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                <title>मांडूहेड़ा गांव के राजकीय प्राथमिक विद्यालय का मामला : भवन के अभाव में छोटे टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर नौनिहाल</title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ जर्जर भवन के बाद नहीं बना नया स्कूल, घोषणाओं के बावजूद निर्माण अधूरा; ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार
]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/case-of-the-government-primary-school-in-manduheda-village--young-children-forced-to-study-under-a-small-tin-shed-due-to-lack-of-a-building/article-147086"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/manduhera-gaanv-k-rajakey-prathamik-vidyalay-ka-mamala-bhavan-k-abhav-mein-chhote-teen-shed-k--niche-padhane-ko-majaboor-naunihal...kanwas,-kota-news-19.03.2026.jpg.jpeg" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास उपखंड क्षेत्र में शिक्षा व्यवस्था की जमीनी हकीकत सामने आई है, जहां ग्राम पंचायत मामोर के गांव मांडूहेड़ा में राजकीय प्राथमिक विद्यालय भवन के अभाव में बच्चे टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। जानकारी अनुसार कक्षा 1 से 5 तक के विद्यार्थियों को खुले आसमान के नीचे या ग्रामीणों द्वारा चंदे से बनाए गए छोटे टीन शेड में पढ़ाई करनी पड़ रही है। गर्मी, सर्दी और बारिश के बीच पढ़ाई करने से बच्चों की शिक्षा प्रभावित हो रही है। आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता रामेश्वर मामोर ने बताया कि सांगोद पंचायत समिति क्षेत्र के इस गांव में पुराना स्कूल भवन जर्जर होने के कारण पहले ही गिर चुका है, लेकिन अब तक नए भवन का निर्माण शुरू नहीं हो पाया है। उन्होंने प्रशासन से शीघ्र निर्माण कार्य शुरू कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>जनप्रतिनिधियों की घोषणाएं भी अधूरी </strong></p>
<p>ग्रामीणों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों की घोषणाएं भी अधूरी साबित हो रही हैं। ओम बिरला और ऊर्जा मंत्री हीरालाल नागर द्वारा विद्यालय भवन के लिए 20 लाख रुपए देने की घोषणा की गई थी, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्य नहीं हुआ। गौरतलब है कि प्रदेश के शिक्षा मंत्री मदन दिलावर भी इसी जिले से हैं, इसके बावजूद समस्या का समाधान नहीं होना सवाल खड़े करता है।</p>
<p><strong>ग्रामीणों ने प्रशासन से लगाई गुहार </strong></p>
<p>ग्रामीण मुकेश मेघवाल, ओमप्रकाश, छोटूलाल, रामचंद्र नागर, रिंकू एरवाल, दिग्विजय सिंह, भेरूलाल, रामप्रसाद बेरवा और शशिकांत मेघवाल सहित अन्य लोगों ने प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द विद्यालय भवन का निर्माण कराया जाए। गांव के अधिकांश विद्यार्थी दलित समुदाय से हैं। ग्रामीणों का कहना है कि संसाधनों के अभाव में बच्चों का भविष्य प्रभावित हो रहा है, विशेषकर बरसात और तेज गर्मी के दौरान हालात और अधिक गंभीर हो जाते हैं।</p>
<p><strong>- रामेश्वर मामोर, आदिवासी सामाजिक कार्यकर्ता</strong></p>
<p>नए भवन के लिए एडीपीसी को प्रस्ताव भेजा जा चुका है। स्वीकृति मिलते ही आगे की प्रक्रिया शुरू की जाएगी।</p>
<p><strong>- आनंद स्वरूप बड़ोलिया, कार्यवाहक सीबीईओ, शिक्षा विभाग</strong><br /> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 17:29:04 +0530</pubDate>
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                <title>साल भर की पढ़ाई ही दिलाएगी सफलता, घबराएं नहीं</title>
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                        <![CDATA[एग्जाम टिप्स: टीचर बोले पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीक एआई का भी लिया जाता सहारा ।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/only-year-long-study-will-lead-to-success--don-t-panic/article-142588"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(12200-x-600-px)-(9).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। बोर्ड परीक्षाओं की पदचाप के बीच विद्यार्थियों में बढ़ते तनाव को देखते हुए शिक्षा विशेषज्ञों ने सफलता के मूल मंत्र साझा किए हैं।वहीं दैनिक नवज्योति की खास रिपोर्ट में पढ़िए शिक्षकों ने कहा कि बोर्ड परीक्षा कोई हौवा नहीं है; इसमें वहीं सवाल पूछे जाते हैं। जो छात्रों ने वर्षभर अपनी कक्षाओं में शिक्षकों से पढ़े हैं। उन्होंने जोर दिया कि नई अध्ययन सामग्री के पीछे भागने के बजाय छात्र अपने शिक्षकों द्वारा पढ़ाए गए पाठ्यक्रम और विषयवस्तु पर ही पूरा भरोसा रखें और उसी का गहन अभ्यास करें। समय प्रबंधन और छोटे लक्ष्यों से हासिल होगी जीत परीक्षा के दौरान समय का सही नियोजन ही सफलता की कुंजी है। वहीं टीचरों ने बताया कि समय-समय पर डिजिटल क्लास रूम में बच्चों को बैठकर आधुनिक तकनीकी से रूबरू करवाया जाता व पढ़ाई करवाई जाती।</p>
<p><strong>लिखकर याद करने का फॉमूर्ला </strong><br />अक्सर छात्र कठिन विषयों को देखकर तनाव में आ जाते हैं। इसके समाधान के लिए कठिन विषय वस्तुओं का बार-बार दोहरान करना आवश्यक है। जो हिस्से याद करने में कठिन लगें, उन्हें छोटे-छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखकर याद करें। हाथ से लिखे नोट्स मस्तिष्क में लंबे समय तक स्थायी रहते हैं।</p>
<p><strong>संवाद और आत्मविश्वास है जरूरी </strong><br />पढ़ाई के पाठ्यक्रम को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटें और कठिन विषयों को पहले निपटाएं। पढ़ाई के बीच 5-10 मिनट का ब्रेक लें। पौष्टिक भोजन करें, पर्याप्त पानी पीएं। परीक्षा की रात अच्छी नींद लें, क्योंकि यह एकाग्रता और सोचने की क्षमता को बेहतर बनाती है। खुद पर विश्वास रखें और अपनी तैयारी पर ध्यान केंद्रित करें। परिणाम के बारे में चिंता न करें। यदि तनाव हावी हो रहा है,तो दोस्तों,परिवार या शिक्षकों से बात करें। वहीं पढ़ाई के दौरान आधुनिक तकनीकों का भी सहारा लिया जाता हैं।<br /><strong>-सुनीता मेहरा, प्रिंसिपल महा. गांधी गवर्नमेंट स्कूल, महावीर नगर फर्स्ट कोटा </strong></p>
<p><strong> वर्षभर जो पढ़ा उसमें से ही प्रश्न पूछे जाते</strong><br />बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने के दौरान ये याद रखें कि जो आपने वर्षभर पढ़ा उस में से ही प्रश्न आते। अत: जो शिक्षकों ने पढ़ाया है उन्ही विषयवस्तुओं को आप अच्छे से पढ़ें। परीक्षा में कोई भी प्रश्न अनुत्तरित ना छोड़े। परीक्षा के दौरान समय प्रबंधन अतिमहत्वपूर्ण है। प्रतिदिन विषयवार छोटे-छोटे उद्देश्य बनायें, उनको प्राप्त करें। जिससे आपका विषय पूर्ण रूप से तैयार हो जाएगा।कठिन विषयवस्तुओं का दोहरान करें। जो याद नहीं हो पा रहा उसे छोटे छोटे नोट्स के रूप में हाथ से लिखें। मोबाइल और सोशल मीडिया से दूरी बनाकर रखें।वहीं समय-समय पर आधुनिक तकनीक जिसमे एआई समेत अन्य तकनीकों का सहारा लिया जाता।<br /><strong>- रूपेश गुप्ता, विज्ञान विषय, महा. गांधी राज. विद्या.,मल्टीपर्पज, गुमानपुरा</strong></p>
<p><strong> संस्कृत व्याकरण का जुलाई से ही शुरू हो जाता है अभ्यास </strong><br />बोर्ड परीक्षा के नाम से छात्र-छात्राओं में भय व्याप्त हो जाता है। हम छात्रों को सत्र के प्रारंभ से ही बोर्ड पाठ्यक्रम के अनुसार अध्यापन और प्रश्नोत्तर की तैयारी करवाते हैं। तीनों परख व प्री बोर्ड के प्रश्नों की संभावित बोर्ड प्रश्नों को आधार बनाकर प्रश्न पत्र तैयार करते हैं। संस्कृत विषय में व्याकरण महत्वपूर्ण है।जुलाई माह से ही पिछली कक्षाओं के व्याकरण को दोहराते हुए बोर्ड के निर्धारित पाठ्यक्रम पर ध्यान केंद्रित कर अधिक से अधिक बार पाठ्यक्रम को दोहराने का प्रयास करवाया जाता हैं। जिससे विद्यार्थी आत्मविश्वास से पूर्ण, विद्यार्थी तनाव मुक्त होकर परीक्षा देते हैं।<br /><strong>- नरेन्द्र कन्सूरिया, व्याख्याता संस्कृत, राउमावि, शिवपुरा</strong></p>
<p><strong>चार्ट और क्लास टेस्ट से होती है तैयारी </strong><br />कृषि विज्ञान में बोर्ड परीक्षा में उच्च अंक प्राप्त करने के लिए विषयों का विस्तृत अध्ययन करे। उसके बाद घर में पुन: पढ़कर नोट्स बनाने को कहा जाता हैं। साथ ही समय-समय पर बच्चों के क्लास टेस्ट लिए जाते हैं। कृषि विज्ञान में विभिन्न फसलों जैसे खाद्यान्न फसलों दलहनी फसलों तिलहनी फसलों तथा विभिन्न सब्जियों की खेती की संपूर्ण जानकारी विद्यार्थियों को पढ़ाई के दौरान दी जाती हैं। ताकि विद्यार्थी आसानी से याद कर सकें। वैसे विद्यार्थियों को कृषि विज्ञान विषय दैनिक जीवन की जरूरतों से जोड़कर पढ़ाया व समझाया जाता हैं। समय-समय पर विद्यार्थियों को चार्टस बनाकर विभिन्न जानकारी दी जाती हैं।<br /><strong>- तृप्ति पालीवाल व्याख्याता, कृषि विज्ञान रा.उ.मा.बि, दादाबाड़ी</strong></p>
<p><strong>स्व-चिंतन' से सुधारें अपनी गलतियां</strong><br />विज्ञान वर्ग की में अध्यापिका होने के चलते में ये ही कहूंगी की परीक्षा में बैठने वाले विद्यार्थियों को परीक्षा में अच्छे मार्क्स स्कोर करने के लिये आत्मविश्वास सर्वोपरि है। पूर्व बोर्ड परीक्षा के सॉल्व प्रश्नों को हल करके स्व-चिंतन करते हुए गलतियों को सुधार करने का प्रयास करें। मुख्य विषय वस्तु के शॉर्ट नोट्स का दोहरान मन मे करते रहे। तनाव रहित रहे, पर्याप्त नींद लें। रात को पढ़े गए का सुबह उठ कर दोहरान करे।<br /><strong>-नेहा गुप्ता विज्ञान अध्यापक, कोटा शहर</strong></p>
<p><strong>पूर्व परीक्षा के प्रश्नों को हल करे</strong><br /> स्टूडेंट को ्रपूरे साल ही सिलेबस को छोटे-छोटे हिस्सों में बांटकर पढ़ने की सलाह देते है। परीक्षा नजदीक आने के दौरान ज्यादा से ज्यादा रिवीजन करे। दिमाग को शांत रखे एवं आसपास का माहौल व्यवस्थित रखने की कोशिश करे। पढ़ाई के साथ साथ अपने स्वास्थ्य का भी ध्यान रखें क्योंकि स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क का निवास होता है।<br />पूर्व वर्ष के परीक्षा प्रश्न पत्र हल करे जिससे परीक्षा से पहले स्वयं के आत्मविश्वास में वृद्धि होगी।<br /><strong>- दीपिका चाँदसिन्हा,वरिष्ठ अध्यापक हिन्दी,राजकीय उच्च मा.वि. सकतपुरा</strong></p>
<p><strong>एकाग्रता और स्वयं के नोट्स से मिलेगी सफलता </strong><br />परीक्षा माध्यम से ही विद्यार्थी वर्षभर की मेहनत का फल प्राप्त करना है। सतर्क रहते हुए विषयवस्तु का अध्ययन करना इस समय विद्यार्थियों को सिर्फ अपने अध्ययन पर ही ध्यान केन्द्रित करना है। नियमित निंद्रा लें, और समय का ध्यान रखें।इस समय एकान्त में एवं एकाग्रचित्त होकर अध्ययन करें। स्वयं के बनाये नोट्स पढ़ें। बड़े उत्तरों को याद करने के लिए मुख्य-मुख्य बिन्दु याद रखें। साथ ही परीक्षा के हॉल में समय का भी ध्यान रखें।<br /><strong>- महेश सुमन,वरिष्ठ अध्यापक संस्कृत</strong></p>
<p> </p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 10 Feb 2026 14:55:49 +0530</pubDate>
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                <title>बिल्डिंग जर्जर, डर के साये में बच्चों की पढ़ाई</title>
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                        <![CDATA[स्कूल आने वाले विद्यार्थी डर के साये  में इनके नीचे से ही गुजरते  है जिसे हादसा होने का अंदेशा बना रहता है।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-building-is-dilapidated--children-study-in-the-shadow-of-fear/article-119527"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rt112roer-(3)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के कुन्हाड़ी के नांता में संचालित राजकीय उच्च माध्यमिक विघालय नांता महल के स्कूल भवन को शिक्षा भवन ने जर्जर घोषित कर रखा है साथ ही भवन भी जर्जर अवस्था में पिछले साल ही इसमें राजकीय बालिका उच्च प्राथमिक विघालय इसमें नांता महल में मर्ज जिसे सत्र 2025 -26 में करीब इसमें 600 विद्यार्थी अध्ययन करते है। किंतु अभी तक विद्यालय में करीब 15 बच्चों का एडमिशन हुआ साथ ही बच्चें एडमिशन के लिए आ रहे है। साथ ही हमारे विद्यालय के  अध्यापक स्कूल में एडमिशन बढ़ाने के लिए घर-घर जाकर बच्चों को मोटिवेट कर रहे है। </p>
<p><strong>विघालय की बिल्डिंग जगह-जगह से जर्जर</strong><br />विघालय की बिल्डिंग जगह - जगह से जर्जर हो चुकी नांता में रहने वाले कुछ अभिभावकों ने बताया कि यहां इमारत करीब सौ से ढाई सौ साल पुरानी है। जिसे जगह इमारत के छज्जे बंदरों के कूदने व बारिश के समय बिजली कड़कने से क्षतिग्रस्त हो चुके है। वहीं करीब स्कूल आने वाले विद्यार्थी डर के साये  में इनके नीचे से ही गुजरते  है जिसे हादसा होने का अंदेशा बना रहता है।</p>
<p><strong>बारिश से दीवारों में सीलन </strong><br />बारिश होने से अभी विद्यालय की बिल्डिंग के कक्षा-कक्ष में जगह -जगह से सीलन आ रही है जिसे बदबू आ रही है। </p>
<p><strong>जगह-जगह उगी झाड़ियां </strong><br />बिल्डिंग परिसर में जगह - जगह पर झाड़िया उगी हुई है जिसे बारिश के मौसम विद्यार्थियों को  जहरीले जंतु के कटने का डर रहता है। साथ ही कई बार जहरीले जंतु विद्यालय की बिल्डिंग में आ जाते है जिसे भय का माहौल बना रहता है। </p>
<p><strong>टूटे छज्जों को टीनशेड से करेंगे सुरक्षित</strong><br />प्रधानाचार्य ने बताया कि जहां पर छज्जे टूटे हुए उनके नीचे चद्दर के टीनशेड लगाएं जाएं जिसे कभी छज्जा टूटता भी है तो वहां टीनशेड़ के ऊपर आकर गिरेगा जिसे कोई दुर्घटना नहीं हो सकेगी। साथ ही टूटे छज्जों के स्थान पर विद्यार्थियों को जाने से रूकने के लिए उनके नीचे रस्सी बांध दी गई साथ ही बावडी में पानी भरा होने से उसके आसपास भी तार की जालियां लगा दी गई है। </p>
<p><strong>सीसीटीवी लगाए हुए</strong><br />प्रधानाचार्य नेबताया कि पहले विद्यालय में पीछेकी तरह से दीवार टूटी होने के कारण आएं दिन चोरियां होती थी जिसे कई बार विद्यालय का सामान भी चोरी हो गया। जिसे बचाने के लिए विद्यालय स्टॉफ  के सहयोग से चार कैमरे लगाए है। </p>
<p><strong>विघालय में आर्ट्स संकाय संचालित </strong><br />विद्यालय में अभी केवल आर्टस संकाय चलता है जिसमें जिसमें राजनीति विज्ञान, भूगोल, हिंदी साहित्य संचालित हो रहा है। </p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />भवन तो जर्जर पर बारिश के समय बच्चो को सुरक्षित स्थान पर ही बैठाया जाता है। और छज्जों के नीचे हमनें बेरिकेड्स लगा रखा है। ताकि कोई घटना नहीं हो। <br /><strong>- डॉ. मोहम्मद शरीफ, प्रधानाचार्य </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 05 Jul 2025 16:01:23 +0530</pubDate>
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                <title>खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर, अंधकार में भविष्य </title>
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                        <![CDATA[छात्रों को कभी पेड़ के नीचे तो कभी पास के मंदिर के बरामदे में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/forced-to-study-under-the-open-sky--future-in-darkness/article-106005"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/257rtrer-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>चौमहला। ग्राम पंचायत सुनारी के गांव लूनाखेड़ी में प्राथमिक विद्यालय की बिल्डिंग नहीं होने के कारण स्कूल में पढ़ने वाले छात्र पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ने को मजबूर हैं, स्कूल भवन क्षतिग्रस्त होने के कारण साल 2018 में इसे नकारा घोषित किया गया था, तब से छात्र कभी पेड़ के नीचे तो कभी धूप में बैठ रहे है। राजकीय प्राथमिक विद्यालय लूनाखेड़ी में स्कूल भवन नहीं होने के कारण छात्र-छात्राएं सर्दी गर्मी बरसात में खुले आसमान ने नीचे पढ़ने को मजबूर है। लूनाखेड़ी में स्कूल भवन था जो काफी जर्जर हो गया था सार्वजनिक निर्माण विभाग ने जुलाई 2018 में नकारा घोषित व असुरक्षित घोषित कर दिया था,तब से स्कूल भवन में छात्र छात्राओं को भवन में नहीं बिठाया जा रहा था,तब से छात्रों को कभी पेड़ के नीचे तो कभी पास के मंदिर के बरामदे में बैठाकर पढ़ाई कराई जा रही है। जिला शिक्षा अधिकारी प्रारंभिक द्वारा जनवरी 2024 में स्कूल भवन को जमींदोज करने के आदेश जारी कर दिए थे, लेकिन आज तक नए स्कूल भवन की स्वीकृति जारी नहीं हुई। स्कूल भवन नहीं होने के कारण बरसात में आए दिन बच्चों की छुट्टी कर दी जाती है। सर्दी गर्मी में बच्चो को खुले आसमान के नीचे बिठाया जाता है। स्कूल भवन नहीं होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों के पास के गांव करणपुरा, निपानिया भेज रहे है जिस कारण छात्र संख्या कम होती जा रही है। कई अभिभावक अपने बच्चों को निजी विद्यालयों में भेज रहे है। पूर्व में मंदिर के बरामदे में बच्चों को बिठाया जाता था ,मंदिर में अब नया रंग रोगन होने के बाद मंदिर समिति ने बच्चों को बिठाने से मना कर दिया गया। प्रधानाध्यापक रामप्रसाद मीणा, एसएमसी अध्यक्ष नारायण सिंह ने बताया कि एसएमसी की बैठक में कई बार नए भवन का प्रस्ताव लेकर उच्च अधिकारियों को भिजवाया गया लेकिन समस्या का समाधान नहीं हो पाया। प्रधानाध्यापक ने बताया स्कूल भवन व खेल मैदान के लिए साल 2021 में भूमि का आवंटन हो चुका है। ग्रामीणों ने बताया नई बिल्डिंग के लिए सांसद, विधायक सहित स्थानीय जनप्रतिनिधियों को अवगत कराया गया सभी सुन कर चले जाते है।</p>
<p>स्कूल भवन नहीं होने के कारण बच्चों को खुले आसमान के नीचे बिठाया जा रहा है, कई बार अवगत कराया समाधान नहीं हो रहा।<br /><strong>- नैनसिंह ग्रामीण</strong></p>
<p>बिल्डिंग नहीं होने के कारण अभिभावक अपने बच्चों को पास के गांवों में भेज रहे है, शीघ्र नया स्कूल भवन बनाया जाए। <br /><strong>- नारायण सिंह, पूर्व सरपंच</strong></p>
<p>स्कूल भवन नहीं होने से छात्र छात्राओं की पढ़ाई प्रभावित हो रही है एसएमसी की बैठक में नए भवन के कई बार प्रस्ताव लेकर उच्च अधिकारियों को भिजवाए गए। <br /><strong>- नारायण सिंह, एसएमसी अध्यक्ष </strong></p>
<p>बच्चों को कभी पेड़ के नीचे तो कभी धूप में बिठाया जाता है, जिससे बच्चों को भी परेशानी होती है।<br /><strong>- प्रहलाद सिंह ग्रामीण</strong><br /> <br />गांव में शीघ्र नया स्कूल भवन बनाया जाए। <br /><strong>- कैलाश प्रजापति, ग्रामीण </strong></p>
<p> लूनाखेड़ी स्कूल भवन के प्रस्ताव बनाकर जिला मुख्यालय भिजवा रखे है जिला मुख्यालय से भी प्रस्ताव बनाकर जयपुर भेजे जा चुके है,नई बिल्डिंग शीघ्र स्वीकृत कराने के प्रयास जारी है।<br /><strong>- रमेश चंद वर्मा, मुख्य ब्लॉक शिक्षा अधिकारी डग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Mar 2025 16:46:06 +0530</pubDate>
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                <title> अग्निपथ का अध्ययन करने के लिए पैनल हो गठित, सुप्रीम कोर्ट से आग्रह</title>
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                        <![CDATA[नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता की ओर से एक याचिका दायर कर अग्निपथ योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सेना पर इसके प्रभाव की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/panel-to-be-constituted-to-study-agneepath--urges-supreme-court/article-12555"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/sc2.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। उच्चतम न्यायालय में अधिवक्ता की ओर से एक याचिका दायर कर अग्निपथ योजना और राष्ट्रीय सुरक्षा एवं सेना पर इसके प्रभाव की जांच के लिए शीर्ष अदालत के सेवानिवृत्त न्यायाधीश के नेतृत्व में विशेषज्ञ समिति गठित करने का निर्देश देने की मांग की गई है। <br /><br />अधिवक्ता विशाल तिवारी ने केंद्र सरकार द्वारा शुरू की गई विवादास्पद सैन्य भर्ती योजना 'अग्निपथ' के खिलाफ हिंसक विरोध प्रदर्शनों की जांच के लिए शीर्ष न्यायालय से एक विशेष जांच दल (एसआईटी) बनाने का भी आग्रह किया है। अधिवक्ता ने अग्निपथ योजना के विरोध में रेलवे सहित सार्वजनिक संपत्ति को हुए नुकसान का आकलन करने के लिए उचित निर्देश देने की भी मांग की।</p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 18 Jun 2022 17:08:10 +0530</pubDate>
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                <title>प्रचंड गर्मी में मां बाड़ी केंद्रों पर टीन शेड के नीचे पढ़ने को मजबूर बच्चे </title>
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                        <![CDATA[केलवाड़ा क्षेत्र में संचालित होने वाले मां बाड़ी केंद्रों पर भीषण गर्मी में टीन शेड के नीचे प्रात: 9 से 5 तक रुकने को विद्यार्थी मजबूर है। क्षेत्र के अनेक मां बाड़ी केंद्र पर छत भी नहीं है। खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/children-forced-to-study-under-tin-shed-at-mother-s-bari-centers-in-scorching-heat/article-9040"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/maa-badi-kendra-kelwara-baran.jpg" alt=""></a><br /><p>केलवाड़ा। केलवाड़ा क्षेत्र में संचालित होने वाले मां बाड़ी केंद्रों पर पढ़ने वाले छात्र -छात्राओं को किसी भी प्रकार की सुविधाएं मुहैया नहीं कराई जा रही है। उनकी सेहत के साथ खिलवाड़ किया जा रहा है। भीषण गर्मी में टीन शेड के नीचे प्रात: 9 से 5 तक रुकने को विद्यार्थी मजबूर है। दूसरी ओर राजकीय विद्यालयों का समय सरकार द्वारा भीषण गर्मी को देखते हुए बदल दिया है परंतु मारवाड़ी केंद्रों में आज भी प्रात: 9 बजे से 5 बजे तक कक्षाएं संचालित की जा रही है। क्षेत्र के अनेकों मां बाड़ी केंद्र पर छत भी नहीं है। खुले आसमान के नीचे पढ़ने को मजबूर हैं। इस और पर परियोजना का कोई ध्यान नहीं है।  <br /><br />वहीं भीषण गर्मी के चलते नन्ने मुन्ने बच्चे पसीने से लथपथ सुबह 9:00 से 5:00 बजे तक बैठे रहते हैं। यह है हमारे समाज का भविष्य! जिनका खुद का भविष्य अंधकार में है। बड़े बड़े अधिकारी और बड़े दफ्तरों में ग्रीष्मकालीन में समय में बदलाव हो जाता  है, लेकिन स्वच्छ परियोजना शाहाबाद के अधीन सहरिया बच्चों का भविष्य जिले में संचालित सभी मां बाड़ी ड़ी केंद्रों पर अधिक तरह चद्दर की टीन सेट बिल्डिंग है और नहीं कोई लाईट पंखा अधिकारी को कई बार अवगत कराया है। समय के बारे में अभी तक कोई बदलाव नहीं किया। <br /><br />इस समय गर्मी का तापमान दिन-ब-दिन बढ़ता जा रहा है। किसी बच्चे के गर्मी में उल्टी दस्त ऐसी शिकायतें आ रही है। सभी जगह से ऐसे में किसी बच्चे की तबीयत खराब हो जाती है, तो परियोजना अधिकारी जिम्मेदार होंगे। समय रहते हुए समय में बदलाव किया जाए।<br /><strong>- राजेंद्र दीवान, जिलाध्यक्ष, मां बाड़ी संघ केलवाडा।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 17:29:26 +0530</pubDate>
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                <title>बोर्ड परीक्षा के समय घंटों बिजली गुल, मोबाइल टॉर्च से पढ़ने को मजबूर हुए छात्र</title>
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                        <![CDATA[बोर्ड की परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चे जी जान से मेहनत कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली गुल होने से बच्चे मोबाइल की टॉर्च के उजाले में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/during-the-board-exam--there-was-power-failure-for-hours--students-were-forced-to-study-with-mobile-torch/article-9042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/power-cut-mobile-torch-study-gamach-bundi-.jpg" alt=""></a><br /><p>गामछ। बोर्ड की परीक्षा की तैयारी के लिए बच्चे जी जान से मेहनत कर रहे हैं। लेकिन ग्रामीण इलाकों में बिजली गुल होने से बच्चे मोबाइल की टॉर्च के उजाले में पढ़ाई करने को मजबूर हैं। रात के वक्त बिजली न आने की वजह से बच्चों को बोर्ड परीक्षा की तैयारी के लिए काफी मशक्कत करनी पड़ रही है।<br /><br /><strong>मोबाइल की टॉर्च के उजाले में क्यों कर रहे हैं पढ़ाई?</strong><br />दरअसल  जिले के ज्यादातर ग्रामीण इलाकों में दिन और रात के समय बिजली गुल रहती है। बच्चे दिन के समय तो जैसे-तैसे पढ़ाई कर लेते हैं। मगर रात के समय बिजली नहीं आने से अंधेरा रहता है। इसलिए अपने मोबाइल की टॉर्च जलाकर जितना हो सकता है, परीक्षा की तैयारी में जुट जाते हैं। हालांकि एक तरफ तो बिजली गुल रहने से अंधेरा रहता है, वहीं दूसरी तरफ कूलर-पंखा नहीं चलने से गर्मी से भी जूझना पड़ता है।<br /><br /><strong>बिजली समस्या को लेकर यह बोले स्टूडेंस्ट्स</strong><br />स्टूडेंट्स का कहना है कि हमारी बोर्ड परीक्षा चल रही है लेकिन हम पढ़ाई कैसे करें क्योंकि बिजली गुल रहती है। अंधेरा होने की वजह से पढ़ाई करने के लिए हमें मोबाइल की टॉर्च का सहारा लेना पड़ रहा है। बच्चों ने कहा कि एक तरफ तो अंधेरा और दूसरी तरफ हमें गर्मी से जूझना पड़ रहा है। यदि इसी तरह से बिजली गुल रहेगी तो हम पढ़ाई नहीं कर पाएंगे और हमारा भविष्य खराब हो जाएगा।<br /><br /><strong>ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों गुल रहती है बिजली</strong><br />इन दिनों बोर्ड की परीक्षाएं चल रही हैं किन्तु बच्चे फोन टॉर्च की लाइट में पढ़ने पर मजबूर है। क्योंकि ग्रामीण क्षेत्रों में घंटों लाइट गुल रहती है। साथ ही भीषण गर्मी का प्रकोप भी बच्चों को झेलना पड़ रहा है। बच्चों के घरवालों का कहना है कि प्रशासन से कई बार अपील की जा चुकी है कि परीक्षा के समय इस प्रकार का खतरा बच्चों के सामने ना खड़ा हो। मगर इस गंभीर दिक्कत पर अब तक किसी ने कोई ध्यान नहीं दिया है। वहीं, फोन की बैटरी डिस्चार्ज होने के बाद यह दिक्कत बहुत बढ़ जाती है। क्योंकि लाइट ना होने के चलते वक़्त पर फोन चार्ज नहीं हो पाता है। इसका सीधा प्रभाव बच्चों की तैयारियों पर पड़ता है। इसलिए हम चाहते हैं कि जब तक बच्चों की बोर्ड परीक्षा चल रही हैं तब तक बिजली सप्लाई नियमित की जाए। बोर्ड परीक्षाओं की तैयारी कर रहे बच्चों के लिए बिजली आपूर्ति करने की सरकार को क्या जरा भी चिंता नहीं है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 02 May 2022 17:25:53 +0530</pubDate>
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                <title>अब बड़े निजी स्कूलों में आरटीई से कर सकते हैं गरीब बच्चें भी पढ़ाई, नि:शुल्क प्रवेश के आवेदन 2 मई से</title>
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                        <![CDATA[ शिक्षा विभाग की ओर से ऑनलाइन आवेदन के लिए 2 से 15 मई तक मांगे हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--now-poor-children-can-also-study-in-big-private-schools-through-rte--application-for-free-admission-from-may-2/article-8638"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/rte2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। निजी स्कूलों में गरीब छात्रों के प्रवेश के लिए अनिवार्य बाल शिक्षा अधिनियम (आरटीई) के तहत स्कूलों में एडमिशन की प्रक्रिया 2 मई से शुरू होगी। शिक्षा विभाग की ओर से ऑनलाइन आवेदन के लिए 2 से 15 मई तक मांगे हैं, जबकि 17 मई को प्राप्त होने वाले आवेदनों की लॉटरी निकालकर उनको प्राथमिकता दी जाएगी। इस प्रक्रिया में प्रदेश में करीब 25 हजार स्कूलों में करीब सवा लाख से अधिक सीटों पर गरीब बच्चों को फ्री एडमिशन दिया जाएगा। आरटीई कानून के तहत प्राइवेट स्कूलों को अपने यहां एंट्री लेवल की कक्षा में कुल संख्या में से 25 फीसदी सीटों पर फ्री प्रवेश देना होगा। बाकी 75 प्रतिशत सीटों पर वे फीस लेकर प्रवेश दे सकते हैं। दरअसल इन सीटों पर एडमिशन के लिए हर साल 2 लाख से ज्यादा आवेदन आते हैं। पिछले साल भी करीब 2.83 लाख बच्चों ने एडमिशन के लिए आवेदन किया था। <br /><br /><strong>ये बच्चे होंगे योग्य</strong><br />आरटीई के तहत क्लास फर्स्ट में बच्चों को एडमिशन मिलेगा। इसके लिए बच्चे की उम्र 5-7 साल के बीच होगी। इसके अलावा बच्चे का बर्थ सर्टिफिकेट और यहां के मूल या स्थाई निवास के दस्तावेज लगाने होंगे। इसमें दो केटेगिरी कमजोर वर्ग और असुविधा समूह में आने वाले बच्चों को एडमिशन मिलेगा। कमजोर वर्ग में वे बच्चे जिनके माता-पिता की आय 2.50 लाख रुपए सालाना या उससे कम हो, जबकि असुविधा समूह में एससी, एसटी वर्ग के अलावा अनाथ बच्चा, एचआईवी या कैंसर पीड़ित या इन बीमारी से प्रभावित माता-पिता के बच्चे, युद्ध विधवा के बच्चे, बीपीएल और नि:शक्त बच्चे शामिल है।<br /><br /><strong>यह है शेड्यूल</strong><br />    30 अप्रैल तक स्कूल संचालक अपने-अपने स्कूलों की प्रोफाइल (फ्री सीटों की डिटेल) आरटीई पोर्टल पर अपडेट करेंगे।<br />    17 मई को शिक्षा विभाग की ओर से प्राप्त आवेदनों की ऑनलाइन प्रायोरिटी लॉटरी निकाली जाएगी।<br />    प्रायोरिटी लॉटरी निकलने के बाद 18 से 25 मई तक आवेदकों (अभिभावकों) को ऑनलाइन ही रिपोर्टिंग करनी होगी।<br />    18 से 27 मई तक आवेदनों की जांच की जाएगी।<br />    ये पूरी प्रक्रिया दो चरणों में होगी यानी पहले चरण की एडमिशन प्रक्रिया पूरी होने के बाद जब सीटे खाली रह जाएगी। दूसरे चरण के आवेदन पत्रों की जांच 1 जून से शुरू होगी। ये पूरी प्रक्रिया 20 जुलाई तक चलेगी।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 26 Apr 2022 12:20:47 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>यूक्रेन से लाए गए विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के विकल्पों पर विचार कर रही है सरकार </title>
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                        <![CDATA[केंद्र सरकार यूक्रेन से ऑपरेशन गंगा के तहत वापस लाए गए करीब 22,500 मेडिकल विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के विकल्पों पर विचार कर रही है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/govt-is-considering-to-study-of-students/article-6496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/46546546546554.jpg" alt=""></a><br /><p>नयी दिल्ली। केंद्र सरकार यूक्रेन से ऑपरेशन गंगा के तहत वापस लाए गए करीब 22,500 मेडिकल विद्यार्थियों की पढ़ाई जारी रखने के विकल्पों पर विचार कर रही है। मुख्य न्यायाधीश एनवी रमना की अध्यक्षता वाली तीन सदस्यीय खंडपीठ ने केन्द्र सरकार का पक्ष रख रहे अटॉर्नी जनरल केके वेणुगोपाल एवं अन्य पक्षकारों की दलीलें सुनने के बाद यूक्रेन से विद्यार्थियों को वापस लाने एवं उनकी भविष्य की पढ़ाई को लेकर व्यक्त की गई चिंताओं से संबंधित दो याचिकाओं का निपटारा किया। वेणुगोपाल ने पीठ को बताया कि सरकार ने 22,500 विद्यार्थियों को वापस लाने का एक बड़ा काम पूरा किया है तथा अब उनके भविष्य की पढ़ाई से संबंधित चिंताएं दूर करने को लेकर विचार कर रही है। याचिकाकर्ता अधिवक्ता विशाल तिवारी ने पीठ के समक्ष गुहार लगाते कहा था कि विद्यार्थियों की शिक्षा में बाधा नहीं आनी चाहिए तथा उन्हें यहां पढ़ाई जारी रखने की अनुमति दी जा सकती है। तिवारी के अलावा यूक्रेन के ओडेसा में नेशनल मेडिकल यूनिवर्सिटी की छात्रा ने यूक्रेन से भारतीय छात्रों को निकालने के लिए केंद्र सरकार को आवश्यक निर्देश देने की गुहार लगाते हुए शीर्ष अदालत का दरवाजा खटखटाया था।</p>
<p>शीर्ष अदालत ने 04 मार्च को केंद्र सरकार से कहा था कि वह यूक्रेन में फंसे नागरिकों की चिंताओं पर विचार करें। केंद्र सरकार ने यूक्रेन में विभिन्न विश्वविद्यालयों के विद्यार्थियों को वापस लाने के लिए ऑपरेशन गंगा शुरू किया था। विदेश मंत्रालय ने पहले कहा था कि यूक्रेन और पड़ोसी देशों पोलैंड, स्लोवाकिया गणराज्य, हंगरी, रोमानिया और मोल्दोवा में दूतावास के अधिकारियों ने शुरू किए गए ऑपरेशन गंगा के तहत भारतीय नागरिकों को निकालने में रूसी भाषी अधिकारियों के साथ अथक प्रयास किए थे।<br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 21 Mar 2022 16:39:58 +0530</pubDate>
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                <title>यूक्रेन से लौटे स्टूडेेंट्स की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू</title>
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                        <![CDATA[यूक्रेन में युद्ध के बीच लौटे स्टूडेंट्स की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है, जिसके चलते स्टूडेंट्स और अभिभावकों को राहत मिली है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/online-studies-started-for-students-returned-from-ukraine/article-6244"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/kk.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। यूक्रेन में युद्ध के बीच लौटे स्टूडेंट्स की ऑनलाइन पढ़ाई शुरू हो गई है, जिसके चलते स्टूडेंट्स और अभिभावकों को राहत मिली है। क्योंकि, स्टूडेंट्स कोटा तो लौट आए थे। लेकिन, पढ़ाई की चिंता हो रही थी। हालांकि, अभी बुकोवानिया यूनिवर्सिटी में ही ऐसा किया गया है। क्योंकि, ये यूनिवर्सिटी युद्ध प्रभावित क्षेत्र से काफी दूर है। खार्किव, सूमी और कीव यूनिवर्सिटी के स्टूडेंट्स को अभी भी पढ़ाई शुरू होने का इंतजार है। संभावना जताई जा रही है इन स्टूडेंट्स की भी 21 मार्च से क्लास शुरू हो जाएगी। दादाबाड़ी निवासी शादाब का कहना है कि यूक्रेन से लौटे एक सप्ताह से अधिक समय हो गया है, लेकिन क्लासें शुरू नहीं होने से चिंता हो रही थी। अब क्लासें शुरू होने से राहत मिली है। शादाब का कहना है कि प्रतिदिन 11 बजे क्लासें शुरू हो जाती है। इनका समापन शाम को 5 बजे होता है। ये फैकल्टी चनवर्त्सी शहर में ही है। यहीं से स्टूडेंट्स को ऑनलाइन मेडिकल की पढ़ाई करवा रही है। ये रूस  बोर्डर से हजारों किलोमीटर दूर है। ऐसे में कोई दिक्कत नहीं है।<br /><br /><strong>रिवाइज का अच्छा मौका</strong><br />खानपुर निवासी आकाश का कहना है कि ये रिवाइज का अच्छा मौका है। क्योंकि, अभी वहां के हालात सामान्य नहीं है। वापिस लौट नहीं सकते है। चार साल पूरे हो चुके है। अधिकांश पढ़ाई पूरी हो गई है। ऐसे में ये मौका रिवाइज का है। ऑनलाइन के माध्यम से मेडिकल की पढ़ाई हो रही है। साथ में रिवाइज का मौका मिल रहा है। इससे पुराने पढ़े सभी विषयों को पुनरावृत्ति हो जाएगी। ताकि, परीक्षाओं में दिक्कत नहीं होगी। अभिभावक सरफराज अंसारी का कहना है कि बच्चों की पढ़ाई को लेकर चिंतित थे। ऐसा होने से चिंता दूर हो गई है।<br /><br /><br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>शिक्षा जगत</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 14:57:58 +0530</pubDate>
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                <title>आवासन मंडल की कार्यप्रणाली और उपलब्धियों का अध्ययन करने आया केन्या का प्रतिनिधिमंडल</title>
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                        <![CDATA[राजस्थान आवासन मंडल आयुक्त आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि केन्या सरकार की सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की निदेशक लेवने निजाइना के नेतृत्व में 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आवासन मंडल की कार्यशैली, संचालित योजनाओं और प्रोजेक्टों का अध्ययन करने आया। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/kenya-delegation-came-to-study-the-functioning-of-board/article-6212"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/mit-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान आवासन मंडल आयुक्त आयुक्त पवन अरोड़ा ने बताया कि केन्या सरकार की सूचना एवं प्रौद्योगिकी विभाग की निदेशक लेवने निजाइना के नेतृत्व में 9 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल आवासन मंडल की कार्यशैली, संचालित योजनाओं और प्रोजेक्टों का अध्ययन करने आया। मंडल मुख्यालय स्थित बोर्ड रूम में अरोड़ा ने टीम को मण्डल द्वारा अल्प समय में अर्जित की गई उपलब्धियों से अवगत करवाया और मण्डल द्वारा संचालित योजनाओं और प्रोजेक्टों के बारे में बताते हुए मण्डल की कार्यशैली से भी अवगत करवाया। केन्या सरकार के प्रतिनिधमंडल ने कहा कि आयुक्त अरोड़ा के नेतृत्व में जिस तरह आवासन मंडल को रिवायव किया गया है, वह हमारे लिए केस स्टडी है। केन्या में भी मंडल की तर्ज पर कार्य किए जाएंगे। उन्होंने ई-आॅक्शन और ई-बिड सबमिशन योजना को केन्या में लागू करने की बात कही। प्रतिनिधमंडल ने आयुक्त से आग्रह किया कि वह केन्या आकर हमें प्रशिक्षित करें।</p>
<p>आवासन आयुक्त अरोडा ने प्रतिनिधिमंडल को मंडल द्वारा अर्जित उपलब्धियों के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि मंडल ने महज 3 वर्ष की अल्पावधि में पारदिर्शता तरीके से ई-बिड और ई-ऑक्शन प्रक्रिया से 13 हजार 500 से अधिक सम्पत्तियों का निस्तारण किया गया। मंडल ने ई-आॅक्शन में मंडल ने महज 35 कार्य दिवसों में 1010 मकान बेचे, जिससे मंडल को 162 करोड़ रूपए का राजस्व मिला। इसी कीर्तिमान को वर्ल्ड बुक आॅफ  रिकॉर्ड्स लंदन द्वारा भी मान्यता प्रदान की गई है। इसके बाद बुधवार नीलामी उत्सव के तहत ई-बिड सबमिशन योजना में 12 दिनों में 185 करोड रूपए मूल्य की 1213 सम्पत्तियों का विक्रय कर पुन: अन्तरराष्ट्रीय कीर्तिमान बनाया। इस रिकॉर्ड को भी वर्ल्ड बुक ऑफ रिकॉर्डस लंदन ने भी मान्यता प्रदान की गई है। इसके साथ ही उन्होंने वर्तमान में चल रहे प्रमुख प्रोजेक्टों कोचिंग हब, सिटी पार्क, फाउंटेन स्क्वायर, विधायक आवास परियोजना, कॉन्स्टीट्यूशन क्लब ऑफ  राजस्थान, जयपुर चौपाटियों और आवासीय योजनाओं के बारे में विस्तार से जानकारी दी। इसके बाद प्रतिनिधिमंडल ने जयपुर में निर्माणाधीन प्रोजेक्टों को विजिट किया। <br /><br /></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 16 Mar 2022 10:03:27 +0530</pubDate>
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                        <![CDATA[Jaipur]]>
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            <item>
                <title>मां बाड़ी केंद्र पर बच्चों के सिर से छत गायब </title>
                                    <description>
                        <![CDATA[ क्षेत्र में कुछ मां बाड़ी केंद्र ऐसे है, जो अपनी बदहाली के आंसू बहा रहे हैं।]]>
                    </description>
                
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/roof-missing-from-children-s-heads-at-maa-bari-center/article-6191"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/ww.jpg" alt=""></a><br /><p> राजपुर। एक और तो सरकार तरह-तरह की योजनाएं संचालित करने के लिए लाखों करोड़ों रुपए का बजट जारी कर सहरिया उत्थान के दावे कर रही है। सहरिया परियोजना विभाग और स्वच्छ परियोजना विभाग के कागजी रिकॉर्ड में सहरिया बच्चों में शिक्षा का बढ़ावा देने के दावे जोरों पर फल फूल रहे हैं और सरकार से भी जमकर बजट दिया जा रहा है। जिसका शहरी क्षेत्र में जमकर बंदरबांट हो रहा है और धरातल पर स्थिति कुछ और ही बयां हो रही है। बच्चों को पढ़ने के लिए मां बाडी केन्द्र पर भवन हैं। उनमें बैठकर बच्चे पढ़ाई तो कर रहे हैं, लेकिन ऊपर से छत गायब है। क्षेत्र में कुछ मां बाड़ी केंद्र ऐसे है, जो अपनी बदहाली के आंसू बहा रहे हैं। कई बार सहरिया समाज के लोगों ने जिम्मेदारों को और सहरिया परियोजना अधिकारी को अवगत करा दिया लेकिन मामले को ठंडे बस्ते में डाल दिया जाता है। उच्च अधिकारियों द्वारा इस मुद्दे को गंभीरता से नहीं लिया जाता। इसके चलते सहरिया समाज में रोष बना हुआ है।<br /><br /><strong>274 मां बाड़ी केंद्र हैं संचालित</strong><br />विधानसभा क्षेत्र में 274 मां बाड़ी केंद्र संचालित हैं। जिनमें 615 शिक्षा सहयोगी लगे हुए हैं, जो मां बाड़ी केंद्र में अपनी सेवाएं देकर सहरिया समाज के बच्चों को शिक्षित बनाने का काम कर रहे हैं। बच्चों को पढ़ने के लिए भवन हैं। उन में बैठकर बच्चे पढ़ाई तो कर रहे हैं, लेकिन ऊपर से छत गायब है। ऐसी तस्वीरें एकाएक सहरिया क्षेत्र में विकास के दावों की और सरकार की जनकल्याणकारी योजनाओं की पोल खोल दी दिखाई दे रही है। इस संबंध में सहरिया परियोजना अधिकारी राहुल मल्होत्रा और विधायक निर्मला सहरिया को भी कई बार अवगत करा दिया लेकिन अभी तक मां बाड़ी शिक्षा सहयोगीयो का भुगतान स्वच्छ परियोजना विभाग द्वारा नहीं किया है। इसके चलते मां बाड़ी शिक्षा सहयोगी आर्थिक तंगी से गुजर रहे हैं और भुगतान के लिए विभागीय अधिकारियों के कार्यालयों के चक्कर काट रहे हैं।<br /><br /><strong>योजनाओं की ठीक से नहीं हो रही मॉनिटरिंग</strong><br />आदिवासी अंचल क्षेत्र में संचालित मां बाड़ी केंद्र सहित सरकार कई प्रकार की जनकल्याणकारी योजना सहरिया समाज के लोगों के लिए संचालित हो रही हैं उनका ठीक तरीके से मॉनिटरिंग करने वाला कोई आला अफसर दिखाई नहीं देता है  इसके चलते सरकार की कई जनकल्याणकारी योजना कागजी रिकॉर्ड में संचालित होकर रफ्तार पकड़ रही हैं। लाखों करोड़ों रुपए का बजट गोलमाल हो रहा है। इस मामले को लेकर विभाग के जिम्मेदार आला अधिकारी और कर्मचारी मूकदर्शक बने हुए हैं। जगदीश सहरिया पूर्व सहरिया कर्मचारी जिला अध्यक्ष, हजारीलाल सहरिया पूर्व जिला परिषद सदस्य,मां बाड़ी शिक्षा सहयोगी अध्यक्ष ने बताया कि सहरिया विकास के नाम पर सरकारी बजट राशि का दुरुपयोग हो रहा है। इसकी एसीबी जांच होनी चाहिए और दोषियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। <br /><br /><strong>पानी के लिए भी इधर-उधर भटकते है बच्चें</strong><br />आदिवासी अंचल क्षेत्र में 274 मां बाड़ी केंद्रों का संचालन हो रहा है। जिन पर पानी की कोई व्यवस्था नहीं है। ऐसे में मां बाड़ी केंद्र पर अध्ययन करने वाले बच्चों को पानी के लिए इधर-उधर भटकना पड़ता है। इसके चलते कई बच्चे तो स्कूल तक नहीं पहुंच पाते हैं। <br /><br />आदिवासी अंचल क्षेत्र में मां बाड़ी केंद्रों की स्थिति बहुत ही दयनीय बनी हुई है। इस संबंध में कई बार सहरिया परियोजना अधिकारी राहुल मल्होत्रा और स्वच्छ परियोजना अधिकारी इंद्रजीत सोलंकी को अवगत करा चुके हैं लेकिन मां बाड़ी केंद्रों की व्यवस्थाओं में अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है। <br /><strong>- जगदीश सहरिया, जिलाध्यक्ष, पूर्व सहरिया कर्मचारी।</strong><br /><br />आदिवासी अंचल क्षेत्र में मां बाड़ी केंद्रों की समस्याओं को स्वच्छ परियोजना अधिकारी इंद्रजीत सोलंकी को बताते हैं तो मां बाड़ी शिक्षा सहयोगियों का वेतन रोक लिया जाता है। सहरिया परियोजना अधिकारी को भी अवगत करा दिया है।<br /><strong>- राजेंद्र दीवान, अध्यक्ष, सहरिया मां बाड़ी संघ। </strong><br /><strong>       </strong> <br />सहरिया क्षेत्र में कुछ मां बाड़ी केंद्र क्षतिग्रस्त है। एस्टीमेट बनाकर भेज दिया है अभी फिलहाल बच्चों को किसी तरह की परेशानी मां बाड़ी केंद्रों पर नहीं है किसी मां बाड़ी शिक्षा सहयोगी को परेशान नहीं किया जा रहा है। अगर सुपरवाइजर मां बाड़ी शिक्षा सहयोगियों से अभद्रता करते हैं तो इसकी जांच कर ऐसे सुपरवाइजर के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- इंद्रजीत सोलंकी, स्वच्छ परियोजना अधिकारी, शाहाबाद।</strong><br />        <br /> स्वच्छ परियोजना विभाग द्वारा मां बाड़ी केंद्र संचालित हैं अगर कहीं भवन क्षतिग्रस्त हैं तो उनको दुरुस्त करवाने के लिए स्वच्छ परियोजना विभाग अधिकारियों से बात की जाएगी। मां बाड़ी केंद्र पर शिक्षा सहयोगीयो का वेतन रोकने की बात सामने नहीं आई है, अगर ऐसी समस्या है तो इसकी जांच कर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।<br /><strong>- राहुल मल्होत्रा, सहरिया परियोजना अधिकारी, शाहाबाद।</strong> <br /><br />शाहाबाद उपखंड मुख्यालय पर अतिरिक्त जिला कलक्टर राहुल मल्होत्रा को सरकार ने नियुक्त कर रखा है ताकि जन कल्याणकारी योजना का संचालन ठीक से हो और प्रभावी रूप से मॉनिटरिंग हो और उनका समाधान भी हो लेकिन मां बाड़ी केंद्रों की स्थिति के बारे में कोई ध्यान नहीं है। <br /><strong>- हजारीलाल सहरिया, पूर्व जिला परिषद सदस्य।</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 15 Mar 2022 16:25:23 +0530</pubDate>
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