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                <title>तीन धर्मों के 3 बड़े जमघट : कुंभ, हज और वैटिकन मास</title>
                                    <description><![CDATA[धर्म और आस्था की डोरी सदियों से मानवों को अपनी ओर खींचती आई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/3-big-gatherings-of-three-religions-kumbh-hajj-and-vatican/article-100802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/5554-(7)6.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। धर्म और आस्था की डोरी सदियों से मानवों को अपनी ओर खींचती आई है। धर्म का भाव, मुक्ति की कामना लाखों लोगों को एक सूत्र में पिरोती है। इसलिए ऐसी गतिविधियों में मनुष्य बिना बुलाये ही भारी संख्या में जमा हो जाता है। दुनिया में हर स्थान पर धार्मिक क्रियाओं के लिए हर कोने में एक निश्चित जगह पर लाखों-करोड़ों लोग जमा होते हैं। सनातन, इस्लाम, ईसाइयत हर धर्म के लोग अपनी परंपरा को मनाने के लिए एक निश्चित स्थान पर जमा होते हैं। मान्यता है कि सनातन में कुंभ की परंपरा लगभग 2500 साल से ज्यादा समय से चलती आ रही है, इस्लाम के मानने वाले लगभग 1400 सालों से हज पर जाते रहे हैं जबकि क्रिश्चयन समुदाय के लोग 1700 सालों से ईस्टर संडे मनाते आ रहे हैं। वेटिकन मास का आयोजन भी सालों से होता आ रहा है।</p>
<p><strong>महाकुंभ :</strong></p>
<p>कुंभ की चर्चा वेदों में तो हैं बावजूद इसके इस वृहद धार्मिक आयोजन के शुरू होने की कोई तारीख स्पष्ट नहीं है। लेकिन आज के स्टैंडर्ड के लिहाज से ये पृथ्वी पर सबसे बड़ा धार्मिक आयोजन है। कुंभ मेला हर 12 साल में एक बार आयोजित किया जाता है। हिन्दुओं को विश्वास है कि विशेष तिथियों में गंगा, यमुना और सरस्वती (अदृश्य) के संगम में स्नान से मनुष्य जन्म और मृत्यु के चक्र से मुक्त होता है। कुंभ का आयोजन भारत के चार धार्मिक शहरों में बारी बारी से होता है ये शहर हैं प्रयागराज, हरिद्वार, उज्जैन और नासिक। कुंभ के दौरान अखाड़ों से जुड़े संतों का स्नान कुंभ का मुख्य आकर्षण होता है। </p>
<p><strong>महाकुंभ को लेकर सरकार की तैयारियां :</strong></p>
<p>महाकुंभ का प्रबंधन उत्तर प्रदेश सरकार की जिम्मेदारी है। इस बार के महाकुंभ के सफल संचालन के लिए यूपी की योगी सरकार ने व्यापक इंतजाम किए हैं। इस बार का प्रयागराज का महाकुंभ मेला करीब 4000 हेक्टेयर भूमि पर फैला है और इसे 25 सेक्टरों में बांटा गया है। यूपी सरकार ने महाकुंभ मेला परिक्षेत्र को राज्य का 76वां जिला घोषित किया है। महाकुंभ के लिए प्रशासन ने संगम तट पर कुल 41 घाट तैयार किए हैं। इनमें 10 पक्के घाट हैं, जबकि बाकी 31 घाट अस्थायी हैं। संगम घाट प्रयागराज का सबसे प्रमुख और महत्वपूर्ण घाट है।</p>
<p><strong>आंकड़ों में महाकुंभ :</strong></p>
<p>महाकुंभ में करीब 45 करोड़ श्रद्धालुओं के आने की उम्मीद है। इस समागम में दुनिया के हर कोने से श्रद्धालु भारत पहुंच रहे हैं। उत्तर प्रदेश सरकार को अनुमान है कि महाकुंभ से प्रदेश में बड़े पैमाने पर आर्थिक गतिविधियां भी पैदा होंगी। राज्य सरकार ने इस महाकुंभ के आयोजन के लिए लगभग 7,000 करोड़ रुपये से ज्यादा का बजट आवंटित किया है। राज्य सरकार के एक आकलन के अनुसार 25,000 करोड़ रुपए का योगदान दे सकता है। इसके परिणामस्वरूप 2 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ हो सकता है। सरकार का मानना है कि अगर यहां आने वाला हर आदमी कम से कम 5000 रुपए भी खर्च करता है तो इससे 2 लाख करोड़ रुपए का आर्थिक लाभ होगा।</p>
<p><strong>हज :</strong></p>
<p>हज इस्लाम के पांच स्तंभों में से एक है। हर साल, दुनिया भर से लाखों मुसलमान हज करने के लिए सऊदी अरब के मक्का में इकट्ठा होते हैं। हज इस्लामिक कैलेंडर के 12वें महीने, धू अल-हिज्जा में मनाया जाता है। ये धार्मिक गतिविधि आमतौर पर साल के किसी भी महीने में हो सकती है, इसकी तिथियां हर साल बदलती रहती हैं क्योंकि इस्लामिक कैलेंडर चंद्रमा से संचालित कैलेंडर है। साल 628 में ये यात्रा शुरू हुई थी। यानी कि आज से 1400 साल पहले। ये यात्रा ही इस्लाम की पहली तीर्थयात्रा बनी जिसे बाद में हज कहा गया। हज में पांच दिन लगते हैं और ये बकरीद यानी ईद उल अदहा के साथ पूरी होती है। 2022 में 40 लाख मुस्लिम जबकि 2024 में 1 करोड़ 30 लाख पहुंचे।</p>
<p><strong>हर साल 12 अरब डॉलर का बिजनेस :</strong></p>
<p>आंकड़ों के अनुसार सऊदी अरब हर साल हज के जरिए 12 अरब डॉलर का बिजनेस जेनेरेट करता है। एक रिपोर्ट के अनुसार सऊदी अरब हज से प्रति वर्ष औसतन 10-15 बिलियन डॉलर कमाता है और उमरा करने वाले 8 मिलियन यात्रियों से 4-5 बिलियन डॉलर कमाता है। कोरोना से पहले 2019 में हज और उमरा से सउदी अरब को 12 बिलियन डॉलर की कमाई हुई थी। सऊदी सरकार का लक्ष्य 2030 तक हर साल 30 मिलियन यानी कि 3 करोड़ मुस्लिम जायरीनों को सऊदी लाया जा सके। बीबीसी की 2017 की रिपोर्ट के अनुसार हज के लिए इंडोनेशिया का कोटा सबसे ज्यादा है। यहां से 2,20,000 लोग हर साल हज के लिए सऊदी जा सकते हैं। हज के कोटे का ये 14 फीसदी हिस्सा है। इसके बाद पाकिस्तान (11 फीसदी), भारत (11 फीसदी) और बांग्लादेश (8 फीसदी) की बारी आती है। इस लिस्ट में नाइजीरिया, ईरान, तुर्की, मिस्र जैसे देश भी शामिल हैं। </p>
<p><strong>वैटिकन मास :</strong></p>
<p>वैटिकन दुनिया भर के लाखों इसाइयों के लिए तीर्थस्थल है। यहां स्थित सेंट पीटर बेसिलिका अदभुत चर्च है। यहां आयोजित होने वाली रोजाना की प्रार्थना सदियों पुरानी परंपराओं में डूबने और वैश्विक समुदाय में शामिल होने का मौका देते हैं। सेंट पीटर बेसिलिका में प्रतिदिन मास यानी कि प्रार्थना होती है। यहां शामिल होने के लिए कोई चार्ज नहीं लगता है, लेकिन इसके लिए बुकिंग जरूर करानी पड़ती है। वैटिकन में सप्ताह के दिनों में कम से कम पांच प्रार्थनाएं होती है और सप्ताह के अंत में इससे भी ज्यादा। इसलिए यहां शामिल होने के कई मौके हैं। यहां होने वाली प्रार्थनाएं इतालवी भाषा में होती हैं।</p>
<p><strong>सेंट पीटर्स बेसिलिका :</strong></p>
<p>धार्मिक कैलेंडर के अनुसार अधिकांश पापल मास यानी कि प्रार्थनाएं यहीं होती है। इसमें बड़ी संख्या में लोग शामिल हो सकते हैं। इसकी क्षमता 15000 से ज्यादा लोगों को समाहित करने की है। इसाइयों के धर्म गुरु पोप फ्रांसिस यही इसाई मतों के लोगों के साथ संवाद करते हैं। </p>
<p><strong>सेंट पीटर्स स्क्वायर :</strong></p>
<p>वैटिकन में बड़े आयोजनों के लिए या जब ज्यादा लोग आते हैं तो ये प्रार्थनाएं सेंट पीटर्स स्क्वायर में आयोजित की जाती हैं। यह विशाल क्षेत्र 80,000 तक की क्षमता वाले लोगों की एक बड़ी संख्या की मेजबानी कर सकता है। हर साल 25 दिसंबर यानी कि बड़ा दिन पर यहां भारी भीड़ उमड़ती है। इस दिन की प्रार्थना को खास माना जाता है।</p>
<p><strong>क्या है पीटर्स पेंस :</strong></p>
<p>वैटिकन में पहुंचने वाले दुनिया भर के ईसाई दान में जो पैसे देते हैं उसे पीटर्स पेंस कहा जाता है। ये वैटिकन और रोमन चर्च की कमाई का बड़ा हिस्सा है। एक सिटी के अनुसार वैटिकन सिटी में हर साल करीब 50 लाख श्रद्धालु आते हैं। हालांकि कोरोना महामारी से पहले यह संख्या करीब 70 लाख थी।  </p>
<p><strong>ईस्टर संडे :</strong></p>
<p>इजरायल की राजधानी येरुशलम इसाइयों का सबसे प्रसिद्ध स्थल है। हर साल ईस्टर पर लाखों लोग जमा होते हैं। इस दिन ईसा मसीह को सूली पर लटकाये जाने के बाद फिर से जीवित हो उठने के याद में मनाया जाता है। यरूशलम में ईस्टर वीक के दौरान श्रद्धालु उसी रास्ते पर चलते हैं जिस पर जीसस क्राइस्ट चले थे। इसे मनाने की परंपरा करीब 1700 साल पहले शुरू हुई थी। दुनिया भर शहर का ईसाई समुदाय, जिसमें ऑर्थोडॉक्स, कैथोलिक और प्रोटेस्टेंट संप्रदाय शामिल हैं, ईसा मसीह को याद  करने के लिए एक साथ आते हैं। इस साल 20 अप्रैल को ये त्योहार मनाया जाएगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Jan 2025 12:06:35 +0530</pubDate>
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                <title>सड़कों पर मवेशियों का हुडदंग, संकट में बच्चों की जान</title>
                                    <description><![CDATA[निगम में शिकायतों का अम्बार लगा लेकिन सड़कों से आवारा मवेशी नहीं हट सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cattle-clash-on-the-roads--lives-of-children-in-danger/article-55265"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/sadako-pr-maveshiyo-ka-huddang,-sankat-me-bachho-ki-jaan...kota-news-23-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। विज्ञान नगर छत्रपुरा तालाब की मुख्य सड़क पर स्कूली बच्चों की जान जोखिम में रहती है। डेढ़ किमी लम्बी सड़क पर 4 स्कूल, 2 मदरसे और 2 धार्मिक स्थल हैं। घड़ी के कांटे दोपहर 12 से 2 के बीच पहुंचते ही स्कूल संचालक और अभिभावकों की धड़कनें तेज हो जाती है। अनहोनी के डर से माथे पर चिंता की लकीरें उभर आती है। वहीं, जनप्रतिनिधियों व निगम अधिकारियों के  रवैये से बाशिंदों में नाराजगी है। पार्षदों की निष्क्रियता से चार वार्डों को जोड़ती सड़क आवारा मवेशियों का अड्ढ़ा बन गई। बच्चों के घर से स्कूल-आने जाने के दौरान हादसे का डर लगा रहता है। निगम में शिकायतों का अम्बार लगा लेकिन सड़कों से आवारा मवेशी नहीं हट सके।  </p>
<p><strong>4 वार्डों की सीमा फिर भी मवेशियों का जमावड़ा  </strong><br />छात्रपुरा तालाब निवासी मोहम्मद हनीफ, जगदीश प्रजापति ने बताया कि ईएसआई हॉस्पिटल स्थित लिंक रोड से मस्जिद चौराहे तक छत्रपुरा तालाब रोड डेढ़ किमी लम्बा है, यह सड़क वार्ड 40, 41, 57 और 39 की सीमा है। रोड के आमने-सामने की कॉलोनी इन चार वार्डों में बंटी हैं। जिनके बाशिंदों ने अपने पार्षदों को  शिकायत दी लेकिन ध्यान नहीं दिया। हालांकि, वार्ड 41 के पार्षद ने आयुक्त व जिला कलक्टर को ज्ञापन देकर समाधान की गुहार लगाई फिर भी कार्रवाई नहीं हुई। </p>
<p><strong>सड़कों पर धमाचौकड़ी, 12 बच्चे जख्मी </strong><br />छत्रपुरा तालाब मुख्य सड़क पर दो दर्जन से अधिक मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जो दिनभर धमाचौकड़ी मचाते हैं। यहां से गुजरने के दौरान कई वाहन चालक मवेशियों से टकराकर चोटिल हो चुके हैं। वहीं, बच्चोें के स्कूल से घर लौटते समय हादसे का डर रहता है। पूर्व में मवेशियों की टक्कर से 10 से 12  बच्चे जख्मी हो चुके हैं।  </p>
<p><strong>वाहन चालक व स्टूडेंट्स हो चुके चोटिल</strong><br />स्थानीय निवासी शमशेर, ब्रजबिहारी, महेंद्र, मनोज सैनी ने बताया कि स्कूलों के बाहर ही आवारा मवेशियों का झुंड़ लगा रहता है। सात दिन पहले ही महात्मा गांधी पार्क के पास मवेशी की टक्कर से बाइक सवार जख्मी हो गया। वहीं, गत माह मस्जिद रोड पर स्कूल जाते समय सांड ने दो बच्चों को चोटिल कर दिया। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं वार्ड पार्षद</strong><br />क्षेत्रवासियों की शिकायत पर मवेशियों को पकड़ने के लिए गाड़ी बुलाते हैं लेकिन मवेशी मिलते ही नहीं। अब फिर से गोशाला चेयरमैन से आग्रह कर समाधान करवाएंगे। <br /><strong>- कपिल शर्मा, पार्षद, वार्ड 57</strong></p>
<p>छत्रपुरा तालाब मार्ग पर मवेशियों की समस्या को लेकर  वार्ड वासियों के साथ निगम कार्यालय पर धरना-प्रदर्शन करेंगे। वहीं, सड़क पर चारा डालने वालों की पहचान कर उनके खिलाफ निगम द्वारा नियमानुसार कार्रवाई करवाएंगे। <br /><strong>- साहिब हुसैन, पार्षद वार्ड 41</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं स्कूल संचालक</strong><br />निगम में कमीशन का खेल छत्रपुरा तालाब मुख्य मार्ग पर आवारा मवेशी ज्वलंत समस्या है। दिनरात सड़कों पर दौड़ते-लड़ते रहते हैं। कई बार विद्यार्थी जख्मी हो चुके हैं। स्कूल व घरों के बाहर खड़े वाहनों को टक्कर मारकर क्षतिग्रस्त कर दिया। सड़क के आमने-सामने के वार्ड 41 व 57 दोनों पार्षदों से शिकायत की लेकिन उन्होंने निगम अधिकारियों द्वारा सुनवाई न करने का हवाला देकर लाचारी दिखाते हैं। अधिकारी भी बिना मौका मुआयना किए कैटल केप्चर वाहनों के बिल पास कर रहे हैं।  <br /><strong>- अजिम पठान, स्कूल संचालक, वार्ड 41 </strong></p>
<p><strong>बच्चे हो गए जख्मी</strong><br />हाल ही में स्कूल की छुट्टी होने पर एक स्टूडेंट्स घर जा रहा था, तभी मस्जिद चौराहे पर दौड़ते हुए सांड ने टक्कर मारकर घायल कर दिया। लोग सड़कों पर चारा डालते हैं। जिसकी वजह से मवेशी आपस में लड़ते हैं, धमाचौकड़ी मचाते हैं। वाहन चालकों व राहगीरों को दुकानों में घुसकर जान बचानी पड़ती है। पिछले साल भी आठ से दस बच्चे मवेशियों के कारण चोटिल हो चुके हैं। <br /><strong>- मोहन सैनी, स्कूल संचालक, वार्ड 39</strong></p>
<p>मेरे वार्ड से अब तक पांच-छह बार मवेशियों को पकड़वा चुका हूं।  यूडीएच मंत्री ने शहर को कैटल फ्री करने के लिए देवनारायण योजना में गौशाला बनाई और चारे-पानी की व्यवस्था भी कर रखी है। इसके बावजूद अधिकारियों की लापरवाही से शहर कैटल फ्री नहीं हो पा रहा। वहीं, गोशाला अध्यक्ष की जिम्मेदारी है कि वे शहर के अंदरूनी इलाकों को कैटल फ्री करवाएं।  <br /><strong>- गफ्फार अंसारी, पार्षद, वार्ड 40 दक्षिण</strong></p>
<p>वार्ड में आवारा मवेशियों की समस्या है, शिकायत मिलने पर मवेशियों को पकड़ने के लिए गाड़ी बुलवाते हैं। वार्डवासियों को भी जागरूक होने की जरूरत है। स्कूलों के आसपास मवेशियों का झुंड रहता है तो हमें सूचना दें, हम मवेशी पकड़वाएंगे।<br /><strong>-मनोज गुप्ता, पार्षद, वार्ड 39 दक्षिण</strong></p>
<p>मवेशियों को पकड़ने में सबसे बड़ी समस्या सुरक्षा इंतजामों का अभाव है। आवारा मवेशी पकड़ने के दौरान कर्मचारियों के साथ तीन-चार बार मारपीट हो चुकी है। पशुपालक उनसे अभद्रता व हाथापाई कर गाड़ी में बंद दूसरे मवेशियों को भी छुड़ा लेते हैं। मैंने दक्षिण निगम आयुक्त को लिखित में पत्र देकर सुरक्षा जाब्ता उपलब्ध करवाने की मांग की है लेकिन अब तक नहीं मिला। ऐसे में कर्मचारियों ने भी हाथ खड़े कर दिए हैं। पूर्व में बरसात के समय शहरी सीमा पर नाकाबंदी करवाई जाती थी लेकिन इस बार तो करवाई ही नहीं। <br /><strong>-जितेंद्र सिंह, चेयरमैन, गोशाला समिति नगर निगम दक्षिण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Aug 2023 11:50:10 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 44 : सांझ ढलते ही जम जाती है स्मैक्चियों की महफिल</title>
                                    <description><![CDATA[शहर को स्मार्ट बनाने में भले ही यूडीएच मंत्री पूरी ताकत झौंके हुए है लेकिन नगर निगम उनकी मेहनत पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। वार्डों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं।  कोटड़ी तिलक नगर स्थित समाज कल्याण विभाग के कन्या छात्रावास व नगर निगम कॉलोनी में स्मैक्चियोंं व समाज कंटकों का जमावड़ा लगा होने से कोटा दक्षिण के वार्ड 44 के बाशिंदे परेशान हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-44--the-gathering-of-smackchie-freezes-at-dusk/article-18964"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/ward-44-sanjh-dhalte-hi-jam-jaati-hai-....kota-news-13.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्मार्ट सिटी परियोजना के तहत शहर में करोड़ों की लागत से विकास कार्य करवाए जा रहे हैं। जिसकी झलक कोटा की पहचान बने ऐतिहासिक धरोवर, चौराहों पर बने स्टेच्यू, नवनिर्मित फलाईओवर व अंडरपास के सौंदर्यीकरण में नजर आती है। बाहर से शहर मेटोसिटी का एहसास कराता है लेकिन अंदरूनी इलाकों की हालात देख समझ धोखा खा जाती है। शहर को स्मार्ट बनाने में भले ही यूडीएच मंत्री पूरी ताकत झौंके हुए है लेकिन नगर निगम उनकी मेहनत पर पानी फेरने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा। वार्डों में आज भी लोग मूलभूत सुविधाओं को तरस रहे हैं। वहीं, कोटड़ी तिलक नगर स्थित समाज कल्याण विभाग के कन्या छात्रावास व नगर निगम कॉलोनी में स्मेक्चियों व समाज कंटकों का जमावड़ा लगा होने से कोटा दक्षिण के वार्ड 44 के बाशिंदे परेशान हैं। खुले आम नशीली सामग्री बिक रही कोटड़ी स्थित नगर निगम कॉलोनी व समाज कल्याण विभाग के कन्या छात्रावास के सामने शाम पड़ते ही स्मेक्चियों का जमावड़ा लगना शुरू हो जाता है। वहीं खुलेआम नशा सामग्री खरीदी-बेची जाती है। मोहल्लेवासियों ने कई बार इन्हें भगाने की कोशिश भी की लेकिन ये अभद्रता पर उतारू हो जाते हैं। इलाके के लोगों ने पार्षद व पुलिस को भी इसकी शिकायत की लेकिन कोई ध्यान नहीं देता। वहीं, क्षेत्र की सभी सड़कें उधड़ी पड़ी है। बरसात में पानी जमा होने से दिखाई नहीं देते और यहां से गुजरने के दौरान राहगीर हादसे का शिकार हो जाते हैं। हाल ही में एक सप्ताह में करीब एक दर्जन से अधिक लोग क्षतिग्रस्त सड़कों के कारण चोटिल हो चुके हैं। - मोहसीन खान, नगर निगम कॉलोनी निवासी पानी के लिए रहती है मारामारी कुछ दिनों पूर्व नगर निगम कॉलोनी के पास पानी की पाइप लाइन फूट गई थी, जिसे अभी तक दुरुस्त नहीं किया गया। जबकि, जलदाय विभाग को इसकी शिकायत भी की जा चुकी है। इसकी वजह से नलों में पानी का प्रेशर डाउन हो गया। हालांकि, लंबे समय से जलापूर्ति व्यवस्था में सुधार के लिए पार्षद को भी अवगत कराया था उन्होंने समाधान का आश्वासन भी दिया था, जो अभी तक पूरा नहीं हुआ। छतों पर रखी पानीकी टंकियां भरने के लिए दिनभर मोटर चलानी पड़ती है। जिससे बिजली का बिल अधिक आता है। सुबह से शाम तक पानी के लिए मारामारी मची रहती है। देर रात को ही थोड़ा प्रेशर में सुधार होता है। वहीं, घर-घर कचरा संग्रहण के लिए लगे टीपर इलाके में आते ही नहीं है। कचरा पाइंटों से समय पर कचरा भी नहीं उठता। गंदगी से बीमारियों का खतरा बना रहता है। - शानू खान, नगर निगम कॉलोनी निवासी सड़कों पर गंदगी व कचरा अंजू आईसक्रीम फैक्टी से लेकर कन्या छात्रावास तक जगह जगह गंदगी का ढेर लगा हुआ है। छात्रावास के सामने कचरा पाइंट बना रखा है, जहां से समय पर कचरे का उठाव नहीं किया जाता। भोजन की तलाश में दिनभर आवारा श्वान व मवेशियों का जमावड़ा लगा रहता है, जो कचरे को सड़कों तक फैला देते हैं। वहीं, बरसात से सारा कचरा नालो व नालियों में जमा होने से पानी की निकासी अवरूद्ध हो गई। नाले व नालियां ओवरफ्लो होकर गंदा पानी सड़कों पर जमा रहता है। गंदगी का आलम यह है कि यहां से गुजरने के दौरान मुंह पर कपड़ा बांधना पड़ता है। गंदगी की वजह से बीमारियों का खतरा बना रहता है। इलाके में जगह-जगह जलभराव होने से मच्छर पनप रहे हैं। जिससे मौसमी बीमारियों का खतरा बना रहता है। पार्षद से नियमित सफाई करवाने का आग्रह किया लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। - मजहर खान, तिलक नगर घरों में घुस रहा नालों व बरसात का पानी पालीवाल कम्पाउड स्थित कोटड़ी क्षेत्र में ड्रेनेज सिस्टम नहीं होने से बरसात का पानी सड़कों पर घुटनों से ऊपर तक भरा रहता है। घरों में तीन-तीन फीट पानी घुस जाता है। कमरों में गंदगी का ढेर लग जाता है। घर-गृहस्ती के कई सामान बह जाते हैं। जनहानी की आशंका से बचने के लिए छतों पर ढेरा जमाना पड़ता है। हाल ही में पूरे घर में घुटनों तक पानी भर गया था। वहीं, वार्ड में नियमित सफाई नहीं होती। दुर्गंध से मोहल्लेवासियों का जीना मुहाल हो रहा है। पार्षद इलाके में आते ही नहीं है। कहां शिकायत करें कुछ समझ में नहीं आता। कुछ दिनों पूर्व नगर निगम में भी शिकायत की थी लेकिन सुनवाई नहीं हुई। वहीं, शाम होते ही नुक्कड़ों पर समाज कंठकों का जमावड़ा लग जाता है। - अबरार हुसैन, कोटड़ी निवासी वार्ड में कई समस्याएं हैं, जिनके समाधान का पूरा प्रयास कर रहा हूं। नगर निगम कॉलोनी में स्मेक्चियों का जमावड़ा लगा रहता है, जिसके लिए गुमानपुरा पुलिस से कार्रवाई के लिए आग्रह किया है। वहीं, सफाई व्यवस्था के लिए सफाईकर्मी लगा रखे हैं। असल में परेशानी यह है, कन्या छात्रावास के सामने हमारा कचरा पाइंट है, जहां दूसरे वार्ड के लोग भी कचरा डालते हैं। मेरे वार्ड की सफाई के लिए नगर निगम से रोजाना एक ट्रैक्टर ट्रॉली कचरा उठाने आती है लेकिन हमारे वार्ड से सटे दूसरे वार्ड के पार्षद उनकी ट्रॉली वहां नहीं लगाते, जिससे कचरे का उठाव सही तरह से नहीं हो पाता। वहीं, एरोड्राम सर्किल से लेकर नए बस स्टैंड तक यूआईटी की ओर से नाला निर्माण करवाया जा रहा है, जब तक यह काम पूरा नहीं हो जाता तब तक बरसाती पानी को डायवर्ट नहीं कर पाएंगे। यह नाला बनने के बाद समस्या खत्म हो जाएगी। इसके अलावा पेयजल आपूर्ति के लिए यूडीएच मंत्री को प्रस्ताव बनाकर दिए हैं। 300 करोड़ की पेयजल योजना के तहत हमने धानमंडी की दोनों पानी की टंकी चालू करवाने व नगर निगम कॉलोनी में एक नई टंकी बनाने का प्रस्ताव रखा है, मंत्री धारीवाल से प्रस्ताव को हरि झंडी मिल चुकी है। टंकी बनने के बाद पेयजल आपूर्ति की समस्या खत्म हो जाएगी। - लेखराज योगी, पार्षद वार्ड 44</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 13 Aug 2022 15:37:05 +0530</pubDate>
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                <title>शौर्य चक्र सम्मानित कैप्टन वरूण सिंह के निधन का समाचार मिलते ही पैतृक गांव कन्हौली में शोक की लहर, श्रंद्धाजलि देने वालों का जमावड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[देवरिया। तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर हादसे में  सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत समेत 13 लोगों की मौत के बाद हादसे में एक  मात्र जीवित बचे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कन्हौली निवासी ग्रुप कैप्टन  वरुण सिंह की उपचार के दौरान बुधवार को निधन की सूचना मिलने के बाद देश के साथ उनके पैतृक गांव  कन्हौली में शोक की लहर दौड़ गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B6%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%9A%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%A3-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A5%83%E0%A4%95-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%B0--%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BF-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE/article-3236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/7.jpg" alt=""></a><br /><p>देवरिया। तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर हादसे में  सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत समेत 13 लोगों की मौत के बाद हादसे में एक  मात्र जीवित बचे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कन्हौली निवासी ग्रुप कैप्टन  वरुण सिंह की उपचार के दौरान बुधवार को निधन की सूचना मिलने के बाद देश के साथ उनके पैतृक गांव  कन्हौली में शोक की लहर दौड़ गई। हालांकि देवरिया के लाल की  सलामती के लिए लोग प्रार्थना कर रहे थे लेकिन  ग्रुप कैप्टन  कई दिनों से जिन्दगी के लिए लड़ रही जंग हार गये। बहादुर लाल के  निधन की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश में देवरिया जिले के रूद्रपुर तहसील  क्षेत्र के उनके पैतृक गांव कन्हौली में शोक की लहर छायी हुई है और उनके  आवास पर शोकाकुल लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है और भीड़ अपने लाल को गम में शहीद के आवास पर जमा होकर शहीद को श्रंद्धाजलि दे रही हैं। <br /><br />शहीद वरूण सिंह के परिवार में माता,पिता,भाई के साथ पत्नी और दो बच्चे हैं। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई उड़ीसा में हुई थी और वह  एनडीए की परीक्षा पासकर वायु सेना में अधिकारी बने। उनके पिता कृष्ण  प्रताप सिंह आर्मी में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वरुण के छोटे  भाई तनुज सिंह मुंबई में भारतीय नौसेना में अधिकारी हैं। पिछले साल एक उड़ान  के दौरान विमान में बड़ी तकनीकी खराबी के बाद भी कैप्टन वरुण सिंह ने विमान  को हैंडल करते हुए विमान को सकुशल जमीन पर उतारा था। उनके इस अदम्य साहस के  लिए उन्हें 15 अगस्त 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शौर्य चक्र से  सम्मानित किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Dec 2021 16:13:43 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस की रैली से पहले बरोजगारों का जमावड़ा,  रीट अभ्यर्थियों को मनाने में जुटेगी सरकार?</title>
                                    <description><![CDATA[ करीब 15 दिनों से शहीद स्मारक पर रीट अभ्यर्थी बैठे हैं धरने पर ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A5%88%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A5%87-%E0%A4%AA%E0%A4%B9%E0%A4%B2%E0%A5%87-%E0%A4%AC%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%9C%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE---%E0%A4%B0%E0%A5%80%E0%A4%9F-%E0%A4%85%E0%A4%AD%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%8B-%E0%A4%AE%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%9C%E0%A5%81%E0%A4%9F%E0%A5%87%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-3053"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/whatsapp-image-2021-12-10-at-15.04.09.jpeg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। 26 दिसंबर को 31 हजार पदों पर आयोजित हुई रीट अध्यापक पात्रता परीक्षा  में पदों की संख्या 31 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने की मांग अब तेज होने लगी है।  पदों की संख्या बढ़ाने की मांग को लेकर पिछले करीब 15 दिनों से शहीद स्मारक पर रीट अभ्यर्थी धरने पर बैठे हैं तो वहीं 12 दिसंबर को जयपुर में कांग्रेस की होने वाली रैली से पहले शुक्रवार को प्रदेशभर से बड़ी संख्या में रीट अभ्यर्थी जयपुर में जुटे।</p>
<p> बेरोजगारों ने जल्द ही पदों की संख्या नहीं बढ़ाने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी दी है।  गौरतलब है कि 24 दिसंबर, 2018 को मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने 31 हजार पदों पर रीट भर्ती परीक्षा की घोषणा की थी लेकिन इस परीक्षा के आयोजन को करीब 3 साल का वक्त लग गया और 26 दिसंबर 2021 को परीक्षा का आयोजन किया गया। लेकिन वर्तमान में अगर थर्ड ग्रेड शिक्षकों के रिक्त पदों की बात की जाए तो करीब 60 हजार पद खाली पड़े हैं। ऐसे में बेरोजगारों ने पदों की संख्या 31 हजार से बढ़ाकर 50 हजार करने की मांग की है।</p>
<p><br />धरने पर बैठे अभ्यर्थी अशोक और सुनीता जाट का कहना है कि तीन साल से इस भर्ती की प्रक्रिया चल रही है और इन तीन सालों में बड़ी संख्या में थर्ड ग्रेड शिक्षकों के पद खाली हुए हैं, जिसके चलते अब रिक्त पदों की संख्या करीब 60 हजार को पार कर चुकी है। ऐसे में अब सरकार को जल्द से जल्द पदों की संख्या 31 हजार से बढ़ाकर 50 हजार कर देनी चाहिए। जिससे ना सिर्फ भर्ती में शामिल हुए अभ्यर्थियों को फायदा मिले, इसके साथ ही नौकरी का सपना देख रहे 19 हजार और बेरोजगारों का सरकारी नौकरी का सपना पूरा हो सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 10 Dec 2021 15:55:46 +0530</pubDate>
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