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                <title>बांसी राजकीय विद्यालय की छतों में टपक रहा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[ बारिश के कारण कक्षा-कक्षों की छतें टपक रही है। ऐसे में स्कूली बच्चों के साथ अभिभावक सहित शाला परिवार परेशान हो रहे है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/water-dripping-from-the-roofs-of-bansi-government-school/article-120816"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/basi-rajakiy-vidyalay-ki-chhaton-mein-tapak-raha-pani...bhandeda,bundi-news-17.07.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>भण्डेडा। पिछले दिनों हुई मानसून की तेज बारिश के कारण बांसी के राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा कक्षों की छतों में से पानी टपकने के कारण विद्याार्थियों को काफी परेशान होना पड़ रहा है। इस विद्यालय परिसर में आठ कक्षाएं संचालित है। लेकिन बारिश के कारण कक्षा-कक्षों की छतें  टपक रही है। ऐसे में स्कूली बच्चों के साथ अभिभावक सहित शाला परिवार परेशान हो रहे है। नौनिहालों को शिक्षणार्थ कुछ कक्षाएं शामिल में बिठाने से उनका अध्ययन कार्य भी प्रभावित हो रहा है। संबंधित विभाग को भी इस संबंध में अवगत करवाया जा चुका है। लेकिन कोई ध्यान नहीं देने के कारण हालत जस के तस बनेहुए है।  </p>
<p><strong>सात कमरें, आठ कक्षाओं का संचालन</strong><br />जानकारी के अनुसार बांसी में दुगारी रोड़ पर स्थित राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय में सात कक्षाकक्ष है, और कक्षाएं आठ संचालित है। प्रारंभिक स्तर के इस विद्यालय में इस समय बारिश चलने से तीन कक्षा-कक्षों की छतों में से पानी टपक रहा है। दीवारों में सीलन आ रही है। एक कक्ष की छत का प्लास्तर उखड़ रहा है, छत की आरसीसी का सरिए  गलने की कगार पर है। जिन कक्षों की छत टपकती है, उन कक्षों की कक्षाएं चार कक्षों की कक्षाओं में समायोजित करके बिठाया जा रहा है। जो बड़ी कक्षाएं छोटी कक्षाओं में चलने से उनका अध्ययन कार्य भी प्रभावित हो रहा है। </p>
<p><strong>छत टपकने से बच्चों के बैठने की दरीपट्टी गीली हो जाती है</strong><br />इस समस्या को लेकर शाला परिवार परेशान हैं। संबंधित विभाग ने लंबे समय से ही भवन की मरम्मत नहीं करवाए जाने से स्कूली बच्चों को खतरे के सांए में शिक्षण  कार्या करवाया जा रहा है। कक्षों की छत टपकने से बैठने की दरीपट्टी तक भींगने की समस्या बनी हुई है। लेकिन संबंधित विभाग नौनिहालों की इस समस्या को गंभीरतापूर्वक नहीं ले रहा है। नौनिहालों के अभिभावक भी जब तक बच्चा सुरक्षित घर नहीं आता है, तब तक परेशान रहते है। इस समस्या का जल्द समाधान की मांग शाला परिवार ने की है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> बांसी बालिका स्कूल में कक्षा-कक्षों की छतों में से पानी टपक रहा है, छत की मरम्मत के लिए संबंधित विभाग के उच्चाधिकारियों को अवगत करवाया जा चूका है। <br /><strong>-श्योजी लाल मीणा, प्रधानाध्यापक, राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विद्यालय, बांसी। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 17:52:38 +0530</pubDate>
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                <title>दोपहर 2 बजे बाद मरीज हो रहे चक्कर घिन्नी</title>
                                    <description><![CDATA[जांच रिपोर्ट लेने के लिए भटकते रहे परिजन]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/patients-are-getting-dizzy-after-2-pm/article-120803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/8842roer40.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।  राजकीय मेडिकल कॉलेज अस्पताल दोपहर 2 बजे बाद मरीजों व तीमारदारों के लिए भूलभूलैया  बन जाता है। दूर-दराज के ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों ने सुबह जिस लैबोरेट्री में जांच के सैंपल दिए या पर्ची कटवाई दोपहर बाद उस लैब, दवा व पर्ची काउंटर तक पहुंचने का रास्ता ढूंढने से भी नहीं मिलता। नतीजन, निर्धारित स्थान पर पहुंंचने के लिए भटकते रहते हैं। अस्पताल प्रशासन की उदासीनता से मरीज व तीमारदार इधर से उधर चक्कर काट परेशान होते रहते हैं और अस्पताल की व्यवस्थाओं को कोसते नजर आते हैं। मरीजों की लगातार मिल रही शिकायत पर नवज्योति ने मौके के हालात देखे तो अजीब स्थिति नजर आई।  दसअसल, मेडिकल कॉलेज में दोपहर 2 बजे बाद गेट नंबर-1 से 3 तक के गेट बंद कर दिए जाते हैं। जबकि, गेट-1 व 2 में सुबह के समय ओपीडी चलती है। जहां रजिस्ट्रेशन करवाने से लेकर डॉक्टर को दिखाने, लेबोरेट्री में जांच तथा ब्लड बैंक में जाने सहित अन्य  कार्य यहीं से होते हैं। लेकिन, दोपहर 2 बजे बाद गेट 1 से 3 तक के सभी गेट बंद कर दिए जाते हैं। ऐसे में मरीजों को लेबोरेट्री से लेकर इमरजेंसी एक्स-रे करवाने तक  कार्यों के लिए अस्पताल से बाहर निकलकर लंबा चक्कर काट गेट-नंबर 4 में जाना पड़ता है। ऐसे में वह परेशान होते रहते हैं। </p>
<p><strong>गेट बंद, अब कैसे जाएं ब्लड बैंक </strong><br />बूंदी जिले के डाबी निवासी रामकरण मीणा, बुद्धिप्रकाश  गेट-1 एक से होते हुए ब्लड बैंक जा रहे थे लेकिन कोरिडोर का गेट बंद होने से मायूस खड़े थे। जब उनसे पूछा तो उन्होंने बताया कि परिजन अस्पताल में भर्ती है। सुबह इसी रास्ते से ब्लड बैंक में खून के सैंपल दिए थे। अब ब्लड लेने जा रहे हैं तो रास्ते का गेट पर ताला लगा हुआ है। ब्लड बैंक कैसे जाएं। यहां कुछ लोगों से पूछा तो वह भी इससे अनजान थे। काफी देर  से सिक्योरिटी गार्ड भी नजर नहीं आए। लैब का रास्ता भी बंद कर दिया। आधे घंटे से परेशान हो रहे हैं। बाद में दवा काउंटर पर ब्लड बैंक तक जाने का रास्ता पूछा तो वह बहुत दूर है। अब अस्पताल से बाहर निकल उपभोक्ता दवा काउंटर की तरफ से गेट नंबर-4 पर जाना पड़ेगा। </p>
<p><strong>जांच रिपोर्ट लेना मरीजों के बनी चुनौती </strong><br />रामगंजमंडी विधानसभा क्षेत्र के सातलखेड़ी से आए रामकिशन व प्रभुदयाल नागर ने बताया कि मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों के लिए जांच रिपोर्ट प्राप्त करना किसी चूनौति से कम नहीं है। सेंट्रल लेबोरेट्री गेट-1 से ही सटी हुई है। सुबह की ओपीडी में यहां से ही लैब में सैंपल दिया था। जांच रिपोर्ट मिलने का समय शाम 5 से रात 8 बजे तक का है। ऐसे में शाम को आए तो यहां ताला लगा हुआ है। अब जांच रिपोर्ट लेने के लिए दूसरे रास्ते गेट-4 से होते हुए टोर्मा वार्ड की तरफ से घूमते हुए लैब तक जाना पड़ा। तब जाकर रिपोर्ट मिली। यानी, गेट नंबर 1 से लैब की दूरी मात्र  40 मीटर थी, जहां पहुंचने के लिए 300 से ज्यादा मीटर दूरी तय कर पहुंचना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>मरीज क्यों काटे लंबी दूरी, इमरजेंसी में भीड़</strong><br />चेचट निवासी मुरली प्रसाद मीणा, अंकुर शर्मा का कहना है, जांच रिपोर्ट, दवा, ईसीजी, एक्सरे करवाने से ब्लड बैंक तक जाने के लिए एकमात्र गेट नंबर-4 से ही जाना पड़ता है। यहां दवा,जांच, रजिस्ट्रेशन के काउंटर भी एक-एक ही है, जहां मरीजों की भीड़ लगी रहती है। वहीं, जांच रिपोर्ट लेने के लिए भी लंबा चक्कर काटकर उसी जगह आना पड़ता है। अस्पताल प्रशासन से शिकायत की तो उन्होंने सुरक्षा करणों का हवाला दिया। लेकिन पूरे अस्पताल में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगे हैं, फिर किस बात का डर सता रहा है। जांच मिलने का समय शाम 5 से 8 बजे तक का है, ऐसे में इस समय तक तो गेट खोलना चाहिए।</p>
<p><strong>भटकते रहे परिजन व तीमारदार </strong><br />गेट  नंबर एक में दंत रोग कक्ष-2 के पास चैनल गेट को बंद देख वापस लौट रहे मां-बेटे ने बताया कि हम कैथून से आए हैं। गेट-नंबर दो पर पर्ची कटवाकर डॉक्टर को दिखाया था। उन्होंने एक्सरे लिखा था। वहां भीड़ अधिक होने के कारण मार्केट भोजन करने चले गए। दोपहर 2 बजे बाद आए तो यहां गेट बंद कर दिया। अब एक्सरे रूम तक पहुंचने के लिए करीब 300 मीटर से ज्यादा की दूरी तय करनी पड़ेगी। जब सारा काम यहीं से हो सकता है तो फिर लंबा चक्कर क्यों काटे? अस्पताल प्रशासन की लापरवाही के कारण रोजाना सैंकड़ों मरीज परेशान होते हैं। </p>
<p><strong>अस्पताल अधीक्षक डॉ. आशुतोष शर्मा से सीधी बात</strong><br /><strong>सवाल : </strong>दोपहर 2 बजे बाद से अस्पताल के 1 से 3 तक गेट बंद क्यों कर रहे?<br />जवाब :<strong> </strong>गेट-1 व 2 ओपीडी वाले हैं और गेट-3 ब्लड बैंक का है। जिन्हें दोपहर 2.30 बजे सुरक्षा कारणों से  बंद किया जाता है। ऐसे में मरीजों के लिए इमरजेंसी गेट नंबर-4 खोला हुआ है।<br /><strong>सवाल : </strong>अस्पताल में हर जगह सीसीटीवी कैमरा व सुरक्षा गार्ड लगे हैं, फिर चोरी का डर कैसे?<br />जवाब : राजस्थान के सभी मेडिकल कॉलेज में यही व्यवस्था है, फिर अनावश्यक गेट खोलकर क्यों रखें।<br /><strong>सवाल :</strong> मरीज परेशान हो रहे, भटक रहे, लंबा चक्कर काटने को मजबूर हो रहे?<br />जवाब :<strong> </strong>मरीज व तीमारदारों का भटकना जैसा कुछ नहीं है। अस्पताल इतना बड़ा नहीं है कि उन्हें गेट-4 न मिले। गार्ड लगाए हैं, जो रास्ता बताते हैं। <br /><strong>सवाल :</strong> जांच दोपहर 3 बजे तक होती है, मरीज गेट-4 पर जाएगा, कतार में लग पर्ची कटाएगा, तब तक जांच केंद्र बंद हो जाता है?<br />जवाब : नहीं, लैब 3 बजे बंद नहीं होती है। जब भी मरीज आते हैं, राउंड द क्लॉक उनका सैंपल लिया जाता है। <br /><strong>सवाल :</strong> सरकार का उद्देश्य मरीजों को राहत पहुंचाना है, लेकिन गेट बंद होने से वह परेशान हो रहे हैं?<br />जवाब : यहां गेट-1 पर गार्ड बैठा रहता है, जैसे ही कोई मरीज-तीमारदार आता है तो उन्हें गेट-4 का रास्ता बताते हैं। थोड़ा बहुत तो चल ही सकते हैं। <br /><strong>सवाल :</strong> जांच रिपोर्ट देने का समय शाम 5 से रात 8 बजे तक का है तो गेट खोले जाने चाहिए।<br />जवाब :<strong> </strong>दोपहर बाद गेट बंद करने का मुख्य उद्देश्य  सेफ्टी है। पहले आए दिन मोबाइल, सामान चोरी हो रहा था। जिससे निपटने केलिए यह व्यवस्था की है।<br /><strong>सवाल :</strong> सेंट्रल लैब में मरीजों के लिए टायलेट नहीं?<br />जवाब : ओपीडी और लैब के बीच जो टायलेट हैं, वो मरीजों के लिए हैं। नियमित सफाई होती है। गेट नंबर-2 का एक टायलेट लीकेज की वजह से बंद है। <br /><strong>सवाल </strong>: गेट बंद करने का निर्णय जयपुर स्तर पर है या अपने स्तर पर?<br />जवाब : जयपुर स्तर से सुरक्षा व्यवस्था करने के निर्देश हैं, इसलिए हमने दोपहर ढाई बजे बाद गेट-1 से 3 तक बंद कर देते हैं। इमरजेंसी के लिए गेट-4 खोला है। हमारे पास सुरक्षा के यहीं उपाए हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 17 Jul 2025 16:04:51 +0530</pubDate>
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                <title>खाली भूखंड बने बीमारियों का घर, पानी में मच्छर पनप रहे</title>
                                    <description><![CDATA[बरसों से खाली भूखंड बीमारियों के जनक बन रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vacant-plots-become-home-of-diseases--mosquitoes-are-flourishing-in-the-water/article-53682"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/khali-bhukhand-bne-bimariyo-ka-ghar,-pani-me-machhar-panap-rhe...kota-news-04-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। पर्यटन की दृष्टि से विकसित हो रहे व स्मार्ट सिटी बन रहे कोटा शहर में जहां एक तरफ विकास की गंगा बह रही है। वहीं दूसरी तरफ पॉश कॉलोनियों के बीच में बरसों से खाली पड़े भूखंडों  में भरा बरसाती पानी बीमारियों का घर बन रहे हैं। इनमें मच्छर जनित बीमारियों के साथ ही कचरे की दुर्गंध फेल रही है। जिससे आस-पास के लोग परेशानी झेल रहे हैं। शहर में कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों में इस तरह के खाली भूखंडों की संख्धा अधिक है। जिन्हें लोगों ने खरीद तो लिया लेकिन उन पर न तो चार दीवारी करवाई है और न ही मकान का निर्माण कराया। खरीदकर भूखंड को खाली छोड़ा हुआ है। जिससे बरसात के समय में उन भूखंडों में पानी भर गया। वह पानी दुर्गंध मारने लगा है। उस पानी में मच्छर पनप रहे हैं। जिससे वह आस-पास रहने वाले लोगों के लिए बीमारियां बढ़ा रहे हैं। </p>
<p><strong>नियमों की उड़ रही धज्जियां</strong><br />राज्य सरकार के नियम के अनुसार भूखंड खरीदने के बाद निधारित समय 3 से 5 साल में उस भूखंड पर निर्माण किया जाना आवश्यक है। ऐसा नहीं करने पर भूखंड मालिक पर जुर्माना लगाने और भूखंड को निरस्त करने तक का प्रावधान है। लेकिन सरकार के उस नियम की भी धज्जियां भूखंड मालिकों द्वारा उड़ाई जा रही है। जिससे परेशानी वहां रहने वाले अन्य लोगों को भुगतानी पड़ रही है। </p>
<p><strong>न्यास ने नोटिस देकर की इतिश्री</strong><br />बरसों से खाली भूखंड बीमारियों के जनक बन रहे हैं। उनसे आस-पास के लोगों को होने वाली परेशानी की शिकायत मिलने पर नगर विकास न्यास द्वारा ऐसे भूखंड मालिकों को नोटिस देकर ही इतिश्री की जा रही है। उसके बाद उस मालिक ने उस पर निर्माण कराया या सफाई करवाई इसकी जानकारी अधिकारियों को नहीं है। साथ ही यह भी जानकारी नहीं है कि कितनों को नोटिस दिए।  न्यास अधिकारियों का कहना है कि न्यास की  विकसित कॉलोनियों में खाली भूखंडों के मालिकों की तो जानकारी रहती है। जबकि कृषि भूमि पर खाली भूखंड का जब तक पट्टा नहीं बनता है तब तक उसके मालिक का भी पता नहीं चलता। ऐसे में उन्हें नोटिस भी जारी नहीं किए जाते। </p>
<p><strong>लोगों का दूभर हुआ रहना</strong><br />पॉश कॉलोनियों में रहने वाले लोग खाली भूखंडों में भरे पानी से अधिक परेशान हैं। बजरंग नगर गली नम्बर चार निवासी राजेश सिंह का कहना है कि उन्होंने पांच साल पहले यहां मकान लिया था। उस समय यहां पास में दो भूखंड खाली थे। वह आज भी उसी स्थिति में है। बरसात में पानी भरने से उसमें दुर्गंध व मच्छर होने से लाखों रुपए खर्च कर मकान बनाने के बाद भी यहां रहना दूभर हो रहा है। नम्रता आवास निवासी शालिनी सिंह का कहना है कि उनके घर के पास एक भूखंड खाली है। जिसके मालिक का ही पता नहीं है। उसमें बरसात का पानी भरने के साथ ही कचरा भी डाला जा रहा है। जिससे वहां दुर्गंध फेल रही है। शाम के समय घर के बाहर नहीं बैठ पाते। मच्छर व दुर्गंध से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। लेकिन निगम व न्यास किसी भी विभाग का इस पर ध्यान नहीं है। </p>
<p><strong>निगम-न्यास में जानकारी ही नहीं</strong><br />हालत यह है कि कृषि भूमि पर बसी कॉलोनियों में कितने भूखंड खाली हैं और वह भूखंड किसके हैं इसकी जानकारी न तो नगर निगम के पास है और न ही नगर विकास न्यास के पास।  सिर्फ नगर निगम व नगर विकास न्यास की विकसित कॉलोनियों में ही खाली भूखंडों के मालिकों के बारे में ही जानकारी मिल सकती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />शहर की कॉलोनियों में अधिकतर खाली भूखंड  नगर विकास न्यास के क्षेत्र में आते हैं। उनके खिलाफ कार्रवाई भी न्यास ही करता है। नगर निगम तो वार्डों के साथ ही ऐसे खाली भूखंडों में मच्छरों से निजात के लिए फोगिंग करवाता है। निजी भूखंड होने से निगम उनकी सफाई  अपने स्तर पर नहीं करवा सकता। <br /><strong>- राजेश डागा, कार्यवाहक आयुक्त नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>खाली भुखंडों में पानी भरने पर संबंधित भूखंड मालिकों को समय-समय पर नोटिस जारी करते रहते हैं।  यह नियमित प्रक्रिया है। कितनों को नोटिस जारी किए इसकी संख्या फिलहाल पता नहीं है। यदि ऐसे भूखंड अभी भी है तो उन्हें भी नोटिस जारी किए जाएंगे। <br /><strong>- राजेश जोशी, सचिव नगर विकास न्यास </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2023 18:36:08 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अधीक्षक व मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल को नोटिस </title>
                                    <description><![CDATA[ पिछले वर्ष 1500000 रुपए पीडब्ल्यूडी को देकर पूरा बिजली लोड चेक कराया और वायरिंग  बदलवाई गई। बिजली के लोड को भी बांटा गया। इसके बावजूद बिजली गुल की समस्या से निजात नहीं मिली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/notice-issued-to-mbs-superintendent-and-medical-college-principal/article-46687"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/hogh-cort-chandigarh-court-hammer1457186614-821.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। स्थाई लोक अदालत ने अस्पताल में लाइट जाने के बाद अंधेरा होने के मामले में एमबीएस अस्पताल अधीक्षक तथा मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य एवं नियंत्रक को नोटिस जारी करते हुए 8 जून 2023 तक जवाब तलब किया है। इस मामले में एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने एक जनहित याचिका पेश करते हुए अदालत को बताया  कि एमबीएस अस्पताल में बिजली जाते ही पूरे अस्पताल में अंधेरा हो जाता है। यहां प्रत्येक वार्ड के हिसाब से 8 जनरेटर और ओटी में एक इनवर्टर लगा हुआ है। बैटरी  बैकअप नहीं होने से ये बेकार हैं। 15 जून 2023 को  शहर में अंधेरा हो गया था। उस समय अस्पताल में जनरेटर नहीं चलने से मरीज आधे घंटे तक परेशान होते रहे। पिछले वर्ष उक्त अस्पताल की पुरानी बिजली लाइन फिटिंग से आए दिन फाल्ट होने से बिजली बंद की समस्या रहती थी ऐसे में घंटों अस्पताल में अंधेरे रहता था। पिछले वर्ष 1500000 रुपए पीडब्ल्यूडी को देकर पूरा बिजली लोड चेक कराया और वायरिंग बदलवाई गई। बिजली के लोड को भी बांटा गया। इसके बावजूद बिजली गुल की समस्या से निजात नहीं मिली। याचिका में बताया इसी मई में दो बार बिजली जाने की घटनाएं होने के बाद भी हालात नहीं सुधरे हैं। इमरजेंसी सेवाओं ,अस्पताल के अन्य हिस्सों में जनरेटर चालू नहीं होने  से मरीज और उनके तीमारदारों को टॉर्च और मोबाइल की रोशनी में रहना पड़ा। नर्सिंग स्टाफ भी बिजली बंद हो जाने से परेशान रहता है। 24 अप्रैल 2022 को न्यू मेडिकल कॉलेज में केबल में फाल्ट होने से इमरजेंसी वार्ड में 3 घंटे तक बिजली गुल रही थी उस दौरान एक महिला मरीज की मौत हुई थी। इसके बावजूद  मेडिकल कॉलेज प्रधानाचार्य तथा एमबीएस अस्पताल अधीक्षक ने कोई उचित कदम नहीं उठाया। इस मामले में न्यायालय ने याचिका को स्वीकार करते हुए जवाब मांगा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 May 2023 17:00:26 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 80 : वार्डवासी तो दूर पार्षद ही व्यवस्थाओं से खफा</title>
                                    <description><![CDATA[वार्ड नम्बर 80 की लगभग हर गली की सड़कें उधड़ी हुई है। वार्ड में कई स्थानों पर कचरे का ढेर लगे हुए हैं। केशवपुरा चौराहा से बालाकुन्ड की ओर जाने वाली सड़क के किनारों पर दिनभर गायों का जमावड़ा लगा रहता है। कुछ मौकों पर पर तो वाहन चालकों को इन पशुओं का शिकार होना पड़ा है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-80--ward-residents-are-far-away-councilors-are-angry-with-the-arrangements/article-33947"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/ward-80--wardwasi-to-door-parshad-hi-vyavasthao-se-khafa...kota-news...02.01.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वार्ड का प्रतिनिधित्व करने वाला ही जब वार्ड की व्यवस्थाओं से सन्तुष्ट ना हो तो इस बात का अनुमान सहजता से लगाया जा सकता है कि उस वार्ड के हालात क्या है? वार्डवासियों को क्या-क्या शिकायतें होगी। बात पढ़ने में अजीब लेकिन ये सच्चाई है कोटा नगर निगम के वार्ड नम्बर 80 की। दरअसल इस वार्ड की पार्षद लक्ष्मी मेहरा भाजपा की ही है और इस बात का खामियाजा पूरे वार्डवासियों को भुगतना पड़ रहा है। खुद पार्षद की ही माने तो ना राज्य में सरकार उनकी है ना निगम में बोर्ड भाजपा का, इसलिए विकास कार्यों के लिए बजट ही नहीं दिया जाता है। नगर निगम कोटा दक्षिण के वार्ड 80 में केशवपुरा सेक्टर-4, आंशिक रूप से केशवपुरा सेक्टर-6, गुजराती बस्ती, हरिजन बस्ती, भील बस्ती तथा सुनारों का मौहल्ला आदि इलाकें आते हैं। वार्ड में कुछ गलियों की सड़कें जरूर बनी हंै लेकिन यहां के निवासी वार्ड में समस्याओं के अम्बार को लेकर वार्ड पार्षद से खफा हैं। मसलन टूटी नालियां, भरी हुई नालियां, जगह-जगह कचरा, सड़कों पर घूमते बडेÞ-बडेÞ श्वान, कई स्थानों पर डेरा जमाये आवारा पशु आदि। वार्ड के कुछ लोग बताते हंै कि अगर वार्ड में विकास कार्य नहीं हो रहे हैं, निगम से जुड़ी समस्याओं का हल नहीं निकल पा रहा हैं तो उसके लिए पार्षद को पूरी तरह से जिम्मेदार नहीं ठहराया जा सकता है। वो अपनी ओर से पूरा प्रयास करती है लेकिन जब उनकी ही कोई नहीं सुनता तो वो भी क्या करें? इसलिए ही वार्ड की समस्याएं जस की तस बनी हुई है। पार्षद खुद समस्याओं को लेकर निगम में संबंधितों को ज्ञापन दे चुकी है, पत्र लिख चुकी है।</p>
<p>वार्ड नम्बर 80 की लगभग हर गली की सड़कें उधड़ी हुई है। वार्ड में कई स्थानों पर कचरे का ढेर लगे हुए हैं। केशवपुरा चौराहा से बालाकुन्ड की ओर जाने वाली सड़क के किनारों पर दिनभर गायों का जमावड़ा लगा रहता है। कुछ मौकों पर पर तो वाहन चालकों को इन पशुओं का शिकार होना पड़ा है। सड़क किनारे सब्जी बेचने वालों का जमावड़ा लगा रहता है। शाम होते-होते तो हालात यहां तब हो जाते है कि वाहनों से निकलना तो दूर की बात पैदल तक चलना मुश्किल हो जाता है।वार्ड में एक नाला भी है जो खड़े गणेशजी मन्दिर से साजीदेहड़ा तक जाता है। ये नाला हरदम कचरे से भरा रहता है। इलाके के आसपास के लोग तो इसमें कचरा डालते ही हंै इस नाले के इर्द-गिर्द खड़े रहने वाले सब्जी, फल बेचने वाले और अन्य दुकानदार भी अपना सारा कचरा इसी नाले में फैंक देते हंै। जिससे बारिश के दौरान हालात ज्यादा खराब होते है। गर्मियों के दिनों में इस नाले के पास से निकलना भी मुश्किल होता है। वार्ड के कुछ लोगों का कहना है कि श्वानों और सांड, गायों के कारण बच्चे ही नहीं बड़ों का भी घरों के बाहर निकलना दुभर हो गया है। गायें और श्वान हाथों में से सामान को खीचकर ले जाते हैं। श्वानों ने कई बार लोगों को काटा है। कुछ स्थानों पर नालियां सालों से टूटी पड़ी है। मौहल्लों में लोग जहां चाहे वहां कचरा डाल देते है लेकिन निगम की ओर से उठाने वाला आता ही नहीं। </p>
<p>वार्ड पार्षद बताती है कि केशवपुरा के इस नाले को साफ करवाने के लिए पार्षद बनने के बाद से लेकर अब तक 8 बार पत्र लिख चुकी है लेकिन नाला कभी साफ ही नहीं होता है। टेन्डर होते है, कागजों में नाला साफ होता है। वार्ड में सफाई के लिए केवल 16 सफाईकर्मी हैं। इनमें से 4 तो दिव्यांग है अब उनसे कैसे काम होगा, कोटा का एक यही वार्ड है जिसमें सबसे ज्यादा दिव्यांग हैं। कई बार कह चुकी हंू कि दो कर्मचारियों को अन्य वार्ड में लगवा दो लेकिन कोई नहीं सुनता। वार्ड के लोगों को पट्टा दिलवाने के मशक्कत करती हंू लेकिन पट्टों का मामला निगम और यूआईटी के बीच फुटबाल बना हुआ है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />हम वार्ड में विकास कार्यों के कारण नहीं सामाजिक सेवा से जाने जाते हैं। वार्ड में डेरा जमाये आवारा पशुओं, श्वानों आदि के लिए ज्ञापन तक दे चुकी हूं। श्वानशाला बन जाने के बाद भी श्वानों को नहीं पकड़ा जा रहा है। वार्ड में विकास कार्यों के लिए बजट ही नहीं मिलता। लोग समझते है कि मैं काम नहीं करवाती तो मेरे घर पर आकर उलाहना देकर जाते हैं।<br /><strong>- लक्ष्मी मेहरा, वार्ड पार्षद।  </strong></p>
<p>वार्ड की कुछ गलियों में सड़कें बनी है, इसके अलावा कोई काम नहीं हुआ है। सफाई नहीं होती है। कचरे के कारण बीमार पड़ने का डर बना रहता है। नालियां हमेशा भरी रहती हैं। बारिश के दिनों में गन्दा पानी सड़कों पर आ जाता है।<br /><strong>- राजेन्द्र सिंह चौहान, वार्डवासी।  </strong></p>
<p>हमारे मौहल्ले में तो सड़क नहीं बनी है। पूरी सड़क पर गड्ढेंÞ बने हुए हंै। वार्ड में सरकारी लाइट कभी जलती है, कभी नहीं। पीने के पानी समस्या बनी हुई है। बिना बूस्टर के पानी आता ही नहीं। हमारे इधर पीने के पानी की पाइप लाइन में पाइप छोटे हैं, इसलिए पे्रशर ही नहीं आता है। <br />- <strong>अर्चना गौड, वार्डवासी। </strong></p>
<p>वार्ड में कुछ भी अच्छा काम नहीं हुआ है। नाले के कचरे और अन्य स्थानों पर कचरा नहीं उठाने को लेकर प्रदर्शन कर चुके हैं लेकिन कुछ नहीं हुआ। मन्दिर के यहां तक कचरे के ढ़ेर पड़े रहते हैं। निगम की ओर से कुछ भी व्यवस्था नहीं है। रोड पर सब्जी वालों का अतिक्रमण रहता है, शाम होते-होते तो जाम लगना शुरू हो जाता है।<br /><strong>- छाया अग्रवाल, वार्डवासी।  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 Jan 2023 15:08:16 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 8:  सूअरों की समस्या मिटे तो वार्ड वासियों को मिले राहत </title>
                                    <description><![CDATA[उपमहापौर मीणा के इस वार्ड में 3-4 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत किये गए हंै जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और कई होने बाकी है। ग्रामीण इलाकों की बात करें तो यहां पर फिलहाल नालियों की एक बड़ी समस्या है जिससे लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-8--if-the-problem-of-pigs-is-removed-then-the-residents-of-the-ward-will-get-relief/article-33401"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/ward-8,-suaro-ki-samasya-mite-to-ward-wasiyo-ko-mile-rahat...kota-news..26.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा नगर निगम दक्षिण के जिस वार्ड नम्बर 8 का प्रतिनिधित्व उपमहापौर पवन मीणा करते हैं उस वार्ड में विकास के भले ही कई काम हुए हो लेकिन वार्डवासी एक ऐसी समस्या से परेशान है जिसका समाधान अभी तक किसी के पास नहीं हैं। इस वार्ड के लोग सूअरों से इतने परेशान है कि लोग अपने छोटे बच्चों को अकेले घर के बाहर खेलने के लिए छोड़ने तक से घबराते हालात यहां तक बिगड़े हुए है कि सूअर लोगों के हाथ से सामान तक खींचकर ले जाते हैं। कई बार तो लोग घायल तक हुए हंै। नगर निगम दक्षिण के वार्ड संख्या 8 में विनोबाभावे नगर, धर्मपुरा रोड, ग्राम धर्मपुरा, ग्राम बंधा, रथकांकरा, नन्दगनी नगर, मुकुन्दरा विहार, गणेश नगर, बसंल स्कूल तथा आरोग्य नगर आदि इलाके आते हैं। इस वार्ड की आबादी करीब 7 हजार से अधिक हैं। इस वार्ड में कई ग्रामीण क्षेत्र भी हैं जहां के लोग सालों से नालियों और रोड की समस्या से परेशान थे लेकिन अब उनकी इस समस्या से उनको कुछ हद तक निजात मिलने लगी है। हां, बेशक वार्ड के कई क्षेत्रों में अब भी कई काम होने बाकी है फिर भी वार्डवासी वर्तमान पार्षद, उपमहापौर के अब तक के कार्यकाल को काफी हद तक ठीक बताते हैं। </p>
<p>उपमहापौर मीणा की माने तो उनके इस वार्ड में 3-4 करोड़ रूपये के विकास कार्य स्वीकृत किये गए हंै जिनमें से कई पूर्ण हो चुके हैं और कई होने बाकी है। कुछ समय पहले तक इस वार्ड के लोगों को छोटी नालियां, उधड़ी सड़के, रोड से उड़ती धूल तथा नालियों का ना होना आदि समस्याओं से जूझना पड़ रहा था लेकिन अब इन समस्याओं का काफी हद तक समाधान हो गया हैं। ग्रामीण इलाकों की बात करें तो यहां पर फिलहाल नालियों की एक बड़ी समस्या है जिससे लोगों को परेशान होना पड़ रहा है। क्षेत्र में सूअरों की समस्या को लेकर लोगों का कहना है कि सूअरों को पकड़ने का ठेका  जिस ठेकेदार को दिया जाता है, कुछ लोग उसके आदमियों से मारपीट करते हैं और समस्या ज्यों की त्यों बनी रहती है। फिर भी वार्ड के लोगों ने इस बात को स्वीकार किया है कि वार्ड में सड़कों का डामरीकरण, रोड लाइट, नालियोंं का निर्माण आदि काम हुए हैं लेकिन अब भी कई कार्यों को करवाये जाने की आवयकता हैं। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />वार्ड पार्षद हमारी सुनते ही नहीं। हमारे यहां आज तक नालियां नहीं बनी हैं। जो हमारी एक बड़ी समस्या है। इसके अलावा दिनभर सड़कों पर सूअर घूमते रहते हैं। बच्चों को बाहर छोड़ने से पहले भी कई बार सोचना पड़ता है। गंदी नालियों में सूअर लेटे रहते हैं और पूरे इलाके में गंदगी फैलाते रहते है। बीमारियों का डर लगा रहता है। <br /><strong>- दिनेश मालव, निवासी विनोबाभावे नगर । </strong></p>
<p> वार्ड की सबसे बड़ी समस्या सूअरों और गायों की थी। इनमें से गायों की समस्या तो कुछ हद तक काफी कम हो गई है लेकिन सूअरों की समस्या से आज तक कोई निजात नहीं दिला पाया है। इस पार्क क्षेत्र में बने पार्क में महावीर नगर आदि इलाकों के समान अगर जालियां लगा दी जाये तो ठीक हो। नाले को लोगों ने कचरापात्र बना दिया है जबकि निगम के टिपर वक्त पर आते हैं। <br /><strong>- विद्यासागर शर्मा, वार्डवासी। </strong></p>
<p>वार्ड के कई इलाकों में लोग मूलभूत आवश्यकताओं के लिए तरस रहे थे, क्षेत्र में वो सुविधाएं उपलब्ध करवाई हैं। वार्ड में कई स्थानों पर सीसी रोड बन चुके हैं जबकि कई स्थानों पर काम चल रहा है। क्षेत्र में सूअरों की समस्या का तकनीकी कारणों से समाधान नहीं हो पाया है। ग्रामीण क्षेत्रों में नालियां बनवानी हैं। पहले तो यहां ऐसी सीसी रोड थी जो पैरो से ही खुद जाया करती थी।            <br /><strong>- पवन मीणा, उपमहापौर, दक्षिण नगर निगम। </strong></p>
<p>हमारी सबसे बड़ी समस्या सूअरों की जिससे छुटकारा मिले तो कुछ राहत मिले। करीब 14 साल बाद सीसी रोड बना है। हमारे यहां नालियां अक्सर भरी रहती हैं। वार्ड पार्षद कार्यकाल के समाप्त होने से पहले काम करवा रहे है, पहले करवाते तो ठीक होता। हमने कई बार विधायक मदन दिलावर को भी हमारी समस्याओं से अवगत करवाया है। क्षेत्र के खाली प्लॉटों में हमेशा पानी भरा रहता है।<br /><strong>- नन्दकिशोर, वार्डवासी। </strong></p>
<p> वार्ड में सीसी रोड का काम चल रहा है। इसके बाद नालियों का काम चलना है। कुछ समय पहले तक वार्ड की सुध लेने वाला कोई नहीं था लेकिन अब वार्ड में विकास के कार्य होने लगे हैं। वार्ड की एक समस्या हमारे क्षेत्र में बना एक नाला है जिसमें पानी नहीं आता है लेकिन लोगों से इसे कचरे से भरा हुआ है। यूआईटी को इस बारे में पत्र भी लिख चुके हैं। यहां पर बने पार्क को लोगों ने पार्किंग स्थल बना दिया है। ठेकेदार का पार्क के रखरखाव में कोई ध्यान नहीं है।<br /><strong>- चेतन यादव, वार्डवासी।  </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 26 Dec 2022 14:55:44 +0530</pubDate>
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                <title>लोगों के पैर खींच रहे काऊ कैचर</title>
                                    <description><![CDATA[ काऊ कैचर के एंगल में अधिक अंतराल होना लोगों के लिए परेशानी व मुसीबत बने हुए हैं। काऊ कैचर के एंगल के बीच अंतराल काफी अधिक है। जिससे यहां कभी भी किसी व्यक्ति का पैर फंसने की घटना हो सकती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cow-catcher-pulling-people-s-legs/article-33118"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/logo-k-paair-kheech-raha-cow-catcher...kota-news..23.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । सरकारी विभागों में मवेशियों को घुसने से रोकने के लिए लगाए गए काऊ कैचर लोगों के लिए परेशानी का सबब बने हुए हैं। काऊ कैचर में आए दिन लोगों के पैर फंस रहे हैं। शहर में हर सरकारी विभाग के मेन गेट पर लोहे के एंगलों से बने काऊ कैचर लगाए गए हैं। इसका मकसद मवेशियों को उन परिसरों में  घुसने से रोकना है। काऊ कैचर के एंगलों के बीच अंतराल अधिक होने से मवेशी उन पर से आसानी से नहीं निकल पाते हैं। जिससे सरकारी विभागों में मवेशियों का प्रवेश कम दिखाई देता है। लेकिन हालत यह है कि उन काऊ कैचर के एंगल में अधिक अंतराल होना लोगों के लिए परेशानी व मुसीबत बने हुए हैं। सर्किट हाउस, एमबीएस अस्पताल, संभागीय आयुक्त कार्यालय व सिचाई विभाग समेत कई सरकारी विभागों के काऊ कैचर अधिक घातक हैं। उन काऊ कैचर के एंगल के बीच अंतराल काफी अधिक है। जिससे यहां कभी भी किसी व्यक्ति का पैर फंसने की घटना हो सकती है। विशेष रूप से इस तरह की घटना महिलाओं के साथ अधिक होती है। उनके पैर छोटे होने व सैंडल का साइज छोटा होने से यदि पैर सीधे की जगह आड़ा पड़ गया तो काऊ कैचर में फंसने की संभावना अधिक रहती है। इस तरह की घटनाएं शहर में पहले कई बार हो चुकी  हैं। कभी अस्पताल के काऊ कैचर में तो कभी सर्किट हाउस के काऊ कैचर में लोगों के पैर फंसने की घटनाएं हो रही हैं। </p>
<p><strong>सर्किट हाउस व अस्पताल में हो चुकी घटनाएं</strong><br />गत दिनों एक पुलिस कर्मी का पैर सर्किट हाउस के काऊ कैचर में फंस गया था। गनीमत रही कि उसके पैर को वहां मौजूद पुलिस कर्मियों ने तुरंत निकाल लिया। जिससे वह बच गया। लेकिन यदि पैर अधिक अंदर चला जाता तो उसे निकालना मुश्किल हो जाता। इसी तरह से एमबीएस अस्पताल  व जे.के. लोन अस्पताल के काऊ कैचर में महिलाओं के पैर फंसने के कई मामले हो चुके हैं। वहीं कलक्ट्री परिसर के मेन गेट के काऊ कैचर में भी पहले एक व्यक्ति का पैर फंसने की घटना हो चुकी है। रजानकारों के अनुसार पैर फंसने के बाद उसका आसानी से बाहर निकलना मुश्किल हो जाता है। प्रयास कर जबरन पैर बाहर निकालने पर संबंधित महिला -पुरुष को तक्लीफ अधिक होती है। इसके लिए गैस कटर से काऊ कैचर के एंगल को काटकर ही पैर सुरक्षित बाहर निकालना पड़ता है। पहले काऊ कैचर में फंसे पैरों को काऊ कैचर के एंगल को गैस कटर से काटकर ही निकाला गया था। </p>
<p><strong>कई जगह पर किया अंतराल कम</strong><br />शहर में कई सरकारी विभाग ऐसे हैं जहां पहले काऊ कैचर की एंगल के बीच अंतराल अधिक था। वहां पैर फंसने की घटनाएं होने व कई जगह पर सावधानी के तौर पर ही उस अंतराल को कम करने के लिए उन एंगल के बेच लोहे के सरिये लगाए गए हैं। जबकि कई जगह पर कम अंतराल वाले काऊ कैचर लगाए गए हैं। कलक्ट्री परिसर के मेन गेट पर लगे काऊ कैचर के बीच-बीच में लोहे के सरिये लगाकर अंतराल को कम किया गया। उसके बाद से वहां पैर फंसने की घटना नहीं हुई।</p>
<p><strong>मवेशियों को रोकना मकसद</strong><br />नगर निगम के अधिकारियों का कहना है कि काऊ कैचर संबंधित विभाग का ही मामला है। काऊ कैचर लगाने का मकसद ही मवेशियों को कार्यालय परिसर में घुसन से रोकना है। हालांकि काऊ कैचर की एंगल में अंतराल कम होने से मवेशी आसानी से प्रवेश कर जाता है। लेकिन उससे लोगों को नुकसान होना खतरनाक है। पहले लगे काऊ कैचर की तुलना में वर्तमान में जो नए काऊ कैचर लग रहे हैं उनमें लोगों की परेशानी को ध्यान में रखकर ही कम गैप वाले लगाए जा रहे हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Dec 2022 16:16:46 +0530</pubDate>
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                <title> अदालत परिसर में खड़े वाहन बन रहे हैं परेशानी का सबब </title>
                                    <description><![CDATA[अदालत परिसर में वकील, पक्षकार, न्यायिक अधिकारी व तारीख पेशी पर आने वाले लोग स्टैंड पर वाहन को खड़ा करने के स्थान पर कोर्ट परिसर में जहां भी जगह खाली दिखाई देते ही वहीं तिरछे आड़े  खड़े कर देते हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vehicles-standing-in-the-court-premises-are-becoming-a-cause-of-trouble/article-32741"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/adalat-parisar-mei-khade-vahan-ban-rahe-hai-pareshani-ka-sabab....rawatbhata-news-kota..19.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अदालत परिसर में दुपहिया व चौपहिया खडेÞ वाहन पर परेशानी का सबब बनते जा रह हैं। इन वाहनों के खड़े होने से आम जन, पक्षकारों, वकीलों  तथा न्यायिक अधिकारियों व न्यायिक कर्मचारियों  को आवागमन करने में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई बार वाहनों से टकराने से घायल भी हो रहा हैं। वाहनोें के अपने यथा स्थान खड़ें नहीं किए जाने से आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कोर्ट परिसर में गेट नं.1 से एडीजे 2 तथा पुराने सुलभ कॉप्लेक्स से लेकर डीजे कोर्ट के सामने वाहनों की लंबी कतारें लग रही हैं। जिससे न्यायिक अधिकारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। अदालत परिसर में वकील, पक्षकार, न्यायिक अधिकारी व तारीख पेशी पर आने वाले लोग स्टैंड पर वाहन को खड़ा करने के स्थान पर कोर्ट परिसर में जहां भी जगह खाली दिखाई देते ही वहीं तिरछे आड़े  खड़े कर देते हैं। </p>
<p><strong> गेट नंबर एक खुला होने से अंदर आते हैं वाहन </strong><br /> जानकारी के अनुसार अदालत परिसर में वर्तमान में दो करोड़ की लागत से निर्माण कार्य चल रहा  है। जिसके चलते गेट नंंबर-1 खुला रहता है। गेट को केवल निर्माण कार्य के दौरान सामान लाने -ले जाने के लिए ही खुला गया है, लेकिन गेट खुला होने के कारण वकील, पक्षकार तथा न्यायिक कर्मचारी और पेशी पर आने वाले लोग, पुलिस कर्मी वाहनों के लेकर अंदर आ जाते हैं,जिससे  परिसर में वाहनोें की लंबी कतारें लग रही हैं। जिससे आवागमन में परेशानी तो होती ही है, लेकिन कई बार वाहनों के कारण कोर्ट में जाने के लिए जगह तक नहीं मिल रही है। एक तरफ कोर्ट में चल रहे निर्माण कार्य के कारण जगह कम है तथा दूसरी तरफ वाहनों के खड़े होने से  तिल भर जगह नहीं बच रही है। जबकि  पूर्व अभिभाषक परिषद के अध्यक्ष मनोज कुमार पुरी ने वर्ष 2019 में वकीलों की असुविधा को देखते हुए कोर्ट परिसर के पास ही निजी स्कूल में पार्किग की व्यवस्था की तथा गेटों को बंद करा दिया था। इसके अलावा गेट नंबर तीन के सामने भी वाहनों को पार्किंग व्यवस्था की गई थी। इसके बावजूद  कोर्ट में वाहनों को खड़ा किया जा रहा है। </p>
<p><strong>गेट नं. 1 बंद कराने की करेंगे व्यवस्था</strong><br /> कोर्ट परिसर में निर्माण कार्य चलने के कारण गेट नंबर एक को खोला गया है। गेट खुला होने से वकील, पक्षकार तथा अन्य लोग वाहन खड़े करते हैं। अब सोमवार से गेट को बंद कराने की व्यवस्था की जाएगी।  परिसर में वाहनों के खड़े होने तथा गंदगी से परेशानी हो रही है। <br /><strong>- प्रमोद कुमार शर्मा, अध्यक्ष अभिभाषक परिषद</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> पार्किंग के लिए जनवरी 2019 में सेंट जोन स्कूल के खाली मैदान में की गई थी। इसके लिए कोर्ट से स्टे भी लिया गया है। इसके साथ ही कोर्ट के सभी गेटों को बंद कर दिया गया था और वाहनों को निर्धारित पार्किंग स्टैंड पर खड़ा कराया जा रहा था। वर्तमान में अभिभाषक परिषद की और से सख्ती नहीं किए जाने से वाहन खड़े हो रहे हैं तथा निर्माण कार्य के दौरान केवल संबंधित वाहनों को ही इजाजत होनी चाहिए थी, लेकिन ऐसा नहीं हो रहा है। वाहनों के उल्टी सीधे खड़े होने से आवागमन में परेशानी हो रही है। जब वकील ही परेशानी स्वयं पैदा कर रहे हैं तो क्या किया जा सकता है। इस मामले में सख्ती किए जाने तथा गाइड लाइन की भी सख्त पालना परिषद को करानी चाहिए। <br /><strong>- मनोजपुरी, पूर्व अध्यक्ष अभिभाषक परिषद </strong></p>
<p>जब तक निर्माण कार्य चल रहा है  तो भी  परिषद को वाहनों को सख्ती से निर्धारित पार्किंग में ही वाहनों को खड़ा करवाना चाहिए। इसके लिए अभिभाषक परिषद ही जिम्मेदार है। <br /><strong>-लोकेश कुमार सैनी, एडवोकेट </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 19 Dec 2022 15:40:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>सर्दी के साथ में खटारा बसों में सफर की मजबूरी </title>
                                    <description><![CDATA[अधिकांश बसों की खिड़कियों लॉक खराब हो चुके है। कई बसों के गेट भी ठीक से बंद नहीं होते है। कोटा उदयपुर मार्ग पर सुबह 5 बजे व 5.30 बजे चलने वाली डिलक्स बसों की सीटे खराब है। वहीं कांच ढ़ीले होने से ठंडी हवा आती है जिससे यात्रियों को ठिठुरते हुए यात्रा करनी पड़ती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/compulsion-to-travel-in-khatara-buses-with-winter/article-32504"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/sardi-k-saath-mei-khatara-buses-mei-safer-ki-mazboori..kota-news..16.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दी में रोडवेज की खटारा बसों में सफर करना किसी सजा से कम नहीं है। रोडवेज यात्रियों से किराया डिलक्स और एक्सप्रेस का ले रही है लेकिन सफर खटारा बसों में करा रहा है। सुबह तेज सर्दी में यात्रा करने वालों के लिए बस की खिड़कियों से आती ठंडी हवा जी का जंजाल बन रही है। पिछले एक दशक से कोटा रोडवेज आगार में बेड नई बसे नहीं आने से लोगों पुरानी खटारा बसों को ही मरम्मत करके चलाया जा रहा है। यात्रियों इन खटारा बसों में सफर करना पड़ रहा है। बसे इतनी पुरानी हो चुकी आए दिन बे्रक डाउन हो रही है। कोटा उदयपुर व कोटा जयपुर मार्ग एक्सप्रेस बस आए दिन खराब हो जाती है जिससे यात्रियों को अपने गंतव्य तक समय पर नहीं पहुंच पा रहे है। रोडवेज यात्रियों से एक्सप्रेस और डिलक्स बसों का किराया वसूल रही है और सफर लोकल खटारा बसों में करा रही है। रोडवेज की बसों के कांच ढीले हो चुके है। बस के रफ्तार पकड़ते ही खिड़किया खुल जाती है और ठंडी हवा बस में यात्रियों को परेशान करती है। यात्री बार बार खिड़की बंद करता है थोडी देर बार फिर खिड़की खुल जाती है। अधिकांश बसों खिड़कियों लॉक खराब हो चुके है। कई बसों के गेट भी ठीक से बंद नहीं होते है। कोटा उदयपुर मार्ग पर सुबह 5 बजे व 5.30 बजे चलने वाली डिलक्स बसों की सीटे खराब है। वहीं कांच ढ़ीले होने से ठंडी हवा आती है जिससे यात्रियों को ठिठुरते हुए यात्रा करनी पड़ती है। शिकायत  करने के नंबर मिटा देने से यात्री डिपो मैनेजर को शिकायत भी नहीं कर पा रहे है।  ऐसे यात्री अपने को ठगा- ठगा सा महसूस कर रहा है। बसों की कमी से अभी 67  शेड्यूल ही संचालित हो रहे है। </p>
<p>पिछले साठ साल में राजस्थान पथ परिवहन निगम ने तीन बस स्टैंड का सफर तय किया । लेकिन जिस प्रकार से शहर की आबादी बढ़ी उसके अनुसार ना तो बस स्टैंड का विस्तार हुआ ना ही बसों का। आज कोटा देश में शिक्षा नगरी के नाम से अपनी अलग पहचान बनाए हुए है । लेकिन यहां आज भी परिवहन के संसाधन सीमित ही हैं। आमजन के लिए रोडवेज सस्ता व सुगम साधन है  लेकिन कोटा का दुर्भाग्य ही कहें ही यहां के बस स्टैंड में 157 बसें हुआ करती थी वह अब घटकर महज 70 रह गई है। यह कोटा की आबादी के हिसाब से बहुत कम है। संजय नगर में बना नया रोडवेज बस स्टैंड तो विशाल बन गया लेकिन अभी यहां से बसें कम ही संचालित होती है। जिससे लोगों को नयापुरा जाना मजबूरी बना हुआ है। बूंदी, जयपुर, नैनवां, टौंक, उनियारा, झालावाड़, बारां की बसें अभी नयापुरा बस स्टैंड की सवारियों से पूरी बस भरती है। </p>
<p><strong>छह दशक पहले 157 बसे संचालित होती आज 70 ही रह गई</strong><br />छह दशक पहले तक  रोडवेज बसों का संचालन श्रीपुरा से हुआ करता था। कालांतर में शहर का विकास हुआ जिससे श्रीपुरा का बस स्टैंड छोटा पड़ने लगा। 1964 में  नयापुरा बस स्टैंड से रोडवेज बसों का संचालन होना शुरू हुआ । यहां पर करीब 157 बसों का विभिन्न रूटों पर संचालन होता था। 1964 में जब नयापुरा बस स्टैंड के आंगन में पहली बस ने कदम रखा तो काफी खुला-खुला शहर था, उसके बाद शहर बढ़ता गया, लोग बढ़ते गए। जरूरत बढ़ती गई और बसों को खड़ा रहने की जगह कम पड़ने लगी। जनवरी 2007 से बड़ा बस स्टैंड बनाने की योजना बनने लगी। 2007-2008 में संजय नगर में रोडवेज का नया बस स्टैंड तैयार हुआ । करीब 49 साल तक नयापुरा बस स्टैंड लोगों के आवागमन के लिए बसें उपलब्ध कराता आ रहा था। बाद में नया बस स्टैंड बनने के बाद इसको जोनल बस स्टैंड बना दिया। लेकिन आज भी संजय नगर का  नया बस स्टैंड पूरी तरह से आबाद नहीं होने से नयापुरा से अधिकांश बसे संचालित हो रही है। जिससे शहर की आधी आबादी बसों के लिए अब भी नयापुरा बस स्टैंड पर आश्रित है। </p>
<p><strong>स्टॉफ व बसों की कमी से व्यवस्था की टूट चुकी कमानियां </strong><br />रोडवेज में चालकों और परिचालकों की कमी के चलते कोटा के विभिन्न रूटों पर बसों को कम कर दिया गया है।  इस कारण यात्रियों को काफी मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।  पहले कोटा डिपो में रोडवेज की 120 बसें थी जो अब 70 रह गई हैं।  इतना ही नहीं रोडवेज के पास मैकेनिक के 96 पद हैं, लेकिन फिलहाल 65 कार्यरत हैं।  इस कारण इन 70 बसों की रूटिंग में होने वाली चैकिंग भी समय पर नहीं हो पाती है, जिससे कई बार बसें रास्ते में ही खराब हो जाती है और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। रोडवेज में नई बसों और कर्मचारियों की भर्ती को लेकर रोडवेज कर्मियों के विभिन्न संगठन लंबे समय से विरोध प्रदर्शन कर नई भर्ती की मांग कर रहे है। कोटा डिपों में स्टॉफ कम होने के बावजूद राजस्व में पिछले सात माह से जोनल आॅफ मंथ आ रहा है। उसके बावजूद सरकार स्टाफ बढ़ाने को लेकर गंभीर नजर नहीं आ रही है। जिसका खामियाजा यात्रियों को उठाना पड़ रहा है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br /> वर्तमान 85 शेड्यूल में 67 शेड्यूल पर ही बसों का संचालन कर पा रहे है।  पांच नई बसों की स्वीकृति तो हो गई है लेकिन अभी तक बसे नहीं मिली है। जिन रूट पर बसे ब्रेकडाउन हो रही है वहां दूसरी बसे लगा दी है।<br /><strong>- अजय कुमार मीणा, मुख्य आगार प्रबंधक कोटा </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 16 Dec 2022 15:03:42 +0530</pubDate>
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                <title>सार्वजनिक स्थानों व प्रमुख बाजारों में नहीं हैं सुविधाघर</title>
                                    <description><![CDATA[शहर के बस स्टैंड, भौंरा रोड़ पर दूर-दराज के गांवों से निजी साधन से प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं खरीदारी करने को आती हंै। सार्वजनिक स्थानों पर सुलभ शौलाचय नहीं होने से काफी परेशानी होती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/there-are-no-facilities-in-public-places-and-major-markets/article-32144"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/sarvajanik-sthano-va-pramukh-bazaro-mei-nahi-hai-suvidhaghar..sultanpur-news-kota-..12.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। नगर में कई मार्गों व सार्वजनिक स्थानों पर सुलभ शौलाचय नहीं होने से आमजन को काफी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। इसके बावजूद लम्बे समय से जिम्मेदार सुलभ घर निर्माण करवाने में दिलचस्पी नहीं दिखा रहे हैं। अब नगर पालिका प्रशासन से ग्रामीणों ने समस्या समाधान की उम्मीद लगाई है। पालिका ने समस्या समाधान के लिए अस्थायी सुविधा घर मंगवाए हैं। जानकारी के अनुसार नगर के नवीन बस स्टैंड, भौंरा रोड़, विद्यापीठ समेत कई जगह पर सुलभ शौचालय की सुविधा नहीं होने से नगर सहित दूरदराज के गांवों, शहरों एवं ढाणियों से आने वाले लोगों को परेशान होना पड़ता है। सड़क मार्ग पर संचालित दुकानों के दुकानदारों को भी लघुशंका के लिए जगह तलाशनी पड़ती है। हालांकि यहां पुराने बस स्टैंड पर एक सुविधा घर है, लेकिन वह भी जर्जर हो रहा है। यहां महिलाओं के लिए कोई सुविधा नहीं है। लोगों एवं दुकानदारों का कहना है कि नगर पालिका प्रशासन की लोगों को सुविधा मुहैया करवाने की जवाब देही होती है। उन्होंने पालिका से समस्या का समाधान कर सुविधा मुहैया करवाने की मांग की है। </p>
<p><strong>मजबूरन जाना पड़ता है दूर</strong><br />विद्यापीठ रोड के दुकानदार श्याम गौड, नरेश नागर, बसन्ती लाल सुमन, ओम नागर व गिरिराज धन्वन्तरी आदि ने बताया कि विद्यापीठ रोड पर तीन से अधिक बैंकों के साथ ही उप तहसील का रास्ता गुजरता है। काफी आवाजाही रहती है। लेकिन यहां पर सुविधा घर नहीं है। मजबूरन काफी दूर हॉट चौक में जाना पड़ता है। इसी तरह भौंरा रोड़ के दुकानदार बाबूलाल सुमन, रामस्वरूप नामा, पुरुषोतम नागर आदि ने बताया कि भौंरा रोड पर भी काफी अंदर जाकर सुविधाघर बनाया हुआ है। ऐसे में काफी परेशानी होती है। राजकीय आईटीआई, विद्युत विभाग व गौशाला के पास भी कोई सुविधाघर नहीं है। मुख्य मार्ग पर नाले पर ही सुलभ घर का निर्माण करवा दिया जाए तो स्थानीय दुकानदारों एवं राहगीरों को काफी हद तक लाभ मिल सकता है। </p>
<p><strong>महिलाओं को होना पड़ता है शर्मसार</strong><br />नगर में पुरुष तो कहीं भी व्यवस्था कर लेते है। लेकिन इन मार्गों पर सुविधा घर नहीं होने से महिलाओं को शर्मसार होना पड़ता है। शहर के बस स्टैंड, भौंरा रोड़ पर दूर-दराज के गांवों से निजी साधन से प्रतिदिन बड़ी संख्या में महिलाएं खरीदारी करने को आती हंै। इन्हें खुले में लघुशंका जाने के दौरान काफी शर्मसार होना पड़ता है।  </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर वासियों की हर समस्या का समाधान किया जा रहा है। पालिका में अस्थायी सुविधाघर भी मंगवा लिए गए हैं। जगह तलाश कर व चिन्हित कर सुविधाघर निर्माण करवाने की कवायद की जाएगी। जिससे आमजन व दुकानदारों को परेशानी नहीं हो। <br /><strong>-हेमलता शर्मा, पालिकाध्यक्ष, नगर पालिका, सुल्तानपुर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 12 Dec 2022 15:09:50 +0530</pubDate>
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                <title>स्पीड ब्रेकर ने बढ़ाया कमर दर्द</title>
                                    <description><![CDATA[स्पीड ब्रेकर को हटवाने के लिए नगरवासी कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इन्हें नहीं हटाया गया है। जिसके चलते नित नए रीड की हड्डी के मरीज सामने आ रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/speed-breaker-increased-back-pain/article-31873"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-12/speed-breaker-nei-badhaya-kamar-dard...bhawanimandi-news-jhalawar..9.12.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>भवानीमंडी। नगर में काफी शिकायतों के बाद भी नगरवासियों को स्पीड ब्रेकर से मुक्ति नहीं मिली  है।  जहां नगर में बेलगाम वाहनों पर लगाम कसने और राहगिरों को हादसे से बचाने के लिए स्पीड ब्रेकर बनाए जाते हैं। वही भवानीमंडी कस्बे में स्पीड ब्रेकर ही नगरवासियों की जान के दुश्मन बने हुए हैं जहां अमानक तरीके से बने हुए स्पीड ब्रेकर नगर वासियों के लिए परेशानी का सबब बन चुके हैं। गाड़ियों की स्पीड कम करने के लिए बने ब्रेकर अब लोगों की हड्डियां तोड़ रहे हैं, स्पीड ब्रेकर को हटवाने के लिए नगरवासी कई बार मांग कर चुके हैं, लेकिन अभी तक इन्हें नहीं हटाया गया है। जिसके चलते नित नए रीड की हड्डी के मरीज सामने आ रहे हैं। वही यह स्पीड ब्रेकर केवल मुख्य मार्गो तक ही सीमित नहीं है हर छोटी-बड़ी गलियों में भी दर्जनों स्पीड ब्रेकर बने हुए हैं।</p>
<p><strong>ये है इनका कहना</strong><br /> स्पीड ब्रेकर के कारण चोटिल मरीज कमल सावला, दिशा शर्मा ने बताया कि छोटी गलियों में भी कुछ फीट की दूरी पर ही प्लास्टिक के ब्रेकर लगे हुए हैं, जहां बार-बार गाड़ी के उछलने से पीठ दर्द की समस्या आम बन चुकी है। </p>
<p>  नगर से स्पीड ब्रेकर के कारण रोजाना 40 से 50 रोगी हड्डी में चोट के आ रहे हैं, जहां प्लास्टिक की स्पीड ब्रेकर के कारण वाहन तेजी से उछलते हैं, जिससे बड़े हादसे का भी अंदेशा बना रहता है। <br /><strong>-डॉ नवीन नागर, फिजियोथैरेपिस्ट</strong></p>
<p> स्पीड ब्रेकर को लेकर काफी समय से शिकायतें सुनने को मिल रही है, जिस पर एक सप्ताह के भीतर ही प्लास्टिक के स्पीड ब्रेकर हटवाकर कंक्रीट के बने स्पीड ब्रेकर लगाए जाएंगे व उन पर डामरीकरण करवाया जाएगा। <br /><strong>-मनीष मीणा, अधिशाषी अधिकारी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 09 Dec 2022 16:14:05 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा उत्तर वार्ड 4 : इन्दिरा मार्केट,लाल बुर्ज चौराहे  के वासी समस्याओं से त्रस्त </title>
                                    <description><![CDATA[नाले-नालियों के हालात इस कदर बदतर  हैं कि सफाई के अभाव में कचरा व कीचड़ जमकर अटा पड़ा हैं। वर्षो से मुख्य सङक पर वाहनों को खङा करने के लिए  पार्किंग  की अच्छी व्यवस्था थी पर कुछ लोगों ने पार्किग स्थल पर अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-kota-north-ward-4--residents-of-indira-market--lal-burj-square-are-plagued-by-problems/article-29812"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-11/ward-4-indira-market,-lal-burj-chaurahe-ke-waasi-samasyao-se-trast...kota-news-16.11.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। वार्ड नम्बर 4 इन्दिरा मार्केट, लाल बुर्ज चौराहा के रहवासी मूलभूत समस्याओं से परेशान हैं। टॉयलेट को लेकर  स्थिति बदतर हैं, सफाई,नालें-नालियों में गंदगी व मुख्य सड़क पर  खुले डीपी के विद्युत तारों से हादसे को लेकर आमजन डरे हुए और परेशान हैं। वार्डवासियों ने बताया कि मोहल्ले में सफाई कर्मी नियमित न आकर कभी -कभार आते हैं जिससे गली मोहल्लों में कचरा बिखरा पड़ा हैं। कचरा गाड़ी भी दो-चार दिन में एक बार आती हैं,जिससे घरों के लोग कचरा  निकालकर प्लास्टिक थैलियों में भरकर बाहर डाल देते हैं। अब कचरा गाड़ी तो नियमित आती नहीं व कचरा उड़-उड़कर गलियों में फैल जाता हैं ।</p>
<p><strong>पार्किग स्थल पर लोगों ने किया कब्जा</strong><br />वर्षो से मुख्य सङक पर वाहनों को खङा करने के लिए  पार्किंग  की अच्छी व्यवस्था थी पर कुछ लोगों ने पार्किग स्थल पर अतिक्रमण कर कब्जा कर लिया हैं। जिससे वाहनों की पार्किग को लेकल बङी समस्या खङी हो गई हैं। यदि मोहल्लें की गलियों या मार्केट की गलियों में भी वाहन खङा करें तो पहले से ही अतिक्रमण को लेकर गलियां संकरी पड़ी  हैं।</p>
<p><strong>मोहल्लें की गलियां बिखरे कचरे से बदसूरत सी बनी रहती हैं।</strong><br />इसकों लेकर वार्डवासियों नें कई दफा पार्षद को अवगत भी कराया पर स्थिति ज्यों की त्यों बनी हैं। अभी तक कोई कार्यवाही नहीं की गई हैं। मोहल्लें की नाले-नालियों के हालात इस कदर बदतर  हैं कि सफाई के अभाव में कचरा व कीचड़ जमकर अटा पड़ा हैं। जिससे दुकानों तक इसकी दुर्गन्ध सहित मच्छरों की भरमार बढने से बिना पंखे दुकानों-घरों में रूकना मुश्किल सा हो गया हैं। सङक के दोनों ओर पेयजल निकासी को लेकर बने नालों के यही हालात हैं। नालों पर लोहे के सरियों से जालीनुमा ढक्कन बनाकर लगे हैं।  बस इनसे देखने पर ही पता चल पाता हैं कि नाले साफ हैं या मलबें से अटे पड़े हैं।</p>
<p> इन्द्रा मार्केट से सङक के उस पार विद्युत विभाग ने घोर लापरवाही दिखाई देती है। विद्युत डीपी को नीचे जमीन पर  बिल्कुल घनी आबादी क्षैत्र में रख दी हैं व इससे निकले गए तार भी नंगे पड़े  होने से कभी हादसा हो जाए तो इसमें कोई अतिश्योक्ति नहीं होगी।वार्ड में अतिक्रमण व वाहनों की पार्किग को लेकर बङी समस्या हैं।व सार्वजनिक टॉईलेट की हालत खराब हैं।जर्जर के साथ गंदगी व खाली शराब के पव्वें,अद्धे व खाली शिशीयां पङी रहती हैं।जिससे लघु शंका के लिए दूर-दराज जाना पड़  रहा हैं।<br /><strong>-मुकेश भटनागर,कैथूनीपोल व्यापार संघ मण्डल अध्यक्ष स्थानीय वार्ड वासी।</strong></p>
<p> सफाई के अभाव में गली मौहल्लों मे गंदगी बनी हैं ',नाले की सफाई के अभाव में मलबे से नाले अटे पङे हैं। लोग बदबू से परेशान हैं। <br /><strong>-राजेन्द्र सोनी , सर्फा दुकानदार साथानीय वार्ड वासी।</strong></p>
<p><strong>इनका कहना हैं</strong><br />इस वार्ड का क्षेत्रफल तीन-चार पार्षदों के अधीन आता हैं। मेरे वार्ड में टायलेट को लेकर समस्या जरूर हैं।  4-5रोज से वार्ड की तरफ मेरा जाना नहीं हआ हैं,जाकर देखता हूं व यदि समस्या हैं तो शीध्र समाधान करवाया जाएगा। <br /><strong>अजय कुमार सुमन, पार्षद वार्ड नम्बर 04</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Nov 2022 13:08:50 +0530</pubDate>
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