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                <title>खेत बने तालाब...फसलें तबाह, काश्तकारों के अरमानों पर फिरा पानी</title>
                                    <description><![CDATA[मवेशियों के लिए चारा तक नहीं बचा।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/fields-turned-into-ponds---crops-destroyed--farmers--hopes-shattered/article-89782"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-09/1rtrer-(1)9.png" alt=""></a><br /><p>सांवतगढ़। सांवतगढ़ सहित आसपास के क्षेत्र में लगातार हो रही बारिश से सैकड़ों बीघा खेतों में पानी भर गया है। इस वजह से फसलें तबाह हो गई है। ऐसे में किसानों के अरमानों पर पानी फिर गया। लंबे समय जिसे फसल को तैयार किया और उसक कटने का मौका आया तो पानी भरने से गल गई। ऐसे में अन्नदाताओं की सारी मेहनत पर पानी फिर गया और लाखों रुपए खर्च करने और दिन रात जागकर फसल की रखवाली की लेकिन  उनको मुनाफे के नाम पर एक ढेला तक नहीं मिल पाया। किसानों का आरोप है कि अभी तक प्रशासन द्वारा कोई सर्वे नहीं करवाया गया है। किसानों का कहना है कि बाजार से महंगे उर्वरक खरीदकर के हमने उड़द, मक्का, सोयाबीन, धान की फसलों की बुवाई की थी लेकिन लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी भर गया है और फसलें लगातार नष्ट हो रही है। जिससे हमें आर्थिक नुकसान हो रहा है। अभी तक फसल खराबे को लेकर कोई सर्वे नहीं करवाया गया है। इसको लेकर भी हम असमंजस में हैं। सरकार और प्रशासन से अनुरोध है कि जल्द ही सर्वे करवाकर हमको फसल खराबे का उचित मुआवजा दे।</p>
<p><strong>खाळ पर बनी दोनों पुलिया के उपर 2 फिट पानी, आवागमन बाधित</strong><br />सांवतगढ़ के नैनवां रोड पर बनी खाळ की पुलिया पर 2 फीट तक पानी की चादर चलने आवागमन बाधित हो गया और यात्रियों को परेशानी का सामना करना पड़ा। बूंदी से जयपुर जाने वाली रोडवेज बस को सांवतगढ़ से ही वापस बूंदी डिपो के लिए लौटना पड़ा। साथ ही निजी बसें भी इस रूट पर नहीं आई। ग्रामीणों का कहना है कि इस पुलिया की ऊंचाई कम होने के कारण बरसात के दिनों में बार-बार आवागमन बाधित हो जाता है। इधर, सोरण रोड पर खाळ पर बनी पुलिया के ऊपर भी पानी का तेज बहाव रहा जिससे गली मोहल्लों और खेतों में पानी घुस गया।</p>
<p><strong>क्षेत्रवासियों की पीड़ा</strong><br />करीब 6 बीघा मक्का सोयाबीन की फसल की बुवाई की थी लगातार हो रही बारिश से खेतों में पानी भर जाने से फसल चौपट हो गई है। प्रशासन से विनम्र अनुरोध है कि सर्वे करवाकर उचित मुआवजा दिलवायें।<br /><strong>- किसान राकेश किराड,सांवतगढ़।</strong></p>
<p>चार बीघा मक्का की फसल में लगातार हो रही बारिश से फसल जल मग्न हो गई है। महंगे उर्वरक लाकर बुवाई की थी लेकिन अब 1 रुपए की भी आमदनी के आसार नहीं है।<br /><strong>- किसान सोजीलाल प्रजापत,सांवतगढ़।</strong></p>
<p>14 बीघा में उड़द की फसल की बुवाई की थी अब तक 12 बीघा उड़द की फसल पूरी तरह से नष्ट हो चुकी है। और बची हुई फसल भी नष्ट होने के कगार पर हैं।<br /><strong>- किसान रामधन नागर,सांवतगढ़।</strong></p>
<p>खाळ का पानी खेतों में भर गया है जिससे 5 बीघा धान 3 बीघा उड़द और 2 बीघा मक्का की फसल नष्ट हो गई है। और साथ ही पशुओं के चारे में भी पानी भर गया है। अन्य जगह नहीं होने के कारण पशुओं को भी पानी में बांधने के लिए मजबूर हैं।<br /><strong>- किसान रामरतन नागर सांवतगढ़।</strong></p>
<p>लगातार बारिश और खाळ का पानी खेत में भर जाने से 5 बीघा मक्का और 1 बीघा उड़द की फसल पूरी तरह से गल गई है। जिससे आर्थिक नुकसान वहन करना पड़ रहा है। <br /><strong>- किसान पप्पू किराड सांवतगढ़।</strong></p>
<p>सार्वजनिक निर्माण विभाग की अनदेखी के चलते सांवतगढ़ से बांसी जाने वाले रास्ते पर छोटी पुलिया बना दी गई। जबकि ग्रामीणों ने यहां पिलर वाली बड़ी पुलिया बनाने की मांग की थी। लेकिन उस वक्त विभागीय अधिकारियों ने बात को अनसुना कर दिया। और नतीजा यह हुआ कि आज बरसात के दिनों में यह मार्ग बंद हो जाने से कई राहगीर परेशान होते हैं।<br /><strong>- रामप्रसाद राठौर,सांवतगढ़।</strong></p>
<p>सांवतगढ़ खाळ की पुलिया पर चादर चलने से बसों को अन्य रूट से ले जाना पड़ा जिससे डीजल का अधिक भार वहन करना पड़ा और यात्री भी परेशान रहे। <br /><strong>- शंकर गुर्जर,निजी बस संचालक।</strong></p>
<p>ग्राम सांवतगढ़ में बारिश से किसानों की फसलों को भारी नुकसान हुआ है व जल मग्न हो गई है । सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा बांसी रोड़ पर पुलिया छोटी व कम ऊंचाई की बनाने के कारण खेतों में पानी भर गया। आवागमन के साधन बाधित हो गए जिससे किसानों व आमजन को भारी समस्या का सामना करना पड़ रहा है। इस बाबत क्षेत्रीय सांसद व उच्चाधिकारियों को अवगत करा दिया है। <br /><strong>- अर्चना कंवर, सदस्य पंचायत समिति हिंडोली।</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सभी पटवारी अपने-अपने क्षेत्र में गिरदावरी कर रहे हैं,जहां फसल खराब होगी उसको गिरदावरी में दर्शाया जाएगा। <br /><strong>- भूपेंद्र सिंह हाड़ा, नायब तहसीलदार, उप तहसील दबलाना</strong></p>
<p>पूरी तरह से सर्वे कर के ही सांवतगढ़ के खाळ की पुलिया बनाई गई है। अत्यधिक बारिश होने से यह हालात बन गए हैं। सभी बांधों के ओवरफ्लो के कारण करीब-करीब सब जगह ऐसे हालात बने हुए है। <br /><strong>- रामरतन नरानिया, एईएन, सार्वजनिक निर्माण विभाग नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 06 Sep 2024 18:06:16 +0530</pubDate>
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                <title>धूप से नहीं लापरवाही से टूटा हजारों पौधों का दम</title>
                                    <description><![CDATA[ठेकेदार का साढ़े पांच माह से अटका वेतन तो पानी हुआ बंद । ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/thousands-of-plants-died-due-to-carelessness--not-sunlight/article-73249"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-03/dhoop-s-nhi-laparwahi-s-tuta-hazaro-podho-ka-dum...kota-news-20-03-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास के अधिकारी अपने काम के प्रति कितने सजग और जिम्मेदार हैं, इसकी बानगी नए बस स्टैंड स्थित 80 फीट लिंक रोड पर नजर आती है। तीन किमी की सड़क पर डिवाइडर में लगे दर्जनों नन्हें पौधे जवां होने से पहले ही दम तोड़ चुके हैं तो कुछ खत्म होने की कगार पर हैं। वाहन चालकों के मददगार इन पौधों की दुर्दशा झुलसाने वाली धूप से नहीं बल्कि यूआईटी के जिम्मेदारों की लापरवाही से हुई है। हालात यह है, इन पौधों को करीब एक साल से पानी नहीं दिया गया। जिससे मुस्कुराती हरियाली मुरझा गई। दरअसल, वर्ष 2018 में यूआईटी ने 80 फीट क्षेत्र में सीसी सड़क का निर्माण करवाया था। इसके एक साल बाद ही वर्ष 2019 में डिवाइडरों में दर्जनों पौधे लगाए गए थे। शुरुआत में तो इसकी सही देखभाल हुई लेकिन मार्च 2023 के बाद से पौधों की सार-संभाल पर ध्यान नहीं दिया गया। ऐसे में 70 फीसदी पौधे सूखकर बर्बाद हो  गए। </p>
<p><strong>एक साल से नहीं मिला पौधों को पानी</strong><br />80 फीट रोड पर कार सर्विस दुकानदार हितेंद्र व रहवासी मनोज कुमार ने बताया कि यूआईटी के एईएन व जेईएन को पहले भी पानी के अभाव में पौधों के सूखने की शिकायत की थी लेकिन ध्यान नहीं दिया गया। उन्होंने बताया कि डीसीएम मार्ग को बोरखेड़ा चौराहे तक सड़क की लंबाई करीब 3 किमी है। इसमें नए बस स्टैंण्ड से आगे कैनाल से बोरखेड़ा चौराहे तक लगभग सभी पौधे सूख चुके हैं। 6 महीने से इस मार्ग पर पानी का टैंकर नहीं देखा है। यूआईटी अधिकारियों की लापरवाही से सड़क के डिवाइडर में लगे पौधे सूख चुके हैं। झाड़ियों में तब्दील हो गए हैं। जबकि, इन पौधों की सार-संभाल के लिए अधिकारियों ने ठेका दे रखा है। लेकिन, जिम्मेदार साइड पर जाते ही नहीं है, जिसका प्रत्यक्ष प्रमाण बर्बाद होते पौधे है। क्षेत्रवासियों के अनुसार, मार्च 2023 के बाद से ही पौधों को पानी नहीं मिला। जिसकी वजह से हरे-भरे पौधे झाड़ियों में बदल गए। </p>
<p><strong>क्या कहते हैं अधिकारी</strong><br />ठेकेदार का कुछ माह का पैमेंट रुका हुआ था, जिसकी वजह से वह पानी नहीं डाल रहा था। उसको बोल दिया है, आज से ही पानी डलवाना शुरू करवा दिया जाएगा। <br /><strong>- सागर मीणा, एईएन, यूआईटी</strong></p>
<p>मामला दिखता हूं। संबंधित अधिकारियों को पौधों की नियमित सार-संभाल के लिए पाबंद कर व्यवस्था सुनिश्चित करेंगे। <br /><strong>- कुशाल कोठारी,  सचिव, नगर विकास न्यास</strong></p>
<p>अक्टूबर 2023 से ही यूआईटी द्वारा भुगतान नहीं किया गया है। करीब 4 से 5 लाख का भुगतान अटका हुआ है। यह तीन किमी की सड़क है, जिसके डिवाइडर पर दर्जनों पौधे लगे हैं। इन्हें पानी देने के लिए एक बार में 10 से ज्यादा टैंकर लगते हैं। पैमेंट नहीं होने के कारण काम प्रभावित हुआ।<br /><strong>- प्रफूल पाठक, ठेकेदार</strong></p>
<p><strong>व्यापारियों का कहना है...</strong><br />80 फीट रोड पर पौधे सूख जाने से रात को सड़क की दोनों लेन से गुजरने वाले वाहनों की हाई बीम रोशनी चालकों की आंखों को चकाचौंध कर देती है। जिससे हादसों का खतरा बना रहता है। पहले पौधे बड़े व घने थे, जिससे वाहनों की रोशनी सीधे आंखों पर नहीं पड़ती थी। लेकिन अब स्थिति उलट है। तेज रोशनी के बीच स्पीड से दौड़ते वाहनों के कारण हादसे का खतरा बना रहता है। क्योंकि, हाई बीम की रोशनी बहुत तेज होती है और इससे दूसरी तरफ के ड्राइवर की आंखे पूरी तरह से ढक जाती है। जबकि, सड़कों के बीच में पौधे लगाने से हाई बीम की रोशनी सीधे आंखों तक नहीं पहुंच पाती। मार्च के बाद से यहां टैंकरों को पानी देते नहीं देखा। <br /><strong>- अजय कुश्वाह, अध्यक्ष, कुश्वाह समाज बोरखेड़ा</strong></p>
<p>डिवाइडरों में लाखों की कीमत के लगे पौधे पानी के अभाव में सूखकर बिखर चुके हैं। जगह-जगह से पौधे गायब हो गए। मार्च 2023 के बाद से पौधों को पानी नहीं दिया गया। एईएन, जेईएन व एक्सईएन कोई भी अधिकारी फिल्ड विजिट नहीं करते। बारिश व व्यापारी के भरोसे ही कुछ पौधे जीवित हैं। आसपास के दुकानदार ही पानी डालते हैं। लेकिन, यूआईटी द्वारा पौधों को टैंकरों से पानी नहीं दिया जाता। <br /><strong>- मोहित झाला, अध्यक्ष, 80 फीट व्यापार संघ</strong></p>
<p>यूआईटी अधिकारियों की लापरवाही के कारण पौधे पनपने से पहले ही उजड़ गए। लंबे समय से पौधों को पानी नहीं दिया जा रहा। ठेकेदार का भुगतान अटका होने से उसने भी टैंकर से पौधों को पानी देना बंद कर दिया। स्पीड से दौड़ते वाहनों के हाईबीम रोशनी के कारण हादसे का खतरा बना रहता है। वहीं, लेबर होते हुए भी सड़कों की सफाई नहीं होती। दिनभर धूल उड़ती है और अधिकतर रोड लाइटें भी बंद हैं। जिसकी शिकायत के बावजूद अधिकारी ध्यान नहीं देते।</p>
<p><strong>- बब्लू कसाणा, पार्षद, वार्ड 17</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 20 Mar 2024 17:33:45 +0530</pubDate>
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                <title> आए दिन हो रही बारिश, सब्जी उत्पादन चक्र ध्वस्त</title>
                                    <description><![CDATA[ बिगड़ते मौसम चक्र के कारण किसान, सब्जी विक्रेता और आमजन को नुकसान उठाना पड़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/it-is-raining-every-day--vegetable-production-cycle-collapses/article-53679"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/aye-din-ho-rhi-baarish,-sabzi-utpadan-chakra-dhvast...kota-news-04-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। मौसम की अनियमितता के चलते साल में बार-बार बारिश होने से   सब्जी उत्पादन  चक्र पर पड़ा है। इस बार मौसम में अधिक उतार-चढ़ाव की वजह से यह फसल चक्र ध्वस्त हो गया। पर्याप्त मात्रा में उत्पादन नहीं होने से मंडियों में सब्जी की आवक टूट गई। इससे उपभोक्ताओं को ऊंचे दाम देकर सब्जियां खरीदनी पड़ रही हैं। इस बार खरीफ सीजन में भी समय पर सब्जियों की बिजाई नहीं हो सकी। इससे अनुमान लगाया जा रहा है कि आने वाले समय में भी सब्जी के लिए तरसना पड़ सकता है। सब्जियों के दाम गिरने की भी संभावना नजर नहीं आ रही। बिगड़ते मौसम चक्र के कारण किसान, सब्जी विक्रेता और आमजन को नुकसान उठाना पड़ रहा है।</p>
<p><strong>उपलब्धता घटी, 300 से 240 ग्राम पर पहुंची</strong><br />कोटा जिले में किसान 15 जुलाई से 30 जुलाई तक टमाटर, शिमला मिर्च व हरी मिर्च के बीज की बुआई कर पौध की नर्सरी तैयार करते हैं। इसके अगस्त के मध्य या अंत तक पौधों की ट्रांसप्लांटिंग का उपयुक्त समय होता है। लगातार बरसात के बाद एकदम अधिक धूप के कारण जड़ गलन रोग लगने से पौध खराब हो गई। इस वजह से जिले में इन सब्जियों का क्षेत्रफल काफी कम हो गया है। वहीं सब्जियों की उत्पादकता जिस अनुपात में बढ़ने नहीं चाहिए वह भी नहीं है। मंडियों में प्रतिदिन सब्जी की उपलब्धता 300 ग्राम होनी चाहिए लेकिन मात्र 240 ग्राम सब्जियां ही प्रति व्यक्ति प्रतिदिन उपलब्ध हो पा रही है।</p>
<p><strong>खेती की लागत बढ़ी,रोग का भी प्रकोप</strong><br />सब्जियों की खेती पर सबसे ज्यादा असर जलवायु परिवर्तन के कारण पड़ रहा है, जिसका नतीजा यह है कि असामयिक अधिक बरसात और अधिक ठंड के कारण सब्जियों की खेती की लागत बढ़ने के साथ ही सब्जियां जल्दी खराब भी हो रही हैं। जलवायु परिवर्तन के कारण किसान गुणवत्तायुक्त सब्जी उत्पादन नहीं कर पा रहा है वहीं सब्जियों पर कीट एवं रोग का प्रभाव अधिक हो रहा है। सब्जियों के पौधे रसदार, तेज वृद्धि वाले और जल्दी फल एवं बीज देने वाले होते हैं। असमय वर्षा होने से सब्जी के पौधे पर बहुत अधिक असर पड़ता है। इससे सब्जियों का उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत कम हो जाता है। </p>
<p><strong>बारिश के पैटर्न में आया बदलाव</strong><br />कृषि विशेषज्ञ शैलेन्द्र कुमार ने बताया कि कृषि की उत्पादकता वर्षा एवं इसकी मात्रा पर निर्भर करती है। वर्षा की मात्रा व तरीकों में परिवर्तन से मृदा क्षरण और मिट्टी की नमी पर प्रभाव पड़ता है। जलवायु के कारण तापमान में वृद्धि से वर्षा में कमी होती है जिससे मिट्टी में नमी समाप्त होती जाती है। इसके अतिरिक्त तापमान में कमी व वृद्धि होने का प्रभाव वर्षा पर पड़ता है। कोटा शहर में पिछले कुछ सालों से असमय बारिश हो रही है। आए दिन बारिश के कारण खरीफ व रबी में सब्जियों का उत्पादन प्रभावित हो रहा है। सब्जी की फसल तैयार होने के बाद असमय बारिश से उसकी गुणवत्ता खराब हो जाती है। </p>
<p><strong>वर्ष 2023-24 में सब्जियों का घटा रकबा</strong><br />सब्जियां  लक्ष्य  बुवाई<br />टमाटर - 125 - 85<br />भिंडी - 300 - 153<br />बैंगन - 100 - 73<br />प्याज - 100 - 84<br />मिर्च - 50 - 45<br />लौकी - 100 - 43<br />गोभी - 75 - 38</p>
<p><strong>कोटा शहर में बरसात का ग्राफ</strong><br />2023 में - 422.4 मिमी<br />2021 में - 1167 मिलीमीटर<br />2022 में - 1289 मिलीमीटर</p>
<p><strong>असमय बारिश से यह पड़ा प्रभाव</strong><br />- असामयिक अधिक बरसात से सब्जियों की खेती की लागत बढ़ी<br />- नमी होने से जल्दी खराब होने लगी सब्जियां <br />- जलवायु परिवर्तन के कारण सब्जियों की गुणवत्ता बिगड़ी<br />- सब्जियों पर कीट एवं रोग का प्रभाव बढ़ा<br />- हर साल सब्जियों का उत्पादन 30 से 40 प्रतिशत तक हुआ कम</p>
<p><strong>अब आगे क्या होगा असर</strong><br />- असमय वर्षा से सब्जियों का स्वाद होगा खराब<br />- हर साल सब्जियों का रकबा घटने लगेगा<br />- सब्जी की फसलों में खरपतवार की मात्रा बढ़ेगी<br />- कीट-पतंगों तथा रोगजनकों की श्रेणी का होगा विस्तार <br />- जलवायु में परिवर्तन से जल चक्र होगा समाप्त <br />- मिट्टी की नमी में कमी आने से घटेगा उत्पादन<br />- सब्जियों के दामों में निरन्तर होगा इजाफा</p>
<p><strong>जिले में सब्जियों के उत्पादन का ग्राफ</strong><br />वर्ष    रकबा    उत्पादन<br />2020-2021    33676    204500<br />2021-2022    34689    190985<br />2022-2023    32361    181262<br />[रकबा हैक्टेयर में उत्पादन मीट्रिक टन में]</p>
<p>कुछ वर्षो पहले सब्जी की खेती से काफी मुनाफा होता था। अब पिछले दो-तीन सालों से असमय बारिश के कारण सब्जियों में खराबा ज्यादा हो रहा है। बारिश से सब्जियों की गुणवत्ता प्रभावित होती है। इससे मंडियों में भाव कम मिलता है और किसान को नुकसान उठाना पड़ता है।<br /><strong>- रामभरोस धाकड़, किसान अर्जुनपुरा</strong></p>
<p>मौसम चक्र बिगड़ने का खामियाजा सब्जी विक्रेताओं को भी उठाना पड़ता है। बारिश से सब्जियों में नमी आ जाती है। जिससे इनकों ज्यादा दिन तक स्टोर करके नहीं रखा जा सकता है। ऐसे में कई बार में ग्राहकों को कम दाम में सब्जियां बेचनी पड़ती है। जिससे सब्जी विक्रेता को काफी नुकसान होता है।<br /><strong>-अशोक अग्रवाल, प्रमुख सब्जी विक्रेता</strong></p>
<p>असमय बारिश के कारण जिले में सब्जियों का रकबा घटने लगा है। हर साल बुवाई के लक्ष्य बढ़ाए जाते हैं, लेकिन किसानों का रुझान कम होने से लक्ष्य पूरा नहीं हो पाता है। बारिश से सब्जियां स्वादहीन हो जाती है। जिससे बिक्री पर प्रभाव पड़ता है।<br /><strong>- आनन्दीलाल मीणा, उपनिदेशक उद्यान विभाग </strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट  व्यू</strong><br />जलवायु परिवर्तन से सब्जियों की खेती को बचाने के लिए किसानों को संरक्षित खेती की तकनीक की तरफ बढ़ना होगा। इस तकनीक में अधिक तापमान, कम तापमान, असमय वर्षा, कीट एवं बीमारी से होने से नुकसान को बचाया जा सकता है। संरक्षित खेती के लिए ग्लास हाउस, पाली हाउस, नेट हाउस, ग्रीन हाउस और पानी टनल का इस्तेमाल करना होगा।<br /><strong>- डॉ. बिजेन्द्र सिंह कृषि विशेषज्ञ</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Aug 2023 18:14:03 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असर खबर का - पीपलखेड़ी सरपंच से वसूले जाएंगे 9 लाख 21 हजार रुपए</title>
                                    <description><![CDATA[उक्त राशि को सात दिन के अंदर जमा कराना होगा। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/effect-of-news---9-lakh-21-thousand-rupees-will-be-recovered-from-peepalkhedi-sarpanch/article-53035"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-07/47.jpg" alt=""></a><br /><p>केलवाड़ा। पीपलखेड़ी ग्राम पंचायत के सरपंच ने जेसीबी की सहायता से करीबन 10 लाख पक्के खरंजे को उखाड़ कर पत्थरों को निजी एवं सरकारी निर्माण कार्य में लगाने की खबर दैनिक नवज्योति ने प्रमुखता के साथ प्रकाशित की थी। दैनिक नवज्योति की खबर के बाद प्रशासन हरकत में आ गया और खबर का बड़ा असर देखने को मिला। ग्राम पंचायत पीपलखेड़ी सरपंच के खिलाफ पत्थरों का पक्का खरंजा खुर्दबुर्द करने के आरोप की जांच कराने के बाद शाहाबाद बीडीओ छुट्टनलाल मीणा ने सरपंच से  खरंजा निर्माण में खर्च हुई राशि 9 लाख 21 हजार रुपए की वसूली करने के लिए सात दिन का समय देते हुए नोटिस जारी किया है।</p>
<p>सरपंच की ओर से किसी सक्षम अधिकारी की स्वीकृति लिए बिना पद का दुरुपयोग करते हुए पीपलखेड़ी पंचायत की परिसंपत्ति खरंजे को खुर्दबुर्द किया। इस नुकसान की भरपाई के लिए पंचायत समिति की ओर से सरपंच  को खरंजा निर्माण में खर्च हुई राशि 9 लाख 21 हजार रुपए का वसूली नोटिस जारी किया गया है। बीडीओ मीणा के अनुसार उक्त राशि को सात दिन के अंदर जमा कराना होगा अन्यथा पंचायती राज एक्ट के मुताबिक सरपंच मेहता के खिलाफ उचित कार्रवाई की अमल में लाई जाएगी।</p>
<p>ग्राम पंचायत पीपलखेड़ी सरपंच पर हनुमान मंदिर से लेकर मुक्तिधाम तक वर्ष 2017-18 में बनाए गए पत्थरों के पक्के खरंजे को खुर्दबुर्द करने का आरोप लगाया गया था। सरपंच पर लगे आरोपों की जांच करने के लिए टीम का गठन कर पड़ताल की गई। जिसमें सरपंच के खिलाफ लगाए गए आरोप सही पाए गए। <br /><strong>- छुट्टनलाल मीणा, बीडीओ। </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Jul 2023 12:44:43 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>प्राकृतिक आपदा से जमींदोज हो रही अरबों की फसल</title>
                                    <description><![CDATA[कोटा संभाग में कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ जिलों की लगभग 22 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि में रबी एवं खरीफ फसल की बुवाई की जाती है। प्रतिवर्ष लगभग 16 हजार से 20 हजार करोड़ रुपए की फसलों का विक्रय कृषि उपज मंडियों सहित निजी क्षेत्र में होता है। लेकिन पिछले तीन सालों से यह उम्मीद भी धराशायी होती जा रही है। अतिवृष्टि के कारण फसलें खराब होने से किसानों को नुकसान हो रहा है।  ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/crops-of-billions-getting-grounded-due-to-natural-calamity/article-26436"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-10/prakratik-aapda-se-zamidoj-ho-rahi-arbo-ki-fasal...kota-news-13.10.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। प्राकृतिक आपदा से कोटा संभाग में हर साल अरबों रुपए की फसलें बर्बाद हो रही है। इसके बावजूद सरकार की ओर से न तो समय पर मदद मिल रही और न ही इस आपदा से बचाव के सम्बंध में कोई उपाय किए जा रहे हैं। रबी व खरीफ सीजन में प्राकृतिक आपदा किसानों पर कहर बन कर टूट रही है। सरकार केवल सर्वे तक ही सीमित है और मुआवजा दूर की कौड़ी बना हुआ है। पिछले तीन सालों से लगातार अतिवृष्टि किसानों को बर्बाद कर रही है। इसके बाद भी सरकार इस समस्या के समाधान को लेकर गम्भीर नहीं है। </p>
<p><strong>कई योजनाएं चलाई, लेकिन धरातल पर नजर नहीं आई</strong><br />खेती-किसानी को बढ़ावा देने के लिए केन्द्र सरकार व राज्य सरकार ने कई योजनाएं चला रखी है। इसके बावजूद धरातल पर इसका लाभ किसानों को मिलता हुआ नजर नहीं आ रहा है। इन योजनाओं का लाभ लेने केॉ लिए कई नियम बना रखे हैं। नियमों की पेचिदगियों के कारण अधिकांश किसानों को इन योजनाओं का लाभ नहीं मिल पाता है। ऐसे में सालभर तक किसान बुवाई से लेकर कटाई होने तक समस्याओं से ही जूझता रहता है। विभागीय अधिकारी भी योजनाओं को लेकर केवल विशेष प्रयास नहीं करते हैं। इससे हर साल किसान अतिवृष्टि के कारण बर्बाद होता जा रहा है।  </p>
<p><strong>कोटा संभाग में 22 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि</strong><br />कोटा संभाग में कोटा, बूंदी, बारां, झालावाड़ जिलों की लगभग 22 लाख हैक्टेयर कृषि भूमि में रबी एवं खरीफ फसल की बुवाई की जाती है। संभाग में प्रमुख रूप से सोयाबीन, धान, लहसुन, धनिया, सरसों, मक्का, ज्वार आदि  की बुवाई होती है। प्रतिवर्ष लगभग 16 हजार से 20 हजार करोड़ रुपए की फसलों का विक्रय कृषि उपज मंडियों सहित निजी क्षेत्र में होता है। एक अनुमान के मुताबिक फसलों के उत्पादन में लगभग 8 हजार से10 हजार करोड़ रुपए की लागत डीएपी, यूरिया पेस्टिसाइड, डीजल, विद्युत खर्च एवं बीज आदि क्रय करने में खर्च करने पड़ते हैं। इसके बाद भी 6 हजार से 10 हजार करोड़ रुपए किसानों को हाथ में आने की उम्मीद रहती थी, लेकिन पिछले तीन सालों से यह उम्मीद भी धराशायी होती जा रही है। अतिवृष्टि के कारण फसलें खराब होने से किसानों को नुकसान हो रहा है। अब तो किसान  खेती को घाटे का सौदा मानने लगा है।  </p>
<p><strong>केवल सलाह देने तक सिमटा कृषि विभाग</strong><br />खेतों में फसलों का उत्पादन बढ़ाने और किसानों की आर्थिक उन्नति के लिए सरकार ने कृषि विभाग बना रखा है और उपखंड स्तर तक कृषि अधिकारियों की नियुक्ति कर रखी है। इसके बावजूद विभागीय अधिकारियों का काम केवल सलाह देने तक ही सिमट कर रह गया है। कृषि पर्यवेक्षकों को पदों के हिसाब से गांवों की जिम्मेदारी दे रखी है, लेकिन यह कभी-कभार ही खेतों तक जाते हैं। किसानों ने बताया कि कृषि पर्यवेक्षक आॅफिस में ही बैठकर खेतों की जानकारी कर लेते हैं। मौके पर जाकर देखते नहीं है। इससे किसानों को उचित सलाह नहीं मिल पाती है। प्राकृतिक आपदा पर फसलों को नुकसान होने के बाद कृषि विभाग के अधिकारी व कर्मचारी खेतों की तरफ दौड़ लगाते हैं। फिर नुकसान का सर्वे करने के बाद गायब हो जाते हैं। ऐसे में अतिवृष्टि के बाद फसलों के बचाव के सम्बंध में कोई जानकारी नहीं मिल पाती है।</p>
<p><strong>मुआवजे के लिए पथरा गई आंखें  </strong><br />किसानों का कहना है कि अक्टूबर माह में इस बारिश से किसानों की फसलें खराब ही नहीं हुई है बल्कि उनकी उम्मीदें, सपने और अरमानों पर भी पानी फिर गया। दु:ख इस बात का है कि सब कुछ तैयार था। फसल अच्छी थी। बाजार में विक्रय के लिए आने वाली थी। इससे पहले इस तरह प्राकृतिक आपदा कहर बन कर टूटी। अब केवल सरकार से कुछ आस बची है, लेकिन मदद की उम्मीद काफी कम नजर आ रही है। किसानों का कहना है कि सरकार सर्वे करवाएगी और फिर कई दिनों बाद रिपोर्ट आएगी। फिर बीमा कम्पनियां सरकारी अधिकारियों से मिलकर मुआवजा शून्य कर देगी। अब तक ऐसा ही हुआ है। </p>
<p>किसानों को पिछले दो-तीन साल से खराबे का मुआवजा नहीं मिल रहा, जिसको लेकर किसान परेशान हैं।  बैंकों में लोन लेने पर फसल बीमा के नाम पर रकम काट ली जाती है, लेकिन बीमा क्लेम का भुगतान नहीं मिल रहा है। बेमौसम हुई बारिश से सोयाबीन, मक्का, उड़द की फसल पूरी तरह तबाह हो गई, जिसके कारण किसान पूरी तरह टूट चुका है। प्राकृतिक आपदा के बाद भी कोई मदद कृषि विभाग द्वारा नहीं की जाती है। ऐसे में पूरी फसल बर्बाद हो जाती है।  <br /><strong>- रामकिशोर धाकड़, अग्रणी किसान दीगोद</strong></p>
<p>किसानों का प्रतिनिधित्व राज्य सरकार एवं राजनीतिक दलों में विगत 20 _ 25 वर्षों से समाप्त होने के कारण आज किसानों की स्थिति दयनीय होती जा रही है। 1990-1995 के बाद से कृषि पर आधारित सभी उद्योगों को सरकार ने मृतप्राय: घोषित कर दिया है। कोटा संभाग सोयाबीन, गन्ना, धान, लहसुन उत्पादक क्षेत्र होने के बावजूद किसानों को संबल नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में किसान दिनों-दिन बर्बाद होता जा रहा है। सरकार भी केवल सर्वे तक ही सीमित है। ऐसे में आगामी दिनों में खेती पर और संकट बढ़ेगा।<br /><strong>- दशरथ कुमार, किसान नेता</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है...</strong><br />केन्द्र सरकार व राज्य सरकार ने खेतीबाड़ी के लिए कई योजनाएं चला रखी है। इसके लिए बकाया अनुदान दिया जाता है। फसल को मवेशियों से बचाने के लिए तारबांदी योजना, कृषि आदान वितरण योजना, सिंचाई के लिए सौर ऊर्जा योजना चला रखी है। प्राकृतिक आपदा से बचाव के सम्बंधित कोई योजना नहीं है। <br /><strong>- आनन्दीलाल मीणा, उपनिदेशक उद्यान विभाग</strong></p>
<p>यह सही है कि हर साल प्राकृतिक आपदा से किसानों को काफी नुकसान पहुंच रहा है। इस साल कई बार हुई अतिवृष्टि से किसानों को नुकसान हुआ है। इस सम्बंध में सर्वे शुरू कर दिया गया। वहीं बीमित किसानों के लिए एडवाइजरी जारी कर दी गई है। वह फसल नुकसान की जानकारी बीमा कंपनियों के प्रतिनिधियों को दे सकते हैं। <br /><strong>- खेमराज शर्मा, उपनिदेशक कृषि विभाग</strong></p>
<p><strong>एक्सपर्ट व्यू</strong><br />भारत में पर्यावरण असंतुलन के चलते प्राकृतिक आपदाओं की घटनाएं पिछले कुछ सालों से ज्यादा हो रही है। इससे खेती को काफी नुकसान पहुंच रहा है। यह सही है कि हम प्राकृतिक आपदा को नहीं रोक सकते हैं, लेकिन आपदा के फसल को बचाने का प्रयास तो कर ही सकते हैं। इसके लिए कृषि विभाग को ज्यादा प्रयास करना होगा। आपदा प्रभावित क्षेत्रों में कर्मचारियों की टीमें भेजनी चाहिए ताकि वह किसानों को फसल के सम्बंध में उचित सलाह दे सकें। उचित समय पर फसल को खेतों को निकाल कर सुखाने के उपाय बताएं जाएं, इससे किसानों को काफी मदद मिल सकेगी और नुकसान भी कम होगा।<br /><strong>- जगन्नाथ गुप्ता, पूर्व सहायक कृषि अधिकारी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 13 Oct 2022 15:10:18 +0530</pubDate>
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                <title>फ्रांस में भीषण आग, 7 हजार हेक्टेयर जंगल नष्ट</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकारियों ने बताया कि शराब उत्पादन के केंद्र के दक्षिण-पूर्व में लगभग 30 किलो मीटर लगी आग ने कुछ घरों को तबाह कर दिया और 10 हजार लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/fire-of-france-7-thousand-forest-destroyed/article-18802"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/46546546544.jpg" alt=""></a><br /><p>बोर्डिओक्स। दक्षिण-पश्चिमी फ्रांस में बोर्डिओक्स के पास जंगल में भीषण आग लग गई। इसके कारण अब तक लगभग 7,400 हेक्टेयर जंगल नष्ट हो चुके है। फ्रांस के अधिकारियों ने बताया कि शराब उत्पादन के केंद्र के दक्षिण-पूर्व में लगभग 30 किलो मीटर लगी आग ने कुछ घरों को तबाह कर दिया और 10 हजार लोगों को पलायन करने के लिए मजबूर कर दिया है।</p>
<p>दक्षिण-पश्चिमी फ़्रांस में गारोन नदी पर बंदरगाह शहर अपने गॉथिक कैथेड्रेल सेंट-आंद्रे के लिए जाना जाता है। इसके अलावा यहां 18वीं और 19वीं सदी की हवेली और म्यूजी डेस ब्यूक्स-आट्र्स डी बोर्डो कला संग्रहालय है। दमकलकर्मी ग्रेगरी एलियोन ने फ्रांस के आरटीएल रेडियो को बताया कि आग भीषण और भयावह है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 12 Aug 2022 11:02:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>किसानों को बेच दिया अवधिपार बीज, फसलें हो गई तबाह</title>
                                    <description><![CDATA[जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित गुढानाथावतान सहकारी समिति से किसानों को अवधि पार बीज बेच दिया गया। जिससे किसानों की फसलें तबाह हो गई। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/expired-date-seed-sold-to-farmers--crops-destroyed/article-18609"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/kisano-ko-awadhipar-beej-bundi-10.8.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>बूंदी। जिला मुख्यालय से करीब 15 किलोमीटर दूर स्थित गुढानाथावतान सहकारी समिति से किसानों को अवधि पार बीज बेच दिया गया। जिससे किसानों की फसलें तबाह हो गई। जब इस मामले की शिकायत की गई और जांच में सामने आया कि किसानों को मनमाफिक कीमत से अवधी पार बीज बेच दिए गए है। इस पर जांच गड़बड़ी सामने आने पर गुढानाथावतान सहकारी समिति का लाइसेंस निरस्त कर दिया गया है। जानकारी के अनुसार अवधि पार बीज देने से गुढानाथावतान गांव के 8 किसानों की फसलें तबाह हो गई। गांव के किसानों में शंकर पुत्र उदालाल मीणा,प्रेमशंकर पुत्र मूलचंद मीणा,नटी बाई मीणा,शंभूलाल मेघवाल और कैलाश कुशवाह को अवधिपार बीज विक्रय कर दिया गया। जिससे इनकी फसलें बर्बाद हो गई। सहकारी समिति ने किसी को 500 रुपए पैकेट और किसी को 580 रुपए के पैकेट की दर से मनमर्जी से बीज बेचान किया।</p>
<p>गड़बड़ी सामने आने पर पहले तो समिति के पदाधिकारियों ने किसानों की शिकायत पर हर संभव प्रयास कर मामले को दबाने की कोशिश की। निराश किसान ने जब इसकी शिकायत राजस्थान सरकार के पोर्टल पर दर्ज की तो शिकायत को खारिज कराने को लेकर समिति के जिम्मेदारों ने झूठे गवाह के बयान फ र्जी हस्ताक्षर कर पोर्टल पर शिकायत को झूठा साबित करने की भी साजिश की गई। इसकी जानकारी मिलने पर झूठे गवाह बनाने पर मोनू कुशवाह पुत्र सत्यनारायण द्वारा सदर थाना पुलिस को समिति के पदाधिकारी के खिलाफ 30 जुलाई 2022 को शिकायत सौंपी। ऐसे में न्याय की उम्मीद लिए किसान जब जिला कलक्टर डॉ रविंद्र गोस्वामी के पास पहुंचे तो उन्होंने त्वरित कार्यवाही करते हुए जांच के लिए उपनिदेशक कृषि विस्तार आदेश जारी कर दिए। इसके बाद उपनिदेशक कृषि ने जांच के लिए ग्राम सेवक को मौका देखकर कर उचित कार्रवाई की जिम्मेदारी सौंपी। दुबारा हुई जांच में भी मिली गड़बड़ी उपनिदेशक कृषि द्वारा समिति बनाकर मामले की जांच करवाई, तो इसमें पाया गया कि समिति द्वारा अवधिपार बीज का बेचान करने के साथ ही किसानों से मनमाफि क दाम भी वसूल लिए। ऐसे में समिति के खिलाफ कार्रवाई करते हुए उपनिदेशक कृषि विस्तार केंद्र से 14 दिवस के लिए लाइसेंस निलंबित कर दिया है। किसान महावीर पालीवाल का कहना है समिति ने अवधि पार बीज का बेचान किया जिसके चलते मेरी 20 बीघा की फ सल खराब हो गई। समिति में शिकायत करने पर मुझ पर दबाव बनाया गया व कलेक्टर साहब से शिकायत की तो न्याय की उम्मीद जगी। किसान गिर्राज मेघवाल ने बताया कि मुझे गुमराह करके मामले को दबाने के लिए मुझसे फ र्जी साइन करवाये गए जिसकी शिकायत सदर थाना पुलिस को कर दी गयी है। जांच करने में सामने आया कि किसानों को अवधि पार बीज बेच दिया गया।</p>
<p>बीज के दाम भी मनमर्जी से वसूल लिया गया। जांच में गड़बड़ी पकड़े जाने पर गुढानाथावतान ग्राम सहकारी समिति का लाइसेंस 14 दिवस के लिए रद्द कर संबंधित रिपोर्ट आगे की कार्यवाही के लिये जिला कलेक्टर को सौंप दी है। - रमेश चंद जैन, उपनिदेशक कृषि विस्तार केंद्र बूंदी</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 10 Aug 2022 16:20:18 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>शुद्ध के लिए युद्ध अभियान:  हेल्थ डिपार्टमेंट ने मैन्युफेक्चरिंग फैक्ट्री में खीरमोहन में लगे कीड़े</title>
                                    <description><![CDATA[गंगापुर सिटी। हेल्थ डिपार्टमेंट ने शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में गुरुवार को गंगापुरसिटी और वजीरपुर में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने गर्ग मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट की वजीरपुर स्थित मैन्युफेक्चरिंग फैक्ट्री कृष्णा चिलिंग सेंटर पर खीरमोहन में कीड़े लगने, मधुमक्खी और झींगुर पड़े हुए होने पर करीब 1 लाख रुपए का 300 किलो खीरमोहन को मौके पर ही नष्ट करवाया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/tonk/war-campaign-for-the-net/article-12911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/shudh-ke-liye-yudd.jpg" alt=""></a><br /><p>गंगापुर सिटी। हेल्थ डिपार्टमेंट ने शुद्ध के लिए युद्ध अभियान में गुरुवार को गंगापुरसिटी और वजीरपुर में बड़ी कार्रवाई की। टीम ने गर्ग मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट की वजीरपुर स्थित मैन्युफेक्चरिंग फैक्ट्री कृष्णा चिलिंग सेंटर पर खीरमोहन में कीड़े लगने, मधुमक्खी और झींगुर पड़े हुए होने पर करीब 1 लाख रुपए का 300 किलो खीरमोहन को मौके पर ही नष्ट करवाया। फैक्ट्री में मावा बहुत पुराना दिखाई देने पर करीब 75 हजार रुपए का 300 किलो मावा और करीब 82 हजार रुपए का 165 लीटर लूज घी सीज किया गया। सीएमएचओ डॉ. तेजराम मीना ने बताया कि गंगापुर सिटी और वजीरपुर में अलग-अलग ब्रांड के घी और अन्य सामग्रियों के सैंपल लिए गए।</p>
<p>विभाग के फूड सेफ्टी अधिकारी विरेन्द्र कुमार और उनकी टीम ने गंगापुर सिटी स्थित मैसर्स गर्ग मिल्क एंड फूड प्रॉडक्ट्स के यहां से 4 सैम्पल लिए। 1 सैम्पल लूज घी, 1 सैम्पल पनीर, 1 सैम्पल मावा और 1 सैम्पल खीरमोहन के लिए गए। साथ ही 165 लीटर लूज घी सीज किया गया जिसकी कीमत करीब 82 हजार 500 रुपए है। गंगापुर सिटी की गर्ग मिल्क एंड फूड प्रोडक्ट की वजीरपुर स्थित मैन्युफेक्चरिंग फैक्ट्री कृष्णा चिलिंग सेंटर पर भी विभाग ने कार्रवाई की। फैक्ट्री में खीरमोहन में कीड़े लगे हुए थे, मधुमक्खी, झींगुर पड़े हुए होने पर करीब 1 लाख रुपए का 300 किलो खीरमोहन मौके पर ही नष्ट करवाया गया, साथ ही चाशनी को भी नष्ट करवाया गया।</p>
<p>फैक्ट्री में ही मौजूद मावा बहुत पुराना दिखाई देने के संदेह पर और मावे की क्वालिटी को देखते हुए करीब 75 हजार रुपए का 300 किलो मावा सीज किया गया। सैम्पल की रिपोर्ट आने के पश्चात फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट 2006 के सीज किए गए घी और मावे पर कार्रवाई की जाएगी। सीएमएचओ डॉ. तेजराम मीना ने सभी लोगों से अपील की लूज या खुला हुआ घी काम में नहीं लें। यह किसी भी प्रकार से सेहत के लिए फाय्देमंद नहीं है। इस लूज घी में पाम आॅयल अथवा अन्य प्रकार के तेल होते हैं, जो हानिकारक हैं। दुकानदार वनस्पति तेल, पाम आॅयल को घी, पूजा-दीया बाती के लिए काम में आने वाला घी बता कर बेचते हैं।</p>
<p>बहुत ही कम कीमत में बाजार में मिलने वाला घी, घी ना होकर नकली, मिलावटी वनस्पति अथवा पाम आॅयल होते हैं। इसलिए जब भी घी खरीदें हमेशा उस पर लिखे हुए लेबल, सामग्री आदि के बारे में पढ़कर जांच परख कर ही खरीदें। कम कीमत में मिलने वाले घी को कई परिवार जन अपने घर की गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं के लिए खरीद कर प्रयोग में लाते हैं, ऐसा घी गर्भवती महिलाओं, धात्री महिलाओं के लिए लाभदायक ना होकर अत्यधिक घातक है। साथ ही ऐसे पदार्थ युवा पीढ़ी के लिए भी घातक हैं। ऐसे पदार्थों का सेवन युवाओं की नस्ल भी खतरे में पड़ रही है। ऐसे में सभी लोग शुद्व घी का प्रयोग करें।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Jun 2022 15:51:45 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सास-देवरानी को फंसाने के लिए खुद उजाड़ी अपनी गोद</title>
                                    <description><![CDATA[डूमाडा गांव में गत दिनों ढाई माह के शिशु की गला घोंटकर हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बच्चे की मां ने ही गला घोंटकर उसकी निर्मम हत्या करना कबूल कर लिया है। पारिवारिक विवाद के चलते खुद अपने ही हाथों अपनी गोद उजाड़ी और इल्जाम सास व देवरानी पर थोप दिया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/to-trap-the-mother-in-law-devrani-she-herself-was-destroyed-in-her-lap/article-11403"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/qq1.jpg" alt=""></a><br /><p> मांगलियावास। डूमाडा गांव में गत दिनों ढाई माह के शिशु की गला घोंटकर हत्या के मामले में चौंकाने वाला खुलासा हुआ है। बच्चे की मां ने ही गला घोंटकर उसकी निर्मम हत्या करना कबूल कर लिया है। पारिवारिक विवाद के चलते खुद अपने ही हाथों अपनी गोद उजाड़ी और इल्जाम सास व देवरानी पर थोप दिया। लेकिन पुलिस तफ्तीश में सच उजागर हो गया। मांगलियावास पुलिस ने हत्या की आरोपी मां को गिरफ्तार कर लिया। उसे सोमवार को नसीराबाद न्यायालय में पेश करेगी। </p>
<p>थाना प्रभारी सुनील ताडा के मुताबिक 14 मई को डूमाडा निवासी पूजा देवी पत्नी पुष्पेंद्र सेन (27) ने मांगलियावास थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई। इसमें बताया कि 13 मई की शाम 5 बजे अपने ढाई माह के बेटे पंकज को चौक में सुला रखा था और वह कमरे में खाना बना रही थी। इसी दौरान उसने अपने बच्चे को दूध पिलाने के लिए उठाया तो वह हिला-डुला नहीं। उसके शरीर ने कोई हरकत नहीं की। इस पर उसने अपने पति के साथ 108 एंबुलेंस की मदद से पीसांगन अस्पताल ले जाकर पंकज की जांच कराई तो चिकित्सकों ने उसे मृत घोषित कर दिया। </p>
<p>रिपोर्ट में पीड़िता ने बताया कि उसकी सास नीता से काफी दिनों से रंजिश चल रही है। उसके पति को अपनी जायदाद से बेदखल करने के प्रयास में लगी हुई है। उसे उसकी सास नीता तथा देवरानी काजल पर मासूम की गला दबाकर हत्या करने की शंका है। पीड़िता की रिपोर्ट पर प्रकरण की गंभीरता को देखते हुए पुलिस अधीक्षक विकास शर्मा, अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक वैभव शर्मा, डिप्टी इस्लाम के सुपरविजन में थाना प्रभारी ताड़ा, हैड कांस्टेबल संजीव चारण, कांस्टेबल विनोद जाट व महिला कांस्टेबल सुमन मीणा की टीम गठन कर जांच आरंभ की। </p>
<p>पूछताछ के दौरान पूजा लगातार अपनी सास व देवरानी को हत्या के आरोप में फंसाने के प्रयास में जुटी रही। लेकिन पुलिस ने जब मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की तो पूजा ने स्वयं हत्या करने का अपराध स्वीकार कर लिया।उसने बताया किपिछले 2 महीने से घर में क्लेश तथा पारिवारिक विवाद चल रहा था। इसी के चलते उसने अपने अबोध बालक की हत्या करने का जुर्म किया। इस पर पुलिस ने झारखंड के देवघर में गुढे बांका निवासी पूजा पुत्री श्याम सिंह शर्मा को हत्या के आरोप में गिरफ्त में ले लिया।</p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 06 Jun 2022 11:10:07 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>यूक्रेन-रूस युद्ध: यूक्रेन के 470 से अधिक ड्रोन नष्ट करने का रूस ने किया दावा</title>
                                    <description><![CDATA[<p>मास्को। रूस ने यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से यूक्रेन के 470 से अधिक ड्रोन नष्ट करने का दावा किया है। रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने रविवार को कहा कि Þ सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद से कुल मिलाकर 136 विमान, 471 मानव रहित हवाई वाहन, 249 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, 2,308 टैंक और अन्य बख्तरबंद लड़ाकू वाहन, 254 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम, 998 फील्ड आर्टिलरी बंदूकें और मोर्टार तथा 2,171 विशेष सैन्य वाहनों को नष्ट किया गया है।<br /><br />उन्होंने कहा कि रूसी रॉकेट बलों और तोपों ने चार यूक्रेनी कमांड पोस्ट, चार</p>...]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/ukraine-russia-war--russia-claims-to-have-destroyed-more-than-470-ukrainian-drones--us-lawmakers-will-go-to-different-countries-to-get-support-for-ukraine/article-8091"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/ukraine-and-usa-flag-.jpg" alt=""></a><br /><p>मास्को। रूस ने यूक्रेन में सैन्य अभियान शुरू होने के बाद से यूक्रेन के 470 से अधिक ड्रोन नष्ट करने का दावा किया है। रूस के रक्षा मंत्रालय के प्रवक्ता इगोर कोनाशेनकोव ने रविवार को कहा कि Þ सैन्य अभियान की शुरुआत के बाद से कुल मिलाकर 136 विमान, 471 मानव रहित हवाई वाहन, 249 एंटी-एयरक्राफ्ट मिसाइल सिस्टम, 2,308 टैंक और अन्य बख्तरबंद लड़ाकू वाहन, 254 मल्टीपल लॉन्च रॉकेट सिस्टम, 998 फील्ड आर्टिलरी बंदूकें और मोर्टार तथा 2,171 विशेष सैन्य वाहनों को नष्ट किया गया है।<br /><br />उन्होंने कहा कि रूसी रॉकेट बलों और तोपों ने चार यूक्रेनी कमांड पोस्ट, चार तोपखाने बैटरी, दो ईंधन डिपो और 100 से अधिक अन्य यूक्रेनी लक्ष्यों को भेदा है। उल्लेखनीय है कि रूस ने 24 फरवरी को यूक्रेन में अपना सैन्य अभियान शुरू किया है।</p>
<p><strong>यूक्रेन के लिए समर्थन हासिल करने हेतु विभिन्न देशों में जाएंगे अमेरिकी सांसद</strong><br />वाशिंगटन। अमेरिकी सांसदों का एक समूह यूक्रेन के लिए मजबूत समर्थन हासिल करने हेतु जर्मनी, पोलैंड, भारत और संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) का दौरा करेगा। अमेरिकी अखबाद 'द हिल' ने अपनी रिपोर्ट में यह जानकारी दी है। अखबार ने रविवार को अमेरिकी सांसदों के संयुक्त बयान के हवाले से अपनी रिपोर्ट में कहा कि प्रतिनिधिमंडल पोलैंड, संयुक्त अरब अमीरात, भारत, नेपाल और जर्मनी में कई प्रमुख नेताओं के साथ मुलाकात करेगा, ताकि बढ़ते वैश्विक तनाव की इस अवधि में आपसी संबंधों को मजबूत किया जा सके।<br /><br />अमेरिकी सांसद मार्क केली ने रविवार शाम अखबार को एक ई-मेल भेजकर प्रतिनिधिमंडल की आगामी नौ दिवसीय यात्रा की घोषणा की। अमेरिकी सांसदों ने संयुक्त बयान में कहा कि इस मजबूत कांग्रेस प्रतिनिधिमंडल को पोलैंड में अमेरिकी सैन्य नेतृत्व और सैनिकों के साथ मिलने का अवसर मिलेगा ताकि यह पता लगाया जा सके कि अमेरिका यूक्रेन और उत्तर अटलांटिक संधि संगठन (नाटो) के हमारे सहयोगियों का समर्थन कैसे जारी रख सकता है।<br /><br />अखबार के अनुसार जर्मनी, पोलैंड, भारत और संयुक्त अरब अमीरात रूस को अलग-थलग करने के लिए अमेरिका के नेतृत्व वाले प्रयासों में सहयोग करने में पर्याप्त रूप से सक्रिय नहीं हैं। उल्लेखनीय है कि रूस 24 फरवरी से यूक्रेन में विशेष सैन्य अभियान चला रहा है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 18 Apr 2022 18:20:33 +0530</pubDate>
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                <title>मारियुपोल पूरी तरह से नष्ट हो गया : यूक्रेन</title>
                                    <description><![CDATA[यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि रूस की सेना ने मारियुपोल शहर को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। मंत्रालय ने ट्वीट किया जब मारियुपोल की घेराबंदी बमबारी की जा रही, लोग जीवन के लड़ रहे हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/%E0%A4%AF%E0%A5%82%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%A8-%E0%A4%B0%E0%A5%82%E0%A4%B8-%E0%A4%AF%E0%A5%81%E0%A4%A6%E0%A5%8D%E0%A4%A7/mariupol-completely-destroyed--says-ukraine/article-6847"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/46546546546576.jpg" alt=""></a><br /><p>कीव। यूक्रेन के विदेश मंत्रालय ने कहा कि रूस की सेना ने मारियुपोल शहर को पूरी तरह नष्ट कर दिया है। मंत्रालय ने ट्वीट किया जब मारियुपोल की घेराबंदी बमबारी की जा रही, लोग जीवन के लड़ रहे हैं। शहर में मानवीय स्थिति भयावह है। रूस के सशस्त्र बल शहर को तबाह कर रहे हैं। इससे पहले राष्ट्रपति वलोडिमिर जेलेंस्की ने रूसी मीडिया के साथ एक साक्षात्कार में कहा कि मारियुपोल को रूस की सेना ने पूरी तरह से अवरुद्ध कर दिया गया है।</p>
<p>राष्ट्रपति के कार्यालय के बयान का हवाले से कहा कि लोग नागरिक परिवहन का उपयोग करके मानवीय गलियारों के माध्यम से शहरछोड़ रहे है। उन्होंने कहा कि रूस ने 'कब्जे वाले क्षेत्रों में मारियुपोल निवासियों को जबरन हटा रहा है। जेलेंस्की ने कहा कि हमारे आंकड़ों के अनुसार 2 हजार से अधिक बच्चों को निर्वासित किया गया। उन्होंने कहा वास्तविकता यह है कि रूसी सेना ने मारियुपोल सभी प्रवेश और निकास अवरुद्ध कर दिया है।रूसी सैनिक मानवीय काफिले पर गोलाबारी कर रहे हैं और ड्राइवरों को मार रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>यूक्रेन-रूस युद्ध</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 10:43:13 +0530</pubDate>
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                <title>दमकल का अभाव, आग से खाक हो रहे अन्नदाता के गेहूं</title>
                                    <description><![CDATA[तहसील क्षेत्र में दमकल का अभाव होने से कस्बे व क्षेत्र के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के लिए परेशानी बनी हुई है। कस्बे व क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं पर करीब 60 किमी दूर जिला मुख्यालय से दमकल पहुंचने में दो से तीन घंटे लग जाते है तब तक सब कुछ जल कर राख हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/-absence-of-fire-brigade--the-wheat-of-annadata-being-destroyed-by-fire/article-6632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/unetitled-design-(1).png" alt=""></a><br /><p>समरानियां।  तहसील क्षेत्र में दमकल का अभाव होने से कस्बे व क्षेत्र के दर्जनों गांवों के ग्रामीणों के लिए परेशानी बनी हुई है। कस्बे व क्षेत्र में आगजनी की घटनाओं पर करीब 60 किमी दूर जिला मुख्यालय से दमकल पहुंचने में दो से तीन घंटे लग जाते है तब तक सब कुछ जल कर राख हो जाता है। क्षेत्र में हर वर्ष घटित घटनाओं पर दमकल के अभाव में लाखों रुपए का नुकसान होता है। मांग के बावजूद सरकार के दमकल उपलब्ध नहीं करवाने पर ग्रामीणों में रोष है ।<br /><br />पंचायत समिति मुख्यालय शाहाबाद की आबादी चौदह लाख से अधिक है। यहां मुख्य कस्बा समरानियां है जो क्षेत्र का सबसे बड़ा बाजार है। दर्जनों गांव इससे जुड़े हुए हैं। पंचायत समिति शाहाबाद में 36 ग्राम पंचायतें हैं। इनमें लाखों लोग निवास करते है। ग्रामीण क्षेत्र में खेतों में एवं आबादी क्षेत्र व ढाणियों में हर साल आग लगने की घटनाएं होती हैं। इस पर जिला मुख्यालय से दमकल बुलवानी पड़ती है, लेकिन उसके यहां पहुंचने पर कुछ भी नहीं बचता है। बारां से शाहाबाद की दुरी 80 किलोमीटर व क्षेत्र के गांव 50-60 किलोमीटर दूर है। ग्रामीण मार्ग खस्ताहाल है। इस पर आग लगने की घटना के कई घंटों बाद दमकल पहुंचती है।<br /><br />हर साल कई घर एवं सैकड़ों बीघा जमीन आग की भेंट- चढ़ जाते हैं अभी दो चार दिन में कई आग की घटनाएं हो चुकी है। जब तक दमकल पहुंचती है तब तक किसान की फसल बर्बाद हो चुकी होती है। ऐसे में तहसील क्षेत्र को दमकल की जरूरत है। बारां से दमकल पहुंचने में करीब दो घंटे लग जाते हैं। ऐसे में जब तक दमकल पहुंचती है तब तक सब कुछ स्वाह हो जाता है।<br /><br />सरकार दमकल उपलब्ध करवाएं- पंचायत समिति व उप तहसील मुख्यालय होने के बावजूद दमकल की व्यवस्था नहीं है। सरकार दमकल उपलब्ध करवाएं तो गरीबों का लाखों रुपए का नुकसान बच सकता है। <br /><strong> रेखा रानी,सरपंच नाटई</strong><br /><br />लाखों का होता नुकसान- हर साल कई जगह पर आग लगने पर लाखों का नुकसान होता है। पंचायत समिति स्तर पर दमकल की व्यवस्था नहीं होने से गरीबों को नुकसान होता है।    - <strong>रामदयाल मेहता, ग्रामीण</strong><br /><br />क्षेत्र में लगातार आग की खबरें पढ़ने को मिल रही है आग लगने से किसानों का कुछ ही समय में लाखों का नुकसान हो जाता है क्योंकि जिला मुख्यालय की दूरी अधिक है दमकल को पहुंचाने में 2 से 3 घन्टें का समय लगता हमारी मांग है की एक दमकल हमारे तहसील मुख्यालय पर हो जिससे नुकसान होने से बचा जा सके । <strong> - सचिन किराड़,ग्रामीण</strong><br /><br />इस समय गर्मी और तेज धूप एवं बिजली की इस पार्किंग की वजह से खेतों में आग लगने की संभावना बनी रहती है संबंधित उपखंड क्षेत्र में दमकल नहीं होने से किसानों को काफी नुकसान हो जाता है इसके लिए मैं संबंधित विभाग को जानकारी देकर उपखंड क्षेत्र में दमकल की व्यवस्था करवाने का पूरा प्रयास करूंगी। <br /><strong>-कांति बाई मेहता, प्रधान शाहाबाद</strong><br /><br />क्षेत्र में दमकल ना होने की वजह से किसानों को काफी नुकसान उठाना पड़ रहा है क्योंकि गेहूं की फसल की कटाई शुरू हो चुकी है ऐसे में आगजनी की समस्या बनी रहती है बारां से शाहाबाद की दूरी अधिक होने के कारण समय पर दमकल नहीं पहुंच पाती जिसके कारण किसानों का काफी नुकसान हो जाता है हमारी मांग है क्षेत्र को दमकल मशीन उपलब्ध कराई जाए।<br /><strong>-नितेश मेहता, युवा कांग्रेस नेता शाहाबाद</strong><br /><br />क्षेत्र में आगजनी की घटनाएं ज्यादा हो रही है ऐसे में क्षेत्र में दमकल की व्यवस्था उपखंड स्तर पर सरकार को करनी चाहिए जिससे किसानों का नुकसान नहीं हो । <br /><strong>-राजमल मेहता भाजपा मंडल अध्यक्ष शाहबाद</strong><br /><br />आगजनी की घटना लगातार हो रही है सरकार को हर तहसील स्तर पर दमकल की व्यवस्था करनी चाहिए या जनप्रतिनिधि अपने स्तर से किसानों को राहत प्रदान करें ताकि किसानों की फसलें बर्बाद नहीं हो।<br /><strong>-ललित मीणा,पूर्व विधायक किशनगंज</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Mar 2022 14:38:42 +0530</pubDate>
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