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                <title>करीब छह माह से नहीं बह रही चम्बल माता से जलधारा</title>
                                    <description><![CDATA[रिवर फ्रंट के आकर्षणों में से एक आकर्षण हैं मूर्ति से बहती जलधारा।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/the-stream-from-chambal-mata-has-not-flowed-for-nearly-six-months/article-134668"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(2)11.png" alt=""></a><br /><p>कोटा । एक तरफ तो शहर को पर्यटन नगरी के रूप में विकसित किया जा रहा है। जहां देश विदेश से पर्यटकों को लाकर यहां के पर्यटन स्थलों को दिखाने के दावे किए जा रहे हैं। वहीं दूसरी तरफ यहां के पर्यटन स्थलों की सुध तक नहीं ली जा रही है। जिसका नजीता है चम्बल रिवर फ्रंट। रिवर फ्रंट पर बैराज साइड पर लगी चम्बल माता की विशाल मूर्ति से पिछले करीब 6 माह से जल धारा तक नहीं बह रही है। जिससे वहां आने वाले बाहरी पर्यटक ही नहीं स्थानीय लोग भी उस मनोरम दृश्य को देखने से वंचित हो रहे हैं। रिवर फ्रंट के आकर्षणों में से एक आकर्षण हैं मूर्ति से बहती जलधारा। लेकिन वहां आने वालों को काफी समय से यह जलधारा बहती हुई नजर ही नहीं आ रही है।रिवर फ्रंट घूमने गए लोगों का कहना है कि वीडियो व रील में तो चम्बल माता से जलधारा बहती हुई दिखती है। लेकिन जब वहां मौके पर गए तो जलधारा नजर ही नहीं आई। जिससे वहां जाकर भी निराशा ही मिली।</p>
<p><strong>धीरे-धीरे गायब हो रहे व्यू कटर</strong><br />रिवर फ्रंट बनने के बाद तत्कालीन नगर विकास न्यास की ओर से बैराज के समानांतर पुल पर रिवर फ्रंट व बैराज साइड दोनों तरफ व्यू कटर लगाए गए हैं। जिससे पुल से गुजरने वाले वाहन चालक अंदर की तरफ नहीं देख सके। साथ ही वाहन चालकों को वहां रूकने से जाम की स्थिति भी नहीं बने। जबकि जब व्यू कटर नहीं लगे थे तब वहां पुल पर जाम की स्थिति बनी रहती थी।लेकिन हालत यह है कि वर्तमान में बैराज साइड से व्यू कटर धीरे-धीरे गायब हो रहे है। बैराज से सकतपुरा की तरफ जाते समय कहीं एक-दो तो कहीं आधा दर्जन से अधिक व्यू कटर टुकड़ों में गायब हो रहे हैं। शुरूआत में यह एक दो जगह से गायब हुए थे वहीं अब इनकी संख्या लगातार बढ़ती जा रही है।</p>
<p>लोगों का कहना है कि कुछ लोगों ने बरसात के समय बैराज के गेट खुलने पर उनके पानी को देखने के लिए कुछ जगह से व्यू कटर तोड़े थे। लेकिन केडीए अधिकारियों की अनदेखी से उन्हें सही नहीं किया गया। जिससे अब यह अधिक जगह से गायब हो गए हैं। जिससे वहां काफी जगह हो गई है। ऐसे में वहां से किसी के झांकने पर गिरकर हादसा होने का खतरा बना हुआ है।</p>
<p>इधर होटल फैडरेशन आॅफ राजस्थान कोटा संभाग के अध्यक्ष अशोक माहेश्वरी ने बताया कि उन्होंने पर्यटन विभाग व केडीए अधिकारियों के साथ गत दिनों रिवर फ्रंट का अवलोकन किया था। इस दौरान वहां जो भी कमियां नजर आई उन्हें दुरुस्त करने के लिए कहा था। जिससे टूर एंड ट्रेवल मार्ट में आने वालों को अच्छा नजारा दिख सके। चम्बल माता की जलधारा को भी फिर से शुरू करने के लिए कहा है। अधिकारियों ने शीघ्र ही उसे चालू करने की बात कही है।</p>
<p><strong>पानी बंद होने पर सही करवाए जा रहे पम्प</strong><br />केडीए के सहायक अभियंता(विद्युत) ललित मीणा ने बताया कि चम्बल माता की मूर्ति में ऊपर तक पानी पहुंचाने के लिए जो मोटर व पम्प लगे हुए हैं वह चम्बल नदी में अंदर की तरफ है। हालांकि वहां चार दीवारी बनाई हुई है। लेकिन बरसात के समय में बैराज के गेट खोलने से पानी की आवक अधिक हो गई थी। जिससे वे पम्प पानी में अधिक डूब गए। पानी के साथ बहकर आई मिट्टी पम्प में जम गई थी। जिससे मोटर व पम्प बंद होने से मृूर्ति से जलधारा बंद हो गई थी। लेकिन अब गेट बंद होने व पानी कम होने से पम्प को निकालकर साफ कराया जा रहा है। शीघ्र ही फिर से जलधारा बहती नजर आएगी।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Dec 2025 15:29:06 +0530</pubDate>
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                <title> आलनिया माता मंदिर : माता की कृपा से मिलता है संतान सुख और समृद्धि, श्रद्धालुओं की आस्था और श्रद्धा का केंद्र </title>
                                    <description><![CDATA[यहां यात्रियों को रात में रुकने और विश्राम करने की सुविधा उपलब्ध है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/alaniya-mata-temple--the-blessings-of-the-mother-goddess-bring-happiness-and-prosperity-through-her-children/article-128042"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news43.png" alt=""></a><br /><p>कसार। कोटा झालावाड़ नेशनल हाईवे 52 के समीप स्थित नाहर सिंही माता का विशाल मंदिर, जिसे आलनिया माताजी के नाम से भी जाना जाता है, क्षेत्र में श्रद्धालुओं के लिए आस्था का प्रमुख केंद्र है। मान्यता है कि नि:संतान दंपतियों को संतान सहजता से प्राप्त हो जाती है। मंदिर में कालका माता व नाहर सिंही माता की प्राचीन प्रतिमाएं लगभग 500 साल पुरानी हैं। ग्रामीणों के अनुसार, इन्हें बूंदी जिले के मेनाल से दो साधु लेकर आए थे और जंगल में एक पेड़ के नीचे स्थापित किया। धीरे-धीरे आसपास का क्षेत्र बसा और श्रद्धालु दर्शन के लिए आने लगे।</p>
<p><strong>विशाल सिंह द्वार बनाया जाने की मांग: </strong> हाइवे किनारे स्थित आलनिया माता मंदिर पर माता के दर्शन मात्र से ही मानव के दुख दूर हो जाते हैं। नवरात्रि के दौरान दूर-दराज से श्रद्धालुओं का ताता लगता है। रविवार व सोमवार को भी काफी संख्या में भक्त दर्शन के लिए पहुंचते हैं। मंदिर समिति ने बताया कि यदि सर्विस रोड के समीप विशाल सिंहद्वार बनाया जाए तो हाईवे से गुजरने वाले यात्रियों की नजरें मंदिर पर पड़ेगी और दर्शनार्थियों की संख्या बढ़ेगी।</p>
<p><strong>परिसर में विशाल भोजनशाला, 10 कमरे, दो वाटर कूलर </strong><br />मंदिर अब ट्रस्ट द्वारा संचालित है। परिसर में विशाल भोजनशाला, 10 कमरे, दो वाटर कूलर और राहगीरों के लिए पेयजल टंकी व शौचालय बनाए गए हैं। यात्रियों को रात में रुकने और विश्राम करने की सुविधा उपलब्ध है।</p>
<p><strong>नौ दिनों तक माता का होता है आकर्षक श्रृंगार </strong><br />श्रद्धालुओं का विश्वास है कि दुनिया की कठिनाइयों से थककर माता के दरबार में आने से मनोकामना पूर्ण होती है। नवरात्रि के दौरान नौ दिनों तक माता का आकर्षक श्रृंगार किया जाता है और दुर्गा शतचंडी पाठ व पालकी नगर भ्रमण आयोजित होता है। मंदिर पुजारी रामनिवास सुमन ने बताया कि उनकी चार पीढ़ियां वर्षों से माता की पूजा अर्चना करती आ रही हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 27 Sep 2025 14:50:44 +0530</pubDate>
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                <title>नवरात्र विशेष : आस्था का द्वार कुन्हाड़ी बीजासन माता धाम, दूर होती है लकवा व हकलाने की बीमारी</title>
                                    <description><![CDATA[राव चंद्रसेन ने कराया था निर्माण, सारबाग के इमली के पेड़ के नीचे से लाए थे मूर्ति
]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/navratri-special--kunhadi-bijasan-mata-dham--a-gateway-to-faith--cures-paralysis-and-stammering/article-127837"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-09/copy-of-news-(10)4.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के रेलवे स्टेशन से करीब 9 किलोमीटर तथा बस स्टैंड से मात्र 2 किलोमीटर दूर स्थित कुन्हाड़ी माता अर्थात बीजासन माता मंदिर स्थित है। यह मंदिर करीब 500 साल पुराना है। यह रियासतकालीन के दौरान बना हुआ है। इस मंदिर की माता कुन्हाड़ी ठिकाना राजपरिवार की कुलदेवी है। इस मूर्ति को राव चंद्रसेन ने सारबाग के इमली के पेड़ से लाकर यहां स्थापित किया था। यह चमत्कारी मंदिर अपने आप में अनूठा मंदिर है। यहां आने वाले हर श्रद्धालु की मनोकामना पूरी होती है। अधिकतर यहां आने वाले श्रद्धालु लकवा, जिनको बोलने में समस्या होती है या फिर जिनके हाथ-पैर में दर्द जैसी कई समस्याएं होती है। जो श्रद्धालु इस मंदिर आकर 2 से 7 परिक्रमा सीधी लगाता है उसकी मनोकामना पूरी हो जाती है। कुछ श्रद्धालु मन्नत पूरी होने तक यहीं रहते है। अपने विश्वास का दीया लगाए रखते है। पुजारी भूपेन्द्र शर्मा व छित्तरलाल ने बताया कि धार्मिक आस्था का ऐसा संगम जहां श्रद्धालु अपनी पूरी श्रद्धा और विश्वास के साथ आते हैं और मां की चौखट से खाली नहीं लौटते। बीजासन माता मंदिर, जिसे कुन्हाड़ी ठिाकाना की कुलदेवी माना जाता है, आज भी आस्था का सबसे बड़ा केन्द्र है। श्रद्धालुओं की हर मनोकामना पूरी होती है। यही कारण है कि यह मंदिर न केवल कोटा और बूंदी, बल्कि पूरे हाड़ौती अंचल के लिए आस्था का अद्भुत धाम बन चुका है।</p>
<p><strong>होती है मन्नत पूरी</strong><br />श्रद्धालुओं के अनुसार मनोकामना पूरी होने के बाद उल्टा साखिया बनाते हैं। यह परंपरा सदियों से चली आ रही है। ग्रामीण मान्यता है कि अगर कोई सच्चे मन से मां के दरबार में आता है, अपनी मनोकामना रखता है और परिक्रमा करता है, तो माता उसकी झोली जरूर भरती है। श्राद्धालुओं के अनुसार इस मंदिर में लकवा जैसी बीमारी में भी काफी फायदा मिलता है। </p>
<p><strong>राव चंद्रसेन ने कराया था निर्माण</strong><br />श्रद्धालुओं के अनुसार इस मंदिर का निर्माण लगभग 500 साल पहले राव चंद्रसेन ने कराया था। वे इस मंदिर को कुन्हाड़ी ठिकाना की कुलदेवी के रूप में लेकर आए थे। कहा जाता है कि सारवाड़ से इमली के पेड़ के नीचे से मां की प्रतिमा को लाकर यहां स्थापित किया गया। तभी से बीजासन माता को कुन्हाड़ी ठिकाना राज परिवार की कुलदेवी के रूप में पूजा जाने लगा। कुन्हाड़ी ठिकाना के राजपरिवार के लोग आज भी यहां दर्शन करने आते हैं। इसे सिर्फ ऐतिहासिक और धार्मिक स्थल ही नहीं, बल्कि राजघराने की आस्था से भी जुड़ा स्थान माना जाता है। बीजासन माता मंदिर सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि आस्था और विश्वास की ऐसी धारा है जो पूरे हाड़ौती को जोड़ती है। यहां हर वर्ष हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं। खासतौर पर नवरात्रि और पूर्णिमा के दिन यहां श्रद्धालुओं का मेला लगता है। नवरात्रि में यहां नौ दिन का भव्य मेला लगता है। इस दौरान श्रद्धालुओं की भीड़ इतनी बढ़ जाती है कि मंदिर परिसर और आसपास का इलाका पूरा आस्था के रंग में रंग जाता है। पंचमी और अष्टमी के दिन सबसे ज्यादा भीड़ रहती है। कई श्रद्धालु पूरे नौ दिन मंदिर परिसर में ही डेरा डालते हैं।</p>
<p><strong>मंदिर के आसपास का वातावरण</strong><br />मंदिर हरे-भरे वातावरण में स्थित है। आसपास के क्षेत्र में मेला लगने पर बड़ी संख्या में दुकानें सजती हैं। श्रद्धालु यहां से माता की प्रतिमाएं, नारियल, चुनरी और अन्य पूजा सामग्री खरीदते हैं। धार्मिक विद्वानों का मानना है कि बीजासन माता शक्ति स्वरूपा हैं। यहां साधना करने से मानसिक शांति मिलती है। यही कारण है कि कई श्रद्धालु दिन-रात मंदिर में भजन-कीर्तन करते हैं। नवरात्रि के दौरान मंदिर में विशेष पूजन और हवन का आयोजन किया जाता है। माता के दरबार को आकर्षक ढंग से सजाया जाता है। हजारों की संख्या में श्रद्धालु इस आयोजन का हिस्सा बनते हैं। बीजासन माता मंदिर सिर्फ धार्मिक धाम नहीं, बल्कि यह समर्पण और विश्वास का केन्द्र है। यहां हर साल लाखों श्रद्धालु आते हैं और मां से आशीर्वाद लेकर जाते हैं।</p>
<p><strong>यह बोले श्रद्धालु</strong><br />कुन्हाड़ी बीजासन माता में मेरी पूरी आस्था है, खड़ीपुर चित्तौड़ रोड से आया हंू। मेरे माताजी देवबाई को चलने में दिक्कत हो रही थी। तीन दिन से यहां रूके हुए है। रोज परिक्रमा भी कर रहे है। माता की कृपा से अब ठीक है।<br /><strong>-उच्छबलाल गुर्जर, खडीपुर, गरडिया महादेव के पास</strong></p>
<p>मैं अपनी पत्नी सेनाबाई के साथ आया हूं। मेरी पत्नी के दोनों हाथों में काफी दिक्कत थी। हम करीब 16 दिन से यहां रुके हुए है।  माता रानी की कृपा से अब काफी सुधार है।<br /><strong>-भोजराज, लठूरा, सांगोद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 25 Sep 2025 15:21:22 +0530</pubDate>
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                <title>विशेषताओं का खजाना है रिवर फ्रंट का हर घाट </title>
                                    <description><![CDATA[कोटा बैराज की तरफ चम्बल माता की सबसे ऊंची 42 मीटर मूर्ति स्थापित की जा रही है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/every-ghat-of-river-front-is-a-treasure-of-specialties/article-53424"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2023-08/rivar-frant-ka-har-ghaat-vishishtataon-ka-khajana-hai...kota-news-02-08-2023.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर विकास न्यास की ओर से चम्बल नदी के  बनाए गए रिवर फ्रंट का हर घाट अपनी अलग विशेषता लिए हुए है। नदी के दोनों छोर पर कुल 26 घाट बनाए गए हैं जहां पर्यटकों के लिए विशेषताओं का खजाना है। इन घाट पर मनोरंजन के साथ ही ज्ञान, जानकारी व संदेश सभी कुछ मिलेगा। नदी के दोनों छोर पर करीब 6 किमी. में बने रिवर फ्रंट का अगस्त में उद्घाटन होने की संभावना है। उसके बाद यह आमजन के लिए खोल दिया जाएगा। उस समय जब शहरवासी व देशी विदेशी पर्यटक उसे देखने जाएंगे तो वहां वह सब कुछ देखने को मिलेगा जो अभी तक कहीं नहीं देखा होगा या फिर उन्हें देखने के लिए अलग-अलग देशों व शहरों में जाना होगा। लेकिन कोटा के हैरिटेज चम्बल रिवर फ्रंट पर देश दुनिया का एक से बढ़कर एक आकर्षण देखने को मिलेगा। </p>
<p><strong>पश्चिमी छोर पर 14 घाट</strong><br />रिवर फ्रंट के दोनों छोर पर कुल 26 घाट बनाए गए हैं। जिनमें से पूर्वी घाट पर 12 और पश्चिमी घाट पर नदी पार 14 घाट बनाए गए हैं। पूर्वी  छोर के 12 घाटों में से तो अधिकतर के बारे में सभी को जानकारी है। जबकि पश्चिमी छोर के एक दो घाट को छोड़कर अधिकतर की जानकारी वहां जाने पर ही मिल पाएगी। कोटा बैराज की तरफ चम्बल माता की सबसे ऊंची 42 मीटर मूर्ति स्थापित की जा रही है। चम्बल माता की इतनी ऊची मूर्ति इससे पहले कहीं नहीं देखी होगी। इसका 42 में से 37 लेबल तक का काम पूरा हो गया है।  इन विजुवल(अदृश्य) योगीराज की विशाल मूर्ति इसी छोर पर देखने को मिलेगी। स्टेनलेस स्टील की यह मूर्ति सामने से देखने पर गायब होगी और साइड से ही देखने पर नजर आएगी। करीब 25 मीटर ऊंची व 16 टन वजनी मूर्ति आकर्षण का केन्द्र है। </p>
<p><strong>विशाल घंटी व नंदी</strong><br />इस छोर पर दुनिया की सबसे वजनी घंटी लगाई जा रही है। करीब 82 हजार किलो वजनी घंटी का काम चल रहा है। इसकी आवाज 8 किलोमीटर दूर तक सुनाई देगी। इसी छोर पर नंदी घाट बनाया गया है। जहां करीब 6.5 मीटर ऊंचाई की विशाल नंदी की मूर्ति देखने को मिलेगी।</p>
<p><strong>एलईडी गार्डन व ग्रेंड आर्च घाट</strong><br />पश्चिमी छोर पर एलईडी गार्डन बनाया गया है। जहां कई तरह की एलईडी लाइटें लगाई गई है। ये लाइटें वहां पेड़ पौधों पर पड़ेंगी तो उनका अलग ही आकर्षण होगा। इसी तरह से ग्रेंड आर्च घाट पर हाड़ौती की वास्तु कला शिल्प देखने को मिलेगी। वहीं राजस्थान पेवेलियन बनाया गया है। जहां जयपुर का हवा महल से लेकर चित्तौड़ का किला और पुष्कर व जैसलमेर के भी कई प्रतिरूप देखने को मिलेंगे। </p>
<p><strong>पूर्वी छोर पर 12 घाट</strong><br />इधर रिवर फ्रंट के पूर्वी छोर पर 12 घाट बनाए गए हैं। इन घाटों की भी अलग अलग विशेषताएं हैं। यहां वर्ल्ड हैरिटेज घाट पर जहां विश्व की 9 प्रसिद्ध इमारतें देखने को मिलेंगी। वहीं म्यूजिकल घाट पर फाउंटेन के साथ संगीत के विभिन्न वाद्य यंत्र बजाती मूर्तियां दिखेंगी। साहित्य घाट पर पुस्तक नुमा आकार में सीढ़ियां बनाई गई है। यहां हॉल में कार्यक्रम होंगे। सिंह घाट पर 9 बड़े शेर बनाए गए हैं। विशाल लाल किले के सामने विशाल ग्लोब बनाया जा रहा है।  राजस्थानी संस्कृति की पहचान कराने के लिए आमने-सामने 6 ऊंट लगाए गए हैं जो देखने पर वास्तविक लगते हैं। इसी तरह से कई अन्य घाट भी देखने को मिलेंगे। </p>
<p><strong>शहर वासियों को उद्घाटन का इंतजार</strong><br />कोटा में नदी किनारे बने इस विश्व स्तरीय पर्यटन स्थल को देखने के लिए शहर वासियों को इसके उद्घाटन का इंतजार है। अगस्त में इसके उद्घाटन की संभावना जताई जा रही है। जिसकी प्रशासन व न्यास के स्तर पर तैयारी की जा रही है। रिवर फ्रंट पर काम को अंतिम रूप देने के चलते यहां फिलहाल आमजन का प्रवेश बंद किया हुआ है। लेकिन सूत्रों के अनुसार येन-केन कुछ लोग रिवर  फ्रंट देखने जा रहे हैं। रोजाना शाम से रात तक नयापुरा साइड पर लोगों की भीड़ देखी जा सकती है।  न्यास अधिकारियों का कहना है कि आमजन का प्रवेश उद्घाटन के बाद ही होगा। अभी तक उद्घाटन की तिथि तय नहीं हुई है। इसकी तैयारी चल रही है। रिवर फ्रंट व आॅक्सीजोन का उद्घाटन एक साथ ही होगा। </p>
<p><strong>शांति घाट पर पंडित नेहरु</strong><br />पश्चिमी छोर पर शांति घाट बनाया गया है। जिसमें देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित नेहरु बच्चों के साथ विभिन्न स्वरूपों में नजर आएंगे। वहीं पंडित नेहरु का विशाल मुखोटा बनाया गया है। जिनकी आंख से रिवर फ्रंट का नजारा देखा जा सकेगा। छोरी चौक पर कइ यौद्याओं के प्रतिरूप देखने को मिलेगे। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Wed, 02 Aug 2023 15:20:58 +0530</pubDate>
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                <title>घट स्थापना के साथ नवरात्र शुरू, माता के मंदिरों में उमड़ा भक्तों का सैलाब</title>
                                    <description><![CDATA[जयपुर के राजपरिवार से आई जरी की पोशाक माता को धारण कराकर आरती उतारी गई। यह परम्परा पिछले 500 सालों से चली आ रही है। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jaipur/jaipur--navratri-begins-with-the-establishment-of-ghat--the-influx-of-devotees-in-the-temples-of-mata/article-7218"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-04/matarani.jpg" alt=""></a><br /><p>जयपुर। चैत्र शुक्ल प्रतिपदा, शनिवार को वासंतिक नवरात्र घट स्थापना के साथ शुरू हुए। माँ दुर्गा घोड़े पर सवार होकर हमारे घर आएंगी और नौ दिन बाद भैंसे पर सवार होकर जाएंगी। हमारे दुख संकट और रोगों को अपने साथ ले जाएंगी। मां दुर्गा और मर्यादा पुरूषोत्तम भगवान श्रीराम की नौ दिनों तक आराधना की जाएगी। छोटीकाशी के दुर्गा और श्रीराम मंदिरों में नौ दिन तक धार्मिक अनुष्ठान होंगे।</p>
<p>आमेर स्थित शिलामाता मंदिर के महंत बनवारी लाल शास्त्री के सानिध्य में सुबह 8.05 मंत्रोच्चारण पूजा-अर्चना के साथ घट स्थापना की गई। माता को नवीन पोशाक धारण कराकर ऋतु पुष्पों से शृंगार किया गया। जयपुर के राजपरिवार से आई जरी की पोशाक माता को धारण कराकर आरती उतारी गई। यह परम्परा पिछले 500 सालों से चली आ रही है। सुबह 9 बजे से भक्तों ने माता के दर्शन किए।<br /><br />मुख्य रूप से आमेर के शिला माता, मनसा माता, दुर्गापुरा के दुर्गा मंदिर, पुरानी बस्ती के रूद्रघंटेश्वरी, घाटगेट के काली माता मंदिर, राजापार्क के वैष्णो देवी मंदिर और झालाना के देवी मंदिर में भक्तों ने मां के दर्शन कर सुख समृद्धि की कामना की। सुबह 6 बजे से ही मंदिरों की कतारों में जाकर लग गए थे और जय माता की जयकारे से देवी की आराधना के इस नौ दिनों के विशेष पर्व का आरंभ किया।<br />अब सभी देवी मंंदिरों में प्रतिदिन दुर्गा शप्तशती, चंडी पाठ और हवन होगा। वहीं, श्रीराम मंदिरों में रामचरितमानस और वाल्मीकि रामायण के पाठ होंगे।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>जयपुर</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 02 Apr 2022 15:48:48 +0530</pubDate>
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                                    <dc:creator><![CDATA[Administrator]]></dc:creator>
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                <title>वैष्णो देवी माता मंदिर में भगदड़, 12  तीर्थयात्रियों की मौत, प्रधानमंत्री-राष्ट्रपति ने जताया शोक</title>
                                    <description><![CDATA[श्रद्धालुओं के बीच झड़प के कारण मची भगदड़: राय]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/bharat/%E0%A4%B5%E0%A5%88%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%A3%E0%A5%8B-%E0%A4%A6%E0%A5%87%E0%A4%B5%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A4%BE-%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A6%E0%A4%BF%E0%A4%B0-%E0%A4%AE%E0%A5%87%E0%A4%82-%E0%A4%AD%E0%A4%97%E0%A4%A6%E0%A4%A1%E0%A4%BC--12--%E0%A4%A4%E0%A5%80%E0%A4%B0%E0%A5%8D%E0%A4%A5%E0%A4%AF%E0%A4%BE%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%BF%E0%A4%AF%E0%A5%8B%E0%A4%82-%E0%A4%95%E0%A5%80-%E0%A4%AE%E0%A5%8C%E0%A4%A4--%E0%A4%AA%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%A7%E0%A4%BE%E0%A4%A8%E0%A4%AE%E0%A4%82%E0%A4%A4%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A5%80-%E0%A4%B0%E0%A4%BE%E0%A4%B7%E0%A5%8D%E0%A4%9F%E0%A5%8D%E0%A4%B0%E0%A4%AA%E0%A4%A4%E0%A4%BF-%E0%A4%A8%E0%A5%87-%E0%A4%9C%E0%A4%A4%E0%A4%BE%E0%A4%AF%E0%A4%BE-%E0%A4%B6%E0%A5%8B%E0%A4%95/article-3704"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2022-01/veshno.jpg" alt=""></a><br /><p>जम्मू। जम्मू-कश्मीर में रियासी जिला के काटरा शहर में त्रिकुटा की पहाड़ी पर स्थित माता वैष्णो देवी मंदिर में (आज तड़के) शनिवार को भगदड़ मचने से 12 तीर्थयात्रियों की मौत हो गई और 13 अन्य लोग घायल हो गए। पुलिस ने बताया कि भवन में तीर्थयात्रियों की भारी भीड़ थी और भगदड़ मच गई। पुलिस ने कहा कि इस हादसे में कम से कम 12 लोगों के मारे जाने की खबर है और कई अन्य लोग घायल हुए हैं। राहत एवं बचाव कार्य जारी है।  पुलिस, श्राइन बोर्ड, अर्ध सैनिक बलों, स्वास्थ्य विभाग और प्रशासन की संयुक्त टीम राहत एवं बचाव कार्य में जुटी हुई है।</p>
<p>इस बीच एक प्रशासनिक अधिकारी ने कहा कि पिछले सप्ताह किसानों के विरोध को देखते हुए ट्रेनों के निलंबन के कारण यात्रा में गिरावट आई थी, लेकिन ट्रेनों के फिर से शुरू होने के बाद नए साल की पूर्व संध्या पर माता के दर्शन के लिए बड़ी संख्या में तीर्थयात्री कटरा पहुंच गए। उन्होंने कहा कि विशेष रूप से नए साल पर गुफा मंदिर में प्रार्थना करने और माता रानी के दर्शन करने के लिए, तीर्थयात्री भवन की ओर दौड़ पड़े, जिससे अफरा-तफरी मच गई।<br /> <br /> <br /> <strong>श्रद्धालुओं के बीच झड़प के कारण मची भगदड़: राय</strong><br /> नई दिल्ली। केंद्रीय गृह राज्य मंत्री नित्यानंद राय ने कहा है कि माता वैष्णो देवी भवन में कुछ श्रद्धालुओं के बीच झड़प के कारण संतुलन बिगड़ने से भगदड़ मची थी और इस घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं। राय ने कहा कि नव वर्ष के कारण भवन में जाने वालों की भीड़ बढ़ गई थी और ढलान पर कुछ श्रद्धालुओं के बीच झड़प के कारण संतुलन बिगड़ने से लोग एक दूसरे पर गिरते चले गए। उन्होंने कहा कि घटना की जांच के आदेश दे दिए गए हैं और स्वयं प्रधानमंत्री जिस मामले में संपर्क बनाए हुए हैं तथा स्थिति पर नजर रख रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब वहां पर स्थिति सामान्य हो रही है और व्यवस्था बनाकर सभी श्रद्धालुओं को दर्शन की अनुमति दी जाएगी तथा किसी को भी वापस नहीं लौटाया जाएगा।<br /> उन्होंने कहा कि घायलों को अस्पताल में भर्ती कराया गया है और उनके उपचार में किसी तरह की कमी नहीं रखी जाएगी।<br /> केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी जम्मू कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा से बात कर स्थिति की जानकारी ली है।<br /> उन्होंने एक ट्वीट कर कहा," माता वैष्णो देवी मंदिर में हुई दुखद दुर्घटना से हृदय अत्यंत व्यथित है। इस संबंध में मैंने उपराज्यपाल  मनोज सिन्हा जी से बात की है। प्रशासन घायलों को उपचार पहुँचाने के लिए निरंतर कार्यरत है। इस हादसे में जान गँवाने वाले लोगों के परिजनों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूँ।"<br /> <strong><br /> मोदी ने वैष्णो देवी मंदिर में हुए हादसे पर जताया शोक</strong><br /> नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जम्मू-कश्मीर के वैष्णो देवी मंदिर में हुए हादसे पर शोक जताया है और मृतकों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि देने की घोषणा की है। मोदी ने शनिवार को ट्वीट कर कहा कि माता वैष्णो देवी मंदिर में मची भगदड़ में लोगों की मौत से अत्यंत दुखी हूं। शोक संतप्त परिवारों के प्रति मेरी संवेदना है। घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं। जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा जी, मंत्री डॉ. जितेंद्र सिंह जी और श्री नित्यानंद राय जी से बात की और स्थिति का जायजा लिया।<br /> <br /> वहीं प्रधानमंत्री कार्यालय की ओर से जारी ट्वीट में कहा गया कि माता वैष्णो देवी मंदिर में हुए हादसे में मारे गए लोगों के परिजनों को प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष से दो-दो लाख रुपये की सहायता राशि दी जाएगी। वहीं घायलों को 50-50 हजार रुपये की सहायता राशि प्रदान जाएगी।<br /> <br /> <strong>कोविंद ने कटरा हादसे पर शोक व्यक्त किया</strong><br /> राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद ने जम्मू- कश्मीर में कटरा स्थित माता वैष्णो देवी भवन में मची भगदड़ में लोगों के हताहत होने पर दुख व्यक्त किया है। कोविंद ने शनिवार को ट्विटर पर अपने शोक संदेश मैं कहा कि यह जानकर बड़ा दुख हुआ कि माता वैष्णो देवी भवन में भगदड़ की दुर्भाग्यपूर्ण घटना में श्रद्धालुओं की जान गई है। मृतकों के शोक संतप्त परिजनों के प्रति मेरी शोक संवेदनाएं। सभी घायलों के शीघ्र स्वस्थ होने की कामना करता हूं।<br /> <br /> <br />  </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>भारत</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 01 Jan 2022 11:06:26 +0530</pubDate>
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