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                <title>smart city - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>अंधेरे में डूबा एरोड्राम का टावर ऑफ लिबर्टी, फुटपाथ पर बिखरी केबल से करंट का खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[बारां रोड पर भी लाइटें गायब, छाया अंधेरा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/aerodrome-s--tower-of-liberty--plunged-into-darkness/article-146817"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर को एक तरफ तो पर्यटन नगरी और स्मार्ट बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ शहर के प्रमुख स्थल व मुख्य मार्ग ही अंधेरे में डूबे हुए हैं। जिससे एक ओर जहां रात के समय अंधेरा छाया हुआ है वहीं राहगीरों के लिए करंट का खतरा भी बना हुआ है। शहर के बीच स्थित एरोड्राम चौराहा। जिस पर करोड़ों रुपए खर्च कर उसे विकसित किया गया। उसके सौन्दर्यीकरण के लिए चौराहे के बीच तीन बड़ी टावरों वाला टावर ऑफ लिबर्टी बनाया गया। उस टावर की हालत यह है कि पिछले कई दिन से यहां अंधेरा छाया हुआ है। कोटा विकास प्राधिकरण की ओर से इसकी बंद लाइटों को कई बार चालू किया जा चुका है। लेकिन उसके बाद भी ये बार-बार बंद हो रही है। जनवरी में भी ये लाइटें कई दिन तक बंद रही थी। उसके बाद उनमें से कई लाइटों को कुछ समय पहले फिर से चालू कर दिया था। लेकिन वर्तमान में इसकी सभी लाइटें फिर से बंद हो गई है। जिससे यहां अंधेरा छाया हुआ है।</p>
<p><strong>पहले लेते थे सेल्फेी</strong><br />यहां से रात के समय निकलने वाले कई लोग विशेषकर बाहर से आने वाले व युवा टावर ऑफ लिबर्टी पर तंग बिरंगी रोशनी व रंग बदलती लाइटों के सेल्फद्दी लेते थे। वहीं अब ऐसा नहीं हो पा रहा है। वरन् अधिकतर लोग इसकी दुर्दशा देखकर निराश हो रहे हैं और इनक लाइटों के फिर से चालू होने का इंतजार कर रहे हैं।</p>
<p><strong>कई बार चोरी हो चुकी हैं लाइटें</strong><br />एरोड्राम चौराहे के टावर आॅफ लिबर्टी की लाइटें व बिजली का पैनल कई बार चोरी हो चुका है। जिससे केडीए द्वारा संवेदक के माध्यम से सही कराया जा चुका है। लेकिन उसके बाद भी यहां की स्थिति में सुधार नहीं हुआ है। सूत्रों के अनुसार अब तो संवेदक ने भी इसे सही करने से हाथ खड़े कर लिए हैं। साथ ही ये लाइटें केडीए के लिए भी चुनौती बनी हुई है।</p>
<p><strong>अंटाघर से एसपी कार्यालय तक अंधेरा</strong><br />शहर में वैसे तो कई मुख्य मार्ग ऐसे हैं जहां रात के समय अक्सर अंधेरा रहता है। कई जगह पर रोड लाइटें खराब होने से बंद हैं। जबकि अंटाघर चौराहे से एसपी कार्यालय तक सड़क किनारे लगी रोड लाइटों में से अधिकतर गायब हो चुकी है। साथ ही उन लाइटों के तारों की केबल फुटपाथ पर ही खुली पड़ी हुई है। बारां रोड की कॉलोनियों में रहने वालों का कहना है कि यहां लाइटें नहीं होने से रात के समतय अंधेरा रहता है। जिससे कभी भी कोई हादसा होने का खतरा बना हुआ है। वहीं फुटपाथ पर केबल खुली व कटी पड़ी होने से करंट का भी खतरा बना हुआ है।लोगों का कहना है कि इसे तुरंत सही करवाया जाए। जिससे किसी तरह का कोई हादसा न हो।</p>
<p><strong>शीघ्र ही सही करवाया जाएगा</strong><br />केडीए सचिव मुकेश चौधरी का कहना है कि एरोड्राम चौराहे की लाइटों को कई बार सही कराया जा चुका है। लेकिन ये बार-बार बंद हो रही है। कई बार केबल चोरी होने से व कई बार तकनीकी कारणों से बंद हो रही है। इसे शीघ्र ही सही करवाकर चालू किया जाएगा। वहीं बारां रोड की गायब लाइटों को दिखवाकर उन्हें भी चालू करवा दिया जाएगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Mar 2026 15:04:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बेस्ट पुडुचेरी के लिए पीएम मोदी ने 2,700 करोड़ रुपये की विकास परियोजनाओं का किया उद्घाटन और शिलान्यास, जनसभा को किया संबोधित</title>
                                    <description><![CDATA[प्रधानमंत्री मोदी ने पुडुचेरी में ₹2,700 करोड़ की परियोजनाओं का उद्घाटन किया। उन्होंने 'BEST' (व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता, पर्यटन) का मंत्र देते हुए ई-बस सेवा, कैंसर सेंटर और करासुर औद्योगिक एस्टेट राष्ट्र को समर्पित किया। इन पहलों का लक्ष्य शहरी बुनियादी ढांचे को मजबूत करना और पुडुचेरी को मेडिकल टूरिज्म का प्रमुख केंद्र बनाना है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/for-best-puducherry-pm-modi-inaugurated-development-projects-worth-rs/article-145081"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/modib-22.png" alt=""></a><br /><p>पुडुचेरी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने रविवार को केंद्र शासित प्रदेश पुडुचेरी में 2,700 करोड़ रुपये से अधिक की विभिन्न विकास परियोजनाओं का उद्घाटन और शिलान्यास किया। इस दौरान पीएम मोदी ने जनसभा को संबोधित करते हुए कहा कि यह केंद्र शासित प्रदेश उनके बेस्ट पुडुचेरी यानी व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता और पर्यटन पर केंद्रित के दृष्टि की दिशा में लगातार आगे बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि वह पुडुचेरी के अछ्वुत लोगों के बीच आकर प्रसन्न हैं। उन्होंने कहा कि आज शुरू हुईं परियोजनाएँ प्रदेश के लोगों के जीवन को सुगम बनाने और क्षेत्र में आर्थिक विकास को तेज करने में सहायक होंगी। उन्होंने कहा, जब मैं पहले यहाँ आया था, तब मैंने बेस्ट पुडुचेरी का मंत्र दिया था। बेस्ट का अर्थ व्यापार, शिक्षा, आध्यात्मिकता और पर्यटन है। पिछले साढ़े चार वर्षों में यह विजन फल दे रहा है। पुडुचेरी ने सुशासन और विकास देखा है। </p>
<p>इस अवसर पर प्रधानमंत्री ने कई महत्वपूर्ण पहलों का उद्घाटन किया, जिनमें पीएम ई-बस सेवा पहल के तहत ई-बसों का शुभारंभ, स्मार्ट सिटी मिशन के तहत एकीकृत कमांड और कंट्रोल सेंटर, सिटीज (सीआईटीआईआईएस ) पहल के तहत आर्थिक रूप से कमजोर वर्गों के लिए आवास इकाइयाँ, तथा पुडुचेरी सरकार की प्रमुख सीवरेज और जल आपूर्ति परियोजनाएं शामिल हैं।</p>
<p>ये परियोजनाएँ शहरी गतिशीलता में सुधार, नागरिक अवसंरचना को सुदृढ़ करने और प्रौद्योगिकी आधारित शासन के माध्यम से बेहतर सेवा वितरण सुनिश्चित करने के उद्देश्य से तैयार की गयी हैं। उच्च शिक्षा और अनुसंधान को बड़ा प्रोत्साहन देते हुए पीएम मोदी ने राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान कराईकल में कॉम्पोजिट इंजीनियरिंग ब्लॉक, डॉ एपीजे अब्दुल कलाम ब्लॉक और गंगा छात्रावास का उद्घाटन किया। इसके साथ ही उन्होंने पांडिचेरी विश्वविद्यालय में नए एनेक्सी भवनों, व्याख्यान कक्षों और छात्रावासों का भी उद्घाटन किया।  </p>
<p>प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, एक मजबूत और सशक्त युवा हमारे देश की विकास की नींव है। हम उनके सपनों को समर्थन देने के लिए काम कर रहे हैं। एनआईटी कराईकल में नया डॉ एपीजे अब्दुल कलाम इंजीनियरिंग ब्लॉक और आधुनिक छात्रावास विद्यार्थियों के लिए तकनीकी शिक्षा हासिल करने में सहायक होगी। पांडिचेरी विश्वविद्यालय में अवसंरचना उन्नयन बेहतर शिक्षण वातावरण और अनुसंधान के अवसर पैदा करेगा।  </p>
<p>स्वास्थ्य सेवा और चिकित्सा अवसंरचना को भी महत्वपूर्ण बढ़ावा मिला। पीएम मोदी ने जवाहरलाल स्नातकोत्तर चिकित्सा शिक्षा एवं अनुसंधान संस्थान (जिपमेर) में क्षेत्रीय कैंसर केंद्र के आधुनिकीकरण का उद्घाटन किया और प्रधानमंत्री आयुष्मान भारत स्वास्थ्य अवसंरचना मिशन (पीएम-अभीम) के तहत तीन क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स की आधारशिला रखी।</p>
<p>उन्होंने कहा, हम मानते हैं कि स्वास्थ्य सेवा सभी के लिए सुलभ, उपलब्ध और किफायती होनी चाहिए। आयुष्मान भारत योजना पहले से ही पूरे भारत में करोड़ों परिवारों के लिए इस दृष्टि को साकार कर रही है। उन्होंने कहा, मेरा दृढ़ विश्वास है कि पुडुचेरी एक चिकित्सा पर्यटन केंद्र बन सकता है। पुड्डुचेरी में पहले से ही नौ मेडिकल कॉलेज हैं। जिपमेर के क्षेत्रीय कैंसर केंद्र का आधुनिकीकरण स्वास्थ्य सेवाओं की क्षमता को और विस्तार देगा।  </p>
<p>औद्योगिक विकास के लिए एक ऐतिहासिक पहल के तहत प्रधानमंत्री ने 750 एकड़ में फैले करासुर-सेदारापेट औद्योगिक एस्टेट को राष्ट्र को समर्पित किया। इस एस्टेट में एक फार्मा पार्क, कपड़ा पार्क, सूचना प्रौद्योगिकी (आईटी) पार्क, सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (आईआईटी) मद्रास का अत्याधुनिक अनुसंधान एवं विकास केंद्र और जिपमेर की उन्नत स्वास्थ्य सुविधाओं केंद्र स्थापित किये जाएंगे, जिससे यह क्षेत्र विनिर्माण, नवाचार और रोजगार सृजन का केंद्र बनेगा। उन्होंने कई अवसंरचना परियोजनाओं की आधारशिला भी रखी, जिनमें स्वच्छ और सुरक्षित पेयजल सुनिश्चित करने के लिए जल आपूर्ति योजनाएँ, प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना (पीएमजीएसवाई) के तहत 41 ग्रामीण सड़कों का निर्माण, और संशोधित वितरण क्षेत्र योजना (आरडीएसएस) के तहत विद्युत क्षेत्र की परियोजनाएँ शामिल हैं।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि परियोजनाओं का यह व्यापक पैकेज अवसंरचना, शहरी सेवाओं, औद्योगिक विकास, शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और सतत विकास को मजबूत करने के लिए सरकार के समन्वित प्रयास को दर्शाता है। प्रधानमंत्री ने पुडुचेरी की प्रगति के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराते हुए ने कहा कि केंद्र शासित प्रदेश की पूर्ण क्षमता को उजागर करने के लिए स्थानीय प्रशासन के साथ निकटता से काम करना जारी रखेगा।  </p>
<p>उन्होंने कहा, ये विकास कार्य जीवन की सुगमता को बढ़ाएंगे और आर्थिक वृद्धि को गति देंगे। मिलकर, हम एक श्रेष्ठ पुडुचेरी का निर्माण करेंगे जो युवाओं के लिए अवसर सृजित करेगा, गरीबों को सशक्त बनाएगा और समग्र विकास का एक आदर्श बनेगा।  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 Mar 2026 17:39:29 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कागज से धरातल तक आने में ही कई गुना बढ़ रही प्रोजेक्ट कॉस्ट</title>
                                    <description><![CDATA[प्रोजेक्ट की डेड लाइन के कोई मायने ही नहीं, बढ़ता रहता है समय और बजट।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/project-costs-are-multiplying-several-times-over-just-to-get-from-paper-to-reality/article-141859"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/856.png" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong>  केस एक:</strong> नई धानमंडी स्थित थोक फल सब्जीमंडी को यहां से चंद्रेसल में शिफ्ट करने की योजना तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में बनी थी। 23 साल बीतने के बाद भी अभी तक यह योजना प्रक्रियाओं के चलते अधरझूल में ही अटकी है। इससे उस समय इसके लिए तय किए गए बजट में तीन गुना तक बढ़ोतरी हो चुकी है।</p>
<p><strong>केस दो: </strong>कलक्ट्रेट स्थित जिला न्यायालय का भवन समय के साथ छोटा पडने लगा है। इसे स्वास्थ्य भवन के पास सार्वजनिक निर्माण विभाग की जमीन पर तैयार करने के लिए जमीन आवंटित हो गई थी। उस समय इसके लिए करीब 200 करोड़ का बजट तय किया गया था। लेकिन अभी तक प्रक्रियाओं में ही उलझने के कारण न तो जगह तय हो सकी है और न ही इसके बनने की समय सीमा। हालत यह है कि इसका बजट अब 290 करोड़ हो गया है।</p>
<p><strong>केस तीन: </strong>कोटा बैराज समेत तीन बांधों की मरम्मत करवाने की योजना बनी। करीब 10 से 15 साल पहले मरम्मत के लिए करीब 100 करोड़ रुपए का बजट तय किया गया था। वर्तमान में यह बजट दो गुना से भी अधिक 236 करोड़ रुपए हो गया है। लेकिन अभी तक भी मरम्मत के संबंध में कोई ठोस निर्णय या कार्यवाही नहीं हो सकी है।</p>
<p>यह तो कुछ उदाहरण हैं । ऐसी छोटी बड़ी कई योजनाएं हैं जिनकी बजट तक में घोषणा हो जाती है। बजट दो से दस गुना तक बढ़ जाता है लेकिन योजना धरातल पर नहीं आ पाती। दूसरी तरह चीन जैसे देश में ऐसे प्रोजेक्ट ना केवल समय पर तैयार हो जाते हैं अपितु डेढ लाइन से छह माह पूर्व तैयार कर लिया जाता है। ऐसा छोटी मोटी योजनाओं में ही नहीं अपितु बुलेट ट्रेन चलाने जैसी योजनाओं में देखा जा चुका है।चीन को दुनिया में तेजी से और समय से पहले प्रोजेक्ट पूरे करने के लिए जाना जाता है।</p>
<p><strong>यह कर दिखाया चीन ने </strong><br />- हुओशेनशान अस्पताल (वुहान) कोरोना महामारी के दौरान 1000 बेड का अस्पताल तय समय से 10 दिन पहले तैयार कर दिया।<br />- बीजिंग-शंघाई हाई-स्पीड रेल लाइन। 1318 किमी निर्धारित समय से पहले पूरा। यह दुनिया की सबसे व्यस्त हाई-स्पीड रेल लाइनों में से एक।<br />-बीजिंग डाक्सिंग इंटरनेशनल एयरपोर्ट दुनिया के सबसे बड़े एयरपोर्ट्स में शामिल, पूरी तरह हाई-टेक और आॅटोमेटेड सिस्टम के बावजूद 2019 में तय समय से पहले उद्घाटन।<br />- थ्री गॉर्जेस डैम चीन की ऊर्जा जरूरतों की रीढ़ दुनिया का सबसे बड़ा जलविद्युत बांध। कई यूनिट पहले ही चालू कर दी गईं।</p>
<p><strong>मिनी सचिवालय की भी यही हालत</strong><br />संभागीय मुख्यालय होने के बावजूद भी अभी तक कोटा में मिनी सचिवालय नहीं है। कोटा में मिनी सचिवालय बनाने का प्रोजेक्ट कांग्रेस सरकार के समय में बना। योजना धरातल पर उतरती उससे पहले ही सरकार बदल गई। प्रोजेक्ट अब एक कदम भी आगे नहीं बढ़ रहा है ।</p>
<p><strong>कंवेंशन सेंटर का तो प्रोजेक्ट ही निरस्त</strong><br />कोटा के दशहरा मैदान स्थित फेज दो में दिल्ली के भारत मंडपम् के तर्ज पर कंवेंशन सेंटर बनाने की योजना थी। पहले इस पर करीब 400 करोड़ रुपए खर्च होने थे। बाद में दूसरी बार योजना बदली और बजट आधा कर 200 करोड़ रुपए कर दिया गया। समय इतना अधिक लगा कि योजना को मूर्त रूप लेने की जगह आखिरकार निरस्त ही करना पड़ा।</p>
<p><strong>स्मार्ट सिटी के भी कई प्रोजेक्ट हुए निरस्त</strong><br />इतना ही नहीं तत्कालीन भाजपा सरकार के समय में कोटा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत बस स्टॉप समेत अन्य कार्य करवाने की योजनाएं बनी। उन पर काम भी हुआ लेकिन सरकार बदलने के बाद आधी से अधिक योजनाएं निरस्त करनी पड़ी और कई में बजट बढ़ गया। ऐसे कई योजनाएं हैं जो धरातल पर आने से पहले ही न तो समय पर पूरी हो पा रही हैं और उनका बजट भी कई गुना अधिक बढ़ रहा है। जिससे आमजन को उनका लाभ तक नहीं मिल पा रहा।</p>
<p><strong>समय पर हो योजनाएं पूरी, जनता पर नहीं पड़े भार</strong><br />तलवंडी निवासी महेश शर्मा का कहना है कि सरकार द्वारा कई बार लोगों की डिमांड पर घोषणा तो कर दी जाती है। उसके बाद योजना भी बन जाती है। लेकिन उन योजनाओं को लागू व विभिन्न स्तरों पर स्वीकृतियों में ही इतना अधिक समय लग जाता है कि उस योजना का बजट कई गुना बढ़ जाता है। जिसका आर्थिक भार जनता पर ही पड़ता है। महावीर नगर निवासी नितिन नामा का कहना है कि योजनाएं आमजन के लिए लाभकारी और कम बजट की होनी चाहिए। साथ ही उन्हें समय पर पूरा किया जाए। जबकि विदेशों में तरक्की करने का कारण ही यह है कि वहां कम बजट में और समय पर योजनाएं पूरी होती है। जिससे जनता को उनका लाभ मिल पाता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />योजनाएं सरकार के स्तर पर बनती है। उनकी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद निविदा जारी की जाती है। निविदा व टेंडर जारी होने के बाद उसमें जितना भी समय लगता है उसके बाद बजट बढ़े या कम हो उसके लिए संवेदक फर्म ही जिम्मेदार रहती है। योजनाओं की स्वीकृति में समय लगना सरकार के स्तर पर ही रहता है। एक बार योजना बनने के बाद उसमें बदलाव होने पर ही बजट बढ़ता है।<br /><strong>- सुनील गर्ग, अध्यक्ष, पीडब्यूडी कांंट्रेक्टर एसोसिएशन</strong></p>
<p>जब तक निविदा जारी नहीं होती तब तक वह योजना धरातल पर नहीं आती। निविदा जारी होने व कायार्देश जारी होने के बाद स्वीकृतियों में समय लगने से यदि बजट बढ़ता है तो उसका जनता पर भार नहीं पड़ता है। कई योजनाएं तो निविदा जारी होने से पहले ही बदलती रहती हैं। उस बारे में सरकार के स्तर पर ही कुछ कहा जा सकता है।<br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईएन, नगर निगम कोटा</strong></p>
<p> सरकार व प्रशासन की मंशा तो रहती है कि जो भी प्रोजेक्ट बनाए जाएं समय पर पूरा किया जाए। लेकिन कई बार जमीन आवंटन, बजट आवंटन, अन्य प्रक्रियाओं को पूरा करने में सरकार के स्तर पर ही समय अधिक लग जाता है। जिससे कई बार कुछ प्रोजेक्ट में देरी हो सकती है। लेकिन हर प्रोजेक्ट बनते समय ही उसकी समय सीमा तय करने से उसकी लागत भी सीमित रहती है और जिस उद्देश्य से प्रोजेक्ट बनाया गया है उसका लाभ भी लोगों को मिल पाता है। विदेशों में ऐसा हो रहा है तो यहां भी उससे सीख लेते हुए कार्य किए जाने चाहिए।<br /><strong>- कृष्णा शुक्ला, अतिरिक्त जिला कलक्टर, प्रशासन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Feb 2026 11:42:46 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इसलिए नहीं बना कोटा स्मार्ट सिटी</title>
                                    <description><![CDATA[स्थानीय लोग ही शहर को गंदा करने में जुटे हैं। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/this-is-why-kota-did-not-become-a-smart-city/article-119723"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(1)25.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। <strong>1 केस - </strong>नगर निगम की ओर से हाइजनिक तरीके से कचरे के परिवहन के लिए आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन का निर्माण कराया गया। सड़क पर कचरा नहीं डले इसके लिए आधुनिक व स्मार्ट डस्टबीन भी रखवाए। उसके बाद भी लोग कचरा पात्रों के बाहर ही कचरा डाल रहे हैं। इससे शहर में न तो सड़कों से कचरा कम हुआ और न ही शहर स्मार्ट बना। </p>
<p><strong>2 केस -</strong> तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से शहर को ट्रैफिक सिग्नल फ्री बनाने के लिए करीब आधा दर्जन से अधिक अंडरपास, फ्लाई ओवर व चौराहों का विकास व सौन्दर्यीकरण कराया गया। चौराहों पर पैदल चलने वालों के लिए पाथ वे बनवाए गए। उसके बाद भी अधिकतर वाहन चालक रोंग साइड से और अस्त-व्यस्त वाहन निकाल रहे हैं। जिससे ट्रैफिक बदहाल हो रहा है। </p>
<p><strong>3 केस - </strong>चम्बल नदी के किनो बसे शहर में लोगों को 24 घंटे जलापूर्ति हो सके। इसके लिए वाटर प्लांट का निर्माण कराया गया। पानी की पाइप लाइन डलवाई गई। लेकिन हालत यह है कि उसके बाद भी शहर के अधिकतर इलाकों में सुबह-शाम या दिन में एक घंटे ही पानी आ रहा है। इसका कारण कुछ लोगों द्वारा अवैध रूप से पानी का कनेक् शन किया हुआ है। </p>
<p>ये तो उदाहरण मात्र हैं। ऐसे दर्जनों विकास कार्य हैं जो कोटा शहर को स्मार्ट बनाने के लिए केन्द्र सरकार के स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करवाए गए। पिछले 9 साल में कोटा शहर में करीब एक हजार करोड़ से अधिक के विकास कार्य करवाने के बाद भी शहर स्मार्ट नहीं बन सका। इसका कारण शहर के लोगों में सिविल सेंस की कमी है। शिक्षा नगरी व शिक्षा की छोटी काशी होने से यहां देशभर से आने वाले लोगों से तो शहर को साफ रखने की अपेक्षा की जाती है। लेकिन स्थानीय लोग ही शहर को गंदा करने में जुटे हैं। </p>
<p>कोटा से बाहर जयपुर जाने पर यहां के लोग ट्रैफिक नियमों की पालना करते हुए नजर आ जाएंगे। फिर चाहे वह दो पहिया वाहन चलाते समय हैलमेट का उपयोग हो या चार पहिया वाहन चलाते समय सीट बेल्ट लगाने का। देश से बाहर विदेश जाने पर कोटा के लोग ही सड़क पर न तो कचरा डालेंगे और न ही इधर-उधर थूकेंगे। जबकि कोटा के लोग अपने शहर में रहकर ही उन नियमों की न तो पालना कर रहे हैं और न ही शहर को स्मार्ट बनाने में अपना योगदान दे रहे हैं। </p>
<p><strong>2016 में शुरु हुआ था स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट: </strong>केन्द्र सरकार की ओर से वर्ष 2016 में स्मार्ट ुसिटी प्रोजेक्ट की शुरूआत की गई थी। उसमें रा’य के जयपुर, उदयपुर, अजमेर के साथ ही कोटा को भी शामिल किया गया था। करीब 9 साल  मार्च 2025 तक यह प्रोजेक्ट चला। इस प्रोजेक्ट के तहत केन्द्र और रा’य के 50-50 फीसदी अंशदान से शहर में करीब एक हजार करोड़ से अधिक के विकास कार्य करवाए गए। नगर निगम व नगर विकास न्यास समेर अन्य कायरकारी एजेंसियों के माध्यम से शहर को स्मार्ट बनाने के लिए हर क्षेत्र में विकास कार्य करवाए गए। </p>
<p><strong>शहर में हुए ये काम</strong><br />स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में अंडरपास, फ्लाई ओवर व चौराहों का विकास व सौन्दर्यी करण तो कराया ही। साथ ही एमबीएस व जे.के. लोन अस्पताल  में नए ओपीड़ी ब्लॉक का निर्माण, नगर निगम के आधुनिक कचरा ट्रांसफर स्टेशन, मल्टी स्टोरी पार्किंग, वाटर प्लांट, खेल संकुल समेत हर क्षेत्र में विकास कार्य करवाए गए। जिसे शहर को स्मार्ट बनाया जा सके। लेकिन हालत यह है कि करीब एक हजार करोड़ से अधिक के कार्य करवाने के बाद भी शहर स्मार्ट सिटी में शामिल नहीं हो सका। </p>
<p><strong>यह है शहर की हालत</strong><br />शहर की हालत यह है कि लोगों में कहीं भी सिविल सेंस नजर नहीं आता। कचरा पात्र रखा होने के बाद भी अधिकतर लोग उसके बाहर ही कचरा डाल रहे है। घर-घर कचरा संग्रहण में लगे टिपर आने के बाद भी घर के बाहर ही कचरा डाल रहे है। आधुनिक शौचालय व घर-घर शौचालय होने के बाद भी सड़क किनारे ही लघुशंका करने लगते हैं। पान व गुटखा खाने के बाद सड़क पर या सार्वजनिक स्थानों व भवनों के कोनों व दीवारों पर थूकते हुए देखे जा सकते है। ट्रैफिक नियमों का उल्लंघन करना तो जैसे लोगों ने अपनी आदत ही बना ली है। सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान करना, पशु पालने के बाद उन्हें सड़क पर छोड़ना, श्वानों का जमघट सड़क पर लगा होना और धार्मिक आस्था के नाम पर सड़क पर ही गायों को चारा डालना समेत कई ऐसी आदतें हैं जो लोगों में सिविल सेंस की कमी को दर्शाती हैं। </p>
<p><strong>इंदौर इसलिए है सफाई में नम्बर वन</strong><br />स्वच्छ भारत मिशन के तहत पिछले करीब 7 साल से हो रहे स्वच्छता सर्वेक्षण में मध्य प्रदेश का इंदौर शहर हर बार नम्बर एक के पायदान पर खड़ा हुआ है। इसका कारण वहां नगर निगम की ओर से सख्ती तो की ही जा रही है। साथ ही लोगों में भी सिविल सेंस है कि शहर को साफ रखना है। सड़क पर कचरा नहीं डालना है। यदि कोई गलती से डाल भी देता है तो उसे टोकने की आदत ने इंदौर को साफ बनाया हुआ है। शहर साफ होने से स्वत: ही स्मार्ट नजर आता है और उससे वहां रहने वालों की स्थिति का पता चलता है। </p>
<p><strong>विकास के साथ सिविल सेंस भी जरूरी</strong><br />स्मार्ट सिटी के तहत शहर में करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाए गए। लेकिन उसके बाद भी शहर की हालत वैसे ही है जैसी पहले थी। न तो शहर साफ हुआ और न ही ट्रैफिक व्यवस्था सुधरी। सरकार ने विकास कार्य करवा दिए। लेकिन जब तक लोग अपनी आदत नहीं सुधारेंगे और उनमें सिविल सेंस नहीं होगा तब तक शहर स्मार्ट नहीं बन सकता। <br /><strong>- महेश शर्मा, तलवंडी</strong></p>
<p><strong>आदतों में सुधार करना होगा</strong><br />सिर्फ सरकार और नगर निगम व नगर विकास न्यास के भरोसे शहर को स्मार्ट नहीं बनाया जा सकता। सरकार व सरकारी विभागों का काम विकास कार्य करवाना व उनका संरक्षण करना है। लेकिन लोगों को उन विकास कार्यों का उपयोग करना व उनकी सही देखभाल करना आना चाहिए। सरकारी सम्पति समझने के कारण लोग उनका दुरुपयोग करते हैं। जबकि वह लोगों के टैक्स से ही काम किया गया है। जब तक लोग अपनी आदत नहीं सुधारेंगे तब तक शहर स्मार्ट नहीं बन सकता। <br /><strong>-  रमेश खत्री, गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong>शिक्षा के साथ व्यवहारिक समझ भी चाहिए</strong><br />शहर को स्मार्ट तो तभी बनाया जाएगा जब लोगों में मंत्रालय व मूत्रालय में अंतर करना आएगा। मंत्रालय लिखा होने पर तो लोग उसे मूत्रालय  समझकर वहां लघुशंका करने लगते है। गीला-सूखा कचरा तक अलग नहीं कर पाए हैं। डस्टबीन होने के बाद भी कचरा सड़क पर ही डाल रहे हैं। जब तक यह अंतर नहीं समझेंगे तब तक शहर को स्मार्ट नहीं बनाया जा सकता। शिक्षा के साथ व्यवहारिक ज्ञानव समझा भी चाहिए। <br /><strong>- मनीष गुप्ता, बल्लभबाड़ी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />कोटा में स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट 9 साल तक चला। वर्ष 2016 सगे मार्च 2025 तक के समय में शहर में करीब एक हजार करोड़ के विकास कार्य करवाए गए। स्मार्ट सिटी में जितने भी काम स्वीकृत हुए थे वे सभी पूरे हो गए हैं। स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत शहर में सभी क्षेत्रों में  विकास कार्य करवाए गए हैं। उनकी देखभाल व मरम्मत के लिए भी ओएंडएम किया हुआ है। विकास के साथ लोगों के सिविल सेंस से ही शहर स्मार्ट बन सकेगा।  <br /><strong>- मस्तराम मीणा, एक्सईएन स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Jul 2025 15:29:41 +0530</pubDate>
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                <title>फ्लाई ओवर के नीचे अतिक्रमण से पनप रही अवैध दुकानें व पार्किंग</title>
                                    <description><![CDATA[शिक्षा नगरी कोटा में अतिक्रमण बड़ी समस्या बन कर उभर रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/illegal-shops-and-parking-are-flourishing-under-the-flyover-due-to-encroachment/article-117659"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/445.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा शहर को स्मार्ट सिटी और सिग्नल फ्री तो बना दिया लेकिन अतिक्रमण की समस्या से निगम व केडीए निजात नहीं दिला सका जिससे आमजन परेशान हो रहे है। शहर के विभिन्न फ्लाईओवर के नीचे लोगों ने अतिक्रमण कर लिया है। केडीए कई बार इनको हटा चुका लेकिन अतिक्रमी फिर से आकर कब्जा जमा लेते है जिससे आमजन के साथ वाहनधारियों को भी भारी परेशानी हो रही है। गुमानपुरा फ्लाईओवर व छावनी फ्लाईओवर के नीचे से लोगों ने आॅटो व बाइक रिपेरिंग की दुकानें लगा ली जिससे सड़क पर आए दिन जाम लग जाता है। फ्लाईओवर के नीचे लोगों ने चाय की थड़िया, पान की गुमटियां लगा दी है। वहीं जवाहर नगर फ्लाईओवर के नीचे पंजाबी डोल व बग्गी वालों के साथ सैंकड हैंड गाड़ी बचेने वालों ने कब्जा जमा लिया है। शहर में केडीए की ओर से बार बार फ्लाई ओवर के नीचे से अतिक्रमण हटाने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है। शहर को स्मार्ट सिटी तो बना दिया लेकिन शहर के फ्लाई ओवरों के नीचे से लोगों के किये गए अवैध रूप से अतिक्रमण को प्रशासन मुक्त नहीं करवा पा रहा है। अतिक्रमण से मुक्ति नहीं मिलने से स्मार्ट सिटी अतिक्रमण की चपेट में आ रही है। शहर की मुख्य सड़कों से अतिक्रमण हटाया जा रहा है। लेकिन शहर में स्मार्ट सिटी के तहत बने 9 फ्लाई ओवर के नीचे लोगों ने अतिक्रमण कर पक्की दुकानें तक बना ली है। केडीए का इस ओर कोई ध्यान नहीं जा रहा है। जिससे लोगों को भारी परेशानी को सामना करना पड़ता है। शिक्षा नगरी कोटा में अतिक्रमण बड़ी समस्या बन कर उभर रहा है।</p>
<p><strong>छावनी का अतिक्रमण बन गया है नासूर</strong><br />छावनी का अतिक्रमण लोगों के लिए नासूर बनता जा रहा है। वाहन चालकों का छावनी क्षेत्र में गाड़ी चलाना काभी मुश्किल साबित हो रहा है। अतिक्रमीयों ने फ्लाई ओवर के नीचे गाड़ी रिर्पेयर व चाय की गुमटियां लगा कर अतिक्रमण का जाल बिछारखा है।<br /><strong>-राहुल शर्मा, स्टेशन निवासी</strong></p>
<p>घोडी बाजे वालों ने कर रखा कब्जाजवाहर नगर स्थित दादाबाड़ी से केशवपुरा तक बने फ्लाई ओवर के नीचे अतिक्रमण की भरमार है। जवाहर नगर की तरफ घोड़ी और ढोल वालों ने अतिक्रमण किया हुआ है। सड़क के दोनो ओर इन अतिक्रमियों ने अपना कब्जा जमाया हुआ है। केशवपुरा सर्किल के यहां बैंडबाजा वालों ने व निजी होटल वालों ने अपनी गाड़ियां खड़ी कर वहां पार्किंग स्थल बना दिया है। दादाबाड़ी से केशवपुरा तक चाय की थड़ियो से लेकर नाश्तें की दुकानें सजी हुई है। यहां तक की फ्लाई ओवर के नीचे प्राइवेट बसें तक खड़ी की जा रही है।     <br /><strong>-दीपक नायक, वाहनधारी </strong></p>
<p><strong>बोरखेड़ा फ्लाई ओवर के नीचे अतिक्रमण</strong><br />बारां रोड स्थित बोरखेड़ा फ्लाई ओवर के नीचे लोगों ने चाय की थड़ियां लगा कर अतिक्रमण कर रखा है। जिसके कारण आए दिन जाम लग जाता है। वहां से गुजर ने वाले वाहन चालकों को भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। चाय पीने वाले लोग अपने वाहन इधर उधर लगा देते जिससे सड़क जाम हो जाती है चौपहिया वाहन निकाले में भी परेशानी होती है। प्रशासन की ओर से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई तो की जाती लेकिन इन पर जुर्माना नहीं लगाया जाता जिससे यह फिर से आकर अतिक्रमण कर लेते है। <br /><strong> -ललित कुशवाह, बोरखेड़ा निवासी    </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अतिक्रमण को जमने नहीं दिया जाएगा जो ठेले व दुकानें लगी है। उन्हें हटा दिया जाएगा। साथ ही जहां जहां केडीए क्षेत्र में अतिक्रमण किया हुआ है। वहां से अतिक्रमण हटाने की कार्रवाई लगातार कार्रवाई की जा रही है। <br /><strong>-कुशल कोठारी, सचिव केडीए कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Jun 2025 17:18:19 +0530</pubDate>
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                <title>शहर ट्रैफिक सिग्नल फ्री, पैदल चलने वाले कहां जाएं</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्य रोड पर ना जेबरा क्रासिंग है और ना ही किसी तरह की सूचना पट्टी जिससे वाहन की गति धीमी हो सके और पैदल कोई निकल सके। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-city-is-traffic-signal-free--where-should-pedestrians-go/article-114990"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/shahar-traffic-signal-free,-paidal-chalane-wale-kahan-jaen...kota-news-22.05.2025.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा।<strong> केस -1 </strong>कैशवपुरा निवासी भारती कुलश्रेष्ठ और उसके परिजन गोबरिया बावड़ी चौराहे से कुछ आगे निकल कर ट्रांसपोर्ट नगर की तरफ आने के लिए रोड क्रॉस करना चाहते थे लेकिन वह रोड घंटों क्रॉस ही नहीं कर सके। कारण यातायात इतना अधिक था कि वहां से निकलना जान जोखिम में डालने जैसा था। मुख्य रोड पर ना जेबरा क्रासिंग है और ना ही किसी तरह की सूचना पट्टी जिससे वाहन की गति धीमी हो सके और पैदल कोई निकल सके। </p>
<p><strong>केस-2</strong> एडरोड्राम का मुख्य चौराहा। यहां शाम होने के साथ भारी यातायात भी शुरू हो जाता है। यहां से किसी को पैदल निकलना हो तो किसी तरह की जेबरा क्रासिंग नहीं है। सड़क के दोनों तरफ पैदल चलना भी मुश्किल है। हमेशा एक्सीडेंट का भय बना रहता है। ऐसे हालात में कोटा ट्रैफिक लाइट फ्री तो हो गया लेकिन एक्सीडेंट की तादात ज्यादा हो गई है। </p>
<p><strong>पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ तक नहीं:</strong> स्मार्ट सिटी बनाने के साथ ही पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किए जा रहे कोटा शहर में जहां देशी विदेशी पर्यटकों के आने की उम्मीद जताई जा रही है। वहीं दूसरी तरफ ट्रैफिक व्यवस्था इतनी बदहाल है कि स्थानीय लोग भी इस बढ़ते ट्रैफिक व वाहनों की स्पीड के बीच पैदल सड़क पार नहीं कर पा रहे हैं। बाहर से आने वालों के लिए तो यह किसी चुनौती से कम नहीं है।  वहीं सबसे अधिक पैदल चलने व सड़क पार करने वालों के लिए समस्या हो गई है।</p>
<p><strong>केवल यहां से निकल सकते हैं पैदल</strong><br />शहर में एक मात्र एरोड्राम चौराहे का अंडरपास ऐसा है जहां अंडर ग्राउंड पैदल सड़क पार करने वालों के  लिए व्यवस्था की हुई है। एक तरफ से दूसरी तरफ आने-जाने के लिए सड़क के साइड से नीचे उतरकर रास्ता बनाया हुआ है। लेकिन उन रास्तों के बारे में बहुत कम लोगों को जानकारी है। जिससे अधिकतर लोगों को मेन रोड से ही बिना जेबरा क्रॉसिंग के जान जोखिम में डालकर सड़क पार करनी पड़ रही है। वहीं विवेकानंद सर्किल पर पैदल चलने वालों के लिए पाथ वे है लेकिन सड़क पार करने की सुविधा नहीं है।  जबकि  न तो रेलवे स्टेशन पर और न ही अदालत चौराहे पर। नयापुरा, जेडीबी, अंटाघर, कोटड़ी, नई धानमंडी, विज्ञान नगर, दादाबाड़ी,सीएडी, नगर निगम, चम्बल गार्डन, से लेकर नए कोटा तक में कहीं भी जेबरा क्रॉसिंग नहीं होने से पैदल  सड़क पार करने वालों के लिए खतरा बना हुआ है।</p>
<p>बदहाल ट्रैफिक व्यवस्था और सिग्नल फ्री शहर के कारण जेबरा क्रॉसिंग तक नहीं होने से सड़क पार करते समय आए दिन छोटे वाहनों से ही एक्सीडेंट हो रहे हैं। जिला प्रशासन व ट्रैफिक पुलिस को आमजन की सुरक्षा पर ध्यान देना होगा। <br /><strong>-शैलेन्द्र कुमार दाधीच, गुमानपुरा कोटडी</strong></p>
<p>शहर को ट्रैफिक लाइट फ्री बनाकर एक ऐसा काम किया गया है जो कोई नहीं कर सकता था। ट्रैफिक नियमों का पालन कर आप चलें तो कहीं आपको कहीं रुकने की जरूरत नहीं है। सब कुछ नियोजित है। पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ होता है। फिर क्या चाहिए। <br /><strong>-जमील अहमद, संजय कालोनी विज्ञान नगर</strong></p>
<p>शहर की ट्रैफिक व्यवस्था में सुधार के प्रोजेक्ट को केडीए ने टैक आॅफ किया है। इसके लिए प्रयास भी शुरु कर दिए गए हैं। करीब एक माह का समय दिया गया है। उस समयावधि में  जबरा क्रॉसिंग से लेकर चौराहों पर सुरक्षित यातायात की जितनी भी व्यवस्थाएं होनी चाहिए वह करने के प्रयास किए जा रहे हैं। <br /><strong>-रविन्द्र माथुर, निदेशक  अभियांत्रिकी कोटा विकास प्राधिकरण   </strong></p>
<p><strong>फिर ट्रैफिक लाइट फ्री का क्या मतलब</strong><br />योजना के अनुसार पैदल चलने वालों के लिए फुटपाथ बना है। जहां जरूरत नहीं है वहां फुटपाथ की व्यवस्था नहीं है। सब कुछ योजनाबद्ध तरीके से किया गया है। मुंबई और बड़े शहरों में जेबरा क्रासिंग होती है। सड़क के दोनों तरफ यातायात बंद हो जाता है और पैदल चलने वाले जेब्रा क्रॉसिंग से निकल जाते हैं। लेकिन यह ट्रैफिक लाइट फ्री में संभव नहीं है। जिसको रोड क्रास करना है वह देखभाल कर रोड क्रॉस करे।  एक हटा कर दूसरी लाइट लगाने का क्या मतलब। इससे यातायात स्मूथ हुआ है। लोगों को कहीं अनावश्यक रुकना नहीं पड़ रहा। हमने एक विजन के तहत काम किया है। दूसरी पार्टी को पसन्द नहीं है तो ठीक करा लो।<br /><strong>-शांति धारीवाल, विधायक व पूर्व यूडीएच मंत्री </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 May 2025 14:49:32 +0530</pubDate>
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                <title>डेकोरेटिव लाइटें हुई चोरी, खम्भे बने ठूंठ</title>
                                    <description><![CDATA[शहर की सुंदरता बिगाड़ने  के साथ ही शहर को अंधेरे में डुबोने का काम कर रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/-decorative-lights-were-stolen--pillars-became-stumps/article-114041"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(1)26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शिक्षा नगरी से स्मार्ट सिटी और पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे कोटा शहर  में जहां विकास व सौन्दर्यीकरण के माध्यम से चमकाने का प्रयास किया गया। वहीं उस विकास व सौन्दर्य को चोर व नशेड़ी ग्रहण लगा रहे हैं। लाखों करोड़ों रुपए खर्च कर शहर में रोशनी के लिए लगाई गई डेकोरेटिव लाइटें चोरी होने से खम्भे ठूंठ बनकर रह गए हैं। पिछली कांग्रेस सरकार के समय में स्मार्ट  सिटी प्रोजेक्ट व  तत्कालीन नगर विकास न्यास के माध्यम से शहर में विकास व सौन्दर्यीकरण के कार्य करवाए गए थे। करीब 6 हजार करोड़ रुपए से अधिक के विकास कार्यों के तहत शहर को रोशन करने के  लिए चौराहों व मुख्य मार्गों पर आकर्षक डेकोरेटिव लाइटें लगाई गई थी।  शहर के अधिकतर क्षेत्रों में डिवाइडरों के बीच हो या सड़क किनारे पर सभी जगह लगी ये लाइटें रात के समय रोशनी देने के साथ ही अपनी अलग ही आभा भी बिखेरती है। फिर चाहे वह नयापुरा स्थित विवकानंद सर्किल हो या जेडीबी कॉलेज से अंटाघर होते हुए स्टेशन रोड। छावनी व कोटड़ी चौराहा हो या नए कोटा शहर के मुख्य मार्ग। सभी जगह पर आकर्षक के साथ ही महंगी डेकोरेटिव लाइटें लगाई गई थी। </p>
<p><strong>धीरे-धीरे गायब होने लगी लाइटें</strong><br />शहर में मेन रोड व चौराहों पर लगी ये लाइटें कुछ समय तक तो सही रही। लेकिन उसके बाद धीरे-धीरे ये गायब होने लगी।  शुरुआत में इनके गायब होने की संख्या कम थी। लेकिन बाद में ये बढ़ती गई। हालत यह है कि अधिकतर लाइटें  चोरी हो चुकी है।  कई जगह पर तो चोरी हुई लाइटों की जगह पर नई लगा दी गई है। जबकि अभी भी आकाशवाणी से लेकर बड़ तिराहे तक और कई अन्य जगहों पर इन लाइटों की जगह पर सिर्फ खम्भे ही रह गए हैं। जबकि लाइटें नजर ही नहीं आ रही है।  जिस तरह से पेड़ के पत्ते व तने कटने पर वहां ठूंठ रह जाता है उसी तरह की हालत इन लाइटों की हो रही है। </p>
<p><strong>नीचे होने से चोरी करना आसान</strong><br />शहर में वैसे तो कई जगह पर इन लाइटों को काफी ऊंचाई  पर लगाया हुआ है। जिससे आसानी से उन्हें चोरी करना मुश्किल है। ऐसी जगह पर ही ये लाइटें सुरक्षित हैं। जबकि कई जगह ऐसी हैं जहां सड़क किनारे इन लाइटों को बहुत कम ऊंचाई पर लगाया गया है। नयापुरा क्षेत्र हो या चम्बल रिवर फ्रंट का क्षेत्र। यहां लाइटें काफी नीची रखी गई है। इसका कारण रोशनी के साथ ही इनकी सुंदरता को भी बताना था। लेकिन उसका फायदा लोगों को तो कम मिला। चोरों व नशेड़ियों को उसका अधिक लाभ हुआ।  जनता के धन की बर्बादी और चोरों की पौबारह हो रही है। नशेड़ी व चोर जरा से लालच के लिए इन महंगी लाइटों को चोरी कर कबाडी को या अन्य स्थानों पर बेचकर शहर की सुंदरता बिगाड़ने  के साथ ही शहर को अंधेरे में डुबोने का काम कर रहे हैं। </p>
<p><strong>सीसीटीवी कैमरों में कैद चोरी की घटनाएं</strong><br />शहर में आए दिन हो रही चोरी की घटनाएं आस-पास लगे सीसीटीवी कैमरों में भी कैद हो रही है। डेकोरेटिव लाइटों को दिन दहाड़े व शाम के समय किस तरह सफाई से चोरी किया जा रहा है। वह भी सीसीटीवी कैमरों में स्पष्ट रूप से नजर आ रहा है। चम्बल रिवर फ्रंट के पास लाइटों के साथ ही बिजली की केबल चोरी तक की घटनाओं को अंजाम देते हुए कई बार लोगों को पकड़ा भी गया है। लेकिन चोरी की घटनाओं पर रोक नहीं लगी। हालांकि कई घटनाओं को तो नाबालिगों के माध्यम से अंजाम दिया जा रहा है। </p>
<p><strong>चोरों का कोई इलाज नहीं, सही करवा रहे</strong><br />शहर को सुंदर बनाने के साथ ही रोशन करने के लिए केडीए की ओर से मेन रोड व चौराहों पर डेकोरेटिव लाइटें लगवाई गई हैं। लेकिन कई जगह पर लाइटों के चोरी होने की शिकायतें मिली थी। उन जगहों पर संवेदक के माध्यम से नई लाइटें लगवा दी है। चोरों का कोई इलाज भी नहीं है।  कई बार लाइटों व अन्य सामान चोरी होने की रिपोर्ट दर्ज करवा दी गई है लेकिन कुछ नहीं हुआ। सभी जगह पर सुरक्षा कर पाना भी मुश्किल है। फिर भी यदि कहीं और ऐसी जगह हैं जहां लाइटें नहीं है। वहां संवेदक से कहकर नई लाइटें लगवा दी जाएंगी। <br /><strong>- पवन शर्मा, एक्सईएन(विद्युत) कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 13 May 2025 17:52:32 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कार्यकाल बढ़ाने पर 7 अप्रैल को केन्द्रीय मंत्री की बैठक में होगा निर्णय, स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारी वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए होंगे शामिल </title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड का कार्यकाल 31 मार्च को पूरा हो गया। लेकिन अब भी दस प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/decision-will-be-taken-in-the-meeting-of-union-minister/article-109291"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/454.png" alt=""></a><br /><p>अजमेर। अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड का कार्यकाल 31 मार्च को पूरा हो गया। लेकिन अब भी दस प्रोजेक्ट्स निर्माणाधीन हैं। अब स्मार्ट सिटी के कार्यकाल के सम्बंध में आगामी 7 अप्रैल को केन्द्रीय हाउसिंग एंड अरबन अफेयर्स मंत्री मनोहरलाल खट्टर की अध्यक्षता में होने वाली बैठक में निर्णय होगा। अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड का कार्यकाल गत वर्ष केन्द्र सरकार के हाउसिंग एंड अरबन अफेयर्स मंत्रालय के स्मार्ट सिटी डिविजन ने 31 मार्च तक बढ़ाया था। अब तक अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के कुल 112 प्रोजेक्ट्स में अब तक 102 पूर्ण हो चुके हैं और 10 प्रोजेक्ट्स में से कुछ निर्माणाधीन हैं और कुछ का सम्बन्धित विभाग को हस्तांतरण होना शेष है। स्मार्ट सिटी मिशन की चल रही परियोजनाओं के सम्बंध में केन्द्रीय मंत्री मनोहरलाल खट्टर की अध्यक्षता में 7 अप्रैल को प्रात: 11 बैठक होगी। बैठक में वर्तमान में चल रही परियोजनाओं और स्मार्ट सिटी मिशन भविष्य में भूमिका पर चर्चा की जाएगी। अजमेर स्मार्ट सिटी लिमिटेड के अधिकारी इस बैठक में वीडियो कॉन्फ्रेन्सिंग के जरिए शामिल होंगे। </p>
<p><strong>सेवन वंडर्स पर सुनवाई भी सात को</strong><br />आनासागर झील के वेटलैंड पर बनाए गए सेवन वंडर्स और पाथ वे, ग्रीन एरिया में बने गांधी स्मृति उद्यान के सम्बंध में सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई सात अप्रैल को होगी। इन सभी प्रोजेक्ट्स का निर्माण स्मार्ट सिटी लिमिटेड के तहत किया गया था। सेवन वंडर्स में शामिल एक प्रतिमा को हटाया जा चुका है। सेवन वंडर्स को ध्वस्त या स्थानांतरित करने के लिए सुप्रीम कोर्ट ने राज्य सरकार को छह माह का समय दिया है। </p>
<p><strong>अजमेर स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट्स    परियोजना संख्या      स्वीकृत राशि</strong><br />प्रोजेक्ट्स प्रगतिरत                     10                     492.17 करोड़<br />प्रोजेक्ट्स पूर्ण                   102                      553.97 करोड़<br />कुल                                      112                     046.14 करोड़</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Apr 2025 14:17:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>शहर की सुंदरता पर काला दाग, गेंट्री बोर्ड से लेकर सार्वजनिक स्थानों पर चस्पा हो रहे हैं पोस्टर</title>
                                    <description><![CDATA[स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय टीम भी कोटा आने वाली है। ऐसे में टीम को भी जब शहर बदरंग नजर आएगा तो कोटा की रैकिंग में सुधार होने के स्थान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/black-stain-on-the-beauty-of-the-city/article-105749"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/257rtrer-(3)48.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर को एक तरफ तो पर्यटन नगरी के रूप में विकसित करने के लिए स्वच्छ व सुंदर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। वहीं दूसरी तरफ विज्ञापनों के माध्यम से गेंट्री बोर्ड व सार्वजनिक स्थानों को बदरंग किया जा रहा है। जिससे बाहर से आने वालों पर शहर की छवि धूमिल हो रही  है। शहर को बदरंग करने वालों पर सख्ती नहीं होने का असर है कि वर्तमान में शहर का कोना-कोना बदरंग हो रहा है।  स्मार्ट सिटी के तहत शहर का विकास व सौन्दर्यीकरण किया गया। करोड़ों की लागत से यहां विकास कार्य करवाए गए। वहीं अब शहर को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित कर विदेशी पर्यटकों को यहां आकर्षित करने का दावा तो किया जा रहा है। लेकिन बाहर से आने वालों पर शहर की छवि अच्छी बनने की जगह बदसूरती की बन रही है।  हालत यह है कि बाहर से आने वालों को शहर में दिशा बताने वाले दिशा सूचक व संकेतक(गेंट्री बोर्ड) पर बड़े-बड़े विज्ञापन फ्लेक्स लगाए हुए  है। जिससे दिशा सूचक बोर्ड पर दिशा बताना तो दूर दिशा भटकाने का काम कर रहे है। जबकि बड़े-बड़े शहरों में कहीं भी ऐसा देखने को नहीं मिलता।  शहर के सभी प्रमुख मार्गों व प्रवेश मार्गों पर केडीए के गेंट्री बोर्ड लगे हुए हैं। जिन पर शहर  के रास्तों व इलाकों की जानकारी संकेतक व दिशा सूचकों के माध्यम से दे तो रखी है लेकिन वह नजर नहीं आ रही है। उस पर विञ्जापन चस्पा कर छिपा दिया गया है। ऐसा किसी एक दो जगह नहीं पूरे शहर में हो रहा है। सीएडी चौराहा हो या दादाबाड़े से केशवपुरा रोड। डीसीएम रोड हो या बारां रोड। जवाहर नगर का क्षेत्र हो या तलवंडी का हर जगह पर यही स्थिति है। सभी जगह पर राजनीतिक दलों के नेताओं व कार्यकर्ताओं के जन्म दिन व पदाधिकारी बनाए जाने पर बधाई संदेश के विज्ञापन फ्लेक्स लगे हुए हैं। </p>
<p><strong>निगम ने कुछ दिन की सख्ती कर की इतिश्री</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण द्वारा सार्वजनिक स्थानों को बदरंग करने वालों के खिलाफ कुछ दिन तक कार्रवाई की। नोटिस व जुर्माने के अलावा कुछ लोगों के खिलाफ दादाबाड़ी थाने में मुकदमा भी दर्ज कराया था। लेकिन उसके बाद उन्होंने भी कोई कार्रवाई नहीं की। वाहीं कोटा उत्तर में इस संबंध में कोई कार्रवाई नहीं की गई। </p>
<p><strong>फ्लाई ओवर व फोर्ट वाल तक बदरंग</strong><br />इधर शहर में अधिकतर सार्वजनिक स्थानों को भी विज्ञापनों से बदरंग किया हुआ है। नियमानुसार किसी भी सार्वजनिक स्थान पर  बिना अनुमति के विज्ञापन सामग्री नहीं लगाई जा सकती। लेकिन हालत यह है कि अधिकारियों की अनदेखी और विज्ञापन दाताओं व एजेंसियों को बुलंद हौंसले सार्वजनिक स्थानों के बदरंग के रूप में नजर आ रहे है। यहां तक कि फ्लाई ओवर व फोर्ट वाल तक को नहीं बक् शा गया।  सूरजपोल दरवाजे के पास हो या कैथीनीपोल में, लाड़पुरा दरवाजे के पास हो पाटनपोल में सभी जगह पर फोर्ट वाल तक पर विज्ञापन लगाए हुए हैं। इसी तरह से शहर में करोड़ों रुपए खर्च कर बनाए गए फ्लाई ओवर की दीवारों तक पर विज्ञापन लगाए हुए हैं। फिर चाहे व छावनी फ्लाई ओवर हो या गुमानपुरा का। दादाबाड़ी का फ्लाई ओवर हो या झालावाड़ रोड का। बारां रोड का हो या रंगपुर रोड का। इनकी दीवार और पिलर तक को विज्ञापनों से इतना अधिक बदरंग किया हुआ है जिससे लगता है मानो ये विज्ञापन के लिए ही अधिकृत किए हुए हैं।  वहीं स्वच्छता सर्वेक्षण के लिए केन्द्रीय टीम भी कोटा आने वाली है। ऐसे में टीम को भी जब शहर बदरंग नजर आएगा तो कोटा की रैकिंग में सुधार होने के स्थान पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है। </p>
<p><strong>सख्ती से ही लगेगी रोक</strong><br />नगर निगम कोटा दक्षिण के उप महापौर व सफाई समिति के अध्यक्ष पवन मीणा का कहना है कि शहर के विकास व सौन्दर्यीकरण पर करोडों रुपए खर्च किए गए हैं। जिसे शहर सुंदर दिखे लेकिन कुछ लोगों के कारण शहर बदरंग हो रहा है। आजकर बधाई देने का ऐसा रोग लगा है कि जहां जगह मिले वहां फ्लेक्स लगाए जा रहे हैं। जबकि विज्ञापन के लिए नगर निगम द्वारा बोर्ड व स्थान चिन्हित किए हुए हैं। उन्हीं स्थानों पर अनुमति लेकर विज्ञापन लगाए जा सकते है। सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन लगाने वालों के खिलाफ नगर निगम सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत कार्रवाई कर सकता है। निगम व केडीए के सख्ती से ही इन पर रोक लगाई जा सकती है। </p>
<p><strong>लगातार कार्रवाईकी जा रही</strong><br />इधर नगर निगम कोटा दक्षिण के राजस्व अनुभाग के अधिकारियों का कहना है कि शहर को बदरंग  करने वालों के खिलाफ पूर्व  में भी कई बार सम्पति विरुपण अधिनियम के तहत कार्रवाई की गई। नोटिस दिए गए और जुर्माना तक किया गया।  इस तरह की कार्रवाई समय-समय पर की जाती है। उसके बाद भी कुछ लोग नहीं मानते। उनके खिलाफ फिर से कार्रवाई की जाएगी।</p>
<p> हमने पहले भी कार्रवाई की थी। अब फिर से अभियान चला कर कार्रवाई करेंगे। <br /><strong>- राजीव अग्रवाल महापौर दक्षिण </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Feb 2025 16:37:38 +0530</pubDate>
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                <title>वार्डों में सफाई के लिए पार्षद हों जवाबदेह, जिम्मेदारी तय हो </title>
                                    <description><![CDATA[निगम को दो भागों में बाटकर कोटा उत्तर व दक्षिण कर दिया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/councillors-should-be-responsible-for-cleanliness-in-the-wards--responsibility-should-be-fixed/article-101831"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । स्मार्ट सिटी और पर्यटन नगरी के रूप में विकसित हो रहे शिक्षा नगरी कोटा में वार्डों की संख्या ढाई गुना होने के बाद भी शहर साफ नजर नहीं आ रहा है। जिसका असर स्वच्छता रैकिंग पर पड़ रहा है। नगर निगम में सफाई कर्मचारियों के साथ ही शहरी सरकार में वार्ड का निर्वाचित जनप्रतिनिधि होने से पार्षद भी सफाई व्यवस्था के लिए उतने ही जिम्मेदार हैं। वहीं समय सीमा में सफाई होगी तो शहर स्वच्छ नजर आएगा। 10 लाख से अधिक की आबादी वाले और संभागीय  मुख्यालय कोटा में पूर्व में जहां एक नगर निगम और वार्डों की संख्या 60 थी।  लेकिन शहर के विकास व विस्तार को देखते  हुए वार्ड बड़े होने पर पार्षदों का अपने क्षेत्र में ही सफाई पर पूरा फोकस नहीं हो पाता था। जिसे देखते हुए पूर्व में वाडों की संख्या बढ़ाकर 65 की गई थी। लेकिन पिछली कांग्रेस सरकार के समय में स्वायत्त शासन विभाग द्वारा अधिसूचना जारी कर वार्डों का नए सिरे से परिसीमन कराया गया। उसके बाद 2019 में कोटा में वार्डों की संख्या 65 से ढाई गुना बढ़ाकर 150 कर दी गई। वहीं निगम को दो भागों में बाटकर कोटा उत्तर व दक्षिण कर दिया गया। कोटा उत्तर में 70 व दक्षिण में 80 वार्ड बनाए गए। नगर निगम क्षेत्र में कोटा उत्रर, कोटा दक्षिण, लाड़पुरा व रामगंजमंडी विधानसभा के वार्ड शामिल किए गए थे। </p>
<p><strong>वार्ड छोटे तो सफाई सुधरेगी</strong><br />स्वायत्त शासन विभाग द्वारा वार्डों की संख्या बढ़ाकर उनका दायरा छोटा किया गया था। जिसका मकसद था कि वार्ड छोटे होंगे तो उनमें सफाई सुधरेगी। साथ ही पार्षद अपने वार्ड में सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग सही ढंग से कर सकेंगे। पार्षदों का मुख्य काम भी अपने-अपने वार्ड व क्षेत्र की सफाई व्यवस्था को सुधारना है। जिससे सभी वार्ड साफ होंगे तो शहर स्वत: ही साफ हो जाएगा। लेकिन हालत यह है कि वर्तमान बोर्ड के कार्यकाल को सवा चार साल का समय हो गया है। अभी तक भी न त वार्डों में सफाई सुधरी और न ही शहर में। जिसका असर हर साल स्वच्छता रैकिंग के रूप में दिख रहा है। </p>
<p><strong>पार्षद को जनता ने चुना तो वहीं जिम्मेदार</strong><br />जनता को सबसे अधिक काम अपने क्षेत्र में साफ सफाई से ही रहता है। पार्षद जनता द्वारा वार्ड में चुना हुआ जनप्रतिनिधि होता है। ऐसे में सफाई व्यवस्था के लिए वही जिम्मेदार होना चाहिए। जनता ने उन्हें चुना है। इस कारण जनता उन्हें ही जानती है। निगम कर्मचारियों को न तो जानते हैं और न ही सुनवाई होती है। <br /><strong>-आशा मीणा, खेड़ली फाटक</strong></p>
<p>जनता ने पार्षद को वोट देकर चुना है। वह इसलिए कि वे वार्ड में सफाई करवा सके।  लेकिन  अधिकतर समय पार्षद चुनाव के समय नजर आते है। उसके बाद काम के समय मिलते ही नहीं है। जबकि पार्षद की जिम्मेदारी है कि वह वार्ड में साफ सफाई नियमित करवाए। नाली, सड़क और आवारा मवेशियों की समस्या का समाधान करवाए। <br /><strong>-शोभा रानी, दादाबाड़ी</strong></p>
<p>पार्षद का मुख्य काम ही अपने क्षेत्र में नियमित साफ सफाई करवाना है। लेकिन अधिकतर पार्षद यह काम नहीं करके अन्य कामों में व्यस्त रहते है। काम के लिए तलाशने पर पार्षद मिलते ही नहीं है। मिल भी जाते हैं तो काम करवाने का आश्वासन दे देते हैं काम समय पर होते नहीं है। जबकि सूचना मिलते ही पार्षद को काम करवााना चाहिए। इसके लिए उनके मोबाइल नम्बर डिस्प्ले हो और वाट्सअप ग्रुप हो जिस पर समस्या बताई  जा सके। <br /><strong>-अंकित शर्मा, महावीर नगर</strong></p>
<p><strong>वार्ड छोटे होने से पार्षद तक पहुंच हुई आसानवार्ड छोटे होने से पार्षद तक पहुंच हुई आसान</strong><br />पार्षद का  मुख्य काम ही अपने वार्ड में सफाई करवाना है। निगम के सफाई कर्मचारियों की मॉनिटरिंग करना है। वार्ड की जनता तो पार्षद को जानती है। कहीं भी गंदगी होने या सफाई नहीं होने पर पार्षद को ही बताते है। वैसे तो सुबह सफाई के लिए अपने वार्ड में घूमते है। फिर भी यदि शिकायत मिलती है तो उसका तुरंत समाधान करवाते है।  वार्ड छोटे होने से पार्षद की आमजन में पहुंच आसान हुई है। <br /><strong>-ऊषा ठाकुर, पार्षद कोटा उत्तर कांग्रेस</strong></p>
<p>पार्षद का मुख्य काम ही अपने वार्ड की सफाई व्यवस्था को देखना है। वही इसके लिए जिम्मेदार है। जनता ने उसे अपनी व वार्ड की सफाई व्यवस्था व समस्याओं के समाधान के लिए चुना  है। दिनभर वार्ड में घूमकर लोगों से मिलकर सफाई व्यवस्था को देखते है। वार्ड का वाट्सअप ग्रुप है जिस पर शिकायत आने पर तुरंत उसका समाधान करवाते है। टिपर निकलने के बाद कचरा डालने पर वही गंदगी नजर आती है। सफाई के लिए लोगों को भी जागरूक होना पड़ेगा। <br /><strong>-पी.डी. गुप्ता, पार्षद कोटा दक्षिण भाजपा</strong></p>
<p>जनता ने पार्षद को चुना है। पार्षद नगर निगम में जनता का प्रतिनिधित्व करता है। उसका मुाख्य काम ही सफाई व्यवस्था में सुधार करवाना है। सुबह सबसे पहले वार्ड में सफाई व्यवस्था देखना ही काम रहता है। जहां सफाई कर्मचारी नहीं जाते या टिपर नहीं जाते उन्हें वहां पहुंचाया जाता है। जिससे सफाई व्यवस्था सुधरे। वहीं वाट्सअप ग्रुप से लोगों को जोड़ा हुआ है। जिस पर भी सूचना मिलने पर समस्याओं समाधान कराया जाता है। <br /><strong>-नवल सिंह हाड़ा, पार्षद कोटा उत्तर भाजपा</strong></p>
<p>शहर  व वार्ड में सफाई कीजिम्मेदारी वैसे तो नगर निगम के अधिकारियों व कर्मचारियों की है। पार्षद वार्ड का जनप्रतिनिधि होने से वह सफाई व्यवस्था की मॉनिटरिंग करता है। सफाई संबंधी शिकायतों का समाधान कराया जाता है।लेकिन निगम के सफाई महकमे में कर्मचारियों की कमी होने से परेशानी आती है। वार्ड के ग्रुप बने हुए हैं जिन पर  सूचना मिलने पर उनका समाधान तुरंत कराया जा रहा है। <br /><strong>-विवेक राजवंशी, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>पार्षद वार्ड की जनता का प्रतिनिधित्व करता है। जनता से जो भी शिकायत मिलती है उनका निगम अधिकारियों, जमादार व सेक्टर निरीक्षक से कहकर उसका समाधान करवाते है। लेकिन काम तो अधिकारियों व सफाई कर्मचारियों को ही करना होता है। सरकार बदलने के बाद वार्डों में काम ही नहीं हो रहे है। अधिकारी सफाई श्रमिक बढ़ाना तो बता रहे हैं लेकिन वे काम कहां कर रहे है इसकी कोई जानकारी पार्षदों को नहीं है। काम अधिकारी व कर्मचारी नहीं कर रहे और जिम्मेदारी पार्षदों पर डाली जा रही है।  <br /><strong>-पवन मीणा, उप महापौरनगर निगम कोटा दक्षिण</strong></p>
<p>पार्षद अपने स्तर पर तो वार्डों में सफाई करवाते है। उसकी मॉनिटरिंग करते हैं। जनता जो काम बताती है उसे भी समय पर कवराते है। लेकिन सरकार बदलने के बाद वार्डों में काम ही नहीं हो रहे है। खास तौर से कांग्रेस पार्षर्दों के वार्ड में नियमित सफाई श्रमिक नहीं आने से समस्या अधिक हो ती है। पार्षदों के कहने पर अधिकारी कोई काम नहींकर रहे है। <br /><strong> -फरीदु्दीन सोनू कुरैशी, उप महापौर नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>
<p>जनता ने पार्षदों को चुना ही अपने वार्ड की सफाई व्यवस्था में सुधार के लिए है। सफाई के लिए पार्षद ही जिम्मेदार रहता है। वही निगम सफाई कर्मचारियों से समंवय बैठाकर सफाई व्यवस्था को सुचारू करवाता है। फिर भी लोगों को समस्या आती है तो मोबाइल नम्बर सभी के पास है। सूचना आने पर उनका समाधान कराया जाता है। लाइट संबंधी व सफाई संबंधी समस्याओं के  लिए अलग-अलग वाट्सअप ग्रुप बने हुए है।  <br /><strong>-अनुराग गौतम, पार्षद कोटा दक्षिण कांग्रेस</strong></p>
<p>सफाई के लिए जितने जिम्मेदार निगम अधिकारी व सफाई कर्मचारी है। उतनी ही जिम्मेदारी पार्षद की भी है। वार्ड की जनता पार्षद को जानती है।  सुबह से ही वार्ड में घूमकर सफाई व्यवस्था को देखते है। जहां समस्या आती है वहां तुरंत समाधान करते है। यदि समय पर सूचना मिल जाती है तो कुछ ही देर में समाधान हो जाता है। लेकिन 24 घंटे के भीतर सफाई संबंधी शिकायत का समाधान कराया जा रहा है। वार्ड के लोगों का वाट्सअप ग्रुप बना हुआ है। जिसके माध्यम से भी सूचना आने पर उनका समय सीमा में समाधान कराया जा रहा है। <br /><strong>-लव शर्मा, नेता प्रतिपक्ष नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Jan 2025 15:10:34 +0530</pubDate>
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                <title>स्मार्ट सिटी की सुंदरता पर लग रहा ग्रहण </title>
                                    <description><![CDATA[  शहर में बिना अनुमति के सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर व विज्ञापन नहीं लगाए जा सकते। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-beauty-of-the-smart-city-is-being-eclipsed/article-94890"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(1)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । कहने को तो कोटा शहर स्मार्ट सिटी  है। शिक्षा नगरी के साथ ही अब यह पर्यटन नगरी के रूप में भी विकसित हो रहा है। लेकिन हालत यह है कि स्मार्ट सिटी की सुंदरता को सार्वजनिक स्थान व फ्लाईओवर पर जगह-जगह  बधाई व विज्ञापन के चस्पा पोस्टर व पम्पलेट बिगाड़ रहे हैं।  नगर विकास न्यास की ओर से शहर के विकास व सौन्दर्यीकरण पर हजारों करोड़ रुपए खर्च किए हैं। जिससे शहर सुंदर दिखे। वहीं करोड़ों रुपए खर्च करके शहर के एतिहिासिक दरवाजों का रूप निखारा था। शहर में फ्लाई ओवर बनवाए। पोर्ट वाल व सार्वजनिक स्थान ऐसे हैं जिन्हें बिगाड़ना सरकारी सम्पति को नुकसान पहुंचाने के समान है।  शहर में बिना अनुमति के सार्वजनिक स्थानों पर पोस्टर, बैनर व विज्ञापन नहीं लगाए जा सकते। लेकिन इन दिनों स्थिति यह है कि सार्वजनिक स्थान चाहे पोर्ट वाल हो या फ्लाई ओवर। तालाब की चार दीवारी हो या मकानों की छत। गेंट्री बोर्ड हो या अन्य सरकारी भवन। जगह-जगह पर कहीं बधाई के तो कहीं कम्पनी व स्कूल के विज्ञापन चस्पा किए हुए हैं। </p>
<p><strong>सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत कार्रवाई का  प्रावधान</strong><br />शहर में सार्वजनिक स्थानों पर विज्ञापन व पोस्टर लगाकर उनकी सुंदरता बिगाड़ने पर नगर निगम कीओर से सम्पति विरूपण अधिनियम के तहत कार्रवाई करने का प्रावधान है। हालांकि निगम की ओर से पूर्व में कई लोगों व विज्ञापन दाता कम्पनियों के खिलाफ  कार्रवाई करते हुए नोटिस भी जारीकिए थे। साथ ही निगम के राजस्व अनुभाग द्वारा ऐसे पोस्टर व पम्पलेट को साफ भी कराया गया था। लेकिन उसके बाद भी फिर से शहर की सुनदरता बिगाड़ने वाले बाज नहीं आ रहे है। </p>
<p><strong>यहां चस्पा हैं पोस्टर-पम्पलेट</strong><br />शहर में कईजगह पर इस तरह के पोस्टव व पम्पलेट चस्पा किए हुए हैं। जिनमें केशवपुरा फ्लाई ओवर हो या गुमानपुरा फ्लाईओवर, छावनी फ्लाईओवर हो या रंगपुर फ्लाईओवर। इनके स्पान पर पम्पलेट इस तरह से चस्पा हैं कि वाहन चालकों कीतो निगाह उन पर पड़ रहीहै। लेकिन बाहर से आने वालों कीआंखों में वे चुभ रहे हैं।  इसी तरह से सूरजपोल दरवाजे के पास पोर्ट वाल कीदीवार पर बधाई संदेश के पोस्टर लगे हुए हैं। यहां तक कि सार्वजनिक शौचालयों की दीवारों पर डॉक्टरों के और तालाब की चार दीवारी पर रोगों से संबंधित उपचार के पम्पलेट व पेंटिंग कर विज्ञापन लिखवा तक रखे है। वहीं वल्लभ नगर में बने किशोरपुरा राने के पुलिस सहायता केन्द्र तक पर विज्ञापन के पम्पलेट चस्पा कर उसकीदशा बिगाड़ी हुई है।  दादाबाड़ी रोड व डीसीएम रोड समेत शहर के कई मेन रोड पर स्थित न्यास के गेंट्री बोर्ड पर बधाईयों के विज्ञापन लगाकर दिशा सूचक तक को छिपा दिया है। जिससे बाहर से आने वाले लोगों को सही राह का पता तक नहीं चल पा रहा। </p>
<p><strong>सुंदरता बिगाड़ने वालों पर हो सख्ती</strong><br />पाटनपोल निवासी किशन मूंदड़ा ने बताया कि शहर की सुंदरता बिगाड़ना गलत है। यदि किसी को विज्ञापन करना है तो उसके लिए नगर निगम व नगर विकास न्यास से अनुमुति लेकर निर्धारित स्थानों पर हीलगाए जाए। जो शहर की सुंदरता बिगाड़ रहा है उनके खिलाफ सख्त कार्रवाई कीजाए।  रामपुरा निवासी प्रशांत जैन का कहना है कि शहर कीसुंदरता से समझौता नहीं होना चाहिए। इसे बिगाड़ने वालों के खिलाफ कार्रवाई करने कीजगह निगम कीओर से स्वयं ही उन पोस्टर को हटा दिया जाता है। जिससे पोस्टर पम्पलेट चस्पा करने वालों पर कोईअसर नहीं हो रहा। नगर निगम को उन पर जुर्माना लगाना चाहिए। तभी वे ऐसा करने से बचेंगे। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />नगर निमम का राजस्व अनुभाग शहर कीसुनदरता बिागड़ने वालों के खिलाफ समय-समय पर कार्रवाई करता रहा है। पूर्व में कई लोगों को नोटिस भी जारी किए थे। लेकिन वर्तमान में राजलसव अनुभाग के माध्यम से उन पोस्टर व पम्पलेट को साफ करवाया जा रहाहै। यदि उसके बाद भी दोबारा से वैसा ही होता है तो संबंधित को नोटिस जारीकर सख्त कार्रवाई कीजाएगी।<br /><strong>- महावीर सिंह सिसोदिया, उपायुक्तनगर निगम कोटा उत्तर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 12 Nov 2024 14:23:32 +0530</pubDate>
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                <title>स्मार्ट सिटी का दशहरा - मेला मैदान मांगता मरम्मत</title>
                                    <description><![CDATA[लाइटों के खम्बे तक आधे गायब।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/smart-city-s-dussehra---fair-ground-demands-repair/article-86984"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/smart-city-ka-dussehra----mela-medan-mangta-marammat...kota-news-06-08-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम कार्यालय के पास स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत करोड़ों रुपए की लागत से तैयार किए गए दशहरा मैदान की हर साल की तरह फिर से दुर्दशा हो गई है। यहां मैदान में पीछे की तरफ लगे बिजली के खम्बे तक आधे गायब हो गए हैं। वहीं टूटफूट भी काफी हो गई है। दिल्ली के प्रगति मैदान की तर्ज पर दशहरा मैदान को बनाने का प्रयास तो किया गया। करीब 80 करोड़ रुपए से अधिक राशि खर्च करने के बाद भी हालांकि यह वैसा बन नहीं सका। लेकिन इसकी देखरेख तक सही ढंग से नगर निगम नहीं कर पा रहा है। यही कारण है कि यहां सुरक्षा गार्ड होने के बावजूद मैदान से आए दिन सामान तक चोरी हो रहे हैं। खास तौर से खतरे की परवाह किए बिना बिजली के खम्बे, लाइटें व डीबी के ढक्कन व तार तक चोर व स्मैकची ले जा रहे हैं। दशहरा मैदान में तुलसी माता मंदिर की तरफ और किशोरपुरा थाने के सामने के हिस्से में दुकानों के आगे लगे बिजली के कई खम्बे आधे गायब हो गए हैं। शुरुआत में इनकी संख्या कम थी लेकिन न तो सुरक्षा गार्डों ने और न ही निगम अधिकािरयों ने ध्यान दिया तो चोर व स्मैकचियों के हौंसले बुलंद होते गए। जिससे चोरी होने वाले बिजली के खम्बों की संख्या भी लगातार बढ़ती ही जा रही है। महंगे खम्बे होने के बावजूद स्मैकची व चोर उन्हें चंद रुपयों में बेचकर अपने नशे की पुड़िया का इंतजाम कर रहे हैं। पूर्व में इन बिजली के खम्बों से लाइटें और डीबी से उनके ढक्कन व तार तक चोरी हो चुके हैं। </p>
<p><strong>घास बढ़ी, फायर बॉक्स टूटे</strong><br />दशररा मैदान के पूरे कच्चे हिस्से में घास काफी बड़ी हो गई है। काफी समय से घास की कटाई नहीं होने से वह इतनी बड़ी हो गई है कि मैदान किसी जंगल से कम नहीं लग रहा। इन कच्ची जगह पर मेले के दौरान ठेले खड़े होने के अलावा कई दुकानें लगाई जाती है। ऐसे में मेले से पहले इस घास को भी कटवाना होगा। वहीं मैदान में आग से से सुरक्षा के लिए फायर सिस्टम लगा हुआ है। जिसके लिए पानी के पाइप रखने के बॉक्स जगह-जगह पर बने हुए  हैं। लेकिन उनमें से अधिकतर बॉक्स के ढक्कन तक टूट चुके हैं। घास के बीच दबे होने से उनका पता नहीं चल रहा है लेकिन जैसे ही घास कटेगी तो उनकी दुर्दशा उजागर हो जाएगी। </p>
<p><strong>दीवारों के पत्थर व नाली के ढकान टूटे</strong><br />दशहरा मैदान में हर साल दशहरा मेले से पहले उसकी मरम्मत पर लाखों रुपए खर्च किए जाते हैं। लेकिन कुछ समय बाद फिर मैदान की हालत वैसे ही हो जाती है। वर्तमान में भी विजयश्री रंगमंच के पीछे और श्रीराम रंगमंच के पिछले हिस्से में सीढ़ियों की दीवार से पत्थर उखड़ रहे हैं। जिनके ढेर मैदान में ही लगे हुए हैं। इसी तरह से पूरे मैदान में कई जगह पर नालियों के ढकान तक टूटे हुए हैं। जिससे उन्हें फिर से ढकने पर खर्चा करन्\ाा पड़ेगा। वहीं मैदान की अधिकतर नालियों के जाम होने से गंदा पानी मैदान में फेल रहा है। </p>
<p><strong>नलों की टोटियां तक गायब</strong><br />दशहरा मैदान में मेले के दौरान आने वाले हजारों लाखों लोगों की सुविधा के लिए जगह-जगह पर पीने के पानी की व्यवस्था की हुई है। वहां प्लास्टिक के नल लगाए हुए हैं। लेकिन देखरेख के अभाव में अधिकतर नलों से टोटियां तक  गायब व चोरी हो चुकी हैं। हालांकि अभी वह काम नहीं आ रही। लेकिन मेले के दौरान पानी की जरूरत पड़ने पर फिर नए सिरे से नलों में टोटियां लगानी पड़ेंगी। इनके अलावा की कई अन्य टूटफूट मैदान में हो रही है। जिनकी मरम्मत  पर निगम को खर्चा करना पड़ेगा। </p>
<p><strong>नाम उकेरकर की दुर्दशा</strong><br />मैदान में जगह-जगह दीवारों  पर लोगों ने विशेष रूप से फुटकर दुकानें लगाने वालों ने अपने नाम लिखकर दीवारों की दशा ही बिगाड़ दी है। कई जगह पर सफेद चूने से तो कई जगह पर पत्थरों से उकेरकर नाम लिख दिए हैं। विशेष रूप से जन सुविधाओं व पीने के पानी की जगह के पास कई जगह पर इस तरह की हालत देखी जा सकती है। </p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />दशहरा मैदान में एक साल में हो सकता है कई जगह पर छोटी-छोटी टूटफूट हो सकती है। बरसात में घास भी बढ़ जाती है। इसके लिए मेला समिति की बैठक में निर्माण व मरम्मत संबंधी कार्य करवाने का निर्णय लिया जा चुका है। कई कामों के टेंडर जारी करने की प्रक्रिया की जा रही है। साथ ही निगम के स्तर पर होने वाले कामों को शीघ्र कर दिया जाएगा। <br /><strong>- ए.क्यू कुरैशी, एक्सईएन, नगर निगम कोटा दक्षिण </strong></p>
<p>मैदान में लगे बिजली के खम्बों से पूर्व में लाइटें चोरी हो जाती थी। उससे सीख लेते हुए पिछली बार ऐसी लाइटें लगाई जो मेले के बाद खोलकर स्टोर में रख दी थी। इस बार मेले के दौरान फिर से उन्हें लगा दिया जाएगा। वहीं बिजली के खम्बे चोरी होने की जानकारी नहीं है। वैसे मैदान में सुरक्षा गार्ड तैनात हैं। उन्होंने भी इस संबंध में कोई जानकारी नहीं दी। <br /><strong>- सचिन यादव, एक्सईएन(विद्युत), नगर निगम कोटा उत्तर</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Aug 2024 16:02:19 +0530</pubDate>
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