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                <title>असर खबर का - मौसम खुला तो खेतों में पहुंचे अधिकारी</title>
                                    <description><![CDATA[नवज्योति ने बारिश से फसलों के नुकसान की खबर को प्रकाशित किया था।  
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/effect-of-news---officials-reached-the-fields-when-the-weather-cleared/article-121172"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(2)33.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। मानसून की लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया है। खेत पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाने से  सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब हो गई हैं। अब मौसम साफ होने के बाद कृषि विभाग ने नुकसान का सर्वे शुरू कर दिया है। रविवार को अवकाश होने के बाद विभाग की टीमें जिले के विभिन्न क्षेत्रों में पहुंची और फसलों में खराबे की स्थिति का आकलन किया। इस दौरान कई खेतों में पानी भरा नजर आया। वहां पर खरीफ फसलें ज्यादा प्रभावित हुई हैं। कोटा जिले सहित हाड़ौती में सबसे ज्यादा सोयाबीन की बुवाई होती है। ऐसे में लगातार बारिश के कारण अधिक नुकसान सोयाबीन को पहुंचा है। इस बार कई किसान तो दो-दो बार सोयाबीन की बुवाई कर चुके हैं। अब बुवाई की प्रक्रिया अनिश्चित काल के लिए टल गई है। </p>
<p><strong>कहीं सोयाबीन तो कहीं मूंग में नुकसान</strong><br />किसानों ने समय पर रात दिन मेहनत करके फसल की बुवाई की, लेकिन इसके बाद लगातार हुई मूसलाधार बारिश से खेतों में पानी भर गया। जिससे खरीफ की फसलें खासकर सोयाबीन को भारी नुकसान हुआ है। खेतों में पानी भरने से फसलें गल गई हैं। बीज अंकुरित नहीं हो रहे हैं। जो अंकुरित हो भी रहे हैं, वे कुछ ही दिनों में नष्ट हो रहे हैं। विभागीय अधिकारियों के अनुसार प्रारंभिक सर्वे में सामने आया कि कोटा जिले के अनेक गांवों में खेत जलमग्न हैं, जिससे फसलों की जड़ों में सड़न शुरू हो गई है। वहीं बारां में सोयाबीन और मक्का की फसलें सबसे ज्यादा प्रभावित हुई हैं। झालावाड़ में भारी बारिश के कारण मूंग की फसलें पूरी तरह से गल गई हैं। कई जगह तो बारिश इतनी अधिक हुई कि खेतों की मेड़ें टूट गईं और पानी निकलने का रास्ता नहीं रहा।</p>
<p><strong>अब क्या करेंगे कुछ समझ नहीं आ रहा</strong><br />इटावा क्षेत्र के किसान मांगीलाल, भरोसीलाल ने बताया कि इस साल क्षेत्र में लगातार बारिश हुई है। इससे फसलों को व्यापक नुकसान पहुंचा है। इस क्षेत्र में अधिकांश किसानों ने सोयाबीन की फसल पर दांव लगाया है। इसके बाद धान की बुवाई की थी। तेज बारिश के कारण खेतों में पानी का भराव होने से सोयाबीन की फसल तो पूरी तरह से बर्बाद हो चुकी है। बड़ी मुश्किल से बीज लेकर खेतों में बुवाई की थी। अब तो सब कुछ बर्बाद हो चुका है। अब समझ नहीं आ रहा कि क्या करें। दुबारा से बुवाई करने के लिए फिर से खाद-बीज की व्यवस्था करनी पड़ेगी। इसके लिए रुपयों की व्यवस्था करना मुश्किल होगा। ऐसे में अब तो खेतों को खाली रखने की नौबत आ गई है। </p>
<p><strong>नवज्योति ने उठाई थी किसानों की पीड़ा</strong><br />इस साल लगातार बारिश होने से फसलों को काफी नुकसान होने के सम्बंध में 17 जुलाई को किसानों की पीड़ा से सम्बंधित समाचार प्रमुखता से प्रकाशित किया गया था। इसमें बताया था कि जिले सहित संभाग के कई क्षेत्रों में सैंकड़ों किसानों को काफी नुकसान पहुंचा है। पिछले दिनों लगातार बारिश ने किसानों की उम्मीदों पर पानी फेर दिया। खेत लबालब पानी से भरे हुए हैं। समय रहते पानी की निकासी नहीं हो पाई। इसके चलते सोयाबीन व उड़द की फसलें खराब गई है। कई किसान तो दो-दो बार सोयाबीन की बुवाई कर चुके हैं। किसान प्रकृति के आगे बेबस सा नजर आ रहा है। पिछले वर्ष भी किसानों की खरीफ की फसल अतिवृष्टि की भेट चढ़ गई थी। इसके बाद कृषि विभाग ने बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों के साथ टीम बनाकर नुकसान का सर्वे करने का निर्णय किया। इसके बाद टीमों ने सर्वे शुरू कर दिया है।</p>
<p>हमने 12 बीघा में सोयाबीन बोई थी, मगर लगातार पानी भरे रहने से पौधे गलने लगे हैं। बीमा करवाने से पहले ही फसल खत्म हो गई। अब दोबारा बुवाई की स्थिति नहीं है।<br /><strong>- गणेशलाल, किसान </strong></p>
<p>मौसम खुलने के बाद खेतों में फसलों को हुए नुकसान को लेकर सर्वे शुरू कर दिया है। जिन खेतों में पानी लम्बे समय तक भराव रहा है वहां पर ज्यादा नुकसान होने की संभावना है। सर्वे पूरा होने के बाद ही खराबे का सही आकलन हो सकेगा।<br /><strong>- अतीश कुमार शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Jul 2025 15:02:53 +0530</pubDate>
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                <title>फीडर की मुख्य लाइन के 11 केवी विद्युत तारों का नीचे की तरफ हो रहा झुकाव </title>
                                    <description><![CDATA[किसानों का कहना है कि इस समय किसानों के खेत खाली हो चुके है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-11-kv-electric-wires-of-the-main-line-of-the-feeder-are-bending-downwards/article-93703"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-sizee-(6)2.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। जयपुर विद्युत वितरण निगम की सादेड़ा फीडर की 11 केवी मुख्य लाइन के विद्युत तारों का रखरखाव नही होने से तारों का झुकाव अधिक नीचे होने से खेतों में किसानों को परेशानी हो रही है। संबंधित विभाग द्वारा समय रहतें दुरूस्त नही किया तो कभी भी किसानों को खतरा हो सकता है। जिम्मेदारों की अनदेखी क्षेत्रीय किसानों पर भारी नहीं पड़ जाएं। जानकारी के अनुसार बांसी जीएसएस से जुडे़ सादेड़ा फीडर की मुख्य लाइन का लंबे समय से रखरखाव नही होने से इस लाइन में भण्डेड़ा के खेतो से गुजर रही 11 केवी विद्युत लाइन के तार बहुत-सी जगहों पर खेतों से गुजर रही लाइन की जगह पर कही पर दस-बारह फीट की ऊंचाई से गुजर रही है। जो खेतो में कृषि कार्य करते मशीनरी को भी खतरा है। वही अधिक ऊंचाई की फसलों को भी खतरा बना हुआ है। संबंधित विभाग समय रहते नही देते इस ओर ध्यान इसका खामियाजा किसानों को भुगतना पड़ता है। किसानों का कहना है कि इस समय किसानों के खेत खाली हो चुके है। खेतो से गुजर रही 11 केवी लाइन हवा में लहराने से आपस में टकराव होने पर चिंगारियां गिरती है। इस दौरान खेतों में कृषि कार्य करते समय किसानों को इसका खतरा हो सकता है। इस समय विभाग इस समस्या को गंभीरतापूर्वक देखे। एवं समय रहते सुध लेकर लाइन के विद्युत तारों की खिचाई कर टाइट करें तो किसानों को भी राहत मिले।</p>
<p><strong>लाइन के नीचे कई जगह पेड़-पौधों के कारण खतरा </strong><br />इस लाइन पर बहुत सी जगह पर लाइन बंबूलों से गुजर रही है, तो बहुत सी जगहों पर लाइन के नीचे पेड़-पौधे है। जो हवा के साथ ही तारों से टकराने पर चिंगारियां उठती है। क्षेत्र में गन्ने की फसल की जगह पर किसानों को अधिक खतरा बना हुआ है। जिम्मेदारों के अनदेखी क्षेत्रीय किसानों पर भारी नहीं पड़ जाए।</p>
<p><strong>बार-बार होती है बिजली गुल</strong><br />ग्रामीणों  का कहना है कि क्षेत्र में विद्युत लाइन का लंबे समय से मरम्मत का कार्य नही होने से बार-बार लाइन में फाल्ट आता हैं। क्षेत्र के उपभोक्ताओं की विद्युत आपुर्ति बाधित हो जाती है। बार-बार बिजली गुल की समस्या से जुझना पड़ता है। हल्की बूंदाबांदी होते ही लाइन में फाल्ट आ जाता है, जो थ्री फेस बिजली पर निर्भर किसानों को पर्याप्त बिजली भी नही मिल पाती है। बहुत-सी बार विद्युत तार टूटकर नीचे गिर जाते है। जो खेतो व रास्तों पर भी खतरा बढ़ जाता है। समय पर संबंधित विभाग सुध लेकर इस लाइन की मरम्मत करें, तो किसानों सहित घरेलू उपभोक्ताओं को भी राहत मिले। क्षेत्र में अनहोनी घटनाएं घटित होने से भी राहत मिले। </p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />फीडर की लाइन के तकनीकी कर्मचारी से इस संबंध में मौके की जानकारी लेगें। इसके बाद विभाग का शेड्यूल बनाकर भेज देगें। जब लाइन की मरम्मत का कार्य स्वीकृति होगी। <br /><strong>- मनीष पहाडिया, जेईएन, विद्युत विभाग, नैनवां-देई</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Oct 2024 15:49:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गुजरियाखेड़ा में खेत और रास्ते हो रहे पानी-पानी</title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासनिक अधिकारियों को अवगत कराया पर नहीं हुआ समाधान। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/fields-and-roads-in-gujariyakheda-are-getting-flooded/article-91342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/427rtrer-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र में गुजरियाखेडा के धरतीपुत्रों के चार से पांच हजार बीघा भूमि में पानी की उचित निकासी नही होने से फसलें तो पूरी तरह नष्ट हो चूकी है। क्षेत्र में बारिश हुए लगभग ग्यारह दिन बीत गए है। पर अभी भी खेत तो तालाब बने हुए है। वही आम रास्ते के भी यही हाल बने हुए है। हर रोज आवाजाही करने पर एक से डेढ़ फीट बरसाती पानी से होकर गुजरने को मजबूर होना पड़ रहा है। क्षेत्र के धरतीपुत्रों ने नैनवां उपखंड स्तर के अधिकारियों से लेकर जिला प्रशासनिक अधिकारियों तक लिखित पत्र देकर पानी निकासी की मांग कर चूके है। पर अभी तक समस्या का समाधान के नाम पर सभी चुप्पी साधे हुए है। जिससे ग्रामीणों में जिम्मेदारों के प्रति काफी रोष व्याप्त नजर आया है। </p>
<p>जानकारी के अनुसार क्षेत्र के गुजरियाखेड़ा के एक तरफ के माल में लगभग चार से पांच हजार बीघा भूमि में क्षेत्र में पहली भारी बारिश होते ही पानी भर जाता है। जो पूरे बारिश के समय ही पानी बढ़ता जाता है। इस समय हाल यह बने हुए है जो किसान परिवार सहित खेत व कुओं पर निवास करते है। उन्हें घर छोड़ते ही पानी से होकर गुजरना पड़ता है। बच्चों को स्कूल आवाजाही के दौरान पारिवारिक सदस्यों को साथ आवागमन करना पड़ता है। स्कूल से आने का समय होते ही बरसाती पानी की जगह बच्चें नही आए उससे पहले परिवार के सदस्यों को गांव के पास पहुंचना पड़ता है। खेतों का पानी सड़कों पर टकराकर फैला हुआ है। रास्ते की ऊंचाई कम होने से रास्ते भी तरबतर हो रहे है। यहां से गुजरते समय पानी में कंटीली कांटे नजर नही आते है। जो कीचड़ व पानी में कांटे तक चुभ जाते है। हर रोज पानी से गुजरते हुए दो माह से भी अधिक समय हो गया पैरो की चमड़ी गल गई। जो दिनरात दर्द दे रही है। खाने पीने की आवश्यक सामग्री के लिए भी गांव व कस्बों में आना जाना पड़ता है। </p>
<p>फसलें बर्बाद हो गई, अभी भी खेतों में बरसाती पानी भरा हुआ है। खेत व कुएं पर रहते समय जहरीले जीव-जंतुओं का भी खतरा बना हुआ है। एक फसल तो बर्बाद हो गई। आगे की फसल के लिए खेतों में भरा पानी इस हाल में तो लगभग एक माह से भी अधिक समय तो पानी कम होने में लग जाएगा। फिर कब हंकाई जुताई कर खेतों को तैयार किया जाएगा। इस बीच एक बारिश हल्की-फुल्की भी होती है। तो इस क्षेत्र में फसलों की बुवाई होना संभव नहीं होने की चिंताएं सताने लगी है। क्षेत्र में लगभग नब्बे प्रतिशत खेती पर निर्भर: धरतीपुत्रों का कहना है कि क्षेत्र में खेती के अलावा यहां व आसपास में मजदूरी का उचित स्त्रोत नही है। जो क्षेत्र के लगभग नब्बे प्रतिशत ग्रामीण खेती पर निर्भर है। जो हर वर्ष बारिश के होते ही धरतीपुत्र अच्छी उपज की आस लगाकर मंहगे दामों में उचित बीज खरीदकर बुवाई करते है। </p>
<p><strong>अन्नदाताओं की पीड़ा से अनजान प्रशासनिक अधिकारी </strong><br />खेतों में पानी को भरे हुए दो महिनों से अधिक समय गुजर गया। खरीफ फसलें पूर्णत: नष्ट हो चुकी है। कुएं पर मकान के चौतरफा पानी ही पानी भरा हुआ है। दोतरफा बने ग्रेवल की सड़कों में पानी निकासी नही होने से हमारे परिवार का जीना दूभर हो गया है। पानी निकासी को लेकर प्रशासनिक अधिकारियों को भी लिखित-पत्र देकर अवगत कराया जा चूका है। मगर अधिकारी नही जाने किसके दबाव में है। जो इस क्षेत्र की पानी निकासी से अवगत करवाया जाने के बाद भी चुप्पी साधे हुए है। जिसका खामियाजा हम भुगत रहे है। <br /><strong>- सत्यनारायण मीणा, निवासी गुजरियाखेड़ा</strong></p>
<p>गांव में जगह का अभाव होने से लंबे समय से ही कुएं पर मकान बनाकर परिवार सहित निवासरत है। ग्रेवल की सड़कों पर पानी निकासी पूर्णतया बंद होने से हर वर्ष बारिश के होते ही यही हाल बन जाते है। खेत पर उचित सीढ़ी लेकर मकान बना रखे है। जिनके चहूंओर पानी भरा हुआ है। घर से निकलते ही एक से दो फीट पानी से गुजरना पड रहा है। सड़क पर पानी की उचित निकासी करे तो परिवार भी सुरक्षित रहे व खेती को भी बचाया जा सकता है।  विभागीय अधिकारी नही जाने किस दबाव में है। जो जब-जब भी इस समस्या को लेकर जाते है, तो पत्र तो लेते है। पर मौके पर आकर नही देखा जाता है। विभागीय अधिकारी जल्द पानी की निकासी नही करवाएंगे, तो ग्राम पंचायत पर पहुंचकर आक्रोश जताया जाएगा।<br /><strong>- गिलेरीराम गुर्जर, निवासी गुजरियाखेड़ा </strong></p>
<p>इस क्षेत्र में जब से ग्रेवल सड़क बनी है। तब से लंबा समय गुजर गया बारिश के समय की फसलें की बुवाई हो जाती है। दवाइयां लग जाती है। जब तेज बारिश होते ही पूरे क्षेत्र में पानी ऊपर से भी आ जाता है। दोनों तरफ ग्रेवल सड़कें इस क्षेत्र के धरतीपुत्रों के लिए आफत बन जाती है। हर रोज खेत व कुएं से गांव तक पहुंचने के लिए कमर तक पानी से गुजर रहे है। जो दो माह बीत चूके है। अभी भी पानी कम नही हो रहा है। अभी तक ऊपर की तरफ से पानी आ रहा है। हमारे खेतों का पानी कम नही हो रहा है। परिवार का भरणपोषण में भी समस्या बनती जा रही है। आखिर करें तो क्या करें इन्हें छोड़कर कहां जाए। संबंधित जिम्मेदार हमारी समस्या को संज्ञान में लेकर जल्द निराकरण करें।<br /><strong> - भगवान सिंह, निवासी गुजरियाखेड़ा</strong></p>
<p>एक तरफ सरकार शिक्षा जरूरी बता रही है। हमारे नौनिहालों को स्कूल जाने के लिए एक किमी दूरी तक ताल-तलैया बने खेतों की पानी भरी मेढ़ के रास्ते से गुजरना पड़ता है। इस पानी में बच्चों के कपड़े तक भीग जाते है। रास्ता पार के दौरान कही फिसलने पर पूरी यूनिफॉर्म गंदी हो जाती है। यह समस्या हर रोज की दो माह से बनी हुई है, जो अभी भी एक माह तक बनी रहेगी। इस दरमियान बारिश हो जाती है, तो अधिक समय तक पानी से होकर ही गुजरने को मजबूर होना पड़ेगा। आगामी समय में फसलों की बुवाई भी समय पर नही होगी। एक चिंता यह भी सताने लगी है। <br /><strong>- सीताराम मीणा, निवासी गुजरियाखेड़ा </strong></p>
<p>ग्रामीणों ने हमे अवगत नही करवाया  था। पंचायत समिति में अवगत कराया गया है। विभाग मौके पर आकर देखे, जहां पर पानी की निकासी होती है। वहीं से इस पानी की निकासी करवानी चाहिए।<br /><strong>- कैलाश सैनी, सरपंच ग्राम पंचायत सादेड़ा</strong></p>
<p>मामला मेरी जानकारी में नही आया है। ग्रामीण देकर गए होंगे तो मैं मोके पर नही था। अब मामला जानकारी में आया है, तो एईएन को भेजकर मौका दिखाया जाएगा। <br /><strong>- ग्यारसीलाल मीणा, बीडीओ पंचायत समिति नैनवां    </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 23 Sep 2024 18:00:13 +0530</pubDate>
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                <title>बीबीएफ पद्धति अपनाकर भारी बरसात में फसलें तबाह होने से बचाएं</title>
                                    <description><![CDATA[नाले को गहरा करने और साफ सफाई समय पर होती तो बच सकती भी फसलें।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/save-crops-from-being-destroyed-in-heavy-rains-by-adopting-bbf-method/article-90378"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/2rtrer-(3)4.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। दुगारी बांध के ओवरफ्लो की वजह से बांसी सहित आसपास के गांवों में खेतों में पानी भर गया और अन्नदाताओं की करोड़ों की फसल तबाह हो गई। कृषि विशेषज्ञों और वैज्ञानिकों का कहना है कि भारी बरसात से फसलों को बचाने के लिए किसानों को बीबीएफ पद्धति से (नाली व मेड विधि) सोयाबीन व उड़द की फसलों की बुवाई करनी चाहिए। जिससे अतिवृष्टि में ज्यादा बरसात होने की स्थिति में बरसात का पानी नालियों से बाहर निकल जाता है। फसले खराब होने से बच सकती है। इस पद्धति से फसलों की बुवाई करने से मध्यप्रदेश में बहुत उपयोगी साबित हो रही है। जानकारी के अनुसार क्षेत्र में  दुगारी बांध का ओवरफ्लो का पानी की निकासी मोरी के सहारे बांसी के तालाब में पहुंच रहा है। बांसी के तालाब का ओवरफ्लो का पानी तीन जगह के नालों के सहारे निचले क्षेत्र मेज नदी में पहुंच रहा है। इस समय नालों की हालात देखी जाए तो लगता है कि यह नाले नही खेत नजर आते है। नाममात्र की जगह पर ही नाले नजर आ रहे है। क्षेत्र में इस समय लंबे समय से ही बारिश चल रही है। जिसका पानी, डैम व तालाब के ओवरफ्लो का पानी एक साथ नाले में बहाव होने से नालों में पानी ऊफान लेकर धरतीपुत्रों के खेतों में लबालब भरे हुए होने से यह पानी नालों में भी धीरे-धीरे निकलने से पानी खेतों की फसलों में अधिक समय तक रहने से हजारों बीघा फसलें बर्बाद हो गई है। संबंधित विभाग पानी निकासी की जगहों पर नालों का समय रहते नालों को अतिक्रमण से मुक्त करवाकर नालों की चौड़ाई व गहराई करवा देते तो तीन से चार गांव के धरतीपुत्रों की हजारों बीघा भूमि में धरतीपुत्रों की फसलें बच जाती तो धरतीपुत्रों को इसका नुकसान नहीं उठाना पड़ता। नालों की गहराई व चौड़ाई होने से बारिश का पानी खेतों का भी नाले मे पहुंच जाता व नाले ऊफान नही लेते व नुकसान की जगह फायदा मिलता। परिवार के भरण-पोषण में भी बाधाएं नही आती। </p>
<p> फसलें बर्बाद की एक वजह यह भी कि क्षेत्र में तालाबों के पानी निकासी के सभी जगहों पर नाले है। जिन पर नालों के दोनों तरफ के ही किसानों ने दोनों तरफ से अतिक्रमण भी कर लिया है। जो किसी जगह पर खेत बना दिया। किसी जगह पर संबंधित विभाग ने पट्टे जारी कर दिए। जिसमें मकान व बाड़े बना लिए। आबादी के अंदर संबंधित विभाग ने सड़कें बना दी। सड़कों की ऊंचाई होने से गांव के बाजारों में पानी अधिक ऊंचाई तक पहुंच गया। वही नालों को खेत का रूप देने से पानी ऊपरी क्षेत्र तक के खेतों तक पानी पहुंच गया। जो क्षेत्र में फसलें बर्बाद होने की यह वजह भी बताई जा रही है।  </p>
<p>बांसी के धरतीपुत्रों के खेतो में पानी भरने की समस्या का समाधान तीन जगह पर हो रहा है। तालाब की पानी निकासी के नाले की दस फीट गहरी व राजस्व विभाग के रिकॉर्ड में दर्ज नाले की चौड़ाई तक खुदाई हो जाए तो पूरे क्षेत्र में बाढ़ जैसे हालात पैदा नही होगें। पानी की निकासी बढे नालों तक पहुंचने से खेतों में जो पानी बारिश का होगा। वह भी इन्हीं में निकल जाएगा। इसका एक जगह का प्रयास मैंने किया था। नाले की गहराई हेतु स्वीकृति भी ली थी। पर कार्य शुरू करते ही खेत वालों ने आपत्ति जताते है। ऐसी स्थिति पास के खेत वालों ने नालों का मात्र नमूना रख रखा है। खेतों में मिलाने से नाले संकडे होते जा रहे है। तालाबों का ओवरफ्लो का पानी बारिश के साथ ही शुरू हो जाता है, जो पानी की निकासी में रूकावट पैदा हो जाती है।  बाढ़ जैसे हालत बन जाने से खेतों में फसलें लंबे समय तक जलमग्न हो जाती है। फसलें बर्बाद हो जाती है। संबंधित विभाग समय रहते सीमा ज्ञान करके नालों की गहराई व चौड़ाई बनाए तो समस्या का समाधान संभव है। <br /><strong>- सत्यप्रकाश शर्मा, सरपंच</strong></p>
<p><strong>ग्राम पंचायत बांसी </strong><br />दुगारी बांध का पानी जहां निचाई है, वही पर अधिक निकासी होती है। संबंधित विभाग ने गांव में सीसी सड़कों का निर्माण भी करवा दिया। जिससे पानी ऊंचाई तक पहुंच जाता है। नाले के आसपास की जगहों में भी विभाग ने पट्टे जारी करने से मकान बनने से चौड़ाई कम हो गई। गांव में पानी भरने की समस्या अधिक होती जा रही है। पानी निकासी के नालों की गहराई नही हुई, जो पानी फैलकर निकलने से खेतों की फसलें तक भरा रहता है। नाले में जितनी-सी जगह है, उसी आधार पर निकासी हो रही है। नालों का रिकॉर्ड राजस्व विभाग के पास है। नालों की गहराई होती तो तीनों गांव के किसानों की फसलें बर्बाद होने से बच जाती।<br /><strong>- पीसी मीणा, एईएन जलसंसाधन विभाग नैनवां</strong></p>
<p>पानी की समस्या से जो हालात पैदा हो रहे है। इस समस्या का समाधान व उचित जानकारी जल संसाधन विभाग को है। हमारे राजस्व विभाग के रिकॉर्ड के नाले है। उनमें पानी निकासी में बाधा नजर आती है, तो बारिश रूकने पर समाधान के लिए देखा जाएगा। <br /><strong>- रामराय मीणा, तहसीलदार राजस्व विभाग नैनवां </strong></p>
<p>क्षेत्र में बारिश शुरू होने पर बारिश का बरसाती पानी फसल के खेत में इकट्ठा नही होना चाहिए है। बारिश जारी रहे, ऐसी स्थिति में बारिश का पानी खेत से निकलता रहे। प्रथम प्राथमिकता खेत की फसल के पानी निकासी की समुचित व्यवस्था हो तो फसल को बारिश से बचाया जा सकता है। बारिश के समय नालों का पानी भी खेतों में नही आए अगर पानी आता है, तो खेत की फसल में रहने से फसल की जड़े गलने लगेगी। धीरे-धीरे फसल सुखने लगेगी। फसल नष्ट हो जाती है, आसपास के नालों का पानी खेतों में फैलेगा तो पानी के साथ आने वाले कीटाणु भी सब्जियों की फसल को नुकसान पहुंचाता है, तो अन्य पानी भी पहले वाले खेतों में नही आना चाहिए। यही भारी बारिश से बचाव का उपचार है। <br /><strong>- प्रेमराज गौचर, सहायक कृषि अधिकारी बांसी  </strong></p>
<p>काश्तकारों को लंबी अवधी में तैयार होने वाली फसलों को तैयार करना चाहिए। जिससे अतिवृष्टि  होने पर भी फसल बच जाती है। वर्तमान में खेतों में रासायनिक उर्वरकों का प्रयोग ज्यादा हो रहा है।  जिससे मिट्टी कठोर हो हाती है। इस वजह से वह पानी को कम अवशोषित करती है।  किसानों को जैविद खाद का उपयोग करना चाहिए  जिससे मिट्टी में जल धारण बढ़ जाती है। जिससे खेतों में मिट्टी अधिक से अधिक पानी को अवशोषित करती है। अन्नदाताओं को मौसम विभाग की भारी बरसात की भविष्यावाणी को देखते हुए फसल बोने का चयन करना चाहिए। वर्तमान में काफी पहले ही भारी बरसात की चेतावनी आ जाती है। ऐसे में सीधी बुवाई वाली धान की फसल को बढ़ावा दे सकते है। अतिवृष्टि ज्यादा बरसात से सोयाबीन और उड़द की फसल को बचाने के लिए बीबीएफ पद्धति (नाली व मेड विधि) से बुवाई करे। इस पद्धति से बरसात का पानी नालियों से बाहर निकल जाता है। यह पद्धति मध्य प्रदेश में उपयोग में ली जाती है। जो काफी सफल साबित हो रही है। <br /><strong>- डॉ. नरेश कुमार शर्मा, सहायक निदेशक, कृषि विभाग, कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 Sep 2024 14:34:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>मोरेल नदी से सटे गांवों के खेतों में पहुंचा पानी, पानी से खेत हुए जलमग्न, फसलें हुई खराब </title>
                                    <description><![CDATA[ लालसोट उपखंड क्षेत्र में कोथून रोड पर मोरेल नदी के किनारे स्थित विजयपुरा, लोरवाड़ा, मटलाना, समेल, राजपुरा आदि गांवों में नदी का पानी खेतों में पहुंच जाने से खेत जलमग्न हो गए तथा खेतों में बोई हुई मूंगफली व तिल की फसल खेतों में पानी भराव के कारण पूरी तरह खराब हो गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dausa/water-reached-the-fields-of-the-villages-adjacent-to-the/article-88234"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/pze-(2)5.png" alt=""></a><br /><p>दौसा। लालसोट उपखंड क्षेत्र में कोथून रोड पर मोरेल नदी के किनारे स्थित विजयपुरा, लोरवाड़ा, मटलाना, समेल, राजपुरा आदि गांवों में नदी का पानी खेतों में पहुंच जाने से खेत जलमग्न हो गए तथा खेतों में बोई हुई मूंगफली व तिल की फसल खेतों में पानी भराव के कारण पूरी तरह खराब हो गई। फसल खराब होने को लेकर किसानों में मायूसी एवं चिंता का माहौल बना नजर आया। किसानों ने अपनी फसल बर्बादी को लेकर मुआवजे की प्रशासन से गुहार की है। भाजपा जिला महामंत्री हरकेश मटलाना ने बताया कि खेतों में मोरेल नदी का पानी भर जाने से मूंगफली की फसल पूरी तरह नष्ट हो गई है।  मटलाना ने बताया कि प्रशासन शीघ्र ही फसल खराबे का सर्वे करा कर पीड़ित किसानों को मुआवजा दिलवाने की कार्यवाही करें। वहीं सहायक कृषि अधिकारी राजेंद्र शर्मा ने बताया कि अतिवृष्टि से किसानों की फसलों में जो नुकसान हुआ है उस नुकसान की भरपाई केंद्र सरकार द्वारा चलाई जा रही योजना प्रधानमंत्री किसान बीमा योजना से किसानों को फसलों में हुए नुकसान की भरपाई हो सकेगी। उन्होंने यह भी बताया कि जल भराव वाले खेतों में जड़ गलन रोग होने से भी फसलों में नुकसान की संभावना है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>दौसा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Aug 2024 15:11:55 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सरकारी उदासीनता: कागजों में ही उड़ा ड्रोन, खेतों तक नहीं पहुंचा</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा जिले में किसी को नहीं मिल पाया लाभ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-indifference--drone-flew-on-paper-only--did-not-reach-the-fields/article-74365"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/sarkari-udasinta---kagzo-me-hi-uda-drone-,-kheto-tk-nhi-pohcha...kota-news-03-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। खेती में नवाचार के लिए प्रदेश में ड्रोन से खेती की योजना मूर्त रूप नहीं ले पाई। पिछले साल बजट घोषणा में राज्य सरकार ने योजना के लिए 40 करोड़ रुपए तक की सब्सिडी का प्रावधान रखते हुए कृषि क्षेत्र के लिए इसे क्रांतिकारी कदम बताया था। वित्तीय वर्ष पूरा हो चुका है। इसके बावजूद कृषि विभाग अब तक एक भी ड्रोन पात्र हाथों तक पहुंचाने में विफल रहा है। कोटा जिले में किसी को भी इस योजना का लाभ नहीं मिल पाया है। यही स्थिति प्रदेश के अन्य जिलों की रही है। </p>
<p><strong>निर्धारित नहीं हो पाए जिलेवार लक्ष्य </strong><br />ड्रोन से खेती योजना के तहत कृषक उत्पादक संगठन, कस्टम हायरिंग सेंटर और बेरोजगार कृषि स्नातक युवाओं को अनुदान पर ड्रोन उपलब्ध करवाने थे। कृषि विभाग की ओर से वित्तीय वर्ष 2023-24 के दौरान अनुदान पर 1000 ड्रोन उपलब्ध करवाने थे। इसके लिए सितम्बर 2023 में गाइड लाइन जारी कर राज. किसान साथी पोर्टल पर आवेदन भी मांग लिए। उसके बाद अनुदान पर ड्रोन उपलब्ध करवाना तो दूर जिलेवार लक्ष्य ही निर्धारित नहीं हुए। ऐसे में खेतों तक ड्रोन पहुंचाने की योजना कागजों में ही दम तोड़ गई।</p>
<p><strong>खेती में ड्रोन का फायदा</strong><br />- कम समय में कीटनाशी या तरल उर्वरक के छिड़काव से समय की बचत।<br />- मजदूर से कीटनाशी या तरल उर्वरक का छिड़काव करवाने की तुलना में कम खर्च।<br />- ड्रोन से हर पौधे पर समान रूप से छिड़काव।<br />- ड्रोन से कीटनाशी या तरल उर्वरक का संतुलित छिड़काव।<br />- ड्रोन से फसल में सिंचाई की सही योजना बनाने में मदद।</p>
<p><strong>इतना मिलना था अनुदान</strong><br />गत सरकार ने बजट घोषणा में किसानों के लिए ड्रोन तकनीक से खेती का प्रावधान रखा था। घोषणा के तहत राजस्थान में 1000 ड्रोन खरीद कर योजना के तहत उपलब्ध कराने का निर्णय किया था। इसके लिए 40 करोड़ रुपए सब्सिडी के लिए जारी किए गए थे। जैसे 10 लाख रुपए का कोई ड्रोन खरीदेगा तो उसे 4 लाख रुपए की सब्सिडी दी जाएगी। कोई भी कस्टम हायरिंग सेंटर इस ड्रोन को खरीद सकता है। जिसके लिए विभाग में संपर्क करना होगा। पूर्व में इसका प्रचार-प्रसार भी किया गया था। योजना के तहत कस्टम हायरिंग सेंटर से कम दर पर भी ड्रोन किराए पर लेने का निर्णय किया गया था।</p>
<p><strong>हर तरह से फायेदमंद है ड्रोन</strong><br />कृषि क्षेत्र में किसी उपज का उत्पादन करने के लिए कई स्टेप होते हैं, जैसे निराई, गुड़ाई, सिंचाई, कटाई के साथ ही कीटनाशक छिड़काव भी है जो काफी महत्वपूर्ण है। कीटनाशक छिड़काव नहीं करने पर पूरी फसल तक बर्बाद हो जाती है। अभी किसान कीटनाशक छिड़काव के लिए पेटीनुमा स्प्रे उपकरण से छिड़काव करते हैं। इसमें एक एकड़ क्षेत्र में अगर किसान कीटनाशक छिड़काव करता है तो 3 घंटे तक लग जाते है। साथ ही कीटनाशक से किसान के शरीर पर बुरा प्रभाव भी पड़ता है। वहीं ड्रोन से इतने ही क्षेत्र में छिड़काव करेगा तो मात्र 10 मिनट में काम पूरा हो जाएगा। साथ ही शरीर पर पड़ने वाले प्रभाव से बचा जा सकता है</p>
<p>सरकार की खेती में ड्रोन के उपयोग के लिए बनाई गई काफी अच्छी है। इससे किसानों को काफी फायदा होता, लेकिन यह योजना कागजों से ही बाहर नहीं निकल पाई। राज. किसान साथी पोर्टल पर आवेदन मांगने के बावजूद किसी के भी इसका लाभ नही मिल पाया।<br /><strong>- त्रिलोकचंद, किसान, जाखड़ोंद</strong></p>
<p>ड्रोन से खेती की योजना विधानसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से आगे नहीं बढ़ पाई। लक्ष्य निर्धारित होते उससे पहले 9 अक्टूबर को आचार संहिता लग गई। प्रदेश में नई सरकार का गठन होने के बाद लोकसभा चुनाव की आचार संहिता लगने से अब 4 जून को आचार संहिता समाप्त होने के बाद ही ड्रोन से खेती योजना पर पुनर्विचार कर लक्ष्य तय किए जाएंगे। <br /><strong>- रमेश चांडक, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 03 Apr 2024 15:34:05 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>प्रतिबंध के बावजूद भी नोलाइयों से सुलग रहे खेत</title>
                                    <description><![CDATA[व्यास ने बताया कि प्रतिबंधित होने के बाद भी ऐसे मामले अधिक हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/despite-the-ban--fields-are-still-burning-due-to-burning-of-fire/article-74279"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-04/pratibandh-k-bawajood-bhi-nolaiyo-me-sulagh-rhe-khet...kota-news-02-04-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। गर्मी का मौसम शुरू होने के साथ ही आग लगने के मामले भी अधिक हो जाते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में फसल कटने के बाद नोलाइयों में आग के मामले भी अधिक आते हैं। अप्रैल से जून तक गर्मी के तीन माह के सीजन में शहर में जहां अधिकतर शॉर्ट सर्किट से आग लगने के मामले आते हैं। वहीं ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकतर खेतों में कटी फसल के बाद नोलाईयों व परालियों में आग के मामले अधिक होते हैं। हालांकि अभी तक फसल पूरी तरह से कटी नहीं है। ऐसे में ये मामले फिलहाल कम आए हैं। अप्रैल में फ सल कटने के बाद नोलाईयों में आग के मामलों में तेजी सेी बढ़ोतरी होगी। नोलाइ में आग लगाना प्रतिबंधित नगर निगम कोटा दक्षिण के मुख्य अग्निशमन अधिकारी राकेश व्यास ने बताया कि नोलाईयों में आग के बढ़ते मामलों को देखते हुए जिला प्रशासन की ओर से नोलाईयों को जलाने को प्रतिबंधित किया गया है। ऐसा करने वालों के खिलाफ संबंधित थाने की पुलिस द्वारा कार्रवाई की जाती है। व्यास ने बताया कि प्रतिबंधित होने के बाद भी ऐसे मामले अधिक हो रहे हैं। </p>
<p><strong>अब हर जिला मुख्यालय पर दमकलें</strong><br />सीएफओ राकेश व्यास ने बताया कि पहले ग्रामीण क्षेत्रों में नोलाइयों में आग लगने पर कोटा शहर से ही दमकलें आग बुझाने जाती थी। हालांकि अभी भी करीब 30 से 10 किमी. दूर बूंदी व सांगोद तक के क्षेत्र में कोटा से ही दमकलें जा रही हैं। वैसे अब हर जिला मुख्यालव व तहसील स्तर पर भी दमकलें उपलब्ध करवा दी गई हैं।  जिससे वहीं से दमकलें पहुंच जाती हैं। फिर भी  सूचना पर कोटा निगम से भी दमकलें भेजते हैं। </p>
<p><strong>अप्रैल में अधिक आएंगे मामले</strong><br />सीएफओ व्यास ने बताया कि मार्च के अंतिम दिनों और अप्रैल में फसल कटने के बाद नोलाइयों में आग के मामले अधिक आते हैं। यह सिलसिला जून तक चलता है। उन्होंने बताया कि सोमवार को सांगोद क्षेत्र से सूचना मिलने पर वहां दमकल भेजी गई थी। </p>
<p><strong>शहर में हो चुकी कई घटनाएं</strong><br />इधर शहर में आग लगने की गत दिनों कई घटनाएं हो चुकी हैं। शहर में एक सप्ताह में दो बड़े कबाड़ गोदाम  में शॉर्ट सर्किट से आग लगने की घटनाएं हो चुकी हैं। जिनमें लाखों का नुकसान होने के साथ ही एक-एक दर्जन दमकलों से लाखों लीटर पानी और फाम से आग पर काबू पाया गया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Apr 2024 18:24:22 +0530</pubDate>
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                <title>अधिक उत्पादन की आस ने बिगाड़ी मिट्टी की सेहत</title>
                                    <description><![CDATA[कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी के क्षारीय होने से पैदावार घट रही है। यूरिया व डीएपी जैसे उर्वरक के अधिकाधिक इस्तेमाल से प्राकृतिक तत्व मिट्टी से लोप हो रहे हैं। जिससे मिट्टी के कणों में पानी संग्रह की क्षमता कम हो रही है। परिणामस्वरूप अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/expectation-of-more-production-spoils-the-health-of-the-soil/article-35573"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-01/adhik-utpadan-ki-aas-nei-bigadi-mitti-ki-sehat..kota-news-23.1.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। जिले की मिट्टी की सेहत बेहद कमजोर है। अधिक उत्पादन की आस में किसान खेतों में अंधाधुंध रसायनों का उपयोग कर रहे हैं। रासायनिक उर्वरकों के बेइंतहा इस्तेमाल से खेतों की उर्वरा शक्ति क्षीण होती जा रही है। सीमित भूमि में अधिक उत्पादन के लालच के चलते किसानों ने रासायनिक उर्वरकों का अंधाधुंध प्रयोग शुरू कर दिया। जिसका परिणाम यह हुआ कि वातावरण प्रदूषित हो चला है। कोटा जिले की मिट्टी भी लगातार बीमार होती जा रही है। लगभग पूरे जिले की मिट्टी में नाइट्रोजन और आॅर्गेनिक कार्बन जैसे जरूरी तत्वों की कमी है। वहीं जिंक और आयरन जैसे तत्व भी नदारद होते जा रहे हैं। </p>
<p><strong>7783 सैंपलों की हुई जांच</strong><br />कोटा स्थित मृदा परीक्षण प्रयोगशाला के आंकड़े यही कहानी बयां कर रहे हैं। यहां इस सीजन में करीब 7783 सैंपल की जांच की गई है। इनमें से 100 प्रतिशत यानी सभी सैंपल में आर्गेनिक कार्बन की कमी पाई गई है। वहीं 98 फीसदी में नाइट्रोजन की कमी मिली है। 10 फीसदी में आयरन और 6 फीसदी में जिंक जैसे जरूरी तत्वों की कमी है। ऐसे में परंपरागत जैविक खेती ही मिट्टी की सेहत को सुधार सकती है। किसानों को रसायनों का जरूरत के मुताबिक या बिल्कुल कम इस्तेमाल करना होगा।</p>
<p><strong>खेती पर पड़ रहा दुष्प्रभाव</strong><br />कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार मिट्टी के क्षारीय होने से पैदावार घट रही है। यूरिया व डीएपी जैसे उर्वरक के अधिकाधिक इस्तेमाल से प्राकृतिक तत्व मिट्टी से लोप हो रहे हैं। जिससे मिट्टी के कणों में पानी संग्रह की क्षमता कम हो रही है। परिणामस्वरूप अधिक सिंचाई की आवश्यकता होती है। यूरिया का बीजों के साथ सीधे संपर्क होने से अंकुरण दर में भी कमी आती है। रासायनिक उर्वरकों के असमान इस्तेमाल से दलहन फसलों की ग्रंथी निर्माण व वायुमंडलीय नाइट्रोजन स्थिरीकरण पर भी विपरीत प्रभाव पड़ रहा है। यूरिया के इस्तेमाल से ग्रीन हाउस गैस, नाइट्रस आॅक्साइड तथा वायुमंडल में उपस्थित ओजोन परत को भी नुकसान पहुंचा रहा है। कीटनाशकों ने किसानों के मित्र जीव कहे जाने वाले कीटों को भी गायब कर दिया। ये जीव जैविक क्रियाओं से मिट्टी को उर्वरा बनाए रखने में मददगार होते हैं।</p>
<p><strong>मानव और जीव-जंतुओं पर भी खतरा</strong><br />कृषि विशेषज्ञों ने बताया कि रसायनों के बढ़ते प्रयोग से प्रत्यक्ष व अप्रत्यक्ष रूप से न केवल मानव जीवन प्रभावित हुआ है, बल्कि पशु-पक्षी और जलीय जीव-जंतु भी संकट के दौर से गुजर रहे हैं। जो फल-सब्जियां सेहत का खजाना मानी जाती हैं, आज उनमें जहर घुल गया है। केमिकल के बढ़ते प्रयोग से लोग बीमारियों की चपेट में आ रहे हैं। पक्षियों की कई प्रजातियां विलुप्त होने की कगार पर पहुंच गई हैं। एक अध्ययन के मुताबिक कीटनाशक के अत्यधिक प्रयोग से कैंसर का खतरा बढ़ गया है। यहां तक कि हमारे हार्मोन, प्रोटीन सेल व डीएनए को क्षति पहुंच रही है। जिससे असमय थकान, संक्रमण, बीमारियों का खतरा, उम्र से पहले बुढ़ापे जैसी समस्याएं भी बढ़ गई हैं।</p>
<p><strong>एक दर्जन पैरामीटर पर होती है जांच</strong><br />मृदा परीक्षण प्रयोगशाला में एक दर्जन पैरामीटर पर मिट्टी का परीक्षण किया जाता है। परीक्षण में पीएच, ईसी, जैविक कार्बन, नाइट्रोजन, फॉस्फोरस, पोटाश, सल्फर, जिंक, बोरान, आयरन, मैगनीज तथा कॉपर को मानकों पर कसा जाता है। मृदा में कुल 17 प्रकार के पोषक तत्व पाए जाते हैं। इनमें 9 मुख्य पोषक तत्व तथा 8 सूक्ष्म पोषक तत्व पाए जाते हैं। इन पोषक तत्वों में से यदि एक की भी मृदा में कमी होती है तो फसल उत्पादन में विपरित प्रभाव पड़ता है। </p>
<p>रासायनिक उर्वरकों में अगर कमी नहीं लाई गई तो मानव जीवन पर इसका काफी दुष्प्रभाव पड़ेगा। रासायनिक उर्वरकों को कम करने के लिए हर फसल से पूर्व मिट्टी की जांच अहम है। इसके लिए किसान मृदा की जांच करवाकर ही फसलों में उर्वरक दें। परम्परागत खेती में शुरूआत में उत्पादन किसानों को कम लगेगा, लेकिन धीरे-धीरे मृदा की सेहत सुधरने पर उत्पादन अच्छा होने लग जाएगा और इंसानों सहित जीव-जंतुओं को भी नुकसान नहीं होगा।<br /><strong>-खेमराज शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 Jan 2023 15:36:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>खेत में ले जाकर नाबालिग से किया सामूहिक दुष्कर्म </title>
                                    <description><![CDATA[थाना इलाके के एक गांव में बीती रात दो युवकों द्वारा पड़ोसी नाबालिग बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। परिजनों ने नामजद दोनों युवकों के खिलाफ दुष्कर्म का आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया है। पुलिस के समक्ष दर्ज कराए गए मुकदमे में नाबालिग ने बताया कि 20 जून की रात्रि को घर के बाहर सो रही थी। रात करीब 1 बजे पड़ोस के रहने वाले दो युवक उसके पास पहुंच गए। दोनों आरोपियों ने नाबालिक के मुंह को बंद कर दूर खेतों में ले गए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/dholpur/gang-raped-a-minor-by-taking-him-to-the-fields/article-12754"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/rrrr.gif" alt=""></a><br /><p><strong>सैंपऊ।</strong> थाना इलाके के एक गांव में बीती रात दो युवकों द्वारा पड़ोसी नाबालिग बालिका के साथ सामूहिक दुष्कर्म का मामला सामने आया है। परिजनों ने नामजद दोनों युवकों के खिलाफ दुष्कर्म का आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया है। पुलिस के समक्ष दर्ज कराए गए मुकदमे में नाबालिग ने बताया कि 20 जून की रात्रि को घर के बाहर सो रही थी। रात करीब 1 बजे पड़ोस के रहने वाले दो युवक उसके पास पहुंच गए। दोनों आरोपियों ने नाबालिक के मुंह को बंद कर दूर खेतों में ले गए। रिपोर्ट के मुताबिक खेत में ले जाकर दोनों आरोपियों ने बारी-बारी से हैवानियत की घटना को अंजाम दिया। सुबह 4 बजे परिजनों के पास एक मोबाइल नंबर से सूचना मिली थी कि आपकी बेटी बेसुध अवस्था में खेतों में पड़ी है।सूचना को सुनकर परिजनों के होश उड़ गए। परिजनों ने मौके पर देखा तो नाबालिग बालिका खेतों में पड़ी हुई थी।</p>
<p>नाबालिग बालिका ने आप बीती घटना से परिजनों को अवगत कराया। परिजनों ने मंगलवार को बालिका को साथ लेकर दोनों नामजद आरोपियों के खिलाफ दुष्कर्म का आपराधिक प्रकरण दर्ज कराया है। पुलिस ने पॉक्सो एक्ट में मामला दर्ज कर लिया। हैड कांस्टेबल एवं एचएम रामनाथ मीणा ने बताया कि प्रकरण की जांच सीओ विजय कुमार सिंह द्वारा की जा रही है। नाबालिग बालिका का मेडिकल कराकर पर्चा बयान लिए जाएंगे। आरोपियों के खिलाफ शीघ्र कार्रवाई की जाएगी।<br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>धौलपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 22 Jun 2022 12:44:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>खेतों में लगी आग, ईंधन सहित कृषि उपकरण जले</title>
                                    <description><![CDATA[उपखण्ड की ग्राम पंचायत बांसेडा के गांव रघुनाथपुरा के खेतों में अज्ञात कारणों से आग लगने से र्इंधन, पाइप सहित कृषि उपकरण जलकर राख हो गए। सूचना पर मौके पर दमकल पहुंचकर आग पर काबू पाया गया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/fire-in-the-fields-burning-of-agricultural-equipment-including-fuel/article-12099"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/ww6.jpg" alt=""></a><br /><p><strong> टोडारायसिंह।</strong> उपखण्ड की ग्राम पंचायत बांसेडा के गांव रघुनाथपुरा के खेतों में अज्ञात कारणों से आग लगने से ईंधन, पाइप सहित कृषि उपकरण जलकर राख हो गए। सूचना पर मौके पर दमकल पहुंचकर आग पर काबू पाया गया। दमकलकर्मी राजेंद्र मीणा ने बताया कि दोपहर बाद सूचना मिली कि पंचायत बांसेडा के गांव रघुनाथपुरा के देवलाल, छोटूलाल तथा रामकिशन गुर्जर के खेतों में अज्ञात कारणों से आग लगी है।</p>
<p>सूचना पर मौके पर पहुंचकर आग बुझाने के प्रयास किए गए, लेकिन तेज हवाओं के चलते आग ने विकराल रूप धारण कर लिया, काफी मशक्कत के बाद आग पर काबू पाया गया। दमकलकर्मी ने बताया कि आग में र्इंधन, हस्ती पाइप, कृषि उपकरण सहित अन्य सामान जलकर राख हो गए। </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 14 Jun 2022 12:30:25 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>10 साल की मासूम को उठा ले गया जंगल में, किया दुष्कर्म, जंगल और खेतों की खाक छान रही पुलिस</title>
                                    <description><![CDATA[ढाई वर्षीय बालिका से दुष्कर्म का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि सोमवार को पारसोली थाना क्षेत्र में वर्षीय बालिका से दरिंदगी की घटना सामने आ गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/chittorgarh/10-year-old-innocent-was-taken-away-in-the-forest--raped--police-scouring-the-forest-and-fields/article-9899"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/16-udi-bassi.jpg" alt=""></a><br /><p>चित्तौड़गढ़/बस्सी। ढाई वर्षीय बालिका से दुष्कर्म का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि सोमवार को पारसोली थाना क्षेत्र में वर्षीय बालिका से दरिंदगी की घटना सामने आ गई।</p>
<p><br />सोमवार मध्यरात्रिा में क्षेत्र के एक गांव में विवाह समारोह की बिंदोली में हिस्सा लेने आया युवक शंभूलाल पुत्र लादूलाल भील ने 10 वर्षीय मासूम को उठा ले गए और पास के खेतों में ले जाकर दुष्कर्म किया और उसे वापस गांव ले आए। बालिका ने जब परिजनों को आपबीती सुनाई तो हंगामा मच गया। भनक लगते ही दुष्कर्मी वहां से फरार हो गया। सूचना पर आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं। पुलिस आसपास के जंगल और खेतों की खाक छान रही है। बताया गया कि आरोपी पांडोली का रहने वाला है और वारदात के समय वह नशे की हालत में था। उसके पास मोबाइल फोन भी नहीं है जिससे उसे ढूंढने में दिक्कत हो रही है।<br /><br />गांव वालों ने की आरोपी की धुनाई<br />वारदात के बाद जब मासूम ने पिता और अन्य लोगों को आपबीती बताई तो देर रात वहां मौजूद लोगों ने दुष्कर्मी की पिटाई कर दी। मौका देखकर दुष्कर्मी वहां से भाग छूटा। परिवार के लोग बालिका को चिकित्सालय लेकर गए और बाद में सुबह थाने लेकर आए। पुलिस ने त्वरित कार्रवाई करते हुए मामला दर्ज कर लिया है और दुष्कर्मी की तलाश प्रारंभ कर दी है।<br /><br />मासूम को काटा, मारपीट कर दांत तोड़ा<br />आरोपी युवक पांचवीं  कक्षा में अध्ययनरत इस बालिका को बिन्दोली के बाद पहले उसका घर और बाद में नदी का रास्ता दिखाने के बहाने गांव से बाहर ले गया। बाद में उसे खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। उसने बालिका के चेहरे के आस पास काटने के साथ मारपीट भी की जिससे बालिका का एक दांत टूट गया, वहीं उसके दाहिने कंधे पर चोट आई। पुलिस ने परिजनों की रिपोर्ट पर नामजद मामला दर्ज कर लिया है। उप पुलिस अधीक्षक रतनाराम देवासी, एसएचओ लोकपाल सिंह के नेतृत्व में पारसोली, मोतीपुरा, बड़ाखेड़ा, बरून्दनी चौराहा सहित आस पास की पुलिस उसे ढूंढ रही है। <br /><br />मामा के साथ आया था शादी में<br />जांच-पड़ताल में सामने आया की कि आरोपी उसके मामा के साथ शादी समारोह में आया था। पुलिस द्वारा उन स्थानों  के पास आदि स्थानों पर अलग-अलग टीम गठित कर अभियुक्त की तलाश तलाश की जा रही है। पुलिस अधीक्षक प्रीति जैन ने मामले को गंभीरता से लेते हुए आरोपी को शीघ्र गिरफ्तार करने के निर्देश दिए है। पीड़िता का सोमवार को पारसोली सीएचसी पर प्राथमिक उपचार करवाया गया। बाद में बेगूं थानाधिकारी रतन सिंह कितावत ने सीएचसी पहुंच कर पीड़िता का मेडिकल करवाया। <br /><br /><br /><br /></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>चित्तौड़गढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 12:14:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[udaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>10 साल की मासूम से खेतों में दुष्कर्म</title>
                                    <description><![CDATA[ढाई वर्षीय बालिका से दुष्कर्म का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि सोमवार को पारसोली थाना क्षेत्र में 10 वर्षीय बालिका से दरिंदगी की घटना सामने आ गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/chittorgarh/--chittorgarh---bassi-10-year-old-girl-raped-in-the-fields/article-9919"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/repa.jpg" alt=""></a><br /><p>चित्तौड़गढ़/बस्सी। ढाई वर्षीय बालिका से दुष्कर्म का मामला अभी ठंडा भी नहीं पड़ा कि सोमवार को पारसोली थाना क्षेत्र में 10 वर्षीय बालिका से दरिंदगी की घटना सामने आ गई।</p>
<p>सोमवार रात को क्षेत्र के एक गांव में विवाह समारोह की बिंदोली में हिस्सा लेने आया युवक शंभूलाल पुत्र लादूलाल भील 10 वर्षीय मासूम को उठा ले गया और पास के खेतों में ले जाकर दुष्कर्म किया और उसे वापस गांव ले आया। बालिका ने जब परिजनों को आपबीती सुनाई तो हंगामा मच गया। वहां मौजूद लोगों ने दुष्कर्मी की पिटाई कर दी। मौका देखकर दुष्कर्मी वहां से भाग छूटा। आरोपी को पकड़ने के लिए पुलिस ने प्रयास प्रारंभ कर दिए हैं। आरोपी पांडोली का रहने वाला है और वारदात के समय वह नशे की हालत में था। उसके पास मोबाइल फोन भी नहीं है जिससे उसे ढूंढने में दिक्कत हो रही है।<br /><br /><strong>मासूम को काटा, मारपीट कर दांत तोड़ा</strong><br />आरोपी युवक पांचवीं कक्षा में अध्ययनरत इस बालिका को बिन्दोली के बाद पहले उसका घर और बाद में नदी का रास्ता दिखाने के बहाने गांव से बाहर ले गया। बाद में उसे खेत में ले जाकर दुष्कर्म किया। उसने बालिका के चेहरे के आस पास काटने के साथ मारपीट भी की जिससे बालिका का एक दांत टूट गया, वहीं उसके दाहिने कंधे पर चोट आई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>चित्तौड़गढ़</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 12:01:33 +0530</pubDate>
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