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                <title>तेलंगाना में 'डिजिटल कैबिनेट' शुरू: सचिवालय में हुई अनौपचारिक कैबिनेट बैठक, कई अहम मुद्दों पर चर्चा</title>
                                    <description><![CDATA[तेलंगाना सरकार ने पारदर्शिता और पर्यावरण संरक्षण की दिशा में ऐतिहासिक कदम उठाते हुए 'डिजिटल कैबिनेट' पहल शुरू की है। मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में सचिवालय में पहली पूरी तरह पेपररहित बैठक हुई। मंत्रियों को विशेष टैबलेट दिए गए, जिससे एजेंडा और सभी सरकारी दस्तावेज अब डिजिटल रूप में उपलब्ध होंगे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/digital-cabinet-started-in-telangana-informal-cabinet-meeting-held-in/article-157391"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/hydrabad.png" alt=""></a><br /><p>हैदराबाद। तेलंगाना के मुख्यमंत्री ए. रेवंत रेड्डी की अध्यक्षता में गुरुवार को सचिवालय में तेलंगाना कैबिनेट की एक अनौपचारिक बैठक शुरू हुई। इस बैठक के साथ ही 'तेलंगाना डिजिटल कैबिनेट' पहल की शुरुआत हुई, जो पेपररहित शासन की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है। राज्य सरकार ने कैबिनेट की बैठकें पूरी तरह से पेपररहित तरीके से आयोजित करने का निर्णय लिया है। एक आधिकारिक बयान के अनुसार, कैबिनेट की चर्चा से पहले मुख्यमंत्री की अध्यक्षता में मंत्रियों की एक विशेष बैठक में इस फैसले को मंज़ूरी दी गयी।</p>
<p>इस पहल के अंतर्गत, आईटी एवं उद्योग मंत्री डी. श्रीधर बाबू ने मुख्यमंत्री, उपमुख्यमंत्री और सभी कैबिनेट मंत्रियों को खास तौर पर तैयार किए गए टैबलेट बांटे। इन टैबलेट का उपयोग कैबिनेट का एजेंडा, नोट्स और दूसरे सरकारी दस्तावेज़ डिजिटल रूप से उपलब्ध कराने के लिए किया जाएगा जिससे कागजी फाइलों की ज़रूरत नहीं पड़ेगी। मुख्यमंत्री रेवंत रेड्डी ने बैठक शुरू होने से पहले डिजिटल कैबिनेट प्रणाली के कामकाज की व्यक्तिगत रूप से समीक्षा की और इसकी कार्यप्रणाली की विशेषताओं का जायजा लिया।</p>
<p>अधिकारियों ने कहा कि तेलंगाना डिजिटल कैबिनेट पहल का उद्देश्य कुशल, पारदर्शी एवं पर्यावरण के अनुकूल कामकाज को बढ़ावा देना है और राज्य को पूर्ण डिजिटल प्रशासनिक व्यवस्था की ओर तेज़ी से लेकर जाना है। बैठक के लिए कैबिनेट का एजेंडा मंत्रियों को टैबलेट के माध्यम से उपलब्ध कराया गया, जिससे वे आसानी से सरकारी दस्तावेज़ देख सके और चर्चा कर सके।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 18 Jun 2026 18:45:13 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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                <title>RSS-BJP का देश को हिन्दू-मुस्लिम और धर्मों के बीच बांटने का एजेंडा: गहलोत</title>
                                    <description><![CDATA[गहलोत ने भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के लाउडस्पीकर से जुड़े सवाल पर आए बयान पर यह प्रतिक्रिया दी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/--jaipur-news--rrs-bjp-agenda-to-divide-country-between-hindu-muslim-and-religions--gehlot/article-8971"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/ashok-gehlot-vs-satish-poonia.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने एक बार फिर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ और बीजेपी पर निशाना साधते हुए कहा है कि आरएसएस और बीजेपी का एकमात्र एजेंडा देश को हिंदू-मुस्लिम और धर्मों के बीच बांटना है। गहलोत रविवार को एक कार्यक्रम के दौरान मीडिया से बातचीत कर रहे थे। गहलोत ने भोपाल में भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सतीश पूनिया के लाउडस्पीकर से जुड़े सवाल पर आए बयान पर यह प्रतिक्रिया दी।</p>
<p><br /> गहलोत ने कहा कि अभी तो यह शुरुआत है, आने वाले समय में यह लोग मुझ पर और सरकार पर और बड़े अटैक करेंगे। आज पूरे देश में हिंसा और तनाव का माहौल है। जब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने दिल्ली में बैठक बुलाई, तब उन्होंने सांसद किरोड़ी मीणा को लेकर कहा कि बाकी सांसद तो कुछ नहीं कर रहे, जो किरोड़ी मीणा करता है, वह तुम सब करो,मतलब धमाल पट्टी करो, हिंसा होगी, अशांति रहेगी तो काम रुकेगा, सरकार का और विकास भी इससे रुकेगी। गहलोत ने आरोप लगाया कि इनकी सोच विकास को ठप करना है।<br /><br /><strong>करौली घटना में निर्दोष फंसे तो छोड़ देंगे:</strong><br />गहलोत ने कहा कि करौली में हुई घटना को हमने तो रोक दिया। रामनवमी पर सब धर्मों ने मिलकर जुलूस भी निकाले, लेकिन करौली में हुआ प्रयोग रामनवमी पर 7 राज्यों में हुआ और वहां दंगे भड़क गए। जब दंगा होता है और जो पकड़े जाते हैं, उनमें गलती करने वाले भी होते हैं और कई बार निर्दोष भी फंस जाते हैं। करौली घटना में हो सकता है निर्दोष लोग फंस गए, तो उन्हें छोड़ देंगे, लेकिन आप निर्दोषों पर बुलडोजर कैसे चला रहे हो। मध्य प्रदेश और उत्तर प्रदेश में लोगों के घर तोड़े जा रहे हैं, क्योंकि इनका एजेंडा बहुत खतरनाक है, जिसे जनता और युवा पीढ़ी को समझना होगा। गांधी जी ने कहा था कि मैं हिंदू हूं मुझे गर्व है, हम सब यही बात कहते हैं कि हमें हिंदू होने पर गर्व है, लेकिन दूसरे धर्मों का सम्मान भी करना चाहिए।</p>
<p><br /><strong> मन्दिर गिराते हैं और मुद्दा भी बनाते हैं:</strong><br />गहलोत ने अलवर के राजगढ़ में तोड़े गए मंदिर के मामले में कहा कि राजगढ़ नगर पालिका में 35 में से 34 पार्षद भाजपा के हैं और भाजपा के बोर्ड में ही पालिका की बैठक में यह प्रस्ताव पारित किया गया। मंदिर भी गिराते हैं और उसे मुद्दा भी बनाते हैं, क्योंकि इनका इरादा ध्रुवीकरण करने का है और कांग्रेस को बदनाम करने का है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 01 May 2022 16:38:54 +0530</pubDate>
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                <title>सतरंगी सियासत</title>
                                    <description><![CDATA[जानें इंडिया गेट में क्या है खास]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/%E0%A4%B8%E0%A4%A4%E0%A4%B0%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%B8%E0%A4%A4/article-3360"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/qutub-minar,delhi,india1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>एजेंडा विकास का...</strong></p>
<p>मोदी सरकार के कार्यकाल में जनसंघ से चले आ रहे भावनात्मक मुद्दे लगभग पूरे हो चुके। बात जम्मू-कश्मीर के अनुच्छेद -370 की हो या राम मंदिर निर्माण की। अब तो काशी विश्वनाथ कोरिडोर का उद्घाटन भी भाजपा शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियो की मौजूदगी में हो चुका। ऐसे में विकास पर फोकस करते हुए भाजपा अब ओबीसी की गोलबंदी कर रही। इसी पर भाजपा नेतृत्व भविष्य में राजनीतिक दांव खेलने की तैयारी में। सो, विपक्ष के समीकरण गड़बड़ाना स्वाभाविक। उसकी परेशानी भी यही। जब ओबीसी आरक्षण विधेयक लाया गया। तो उसे सरकार के साथ आना मजबूरी हो गया। विपक्ष को तमाम हंगामें, विरोध के बीच सदन में रहकर समर्थन करना पड़ा। वैसे ही, जैसे सवर्ण आरक्षण विधेयक पर। कांग्रेस अल्पसंख्यक, दलित, ईसाई वोट को ध्यान में रखकर दशकों तक राजनीति करती रही। लेकिन भाजपा का फोकस अब ओबीसी पर। क्योंकि इसके वोटरों की तादात आधी से ज्यादा। और लगभग हर दल की इन पर गहरी नजर। लेकिन भाजपा इस पर काम भी आगे बढ़ा चुकी।</p>
<p><strong><br />चतुरसुजान पवार!</strong><br />एनसीपी के मराठा क्षत्रप शरद पवार यूं ही दशकों से राजनीति में नहीं बने हुए। वह महाराष्टÑ ही नहीं। देश की राजनीति में भी मजबूत स्तंभ और मंजे हुए खिलाड़ी। अब एनसीपी कह रही। कांग्रेस से ही नहीं। न ही टीएमसी की ममता बनर्जी। शरद पवार 2024 में पीएम पद के उम्मीदवार लायक। असल में, ममता बनर्जी ने दावा कर दिया कि कोई संप्रग नहीं। कांग्रेस के बिना भी विपक्षी मोर्चा संभव। वहीं, शिवसेना ने कहा, बिना कांग्रेस, भाजपा से लड़ना आसान नहीं। जबकि पवार पहले शिवसेना और ममता दीदी को साथ लेकर आगे बढ़ते रहे। अब खद ही अपना नाम आगे कर रहे। उन्हें आजकल केन्द्र सरकार से कुछ ज्यादा ही परेशानी। सहकारिता के मामलों में भी और राजनीतिक भी। ऐसे में बंगाल में ममता को झटका और केन्द्रीय स्तर पर कांग्रेस को। यानी, बंगाल में ममता अटकेंगी और देश में कांग्रेस खद अपने ही समविचारी दलों से ही उलझेगी। काम आसान होगा मोदी-शाह की जोड़ी का। हां, पवार की आयु जरुर रोड़ा।</p>
<p><br /><strong>एक और फैसला ...</strong><br />मोदी सरकार ने एक और बड़ा फैसला कर डाला। चुनाव सुधार की प्रक्रिया को आगे बढ़ाते हुए अब आधार कार्ड के साथ मतदाता पहचान पत्र भी जुड़ेगा। फिलहाल यह स्वेच्छिक रखा गया। लेकिन देर सबेर वैसे ही लागू होगा। जैसे बैंक खाते, पैन नंबर, मोबाइल समेत कई महत्वपूर्ण डाक्यूमेंट को आधार नंबर से जोड़ा गया। हालांकि यह कदम चुनाव आयोग की सिफारिशों के आधार पर उठाया गया। लेकिन बात इच्छा शक्ति की भी। मतलब भविष्य में फर्जी वोटिंग पर काफी हद तक रोक लगेगी। साथ में, एक वोटर का एक से ज्यादा स्थानों पर नामांकन कराने की प्रवृत्ति भी रूकेगी। सरकार तो ऑनलाइन वोटिंग की ओर भी आगे बढ़ रही। क्योंकि बड़ी संख्या में मतदाता मतदान केन्द्र तक किसी न किसी कारण पहुंच ही नहीं पाते। जिसका खामियाजा सभी को भुगतना पड़ता है। मतलब, लोग भविष्य में घर बैठे ही वोट डाल सकेंगे। पीएम मोदी पहले से ही ‘वन नेशन, वन इलेक्शन’ का नारा दे चुके। मानकर चलिए, इसके दूगामी परिणाम होंगे।</p>
<p><br /><strong>महज संयोग!</strong><br />अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव में यूपी पर देशभर की नजरें। लेकिन पंजाब भी अच्छा खासा चर्चा में। क्योंकि एक तो, कैप्टन अमरिन्दर सिंह कांग्रेस से बाहर आ गए। और दूसरा, दशकों से चला आ रहा अकाली दल एवं भाजपा का गठबंधन भी टूट गया। लेकिन पंजाब के रण में एक और दिलचसप तथ्य। राज्य में आजकल राजस्थान के दो नेताओं को चुनाव प्रभारी जैसी महत्वपूर्ण जिम्मेदारी। एक, हरीश चौधरी गहलोत सरकार में मंत्री रहे। दूसरे, गजेन्द्र सिंह शेखावत। जो मोदी सरकार में काबिना मंत्री। हरीश चौधरी जहां कैप्टन अमरिन्दर सिंह की बगावत से बावस्ता। जबकि शेखावत वह नेता। जिनके कंधों पर पंजाब में भाजपा की चुनावी जड़ें जमाने की भी जिम्मेदारी। भाजपा पहली बार अकाली दल की छाया से बाहर निकलकर अकेले चुनावी मैदान में उतरेगी। सो, पंजाब में मरुधरा के दो लालों की कड़ी राजनीतिक परीक्षा। जहां शेखावत आलाकमान की पसंद। तो चौधरी की पहचान सीएम गहलोत के शागिर्द के रुप में भी। वैसे वह पिछले चुनाव में भी काम कर चुके।</p>
<p><br /><strong>दर्द-ए-पीके...</strong><br />चुनावी रणनीतिकार प्रशांत कुमार यानी पीके आजकल बदले-बदले से। वह कांग्रेस के प्रति आक्रामक। ममता बनर्जी को ऐसी सलाह दे डाली कि वह कांग्रेस का एक-एक करके कई राज्यों में विकट उड़ा रहीं। जो कांग्रेस के लिए असहजता का सबब बन रहा। असल में, पीके के कांग्रेस में शामिल होने की बात लगभग पक्की थी। लेकिन अचानक पीके को अपना ‘बिजनेस’ याद आ गया। सो, राहुल के सामने शर्त रख दी। कहा, वह उनके एडवाइजर होंगे। इस नाते वह सिर्फ  उन्हें ही रिपोर्ट करेंगे। साथ में, सीडब्ल्यूसी की बैठकों में भी मौजूदगी चाहिए। लेकिन राहुल गांधी ने इसके लिए औपचारिक रूप से पार्टी में शामिल होने की शर्त रख दी। लेकिन यह पीके को सूट नहीं किया। क्योंकि यदि वह कांग्रेस का हिस्सा हो जाते। तो देशभर में अन्य दलों या क्षेत्रीय नेताओं के साथ काम नहीं कर पाते। इसीलिए पीके बात बिगड़ने पर लगातार कांग्रेस के खिलाफ  मुखर तो हो ही रहे। अब भाजपा और पीएम मोदी की भी तारीफ  में कशीदे गढ़ रहे।</p>
<p><strong><br />एजेंडा ‘डि-रेल’ तो नहीं?</strong><br />यह संसद के शीतकालीन सत्र का अंतिम सप्ताह। लेकिन पहले ही दिन 12 विपक्षी सांसद राज्यसभा से निलंबित किए गए। कहीं सरकार ने सांसदों को निलंबित करवाकर विपक्षी एजेंडे को ‘डि-रेल’ तो नहीं कर दिया? बाद में, लखीमपुर खिरी मामले में एसआईअी की रिपोर्ट आ गई। तो विपक्ष केन्द्रीय मंत्री अजय कुमार मिश्र के इस्तीफे की मांग पर अड़ गया। जबकि भाजपा यह काम फिलहाल नहीं करेगी। यूपी में चुनावी मौके पर भाजपा उन्हें हटाने का जोखिम लेगी। ऐसा लग रहा। क्योंकि कोई भी कदम उठाया गया। तो भाजपा का चुनावी समीकरण गड़बड़ाना संभव। ऐसे में कहीं पूरे सत्र में विपक्ष, सरकार की रणनीति में फंसकर तो नहीं रह गया? सांसद निलंबन प्रकरण के दो दिन बाद विपक्ष को समझ आया कि इससे तो बाकी मुद्दों पर तो सरकार घेरने का तो अवसर ही नहीं मिला। जबकि किसान, महगांई, बेरोजगारी, अर्थव्यवस्था, कोरोना प्रबंधन जैसे मुद्दों पर सरकार से सदन में सवाल करने थे। कहीं विपक्ष को सरकार ने भटका तो नहीं दिया?    <br /><strong>        श्रीनाथ मेहरा<br />(ये लेखक के अपने विचार हैं)</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 20 Dec 2021 12:07:59 +0530</pubDate>
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