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                <title>rajput - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>मोदी-3 सरकार में राजस्थान से चार मंत्री : राजपूत-एससी-यादव चेहरे रिपीट, कैलाश हारे तो उनकी जगह जाट चेहरा भागीरथ शामिल</title>
                                    <description><![CDATA[प्रदेश को मिली पूरी तवज्जो, 25 की जगह 14 ही सीटें जीती, लेकिन मोदी-3 सरकार के मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व मोदी-2 सरकार की तरह बरकरार ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/in-modi-3-government-four-ministers-from-rajasthan-rajput-sc-yadav-faces-repeat/article-80973"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/ministers.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान में भले ही भाजपा ने इस बार 25 की जगह 14 ही सीटों पर जीत हासिल की हो, लेकिन केन्द्र की मोदी सरकार-3 में प्रदेश से भाजपा का प्रतिनिधित्व कम नहीं किया गया है। जातिगत समीकरण भी मोदी-2 सरकार में जिस तरह से साधे गए थे, उसी तरह इस बार भी राजपूत, एससी, यादव (ओबीसी) और जाट वर्ग से ही मंत्री बनाए गए हैं। भाजपा राजस्थान से लोकसभा सांसद बने जोधपुर के गजेन्द्र सिंह शेखावत, राज्यसभा सांसद भूपेन्द्र यादव केबिनेट मंत्री, बीकानेर सांसद अर्जुनराम मेघवाल राज्यमंत्री स्वतंत्र प्रभार और बाड़मेर से कैलाश चौधरी राज्यमंत्री मंत्री थे। वहीं इस बार भी भाजपा ने गजेन्द्र, भूपेन्द्र को पिछली बार की ही भांति केबिनेट मंत्री और अर्जुनराम को मंत्रिमंडल राज्यमंत्री का स्वतंत्र प्रभार दिया है। बाड़मेर से कैलाश चौधरी चुनाव हार गए। ऐसे में उनकी जगह जाट वर्ग से ही अजमेर लोकसभा चुनाव से जीतकर आए भागीरथ चौधरी को राज्य मंत्री बनाया है।  </p>
<p><strong>जाट बैल्ट की 6, एससी की 4 में से 1-1 ही जीत सके, जीते दोनों सांसद मंत्री</strong><br />भाजपा को लोकसभा चुनावों में राजस्थान की जाट बैल्ट की छह सीटों चूरू, नागौर, सीकर, झुंझुनूं, बाड़मेर, अजमेर में से पांच सीटों पर हार का सामना करना पड़ा है। केवल अजमेर सीट पर भाजपा के भागीरथ चौधरी दूसरी बार जीतकर आए हैं। ऐसे में प्रदेश में जाट वर्ग को साधने के लिए भागीरथ को राज्यमंत्री बनाया गया है, क्योंकि इस बैल्ट से केवल वे ही चुनाव जीतकर आए हैं। वहीं एससी वर्ग की राजस्थान की चार सीटों में करौली-धौलपुर, भरतपुर, बीकानेर, गंगानगर में से भी भाजपा केवल बीकानेर पर ही अर्जुनराम मेघवाल चुनाव जीतकर आ सके हैं। ऐसे में एससी वर्ग को साधने के लिए भाजपा ने मेघवाल को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया है। </p>
<p><strong>परम्परागत राजपूत वर्ग को साधा</strong> <br />राजपूत वर्ग भाजपा का प्रदेश में परम्परागत वोट बैंक रहा है। लोकसभा चुनावों में इस वर्ग के वोट बैंक से भी भाजपा को सेंधमारी की आशंका है। ऐसे में परम्परागत वोट को साधने के लिए भाजपा ने फिर से राजपूत वर्ग के बडेÞ चेहरे जोधपुर लोकसभा सीट से जीते गजेन्द्र सिंह शेखावत को फिर से केबिनेट मंत्री बनाकर इस वर्ग को तवज्जो दी है। </p>
<p><strong>राजस्थान के साथ हरियाणा के सियासी समीकरण साध रहे यादव </strong><br />दूसरी बार केन्द्रीय मंत्री बने अलवर के लोकसभा सांसद भूपेन्द्र यादव को भाजपा ने मोदी-3 सरकार में भी केबिनेट मंत्री बनाया है। मूलत: अजमेर के रहने वाले यादव प्रदेश की यादव बैल्ट के साथ ही हरियाणा में भी खासी पकड़ रखते हैं। यूपी में भी इस वर्ग के सियासी समीकरण बनाने के लिए उन्हें मंत्री बनाया गया है। यादव मोदी-2 सरकार में राज्यसभा कोटे से केबिनेट मंत्री बने थे।  </p>
<p><strong>गजेन्द्र की मंत्रिमंडल में हैट्रिक, यादव-मेघवाल दूसरी बार, भागीरथ का पहला टर्म </strong><br />मोदी की लगातार तीसरी सरकार में जोधपुर सांसद गजेन्द्र सिंह शेखावत मंत्री बने हैं। वहीं भूपेन्द्र यादव और अर्जुनराम मेघवाल दूसरी बार मंत्री बने हैं। हालांकि मेघवाल मोदी-1 सरकार में लोकसभा में मुख्य सचेतक भी रहे हैं। दूसरी बार सांसद बने भागीरथ चौधरी पहली बार मंत्री बने हैं। </p>
<p><strong>जोधपुर, अजमेर, अलवर, बीकानेर संभाग से मंत्री </strong><br />राजस्थान मे जोधपुर संभाग से गजेन्द्र, अजमेर संभाग से भागीरथ, बीकानेर संभाग से मेघवाल और अलवर संभाग से भूपेन्द्र को मंत्री बनाया गया है। </p>
<p><strong>अश्विनी वैष्णव मूलत: राजस्थान के, पूर्व की भांति उड़ीसा कोटे से मंत्री बने </strong><br />मोदी-2 सरकार में रेल मंत्री रहे राज्यसभा सांसद अश्विनी वैष्णव भी मूलत: राजस्थान के जोधपुर के रहने वाले हैं। हालांकि वे उड़ीसा में आईएएस रहे और फिर भाजपा में आए। वहीं से मोदी-2 सरकार में केबिनेट मंत्री बने। हालांकि चुनावों से पहले उनकी राजस्थान में भी सक्रियता प्रदेश की राजनीति में चर्चा का विषय रही। कयास लगाए गए कि वे 2024 के लोकसभा चुनावों में राजस्थान की राजनीतिक में लैंड कराए जा सकते हैं, लेकिन चुनाव पूर्व उनकी सक्रियता प्रदेश में ना दिखने पर इस कयास पर विराम लग गया था। </p>
<p><strong>ओम लोकसभा अध्यक्ष थे, पद पर फैसला अभी बाकी</strong><br />कोटा सांसद ओम बिरला मोदी-2 सरकार में लोकसभा अध्यक्ष रहे हैं। अभी उन्हें मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। इस बार लोकसभा अध्यक्ष पद गठबंधन की राजनीति में फंसा है। हालांकि लोकसभा अध्यक्ष का पद रूलिंग पार्टी के सबसे बड़े दल के लिए अति महत्वपूर्ण होता है, लेकिन टीडीपी के चन्द्रबाबू नायडू की पार्टी के इसकी डिमांड की चर्चा राजनीति हलकों में है। बिरला का फिर से पदासीन होने पर संशय है। मोदी-3 सरकार का लोकसभा का पहला सत्र संभवत: इसी माह शुरू हो सकता है। ऐसे में जून माह में ही पद की तस्वीर साफ हो जाएगी। बिरला रिपीट हुए तो राजस्थान में भाजपा के 11 सीटों के नुकसान के बावजूद प्रतिनिधित्व मोदी-2 सरकार की तरह ही बरकरार रहेगा। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 10 Jun 2024 09:41:49 +0530</pubDate>
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                <title>नेता प्रतिपक्ष और पीसीसी चीफ : ब्राह्मण, राजपूत या ओबीसी समाज के चेहरों को मिल सकती है जगह</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष और पीसीसी चीफ के चेहरे बदलने के बाद अब राजस्थान में भी एक हफ्ते में निर्णय लिया जा सकता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/leader-of-opposition-and-pcc-chief-brahmin-rajput-or-faces/article-64422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-12/congress-logo-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। कांग्रेस के मध्य प्रदेश और छत्तीसगढ़ में नेता प्रतिपक्ष और पीसीसी चीफ के चेहरे बदलने के बाद अब राजस्थान में भी एक हफ्ते में निर्णय लिया जा सकता है। कांग्रेस आलाकमान राजस्थान में दोनों पदों के लिए ब्राह्मण, राजपूत या ओबीसी चेहरों पर दाव चल सकती है। वहीं पूर्व सीएम अशोक गहलोत के नेता प्रतिपक्ष बनने की संभावनाएं कम आंकी जा रही हैं।</p>
<p>सूत्रों के अनुसार राजस्थान कांग्रेस में नेता प्रतिपक्ष और प्रदेशाध्यक्ष पद पर ब्राह्मण, राजपूत या ओबीसी वर्ग के नेता की नियुक्ति हो सकती है। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट के कांग्रेस राष्ट्रीय महासचिव नियुक्त होने की संभावनाए हैं। मध्य प्रदेश में आदिवासी वर्ग के उमंग सिंघार को नेता प्रतिपक्ष और ओबीसी वर्ग के जीतू पटवारी को प्रदेशाध्यक्ष बनाने के बाद राजस्थान में भी जातिगत समीकरण साधने के कवायद की जा रही है। चूंकि मध्य प्रदेश में आदिवासी समाज के नेता को मौका मिल चुका, इसलिए राजस्थान में आदिवासी नेता महेन्द्रजीत मालवीय के नेता प्रतिपक्ष बनने के कम आसार हैं। कांग्रेस आलाकमान से जुड़े सूत्रों की माने तो राजस्थान में अब पूर्व मुख्यमंत्री अशोक गहलोत की जगह वरिष्ठ विधायक राजेन्द्र पारीक या हरीश चौधरी को नेता प्रतिपक्ष पद पर मौका मिल सकता है। पीसीसी चीफ पद पर पूर्व विधानसभा अध्यक्ष डॉ. सीपी जोशी या पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास जैसे नामों को मौका दिया जा सकता है। अगले एक हफ्ते में इन नियुक्तियों पर फैसला लेने की संभावना जताई जा रही है। </p>
<p><strong>प्रदेश प्रभारी की जिम्मेदारी से मुक्त होना चाहते हैं सुखजिंदर रंधावा</strong><br />सूत्रों के अनुसार प्रदेश प्रभारी सुखजिंदर सिंह रंधावा अब पंजाब कांग्रेस और अपने निर्वाचन क्षेत्र में व्यस्त हो गए हैं। नेता प्रतिपक्ष और पीसीसी चीफ पदों पर नियुक्ति मामले में रंधावा खुद को अलग रखने की राय कांग्रेस आलाकमान को दे चुके हैं। पंजाब से लोकसभा चुनाव लड़ने की तैयारियों को लेकर रंधावा राजस्थान प्रदेश कांग्रेस प्रभारी पद से मुक्त होना चाहते हैं और अपनी राय से हाईकमान को अवगत करा चुके हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Mon, 18 Dec 2023 12:41:02 +0530</pubDate>
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                <title>राजस्थान में फिल्म ‘पृथ्वीराज’ की रिलीजिंग पर असमंजस! : राजपूत बनाम गुर्जर जाति द्वंद्व फिल्म के टाइटल में बदलाव के साथ उन्हें अपनी जाति का दिखाने की मांग</title>
                                    <description><![CDATA[करणी सेना रुकवा चुकी है राजस्थान में फिल्म की शूटिंग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/movie-fun/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%A8-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E2%80%98%E0%A4%AA%E0%A5%83%E0%A4%A5%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E2%80%99-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%80%E0%A4%9C%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%97-%E0%A4%AA%E0%A4%B0-%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%9C%E0%A4%B8----%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A4-%E0%A4%AC%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%97%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%9C%E0%A4%B0-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%B5-%E0%A4%AB%E0%A4%BF%E0%A4%B2%E0%A5%8D%E0%A4%AE-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%9F%E0%A4%BE%E0%A4%87%E0%A4%9F%E0%A4%B2-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AC%E0%A4%A6%E0%A4%B2%E0%A4%BE%E0%A4%B5-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%B8%E0%A4%BE%E0%A4%A5-%E0%A4%89%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%B9%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%85%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A5%80-%E0%A4%9C%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%96%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97/article-4104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/prithviraaj-2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सम्राट पृथ्वीराज चौहान पर बनी फिल्म ‘पृथ्वीराज’ के नाम के साथ अब उनकी जाति को लेकर राजस्थान के दो महत्वपूर्ण समाज आमने-सामने आ गए हैं। राजपूत समाज जहां पृथ्वीराज चौहान को अपनी जाति का बता रहा है। वहीं अब गुर्जर समाज ने भी पृथ्वीराज को सम्राट गुर्जर बताते हुए फिल्म में भी इस बात को दिखाने की मांग कर दी है। इससे पहले मिहिरभोज और सुहेलदेव की जाति को लेकर भी दो जातियों के बीच विवाद चल रहा है। यश चोपड़ा के बैनर पर बनी रही फिल्म के निर्देशक चन्द्रप्रकाश द्विवेदी है। <br /><strong><br />पृथ्वीराज राजपूत समाज की अस्मिता के प्रतीक</strong><br />करणी सेना के राष्ट्रीय अध्यक्ष महिपाल सिंह मकराना कहते है कि पृथ्वीराज फिल्म के टाइटल को लेकर हमारा विरोध है। वहीं अब गुर्जर समाज उन्हें अपनी जाति का बता रहा है, जबकि सम्राट पृथ्वीराज चौहान राष्ट्र गौरव है। वह राजपूत समाज की अस्मिता के प्रतीक है। मैं खुद पृथ्वीराज चौहान के वंशज परिवार से ताल्लुक रखता हूं। गुर्जर समाज फिल्म से पहले ही इस तरह के दावे कर रहा है इससे पहले ये समाज के लोग कहां पर थे। </p>
<p><br /><strong>पृथ्वीराज को राजपूत दिखाया तो होगा विरोध</strong><br />गुर्जर नेता हिम्मत सिंह गुर्जर कहते है कि अगर पृथ्वीराज चौहान के लिए राजपूत शब्द बोला गया तो फिल्म का जबरदस्त विरोध किया जाएगा। कर्नल टोड ने गलत इतिहास लिखा है। इतिहास में वर्णन है कि उनके पिता गुर्जर थे। पृथ्वीराज चौहान रासो महाकाव्य 16वीं शताब्दी में लिखा गया था, जो पूरी तरह मिथ्यापूर्ण है। यह महाकाव्य चंदरबरदाई ने प्रिंगल भाषा में लिखा था, जो बाजरा और राजस्थानी भाषाओं का मिश्रण है। गुर्जर सम्राट पृथ्वीराज चौहान के शासन काल में संस्कृत बोली जाती थी ना कि प्रिंगल भाषा का, जिसका कवि ने प्रयोग किया है। हिम्मत कहते है कि ऐतिहासिक सबूतों के मुताबिक 13वीं शताब्दी से पहले राजपूत कभी अस्तित्व में नहीं थे। वे कहते है कि पृथ्वीराज चौहान के पिता सोमेश्वर गुर्जर जाति से है। इसलिए उनका बेटा खुद गुर्जर होना चाहिए। </p>
<p><br /><strong>गुर्जर प्रतिहार के लिए होता है इस्तेमाल </strong><br />इतिहासकार आरएस खंगारोत कहते है कि जिस गुर्जर शब्द की बात आज की जा रही है, वह गुर्जर प्रतिहार के लिए इस्तेमाल होता है। चौहान और चहमान से इसे कन्फयूज नहीं करना चाहिए। गुर्जर प्रतिहार की उत्पत्ति 8वीं शताब्दी में मानी जाती है। ये खुद को भगवान राम के भाई लक्ष्मण का वंशज कहते हैं। इसलिए वे अपने आप को सूर्यवंशी बताते हैं। कुछ इतिहासकार इन्हें विदेशी मानते हैं कि ये हूणों के साथ भारत आए और गुर्जर थे, लेकिन भारतीय इतिहासकार ऐसा नहीं मानते हैं।</p>
<p><br /><strong>फिल्म के लिए है बड़ी मुश्किलें</strong><br />पृथ्वीराज फिल्म की शूटिंग के दौरान ही करणी सेना ने फिल्म में ऐतिहासिक तथ्यों से छेड़छाड़ के आरोप लगाते हुए इसकी शूटिंग रूकवा दी थी। इसके बाद पूरी शूटिंग बाहर की गई। अब दोनों ही जातियों में पृथ्वीराज की जाति को लेकर विवाद है। राजपूत समाज को फिल्म के नाम पर भी आपत्ति है। वे इसका नाम बदलकर सम्राट पृथ्वीराज चौहान करने की मांग कर चुके हैं। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 21 Jan 2022 16:45:49 +0530</pubDate>
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                <title>राजपूतनीति की हुंकार</title>
                                    <description><![CDATA[क्षत्रिय युवक संघ का हीरक जयंती समारोह : गुलाबीनगर की धरा पर छा गया केसरिया रंग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%9C%E0%A4%AA%E0%A5%82%E0%A4%A4%E0%A4%A8%E0%A5%80%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%B9%E0%A5%81%E0%A4%82%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0/article-3452"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/harik-jayanti.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। जयपुर में बुधवार को सीकर रोड स्थित भवानी निकेतन कॉलेज परिसर में क्षत्रिय युवक संघ की स्थापना के 75 साल पूरे होने पर हीरक जयंती समारोह था, जिसमें देशभर के राजपूतों का जनसैलाब उमड़ा। इसमें क्षत्रिय ही नहीं क्षत्राणियां भी जुटी। पहली बार किसी कार्यक्रम में आने के लिए पूरी ट्रेन भी बुक कराई गई। जैसलमेर से 24 कोच की ट्रेन भरकर समारोह में हिस्सा लेने आई। राजपूत समाज ने यहां अनुशासन-एकजुटता का संदेश तो दिया, लेकिन समाज की राजनीति में पिछड़ने और राजनीतिक नेतृत्व में आई कमी की बैचेनी भी मंच पर एक साथ दिखे राजनेताओं और समाज की आवाज को बुलंद करने में लगे लोगों के अप्रत्यक्ष संबोधन में दिखी। हालांकि मंच से सभी वर्गों को साथ लेकर आगे चलने को लेकर बात की गई। लेकिन राजनीतिक दलों को राजपूत समाज की ताकत और उन्हें कमत्तर नहीं आंकने का एक बैनर तले आने का एहसास कराने का संदेश भी साफतौर पर गया है।</p>
<p><span style="background-color:#ffff99;"><span style="color:#ff0000;"><span style="font-size:larger;">क्षत्रिय युवक संघ की हीरक जयंती में देशभर से आए क्षत्रिय-क्षत्राणियां, जैसलमेर से पूरी ट्रेन भरकर आई<br /> राजनीति में पिछड़ने की बैचेनी दिखी, तेवर-ताकत का एहसास और एकजुटता-अनुशासन से आगे बढ़ने का दिया संदेश  </span></span></span></p>
<p>भवानी निकेतन में बुधवार को हुए क्षत्रिय युवक संघ के हीरक जयंती समारोह में संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर ने कहा कि तनसिंहजी को जो पीड़ा हुई वह प्राणी मात्र के कल्याण के लिए हुआ। उन्होंने कहा कि मुझे संरक्षक का दायित्व दिया है, लेकिन हमारा संरक्षक ईश्वर है। यह भरा हुआ विशाल प्रांगण ऐसे लग रहा है कि जैसे केसरिया सागर की तरह से लहरा रहा है।  क्षत्रिय युवक संघ की पहचान राजपूत समाज में अनुशासन की रही है। वहीं कार्यक्रम में दिखा भी। समारोह में पुरूष केसरिया बाना, सफेद शर्ट और काली पेंट पहनकर आए। वहीं महिलाएं राजपूती परम्परागत पीली साड़ियां, लहंगे पहनकर आई। बड़ी संख्या के चलते समारोह स्थल केसरिया और पीले रंग में रंगा दिखा। हेलिकॉप्टर से समारोह में फूलों की बारिश भी की गई।</p>
<p><strong>केसरिया-पीले रंग के वस्त्रों में रंगा दिखा समारोह स्थल</strong><br /> कार्यक्रम की कमान क्षत्रिय युवक संघ के संरक्षक भगवान सिंह रोलसाहबसर, संघ प्रमुख लक्ष्मण सिंह, महावीर सिंह सरवड़ी के हाथ थीं। उनके नेतृत्व में प्रदेश के हर दल के राजपूत नेता जुटे। इनमें केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री गजेन्द्र सिंह शेखावत, उपनेता प्रतिपक्ष राजेन्द्र राठौड़, प्रदेश सरकार के मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास, भंवर सिंह भाटी, पूर्व मंत्री पुष्पेन्द्र सिंह, गजेन्द्र सिंह खींवसर, नरपत सिंह राजवी, राजपाल सिंह शेखावत, पूर्व राज्यपाल वीपी सिंह बदनौर, विहिप के नरपत सिंह शेखावत, भंवर सिंह पलाड़ा सहित कई विधायक, पूर्व विधायक, राजपूत नेता थे। सीएम अशोक गहलोत, पूर्व सीएम वसुन्धरा राजे के शुभकामना संदेश भी पहुंचे। इसके अलावा समाज के इतर अन्य मंत्री महेश जोशी, सांसद रामचरण बोहरा, भाजपा प्रदेशाध्यक्ष सतीश पूनिया सहित कई बड़े नेता भी कार्यक्रम में आए। <br /> <strong><br /> ड्रोन कैमरे से समारोह की शूटिंग </strong><br /> समारोह का लाइव क्षत्रिय युवक संघ के फेसबुक पेज और यूटयूब पर भी समाज के लोगों ने देखा। ड्रोन कैमरे से समारोह की शूटिंग हुई। लोगों ने केसरिया साफे पहनकर अपने परिवारों के साथ सेल्फी ली। इसके साथ ही परिसर के बाहर लोगों ने अपने-अपने घरों और लो फ्लोर बस पर बनाए गए कॉरिडोर के ऊपर से समारोह को देखा। इस दौरान परिसर के बाहर यातायात को मौजूद पुलिस के अधिकारियों ने कंट्रोल किया।<br /> <br /> हम केवल और केवल संगठन के लिए, क्षत्रिय जाति के कल्याण-उत्थान के लिए, तनसिंहजी के संदेश को आगे बढ़ाने के लिए काम करते हुए आगे बढ़े। संघ के पूर्वजों के संस्कारों को फिर से स्थापित करें। तनसिंह जी का मार्ग समाज में नई चेतना जागरण का काम करेगा। - <strong>गजेन्द्र सिंह शेखावत, केन्द्रीय जलशक्ति मंत्री</strong><br /> <br /> आज देश में लोकतंत्र है और लोकतंत्र में राजा का जनमत पेटी से होता है। समाज में पहले राजनीतिक चेतना नहीं थी, लेकिन अब समाज जाग रहा है। लोकतंत्र के लिए राजपूतों ने अपनी रियासतें त्याग दी थी। जब मैं एक साजिश के तहत जेल गया था तो संघ और प्रताप फाउंडेशन मेरे साथ खड़ा था। एकजुटता-अनुशासन सफलता के मंत्र हैं।- <strong>राजेन्द्र राठौड़, उपनेता प्रतिपक्ष </strong><br /> <br /> क्षत्रिय वही कहलाता है जो दलित, पिछड़े को बचाने के लिए लड़ने-मरने की ताकत रखता हो, जो भेदभाव नहीं करता हो। केन्द्र ईडब्ल्यूएस आरक्षण में आठ लाख की गारंटी खत्म करें। संघ हर गरीब के कल्याण-उत्थान का संदेश देता है। - प्रताप सिंह खाचरियावास, खाद्य मंत्री, राजस्थान <br /> <br /> संघ ने समाज को जोड़ा है। समाज के मुद्दों पर सरकार से सार्थक संवाद करता है। आरक्षण जैसे अहम मुद्दें पर संघ ने समाज के लिए राजनीतिक पार्टियों से प्रभावी और संवैधानिक संवाद किया है। - <strong>धर्मेन्द राठौड़, वरिष्ठ नेता, कांग्रेस </strong><br /> <br /> <strong>सीकर रोड पर रही जाम की स्थिति</strong><br /> हीरक जयंती समारोह के दौरान सीकर रोड, चौमूं पुलिया, झोटवाड़ा रोड, खातीपुरा रोड, कालवाड़ रोड, मुरलीपुरा सहित आसपास के इलाके में जाम की स्थित रही। समारोह में प्रदेशभर के अलग-अलग जिलों से लाखों की संख्या में लोग शामिल हुए थे। भीड़ को देखते हुए पुलिस और समारोह प्रबंधन समिति ने पुख्ता इंतजाम कर रखे थे। प्रबंधन समिति की तरफ  से लगे वॉलंटियर ने चिन्हित प्वाइंट पर तैनात रहकर बाहर से आने वाले लोगों को रास्ता समझाकर समारोह तक पहुंचाया। इस कारण किसी भी जगह पर जाम लंबा नहीं चला। यातायात के भारी दबाव के कारण ही इन मार्गों पर वाहनों की गति धीमी होने से हल्का जाम रहा था।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
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                <pubDate>Thu, 23 Dec 2021 11:03:56 +0530</pubDate>
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