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                <title>degree - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>16 हजार की डिग्री के लिए बालिकाएं चुका रही 50 हजार, रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</title>
                                    <description><![CDATA[रेगुलर स्कीम के मुकाबले सेल्फ फाइनेंस स्कीम में ढाई गुना ज्यादा लग रही फीस ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/girls-are-paying-50-thousand-for-a-degree-of-16-thousand/article-115954"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/rtroer-(3)22.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज जेडीबी आर्ट्स में एमए होम साइंस व जीपीईएम पिछले 7 साल से सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहे हैं। जिससे बालिकाओं की शिक्षा महंगी हो गई। नतीजन, 16 हजार की डिग्री के लिए उन्हें 50 हजार रुपए फीस चुकानी पड़ रही है। सरकारी कॉलेज होने के बावजूद महंगी फीस, बालिकाओं के शिक्षा में बढ़ते कदम पर बेड़ियां बन गई। दरअसल, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) व होम साइंस बीए तक तो सरकारी स्कीम के तहत संचालित होता है। जिसमें कोर्स फीस परईयर 3 हजार रुपए लगती है। जबकि, एमए में यही कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से 20 हजार रुपए परईयर हो गई।  महंगी फीस के कारण बालिकाओं को बारां-झालावाड़ की ओर रुख करना पड़ रहा है। वहीं, इंडस्ट्रीज में डिमांड होने के बावजूद छात्राएं इन पाठ्यक्रमों में एडमिशन नहीं ले पा रही। </p>
<p><strong>जीपीईएम :</strong> 40 हजार कोर्स व 10 हजार एग्जाम फीस: राजकीय कला कन्या महाविद्यालय में सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत एमए जीपीईएम कोर्स की फीस पर-ईयर 20 हजार रुपए है। साल में दो बार सेमेस्टर एग्जाम होते हैं। पर-सेमेस्टर एग्जाम फीस ढाई हजार रुपए है, ऐसे में एक साल के 25 हजार रुपए होते हैं और दो साल का पीजी कोर्स पूरा करने के लिए छात्राओं को 50 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। ग्रामीण परिवेश से आने वाली छात्राओं के लिए इतनी महंगी फीस दे पाना चुनौतिपूर्ण रहता है। ऐसे में कई छात्राएं रुचि होने के बावजूद इस कोर्स में दाखिला नहीं ले पाती। </p>
<p><strong>रेगुलर स्कीम में 3 हजार रुपए फीस</strong><br />जीपीईएम विभागाध्यक्ष प्रो. बिंदू चतुर्वेदी बताती हैं, यदि गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) कोर्स सरकारी स्कीम में संचालित किया जाए तो इसकी फीस 20 हजार की बजाय 3 हजार रुपए सालाना हो जाएगी। वहीं, सेमेस्टर एग्जाम फीस 5 हजार रुपए जोड़कर 8 हजार रुपए में एक साल पूरा हो जाएगा। इस तरह दो साल की यह डिग्री 50 हजार की जगह 16 हजार रुपए में पूरी हो जाएगी। ऐसे में ज्यादा से ज्यादा छात्राएं दाखिला ले पाएंगी और उन पर आर्थिक भार भी नहीं पड़ेगा। टैक्सटाइल डिजाइनिंग के क्षेत्र में प्रतिभाएं उभर सकेंगी। </p>
<p><strong>होम साइंस : 15 हजार की जगह लग रहे 30 हजार</strong><br />होम साइंस की विभागाध्यक्ष दीपा स्वामी बताती हैं, एमए होम साइंस भी सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है। इसकी पर-ईयर फीस 10 हजार रुपए तथा 5 हजार रुपए सेमेस्टर एग्जाम फीस है। ऐसे में एक साल में 15 हजार रुपए खर्च होते हैं। इस तरह दो साल की डिग्री पूरी करने के लिए 30 हजार लगते हैं। जबकि, यही कोर्स यूजी में सरकारी मोड पर संचालित होने से इसकी फीस परईयर 3 हजार रुपए ही है। </p>
<p><strong>साइड इफेक्ट: हर साल खाली रहती सीटें</strong><br />कॉलेज से मिली जानकारी के अनुसार, प्रदेश के अन्य जिलों से भी लड़कियां जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में एमए जीपीईएम में दाखिले के लिए आवेदन करती हैं। इस विषय में कुल 20 सीटें हैं, जिसके मुकाबले एडमिशन फॉर्म तो दो गुने आते हैं लेकिन फीस ज्यादा होने के चलते 10 से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है। कॉलेज में यूजी में 1999 में यह कोर्स शुरू हुआ था। उस समय राज्य में केवल अलवर व बीकानेर में ही चलता था। डिमांड बढ़ने पर जेडीबी में पीजी में वर्ष 2018 में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में इस कोर्स को शुरू किया था। जीपीईएम में गत वर्ष प्रिवियस में 15 तथा फाइनल में 11 सीटें खाली रह गई। होम साइंस की 40 सीटों में से आधी सीटें खाली रही थी।  </p>
<p><strong>बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर छात्राएं</strong><br />छात्राओं ने बताया कि हाड़ौती में केवल राजकीय महाविद्यालय बारां व झालावाड़ में ही होम साइंस रेगुलर स्कीम में संचालित हो रहा है। जिसमें सरकारी फीस होने के कारण बड़ी संख्या में छात्राएं कोटा से बारां-झालावाड़ जाने को मजबूर होती है। जबकि, कोटा में इसे सरकारी स्कीम में चलाने के लिए आयुक्तालय से लेकर विधायक मंत्री तक को ज्ञापन दे चुके हैं, इसके बावजूद समाधान नहीं हो रहा। </p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br /><strong>फीस बहुत महंगी, रेगुलर मोड पर चलाए सरकार</strong><br />मैने जीपीईएम में एमए किया है। सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चलने से कोर्स की फीस बहुत महंगा है। ऊपर से सेमेस्टर के कारण फीस और बढ़ गई। इसके अलावा प्रेक्टिकल, असाइमेंट व इंडस्ट्री विजिट सहित अन्य खर्चों को मिलाकर दो साल की डिग्री करने में 50 हजार से ज्यादा रुपए खर्च हो गए। इतनी महंगी शिक्षा से कई छात्राएं रुचि होते हुए भी यह कोर्स नहीं कर पातीं। सरकार को छात्राओं के हित में इस कोर्स को रेगुलर स्कीम में संचालित करना चाहिए। <br /><strong>-निकिता सचवानी, रिसर्चर जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>एक साथ 20 हजार रुपए सालाना फीस जमा करवाना लड़कियों के लिए आसान नहीं होता। क्योंकि, अधिकतर छात्राएं ग्रामीण परिवेश से आती हैं। जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में चलाने के लिए शिक्षकों व आयुक्तालय से डिमांड की लेकिन कुछ नहीं हुआ। फॉर्म तो सीटों से दो गुना आते हैं लेकिन महंगी फीस के कारण छात्राएं एडमिशन नहीं ले पाती। कुछ समय पहले छात्राओं  ने होमसाइंस व जीपीईएम को रेगुलर स्कीम में करने की मांग को लेकर प्रदर्शन भी किया था। <br /><strong>-अनुश्री सक्सेना, छात्रा जेडीबी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>क्या कहते हैं प्रोफेसर </strong><br /><strong>परिधान इंडस्ट्री में रोजगार के अवसर </strong><br />जीपीएम, गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एम्पोर्ट मैनेजमेंट कोर्स होता है। इसमें कपड़ा निर्माण से लेकर डिजाइनिंग व एक्सपोर्ट-एम्पोर्ट तक की जानकारी दी जाती है। इस कोर्स में एडमिशन लेकर छात्राएं, फैशन डिजाइनिंग, परिधान उद्योग, गारमेंट व्यवसाय, बुटीक, गारमेंट इंडस्ट्री में कॅरियर बना सकती हैं। वहीं, नेट व सेट कर आरपीएससी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भी नौकरी पा सकती हैं। छात्राओं को जयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा में इंडस्ट्री विजट करवाई जाती है। वहीं,  कैथून में कोटा डोरिया के उत्पादन-निर्माण दिखाया जाता है। इसमें रोजगार के असीम अवसर उपलब्ध हैं।<br /><strong>-प्रो. बिंदू चतुर्वेदी, विभागाध्यक्ष जीपीईएम, जेडीबी आर्ट्स कॅलेज</strong></p>
<p>कोटा जिले में यह एकमात्र ऐसा कॉलेज है, जहां होम साइंस में एमए कराई जाती है। लेकिन, सेल्फ फाइनेंस स्कीम में होने से फीस महंगी हो गई। जिसकी वजह से छात्राओं को बारां-झालावाड़ जाना पड़ता है। होम साइंस में प्रसार शिक्षा, इंटियर डिजाइनिंग, टेक्सटाइल, फू्रड एंड न्यूट्रीशियन तथा फर्नीचर डिजाइनिंग सीखाई जाती है। इसे रेगुलर मोड पर संचालित करवाने के लगातार प्रयास कर रहे हैं। आयुक्तालय को भी पत्र भेज चुके हैं। उम्मीद है इस सत्र से हो जाए। <br /><strong>-प्रो. दीपा स्वामी, विभागाध्यक्ष होम साइंस, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p> यह कॉलेज संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज है। पिछले 7 साल से जीपीईएम व होम साइंस कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहा है। फीस बहुत महंगी है, जिसके कारण छात्राओं पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इन कोर्सेज को सरकार द्वारा संचालित करवाने के लिए हर साल आयुक्तालय को पत्र भेजा जाता है।  हाल ही में लोकसभा स्पीकर के विशेषाधिकारी को भी इससे अवगत कराया है। उन्होंने समाधान का भरोसा दिलाया है। अब तक उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री, स्थानीय विधायकों को भी पत्रों के माध्यम से छात्राओं के हित में इन कोर्सेज को रेगुलर स्कीम में करवाने की मांग की थी। इसके बावजूद कुछ नहीं हुआ। हालांकि, हमारे स्तर पर प्रयास जारी है।  <br /><strong> -प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 May 2025 15:08:04 +0530</pubDate>
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                <title>राज्यपाल ने प्रो. सिंघल को शेखावाटी विश्वविद्यालय की मानद उपाधि से किया सम्मानित, कुलगुरु प्रो. अनिल कुमार राय रहे मौजूद </title>
                                    <description><![CDATA[ राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को राजभवन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर की ओर से राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.जगदीश प्रसाद सिंघल को पीएचडी की मानद उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-governor-honored-prof-singhal-with-the-honorary-degree-of/article-112573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/news-(1)47.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राज्यपाल हरिभाऊ बागडे ने बुधवार को राजभवन में पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर की ओर से राजस्थान विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति प्रो.जगदीश प्रसाद सिंघल को पीएचडी की मानद उपाधि प्रदान कर सम्मानित किया।</p>
<p>इस अवसर पर विश्वविद्यालय के कुलगुरु प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय मौजूद रहे। उल्लेखनीय है कि शेखावाटी विश्वविद्यालय के पंचम् दीक्षांत समारोह में शिक्षाविद् प्रो.जे.पी. सिंघल को मानद उपाधि प्रदान करने की घोषणा की गई थी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 30 Apr 2025 17:23:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>50 हजार की डिग्री अब 19 हजार में मिलेगी </title>
                                    <description><![CDATA[गवर्नमेंट साइंस में बीसीए व कॉमर्स कॉलेज में बीबीए की मिली सौगात]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/50-thousand-degree-will-now-be-available-for-19-thousand/article-95018"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6630400-sizee-(4)6.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। युवाओं को रोजगार से जोड़ने के लिए सरकार ने शहर के सरकारी कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज शुरू कर दिए हैं। ताकि, आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थी महंगी फीस के कारण व्यवसायिक शिक्षा से वंचित न रहे और इंडस्ट्री की डिमांड के अनुरूप अपनी कार्य क्षमता को निखार सके। साथ ही वर्तमान समय की आवश्यकता के अनुरूप प्रोफेशनल एम्पलोइज बन आजीविका चलाने में सक्षम बन सके।  सरकार की इस पहल से मध्यम व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के विद्यार्थियों को संबल मिलेगा। दरअसल, प्राइवेट कॉलेजों में प्रोफेशनल कोर्सेज की महंगी फीस को देखते हुए सरकार ने राजकीय महाविद्यालयों में रोजगारोन्नमुखी कोर्सेज शुरू किए हैं। गवर्नमेंट कॉलेज कोटा में बैचलर आॅफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) व   राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में बैचलर आॅफ बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन (बीबीए) की सौगात दी है। </p>
<p><strong>सरकारी में 6 तो निजी कॉलेज में 17 हजार सालाना फीस</strong><br />गवर्नमेंट कॉलेज कोटा की प्राचार्य प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव कहतीं हैं, सरकार ने बैचलर आॅफ कम्प्यूटर एप्लीकेशन (बीसीए) डिग्री कोर्स की सौगात दी है। सरकारी कॉलेज में बीसीए की सालाना फीस साढ़े 6 हजार है, जबकि प्राइवेट कॉलेज में 17 हजार है। ऐसे में निजी इंस्टीट्यूड में तीन साल की फीस 50 हजार से ऊपर पहुंच जाती है और सरकारी में 17 हजार में ही डिग्री पूरी हो जाएगी। इसके अलावा यहां इंडस्ट्री विजिट, एक्सपर्ट गेस्ट लेक्चर, विषय-विषयज्ञों से सेमिनार सहित पर्सनालटी व स्किल डवलपमेंट एक्टिविटी भी कैरिकुलम में शामिल की गई है। ताकि, कोर्स पूरा होने तक विद्यार्थी मार्केट की आवश्यकता के अनुसार प्रोफेशनल एम्पलोइज के रूप में तैयार हो सके।  </p>
<p><strong>व्यवसायिक शिक्षा से निखरेगा कौशल</strong><br />शिक्षाविदें का कहना है, निजी कॉलेजों में व्यवसायिक प्रोफेशनल कोर्सेज की फीस काफी महंगी होती है, जिसकी वजह से आर्थिक रूप से कमजोर तथा मध्यम वर्ग के विद्यार्थी बीसीए व बीबीए जैसे प्रोफेशन कोर्स नहीं कर पाते और रोजगार की दौड़ में पिछड़ जाते हैं। सरकार द्वारा सरकारी कॉलेजों में इन कोर्सेज को शुरू करना उच्च शिक्षा की दिशा में सहरानीय कदम है। यहां मामूली फीस में बेहतर साधन-संसाधनों व क्वालीफाइड फैकल्टी के साथ प्रोफेशनल कोर्स कर मल्टीनेशनल कम्पनियों में जॉब पा सकेंगे। सरकार के इस प्रयास से न केवल छात्रों का कौशल निखरेगा बल्कि रोजगार की दिशा में भी आगे बढ़ेंगे। विद्यार्थी खुद का व्यवसाय भी शुरू कर सकेंगे। </p>
<p><strong>यूजीसी मापदंडों पर शिक्षकों का चयन</strong><br />कॉलेज शिक्षा के सहायक क्षेत्रिय अधिकारी डॉ. गीताराम शर्मा ने बताया कि गवर्नमेंट कॉलेज में बीसीए की विद्या संबल पर तीन फैकल्टी लगाई गई है। शिक्षकों का चयन यूजीसी के तय मापदंड  पर ही की जाती है। जिसमें पीएचडी, नेट या सलेट क्वालिफाइड अभ्यर्थियों का ही चयन किया जाता है। ऐसे में सरकारी कॉलेज में वेल क्वालिफाइड शिक्षक हैं, जो विद्यार्थियों को कम्प्यूटर पढ़ा रहे हैं। इसके अलावा सरकार के रिसोर्सेज का लाभ भी विद्यार्थियों को रोजगार के रूप में मिलता है।</p>
<p><strong>लैब व कम्प्यूटर की उपलब्धता भी अधिक</strong><br />गवर्नमेंट साइंस कॉलेज के पास बड़ी लैब है, जहां 18 से 20 कम्प्यूटर हैं। इसके अलावा कॉलेज प्रशासन ने नई लैब बनाने व कम्प्यूटर सहित अन्य संसाधनों की उपलब्धता के लिए प्रस्ताव बनाकर आयुक्तालय भेजा है। जहां से स्वीकृति मिलते ही हाईटेक लैब तैयार की जाएगी। इसके अलावा प्लेसमेंट सेल भी आईटी कम्पनियों से समनव्य स्थापित कर रही है। </p>
<p><strong>इधर, बीबीए की सौगात </strong><br />राजकीय वाणिज्य महाविद्यालय में सरकार ने बैचलर आॅफ बिजनेस एडमिनेस्ट्रेशन (बीबीए) कोर्स खोला है। हालांकि, वित्तीय व प्रशासनिक स्वीकृति देरी से मिलने के कारण एडमिशन प्रक्रिया में अनावश्यक देरी हो गई। जिसकी वजह से पर्याप्त एडमिशन नहीं मिल पाए। वर्तमान में 9 सीटें भर चुकी हैं और कोर्स चलाने के लिए 10 विद्यार्थियों का एडमिशन होना जरूरी है। ऐसे में कॉलेज प्रशासन आवेदन करने वाले विद्यार्थियों से समम्पर्क कर कन्वेंस कर रहा है। संभव: इसी माह से यहां बीबीए कोर्स शुरू हो जाएगा।  </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />कम फीस में बेहतर सुविधाओं के साथ प्रोफेशनल बीसीए कोर्स करने का मौका मिला है। सरकार की इस पहल से ग्रामीण परिवेश से आने वाले विद्यार्थियों को संबल मिला है और रोजगार की दिशा में यह प्रयास मिल का पत्थर साबित होगा। गवर्नमेंट साइंस कॉलेज प्रशासन ने क्वालिफाइड शिक्षक लगाए हैं। कम्प्यूटर लैब में भी पर्याप्त कम्प्यूटर हैं। नियमित क्लासें लग रही हैं। फेकल्टी भी थ्योरी के बाद प्रेक्टिकल करवाती है। <br /><strong>-परमेंद्र सिंह, चारू कुमारी, मयंक, छात्र </strong></p>
<p>प्राइवेट कॉलेजों में बीसीए की तीन साल की फीस 50 हजार से ऊपर जाती है। ऐसे में मध्यम वर्ग के विद्यार्थियों के लिए यह कोर्स कर पाना आसान नहीं होता। गवर्नमेंट साइंस कॉलेज में यह कोर्स खुलने से बड़ी संख्या में विद्यार्थी प्रोफेशनल कोर्सेज कर पाएंगे। शिक्षक लैब में हर डाउट का सॉल्यूशन देते हैं। सरकार को इस तरह के अन्य प्रोफेशनल कोर्सेज भी शुरू करना चाहिए। <br /><strong>-रणजीत कुमार, योगेंद्र, आसिफ मंसूरी, छात्र </strong></p>
<p><strong>बढ़ेगा रोजगार, तैयार होंगे प्रोफेशनल्स  </strong><br />प्राइवेट कॉलेजों  व इंस्टीट्यूड्स में बीसीए व बीबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज की महंगी फीस होने के चलते कई प्रतिभाशाली विद्यार्थी वंचित रह जाते हैं। जबकि, यह कोर्सेज वर्तमान की आवश्यकता है। सरकारी हो या प्राइवेट सेक्टर हर जगह सभी कार्य आॅनलाइन हो गए हैं। ऐसे में मार्केट में आईटी प्राफेशनल की डिमांड बढ़ गई। वहीं, कई कम्पनियां खुदरा व्यवसाय में कई प्रोजेक्ट चला रही है। जिससे मैनेजमेंट एम्पलोइज की भी आवश्यकता बढ़ी है। ऐसे में सरकार ने सरकारी कॉलेजों में बीसीए व बीबीए जैसे प्रोफेशनल कोर्सेज शुरू किए हैं, ताकि युवाओं को रोजगार मिल सके। <br /><strong>-प्रो. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक, कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 14 Nov 2024 14:33:17 +0530</pubDate>
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                <title>असमंजस के भंवर में फंसी आरटीयू की एमए-एमएससी </title>
                                    <description><![CDATA[पहले सितम्बर फिर अक्टूबर में एडमिशन शुरू करने के किए थे दावे, नवम्बर में भी आसार नहीं।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rtu-s-ma-msc-stuck-in-a-whirlpool-of-confusion/article-94407"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/6633-copy34.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय में नॉन इंजीनियरिंग एमएससी व एमए डिग्री प्रोग्राम असमंजस के भंवर में फंस गए हैं। सितम्बर में शुरू होने वाले कोर्सेज के नवम्बर में भी शुरू होने के आसार नजर नहीं आ रहे। जबकि, आरटीयू द्वारा सितम्बर के प्रथम सप्ताह में ही कोर्स शुरू करने के दावे किए गए थे। एमएससी व एमए में 30-30 सीटों पर एडमिशन दिए जाने थे। लेकिन, आरटीयू प्रशासन की लेटलतीफी के कारण हजारों विद्यार्थियों की उम्मीदों पर पानी फिर गया।  क्योंकि, कॉलेजों में पीजी के एडमिशन प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और सीटें सीमित होने के कारण अधिकतर विद्यार्थी स्वयंपाठी के रूप में एडमिशन ले चुके हैं। ऐसे में उनका आरटीयू में एमएससी व एमए करना सपना ही रह गया। विशेषज्ञों का मत है, यदि आरटीयू द्वारा नवम्बर के आखिरी सप्ताह तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू करता है तो संतोषजनक एडमिशन नहीं मिल पाएंगे, क्योंकि अनावश्यक देरी के चलते विद्यार्थी अन्य संस्थानों में एडमिशन ले चुके हैं। कोटा यूनिवर्सिटी से एफिलेटेड कॉलेजों में पीजी प्रथम सेमेस्टर की परीक्षाएं भी दिसम्बर से जनवरी के बीच निर्धारित है। </p>
<p><strong>पहले सितम्बर फिर अक्टूबर अब नवम्बर</strong><br />आरटीयू प्रशासन द्वारा एमएससी व एमए डिग्री कोर्सेज शुरू करने के लिए पहले सितम्बर के प्रथम सप्ताह में प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने के दावे किए गए थे। इसके बाद कोर्स संचालन की कमेटी की मिटिंग नहीं होने का हवाला देकर अक्टूबर से एडमिशन स्टार्ट करने की बात कही गई। लेकिन, दोनों माह बीतने के बाद अब नवम्बर में बोम से अप्रूवल मिलने पर कोर्स शुरू करने की उम्मीद जताई जा रही है। </p>
<p><strong>फिजिक्स, मैथ्स व कैमेस्ट्री में एमएससी</strong><br />आरटीयू द्वारा वर्तमान शिक्षा सत्र 2024-25  में  फिजिक्स, मैथ्स व कैमेस्ट्री में एमएससी कराए जानी है। लेकिन, अब अब तक एडमिशन प्रक्रिया ही शुरू नहीं की गई। जबकि, सिलेबस तक बन गए। कोर्सेज के लिए कमेटी भी गणित हो चुकी है। इसके बावजूद आरटीयू प्रशासन द्वारा प्रवेश प्रक्रिया शुरू करने में अनावशयक देरी की जा रही है। जिससे एमएससी शुरू होने पर भी संशय लग गया। </p>
<p><strong>अंगे्रजी, गणित व ह्यूमेनिटी में एमए</strong><br />राजस्थान तकनीकी विश्वविद्यालय अंग्रेजी, गणित व ह्यमेूनिटी में एमए डिग्री कोर्स शुरू होना है। एमए इंग्लिश के प्रति विद्यार्थियों में खासा उत्साह नजर आया था। क्योंकि, प्रत्येक संकाय में 30-30 सीटें निर्धारित हैं। वहीं, शहर में मात्र गवर्नमेंट कॉलेज में ही अंगे्रजी में एमए करवाई जाती है। लेकिन वहां सीटे सीमित होने के कारण छात्र-छात्राओं का रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। ऐसे में बड़ी संख्या में विद्यार्थी आरटीयू से उम्मीद लगाए बैठे थे लेकिन नवम्बर तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं होने से मायूस हो गए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं विद्यार्थी</strong><br />जब आरटीयू में इंग्लिश में एमए की जानकारी मिली थी तो हम एडमिशन लेने के लिए उत्साहित थे और बेसब्री से प्रवेश प्रक्रिया शुरू होने का इंतजार कर रहे थे, क्योंकि कोटा शहर में मात्र गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा में ही इंग्लिश में एमए करवाई जाती है लेकिन सीटें कम होने से मेरिट हाई जाती है, जिसकी वजह से अधिकतर विद्यार्थियों को रेगुलर एडमिशन नहीं मिल पाता। ऐसे में आरटीयू  से उम्मीद थी। लेकिन यहां अब तक कोर्स ही शुरू नहीं हुआ। मजबूरी में स्वयंपाठी के रूप में एडमिशन लेना पड़ेगा। <br /><strong>- जोगेंद्र कहार, याज्ञेंद्र कुमार, छात्र </strong></p>
<p>आरटीयू, टेक्नीकल यूनिवर्सिटी होने के नाते यहां इंफ्रास्ट्रेक्चर बेहतर है। ऐेसे में यहां से एमएससी करना चाहता था लेकिन नवम्बर तक भी एडमिशन प्रोसेज शुरू नहीं किया। ऐसे में गवर्नमेंट कॉलेज में ही एडमिशन ले लिया। यदि, अक्टूबर तक भी प्रोसेज शुरू  हो जाता तो एडमिशन ले सकते थे। यह यूनिवर्सिटी की लेटलतीफी है, कई विद्यार्थी एमएसी व एमए के विभिन्न संकाय में एडमिशन लेने की आस लगाए बैठे थे, लेकिन देरी के कारण अन्यंत्र संस्थानों में एडमिशन लेना पड़ा।  नवम्बर से भी कोर्स शुरू हो जाए, यह भी तय नहीं है। इस सत्र से कोर्स शुरू होना मुश्किल लगता है। <br /><strong>- खुशीराम जादौन, हर्षित अग्रवाल, छात्र </strong></p>
<p>अभी इस संबंध में कोई अपडेट नहीं है। हालांकि कार्य तेजी से चल रहा है। <br /><strong>- प्रो. रंजन माहेश्वरी, चीफ प्रोक्टर आरटीयू</strong></p>
<p>एडमिशन प्रोसेज के रूल-रेगुलेशन आखिरी स्टेज पर है। आगामी कुछ दिनों में बोम की बैठक होने की उम्मीद है, जिसमें अप्रूव्ल मिलते ही प्रवेश प्रक्रिया शुरू कर दी जाएगी। सिलेबस बन चुके हैं, तैयारी भी पूरी हो चुकी है। आरटीयू विद्यार्थियों के सर्वागींण विकास के लिए लगातार प्रयासरत है। <br /><strong>- प्रो. दिनेश बिरला, डीन फैकल्टी अफेयर आरटीयू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Nov 2024 14:56:35 +0530</pubDate>
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                <title>युवाओं को फर्जी डिग्री बांटने का काम कर रहे विश्वविद्यालय : गर्ग</title>
                                    <description><![CDATA[यह पक्ष विपक्ष का विषय नहीं है, हम फेल हो गए, लेकिन अब आपको इस पर ध्यान देना चाहिए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/university-is-working-to-distribute-fake-degrees-to-youth--says-garg/article-85334"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-07/111u1rer-(10)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। विधानसभा में उच्च शिक्षा की डिमांड पर विधायक सुभाष गर्ग ने विश्वविद्यालयों के फर्जीवाड़ा का मामला उठाते हुए कहा कि जो विश्वविद्यालय फर्जी हैं, उनको बर्खास्त किया जाना चाहिए, ये युवाओं के साथ डिग्रियों के नाम पर पैसा लूट रहे हैं। साथ ही  विश्वविद्यालय में कुलाधिपतियों के नाम पर हो रही लूट को भी रोका जाना चाहिए। यह पक्ष विपक्ष का विषय नहीं है, हम फेल हो गए, लेकिन अब आपको इस पर ध्यान देना चाहिए। </p>
<p>यूपी से शिक्षकों की नियुक्ति की जाती है, जिस तरीके से राजस्थान में इतने विश्वविद्यालय खुल रहे हैं, क्या राजस्थान में इतने विश्वविद्यालय की जरूरत है क्या, यह केवल एडमिशन करते हैं और युवाओं को फर्जी डिग्री बांटने का काम करते हैं, उनके देखरेख का कोई सिस्टम नहीं है। क्या हमारे विश्वविद्यालय में सेमेस्टर सिस्टम व्यवस्था है, जबकि नई शिक्षा पॉलिसी में यह सेमेस्टर सिस्टम अनिवार्य किया गया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Jul 2024 18:24:57 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कॉलेज में 4 हजार की डिग्री के लग रहे 40 हजार </title>
                                    <description><![CDATA[सरकार की उपेक्षा का शिकार हाड़ौती का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/40-thousand-is-being-charged-for-a-degree-of-4-thousand-in-the-college/article-82548"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/college-me-4-hazaar-ki-degree-k-lg-rhe-40-hazaar...kota-news-24-06-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। उच्च शिक्षा में सरकार का दोहरा रवैया बेटियों को शिक्षा से दूर करता नजर आ रहा है। एक ओर जहां बालिका शिक्षा को बढ़ावा देने की बात कही जा रही वहीं, दूसरी ओर महंगी शिक्षा के बोझ तले प्रतिभाएं कुचली जा रही है। हालात यह हैं, कोटा संभाग का सबसे बड़ा गर्ल्स कॉलेज जेडीबी आर्ट्स में दो साल की डिग्री कोर्स के लिए बेटियों को 4 हजार की जगह 40 हजार चुकाने पड़ रहे हैं। जबकि, इसमें सेमेस्टर एग्जाम फीस नहीं जुड़ी है। यदि, वह भी जोड़ लिया जाए तो उनकी पीजी 50 हजार में पूरी होगी। सरकारी कॉलेज होने के बावजूद महंगी फीस, शिक्षा में बढ़ते कदम पर बेड़ियां बन गई है। दरअसल, जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में एमए गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट (जीपीईएम) व होम साइंस कोर्स पिछले 6 साल से सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है। जिसकी वजह से इनकी एडमिशन फीस पर ईयर 20 हजार रुपए हो गई। ऐसे में दो साल की फीस 40 हजार रुपए हो जाती है। हालांकि, होम साइंस की पर ईयर फीस 10 हजार है। यदि, यह कोर्स रेगुलर यानी सरकारी स्कीम में चले तो इन दोनों कोर्सेज की फीस पर ईयर 2 हजार हो जाएगी।</p>
<p><strong>सेमेस्टर फीस जोड़ते ही 50 हजार की डिग्री</strong><br />राजकीय कला कन्या महाविद्यालय जेडीबी में एमए जीपीईएम कोर्स  की पर ईयर एडमिशन फीस 20 हजार रुपए है। साल में दो बार सेमेस्टर एग्जाम होते हैं। इस तरह पर सेमेस्टर एग्जाम फीस ढाई हजार रुपए है, ऐसे में एक साल के 25 हजार रुपए होते हैं और दो साल का पीजी कोर्स पूरा करने के लिए बेटियों को 50 हजार रुपए चुकाने पड़ते हैं। ग्रामीण परिवेश से आने वाली छात्राओं के लिए इतनी महंगी फीस दे पाना चुनौतिपूर्ण रहता है। ऐसे में कई छात्राएं रुचि होने के बावजूद इस कोर्स में दाखिला नहीं ले पाती। </p>
<p><strong>होम साइंस भी 30 हजार की</strong><br />एमए होम साइंस भी सेल्फ फाइनेंस स्कीम में संचालित हो रहा है।  इसकी पर ईयर एडमिशन फीस ही 10 हजार रुपए है और एग्जाम फीस पर सेमेस्टर ढाई हजार रुपए के हिसाब से दो सेमेस्टर के 5 हजार रुपए अलग से लगते हैं। ऐसे में एक साल के 15 हजार और दो साल की डिग्री पूरी करने के लिए 30 हजार रुपए लगते हैं। जबकि, यही कोर्स यूजी में सरकार द्वारा संचालित किया जाता है। जिसकी फीस 2 हजार रुपए पर ईयर है। कोटा जिले में बालिकाओें के लिए यह कोर्स केवल जेडीबी आर्ट्स कॉलेज में ही उपलब्ध है। </p>
<p><strong>परिधान इंडस्ट्री में रोजगार के बेहतर अवसर </strong><br />प्रोफेसर बिंदू चतुर्वेदी बतातीं हैं जीपीएम, गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एम्पोर्ट मैनेजमेंट कोर्स होता है। इसमें कपड़ा निर्माण से लेकर डिजाइनिंग व एक्सपोर्ट-एम्पोर्ट तक की जानकारी दी जाती है। इस कोर्स में एडमिशन लेकर छात्राएं, फैशन डिजाइनिंग, परिधान उद्योग, गारमेंट व्यवसाय, बुटीक, गारमेंट इंडस्ट्री में कॅरियर बना सकती हैं। वहीं, नेट व सेट कर आरपीएससी के माध्यम से शिक्षा के क्षेत्र में भी नौकरी पा सकती हैं। छात्राओं को जयपुर, बीकानेर, भीलवाड़ा में इंडस्ट्री विजट करवाई जाती है। वहीं,  कैथून में कोटा डोरिया के उत्पादन-निर्माण दिखाया जाता है। </p>
<p><strong>हर साल आधी सीटें रह जाती खाली</strong><br />जीपीईएम कोर्स में कुल 20 सीटें हैं, जिसके मुकाबले एडमिशन फॉर्म तो दो गुने आते हैं लेकिन फीस ज्यादा होने के चलते 10 से ज्यादा सीटें खाली रह जाती है। कॉलेज में यूजी में 1999 में यह कोर्स शुरू हुआ था। उस समय राज्य में केवल अलवर व बीकानेर में ही चलता था। डिमांड बढ़ने पर जेडीबी में पीजी में वर्ष 2018 में सेल्फ फाइनेंस स्कीम में इस कोर्स को शुरू किया गया था। </p>
<p>6 साल से जीपीईएम व होम साइंस कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम में चल रहा है। फीस बहुत महंगी है, जिसके कारण छात्राओं पर आर्थिक बोझ पड़ता है। इन कोर्सेज को सरकार द्वारा संचालित करवाने के लिए हर साल दो बार आयुक्तालय को पत्र भेजा जाता है। पिछले कुछ महीने पहले उप मुख्यमंत्री एवं उच्च शिक्षा मंत्री कोटा आए थे तब भी उन्हें इस मामले से अवगत कराया था। विधायक व लोकसभा अध्यक्ष को भी पत्रों के माध्यम से छात्राओं के हित में इन कोर्सेज को रेगुलर स्कीम में करवाने की मांग की थी। हालांकि, हमारे स्तर पर प्रयास लगातार जारी है।  <br /><strong>- प्रो. सीमा चौहान, प्राचार्य जेडीबी आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>क्या कहती हैं छात्राएं</strong><br /><strong>डिग्री करने में लग गए 60 हजार</strong><br />मैने जीपीईएम में एमए किया है। फीस बहुत महंगी है। ऊपर से सेमेस्टर के कारण फीस और बढ़ गई। इसके अलावा प्रेक्टिकल, असाइमेंट व इंडस्ट्री विजिट सहित अन्य खर्चों को मिलाकर दो साल की डिग्री करने में 60 हजार रुपए खर्च हो गए। इतनी महंगी शिक्षा से कई छात्राएं रुचि होते हुए भी यह कोर्स नहीं कर पातीं। सरकार को रेगुलर स्कीम में संचालित करना चाहिए।<br /><strong>- निकिता सचवानी, रिसर्चर जेडीबी आर्ट्स कॉलेज</strong></p>
<p>हमने आयुक्तालय से लेकर जनप्रतिनिधि तक को पत्र लिखकर मांग कर चुके हैं। धरना, प्रदर्शन कर उच्च शिक्षा विभाग को छात्राओं की समस्याओं से अवगत कराया फिर भी सुनवाई नहीं हुई। ग्रामीण परिवेश से आने वाली छात्राओं के लिए इतनी फीस दे पाना आसान नहीं होता है। महंगी शिक्षा होने के कारण कई छात्राएं एडमिशन नहीं पाती। <br /><strong>- रुपाली चौहान, छात्रा सेविका, जेडीबी कॉलेज</strong></p>
<p><strong>रेगुलर स्कीम में 2 हजार रुपए फीस</strong><br />वर्ष 2018 में पीजी संकाय में गारमेंट प्रोडेक्शन एंड एक्सपोर्ट मैनेजमेंट कोर्स सेल्फ फाइनेंस स्कीम के तहत शुरू किया गया था। सरकार की स्कीम थी कि सेल्फ फाइनेंस स्कीम यानी स्ववित्त पोषिक योजना में कोई कोर्स 5 साल तक नियमित रूप से संचालित होता है तो उसे छठें साल में आॅटोमेटिक सरकारी स्कीम में तब्दील कर दिया जाता है। लेकिन ऐसा हुआ नहीं। यदि, यह कोर्स सरकारी स्कीम में हो जाए तो इसकी एडमिशन फीस पर ईयर 2 हजार रुपए हो जाएगी। <br /><strong>- बिंदू चतुर्वेदी, प्रोफेसर जेडीबी आर्ट्स </strong></p>
<p>प्राचार्य द्वारा इसके प्रस्ताव तैयार कर हमें दिए जाएं। जिसें आयुक्तालय को भेजकर बालिकाओं के हित में इन कोर्सजे को रेगुलर स्कीम में संचालित करवाने की मांग करेंगे। <br /><strong>- डॉ. गीताराम शर्मा, क्षेत्रिय सहायक निदेशक आयुक्तालय कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/40-thousand-is-being-charged-for-a-degree-of-4-thousand-in-the-college/article-82548</link>
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                <pubDate>Mon, 24 Jun 2024 15:44:08 +0530</pubDate>
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                <title>ग्रेजुएशन के 4 साल बाद भी डिग्री के लिए भटक रहे छात्र</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा यूनिवर्सिटी की लापरवाही के भंवर में फंसा भविष्य।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/students-wandering-for-degree-even-after-4-years-of-graduation/article-78461"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-05/graduation-k-char-saal-bd-bhi-degree-k-liye-bhatak-rhe-chatr...kota-news-18-05-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा यूनिवर्सिटी की लापरवाही के भंवर में हजारों विद्यार्थी ऐसे फंसे की उन्हें सब काम छोड़ तपती दोपहरी में चक्कर काटने को मजबूर हो गए। कभी कॉलेज तो कभी विश्वविद्यालय का रास्ता नाप रहे हैं। हालात यह हैं, ग्रेज्यूएशन व पोस्ट ग्रेज्यूएशन पूरी करने के 4 साल बाद भी उन्हें डिग्री नहीं मिली। अफसरों की लेटलतीफी का आलम यह है, आगामी 2 जुलाई को दीक्षांत समारोह है, लेकिन कॉलेजों को वर्ष 2019 की डिग्रियां बांटी जा रही हैं। जबकि, अभी तक संभाग के अधिकतर कॉलेजों में वर्ष 2020 की डिग्रियां तक नहीं पहुंची। जिसकी वजह से उनकी नौकरी व हायर एजुकेशन पर आंच आ गई। पिछले चार साल से विद्यार्थी डिग्री के लिए कभी कॉलेज तो कभी यूनिवर्सिटी के चक्कर काट रहे हैं लेकिन सुनवाई नहीं हो रही। हालांकि, डिग्री के एवज में उन्हें प्रोविजनल डिग्री दी जा रही है, जिसका भी शुल्क यूनिवर्सिटी वसूल रही है। लेकिन, प्रोविजनल डिग्री छह माह तक ही वैलिड होती है। ऐसे में छात्रों को फिर से डिग्री के लिए दौड़भाग करनी पड़ती है। </p>
<p><strong>तनाव से गुजर रहे छात्र</strong><br />कोटा विश्वविद्यालय के अफसरों की लेटलतिफी का दंश हजारों छात्र मानसिक तनाव झेलकर भुगत रहे हैं। पिछले चार साल में कई विद्यार्थी निजी सेक्टर में जॉब पर लगे हैं तो कोई आगे की पढ़ाई के लिए बाहर की यूनिविर्सिटीज में एडमिशन लिया लेकिन दोनों ही जगह आॅरिजनल डिग्री मांगी जा रही है। जब छात्र डिग्री लेने कॉलेज पहुंचते हैं तो उन्हें यूनिवर्सिटी से प्राप्त नहीं होने की बात कहीं जाती है। इसके बाद वे विश्वविद्यालय के चक्कर काटते हैं। जहां उनसे 100 रुपए शुल्क लेकर प्रोविजनल डिग्री दी जाती है। लेकिन, वह 6 माह तक ही वेलिड मानी जाती है। </p>
<p><strong>कॉलेजों में नहीं पहुंची 2020 की मास्टर डिग्री</strong><br />कोटा जिले के अधिकतर राजकीय महाविद्यालयों में वर्ष 2020 की मास्टर डिग्री अब तक नहीं पहुंची है। हालांकि, कुछेक कॉलेजों में आई है लेकिन वह भी यूजी की। जबकि, पीजी और स्वयंपाठी विद्यार्थियों की तो पहुंची ही नहीं। दैनिक नवज्योति ने जिले के 10 राजकीय महाविद्यालयों के प्राचार्यों से बात की तो पता चला कि उनके कॉलेजों में वर्ष 2019 की मास्टर डिग्री आई है। लेकिन, 2020 की नहीं मिली। वहीं, जिन कॉलेजों में डिग्री आई हैं, वहां विद्यार्थियों को 8 दिन बाद ही मिल सकेगी। तब तक उन्हें इंतजार करना होगा।</p>
<p><strong>इन कॉलेजों में यूजी की डिग्री आई, पीजी की नहीं</strong><br />शहर के गवर्नमेंट कॉमर्स कॉलेज की प्राचार्य प्रेरणा सक्सेना ने बताया कि कुछ दिन पहले ही वर्ष 2020 में स्नातक करने वाले नियमित विद्यार्थियों की मास्टर डिग्री यूनिवर्सिटी से आई है। लेकिन, स्नातकोत्तर व यूजी-पीजी के स्वयंपाठी छात्रों की डिग्रियां नहीं आई। वहीं, राजकीय कन्या वाणिज्य महाविद्यालय की प्राचार्य वंदना आहूजा ने कहा, यूजी के रेगुलर छात्रों की ही डिग्री आई है लेकिन आॅनर्स संकाय व पीजी के नियमित-प्राइवेट छात्रों की डिग्री नहीं भेजी गई। जेडीबी साइंस की प्राचार्य सीमा चौहान के अनुसार, यूजी नियमित व गवर्नमेंट साइंस कॉलेज के कार्यवाहक प्राचार्य अरुण कुमार ने बताया कि वर्ष 2020 में स्नातक करने वाले नियमित छात्रों की ही डिग्री पहुंची है लेकिन पीजी के नियमित और स्वयंपाठी विद्यार्थियों की डिग्री अब तक नहीं आई है।</p>
<p><strong>7 साल बाद कॉलेजों में पहुंची 2019 की डिग्री </strong><br />कोटा यूनिवर्सिटी द्वारा जिले के 7 महाविद्यालयों में वर्ष 2020 की मास्टर डिग्री के बजाए वर्ष 2019 की डिग्री भेजी गई है। जिनमें जेडीबी आर्ट्स कॉलेज, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा सहित ग्रामीण जिले के चारों महाविद्यालय शामिल हैं। ऐसे में सत्र 2016-17 में एडमिशन लेकर 2019 में गे्रज्यूएशन करने वाले छात्रों को वर्ष 2024 में यानी साढ़े 7 साल बाद मास्टर डिग्री मिलेगी। वहीं, सत्र 2017-18 में एडमिशन लेने वाले छात्रों की यूजी वर्ष 2020 में पूरी हो गई लेकिन उन्हें अब तक मास्टर डिग्री नसीब नहीं हुई। </p>
<p><strong>यहां नहीं आई वर्ष 2020 की मास्टर डिग्री</strong><br />कोटा व बारां जिले के एक दर्जन से अधिक कॉलेजों में वर्ष 2020 की मास्टर डिग्री अब तक नहीं पहुंची है। कोटा यूनिवर्सिटी प्रशासन की लापरवाही से विद्यार्थियों को अकेडमिक व रोजगार से संबंधित विभिन्न परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। कोटा के राजकीय कला कन्या महाविद्यालय, राजकीय कला महाविद्यालय कोटा, कनवास, सांगोद, इटावा, रामगंजमंडी सहित गवर्नमेंट कॉलेजों में यूनिवर्सिटी द्वारा वर्ष 2020 की डिग्री नहीं भेजी गई। </p>
<p><br /><strong>विद्यार्थियों ने बयां की पीड़ा</strong><br /><strong>पिछले चार सालों में नौकरी छूटी  तो कहीं एडमिशन अटका,  प्रोविजनल के  नाम पर 100-100 रुपए वसूल विश्वविद्यालय काट रहा स्टूडेंट्स की  जेब</strong></p>
<p>मैंने वर्ष 2020 में गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा से बीए किया था। वर्तमान में निजी कम्पनी में जॉब कर रहा हूं। जहां ग्रेज्युएशन की मास्टर डिग्री मांगी जा रही , जो अब तक मुझे कोटा यूनिवर्सिटी से नहीं मिली। हालांकि, 100 रुपए शुल्क लेकर प्रोविजनल डिग्री दी गई लेकिन वह 6 माह तक ही वैध मानी जाती है। इसके बाद फिर से कम्पनी ने डिग्री का तकाजा किया तो मुझे फिर से यूनिवर्सिटी के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। विवि प्रशासन की लेटलतीफी के कारण अनावश्यक तनाव झेल रहा हूं। जॉब ही खतरे में पड़ रही है। <br /><strong>- अमित कुमार, छात्र</strong></p>
<p>मुझे दिल्ली से पीएचडी करनी है, जिसके लिए आॅरिजनल मास्टर डिग्री की जरूरत है। लेकिन, कोटा विवि द्वारा चार साल बाद भी डिग्री नहीं दी जा रही है। दिल्ली संस्थान द्वारा बार-बार आॅरिजनल डिग्री की मांग की जा रही है। पिछले चार साल में कई बार यूनिवर्सिटी के चक्कर काट चुके हैं। वहां से कोटा आने जाने में ही हजारों रुपए खर्च हो गए लेकिन डिग्री कब मिलेगी इसका जवाब नहीं मिल रहा।<br /><strong>- जीतेश मीणा, स्टूडेंट</strong></p>
<p>कोटा यूनिवर्सिटी की लापरवाही का खामियाजा हमें भुगतना पड़ रहा है। वर्ष 2022 में निजी कम्पनी में जॉब के लिए इंटरव्यू दिया था, जहां सलेक्ट होने के बाद मास्टर डिग्री मांगी गई, इस पर यूनिवर्सिटी गया तो वहां 100 लेकर प्रोविजनल डिग्री दे दी गई, जिसे कम्पनी ने स्वीकार नहीं किया। ऐसे में हाथ आई नौकरी छूट गई। मेरे जैसे कई छात्र हैं जो कोटा विवि प्रशासन की लेटलतिफी से तनाव झेल रहे हैं।<br /><strong>- देवकी नंदन, छात्र</strong></p>
<p>एक तरफ कोटा यूनिवर्सिटी 2 जुलाई को 2021 का दीक्षांत समारोह  मनाने जा रही है और दूसरी तरफ 2020 की डिग्री 2024 तक नहीं दे सकी तो 2021 की डिग्रियां विद्यार्थियों को कब मिलेगी। इसका अंदाजा स्वयं ही लगा सकते हैं। यूनिवर्सिटी प्रशासन की लचरता से पिछले 4 साल में कई छात्र नौकरी गंवा चुके हैं तो कई विदेशी यूनिवर्सिटीज में एडमिशन नहीं ले पाए। क्योंकि, वहां प्रोविजनल डिग्री को वैलिड नहीं मानते। गलती अफसर कर रहे हैं और प्रोविजनल के नाम पर विद्यार्थियों से 100-100 रुपए लेकर लूटा जा रहा है। विवि प्रशासन प्राइवेट फर्म को काम देती है और उसने समय पर पूरा नहीं किया। इसके बावजूद विश्वविद्यालय द्वारा संबंधित फर्म के खिलाफ  कोई कार्रवाई नहीं की गई। ऐसे में यूनिवर्सिटी की कार्यप्रणाली सवालों  के घेरे में आती है।<br /><strong>- रोहिताश मीणा, छात्रसंघ महासचिव, कोटा यूनिवर्सिटी </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />अधिकतर कॉलेजों में मास्टर डिग्रियां भेजी जा चुकी है। कुछ महाविद्यालय शेष हैं, जहां भेजी जा रही है। किसी भी विद्यार्थी को कोई परेशानी नहीं है, जो स्टूडेंट्स डिग्री के लिए यहां आ रहे उन्हें दी जा रही है।<br /><strong>- प्रवीण भार्गव, परीक्षा नियंत्रक, कोटा यूनिवर्सिटी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 May 2024 14:59:58 +0530</pubDate>
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                <title>पूर्वा प्रधान को मिली स्नातक की डिग्री </title>
                                    <description><![CDATA[उनका डॉक्टरेट थीसिस बाहरी मौनिकों द्वारा स्वीकृत की गई थी, जो विश्वविद्यालय में एक बहुत ही दुर्लभ अवस्था है। यह केवल 100 छात्रों में से 2 कोई होते है, जिनकी थीसिस को सही करे बिना या परीक्षण के स्वीकृति मिलती है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/purva-pradhan-got-the-bachelors-degree/article-58759"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/untitled-1-copy7.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्वा प्रधान को सिडनी विश्वविद्यालय से स्नातक की डिग्री मिली है। डॉक्टरेट (क्लिनिकल हेल्थ प्साइकोलॉजी में) की डिग्री को विश्वविद्यालय के प्रो. वाइस चैंसलर की अध्यक्षता में एक महत्वपूर्ण समारोह में प्रदान किया गया। उन्होंने अपनी स्नातक की (बीए प्साइकोलॉजी हॉन्स.) राजस्थान विश्वविद्यालय (मनोविज्ञान विभाग) से की थी। उन्होंने सारे मानविकी खंड में पहली स्थान  किया था। उनकी स्नातक की डिग्री को राजस्थान विश्वविद्यालय के आदरणीय वाइस चैंसलर ने स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर सम्मानित किया था। फिर उन्होंने अपनी मास्टर्स की पढ़ाई ग्लासगो विश्वविद्यालय संगठित राज्य से किया था।</p>
<p>उनका डॉक्टरेट थीसिस बाहरी मौनिकों द्वारा स्वीकृत की गई थी, जो विश्वविद्यालय में एक बहुत ही दुर्लभ अवस्था है। यह केवल 100 छात्रों में से 2 कोई होते है, जिनकी थीसिस को सही करे बिना या परीक्षण के स्वीकृति मिलती है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 04 Oct 2023 16:07:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>डिग्री ही नहीं तनाव भी बांट रही कोटा यूनिवर्सिटी</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा यूनिवर्सिटी की लेटलतीफी का खामियाजा सबसे ज्यादा पीजी प्रिवियस के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा। सेमेस्टर सिस्टम से दूरी बनाने वालों में सबसे कम संख्या साइंस कॉलेज के विद्यार्थियों की रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि विज्ञान में सेमेस्टर प्रणाली पिछले चार-पांच वर्षों से जारी है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-university-is-distributing-not-only-degree-but-also-tension/article-45699"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-05/degree-hi-nahi-tanav-bhi-sajha-kar-rahi-kota-university...kota-news-16-05-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा यूनिवर्सिटी सिर्फ डिग्री ही नहीं मानसिक तनाव भी बांट रही है। विश्वविद्यालय ने अपनी सनक पूरी करने के लिए सैंकड़ों बच्चों का भविष्य दांव पर लगा दिया। अधूरी तैयारियों व आधा सत्र खत्म होने के बावजूद सेमेस्टर प्रणाली थोपना विद्यार्थियों के लिए घातक साबित हुआ। इसके गंभीर नतीजे हाल ही में सम्पन्न हुई पीजी प्रिवियस के प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा में देखने को मिले। विवि के अव्यवहारिक निर्णय से महाविद्यालयों में बड़ी संख्या में विद्यार्थी रेगूलर से प्राइवेट हो गए।  दरअसल, वर्तमान सत्र में हाड़ौती के 8 राजकीय महाविद्यालयों में पीजी प्रिवियस में 1 हजार 841 बच्चों ने रेगूलर एडमिशन लिया था। जिसमें से 232 स्टूडेंटस ने एग्जाम फॉर्म न भरकर नियमित से स्वयंपाठी हो गए। </p>
<p><strong>कोटा विश्वविद्यालय की लापरवाही के ये आए नतीजे</strong><br /><strong>8 कॉलेजों में 232 विद्यार्थी हुए रेगुलर से प्राइवेट</strong><br />हाड़ौती के 8 राजकीय पीजी कॉलेजों से प्राप्त हुए आंकड़ों के अनुसार, इस वर्ष विभिन्न संकायों के पीजी प्रिवियस में कुल 1 हजार 841 विद्यार्थियों ने रेगूलर एडमिशन लिया है। जिसमें से 1 हजार 609 बच्चों ने प्रथम सेमेस्टर की परीक्षा के लिए फॉर्म भरे हैं। जबकि, 232 ऐसे विद्यार्थी हैं, जिन्होंने एग्जाम फॉर्म न भरकर स्वयं को रेगूलर से प्राइवेट कर लिया है। जब इसकी पड़ताल की तो सबसे बड़ा कारण एक साल में दो बार परीक्षा फीस देना सामने आया। आर्थिक कमजोरी के कारण बच्चों को मजबूरन  स्वयंपाठी बनने को मजबूर हुए। </p>
<p>आटर्स-कॉमर्स में सबसे ज्यादा स्टूडेंट्स हुए प्राइवेट  <br />परीक्षा फॉर्म न भरकर खुद को नियमित विद्यार्थी से स्वयंपाठी बनने की दिशा में कदम उठाने वालों में सबसे ज्यादा संख्या आर्ट्स व कॉमर्स स्टूडेंट्स की हैं। शहर के दोनों आर्ट्स कॉलेज में एमए प्रिवियस में कुल 975 विद्यार्थियों ने रेगूलर एडिमिशन लिया था। जिसमें से 119 स्टूडेंट्स ने एग्जाम फॉर्म न भकर खुद को स्वयंपाठी कर लिया। इनमें सबसे अधिक संख्या गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज की है। यहां कुल 604 ने एडमिशन लिया और 81 बच्चों ने एग्जाम फॉर्म भरने से दूरी बनाई। इसी तरह दोनों कॉर्मस कॉलेज के आंकड़ें देखें तो सामने आया कि 377 ने एडमिशन लिया। जिसमें से 67 ने एग्जाम फॉर्म नहीं भरे। इनमें गवर्नमेंट कॉमर्स में 221 ने दाखिला लिया और 37 ने फॉर्म नहीं भरे। इसी तरह जेडीबी वाणिज्य में 371 ने एडमिशन लिया और 38 ने दूरी बनाई रखी। सिलेबस पूरा न होना और गत वर्ष की अपेक्षा इस वर्ष दो गुनी फीस  और साल में दो बार देना सबसे बड़ा कारण सामने आया। </p>
<p>सबसे कम संख्या साइंस में <br />सेमेस्टर सिस्टम से दूरी बनाने वालों में सबसे कम संख्या साइंस कॉलेज के विद्यार्थियों की रही है। इसका प्रमुख कारण यह है कि विज्ञान में सेमेस्टर प्रणाली पिछले चार-पांच वर्षों से जारी है। ऐसे में विद्यार्थी इस सिस्टम से पूरी तरह से ढल चुके हैं और सेमेस्टर उनकी आदत में आ चुका है। हालांकि, दोनों ही साइंस कॉलेज से 28 विद्यार्थियों ने एग्जाम फॉर्म भरने में रुची नहीं दिखाई। इनमें सबसे ज्यादा संख्या 21 गवर्नमेंट साइंस कॉलेज की है। वहीं, बूंदी व झालावाड़ गर्ल्स कॉलेज में भी बड़ी छात्राओं ने इस सिस्टम को नकार दिया। </p>
<p>सेमेस्टर से दूरी के प्रमुख कारण <br />साल में दो बार दोगुना फीस  <br />सेमेस्टर प्रणाली से दूरी बनाने का सबसे प्रमुख कारण आर्थिक भार है। प्रिवियस पूरा करने के लिए विद्यार्थियों को 6-6 माह में दो बार परीक्षा देनी है। जिसके लिए उन्हें  दो बार ही एग्जाम फॉर्म भरना है। इसके लिए उन्हें गत वर्ष की तुलना में दो गुना फीस  साल में दो बार देनी होगी। ऐसे में आर्थिक भार बढ़ने से विद्यार्थी रेगुलर से प्राइवेट  होने को मजबूर हो गए। छात्रों ने बताया कि पिछले साल एमए प्रिवियस की फीस 1690 रुपए थी। जबकि, इस वर्ष प्रथम सेमेस्टर की फीस ही 2265 रुपए है। अब यही फीस अगले सेमेस्टर में फिर से देनी होगी। ऐसे में दो गुना फीस दो बार देना आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के बच्चों के लिए संभव नहीं है। इसी कारण से स्टूडेंट्स रेगुलर होते हुए भी प्राइवेट हो गए। </p>
<p>ढाई माह में हो रही 6 माह की परीक्षा<br />शैक्षणिक सत्र 2022-23 शुरू से ही निर्धारित समय से देरी से चल रहा है। महाविद्यालयों में पिजी प्रिवियस के  एडमिशन नवम्बर माह से शुरू हुए थे, जो जनवरी तक जारी रहे। क्योंकि, दिसम्बर माह सरकारी छुट्टियों व प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन में ही गुजर गया। वहीं, आयुक्तालय ने 19 जनवरी को वेटिंग में रहने वाले विद्यार्थियों के लिए फिर से एडमिशन पोर्टल शुरू कर दिया। ऐसे में 27 जनवरी तक तो एडमिशन प्रक्रिया ही जारी रही। हालांकि, कक्षाओं का संचालन 15 जनवरी के मध्य शुरू हो गया था लेकिन, नियमित क्लासें फरवरी से ही संचालित हो सकी। ऐसे में विद्यार्थियों की कक्षाएं करीब डेढ़ माह ही चलने के कारण सिलेबस भी पूरा नहीं हो सका और मार्च के मध्यम प्रथम सेमेस्टर के पेपर शुरू हो गए, जो अप्रेल के प्रथम सप्ताह तक जारी रहे। </p>
<p>अधूरी तैयारियों ने बढ़ाया तनाव <br />कोटा यूनिवर्सिटी की लेटलतीफी का खामियाजा सबसे ज्यादा पीजी प्रिवियस के विद्यार्थियों को भुगतना पड़ा। एडमिशन प्रक्रिया से निपटने के एक माह बाद ही विश्वविद्यालय द्वारा पहले सेमेस्टर की परीक्षा का शेड्यूल जारी कर दिया। 27 मार्च से परीक्षाएं शुरू हुर्इं। लेकिन कॉलेजों में आर्ट्स, कॉमर्स व साइंस का कोर्स करीब  25 से 35 प्रतिशत अधूरा रहा। वहीं, इस बार 100 प्रतिशत सिलेबस पर ही एग्जाम लिए गए। ऐसे में अधूरी तैयारियों के बीच परीक्षा की टेंशन विद्यार्थियों को अवसाद में डाल रही है। इधर, उच्च शिक्षा आयुक्तालय ने विद्या संबल शिक्षकों को हटाकर विद्यार्थियों की मुसीबत और बढ़ा दी है, जो कक्षाएं लग रहीं थी अब वो भी नहीं लग पा रही। ऐसे में सिलेबस भी पूरे नहीं हो पाए। </p>
<p>क्या कहते हैं छात्र पदाधिकारी<br />यूनिवर्सिटी को पहले शैक्षणिक सत्र पटरी पर लाना चाहिए था। फिर सेमेस्टर सिस्टम लागू करते तो छात्रहित में होता। बच्चों को सेमेस्टर से अवगत कराते और कब एग्जाम होंगे, कब एग्जाम फॉर्म भरे जाएंगे, इसकी जानकारी सभी स्टूडेंट्स को मिले, ऐसा मैकेनिज्म तैयार करना चाहिए था। जब परीक्षा फॉर्म भरे जा रहे थे तो कॉलेज प्रशासन ने मुझे सूचना नहीं दी गई। परीक्षा फीस भी बड़ा कारण रही। परीक्षा फॉर्म नहीं भर पाने का दुख है। नियमित होते हुए भी अब मुझे प्राइवेट विद्यार्थी के रूप में परीक्षा देनी पड़ेगी। विवि जमीनी हकीकत जानने के बाद फैसला करती तो अच्छा होता। <br />- चंचल, छात्रा, एमकॉम प्रिवियस, जेडीबी कॉमर्स </p>
<p><br />सेमेस्टर सिस्टम अच्छा है लेकिन कोटा यूनिवर्सिटी ने लागू करने में जल्दीबाजी कर दी। शैक्षणिक सत्र पटरी पर लाने के बाद शुरू करते तो ज्यादा बेहतर होता। इस बार 6 महीने की परीक्षा ढाई माह में हो रही है। बच्चों को तैयारी का बिलकुल भी मौका नहीं मिला है। वहीं, पिछले साल प्रिवियस की फीस 1690 रुपए थी, जो साल में एक बार ही देनी थी लेकिन इस बार पहले सेमेस्टर की फीस ही 2300 रुपए रही और सेकंड सेमेस्टर में भी यही एग्जाम फीस देनी पड़ेगी। विवि को परीक्षा फीस में कमी करनी चाहिए। <br />- दीप्ती मेवाड़ा, छात्रसंघ अध्यक्ष, जेडीबी कॉमर्स कॉलेज</p>
<p>सरकारी कॉलेजों में पढ़ने वाले अधिकतर स्टूडेंट्स आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के होते हैं। इस बार एमएससी प्रिवियस में प्रथम सेमेस्टर की एग्जाम फीस 1725 रुपए थी। लेकिन, प्रैक्टिकल फीस भी देनी होती है, ऐसे में फीस बढ़कर 2300 तक पहुंच गई। आर्थिक भार बढ़ने से कई बच्चों ने इस बार फॉर्म नहीं भरे। हालांकि, साइंस में सेमेस्टर पहले से ही लागू है, लेकिन फीस बढ़ाना गलत है।  जुलाई के प्रथम सप्ताह में दूसरे सेमेस्टर की परीक्षा होना विवि द्वारा बताया गया है।  ऐसे में 6 माह की जगह ढाई माह में परीक्षा कराना बच्चों को मानसिक तनाव की तरफ धकेलना है। <br /><strong>- अंजली मीणा, छात्रसंघ अध्यक्ष, जेडीबी साइंस कॉलेज </strong></p>
<p>शैक्षणिक सत्र आधा बीतने के बाद कोटा विवि ने आनन-फानन में विद्यार्थियों पर सेमेस्टर सिस्टम थोप दिया। जबकि, जनवरी तक तो प्रिवियस के एडमिशन ही चलते रहे। फरवरी में क्लासें लगना शुरू हुई और मार्च के आखिरी सप्ताह में प्रथम सेमेस्टर के एग्जाम हो गए। सिलेबस पूरा नहीं हुआ, बच्चे तनाव में रहे और गत वर्ष के मुकाबले इस वर्ष दोगुना फीस साल में दो बार देना आर्थिक रूप से कमजोर विद्यार्थियों के साथ अन्याय है। विवि प्रशासन को सेमेस्टर एग्जाम फीस में कटौती करनी चाहिए। <br /><strong>- मनीष सामरिया, छात्रसंघ अध्यक्ष, गवर्नमेंट आर्ट्स कॉलेज कोटा</strong></p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />यूनिवर्सिटी प्रशासन पहले बच्चों को सेमेस्टर प्रणाली के फायदे-नुकसान की जानकारी देता और प्रचार-प्रसार करने के बाद इस सिस्टम को लागू करती तो ज्यादा बेहतर होता। वहीं, एक ही साल में दो बार सेमेस्टर एग्जाम की फीस से आर्थिक भार बढ़ने के कारण बच्चों ने खुद को स्वयंपाठी रहते हुए परीक्षा देने का मानस बनाया हो, ऐसी संभावना हो सकती है। <br /><strong>- डॉ. संजय भार्गव, प्राचार्य जेडीबी साइंस कॉलेज</strong></p>
<p>नई शिक्षा निति के तहत सही समय पर सेमेस्टर सिस्टम लागू किया गया है। सभी कॉलेजों में अतिरिक्त कक्षाएं लगाकर सिलेबस पूरा करवाया गया है। जिसका लेटर संबंधित कॉलेजों से हमें फोरवर्ड किया गया है, तभी यूनिवर्सिटी ने एग्जाम करवाएं हैं। वहीं, सेमेस्टर एग्जाम फीस के मामले में एग्जाम कंट्रोलर से बात की जा सकती है। यह मामला मेरे कार्यक्षेत्र में नहीं है। <br /><strong>- आरके उपाध्याय, रजिस्ट्रार, कोटा यूनिवर्सिटी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 16 May 2023 14:20:30 +0530</pubDate>
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                <title>वकीलों की डीग्री की जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट ने कमेटी की गठित, बिना किसी शुल्क के होगी जांच</title>
                                    <description><![CDATA[निगरानी करने वाली कमेटी में न्यायमूर्ति चौहान के अलावा, समिति में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अरुण टंडन, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी और मनिंदर सिंह और बीसीआई द्वारा नामित तीन सदस्य शामिल होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/the-supreme-court-has-constituted-a-committee-to-check-the/article-42458"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/supreme-court-.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने वकीलों कि डिग्री की जांच के लिए आदेश जारी किये है। सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि सभी वकीलों की डिग्री की जांच की जाएगी जिसकी निगरानी एक उच्चस्तरीय कमेटी द्वारा की जाएगी।  कमेटी की अध्यक्षता सुप्रीम कोर्ट के पूर्व जज जस्टिस बीएस चौहान करेंगे।</p>
<p>वकील अजय शंकर श्रीवास्तव की याचिका पर आदेश पारित करते हुए कोर्ट ने कहा कि सभी वकीलों की डीग्री की जांच की जाएगी, जो सभी विश्वविद्यालय और परीक्षा बोर्ड बिना शुल्क के करेंगे। </p>
<p>निगरानी करने वाली कमेटी में न्यायमूर्ति चौहान के अलावा, समिति में इलाहाबाद उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश, न्यायमूर्ति अरुण टंडन, दिल्ली उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीश राजेंद्र मेनन, वरिष्ठ अधिवक्ता राकेश द्विवेदी और मनिंदर सिंह और बीसीआई द्वारा नामित तीन सदस्य शामिल होंगे।</p>
<p>सुप्रीम कोर्ट ने आदेश दिया  कि “सभी विश्वविद्यालय और परीक्षा बोर्ड बिना शुल्क लिए डिग्रियों की सत्यता की पुष्टि करेंगे, और राज्य बार काउंसिल द्वारा मांग पर बिना किसी देरी के कार्रवाई की जाएगी। हम समिति से अनुरोध करते हैं कि पारस्परिक रूप से सुविधाजनक तारीख और समय में काम शुरू करें और स्थिति रिपोर्ट 31 अगस्त 2023 में दायर की जाए।”</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 11 Apr 2023 13:18:50 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>30 हजार से एक लाख रुपए में देते थे फर्जी डिग्री, जरूरत पर दोगुना कर देते थे रेट</title>
                                    <description><![CDATA[ अशोक के पास मिले लैपटॉप और हार्डडिस्क में 25 से अधिक इस प्रकार के सॉफ्टवेयर मिले हैं, जिनकी सहायता से किसी भी डिग्री को स्कैन कर अन्य नामों से तैयार कर लेता था। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/fake-degree-give--in-one-lakh/article-41168"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/333-copy5.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। फर्जी डिग्री बनाकर आरोपी अशोक विजय युवकों से एक डिग्री के 30 हजार से लेकर एक लाख रुपए तक वसूलता था। यदि उसे यह पता लग जाता कि किसी युवक को अर्जेंट डिग्री चाहिए, तो वह रकम दोगुनी कर देता था। अशोक करीब 15 से 20 वर्षों से विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं में छात्रों का प्रवेश कराने का कार्य करता रहा है। शुरू से वह यह कार्य कुछ मुक्तविश्वविद्यालयों के लिए करता था। जब इसने देखा कि बाहर की अधिकतर शैक्षणिक संस्थाएं प्रक्रिया की पालना किए बिना ही डिग्री या सर्टिफिकेट दे रही हैं तो इसने स्वयं ही यह डिग्रियां और सर्टिफिकेट तैयार करना शुरू कर दिया। डीसीपी वंदिता राणा ने बताया कि अशोक विभिन्न संस्थाओं में अलग-अलग एजेंटों के जरिये कुछ छात्रों का प्रवेश करवाता और वहां से मिली डिग्री या सर्टिफिकेट की विभिन्न कम्प्यूटर सॉफ्टवेयर से कॉपी निकलवाता। उन्हें पेज मेकर या कोरल ड्रॉ से हूबहू नकल तैयार कर उन्ही एनरोलमेंट नंबर और अन्य विवरणों के आधार पर फर्जी डिग्री व मार्कशीट बना देता था। अशोक के पास मिले लैपटॉप और हार्डडिस्क में 25 से अधिक इस प्रकार के सॉफ्टवेयर मिले हैं, जिनकी सहायता से किसी भी डिग्री को स्कैन कर अन्य नामों से तैयार कर लेता था। उसने कई संस्थाओं के होलोग्राम और विभिन्न संस्थाओं की मोहर एवं स्टाम्प तैयार करवाई। आरोपियों के पास चार हजार होलोग्राम व 100 से अधिक मोहरें मिली हैं। साथ ही किसी भी मोहर को स्वयं ही तैयार कर लेने वाली किट भी मिली है।</p>
<p><strong>नौकरी के लिए सत्यापन भी कराता था </strong><br />एसीपी (वैशाली नगर) आलोक कुमार ने बताया कि विभिन्न शैक्षणिक संस्थाओं की डिग्रियां तैयार कराने के लिए अलग-अलग एजेन्टों की सहायता लेता था। आरोपी ओपीजेएस यूनिवर्सिटी चूरू की डिग्रियां तैयार करने के लिए प्रमोद सिंह की सहायता लेता था, जो छात्र विश्वविद्यालय में वैरिफाई करने के लिए जाते थे। उन्हें प्रमोद सिंह खुद अटेंड करता और बाहर से ही संतुष्ट करके भेज देता था। प्रमोद सिंह यदि किसी व्यक्ति की नौकरी लगती तो उसका सत्यापन करवाने का आश्वास भी देता था। इसके लिए उसके पास विश्वविद्यालय के खाली लेटर पैड भी थे। आरोपी ने अजय सिंह के साथ मिलकर जेएस यूनिवर्सिटी शिकोहाबाद यूपी, महात्मा गांधी एलम यूनिवर्सिटी सिक्तिम मेघालय की फर्जी डिग्रियां और मार्कशीट तैयार करने का कार्य किया है। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Mar 2023 10:47:10 +0530</pubDate>
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                <title>मानसून में देरी से गर्मी का असर नहीं हो रहा कम</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश में प्री-मानसून की झमाझम के बावजूद गर्मी का असर कम नहीं हो रहा है। प्री-मानसून की बारिश सामान्य से 38 फीसदी ज्यादा होने के बावजूद गर्मी और उमस से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-40-degree-temperature-to-heat-in-state/article-13035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/temprature1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रदेश में प्री-मानसून की झमाझम के बावजूद गर्मी का असर कम नहीं हो रहा है। प्री-मानसून की बारिश सामान्य से 38 फीसदी ज्यादा होने के बावजूद गर्मी और उमस से तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर बना हुआ है। लोगों को अभी दो दिन और गर्मी से परेशान होना पड़ सकता है। मौसम विभाग ने 27 जून से राज्य में बारिश शुरू होने की संभावना व्यक्त की है, जो अगले तीन दिन तक दक्षिण राजस्थान के कुछ ही हिस्से में होने की संभावना है, जबकि शेष राज्य में मौसम शुष्क रहेगा। मौसम विशेषज्ञों की माने तो 27 जून से मानसून के प्रवेश के साथ ही राजस्थान के डूंगरपुर, बांसवाड़ा, चित्तौड़गढ़, सिरोही और राजसमंद एरिया से बारिश का दौर शुरू होगा।</p>
<p>अभी मानसून दक्षिण-पश्चिमी सीमा राजस्थान के झालावाड़ के पास से होकर गुजर रहा है। राजस्थान में मानसून आने की सामान्य तारीख 26 जून मानी जाती है। विशेषज्ञों की माने तो मानसून 2 दिन की देरी से प्रवेश हो सकता है। प्रदेश के अधिकंश इलाकों में शनिवार को भी गर्मी के तेवर तीखे बने रहे। जोधपुर, बीकानेर, गंगानगर, नागौर समेत सभी शहरों में दिन का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस से ऊपर रहा। प्रदेश में जैसलमेर जिला 44.8 डिग्री के साथ सबसे गर्म रहा। वहीं राजधानी जयपुर में भी दिन में गर्मी और उमस से हाल बेहाल रहा और दिन का तापमान 40.3 डिग्री सेल्सियस रिकॉर्ड किया गया। वहीं रात में भी गर्मी का असर बढ़ने से 28.8 डिग्री न्यूनतम तापमान दर्ज किया गया।</p>
<p><strong>अब आगे क्या</strong><br />जयपुर मौसम केन्द्र से मिली जानकारी के अनुसार अगले 24 घंटों में प्रदेश में मौसम शुष्क रहेगा। राजसमंद, बांसवाड़ा, डूंगरपुर के अलावा चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ एरिया में बारिश हो सकती है। इसी तरह 28 और 29 जून को उदयपुर, कोटा, झालावाड़, बारां, डूंगरपुर, बांसवाड़ा, सिरोही, राजसमंद, चित्तौड़गढ़, प्रतापगढ़ और राजसमंद में बारिश होने की संभावना है।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 26 Jun 2022 10:41:19 +0530</pubDate>
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