीएस में आए दिन मरीजों को किसी ना किसी परेशानी से दोचार होना पड़ रहा है। कभी जांच नहीं होने तो कभी लंबी कतारों से। सोमवार को एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी की लिफ्ट खराब होने से मरीजों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ा। तीन मंजिला इमारत पर अलग अलग फ्लोर पर ओपीडी संचालित हो रही है। सबसे ज्यादा दुर्घटना में घायल मरीजों को अस्थि रोग विभाग में जाने में हुई। मरीजों को सीढ़ियों के द्वारा ओपीडी में डॉक्टर को दिखाने जाना पड़ा। मौसमी बीमारियों के प्रकोप बढ़ने के साथ अस्पतालों में मरीजों की संख्या में लगातार इजाफा हो रहा है। इसके साथ अस्पताल में लगी लिफ्ट मरीजों के बोझ से हाफने लगी है। जिससे गंभीर मरीजों को भी सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ रहा है। शहर के एमबीएस अस्पताल में मरीजों की संख्या बढ़ने के साथ ही लिफ्ट का इस्तेमाल बढ़ गया है। जिससे लिफ्ट आए दिन खराब हो रही है। अस्पताल में लिफ्ट मरीजों का भार नहीं उठा पा रही जिससे दूसरी मंजिल पर जाने के लिए मरीजों को सीढ़ियों का सहरा लेना पड़ रहा है।  सोमवार को मरीजों की संख्या ज्यादा होने से दो लिफ्ट बंद रही। </p>
<p><strong>लिफ्ट 2, 3,4,6 हुई खराब</strong><br />इलाज कराने आए अख्तर खान ने बताया कि अस्पताल में एक ही लिफ्ट चालू थी जिसमें मरीजों को स्ट्रेचर से ले जाया जा रहा था। अस्पताल की दो नंबर, तीन नंबर, चार नंबर और छह नंबर लिफ्ट सोमवार को काम नहीं कर रही थी। जिससे मरीजों को फर्स्ट, सैंकड, थर्ड फ्लोर पर जाने के लिए सीढ़ियों का सहारा लेना पड़ा कई बुजुर्गो को सीढ़िया चढ़ने में परेशानी हुई ।वहीं बीपी और हार्ट के मरीज सबसे ज्यादा परेशान हुए। अस्पताल की लिफ्ट आए दिन खराब हो जाती है। ऐसे में मरीजों को तीसरे माले तक जाने में भारी परेशानी होती है। </p>
<p><strong>पैर में चोट लगी थी बडी मुश्किल से ओपीडी में पहुंची</strong><br />कुन्हाडी से पैर का चोट का इलाज कराने आई तेजी बाई वर्मा ने बताया कि पैर में सिर में चोट लगी थी अस्थि व न्यूरोलॉजी विभाग में दिखाने लिए जाना था लेकिन लिफ्ट खराब थी सीढ़ियों से जाना पड़ा। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />ओपीडी की लिफ्ट में कुछ तकनीकी खराबी आ गई थी उनको ठीक करा दिया है। अभी ओपीडी की सभी लिफ्ट काम करना शुरू कर दिया है। <br /><strong>- डॉ. धर्मराज मीणा, अधीक्षक एमबीएस अस्पताल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Aug 2024 15:17:28 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी का वेटिंग हॉल पड़ा है बंद</title>
                                    <description><![CDATA[नई इमारत की खिडकियां भी टूटने लगी हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-waiting-hall-of-the-new-opd-of-mbs-hospital-is-closed/article-81639"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/mbs-aspatal-ki-nyi-opd-ka-waiting-room-pda-h-bnd...kota-news-15-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा जिले के सबसे बड़े अस्पताल से दबाव कम करने के लिए नई ओपीडी तैयार की गई थी। अस्पताल के लिए नई ओपीडी तो तैयार हो गई लेकिन उसमें कई सुविधाएं अभी भी बंद हैं। ओपीडी में बंद इन सुविधाओं का लाभ मरीजों और उनके परिजनों को मिलना था। नई ओपीडी में मरीजों और परिजनों के लिए बनाया गया वेटिंग हॉल अभी भी बंद पड़ा है। साथ ही इमारत के बाहर मौजूद लाइट के स्थान पर खाली तार लटके हुए हैं। उनके स्थान पर अभी बल्ब नहीं लग पाए हैं। </p>
<p><strong>इमारत में अभी तक नहीं लगी लाइट</strong><br />यूआईटी के द्वारा एमबीएस अस्पताल की नई ओपीडी को हैरिटेज लुक में तैयार किया गया था। जिससे इसे राजस्थान के इतिहास और धरोहर के साथ जोड़ा जा सके। वहीं ओपीडी तैयार होने के बाद इमारत के कई कार्य अभी भी बाकी हैं। जिसमें सबसे जरूरी इमारत के बाहर लगने वाली लाइट बल्ब हैं, जो अभी तक नहीं लग पाए हैं। ये लाइट बल्ब ओपीडी के हैरिटेज लुक को और निखारने के लिए लगाने थे। लेकिन उनकी जगह पूरी इमारत में इनकी जगह केवल तार लटक रहे हैं। इसके अलावा नई इमारत की खिडकियां भी टूटने लगी हैं।</p>
<p><strong>ओपीडी शुरू होने से ही बंद है वेटिंग हॉल</strong><br />एमबीएस अस्पताल के लिए दो साल पहले तैयार की गई नई ओपीडी में मरीजों व परिजनों के लिए सभी तरह की सुविधाएं भी बनाई गई थी, जिसमें वेटिंग हॉल भी शामिल था। पुरानी इमारत में ओपीडी में दिखाने आने वाले मरीजों के लिए अलग से कोई वेटिंग हॉल मौजूद नहीं था। इसी समस्या के समाधान के लिए नई इमारत में वेटिंग हॉल बनाया गया था। लेकिन नई ओपीडी के चालू होने के बाद भी इसका वेटिंग हॉल अभी भी बंद पड़ा है। ऐसे में वेटिंग हॉल होने के बाद भी उसका लाभी मरीजों और परिजनों को नहीं मिल पा रहा है। जिसके चलते परिजनों को सीढ़ीयों और यहां वहां बैठना पड़ रहा है। जबकि वेटिंग हॉल में 50-70 लोगों के बैठने की व्यवस्था है, बावजूद इसके वेटिंग हॉल की सीटों पर धूल जमा है। इतना ही नहीं वेटिंग हॉल की खाली जगह पर अस्पताल प्रशासन ने कचरे के पात्र रखे हुए हैं।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />अस्पताल में वेटिंग हॉल शुरूआत से ही बंद है, कभी खुला हुआ नहीं देखा। ओपीडी में आने पर साथ आने वाले को पर्ची कटाते समय खड़ा रहना पड़ता है। वेटिंग हॉल मौजूद है तो उसकी सुविधा मिलनी चाहिए।<br /><strong>- शंभू सिंह राठौर, रंगबाड़ी</strong></p>
<p>पुरानी इमारत में वेटिंग हॉल मौजूद नहीं था, नई में बना ते दिया लेकिन बंद किया हुआ है। ऐसे में इसके बनना भी न बनने के बाराबर ही हो गया। क्योंकि इसका किसी कोे लाभ नहीं मिल पा रहा है। मरीजों को इधर उधर या नीचे बैठना पड़ता है।<br /><strong>- हरीश प्रजापति, इंद्रा गांधी नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नई ओपीडी में बने वेटिंग हॉल को तकनीकी कारणों और ढकान नहीं होने से बंद किया हुआ था। जल्द उसे खोल दिया जाएगा। इमारत के बाहर रोशनी के लिए लाइट लगाने का कार्य यूआईटी की ओर से किया जाना है। उसके लिए यूआईटी को पत्र लिखा हुआ है। <br /><strong>- धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jun 2024 14:32:08 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>परेशानी: रविवार को नहीं चलती सुपर स्पेशियलिस्ट की ओपीडी</title>
                                    <description><![CDATA[सुपर स्पेशियलिस्ट अस्पताल में वर्तमान में 9 यूनिट की ओपीडी संचालित हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/problem--opd-of-super-specialist-does-not-run-on-sunday/article-75214"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/preshani---ravivar-ko-nhi-chlti-super-speciality-ki-opd...kota-news-16-04-2024-(1).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल के पास साल 2019 में शुरु हुए सुपर स्पेशियलिस्ट हॉस्पिटल में 6 साल बाद भी रविवार को ओपीडी बंद रहती है। ओपीडी बंद रहने के कारण कई मरीजों को इसका लाभ नहीं मिल पाता है। जबकि सरकार की ओर सुपर स्पेशियलिस्ट ब्लॉक की शुरूआत ही मरीजों को विश्व स्तरीय सुविधाएं देने के लिए की गई थी। ताकि कोटा के आस पास के क्षेत्र के मरीजों को गंभीर बिमारी के इलाज के लिए जयपुर या दिल्ली न जाना पड़े। लेकिन ब्लॉक में अभी भी स्पेशियलिस्ट विभागों की मात्र 9 ही यूनिट संचालित हैं। ऐसे में इन यूनिटों द्वारा ही ओपीडी, आईपीडी, आॅपरेशन थियटर और कैथलेब चलाने के कारण हॉस्पिटल में ओपीडी की संख्या तो कम है ही बल्कि रविवार को ओपीडी बंद ही रहती है।</p>
<p><strong>वर्तमान में हफ्ते में 6 दिन 9 यूनिट की ओपीडी</strong><br />सुपर स्पेशियलिस्ट अस्पताल में वर्तमान में 9 यूनिट की ओपीडी संचालित हैं। जिनमें कार्डियोलॉजी, ग्रेस्टोलॉजी, न्यूरोलॉजी, न्यूरो सर्जरी, नेफ्रोलोजी, पीड्रियाट्रिक सर्जरी, प्लास्टिक सर्जरी, इन्फट्रिलिटी, यूरोलॉजी, सीटीवी (कार्डियो, थोरासिस, वेस्कुलर) सर्जरी, आॅनकोलॉजी सर्जरी व एंडोक्रायोनोलोजी सहित 9 ओपीडी संचालित हैं। इनमें कार्डियोलोजी की सोमवार, बुधवार, शनिवार को, ग्रेस्ट्रोलॉजी की सोमवार और शुक्रवार को, न्यूरोलॉजी की मंगलवार व शनिवार को, न्यूरोसर्जरी की गुरूवार को, नेफ्रोलॉजी और पीड्रियाट्रिक सर्जरी की मंगलवार को, प्लास्टिक सर्जरी की सोमवार और बुधवार को, इन्फट्रिलिटी की गुरुवार को, यूरोलॉजी की सोमवार व शनिवार को, सीटीवी सर्जरी व आॅनकोलोजी की बुधवार और शुक्रवार को तथा एन्डोक्रायोनोलॉजी की मंगलवार और गुरुवार को ओपीडी संचालित होती है। इन सभी विभाग में मात्र एक एक यूनिट ही मौजूद है जिसके द्वारा ही ओपीडी और आईपीडी से संबंधित कार्य किए जाते हैं।</p>
<p><strong>अतिरिक्त यूनिट मिले तो बढ़ सकती है ओपीडी</strong><br />अभी अस्पताल में मौजूद सभी यूनिट की ओपीडी पूरी तरह से संचालित हैं। जिसके बाद रविवार के लिए कोई यूनिट नहीं बचती है वहीं यूनिट के डॉक्टर को ओपीडी देखने के साथ साथ वार्ड, आॅपरेशन और कैथलेब भी देखनी होती है। जिसके चलते रविवार को ओपीडी नहीं चल पाती। वहीं एनएमसी के नियमों के मुताबिक अस्पताल में किसी भी नई यूनिट को शुरू करने के लिए एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट, एक असिस्टेंट की आवश्यकता होती है। अधीक्षक निलेश जैन ने बताया कि सुपर स्पेशियलिस्ट अभी शुरूआती दौर में हैं अभी अस्पताल अपने फुल फेज में संचालित नहीं हुआ है। जिसकी क्षमता को बढ़ाने के प्रयास किए जा रहे हैं। </p>
<p><strong>ओपीडी का नहीं मिल रहा लाभ</strong><br />सभी अस्पतालों में रविवार को भी ओपीडी संचालित होती है केवल सुपर स्पेशियलिस्ट अस्पताल में ही ओपीडी बंद रहती है। यहां भी ओपीडी चलने लगे तो वर्तमान से अधिक मरीजों को इसका लाभ मिल सकता है।<br /><strong>- पुष्पेंद्र सुमन, दादाबाड़ी</strong></p>
<p>एक दो बार रविवार को सुपर स्पेशियलिस्ट अस्पताल की ओपीडी में दिखाने गया लेकिन हर बार बंद मिली जिसके बारे में पूछा तो डॉक्टर न होने का जवाब मिला। सुपर स्पेशियलिस्ट अस्पताल में ही ओपीडी संचालित नहीं है तो मरीजों को इलाज कैसे संभव है।<br /><strong>- मोहम्मद नदीम, विज्ञान नगर</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में मौजूद यूनिट के अनुसार ओपीडी संचालित की जा रही है, नई ओपीडी शुरु करने के लिए अतिरिक्त यूनिट की आवश्यकता होगी। जिसके लिए सरकार को पत्र लिखा हुआ है। यूनिट के लिए वार्ड और स्टॉफ मिलने पर ओपीडी शुरु कर दी जाएगी।<br /><strong>- निलेश जैन, अधीक्षक, सुपर स्पेशियलिस्ट अस्पताल</strong></p>
<p><strong>9 विभाग के लिए 180, आईसीयू, डायलिसिस और ओटी के लिए 20 बेड मौजूद</strong><br />सुपर स्पेशियलिस्ट अस्पताल की वर्तमान में बेडों की कुल क्षमता 200 है जिसमें अभी 9 विभागों की प्रत्येक यूनिट के लिए 20 बेड हैं जिनकी कुल संख्या 180 है। वहीं आईसीयू, डायलिसिस और ओटी जैसे विभागों के लिए 20 बेड मौजूद हैं। ऐसे में नई यूनिट शुरू करने पर प्रत्येक यूनिट के लिए 20 बेडों की आवश्यकता होगी। वर्तमान में अस्पताल में इसके लिए संभावना मौजूद है, अस्पताल में नई युनिट के शुरू होने से कोटा और आसपास के क्षेत्र के कई मरीजों को इसका लाभ मिल सकेगा। वर्तमान में ओपीडी की संख्या कम होने से गिने चुने लोग ही सुपर स्पेशियलिस्ट में इलाज करा पाते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 Apr 2024 15:21:53 +0530</pubDate>
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                <title>ईएनटी की आईपीडी 12 साल से कागजों में</title>
                                    <description><![CDATA[अस्पताल में विभाग की ओपीडी सप्ताह में दो दिन सोमवार और बुधवार को संचालित होती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ent-s-opd-has-been-on-paper-for-12-years/article-74995"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/ent-ki-opd-15-saal-s-kagazo-me...kota-news-12-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। चिकित्सा विभाग की ओर से अस्पतालों में मरीजों के लिए सुविधाएं बढ़ाने के लिए रोज नए प्रयोग किए जा रहे हैं। फिर चाहे वो सफाई के लिए क्यूआर कोड हो या मरीजों को पीपीपी मोड पर जांच सुविधाएं उपलब्ध कराना हो। इन सब के बीच कुछ जगहों पर मरीज को जिन मुलभूत सुविधाओं की आवश्यकता होती है वो भी नहीं मिल रही हैं। दरअसल मेडिकल कॉलेज अस्पताल में नाक, कान, गला विभाग की ओपीडी तो संचालित है, लेकिन उसके लिए आईपीडी की व्यवस्था तक नहीं है। अस्पताल में विभाग की ओपीडी सप्ताह में दो दिन सोमवार और बुधवार को संचालित होती है। जिसमें दिखाने आने वाले मरीजों के छोटे ऑपरेशन करने के लिए ऑपरेशन थिएटर भी मौजूद नहीं है।</p>
<p><strong>अस्पताल शुरू होने के समय से मौजूद नहीं आईपीडी</strong><br />रंगबाड़ी स्थित नवीन चिकित्सालय में स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत साल 2008 में हुई थी। तब से अब तक अस्पताल में कई चिकित्सा विभागों की स्वास्थ्य सेवाएं मरीजों के लिए चालू हो चुकी है। वहीं अस्पताल में ईएनटी विभाग की शुरुआत साल 2012 में हो गई थी लेकिन शुरू होने के 12 साल बाद भी अस्पताल में ईएनटी विभाग की आईपीडी नहीं आ पाई है। जिसकी वजह से यहां दिखाने वाले मरीजों को भर्ती होने या छोटे ऑपरेशन कराने के लिए भी एमबीएस अस्पताल जाना पड़ता है। इसके अलावा अस्पताल में ईएनटी विभाग का ओपीडी भी मात्र दो ही दिन संचालित होता है जिसमें हर दिन 200 से 250 मरीज दिखाने आते हैं। इसके अलावा अस्पताल के आसपास के क्षेत्र के मरीजों को ओपीडी से अन्य दिनों में एमबीएस अस्पताल जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>आईपीडी शुरू हो तो ऑपरेशन के साथ इलाज भी यहीं मिले</strong><br />अस्पताल में नाक कान गला विभाग का आईपीडी वार्ड शुरू करने के लिए पर्याप्त जगह है। जिसमें वार्ड और ऑपरेशन थिएटर दोनों शामिल हैं। अस्पताल के अधीक्षक आरपी मीणा के अनुसार अस्पताल वर्तमान में 750 बेड की क्षमता है। जिसमें अन्य विभागों की आईपीडी के लिए बेड निकालने के बाद भी नाक, कान, गला विभाग के वार्ड के लिए पर्याप्त जगह मौजूद है। ऐसें में अगर स्टॉफ मिल जाए तो तुरंत ही आईपीडी शुरू की जा सकती है। जिससे मरीजों को एमबीएस अस्पताल में न जाकर मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही ओपीडी के साथ आईपीडी की सुविधाएं मिल सकती हैं। </p>
<p><strong>छोटे से ऑपरेशन के लिए भी जाना पड़ता है एमबीएस</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ईएनटी विभाग की आईपीडी न होने से मरीजों को डॉक्टर को दिखाने के बाद भी एमबीएस अस्पताल में जाना पड़ता है। क्योंकि किसी मरीज को ऑपरेशन की जरूरत पड़ जाती है तो उसके लिए विभाग के पास ऑपरेशन थिएटर नहीं है अगर छोटा मोटा ऑपरेशन कर भी दे तो उसे भर्ती करने के लिए वार्ड नहीं है, जिस कारण मरीजों को मजबूरन एमबीएस अस्पताल में जाना पड़ता है। इतना ही नहीं मेडिकल कॉलेज से एमबीएस में जाने पर मरीज को दोबारा पर्ची कटाकर डॉक्टर को दिखाना पड़ता है और फिर से नई जांच करवानी पड़ती है। इन सब से परेशान होकर मरीज प्राइवेट में ही दिखाने चला जाता है।</p>
<p><strong>लोगों का कहना है</strong><br />मुझे कान में दर्द था जिसे डॉक्टर को दिखाने के बाद उन्होंने ऑपरेशन कराने के लिए बोला लेकिन अस्पताल में आईपीडी नहीं होने से एमबीएस जाने को बोला है। <br /><strong>- दिनेश कुमार, मरीज, केशवपुरा</strong></p>
<p>नाक में दर्द होने सूजन थी, जिसकी जांच कराने के बाद डॉक्टर ने एमबीएस अस्पताल में आने को बोला पूछने पर बताया कि यहां ऑपरेशन नहीं हो सकता इसलिए वहां आना होगा।<br /><strong>- मिनाक्षी वर्मा, मरीज, छावनी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विभाग के पास मैन पावर तो है लेकिन एसोसिएट प्रोफेसर एक ही है ऐसे में यूनिट शुरू करने के लिए एक और एसोसिएट प्रोफेसर मिल जाए तो एक प्रोफेसर, एक एसोसिएट प्रोफेसर, दो असिस्टेंट और रेजिडेंट के साथ आईपीडी शुरू कर दी जाएगी।<br /><strong>- राजकुमार जैन, अध्यक्ष, ईएनटी विभाग, मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p>मेडिकल कॉलेज में ईएनटी विभाग की आईपीडी शुरू करने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं इसके लिए अवकाश के बाद मीटिंग लेकर फैकल्टी लाने की कोशिश की जाएगी। फैकल्टी मिलते ही आईपीडी शुरू कर दी जाएगी।<br /><strong>- संगीता सक्सेना, प्राधाचार्या व नियंत्रक, मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p>ईएनटी विभाग की आईपीडी शुरू करने के लिए पर्याप्त संसाधन और जगह मौजूद है। हमें आईपीडी शुरू करने में कोई समस्या नहीं कॉलेज से यूनिट और स्टॉफ मिल जाए तो आज ही शुरू कर दें।<br /><strong>- आरपी मीणा, अधीक्षक, नवीन चिकित्सालय</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Apr 2024 16:54:33 +0530</pubDate>
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                <title>टोकन व्यवस्था हो तो ओपीडी की भीड़ से मिल सकती है निजात</title>
                                    <description><![CDATA[टोकन की व्यवस्था शुरू करने से काफी हद तक असुविधा से बचा जा सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-there-is-token-system-then-opd-crowd-can-be-relieved/article-74791"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/token-vyavastha-ho-to-opd-ki-bheed-s-mil-skti-h-nijat...kota-news-09-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर में तीन बड़े अस्पताल सहित कुल पांच अस्पताल मौजूद हैं जहां रोजना लाखों लोग अपना इलाज कराने आते हैं। ऐसे में मरीजों को इन अस्पतालों में पर्ची कटाने से लेकर जांच कराने और दवाई लेने तक हर जगह लाइनों में लगना होता है। जहां समय भी बर्बाद होता है और मरीजों को परेशानी भी उठानी पड़ती है। कई बार तो मरीजों को अपना नंबर लगाने के लिए खुद ही लाइनों में खड़ा होना पड़ता है। इस समस्या के निवारण के लिए जिला अस्पतालों में जांच काउंटर की तरह टोकन की व्यवस्था शुरू करने से काफी हद तक असुविधा से बचा जा सकता है। टोकन व्यवस्था में मरीज को नंबर लगाने के बाद खड़े रहने की आवश्यकता नहीं होगी और अपना नंबर आने पर डॉक्टर को दिखा सकेगा।</p>
<p><strong>अभी क्या है व्यवस्था</strong><br />वर्तमान में सभी अस्पतलों में मरीजों को पर्ची कटाने के लिए पहले पर्ची काउंटर पर लाइन में लगना होता है उसके बाद डॉक्टर को दिखाने के लिए फिर से लाइन में लगना होता है। अगर डॉक्टर दिखाने के समय जांच लिख दे तो मरीज को फिर लाइन में लगना होता है वहीं जांच मिल जाने के बाद उसे डॉक्टर को दिखाना हो तो फिर लाइन में लगना पड़ता है। जिससे ना चाहते हुए भी समय की बर्बादी तो होती ही है, साथ ही मरीज को परेशानी भी उठानी पड़ती है।</p>
<p><strong>टोकन व्यवस्था में मिले सुविधा</strong><br />जिले के सभी अस्पतालों में वर्तमान में सिर्फ जांच काउंटरों पर ही टोकन की सुविधा उपलब्ध है, जहां पहले आपको जांच के लिए एंट्री कराकर टोकन नंबर लेना होता है जिसके अनुसार आपका टोकन नंबर आने पर आप जांच करा सकते हो। सही सुविधा मरीज को ओपीडी में दिखाते वक्त मिले तो उसे लाइनों में नहीं लगना पड़े। क्योंकि अस्पतालों में पर्ची काउंटर के बाद सबसे ज्यादा भीड़ विभागों की ओपीडी में देखने को मिलती है। जहां टोकन व्यवस्था लागू करने से लाइनों व भीड़ दोनों से निजात मिल सकती है। </p>
<p>कई निजी अस्पतालों में टोकन व्यवस्था संचालित है जहां टोकन नंबर के आधार पर ही मरीज दिखाते हैं। जिससे ओपीडी में अनावश्यक भीड़ नहीं होती। यही व्यवस्था अगर सरकारी अस्पतालों में भी हो तो लोग लाइनों में लगने के स्थान पर अपना नंबर आने तक आराम से बैठ सकते हैं।<br /><strong>- भीमराज गुर्जर, नयागांव</strong></p>
<p>असपतालों की ओपीडी में हमेशा भीड़ रहती है कोई कहीं से भी आकर घुस जाता है और पहले से लाइन में लगने वाले रह जाते हैं अगर टोकन व्यवस्था चालू हो तो इन समस्याओं को समाधान हो सकता है। <br /><strong>- दिनेश मेवाड़ा, डीसीएम</strong></p>
<p>टोकन व्यवस्था अपस्पतालों में होना जरूरी है क्योंकि ऐसी व्यवस्था नहीं होने से जिनका नंबर पहले होता है वो पीछे रह जाते हैं और जिनका बाद में होता है वो आगे निकल जाते हैं। टोकन होने से सबको अपना नंबर पता होगा और उसी के अनुसार दिखा सकेंगे।<br /><strong>- अर्जुन कुमार, प्रेम नगर</strong></p>
<p>असपतालों में कई बार भीड़ बहुत ज्यादा होती है जिसमें दिखाना बहुत मुश्किल हो जाता है क्योंकि सब अपना नंबर के लिए बिना किसी लाइन के आस पास खड़े हो जाते हैं जिससे बीमारी फैलने का भी खतरा रहता है। टोकन व्यवस्था हो तो इससे निजात मिल सकती है।<br /><strong>- राजेंद्र नायक, बोरखेड़ा</strong></p>
<p>अस्पताल में एक दिन की ओपीडी में हजार से ज्यादा मरीज आते हैं जिनमें कई समझदार होते हैं कुछ नहीं। जिससे व्यवस्थ बिगड़ जाती है, अगर ऐसी जरूरत है तो टोकन व्यवस्था लागू करने पर विचार करेंगे। साथ ही भीड़ कम करने के भी प्रयास करेंगे।<br /><strong>- धर्मराज मीणा, अधीक्षक, एमबीएस </strong></p>
<p>नवीन चिकित्सालय में मरीज भार ज्यादा है ऐसे में एक साथ इतने मरीजों में टोकन व्यवस्था लागू करना मुश्किल हो सकता है। क्योंकि कई बार किसी मरीज की गंभिरता को देखते हुए नियम तोड़ने पड़ जाते हैं। लेकिन टोकन व्यवस्था को लागू करने पर विचार करेंगे। <br /><strong>- आरपी मीणा, अधीक्षक, नवीन चिकित्सालय</strong></p>
<p>जेके लोन में केवल प्रसूति और शिशु से संबंधित रोगों की ही ओपोडी चलती है। मरीज भार कम होने से अव्यवस्था नहीं होती है। कभी कभार मरीज ज्यादा आने से व्यवस्था बिगड़ने पर संभाल लिया जाता है। टोकन व्यवस्था अच्छा विकल्प है जिससे लागू करने की संभावनाएं देख कर इसे चालू करने की कोशिश करेंगे।<br /><strong>- अशुतोष शर्मा, अधीक्षक, जेके लॉन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Apr 2024 17:47:47 +0530</pubDate>
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                <title>जान का दुश्मन बन रहा डेंगू का डंक</title>
                                    <description><![CDATA[संभाग में डेंगू अपने चरम पर है, जिसके चलते भी मरीज की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/dengue-cases-in-kota-rajasthan/article-56931"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-09/jaan-ka-dushman-bn-rha-dengue-ka-dank...bhawanimandi,-jhalawar-news-12-09-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>भवानीमंडी। भवानीमंडी के राजकीय कमरुद्दीन चिकित्सालय में मौसमी बीमारियों के कारण लगातार मरीजों की संख्या में बढ़ोतरी हो रही है, जहां चिकित्सालय की ओपीडी में मरीजों की कतारे खत्म होने का नाम ही नहीं ले रही। डेंगू के मरीज भी लगातार बढ़ रहे है। विगत 30 दिनों में अब तक 10 मरीज डेंगू के आ चुके है।  राजकीय चिकित्सक राहुल आचोलिया ने बताया कि सामान्य दिनों में चिकित्सालय में प्रतिदिन 200 से 300 मरीज ओपीडी में आते हैं। वही इन दोनों मौसम में बीमारी बीमारियों खांसी, सर्दी, जुकाम, बुखार के चलते प्रतिदिन ओपीडी 700 से 800 तक पहुंच गई है, वही विगत तीन दिनों से खराब पड़ी एक्स-रे मशीन को भी सही करवाया गया है, जिससे मरीजों को राहत की सांस मिली है। जहां इन दोनों संभाग में डेंगू अपने चरम पर है, जिसके चलते भी मरीज की संख्या में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। जहां चिकित्सालय में चिकित्सकों की कमी के बावजूद दुगुनी ओपीडी को भी पर्याप्त उपचारित किया जा रहा है। क्षेत्र में अभी सबसे ज्यादा डेंगू , मलेरिया व वायरल के मरीज की संख्या में बढोतरी हो रही है। कई जगहों पर क्षेत्र में कीचड फैला हुआ है, वहीं टंकियों व कूलर की समय समय सफाई नहीं होने के कारण भी मौसमी बीमारियों में इजाफा हुआ है। अस्पतालों में डेंगू, मलेरिया, वायरल, स्क्रब टाइफस के मरीज दिनों दिन बढते जा रहे है। </p>
<p>बिजली कटौती के कारण मच्छरों का दंश झेलना पड़ रहा है, जिसके चलते घरों में बीमारियां भी बढ़ रही है।<br /><strong> - बद्रीनाथ, ग्रामीण </strong></p>
<p>बुखार आने पर चिकित्सालय आए थे यहां मरीजों की भीड़ देखकर काफी देर तक इंतजार करना पड़ा।<br /><strong>- भोगराज, ग्रामीण </strong></p>
<p>मौसमी बीमारियों ने सभी क्षेत्रवासियों को अपनी चपेट में ले लिया है, डेंगू के डर के चलते सभी हल्का बुखार आने पर भी चिकित्सालय पहुंच रहे हैं।<br /><strong>- दिव्यदर्शन, नगरवासी </strong></p>
<p>अपने आसपास सफाई बनाए रखें, कूलर में पानी न जमा होने दे, साफ पानी का सेवन करें, पौष्टिक आहार खाएं, मच्छरदानी का अधिक से अधिक प्रयोग करें।<br /><strong>- डॉ रोहिताश्व, चिकित्सा प्रभारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Sep 2023 16:13:50 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>अब प्रसव पीड़ा पर भारी नहीं पड़ेगी अव्यवस्था</title>
                                    <description><![CDATA[आधुनिक सुविधा युक्त लेबर का जीणोद्धार कार्य पूरा हो चुका है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/now-labor-pain-will-not-be-overshadowed-by-clutter/article-52023"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/ab-prasav-peeda-pr-bhari-nhi-pdegi-avyavstha...kota-news-17-07-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े जेकेलोन अस्पताल की नई ओपीडी में इमजेंसी प्रसूताओं को सीढ़ियां चढ़ने आ रही परेशानी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने ओपीडी में व्हील चेर्यस और स्ट्रेचर की व्यवस्था की है। इमजेंसी प्रसव के लिए आई महिलाओं को लेबर रूम तक ले जाने के लिए परेशानी हो रही थी। इस परेशानी को ध्यान में रखते हुए अस्पताल प्रशासन ने ये व्यवस्था शुरू की। जेकेलोन की नई ओपीडी बनने के बाद से प्रसूताओं को ओपीडी के तक पहुंचने के लिए दस सीढ़ियां चढ़ने पड़ रही थी एक से प्रसव पीड़ा का दर्द उस पर इतनी सीढ़ियां चढ़ने प्रसूताओं का दर्द और बढ़ रहा था। </p>
<p><strong>पुराने लेबर रूम तक जाने में हो रही थी परेशानी </strong><br />जेकेलोन अस्पताल में अपनी बहु की डिलेवरी के लिए साथ आई सास कमला चौहान ने बताया कि बहु की प्रसव पीड़ा बढ़ गई तो आॅटो से अस्पताल लेकर पहुंचे। ओपीडी सीढ़ियां चढ़ने की हालत में बहु नहीं थी रेप के रास्ते लेकर गए, लेकिन वहां भी नहीं चल पाई मैं अस्पताल में अंदर जाकर स्ट्रैचर की तलाश कर ही रही थी तभी वहां तैनात गार्ड ने बताया कि अंदर व्हील चेयर्स रखी है उस पर बिठाकर लेकर आए। रजिस्टेशन कराया तो पता चला लेबर रूम पुरानी बिल्डिंग के आखिरी छोर पर है। बहु को व्हील चेयर्स मिलने से आसानी से लेबर रूम तक ले जा सके नहीं तो भारी परेशानी हो जाती थी।</p>
<p><strong>ओपीडी में मरीजों के बैठने के लिए लगाई कुर्सियां</strong><br />जेकेलोन के अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा ने बताया कि मरीजों के बैठने के लिए ओपीडी में सीएसआर में 50 बैच तीन सीटर ली है। कोरोमंडल कंपनी से ली है। पुरानी आईपीडी के लिए भी 200 बैच के लिए प्रयास चल रहा है। जिससे ये सारी परेशानी खत्म हो जाएगी। </p>
<p><strong>गर्भवती के लिए दस सीढ़ी चढ़ना नहीं है आसान, होती है मुश्किल</strong><br />जेकेलोन अस्पताल की नई ओपीडी तो बना दी लेकिन वहां आने वाली महिलाओं को दस सीढ़ियां चढ़ना भारी पड़ रहा है। परिजनों का कहना है ओपीडी में पहुंचने के लिए दस सीढ़िया चढ़ना प्रसूता के लिए पहाड़ पर चढ़ाई करने जैसा है। पुरानी ओपीडी में सीढ़िया नहीं होने से प्रसूताए बिना किसी के सहारे के ही अपनी जांच कराकर आसानी से आ जा सकती थी जब से नई ओपीडी शुरू हुई महिलाओं के लिए परेशानी हो रही थी। इमरेंसी में आई महिलाओं को ना तो व्हील चेयर्स मिल रही ना ही स्ट्रैचर ऐसे महिलाए परिजनों के सहारे रैंप व सीढ़ियों से ओपीडी में पहुंच रही थी। लोगों अस्पताल प्रशासन को इस बारे मे अवगत कराया तब जाकर ओपीडी में स्ट्रेचर और व्हील चेर्यस की व्यवस्था हुई। </p>
<p><strong>लेबर रूम के हेंडओवर की प्रोसेस अंतिम चरण में</strong><br />आधुनिक सुविधा युक्त लेबर का जीणोद्धार कार्य पूरा हो चुका है। लेबर हेंडओवर का कार्य अंतिम चरण में चल रहा है अगले सप्ताह से इसके चालू होने की संभावना है। ओटी की मशीनों व अन्य उपकरणों की जांच और काउंटिक लिस्ट के अनुसार चेक की जा रही है। ये काम पूरा होते ही नया लेबर रूम शुरू हो जाएगा। अभी पुराना लेबर रूम जेकेलोन के अंतिम छोर पर होने से प्रसूताओं को लंबा चक्कर लगाकर जाना पड़ रहा है। अब दूसरा गेट भी बंद हो गया है। ऐसे में प्रसूताओं को पहले नई ओपीडी से पुरानी ओपीडी बिल्डिंग में होते हुए पुराने लेबर रूम में जाना पड़ रहा है। ओपीडी से लेबर रूम की दूरी काफी होने से प्रसूताओं को भारी परेशानी हो रही है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अस्पताल में प्रसूताओं की सुविधा के लिए ओपीडी के गेट के पास बने रूम में व्हील चेर्यस व ट्राली रखवाई हुई है। लोगों परेशानी नहीं हो इसके लिए बोर्ड तैयार कराए जिससे लोगों आसानी से ट्राली आदि मिल जाएगी। गार्ड पाबंद किया हुआ है। अगले सप्ताह तक नया लेबर रूम शुरू होने से प्रसूताओं लंबा चक्कर नहीं काटना पड़ेगा। <br /><strong>-डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक जेकेलोन अस्पताल कोटा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 17 Jul 2023 16:03:19 +0530</pubDate>
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