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                <title>traders - Dainik Navajyoti Rising Rajasthan</title>
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                            <item>
                <title>सुरेश पाटोदिया बने  कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स के उपाध्यक्ष,  उनके अनुभव और नेतृत्व से संगठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान के वरिष्ठ व्यापारी नेता सुरेश पाटोदिया को कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (CAIT) का राष्ट्रीय उपाध्यक्ष (2026-2028) निर्वाचित किया गया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने उनके नेतृत्व और व्यापारियों के प्रति समर्पण की सराहना की। पाटोदिया की यह नियुक्ति व्यापारिक जगत में राजस्थान के बढ़ते प्रभाव और मजबूत नेतृत्व का प्रमाण है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/suresh-patodiya-becomes-national-vice-president-of-cat/article-151496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/cait.png" alt=""></a><br /><p>जयपुर। प्रमुख व्यापारिक संगठन कन्फेडरेशन ऑफ ऑल इंडिया ट्रेडर्स (कैट) के वार्षिक आमसभा में राजस्थान के वरिष्ठ व्यापारी नेता सुरेश पाटोदिया को वर्ष 2026-2028 के लिए राष्ट्रीय उपाध्यक्ष निर्वाचित किया गया है। कैट के राष्ट्रीय अध्यक्ष बी.सी. भरतिया ने उन्हें पत्र लिखकर हार्दिक बधाई दी और कहा कि यह पद उनके समर्पण, नेतृत्व क्षमता और व्यापारियों के हित में किए गए उल्लेखनीय कार्यों का परिणाम है। पाटोदिया लंबे समय से व्यापारिक संगठनों में सक्रिय भूमिका निभाते रहे हैं और उन्होंने विभिन्न मंचों पर व्यापारियों की समस्याओं को मजबूती से उठाया है। उनके अनुभव और नेतृत्व से संगठन को नई दिशा मिलने की उम्मीद जताई जा रही है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बिजनेस</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 23 Apr 2026 17:35:39 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur NM]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>असर खबर का.... मिली सौगात: भामाशाह मंडी विस्तार का रास्ता हुआ साफ, 96 हैक्टेयर में विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की मंजूरी</title>
                                    <description><![CDATA[एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को  परेशानियां आ रही थी।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-impact-of-reporting----a-welcome-boon--path-cleared-for-bhamashah-mandi-expansion--national-board-for-wildlife-approves-expansion-across-96-hectares/article-147031"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)37.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। देश की सबसे बड़ी कृषि उपज मंडियों में शामिल भामाशाह कृषि उपज मंडी के विस्तार को मंजूरी मिल गई है। वर्षों से लंबित मंडी के विस्तार को राष्ट्रीय वन्यजीव बोर्ड की 89वीं स्थायी समिति की बैठक में महत्वपूर्ण मंजूरी मिलने के बाद पूरे क्षेत्र में हर्ष की लहर है। लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला के निरन्तर प्रयासों से मिली सफलता से हाड़ौती क्षेत्र के किसानों, व्यापारियों और कृषि अर्थव्यवस्था को नई मजबूती मिलेगी। भामाशाह मंडी के विस्तार से भंडारण, विपणन और परिवहन सुविधाएं बेहतर होंगी। इससे किसानों को अपनी उपज का बेहतर मूल्य मिलेगा और व्यापारियों को आधुनिक ढांचा उपलब्ध होगा।</p>
<p><strong>जाम और लम्बे इंतजार से मिलेगी निजात</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। इसके साथ ही आवक के मुकाबले मंडी में पर्याप्त शेड नहीं होने से बारिश के समय किसानों की उपज खराब होने का खतरा रहता है। विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी, राष्ट्रीय राजमार्ग 27 से भी मंडी सीधी जुड़ जाएगी, इससे जाम की समस्या से भी निजात मिलेगी और किसानों को उपज बेचने के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा।</p>
<p><strong>अरसे से अटका था मामला</strong></p>
<p>मंडी से जुड़े वन भूमि के कारण विस्तार का मामला वर्षो से लम्बित था। विस्तार की स्वीकृति मिली तो फिर वन क्षेत्र से गुजर रहे राजमार्ग के किनारे एक किमी तक पौधारोपण से जुड़े नियमों के कारण विस्तार फिर से अटक गया। दिल्ली में स्पीकर बिरला और केन्द्रीय मंत्री भूपेन्द्र यादव के बीच हुई बैठकों के बाद नियम में शिथिलता के लिए सेंट्रल एंपावर्ड कमेटी (सीईसी) में आवेदन किया गया था। इसके बाद समिति द्वारा वर्ष 2007 में कोटा बाइपास निर्माण के दौरान निर्धारित ग्रीन बेल्ट से जुड़ी शर्तों में संशोधन कर स्वीकृति दे दी गई है, जिससे लगभग 96 हेक्टेयर क्षेत्र के लिए लैंड डायवर्जन का मार्ग प्रशस्त हो गया है।</p>
<p><strong>नवज्योति ने प्रमुखता से उठाया था मामला</strong></p>
<p>एशिया की सबसे बड़ी भामाशाहमंडी का परिसर छोटा पड़ने से किसानों और व्यापारियों को आ रही परेशानियों के सम्बंध में दैनिक नवज्योति में प्रमुखता से समाचार प्रकाशित किए गए थे। इसमें बताया था कि सीजन में मंडी अनाज से ठसाठस भर जाती है। मंडी गेट से दो-तीन किलोमीटर लम्बी अनाज से भरी ट्रैक्टर-ट्रॉलियों की कतार लग जाती है। काफी समय से मंडी के विस्तार की दरकार है। भामाशाहमंडी में खरीफ व रबी सीजन के पीक टाइम में रोजाना 2 लाख से 5 लाख बोरी कृषि जिंसों की आवक होती है। मंडी में राजस्थान ही नहीं देश के कई राज्यों से यहां अनाज आ रहा है। ऐसे में मंडी छोटी पड़ने के साथ ही मंडी प्रशासन की व्यवस्थाएं भी अब छोटी हो चुकी हैं। यार्ड फुल होने के बाद अब खुले में व सड़कों पर नीलामी करनी पड़ रही है।</p>
<p>भामाशाह मंडी का विस्तार हाड़ौती क्षेत्र के किसानों के भविष्य को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है। मंडी के विस्तार से किसानों को सुविधा के साथ व्यापार सुगम होगा साथ ही क्षेत्र की कृषि आधारित अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी। आने वाले वर्षों में कोटा की भामाशाह मंडी देश की सबसे आधुनिक कृषि मंडियों में शामिल होगी और हाड़ौती के लाखों किसानों को इसका सीधा लाभ मिलेगा।</p>
<p><strong>- ओम बिरला, अध्यक्ष लोकसभा</strong></p>
<p>भामाशाह मंडी को विस्तार मिलने के बाद अब इसकी सुविधाओं में भी इजाफा होगा। जिसके चलते अब इसके टर्नओवर में करीब दो से तीन गुना वृद्धि होगी। वहीं अब मंडी एयरकनेक्टिीविटी से जुड़ने के साथ ही एटलेन व फोरलेन से सीधे जुड़ेगी। वहीं मंडी परिसर में रेल्वे ट्रैक का निर्माण होगा। जिससे अब माल का लदान यही से होगा। 20 टन के कांटे लगाने की योजना हैं जिससे लेबर लेस तुलाई होगी।</p>
<p><strong>-महेश खंडेलवाल, महामंत्री भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>मंडी का विस्तार होने से जो सीजन के समय पर कतारें लगती थी। वह अब खत्म होगी। किसान दो से तीन दिन तक इंतजार करते थे। अब वह इंतजार खत्म होगा। साथ ही किसानों के माल की तुरंत नीलामी होगी। जिससे अब किसानों को नीलामी के लिए इंतजार नहीं करना पड़ेगा। मंडी का विस्तार होने से विभिन्न सुविधाओं का विस्तार होगा।</p>
<p><strong>-मनोज मीणा, सचिव, भामाशाह मंडी कोटा</strong></p>
<p>भामाशाहमंडी में हाड़ौती के साथ मध्यप्रदेश से जुड़े क्षेत्रों से भी किसान उपज बेचने के लिए आते है। सीजन के दौरान मंडी में प्रवेश के लिए वाहनों की लम्बी कतारें लगने से किसानों को इंतजार के साथ परेशानी झेलनी पड़ती है। अब विस्तार के साथ ही मंडी में कारोबार में कई गुना की वृद्धि होगी।</p>
<p><strong>-जगदीश कुमार, किसान नेता</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 19 Mar 2026 14:09:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>आम राजा अल्फांसो अप्रैल में देगा दस्तक, महाराष्ट्र के देवगढ़ और रत्नागिरी से होगी आवक</title>
                                    <description><![CDATA[खास खुशबू, स्वाद व गुणवत्ता के कारण विशेष पहचान ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the--king-of-mangoes-%E2%80%94alphonso%E2%80%94set-to-arrive-in-april/article-146496"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। आम प्रेमियों के लिए अच्छी खबर यह है कि गर्मी के मौसम के साथ ही आम की बहार शुरू होने वाली है। आम का राजा कहे जाने वाला अल्फांसो आम अप्रैल के दूसरे पखवाड़े में कोटा के बाजारों में पहुंचने लगेगा। व्यापारियों के अनुसार महाराष्ट्र के देवगढ़ और रत्नागिरी क्षेत्र से इसकी पहली खेप करीब 15 अप्रैल से कोटा में आने की संभावना है। फल कारोबारियों का कहना है कि अल्फांसो आम अपनी खास खुशबू, गहरे स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में काफी पसंद किया जाता है। यही वजह है कि इसे आम का राजा कहा जाता है। बाजार में इसकी कीमत भी अन्य आमों की तुलना में अधिक रहती है। </p>
<p><strong>भाव 300 रुपए प्रति किलो तक </strong><br />फल व्यापारियों के मुताबिक हर साल गर्मी के मौसम में अल्फांसो आम की मांग काफी बढ़ जाती है। खासकर बड़े होटल व रेस्टोरेंट में ग्राहक इसकी खास तौर पर डिमांड करते हैं। ऐसे में अप्रैल के मध्य से कोटा के बाजारों में इसकी खुशबू और मिठास आम प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती नजर आएगी। कोटा की फल मंडी में अल्फांसो आम की थोक कीमत करीब 200 से 250 रुपए प्रति किलो रहने का अनुमान है, जबकि खुदरा बाजार में यह करीब 300 रुपए प्रति किलो तक बिक सकता है। शुरूआती दिनों में इसकी आवक कम होने के कारण दाम कुछ ज्यादा रहने की संभावना है, लेकिन आवक बढ़ने के साथ कीमतों में थोड़ी नरमी भी आ सकती है।</p>
<p><strong>अल्फांसो आम की खासियत</strong><br /><strong>- विशिष्ट भौगोलिक स्थान और स्वाद:</strong> यह आम केवल विशेष मिट्टी और समुद्र तटीय जलवायु में ही बेहतरीन स्वाद के साथ विकसित होता है।<br /><strong>- विशेष सुगंध: </strong> यह आम अपनी अद्वितीय मिठास, मखमली बनावट और विशेष सुगंध से पहचाना जाता है।<br /><strong>- सीमित उत्पादन:</strong> मांग की तुलना में इसकी पैदावार कम होती है, जिससे कमी बनी रहती है।<br /><strong>- श्रमसाध्य खेती: </strong>इसकी खेती में बहुत अधिक देखभाल, हाथ से कटाई, और प्राकृतिक रूप से पकाने की प्रक्रिया शामिल है, जिससे लागत बढ़ती है।<br /><strong>- कम मौसम:</strong> यह आम बहुत ही कम समय के लिए बाजार में उपलब्ध होता है। इस कारण कीमत भी अधिक रहती है।<br /><strong>- उच्च मांग:</strong> देश-विदेश में, विशेषकर लंदन और अमेरिका में इसकी बहुत मांग है, जिससे इसके प्रीमियम दाम मिलते हैं।</p>
<p><strong>सबसे पहले बादाम का मिलेगा स्वाद</strong><br />कोटा के फल बाजारों में अप्रैल माह की शुरुआत में बादाम आम की आवक शुरू हो जाएगी। यह आम मुख्य रूप से तेलंगाना और आंध्र प्रदेश से कोटा की मंडियों में पहुंचेगा। इसके आते ही आम प्रेमियों को गर्मियों की शुरूआत में ही आम का स्वाद चखने का मौका मिलेगा। फल व्यापारियों के अनुसार शुरूआती दौर में बादाम आम की आवक सीमित रहेगी, लेकिन जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, इसकी मात्रा भी बढ़ने लगेगी। बादाम आम अपने मधुर स्वाद और मुलायम गूदे के कारण लोगों के बीच काफी लोकप्रिय माना जाता है।</p>
<p><strong>मई में रहेगी दशहरी व लंगड़ा की धूम</strong><br />मई के महीने में उत्तर प्रदेश से दशहरी और लंगड़ा आम की आवक भी शुरू हो जाएगी। इन दोनों किस्मों के आमों की बाजार में अच्छी मांग रहती है। खासकर दशहरी आम अपनी मिठास और खुशबू के कारण लोगों की पहली पसंद माना जाता है, वहीं लंगड़ा आम भी अपने अलग स्वाद के कारण खास पहचान रखता है। फल व्यापारियों का कहना है कि इस साल मौसम अनुकूल रहने से आम की फसल अच्छी होने की उम्मीद है। ऐसे में आने वाले दिनों में कोटा के बाजारों में अलग-अलग किस्म के आमों की बहार देखने को मिलेगी और आम प्रेमियों को विविध स्वाद का आनंद मिलेगा।</p>
<p>अल्फांसो आम अपनी खास खुशबू, गहरे स्वाद और बेहतरीन गुणवत्ता के कारण देश-विदेश में काफी पसंद किया जाता है। यही वजह है कि इसे आम का राजा कहा जाता है। बाजार में इसकी कीमत भी अन्य आमों की तुलना में अधिक रहती है।<br /><strong>- विजय चंदानी, थोक फल व्यापारी, थोक फलसब्जी मंडी कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the--king-of-mangoes-%E2%80%94alphonso%E2%80%94set-to-arrive-in-april/article-146496</link>
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                <pubDate>Sat, 14 Mar 2026 14:48:05 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[kota]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>इन्द्रगढ़ में स्थाई बस स्टैंड की कमी, यात्री, राहगीर और व्यापारी होते हैं प्रतिदिन परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[कई बसों के मुख्य सड़क पर खड़े होने से दिनभर जाम लगा रहता है। 
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-lack-of-a-permanent-bus-stand-in-indragarh-causes-daily-inconvenience-to-passengers--pedestrians--and-traders/article-132945"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-11/11-(700-x-400-px)-(2)2.png" alt=""></a><br /><p>इन्द्रगढ़। जिले का महत्वपूर्ण कस्बा इन्द्रगढ़ आज भी स्थाई बस स्टैंड के अभाव से जूझ रहा है। यहां से प्रतिदिन कोटा, बूंदी, बारां, टोंक, सवाई माधोपुर, अलवर, धौलपुर सहित कई जिलों के लिए रोडवेज व प्राइवेट बसों का निरंतर आवागमन होता है। इसके अलावा श्री बिजासन माता, कमलेश्वर महादेव और सहस्त्रफणी पार्श्वनाथ अतिशय तीर्थ होने से प्रतिदिन सैकड़ों श्रद्धालु यहां से होकर गुजरते हैं। बढ़ती बसों की आवाजाही के बीच निर्धारित बस स्टैंड न होने से यात्रियों को भारी परेशानी उठानी पड़ रही है। स्थाई व्यवस्था न होने के कारण अलग-अलग स्थानों पर बसें खड़ी होती हैं। कोटा जाने वाली बसें चुंगी नाका पर पेट्रोल पंप के सामने, बूंदी जाने वाली बसें पंडित दीनदयाल उपाध्याय सर्किल के पास, जबकि जयपुर, टोंक, अलवर, दिल्ली व धौलपुर मार्ग की बसें श्रीराम चौराहे पर नहर किनारे मुख्य सड़क पर खड़ी रहती हैं। </p>
<p>इसी प्रकार सवाई माधोपुर, नैनवा, देई, उनियारा मार्ग की प्राइवेट बसें गौण मंडी स्थित अस्थाई बस स्टैंड और मुक्ति धाम तिराहे पर रुकती हैं। कई बसें सीधे मुख्य सड़क पर ही खड़ी हो जाती हैं, जिससे दिनभर जाम की स्थिति बनी रहती है। बसों के पास ही रिक्शा, आॅटो और टेम्पो चालक यात्रियों की प्रतीक्षा में वाहन खड़े कर देते हैं, जिससे अव्यवस्था और बढ़ जाती है। इसका सीधा असर राहगीरों, आमजन और व्यापारियों पर पड़ता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि इन्द्रगढ़ में स्थाई बस स्टैंड का निर्माण हो जाए तो न केवल जाम की समस्या समाप्त होगी बल्कि यात्रियों को सुरक्षित व सुव्यवस्थित सुविधा भी मिल सकेगी। इसके लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता बताई जा रही है।</p>
<p>बस स्टैंड एक आधारभूत सुविधा है इन्द्रगढ़ मे स्थाई बस स्टैंड नहीं होना गंभीर समस्या है जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता हैं साथ ही बार बार ट्रैफिक जाम की समस्या उत्पन्न होती है व दुर्घटनाओं का अंदेशा बना रहता है <br /><strong>- बृज भूषण शर्मा,अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका इन्द्रगढ़। </strong></p>
<p>अगर स्थाई बस स्टैंड बने तो यात्रियों के साथ साथ व्यापारियों को भी राहत मिलेगी क्योंकि विभिन्न स्थानों पर दुकानों के आगे बसे खड़ी होने से व्यापार भी प्रभावित होता है जिससे व्यापारियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है<br /><strong>- तनिष्क गर्ग, अध्यक्ष किराना व्यापार संघ इन्द्रगढ़ </strong></p>
<p>स्थाई बस स्टैंड के लिए पूर्व में भी प्रयास किया गया था परन्तु अब बस स्टैंड के लिए सभी को एक साथ सामूहिक प्रयास करना चाहिए बस स्टैंड बनने से यात्रियों को भी सुविधा होगी साथ ही व्यापार मे भी बढ़ोतरी होगी <br /><strong>- सन्मति जैन हरकारा, पूर्व नगर कांग्रेस अध्यक्ष, इन्द्रगढ़।</strong></p>
<p>इन्द्रगढ़ मे स्थाई बस के लिए प्रस्ताव बना कर जल्द ही भाजपा का एक प्रतिनिधि मंडल राजस्थान सरकार के परिवहन मंत्री से मिलेगा एवं क्षेत्रीय सांसद व लोकसभा अध्यक्ष ओम जी बिरला को भी इससे अवगत कराया जाएगा एवं स्थाई बस बनाने के लिए हर संभव प्रयास किया जाएगा<br /><strong>- गिरिराज जैन (गिरु), अध्यक्ष भाजपा शहर मंडल इन्द्रगढ़ </strong></p>
<p>इन्द्रगढ़ मे बस स्टैंड की मांग काफी पुरानी है नगर पालिका स्तर पर भी स्थाई बस स्टैंड बनाने की मांग की जाएगी इन्द्रगढ़ मे बस स्टैंड बनाने के लिए नगर पालिका की ओर से पूरी मदद की जाएगी<br /><strong>- नीलम भारती, चेयरमैन नगर पालिका इन्द्रगढ़ </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/the-lack-of-a-permanent-bus-stand-in-indragarh-causes-daily-inconvenience-to-passengers--pedestrians--and-traders/article-132945</link>
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                <pubDate>Wed, 19 Nov 2025 16:37:12 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>दिवाली दे गई शहर को 3 हजार करोड़ का बूस्टर डोज, सोना-चांदी के दाम में बढ़ोतरी होने के बावजूद हुई जमकर खरीदारी</title>
                                    <description><![CDATA[इस बार शहरवासियों को जीएसटी कम होने का भरपूर फायदा हुआ ।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/diwali-gave-the-city-a-boost-of-3000-crore-rupees--despite-the-rise-in-gold-and-silver-prices--there-was-extensive-shopping/article-130435"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-10/11131.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर में दीपोत्सव पर्व पर सुबह से लेकर शाम तक मार्केट में अच्छी पहल होने व खरीदारी के चलते शहर में अच्छा -खासा  करोबार हुआ। जिसके दुकानदारों ने बताया कि इस बार अच्छी बारिश होने के चलते पिछले साल की अपेक्षा कारोबार में अच्छी बढ़ोतरी हुई। दीपोत्सव पर्व पर करीब शहर में अनुमानित तीन हजार करोड़ का कारोबार हुआ। जिसके चलते दुकानदारों के चेहरों खुशी लौटी। व्यपार के महासचिव अशोक माहेश्वरी ने बताया कि इस बार अच्छी फसले होने से करीब 3000 हजार का कारोबार हुआ। वहीं दीपावली से पहले मंदी की मार झेल रहे मार्केट में दीपावली से बूस्टर डोज मिला। </p>
<p><strong>90 से 100 का करोबार धन बरसा  सर्राफा बाजार में </strong><br />स्वर्ण रजत बड़ा सर्राफा बाजार अध्यक्ष रमेश कुमार सोनी ने बताया कि इस बार सोना-चांदी के दाम में बढ़ोतरी होने के बावजूद शहरवासियों समेत आसपास के ग्रामीणों ने जमकर खरीदारी की। जिसमें इस बार शहर के सरार्फा बाजार, रामपुरा बाजार, चौथमाता सर्राफा बाजार में लोगों ने  सोने-चांदी के सिक्के, चांदी की मूर्तियां, चांदी की हनुमान चालीसा रिद्धि-सिद्धि के साथ गणेश जी, इसके अलावा चांदी के गिलास, कटोरी और अन्य आयटम की डिमांड रही। ज्वैलर व केडेबरी सोने समेत अन्य सोने चांदी के सामानों की जमकर खरीदारी की। जिसके चलते बाजार में धनतेरस से भाईदूज तक करीब 100 करोड का कारोबार हुआ। </p>
<p><strong>फर्नीचर मार्केट में 45 करोड़ का कारोबार</strong><br />फर्नीचर मार्केट के अध्यक्ष इलियास अंसारी ने बताया कि धनतेरस से शुरू हुआ दीपोत्सव पर्व पर फर्नीचर मार्केट में करीब 45 करोड़ का कारोबार हुआ। वहीं इसके बाद अब नवंबर में शादियों का सीजन आने के कारण अभी और इसमे  बढ़ोतरी होने की उम्मीद है। </p>
<p><strong>वाहन बाजार में बरसा एक हजार करोड़ का धन</strong><br />दीपोत्सव पर नई गाड़ी की खरीदारी करना शुभ माना जाता है। वहीं इस बार वाहनों पर जीएसटी 28 से 18 प्रतिशत होने पर वाहनों के भावों में गिरावट आई है। शहर के सभी आॅटोमोबाइल शोरूम दीपोत्सप पर्व पर ग्राहकों की दिनभर भीड़ रही। वहीं इस बार दीपोत्सव पर्व पर जीएसटी कम होने के चलते शहरवासियों ने वाहनों की जमकर खरीदारी की। वहीं टू व्हीलर व फोर वहीलर की कई कंपनियों ने दीपोत्सव पर्व पर ग्राहकों को आकर्षित करने के लिए विभिन्न प्रकार की स्कीम्स ग्राहकों को दी। शोरूम संचालकों ने बताया कि इस जीएसटी कम होने से करीब 500 करोड़ से अधिक का कारोबार सिर्फ आॅटोमोबाइल सेक्टर में हुआ। टू व्हीलर कंपनी के मैनेजर विक्रमसिंह ने बतया कि इस बार हमारे शोरूम पर पिछले साल की हमारे शोरूम पर करीब 430 गड़ियों की डिलेवरी हुई थी। वहीं इस बार करीब 600-630 गड़ियों की डिलेवरी हुई। वहीं ईवी स्कूटर कंपनी के मैनेजर नीरज कुमार ने बताया कि इस बार शहरवासियों ने जीएसटी कम होने का भरपूर फायदा हुआ और दीपोत्सव पर करीब शोरूम 150 से अधिक ईवी वाहन बिके। फोर व्हीलर कंपनी के मैनेजर प्रदीप कुमार ने बताया कि इस बार धनतेरस से पहले मंगल पुष्य नक्षत्र होने व भाईदूज पर आयुष्मान योग होने के चलते शोरूम पर दीपोत्सप पर्व पर करीब 150-250 गाड़ियों की ब्रिकी हुई। वहीं हमारे फोर व्हीलर ईवी शोरूम पर करीब 250-300 गड़ियों की डिलेवरी हुई। वहीं इस बार करीब आॅटोमोबाइल्स मार्केट में करीब 1000 हजार करोड़ का कारोबार हुआ होगा। </p>
<p><strong>रेडिमेड गारमेंट्स व कपड़ा बाजार में 70 करोड़ का कारोबार</strong><br />शहर में विभिन्न जगहों पर लगी दो सौ से अधिक कपड़े की दुकानों पर दीपावली पर करीब 80 करोड़ का कारोबार हुआ। महावीर नगर प्रथम में कपड़े की दुकान लगाने वाले लविश कुमार ने बताया कि हमारी दुकान पर पिछले करीब दीपावली पर अच्छी खासी ग्राहकी हुई थी। वहीं इस बार दुकान पर धनतेरस से ही ग्राहकों की आवाजाही बनी रही। रामपुरा में कपडेÞ की दुकान चलाने वाले दीपक कुमार ने बताया कि इस बार पिछले साल की अपेक्षा अच्छी फसल होने के चलते दुकानों पर दिनभर कपड़े खरीदने वालों की भीड़ रही। वहीं गुरूवार को भाईदूज होने के चलते भी कुछ लोग कपड़े खरीदने पहुंचे। </p>
<p><strong>किराना बाजार में जमकर हुई खरीदारी</strong><br />शहर के अग्रसेन बाजार व पुरानी सब्जीमंडी सहित अन्य किराना बाजार में दीपोत्सव पर्व पर शहरवासियों ने जमकर किराना सामानों की खरीदारी की। किराना बाजार सचिव पवन दुआ ने बताया कि इस बार शहर में करीब 600-700 करोड़ का कारोबार हुआ। </p>
<p><strong>अन्य बाजारों में 200 करोड़ का बरसा धन </strong><br />शहर के अन्य बाजारों में करीब 200 करोड़ का करोबार हुआ। जिसमें श्रृंगार प्रसाधन, ब्लॉथ मार्केट, जूते व सजावट के समान, मेकअप, पूजन सामाग्री और मिठाई, कार सजावट बाजार सहित अन्य मार्केट सम्मलित है। </p>
<p><strong>इलेक्ट्रॉनिक्स बाजार में 80 करोड़ का मिला बूस्टर डोज</strong><br />धनतेरस से शुरू हुआ दीपोत्सव पर्व की पर शहरवासियों ने इस बार  इलेक्ट्रॉनिक्स सामानों की जमकर खरीदारी की। इलेक्ट्रॉनिक्स व्यवसायी मनोज कुमार व जयपाल ने बताया कि इस बार दिवाली पर घरेलू चक्की, डबल डोर फ्रीज, वाशिंग मशीन, एलईडी सहित अन्य सामानों की उम्मीद से अधिक बिक्री हुई। जिसे करीब दीपोत्सव पर्व पर करीब 80-90 करोड़ का कारोबार हुआ। </p>
<p><strong>आतिशबाजी बाजार में करीब 800 करोड़ का कारोबार </strong><br />शहर में विभिन्न जगहों पर करीब बारह सौ से अधिक लगाने वाली दुकानों पर शहरवासियों ने जमकर आतिशबाजी खरीदारी की। आतिशबाजी की दुकान लगाने वाले दीपक कुमार नेबताया कि पिछले साल की अपेक्षा आतिशबाजी की रेट में कुछ इजाफा हुआ पर इस का कोई असर मार्केट में नहीं दिख रहा। वहीं इस बार पिछले साल की अपेक्षा हमारी दुकान पर करीब दो से तीन लाख तक की आतिशबाजी की ब्रिकी हुई।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 24 Oct 2025 15:30:16 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>दशहरा मेले में इस बार नहीं लगेगा महंगाई का तड़का, खाद्य पदार्थ और झूलों की नहीं बढ़ेगी रेट</title>
                                    <description><![CDATA[मेला समिति ने दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया है गत वर्ष के समान ही दुकानों का किराया लिया गया है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-dussehra-fair-will-not-be-affected-by-inflation-this-time--food-prices-and-swings-will-not-increase/article-127868"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(1)29.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक ओर जहां महंगाई लगातार बढ़ रही है। वहीं उसका असर इस बार दशहरे मेले में नहीं दिखाई देगा। दशहरा मेले में महंगाई का तड़का नहीं लगेगा। विशेष रूप से खाद्य पदार्थ और झूलों पर। दशहरा मेले का विधिवत शुभारम्भ तो दो दिन पहले नवरात्र के दिन से हो गया है लेकिन अभी तक भी मेले में पूरी दुकानें नहीं लग पाई है। बाहर से आने वाले दुकानदार अभी तक बहुत कम संख्या में आए। हालांकि स्थानीय व्यापारी व दुकानदारों द्वारा अपने हिसाब से दुकानें तैयार की जा रही है। जिससे खाने-पीने की दुकानों के साथ ही झूले ही लग पाए हैं।  दशहरा मैदान के फेज एक में झूला मार्केट से लेकर मैदान में अन्य निर्धारित स्थानों पर हर साल लगने वाले परम्परागत झूले लग रहे है। वहीं नसीराबाद का कचौड़ा, पकौड़ी व सोफ्टी और फास्ड फूड की दुकानें लगना शुरु हो गई है।  दुकानदारों का कहना है कि इस बार मेले में खाद्य पदार्थ व झूलों की रेट नहीं बढ़ाई गई है। खाद्य पदार्थ के दुकानदार सुनील वैष्णव ने बताया कि नसीराबाद का कचौड़ा व गोभी के पकौड़े, गुलाब जामुन व अन्य खाद्य पदार्थों की कीमत इस बार भी वही है जो गत वर्ष थी।  सोफ्टी के  दुकानदार प्रमोद लोधा का कहना है कि मेला समिति ने दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया है। गत वर्ष के समान ही इस बार भी दुकानों का किराया लिया गया है। इस कारण से सोफ्टी की दरों में भी बढ़ोतरी नहीं की गई है। जिससे 30 से 50 रुपए के बीच ही सोफ्टी की रेट है। हालांकि कई दुकानदार 20 रुपए में भी बेचते हैं।  वहीं झूला संचालक जाकिर हुसैन ने बताया कि मेले में जहां परम्परागत रूप से जो झूले आते हैं उनकी संख्या पहले से भी अधिक हो गई है। करीब 60 से ज्यादा झूले लगेंगे। ऐसे में इस बार भी झूलों की रेट नहीं बढ़ाई गई है। जितनी रेट गत वर्ष थी उतनी ही रखी गई है। 30-40 रुपए से लेकर 80 रुपए तक ही रेट है। </p>
<p><strong>नए झृूलों की रेट अधिक है</strong><br />वहीं मेला समिति के अध्यक्ष विवेक राजवंशी ने बताया कि मेला समिति की ओर से इस बार मेले में आवंटित दुकानों का किराया नहीं बढ़ाया गया है। इसका मकसद मेले में आने वाले व्यापारियों के साथ ही आमजन पर आर्थिक भार नहीं बढ़ाना है। इस बार भी झूला संचालकों से पुरानी दर पर ही झूले संचालित करने को कहा गया है।  उन्होंने बताया कि इस बार मेले में कई नए व आकर्षक झूले भी लगेंगे जो पहली बार आएंगे। ये झूले बड़े होने से इनकी रेट सामान्य झूलों से कुछ अधिक है।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 14:51:59 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>हाड़ौती बने सोया हब तो किसानों की बदले तकदीर, सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट व मार्केट की दरकार </title>
                                    <description><![CDATA[सोयाबीन से बने उत्पादों जैसे सोया दूध, टोफू, सोया आटा और पशु आहार की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और बिक्री की व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसानों की तकदीर बदल सकती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/if-hadoti-becomes-a-soy-hub--the-fortunes-of-farmers-could-change--soybean-processing-units-and-markets-are-needed/article-127688"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/111-(2)1.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती क्षेत्र सोयाबीन उत्पादन के लिए पूरे देश में पहचान बना चुका है। हर साल यहां लाखों टन सोयाबीन का उत्पादन होता है, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत का उचित मूल्य नहीं मिल पाता। इस बार भी बंपर उत्पादन के बावजूद किसान औने-पौने दाम पर अपनी उपज बेचने को मजबूर हैं। कृषि विशेषज्ञों और उद्यमियों का मानना है कि किसानों को इस स्थिति से उबारने के लिए अब हाड़ौती में सोयाबीन आधारित इंडस्ट्री स्थापित करना और स्थानीय स्तर पर मजबूत मार्केटिंग की व्यवस्था करना बेहद जरूरी हो गया है। यदि सोयाबीन से बने उत्पादों जैसे सोया दूध, टोफू, सोया आटा और पशु आहार की स्थानीय स्तर पर प्रोसेसिंग और बिक्री की व्यवस्था हो जाए तो यहां के किसानों की तकदीर बदल सकती है। अब हाड़ौती को सोया हब बनाने की जरूरत है।</p>
<p><strong>खेती से सीधे जुड़ेगा आय का साधन:</strong> कृषि वैज्ञानिकों के अनुसार, सोया प्रसंस्करण को खेती के साथ आसानी से जोड़ा जा सकता है। किसान स्वयं या सहकारी समितियों के माध्यम से छोटे स्तर पर सोया दूध, टोफू और अन्य उत्पाद तैयार कर सकते हैं। इससे उन्हें कच्चे माल के बजाय तैयार उत्पाद बेचने का अवसर मिलेगा, जिससे लाभ कई गुना बढ़ सकता है। हाड़ौती में सोया आधारित लघु उद्योगों की स्थापना से न केवल किसानों को बेहतर मूल्य मिलेगा, बल्कि क्षेत्रीय युवाओं को रोजगार भी मिलेगा। एक अनुमान के अनुसार, एक मध्यम आकार की टोफू यूनिट प्रतिदिन 500 लीटर सोया दूध प्रोसेस कर सकती है, जिससे 50-60 किलो टोफू तैयार होता है। बाजार में इसकी कीमत 200-300 रुपए प्रति किलो तक होती है।</p>
<p><strong>बाजार और ब्रांडिंग की जरूरत</strong><br />प्रगतिशील किसान लक्ष्मीचंद नागर व प्रमुख व्यापारी भूपेन्द्र कुमार का कहना है कि सोया उत्पादों की बिक्री के लिए स्थानीय और आॅनलाइन बाजार की व्यवस्था आवश्यक है। किसान उत्पादक कंपनियां और सहकारी समितियां मिलकर ब्रांडिंग और पैकेजिंग कर सकती हैं। इससे उत्पादों को बेहतर पहचान मिलेगी और उपभोक्ताओं तक सीधे पहुंच बन सकेगी। हाड़ौती में सोयाबीन प्रोसेसिंग यूनिट्स की अपार संभावना है। छोटी यूनिट्स 2-5 करोड़ रुपए की लागत से लग सकती हैं। इसके लिए सरकार को निवेशकों को रियायती जमीन, सस्ती बिजली और बैंक लोन की सुविधा देनी होगी। उन्होंने कहा कि यूनिट्स लगाने से मंडियों पर दबाव कम होगा और किसानों को सीधे फैक्ट्री रेट मिलेगा।</p>
<p><strong>बम्पर उत्पादन फिर भी किसानों को घाटा</strong><br />हाड़ौती में सोयाबीन का उत्पादन हर साल रिकॉर्ड स्तर पर होता है, लेकिन किसानों को उनकी मेहनत का लाभ नहीं मिल पाता। विशेषज्ञों, व्यापारियों और किसानों की राय एक ही दिशा में इशारा कर रही है कि यदि स्थानीय स्तर पर इंडस्ट्री और मार्केट उपलब्ध कराए जाएं तो हाड़ौती देश का सबसे बड़ा सोयाबीन प्रोसेसिंग हब बन सकता है और किसानों की आय दोगुनी हो सकती है। यहां हर साल यहां लाखों हैक्टेयर में सोयाबीन बोई जाती है और उत्पादन भी लाखों टन तक पहुंच जाता है। इसके बावजूद किसानों को उनकी मेहनत का सही मूल्य नहीं मिलता। इस बार भी समर्थन मूल्य करीब 4,600 रुपए प्रति क्विंटल है, लेकिन मंडियों में सोयाबीन 3,800 से 4,000 रुपए में बिक रही है। किसानों का कहना है कि बंपर उत्पादन के बावजूद कम दाम से उनकी आर्थिक हालत बिगड़ रही है।</p>
<p><strong>सोयाबीन से बनने वाले उत्पाद</strong><br />- सोयाबीन तेल: खाद्य उपयोग का सबसे बड़ा बाजार।<br />- सोया नगेट्स (चंक्स) : शाकाहारी प्रोटीन का सस्ता और लोकप्रिय स्रोत।<br />- सोया दूध व टोफू : स्वास्थ्य व डायट फूड इंडस्ट्री में बढ़ती मांग।<br />- सोया आटा व बेकरी उत्पाद : बिस्किट, ब्रेड व स्नैक्स इंडस्ट्री।<br />- पशु आहार (डी-आॅयल्ड केक) : पोल्ट्री और डेयरी उद्योग के लिए अहम।<br />- न्यूट्रास्यूटिकल्स व प्रोटीन पाउडर : जिम, फिटनेस व फार्मा बाजार में उपयोगी</p>
<p>सोयाबीन उगाने में लागत लगातार बढ़ रही है, लेकिन मंडियों में दाम लागत से भी कम मिलते हैं। हमें मजबूरी में फसल बेचनी पड़ती है। अगर हाड़ौती  में सोयाबीन की इंडस्ट्री लगेगी तो हमें सीधे खरीदार मिलेंगे और फायदा होगा।<br /><strong>-रामलाल मीणा, किसान</strong></p>
<p>हाड़ौती क्षेत्र में सोयाबीन से बने उत्पाद जैसे तेल, सोया चंक्स, पशु आहार और प्रोटीन पाउडर के उत्पादन की बड़ी संभावना है। अगर यहां प्रोसेसिंग यूनिट्स लग जाएं तो न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी बल्कि युवाओं को भी रोजगार मिलेगा।<br /><strong>- डॉ. ए.के. शर्मा, कृषि विशेषज्ञ </strong></p>
<p> अभी सोयाबीन को बाहर की फैक्ट्रियों में भेजना पड़ता है। यहां स्थानीय प्रोसेसिंग नहीं होने से किसानों को सही दाम नहीं मिल पाते है। यदि इंडस्ट्री हाड़ौती में ही लग जाए तो परिवहन खर्च बचेगा और किसानों को लाभ मिलेगा<br /><strong>- दिनेश अग्रवाल, मंडी व्यापारी  </strong></p>
<p>सरकार यदि इंडस्ट्री पॉलिसी के तहत टैक्स में छूट और सब्सिडी दे तो यहां सोया आधारित बड़ी-बड़ी यूनिट्स खड़ी हो सकती हैं। इससे कोटा, बूंदी, झालावाड़ और बारां सभी जिलों को फायदा होगा। <br /><strong>- पंकज गुप्ता, उद्यमी </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 23 Sep 2025 16:43:15 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>ट्रम्प टैरिफ : कोटा स्टोन, सेंड स्टोन मसालों का निर्यात होगा कम, हाड़ौती के निर्यात पर पड़ेगा असर</title>
                                    <description><![CDATA[भारतीयों को यहां की वस्तुएं  मिलना ही बंद हो जाएंगी या पहले से काफी महंगे दामों में मिलेगी। जिससे लोगों पर आर्थिक भार बढ़ने से वे भी इनका उपयोग व उपभोग कम कर पाएंगे। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/trump-tariff--export-of-kota-stone--sand-stone--coriander-and-spices-will-decrease/article-123042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-08/6622-copy13.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प द्वारा भारत पर अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ लगाने से यह पहले से दो गुना हो गया है। जिससे भारत के अन्य प्रदेशों के साथ ही हाड़ौती से अमेरिका को होने वाले निर्यात पर असर पड़ेगा। यहां से निर्यात होने वाले कोटा स्टोन, सेंड स्टोन, मसाले व धनिया की मात्रा कम हो जाएगी। अमेरिकी राष्ट्रपति द्वारा अन्य देशों की तुलना में भारत पर अधिक टैरिफ लगाया जा रहा है। पहले से ही 25 फीसदी टैरिफ लग रहा था जिसे बढ़ाकर अब 50 फीसदी कर दिया गया है। ऐसे में भारत से अमेरिका में निर्यात होने वाले सामानों पर इसका सीधा असर पड़ेगा। वहीं कोटा व हाड़ौती से यहां की विशेषता लिए जो सामान अमेरिका में निर्यात होते हैं वे भी प्रभावित होंगे। कोटा के व्यापारियों व उद्यमियों का कहना है कि भारत पर टैरिफ बढ़ाने का असर यहां से ’यादा अमेरिका पर रहेगा।  ऐसे में यहां से होने वाला निर्यात या तो कम हो जाएगा या सरकार के निर्णय की पालना में पूरी तरह से बंद कर दिया जाएगा। जिससे  रहने वाले भारतीयों को यहां की वस्तुएं  मिलना ही बंद हो जाएंगी या पहले से काफी महंगे दामों में मिलेगी। जिससे लोगों पर आर्थिक भार बढ़ने से वे भी इनका उपयोग व उपभोग कम कर पाएंगे। </p>
<p><strong>दूसरे देशों के माल से प्रतिस्पर्धा होगी मुश्किल</strong><br />अमेरिका द्वारा भारत पर लगाए गए अतिरिक्त 25 फीसदी टैरिफ के कारण कोटा से निर्यात होने वाला कोटा स्टोन व सेंड स्टोन पर इसका सीधा असर पड़ेगा। इन दोनों का निर्यात पहले से कम हो जाएगा। पहले ही कोविड के समय से इसका व्यापार प्रभावित हुआ है। साथ ही टैरिफ बढ़ने से अमेरिका में भारत के माल की कीमत अधिक होगी।  जबकि दूसरे देशों से वहां आने वाले सामान की कीमत कम टैरिफ के कारण अपेक्षाकृत कम रहेगी। ऐसे में उस सामान से  मार्केट में प्रतिस्पर्धा कर पाना मुश्किल होगा। <br /><strong>- राजेश गुप्ता, उद्यमी</strong></p>
<p><strong>कोटा स्टोन व सेंड स्टोन पर पड़ेगा असर</strong><br />कोटा व हाड़ौती से तो अमेरिका में सीधे तौर पर सेंड स्टोन, कोटा स्टोन, धनिया व मसालों का निर्यात होता है। अमेरिका द्वारा टैरिफ दो गुना करने से यहां से अमेरिका में होने वाला निर्यात प्रभावित होगा। अमेरिका को निर्यात संबंधी भारत सरकार के निर्णय पर निर्भर करेगा। यदि सरकार ने वहां  निर्यात करना बंद कर दिया तो अन्य देशों को किया जाएगा। जिससे भारत पर इसका काम असर होगा। <br /><strong>- राजेन्द्र जैन, उद्यमी</strong></p>
<p><strong>भारत के लिए विकल्प, अमेरिका के लिए नहीं</strong><br />अमेरिका द्वारा भारत पर इतना अधिक टैरिफ लगाने से हाड़ौती समेत पूरे देश से ओवरआॅल  निर्यात पर तो असर पड़ेगा। यहां का माल अमेरिका में रहने वालों को पहले से अधिक महंगा मिलेगी। विशेष रूप से जिन वस्तुओं व सामानों के लिए अमेरिका भारत पर निर्भर है। हालांकि भारत सरकार जिस तरह के फैसले ले रही है ऐसे में  भारत के लिए तो यूरोपीय देशों से जीरो फीसदी पर व्यापार समझौते करने का प्रयास किया जा रहा है। ऐसे में भारत उन देशों को माल बेचकर अपना काम चला लेगा। जबकि अमेरिका के लोगों को यहां की वस्तुएं नहीं मिलने से वहां  फर्क पड़ेगा। <br /><strong>- कौशल बसंल, उद्यमी</strong></p>
<p><strong>भारत में घरेलू व्यापार बढ़ेगा</strong><br />अमेरिका के टैरिफ बढ़ाने से देश से होने वाला निर्यात बंद कर दिया जाएगा। अमेरिका की स्थान पर अन्य देशों को निर्यात कर भारत तो उस सामान का उपयोग घरेलू व्यापार में खपत कर लेगा लेकिन अमेरिका पर इसका अधिक असर पड़ेगा। हालांकि कोटा व हाड़ौती के व्यापारी 10 अगस्त से हमारा स्वाभिमान स्वदेशी अभियान चलाएंगे। जिससे लोगों को स्वदेशी सामान खरीदने के लिए जागरूक किया जाएगा। जब वहां के सामान की भारत में खपत ही नहीं होगी तो स्वदेशी की मांग व खपत अधिक होने से यहां के व्यापार व लोगों को लाभ होगा। <br /><strong>- संदीप पाड़िया, उद्यमी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 08 Aug 2025 17:04:40 +0530</pubDate>
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                <title>हाड़ौती की उपज से मुनाफा कमा रहा गुजरात, धनिया प्रोसेसिंग यूनिट नहीं होने से किसानों को नुकसान</title>
                                    <description><![CDATA[ हाड़ौती की भूमि में उत्पादित होने वाला धनिया देश ही नहीं विदेशियों की भी पहली पसंद बना हुआ है।
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gujarat-is-earning-profit-from-hadoti-s-produce/article-111758"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/rtrer-(2)12.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाड़ौती की भूमि में उत्पादित होने वाला धनिया देश ही नहीं विदेशियों की भी पहली पसंद बना हुआ है। खाड़ी देशों सहित अन्य देशों में यहां के धनिये की काफी डिमांड है, लेकिन विडंबना यह है कि हाड़ौती की उपज का जो मुनाफा हमारे किसानों को मिलना चाहिए वो कमाई गुजरात के व्यापारी कर रहे हैं। कोटा व बारां जिले में धनिया की सबसे उच्च क्वालिटी वाली पैदावार होती है। इसके बावजूद यहां के किसानों को क्वालिटी के हिसाब से दाम नहीं मिल पाता है। इसका कारण यह है कि हाड़ौती में धनिया की प्रोसेसिंग यूनिट नहीं हैं। जिससे यहां के किसानों से खरीदा गया धनिया गुजरात जाता है। वहां प्रोसेसिंग यूनिट में गुणवतापूर्ण करने के बाद विदेशों में भेजा जाता है। इससे गुजरात के व्यापारियों को ज्यादा मुनाफा होता है। </p>
<p><strong>यहां प्रोसेसिंग यूनिट व एफपीओ की दरकार</strong><br />स्थानीय किसानों को पर्याप्त प्रोत्साहन व आवश्यक संसाधनों की कमी के कारण वे अपनी उपज पर ज्यादा कमाई नहीं कर पा रहे हैं। उन्हें उचित भाव नहीं मिलने से आर्थिक नुकसान उठाना पड़ता है।  किसानों का कहना है कि जिले में दो-तीन प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित करने के साथ फार्मर प्रोड्यूसर ऑगेर्नाइजेशन (एफपीओ) बना दिए जाएं तो हमारा जिला धनिया का हब बन सकता है। इससे स्थानीय स्तर पर धनिया का निर्यात संभव होगा व रोजगार के अवसर पैदा होंगे। वर्तमान में इस फसल से जुड़े किसानों के लिए फार्मर प्रोड्यूसर आॅर्गेनाइजेशन बनाने की दरकार है। 40-50 किसानों का एक एफपीओ बनाकर उसका पंजीकरण करवाना होता है, जिस पर केंद्र सरकार की निगरानी रहती है। इससे हाड़ौती धनिया का हब बन सकता है।</p>
<p><strong>यहां का धनिया इसलिए है खास</strong><br />धनिया के व्यापारी मोहित जैन ने बताया कि देश के विभिन्न राज्यों में पैदा होने वाले धनिया की अलग-अलग क्वालिटी है। जिसमें सबसे ज्यादा ग्रेवी हाड़ौती संभाग की जमीन से पैदा होने वाले धनिया में निकलती है। यहां का धनिया बड़े आकार का होने के बावजूद उसका वजन कम होता है और उसमें खुशबू भी अच्छी होती है। खुशबू मालवा के खेतों से आने वाले धनिया में भी देखने को मिलती है, लेकिन उसके दाने के आकार में अंतर आता है। गुजरात में पैदा होने वाले धनिया में खुशबू नहीं होती है। इस कारण उसकी बाजार दर कम होने से हाड़ौती के धनिये को मिक्स करके बेचा जाता है। इससे वहां कें व्यापारियों को ज्यादा कमाई होती है।</p>
<p><strong>विदेशों में लग चुकी प्रोसेसिंग इकाइयां</strong><br />धनिया निर्यातक मुकेश गुप्ता के अनुसार विदेशों में मांसाहारी सब्जियों का सेवन ज्यादा होता है। जिसकी दुर्गंध को समाप्त करके खुशबू देने के लिहाज से उसमें सबसे ज्यादा धनिया डाला जाता है। धनिया सुगंध के साथ पाचन क्रिया में फायदेमंद होता है। जिसके कारण उसकी मांग निरंतर बढ़ रही है। विदेशों में धनिया पाउडर का प्रचलन है। कुछ मसाला कंपनियों ने तो विदेशों में अपनी प्रोसेसिंग इकाइयां तक लगाई हुई है। इसके माध्यम से वह हाड़ौती के धनिये का पाउडर बनाती है और इसके बाद बाद महंगे दामों में उसकी बिक्री करते हैं। यहां का धनिया विदेशी कंपनियों को अच्छा मुनाफा कमा कर दे रहा है।</p>
<p><strong>मंडी में धनिया के भाव (रुपए प्रति क्विं)</strong><br />- धनिया बादामी 5800 से 6600<br />- धनिया ईगल  6700 से 7100<br />- धनिया रंगदार 7100 से 10500</p>
<p><strong>इनका कहना</strong><br />सरकार को हाड़ौती में प्रोसेसिंग यूनिट स्थापित करनी चाहिए। इससे किसानों को अपनी उपज बेचने में आसानी होगी व उसका उचित भाव मिलेगा। जिले में  प्रोसेसिंग की सुविधा हो तो ज्यादा मुनाफा हो सकता है। वहीं ज्यादा किसान यह फसल उगाने के लिए प्रोत्साहित होंगे<br /><strong>- मथुराप्रसाद, किसान</strong></p>
<p>हाड़ौती के धनिये की विदेशों में काफी डिमांड रहती है। इस फसल में पानी की ज्यादा जरूरत नहीं होती है। इस कारण असिंचित भूमि वाले किसान भी इसकी खेती के प्रति रुझान दिखा रहे हैं। प्रोसेसिंग यूनिट का मामला राज्य सरकार के स्तर का है। <br /><strong>- नंदबिहारी मालव, उपनिदेशक, उद्यान विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 23 Apr 2025 14:59:39 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>नगर निगम की कार्रवाई के विरोध में व्यापारियों का प्रदर्शन : रैली निकालकर दिया धरना, प्रशासन के खिलाफ की नारेबाजी </title>
                                    <description><![CDATA[व्यापारियों ने बाजार बंद कर रैली निकाली और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/demonstration-rally-of-traders-against-the-action-of-municipal-corporation/article-109683"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/2.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। हैरीटेज नगर निगम की ओर से की जा रही सीलिंग कार्रवाई के विरोध में जयपुर के व्यापारियों ने बड़ी चौपड़, जौहरी बाजार, हल्दियों का रास्ता, घी वालों का रास्ता, गोपाल जी का रास्ता, हवामहल बाजार और त्रिपोलिया बाजार में प्रदर्शन किया। व्यापारियों ने बाजार बंद कर रैली निकाली और प्रशासन के खिलाफ नारेबाजी की।</p>
<p><strong>7 अप्रैल को होगी कोर्ट में सुनवाई :</strong></p>
<p>व्यापारियों का कहना है कि यह कार्रवाई अनियमित रूप से की जा रही है, जिससे उनका कारोबार प्रभावित हो रहा है। इस मामले पर 7 अप्रैल को कोर्ट में सुनवाई होगी।</p>
<p><strong>व्यापार मंडलों का विरोध जारी :</strong></p>
<p>दडा मार्केट व्यापार मंडल अध्यक्ष मनोज गोयल और जौहरी बाजार व्यापार मंडल महामंत्री कैलाश मित्तल ने बताया कि प्रशासन की इस कार्रवाई से व्यापारियों में आक्रोश है और वे अपने हक की लड़ाई लड़ेंगे।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Fri, 04 Apr 2025 17:59:06 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>परकोटा क्षेत्र में व्यावसायिक गतिविधियों पर संकट : व्यापारियों ने निकाला शांति मार्च, प्रतिष्ठान बंद रखे</title>
                                    <description><![CDATA[गोयल ने बताया कि जिस बिल्डिंग बाइलॉज 2020 का हाईकोर्ट ने उल्लंघन का हवाला दिया है वह पुराने भवन परिसरों पर लागू ही नहीं होते। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/crisis-on-commercial-activities-in-parkota-region-traders-took-off/article-109473"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-04/6622-copy1.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। परकोटा क्षेत्र में चल रही व्यावसायिक गतिविधियों पर मंडरा रहे संकट को लेकर व्यापारियों में आक्रोश बढ़ता जा रहा है। हाल ही में हाई कोर्ट द्वारा 19 परिसरों की दुकानों को सील करने का आदेश जारी किया गया, जिसे व्यापारी समुदाय एक गंभीर शुरुआत मान रहा है। परकोटा विकास संघर्ष समिति के नेतृत्व में बुधवार को सुबह 11 बजे से दोपहर एक बजे तक व्यापारियों ने हल्दियों के रास्ते से जौहरी बाजार होते हुए बड़ी चौपड़ तक शांति प्रदर्शन किया। समिति के अध्यक्ष सुनील बक्शी ने बताया की मौन प्रदर्शन में शामिल हजारों व्यापारियों को जयपुर व्यापार महासंघ के उपाध्यक्ष एवं हल्दियों के रास्ते व्यापार मण्डल के अध्यक्ष सुरेंद्र बज ने आश्वासन दिया कि जयपुर व्यापार महासंघ व्यापारियों के साथ है। समिति के संयुक्त सचिव मनोज गोयल ने बताया कि व्यावसायिक परिसर सार्वजनिक या सरकारी भूमि पर नही है बल्कि निजी स्वामित्व की भूमि पर निर्मित है हमारे साथ अन्याय हो रहा है जबकि पूरे परकोटे में व्यावसायिक गतिविधियां आवासीय परिसरों के साथ में चलने की परम्परा रही है। गोयल ने बताया कि जिस बिल्डिंग बाइलॉज 2020 का हाईकोर्ट ने उल्लंघन का हवाला दिया है वह पुराने भवन परिसरों पर लागू ही नहीं होते। </p>
<p>समिति के प्रवक्ता पवन कानूनगो ने बताया कि जब तक निगम हाई कोर्ट को सही वस्तु स्थिति से अवगत नही करा देती एवं सरकार की ओर से कैबिनेट में उपसमिति का गठन नही हो जाता इसका स्थायी समाधान संभव नही है अत: सरकार से मांग है कि शीघ्र ही उप समिति का गठन कर गजट में प्रकाशित करे।</p>
<p>शांति मार्च के संघर्ष समिति का प्रतिनिधिमण्डल हेरिटेज नगर निगम कमिश्नर से मिलकर अपना पक्ष रखा। शांति मार्च में संघर्ष समिति के सभी पदाधिकारी कैलाश अग्रवाल, गजेंद्र कासलीवाल, नरेश जैन, हनुमान मंगल, विजय गोयल, गिरीश अग्रवाल, वासुदेव गुप्ता, सतीश अग्रवाल, शिवचरण अग्रवाल सहित हजारों की संख्या में व्यापारी और कर्मचारी उपस्थित रहे।  </p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 03 Apr 2025 10:21:47 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Jaipur ]]></dc:creator>
                            </item>
            <item>
                <title>कृषि कल्याण शुल्क और आयात शुल्क के विरोध में व्यापारियों ने दिया धरना, राजधानी कृषि उपज मंडी के बाहर किया प्रदर्शन </title>
                                    <description><![CDATA[राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ की ओर से चल रही हड़ताल के दौरान राजधानी कृषि उपज मंडी कूकर खेड़ा के बाहर व्यापारियों ने धरना प्रदर्शन किया। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/traders-protested-outside-the-capital-agricultural-produce-market-to-protest/article-105912"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-02/6622-copy151.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ की ओर से चल रही हड़ताल के दौरान राजधानी कृषि उपज मंडी कूकर खेड़ा के बाहर व्यापारियों ने धरना प्रदर्शन किया। राजस्थान खाद्य पदार्थ व्यापार संघ के अध्यक्ष बाबू लाल गुप्ता, खाद्य पदार्थ व्यापार संघ, कुकर खेड़ा मंडी के अध्यक्ष रामचरण नाटाणी, दाल मिल संघ के संयुक्त मंत्री पवन अग्रवाल और उपाध्यक्ष मधु सुदन गर्ग, श्याम नाटाणी सहित सैकड़ों व्यापारियों ने धरना दिया और प्रदर्शन किया। गुप्ता ने बताया कि हमारी 56 मांगों का मांग पत्र सरकार को भेजा जा चुका है। प्रदेशभर में मंडिया, दाल मिल, तेल मिल, आटा मिल और मसाला उद्योग बंद है।</p>
<p>हमारी मुख्य मांग कृषक कल्याण शुल्क, दलहन पर लगने वाला आयात शुल्क हटाया जाए। गुप्ता ने बताया कि संघ का प्रतिनिधिमंडल वन मंत्री संजय शर्मा और गृह राज्य मंत्री जवाहर सिंह बैडम से उनके सरकारी आवास पर मिलकर मांग पत्र सौंप दिया है। मंत्रियों ने कहा सरकार आपका पूरा ध्यान रखेगी। मुख्यमंत्री भजन लाल शर्मा से बात करेंगे। आपकी मांगों का जल्द समाधान होगा।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

                <link>https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/traders-protested-outside-the-capital-agricultural-produce-market-to-protest/article-105912</link>
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                <pubDate>Fri, 28 Feb 2025 19:00:32 +0530</pubDate>
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