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                <title>unsafe - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>दो लाख में मरम्मत के बाद भी जर्जर कक्षा-कक्ष, असुरक्षित नौनिहाल</title>
                                    <description><![CDATA[मुण्डली सरकारी स्कूल में कक्ष बंद, बरामदे में पढ़ने को मजबूर छात्र।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/despite-repairs-costing-two-lakh-rupees--dilapidated-classrooms-remain-unsafe-for-children/article-146104"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(1)2.png" alt=""></a><br /><p>भण्डेड़ा। क्षेत्र के मुण्डली गांव स्थित राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय में कक्षा कक्षों की जर्जर हालत के बावजूद विद्यार्थियों को सुरक्षित कक्ष उपलब्ध नहीं हो पा रहे हैं। विद्यालय के कुछ कमरों की मरम्मत के लिए सरकार की ओर से करीब दो लाख रुपए स्वीकृत किए गए, लेकिन मरम्मत के बाद भी कई कक्ष अब भी जोखिम भरे बने हुए हैं। ऐसे में स्टाफ को विद्यार्थियों को बरामदे में बैठाकर अध्ययन करवाने की मजबूरी बनी हुई है।</p>
<p>जानकारी के अनुसार विद्यालय के कई कक्ष पहले से जर्जर अवस्था में थे। छत की पट्टियां टूट चुकी थीं और एक कक्ष में सरिया तक बाहर निकलकर जंग खा रहा था। इस स्थिति को लेकर समाचार प्रकाशित होने के बाद ब्लॉक स्तरीय अधिकारी मौके पर पहुंचे और कुछ कक्षों को विद्यार्थियों के बैठने के लिए असुरक्षित मानते हुए बंद कर दिया गया। बाद में सरकार की ओर से मरम्मत और रंग-रोगन के लिए राशि स्वीकृत की गई, जिसके बाद हाल ही में मरम्मत कार्य कराया गया।</p>
<p>हालांकि मरम्मत के बावजूद कई कक्षों की स्थिति संतोषजनक नहीं है। प्रधानाध्यापक कक्ष की छत में नीचे से सरिया निकलता हुआ दिखाई दे रहा है, जबकि एक कक्ष की दीवारों में दरारें अब भी बनी हुई हैं और उस पर ताला लगा हुआ है। दो कक्षों में टूटी छत की पट्टियों को सहारा देने के लिए नीचे लोहे की एंगल लगाई गई है।</p>
<p><strong>छत की मरम्मत, लेकिन भवन असुरक्षित</strong><br />कक्षों की कमी और जर्जर भवन के कारण दो कक्षाओं के विद्यार्थियों को बरामदे में बैठाकर पढ़ाई करवाई जा रही है। ग्रामीणों का कहना है कि केवल छत की मरम्मत से भवन पूरी तरह सुरक्षित नहीं हो जाता, क्योंकि दीवारों और फर्श में भी दरारें मौजूद हैं। ऐसे में बरसात के मौसम में स्थिति और गंभीर हो सकती है। ग्रामीणों ने जिम्मेदार विभाग से समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग की है।</p>
<p><strong>इनका कहना है </strong><br />मुण्डली यूपीएस में एक कक्ष में छत की टूटी पट्टी के लिए एंगल हमने आग्रह करने पर लगाया है। दूसरे कक्ष में छत की मरम्मत हुई है। मगर कक्ष की दीवारों में दरारें होने से इस में छात्र छात्राओं को नहीं बिठाया जाता है। दो कक्षाएं बरामदे में बिठाने को मजबूर हैं। भवन की स्थिति को मद्देनजर रखकर समायोजित करके व्यवस्था बिठा रखी है।<br /><strong>-राकेश कुमार शर्मा, प्रधानाध्यापक, राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय, मुण्डली।</strong></p>
<p><br />इधर एसीबीईओ का कहना है कि मुण्डली विद्यालय में छात्र-छात्राओं को बाहर बैठने की समस्या क्यों है। संबंधित पीईईओ को निर्देशित किया जाएगा। कक्षाकक्षों की मरम्मत का टारगेट पूर्ण हो गया होगा, तो दीवारो की मरम्मत की जरूरत होगी तो संबंधित जेईएन को मोके पर बुलाकर दीवारों की मरम्मत के लिए प्रस्ताव तैयार करके भिजवाया जाएगा। कक्षाकक्षों की मरम्मत के बाद भी कक्ष काम नही आ रहे है। जितनी राशि स्वीकृत हुई थी, उसमें एक दो कक्षो को बैठने लायक मरम्मत करवाते छत ही  जरूरी नहीं थी, फिर भी प्रयास किया जाएगा।<br /><strong>-अनिल कुमार जैन, एसीबीईओ, शिक्षा विभाग, नैनवां</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 11 Mar 2026 16:54:43 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>गवर्नमेंट कॉलेज का शताब्दी व अकेडमिक ब्लॉक असुरक्षित </title>
                                    <description><![CDATA[कॉलेज प्रशासन ने बिल्डिंग खाली कर लगवाया ताला।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/government-college-s-shatabdi-and-academic-block-unsafe/article-87098"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-08/4111u1rer-(16).png" alt=""></a><br /><p>कोटा। पीडब्ल्यूडी ने राजकीय महाविद्यालय कोटा के कुछ भवनों को असुरक्षित घोषित कर दिया है। जिनका पुननिर्माण या रिपेयरिंग होना आवश्यक है। यह भवन जर्जर अवस्था में हैं। कॉलेज में बड़ी संख्या में छात्रों का आवागमन रहता है। ऐसे में बारिश के दौरान हादसा होने की आशंका बनी रहती है। हालांकि, कॉलेज प्रशासन ने पीडब्ल्यूडी की रिपोर्ट पर तुरंत एक्शन लेते हुए प्रभावित भवनों व कक्षा-कक्षों को खाली करवाकर ताला लगवा दिए हैं। साथ ही मरम्मत व पुननिर्माण के लिए आयुक्तालय को पत्र भी लिखे जा चुके हैं।  </p>
<p><strong>9 क्लास रूम व लैब असुरक्षित </strong><br />राजकीय महाविद्यालय परिसर में शताब्दी व एकेडिम ब्लॉक  में 49 से 57 तक कमरें जर्जर अवस्था में हैं। जगह-जगह से प्लास्टर उखड़े हुए हैं। कई बार प्लास्टर गिर चुके हैं। पट्टियां दरकने का खतरा बना हुआ है। इसी तरह स्टेयर पोर्शन भी खस्ताहाल बना हुआ है। हादसे की आशंका के चलते कॉलेज प्रशासन ने इसे बंद कर ताला लगवा दिया है। आयुक्तालय को पत्र के माध्यम से स्थिति से अवगत करा बजट की मांग की गई है। जल्द ही इन भवनों का पुन:निर्माण या मरम्मत कार्य करवाया जाएगा। </p>
<p><strong>ऊपर आर्ट्स, नीचे साइंस की क्लासें</strong><br />शताब्दी भवन में दो ब्लॉक संचालित हैं। ऊपर की बिल्डिंग में करीब 8 से 10 कक्षा-कक्ष राजकीय कला महाविद्यालय के अधीन हैं। जिसमें हिन्दी, अंग्रेजी, पोलिटिकल साइंस व अर्थशास्त्र डिपार्टमेंट संचालित हो रहे थे, जिन्हें कॉलेज प्रशासन ने फिलहाल नई बिल्डिंग में शिफ्ट कर दिए हैं।  इसी तरह नीचे की एकेडमिक ब्लॉक में भी 8 से 10 कक्षा कक्ष हैं, जो साइंस कॉलेज के अधीन हैं। दोनों ही कॉलेज प्रशासन द्वारा अनहोनी की आशंका के चलते दोनों ब्लॉक बंद करवा दिए हैं। जिनका पुननिर्माण व मरम्मत कार्य करवाया जाएगा। </p>
<p><strong>स्टेयर पोर्शन व डीएसटी फिस्ट लैब भी असुरक्षित</strong><br />सार्वजनिक निर्माण विभाग के सहायक अभियंता व अधिशासी अभियंता ने 14 मार्च 2024 को महाविद्यालय का निरीक्षण किया था। जिसमें उन्होंने शताब्दी व अकेडमिक ब्लॉक के साथ स्टेयर पोर्शन व डीएसटी फिस्ट लैब का अवलोकन कर असुरक्षित घोषित कर इनमें कक्षाएं संचालित न करने की हिदायत दी थी। पीडब्ल्यूडी ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि यह भवन सुरक्षित नहीं है। कभी भी कोई हादसा हो सकता है। हालांकि, इन भवनों को छोड़कर कॉलेज के अन्य  भवन प्राकृतिक आपदाओं के अलावा संरचनात्मक दृष्टि से सुरक्षित हैं। इस पर कॉलेज प्रशासन ने स्टेयर पोशर्न व डीएसटी फिस्ट लैब को बंद करवा दिया है। </p>
<p>पीडब्ल्यूडी ने गत मार्च माह में महाविद्यालय में स्थित शताब्दी व अकेडमिक ब्लॉक, स्टेयर पोर्शन, और डीएसटी फिस्ट लैब का निरीक्षण किया था। जिसमें इन भवनों को असुरक्षित घोषित किया है। जिसके बाद इन भवनों को तुरंत बंद कर दिया गया है। हमारे अधीन आने वाले पोर्शन का पुननिर्माण  के लिए प्रपोजल बनवा लिया है। जिसका जल्द ही निर्माण कार्य शुरू करवा दिया जाएगा। वर्तमान में इन पोर्शन में कक्षाएं संचालित नहीं होती है। वहीं, फिस्ट लैब का पीडब्ल्यूडी से तकमीना बनवाने का कार्य शुरू करवा दिया है। वैसे तो सभी भवन राजकीय महाविद्यालय कोटा के अधीन हैं। आर्ट्स कॉलेज को कुछ भवन कंडीशन पर दिए हैं। <br /><strong>- प्रो. प्रतिमा श्रीवास्तव, प्राचार्य राजकीय महाविद्यालय कोटा </strong></p>
<p>सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा शताब्दी ब्लॉक को असुरक्षित घोषित करते ही हमने तुरंत इसे बंद करवा दिया है और यहां संचालित हो रही पीजी की अंग्रेजी, इतिहास, अर्थशास्त्र व पोलिटिकल साइंस की कक्षाएं नए कॉलेज भवन में शिफ्ट कर दी है। नए कॉलेज में मात्र 7 कक्षा-कक्ष हैं, जिसमें पीजी की कक्षाएं संचालित की जा रही है। यूजी की कक्षाएं पुराने कॉलेज के भवनों में चल रही हैं।  वास्तविक स्थिति से आयुक्तालय को भी अवगत करा चुके हैं। जल्द ही शताब्दी ब्लॉक की मरम्मत करवाई जाएगी। हमारी मांग है कि मरम्मत के बाद आयुक्तालय पुन: यहां पीजी कक्षाएं संचालित करने के लिए शताब्दी ब्लॉक के कक्षा-कक्ष हमें आवंटित किए जाएं।<br /><strong>- प्रो. रोशन भारती, प्रचार्य राजकीय कला महाविद्यालय</strong></p>
<p>राजकीय महाविद्यालय कोटा के उक्त भवनों का गत 14 मार्च को निरीक्षण कर असुरक्षित घोषित किया है। इनमें कक्षाएं संचालित नहीं की जा सकती। बारिश के दौर में हादसे की आशंका बनी रहेगी। ऐसेमें इनकी मरम्मत करवाई जाना  आवश्यक हैं। <br /><strong>- नेहा माहेश्वरी, सहायक अभियंता, पीडब्ल्यूडी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 07 Aug 2024 17:54:41 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>असुरक्षित सफर</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीय रेल को वैश्विक पैमानों के अनुरूप बनाने के दावों के बरबस रेल सफर आज भी असुरक्षित बना हुआ है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/61e2a30ab28d6/article-4003"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/train-engine.jpg" alt=""></a><br /><p>भारतीय रेल को वैश्विक पैमानों के अनुरूप बनाने के दावों के बरबस रेल सफर आज भी असुरक्षित बना हुआ है। वैसे हर कुछ समय बाद रेल से सफर को सुरक्षित और सहज बनाने के दावे किए जाते हैं, लेकिन उन पर अमल अभी भी पूरा नहीं हो पाया है। अगर ऐसा होता तो पश्चिम बंगाल के जलपाईगुडी जिले के मैनागुडी में गुवाहाटी-बीकानेर एक्सप्रेस हादसे का शिकार नहीं होती। इस हादसे में फिलहाल दस यात्रियों की मौत होने की खबरें हैं और करीब पचास यात्रियों के घायल होने की जानकारी दी जा रही है। घायलों में से पन्द्रह यात्रियों की हालत गंभीर बताई जा रही है। यह ट्रेन मंगलवार की देर रात को बीकानेर से रवाना हुई थी और गुरुवार की शाम को पांच बजे पटना से रवाना हुई थी और मैनागुडी में तेज झटके के साथ इसकी 12 बोगियां पटरी से उतर गईं। ट्रेन के दो डिब्बे एक दूसरे पर चढ़ गए। हादसे के समय ट्रेन की गति 40 किलोमीटर प्रति घंटा थी। यदि ट्रेन की गति ज्यादा होती तो हादसा काफी भयानक हो सकता था। प्रारंभिक तौर पर बताया जा रहा है कि पटरी पर बड़ा क्रेक था। हादसे के बाद जांच के आदेश दे दिए हैं और मुआवजे की घोषणा भी कर दी गई है। हर रेल हादसे के बाद ऐसी पहल एक प्रकार की रस्म बनकर रह गई है, मगर हादसे के लिए जिम्मेदार लोगों के खिलाफ एक शब्द भी नहीं कहा जाता है। आमतौर पर कहा जाता है कि तेज ठंड या तेज गर्मी की वजह से पटरियों में क्रेक आ जाते हैं। हालांकि यह जांच का विषय है कि गुवाहाटी एक्सप्रेस हादसे की मुख्य वजह क्या थी और इसका दोषी कौन है? लेकिन लगता है कि जांच एक प्रकार से लीपापोती बनकर रह जाती है। क्योंकि किसी भी हादसे की जांच की जानकारी सार्वजनिक नहीं की जाती और न यह बताया जाता है कि इसका दोषी कौन था और उसे क्या सजा दी गई? रेल सफर को अति सुविधाजनक बनाने और कायापलट के नाम पर काफी महंगा तो कर दिया गया है, लेकिन यह सुनिश्चित करना जरूरी नहीं समझा जाता कि यात्रियों का सफर कैसे सुरक्षित पूरा हो?</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 15 Jan 2022 17:53:26 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
                            </item>
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                <title>असुरक्षित फैक्ट्रियां</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में नूडल्स, कुरकुरे और अन्य डिब्बाबंद खाद्य वस्तुएं बनाने वाली फैक्ट्री में रविवार को बायलर फटने से सात मजदूरों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82/article-3591"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/36.jpg" alt=""></a><br /><p>बिहार के मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में नूडल्स, कुरकुरे और अन्य डिब्बाबंद खाद्य वस्तुएं बनाने वाली फैक्ट्री में रविवार को बायलर फटने से सात मजदूरों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। धमाका इतना तेज था कि इसका असर तीन-चार किलोमीटर दूर तक महसूस किया गया। हादसे के समय वहां दो दर्जन से अधिक श्रमिक काम में जुटे थे और ये सभी दिहाड़ी मजदूर थे। तेज धमाके से फैक्ट्री के परखचे उड़ गए और आसपास के कारखानों को भी क्षति पहुंची। हमारे देश में फैक्ट्री हादसे कोई नए नहीं हैं, आएदिन कई कारखानों में हादसे होते रहते हैं। हादसों के लिए फैक्ट्री प्रबंधन की अनदेखी व लापरवाही होती है और निर्दोष मजदूरों की मौत हो जाती है। ऐसे हादसों पर सरकारें खेद व्यक्त कर और जांच व मुआवजों की घोषणा करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती हैं। मुजफ्फरपुर के फैक्ट्री हादसों के बाद बिहार सरकार ने भी मुआवजे व जांच की घोषणा करने में देर नहीं की। मगर सवाल है कि क्यों नहीं सरकारें ऐसे हादसों की पुनर्रावृत्ति रोकने के इंतजाम क्यों नहीं कर पाती? सरकारें क्यों नहीं कोई कारगर व्यावहारिक नीति बनाई जाती? दरअसल हमारे देश में औद्योगिक हादसों से संबंधित कोई कड़ा कानून नहीं है, जिसकी वजह से ही कारखानों के मालिक व प्रबंधन वाले लोग रख-रखाव के मामलों में लापरवाही बरतने के आदी बने रहते हैं। उन्हें पता है कि किसी भी हादसे के बाद मजदूरों के मरने पर परिजनों को मुआवजा आदि देकर संतुष्ट कर दिया जाएगा। दुनिया के अन्य देशों में फैक्ट्री-कानून सख्त बने हुए हैं तो फैक्ट्री मालिक सतर्क व सावधान बने रहते हैं। सरकारी स्तर पर कारखानों के निरीक्षण आदि की नियमित व्यवस्था बनी हुई है, लेकिन फैक्ट्री प्रशासन के साथ उनकी सांठगांठ बना रहती है और लेनदेन की परंपरा पर कोई अंकुश नहीं है। अधिकांश कारखानों में असंगठित क्षेत्र के अप्रशिक्षित श्रमिकों से काम लिया जाता है। मुजफ्फरपुर के कारखाने में भी दिहाड़ी मजदूरों को ही काम पर लगा रखा है। ये अप्रशिक्षित होते हैं तो कई बार हादसे हो जाते हैं। जब तक सख्त कानून नहीं बनेंगे तब तक ऐसे हादसों को रोका जाना मुश्किल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Dec 2021 15:00:20 +0530</pubDate>
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