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                <title>vegetables - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>गंदगी इतनी कि सब्जी बेचना और खरीदना हो रहा दुश्वार</title>
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                        <![CDATA[ सब्जी मंडी में गंदगी के ढेर लगे हुए है तथा आवारा पशु भी मंडी में घूमते रहते हैं।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/there-is-so-much-garbage-that-it-is-difficult-to-sell-and-buy-vegetables/article-121491"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/news-(2)40.png" alt=""></a><br /><p>खानपुर।  एक तरफ जहां स्वच्छता अभियान जोरो शोरो से लगातार जारी है, वहीं दूसरी ओर खानपुर क्षेत्र की सब्जीमंडी में गंदगी के ढेरों व अव्यवस्थाओं के बीच सब्जियों की खरीद फरोख्त की जा रही है। मामला खानपुर कस्बे के अंदर सब्जी मंडी का है, सब्जीमंडी में इतनी गंदगी हो रही हैं कि सब्जी विक्रेताओं का सब्जी बेचना दुश्वार हो रहा है और तो और जो सब्जी खरीदने जब कोई व्यक्ति जाता है उसको भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहां इस समय इतनी बदबू फैल रही है कि सब्जी की खुशबू कम गंदगी की बदबू अधिक आ रही है। सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि हमारे यहां बैठने के लिए सालों से रसीद कटती आ रही है, फिर भी हमें सुविधा उपलब्ध नहीं है और अब तो खानपुर नगर पालिका बन चुकी है तो सब्जी मंडी को तो और चमक जाना चाहिए, लेकिन अभी हाल यह है कि गंदगी के ढेर लगे हुए हैं, सब्जी मंडी में टीनशेड जर्जर अवस्था में हो चुके हैं तो हम सब्जी लेकर बैठे तो कहां बैठे। यदि बरसात में सब्जी एक बार खराब हो जाती है तो वह पूर्णतया  खराब हो जाती है किसी काम की नहीं रहती। यदि सब्जी को लेकर बाहर ठेला लगाकर बैठते हैं तो बाहर एक सरकारी स्कूल है जिसमें बच्चों को आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है और ट्रैफिक जाम की स्थिति बन जाती है तो हमारे परेशानी आती है। सब्जी मंडी में गंदगी के ढेर लगे हुए है तथा आवारा पशु भी मंडी में घूमते रहते हैं जो सब्जी विक्रेताओं को कई बार हमला करके नुकसान पहुंचा देते है। सब्जी मंडी का मुख्य गेट भी टूटा हुआ है जिसमें से होकर आवारा पशु अंदर आ जाते हैं और अचानक सब्जियों को खा जाते हैं । कस्बेवासियों ने मांग की है कि सब्जीमंडी में जो भी अव्यवस्थाएं है उनकों जल्द से जल्द दुरूस्त करवाया जाए।  </p>
<p>हम सभी सब्जी बेचने वाले गरीब व्यक्ति हैं जाने कैसे जुगाड़ करके तो हम सब्जी खरीदते हैं और फिर भी हमें मुनाफा ना हो तो क्या फायदा। <br /><strong>- सत्तू सुमन, सब्जी विक्रेता</strong><br /> <br />कुछ सब्जियों ऐसी होती है जो बरसात में तुरंत बिगड़ जाती है यदि बरसात के पानी का थोड़ा सा भी असर हो जाए तो सब्जी किसी काम की नहीं रहती है इससे हमारे बहुत नुकसान हो रहा है मंडी में टीनशेड तक नहीं हो रहे हैं । <br /><strong>-  विशाल सुमन, सब्जी विक्रेता  </strong></p>
<p>हमारे सब्जी मंडी में बैठने के लिए रसीद कटती है जो सालों से कटती हुई आ रही हैं फिर भी हमारे कोई सुविधा नहीं मिल रही है, बरसात में तो हमारी आए दिन सब्जियां खराब हो जाती है जिससे हमें भारी नुकसान उठाना पड़ता है। <br /><strong>-  सोजी माली, सब्जी विक्रेता  </strong></p>
<p>सब्जी मंडी में गंदगी तो हो ही रही है लेकिन सब्जी मंडी की तरफ कोई ध्यान नहीं दे रहा है, हमारे ऊपर जो टीनशेड लगे हुए थे वह भी गिर चुके हैं और गंदगी का इतना ढेर बन चुका है कि पूरी सब्जी मंडी में बदबू ही बदबू आती है जिससे विक्रेताओं को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। <br /><strong>-  बंटी सुमन, सब्जी विक्रेता </strong><br /> <br />सब्जीमंडी में हमारे बैठने की व्यवस्था भी ठीक प्रकार से नहीं है सारे जो चबूतरे बने हुए थे वह सभी लगभग गिर चुके हैं। हमारा बैठकर सब्जी बेचना दुर्लभ हो रहा है। <strong> -कुलदीप सुमन, सब्जी विक्रेता</strong></p>
<p>सब्जी ही बेचना हमारी रोजी-रोटी है इसे ही हमारे घर का गुजारा चलता है और हम इसके ऊपर ही निर्भर रहते हैं मुझे बहुत साल हो गए सब्जी बेचते हुए लेकिन ऐसी गंदगी कभी नजर नहीं आई। इस गंदगी को देखकर हमारे ग्राहक भी कम आते हैं और आमदनी भी कम होती है, जिससे घर का गुजारा भी ठीक प्रकार से नहीं चल पा रहा है, कृपया समस्या का निस्तारण करें। <br /><strong>-गोलू सुमन, सब्जी विक्रेता</strong></p>
<p>जल्दी ही सब्जी मंडी की जमादार से कहकर सफाई करवा दी जाएगी। <br /><strong>-  पुखराज मीणा नगर पालिका आयुक्त, खानपुर</strong></p>
<p>अभी बजट नहीं आया है जैसे ही बजट आएगा, खानपुर की सब्जी मंडी की जर्जर व्यवस्था को ठीक कर दी जाएगी और सफाई व्यवस्था पर तुरंत एक्शन लिया जाएगा। <br /><strong>   - रजत कुमार विजय वर्गीय, खानपुर उपखंड अधिकारी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 24 Jul 2025 17:22:19 +0530</pubDate>
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                <title>कीचड़ व गंदगी की मारामारी, सरे बाजार बीच बिक रही तरकारी</title>
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                        <![CDATA[ कीचड़ के बीच फलों और सब्जियों की बिक्री का कारोबार करना पड़ता है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/fight-of-mud-and-dirt--vegetables-being-sold-in-the-middle-of-the-market/article-119093"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-07/rtroer-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर के बीच स्थित थोक फलसब्जी मंडी में बारिश के मौसम में इन दिनों कीचड़ और गंदगी की भरमार हो रही है। इससे विक्रेताओं और ग्राहकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। गंदगी के बीच ही फल और सब्जियों की खरीद फरोख्त का कारोबार किया जा रहा है। बारिश के कारण मंडी परिसर में पानी भर जाता है। जिसमें मच्छर और मक्खियां भिनभिनाती रहती है। ऐसे में थोक मंडी में खरीदी गई सब्जियों के साथ बीमारियां भी घर तक प्रवेश कर सकती है। मंडी में करीब 8 से 10 हजार बड़े, छोटे व्यापारी, सब्जी विक्रेताओं और ग्राहकों की रोजाना आवाहाजी होती है। मंडी में तड़के चार बजे ही कारोबार शुरू हो जाता है। रात को बारिश के बाद मंडी में कीचड़ और गंदगी की समस्या व्याप्त हो जाती है। जिससे कई बार कीचड़ के बीच फलों और सब्जियों की बिक्री का कारोबार करना पड़ता है।</p>
<p><strong>थोड़ी सी बरसात में भर जाता है पानी</strong><br />थोक मंडी के फल और सब्जी विक्रेताओं ने बताया कि मंडी परिसर में थोड़ी सी बरसात में ही पानी भर जाता है। ऐसे में व्यापारियों को कीचड़ में ही कारोबार करना पड़ता है। कई बार तो कीचड़ और गंदगी के कारण सब्जी विक्रेता और ग्राहक फिसल भी जाते हैं। एक बार बरसात होने के बाद कीचड़ की समस्या काफी समय तक बनी रहती है। हालांकि मंडी की सफाई के लिए प्रशासन ने कर्मचारी लगा रखे हैं, लेकिन वह सही तरीके से मंडी परिसर की सफाई नहीं करते हैं। जिससे कीचड़ की समस्या बरकरार रह जाती है। इस दौरान कई बार परिसर में खराब सब्जियों और फलों को फेंक दिया जाता है। जिससे मंडी परिसर में दुर्गध तक आती रहती है। यहां पर सफाई व्यवस्था की प्रभावी मॉनिटरिंग होनी चाहिए ताकि व्यापारियों और ग्राहकों को बारिश के मौसम में कीचड़ की समस्या से निजात मिल सके।</p>
<p><strong>मंडी के अंदर बाहर ट्रैफिक जाम</strong><br />थोक मंडी में आने के लिए कुल तीन गेट हैं। जिनमें से मंडी में प्रवेश के लिए अधिकतर वाहन गेट नंबर एक से ही आते जाते हैं। इस वजह से यहां सुबह छह बजे से दस बजे तक जाम के हालात बने रहते हैं। वहीं मंडी के अंदर भी बेतरतीब वाहन खड़े रहने व बाहर से आने वाली गाड़ियों के कारण जाम के हालात बने रहते हैं। कई बार तो लोगों को निकलने तक की जगह नहीं मिल पाती है। पैदल सब्जी खरीदने आए लोग वाहनों के बीच फंस तक जाते हैं। बारिश के दिनों में तो समस्या और बढ़ जाती है। एक तरफ तो कीचड़ में ग्राहकों को फिसलने का खतरा बना रहता है वहीं दूसरी तरफ वाहनों के जाम के कारण आवागमन में परेशानी का सामना करना पड़ता है। सुबह के समय जाम की समस्या के समाधान के लिए मंडी कर्मचारियों की तैनाती करना अनिवार्य है।</p>
<p>इन दिनों बरसात का मौसम होने के कारण सुबह के समय मंडी परिसर में कीचड़ व गंदगी की भरमार हो जाती है। इस दौरान फल और सब्जी की खरीदारी करने में परेशानी का सामना करना पड़ता है। बरसाती मौसम में तो मंडी में लगातार सफाई करवाने की जरूरत है।<br /><strong>-सुमन देवी, ग्राहक</strong><br /> <br />मंडी परिसर की नियमित रूप से सफाई करवाई जाती है। इसके लिए कर्मचारी लगा रखे हैं। बरसात के मौसम में कीचड़ की समस्या अधिक होती है। इसके चलते फल और सब्जियों का कारोबार समाप्त होने के बाद परिसर की सफाई करवाई जाती है।<br /><strong>-विश्वजीत सिंह, सचिव, थोक फलसब्जी मंडी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 01 Jul 2025 16:00:23 +0530</pubDate>
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                <title>जेड श्रेणी की सुरक्षा से बची सब्जियों की जान, बारिश से खेतों में मौजूद सब्जियों को नहीं हुआ नुकसान</title>
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                        <![CDATA[तेज बरसात में कारगर साबित हुई प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक ।
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/z-category-protection-saved-the-lives-of-vegetables/article-101097"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-01/257rtrer26.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होने के कारण कोटा जिले में बुधवार रात को तेज बरसात खेतों में मौजूद सब्जियों की फसल के लिए आफत बन सकती थी, लेकिन प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक सब्जियों के लिए जेड श्रेणी की सुरक्षा साबित हुई और कोई नुकसान नहीं हो पाया। इस तेज सर्दी के मौसम में बरसात से सब्जियों का उत्पादन प्रभावित होने की संभावना बन गई थी। किसानों द्वारा उद्यान विभाग की मल्चिंग तकनीक से पौधों को सफेद प्लास्टिक से कवर करने से उनकी सुरक्षा हो गई है। अब कोटा जिले में मौसम की मार से परेशान किसान मल्चिंग खेती की ओर कदम बढ़ा रहे है। इससे न केवल उनकी फसल का उत्पादन बढ़ रहा है वहीं उनके खेती के खर्चे में भी कमी आने लगी है। </p>
<p><strong>उत्पादन और आमदनी में हो रहा इजाफा</strong><br />जिले में सैकड़ों बीघा भूमि के खेतों में किसान अब इसी तर्ज पर मिर्च, करेला, आलू व टमाटर की खेती कर रहे हैं। कृषि एक्सपर्ट का मानना है कि इस तकनीक से किसान के खेत में खरपतवार भी नहीं होती है जिससे उसे खरपतवार हटाने के लिए खुदाई की जरूरत भी नहीं पड़ती है। अब सैकड़ों किसान इस तकनीक से फसल उत्पादन कर रहे है। मल्चिंग तकनीक का अर्थ अपनी फसल को पूरी तरह से सफेद प्लास्टिक के कवर करके उसकी सुरक्षा करना है। इससे पौधों की ग्रोथ में बढ़ोतरी हो रही है और ग्रोथ अच्छी होने से फसल का उत्पादन भी बढ़ने लगा है। इससे किसानों की आमदनी भी अन्य तरकीब से होने वाली आमदनी के बजाय दोगुनी होने लगी है।</p>
<p><strong>पाले से सुरक्षा, शीतलहर का झंझट समाप्त</strong><br />प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक से फसल की पौध को ऊपर की ओर प्लास्टिक से ढंकने के कारण सर्दी के मौसम में पाला पड़ने से सुरक्षा मिल रही है। वहीं शीत लहर से भी फसल को बचाया जा रहा है। उक्त प्लास्टिक सफेद व पारदर्शी होने से सूरज की किरणें भी पर्याप्त मात्रा में पौधों तक पहुंचने के कारण पौधे की बढ़ोतरी में कोई नुकसान नहीं हो रहा है। इस तरकीब को अपनाने से फसल के पौधे के चारों तरफ उगने वाले खरपतवार नहीं होने से खरपतवार हटाने के लिए लगने वाले मजदूर की आवश्यकता नहीं पड़ती है। साथ ही खरपतवार हटाने के लिए रासायनिक दवा की आवश्यकता भी नहीं होती है। इसी प्रकार फसल में किसानों की ओर से दिया जाने वाला रासायनिक खाद व गोबर की खाद भी बूंद- बूंद सिंचाई के साथ देने से खर्च में कमी आती है। </p>
<p><strong>शीत ऋतु में नुकसान का खतरा अधिक</strong><br />कृषि विभाग के अधिकारियों के अनुसार जब शीतऋतु में तापमान काफी नीचे गिर जाए और दोपहर बाद अचानक हवा का बहाव बन्द हो जाए व आसमान साफ रहे तो उस रात तेज सर्दी पड़ने के संकेत है। तेज सर्दी के कारण फसलों, फलवृक्षों, सब्जियों के तनों, पत्तियों, फूलों तथा फलों में उपस्थित द्रव बर्फ के रूप में जम जाता है, जो सूर्य की रोशनी से पिघलना शुरू होती है। इससे पौधों के इन भागों की कोशिकाएं फट कर नष्ट हो जाती है। जिससे पौधों की पत्तियां झुलसी हुई नजर आती है और फल व फूल झड़ जाते हैं। इससे सब्जी फसलों का उत्पादन प्रभावित हो जाता है और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है।</p>
<p>हर बार सर्दी में बरसात के कारण सब्जियों की फसल को काफी नुकसान पहुंंचता था। इस साल प्लास्टिक मल्चिंग तकनीक से पौधों को सुरक्षा प्रदान की गई थी। इस कारण तेज बरसात में भी सब्जियों की पौध को कोई नुकसान नहीं हो पाया।<br /><strong>- शिवरतन मीणा, किसान</strong></p>
<p>अब कोटा जिले में मौसम की मार से परेशान किसान मल्चिंग खेती की ओर कदम बढ़ा रहे है। इससे न केवल उनकी फसल का उत्पादन बढ़ रहा है वहीं उनके खेती के खर्चे में भी कमी आने लगी है। तेज बरसात, पाला और शीतलहर से पौधों को सुरक्षा मिलती है। <br /><strong>- एन.बी. मालव, उपनिदेशक, उद्यान विभाग कोटा</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jan 2025 15:16:10 +0530</pubDate>
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                <title>सर्दी में जायका बिगाड़ रहे प्याज व लहसुन</title>
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                        <![CDATA[विदेशों में प्याज भेजने के कारण यहां पर दाम कम नहीं हो रहे हैं। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/onion-and-garlic-are-spoiling-the-taste-in-winter/article-95574"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-11/srdi-me-zayeka-bigad-rhe-pyaz-va-lehsun...kota-news-22-11-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सर्दी के मौसम में प्याज और लहसुन के भाव ज्यादा होने के कारण सब्जियों का जायका बिगड़ रहा है। हरी सब्जियों की आवक होने से भाव में गिरावट आने लगी है, लेकिन प्याज और लहसुन के भाव अभी भी तेज बने हुए हैं। सरकार ने प्याज के निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया है और विदेशो में तीन लाख मीट्रिक टन निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस कारण आमजन के लिए प्याज सस्ता नहीं हो पा रहा है। वर्तमान में कोटा की प्रमुख सब्जीमंडी में प्याज के भाव 50 से 60 रुपए प्रति किलो बने हुए हैं। इससे ज्यादा खराब स्थिति लहसुन की हो रही है। लहसुन की बुवाई का कार्य होने से इसके भाव 200 से 300 रुपए प्रति किलो बने हुए हैं। सब्जियों को स्वाद बढ़ाने के लिए प्याज और लहसुन का उपयोग किया जाता है, लेकिन अभी भाव ज्यादा होने से स्वाद बिगड़ रहा है।</p>
<p><strong>कीमतें बढ़ी तो लगाया था बैन</strong><br />पिछले साल दिसंबर महीने में प्याज की कीमतों में तेज बढ़ोतरी देखने को मिली थी। तब प्याज के दाम 100 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गए थे। इसके बाद केन्द्र सरकार सक्रिय हुई। प्याज के उत्पादन में कमी और आसमान पर पहुंची कीमतों के चलते केंद्र सरकार ने पिछले साल 8 दिसंबर को प्याज के निर्यात पर बैन लगा दिया था। इससे प्याज के भावों में लगातार गिरावट होने लगी थी। 80 से 100 रुपए किलो बिकने वाले प्याज के भाव 50 से 60 रुपए किलो पर आ आ गए थे। अब नई प्याज की आवक होने से इसके भावों में और गिरावट होने की संभावना जताई जा रही थी, लेकिन अब प्याज के निर्यात से बैन हटने के बाद प्याज के भाव स्थिर हो गए हैं। इससे अभी भी लोगों को महंगा प्याज खरीदना पड़ रहा है। </p>
<p><strong>अलवर से आ रहा गीला प्याज</strong><br />थोक सब्जीमंडी के व्यापारी सद्दाम वारसी ने बताया कि अलवर में लाल प्याज का उत्पादन होने लगा है और कोटा सहित प्रदेश की अधिकांश मंडियों में लाल प्याज की आवक होने भी लगी हैं, लेकिन अभी लाल प्याज गीला आ रहा है। इसमें नमी की मात्रा अधिक है। ऐसे में ग्राहक इसे खरीदने से कतरा रहे हैं। इसके भाव भी 50 रुपए किलो बने हुए हैं। इसके अलावा इन्दौर से सफेद प्याज आ रहा है, जो सूखा है, लेकिन यह 60 रुपए किलो में बिक रहा है। वारसी ने बताया कि यदि प्याज के निर्यात से बैन नहीं हटता तो प्याज के भावों में 10 से 15 रुपए किलो तक गिरावट आ सकती थी। विदेशों में प्याज भेजने के कारण यहां पर दाम कम नहीं हो रहे हैं। </p>
<p><strong>लहसुन खरीदने से बना रखी दूरी</strong><br />पिछले दो साल से लहसुन के भावों में तेजी बनी हुई है। इससे भाव 200 रुपए किलो से कभी नीचे ही नहीं आए। दो साल से किसानों को भाव ज्यादा मिलने के कारण इस साल लहसुन की बुवाई का रकबा अधिक हो गया है। इस समय लहसुन की बुवाई का दौर चल रहा है। ऐसे में लहसुन के बीज की डिमांड बनी हुई है। इस कारण लहसुन के भाव खुले बाजार में 200 से 300 रुपए प्रति किलो के बीच बने हुए हैं। थोक मंडी के व्यापारी अशोक कुमार ने बताया कि लहसुन की ग्राहकी काफी कम हो रही है। इसके भावों में गिरावट नहीं होने से अब ग्राहकों ने खरीदने की मात्रा कम कर दी है। अब अधिकांश ग्राहक केवल 250 ग्राम लहसुन खरीद कर काम चला रहे हैं। बाजार में लहसुन की बिक्री भी कुछ ही व्यापारी करते हैं। </p>
<p>प्याज सभी सब्जियों में काम आता है। अब दाम में तेजी से खरीदारी में कटौती करनी पड़ रही है। हर साल सर्दी के मौसम में प्याज के दाम कम हो जाते हैं, लेकिन इस साल भावों में कमी नहीं हो रही है। इससे सब्जियों का जायका ही बिगड़ रहा है।<br /><strong>- सुलोचना देवी, गृहिणी </strong></p>
<p>सरकार ने प्याज के निर्यात से प्रतिबंध हटा लिया है और विदेशो में तीन लाख मीट्रिक टन निर्यात को मंजूरी दे दी है। इस कारण आमजन के लिए प्याज सस्ता नहीं हो पा रहा है। लहसुन के भाव तो 200 रुपए किलो से नीचे ही नहीं आए हैं।<br /><strong>- भूपेन्द्र सोनी, थोक सब्जी विक्रेता </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 22 Nov 2024 14:40:12 +0530</pubDate>
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                <title>भीषण गर्मी से सब्जियों के भाव आसमान पर पहुंचे</title>
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                        <![CDATA[मुहाना मंडी, जनता मार्केट मंडी और रिटेल मार्केट में सब्जियों के भावों में बहुत बड़ा अंतर है। मंडियों में बिकने वाली सब्जियों के भाव रिटेल में डबल से ऊपर बिक रही है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/prices-of-vegetables-skyrocketed-due-to-extreme-heat/article-82678"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-06/uu11rer-(15)9.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। भीषण गर्मी के कारण जयपुर के बाजार में सब्जियों के भाव रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंची। टिंडा 160 रुपए प्रति किलो बिक रहा है। आलू, प्याज और टमाटर रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंचे। आलू प्याज और टमाटर 40 से 60 रुपए प्रति किलो बिक रहे हैं। आधिकांश सब्जियों सौ रुपए प्रति किलो से ऊपर बिक रही है। मंडियों में आवक बहुत धीमी चल रही है। मुहाना मंडी, जनता मार्केट मंडी और रिटेल मार्केट में सब्जियों के भावों में बहुत बड़ा अंतर है। मंडियों में बिकने वाली सब्जियों के भाव रिटेल में डबल से ऊपर बिक रही है।</p>
<p><strong>रिटेल भाव</strong><br />आलू 40 से 50 रुपए <br />प्याज 35 से 50 रुपए <br />टिंडा 100 से 160 रुपए <br />टमाटर 40 से 60 रुपए</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 25 Jun 2024 18:04:22 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का - 100 में से 50 नमूने जांच में हुए फेल, कीटनाशक मिला</title>
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                        <![CDATA[समाचार प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग हरकत में आया और जिले में खेतों से नमूने लेकर कार्रवाई की।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impact-of-news---50-out-of-100-samples-failed-in-testing--pesticide-found/article-70911"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-02/asar-khabar-ka---100-me-s-50-namoone-janch-me-hue-fail,-keetnashak-mila...kota-news-23-02-2024.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। सब्जियों की अत्यधिक उपज लेने की होड़ में कीटनाशकों का उपयोग खतरनाक रसायन के तौर पर सब्जियों में घुलने लगा है। अधिक उत्पादन के चक्कर में सब्जियां तक जहरीली होने लगी है। बुवाई के दौरान पेस्टीसाइड का छिड़काव करने से पेस्टीसाइड का जहर सब्जियों के भीतर घुसने लगा है। खेतों से बाजार तक पहुंचने वाली सब्जियों में घुले खतरनाक कीटनाशक  कैंसर, जोड़ों के दर्द, लकवा तथा अल्जाइमर सरीखी घातक बीमारियों के कारक बन सकते हैं। कृषि विभाग की ओर से जिले में चार माह में सब्जियों के 100 नमूने जांच के लिए गए थे। इनमें से 50 नमूने फेल गए। यानी जांच रिपोर्ट में इन नमूनों में कीटनाशक का अधिक उपयोग पाया गया।  </p>
<p><strong>किसानों को दी गई हिदायत</strong><br />कृषि विभाग की ओर से जिले में फसलों और सब्जियों के नमूने लेने के लिए  अभियान चलाया गया था। इस दौरान सब्जियों के खेतों से 100 नमूने लिए गए थे। इन नमूनों की प्रयोगशाला में जांच की गई थी। जांच में 50 नमूने अमानक पाए गए। जांच में पता चला कि सब्जियों के अधिक उत्पादन लेने के लिए इनमें कीटनाशकों को अधिक छिड़काव किया गया। ऐसे में सब्जियां उत्पादन करने वालें को किसानों को तय मात्रा में ही कीटनाशक का छिड़काव करने की हिदायत दी गई।</p>
<p><strong>कीटनाशक से कई बीमारियों का खतरा</strong><br />कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि पेस्टीसाइड सब्जियों के माध्यम से शरीर में जाने के बाद शरीर के भीतर जमा होते रहते हैं। पेस्टीसाइड के बढ़ते प्रभाव से शरीर का नर्वस सिस्टम प्रभावित होने लगता है। इसके चलते पेट दर्द, जोड़ दर्द, कैंसर जैसी घातक बीमारियां चपेट में ले रही हैं। बेमौसम आने वाली हाईब्रीड सब्जियां भी सेहत के लिए काफी खतरनाक हैं। यही नहीं, इन सब्जियों को अच्छे से धोने के बाद भी उनकी सतह पर मौजूद विषैले तत्व व पेस्टीसाइड्स दूर नहीं होते हैं। इससे लोगों को कैंसर, एलर्जी, हृदय, पेट, शुगर, रक्त विकार, आंखों की बीमारियों के साथ ही अस्थमा, आॅटिज्म, डायबिटीज, परकिंसन, अल्जाइमर, जन्मजात विकृति, प्रजनन संबंधी अक्षमता और कई तरह के कैंसर होने का खतरा रहता है। </p>
<p><strong>अधिक उत्पादन की चाह में कर रहे छिड़काव</strong><br />कृषि वैज्ञानिकों की माने तो टमाटर, बैंगन, पालक, भिंडी, करैला आदि में कीटनाशकों के छिड़काव की अधिकता से उत्पादन तो बेहतर हो जाता है, लेकिन इन सब्जियों में घुले खतरनाक रसायन शरीर को घातक बीमारियां देने लगे हैं। हालांकि स्थिति की गंभीरता समझने के बाद सरकारी स्तर पर खानापूर्ति करते हुए जैविक खेती को प्रोत्साहित करने की योजना तो शुरू की है ,लेकिन यह कारगर साबित नहीं हो पाई है। इस संबंध में कृषि विज्ञान एवं अनुसंधान केन्द्रों के कृषि वैज्ञानिकों ने गहरी चिंता जताते हुए काश्तकारों से इस ओर ध्यान देने का आग्रह किया, लेकिन सफलता नहीं मिली। </p>
<p><strong>कोटा मंडी में यहां से आती है सब्जियां</strong><br />थोक फल सब्जीमंडी के प्रमुख व्यापारी शब्बीर वारसी ने बताया कि मंडी में जिले के कैथून और सुल्तानपुर से स्थानीय किसान सब्जी लेकर आते हैं। इसके अलावा बूंदी के विभिन्न क्षेत्रों से काफी मात्रा में सब्जियों की आवक होती है। वहीं फलों की आवक राजस्थान से बाहर से आती है। महाराष्टÑ, मध्यप्रदेश और अन्य राज्यों से फलों की ज्यादा आवक होती है। मंडी में आने के बाद हाथों-हाथ फलों और सब्जियों की थोक में बिक्री हो जाती है।</p>
<p><strong>नवज्योति में समाचार प्रकाशित होने पर हरकत में आया विभाग</strong><br />जिले में गंदे नाले के पानी से सब्जियों में सिंचाई करने के सम्बंध में पूर्व में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किया गया था। जिसमें बताया था कि जिले में कई स्थानों पर गंदे नाले के पानी का उपयोग सब्जियों के उत्पादन में किया जा रहा है। इस तरह की दूषित सब्जियां मंडियों में बिकने के लिए पहुंच रही है। समाचार प्रकाशित होने के बाद कृषि विभाग हरकत में आया और जिले में खेतों से नमूने लेकर कार्रवाई की। इस सम्बंध में कुछ किसानों को हिदायत भी दी गई।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />आम लोगों को यह जानकारी नहीं होती है कि कौनसी सब्जियां जहरीले होंगी। न ही इन पर कोई निशान लगा होता जिससे पहचान की जा सके। बाजार में हर जगह सब्जियां व फल बिक रहे हैं। प्रशासन और सरकार को इस तरफ ध्यान देकर जहरीली सब्जियों को बैन कर देना चाहिए।<br /><strong>- संजू रानी, उपभोक्ता</strong></p>
<p>कीटनाशकों में प्रयुक्त होने वाले रसायनों के कारण केवल स्वास्थ्य को ही खतरा नहीं उत्पन्न होता है, बल्कि यह कई घातक बीमारियों का कारक भी बन सकते हैं। कीटनाशक सब्जियों के अंदर तक चले जाते हैं। उन सब्जियों का सेवन करने पर कीटनाशक के घातक रसायन शरीर के अंदर तक प्रवेश कर जाते हैं। फल-सब्जियों को इस्तेमाल करने से पहले गर्म पानी में 15 से 20 मिनट तक भिगोकर रख दें तो काफी मात्रा में पेस्टीसाइड का जहर निकलने की उम्मीद रहती है।<br /><strong>- गोपीचंद, वरिष्ठ कृषि वैज्ञानिक</strong></p>
<p>विभाग की ओर से समय-समय पर जिले में खेतों में जाकर सब्जियों के नमूने लिए जाते हैं। नमूनों की जांच में आलू और भिंडी में अधिक कीटनाशक पाए गए थे। इस पर किसानों को हिदायत दी गई थी। किसानों को इसके लिए जागरूक होकर अत्यधिक कीटनाशक का प्रयोग बंद करना चाहिए। ताकि इस प्रकार की समस्या नहीं आए।<br /><strong>- खेमराज शर्मा, संयुक्त निदेशक, कृषि विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 23 Feb 2024 17:13:06 +0530</pubDate>
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                <title>आम आदमी की थाली से दूर हुई सब्जियां, रुलाने लगा प्याज</title>
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                        <![CDATA[दैनिक उपयोग की सभी चीजों के भाव आसमान छूने लगे हैं तो सब्जियों की कीमत की मार झेलने वाले लोग अब दालों की रेट सुनकर भी कांप उठते हैं। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vegetables-kept-away-from-common-man-s-plate--onion-started-crying/article-60874"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/aam-admi-ki-thali-s-dur-hui-sabziya,-rulane-lga-pyaz...sultanpur,-kota-news-30-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>सुल्तानपुर। बढ़ती महंगाई ने एक बार फिर बाजार पर बदनसीबी की लकीर खींच दी है। जिसका प्रभाव आम आदमी की जिंदगी पर देखा जा रहा है। महंगाई के चलते रोजाना काम आने वाली सब्जियां आम लोगों की थाली से दूर होती जा रही हैं। कालाबाजारी के चलते दिनों-दिन बढ़ रही महंगाई ने लोगों का बजट बिगाड़ दिया है। जानकारी के अनुसार पिछले दिनों हुई बेमौसम की तेज बारिश के चलते खेतों में पानी भरने से सब्जियां गल गई हैं। आवक कम होने के  चलते सब्जियों के भाव भी आसमान को छू रहे हैं। जिससे ग्रामीणों का बजट गड़बड़ा गया है। प्रतिदिन काम में आने वाली हरी मिर्ची 80 रुपए प्रति किलो, धनिया 100 रुपए प्रति किलो तो अदरक डेढ़ सौ रुपए प्रति किलो एवं टमाटर व प्याज 50 रुपए प्रति किलो के ऊपर बिक रहा है। गोभी का भाव भी 80 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है। हरी सब्जियां पालक व मैथी भी 100 रुपए प्रति किलो के ऊपर चल रही है। सब्जियों का भाव 60 से लेकर 120 रुपए प्रति किलो तक पहुंच चुका है। दैनिक उपयोग की सभी चीजों के भाव आसमान छूने लगे हैं तो सब्जियों की कीमत की मार झेलने वाले लोग अब दालों की रेट सुनकर भी कांप उठते हैं। काला बाजारी के चलते आगामी दिनों में हर दाल 100 से 120 तक का आंकड़ा छूने की आशंका है। बाजार मूंग की दाल 120 रुपए प्रति किलो, चने की दाल 90 रुपए प्रति किलो, अरहर की दाल 130 रुपए प्रति किलो, उड़द की दाल 120 रुपए प्रति किलो से भी अधिक भाव में बिक रही है। जबकि कुछ दिनों पूर्व दालों के भाव कम थे। जब मध्यम वर्ग के लोग रसोई के बढ़ते दाम से परेशान हैं तो आम आदमी का तो इस बढ़ रही महंगाई में भगवान ही मालिक है। कुछ दिनों पूर्व भाव सामान्य थे लेकिन कालाबाजारी के चलते अचानक आसमान में पहुंच गई है। जिसने आम वर्ग की कमर तोड़कर रख दी है। बच्चों की फीस, मकान का किराया, दवाइयां, बिजली का बिल ऐसे खर्चे हैं जो किसी के भी रोकने से नहीं रुकते हैं। चाहे कितना भी गरीब आदमी हो लेकिन मजबूरी में उन्हें इनका तो भुगतान करना ही पड़ता है। </p>
<p><strong>आटे की कीमतों में भी हुआ इजाफा</strong><br />वर्तमान में प्रतिदिन काम में आने वाला आटा व गेहूं के भी भाव आसमान में पहुंच रहे हैं। जहां पूर्व में आटा 25 से 30 किलो मिल जाता था, इन दिनों 35 रुपए प्रति किलो में मिल रहा है। रोजमर्रा के खाने में काम में आने वाले सामानों के भाव आसमान छू रहे हैं तो वही हरी सब्जियों के भाव भी दुगने हो चुके हैं। महंगाई से आम जनता का बहुत बुरा हाल है। कई लोग तो महंगाई के चलते बाजारों में खरीदारी तक करने नहीं आ रहे हैं।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />महंगाई ने घर के बजट को बुरी तरह प्रभावित किया है। पहले की कहावतें सिद्ध हो रही हंै कि गृहस्थी चलाना भी एक टेढ़ी खीर है, यह सच भी होता जा रहा है। महंगाई के कारण वाकई में गृहस्थी चलाना एक टेढ़ा काम हो गया है। लोगों को अब अपने बजट में कटौती करनी पड़ रही है।    <br /><strong>- रीना गौड़, ग्रहणी  </strong></p>
<p>रसोई में सब्जियों से किनारा कर चुकी हूं। एक कटोरी दाल में पांच कटोरी पानी डालकर गुजारा करना पड़ रहा है। बढ़ती हुई महंगाई को देख कर जैसे-तैसे गुजारा करना पड़ रहा है। <br /><strong>- लवीना, ग्रहणी  </strong></p>
<p>महंगाई की मार झेल रहे उपभोक्ताओं के लिए आने वाले दिन और कष्टकारी होंगे। आलू, प्याज के भाव भी आसमान छू रहे हैं। खाद्य सामग्रियों के बढ़ते हुए दामों से घर का खर्च चलाना मुश्किल हो रहा है।<br /><strong>- गायत्री शर्मा, ग्रहणी</strong></p>
<p><strong>बारिश में गला बीज, दुबारा करनी पड़ी सब्जियों की बुवाई</strong><br />सब्जी की खेती करने वाले किसान जगदीश अजमेरा एवं बनवारी लाल सुमन का कहना है कि पूर्व में हरी सब्जी पालक एवं मैथी के बीज की बुवाई करते समय बारिश हो जाने के कारण बीज गल गए थे। जिसके चलते दोबारा सब्जियां लगानी पड़ीं। जिससे क्षेत्र की सब्जियां मंडी में देर से आने के कारण बाहर से आने वाली हरी सब्जियां महंगी पड़ रही हैं। साथ ही प्याज की फसल की आवक भी कम होने के कारण अचानक से प्याज के दामों में तेजी आ गई है।</p>
<p><strong>बाहर से मंगानी पड़ रहीं सब्जियां</strong><br />सब्जी बेचने वाले जीतू राठौर, कमल सुमन का कहना है कि बाहर से आने वाली सब्जियां महंगी आ रही हैं। जिसके चलते सब्जियों की रेट में अचानक तेजी आ गई है।</p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Oct 2023 21:36:45 +0530</pubDate>
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                <title>नालों के गंदे पानी से तैयार हो रही सब्जियां</title>
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                        <![CDATA[खेतों के पास से निकल रहे नालों में मोटर लगाकर बड़े पैमाने पर सिंचाई की जा रही है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/vegetables-being-prepared-from-dirty-water-of-drains/article-59293"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/naalo-k-gande-pani-s-tyyar-ho-rhi-sbziya...kota-news-11-10-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अगर आप चमकती साफ सुथरी सब्जियों को देखने भर से हाइजिनिक मान रहे हैं तो सावधान। यह सब्जियां नालों के गंदे पानी की सिंचाई  से तैयार हो सकती हैं। कोटा में कुछ किसान ऐसी सब्जियां तैयार कर रहे हैं। खास बात है कि ऐसी सब्ज्यिां नालों का पानी सिंचाई में मिलने से खासी फलती फूलती हैं और चमकती भी हैं। लेकिन उपयोग करने के बाद वह स्वास्थ्य के लिए नुकसान दायक हो सकती हैं। खेतों में उगने वाले अनाज और सब्जियां हमारे घरों में आती हैं और यही हमारी रोजमर्रा कि जिंदगी में आवश्यक उर्जा और पोषक तत्वों की प्रमुख स्त्रोत होती हैं। इसके लिए खेतों कि मिट्टी का उपजाऊ होना जरुरी है ताकि शरीर को इन फसलों के जरिए पोषक तत्व मिल सकें। इसके लिए किसान  मिट्टी को उपजाऊ बनाने के लिए उर्वरक व खाद और यूरिया का उपयोग तो करतें हैं ही लेकिन शहर से सटे कई गांवों में किसान इन तरीकों के स्थान पर ऐसे तरीके का उपयोग का रहे हंै जो इन फसलों और सब्जियों को पोषक बनाने के बदले उन्हें स्वास्थ्य के लिए हानिकारक बनाया जा रहा है। शहर से सटे धाकड़खेड़ी, राजनगर, देवली अरब और थेकड़ा रोड इलाके के खेतों में शहर से निकले नालों के पानी से फसलों और सब्जियों कि सिंचाई की जा रही है। इन नालों के पानी से इन फसलों को उर्वरक तत्व तो मिलते हैं पर इनके साथ साथ इस पानी के जरिए फसलों में कई हानिकारक और बीमार करने वाले तत्व भी पहुंच रहे हैं जो कई गम्भीर बीमारियों के कारण बन सकते हैं। </p>
<p><strong>मोटर लगाकर सिंचाई</strong><br />खेतों के पास से निकल रहे नालों में मोटर लगाकर बड़े पैमाने पर सिंचाई की जा रही है। सब्जियों के साथ साथ पारम्परिक फसलों की भी इन नालों के पानी से सिंचाई की जा रही है। लोग इतने शातिर तरीकों से पानी का उपयोग कर रहे हैं जिसकी कोई उम्मीद ना कर सके, नाले के पानी को मोटर द्वारा सड़क के नीचे से निकाल कर गांव के दूसरे हिस्से में सिंचाई की जा रही है। मोटरों के अलावा जहां खेत का क्षेत्र नीचे है वहां पर धोरे बनाकर उनके द्वारा खेतों तक नालों के पानी को पहुंचाया जा रहा है। </p>
<p><strong>किसान कहिन</strong><br />नाम नहीं छापने की शर्त पर  स्थानीय किसानों से बात की तो उन्होंने कहा कि इस पानी से फसल कि पैदावार अच्छी होती है खाद और यूरिया का कम इस्तेमाल करना पड़ता है, यहां सिंचाई के लिए नहर का पानी नहीं आता है और ना ही जमीनी पानी से सिंचाई हो पाती है। इस कारण मजबूरन इस पानी से सिंचाई करनी पड़ रही है। नालों में सीवरेज और फैक्ट्रियों का पानी आने के पहले से हम इन नालों से सिंचाई कर रहे हैं तब इनमें बरसाती नालों का पानी आता था। अभी भी खेतों तक नहर का पानी नहीं आता है और सिंचाई का  कोई साधन नहीं है।</p>
<p><strong>आम लोगों का कहना है</strong><br />सब्जी को बाजार में लेते समय पता नहीं चलता कि ये किस पानी से उगाई गई हैं । पता तो है ऐसा होता है पर कौनसी सब्जी नाले के पानी से पकाई गई हैं कौनसी नहीं इसका कोई पता नहीं लग पाता है। प्रशासन को चाहिए कि ऐसे इलाकों का पता लगाए और इसे बंद करवाए। थोड़े से रुपयों के लिए यह आमजन के स्वास्थ्य से खिलवाड़ है। <br /><strong>- दीपक कुमावत, विज्ञान नगर </strong></p>
<p>अभी सब्जियों में पहले जैसा स्वाद नहीं आता है, और स्िब्जयां पकने में भी समय लेती हैं । हो सकता है इन नालों के पानी से पकाने के कारण ऐसा हो रहा हो । अगर ऐसा है तो प्रशासन और किसानों दोंनो की जिम्मेदारी है कि वो इसे रोकें । क्योंकि पहली नजर में देखने से इन सब्जियों का पता नहीं लगता। यह सच है कि अब बीमारियां ज्यादा हो रही हैं। सब्जियां भी इसका कारक हो सकती हैं। चंद रुपयों के लिए ऐसा किया जाना पाप है। <br /><strong>- ज्योतिबाला छावनी</strong><br /> <br /><strong>हो सकते हैं लीवर, किडनी व श्वांस संबंधी रोग </strong><br />इन नालों के पानी में फैक्ट्रियों से निकला पानी मिला हो तो इसमें लैड मर्करी जैसे हानिकारक केमिकल होते हैं जिससे सिंचाई से पारम्परिक फसलों पर तो कम असर होता है लेकिन सब्जियों कि फसल पर ज्यादा होता है । क्योंकि पारम्परिक फसलों को पकने में ज्यादा समय लगता है और सब्जियों कि फसल के कम समय में पकने से गंदे पानी में मौजूद ये केमिकल सब्जियों में रह जाते हैं। यह खाने के रास्ते से हमारे शरीर में प्रवेश कर जाते हैं और कई गम्भीर बीमारियों का कारण बन सकते हैं। इन फसलों और सब्जियों के लगातार सेवन से लम्बे समय बाद इनका असर देखने को मिलता है। इस पानी से उगाई गई सब्जियों के सेवन से लीवर, किडनी व श्वास संबंधी रोग होते हैं। <br /><strong>- शिवचरण जेलिया, आचार्य, मेडिसिन विभाग मेडिकल कॉलेज</strong></p>
<p>कोटा में सिंचाई सिर्फ चंबल के पानी ,नहरों या ट्यूबवेल के माध्यम से ही की जा रही है। नाले के पानी से सिंचाई की कहीं शिकायत नहीं है। अगर है तो उसकी जाँच कराएंगें और उसे बंद करवाएंगे।<br /><strong>- खेमराज शर्मा, संयुक्त निदेशक कृषि विस्तार विभाग</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Oct 2023 16:04:52 +0530</pubDate>
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                <title>सेब महंगाई से लाल, अनार के दाम में भी उछाल</title>
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                        <![CDATA[देश के सबसे बड़े सेब उत्पादक राज्य हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस बार बारिश और बर्फबारी के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/apple-red-due-to-inflation--price-of-pomegranate-also-increased/article-54948"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/seb-mehngayi-s-laal,-anaar-k-daam-me-bhi-uchaal...kota-news-photo-19-08-2023-(2).jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। बारिश की मार सिर्फ टमाटर और हरी सब्जियों पर ही नहीं पड़ी है, बल्कि सेब उत्पादक किसानों को भी भारी नुकसान हुआ है। हिमाचल प्रदेश में बारिश की वजह से 30 प्रतिशत से अधिक सेब की फसल बर्बाद हो गई है। इस कारण कोटा जिले में सेब के दाम में भारी उछाल आ गया है। शहर की प्रमुख मंडी में सेब के दाम 100 से 140 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। वहीं अनार के दाम में भी तेजी बनी हुई है। इसके दाम भी 140 रुपए किलो हो गए हैं।</p>
<p><strong>फल व सब्जी के दाम</strong><br />सेब    100-140<br />अनार    80-140<br />केला    30-40<br />टमाटर    60-70 <br />भिंडी    40-60<br />अदरक    130-140 <br />बैंगन    40-60<br />मिर्च     40-60<br />फूल गोभ    60-80<br />टिंडा    40-60<br />अरबी    40-60<br />मूली    50-60<br />(भाव रुपए प्रति किलो)</p>
<p><strong>सेब की आपूर्ति प्रभावित</strong><br />देश के सबसे बड़े सेब उत्पादक राज्य हिमाचल प्रदेश और कश्मीर में इस बार बारिश और बर्फबारी के कारण सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। इस कारण उत्पादन में कमी आने से बाजार में सेब की आपूर्ति पर प्रभाव पड़ा है। जिससे सेब की कीमतें में भारी उछाल आया है। इससे आमजन को महंगे सेब खरीदने पर मजबूर होना पड़ रहा है। स्थानीय फल व्यापारियों ने बताया कि कोटा में सेब की सबसे ज्यादा आवक हिमाचल प्रदेश से होती है। गत दिनों वहां हुई भारी बारिश के कारण सेब के बाग नष्ट हो गए हैं। जिससे  कोटा में सेब की आवक कम होने लगी है। इस कारण दाम में तेजी आई है। </p>
<p><strong>मंडी में तेजी से बढ़े दाम</strong><br />धानमंडी स्थित फल व्यापारी अशोक कुमार ने बताया कि मंडी में कुछ दिन पहले सेब 70 से 90 रुपए किलो बिक रहा था। पूर्व में हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड से सेब आ रहा था। इस कारण सेब के दाम स्थिर थे। कुछ दिनों पहले हिमाचल प्रदेश में बारिश से सेब की फसल को भारी नुकसान हुआ है। इस कारण वहां से सेब की आवक बंद हो गई है। इस समय केवल उत्तराखंड से सेब आ रहा है। इसलिए सेब के दाम 100 से 140 रुपए प्रति किलो पहुंच गए हैं। इसके साथ अनार के दाम में भी उछाल बना हुआ है। फल मंडी में अच्छी किस्म का अनार 90 से 140 रुपए किलो के बीच मिल रहा है।</p>
<p><strong>इधर किचन में होने लगी टमाटर की एंट्री</strong><br />इधर स्थानीय सब्जीमंडी में टमाटर के दामों में निरन्तर गिरावट हो रही है। कोटा शहर में जो टमाटर 200 रुपए प्रति किलो से ऊपर पहुंच गया था उसके दाम शुक्रवार को थोक फल सब्जी मण्डी में 60 से 70 रुपए प्रतिकिलो पर आ गए। भावों में आई नरमी से अब मंडी में हर सब्जी की दुकान में टमाटर दिखाई देने लगा है।  बारिश के चलते टमाटर की फसल को खासा नुकसान पहुंचने से मार्केट में कमी हो गई थी और दाम चार गुना महंगे हो गए थे।अब टमाटर के दामों में गिरावट हो रही है। मंडी में टमाटर के प्रमुख व्यापारी शब्बीर वारसी ने बताया कि एक सप्ताह पहले टमाटर की आवक 1300 से 1500 कैरेट प्रतिदिन हो रही थी। वहीं अब बैंगलुरु व शिमला से करीब 2000 कैरेट टमाटर की आवक हो रही है। आवक बढ़ऩे से दाम कम हुए हैं। </p>
<p><strong>चाय में आया अदरक का स्वाद </strong><br />महंगाई के दौर में अदरक ने भी चाय से दूरी बना ली थी। अदरक के दाम 250 रुपए प्रतिकिलो पर पहुंच गए थे। जिससे चाय से अदरक का स्वाद चला गया था। घर से लेकर चाय की दुकान तक अदरक दूर हो गई थी। लेकिन अब महंगाई कम हुई तो स्वाद वापस दिखने लगा है। शुक्रवार को मंडी में अदरक 140 रुपए प्रति किलो बिक रहा था। हालांकि अभी भी ग्राहक ज्यादा अदरक नहीं ले रहे हैं। कोटा की मंडी में इन दिनों जयपुर व दिल्ली से नई अदरक की आवक शुरू हो गई है। इसके कारण अदरक के भाव में कमी आई है।</p>
<p>पहले टमाटर महंगा होने के कारण घर की रसोई से टमाटर का स्वाद गायब हो गया था। अब सेब के दाम में तेजी आने लगी है। हर माह कोई न कोई सब्जी या फल में तेजी आती रहती है। खाने की चीजों में अब लगातार महंगाई होती जा रही है। <br /><strong>- उमा तोमर, गृहिणी</strong></p>
<p>पिछले एक महीने से घर की रसोई से टमाटर और अदरक का स्वाद ही फीका हो गया था, लेकिन अब इनके दाम में कमी आई है। अब सेब व अनार के दाम बढ़ने लगे हैं। फिलहाल सेब व अनार खरीदने से दूरी बना रखी है।<br /><strong>- पारुल वर्मा, गृहिणी</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 19 Aug 2023 15:37:35 +0530</pubDate>
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                <title>15 साल से सरकारी मंडी खुलने का सपना संजोए हैं किसान </title>
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                        <![CDATA[मंडी के अभाव में किसानों को अपनी सब्जी बेचने के लिए 15 से 20  किमी दूर कोटा एरोड्रक फल-सब्जी मंडी जाने को मजबूर है। जो किसानों के लिए समय और धन की बर्बादी होती है। 
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/farmers-have-cherished-the-dream-of-opening-a-government-market-for-15-years/article-40434"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/15-saal-se-sarkari-mandi-khulane-ka-sapna-sanjoe-hain-kisaan...bundi-news-21-03-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>गुड़ली। केशवरायपाटन उपखंड के गुड़ली गांव में सरकारी मंडी स्थापित करने का सपना पंद्रह साल बाद भी अधूरा है।  किसान पंद्रह सालों से मंडी स्थापना की आस लगाए हुए है। सरकारी मंडी खुलने पर यहां के किसानों की तकदीर बदल सकती है। खास बात यह है कि गुड़ली की भिण्ड़ी अच्छी क्वालिटी की देशभर के व्यापारी खरीदने गुड़ली आते है। भिण्डी ही नहीं अन्य सब्जियां भी यहां पर खूब उत्पादन किया जा रहा है। मंडी के अभाव में किसानों को अपनी सब्जी बेचने के लिए 15 से 20  किमी दूर कोटा एरोड्रक फल-सब्जी मंडी जाने को मजबूर है। जो किसानों के लिए समय और धन की बर्बादी होती है। </p>
<p><strong>भिंडी की होती है बंपर पैदावार</strong><br />गुड़ली गांव की 3 हजार की आबादी खेतीबाड़ी करते है। हर घर के लोग कृषि से जुड़े है। आसपास के गांवों में इन दिनों भिण्डी का बंपर उत्पादन हो रहा है।  जिसके चलते भिंडी उत्पादक किसानों ने बताया कि सीजन के दिनों में भिंडी बेचने और खरीदने के लिए यहां मेला सा लग जाता है। व्यापारी नरेंद्र सुमन , हेमंत सुमन, रूप शंकर सुमन, त्रिलोक सुमन  के मुताबिक भिंडी बेचने के लिए रोजाना 50 गांवों के किसान कस्बे  की गुडली मंडी में पहुंच रहे हैं। दोपहर से ही मेन रोड पर व्यापारी और विक्रेताओं की भीड़ लग जाती है। यहां के किसानों ने भिंडी उत्पादन को अपना व्यवसाय ही बना लिया है। इस बार भी करीब 200 बीघा  से अधिक में भिंडी उत्पादन किया गया है। किसान भी चाहते हैं कि सरकारी प्रयास हो जाएं तो उनकी तकदीर बदल सकती है।</p>
<p><strong>इन गांवों में होता है उत्पादन</strong><br /> लाडपुर, गुड़ली, गुडला, पटोलिया, गिरधरपुरा, केशवरायपाटन, देहित, सुवांसा, कापरेन, लाखेरी, गामछ, कणा, भवानीपुरा, चितावा, तीरथ, मेहराना समेत करीब 50 गांवों में भिंडी का उत्पादन किया जा रहा है। किसान रोजाना गुडली में भिंडी बेचने पहुंच रहे हैं। प्रत्येक गांव का किसान गुडली भिंडी मंडी को पसंद करता है। यहां शुरूआती रेट 40 से 50 प्रति किलो है।</p>
<p><strong>पूर्व मंत्री वर्मा ने मंडी बनाने की थी घोषणा</strong><br /> भिंडी मंडी के लिए भाजपा सरकार के पूर्व  राज्यमंत्री बाबूलाल वर्मा ने उनके कार्यकाल में मंडी के लिए पैसा व जमीन स्वीकृत करने के लिए कहा था, लेकिन गुडली में जमीन का अभाव है। मेन रोड पर जहां पर भी पंचायत में अतिक्रमण की चपेट में है। सरकारी जमीन पर अतिक्रमण हटाकर मंडी बनाने का प्रयास सरकार के द्वारा किया जाना चाहिए सरकार द्वारा भिंडी मंडी लग जाए तो यहां के किसान मालामाल हो सकते हैं। यहां के किसान भिंडी के अलावा अन्य सब्जियां हर सीजन में करते आ रहे है। टमाटर, मिर्ची ,गोभी, बैंगन, मेथी पालक यह सभी सब्जियां मुख्य रूप से सीजन में की जाती है इनको बेचने के लिए कोटा और पाटन जाना पड़ता है।</p>
<p><strong>गुडली भिंडी की क्वालिटी</strong><br />यहां के किसान राजेंद्र मेरोठा ,तुलसीराम मेरोठा  ने बताया कि अच्छी क्वालिटी का बीज प्रयोग में लिया जाता है जिसकी वजह से भिंडी की लंबाई मात्र 3 से 4 इंच होती है और हरा गहरा रंग होता है। भिंडी के लिए यहां का वातावरण अनुकूल है। देसी दवाइयों का भी प्रयोग किया जाता है। खाने में टेस्ट स्वादिष्ट इस  की वजह से देश की बड़ी मंडियों में पहचान बना चुकी है। </p>
<p>यहां पर किसानों को सरकारी मंडी की बहुत बड़ी जरूरत है क्यों कि यहां पर भिंडी उगाने के लिए अनुकूल वातावरण हैं। चंबल नदी पास  में होने से पानी की कमी भी नहीं रहती। जमीन  में वाटर लेवल ऊपर है। इसके कारण यहां पर किसान टमाटर,प्याज, लहसुन, हरा धनियां, चना, मैथी, पालक, गोभी,मूली आदि रोजाना उपयोग में आने वाली सब्जियां की खेती करते है। इन सब्जियों को स्थानीय स्तर पर मंडी नहीं है। इसके चलते यहां से करीब 20 किमी दूर कोटा जाने को मजबूर है। इसके कारण रेगुलर खेती करना संभव नहीं है। <br /><strong>-नंदकिशोर सुमन, किसान </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />गुड़ली कस्बे में भिंडी की पैदावार के लिए यहां का वातावरण भिंडी के अनुकूल है। जिससे काफी अच्छी पैदावार होती है। यह खाने में भी स्वादिष्ट है। इसमें खाद, बीज, दवाइयों का उपयोग कम किया जाता है। किसानों को एक माह में निजी खेतों में एक बीघा में 30 से 40 हजार रुपए मिल जाता है। गुडली में सरकारी मंडी बनती है तो यहां के किसानों को सब्जियों की खेती करने में महारत हासिल है। यहां बड़ा कारोबार किया जा सकता है। ग्रामीणों को सालभर रोजगार मिल सकता है। <br /><strong>-तेजमल मेरोठा, कृषक मित्र,ग्राम पंचायत गुड़ली</strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 21 Mar 2023 14:36:36 +0530</pubDate>
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                <title>फिलीपींस में चिकन-मटन से भी महंगा प्याज, 1200 रुपए किलो</title>
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                        <![CDATA[अप्रैल 2022 की तुलना में प्याज की कीमत अब 1000 रुपए से ज्यादा बढ़ा गई है. देश में महंगाई दर करीब 14 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/world/onion-costlier-than-chicken-and-mutton-in-the-philippines-at/article-38668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-03/z-2.png" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। दुनियाभर में महंगाई की मार से जनता बेहाल है और सबसे ज्यादा महंगाई खाने-पीने की चीजों पर देखने को मिल रही है। इस लिस्ट में फिलीपींस भी शामिल है और यहां सबसे ज्यादा प्याज लोगों के आंसू निकाल रही है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि अप्रैल 2022 की तुलना में प्याज की कीमत अब 1000 रुपए से ज्यादा बढ़ा गई है. देश में महंगाई दर करीब 14 साल के उच्च स्तर पर पहुंच गई है।</p>
<p><strong>चिकन-मटन भी प्याज से सस्ता</strong><br />फिलीपींस में महंगाई का आलम ये है कि महंगाई दर बढ़कर 8.7 फीसदी पर पहुंच गई है। इस बीच सबसे ज्यादा मार खाने-पीने की चीजों पर पड़ रही है। एक किलो प्याज का भाव अब यहां पर 800 पेसो पर पहुंच गया है। अगर भारतीय रुपए में इसे देखें तो ये करीब 1200 रुपए।हो जाती है। फिलीपींस में प्याज की कीमतों में ये तेजी 10 महीने में देखने को मिली है। अप्रैल 2022 में एक किलो प्याज 70 पेसो (105 रुपए) में मिल रही थी। </p>
<p><strong>लोगों ने प्याज खाना ही किया बंद</strong><br />देश में प्याज की कीमतें चिकन और मटन से ज्यादा होने से लोगों का जायका खराब हो गया है। महंगाई की मार झेल रही जनता की रसोई से प्याज गायब सी हो गई है। हालांकि, सरकार ने लोगों को रुला रही प्याज की कीमतों पर लगाम लगाने के लिए कदम उठाए हैं, लेकिन इसका तत्काल उपाय नजर नहीं आ रहा है। रिपोर्ट के मुताबिक, फिलीपींस सरकार ने 21,000 टन प्याज के आयात को मंजूरी दी है। आर्थिक तंगी की बड़ी मार झेल रहे पाकिस्तान और श्रीलंका जैसे देशों में भी प्याज की कीमतें आसमान छू रही हैं। डॉन के मुताबिक, पाकिस्तान में प्याज 250 रुपए प्रति किलो बिक रही है, तो वहीं श्रीलंका में दिसंबर 2022 में ये 320 रुपए प्रति किलो तक पहुंच गई थी। इसके अलावा अन्य देशों की बात करें तो प्याज के दाम अमेरिका में लगभग 240 रुपए प्रति किलो, कनाडा में करीब 190 रुपये प्रति किलो तक पहुंच गए हैं। </p>]]>
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                                                            <category>दुनिया</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Mar 2023 11:49:30 +0530</pubDate>
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                <title>बिचौलिए मालामाल, किसान बेहाल</title>
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                        <![CDATA[शहर सहित जिले की सब्जी मंडियों में किसानों की ओर से खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत से तैयार की गई सब्जियों के भाव बारिश की वजह से धडाम गिर रहे हैं, लेकिन बाजार में सब्जियों के भाव कम नहीं हुए है। ]]>
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                        <![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/middlemen-are-rich--farmers-are-in-upset/article-16136"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/bichauliye-malamal,-kissan-behal-kota-news-25.7.2022.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा । शहर सहित जिले की सब्जी मंडियों में किसानों की ओर से खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत से तैयार की गई सब्जियों के भाव बारिश की वजह से धडाम गिर रहे हैं, लेकिन बाजार में सब्जियों के भाव कम नहीं हुए है। इसमें सीधे तौर पर बिचौलिए माल कमा रहे हैं, जो किसानों से औने-पौने दामों में सब्जी खरीद रहे हैं। इससे किसान और आमजन को आर्थिक नुकसान हो रहा है।<br /><br /><strong>किसानों को नहीं मिल रहा ज्यादा फायदा</strong><br />जानकारी के अनुसार किसान बड़े पैमाने पर नकदी फसल के तौर पर सब्जी की खेती करते हैं। कुछ किसान तो परम्परागत खेती सिर्फ परिवार का खर्च चलाने के लिए ही कर रहे हैं, जबकि अधिकतर किसान खेतों में सब्जियों की खेती करने लगे हैं, लेकिन किसानों को सब्जी की खेती में जो मुनाफा मिलना चाहिए, वह बिचौलिए ले रहे हैं। सब्जी के व्यापार में घुसे बिचौलिए मालामाल हो रहे हैं और किसान कड़ी मेहनत के बावजूद बेहाल हो रहे हैं। किसान मेहनत करने के बाद भी वहीं खड़ा है, जहां इसके पहले था। सब्जी की खेती करने वाले किसान हाड़-तोड़ मेहनत करने के बाद भी उस उपज का सीधा और ज्यादा लाभ नहीं ले पा रहा है। सबसे ज्यादा चोट सब्जी खरीदने वाले ग्राहकों पर पड़ रही है। ग्राहकों तक पहुंचते ही सब्जियां कई गुना महंगी हो जाती है।<br /><br />सब्जी की खेती करने वाले अरंडखेड़ा निवासी किसान भरोस शर्मा ने बताया कि उसने छह बीघा से ज्यादा खेत में टमाटर की खेती की थी, लेकिन भाव नहीं मिलने से खेत में ट्रैक्टर चला दिया है। मंडी और बाजार में सब्जियों के भाव में डेढ़ से दोगुना का अंतर है। किसान तो बर्बाद हो रहा है।<br /><br />सब्जी      थोक     फुटकर<br />टमाटर     7-10     30-35<br />मिर्च     15-20     40-45<br />लौकी     20-22     40-42<br />भिंडी     27-30     40-45<br />प्याज     7-10     20-22<br />ग्वारफली     25-30     60-80<br /><br /><strong>ऐसे बढ़ते हैं सब्जियों के दाम</strong><br />किसान कड़ी मेहनत से सब्जियां तैयार कर नजदीकी मंडी में बेचने ले जाते हैं। सब्जी की आवक एवं डिमांड के अनुसार आढ़तियां रेट निर्धारित करता है। थोक मंडी से सब्जी की खरीद कर बिचौलिए सब्जी का भाव बढ़ाकर छोटे व्यापारियों को बेचते हैं। ऐसे में फुटकर दुकानदार खरीद किए भाव को बढ़ा कर आमजन को बेचते हैं। किसानों के खेत से सस्ते में बिकने वाली सब्जी बाजार में पहुंचते-पहुंचते दो से ढाई गुना महंगी हो जाती है।<br /><br />थोक फल सब्जी मंडी में किसानों का माल उचित दाम पर ही खरीदा जाता है। इसके बाद मंडी का व्यापारी अपना मुनाफा निकाल कर फुटकर व्यापारी को बेचता है। इस कारण सब्जियों के दाम बढ़ जाते हैं। <strong>-संतोष कुमार, सब्जी व्यापारी </strong></p>]]>
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                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 25 Jul 2022 15:56:52 +0530</pubDate>
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