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                <title>memories - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>सुपरहीरो शक्तिमान की यादें फिर होगी ताजा, रणवीर सिंह निभायेंगे किरदार!</title>
                                    <description><![CDATA[मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह सिल्वर स्क्रीन पर सुपरहीरो शक्तिमान का किरदार निभाते नजर आ सकते हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/memories-of-superhero-shaktimaan-will-be-fresh-again--ranveer-singh-will-play-the-character/article-13761"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/shaktimaan.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बॉलीवुड अभिनेता रणवीर सिंह सिल्वर स्क्रीन पर सुपरहीरो शक्तिमान का किरदार निभाते नजर आ सकते हैं।<br /><br />90 के दशक के सीरियल 'शक्तिमान' में मुकेश खन्ना ने शक्तिमान की भूमिका निभायी थी। शक्तिमान को देश का पहला सुपरहीरो माना जाता है। हाल ही में शक्तिमान पर फिल्म का एलान किया गया था। सोनी पिक्चर्स इंटरनेशनल प्रोडक्शंस द्वारा पिछले दिनों एक टीजर जारी किया गया था। इस टीजर में फिल्म 'शक्तिमान' की पहली झलक दिखाई गई थी। हालांकि मेकर्स ने फिल्म के कलाकारों और निर्देशक के बारे में कोई जानकारी नहीं दी थी।<br /><br />चर्चा है कि फिल्म 'शक्तिमान' के लिए इंडस्ट्री के एक नामी कलाकार को अप्रोच किया गया है। चर्चा है कि 'शक्तिमान' के मेकर्स ने रणवीर सिंह को फिल्म में मुख्य भूमिका निभाने की पेशकश की है। यह फिल्म सोनी पिक्चर्स और मुकेश खन्ना के भीष्म इंटरनेशनल के बैनर तले बनाई जाएगी।' निर्माताओं को लगता है कि रणवीर इस सुपरहीरो के किरदार को स्वाभाविक रूप से पर्दे पर निभा सकते हैं। यदि सबकुछ सही रहा तो रणवीर सिल्वर स्क्रीन पर शक्तिमान का किरदार निभाते नजर आ सकते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 06 Jul 2022 18:15:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>पति ने देश सेवा में प्राण न्यौछावर किए, अब चीजों को यादों के रूप में पास रखते हैं</title>
                                    <description><![CDATA[गैलेण्ट्री अवार्ड समारोह जयपुर मिलिट्री स्टेशन के 61 केवेलरी ग्राउण्ड पर शनिवार को हुआ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/husband-laid-down-his-life-in-the-service-of-the-country--now-keeps-things-close-as-memories/article-6768"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/untitled-design1.png" alt=""></a><br /><p> जयपुर। लद्दाख में ड्यूटी के दौरान दुश्मन से लोहा लेकर मातृभूमि की रक्षा में प्राण न्यौछावर करने वाले नायब सूबेदार (एआईजी) मनदीप सिंह और नायब सूबेदार (डीएमटी) सतनाम सिंह को मरणोपरांत सेना मैडल दिया गया। गैलेण्ट्री अवार्ड समारोह जयपुर मिलिट्री स्टेशन के 61 केवेलरी ग्राउण्ड पर शनिवार को हुआ।<br /><br /><strong>मिठाई के थे शौकीन मनदीप</strong><br />नायब सूबेदार मनदीप सिंह की धर्मपत्नी गुरदीप कौर ने बताया कि देश सेवा का जज्बा उनमें जबरदस्त था। फैमिली के बारे में कम और फौज के बारे में ज्यादा सोचते थे। एक बेटी है जो 12वीं कक्षा में है। अभी बोर्ड एग्जाम की तैयारी कर रही और बेटा 7वीं कक्षा में है। गुरुद्वारा साहिब जाने का शौक था। मन करने पर खुद गर्मागर्मा रोटियां बनाकर हमें खिलाते थे। शादी की सालगिरह पर मेरे लिए केक लाते थे। मिठाई में हलवा, सेवइयां और लड्डू खाने के शौकीन थे। परिवार का खयाल रखते थे। उनके जाने पर कमी महसूस होती है।<br /><br /><strong>कार से घूमाने ले जाते थे सतनाम</strong><br />नायब सूबेदार सतनाम सिंह की धर्मपत्नी जसविंदर कौर ने बताया कि घर में एक रूम के अंदर उनकी चीजों को यादें बनाकर साथ रखते हैं। उनके बैच, बैल्ट, ड्रेस, फोटो, मोटर साइकिल वगैरह सभी साथ रखते हैं। भीगी हुई पलकों से याद करते हुए जसविंदर ने कहा कि वे लाइफ में हरदम एडजस्ट करके चलते थे। कार चलाने का शौक था उन्हें तो पहले हमने सैकंड हैंड कार ली उससे घूमने जाया करते थे। बाद में नई कार लेने की खुशी अलग थी। बच्चे पिता की हर चीज को सहेज कर रखते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 26 Mar 2022 14:14:10 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'बड़े मियां छोटे मियां' की यादें होगी ताजा, अक्षय और टाइगर की जोड़ी मचायेगी धूम!</title>
                                    <description><![CDATA[बॉलीवुड में चर्चा है कि निर्देशक अली अब्बास जफर, अक्षय कुमार और टाइगर श्राफ को लेकर एक फिल्म बनाने जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/61c59d462dce8/article-3503"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/akshay_tiger-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। क्या आपकों आज भी 'बड़े मियां छोटे मियां' फिल्म के गुदगुदाने वाले दृश्य याद है। जो आपकों हंसा-हंसा कर लौट-पौट कर देते थे। हम आपकों ऐसी जानकारी बताने जा रहे है जिससे एक बार फिर आप सिल्वर स्क्रीन पर जबरदस्त मस्ती देखकर अपनी हंसी रोक नहीं पायेंगे। दरअसल बॉलीवुड के खिलाड़ी कुमार अक्षय कुमार और एक्शन हीरो टाइगर श्राफ की जोड़़ी सिल्वर स्क्रीन पर धूम मचाती नजर आ सकती है। बॉलीवुड में चर्चा है कि निर्देशक अली अब्बास जफर, अक्षय कुमार और टाइगर श्राफ को लेकर एक फिल्म बनाने जा रहे हैं। कहा जा रहा है कि यह फिल्म 'बड़े मियां छोटे मियां' के तर्ज पर बनायी जायेगी। यह फिल्म अगले साल 2022 में फ्लोर पर जा सकती है। मेकर्स कथित तौर पर इस फिल्म को वर्ष 2023 में रिलीज करने की प्लानिंग बना रहे हैं।<br /> <br />  गौरतलब है कि वर्ष 1998 में प्रदर्शित  फिल्म 'बड़े मियां छोटे मियां' में अमिताभ बच्चन और गोविंदा ने डबल रोल किया था। इसके अलावा फिल्म में रवीना टंडन, राम्या कृष्णन, अनुपम खेर, परेश रावल, शरत सक्सेना और सतीश कौशिक महत्वपूर्ण भूमिका में हैं। फिल्म का निर्देशन डेविड धवन ने किया था।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Dec 2021 16:33:51 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'कप्तान साहब' की अमिट स्मृतियां</title>
                                    <description><![CDATA[चोर-डकैतों को पकड़ने में ‘नवज्योति’का योगदान]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/-%E0%A4%95%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%B9%E0%A4%AC--%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%85%E0%A4%AE%E0%A4%BF%E0%A4%9F-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%AE%E0%A5%83%E0%A4%A4%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82/article-3317"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/33.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>एक दिवाली ऐसी भी आई</strong><br /> एक दिवाली ऐसी भी आई जिस दिन हमारे पास एक पैसा भी नहीं था। फिकर हो गई, दिवाली कैसे मनाएं? इत्तफाक से छोटी लड़की के पास 10 रु. निकले जो स्कूल की फीस के लिए थे। उनसे दीपावली मनाई।<br /> <br /> <strong>अजमेर की दरगाह शरीफ को बचाया</strong><br /> 15 अगस्त को हिन्दुस्तान आजाद होने के बाद अजमेर से काफी संख्या में करीब 50 हजार मुसलमान पाकिस्तान चले गए। करीब 10 हजार रह गए। सिंध से सिंधी भाइयों का आना शुरू हो गया। उन्होंने बदले की भावना से मुसलमानों को भगाना, लूटना, मारना शुरू कर दिया, लेकिन कोई खास बड़ा नुकसान जान और माल का नहीं हुआ।<br /> इन्द्रकोट में तारा चंद पुलिस सिपाही जो वहां तैनात था उसको कुछ मुसलमानों ने जान से मारकर एक घर में गाड़ दिया। कुछ दिनों तक उसको मारने वालों का पता नहीं चला। मि. खलीलउद्दीन गोरी ने जो डिप्टी सुप. पलिस थे, मारने वालों का पता लगा दिया और लाश बरामद कर ली। हिन्दुओं ने सरकार से लाश की मांग की और कहा कि हम इसका दाह-संकार करेंगे। उनका इरादा था कि लाश का जुलूस दरगाह के सामने से ले जाया जाय और दरगाह के अंदर घुसकर मोइनुद्दीन चिश्ती की मजार को तोड़फोड़ दिया जाय।<br /> सरकार को शंका तो थी कि कहीं कोई गड़बड़ी न हो। आर्य समाजी नेता पं. जियालाल और कांग्रेसी ज्वालाप्रसाद ने चीफ कमिश्नर से कहा कि हम कोई गड़बड़ नहीं होने देंगे और जुलूस शांति से निकलेगा। मुझे जुलूसियों के इरादे का पता चल गया था। इसलिए मैैंने पुलिस सुपररिन्टेडेंट सुघड़सिंह और चीफ कमिश्नर शंकरप्रसाद से कहा का आप जुलूस को किसी भी हालत में दहगाह के सामने से न जाने देना, वरना जुलूस वाले दरगाह को नष्ट-भ्रष्ट कर देंगे। दोनों नेताओं ने बहुत आश्वासन दिया कि कोई गड़बड़ न होगी, जुलूस दरगाह बाजार से ले जाने दिया जाय लेकिन सरकार इसके लिए तैयार नहीं हुई। नए बाजार के कड़क्के चौक दरवाजे के सामने पुलिस तैनात कर दी और जुलूस को उधर से न जाने दिया और एक बड़ी घटना होने से टल गई।<br /> <br /> <strong>चोर-डकैतों को पकड़ने में ‘नवज्योति’का योगदान</strong><br /> कुछ वर्ष पूर्व अजमेर के सावित्री कालेज के सामने जब एक व्यक्ति स्टेट बैैंक से दर हजार रुपए लेकर स्कूटर में बैठकर जा रहा था कि सावित्री कालेज के सामने दो लुटेरे उसे लूटकर भाग गए। पुलिस डिप्टी सुप. श्री खलीलउद्दीन गोरी को खबर मिलते ही उन्होंने एक डाकू को तो पकड़ लिया जिसे अजमेर जेल में बंद कर दिया और दूसरा पकड़ नें नहीं आया। उसको पकड़ने की योजना बनाई। वे मेरे पास आए। कहा कि आप एक खबर छाप दीजिए कि फलां नाम का दूसरा डकैत भी पकड़ा गया। वह खबर अखबार में छपवाकर अखबार लेकर वे जेल गए और डकैत से कहा कि फलां नाम का दूसरा तुम्हारा साथी हमने गिरफ्तार कर लिया है तो उसने तुरन्त कहा कि फलां आदमी जिसे पकड़ा है बेकसूर है, फलां आदमी मेरे साथ डकैती में शामिल था। उसको भी गिरफ्तार कर लिया गया। पुलिस सुप. गुप्ता को जब यह खबर बताई थी तो वे बड़े नाराज हुए थे, लेकिन गिरफ्तारी के बाद गोरी ने गुप्ता साहब से कहा कि दूसरा भी पकड़ा जाय इसलिए यह खबर छपाई थी।<br /> <br /> <br /> <strong>जब मैैं इक्कीस मंजिली इमारत पर सीढ़ियों से चढ़ गया</strong><br /> सन् 1982 की बात है। मैैं ‘नवज्योति के काम से कलकत्ता गया हुआ था। वहां विज्ञापन एजेंसियों से मिला। इसी सिलसिले में चौरंगी रोड पर एक विज्ञापन एजेंसी से मिलने गया। चौरंगी रोड पर एक इक्कीस मंजिल की इमारत पर उसका आफिस था। मेरे साथ हमारे दफ्तर का नवजवान साथी भी था। जब हम वहां पहुंचे तो इत्तफाक से बिजली बंद थी, जिससे लिप्ट काम नहीं कर रही थी। मेरे साथी ने कहा कि बिजली आएगी तब ऊपर चढ़ेंगे। मैंने कहा- नहीं, बिजली का इंतजार नहीं करना है और हमें चींटी की चाल से इक्कीस मंजिल चढ़ना है। हम दोनों चींटी की चाल से सीढ़ी दर सीढ़ी इक्कीस मंजिल पर चढ़ गए। मैं तो न थका  न मेरे कोई पसीना  आया। साथी थक कर पसीने से तर-बतर हो गया और हांफने लगा। थोड़ी देर सुस्ताने के बाद हम आफिस में गए और मिल करके वापिस आए, तब भी लिफ्ट बंद थी। मैैंने कहा कि उतरने में क्या जोर आएगा। अपन सीढ़ियों से नीचे उतर सकते हैैं। मेरे साथी ने कहा-मेरी अब हिम्मत नहीं है, लिफ्ट जब चालू होगी तब ही चलेंगे।’ थोड़ी देर में लिफ्ट चालू हो गई, हम लोग उसके जरिए नीचे उतर आए। एक विज्ञापन एजेन्सी में  हमने यह सारी घटना सुनाई। पास में किसी न्यूज एजेन्सी के संवाददाता भी बैठे हुए थे। उन्होंने अपनी एजेन्सी द्वारा कलकत्ते के सारे अखबार वालों को हमारी यह न्यूज दी और दूसरे दिन वहां के सारे अखबारों में हमारी यह न्यूज छप गई। <br /> <br /> <strong>रात्रि में पहाड़ों पर तीस मील का सफर</strong><br /> सन् 1938  में जब मैं, माणिक्यलाल वर्मा, भोगीलाल पांड्या तथा हमारे पच्चीस साथी डूंगरपुर रियासत में महारावल के सहयोग से भीलों में रचनात्मक कार्य कररहे थे,उस समय भंयकर अकाल पड़ा था। भील लगान न दे पाएं तो दीवान ने सख्ती शुरू की। खडलाई पाल के क्षेत्र में जहां हम रहते थे, वहां हम लोगों को बुलाकर कहा कि आप भीलों से कहें कि वे लगान अदा करें। हमने कहा न तो हम लगान देने के लिए कहेंगे,क्योंकि यह माहे कार्य क्षेत्र के बाहर है। महारावल के पास ये बात पहुंचानी जरूरी थी। मगर हम वहां से डूंगरपुर रास्ते रास्ते जाते तो हमें दो दिन लगते। पहाड़ों-पहाड़ों पर चलने से हम शाम को रवाना होकर सुबह डूंगरपुर पहुंच सकते थे। इसलिए मैैं और वर्माजी चार भीलों को साथ लेकर शाम को रवाना हुए और तीस मील रात में पहाड़ों ही पहाड़ों पर चलकर सुबह डूंगरपुर पहुंच गए। वहां भोगीलालजी पांड्या को सारी स्थिति बताई। पांड्याजी ने महारावल से सारी बातें कहीं। महारावल नाराज हुए और दीवान को कहलवा दिया कि लगान वसूली के बारे में इनसे कोई बात न करे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Dec 2021 12:55:04 +0530</pubDate>
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