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                <title>factories - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>लापरवाही: पिपलाद बांध प्रदूषण का शिकार</title>
                                    <description><![CDATA[वर्तमान में पिपलाद बांध से ही नगर व आसपास के दर्जनभर गांवों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/negligence--piplad-dam-is-a-victim-of-pollution/article-106483"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-03/6622-copy65.jpg" alt=""></a><br /><p>भवानीमंडी। भवानीमंडी का पिपलाद बांध जल प्रदूषण के कारण अपना अस्तित्व खोता जा रहा है। प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने देश की 14 प्रदूषित नदियों में पिपलाद बांध को भी शामिल किया है। आसपास की फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल अपशिष्ट और नालों की गंदगी पिपलाद बांध में मिल रही है। जिससे पानी प्रदूषित कर रहा है। भवानीमंडी में बढ़ते जल प्रदूषण के सामने सरकार, अधिकारी व राजनेता इस कदर नतमस्तक है कि नगर के सबसे बड़े जल स्त्रोत पिपलाद को प्रदूषण मुक्त करवाने की बजाय कोसो दूर से पाने लाने को तैयार है। जो नगरवासियों के लिए किसी विडंबना से कम नही है। </p>
<p><strong>24 किमी दूर राजगढ़ बांध से पानी लाने की तैयारी</strong><br />भवानीमंडी में पेयजल की समस्या को देखते हुए राजगढ़ बांध से पानी लाने की तैयारी पूरी हो चुकी है। सरकार ने पिछले बजट में इसके लिए वित्तीय स्वीकृत दी थी। लगभग 22 करोड़ खर्च करके 24 किमी दूर से पानी लाने के लिए पाइपलाइन डालने का कार्य जल्द ही शुरू होगा। वही पिपलाद बांध का लगातार बढ़ रहे जल प्रदूषण के कारण दिनों दिन अस्तित्व खतरे में है। तत्कालीन मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे सिंधिया ने करोड़ों की लागत से भवानीमंडी वासियों को लगभग 85 करोड़ की लागत से पिपलाद बांध परियोजना की सौगात दी थी, ताकि क्षेत्रवासियों व किसानों को सिंचाई और पेयजल के लिए पर्याप्त व शुद्ध पेयजल आपूर्ति हो सके।  झालावाड़ जिले में कालीसिंध नदी पर बनी यह परियोजना पचपहाड़ तहसील के 19 गांवों की कृषि को सिंचित करती है। पर उद्योगों ने बेरोकटोक छोड़े जा रहे जा रहे केमिकल्स व अपशिष्ट के कारण पिपलाद जलाशय का अस्तित्व खतरें में है। हालात यह है कि पिपलाद का नाम देश की 14 प्रदूषित नदियों में शुमार है। बावजूद इसके इसकी सुध लेने को कोई तैयार नही है।</p>
<p><strong>जलदाय विभाग कर रहा शुद्ध पेयजलापूर्ति का दावा</strong><br />वर्तमान में पिपलाद बांध से ही नगर व आसपास के दर्जनभर गांवों को पेयजल आपूर्ति की जा रही है। जबकि प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने प्रदूषित नदी के रूप में चिन्हित किया है। जलदाय विभाग के अधिकारियों का कहना है कि हम पिपलाद से मिल रहे पानी का ट्रीटमेंट करके ही आमजन को शुद्ध पेयजलापूर्ति कर रहे है। ऐसे में सवाल उठता है कि जब जलदाय विभाग के अधिकारी नगर में शुद्ध पेयजल सप्लाई का दावा कर रहे,तो राजगढ़ से पानी लाने की जरूरत ही क्यो है..?</p>
<p><strong>फैक्ट्रियों का अपशिष्ट मिलने से पिपलाद नदी में हो रहा जल प्रदूषण</strong><br />नगर में उद्योगों व फैक्ट्रियों से निकलने वाले केमिकल अपशिष्ठ को पिपलाद में जाकर मिलने वाले नालों में छोड़ा जा रहा है, जिससे लगातार पिपलाद नदी प्रदूषण का शिकार हो रही है। रामटी पुलिया के पास नाले में लम्बे समय से अपशिष्ठ व केमिकल युक्त गंदे पानी की निकासी की जा रही है, जो सीधे पिपलाद में जाकर गिरता है। इसको रोकने के लिए शहरवासियों ने पूर्व में कई जनआंदोलन भी किए पर आखिर बीतते समय के साथ सभी नतमस्तक हो गए और पिपलाद का अस्तित्व खत्म होने की कगार पर है। यह सब शहरवासियों के लिए एक जंग हारने जैसा है।</p>
<p><strong>कभी हुआ करता था पिकनिक स्पॉट, आज पड़ा सुनसान</strong><br />पिपलाद डेम किसी समय पिकनिक स्पॉट के रूप में जाना जाने लगा था। पर बीतते समय, अनदेखी के अभाव व जलप्रदूषण के चलते प्रदूषित नदियों में गिना जाने लगा है। एक समय ऐसा था कि दूर-दराज से यहां लोग घूमते आते थे। पर्यटन स्पॉट के रूप में भी उभरने लगा था। यहा का प्राकृतिक सौंदर्य लोगों का मनमोह लेता है। देखरेख के  अभाव में यह सब धीरे-धीरे विलुप्त होता जा रहा है।</p>
<p><strong>क्षेत्रवासियों का दर्द</strong><br />पिपलाद बांध का पानी प्रदूषित हो रहा है। हम एक फैक्ट्री के पीछे रहते है। हमारी कुंईया के पानी भी खराब हो रहा है। चमनी से निकलने वाली चुरी भी उड़कर घरों तक आती है।<br /><strong>- प्रभुलाल मेघवाल, रहवासी </strong></p>
<p>रात को पिपलाद बांध में आसपास की फैक्ट्रियों से निकलने वाला केमिकल का गन्दा पानी छोड़ा जाता है, मेरे वार्ड में लोगों के घरों में कुआें में तक पीला व काला रंग जैसा पानी आ रहा है, नहाने-धोने में बहुत परेशानी आती है। कई बार उच्च अधिकरियों को शिकायत करी पर निस्तारण नही हुआ।<br /><strong>- राजेश मेघवाल, वार्ड पार्षद </strong></p>
<p>हमने यहां जो ट्यूबवेल लगवाई उसमें भी जमीन से इतना केमिकल निकला और आज भी ट्यूबवेल से गन्दा व दुर्गंध भरा पानी आता है। थोड़ी बहुत फसलें व सब्जियां बोई थी वो भी केमिकल की वजह से नष्ट हो गई। <br /><strong>- अरुण तंवर, शहरवासी </strong></p>
<p>गंदे पानी के फिल्टर का प्लांट तो लगवाया है, पर वास्तविकता में फिल्टर होता नही है। यह गन्दा पानी ही पिपलाद में जाकर मिल रहा और पूरे नगर ने सप्लाई किया जा रहा है। इस केमिकल के कारण कई बार तो मछलियां मरती हुई देखी है।<br /><strong>- राम बैरवा, पार्षद </strong></p>
<p>22 करोड़ से अधिक लागत से राजगढ़ बांध से भवानीमंडी में पानी लाने की योजना  पिछले बजट में स्वीकृत हुई थी। इसके लिए पाइप लाइन डालने का काम जल्द ही पूरा होगा। पिपलाद बांध में जल प्रदूषण को ट्रीटमेंट करके शुद्ध पानी की सप्लाई की जा रही है। अब साथ ही राजगढ़ बांध से पानी लाने की योजना पूरी होते ही पानी की समस्या हल हो जाएगी।<br /><strong>- रमन लाल जाटव, एक्सइएन, जलदाय विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 05 Mar 2025 15:08:25 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>कागज की किल्लत से संकट में कोरोगेटेड बॉक्स उद्योग, हजारों फैक्ट्रियों पर खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[आयातित रद्दी ओसीसी वेस्टेज की कमी और शिपिंग कंपनियों द्वारा भाड़े में बढ़ोतरी से स्थिति और गंभीर हो गई है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/corrugated-box-industry-in-trouble-due-to-paper-shortage-thousands/article-92299"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(2)3.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। पैकेजिंग और एसेसरीज उद्योग कागज की कमी और कीमतों में भारी वृद्धि के कारण गंभीर संकट में है। पेपर मिलों द्वारा कागज की कीमतों में 20-25% तक की वृद्धि ने कोरोगेटेड बॉक्स निर्माताओं को पेपर मिलों और ग्राहकों के बीच सैंडविच बना दिया है। ऑल राजस्थान कोरोगेटेड बोर्ड एंड बॉक्स मैन्युफैक्चरर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष, हेमेंद्र अग्रवाल ने बताया कि कच्चे माल की कीमतों में वृद्धि इंडस्ट्री के अस्तित्व पर सवाल खड़ा कर रही है और इसके दूरगामी प्रभाव मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर और रोजगार पर भी पड़ सकते हैं।</p>
<p>आयातित रद्दी ओसीसी वेस्टेज की कमी और शिपिंग कंपनियों द्वारा भाड़े में बढ़ोतरी से स्थिति और गंभीर हो गई है। अग्रवाल ने सरकार और उद्योगपतियों से इस संकट का समाधान खोजने की अपील की है, अन्यथा राजस्थान की 1200 से अधिक फैक्ट्रियां बंद होने की कगार पर पहुंच सकती हैं, जिससे 'मेक इन इंडिया' और 'आत्मनिर्भर भारत' जैसी योजनाओं पर भी असर पड़ेगा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Oct 2024 16:13:15 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>तमिलनाडु: पटाखा फैक्ट्रियों में विस्फोट से 11 लोगों की मौत</title>
                                    <description><![CDATA[ शिवकाशी के पास किचनाइकेनपट्टी गांव में एक निजी पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से एक कर्मचारी की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/11-people-killed-in-explosion-in-tamil-nadu-firecracker-factories/article-59795"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-10/बंदर-ली-अधिकारी-कि-जगह(13).png" alt=""></a><br /><p>विरुधुनगर। तमिलनाडु के विरुधुनगर जिले में मंगलवार को दो पटाखा फैक्ट्रियों में विस्फोट होने से नौ महिलाओं सहित 11 लोगों  की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए।</p>
<p> पुलिस ने बताया कि आज दोपहर श्रीविल्लिपुथुर के पास रंगमपलयम में कनिष्कर फायरवक्रस फैक्ट्री में अचानक  हुए  विस्फोट से  नौ महिलाओं सहित 10 श्रमिकों की मौत हो गई और दो अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए।</p>
<p> जिस समय यह हादसा हुआ उस समय श्रमिक फैंसी किस्म के पटाखे बनाने में इस्तेमाल होने वाले अत्यधिक ज्वलनशील रसायनों को मिलाने के काम में जुटे हुए थे।</p>
<p> एक अन्य घटना में, शिवकाशी के पास किचनाइकेनपट्टी गांव में एक निजी पटाखा फैक्ट्री में आग लगने से एक कर्मचारी की मौत हो गई और कुछ अन्य घायल हो गए। दोनों फैक्ट्रियों में पहुंचे दमकल ने  कुछ घंटों की मशक्कत के बाद आग पर काबू पा लिया।</p>
<p>वरिष्ठ राजस्व और पुलिस अधिकारी बचाव कार्यों की निगरानी के लिए मौके पर  पहुंचे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 17 Oct 2023 19:23:38 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>  दो कॉटन फैक्ट्रियों में भीषण आग, हे श्रमिकों ने भाग कर  बचाई जान</title>
                                    <description><![CDATA[अजमेर से भी बुलानी पड़ी दमकल]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/ajmer/ajmer-massive-fire-in-two-cotton-factories/article-10444"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/28.jpg" alt=""></a><br /><p>ब्यावर। शहर के अजमेर रोड रीको क्षेत्र में बुधवार दोपहर एक बजे दो कॉटन फैक्ट्रियों में भीषण आग लग गई। इससे वहां रखा लाखों रुपए का माल जलकर राख हो गया। मौके पर काम कर रहे श्रमिकों ने भाग कर अपनी जान बचाई। क्षेत्र में अफरा-तफरी मच गई। मौके पर बड़ी संख्या में लोग आग बुझाने में जुट गए, मगर हवा के संपर्क में आते ही आग विकराल होती चली गई। कई मीटर ऊंचे धुएं के गुबार उठने लगे। नौबत यह आई कि नगर परिषद की दमकल सहित श्री सीमेंट और अजमेर से भी दमकलें बुलानी पड़ गई। आग ने अंदर ही अंदर इतना विकराल रूप धारण कर लिया कि फैक्ट्री परिसर की दीवारों को जेसीबी के जरिए तोड़ा गया। देर शाम तक आग पर काबू पाया गया। घटना में हालांकि कोई जनहानि नहीं हुई है। लेकिन फैक्ट्री संचालक को भारी नुकसान पहुंचा है।</p>
<p>रीको क्षेत्र में स्थित गोल्डन कॉटन फैक्ट्री में दोपहर अचानक आग लग गई। देखते ही देखते आग बढ़ती गई और पास ही स्थित एक अन्य फैक्ट्री को भी अपनी चपेट में ले लिया। बताया जा रहा है कि यह फैक्ट्री सौरभ यादव की है। मगर उसे किराए पर लेकर मोहम्मद फकीर संचालन कर रहा है। पास की फैक्ट्री को भी इसी ने किराए पर ले रखा है। दोनों फैक्ट्रियों में कपास एवं रूई बनाने का काम हो रहा है। करीब एक बजे अचानक आग लग जाने से वहां रखा माल जल उठा। आग देख मजदूरों में अफरा-तफरी मच गई। </p>
<p>देखते ही देखते आग ने पास की फैक्ट्री को भी अपनी चपेट में ले लिया। आसपास के श्रमिक एकत्रित हो गए तथा आग पर काबू पाने का प्रयास किया मगर असफल रहे। बाद में नगर परिषद की दो दमकलें पहुंची और आग बुझाने का प्रयास किया। आग विकराल होने के कारण श्री सीमेंट लिमिटेड तथा अजमेर से एक-एक दमकल बुलाई गई। कुल चार दमकलों की सहायता से देर शाम तक भी आग पर काबू नहीं पाया जा सका। पानी की कमी को देखते हुए मौके पर टैंकर मंगवाकर दमकलों में भरा गया। घटना की जानकारी मिलने पर सिटी थाना प्रभारी संजय शर्मा मय टीम मौके पर पहुंचे। जहां क्षेत्रवासियों की सहायता से गोदाम के बाहर पड़े माल को हटवाकर एक तरफ किया। बताया जा रहा है कि विद्युत शॉर्ट सर्किट से फैक्ट्री में रखी कॉटन ने आग पकड़ ली। इस घटना में दोनों फैक्ट्रियों में रखा लाखों रुपए का माल जलकर राख हो गया। वही फैक्ट्री भवनों को भी भारी नुकसान पहुंचा है। </p>
<p> </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>अजमेर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 26 May 2022 12:03:27 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Ajmer]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>अवैध फैक्ट्रीयों-गोदामों पर चला 'पीला पंजा'</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर विकास प्राधिकरण ने जोन-14 में अवैध फैक्ट्रीयों-गोदामों को किया ध्वस्त]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur-development-authority-demolished-illegal-factories-warehouses-in-zone-14/article-7433"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/111.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर विकास प्राधिकरण ने जोन-14 में निजी खातेदारी की कृषि भूमि पर जेडीए की बिना अनुमति व स्वीकृति के व्यावसायिक प्रयोजनार्थ फैक्ट्रीयो-गोदामों के लिए बने निर्माणाधीन अवैध बाउण्ड्रीवाल, पिल्लर, ढॉचो इत्यादि अवैध निर्माणों को प्रारम्भिक स्तर पर ही पूर्णतः ध्वस्त किया गया। <br /><br />मुख्य नियंत्रक प्रवर्तन रघुवीर सैनी ने बताया कि जोन-14 के क्षेत्राधिकार में सायपुरा शिकारपुरा रोड़ पर ग्राम-कोकवास में अवस्थित ग्वार ब्राहम्णों की ढाणी में निजी खातेदारी की कृषि भूमि पर जेडीए की बिना अनुमति स्वीकृति के आठ स्थानो पर व्यावसायिक प्रयोजनार्थ बने फैक्ट्रीयो-गोदामो के निर्माणाधीन अवैध बाउण्ड्रीवाल, पिल्लर, ढॉचों इत्यादि अवैध निर्माणों को प्रारम्भिक स्तर पर ही जोन-14 के राजस्व व तकनीकी स्टॉफ की निशादेही पर प्रवर्तन दस्ते ने जेसीबी मशीन और मजदूरों की सहायता से पूर्णतः ध्वस्त किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 05 Apr 2022 17:43:13 +0530</pubDate>
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                <title>इंदिरा गांधी नहर में फैक्ट्रियों का गंदा पानी छोड़ने का मुद्दा उठा, पंजाब जाएगी सरकार की टीम</title>
                                    <description><![CDATA[जहरीला पानी पुरानी समस्या इंदिरा गांधी नहर में पंजाब से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी छोड़ने की पुरानी समस्या रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--issue-of-leaving-the-dirty-water-of-factories-in-indira-gandhi-canal-raised--the-government-team-will-go-to-punjab/article-6900"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/mahendra-jeet-singh-malviya.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। इंदिरा गांधी नहर में पंजाब की फैक्ट्रियों का गंदा पानी छोड़ने का मुद्दा सोमवार को सदन में गूंजा। निर्दलीय विधायक राजकुमार गौड़ के सवाल के जवाब में जल संसाधन मंत्री महेंद्रजीत सिंह मालवीय ने कहा कि इंदिरा गांधी नहर में पंजाब से गंदा और जहरीला पानी छोड़ा जाना हम सबकी चिंता का विषय है। जल्द ही अफसरों की टीम के साथ पंजाब सरकार के साथ बैठक करेंगे और इस समस्या का निराकरण करवाएंगे।<br /><br />विधानसभा में इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में पानी की चोरी, जर्जर नहरों और पानी का सही तरीके से बटवारा नहीं होने के मुद्दे पर विपक्षी विधायक सरकार को घेर रहे हैं। विधायक ने कहा कि राजस्थान की लंबे समय से यह मांग रही है कि समझौते के मुताबिक नहरों में उसे पूरा पानी दिया जाए. लेकिन कमजोर नहरी तंत्र और पंजाब की मनमर्जी से पानी नहीं मिल रहा है। समझौते के मुताबिक नहरों में उसे पूरा पानी दिया जाए, लेकिन कमजोर नहरी तंत्र और पंजाब की स्थानीय राजनीति के कारण कभी पूरा पानी नहीं मिल पाया। हमारे हिस्से का पूरा पानी नहीं मिलने की वजह से इंदिरा गांधी नहर क्षेत्र में अंतिम छोर के किसानों को सिंचाई का बहुत कम पानी मिलता है। गंगानगर और हनुमानगढ के फ्रंट वाले किसानों को तो पानी मिल जाता है लेकिन बीकानेर, जैसलमेर क्षेत्र तक पानी नहीं मिल पाता। जहरीला पानी पुरानी समस्या इंदिरा गांधी नहर में पंजाब से फैक्ट्रियों का जहरीला पानी छोड़ने की पुरानी समस्या रही है। जनवरी के महीने में भी नहर में कई बार जहरीला पानी आया। सुप्रीम कोर्ट तक में यह मामला जा चुका है, लेकिन अब तक समाधान नहीं हुआ आज की बहस में कई विधायक पंजाब सरकार से इस मामले में दखल देकर जहरीला पानी नहीं छोड़ने पर पाबंद करने की मांग रखेंगे। अनट्रीटेड पानी छोड़ने से फसलों के साथ लोगों के स्वास्थ्य पर भी खराब असर पड़ता है। अब इंदिरा गांधी नहर से राजस्थान के पश्चिमी जिलों में पेयजल सप्लाई भी होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 28 Mar 2022 15:40:37 +0530</pubDate>
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                <title>असुरक्षित फैक्ट्रियां</title>
                                    <description><![CDATA[बिहार के मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में नूडल्स, कुरकुरे और अन्य डिब्बाबंद खाद्य वस्तुएं बनाने वाली फैक्ट्री में रविवार को बायलर फटने से सात मजदूरों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/opinion/%E0%A4%85%E0%A4%B8%E0%A5%81%E0%A4%B0%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%B7%E0%A4%BF%E0%A4%A4-%E0%A4%AB%E0%A5%88%E0%A4%95%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%82/article-3591"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/36.jpg" alt=""></a><br /><p>बिहार के मुजफ्फरपुर के बेला औद्योगिक क्षेत्र में नूडल्स, कुरकुरे और अन्य डिब्बाबंद खाद्य वस्तुएं बनाने वाली फैक्ट्री में रविवार को बायलर फटने से सात मजदूरों की मौत हो गई और कई घायल हो गए। धमाका इतना तेज था कि इसका असर तीन-चार किलोमीटर दूर तक महसूस किया गया। हादसे के समय वहां दो दर्जन से अधिक श्रमिक काम में जुटे थे और ये सभी दिहाड़ी मजदूर थे। तेज धमाके से फैक्ट्री के परखचे उड़ गए और आसपास के कारखानों को भी क्षति पहुंची। हमारे देश में फैक्ट्री हादसे कोई नए नहीं हैं, आएदिन कई कारखानों में हादसे होते रहते हैं। हादसों के लिए फैक्ट्री प्रबंधन की अनदेखी व लापरवाही होती है और निर्दोष मजदूरों की मौत हो जाती है। ऐसे हादसों पर सरकारें खेद व्यक्त कर और जांच व मुआवजों की घोषणा करके अपने कर्तव्य की इतिश्री कर लेती हैं। मुजफ्फरपुर के फैक्ट्री हादसों के बाद बिहार सरकार ने भी मुआवजे व जांच की घोषणा करने में देर नहीं की। मगर सवाल है कि क्यों नहीं सरकारें ऐसे हादसों की पुनर्रावृत्ति रोकने के इंतजाम क्यों नहीं कर पाती? सरकारें क्यों नहीं कोई कारगर व्यावहारिक नीति बनाई जाती? दरअसल हमारे देश में औद्योगिक हादसों से संबंधित कोई कड़ा कानून नहीं है, जिसकी वजह से ही कारखानों के मालिक व प्रबंधन वाले लोग रख-रखाव के मामलों में लापरवाही बरतने के आदी बने रहते हैं। उन्हें पता है कि किसी भी हादसे के बाद मजदूरों के मरने पर परिजनों को मुआवजा आदि देकर संतुष्ट कर दिया जाएगा। दुनिया के अन्य देशों में फैक्ट्री-कानून सख्त बने हुए हैं तो फैक्ट्री मालिक सतर्क व सावधान बने रहते हैं। सरकारी स्तर पर कारखानों के निरीक्षण आदि की नियमित व्यवस्था बनी हुई है, लेकिन फैक्ट्री प्रशासन के साथ उनकी सांठगांठ बना रहती है और लेनदेन की परंपरा पर कोई अंकुश नहीं है। अधिकांश कारखानों में असंगठित क्षेत्र के अप्रशिक्षित श्रमिकों से काम लिया जाता है। मुजफ्फरपुर के कारखाने में भी दिहाड़ी मजदूरों को ही काम पर लगा रखा है। ये अप्रशिक्षित होते हैं तो कई बार हादसे हो जाते हैं। जब तक सख्त कानून नहीं बनेंगे तब तक ऐसे हादसों को रोका जाना मुश्किल है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>ओपिनियन</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Dec 2021 15:00:20 +0530</pubDate>
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