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                <title>Mahatma Gandhi Hospital - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                <description>Mahatma Gandhi Hospital RSS Feed</description>
                
                            <item>
                <title>महात्मा गांधी अस्पताल की पहल : टोंक में लगा निशुल्क कैंसर स्क्रीनिंग शिविर, सैकड़ों मरीजों ने उठाया लाभ</title>
                                    <description><![CDATA[महात्मा गांधी अस्पताल और रोटरी क्लब के सहयोग से टोंक में भव्य निशुल्क चिकित्सा शिविर आयोजित हुआ। मेडिकल कॉलेज प्राचार्य डॉ. लोकेन्द्र शर्मा की मौजूदगी में कैंसर स्क्रीनिंग, मैमोग्राफी और विशेषज्ञ परामर्श सेवाएं दी गईं। बड़ी संख्या में मरीजों ने मुफ्त दवाइयों और आधुनिक जांचों का लाभ उठाकर अपनी सेहत सुनिश्चित की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/hundreds-of-patients-took-advantage-of-the-free-cancer-screening/article-151840"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/mahatam-gandhi.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर के श्री राम कैंसर एंड सुपर स्पेशियलिटी सेंटर के तत्वावधान में रोटरी क्लब, टोंक एवं इनरव्हील क्लब, टोंक के संयुक्त सहयोग से अग्रवाल धर्मशाला, टोंक में निशुल्क चिकित्सा परामर्श एवं कैंसर स्क्रीनिंग शिविर का सफल आयोजन किया गया। शिविर के मुख्य अतिथि टोंक मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य डॉ. लोकेन्द्र शर्मा रहे। उन्होंने अपने संबोधन में कहा कि इस प्रकार के शिविर ग्रामीण एवं  अर्धशहरी क्षेत्रों में कैंसर जैसी गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान और उपचार के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। </p>
<p>शिविर में पेट रोग विशेषज्ञ डॉ सुमित यादव, डॉ सुनील जानी, विभिन्न विशेषज्ञ चिकित्सकों की टीम द्वारा मरीजों को परामर्श एवं जांच सेवाएं प्रदान की गईं। इसमें न्यूरोलॉजी, गैस्ट्रोलॉजी, जनरल मेडिसिन, ऑर्थोपेडिक्स, कार्डियोलॉजी, कैंसर रोग, ईएनटी, यूरोलॉजी तथा स्त्री एवं प्रसूति रोगों से संबंधित परामर्श एवं उपचार शामिल रहे। शिविर में उपलब्ध प्रमुख सेवाओं में चेस्ट एक्स-रे, मेमोग्राफी, पैप स्मियर टेस्ट, मुंह के कैंसर की स्क्रीनिंग, ईसीजी, ब्लड शुगर एवं ब्लड प्रेशर जांच आदि शामिल रहीं। साथ ही, मरीजों को निःशुल्क दवाइयों का वितरण भी किया गया। शिविर में बड़ी संख्या में मरीजों ने भाग लेकर विशेषज्ञ चिकित्सकों से लाभ प्राप्त किया। महात्मा गांधी अस्पताल के डायरेक्टर जनसंपर्क वीरेंद्र पारीक ने बताया कि इस आयोजन में रोटरी क्लब, टोंक एवं इनरव्हील क्लब, टोंक का विशेष सहयोग रहा। आयोजन को सफल बनाने में क्लब पदाधिकारियों एवं समाजसेवियों का महत्वपूर्ण योगदान रहा।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                            <category>टोंक</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 27 Apr 2026 18:02:58 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>बिना चीरा लगाए न्यूरो इंटरवेंशन तकनीक के जरिए ब्रेन एन्यूरिज्म का सफल उपचार: 74 वर्षीय वृद्धा को मिली नई जिंदगी</title>
                                    <description><![CDATA[महात्मा गांधी अस्पताल में तेज सिरदर्द से पीड़ित महिला का सफल इलाज। जांच में मिला एक सेंटीमीटर का ब्रेन एन्यूरिज्म। बिना चीरे के न्यूरो इंटरवेंशन तकनीक से उपचार। महिला को अगले दिन ही स्वस्थ होने पर घर भेजा। ब्रेन एन्यूरिज्म फटने से अधिकांश रोगी मौत का शिकार हो जाते हैं। दिमाग की नस फूल कर हो चुकी थी गुब्बारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/successful-treatment-of-brain-aneurysm-through-neuro-intervention-technique-without/article-144426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/mahatma-gandhi.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल में न्यूरो इंटरवेंशन प्रक्रिया से एक जटिल केस में महिला का सफलतापूर्वक इलाज किया गया है।  तेज सिरदर्द से पीड़ित 74 वर्षीय महिला बीते दिनों महात्मा गांधी अस्पताल पहुंची। जहां विस्तृत जांच के दौरान एमआरआई एवं संदेह के आधार पर एंजियोग्राफी की गई, जिसमें लगभग एक सेंटीमीटर का ब्रेन एन्यूरिज्म पाया गया। महिला को बिना चीरे के न्यूरो इंटरवेंशन तकनीक के जरिए बिना सर्जरी उपचारित किया गया। उपचार के बाद महिला को अगले दिन ही स्वस्थ होने पर घर भेज दिया गया। उल्लेखनीय है कि करीब 3 प्रतिशत वयस्क आबादी में एक तरह के खून की नसों के गुब्बारे और एन्यूरिज्म होते हैं। जिनका एंजियोग्राफी के बिना पता नहीं चल पाता। ब्रेन एन्यूरिज्म फटने से अधिकांश को लकवा हो जाता है या फिर रोगी तत्काल मौत का शिकार हो जाते हैं।</p>
<p>न्यूरो-इंटरवेंशन विभागाध्यक्ष प्रोफेसर डॉ. मदन मोहन गुप्ता ने बताया कि जांच में सामने आया कि दिमाग की नस असामान्य रूप से फूल कर गुब्बारे का रूप ले चुकी थी और उसमें खून भरा हुआ था, जो किसी भी समय फट सकता था और जान के लिए घातक साबित हो सकता था।</p>
<p>उन्होंने बताया कि चुनौतियां और भी थीं। मरीज की गर्दन की मोटाई अधिक थी और एन्यूरिज्म दिमाग की दो प्रमुख धमनियों में से एक एंटीरियर सेरेब्रल आर्टरी के पास स्थित था। इसके अलावा मरीज को पूर्व में ब्रेन हैमरेज और लकवा भी हो चुका था, जिससे उपचार अत्यंत जोखिमपूर्ण हो गया था।</p>
<p>कठिन परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए सर्जरी की बजाय अत्याधुनिक न्यूरो-इंटरवेंशन तकनीक का चयन किया गया। उपचार के दौरान कंटूर डिवाइस की सहायता से एन्यूरिज्म का इलाज किया और उसमें खून के प्रवाह को रोकने के साथ वहीं अन्य नसों में रक्त प्रवाह सुचारू बना रहा। परिणामस्वरूप एन्यूरिज्म में जमा खून गाढ़ा होकर सूख गया और गुब्बारे नुमा हो गई नस के फटने का खतरा भी समाप्त हो गया।<br />डॉ मदन मोहन गुप्ता ने बताया कि जयपुर ( राजस्थान) में इस प्रकार के जटिल ब्रेन एन्यूरिज्म का कंटूर डिवाइस से न्यूरो-इंटरवेंशन प्रक्रिया से सफल उपचार का यह पहला मामला है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 24 Feb 2026 15:38:14 +0530</pubDate>
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                <title>महाराजा एक्सप्रेस: शाही ट्रेन को बेपटरी करने की नाकाम कोशिश, रेलवे ट्रैक पर रख लोगे के एंगल, पुलिस कर रही मामले की जांच </title>
                                    <description><![CDATA[राजधानी के शिवदासपुरा इलाके में सोमवार रात देश की सबसे लग्जरी ट्रेन 'महाराजा एक्सप्रेस' को बेपटरी करने की एक सनसनीखेज कोशिश की गई। अज्ञात बदमाशों ने महात्मा गांधी अस्पताल के पास रेलवे ट्रैक पर भारी लोहे के एंगल और सीमेंट ब्लॉक रख दिए थे, ताकि ट्रेन दुर्घटनाग्रस्त हो जाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/failed-attempt-to-derail-the-royal-train-by-keeping-it/article-140395"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/maharaja.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। शिवदासपुरा थाना इलाके में अज्ञात लोगों ने रेलवे ट्रैक पर रेलवे लाइन के आसपास लगे लोहे के एंगल को उखाड़ कर रख दिया। जानकारी के अनुसार अज्ञात बदमाशों ने सवाई माधोपुर की ओर से आ रही शाही महाराजा ट्रेन को बेपटरी करने की कोशिश की जो पूरी तरह नाकाम रही।</p>
<p>पुलिस का मानना है कि लोको पायलट की सूझबूझ से ट्रेन को पेपर ट्राई करने की कोशिश को नाकाम किया गया। मामले की जांच कर रहे उपनिरीक्षक धर्म सिंह ने बताया कि घटना सोमवार रात करीब 11 बजे की है। मामले में उत्तर पश्चिम रेलवे के सेशन इंजीनियर वीरेंद्र प्रसाद ने रिपोर्ट दर्ज कराई है। घटना बलवा के पास पिलर नंबर 108/16 से 108/18 के बीच की है।</p>
<p>पुलिस अज्ञात आरोपियों की तलाश कर रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 21 Jan 2026 16:56:36 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>एक दिन में हुए दो रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट : महात्मा गांधी अस्पताल के चिकित्सकों को मिली सफलता, मेडिकल इतिहास में नया अध्याय</title>
                                    <description><![CDATA[अब किडनी ट्रांसप्लांट भी रोबोट तकनीक के जरिए होने लगे हैं। हाल ही में महात्मा गांधी अस्पताल में एक दिन में दो रोगियों में किडनी प्रत्यारोपण रोबोट की सहायता से किये गए]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/two-robotic-kidney-transplant-mahatma-gandhi-hospital-got-success-in/article-128455"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/111-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अब किडनी ट्रांसप्लांट भी रोबोट तकनीक के जरिए होने लगे हैं। हाल ही में महात्मा गांधी अस्पताल में एक दिन में दो रोगियों में किडनी प्रत्यारोपण रोबोट की सहायता से किये गए। उल्लेखनीय है कि देश में बहुत कम केंद्र हैं जहां एक दिन में दो किडनी ट्रांसप्लांट इस पद्धति से किए गए हैं।</p>
<p>रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट सर्जन डॉ नृपेश सदासुखी ने बताया कि रोबोटिक किडनी ट्रांसप्लांट रोगी तथा सर्जन दोनों के लिए बेहद उपयोगी तकनीक है। इसमें ऑपरेशन में छोटा चीरा लगाया जाता है जिससे रक्तस्राव और दर्द भी कम होता है। इसमें प्रयुक्त रोबोटिक आर्म्स 360 डिग्री घूम सकते हैं और बेहद नाजुक रक्तवाहिनियों को बिना नुकसान पहुँचाए जोड़ सकते हैं। </p>
<p>उन्होंने बताया कि ऑपरेशन के बाद मरीज को सामान्य होने में कम समय लगता है। अस्पताल में कम समय तक भर्ती रहना होता है। इससे संक्रमण की संभावना भी कम हो जाती है। घाव जल्दी भर जाता है और केवल छह दिन में छुट्टी हो जाती है। यह सर्जरी सौंदर्य की दृष्टि से देखे तो यह युवा महिला रोगियों के लिए अधिक उपयोगी होती है। छोटे चीरे के निशान भी समय के साथ कम हो जाते हैं। इसके अलावा मोटापा प्रभावित मरीजों में रोबोटिक तकनीक सर्जन मदद देती है। इसके अलावा पहले से पेट की सर्जरी  करा चुके रोगियों, डायबिटिक रोगियों के लिए भी  अधिक उपयोगी होती है।</p>
<p>हाल ही में इक्यावन वर्षीय किडनी रोगी महेंद्र को अधिक वजन तथा ब्लड प्रेशर होने की वजह से रोबोटिक तकनीक से  किडनी प्रत्यारोपित की गई।  किडनी उनकी पत्नी सुनीता ने दी थी। और अब दोनों स्वास्थ्य लाभ ले रहे हैं। इसी तरह नरेंद्र नामक किडनी रोगी दो माह से डायलिसिस करा रहे थे। मैच होने पर उनकी माता ने किडनी डोनेट की। रोबोटिक सर्जरी से उन्हें किडनी लगा दी गई। दोनों रोगी अब ठीक हैं और शीघ्र ही छुट्टी दे दी जाएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 01 Oct 2025 18:49:11 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>सफल स्पाइन सर्जरी से दी कबड्डी खिलाड़ी को नई जिंदगी, ऑपरेशन में किया गया अत्याधुनिक तकनीक ‘ओ-आर्म नेविगेशन’ का प्रयोग</title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा कि, ऐसी स्पाइन इंजरी से पीड़ित हजारों मरीज जानकारी के अभाव में जीवन भर बिस्तर तक सीमित हो जाते हैं, जबकि समय पर सही इलाज और आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर उन्हें पूर्ण स्वस्थ बनाया जा सकता है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mahatma-gandhi-hospital-achieved-historical-achievement-of-successful-spine-surgery/article-127803"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/02154.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महात्मा गांधी अस्पताल जयपुर ने एक और ऐतिहासिक उपलब्धि हासिल करते हुए जटिल स्पाइन सर्जरी को सफलतापूर्वक अंजाम दिया। इस सर्जरी ने मालपुरा निवासी एवं राज्य स्तर पर कबड्डी खिलाड़ी रह चुके 43 वर्षीय मोहम्मद इस्लाम को फिर से जीवन की नई राह दी है। काम करते समय वजन उठाने के कारण मोहम्मद इस्लाम की रीढ़ की हड्डी में गंभीर चोट लग गई थी। इसके बाद से उनकी नाभि से नीचे का हिस्सा बिल्कुल काम नहीं कर रहा था और वे पूरी तरह बिस्तर पर आश्रित हो गए थे। यहां तक कि पेशाब का भी एहसास नहीं होता था।</p>
<p>अस्पताल के न्यूरोसर्जरी विभागाध्यक्ष डॉ. पंकज गुप्ता ने बताया कि इस जटिल मामले का निदान कर डी12–एल1 स्पाइन सर्जरी की गई। विशेष बात यह रही कि ऑपरेशन में अत्याधुनिक तकनीक ‘ओ-आर्म नेविगेशन’ का प्रयोग किया गया, जिससे सर्जरी और अधिक सटीक एवं सुरक्षित तरीके से संभव हुई। ऑपरेशन टीम में डॉ. पंकज गुप्ता के साथ डॉ. सुनीता शर्मा, डॉ. रविंद्र सिंह सिसोदिया, डॉ. अनमोल, डॉ. फोरम मेहता तथा डॉ. संदर्भ गौतम शामिल रहे। टीम के सामूहिक प्रयासों से यह जटिल सर्जरी सफलतापूर्वक सम्पन्न हुई। ऑपरेशन के आठ महीने बाद आज मोहम्मद इस्लाम फिर से सामान्य दिनचर्या जी रहे हैं। वे स्वयं चल-फिर सकते हैं, अपने दैनिक कार्य कर रहे हैं और पेशाब का संकेत भी मिलने लगा है। डॉ. पंकज गुप्ता ने कहा कि, ऐसी स्पाइन इंजरी से पीड़ित हजारों मरीज जानकारी के अभाव में जीवन भर बिस्तर तक सीमित हो जाते हैं, जबकि समय पर सही इलाज और आधुनिक तकनीक का सहारा लेकर उन्हें पूर्ण स्वस्थ बनाया जा सकता है। खास बात यह रही कि ऑपरेशन राज्य सरकार की मां योजना के तहत निशुल्क किया गया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Sep 2025 17:32:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महात्मां गांधी अस्पताल में तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस एओगिन 2025 का शुभारंभ : सर्वाइकल कैंसर के मामले कम हो रहे, एचपीवी टीके और डीएनए टेस्ट से हो रही रोकथाम</title>
                                    <description><![CDATA[आईसीएमआर के निदेशक डॉ. प्रशांत माथुर ने कहा कि बहुत अच्छा संकेत है कि राष्ट्रीय रजिस्ट्री आंकड़ों के अनुसार देश में सर्वाइकल कैंसर के मामले कम हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/three-day-conference-aoeagin-2025-inaugurated-in-mahatma-gandhi-hospital/article-125332"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/1ne1ws-(6)40.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। अनुमान के तौर पर इस समय दुनिया में हर साल 6.5 लाख से अधिक सर्वाइकल कैंसर के नए रोगी सामने आ रहे हैं। भारत में यह संख्या करीब 1.25 लाख है। अगर सर्वाइकल कैंसर से होने वाली मौतों के आंकड़े देखें तो पता चलेगा, कि दुनिया में हर साल 3.5 लाख मौतों के लिए सर्वाइकल कैंसर जिम्मेदार है। देश में यह संख्या 60 हजार के आस-पास है। यह जानकारी शनिवार को महात्मा गांधी अस्पताल जयपुर में आयोजित तीन दिवसीय कॉन्फ्रेंस एओगिन-2025 में मुख्य वक्ता और स्त्री कैंसर विशेषज्ञ पद्मश्री डॉ. नीरजा बटाला ने दी। डॉ. बटाला ने कहा कि सर्वाइकल कैंसर की रोकथाम के लिए एचपीवी वैक्सीन को बहुत उपयोगी है। इससे सर्वाइकल कैंसर में 60 से 90 प्रतिशत तक कमी आ सकती है।</p>
<p>खास बात ये है कि यह वैक्सीन गले, मलद्वार और योनि के कैंसर में भी प्रभावी साबित हो रहा है। आईसीएमआर के निदेशक डॉ. प्रशांत माथुर ने कहा कि बहुत अच्छा संकेत है कि राष्ट्रीय रजिस्ट्री आंकड़ों के अनुसार देश में सर्वाइकल कैंसर के मामले कम हो रहे हैं। इस दौरान विशेषज्ञों ने कहा कि 9 से 14 साल की उम्र में लड़के और लड़कियों को एचपीवी वैक्सीन दी जाए, ताकि संक्रमण से पहले ही सुरक्षा मिल सके। कॉन्फ्रेंस में विश्व स्वास्थ्य परिषद के कैंसर बचाव विभाग के अध्यक्ष डॉ. पार्था बासु, महात्मा गांधी मेडिकल यूनिवर्सिटी के संस्थापक चेयरमैन डॉ. एमएल स्वर्णकार, आयोजन समिति अध्यक्ष और वरिष्ठ स्त्री कैंसर रोग विशेषज्ञ डॉ. रानू पाटनी व आयोजन सचिव वरिष्ठ स्त्री रोग विशेषज्ञ डॉ. अंशु पटोदिया भी मौजूद रहे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sun, 31 Aug 2025 16:46:37 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur PS]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>राजस्थान में पहली बार हुई दुर्लभ सर्जरी, लिवर ऑटो-ट्रांसप्लांटेशन से मिला नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[डॉक्टर्स ने राजस्थान की पहली लिवर ऑटो-ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी कर एक दुर्लभ और जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/rare-surgery-for-the-first-time-in-rajasthan-got-new/article-119016"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-06/114.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर में सेंटर फॉर डाइजेस्टिव साइंसेज के डॉक्टर्स ने राजस्थान की पहली लिवर ऑटो-ट्रांसप्लांटेशन सर्जरी कर एक दुर्लभ और जटिल ऑपरेशन को सफलतापूर्वक अंजाम दिया।</p>
<p>एचपीबी सर्जरी व लिवर ट्रांसप्लांटेशन विभागाध्यक्ष डॉ नैमिष एन मेहता ने बताया कि यह सर्जरी 42 वर्षीय पुरुष मरीज की थी, जो तेज पेट दर्द और दोनों पैरों में सूजन की समस्या लेकर अस्पताल आया था। जांच में पता चला कि लिवर के पीछे एक बड़े ट्यूमर ने निचले शरीर की मुख्य नस (इंफीरियर वेना कावा – IVC) को पूरी तरह से घेर लिया था। यह नस शरीर के निचले हिस्से से रक्त को हृदय तक ले जाती है। ट्यूमर के कारण रक्त प्रवाह नहीं हो पा रहा था, जिससे दोनों पैरों में सूजन आ गई थी और दर्द भी था। इतना ही नहीं, ट्यूमर लिवर की मुख्य रक्त संचार करने वाली नसों को भी दबा रहा था। इस वजह से लिवर फंक्शन भी बाधित हो रहा था।</p>
<p>डॉ मेहता ने बताया कि यह स्थिति जानलेवा हो सकती थी। जान बचाने के लिए ट्यूमर को हटाना ही एकमात्र उपाय था, लेकिन इसके लिए ऑपरेशन के दौरान मुख्य रक्त वाहिनी को बंद करना जरूरी था और रक्त संचार बंद करने पर लिवर के खराब होने की संभावना भी थी। ऑपरेशन में  वरिष्ठ हार्ट सर्जन  डॉ. मुर्तजा अहमद चिश्ती की मदद से सीने तथा पैरीकार्डियम को खोला गया। डॉ मेहता ने बताया कि इस बेहद जटिल प्रक्रिया के दौरान सबसे बड़ी समस्या लिवर को आईवीसी कावा धमनी से अलग करना था। ऑपरेशन के दौरान सर्जरी टीम थोड़ी देर खून को रोक कर सर्जरी करते और फिर से रक्त संचार करने सुचारू करते। इसके बाद सर्जरी से लिवर को मुख्य रक्त वाहिनी से  अलग किया गया। ट्यूमर को निकाल कर कृत्रिम नस  'वेना ग्राफ्ट'  द्वारा मुख्य नस को फिर से बनाया गया और पुनः लिवर को प्रत्यारोपित कर दिया गया।</p>
<p>यह प्रक्रिया लिवर ऑटो-ट्रांसप्लांटेशन कहलाती है, जिसे विश्व के गिने-चुने अत्याधुनिक चिकित्सा केंद्रों में ही किया जाता है। लगभग 12 घंटे तक चली मैराथन सर्जरी डॉ. नैमिष मेहता के नेतृत्व में पूरी टीम शामिल रही।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>स्वास्थ्य</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 30 Jun 2025 18:40:16 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur KD]]></dc:creator>
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            <item>
                <title>तीन दिन के नवजात के दिल में लगाया स्टेंट, महात्मा गांधी अस्पताल के विशेषज्ञों ने दिया नवजात को नया जीवन</title>
                                    <description><![CDATA[ राजधानी में अब नवजात बच्चों के हार्ट की जटिल बीमारियों का बिना ऑपरेशन बैलूनिंग तथा स्टेटिंग से उपचार किया जा रहा हैं]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/stent-mahatma-gandhi-hospital-experts-gave-a-new-life-to/article-112674"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-05/news-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजधानी में अब नवजात बच्चों के हार्ट की जटिल बीमारियों का बिना ऑपरेशन बैलूनिंग तथा स्टेटिंग से उपचार किया जा रहा हैं।  ऐसा ही एक मामला पिछले दिनों महात्मा गांधी मेडिकल कॉलेज और अस्पताल जयपुर में सामने आया।   तीन दिन पहले जन्मे एक बच्चे को  ऑक्सीजन की</p>
<p>गंभीर कमी तथा शरीर के  नीले पड़ने की शिकायत के साथ अजमेर से रेफर किया गया था। जांच किए जाने पर ज्ञात हुआ की बच्चे के फेफड़ों में रक्त प्रवाह बहुत ही कम हो रहा था। यह एक जटिल जन्मजात हृदय रोग पल्मोनरी एट्रिजिया का लक्षण था। बच्चे की कमजोर स्थिति को देखते हुए ओपन हार्ट सर्जरी की बजाय नॉन इंटरवेंशनल पीडीए स्टेटिंग तकनीक द्वारा एक तार के जरिए हृदय की पीडीए वाहिनी में स्टेंट लगाया गया। यह प्रयास सफल रहा और बच्चे के फेफड़ों में रक्त संचार सामान्य हो गया। तीन दिन के नवजात में इस तरह की पीडीए स्टेटिंग का संभवतः यह प्रदेश में पहला मामला है।</p>
<p>इस प्रक्रिया में शिशु हृदय रोग विशेषज्ञ डॉ  संजय खत्री, डॉ कनुप्रिया चतुर्वेदी तथा डॉ प्रेरणा भट्ट की भूमिका महत्वपूर्ण रही। चिकित्सकों ने बताया कि ऐसे मामलों में सर्जरी के अलावा पीडीए स्टेंटिंग का विकल्प भी होता है जिसमें जांघ के रास्ते कैथेटर को हृदय तक पहुंचाकर पीडीए नली को खुला रखा जा सकता है। प्रक्रिया के बाद बच्चे के फेफड़ों में रक्त संचार सामान्य हो गया है।</p>
<p>उन्होंने बताया कि बच्चे के पल्मोनरी वाल्व बना ही नहीं था। पीडीए के रास्ते ही खान का संचार हो रहा था। सामान्यतः पीडीए नली जन्म के 2 या तीन दिन में स्वतः ही बंद हो जाती है। इस प्रक्रिया में बिना ऑपरेशन द्वारा किया गया जिससे नौनिहाल को जटिलताओं से बचाया जा सका।  गंभीर रूप से बीमार नवजात शिशु पर अपना पहला पेटेंट डक्टस आर्टेरियोसिस (पीडीए) स्टेंटिंग सफलतापूर्वक किया, जो राजस्थान के लिए बच्चों में दिल की बीमारियोंके उपचार में महत्वपूर सफलता माना जा रहा है।</p>
<p>पीडियाट्रिक कार्डियक साइंसेज के निदेशक डॉ सुनील कुमार कौशल ने बताया कि पीडीए स्टेंटिंग जैसी नॉन इनवेसिव उपचार के लिए  महात्मा गाँधी अस्पताल राज्य का एकमात्र समर्पित उपचार केंद्र है जहां जटिल से जटिल शिशु ह्रदय रोगों का उपचार प्रभावी ढंग से सफलतापूर्वक किया जा रहा है।  डॉ  कौशल ने बताया कि पीडीए स्टेंटिंग उन नाजुक नवजात शिशुओं के लिए एक गेम चेंजर है जिनकी तत्काल सर्जरी नहीं  की जा सकती है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 01 May 2025 18:55:14 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>5 माह के मासूम की सफल जटिल रोबोटिक सर्जरी</title>
                                    <description><![CDATA[यह सर्जरी बिना किसी रक्तस्राव और बहुत ही सूक्ष्म 8 मिमी के तीन चीरों द्वारा करने में सफ लता मिली। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/successful-complex-robotic-surgery-of-5-month-old-baby/article-96717"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-12/257rtrer-(7)8.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। महात्मा गांधी अस्पताल के पीडियाट्रिक्स सर्जरी विशेषज्ञ ने पांच माह के मासूम की जटिल सर्जरी कर जान बचाई है। बच्चे को जन्म से ही श्वास लेने में मदद करने वाली छाती एवं पेट के बीच स्थित मांसपेशी में एक बड़ा छेद था। इस कारण मासूम का आमाशय, बायां गुर्दा, तिल्ली, बड़ी आंत और छोटी आंत का काफी सारा हिस्सा बच्चे के बाएं ओर छाती में था। इस वजह से बच्चे के बाएं फेफड़े, दिल एवं दाएं फेफड़े पर भारी दबाव था। वे अपनी जगह से दूसरी ओर सरक गए थे। ऐसी स्थिति में बच्चे को बार-बार श्वास की तकलीफ थी। महात्मा गांधी अस्पताल के वरिष्ठ पीडियाट्रिक सर्जन डॉ सिद्धार्थ सिंह राठौड़ ने मरीज के परिजनों को बच्चे के इलाज के लिए ऑपरेशन की आवश्यकता जताई थी। बीमारी में बच्चे के ऑपरेशन के लिए रोबोटिक सर्जरी बहुत फायदेमंद साबित हुई। रोबोटिक सर्जरी से छाती में सूक्ष्म चीरों से ही बच्चे की जटिल सर्जरी करके सफ लता मिली। यदि इसे सामान्यत: किया जाता तो बच्चे के पेट पर एक बड़ा चीरा लगाना होता। ऑपरेशन के बाद बच्चे को दो दिन में ही घर भेज दिया गया, जहां वह अब वह पूर्णत: स्वस्थ है।</p>
<p><strong>बच्चे का संभवत: पहला ऑपरेशन</strong><br />पांच महीने के बच्चे के कंजेनाइटल डाइफ्रामैटिक हर्नियां रोग का रोबोटिक तकनीक से ट्रांस थोरेंसिक डाइफ्रामैटिक रिपेयर किया गया। चिकित्सकों के अनुसार प्रदेश में यह इस तरह का संभवत: पहला ऑपरेशन है। प्रो.सिद्धार्थ सिंह राठौड़ ने बताया कि बच्चे की छाती में बहुत कम जगह होती हैं। फेफड़े के लगातार फूलने एवं दिल के धड़कने से लगातार मूवमेन्ट होता है। इससे सर्जन को बड़ी कठिनाई होती है। इसके लिए रोबोटिक 3डी वीजन जैसे बेहतरीन उपकरण का सहारा लिया जाता है। यह सर्जरी बिना किसी रक्तस्राव और बहुत ही सूक्ष्म 8 मिमी के तीन चीरों द्वारा करने में सफ लता मिली। ऑपरेशन में एनेस्थीसिया विशेषज्ञ डॉ कल्पना, डॉ तन्मय ने महत्वपूर्ण योगदान दिया।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Dec 2024 10:19:52 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>महात्मा गांधी अस्पताल में रोबोट से किया बैरिएट्रिक ऑपरेशन</title>
                                    <description><![CDATA[यह उपलब्धि मेटाबॉलिक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो उन्नत चिकित्सा तकनीकी स्तर को बयां करती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/bariatric-operation-done-with-robot-in-mahatma-gandhi-hospital/article-92476"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2024-10/630400-size-(13)1.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल में अब मोटापा सर्जरी भी रोबोटिक तकनीक से की जा रही है। हाल ही में गैस्ट्रो सर्जन डॉ विनय महला ने 141 किलो वजनी महिला को जिसका बीएमआई 60 से अधिक था बैरिएट्रिक सर्जरी कर राहत दिलाई है।</p>
<p>डॉ महला के ने बताया कि यह सर्जरी 35 वर्षीय महिला  को अधिक बीएमआई के कारण डायबिटीजए हृदय रोग और स्लीप एपनिया जैसी गंभीर समस्याओं का सामना करना पड़ रहा था। रोबोटिक तकनीक के उपयोग से सर्जरी में अधिक सटीकता और कम जटिलताएं सुनिश्चित हुई जिससे मरीज की तेजी से रिकवरी संभव हो सकी। सामान्य सर्जरी की तुलना में रोबोटिक सर्जरी में कम जोखिम होता है और परिणाम बेहतर होते हैं।</p>
<p>यह उपलब्धि मेटाबॉलिक सर्जरी के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर है जो उन्नत चिकित्सा तकनीकी स्तर को बयां करती है। डॉ महला ने बताया कि मेटाबॉलिक सर्जरी मोटापे और उससे जुड़े विकारों जैसे टाइप 2 डायबिटीज, उच्च रक्तचाप, हृदय रोग और स्लीप एपनिया के इलाज में बेहद महत्वपूर्ण है। यह सिर्फ वजन घटाने तक सीमित नहीं है बल्कि मेटाबॉलिक संतुलन को बहाल करने में भी मदद करती है जिससे मरीजों की जीवन गुणवत्ता में सुधार होता है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 07 Oct 2024 12:43:19 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
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                <title>महात्मा गांधी अस्पताल ने एक दिन में 6 स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट कर रोगियों को दी नई जिन्दगी </title>
                                    <description><![CDATA[डॉ. सूरज गोदारा ने बताया कि  यहॉं  कैडेवर, लिविंग डोनर, एबीओ इंकॉम्पिटिबल तथा स्वैप तकनीक से किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/mahatma-gandhi-hospital-gave-new-life-to-patients-by-transplanting-6-swap-kidneys-in-a-day/article-49666"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-06/630-400-size-(7)12.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। सीतापुरा स्थित महात्मा गांधी अस्पताल, जयपुर के किडनी प्रत्यारोपण विशेषज्ञों ने हाल ही में एक दिन में 6 रोगियों में स्वैप किडनी प्रत्यारोपण कर राज्य में इतिहास रचा है। खास बात यह है कि इन सभी रोगियों को उसी ब्लड ग्रुप का मैचिंग डोनर नहीं मिल पा रहा था।  ऐसे में किडनी प्रत्यारोपण नहीं हो पा रहा था। एक अस्पताल में एक दिन में एक साथ छह स्वैप किडनी प्रत्यारोपण करने का देश के चिकित्सा इतिहास में बहुत ही कम उल्लेख मिला है। किडनी ट्रांसप्लांट यूनिट के निदेशक तथा विख्यात यूरोलोजिस्ट प्रो. डॉ. टी सी सदासुखी तथा राजस्थान के जाने-माने गुर्दा रोग विशेषज्ञ व महात्मा गांधी अस्पताल में नेफ्रेलोजी हैड प्रो. डॉ. सूरज गोदारा ने बताया कि डोनर किडनी देने को तैयार हो और ब्लड ग्रुप मैच नहीं हो तो यह बडी निराशाजनक स्थिति होती है। स्वैप किडनी डोनेशन के जरिये रोगियों को उपचारित किया जा रहा है। स्वैप किडनी ट्रांसप्लांट उसी स्थिति में हो सकता है जबकि कई रोगी तथा डोनर्स वेटिंग में हों। महात्मा गांधी अस्पताल में राज्य के सर्वाधिक किडनी प्रत्यारोपण किये गये है। अब यह संख्या 1600 से अधिक हो गई है। हाल ही में किए गए सभी   ऑपरेशन विगत 8 मई,2023 को हुए। इसमें 4 सर्जन्स ने 4 ऑपरेशन थियेटर्स में, सुबह 8 बजे ऑपरेशन शुरू किये थे जो करीब 12 घण्टे चले तथा रात 8 बजे तक पूरे हो सके थे। गहन चिकित्सा इकाई में उन्हें संक्रमणमुक्त वातावरण में रखा गया तथा 10 दिन की रिकवरी के बाद छुट्टी दे दी गई। अभी किये गये फॉलो-अप में सभी रोगी जिनमें किडनी प्रत्यारोपित की गई तथा सभी डोनर्स पूरी तरह ठीक हैं तथा शीघ्र ही वे सामान्य दिनचर्या में लौट आये हैं। <br /><br />डॉ. सूरज गोदारा ने बताया कि  यहॉं  कैडेवर, लिविंग डोनर, एबीओ इंकॉम्पिटिबल तथा स्वैप तकनीक से किडनी ट्रांसप्लांट किए जा रहे हैं।<br />उन्होंने बताया कि पहले मामले में बहरोड निवासी निशांत का ब्लड ग्रुप बी-पॉजीटिव था जबकि उसकी डोनर माता ललता देवी का ब्लड ग्रुप ओ-पॉजिटिव था। एंटीबॉडीज के कारण ट्रांसप्लांट में समस्या आ रही थी। ऐसे में उन्हें स्वैप डोनर सरिता यादव की किडनी लगाई गई।  दूसरे मामले में श्रीगंगानगर निवासी किडनी रोगी रजनी शर्मा का ब्लड ग्रुप एबी-पॉजीटिव था जबकि उनके पति गौरी शंकर का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था। ऐसे में एंटीबॉडीज के कारण उनका किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा था। स्वैप ट्रांसप्लांट के जरिये उन्हें मैचिंग स्वैप डोनर मुन्नी देवी की किडनी लगाई गई। तीसरे मामले में रोगी उषा शाक्य जयपुर की रहने वाली थीं उनका ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था जबकि उनके डोनर रमेश चंद का ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव था। ऐसे में अलग ब्लड ग्रुप के कारण उनका भी किडनी ट्रांसप्लांट नहीं हो पा रहा था। उन्हें स्वैप डोनर ललता देवी मीना की किडनी लगाई गई।चौथे मामले में झुंझुनू निवासी प्रीति सोनी का ब्लड ग्रुप ए-पॉजिटिव था जबकि उनके डोनर उनकी माता मुन्नी देवी का ब्लड ग्रुप बी-पॉजिटिव था। उन्हें स्वैप डोनर रमेश चंद की किडनी प्रत्यारोपित की गई। पॉंचवा केस भी कुछ ऐसा ही था जिसमें डीडवाना निवासी महिपालसिंह का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था जबकि उनकी डोनर माता स्वरूप कंवर का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था। ऐसे में उन्हें स्वैप डोनर गौरीशंकर शर्मा की किडनी लगाई गई। छठे मामले में मैनपुरी, यूपी के रहने वाले दिनेश यादव का ब्लड ग्रुप ए पॉजिटिव था जबकि उनकी डोनर पत्नी सरिता का ब्लड ग्रुप बी पॉजिटिव था। मैचिंग ब्लड ग्रुप नहीं होने की वजह से वे बहुत दिनों से मैचिंग डोनर का इंतजार कर रहे थे। ऐसे में स्वैप डोनेर स्वरूप कंवर की किडनी लगाई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 22 Jun 2023 13:26:07 +0530</pubDate>
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                <title>जोधपुर: 10 साल की बच्ची के पेट से निकाला बालों का गुच्छा </title>
                                    <description><![CDATA[मरीज के परिजनों से बीमारी के बारे में हिस्ट्री लेने पर पता लगा कि मरीज को अपने स्वयं के बाल नोच नोच कर खाने की आदत है, मरीज की इस आदत को छुड़ाने के लिए परिजनों ने काफी जतन किए पर बच्चे की यह आदत छुड़ा नहीं पाए।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jodhpur/jodhpur-a-bunch-of-hair-removed-from-the-stomach-of-a-10-year-old-girl/article-20313"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-08/capture12.jpg" alt=""></a><br /><p>जोधपुर। शहर के महात्मा गांधी अस्पताल में ऑपरेशन के जरिए 10 साल की बालिका के पेट से बालों का गुच्छा निकाला गया। डॉक्टर एसएन मेडिकल कॉलेज के पब्लिक रिलेशन ऑफिसर डॉक्टर जयराम रावतानी ने बताया कि 10 वर्षीय बालिका बार बार उल्टी, भूख नहीं लगने और पेट के ऊपरी हिस्से में गांठ जैसी शिकायत के साथ मथुरादास माथुर अस्पताल में डॉ सुनील दाधीच गैस्ट्रोलॉजिस्ट के पास गया। वहां उन्होंने दूरबीन से एंडोस्कोपी जांच द्वारा पता लगाया कि बालिका ट्राइकोबेज़ोर नामक बीमारी से ग्रसित हैं। डॉ सुनील दाधीच ने एंडोस्कोपी द्वारा इस बाल के गुच्छे को निकालने की कोशिश की पर बड़ा होने के कारण यह निकल नहीं पाया और उन्होंने सर्जरी की सलाह दी। इस पर मरीज के रिश्तेदार सर्जरी करवाने के लिए महात्मा गांधी अस्पताल में डॉक्टर दिनेश दत्त शर्मा की यूनिट में भर्ती हुए।<br /><br />मरीज के परिजनों से बीमारी के बारे में हिस्ट्री लेने पर पता लगा कि मरीज को अपने स्वयं के बाल नोच नोच कर खाने की आदत है, मरीज की इस आदत को छुड़ाने के लिए परिजनों ने काफी जतन किए पर बच्चे की यह आदत छुड़ा नहीं पाए। डॉ दिनेश दत्त शर्मा ने बताया कि मरीज की इस बीमारी को ट्राईकोफेजिया कहते हैं और बाल खाने की आदत की वजह से यह बाल शरीर की आहार नाल में इकट्ठे होना शुरू हो जाते हैं। अमाशय में इकट्ठा होने से जो बालों का गुच्छा बनता है उसको ट्राइकोबेजोर ( Hair Ball) कहा जाता है क्योंकि बाल को पचाने की क्षमता मनुष्य के आहार नाल में नहीं होती है। इस वजह से यह एक जगह इकठ्ठा होकर बालों का गुच्छा बना देते  है। यह बीमारी साधारणतया मानसिक रूप से कमजोर, विक्षिप्त और असामान्य व्यवहार करने वाली महिलाएं जो 15 से 30 साल की उम्र की होती है उनमें होती है, लेकिन इस मरीज में मानसिक कमजोरी या विक्षिप्तता जैसे कोई लक्षण नहीं थे। फिर भी बाल खाने की आदत की वजह से यह बीमारी हुई है।<br />इस बाल के गुच्छे ने अमाशय और छोटी आंत के शुरुआती भाग को पूर्ण रूप से ब्लॉक कर दिया था इस कारण मरीज जो भी खाता वह आंतों में रूकावट के कारण आगे नहीं जा पा रहा था और उससे उल्टियां हो रही थी। सभी जांच कराकर इमरजेंसी ऑपरेशन प्लान किया गया और ऑपरेशन कर इस बाल के गुच्छे को शरीर से बाहर निकाला गया। इस बाल के गुच्छे की लंबाई लगभग 25 इंच और आमाशय वाले हिस्से में यह आमाशय का आकार लेते हुए लगभग 12 इंच गुना 5 इंच साइज का था।<br /> ऑपरेशन करने वाली टीम में डॉ. दिनेश दत्त शर्मा के साथ डॉ.यदुनाथ एवं डॉ. सुनील मीणा थे और एनेस्थीसिया टीम में डॉ. फतेह सिंह भाटी, डॉ. भरत चौधरी एवं डॉ. रश्मि स्याल थे। नर्सिंग स्टाफ में अरविंद अपूर्वा  रेखा सोलंकी, ज्योती, आदि का भी योगदान रहा। मरीज का यह ऑपरेशन महात्मा गांधी अस्पताल में पूर्णतया निशुल्क किया गया है। डॉ.दिलीप कच्छावा, प्रिंसिपल एवं कंट्रोलर एस.एन मेडिकल कॉलेज एवं डॉ. राजश्री बेहरा अधीक्षक महात्मा गांधी अस्पताल ने ऑपरेशन करने वाली टीम को बधाई दी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>Top-News</category>
                                            <category>जोधपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 24 Aug 2022 19:02:40 +0530</pubDate>
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