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                <title>america's - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अमेरिका की विश्व को सीधी धमकी</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका ने विश्व के सभी देशों को साफतौर पर कहा है कि वो रूस से हथियारों से संबंधित कोई भी बड़ा समझौता करने से परहेज करें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-s-direct-threat-to-the-world--the-advice--avoid-defense-deal-with-russia-in-the-current-situation/article-7841"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rajnath-singh.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका ने विश्व के सभी देशों को साफतौर पर कहा है कि वो रूस से हथियारों से संबंधित कोई भी बड़ा समझौता करने से परहेज करें। भारत और अमेरिका के बीच हुई टू प्लस टू की वार्ता के बाद हुई साझा प्रेस कांफ्रेंस में अमेरिका की तरफ से ये बात कही गई है।</p>
<p><br />आपको बता दें कि भारत के रक्षा मंत्री पांच दिवसीय यात्रा पर वाशिंगटन के दौरे पर हैं। वहीं इसी दौरान विदेश मंत्री एस जयशंकर भी वहां पर मौजूद थे। टू प्लस टू वार्ता के दौरान दोनों देशों के बीच कई मुद्दों पर वार्ता हुई है। अमेरिका के विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन ने साझा प्रेस कांफ्रेंस के दौरान कहा कि वो सभी देशों से इस बात की अपील करते हैं कि रूस के साथ हथियारों का कोई नया समझौता न करें। उन्होंने कहा कि खासतौर से रूस जिस तरह से यूक्रेन पर जंग थोपे हुए है उसको देखते हुए ये और भी जरूरी हो जाता है। प्रेस कांफ्रेंस के दौरान ब्लिंकन से ये भी पूछा गया कि क्या रूस से मिसाइल डिफेंस सिस्टम एस-400 की खरीद के बाद अमेरिका भारत के खिलाफ प्रतिबंध लगाने पर विचार करेगा। इस सवाल के जवाब में ब्लिंकन ने कहा कि वो फिलहाल नियमों के तहत प्रतिबंधों को लगाने या न लगाने पर काम कर रहे हैं। उन्होंने ये भी माना कि भारत और रूस के संबंध काफी पुराने और बेहद मजूबत हैं। भारत और रूस के बीच हथियारों की खरीफ फरोख्त का एक लंबा इतिहास रहा है। ब्लिंकन का कहना था कि ये तब संभव है जबकि हम एक दूसरे के साझेदार बनना चाहें। मौजूदा समय में हम दोनों ही ये चाहते हैं और अमेरिका भारत का सुरक्षा साझेदार बनना चाहता है। इस साझा प्रेस कांफ्रेंस को संबोधित करते हुए अमेरिकी रक्षा मंत्री लायड आस्टिन ने कहा कि भारत के साथ अमेरिका की बातचीत में सेना को अपग्रेड करने पर भी बात हुई है। अमेरिका भारत को सस्ती कीमत पर हथियार बेचने की तैयारी कर रहा है। भविष्य की तैयारियों पर पूछे गए एक सवाल के जवाब में आस्टिन ने कहा कि वो इस बारे में भारत से संपर्क में है। अमेरिका देखेगा कि भारत की सेना को कैसे और अधिक अपग्रेड करने में अपनी मदद दे सकता है। बता दें कि मौजूदा दौर में चल रहे यूक्रेन-रूस विवाद में भारत ने खुद को तटस्थ बनाए रखा है। भारत ने रूस के खिलाफ अब तक लगाए गए प्रतिबंधों पर अपनी सहमति नहीं दी है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Apr 2022 13:29:06 +0530</pubDate>
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                <title>अमेरिका की मिनटमैन-3 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल परीक्षण रद्द</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन युद्ध के बीच अमेरिका ने रद्द किया मिसाइल परीक्षण]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/america-s-minuteman-3-intercontinental-ballistic-missile-test-canceled--decision-to-reduce-nuclear-tension-with-russia-amid-ongoing-military-conflict-in-ukraine/article-7228"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/missile-tests-.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिका को यूक्रेन-रूस के बीच युद्ध और तनाव के कारण मिसाइल परीक्षण रद्द करना पड़ा।अमेरिका ने यूक्रेन में जारी सैन्य संघर्ष के बीच रूस के साथ परमाणु तनाव को कम करने के लिए अपनी मिनटमैन-3 अंतरमहाद्वीपीय बैलिस्टिक मिसाइल (ICBM) के एक नियोजित परीक्षण-प्रक्षेपण को रद्द कर दिया है। अमेरिकी वायु सेना ने शनिवार को यह जानकारी दी। <br /><br />अमेरिकी वायु सेना के प्रेस डेस्क ने शिन्हुआ के साथ एक फोन कॉल में इसकी पुष्टि करते हुए कहा कि यह निर्णय रूस के साथ गलतफहमी से बचने के लिए लिया गया था। उन्होंने कहा कि दो मार्च को परीक्षण स्थगित करने का कारण भी यही था। वायु सेना के प्रवक्ता एन स्टेफनेक ने बाद में ईमेल के माध्यम से शिन्हुआ को भेजे गए एक बयान में कहा कि वायु सेना विभाग ने हाल ही में मार्च 2022 के लिए निर्धारित एलजीएम-30जी मिनटमैन-3 मिसाइल की नियमित रूप से नियोजित परीक्षण उड़ान को रद्द कर दिया। यूक्रेन में चल रहे रूसी आक्रमण के दौरान गलत व्याख्या या गलत संचार से बचने के लिए पहले भी लॉन्च में देरी हुई थी। इसी कारण से इसे रद्द भी किया गया।</p>
<p> स्टेफनेक ने कहा कि हमारी अगली नियोजित परीक्षण उड़ान इस साल के अंत में है। विभाग को अमेरिका के रणनीतिक बलों की तैयारी पर भरोसा है। रूसी राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन ने फरवरी में अपने देश के परमाणु बलों को हाई अलर्ट पर रहने का आदेश दिया, जिस कारण वाशिंगटन को संभावित परमाणु संकट से बचने के लिए कदम उठाने पड़े।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 18:11:53 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>इमरान खान के आरोपों पर अमेरिका का पलटवार, कहा, 'आरोपों में नहीं कोई सच्चाई'</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने भी इन आरोपों का खंडन किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-s-counterattack-on-imran-khan-s-allegations--said--no-truth-in-the-allegations/article-7149"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/pak.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। इमरान खान के आरोपों पर अमेरिका ने पलटवार किया है। अमेरिकी राष्ट्रपति कार्यालय 'व्हाइट हाउस' ने गुरुवार को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान के उन दावों को सिरे से नकार दिया, जिसमें उन्होंने कहा है कि उनकी सरकार को गिराने के प्रयासों के पीछे विदेशी एजेंसियों के हाथ हैं। व्हाइट हाउस की संचार निदेशक केट बेडिंगफील्ड ने ब्रीफिंग में कहा कि उनके आरोपों में कोई सच्चाई नहीं है।<br /><br />उन्होंने कहा कि गुरुवार शाम को खान द्वारा राष्ट्र को संबोधित किये जाते वक्त ऐसा लगा कि उन्होंने जानबूझकर जुबान फिसलने की गलती की और कह डाला, ''अमेरिका...मेरा मतलब...एक विदेशी ताकत हमारी स्वतंत्र विदेश नीति से नाराज है।''<br /><br />अमेरिकी विदेश विभाग के प्रवक्ता नेड प्राइस ने भी इन आरोपों का खंडन किया है। उन्होंने कहा,''हम पाकिस्तान की गतिविधियों पर पैनी नजर बनाए हुए हैं और वहां के संविधान और कानून का समर्थन करते हैं। इन आरोपों के पीछे कोई सच्चाई नहीं है।''<br /><br />अविश्वास प्रस्ताव से पहले देश में गंभीर राजनीतिक उथल-पुथल के बीच खान ने गुरुवार को स्पष्ट रूप से पद छोडऩे से इनकार कर दिया और उनकी चुनी हुई सरकार को गिराने के प्रयास को विदेशी साजिश करार दिया। खान ने कहा,''लोग मुझे इस्तीफा देने के लिए कह रहे हैं। मैं बताना चाहता हूं कि क्रिकेट में मैं आखिरी गेंद तक खेलता था। नतीजा कुछ भी हो, मैं और ताकतवर बनकर उभरूंगा।''<br /><br />उन्होंने अपने राजनीतिक विरोधियों को 'देशद्रोही' करार देते हुए कहा कि आने वाली पीढिय़ां उन्हें नेशनल असेंबली में रविवार को जो कुछ भी होने जा रहा है उसके लिए कभी माफ नहीं करेगी। उन्होंने कहा, ''याद रखना, लोग आपको कभी माफ नहीं करेंगे। लोग ध्यान रखेंगे कि आपने अपना देश बेच दिया। जीवन भर कोई आपको माफ नहीं करेगा। हमारी आने वाली पीढिय़ां आपको कभी माफ नहीं करेंगी। क्या आपको लगता है कि मैं चुप रहूंगा? मैं तब तक लड़ूंगा, जब तक मेरे शरीर में खून है।''</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 01 Apr 2022 14:02:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>अमेरिका का रूस की सेना को लेकर बड़ा दावा: रूस जॉर्जिया से होकर यूक्रेन में भेज रही सेना </title>
                                    <description><![CDATA[ यूक्रेन में रूसी सैन्य अभियान की शुरुआत 24 फरवरी को हुई थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/america-s-big-claim-about-russia-s-army--russia-is-sending-troops-to-ukraine-via-georgia/article-6759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/russia-army.jpg" alt=""></a><br /><p>वाशिंगटन। अमेरिकी प्रतिरक्षा विभाग के मुख्यालय पेंटागन ने पाया है कि डोनबास क्षेत्र में अपने हमले का समर्थन करने के लिए रूस जॉर्जिया से यूक्रेन में अपनी सेना भेज रही है। एक वरिष्ठ अमेरिकी रक्षा अधिकारी ने इसकी जानकारी दी। अधिकारी ने एक प्रेस (एजेंसी) के दौरान कहा,''हमें जॉर्जिया से सेना भेजने के कुछ संकेत मिले हैं। हमें जॉर्जिया में कुछ सैनिकों की गतिविधि भी देखने को मिली है। हालांकि हमें इसकी सही संख्या नहीं पता है।''<br /><br />इस दौरान, पेंटागन के अधिकारी ने यह स्पष्ट नहीं किया कि उन्होंने जॉर्जिया का नाम क्यों लिया है क्योंकि यहां कोई रूसी सेना नहीं है। रक्षा विभाग के प्रेस केंद्र ने इस मुद्दे पर स्पूतनिक की जांच का तुरंत कोई जवाब नहीं दिया।उल्लेखनीय है कि यूक्रेन में रूसी सैन्य अभियान की शुरुआत 24 फरवरी को हुई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 13:05:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>मदद के हाथ</title>
                                    <description><![CDATA[अमेरिका के रुख की अनदेखी करके भारत ने अफगानिस्तान की मदद के लिए अपने हाथ बढ़ा दिए हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%AE%E0%A4%A6%E0%A4%A6-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A4%BE%E0%A4%A5/article-3144"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/32.jpg" alt=""></a><br /><p>अमेरिका के रुख की अनदेखी करके भारत ने अफगानिस्तान की मदद के लिए अपने हाथ बढ़ा दिए हैं। संकट से जूझ रहे वहां के नागरिकों के लिए भारी मात्रा में जीवन रक्षक दवाओं की पहली खेप भेजी है। इसके अलावा अब भारत अफगानिस्तान को 50 हजार टन अनाज और कुछ आवश्यक दवाओं की एक और खेप भेजने वाला है। यह मदद पाकिस्तान के रास्ते से जाने वाली है जिसके लिए पाकिस्तान ने अपनी सहमति दे दी है। दवाओं की पहली खेप उस विमान से भेजी गई, जो अफगान शरणार्थियों को भारत लेकर आया था। भारत अफगानिस्तान में व्याप्त संकट की अनदेखी नहीं कर सकता। अफगानिस्तान भारत का पड़ोसी देश है हालांकि अब वहां तालिबान की सरकार है। तालिबान को भारत सहित दुनिया के अनेक देश खतरनाक आतंकी संगठन मानते हैं, लेकिन वहां के नागरिकों की मदद मानवीय दृष्टिकोण से की जानी चाहिए और यही संदेश देने के लिए भारत ने मदद की पहल की है। तालिबान की सरकार बनने के बाद से भारत ने अपनी गतिविधियां लगभग रोक दी थीं, क्योंकि वह अमेरिका सहित दुनिया का रुख देख रहा था। अमेरिका नहीं चाहता था कि कोई देश अफगानिस्तान की मदद करे। लेकिन तालिबान की सरकार बनने के बाद चीन व रूस ने तालिबान की सरकार को समर्थन देना शुरू कर दिया था। यह भी भारत के लिए एक संकट था,क्योंकि चीन ने अफगानिस्तान में अपने पैर पसारने की पहल शुरू कर दी थी। इससे भारत को बड़ा खतरा पैदा हो सकता था। पाकिस्तान पहले से ही भारत से दुश्मनी भरे रिश्ते रखता आ रहा है। पाकिस्तान भी तालिबान की सरकार का समर्थक है। यदि अफगानिस्तान का झुकाव पाकिस्तान की तरफ बढ़ता है तो यह भी भारत के लिए एक संकट हो सकता है। इसलिए भारत केवल अमेरिका के रुख के साथ नहीं चल सकता। भारत अफगानिस्तान के खिलाफ खड़ा नहीं हो सकता और यह कूटनीतिक दृष्टि से भी ठीक नहीं रहता। अब भारत-रूस के रिश्ते भी मजबूत हुए हैं और भारत ने अमेरिका के विरोध के बावजूद रूस से हथियारों की खरीद की है। रूस तालिबान के प्रति नरम रुख रखता है। अब भारत ने अफगानिस्तान की मदद की तरफ हाथ बढ़ा दिए हैं और इससे वहां के लोगों को बड़ी राहत मिलेगी और उम्मीद है कि तालिबान की सत्ता भी भारत के हितों का ध्यान रखेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Dec 2021 13:07:08 +0530</pubDate>
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