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                <title>russian - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>भारत-रूस मिलकर बनाएंगे ब्रह्मोस-2 मिसाइल : रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के दिल्ली दौरे के दौरान समझौता होने के संकेत, स्क्रैमजेट  इंजन का उपयोग होगा</title>
                                    <description><![CDATA[ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को चीन और पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम नहीं रोक सकते हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-russia-will-make-brahmos-2-missile-russian-president-vladimir-putins-signs/article-121772"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/untitled-design-(12)1.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को/नई दिल्ली। ऑपरेशन सिंदूर ने साबित कर दिया है कि ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल को चीन और पाकिस्तान के एयर डिफेंस सिस्टम नहीं रोक सकते हैं। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक भारत और रूस के बीच ब्रह्मोस-2के हाइपरसोनिक क्रूज मिसाइल प्रोग्राम को फिर से शुरू करने को लेकर बड़ा समझौता हो सकता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन जब भारत के दौरे पर आएंगे उस दौरान दोनों देशों के बीच बड़ा समझौता हो सकता है। आपको बता दें कि ब्रह्मोस-2के को मौजूदा ब्रह्मोस सुपरसोनिक क्रूज मिसाइल का नेक्स्ट जेनरेशन माना जाता है और इसकी हाइपरसोनिक स्पीड होगी। ये रूस की जिरकॉन (3एम22 जिरकॉन) मिसाइल की टेक्नोलॉजी पर आधारित होगी। रिपोर्ट के मुताबिक ब्रह्मोस-2के में स्क्रैमजेट इंजन का इस्तेमाल किया जाएगा और ये अपने साथ न्यूक्लियर वारहेड ले जा सकती है। यानि ब्रह्मोस-2के एक न्यूक्लियर मिसाइल होगी, जिसकी स्पीड 7-8 मैक की हो सकती है और इसका रेंज 1500 किलोमीटर होने की बात कही जा रही है। आपको बता दें कि ब्रह्मोस-2के प्रोग्राम को बनाने का प्रस्ताव करीब 10 साल पहले ही रखा गया था और ये प्रोजेक्ट भारत के ऊफऊड और रूसी ठढड टं२ँ्रल्लाङ्म २३१ङ्म८ील्ल्र८ं के बीच का वाइंट वेंचर है। लेकिन अब जबकि पाकिस्तान के खिलाफ ब्रह्मोस जबरदस्त कामयाब हुआ है तो अब इस प्रोग्राम को फिर से शुरू करने की कोशिश शुरू की गई है।</p>
<p><strong>यह मिसाइल कितनी खतरनाक होगी?</strong></p>
<p>ब्रह्मोस-2के मिसाइल दुनिया की सबसे ज्यादा खतरनाक मिसाइलों में से एक होगी और शायद अभी तक ऐसा कोई भी एयर डिफेंस सिस्टम नहीं बना हो जो इसे इंटरसेप्ट कर सके। चीन लगातार ब्रह्मोस मिसाइल को काउंटर करने के लिए एयर डिफेंस बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन अभी तक वो नाकामयाब रहा है। डिफेंस एक्सपर्ट्स के मुताबिक ये मोस्ट एडवांस स्क्रैमजेट टेक्नोलॉजी से लैस होगी, जिसका मतलब है कि टारगेट से टकराने तक इसकी स्पीड हाइपरसोनिक होगी। इसकी स्पीड वायुमंडलीय प्रेशर की वजह से कम नहीं होगी। मौजूदा ब्रह्मोस मिसाइल की स्पीड 3.5 मैक की है और रेंज 800 किलोमीटर की है। भारत ने इसे एयरफोर्स और नेवी में तैनात कर रखा है। <br />इसके अलावा थल सेना में भी ब्रह्मोस को तैनात किया गया है। ब्रह्मोस-2के, जिसे ब्रह्मोस मार्क-।। या ब्रह्मोस-।। भी कहा जा रहा है, उसमें काफी कम रडार सिग्नेचर और एडवांस मैनूवरिंग क्षमता होगी, जिससे इसे इंटरसेप्ट करना लगभग असंभव होगा। </p>
<p>इसी साल अप्रैल महीने में डीआरडीओ ने एक स्वदेशी स्क्रैमजेट इंजन का 1,000 सेकंड का सफल ग्राउंड टेस्ट किया था, जिसके बाद ब्रह्मोस-2के को नया जीवन मिल गया। डीआरडीओ के पूर्व महानिदेशक डॉ. सुधीर कुमार मिश्रा ने कहा था कि भारत में विकसित यह स्क्रैमजेट इंजन ब्रह्मोस-2के में शामिल किया जा सकता है, जिससे रूस पर निर्भरता कम हो जाएगी। हालांकि मिसाइल की डिजाइन में रूसी जिरकॉन मिसाइल पर ही आधारित होगी, लेकिन भारत अपनी मिसाइल टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर इसे हाइब्रिड सिस्टम बनाएगा। भारत ब्रह्मोस-2के प्रोग्राम उस वक्त शुरू कर रहा है जब दुनिया के कई देश हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने की दिशा में कड़ी मेहनत कर रहे हैं, लेकिन सिर्फ चीन और रूस को ही कामयाबी मिल पाई है।  अमेरिका का हाइपरसोनिक मिसाइल कार्यक्रम कम से कम तीन बार फेल हो चुका है, लेकिन भारत हाइपरसोनिक मिसाइल बनाने के काफी करीब पहुंच चुका है।</p>
<p><br /><strong>कब तक डवलप कर लिया जाएगा?</strong></p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक ब्रह्मोस-2के मिसाइल के दो वैरिएंट बनाने की योजना पर काम हो रहा है। इसका पहला वैरिएंट, जिसकी स्पीड हाइपरसोनिक स्पीड के करीब होगी, उसे अगले साल के अंत तक तैयार कर लिया जाएगा और दूसरा वैरिएंट, जो पूरी तरह से स्क्रैमजेट पर आधारिक होगा, उसके 2027 तक डेवलप कर लिया जाएगा। चूंकी भारत और रूस मिसाइल टेक्नोलॉजी में इतना ज्यादा आगे हैं कि उन्हें मिसाइल बनाने में ज्यादा वक्त नहीं लगता। दिल्ली डिफेंस रिव्यू के डायरेक्टर सौरव झा ने कहा कि भारत ने मिसाइल बनाने के लिए शुरूआत से ही काम किए हैं और अपना इको-सिस्टम तैयार किया है। भारत के पास मिसाइलों को टेस्ट करने के लिए एडवांस सुविधाएं हैं, इसीलिए मिसाइल बनाने में भारत दुनिया के शीर्ष देशों में शामिल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 27 Jul 2025 12:44:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>एसयू 30 एमकेआई को रूसी आर-37एम मिसाइल से लैस करेगा भारत, हाइपरसोनिक स्पीड से हमला करने की क्षमता</title>
                                    <description><![CDATA[ भारतीय वायुसेना बहुत जल्द अपने एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों में रूसी आर-37एम हाइपरसोनिक एयर टू एयर मिसाइल को इंटीग्रेट कर सकती है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/india-will-equip-su-30-mki-with-russian-r-37m-missile/article-118952"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/rtroer-(4)26.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। भारतीय वायुसेना बहुत जल्द अपने एसयू-30 एमकेआई लड़ाकू विमानों में रूसी आर-37एम हाइपरसोनिक एयर टू एयर मिसाइल को इंटीग्रेट कर सकती है। डिफेंस सिक्योरिटी एशिया की रिपोर्ट में कहा गया है कि आर-37एम एक दुर्जेय रूसी मिसाइल है, जिसे इंटीग्रेट करने से भारतीय वायुसेना के विमानों की बीवीआर लड़ाई में रेंज काफी ज्यादा बढ़ जाएगी। रूस की आर-37एम एयर टू एयर मिसाइल को नाटो देशों ने एए-13 एक्सहेड कोडनेम दिया हुआ है। </p>
<p>रिपोर्ट में दिल्ली के विश्वसनीय सूत्रों के हवाले से कहा गया है कि भारत ने अपने प्रतिद्वंदियों चीन और पाकिस्तान के बियॉन्ड विजुअल रेंज खतरों ने निपटने के लिए रूसी हाइपरसोनिक मिसाइल पर भरोसा जताया है। रिपोर्ट में कहा गया है कि रूस ने भारत को एक जबरदस्त पैकेज का प्रस्ताव दिया है, जिसमें आर-37एम मिसाइल का भारत में ही उत्पादन शामिल है।</p>
<p>रिपोर्ट के मुताबिक भारतीय एसयू-30एमकेआई लड़ाकू विमान के साथ साथ मिग-29 लड़ाकू विमानों को भी आर-37एम मिसाइल से लैस किया जा सकेगा। यह मिसाइल दुनिया की सबसे लंबी दूरी की एयर-टू-एयर मिसाइलों में से एक है और भारत के लिए यह कदम सिर्फ एक हथियार तैनाती नहीं, बल्कि हवाई रणनीति में बदलाव का प्रतीक है। सूत्रों के मुताबिक रूस ने इस डील को और आकर्षक बनाने के लिए स्थानीय को-प्रोडक्शन और टेक्नोलॉजी ट्रांसफर का प्रस्ताव भी दिया है, जो भारत की मेक इन इंडिया और 130 अरब डॉलर के डिफेंस मॉडर्नाइजेशन प्रोग्राम के मुताबिक है।</p>
<p><strong>आर-37एम मिसाइल की विशेषताएं</strong></p>
<p><strong> आर-37एम का वर्जन :</strong> एयर टू एयर मिसाइल <br /><strong> डवलपर :</strong> रूस की मशहूर Vympel Design Bureau ने डेवलप किया<br /><strong> मिसाइल की फायरिंग रेंज : </strong>300 किलोमीटर के करीब  है।<br /> <strong>मिसाइल की टर्मिनल स्पीड :</strong> है, जो मैक 6 यानि आवाज की रफ्तार से 6 गुना ज्यादा (विनाशकारी हाइपरसोनिक स्पीड)<br /><strong> मिसाइल का आकार :</strong> 4.2 मीटर लंबी और <br /><strong> वजन :</strong> 600 किलोग्राम।</p>
<p><strong>भारत से बड़ा रणनीतिक साझेदार नहीं</strong><br />मॉस्को के रक्षा मंत्रालय ने हाल ही में पुष्टि की है कि 1 नवंबर 2024 को एसयू-30एसएम और एसयू-35एस जेट ने यूक्रेनी लड़ाकू विमानों को मार गिराने के लिए आर-37एम का सफलतापूर्वक इस्तेमाल किया था। अक्टूबर 2022 में युद्ध के मैदान की रिपोर्टें सामने आईं थी कि रूस की पांचवीं पीढ़ी के एसयू-57 से लॉन्च किए गए आर-37एम मिसाइल ने एक यूक्रेनी एसयू-27 को मार गिराया गया था। हालांकि आर-37एम को मूल रूप से मिग-31 जैसे भारी इंटरसेप्टर के लिए बनाया गया था, जिसके बड़े आकार की वजह से इस 4.2 मीटर लंबी और 600 किलोग्राम वजनी मिसाइल को ढोना सरल होता है। लेकिन एसयू-30एमकेआई और मिग-29 जैसे विमानों में इसे इंटीग्रेट करना थोड़ा मुश्किल होगा। इसके लिए भारत को एवियोनिक्स और रडार सिस्टम को अपग्रेड करना होगा।  भारत और रूस के बीच तकनीकी साझेदारी को देखते हुए ऐसा करना संभव माना जा रहा है। </p>
<p>डिफेंस सेक्टर पर नजर रखने वाली वेबसाइटों का कहना है कि आर-37एम की टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और भारत में निर्माण यूक्रेन युद्ध की वजह से आसान हो गया है, क्योंकि रूस के लिए पश्चिमी देशों के दरवाजे बंद हैं और भारत से बड़ा उसके पास कोई और रणनीतिक साझेदार नहीं है।</p>
<p><strong>भारत में 200-300 मिलियन डॉलर तक की लागत</strong><br />अगर भारत इसका उत्पादन करता है तो यह मिसाइल भारत में 200-300 मिलियन डॉलर तक की लागत वाली स्वदेशी मिसाइल सप्लाई चेन को जन्म दे सकता है। इससे न सिर्फ रोजगार और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन होगा, बल्कि भारत की लंबी दूरी की एयर डिफेंस नीति को आत्मनिर्भरता भी मिलेगी। आर-37एम की तैनाती के साथ भारतीय वायुसेना की मार करने की क्षमता सैकड़ों किलोमीटर और गहरा हो जाएगा। डिफेंस वेबसाइट का मानना है कि इससे पाकिस्तान की बीवीआर क्षमता की रीढ़ टूट सकती है। और उसे पीएल-21 जैसी अगली पीढ़ी की मिसाइलों की तलाश करने हुए चीन से फिर मदद मांगना पड़ सकता है। इसके अलावा एसयू-30एमकेआई जैसे प्लेटफॉर्म को आर-37एम से लैस करना उसे 4.5 जनरेशन के सुपर पावर प्लेटफॉर्म में बदल देगा, जो वजन, रेंज, पेलोड और सेंसर फ्यूजन के लिहाज से किसी भी आधुनिक लड़ाकू जेट को चुनौती दे सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Jun 2025 11:42:30 +0530</pubDate>
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                <title>सीरिया से बोरिया-बिस्तर समेट रही रूसी सेना, अब लीबिया पर पुतिन की निगाह, बनाएंगे नया मिलिट्री बेस</title>
                                    <description><![CDATA[सीरिया से बशर अल-असद की सत्ता के पतन के बाद रूस ने अपने सैन्य ठिकाने को समेटना शुरू कर दिया है। रूसी सैन्य टुकड़ियां अब अफ्रीका के एक दूसरे देश में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/russian-army-withdrawing-from-syria-now-putins-eyes-on-libya/article-97976"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/5554-(5)3.png" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। सीरिया से बशर अल-असद की सत्ता के पतन के बाद रूस ने अपने सैन्य ठिकाने को समेटना शुरू कर दिया है। रूसी सैन्य टुकड़ियां अब अफ्रीका के एक दूसरे देश में अपनी मौजूदगी बढ़ा रही हैं। जिस देश में रूसी सैन्य उपस्थिति में बढ़ोत्तरी देखी गई है, उसका नाम लीबिया है। लीबिया अफ्रीका का एक देश है, जहां पहले मुअम्मर गद्दाफी का शासन था। गद्दाफी से रूस के संबंध काफी मजबूत थे, लेकिन उनके तख्तापलट और हत्या के बाद हालात एकदम बदल गए। हालांकि, इसके बावजूद रूस ने लीबिया में अपना सैन्य अड्डा बनाए रखा। भले ही रूस लीबिया में एक बड़ा सैन्य अड्डा बनाने की कोशिश कर रहा है, लेकिन इस बात का कोई संकेत नहीं है कि वह सीरिया में अपने दो सैन्य ठिकानों को खाली कर रहा है।</p>
<p><strong>सीरिया में रूसी सैन्य अड्डे से पुतिन को था फायदा</strong></p>
<p>बशर अल-असद ने सीरियाई गृहयुद्ध में सहायता के बदले रूस को मुफ्त में 49 साल की लीज पर दो सैन्य अड्डों को दिया था। दशकों से सीरिया पश्चिम एशिया और अफ्रीका में रूस का कमांड सेंटर रहा है। सीरिया के पश्चिम में टार्टस और लताकिया में अपने दो सैन्य ठिकानों के माध्यम से रूस ने न केवल सीरियाई गृहयुद्ध में बशर अल-असद का समर्थन किया, बल्कि इस क्षेत्र में अपनी खुद की सैन्य उपस्थिति बनाए रखी। टार्टस नौसैनिक अड्डे ने नाटो के दक्षिणी किनारे पर रूस की सैन्य मौजूदगी को बनाए रखा और काला सागर और भूमध्य सागर के माध्यम से पश्चिम एशिया और यूक्रेन के मोर्चे के बीच एक संबंध भी स्थापित किया। चूंकि रूस ने सीरिया से अपने सैनिकों और सैन्य उपकरणों को वापस लेना शुरू कर दिया है, ऐसे संकेत हैं कि रूस इस क्षेत्र में एक नए केंद्र के रूप में लीबिया की ओर देख रहा है। रूस सीरिया में असद के शासन के दौरान जो पकड़ रखता था, उसे फिर से नहीं बना सकता। हालांकि अगर वह लीबिया में बंदरगाह या एक बड़ा सैन्य अड्डा हासिल कर लेता है, तो वह नुकसान की भरपाई कर सकता है।</p>
<p><strong>असद की हार रूस के लिए बड़ा झटका</strong><br />सीरिया में भले ही असद की हार हुई हो, लेकिन नुकसान मूल रूप से रूस का हुआ है। इसका कारण यह है कि 2015 में शुरू हुए सीरियाई गृहयुद्ध में रूसी सैन्य हस्तक्षेप ने असद के शासन को सहारा दिया था। यूक्रेन में ध्यान भटकने के कारण असद की स्थिति को मजबूत करने की रूस की क्षमता कम हो गई। सीरिया का दूसरा प्रमुख सहयोगी ईरान भी मदद करने में असमर्थ था। ऐसे में हयात तहरीर अल-शाम के नेतृत्व वाली विपक्षी ताकतों ने इस अवसर का लाभ उठाया। डिफेंस वेबसाइट द वॉरजोन के अनुसार, अब इस बात के सबूत बढ़ रहे हैं कि लीबिया, सीरिया से रूसी सैन्य वापसी का समर्थन कर रहा है। </p>
<p>ळहे ने बताया कि रूस ने टार्टस में नौसैनिक अड्डे से कम से कम कुछ रूसी नौसैनिक संपत्ति को लीबिया में स्थानांतरित कर दिया है। यह घटनाक्रम ऐसी खबरों के बीच हुआ है कि रूस लीबियाई राष्ट्रीय सेना के प्रमुख खलीफा हफ्तार को लीबिया के शहर बेंगाजी में रूस को एक बंदरगाह सौंपने के लिए मनाने की कोशिश कर रहा है।</p>
<p><strong>सीरिया में नुकसान की भरपाई करेगा रूस</strong><br />सैन्य विशेषज्ञ थॉमस न्यूडिक का मानना है कि रूस के लिए ऐसा करना उचित होगा क्योंकि यह टार्टस में बंदरगाह के नुकसान की भरपाई करेगा। यदि रूस बंदरगाह हासिल करने में सफल हो जाता है, तो लीबिया रूसी सेना के लिए भूमध्य सागर तक पहुंच प्रदान करने और अफ्रीका में अन्य रूसी हितों के लिए एक ट्रांसशिपमेंट पॉइंट के रूप में एक वैकल्पिक केंद्र बन सकता है। कम से कम एक सीरियाई कैंडिड कार्गो विमान ने सीरिया और लीबिया और अफ्रीका के अन्य स्थानों के बीच बार-बार उड़ान भरी है, जिससे पता चलता है कि रूस इन स्थानों पर उपकरण और कर्मियों को ट्रांसफर कर रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 18 Dec 2024 12:00:09 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>यूक्रेन में रूसी सेना के युद्ध अपराध पर जल्द जारी होगी किताब: जेलेंस्की</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने आगाह किया कि  नागरिकों के लिए आने वाली सर्दी मुश्किल भरी होगी साथ ही कहा कि  रूसी सेना के यूक्रेन में किये गये अपराधों को एक दस्तावेज 'बुक ऑफ टॉर्चर्स के रूप में जल्द ही जारी किया जायेगा यूक्रेन में रूसी सेना के युद्ध अपराध पर जल्द जारी होगी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/book-on-russian-militarys-war-crimes-in-ukraine-to-be/article-11662"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/zelensky-.jpg" alt=""></a><br /><p></p>
<p class="MsoNormal"><strong><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">कीव।</span></strong> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">यूक्रेन के राष्ट्रपति वलोदिमिर जेलेंस्की ने आगाह किया कि<span>  </span>नागरिकों के लिए आने वाली सर्दी मुश्किल भरी होगी साथ ही कहा कि<span>  </span>रूसी सेना के यूक्रेन में किये गये अपराधों को एक दस्तावेज </span>'<span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">बुक ऑफ टॉर्चर्स</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">के रूप में जल्द ही जारी किया जायेगा </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">यूक्रेन में रूसी सेना के युद्ध अपराध पर जल्द जारी होगी किताब जेलेंस्की</span> </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">यूक्रेन में रूसी सेना के युद्ध अपराध पर जल्द जारी होगी किताब: जेलेंस्की </span><span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi"> राष्ट्रपति ने मंगलवार रात को वीडियो के माध्यम से संबोधन करते हुए कहा</span>, <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">रूस के यूक्रेन पर हमला करने के कारण हालिया स्थिति में यह स्वतंत्रता के बाद की सबसे कठिन सर्दी होने वाली है।</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">उन्होंने आगे कहा कि सरकारी अधिकारियों और राज्य के स्वामित्व वाली ऊर्जा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ आने वाली सर्दी के सीजन की तैयारी के लिए एक मुख्यालय स्थापित करने के लिए चर्चा की गयी है। सीएनएन ने यह रिपोर्ट किया। उन्होंने जोर देकर कहा कि सर्दी के मौसम में कोयले के संचय और बिजली उत्पादन के लिए गैस खरीदने की समस्या है। इस समय हम विदेश में अपनी गैस और कोयले को नहीं बेचेंगे। सभी घरेलू उत्पाद को हमारे नागरिकों के उपयोग के लिए रखा जायेगा। उन्होंने उद्धृत करते हुए कहा कि वह रूसी हमलों से क्षतिग्रस्त या नष्ट हुए ताप और बिजली संयंत्रों की मरम्मत करने की भी योजना बना रहे हैं। आगामी महीनों में इस कार्यक्रम को लागू करने का काम यूक्रेन के ऊर्जा मंत्रालय के शीर्ष<span>  </span>काम में से एक है।</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">सीएनएन ने राष्ट्रपति के हवाले से कहा कि यूक्रेन में युद्ध अपराधियों और रूसी सेना के अपराधियों का दस्तावेजीकरण करने वाली एक पुस्तक </span>'' <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">बुक ऑफ टॉर्चर</span> <span lang="hi" style="font-size:10pt;line-height:115%;font-family:Mangal;" xml:lang="hi">जारी की जायेगी।</span></p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 08 Jun 2022 16:41:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन के ब्रह्मास्त्र से धुआं-धुआं हुआ रूस का एक और युद्धपोत</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन के स्कूल पर मिसाइल हमला 60 लोगों के मरने की आशंका]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/another-russian-warship-caused-smoke-from-ukraine-s-brahmastra/article-9413"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/youk.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। रूस-यूक्रेन युद्ध पिछले 74 दिनों से जारी है। इस बीच यूक्रेन ने दावा किया है कि उसने काला सागर में रूस के एक और युद्धपोत को नष्ट कर दिया है। यूक्रेनी सेना ने इस घटना का एक थर्मल ड्रोन वीडियो भी जारी किया है, जिसमें एक युद्धपोत पर विस्फोट होता दिखाई दे रहा है। यूक्रेन का दावा है कि उसने स्नेक आइलैंड के पास एक नए रूसी लैंडिंग क्राफ्ट को नष्ट कर दिया है। इस युद्धपोत को तुर्की से खरीदे गए बायरकटार टीबी2 ड्रोन से दागी गई मिसाइल से नष्ट किया गया है। एक सशस्त्र बायरकटार ड्रोन ने ओडेसा के यूक्रेनी बंदरगाह से 80 मील दक्षिण में स्थित द्वीप पर एक रूसी मिसाइल डिफेंस सिस्टम को भी नष्ट कर दिया।<br /><br /><strong>सैटेलाइट तस्वीर ने भी की पुष्टि</strong><br />अमेरिका की पब्लिक अर्थ इमेजिंग कंपनी प्लैनेट लैब्स की शनिवार तड़के ली गई सैटेलाइट इमेज से पता चला कि स्नेक आइलैंड के उत्तरी समुद्र तट के पास सेर्ना-क्लास लैंडिंग जहाज दिखाई दे रहा है। यह यूक्रेनी सेना के जारी किए गए वीडियो से मेल खाता है। जहाज पर आग लगने से मची तबाही साफ नजर आ रही है। हालांकि रूस की तरफ से इस हमले के दावे को लेकर अभी तक कोई भी बयान जारी नहीं किया गया है।<br /><br /><strong>यूक्रेन के स्कूल पर मिसाइल हमला 60 लोगों के मरने की आशंका</strong><br />कीव। यूक्रेन के लुहान्स्क क्षेत्र में एक स्कूल पर हुए मिसाइल हमले में कम से कम 60 लोगों के मारे जाने की आशंका है। मीडिया रिपोर्ट में रविवार को यह जानकारी सामने आई है। एक अधिकारी ने कहा कि एक स्कूल में शनिवार को हवाई हमला हुआ, जहां 90 लोगों ने शरण ली थी। लुहान्स्क क्षेत्रीय सैन्य प्रशासन के प्रमुख सेरही हेयडे ने टेलीग्राम पर रविवार को कहा कि स्कूल से 30 लोगों को बचाया गया है, जिनमें सात घायल भी शामिल हैं। उन्होंने कहा कि मलबे में से दो शव भी बरामद हुए हैं। सीएनएन ने हेयडे के हवाले से कहा कि ऐसी संभावना जताई जा रही है कि स्कूल की इमारत के मलबे में दबे सभी 60 लोगों की मौत हो गयी है। सीएनएन के अनुसार रूसी विमान ने बिलोहोरिवका गांव में स्कूल पर बम बरसाया थे, जिससे इमारत में आग लग गयी। आग पर काबू पाने में अग्निशमन कर्मियों को करीब चार घंटे का समय लगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 14:28:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी सेना अब काफी कमजोर: ब्रिटेन</title>
                                    <description><![CDATA[ ब्रिटेन सरकार ने दावा किया कि भविष्य में पारंपरिक सैन्य बल को तैनात करने की रूस की क्षमता प्रभावित होगी। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/russian-army-now-very-weak--uk/article-9094"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/russian-army.jpg" alt=""></a><br /><p>लंदन। ब्रिटेन के रक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को दावा किया कि यूक्रेन पर आक्रमण के परिणामस्वरूप रूस की सेना अब भौतिक और वैचारिक रूप से काफी कमजोर हो चुकी है। ब्रिटेन सरकार ने दावा किया कि भविष्य में पारंपरिक सैन्य बल को तैनात करने की रूस की क्षमता प्रभावित होगी। उसने कहा कि रूस की सेना यूक्रेन पर आक्रमण के परिणामस्वरूप अब भौतिक और वैचारिक दोनों रूप से काफी कमजोर हो गयी है। प्रतिबंधों के कारण रूस इससे आसानी से नहीं उबर सकेगा। इसका पारंपरिक सैन्य बल तैनात करने की रूस की क्षमता पर भी दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा।<br /><br />उसने कहा कि 2005 और 2018 के बीच रूस का रक्षा बजट लगभग दोगुना हो गया है। ब्रितानी रक्षा मंत्रालय ने ट्वीट कर कहा, ''रूस का रक्षा बजट 2005 और 2018 के बीच लगभग दोगुना हो गया है, जिसमें कई उच्च-स्तरीय वायु, भूमि और समुद्री क्षमताओं में निवेश किया गया है। वर्ष 2008 से इसने व्यापक सैन्य आधुनिकीकरण कार्यक्रम 'न्यू लुक'  शुरू किया है।'' ब्रिटेन ने कहा कि रूस तमाम प्रयासों के बावजूद यूक्रेन पर हावी होने में सक्षम नहीं हो सका है।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 03 May 2022 18:39:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>रूसी सैन्य ठिकानों को जाहिर करने के लिए मैप्स नहीं बदले : गूगल</title>
                                    <description><![CDATA[गल मैप्स सेवा में कोई बदलाव नहीं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/didn-t-change-maps-to-reveal-russian-military-bases--google/article-8166"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/google.jpg" alt=""></a><br /><p>मॉस्को। गूगल ने सोमवार को कहा कि उसने रूस के सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को प्रकट करने के लिए अपनी गूगल मैप्स सेवा में कोई बदलाव नहीं किया है। सर्च इंजन कंपनी ने स्पूतनिक से बात करते हुए कहा कि हमने रूस में अपनी उपग्रह तस्वीरों में कोई बदलाव नहीं किया है।<br /><br />द डेली स्टॉर्म ने सोमवार को जारी रिपोर्ट में कहा था कि गूगल मैप्स ने रूसी सैन्य और रणनीतिक ठिकानों को जाहिर कर दिया जबकि अन्य देशों की इसी तरह की जानकारी अभी भी छिपी हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 19 Apr 2022 17:54:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन-रूस युद्ध:  यूक्रेनी महिला सैनिकों को प्रताड़ति कर रही रूसी सेना!</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेनी मानवाधिकार अधिकारी ने दावा किया कि 12 से अधिक यूक्रेनी महिला सैनिक रूसी सेना के कब्जे में है]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/-ukraine-russia-war--russian-army-torturing-ukrainian-women-soldiers/article-7486"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ukraine13.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव।यूक्रन-रूस के बीच युद्ध के बीच कई भयावह तस्वीरें सामने आने लगी है। युद्ध के बीच यूक्रेन ने कहा है कि रूसी सेना से मोर्चा लेने के दौरान पकड़ी गयी यूक्रेनी महिला सैनिकों को प्रताड़ति किया जा रहा है। एक यूक्रेनी मानवाधिकार अधिकारी ने दावा किया कि 12 से अधिक यूक्रेनी महिला सैनिक रूसी सेना के कब्जे में है और रूसी सेना उन्हें प्रताड़ति कर रही है तथा उनके साथ दुव्यर्वहार किया जा रहा है।<br /><br />सूत्रों के अनुसार रूसी सेना ने शुक्रवार को बंदी बनाये गये 86 यूक्रेनी सैनिकों को रिहा किया जिसमें 15 महिला सैनिक भी शामिल थीं। यूक्रेनियन पार्लियामेंट कमिश्नर फॉर ह्यूमन राइट्स लयुडमेला डेनिसोवा ने अपने आधिकारिक टेलीग्राम पेज पर मंगलवार को कहा कि जिन यूक्रेनी महिला सैनिकों को अपने कब्जे में लिया उन्हें पहले बेलारूस और बाद में रूस के ब्रियांस्क में प्री ट्रायल डिटेंशन सेंटर पर ले जाया गया जहां उन्हें धमकाया गया और कई तरह की यातनाएं भी दी गयीं।<br /><br />डेनिसोवा ने दावा किया कि महिला सैनिकों को पुरूषों के सामने निवस्त्र किया गया, उनके बाल काटे गये और उनका मनोबल तोडऩे के लिए इसी अवस्था में पूछताछ भी की गईं। मैं संयुक्त राष्ट्र आयोग ने यूक्रेन में रूसी सेना द्वारा किये जा रहे मानवाधिकार उल्लंघन के मामलों की जांच करने की अपील करता हूं जिसमें ओएससीई के विशेषज्ञों को शामिल किया जाएं जो यूक्रेनी युद्धबंदियों के अधिकारों के रूस द्वारा किये जा रहे उल्लंघन के मामलों को देखे।<br /><br /> मानवाधिकार अधिकारी ने कहा कि यूक्रेनी युद्धबंदियों के साथ रूसी सेना द्वारा मारपीट की जा रही है, उन्हें भूखा रखा जा रहा है वह फ्रॉस्टबाइट से जूझ रहे हैं । पिछले एक सप्ताह तक दोनों देशों के बीच इस मामले में चली लंबी बातचीत के बाद दोनों पक्षों ने 86 कैदियों को दोनों ओर से रिहा किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Apr 2022 15:04:30 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>कम सैलरी, अधूरी ट्रेनिंग, कमजोर मनोबल, रूसी सैनिकों की बगावत का इतिहास पुराना, यूक्रेन में भी नहीं मान रहे ऑर्डर्स</title>
                                    <description><![CDATA[कमजोर मनोबल के साथ कब तक लड़ेंगे रूसी सैनिक?]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/kyiv--moscow--low-salary--incomplete-training--weak-morale--history-of-uprising-of-russian-soldiers-is-old--orders-are-not-being-obeyed-even-in-ukraine/article-7319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/sainik.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव/मॉस्को। हाल के दिनों में ऐसी खबरें आई हैं कि यूक्रेन में आगे बढ़ने से रोक दी गई और कई सैन्य नाकामियों का सामना कर रही रूसी सेना ने अपने खुद के उपकरण नष्ट कर दिए हैं और उसने युद्ध लड़ने और आदेशों का पालन करने से इनकार कर दिया है। एक खबर में यहां तक कहा गया है कि उन्होंने अपने ही कमांडर पर हमला कर दिया। नाटो का अनुमान है कि दो महीने से भी कम वक्त में इस संघर्ष के दौरान करीब 15,000 रूसी सैनिक मारे गए है, जो अफगानिस्तान में नौ वर्षों में मारे गए सोवियत संघ (अब विघटित हो चुके) के सैनिकों के बराबर है। ऐसा बताया जा रहा है कि सैनिकों का मनोबल गिर गया है। ऐसी स्थिति में रूसी सैनिकों के विद्रोह करने की संभावना है। लड़ाई छोड़कर भागने से सेना का शारीरिक और मनोवैज्ञानिक उत्साह कम हो जाएगा, जबकि पाला बदलने या दुश्मन की सेना में शामिल होने से यूक्रेन को मदद मिल सकती है। यह पहली बार नहीं है जब रूसी या सोवियत सैनिकों ने किसी संघर्ष में आदेशों को मानने से इनकार कर दिया है। रूस-जापान युद्ध के दौरान रूसी सैनिकों ने जून 1905 में विद्रोह कर दिया था जो इतिहास की प्रसिद्ध घटनाओं में से एक है।<br /><br /><strong>पहले भी बगावत कर चुके हैं रूसी सैनिक</strong><br />सुशिमा की लड़ाई में रूसी नौसेना का ज्यादातर बेड़ा नष्ट हो गया था और उसके पास कुछ गैर-अनुभव वाले लड़ाके बचे थे। बांसा मांस परोसे जाने समेत काम करने की खराब स्थितियों का सामना कर रहे 700 नाविकों ने अपने अधिकारियों के खिलाफ ही विद्रोह कर दिया था। द्वितीय विश्वयुद्ध में जोसेफ स्टालिन ने आत्मसमर्पण करने की ओर बिल्कुल बर्दाश्त न करने वाली नीति लागू करते हुए सैनिकों के बीच आज्ञाकारिता सुनिश्चित करने की कोशिश की थी। चेचन्या के साथ रूस के पहले संघर्ष (1994-96) में बड़ी संख्या में सैनिक जंग का मैदान छोड़कर भाग गए थे।<br /><br /><strong>कमजोर मनोबल के साथ कब तक लड़ेंगे रूसी सैनिक?</strong><br />युद्ध में पाला बदलना और मैदान छोड़कर भागना आम है। युद्ध की मुश्किलें, लड़ाई में खराब प्रदर्शन और युद्ध की वजह की वैचारिक प्रतिबद्धता के कम होने से सैनिक जंग का मैदान छोड़कर भाग सकते हैं। लेकिन रूसी सैनिक पहले ही मनोबल गिरने और सहयोग न मिलने की स्थिति को महसूस कर रहे हैं। अध्ययन से पता चलता है कि सैनिकों का मनोबल कम है, खासतौर से जिन्हें आधुनिक तकनीक नहीं आती हैं।<br /><br /><strong>अमेरिका की तुलना में 200 फीसदी कम वेतन पाते हैं रूसी सैनिक</strong><br />ऐसी खबरें हैं कि रूसी सेना अपनी संरचना में बदलाव लाने की कोशिश कर रही है लेकिन इसके बावजूद रूस की अपनी सेना ने 2014 में बताया कि उसके 25 प्रतिशत से अधिक कर्मी अपनी इंफेंट्री के उपकरण नहीं चला पाए। हालांकि, राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बदलावों के नतीजन सेना का बजट बढ़ गया लेकिन सैनिकों की तनख्वाह नहीं बढ़ी। अनुबंधित सैनिकों को उनके अमेरिकी समकक्षों के मुकाबले 200 प्रतिशत कम वेतन दिया जाता है।<br /><br /><strong>अपने सैनिकों का दिल नहीं जीत पा रहा रूस</strong><br />इन सभी कारणों से सैनिकों का मनोबल गिरा है और पाला बदलने तथा मैदान छोड़कर भागने की आशंका भी बढ़ी है। इससे निपटने के लिए रूसी जनरल अग्रिम मोर्चे पर जाकर लड़ रहे हैं ताकि सैनिकों को प्रोत्साहित किया जाए। इसके कारण कम से कम सात जनरल की मौत हो गई है, जो द्वितीय विश्वयुद्ध के बाद से रूसी सेना में जनरलों की सबसे अधिक मृत्यु दर है। रूस न केवल यूक्रेन के लोगों के दिल और दिमाग जीतने में नाकाम रहा है, बल्कि अब वह अपने सैनिकों का मन जीतने के लिए संघर्ष करता प्रतीत हो रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 13:09:34 +0530</pubDate>
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                <title>रूस-यूक्रेन में मध्यस्थता कर सकता है भारत</title>
                                    <description><![CDATA[भारत एक महत्वपूर्ण देश: लावरोव]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/india-may-mediate-between-russia-ukraine--russian-foreign-minister-s-visit-to-india-amid-war--india-an-important-country--lavrov/article-7189"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/russia-ukraine-.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। यूक्रेन जंग के बीच भारत दौरे पर पहुंचे रूस के विदेश मंत्री सर्गेई लावरोव ने शुक्रवार को नई दिल्ली में विदेश मंत्री एस जयशंकर से मुलाकात की। मुलाकात के बाद उन्होंने मीडिया से कहा भारत एक महत्वपूर्ण देश है। वो रूस-यूक्रेन विवाद में मध्यस्थता कर सकता है। अगर भारत ऐसी भूमिका निभा सकता है जिसमें वो तार्किक रहते हुए अंतरराष्टÑीय मसलों को सुलझाने के सुझाव दे सके तो हमें भारत की यह भूमिका मंजूर होगी। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि हमारे राष्टÑपति व्लादिमिर पुतिन ने भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को थैंक्यू कहा है।</p>
<p><br />लावरोव ने यूक्रेन मुद्दे पर भारत की तारीफ करते हुए कहा कि भारत बिना किसी दबाव में आए सूझबूझ के साथ आगे बढ़ रहा है। मेरा मानना है कि भारतीय विदेश नीति की खासियत बिना किसी दबाव में आए अपने राष्टÑीय हितों पर ध्यान केंद्रित करना है। रूसी संघ में इसी तरह की नीति है, यह हमें बड़ा देश बनाती है और यही हमें अच्छा और वफादार दोस्त और भागीदार बनाती है।<br /><br /><strong>हम विश्व व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना चाहते हैं</strong><br />रूसी विदेश मंत्री ने आगे कहा कि भारत हमसे जो भी सामान खरीदना चाहता है हम उसे देने के लिए तैयार हैं। भारत और रूस लंबे वक्त से डिफेंस पार्टनरशिप डेवलप करते रहे हैं। हम दोनों ही विश्व व्यवस्था में संतुलन बनाए रखना चाहते हैं।</p>
<p><br /><strong>यूक्रेन में एक स्पेशल ऑपरेशन</strong> <br />यूक्रेन युद्ध को लेकर पूछे गए सवाल पर उन्होंने कहा कि आप इसे युद्ध कह रहे हैं जो कि सच नहीं है। यह एक स्पेशल आॅपरेशन है, जिसमें यूक्रेनी आर्मी के इन्फ्रास्ट्रक्चर को निशाना बनाया जा रहा है। हमारा सिर्फ इतना मकसद है कि आने वाले वक्त में कीव की सरकार रूस के लिए कोई खतरा न बन पाए।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 11:34:42 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>ब्रिटेन का दावा: रूसी सैनिकों ने पुतिन का आदेश मानने से किया इनकार</title>
                                    <description><![CDATA[ फ्लेमिंग के हवाले से कहा कि ब्रिटेन के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र ने यूक्रेन सरकार और सैन्य प्रणालियों को बाधित करने के रूस के निरंतर इरादे को देखा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/britain-s-claim--russian-soldiers-refused-to-obey-putin-s-order/article-7106"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/russia1.jpg" alt=""></a><br /><p>कैनबरा। ब्रिटिश खुफिया प्रमुख जेरेमी फ्लेङ्क्षमग ने गुरुवार को कहा कि कुछ रूसी सैनिकों ने हथियारों और मनोबल की कमी के कारण अपने राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के आदेशों का यूक्रेन में पालन करने से इनकार कर दिया है। ब्रिटिश खुफिया एजेंसी जीसीएचक्यू फ्लेमिंग ने कैनबरा में कहा कि ऐसा लगता है कि  पुतिन ने स्थिति का बड़े पैमाने पर गलत आकलन किया है। यह स्पष्ट है कि उन्होंने यूक्रेन के लोगों के प्रतिरोध को गलत आकलन किया।<br /><br />उन्होंने कहा कि हमने रूसी सैनिकों को हथियारों और मनोबल की कमी के कारण  आदेशों को पूरा करने से इनकार करते हुए, अपने स्वयं के उपकरणों में तोडफ़ोड़ करते हुए और यहां तक कि गलती से स्वयं के विमानों को मार गिराते हुए देखा है। उन्होंने कहा कि भले ही हम मानते हैं कि पुतिन के सलाहकार उन्हें सच बताने से डरते हैं। क्या हो रहा है और इन गलत निर्णयों की सीमा शासन के लिए स्पष्ट होनी चाहिए। </p>
<p> फ्लेमिंग के हवाले से कहा कि ब्रिटेन के राष्ट्रीय साइबर सुरक्षा केंद्र ने यूक्रेन सरकार और सैन्य प्रणालियों को बाधित करने के रूस के निरंतर इरादे को देखा है। साथ ही उन संकेतकों को देखा है कि रूस के साइबर अभिनेता क्रेमलिन के कार्यों का विरोध करने वाले देशों में लक्ष्य की तलाश कर रहे हैं। उन्होंने वैगनर समूह सहित यूक्रेन में भाड़े के सैनिकों और विदेशी लड़ाकों का उपयोग करने वाले रूस को लेकर कहा,'' समूह रूसी सेना की छाया शाखा के रूप में काम करता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 18:43:01 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यूक्रेन का दावा: कीव और चेर्निहाइव से रूसी सैनिकों की वापसी केवल 'व्यक्तिगत इकाइयों का रोटेशन' </title>
                                    <description><![CDATA[इसका उद्देश्य यूक्रेन के 'सैन्य नेतृत्व को गुमराह करना' है: यूक्रेन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/ukraine-claims--withdrawal-of-russian-troops-from-kyiv-and-chernihiv-only--rotation-of-individual-units/article-7033"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/russia-ukraine.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन और रूस के युद्ध के बीच चर्चा है कि यूक्रेन के राष्ट्रपति वोलोडिमीर जेलेंस्की और  रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन के बीच मुलाकात हो सकती है। लेकिन इस बीच दोनों देशों की तकरार भी देखी जा रही है। यूक्रेन के सशस्त्र बलों के जनरल स्टाफ ने बुधवार को कहा कि कीव और चेर्निहाइव से रूसी सैनिकों की वापसी केवल 'व्यक्तिगत इकाइयों का रोटेशन' है और इसका उद्देश्य यूक्रेन के 'सैन्य नेतृत्व को गुमराह करना' है। उन्होंने कहा कि कुछ ऐसे संकेत मिले है कि रूसी दुश्मन पूर्व में अपने मुख्य प्रयासों की ओर ध्यान केंद्रित करने के लिए इकाइयों को फिर से संगठित कर रहा है।<br /><br />उन्होंने कहा कि इस समय तथाकथित 'सैनिकों की वापसी' शायद व्यक्तिगत इकाइयों का रोटेशन है और इसका उद्देश्य यूक्रेन के सशस्त्र बलों के सैन्य नेतृत्व को गुमराह कर कब्जा करने वालों के बारे में गलत धारणा पैदा करना है जो कीव शहर को घेरने की योजना से इनकार करते हैं। मंगलवार को रूसी उप रक्षा मंत्री अलेक्जेंडर फोमिन ने कहा कि रूस यूक्रेन की राजधानी कीव के आसपास अपनी सैन्य कार्रवाई में भारी कटौती करेगा क्योंकि दोनों पक्ष तुर्की में शांति (एजेंसी) के लिए मिले है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Mar 2022 18:15:26 +0530</pubDate>
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