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                <title>आईएस ने ली पुलिस पर हुए हमले की जिम्मेदारी</title>
                                    <description><![CDATA[इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने श्रीनगर में पुलिस दल हुए हमले की जिम्मेदारी ली है। इस हमले में एक पुलिस अधिकारी शहीद हो गया था तथा दो अन्य घायल हो गए हो गए थे।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/is-claimed-responsibility-for-the-attack-on-the-police/article-14262"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-07/is-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>श्रीनगर। इस्लामिक स्टेट (आईएस) ने श्रीनगर में पुलिस दल हुए हमले की जिम्मेदारी ली है। इस हमले में एक पुलिस अधिकारी शहीद हो गया था तथा दो अन्य घायल हो गए हो गए थे। इस्लामिक स्टेट की अमाक न्यूज एजेंसी ने हमले की जिम्मेदारी ली है। इस दावे की हालांकि स्वतंत्र रूप से पुष्टि नहीं हो सकी है। उल्लेखनीय है कि आतंकवादियों ने करीब 7 बजे श्रीनगर के लाल बाजार इलाके में एक पुलिस चौकी पर गोलीबारी की थी, जिसमें सहायक पुलिस उप निरीक्षक मुश्ताक अहमद शहीद हो गए थे और दो अन्य पुलिस अधिकारी घायल हुए थे।</p>
<p>अमाक न्यूज एजेंसी ने हमले की एक वीडियो क्लिप भी जारी की। इस वीडियो में पुलिस पर अंधाधुंध फायरिंग करते हुए हमलावर को लगाते सुना जा सकता है। समूह ने दावा किया कि हमले के बाद एक हथियार भी ले लिये गये थे। इस हमले के तुरंत बाद एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने बताया कि वे हमलावरों की पहचान के लिए सीसीटीवी फुटेज खंगाल रहे हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 13 Jul 2022 12:27:22 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सिंगल स्क्रीन सिनेमाघर: वक्त के साथ अपनी धरोहर को संजोए हुए या लुप्त हो रहा अस्तित्व</title>
                                    <description><![CDATA[सिनेमाघर जहां सपने उड़ान भरते हैं और सितारे जमीं पर उतरते हैं, जहां 3 घंटे में आप हर वो एहसास कर लेते हैं। ख्वाबों के महल, बचपन की यादें, पहला प्यार, दोस्ती-दुश्मनी, दर्द और लड़ने का जज्बा, वो शहर वो गली, वो जगह, हर अनुभव महसूस करते हैं। अपनी हर परेशानी भूल कर पूरी जिंदगी जी लेते हैं। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/with-time--the-existence-of-its-heritage-is-being-preserved-or-vanishing/article-13142"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/cinema.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> सिनेमाघर जहां सपने उड़ान भरते हैं और सितारे जमीं पर उतरते हैं, जहां 3 घंटे में आप हर वो एहसास कर लेते हैं। ख्वाबों के महल, बचपन की यादें, पहला प्यार, दोस्ती-दुश्मनी, दर्द और लड़ने का जज्बा, वो शहर वो गली, वो जगह, हर अनुभव महसूस करते हैं। अपनी हर परेशानी भूल कर पूरी जिंदगी जी लेते हैं।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>सिनेमाघर और राजस्थान राज घराना</strong></span><br />दोनों ही एक दूजे से जुड़े है। महाराजा स्वामी राम सिंह द्वितीय का फिल्मों से रिश्ता बरसों पुराना रहा है, जिसे उन्होंने 1879 में एक थिएटर के रूप में बनवाया और जयपुर को पहला सिनेमाघर मिला, जिसका नाम राम प्रकाश टॉकीज था।  इसने नाटकों व फिल्मों को हमसे जोड़ा और वो सब दिया, जो हर दिल चाहता है ‘एंटरटेनमेंट’, लेकिन अब ये बंद हो चुका है। जयपुर और शानो शौकत का अटूट संबध है, एशिया का सबसे बड़ा सिनेमाघर यानी राज मंदिर, इसकी शान का  जीता जागता नमूना है।</p>
<p>इसकी सजावट, बनावट, नक्काशी और रॉयल टच के साथ यह पूरी दुनिया में मशहूर है। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों के लिए राज मंदिर उनकी यादों का हिस्सा बन जाता है। बड़े स्क्रीन पर मखमली पर्दे, जो प्राकृतिक फूलों की खुशबू से भरे हैं, झूमरों से सजी ऊंची छत और नौ सितारे यहां आने वालों को खुद सितारा होने का एहसास कराते हैं। इसे मेहताब चंद्र जी गोलेछा ने बनवाया था। इसकी नींव 1966 में तत्कालीन मुख्यमंत्री मोहनलाल सुखाड़िया ने रखी थी और 1976 में पूर्व मुख्यमंत्री हरिदेव जोशी ने इसका उद्घाटन किया था। राजमंदिर में पहली फिल्म चरस लगी थी, जिसका नशा, आज भी सिर चढ़ कर बोल रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>गोलेछा सिनेमा :</strong> </span>गोलेछा सिनेमा का पूर्व नाम प्रेम प्रकाश था, जो राजस्थान में 70 मिमी स्क्रीन का एकमात्र हॉल, जो आज चंद्रमहल के नाम से जाना जाता है। अब ये सिनेमा हॉल तीन स्क्रीन वाला मल्टीप्लेक्स है। प्रसिद्ध प्रेम प्रकाश समोसा, इसकी बड़ी स्क्रीन की तरह बहुत मशहूर है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>पोलो विक्ट्री सिनेमा :</strong> </span>भारत ने 1933 में पोलो में विश्व कप जीता था। ये हॉल उसी उपलक्ष्य में एक गर्व के रूप में बनाया गया, जिसका उद्घाटन स्वतंत्र भारत के राज्यपाल जनरल लॉर्ड माउंटबेटन ने किया। यह भी अब मल्टीप्लेक्स बन चुका है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>जेम सिनेमा :</strong></span> फिल्म प्रेमियों का रत्न हुआ करता था, लेकिन प्रतिस्पर्धा के कारण ये बंद हो गया। कई वर्षों बाद नए लुक में यह फिर शुरू हुआ और दर्शकों से अपना रिश्ता बनाने लगा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>कोहिनूर सिनेमा :</strong> </span>नवीनीकृत करने के बाद ये दर्शकों की भीड़ को अपनी ओर आकर्षित कर रहा है।<br /><span style="color:#ff0000;"><strong>पारस सिनेमा :</strong> </span>गुलाबी रंग की दीवारों से सजा ये दर्शकों को खूब लुभाता है।<br /><span style="color:#ff0000;"><strong>लक्ष्मी मंदिर :</strong></span> बेहतरीन सिनेमा हॉल में से एक, लेकिन अब धीरे-धीरे अपना वजूद खो रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>अंकुर सिनेमा :</strong> </span>अपना अस्तित्व बनाए रखने में नाकाम हो रहा है।</p>
<p><span style="color:#ff0000;"><strong>बंद हो चुके सिनेमा हॉल: </strong></span>सम्राट, संगम, मिनर्वा, मयूर, मान प्रकाश, मोती महल सिनेमाघर शहर की अमिट विरासत का हिस्सा रहे, लेकिन आर्थिक तंगी, आधुनिक तकनीक और रखरखाव के बिना बंद हो चुके हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>मूवी-मस्ती</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Jun 2022 13:20:59 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>राजस्थान रोडवेज को सरकारी बेड़े में शामिल करने की योजना ठंडे बस्ते में</title>
                                    <description><![CDATA[ रोडवेज को सरकारी बेड़े में शामिल करने की योजना ठंडे बस्ते में है। हरियाणा सरकार के बाद अब आन्ध्रप्रदेश सरकार ने भी कॉरपोरेशन को बंद कर रोडवेज को अपने अधीन कर लिया है। अब सरकार ही बसों का संचालन करने व कर्मचारियों के हित में फैसला ले रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/the-plan-to-include-rajasthan-roadways-in-the-government-fleet-is-in-cold-storage/article-12439"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-06/roadways1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> रोडवेज को सरकारी बेड़े में शामिल करने की योजना ठंडे बस्ते में है। हरियाणा सरकार के बाद अब आन्ध्रप्रदेश सरकार ने भी कॉरपोरेशन को बंद कर रोडवेज को अपने अधीन कर लिया है। अब सरकार ही बसों का संचालन करने व कर्मचारियों के हित में फैसला ले रही है। राजस्थान रोडवेज की स्थापना एक अक्टूबर 1964 में हुई थी। रोडवेज का संचालन फिलहाल कॉरपोरेशन से हो रहा है। रोडवेज संचालन अवधि के बाद से ही लगातार घाटे में चल रही है।</p>
<p>वर्तमान में रोडवेज करीब 5000 करोड़ रुपए से अधिक घाटे में है। राजस्थान सरकार भी पिछले कुछ समय से रोडवेज को आर्थिक तंगी से देखते हुए अपने अधीन करने की कवायद शुरू की थी। इसको लेकर तत्कालीन परिवहन मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने 18 अगस्त 2021 को मुख्यमंत्री और सीएमडी संदीप वर्मा ने 24 अगस्त को प्रमुख सचिव (परिवहन) को पत्र लिखा था। रोडवेज के पास अभी कुल 3300 (अनुबंधित सहित) बसें हैं। इनमें से अगले साल मार्च में 1600 बसें कंडम हो जाएंगी। वर्ष 2019 के बाद रोडवेज ने नई बसों की खरीद नहीं हुई है।</p>
<p><span style="background-color:#ff0000;"><strong>सरकार में शामिल होने से यह होगा फायदा</strong></span><br />विभिन्न मांगों को लेकर कर्मचारी यूनियनों की ओर से आए दिन हड़ताल करते हुए बसों का संचालन बंद कर दिया जाता है। इससे रोडवेज को नुकसान के साथ जनता को भी परेशानी उठानी पड़ती है। सरकार के बेड़े में शामिल होने के बाद यह परेशानी दूर हो जाएगी। कर्मचारियों की वेतन विसंगति के साथ सभी मांगों का फैसला सरकार खुद ले सकेगी। सरकार के अधीन होने के बाद रोडवेज का घाटे से उभरने के साथ ही सफल संचालन भी हो सकेगा।</p>
<table style="width:509px;height:418px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;height:41px;width:505px;" colspan="2"><span style="color:#ff0000;"><strong>हरियाणा और आंध्रप्रदेश सरकार में शामिल है रोडवेज</strong></span></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:505px;text-align:left;" colspan="2"><strong>हरियाणा</strong></td>
</tr>
<tr style="height:10px;">
<td style="height:10px;width:103.467px;">
<p><strong>बसें </strong></p>
<p><strong>कर्मचारी</strong></p>
</td>
<td style="height:10px;width:401.533px;">
<p><strong>3900</strong></p>
<p><strong>19000</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:505px;" colspan="2"><strong>आन्ध्रप्रदेश                   </strong>  </td>
</tr>
<tr style="height:23.45px;">
<td style="height:23.45px;width:103.467px;">
<p><strong>बसें  </strong></p>
<p><strong>कर्मचारी   </strong></p>
</td>
<td style="height:23.45px;width:401.533px;">
<p><strong> 12000</strong></p>
<p><strong>50 हजार से अधिक</strong></p>
</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:505px;text-align:left;" colspan="2"><strong>राजस्थान</strong></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="height:41px;width:103.467px;">
<p><strong>बसें   </strong></p>
<p><strong>कर्मचारी  </strong></p>
</td>
<td style="height:41px;width:401.533px;">
<p><strong>3300 (अनुबंधित सहित)</strong></p>
<p><strong>12 से 13 हजार</strong></p>
</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 17 Jun 2022 13:39:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सुनहरा हुआ देसाई का भविष्य</title>
                                    <description><![CDATA[संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी परिणाम में अजमेर के भविष्य देसाई ने पूरे देश में 29वीं रैंक हासिल की है।भविष्य ने दैनिक नवज्योति से बातचीत में बताया कि उन्होंने स्कूली शिक्षा सेंट एन्सलम स्कूल से करने के बाद आईआईटी कानपुर से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया है। इसके बाद गुड़गांव स्थित फर्म में 55 लाख रुपए वार्षिक पैकेज पर नौकरी लग गई लेकिन इच्छा विदेश सेवा करने की थी। इसलिए नौकरी छोड़कर वह यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ajmer-news--desai-s-future-is-golden/article-10850"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/1110.jpg" alt=""></a><br /><p> अजमेर। संघ लोक सेवा आयोग द्वारा जारी परिणाम में अजमेर के भविष्य देसाई ने पूरे देश में 29वीं रैंक हासिल की है। देसाई ने पहली ही बार में यह सफलता हासिल की है। उनकी प्राथमिकता विदेश सेवा में जाने की है। एमडीएस विश्वविद्यालय के पास ही मोहिनी विहार कॉलोनी में रहने वाले भविष्य देसाई के पिता गोपाराम देसाई महर्षि दयानन्द सरस्वती विश्वविद्यालय में बॉटनी विभाग में हरबैरियम असिस्टेंट के पद पर कार्यरत हैं और माता ललिता देसाई कायड़ स्थित राजकीय विद्यालय में शिक्षक है। भविष्य की छोटी बहन हिमाक्षी बड़ोदरा में एमबीबीएस कर रही है।</p>
<p>भविष्य ने दैनिक नवज्योति से बातचीत में बताया कि उन्होंने स्कूली शिक्षा सेंट एन्सलम स्कूल से करने के बाद आईआईटी कानपुर से कम्प्यूटर साइंस में बीटेक किया है। इसके बाद गुड़गांव स्थित फर्म में 55 लाख रुपए वार्षिक पैकेज पर नौकरी लग गई लेकिन इच्छा विदेश सेवा करने की थी। इसलिए नौकरी छोड़कर वह यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा की तैयारी में जुट गया। </p>
<p><strong>अपनाई यह स्ट्रेटजी</strong></p>
<p>भविष्य ने बताया कि यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा का सिलेबस बहुत विस्तृत होता है और टाइम लिमिटेड होता है। इसलिए उन्होंने सिम्पल स्ट्रेटजी अपनाई। बेसिक कॉन्सेप्ट पर ध्यान केन्द्रीय किया। लिमिटेड पढ़ाई और मल्टीपल रिवीजन अपनाया।</p>
<p><strong>एस. जयशंकर से प्रभावित होकर किया विदेश सेवा का चयन</strong></p>
<p>भविष्य ने बताया कि उनकी इच्छा विदेश सेवा में जाने की है। उन्होंने यूपीएससी के परीक्षा आवेदन में भी प्राथमिकता में विदेश सेवा ही चुनी थी। इसकी वजह यह है कि उनकी पॉलिटिकल फिलोसॉफी, इंटरनेशनल रिलेशनशिप में काफी दिलचस्पी रही है। वह विदेश मंत्री एस. जयशंकर तथा एम्बेसेडर शिवशंकर मेनन से काफी प्रभावित रहे हैं। परिणाम आने के बाद अब मसूरी स्थित लालबहादुर शास्त्री एकेडमी में होगी और सुषमा स्वराज इंस्टीटयूट में फोरेन पॉलिसी ट्रेनिंग होगी। इसके बाद लैंग्वेज ट्रेनिंग होगी। भविष्य के अनुसार लैंग्वेज में उनकी प्राथमिकता चाइनिज और फ्रेंच है लेकिन विदेश मंत्रालय तय करेगा कि कौनसी लैंग्वेज मिलेगी। इसके अनुसार ही उनकी नियुक्ति होगी। </p>
<p><strong>लगा बधाइयों का तांता</strong></p>
<p>जैसे यूपीएससी का परिणाम घोषित हुआ। गोपाराम देसाई के घर पर बधाई देने वालों का तांता लग गया। परिचितों, मित्रों, सहकर्मियों, रिश्तेदारों ने बधाई दी। बेटे की सफलता से गद्गद् गोपाराम का कहना है कि बेटे की सफलता ने उनका सीना चौड़ा कर दिया। उन्होंने बताया कि भविष्य और उसकी छोटी बहन आरंभ से ही मेधावी रहे हैं। जब उसने यूपीएससी की प्रतियोगी परीक्षा के लिए आवेदन किया। तब उसकी तैयारी और लगन देख उन्हें अहसास हो गया था कि भविष्य पहली ही बार में सफलता हासिल करेगा। </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 31 May 2022 11:52:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'इंडिया गेट'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/know-what-is-special-in-india-gate/article-10304"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/india-gate021.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>अभी नहीं तो...</strong><br />तो कांग्रेस मान चुकी। साल 2024 का आम चुनाव उसके लिए जीवन मरण का। सो, उदयपुर में लिए गए फैसलों पर तेजी से आगे बढ़ रही। इसके लिए दिल्ली में ताबडतोड बैठकें हुईं। प्रियंका गांधी ने भी मौजूदगी दर्ज करवाई। अब तो पार्टी नेता भी कहने लग गए। अभी नहीं तो कभी नहीं। उदयपुर में तय किए गए रोडमैप से पीछे हटे तो मानो खत्म हो जाएंगे। आगे के रास्ते खत्म हो जाएंगे। वैसे भी पार्टी के लिए इन दिनों सिर मुंडाते ही ओले पड़ने जैसे हालात। चिंतन शिविर के दौरान ही जहां सुनील जाखड़ ने पार्टी को बाय-बाय कहा। जले पर नमक छिड़कने वाली बात तो यह कि वह भाजपा में शामिल हो गए। फिर गुजरात में चुनाव आ रहे। वहां के कार्यकारी अध्यक्ष हार्दिक पटेल भी कांग्रेस छोड़ गए। उसी दिन शाम होते-होते डूंगरपुर से पार्टी विधायक गणेश गोगरा ने भी विधायक पद छोड़ा। मतलब कोढ़ में खाज जैसे हालात। अभी शिविर खत्म हुए एक हफ्ता ही बीता। फिर यह सब क्या?</p>
<p><br /><strong>नजरें इनायत... !</strong><br />आजकल भाजपा और कांग्रेस की मरुभूमि पर नजरें इनायत हो रहीं। जहां कांग्रेस ने उदयुपर में चिंतन शिविर किया। तो भाजपा ने भी राष्ट्रीय पदाधिकारियों की तीन दिनी बैठक कर डाली। अब दोनों ही दलों में आरोप प्रत्यारोप भी। सीएम गहलोत बोले, यह सब उदयपुर के जवाब में। भाजपा ने कहा, यह महज संयोग। योजना बहुत पहले ही बन गई थी। फिर आखिर ऐसी क्या बात जो राजस्थान पर कांग्रेस-भाजपा पर इतना फोकस। असल में, दोनों ही दलों में गुटबजी और मतभेद का आलम सार्वजनिक। कांग्रेस में गहलोत एवं पायलट की अदावत जगजाहिर। तो इधर, वसुंधरा राजे और सतीश पूनिया के बीच रस्साकशी के खेल की खबरें। सीएम अशोक गहलोत ने उदयपुर में सफल बैठक का आयोजन करवाकर खुद को साबित करने की कोशिश की। तो भाजपा की बैठक भी शांतिपूर्ण संपन्न हो गई। अब गुजरात के विधानसभा चुनाव की प्रतिक्षा। जैसे यूपी, वैसे ही गुजरात के नतीजे पर बहुत कुछ निर्भर। खासकर भाजपा, राजस्थान को लेकर बड़ा फैसला लेने जा रही।</p>
<p><br /><strong>हम पर ही बरस पड़े...</strong><br />तो पूर्व सीएम वसुंधरा राजे का दर्द बाहर आ गया और वह छलक ही पड़ा। उन्होंने इसके लिए दिग्गज नेता भैंरांसिंह शेखावत से संबंधित एक कार्यक्रम को चुना। शायरना अंदाज में उन्होंने अल्फाज जाहिर किए। कहा, जिनको सांसें दी, उनकी जुबां खुली तो हम पर ही बरस पड़े। मतलब सब कुछ ठीक नहीं चल रहा। लेकिन कहां? पार्टी के भीतर या संगठन के कामकाज के स्तर पर? या फिर इससे भी इतर कोई और बात? राजे गुट की लगातार मांग कर रहा। अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले राजे को सीएम चेहरा बनाया जाए। लेकिन पार्टी नेतृत्व ने स्पष्ट कर दिया। कमल का फूल और पीएम मोदी का चेहरा ही काफी। लेकिन अभी भी अंतिम फैसला होना बाकी। तब तक चीजें ठहरी हुईं। जो दावेदार। वह भी इंतजार कर रहे। लेकिन राजे गुट इसके मूड में नहीं। क्योंकि फिर चुनावी तैयारियों का समय कम बचेगा। लेकिन यह तो नेतृत्व भी सोच रहा होगा। फिर फैसला कहां अटका हुआ?</p>
<p><br /><strong>नकल या रोडमैप?</strong><br />कांग्रेस भी अब जमीनी स्तर पर वही करने का प्रयास कर रही। जो बरसों से भाजपा करती रही। वैसे भी भाजपा ने बूथ पर काम करके कांग्रेस को भी सोचने को मजबूर किया। अब कांग्रेस में भी पूर्णकालीन कायकर्ता का फंडा। करीब 6500 पार्टी कार्यकतार्ओं की देशभर में नियुक्ति का संकल्प। यह लोग जमीन पर बिल्कुल वैसे ही काम करेंगे। जैसे भाजपा में ग्रास रूट का कार्यकर्ता करता है। योजना के अनुसार यह होल टाइम वर्कर लोकसभा एवं विधानसभावार काम करेंगे।यह लोग अपनी राजनीतिक महत्वाकांक्षा को किनारे रखेंगे। किसी को टिकट देने की पैरवी भी नहीं करेंगे। क्षेत्र के मंदिरों एवं पुजारियों, पान, नाई एवं चाय की दुकान की सूचियां बनाएगें। क्षेत्र में सामाजिक समीकरणों का बारीकी से अध्ययन करेंगे। लेकिन इतनी जमीनी बातें क्या कांग्रेस में संभव? क्या पार्टी इन सब फैसलों को जमीन पर उतार पाएगी? क्या कांग्रेस में कार्यकतार्ओं एवं नेताओं की वैचारिक ट्रेनिंग का तौर तरीका ऐसा ही? क्या इसके लिए वह तैयार रहते हैं? यह सब कौन देखेगा?</p>
<p><br /><strong>सतह पर हलचल!</strong><br />बिहार में भाजपा-जदयू गठबंधन की राजनीतिक हलचल सतह पर। केन्द्रीय मंत्री आरसीपी सिंह को नितिश कुमार ने राज्यसभा के लिए नामित नहीं किया। बल्कि उन्होंने जार्ज फर्नाडिस के लंबे समय तक सहयोगी रहे अनिल हेगड़े को आगे किया। इससे कई तरह के कयास। फिर आरसीपी सिंह मंत्री कैसे रहेंगे? असल में, आरसीपी सिंह के बजाए लल्लन सिंह को ही जदयू कोटे से मंत्री बनना था। लेकिन मौका आरसीपी सिंह पा गए। बाद में आरसीपी भाजपा नेतृत्व के करीब चले गए। वहीं, लल्लन सिंह ने पार्टी अध्यक्ष के नाते आरसीपी को अलग थलग करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। कहा तो यहां तक जा रहा। नितिश को लाइन पर लाने के लिए भाजपा आरसीपी को प्रवोक कर रही। ताकि जदयू में झगड़े का लाभ भाजपा उठा सके। हालांकि भाजपा अपनी ओर से नितिश को छोड़ने के मूड में नहीं। जबकि नितिश इस बार भाजपा के मुकाबले विधायकों का संख्या बल कम होने से सहज नहीं। अब राज्यसभा चुनाव के बहाने ही हलचल।</p>
<p><br /><strong>काशी के बहाने ...</strong><br />यूपी एक बार फिर चर्चा में। बिल्कुल अयोध्या की तर्ज पर। बाबा काशी विश्वनाथ मंदिर का विवाद सुप्रीम कोर्ट होते हुए निचली अदालत में पहुंच गया। इससे पहले मंदिर परिसर में हुुए सर्वे के बाद वहां बाबा के मिलने का दावा। तो दूसरा पक्ष इसे खारिज कर रहा। अब इसे लेकर बयानबाजी, दावे-प्रतिदावे और विवाद की स्थिति। साथ में, तर्क और कुतर्क भी। इसी चक्कर में एक डीयू के पढ़े लिखे महाशय लपेटे में आ गए। यूपी में विधानसभा चुनाव निपट चुके। हां, अगले ही साल से लोकसभा चुनाव। चूंकि यूपी देश का सबसे बड़ा सूबा। जहां 80 लोकसभा सीटें। स्वाभाविक है कि यहां भाजपा का फोकस रहेगा। भाजपा का लक्ष्य 75 पार का। तो सपा के भी इस बार लगभग दो गुने से ज्यादा विधायक। ऐसे में कड़ी टक्कर की नौबत तो रहेगी। लेकिन इन सबमें बाबा विश्वनाथ बीच में कहां? इसी बीच, अब तो मथुरा की भी चर्चा। अलग-अलग विषयों को लेकर कई लोग कोर्ट की शरण में जा रहे।<br /><strong>-दिल्ली डेस्क</strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 16:56:08 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>नेताओं को उम्र की सीमा में बांधना ‘बेमानी’, ‘राज’ में नहीं, उम्र की ‘नीति’</title>
                                    <description><![CDATA[एम. करुणानिधि (95) के नाम सबसे उम्रदराज सीएम का रिकॉर्ड, देश के सबसे युवा 29 साल की उम्र में एम.ओ. फारूक मरीकन पुडुचेरी की सीएम बने ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--binding-leaders-in-age-limit-is-nonsensical--not-in-raj--policy-of-age/article-10279"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/119.jpg" alt=""></a><br /><p> जयपुर। कांग्रेस के उदयपुर में हुए चिंतन शिविर से देश की सियासत में नेताओं की उम्र को लेकर बहस गर्म है। कांग्रेस की कार्यवाहक अध्यक्ष सोनिया गांधी की उम्र 75 साल हो गई है, वहीं प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी 71 साल के हैं। ऐसे में नेताओं को उम्र की सीमा में बांधना उनके साथ बेमानी है। देश में वर्तमान में सबसे उम्रदराज मिजोराम के मुख्यमंत्री जोराथंग (77) है, वहीं सबसे कम उम्र अरुणाचल प्रदेश के पेमा खांडू (42) की है। राजस्थान में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत भी 71 साल के हो गए हैं, जो देश के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से छह महीने छोटे हैं। देश के सबसे युवा मुख्यमंत्री एम. ओ. फारुक मरीकर रहे, जिन्होंने 1967 में पुडुचेरी के मुख्यमंत्री के रूप में 29 वर्ष की आयु में शपथ ली। जबकि सबसे बुजुर्ग मुख्यमंत्री एम.करूणानिधि रहे जो कि 95 वर्ष की उम्र तक मुख्यमंत्री रहे। <br /><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>एम. करुणानिधि (95) के नाम सबसे उम्रदराज सीएम का रिकॉर्ड</strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>देश के सबसे युवा 29 साल की उम्र में एम.ओ. फारूक मरीकन पुडुचेरी की सीएम बने</strong> </span><br /><br /><span style="color:#ff0000;"><strong>एक नजर राजस्थान पर</strong></span><br />राजस्थान में सबसे कम उम्र 38 साल में मोहनलाल सुखाड़िया ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। वहीं भैंरोसिंह शेखावत और शिवचरण माथुर 54 साल की उम्र में सीएम बने। वंसुधरा राजे जब 2003 में मुख्यमंत्री बनी तब उनकी उम्र 50 साल थीं। वर्तमान मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने जब पहली बार 1998 में मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी तब उनकी उम्र 47 साल थीं।</p>
<table style="width:566px;">
<tbody>
<tr>
<td style="width:177.3px;"> मुख्यमंत्री </td>
<td style="width:387.7px;">    शपथ के समय उम्र</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">हीरालाल शास्त्री   </td>
<td style="width:387.7px;">50</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">जयनारायण व्यास   </td>
<td style="width:387.7px;">52</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">टीकाराम पालीवाल  </td>
<td style="width:387.7px;">43</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">मोहन लाल सुखाड़िया   </td>
<td style="width:387.7px;">38</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">बरकतुल्लाह खान   </td>
<td style="width:387.7px;">51</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">हरिदेव जोशी   </td>
<td style="width:387.7px;">53</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">भैरों सिंह शेखावत  </td>
<td style="width:387.7px;">54</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">जगन्नाथ पहाड़िया   </td>
<td style="width:387.7px;">48</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">शिवचरण माथुर   </td>
<td style="width:387.7px;">54</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">आशोक गहलोत   </td>
<td style="width:387.7px;">47</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:177.3px;">वसुंधरा राजे सिंधिया   </td>
<td style="width:387.7px;">50</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p> </p>
<p style="text-align:left;"><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>राजस्थान में सबसे युवा सीएम का खिताब मोहन लाल सुखाड़िया (38) के नाम</strong></span><br /><span style="background-color:#ffff99;color:#ff0000;"><strong>भैंरोसिंह शेखावत और शिवचरण माथुर ने 54 साल की उम्र में ली थी सीएम की शपथ</strong></span><br />ऐसा आंकड़ा नहीं कि युवाओं को टिकट दें तो वे सफल और बूढ़े विफल होते हैं। मामला परसेप्शन का है। अभी हाल देखें तो धारणा है कि बीजेपी नए लोगों को ला रही है तो कांग्रेस पुराने ढर्रे पर है। जिन लोगों ने कांग्रेस छोड़ी है, वे ज्यादातर युवा हैं। कांग्रेस युवाओं को पर्याप्त स्पेस दे तो इससे कामयाबी उतनी न मिले लेकिन पर परसेप्शन तो बदलता है।<br />- <strong>प्रो. संजय कुमार, सीएसडीएस (विकास की राजनीति के अध्ययन का केन्द्र)</strong><br /><br /><span style="background-color:#ffcc00;color:#ff6600;"><strong>‘राज’ में नहीं, उम्र की ‘नीति’</strong></span><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>बीजेपी राज्यों में सीएम की उम्र गैर बीजेपी शासित राज्यों से कम</strong></span><br />अगर बीजेपी और गैर बीजेपी शासित राज्यों की तुलना की जाए तो बीजेपी शासित राज्यों के मुख्यमंत्रियों की औसत आयु तुलनात्मक रूप से गैर बीजेपी शासित राज्यों से कम है। <br />भाजपा ने एक दशक में यह धारणा बनाई है कि वह बुजुर्गों को मार्गदर्शक मंडल में भेजकर पार्टी की धमनियों में नया लहू बहा रही है।<br />नोट: देश में वर्तमान समय में 40 से कम उम्र के मुख्यमंत्री कोई नहीं है।</p>
<table style="width:566px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:564px;" colspan="3"><strong>50 से कम उम्र के मुख्यमंत्री</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">सीएम   </td>
<td style="width:73.8833px;">उम्र   </td>
<td style="width:371.117px;">प्रदेश</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">जगन रेड्डी   </td>
<td style="width:73.8833px;">49   </td>
<td style="width:371.117px;">आंध्रप्रदेश</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">योगी आदित्य नाथ   </td>
<td style="width:73.8833px;">49    </td>
<td style="width:371.117px;">उत्तरप्रदेश</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">प्रमोद सावंत  </td>
<td style="width:73.8833px;">49    </td>
<td style="width:371.117px;">गोवा</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">भगवंत मान   </td>
<td style="width:73.8833px;">48    </td>
<td style="width:371.117px;">पंजाब</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">हेमंत सोरेन   </td>
<td style="width:73.8833px;">46   </td>
<td style="width:371.117px;">झारखण्ड</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">पुष्कर धामी   </td>
<td style="width:73.8833px;">46   </td>
<td style="width:371.117px;">उत्तराखण्ड</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">सी. के.संगमा   </td>
<td style="width:73.8833px;">44   </td>
<td style="width:371.117px;">मेघालय</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:119px;">पेमा खांडू   </td>
<td style="width:73.8833px;">42   </td>
<td style="width:371.117px;">अरुणाचल प्रदेश</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;">   </p>
<table style="width:566px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;width:560px;height:41px;" colspan="3"><strong>60 से कम उम्र के मुख्यमंत्री</strong></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:135px;height:41px;">सीएम   </td>
<td style="width:57.6333px;height:41px;">उम्र   </td>
<td style="width:367.367px;height:41px;">प्रदेश</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:135px;height:41px;">जयराम ठाकुर   </td>
<td style="width:57.6333px;height:41px;">57   </td>
<td style="width:367.367px;height:41px;">हिमाचल प्रदेश</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:135px;height:41px;">प्रेम सिंह तमंग   </td>
<td style="width:57.6333px;height:41px;">54     </td>
<td style="width:367.367px;height:41px;">सिक्किम</td>
</tr>
<tr style="height:54.9px;">
<td style="width:135px;height:54.9px;">हेमंत सोरेन   </td>
<td style="width:57.6333px;height:54.9px;">53   </td>
<td style="width:367.367px;height:54.9px;">झारखण्ड</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:135px;height:41px;">अरविंद केजरीवाल   </td>
<td style="width:57.6333px;height:41px;">53   </td>
<td style="width:367.367px;height:41px;">दिल्ली</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;">  </p>
<table style="width:566px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:563px;" colspan="3"><strong>सबसे उम्र दराज मुख्यमंत्री</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:154px;">सीएम  </td>
<td style="width:64.6px;">उम्र   </td>
<td style="width:344.4px;">प्रदेश</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:154px;">जोरामथंगा    </td>
<td style="width:64.6px;">77   </td>
<td style="width:344.4px;">मिजोरम</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:154px;">पिनरई विजयन   </td>
<td style="width:64.6px;">76   </td>
<td style="width:344.4px;">केरल</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:154px;">नवीन पटनायक   </td>
<td style="width:64.6px;">75   </td>
<td style="width:344.4px;">उड़ीसा</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<table style="width:566px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;width:564px;height:41px;" colspan="3"><strong>70 से कम उम्र वाले मुख्यमंत्री</strong></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">सीएम   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">उम्र   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">प्रदेश</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">एम.के.स्टालीन   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">69   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">तमिलनाडु</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">मनिक साहा   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">69   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">त्रिपुरा</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">के.सी.आर   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">68   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">तेलगांना</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">एम.एल.खट्टर   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">68   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">हरियाणा</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">ममता बनर्जी   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">67   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">पश्चिम बंगाल</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">शिवराज सिंह चौहान   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">63   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">मध्यप्रदेश</td>
</tr>
<tr style="height:41.4667px;">
<td style="width:154px;height:41.4667px;">भूपेंद्र भाई पटेल   </td>
<td style="width:73.9px;height:41.4667px;">62   </td>
<td style="width:336.1px;height:41.4667px;">गुजरात</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">बी.एस.बोम्मई   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">62   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">कर्नाटक</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;"> उद्धव ठाकरे   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">61   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">महाराष्ट्र</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">एन.बिरेन सिंह   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">61   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">मणिपुर</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:154px;height:41px;">भूपेश बघेल   </td>
<td style="width:73.9px;height:41px;">60   </td>
<td style="width:336.1px;height:41px;">छत्तीसगढ़</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;">      </p>
<table style="width:566px;">
<tbody>
<tr style="height:41px;">
<td style="text-align:center;width:564px;height:41px;" colspan="3"><strong>70 के पार वाले मुख्यमंत्री</strong></td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:144px;height:41px;">सीएम   </td>
<td style="width:65.9px;height:41px;">उम्र   </td>
<td style="width:354.1px;height:41px;">प्रदेश</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:144px;height:41px;">जोरामथंगा   </td>
<td style="width:65.9px;height:41px;">78   </td>
<td style="width:354.1px;height:41px;">मिजोराम</td>
</tr>
<tr style="height:52px;">
<td style="width:144px;height:52px;">पिनरई विजयन   </td>
<td style="width:65.9px;height:52px;">77   </td>
<td style="width:354.1px;height:52px;">केरल</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:144px;height:41px;">नवीन पटनायक   </td>
<td style="width:65.9px;height:41px;">76    </td>
<td style="width:354.1px;height:41px;">उड़ीसा</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:144px;height:41px;">नीतीश कुमार   </td>
<td style="width:65.9px;height:41px;">71   </td>
<td style="width:354.1px;height:41px;">बिहार</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:144px;height:41px;">नेफियू रियो   </td>
<td style="width:65.9px;height:41px;">72   </td>
<td style="width:354.1px;height:41px;">नागालैण्ड</td>
</tr>
<tr style="height:41.6px;">
<td style="width:144px;height:41.6px;">अशोक गहलोत   </td>
<td style="width:65.9px;height:41.6px;">71   </td>
<td style="width:354.1px;height:41.6px;">राजस्थान</td>
</tr>
<tr style="height:41px;">
<td style="width:144px;height:41px;">एन रंगास्वामी  </td>
<td style="width:65.9px;height:41px;">72   </td>
<td style="width:354.1px;height:41px;">पुडुचेरी</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;">  </p>
<table style="width:566px;">
<tbody>
<tr>
<td style="text-align:center;width:563px;" colspan="3"><strong>सबसे युवा मुख्यमंत्री</strong></td>
</tr>
<tr>
<td style="width:146px;"> सीएम    </td>
<td style="width:67.6167px;">उम्र    </td>
<td style="width:349.383px;">प्रदेश</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:146px;">पेमा खांडू    </td>
<td style="width:67.6167px;">42    </td>
<td style="width:349.383px;">अरुणाचल प्रदेश</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:146px;">पुष्कर धामी   </td>
<td style="width:67.6167px;">46    </td>
<td style="width:349.383px;">उत्तराखंड</td>
</tr>
<tr>
<td style="width:146px;">सी.के.संगमा    </td>
<td style="width:67.6167px;">44    </td>
<td style="width:349.383px;">मेघालय</td>
</tr>
</tbody>
</table>
<p style="text-align:left;"><br /><br />   <br />    <br />    <br />    </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--binding-leaders-in-age-limit-is-nonsensical--not-in-raj--policy-of-age/article-10279</link>
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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 15:02:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>'राजकाज'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-10257"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/rajkaj1.jpg" alt=""></a><br /><p><span style="color:#ff6600;"><strong>चर्चा में शेरो-शायरी</strong></span><br />अगर कोई शेरो-शायरियों से इशारों ही इशारों में अपनी बात कहता है, तो कई भाइयों को पचती नहीं है और उसके कई मायने निकालने में जुट जाते हैं। और तो और ऊपर वालों के कान भरने में भी कोई कसर नहीं छोड़ते। अब देखो ना, पिछले मंडे को पिंकसिटी में भगवा वाली मैडम ने अपने पुराने अंदाज में शेरो-शायरी क्या सुना दी, कइयों का दिन का चैन और रातों की नींद उड़ गई। मैडम के नाम से मुंह बिगाड़ने वाले कई भाई लोगों ने इसे खुद से जोड़ कर ऊपर वालों को परोसने में पसीने बहाने में जुट गए। मैडम का शेर था कि जिन पत्थरों को हमने दी थी धड़कनें, उनको जुबान मिली थी, तो हम पर ही बरस पड़े। मैडम के इस शेर को समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी हैं।</p>
<p><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>एम फैक्टर और शनि का असर</strong></span><br />हाथ वाले भाई लोगों का भी कोई सानी नहीं है। चाहे अपना हो या फिर पराया, हत्थे चढ़ने पर कोई कसर नहीं छोड़ते। इन दिनों उनके हत्थे सिंह राशि वाले तीन भाई लोग चढ़े हुए हैं, जो एम फैक्टर में टॉप टेन में शामिल हैं। एक भाईसाहब बाड़ी से ताल्लुकात रखते हैं, तो दूसरे भाईसाहब का पिंकसिटी में कृष्ण की पोल से सीधा संबंध है। तीसरे भाईसाहब नावां की गूदड़ी के लाल हैं। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर आने वाले में खुसरफुसर है कि हाथ वाले दल में सिंह राशि वाले भाइयों पर शनि का असर कुछ ज्यादा ही है, जो उनको या परिवार वालों को लपेटे में लिए बिना पीछा नहीं छोड़ रहा। यह तो भला हो, जोधपुर वाले अशोक जी भाईसाहब का, जो अपने जादू से कोई न कोई गली निकाल लेते हैं, वरना शनि तो कोई कसर नहीं छोड़ रहा।</p>
<p><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>पसंद और नापसंद का फेर</strong></span><br />सूबे में चेहरों के नाम पर चार बार राज कर चुकी भगवा वाली पार्टी में इन दिनों लीडर को लेकर उठापटक मची हुई है। चार धड़ों में बंटे नेताओं में एक राय बनाने की कोशिशें भी की गई, लेकिन भारती भवन में बैठकों में चिंतन-मंथन करने वाले भाई लोग कोई ना कोई रोड़ा अटका देते हैं। राज का काज करने वालों में चर्चा है कि दो बार बाबोसा और दो बार मैडम के चेहरे पर चुनावी जंग फतह कर चुके कमल के फूल वाले दल में बड़ा चेहरा तो है, लेकिन पसंद और नापसंद के फेर में फंसता नजर आ रहा है। ऐसे में अब बेचारों के सामने नमोजी के नाम पर जंग में उतरने के सिवाय कोई चारा भी तो नहीं है, चूंकि खुद के चेहरे के नाम पर वोट मांगने का कॉन्फिडेंस भी तो नहीं है।</p>
<p><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>चर्चा नई बीनणी की</strong></span><br />इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के दफ्तर में कुर्सी की इंतजार में बैठे भाई लोगों में नई बीनणी वाली कहावत की चर्चा जारों पर है। कहावत भी गुजरे जमाने में राज का काज कर चुके खाकी वाले नेताजी ठाठ के साथ सुनाते हैं। पीसीसी में घटती भीड़ को लेकर नेताजी चटकारे लेते हैं कि नई बीनणी को देखने के लिए पूरा गांव इकट्ठा होता है, पर पुरानी होने के बाद केवल घर वाले ही रहते हैं। यही हाल लक्ष्मणगढ़ वाले भाईसाहब के साथ हो रहा है।</p>
<p><br /><span style="color:#ff6600;"><strong>एक जुमला यह भी</strong></span><br />सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं, बल्कि भगवा वाले भाईसाहब से ताल्लुक रखता है। जोधपुर की धरा में रमे बसे भाईसाहब पिछले पौने दो साल से चमक नींद सो रहे हैं। जब किसी किसी एम्बुलेंस या पुलिस की गाड़ी पर लगे सायरन की आवाज आती है, तो भाई साहब की सांसें ऊपर-नीचे होने लगती हैं। जुमला है कि भाईसाहब साल भर पहले भी दिल्ली में सायरन की आवाज से चमक कर दीवार लांघने में ऐड़ी तुड़वा चुके हैं।<br /><strong>एल. एल. शर्मा, पत्रकार</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 23 May 2022 11:53:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>वर्ल्ड हाइपरटेंशन डे आज: तीन गोली से बीपी कंट्रोल ना हो तो सामान्य फिजिशियन से नहीं, एंडोक्राइनोलॉजिस्ट से कराएं बीमारी का इलाज</title>
                                    <description><![CDATA[एंडोक्राइन हाइपरटेंशन के मरीजों की संख्या में इजाफा, 35 साल तक के युवा हो रहे ग्रसित]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--world-hypertension-day-today--if-there-is-no-bp-control-with-three-pills--then-treat-the-disease-with-an-endocrinologist--not-a-general-physician/article-9927"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/hypertension-day.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हाइपरटेंशन यानि हाई बीपी की बीमारी को लेकर यह धारणा है कि मरीज जनरल फिजिशियन से ही इलाज लेता है, लेकिन एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के एक रिसर्च में यह खुलासा हुआ है कि एंडोक्राइन हाइपरटेंशन के केस भी अब तेजी से बढ़ने लगे है और यह बीमारी 35 साल से कम आयु वर्ग में देखने को मिली है।  एसएमएस मेडिकल कॉलेज के एंडोक्राइनोलॉजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संदीप माथुर ने बताया कि एंडोक्राइन हाइपरटेंशन एक जेनेटिक डिसआॅर्डर से संबंधित बीमारी है। हमारे यहां जो लोग ओपीडी में इलाज के लिए आ रहे हैं या भर्ती हैं उनमें 35 साल तक की आयु के मरीज हैं। जिन परिवारों में माता-पिता को हाई बीपी की शिकायत रहती है, वहां बच्चों में यह बीमारी होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसमें मरीज का ब्लड प्रेशर बहुत ज्यादा रहता है और 3 या 4 गोली से भी कंट्रोल में नहीं आता है। इनमें सामान्य बीपी के मरीजों की तुलना में अलग लक्षण होते हैं। इनमें तेज घबराहट, दिल की धड़कन बढ़ना, बैचेनी होने के अलावा तेज पसीना आना, रात में यूरिन अधिक और बार-बार आना, क्रैम्प्स आना आदि लक्षण होते हैं। मरीज इसे सामान्य ब्लड प्रेशर मानकर जनरल फिजिशियन से इलाज कराते हैं और महज दस फीसदी मरीज ही एसएमएस के आते हैं। इससे बीमारी पूरी तरह से पकड़ में नहीं आती और मरीज की मौत भी हो जाती है।<br /><br />फियोक्रोमोसाइटोमा के कारण बन जाता है ट्यूमर<br />डॉ. माथुर ने बताया कि एंडोक्राइन हाइपरटेंशन में फियोक्रोमोसाइटोमा भी एक प्रकार का विकार है। इसमें मरीज के पेट में ट्यूमर बन जाता है, जिसके कारण ब्लड प्रेशर कंट्रोल में नहीं होता। आॅपरेशन कर ट्यूमर को निकालने पर ही ब्लड प्रेशर कंट्रोल होता है। पिछले दो साल में यहां करीब 80 मरीज आ चुके हैं। ऐसे रिसर्च के लिए डिपार्टमेंट ने रेअर जीन प्रोजेक्ट भी शुरू किया है, जिसमें जेनेटिक टेस्टिंग से उन मरीजों का डेटा तैयार कर एनालिसिस किया जाएगा। इस बीमारी का पता लगाने के लिए रेनिन एल्डोस्टेरोन नामक जांच होती है। यह जांच अब एसएमएस मेडिकल कॉलेज में शुरू कर दी है और नि:शुल्क भी है।<br /><br />    साइलेंट किलर है हाइपरटेंशन<br />आनुवंशिक कारण के अलावा खराब लाइफ -स्टाइल और गलत खान-पान तथा निर्धारित मात्रा से अधिक नमक का सेवन भी हाइपरटेंशन का कारण है। इससे हार्ट अटैक से लेकर लिवर डैमेज और आंखों की रोशनी जाने का खतरा होता है। हाइपरटेंशन को साइलेंट किलर भी कहा जाता है, जो बिना लक्षण के ही प्राणघातक होता है, इसमें कुछ लोगों में सिर दर्द, धडकनों का तेज होना, चलते समय सांसों का फूलना, थकान और असहजता देखी जाती है, यह लकवा और हार्ट अटैक का प्रमुख कारण है। <br />    हाइपरटेंशन का पैमाना<br />एक सेहतमंद आदमी के लिए रक्तचाप 120-80 होता है, जब आपका सिस्टोलिक ब्लड प्रेशर या ऊपर का रक्तचाप 140 और डायास्टोलिक ब्लड प्रेशर यानी नीचे का रक्तचाप 90 या इससे ऊपर हो तो तब उसे उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन कहते हैं।<br /><br />ंहाइपरटेंशन के कारण युवाओं में हार्ट अटैक के मामले देखे जा रहे हैं। उच्च रक्तचाप के बारे में कम जागरूकता, प्राथमिक देखभाल के माध्यम से उचित देखभाल की कमी आदि इसके प्रमुख कारण है। <br />-डॉ. संदीप मिश्रा, पूर्व डायरेक्टर, <br />कार्डियोलॉजी एम्स नई दिल्ली। ु<br /><br />ं-हाइपरटेंशन का सही समय पर उपचार नहीं किया जाए तो यह जीवन के लिए खतरनाक होता है। समय पर निदान, नियमित जांच और रक्तचाप के स्तर को नियंत्रित रखना चाहिए। <br />-डॉ. राशिद अहमद, <br />सीनियर कार्डियोलॉजिस्ट ु</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 May 2022 13:19:03 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>सब लोग बदलाव चाहते हैं,ताकि कांग्रेस नए रूप में लोगों के सामने पेश हो:पायलट</title>
                                    <description><![CDATA[र्टी में अपनी भूमिका के सवाल पर कहा कि  पार्टी जो भी जिम्मेदारी दे, मैं उसके लिए तैयार हूं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/everyone-wants-change--so-that-congress-is-presented-in-front-of-people-in-a-new-form--sachin-pilot/article-9773"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/sachin-pilot-11.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट ने कहा कि उदयपुर चिंतन शिविर के दौरान मीडिया से बात करते हुए कहा कि सब लोग चाहते हैं कि कांग्रेस में बदलाव हो और नए रूप में हम लोगों के सामने कांग्रेस को प्रस्तुत कर सकें। पार्टी युवाओं के लिए बड़े बदलाव कर रही है। शिविर में सोनिया गांधी ने बहुत अहम संदेश दिया है। सभी को पार्टी को मजबूत करने का काम होगा। पार्टी में अपनी भूमिका के सवाल पर कहा कि  पार्टी जो भी जिम्मेदारी दे, मैं उसके लिए तैयार हूं।</p>
<p><br /><strong>किसानों के साथ कांग्रेस:</strong><br />पायलट ने कहा कि कांग्रेस हर वर्ग की पार्टी रही सबको साथ लेकर चली है। देश भर में किसान आत्महत्या कर रहे हैं। केंद्र पहले काले कानून लाई फिर किसानों को नक्सली बोला गया। किसी ने इनके लिए आंसू तक नहीं बहाया। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा हाल ही में राजस्थान आए, लेकिन किसानों के लिए कुछ नही बोले।किसान भी देख रहा है कि कौन उसके हित मे और कौन विरोध में है। देश मे जारी माहौल के बीच पायलट ने कहा कि देश मे लोगों को लड़ाकर आक्रामक राजनीति की जा रही है। ऐसे लोगों को मिलकर रोकना होगा।देश में राजनीति मुद्दों पर होनी चाहिए। शिविर में ऐसे ही मुद्दों पर चर्चा हो रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 14 May 2022 19:33:52 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>'इंडिया गेट'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/india-gate/know-what-is-special-in-india-gate/article-9428"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/india-gate02.jpg" alt=""></a><br /><p>मैदान में पीके!<br />तो आखिरकार प्रशांत कुमार यानी पीके ने राजनीति के मैदान में उतरने का संकेत कर ही दिया। शुरूआत बिहार से करेंगे। सो, सभी राजनीतिक दल उन पर पिल पड़े। हालांकि वह जदयू के उपाध्यक्ष रह चुके। उसके बाद उन्होंने बिहार की हर ग्राम पंचायत से युवा नेतृत्व को आगे लाने का मिशन शुरू किया। लेकिन अचानक उस पर विराम लगा दिया। बहाना कोरोना महामारी का। लेकिन जब उनकी कांग्रेस से बात बिगड़ गई। तो हुंकार भर रहे। कहा, दस साल हो गए। अब जमीन पर कुछ नया करना होगा। लेकिन जमीनी राजनीति करना और पार्टियों से ठेका लेकर जितवाने के लिए आइडिया देना अलग बात! यह डगर इतनी आसान नहीं। आज जो राजनीति के शीर्ष पर। उन्होंने दशकों तक जमीन पर आम जनता के बीच काम किया। उसके बाद ही जनता ने उन्हें भरोसा करके आशीर्वाद दिया। अब सवाल पीके का। उन्होंने अब तक जमीन पर लोगों के लिए किया क्या? अलावा कंप्यूटर पर आंकड़ों का विश्लेषण करने के और पैसा भी कमाया।</p>
<p><br /><strong>शह, मात.. कश्मकश!</strong><br />बिहार में भविष्य की राजनीति के लिहाज से बुहत कुछ घटित हो रहा। सीएम नितिश कुमार संकेत दे रहे। सत्ता में सहयोगी भाजपा समेत विपक्षी राजद को भी। पहले नितिश पूर्व सीएम राबड़ी देवी के आवास पर आयोजित इफ्तार में गए। तो अगले ही दिन प्रोटोकॉल तोड़कर अमित शाह का स्वागत करने एयरपोर्ट पहुंच गए। अब इससे कई तरह के कयास, चचार्एं। उपर से उनके दिल्ली आने की चचार्एं और भाजपा की इच्छा कि उसका सीएम बने। अब बिहर विधानसभा का वर्तमान में समीकरण ऐसा कि जिधर नितिश जाएंगे। सत्ता उधर ही होगी। हां, भाजपा की सहयोगी वीईपी का कुनबा बिखर गया। जबकि चिराग पासवान की लोजपा पहले ही खेत रही। अब डर तो हम के जीतनराम मांझी को भी सता रहा। वहीं, लालूजी के परिवार में भी सब कुछ ठीक ठाक नहीं। उनके बड़े पुत्र तेजप्रताप बगावत के सुर दे रहे। क्योंकि लालूजी की राजनीतिक विरासत उनके छोटे भाई तेजस्वी यादव के पास जा रही। उम्मीद कि राष्ट्रपति चुनाव तक तस्वीर साफ हो।</p>
<p><br /><strong>राष्ट्रपति चुनाव..</strong><br />देश के अगले राष्ट्रपति के चुनाव के लिए सुगबुाहट सुनाई देने लगी। सत्ता पक्ष में नहीं। बल्कि कांग्रेस के अगुवाई वाले विपक्ष में। चर्चा यह कि कांग्रेस समेत वामदल सक्रिय हो रहे। भाजपा विरोधी दल एक साझा प्रत्याशी उतारने के पक्ष में। केसीआर ने वायएसआर के जगनमोहन रेड्डी एवं बीजद के नवीन पटनायक से बात की बताई। लेकिन उन्होंने कांग्रेस के साथ जाने से इनकार किया बताया। असल में, यह दोनों ही दल विरोध के फेर में भाजपा से बैर मोल लेने एवं कांग्रेस के साथ खड़े नहीं होना चाहते। हालांकि मतों का आंकड़ा एनडीए के पक्ष में। सत्ताधारी गठबंधन का प्रत्याशी आराम से जीत जाएगा। लेकिन कांग्रेस एवं वामदलों का रूख हमेशा से विरोध के लिए विरोध करने का। इस बीच, अभी तक यह कोई अनुमान नहीं लगा पा रहा कि देश का अगला राष्ट्रपति कौन होगा? हां, राष्ट्रपति कोई महिला, अल्पसंख्यक या दक्षिण भारत से होने की संभावना जताई जा रही। लेकिन यह सब केवल पीएम मोदी एवं अमित शाह ही जानते!</p>
<p><br /><strong>झारखंड का झमेला!</strong><br />कांग्रेस के दिन वाकई में ठीक नहीं चल रहे। हर ओर से परेशानी ही परेशानी। एक तो केवल राजस्थान एवं छत्तीसगढ़ में सरकारें बची हुईं। इसके अलावा कांग्रेस झारखंड एवं महाराष्ट्र में गठबंधन सरकारों में शामिल। लेकिन महाराष्ट्र में ऐसा कोई दिन नहीं बीता। जब कोई खटपट न हुई हो। अब झारखंड में भी बखेड़ा। हालांकि यह खुद कांग्रेस के कारण नहीं। बल्कि सहयोगी जेएमएम के नेता एवं सीएम हेमंत सोरेन एक आॅफिस आॅफ प्रोफिट के मामले में फंस गए। शिकायत हुई। तो चुनाव आयोग ने गंभीरता से लेते हुए नोटिस भी भेज दिया। अब परेशान कांग्रेस। मामला आगे बढ़ा तो कहीं विधायक दल ही न टूट जाए। जबकि पार्टी विधायक कई दिनों से सीएम एवं उनके मंत्रियों की शिकायत पार्टी आलाकमान से करते रहे। अब यदि झारखंड में कुछ हुआ। तो इसकी कोई गारंटी नहीं कि महाराष्ट्र में कुछ नहीं होगा। जहां बीएमसी के चुनाव सामने। जहां अभी तक यह पक्का नहीं कि गठबंधन के सहयोगी शिवसेना एवं एनसीपी साथ चुनाव लड़ेंगे।<br /><strong>दूर की रणनीति!</strong><br />जम्मू-कश्मीर को लेकर परिसीमन आयोग की सिफारिशें सार्वजनिक। जहां विधानसभा सीटों में बढ़ोतरी का प्रस्ताव। तो अब जम्मू एवं कश्मीर संभागों में सीटों का अंतर भी नौ से घटकर चार सीट का होगा। एसटी के लिए नौ एवं एससी के लिए सात सीटों पर आरक्षण का भी प्रस्ताव। मतलब अब्दुल्ला एवं मुफ्ती परिवारों के प्रभुत्व के खात्मे का इंतजाम। इसके पहले ग्राम पंचायत एवं बीडीसी के चुनाव हुए। जिसका एनसी एवं पीडीपी ने बायकाट किया। लेकिन जब असली गेम समझ आया। तो मजबूरी में डीडीसी के चुनाव में गुपकार गठबंधन के साथ उतरे। लेकिन तब तक देर हो चुकी थी। अब विधानसभा चुनाव। लेकिन सरकार इससे भी आगे की सोच रही। जम्म-कश्मीर को लेकर पाकिस्तान हमेशा जनमत संग्रह की मांग करता रहा। अब यदि यूएनओ के प्रस्ताव के मुताबिक कभी जनमत संग्रह हुआ। तो वह पाक अधिकृत कश्मीर में भी होगा। चूंकि असली लोकतांत्रिक प्रक्रिया भारत में अपनाई जा रही। आम जनता को इसमें भागीदारी मिल रही। फिर पीओके की जनता किधर जाएगी?</p>
<p><br /><strong>केन्द्र में मरुधरा!</strong><br />अपनी मरुधरा इन दिनों राजनीति के लिहाज से खासी चर्चा में। पहले करौली दंगों और बाद में जोधपुर शहर में हुए तनाव ने देशभर का ध्यान खींचा। हालांकि कांग्रेस एवं भाजपा में आंतरिक गुटबाजी भी राजनीति के जानकारों को गौर करने पर मजबूर कर रही। जहां कांग्रेस में सीएम अशोक गहलोत एवं पूर्व पीसीसी सचिन पायलट की राजनीतिक अदावत किसी न किसी बहाने चर्चा में रहती। तो भाजपा में भी पूर्व सीएम वसुंधरा राजे की भी अपने केन्द्रीय नेतृत्व से पटरी नहीं बैठने की खबरें गाहे बगाहें आती रहतीं। अब एक और मुद्दा। जहां कांग्रेस उदयपुर में तीन दिवसीय चिंतन शिविर आयोजित कर रही। तो भाजपा भी 21 एवं 22 को राष्ट्रीय कार्यकारिणी की जयपुर में बैठक करने जा रही। उसी समय राहुल गांधी का कोटपूतली में दौरा प्रस्तावित। तो भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा एवं गृहमंत्री अमित शाह भी मरुधरा का दौरा करेंगे। मतलब राजस्थान मानो राजनीतिक गतिविधियों का कुरूक्षेत्र बनने जा रहा। ऐसा क्यों? विधानसभा चुनाव में तो अभी समय। फिर कारण क्या?<br />-<strong>दिल्ली डेस्क </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>इंडिया गेट</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 16:25:41 +0530</pubDate>
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                <title>बेटे पर दुष्कर्म आरोप मामले में सामने आए महेश जोशी: बोले, 'मैं हमेशा न्याय के साथ, कोई भी प्रकरण हो जहां सत्य वहां महेश जोशी'</title>
                                    <description><![CDATA[ जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी के बेटे और युवा कांग्रेस नेता रोहित जोशी के खिलाफ एक युवती ने दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-news--mahesh-joshi-came-out-in-the-rape-allegation-case-against-the-son--said--i-am-always-with-justice--no-matter-where-the-truth-is-there-mahesh-joshi/article-9422"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/mahesh-joshi-son-1.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>जयपुर।</strong> जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी के बेटे और युवा कांग्रेस नेता रोहित जोशी के खिलाफ एक युवती ने दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया है। पीड़िता ने रोहित पर दुष्कर्म के अलावा ब्लैकमेल कर शारीरिक शोषण करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने रोहित के खिलाफ दिल्ली दक्षिणी इलाके के सदर बाजार थाने में रविवार को एफआईआर दर्ज करवाई है। इन आरोपों के बाद राजस्थान के जलदाय मंत्री महेश जोशी पहली बार मीडिया के सामने आए।</p>
<p><br />इस दौरान महेश जोशी ने कहा कि मैं हमेशा अपने पूरे जीवन सत्य और न्याय पर रहा हूं। पुलिस निष्पक्षता, गहराई और सख्ती के साथ इस मामले की जांच करें। मुझे इस मामले का मीडिया से ही पता लगा है और मैं हमेशा न्याय और सच्चाई के साथ रहूंगा। मीडिया ने अपनी जिम्मेदारी निभाते हुए एफआईआर के बारे में जनता तक बात पहुंचा दी, लेकिन अब इस मामले में कयास और मीडिया ट्रायल को छोड़ पुलिस को अपना काम करने देना चाहिए।</p>
<p><br /><strong>पुलिस गहराई में जाकर सच्चाई पता लगाएगी</strong> <br /> जोशी ने दिल्ली में एफआईआर दर्ज होने की बात पर कहा कि उन्हें इस मामले में उतना ही पता है जो मीडिया चला रहा है। लेकिन मैं इतना जरूर कहूंगा कि पुलिस इस मामले में न्याय करेगी और गहराई में जाकर सच्चाई का पता लगाएगी। उन्होंने मामले की ज्यादा जानकारी होने से इनकार कर दिया। जोशी ने कहा कि मैं हमेशा न्याय के साथ रहा हूं। चाहे यह प्रकरण हो या कोई और प्रकरण जहां न्याय होगा वहीं महेश जोशी होगा।<br /><br /><strong>क्या है पूरा मामला</strong>: राजस्थान के जलदाय मंत्री डॉ. महेश जोशी के बेटे और युवा कांग्रेस नेता रोहित जोशी के खिलाफ एक युवती ने दुष्कर्म का मामला दर्ज करवाया है। पीड़िता ने रोहित पर दुष्कर्म के अलावा ब्लैकमेल कर शारीरिक शोषण करने का भी गंभीर आरोप लगाया है। पीड़िता ने रोहित के खिलाफ दिल्ली दक्षिणी इलाके के सदर बाजार थाने में रविवार को एफआईआर दर्ज करवाई है। हालांकि पीड़िता ने उसके साथ दुष्कर्म होने का स्थान सवाई माधोपुर बताया है जिसके चलते दिल्ली पुलिस ने जीरो नंबरी एफआईआर दर्ज कर मामला जांच के लिए महिला थाना सवाई माधोपुर भिजवाया है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 15:28:33 +0530</pubDate>
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                <title>'राजकाज'</title>
                                    <description><![CDATA[पर्दे के पीछे की खबरें जो जानना चाहते है आप....]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/know-what-is-special-in-raj-kaj/article-9414"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/rajkaj.jpg" alt=""></a><br /><p><strong>नजरें झीलों की नगरी की तरफ</strong><br />इन दिनों सूबे के पॉलिटिशियन के साथ ब्यूरोक्रेसी की नजरें झीलों की नगरी पर टिकी हैं। टिके भी क्यों नहीं, मेवाड़ में बनी पांच अक्षरों वाली इस नगरी में तीन दिन तक गहन मंथन के साथ अमृत जो निकालेगा। अमृत निकालने वाले और कोई नहीं, बल्कि हाथ वाले भाई लोग हैं। इंदिरा गांधी भवन में बने पीसीसी के ठिकाने पर चर्चा है कि उदयपुर के मंथन में निकलने वाले अमृत का ब्रांड वो ही होगा, जो मेष राशि वाले भाई साहब अपने जादू से निकालेंगे। अब समझने वाले समझ गए, ना समझे वो अनाड़ी हैं।</p>
<p><br /><strong>तुम नहीं होते तो</strong><br />आज हम चर्चा करेंगे, हे मेरे अल्लाह और हे मेरे राम की। करना भी लाजमी है, चूंकि इन दिनों इन दोनों पर पूरे इंडिया की नजर है। इनसे न पॉलिटिशियन अछूते हैं और न ही ब्यूरोक्रेट्स। खाकी और खादी वाले तक इन दोनों के भंवरजाल में फंसे हुए हैं, जिनको न आगा सूझ रहा है और न ही पीछा। हर गली और मौहल्ला इनमें बंटा हुआ है। सरदार पटेल मार्ग पर स्थित बंगला नंबर 51 में बने भगवा के ठिकाने के साथ इंदिरा गांधी भवन में बने हाथ वालों के दफ्तर में आने वाले भाई लोग सिर्फ ये ही गुनगुना रहे हैं कि हे अल्लाह और हे मेरे भगवान, आज तुम नहीं होते, तो हम राजनीति कैसे करते।</p>
<p><br /><strong>असर अफवाहों का</strong><br />सूबे में इन दिनों कई तरह की अफवाहों का दौर है। ढाणी-गांव से लेकर शहर की गलियों तक अफवाह फैलाने वालों की कमी नहीं है। अफवाहें भी हाथ वालों के साथ भगवा वाले नेताओं को लेकर है। हाथ वाले भाई लोगों का एक गुट जोधपुर वाले भाईसाहब को लेकर अफवाह फैलाने में कोई कसर नहीं छोड़ रहा, तो भगवा वाले भाई लोगों के तीन गुट मैडम को लेकर कई तरह की अफवाहें फैलाने में दिन-रात एक किए हुए हैं। राज का काज करने में वालों में हकीकत को लेकर चर्चा है कि न तो जोधपुर वाले भाई साहब कहीं जा रहे हैं और न ही मैडम सूबे से दूर हो रही हैं। अब अफवाह फैलाने वालों को कौन समझाए कि मिशन-2023 के लिए इन दोनों सेनापतियों की सेना ही मैदान में उतरेगी, जो आप को बोर्डर पर ही रोकने का दम रखती है। सो दीपावली पर सिविल लाइंस के बंगला नंबर 13 में पटाखों के साथ रंग बिरंगी फुलझड़ियां भी छूटे बिना नहीं रहेगी।</p>
<p><br /><strong>कमाल मीठी माई का</strong><br />जोधपुर वाले भाईसाहब कब क्या पैंतरा फेंक दें, पता नहीं चलता। भगवा वाले तो दूर की बात हाथ वाले भी नहीं समझ पा रहे कि आखिर माजरा क्या है। दोनों ओर के नेता इधर-उधर टोह लेने में भी कोई कसर नहीं छोड़ रहे। इन दिनों साहब की बदली चाल-ढाल को लेकर भारती भवन में भी चर्चा, चिंतन और बैठकों का दौर जारी है। सरदार पटेल मार्ग स्थित बंगला नंबर 51 में आने वाले भाईसाहबों के चेहरों पर भी चिंता की लकीरें साफ दिखाई देने लगी हैं। सुबह-शाम हाजरी भरने वाले साहबों की लाइन भी लंबी होने लगी है। दिल्ली दरबार में बढ़ती साख से कइयों के आफरा आने लगा है। अब उनको कौन बताए कि यह सारा कमाल सूर्यनगरी स्थित सोजती गेट वाले गणेश मंदिर के साथ मीठी माई का है।</p>
<p><br /><strong>एक जुमला यह भी</strong><br />सूबे में इन दिनों एक जुमला जोरों पर है। जुमला भी छोटा-मोटा नहीं बल्कि ब्यूरोक्रेसी को लेकर है। जुमला है कि सूबे में रनिंग ब्यूरोक्रेसी की स्पीड में कई तरह के ब्रेक लगे हैं। ब्रेक लगाने वाले और कोई नहीं, बल्कि रिटायरमेंट के बाद भी डांग पटेलाई करने वाले साहब लोग हैं। सचिवालय से सिविल लाइन तक खुसरफुसर है कि रिटायरमेंट के बाद राज को सलाह देने वाले न तो सिस्टम को चलने दे रहे और न ही हार्ड कोर वर्कर को स्पीड से बढ़ने दे रहे। अब बेचारे अफसरों के पास उनकी एडवाइस का इंतजार करने के सिवाय कोई चारा नहीं है।<br />एल. एल. शर्मा, पत्रकार</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 09 May 2022 14:48:17 +0530</pubDate>
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