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                <title>mourning - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>साहित्य जगत में शोक की लहर: मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का निधन ; डिमेंशिया से थे पीड़ित, जानें कैसा रहा उनका जीवन?</title>
                                    <description><![CDATA[मोहब्बत और तन्हाई को खूबसूरत अल्फाज देने वाले प्रख्यात शायर डॉ. बशीर बद्र का बक़रीद के दिन 91 वर्ष की आयु में निधन हो गया। वे लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित थे। उनके जाने से साहित्य जगत में शोक की लहर है, लेकिन उनकी गजलें उर्दू अदब का गौरव बनी रहेंगी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/wave-of-mourning-in-the-literary-world-famous-poet-dr/article-155275"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/bashir.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। मोहब्बत, तन्हाई और जिंदगी को अपने अल्फाजों में नई पहचान देने वाले मशहूर शायर डॉ. बशीर बद्र का बकरीद के दिन 91 साल की उम्र में निधन हो गया। उन्होंने अपने घर पर ही आखिरी सांस ली। उनके निधन की खबर से साहित्य जगत में शो की लहर छा गई पारिवारिक सूत्रों के अनुसार, वे काफी लंबे समय से डिमेंशिया से पीड़ित थे। लंबी बीमारी के कारण हालत ये हो गई थी कि वे अपने करीबियों और परिचितों को पहचान भी नहीं पा रहे थे। बशीर बद्र ने उर्दू साहित्य को नई ऊंचाई दी और यही कारण है कि उनकी गजलें सिर्फ मुशायरों तक सीमित नहीं रहीं। </p>
<p><img src="https://images.bhaskarassets.com/web2images/521/2021/01/07/bashirbadr26613968835x547-m_1609959067.jpg" alt="When Dr. Bashir Badr, a Padmashree poet of Bhopal wrote his PhD thesis, 87  lions of his own were included in it."></img></p>
<p>डॉ. बशीर बद्र (असल नाम सय्यद मुहम्मद बशीर) 15 फरवरी 1935 को कानपुर में पैदा हुए। उत्तर प्रदेश में उनका पैतृक स्थान फ़ैज़ाबाद ज़िले का मौज़ा बक़िया है। उनका वास्तविक नाम सैय्यद मोहम्मद बशीर था। उनके पिता सैय्यद मोहम्मद नजीर पुलिस विभाग में कार्यरत थे। प्रारंभिक शिक्षा कानपुर और इटावा में हुई। हाई स्कूल के बाद पिता के निधन के कारण उनकी पढ़ाई बाधित हो गई और उन्हें कम उम्र में ही 85 रुपए मासिक पर पुलिस विभाग में नौकरी करनी पड़ी। परिवार की जिम्मेदारियों के बीच भी उन्होंने शिक्षा और साहित्य से अपना संबंध नहीं टूटने दिया।</p>
<p><img src="https://static.abplive.com/wp-content/uploads/sites/2/2021/01/06043521/basirbadra.jpg" alt="Urdu poet Bashir Badr received his PHD degree at the age of 85 | अज़ीम शायर बशीर  बद्र को 47 साल बाद मिली PHD की डिग्री"></img></p>
<p>बचपन से ही उन्हें शायरी का शौक था। सातवीं कक्षा में उनकी पहली गजल प्रतिष्ठित पत्रिका ‘निगार’ में प्रकाशित हुई थी। युवावस्था तक पहुंचते-पहुंचते उनकी गजलें भारत और पाकिस्तान की साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित होने लगीं। बाद में उन्होंने फिर से पढ़ाई शुरू की और अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से स्नातक, स्नातकोत्तर तथा पीएचडी की उपाधियां प्राप्त कीं। उनका शोध विषय ‘आजादी के बाद उर्दू गजल का आलोचनात्मक अध्ययन’ था।</p>
<p><img src="https://staticimg.amarujala.com/assets/images/2017/06/11/bashir-badr_1497170073.jpeg?w=750&amp;dpr=1.0" alt="Padmshri Dr Bashir Badr; A Most Popular Shayer - Amar Ujala Kavya -  पद्मश्री डॉ. बशीर बद्र:सिर्फ़ शायर ही नहीं एक नज़रिया भी हैं..."></img></p>
<p>वर्ष 1967 में उन्होंने पुलिस सेवा छोड़ दी और साहित्य तथा शिक्षण को अपना जीवन समर्पित कर दिया। वर्ष 1974 में पीएचडी पूरी करने के बाद वे मेरठ विश्वविद्यालय से संबद्ध मेरठ कॉलेज में उर्दू विभाग में व्याख्याता नियुक्त हुए। वर्ष 1974 से 1990 के बीच उनकी शायरी ने नई ऊंचाइयां हासिल कीं और वे देश-विदेश के मुशायरों में लोकप्रिय शायर बन गए। डॉ. बशीर बद्र ने उर्दू गजल को पारंपरिक फारसी और अरबी प्रभाव से निकालकर बोलचाल की भाषा से जोड़ा। उन्होंने गजल में ऐसे शब्दों और अनुभवों को शामिल किया, जिन्हें पहले उर्दू शायरी का हिस्सा नहीं माना जाता था। उनकी शायरी में गांव की मिट्टी की खुशबू भी है और शहर की जिंदगी की तल्ख सच्चाइयां भी।</p>
<p><img src="https://resize.indiatv.in/resize/newbucket/1200_-/2026/05/bashir-badr-1779961586.webp" alt="मशहूर शायर बशीर बद्र का निधन, 91 की उम्र में कहा दुनिया को अलविदा, आखिरी  दिनों में भूल गए थे खुद के शेर - India TV Hindi"></img></p>
<p>उनकी गजलें मोहब्बत, दर्द, अकेलेपन, रिश्तों और बदलते समाज की संवेदनाओं को बेहद सहज ढंग से प्रस्तुत करती हैं। उनके कई शेर आज भी लोगों की जुबां पर हैं। ‘उजाले अपनी यादों के हमारे साथ रहने दो, न जाने किस गली में जिंदगी की शाम हो जाए’ और ‘लोग टूट जाते हैं एक घर बनाने में, तुम तरस नहीं खाते बस्तियां जलाने में’ जैसे शेर उन्हें आम जनमानस से जोड़ते हैं।</p>
<p><img src="https://images.bhaskarassets.com/thumb/1200x900/web2images/521/2020/11/24/orig_35_1606165508.jpg" alt="Bashir Badr no longer recognizes even his wife, Iarshad-Irshad is said when  someone misses a Mushaira."></img></p>
<p>वर्ष 1987 के मेरठ दंगों में उनका घर जल गया था। इसके बाद वे भोपाल आकर बस गए। उन्होंने बाद में डॉ. राहत सुल्तान से विवाह किया। बढ़ती उम्र के साथ उनकी स्मरण शक्ति कमजोर होती गई और वे लंबे समय से डिमेंशिया बीमारी से पीड़ित थे। डॉ. बशीर बद्र को साहित्य अकादमी पुरस्कार सहित अनेक सम्मान प्राप्त हुए। भारत सरकार ने उन्हें पद्मश्री से भी सम्मानित किया। उनके प्रमुख गजल संग्रहों में ‘इकाई’, ‘इमेज’, ‘आमद’, ‘आस’, ‘आसमान’ और ‘आहट’ शामिल हैं। उर्दू गजल में नए प्रयोगों, सरल भाषा और मानवीय संवेदनाओं के कारण डॉ. बशीर बद्र को आधुनिक उर्दू शायरी का महत्वपूर्ण स्तंभ माना जाता है। उनकी शायरी आने वाली पीढ़ियों को भी लंबे समय तक प्रेरित करती रहेगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 28 May 2026 14:59:19 +0530</pubDate>
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                <title>पंचतत्व में विलीन हुए अजित दादा, बेटे, पार्थ पवार और जय पवार ने दी मुखाग्नि, आंसुओं के सैलाब के बीच हुआ अंतिम संस्कार</title>
                                    <description><![CDATA[विमान हादसे में निधन के बाद अजित पवार का बारामती में पूरे राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार हुआ। देशभर के नेताओं और समर्थकों ने नम आंखों से अंतिम विदाई दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/ajit-dada-son-parth-pawar-and-jai-pawar-who-joined/article-141172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/500-px)-(7).png" alt=""></a><br /><p>महाराष्ट्र। महाराष्ट्र के डिप्टी सीएम अजित पवार का बुधवार को विमान हादसे में निधन हो गया था जिसके बाद महाराष्ट्र समेत पूरे देश में शोक की लहर दौड़ पड़ी है। बता दें कि आज बारामती विद्या प्रतिष्ठान ग्राउंड में अजित पवार का पूरे राजकीय सम्मान के साथ अंतिम संस्कार किया गया। इसके साथ ही महाराष्ट्र की राजनीति के दादा पंचतत्व में विलीन हो गए।</p>
<p>बता दें कि उनके बेटे पार्थ पवार और जय पवार दोनों ने मिलकर पिता अजित पवार की चिता को मुखाग्नि दी। अजीत पवार को अंतिम विदाई देने के लिए केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह, केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी, महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और गोवा के मुख्यमंत्री प्रमोद सावंत आदि अंतिम संस्कार में शामिल हुए। इसके साथ ही बता दें कि अजित पवार की पत्नी और राज्यसभा सांसद सुनेत्रा पवार ने अपने पति को अंतिम विदाई दी।</p>
<p>बता दें कि अजित पवार के अंतिम दर्शन के लिए समर्थकों, नेताओं की भीड़ उमड़ पड़ी। अजित दादा को अंतिम विदाई देने के लिए सुप्रिया सुले और सुनेत्रा पवार भी पहुंची थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 29 Jan 2026 12:41:46 +0530</pubDate>
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                <title>हिमाचल प्रदेश में भीषण हादसा, सिलेंडर ब्लास्ट के बाद घर में लगी आग में एक ही परिवार के 6 लोगों की मौत, बचाव राहत कार्य जारी</title>
                                    <description><![CDATA[सिरमौर के तलंगाना गांव में सिलेंडर ब्लास्ट से लगी भीषण आग में एक ही परिवार के छह लोगों की झुलसकर मौत।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/horrific-accident-in-himachal-pradesh-6-people-of-the-same/article-139622"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/himachal-fire.png" alt=""></a><br /><p>सिरमौर। हिमाचल प्रदेश से बड़ी खबर सामने आ रही है। यहां​ जिला सिरमौर के श्रीरेणुकाजी विधानसभा क्षेत्र के तहत आने वाली धनडूरी पंचायत के तलंगाना गांव के एक परिवार में सिलेंडर ब्लास्ट होने से देर रात आग लग गई, आग इतनी भीषण थी परिवार के करीब 6 लोगों की झुलसकर मौके पर ही मौत हो गई। मरने वालों की पहचान विता देवी पत्नी लोकेंद्र सिंह, सारिका 9 साल, कृतिका 3 साल, तृप्ता देवी 44 साल तथा नरेश कुमार के रूप में हुई है।</p>
<p>स्थानिय लोगों के द्वारा सूचना देने के बाद एसडीएम संगहाड सुनील कुमार घटनास्थल पर रवाना हो चुके हैं। बता दें कि इस हादसे के बाद भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष जगत प्रकाश नड्डा, प्रदेश अध्यक्ष डॉ. राजीव बिंदल, नेता प्रतिपक्ष जयराम ठाकुर, सांसद सुरेश कश्यप, पूर्व केंद्रीय मंत्री अनुराग ठाकुर, पूर्व मुख्यमंत्री प्रेम कुमार धूमल तथा शांता कुमार ने इस हृदय विदारक हादसे पर शोक व्यक्त करते हुए गहरी संवेदना प्रकट की और दिवंगत आत्माओं की शांति के लिए प्रार्थना की। फिलहाल, आग पर काबू पाने की कोशिश की जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 15 Jan 2026 13:24:36 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर राज्य में 7 दिन के राजकीय शोक  की घोषणा</title>
                                    <description><![CDATA[स्वर्गीय मनमोहन सिंह के सम्मान में राज्य में 26 दिसंबर से 7 दिन तक राजकीय शोक रहेगा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/announcement-of-7-days-state-mourning-in-the-state-on/article-98858"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/555452.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्य सरकार ने पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह के निधन पर प्रदेश में सात दिन का राजकीय शोक घोषित किया है। स्वर्गीय मनमोहन सिंह के सम्मान में राज्य में 26 दिसंबर से 7 दिन तक राजकीय शोक रहेगा। इस दौरान राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे तथा किसी भी आधिकारिक मनोरंजन कार्यक्रम का आयोजन नहीं किया जाएगा।</p>
<p>पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह का निधन नई दिल्ली स्थित अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान में हो गया। भारत सरकार द्वारा स्व. डॉ. मनमोहन सिंह को राजकीय सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी जाएगी। अंतिम संस्कार के दिन सभी राजनयिक मिशन एवं विदेशों में भी उच्चायोगों में राष्ट्रीय ध्वज आधे झुके रहेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 27 Dec 2024 16:43:45 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>तुलसी गौड़ा के निधन से कर्नाटक में शोक की लहर, मोदी ने जताया शोक</title>
                                    <description><![CDATA[मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने वन विभाग में एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में उनकी शुरुआत को याद किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/wave-of-mourning-in-karnataka-due-to-the-demise-of/article-97914"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/663333-copy6.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलुरु। पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित प्रसिद्ध पर्यावरणविद् तुलसी गौड़ा के निधन से पूरे देश में शोक की लहर है और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया, उपमुख्यमंत्री डीके शिवकुमार, और राज्य भाजपा के अध्यक्ष विजयेंद्र येदियुरप्पा देशभर के नेताओं ने पर्यावरण संरक्षण के लिए उनके आजीवन समर्पण की सराहना करते हुए मंगलवार को उन्हें श्रद्धांजलि दी। मोदी ने प्रकृति के पोषण में उनके अथक काम के लिए सुश्री गौड़ा की प्रशंसा करते हुए कहा- ''उन्होंने अपना जीवन हजारों पौधे लगाने और हमारे पर्यावरण के संरक्षण के लिए समर्पित कर दिया। उनका काम पीढिय़ों को हमारे ग्रह की रक्षा के लिए प्रेरित करता रहेगा। उन्होंने उनके परिवार और प्रशंसकों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए कहा- ''ओम शांति''। </p>
<p>मुख्यमंत्री सिद्दारमैया ने वन विभाग में एक दिहाड़ी मजदूर के रूप में उनकी शुरुआत को याद किया। उन्होंने कहा- ''अपनी सेवानिवृत्ति के बाद भी, उन्होंने पेड़ लगाना जारी रखा, पर्यावरण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता से कभी पीछे नहीं हटीं। उनके उत्कृष्ट कार्य के लिए उन्हें पद्मश्री से सम्मानित किया गया। उन्होंने सुश्री गौड़ा की आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना भी की।      </p>
<p>शिवकुमार ने उन्हें औपचारिक रूप से शिक्षित न होने के बावजूद प्रकृति के बारे में उनके गहरे ज्ञान का उल्लेख करते हुए, ''वृक्ष माता'' के रूप में वर्णित किया। उन्होंने कहा- ''उनका जीवन, जिसमें लाखों पेड़ लगाना और उनका पालन-पोषण करना, साथ ही कई लुप्तप्राय जंगली पौधों के बीज एकत्र करना शामिल था। उन्होंने अपनी संवेदना व्यक्त की और उनकी आत्मा की शांति के लिए प्रार्थना करते हुए कहा, ''ओम शांति''।</p>
<p>विजयेंद्र ने भी उनके निधन पर दुख व्यक्त किया। उन्होंने कहा- ''पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित और पर्यावरण की सशक्त आवाज तुलसी गौड़ा के निधन से वास्तव में पर्यावरणविदों को बड़ा सदमा लगा है। हरित क्रांति के माध्यम से उनकी अथक चिंता और पर्यावरण क्रांति की मान्यता में केंद्र सरकार ने उन्हें पिछले साल प्रतिष्ठित पद्म श्री पुरस्कार से सम्मानित किया। विजयेंद्र ने पर्यावरण में उनके असाधारण योगदान पर प्रकाश डालते हुए कहा- ''उन्होंने प्रति वर्ष 30 हजार से अधिक पेड़ लगाए और उनका पालन-पोषण किया तथा वह 14 वर्षों से अधिक समय से वृक्षारोपण कर रही थीं। </p>
<p>उन्होंने कहा कि सुश्री गौड़ा का निधन कर्नाटक में पर्यावरण संरक्षण के एक युग का अंत है। प्रकृति के प्रति उनका आजीवन समर्पण भविष्य की पीढिय़ों को पर्यावरण के संरक्षण और सुरक्षा की लड़ाई में प्रेरित करता रहेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Dec 2024 16:21:33 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>प्रयागराज में आकशीय बिजली का कहर: 6 की मौत, कई झुलसे</title>
                                    <description><![CDATA[प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों के दौरान आकाशीय बिजली की चपेट में आने की विभिन्न घटनाओं में एक युवक समेत छह लोगों की मौत हो गयी और कुछ अन्य झुलस भी गये हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/lightning-havoc-in-prayagraj-6-killed-many-scorched/article-16287"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/prayagraj.jpg" alt=""></a><br /><p>प्रयागराज। उत्तर प्रदेश में प्रयागराज के विभिन्न थाना क्षेत्रों में पिछले 24 घंटों के दौरान आकाशीय बिजली की चपेट में आने की विभिन्न घटनाओं में एक युवक समेत छह लोगों की मौत हो गयी और कुछ अन्य झुलस भी गये हैं। </p>
<p>खेत में धान की रोपाई करते समय आकाशीय बिजली गिरने और उसकी चपेट में आने से पिछले 24 घंटे के दौरान एक युवक समेत छह लोगों की मौत हो गयी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस जनहानि पर गहरा शोक व्यक्त करते हुए मृतकों के परिजनों को चार चार लाख रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान करने के निर्देश दिए। पुलिस के अनुसार पिछले 24 घंटे के दौरान प्रयागराज के कोरांव, सराय ममरेज, मेजा, मांडा, बारा और उतरांव थाना क्षेत्रों में धान लगाते समय बारिश के दौरान आकाशीय बिजली गिरने से उसकी चपेट में एक युवक और पांच महिलाओं की मृत्यु हो गयी जबकि कई झुलस गये। घायलों को जिले के अलग अलग अस्पतालों में भर्ती कराया गया है।<br /><br />उन्होने बताया कि कोरांव थाना क्षेत्र में माडो गांव में एक खेत में धान की रोपाई करने सोनू कोल (25)की मौत हो गयी जबकि उसके साथ अन्य लोग बुरी तरह झुलस गये जिनका कोरांव सामुदायिक स्वास्थ्य केन्द्र (सीएचसी) में भर्ती कराया गया है। इसी प्रकार सराय ममरेज थाना क्षेत्र के नासिर पट्टी गांव में धान की रोपई कर रही रमेश चन्द्र की पुत्री बेबी (25) भी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से गंभीर रूप से झुलस गयी और मौके पर ही उसकी मृत्यु हो गयी जबकि साथ में कुछ अन्य मजदूर बाल-बाल बच गए।</p>
<p>इसी प्रकार मांडा थाना क्षेत्र के ढि़लिया केवटान बस्ती निवासी मुकेश कुमार और पत्नी सन्नो देवी (30) दोपहर में धान की रोपाई कर रहे थे।  आकाशीय बिजली गिरने से सन्नो की झुलस कर मौके पर ही मौत हो गयी जबकि मुकेश को  एक एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया है।  बारा थाना क्षेत्र के ग्राम पंचायत पिपराव निवासी शुशील की पत्नी खुशबू (20) अपनी छोटी बहिन शिप्रा के साथ धान की रोपाई करने गयी थी। आकाशीय बिजली की चपेट में आने से दोनो बहनें झुलस गयी। परिजन दोनो को अस्पताल ले गये जहां डाक्टरों ने खुशबू को मृत घोषित कर दिया। जबकि मेजा थाना क्षेत्र की निवासी ङ्क्षसहपुर कला गांव निवासी श्रीकांंत शर्मा की पत्नी प्रतिमा और उतरांव थाना क्षेत्र की इनायतपट्टी निवासी राजू भारतीया की पुत्री गीता (25) की भी आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो गयी।<br /><br /> मुख्यमंत्री कार्यालय की ओर से लखनऊ में जारी बयान में योगी ने प्रयागराज में आकाशीय बिजली गिरने से हुई छह लोगों की मृत्यु पर गहरा शोक व्यक्त किया है। उन्होने शोक संतप्त परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करते हुए इस दैवीय आपदा से मृतक के परिजनों को चार-चार लाख रूपए की आर्थिक सहायता प्रदान किए जाने की घोषणा की।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Jul 2022 16:59:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>शादी की खुशियां बदली मातम में : दूल्हे सहित 9 बरातियों की मौत : हादसे के बाद ढाई घंटे पानी में डूबे रहे शव</title>
                                    <description><![CDATA[ मृतकों में 3 चौथ का बरवाड़ा और 6 जयपुर के, चौथ का बरवाड़ा से उज्जैन जा रही थी बारात ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-happiness-of-marriage-turned-into-mourning--the-bodies-were-submerged-in-water-for-two-and-a-half-hours-after-the-accident--barati-s-car-fell-in-chambal-river--9-marriages-including-the-groom-died--among-the-dead--3-chauth-ka-barwada-and-6-in-jaipur/article-4740"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-02/du1.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नयापुरा थाना क्षेत्र में रविवार तड़के बरातियों की एक कार चम्बल नदी में जा गिरी। जिससे कार में सवार दूल्हा, उसके बहनोई और उसके भाई समेत 9 लोगों की मौके पर ही मौत हो गई। पुलिस व प्रशासन को घटना की जानकारी दो से ढाई घंटे बाद मिली। इतने समय शव पानी में डूबे रहे। पुलिस ने सभी शवों को नदी से निकालकर पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंप दिए। बारात चौथ का बरवाड़ा से उज्जैन जा रही थी। शहर पुलिस अधीक्षक केसरसिंह शेखावत ने बताया कि सुबह 8 बजे करीब सूचना मिली थी कि नयापुरा में चम्बल नदी में एक कार गिरी हुई है। इस सूचना पर पुलिस व निगम के गोताखोरों की टीम को मौके पर रवाना किया। वहां जाकर क्रेन की सहायता से कार को बाहर निकाला जिसमें 7 लोग मिले। उसके बाद निगम के गोताखोरों ने नदी में तलाश किया तो दो शव बाद में मिले। इस तरह से कार नदी में गिरने से 9 लोगों की मौत हुई है। अचानक हुए इस हादसे से कोटा में तो हड़कम्प मच गया। साथ ही चौथ का बरवाड़ा में दूल्हे के परिवार और उज्जैन में दुल्हन के परिवार में खुशी की जगह मातम का माहौल छा गया। दोपहर 12.15 बजे पोस्टमार्टम के बाद सभी शवों को एक साथ 9 एम्बुलेंस से चौथ का बरवाड़ा व जयपुर के लिए रवाना किया गया। <br /><br /><strong>पूरा परिवार हुआ खत्म </strong><br />सवाईमाधोपुर। किशन गोपाल के दो बेटे हैं। बड़ा बेटा केशव है जिसकी शादी नहीं हुई है। जबकि छोटे बेटे अविनाश की शादी के तीन दिन कार्यक्रम करने के बाद रविवार को बारात उज्जैन जा रही थी। दोनों भाइयों की बारात में जाते समय हादसे में मौत हो गई है। हादसे में किशन गोपाल का पूरा परिवार ही खत्म हो गया है। दूल्हे के बहनोई शुभम और बहन नेहा की शादी 15 नवम्बर 2021 को हुई थी। नेहा की ससुराल जयपुर में है। जयपुर से यहां दोनों शादी में शरीक होने आए थे। नेहा की जान बच गई, लेकिन उसका पूरा जीवन बर्बाद हो गया है।<br /><br /><strong>इनकी हुई मौत </strong><br />एसपी ने बताया कि अर्टिगा कार में सवार 9 में से 3 लोग चौथ का बरवाड़ा के और 6 लोग जयपुर के रहने वाले थे। मृतकों में चौथ का बरवाड़ा निवासी दूल्हा अविनाश वाल्मीकि (23), उसका बड़ा भाई केशव (30) व कार चालक इस्लाम खान (35) के अलावा दूल्हे का बहनोई गौतम नगर जयपुर निवासी शुभम् (23), रोहित (22) व कुशाल (22), आमागढ़ ट्रांसपोर्ट नगर जयपुर निवासी राहुल (25), घाटगेट जयपुर निवासी विकास (24) और मालवीय नगर निवासी मुकेश कुमार (35) शामिल हैं। जबकि बस में दूल्हे के पिता किशनलाल समेत अन्य लोग सवार थे। हादसे की जानकारी मिलते ही परिजनों की बस भी मौके पर पहुंची। मोर्चरी के बाहर दूल्हे के पिता समेत अन्य लोगों का रो-रोकर बुरा हाल हो रहा था। <br /><br /><strong>प्रभारी मंत्री और विधायक पहुंचे सांत्वना देने</strong><br />प्रभारी व पीडब्लूडी मंत्री भजनलाल जाटव भरतपुर से गमगीन परिवार को सांत्वना देने चौथ का बरवाड़ा पहुंचे। हादसे की खबर से चौथ का बरवाड़ा गांव में मातम का माहौल बना हुआ है। दोपहर करीब सवा तीन बजे कोटा में पोस्टमार्टम के बाद तीनों शव चौथ का बरवाड़ा पहुंचे। शवों के यहां पहुंचते ही कोहराम मच गया। जहां दुल्हन आनी थी। वहां अपने परिजनों के शव आता देखकर गांववासी भी अपने आंसू नहीं रोक सके। क्षेत्रीय विधायक अशोक बैरवा और जिला कलक्टर सुरेश कुमार ओला सहित कई पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी मौजूद रहे। <br /><strong><br />राष्ट्रपति, मुख्यमंत्री, पूर्व सीएम और लोकसभा अध्यक्ष ने जताया दु:ख<br />मृतकों के आश्रितों को दो और पांच लाख रुपए की सहायता</strong><br />कोटा में दूल्हे सहित बारातियों की मौत पर राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद, राज्यपाल कलराज मिश्र, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला और मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने शोक संवेदना व्यक्त की है। राष्ट्रपति और राज्यपाल ने शोकाकुल परिजनों को यह दु:ख सहन करने की शक्ति प्रदान करने की प्रार्थना की है। मुख्यमंत्री ने ट्वीट कर कहा कि दूल्हे सहित नौ लोगों की मौत बेहद दुखद व दुर्भाग्यपूर्ण है। उन्होंने कलेक्टर से बात कर पूरी घटना की जानकारी ली है। गहलोत ने पीडब्ल्यूडी मंत्री भजनलाल जाटव को घटना स्थल पर जाने के निर्देश दिए। हादसे में मृतक आश्रित को दो लाख रुपए की और एक परिवार से दो या अधिक मृतकों पर अधिकतम पांच लाख रुपए की सहायता राशि देने के निर्देश दिए हैं। पूर्व सीएम वसुन्धरा राजे ने कहा कि इस हृदय विदारक दुर्घटना ने हम सब को आहत कर दिया है। मैं ईश्वर से दिवंगतों की आत्मा को शान्ति तथा शोक संतृप्त परिजनों को धैर्य प्रदान करने की प्रार्थना करती हूं। </p>
<p><strong>दो भाई और एक दोस्त की अर्थी को एक साथ देख लोगों की आंखें नम</strong><br />जयपुर से दोस्त के साले की शादी में चौथ का बरवाड़ा गए पांच परिवारों की खुशियां रविवार को मातम में बदल गईं। यहां टोंक फाटक स्थित गौतम नगर की वाल्मीकि बस्ती में दो भाइयों और एक दोस्त की अर्थी एक साथ उठी तो पूरी बस्ती के लोगों की आंखे नम हो गईं। लोगों का कहना है कि मृतक पांच दोस्त हमेशा एक-दूसरे के सुख-दुख में साथ रहते थे। मृतक शुभम अपने भाई खुशाल और चार दोस्तों के साथ अपने साले अविनाश की शादी में चौथ का बरवाड़ा गया था। सभी शादी से एक दिन पहले ट्रेन से शुभम की ससुराल गए थे। शुभम की 11 नवंबर को ही शादी हुई थी। इसलिए ससुराल में कार्यक्रम उसके दोस्त भी साथ गए थे।<br /><br /><strong>कई जगह एक साथ किया काम</strong><br />शुभम के बड़े भाई मनोज कुमार ने बताया कि सभी दोस्त एक साथ में रहते थे। कई जगहों पर साथ में काम किया। सभी की अच्छी दोस्ती थी। किसी भी परिवार में कोई भी कार्यक्रम होता तो सभी दोस्त मिल कर काम करते थे। इसलिए शुभम के साले अविनाश की शादी में जाने के लिए पहले से ही कार्यक्रम बनाया था। शुभम के पांच भाई हैं। मृतक तीसरे नंबर का था। खुशाल की दो बहनें और दो भाई हैं। मृतक खुशाल सबसे बड़ा था। दूल्हे अविनाश को लेकर कार में शुभम और उसके दोस्त बैठे हुए थे। हादसा कैसे हुआ इसके बारे में पता नहीं चला, क्योंकि गाड़ी में सवार नौ लोगों के शव नदी से बाहर निकाले हैं।<br /><br /><strong>चार माह पहले हुई थी शादी</strong><br />शुभम की चार महीने पहले ही शादी हुई थी। इसलिए पत्नी 15 दिन पहले ही अपने घर चली गई थी। इधर परिवार खुशाल की शादी की तैयारी कर रहा था।<br /><strong><br />शादी की चल रही थी तैयारी</strong><br />गौतम नगर कच्ची बस्ती निवासी मृतक रोहित के भाई अजय ने बताया कि हम रोहित की शादी की तैयारी कर रहे थे। इससे पहले दो बहनों और मेरी शादी हो चुकी है। एक परिवार से शादी की चर्चा चल रही थी। अगर सब कुछ ठीक रहता तो शादी करने का विचार था। परिवार में दो भाई और तीन बहने हैं। इसमें से एक भाई और दो बहनों की शादी हो चुकी है। इस बार रोहित की शादी की तैयारी चल रही थी। इससे पहले ही हादसे में रोहित की मौत हो गई।<br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Feb 2022 11:03:57 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>शौर्य चक्र सम्मानित कैप्टन वरूण सिंह के निधन का समाचार मिलते ही पैतृक गांव कन्हौली में शोक की लहर, श्रंद्धाजलि देने वालों का जमावड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[देवरिया। तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर हादसे में  सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत समेत 13 लोगों की मौत के बाद हादसे में एक  मात्र जीवित बचे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कन्हौली निवासी ग्रुप कैप्टन  वरुण सिंह की उपचार के दौरान बुधवार को निधन की सूचना मिलने के बाद देश के साथ उनके पैतृक गांव  कन्हौली में शोक की लहर दौड़ गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B6%E0%A5%8C%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF-%E0%A4%9A%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%95%E0%A5%88%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A4%A8-%E0%A4%B5%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%A3-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%B9-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%A7%E0%A4%A8-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%9A%E0%A4%BE%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A4%A4%E0%A5%87-%E0%A4%B9%E0%A5%80-%E0%A4%AA%E0%A5%88%E0%A4%A4%E0%A5%83%E0%A4%95-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%8C%E0%A4%B2%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%95-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B2%E0%A4%B9%E0%A4%B0--%E0%A4%B6%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B2%E0%A4%BF-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%B5%E0%A4%BE%E0%A4%B2%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%9C%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%B5%E0%A4%A1%E0%A4%BC%E0%A4%BE/article-3236"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/7.jpg" alt=""></a><br /><p>देवरिया। तमिलनाडु के कुन्नूर में हेलीकॉप्टर हादसे में  सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत समेत 13 लोगों की मौत के बाद हादसे में एक  मात्र जीवित बचे उत्तर प्रदेश के देवरिया जिले के कन्हौली निवासी ग्रुप कैप्टन  वरुण सिंह की उपचार के दौरान बुधवार को निधन की सूचना मिलने के बाद देश के साथ उनके पैतृक गांव  कन्हौली में शोक की लहर दौड़ गई। हालांकि देवरिया के लाल की  सलामती के लिए लोग प्रार्थना कर रहे थे लेकिन  ग्रुप कैप्टन  कई दिनों से जिन्दगी के लिए लड़ रही जंग हार गये। बहादुर लाल के  निधन की सूचना मिलते ही उत्तर प्रदेश में देवरिया जिले के रूद्रपुर तहसील  क्षेत्र के उनके पैतृक गांव कन्हौली में शोक की लहर छायी हुई है और उनके  आवास पर शोकाकुल लोगों का जमावड़ा लगा हुआ है और भीड़ अपने लाल को गम में शहीद के आवास पर जमा होकर शहीद को श्रंद्धाजलि दे रही हैं। <br /><br />शहीद वरूण सिंह के परिवार में माता,पिता,भाई के साथ पत्नी और दो बच्चे हैं। उनकी प्रारंभिक पढ़ाई उड़ीसा में हुई थी और वह  एनडीए की परीक्षा पासकर वायु सेना में अधिकारी बने। उनके पिता कृष्ण  प्रताप सिंह आर्मी में कर्नल के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं। वरुण के छोटे  भाई तनुज सिंह मुंबई में भारतीय नौसेना में अधिकारी हैं। पिछले साल एक उड़ान  के दौरान विमान में बड़ी तकनीकी खराबी के बाद भी कैप्टन वरुण सिंह ने विमान  को हैंडल करते हुए विमान को सकुशल जमीन पर उतारा था। उनके इस अदम्य साहस के  लिए उन्हें 15 अगस्त 2021 को राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने शौर्य चक्र से  सम्मानित किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 15 Dec 2021 16:13:43 +0530</pubDate>
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