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                <title>बीए पास गीता कोटा में चला रही ऑटो</title>
                                    <description><![CDATA[महिलाओं ने भी इस रोजगार को इसलिए चुना क्योंकि यह उनके लिए चलता फिरता  एटीएम है। सड़क पर ऑटो लेकर निकलने पर ये महिलाएं एक दिन में 500 से 700 रुपए तक कमा रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/ba-pass-geeta-is-driving-an-auto-in-kota/article-92720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/4427rtrer-(4)9.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । काम कोई भी हो , छोटा या बड़ा नहीं होता। उस काम को करने की इच्छा शक्ति होनी चाहिए। हर व्यक्ति को नया काम शुरू करने में कई समस्याओं का सामना भी करना पड़ता है विशेष रूप से महिलाओं को वह भी ऐसा काम जो अधिकतर पुरुष ही करते रहे है। लेकिन कोटा की बेटियों ने शादी के बाद भी घर परिवार के साथ ही लोगों का सामना करते हुए अपने लिए एक सुरक्षित रोजगार चुना वह है ऑटो चलाना। कोटा शहर में ऑटो चलाने का काम पहले अधिकतर पुरुष ही करते थे। लेकिन वर्तमान में करीब दो दर्जन से अधिक महिलाएं भी ऑटो चला रही है। उन महिला ऑटो चालकों को देखकर अकेली महिला, परिवार के लोग व स्टूडेंट हाथ देकर रोकते है। कहीं भी आने-जाने में वे महिला ऑटो चालक के साथ स्वयं को अधिक सुरक्षित भी महसूस कर रहे है। महिलाओं ने भी इस रोजगार को इसलिए चुना क्योंकि यह उनके लिए चलता फिरता  एटीएम है। सड़क पर ऑटो लेकर निकलने पर ये महिलाएं एक दिन में 500 से 700 रुपए तक कमा रही है। </p>
<p><strong>18 साल नर्सिंग की नौकरी की, अब ऑटो चला रही</strong><br />भीमगंजमंडी निवासी गीता शर्मा स्रातक तक शिक्षित है और कम्प्जूटर कोर्स भी किया हुआ है। उन्होंने निजी अस्पताल में करीब 18 साल तक नर्सिंग क्षेत्र में नौकरी की लेकिन अब दो साल से शहर में ऑटो चला रही है। उनके पति राकेश शर्मा भी ऑटो चलाते है। 19 व 15 साल के दो बच्चे है। गीता ने बताया कि नौकरी के दौरान बिना गलती के भी कई बार बहुत कुछ सुनना पड़ता था। लेकिन एक दिन ख्याल आया कि क्यों किसी की गुलामी की जाए और नौकरी छोड़ ऑटो थाम लिया। घर का ऑटो, बेकार नहीं खड़ा रहेगा: गीता ने बताया कि नौकरी छोड़ने के बाद उन्होंने सोना कि घर का ऑटो है। कभी यदि कोई विपरीत परिस्थिति होती है तो घर का ऑटो बेकार तो खड़ा नहीं रहेगा। उससे परिवार का गुजारा चलाया जा सकता है। इस मकसद से तीन माह का प्रशिक्षण लिया। उसके बाद लाइसेंस बनवाया और दो साल से शहर में ऑटो चला रही है। </p>
<p><strong>घर व देश चला रही महिलाएं</strong><br />गीता ने बताया कि शुरुआत में उन्हें कई लोगों के ताने सुनने पड़े। हर कोई यही कहता था कि ऑटो चलाना महिलाओं का काम है क्या। यहां तक की उनके बच्चों को भी लोग यही कहते थे कि तुम्हारी मम्मी को ऑटो चलाने की क्या जरूरत है। गीता ने बताया कि उन्होंने सभी परिस्थितियों का सामना किया। बच्चों को इसके लिए तैयार किया। फिर जो भी उनसे कहता तो सभी को वे यही जवाब देने लगी कि जब महिला घर और देश चला सकती है तो ऑटो चलाने में क्या बुराई है। किसी के आगे हाथ फेलाने से तो खुद का काम करना अच्छा है। आज जब भी वे घर से निकलती है तो रोजाना 700 से 800 रुपए कमाकर ही लाती है। </p>
<p><strong>बच्चों को इंगलिश मीडियम में पढ़ा रही ऑटो चालक रेखा</strong><br /><strong>ऑटो चलाकर दे रही परिवार को आर्थिक सम्बल</strong><br />विज्ञान नगर निवासी रेखा बारोही (37) पिछले 8 साल से ऑटो चला रही है। इससे पहले वे ऑटो यूनियन में रिसेप्सनिस्ट का काम करती थी। वहां से ही उन्हें ऑटो चलाने की प्रेरणा मिली। रेखा ने बताया कि घर की आर्थिक स्थिति काफी कमजोर थी। अकेले पति की कमाई से घर नहीं चलता। 12 वीं तक पढ़ी होने से कहीं अच्छी नौकरी भी नहीं मिली। 12, 9 व 5 साल के तीन बच्चे भी है। ऐसे में ऑटो चलाने का प्रशिक्षण लिया और सड़क पर निकल पड़ी।  रेखा ने बताया कि वे पहले 250 रुपए रोजाना पर और अब 300 रुपए रोजाना किराए पर ऑटो लेकर चलाती है। शुरुआत में उन्होंने स्कूल व कोचिंग के बच्चों को लाने ले जाने का काम किया। वह काम अभी भी जारी है। साथ ही अब शहर में सुबह से रात 8 बजे तक ऑटो चला रही है। </p>
<p><strong>मार्शल आर्ट सीखा, हर स्थिति का कर रही सामना:</strong> रेखा ने बताया कि ऑटो चलाने के दौरान हर तरह के लोग मिलते है। कई बार गलत लोग भी मिले।  लेकिन उनसे निपटने के लिए सभी महिला ऑटो चालकों ने मार्शल आर्ट सीखा हुआ है। इससे आत्म विश्वास आया है। अब कोई भी स्थिति आए उसका सामना कर सकती है। </p>
<p><strong>अकेली महिला व स्टूडेंट के लिए सुरक्षित</strong><br />रेखा ने बताया कि महिलाओं का ऑटो चलाना लोगों को अखतरा है। लेकिन अकेली महिला व कोचिंग स्टूडेंट महिला ऑटो चालकों को अधिक सुरक्षित  महसूस करती है। महिला ऑटो चालक देखकर हाथ देकर रोकती है। रात के समय या सुबह जल्दी बाहर से ट्रेन से आनी वाली स्टूडेंट उन्हें कई बार फोन करके बुलाती है। </p>
<p><strong>किराया निकालकर 500 रुपए रोजाना कमा रही</strong><br />रेखा ने बताया कि वे 300 रुपए रोजाना किराए का ऑटो लेकर चलाती है। जब भी घर से बाहर निकलती है तो कमाकर ही आती है।। ऑटो मतलब चलता फिरता एटीएम है। किराया निकालने के बाद रोजाना करीब 500 रुपए कमाकर ही लाती है।  तीनों बच्चों को इंगलिश मीडियम स्कूल में पढ़ा रही है। दूसरे बच्चों को स्कूल कोचिंग लाने ले जाने के अलावा खुद के बच्चों को भी स्कूल छोड़ने व लाने का काम करती है। </p>
<p><strong>काम के साथ घर भी संभाल रही</strong><br />रेखा ने बताया कि वे काम के साथ घर भी पूरी मेहनत से संभाल रही है। सुबह जल्दी घर से निकलने से पहले बच्चों के लिए टिफिन तैयार करती है। खुद के लिए भी टिफिन लेकर निकलती है। जहां भी समय मिलता है वहां खाना खाती है। रात के घर आने पर फिर खाना बनाना व परिवार को समय देती है।  रेखा ने बताया कि काम कोई भी छोटा नहीं होता।  महिलाएं यदि ठान लें तो कोई भी काम कर सकती है। </p>
<p><strong>25 से अधिक महिलाएं चला रही ऑटो</strong><br />नगर निगम में डेएनयूएलएम की प्रबंधक हेमलता गांधी ने बताया कि निगम में नौकरी करने से पहले वे भी ऑटो चलाती थी। शहर में सबसे पहले काली बाई ने ऑटो चलाया था। वर्तमान में उनकी उम्र 71 साल है और देखने में समस्या होने से उन्होंने ऑटो चलाना कम कर दिया है। वहीं एक महिला गुड्डी बाई रात में ही ऑटो चलाती थी लेकिन उनका कुछ समय पहले निधन हो चुका है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 10 Oct 2024 15:17:45 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का- ट्रैफिक व्यवस्था को लेकर कोर्ट ने किया नोटिस जारी </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा शहर  स्मार्ट सिटी के  रूप में परिवर्तित होने के अंतिम चरण में चल रहा है।इसके बावजूद यहां की ट्रेफिक व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है। शहर के प्रमुख चौराहों अव्यवस्थित तरीके से अपने आॅटो खड़े कर देते हैं। जिससे लोगों को आवाजाही पर विपरीत असर पड़ता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/asar-khabar-ka-%E2%80%93-court-issues-notice-regarding-traffic-arrangements/article-44178"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-04/asar-khabar-ka--traffic-vyavastha-ko-lekar-court-nei-kiya-notice-jaari..kota-news..29.4.2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। कोटा सिटी को स्मार्ट सिटी का लुक दिए जाने के बावजूद अभी तक ट्रैफिक व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किए जाने के मामले में स्थाई लोक अदालत ने पुलिस अधीक्षक  तथा डिप्टी एसपी को नोटिस जारी करते हुए जवाब तलब किया है। मामले में आगामी सुनवाई 24 मई को होगी। इस मामले में एडवोकेट लोकेश कुमार सैनी ने न्यायालय में पेश एक जनहित याचिका में बताया कि कोटा सिटी एक शिक्षा नगरी के रूप में जानी जाती है। कोटा शहर  स्मार्ट सिटी के  रूप में परिवर्तित होने के अंतिम चरण में चल रहा है। जिससे यहां के चौराहों को सुंदरता में बदला  जा रहा है तथा सड़कें चौड़ी की जा रही हैं। शहर की प्रसिद्ध इमारतों का हेरिटेज लुक दिया जा रहा है। इसके बावजूद यहां की ट्रेफिक व्यवस्था में कोई परिवर्तन नहीं किया जा रहा है। याचिका में बताया गया कि शहर को सिग्नल फ्री बनाने के लिए यूआईटी ने कई फ्लाइओवर, अंडरब्रिज बनाए हैं। परन्तु शहर के आॅटो चालकों में कोई परिवर्तन नहीं किया गया है। यहां आॅटो चालक अपनी मन मर्जी से आॅटों को पार्किंग कर देते हैं तथा जहां ना तहां सड़क पर रोक कर सवारियों को बैठाने लग जाते हैं। वे ये भी नहीं देखते हैं कि सड़क पर आॅटो रोकने से बड़ा हादसा हो सकता है। आॅटो चालकों के सड़क पर ही आॅटो को रोकने से पीछे से आने वाले वाहन चालक को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। साथ हादसा की संभावना बढ़ जाती है। शहर के प्रमुख चौराहों अव्यवस्थित तरीके से अपने आॅटो खड़े कर देते हैं। जिससे लोगों को आवाजाही पर विपरीत असर पड़ता है। शहर को सबसे व्यस्तम क्षेत्र सब्जी मंडी में आॅटो चालक आॅटो स्टैंड पर खड़ा नहीं करते हैं। जिससे बाजार में जगह-जगह आॅटो खड़े होने से लोगों को परेशानी होती है। यहां पर यातायात के नियमों की कोई पालना नहीं की जा रही है। शहर के नयापुरा बस स्टैंड पर बीच रोड पर आॅटो खड़ा कर रास्ता ही बंद कर देते हैं। जिससे स्टेैंड से आने वाले यात्रियों को रास्ता ही नहीं मिल पता है। आॅटों चालकों यही नहीं कोटा शहर के प्रत्येक स्थान पर यातायात नियमों की खुलेआम धज्जियां उड़ा रहे हैं। उन्होंने बताया कि यातायात पुलिस की अनदेखी के चलते आम लोगों को समस्या का सामना करना पड़ रहा है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 29 Apr 2023 15:03:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>बजाज ऑटो की बिक्री मार्च में 20 प्रतिशत गिरी</title>
                                    <description><![CDATA[ बजाज ऑटो के मार्च में बिके वाहनों में 20 प्रतिशत की गिरावट हुयी है। कंपनी ने बताया कि उसने पिछले माह में 2,97,188 वाहन बेचे हैं, जबकि मार्च 2021 में बिक्री संख्या 3,69,448 थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/bajaj-auto-sales-fell-20-percent/article-7342"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/bajaj-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>मुंबई। बजाज ऑटो के मार्च में बिके वाहनों में 20 प्रतिशत की गिरावट हुयी है। कंपनी ने बताया कि उसने पिछले माह में 2,97,188 वाहन बेचे हैं, जबकि मार्च 2021 में बिक्री संख्या 3,69,448 थी। बजाज के एक बयान में कहा गया है कि घरेलू बाजार में वाहनों की उसकी कुल बिक्री 36 प्रतिशत से कम होकर 1,26,752 रही, जबकि मार्च 2021 में यह संख्या 1,98,551 थी।      </p>
<p>कंपनी ने घरेलू बाजार में इस बार मार्च 2021 में 1,07,081 दोपहिया वाहन बेचे, जबकि एक साल पहले इसी माह में बिक्री का यह आंकड़ा 1,81,393 था। कंपनी ने कहा कि इस दौरान घरेलू बाजार में उसके वाणिज्यिक वाहनों की बिक्री 15 प्रतिशत बढ़कर 19,671 रही, जबकि एक वर्ष पूर्व इसी अवधि में यह संख्या 17,158 वाहनों की थी। इस बार मार्च में 21,193 वाणिज्यिक वाहनों का निर्यात किया, जो मार्च 2021 की तुलना में चार प्रतिशत कम है। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 Apr 2022 16:45:44 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>20 साल कॉलेज में पढ़ाने के बाद चला रहे ऑटो </title>
                                    <description><![CDATA[अगर कोई ऑटो चालक आपसे बहुत ही विनम्र तरीके से अंग्रेजी में बात करे तो आपको आश्चर्य तो होगा। बेंगलुरु की निकिता अय्यर ने ऐसा ही वाक्या साझा किया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/leads/karnataka-one-man-driving-auto-after-20-years-teach-in-college/article-7044"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-03/auto-driver-copy.jpg" alt=""></a><br /><p>बेंगलूरू। अगर कोई ऑटो चालक आपसे बहुत ही विनम्र तरीके से अंग्रेजी में बात करे तो आपको आश्चर्य तो होगा। बेंगलुरु की निकिता अय्यर ने ऐसा ही वाक्या साझा किया है। निकिता को अपने कार्यालय पहुंचने में देर हो रही थी, जो शहर के दूसरे छोर पर था। वह किसी वाहन का इंतजार कर रही थी। तभी एक ऑटो आकर रुका और उसका चालक जो 74 वर्षीय बुजुर्ग था, बड़े ही विनम्र शब्दों में अंग्रेजी में बोला कृपया अंदर आइए मैडम, आप जो चाहें भुगतान कर सकती हैं। इस वृद्ध के व्यवहार से अय्यर हैरान रह गई और उसने उत्सुकता से उससे पूछा कि वह इतनी अच्छी अंग्रेजी कैसे बोलते हैं। पताबी रमन ने जवाब दिया कि वह एक अंग्रेजी व्याख्याता हुआ करता था और उसने एमए और एम एड किया है। रमन ने तुरंत अय्यर से सवाल किया कि क्या आप मुझसे पूछने जा रहे हैं कि मैं ऑटो क्यों चला रहा हूं।</p>
<p><strong>कर्नाटक में नहीं मिली नौकरी</strong><br />रमन ने बताया कि वह 14 साल से ऑटो-रिक्शा चला रहा है। जाति के कारण कर्नाटक में नौकरी नहीं मिलने के कारण वह मुंबई चले गए और वहां के पवई कॉलेज में अंग्रेजी पढ़ाते थे। उन्होंने वहां 20 साल तक काम किया और 60 वर्ष की आयु में सेवानिवृत्त हो गए।</p>
<p><strong>700-1500 रुपए रोज कमा लेते हैं</strong><br />रमन ने बताया कि शिक्षकों को अच्छा वेतन नहीं मिलता है। आप अधिकतम 10 से 15 हजार कमा सकते हैं और चूंकि यह एक निजी संस्थान था, इसलिए मेरे पास पेंशन नहीं है। रिक्शा चलाने से मुझे एक दिन में कम से कम 700-1500 रुपए मिलते हैं जो मेरे और मेरी प्रेमिका के लिए काफी है। उसने बताया कि वह अपनी पत्नी को प्रेमिका कहते हैं।</p>
<p><strong>पत्नी को क्यों कहते हैं प्रेमिका</strong> <br />उन्होंने बताया कि जिस क्षण आप पत्नी कहते हैं, पति सोचते हैं कि वह एक दास है, जिसे आपकी सेवा करनी चाहिए, लेकिन वह किसी भी तरह से मुझसे कम नहीं है, वास्तव में, वह कभी-कभी मुझसे श्रेष्ठ होती है। हम कडुगोडी में वन बीएचके में रहते है, जहां मेरा बेटा 12 हजार रुपए किराया देने में मदद करता है, लेकिन इसके अलावा हम अपने बच्चों पर निर्भर नहीं हैं।वे अपना जीवन जीते हैं और हम खुशी से अपना जीवन जीते हैं। अब मैं जब चाहूं अपना ऑटो निकाल सकता हूं और जब चाहूं काम कर सकता हूं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 31 Mar 2022 10:45:26 +0530</pubDate>
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                <title>चिप का संकट नए साल के अंत तक दूर होने के आसार, राजस्थान के ऑटो मार्केट को 800 करोड़ का झटका</title>
                                    <description><![CDATA[सरकार को 250 करोड़ जीएसटी और 80-100 करोड़ के रोड़ टैक्स की हानि]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/business/gadgets/61cc0427ceee2/article-3625"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2021-12/4-28-21-semiconductor-2-featured-image.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सेमिकंडक्टर (चिप) की कमी से जूझते कार डीलर्स को दिवाली से अब तक करीब 800 करोड़ के कारोबार का नुकसान हुआ। करीब आठ हजार यूनिट बिकती, जो कि कार खरीदारों को नहीं मिल सकी। अब भी एक साल से अधिक का बुकिंग पीरियड चल रहा है। ऑटो डीलर्स के कारोबार के नुकसान के साथ राजस्थान सरकार को रोड टैक्स 80 से 100 करोड़ और 250 करोड़ के जीएसटी से वंचित रहना पड़ा। ऑटो एक्सपर्ट की माने तो यह समस्या नए साल 2022 के अंत तक दूर होगी। इस समस्या से शोरूमों में जॉब कट लगातार हो रहा है। राजस्थान में करीब दो हजार शोरूम है, जिसमें जयपुर के तीन सौ शोरूम शामिल है।</p>
<p><strong><br />कमी का मुख्य कारण लॉकडाउन</strong><br />वैश्विक महामारी कोरोना की रोकथाम के लिए लॉकडाउन लगाया। प्लांट बंद हो गए। अब प्लांट फिर से शुरू हो गए। लेकिन उत्पादन की क्षमता से अधिक मांग बनी हुई है। मांग और पूर्ति की दूरी में कमी नए प्लांट में उत्पादन बढ़ने से ही दूर होगी। कोरिया, चीन और ताइवान मुख्य उत्पादक देश है। अमेरिका में भी निर्माण होगा है। दुनिया की पचास फीसदी मांग ताइवान सेमिकंडक्टर मैन्युफैक्चिरिंग कंपनी करती है। <br /><strong><br />पसंदीदा कार खरीदने के लिए लंबा इंतजार</strong><br />दुनिया भर में इन दिनों सेमीकंडक्टर की किल्लत चल रही है जिस वजह से पैसेंजर व्हीकल के प्रोडक्शन पर काफी असर पड़ा है। फैडरेशन ऑफ ऑटो मोबाइल डीलर्स एसोसिएशन के राष्ट्रीय कोषाध्यक्ष साईं गिरधर ने बताया कि  यह स्थिति जल्द सुधरने की कोई उम्मीद नहीं है। बाजार में पैसेंजर कार और एसयूवी की मांग आगामी फेस्टिव सीजन में बढ़ने वाली है और इस वजह से कार बनाने वाली कंपनियां अब वैकल्पिक रास्ता तलाशने में जुट गई हैं।<br /><br /><strong>कनेक्टेड कार मतलब ज्यादा चिप</strong><br />ऑटो बनाने वाली कंपनियां अब अपने प्रोडक्शन लाइन को चलाते रहने के लिए अपने वाहनों में माइक्रोचिप का इस्तेमाल कम करने में जुट गई है। कार बनाने वाली कंपनियां के हायर वैरिएंट मॉडल में एडिशनल फीचर के लिए अधिक चिप की जरूरत होती है। इसमें टच स्क्रीन, पावर मिरर और कनेक्टेड कार सिस्टम आदि शामिल हैं।<br /><br /><strong>कार कंपनियों के मुनाफे पर असर</strong><br />ऑटो कंपनियों की कुल बिक्री में हाई एंड मॉडल की हिस्सेदारी लगातार बढ़ रही है। इस वजह से कार बनाने वाली कंपनियों को मुनाफा भी अधिक हो रहा है। देश में इस समय चार लाख से अधिक ग्राहक अपनी नई कार का इंतजार कर रहे हैं। कार निर्माता कंपनियों को चिप की किल्लत से निपटने का कोई तरीका नजर नहीं आ रहा है। इस वजह से कार बनाने वाली कंपनियों ने अब अपनी रणनीति बदल ली है।<br /><br /><strong>कनेक्टेड कार की जगह सिंपल सिस्टम</strong><br />टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा और हुंडई मोटर इंडिया जैसी कंपनियों ने अब अपने टॉप सेलिंग व्हीकल के बिना इन्फोटेनमेंट सिस्टम वाले वेरिएंट लॉन्च कर दिए हैं। इन्फोटेनमेंट सिस्टम में सबसे ज्यादा माइक्रोचिप का इस्तेमाल होता है। कार बनाने वाली कंपनियों ने अब कनेक्टेड कार की जगह सिंपल सिस्टम पेश करना शुरू कर दिया है। टाटा मोटर्स अपने ग्राहकों को सिर्फ  एक रिमोट की देती है। कंपनी का कहना है कि कार खरीदारी के समय एक रिमोट की मिलेगा जबकि दूसरा रिमोट की बाद में दिया जा सकता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>गैजेट्स</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 29 Dec 2021 13:09:40 +0530</pubDate>
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