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                <title>sonia gandhi's - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <title>   सोनिया गांधी की कांग्रेस नेताओं को ताकीद.. पार्टी ने बहुत कुछ दिया, अब देने का समय</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं एवं नेताओं में आत्मविश्वास भरने एवं उनमें उत्साह का संचार करने के लिए भाजपा एवं आरएसएस पर हमलावर रुख अख्तियार करना शुरु कर दिया है।
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                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/sonia-gandhi-s-advice-to-congress-leaders---the-party-has-given-a-lot--now-is-the-time-to-give/article-9708"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/sonia-gandhi1.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। साल 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव में केन्द्र की सत्ता में फिर से वापसी के लिए कांग्रेस ने अभी से ही मेहनत करना शुरु कर दिया है। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने इसके लिए पार्टी कार्यकर्ताओं एवं नेताओं में आत्मविश्वास भरने एवं उनमें उत्साह का संचार करने के लिए भाजपा एवं आरएसएस पर हमलावर रुख अख्तियार करना शुरु कर दिया है।<br /><br />कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी ने एक बार फिर से दोहराया है कि पार्टी ने अपने नेताओं को उनके राजनीतिक जीवन में बहुत कुछ दिया है। अब जब पार्टी को लगातार हार का सामना करना पड़ रहा है। तो देने का समय है। उदयपुर में शुक्रवार से आरंभ हुए तीन दिवसीय ‘नव संकल्प चिंतन शिविर’ के शुरुआत में सोनिया गांधी ने कहा कि आज पार्टी के समक्ष असाधरण चुनौतियां हैं। ऐसे में उनका मुकाबला भी असाधारण तरीके से ही करना होगा। कांग्रेस अध्यक्ष ने केन्द्र में सत्तारूढ़ भाजपा एवं उसके मातृ संगठन आरएसएस पर हमलावर होते हुए आरोप लगाया कि केन्द्रीय एजेसिंयों का राजनीतिक विरोधियों को दबाने के लिए धड़ल्ले से दुरुपयोग हो रहा है। संवैधानिक मूल्यों पर चोट की जा रही है। संस्थाओं को एक-एक करके कमजोर किया जा रहा है। ऐसे में कांग्रेस को फिर से उसी भूमिका में आना होगा। जिसमें अब तक वह रही है। इसमं पार्टी नेताओं को भी अपनी महती भूमिका निभानी होगी। क्योंकि पार्टी के मूल सिद्धांतों जैसे सामाजिक न्याय, समानता एवं सेकुलेरिज्म पर लगातार चोट की जा रही है। इससे समाज के कमजोर वर्ग और कमजोर हो रहे हैं। लेकिन इन हालात को बदलना होगा। सोनिया गांधी ने आरोप लगाया कि संप्रग सरकार ने अपने शासनकाल में जनहित में जो फैसले लिए थे। उन्हें भी कमजोर करने का प्रयास किया जा रहा है और उन कार्यक्रमों को लागू करने में वर्तमान सरकार द्वारा ढिलाई बरती जा रही है। बात चाहे मनरेगा लागू करना हो। या फिर आरटीआई कानून या आरटीई कानून की। खाद्य सुरक्षा कानून को भी ठीक से लागू नहीं किया जा रहा है। कांग्रेस अध्यक्ष ने आरोप लगाया कि एनडीए सरकार खुद अपने ही संकल्प, ‘अधिकतम प्रशासन, न्यूनतम सरकार’ को भी कमजोर किया है।</p>
<p><strong>मुख्यमंत्री गहलोत ने दिखाए तीखे और आक्रामक तेवर</strong></p>
<p><strong>कांग्रेस द्वारा झीलों की नगरी उदयपुर में आयोजित हो रहे ‘नव संकल्प चिंतन शिविर’ में अगुवा की भूमिका में मुख्यमंत्री अशोक गहलोत ने आज केन्द्र में सत्ताधारी भाजपा के खिलाफ तीखे एवं आक्रामक तेवर दिखाए। उन्होंने हुंकार भरी कि भाजपा का ‘कांग्रेस मुक्त भारत’ का सपना कभी पूरा नहीं होगा। हम इस देश में ऐसा कभी नहीं होने देंगे। सीएम गहलोत ने कहा कि कांग्रेस हमेशा अपने शासन में आम जनता का लिहाज करती है। लेकिन भाजपा ने सारी हदें पार कर दी हैं। इनको किसी की परवाह नहीं है। भाजपा के लिए लोकतंत्र के कोई मायने नहीं है। सीएम गहलोत ने दावा किया कि कांगे्रस ने हमेशा समाज के निचले तबके को आगे लाने का काम किया है। लेकिन दुर्भाग्य से कांग्रेस को मार्केटिंग करना नहीं आता है। जबकि भाजपा इसमें माहिर है। चाहे काम हो या न हो। लेकिन प्रचार पूरा करती है। सीएम गहलोत ने आरोप लगाया कि बीते कुछ सालों में भाजपा एवं आरएसएस ने लोकतंत्र का बहुत नुकसान किया है। जिसकी भरपाई में समय लगेगा। असल में, सीएम गहलोत अपने संबोधन में भाजपा को उसकी नीतियों के खिलाफ खुली चुनौती देते हुए नजर आए। चिंतन शिविर के शुभारंभ के अवसर पर सीएम गहलोत के बोलने का अंदाज काफी आक्रामक दिखा।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 18:26:35 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
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                <title>उदयपुर के चिंतन शिविर से सोनिया गांधी का संबोधन हू-ब-हू</title>
                                    <description><![CDATA[बीजेपी पर लगाया  ध्रुवीकरण का आरोप]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/udaipur/sonia-gandhi-s-speech-from-udaipur-s-chintan-shivir/article-9704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-05/sonia-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>उदयपुर। कांग्रेस के उदयपुर में जारी नव संकल्प चिंतन शिविर पर कांग्रेसी नेता और कार्यकर्ताओं से सहित देशभर की निगाहें टिकी है। हर कोई जानना चाहता है कि शिविर के पहले दिन सोनिया गांधी ने संबोधित करते हुए क्या कहा। ऐसे में हम आपको सोनिया गांधी के हर एक अल्फाज से रूबरू करवाते है।</p>
<p><strong>यह बोला सोनिया ने.....</strong></p>
<p>साथियों,<br />      - इस ऐतिहासिक शहर की एक बहुत ही कीर्तिवान विरासत है। यहां जो हमारा चिंतन शिविर हो रहा है, उसका प्रसंग है ‘नव संकल्प’।<br />      यह हम सबको एक अवसर देता है, जहां हम सब विचार-विमर्श करें, उन तमाम चुनौतियों पर, जो भाजपा की नीतियों और RSS से जुड़ी हुई संस्थाओं की गतिविधियों के चलते, आज देश के सामने हैं।<br />      - एक राजनीतिक दल की हैसियत से, हमारे लिए भी यह एक अवसर है, कि हम विमर्श करें अपने आगे के रास्ते पर।<br />      - एक तरह से यह न केवल राष्ट्रीय मुद्दों पर एक चिंतन है, बल्कि एक आत्म-चिंतन भी है।<br />      - मैं जानती हूं, हमारे कई साथी यहां आना चाहते थे। इस चिंतन शिविर में भाग लेना चाहते थे। लेकिन कई कारणों से हमें संख्या को सीमित रखना पड़ा। मुझे पूरा भरोसा है, कि वे इस बात को समझेंगे। इसका यह मतलब नहीं है, कि संगठन को मज़बूत बनाने में उनका योगदान किसी से भी कम है।  <br />      - अब तो यह पूरी तरह से स्पष्ट हो चुका है, कि प्रधानमंत्री मोदी और उनके सहयोगी जो बार-बार दोहराते हैं ‘maximum governance &amp; minimum government’ इससे उनका असली चेहरा निकल कर सामने आ गया है। <br />     -  इसका असली अर्थ है, देश को निरंतर ध्रुवीकरण में रखना और लोगों को चिंता, भय और असुरक्षा के माहौल में जीने को मज़बूर करना। <br />      - इसका असली अर्थ है, अल्पसंख्यक जो हमारे गणतंत्र के बराबर के नागरिक हैं, जो हमारे समाज के अटूट अंग हैं, उन्हें जान-बूझकर निशाना बनाना और उन पर क्रूरता से हमला करना। <br />      - इसका असली अर्थ है, समाज में युगों से चली आ रही विविधता का दुरूपयोग करके उसे बांटना और समाज में बड़ी सावधानी से पालन-पोषण किए गये अनेकता में एकता के सिद्धांत को तबाह करना। <br />     -  इसका असली अर्थ है, अपने राजनीतिक विरोधियों को डराना, धमकाना, उनकी छवि को नुक़सान पहुंचाना, उन्हें झूठे बहानों से जेल में डालना और उनके खि़लाफ़ जांच एजेंसियों का ग़लत इस्तेमाल करना। <br />     -  इसका असली अर्थ है, तमाम लोकतांत्रिक संस्थाओं की स्वतंत्रता और निष्पक्षता के साथ खिलवाड़ करना। <br />      - इसका असली अर्थ है, इतिहास के नाम पर थोक में झूठ परोसना और हमारे महान् नेताओं को, विशेष तौर पर जवाहरलाल नेहरू को बदनाम करना। उनके योगदान, उपलब्धियों और बलिदानों को एक सोची समझी रणनीति के तहत नीचा दिखाना या उनका खंडन करना। <br />     -  इसका असली अर्थ है, महात्मा गांधी के हत्यारों और उनके वैचारिक पथ प्रदर्शकों का महिमा मंडन करना। <br />      इसका असली अर्थ है, देश के संविधान के सिद्धांतों, आदर्शों  और उसके चार स्तंभ- न्याय, स्वतंत्रता, समानता व भाई-चारे का खुलकर उल्लंघन करना। <br />      इसका असली अर्थ है, भय के माध्यम से नौकरशाही, उद्योगपतियों, व्यापारियों और Civil Society को क़ाबू में रखना। <br />      - इसका असली अर्थ है, खोखले नारे, भटकाने की तरक़ीबें और जब मरहम की सबसे ज़्यादा ज़रूरत हो, तब भी बड़-बोले प्रधानमंत्री मोदी जी की हैरान कर देने वाली खामोशी। <br />      - आज न केवल लंबे समय से पोषित हमारे संवैधानिक मूल्य ख़तरे में हैं, बल्कि नफ़रत और कलह की जो आग भड़काई जा रही है, उस आग ने, कई लोगों का जीवन तबाह कर दिया है। इन लपटों के गंभीर सामाजिक विकट परिणाम- अशांति और हिंसा के रूप में दिखते हैं। <br />     -  हर एक भारतवासी शांति, मेल-जोल और आपसी समन्वय के साथ जीना चाहता है। लेकिन भाजपा, उसके सहयोगी संगठन और उनके cheerleaders लोगों को हमेशा उत्तेजित और टकराव की स्थिति में रखना चाहते हैं, उन्हें उकसाना चाहते हैं, भड़काना चाहते हैं, नफ़रत और बदले की आग में जलाना चाहते हैं। हमें बिना किसी समझौते के, विभाजन के इस virus से लड़ना है, जिसे जान-बूझकर फ़ैलाया जा रहा है, हमें इसे फैलने से रोकना है। <br />      - अपने युवा वर्ग को रोज़गार के अवसर मुहैया कराने, समाज कल्याण कार्यक्रमों के लिए धनराशि उपलब्ध कराने और आम जनता के जीवन स्तर को बढ़ाने के लिए, एक उच्च आर्थिक वृद्धि को कायम रखना ज़रूरी है। लेकिन कट्टरता और सामाजिक अनुदारवाद/संकीर्णता का माहौल आर्थिक वृद्धि की नींव को हिला कर रख देते हैं। <br />      - नवंबर, 2016 में हुई नोटबंदी से, अर्थ-व्यवस्था लगातार मंदी के दौर से ग्रसित है। <br />       - भारी तादाद में सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योग पंगु हो गये। बेरोज़गारी ख़तरनाक तरीक़े से बढ़ गयी, और यह पहली बार देखने को मिल रहा है, कि एक बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिन्होंने नौकरी ढूंढना ही बंद कर दिया। <br />      - जो भी राहत, केंद्र सरकार पिछले दो वर्षों में दे पायी है, वह कांग्रेस पार्टी की दो ऐतिहासिक कानूनों के चलते ही संभव हो पाया, महात्मा गांधी नरेगा और राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा अधिनियम। <br />      - अपने तप और बे-मिसाल आंदोलन से हमारे देश के किसान, तीन काले कानूनों को रद्द करवाने में सफ़ल रहे। मुझे इस बात का संतोष है, कि इन कानूनों के खि़लाफ़ संसद के अंदर और बाहर, कांग्रेस पार्टी अन्नदाता किसानों के साथ पूरी दृढ़ता से खड़ी रही। लेकिन दुःख की बात है, कि मोदी सरकार ने, किसानों से जो वादे किए थे, वो अभी भी पूरे नहीं हुए। इस दौरान गेहूं की सरकारी ख़रीद में आने वाली भारी गिरावट से, देश की खाद्य सुरक्षा को गंभीर संकट पैदा हो सकता है। <br />      - रोज़-मर्रा की चीज़ें, जैसे रसोई गैस, तेल, दालें, सब्जियां, खाद, Petrol, Diesel आदि की लगातार बढ़ती क़ीमतें, करोड़ों परिवारों पर, एक असहनीय बोझ बन गयी हैं। <br />     -  आर्थिक और सामाजिक लक्ष्यों को दिमाग़ में रखते हुए, योजनाबद्ध तरीक़े से, public sector की कंपनियां कांग्रेस की सरकारों ने स्थापित की थीं। आज उन्हें चुनिंदा लोगों के हाथों बेचा जा रहा है। इससे बाक़ी नुक़सान के अलावा, अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लिए, निश्चित रोज़गार के अवसर भी बंद होते जा रहे हैं।</p>
<p><br />सोनिया गांधी ने अपने संबोधन जारी रखते हुए कहा साथियों,<br />      - हमारे इस महान और सशक्त संगठन से, समय-समय पर अपने लचीलेपन को दर्शाने की उम्मीद की जाती रही है। और हर बार हमारे संगठन ने, असरदार तरीक़े से, अपनी प्रतिक्रिया दर्शाई है। <br />      - एक बार फिर हमसे यह आशा की जा रही है, कि हम अपना साहस, हौसला और समर्पण की भावना का परिचय दें।<br />      - लेकिन आज जो हमारे संगठन के सामने परिस्थितियां उत्पन्न हुई हैं, वे अभूतपूर्व हैं। असाधारण परिस्थितियों का मुक़ाबला, असाधारण तरीक़े से ही किया जा सकता है। इस बात के प्रति मैं पूरी सचेत हूं। <br />      - हर संगठन को, न केवल जीवित रहने के लिए, बल्कि बढ़ने के लिए भी समय-समय पर, अपने अंदर परिवर्तन लाने होते हैं। हमें सुधारों की सख़्त ज़रूरत है-- रणनीति में बदलाव, ढांचागत सुधार और रोज़ाना काम करने के तरीक़े में परिवर्तन। एक तरह से यह सबसे बुनियादी मुद्दा है। लेकिन मैं यह भी ज़ोर देकर कहना चाहती हूं, कि हमारा पुनरुत्थान सिर्फ़ विशाल सामूहिक प्रयासों से ही हो पाएगा। और वो विशाल सामूहिक प्रयास, न टाले जा सकते हैं, न ही टाले जाएंगे। यह शिविर इस लंबे सफ़र में एक प्रभावशाली क़दम है। <br />     - हमारे लंबे और सुनहरे इतिहास में, आज एक ऐसा समय आया है, जब हमें अपनी निजी आकांक्षाओं को, संगठन के हितों के आधीन रखना होगा। पार्टी ने हम सभी को बहुत कुछ दिया है। अब समय है कर्ज़ उतारने का। मैं समझती हूं, इससे आवश्यक और कुछ नहीं है। <br />साथियों,<br />     - मैं आप सबसे आग्रह करती हूं, कि अपने विचार खुल कर रखें। मग़र, बाहर सिर्फ़ एक ही संदेश जाना चाहिए- संगठन की मज़बूती, दृढ़ निश्चय और एकता का संदेश। यह निश्चय बरक़रार रखना होगा। <br />     - हाल में मिली नाकामयाबियों से, हम बेख़बर नहीं हैं। न ही हम बेख़बर हैं, उस संघर्ष से या उस संघर्ष की कठिनाइयों से, जिसे हमें करना है और जीतना है। लोगों की हमसे जो उम्मीदें हैं, उनसे हम अंजान नहीं हैं। <br />      - व्यक्तिगत और सामूहिक रूप से यह प्रण लेने के लिए हम एकत्रित हुए हैं, हम देश की राजनीति में अपनी पार्टी को फिर से उसी भूमिका में लाएंगे,जो भूमिका पार्टी ने सदैव निभाई है और जिस भूमिका की उम्मीद इन बिगड़ते हुए हालातों में देश की जनता हमसे करती है। <br />     - हम यहां पूरी विनम्रता के साथ आत्म निरीक्षण तो कर रहे हैं, लेकिन आज हम तय करें, कि जब हम यहां से निकलेंगे, तो हम एक नये आत्म-विश्वास, एक नयी ऊर्जा के साथ और एक नयी प्रतिबद्धता से प्रेरित होकर निकलेंगे। <br />      धन्यवाद, जय-हिंद।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>उदयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 13 May 2022 17:16:33 +0530</pubDate>
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                <title>कांग्रेस स्थापना दिवस पर  सोनिया गांधी का देश और कार्यकर्ताओं के नाम हिंदी सन्देश</title>
                                    <description><![CDATA[कांग्रेस केवल एक राजनीतिक पार्टी का ही नाम नहीं है, बल्कि एक आंदोलन का नाम कांग्रेस पार्टी है: सोनिया]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%97%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%87%E0%A4%B8-%E0%A4%B8%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%BE%E0%A4%AA%E0%A4%A8%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B5%E0%A4%B8-%E0%A4%AA%E0%A4%B0--%E0%A4%B8%E0%A5%8B%E0%A4%A8%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%97%E0%A4%BE%E0%A4%82%E0%A4%A7%E0%A5%80-%E0%A4%95%E0%A4%BE-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6-%E0%A4%94%E0%A4%B0-%E0%A4%95%E0%A4%BE%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%AF%E0%A4%95%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%93%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%87-%E0%A4%A8%E0%A4%BE%E0%A4%AE-%E0%A4%B9%E0%A4%BF%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A5%80-%E0%A4%B8%E0%A4%A8%E0%A5%8D%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B6/article-3607"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/soniya.jpg" alt=""></a><br /><p>नई दिल्ली। कांग्रेस के 137 वें स्थापना दिवस के मौेके पर  सोनिया गांधी का देश और कार्यकर्ताओं के नाम हिंदी सन्देश जारी हुआ। सोनिया ने अपने संदेश में कहा कि हमारे प्यारे देशवासियों और कांग्रेस के जांबाज साथियों! आज हम सब 136 साल पुरानी अपनी कांग्रेस का स्थापना दिवस पूरे देश में बड़े व्यापक रूप से मना रहे हैं। कांग्रेस केवल एक राजनीतिक पार्टी का ही नाम नहीं है, बल्कि एक आंदोलन का नाम कांग्रेस पार्टी है। कांग्रेस की स्थापना किन परिस्थितियों में हुई, यह मुझे बताने की जरूरत नहीं है।</p>
<p>आजादी के आंदोलन में कांग्रेस और उसके तमाम नेताओं ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया, संघर्ष किया, जेलों में कठोर यातनाएं झेली और बहुत से देश भक्तों ने अपने प्राणों तक का बलिदान दिया, तब जाकर कहीं हमें आजादी मिली। आजादी के बाद हमें जो भारत मिला उसकी कल्पना करना कठिन है, लेकिन हमारे महान नेताओं ने बड़ी सूझबूझ और दृढ़ निश्चय के साथ भारत के नव-निर्माण की एक मजबूत बुनियाद रखी, जिस पर चलकर हमने एक सशक्त भारत खड़ा किया। एक ऐसा भारत जिसमें सभी देशवासियों के अधिकारों और हितों का ध्यान रखा गया। जिन लोगों ने आजादी के आंदोलन में भागीदारी नहीं दिखाई, वह इसकी कीमत कभी नहीं समझ सकते। आज भारत की उस मजबूत बुनियाद को कमजोर करने का हर संभव प्रयास किया जा रहा है।<br /> <br /> -इतिहास को झुठलाया जा रहा है।<br /> -हमारी विरासत गंगा-जमुना संस्कृति को मिटाने की नापाक कोशिश हो रही है।<br /> -देश का आम नागरिक असुरक्षित और भयभीत महसूस कर रहा है।<br /> -लोकतंत्र और संविधान को दरकिनार कर तानाशाही चलाई जा रही है।<br /> <br /> ऐसे वक्त में कांग्रेस चुप नहीं रह सकती। देश की विरासत को किसी को भी नष्ट करने की इजाजत नहीं देगी। आम जनमानस के लिए, लोकतंत्र की रक्षा के लिए, देश विरोधी, समाज विरोधी साजिशों के खिलाफ हर संभव संघर्ष करेगी, हर कुर्बानी देगी।<br /> <br /> आज के इस ऐतिहासिक अवसर पर एक-एक कांग्रेस जन को यही संकल्प लेना है और कांग्रेस संगठन को मजबूत बनाना है।<br /> इन्हीं शब्दों के साथ आप सभी को कांग्रेस के स्थापना दिवस पर और आने वाले नववर्ष की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं।<br /> <br /> जय हिंद, जय कांग्रेस</p>]]></content:encoded>
                
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                <pubDate>Tue, 28 Dec 2021 16:51:23 +0530</pubDate>
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