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                <title>सात वार्डों की ऑडिट में छलका लोगों का दर्द: अरमान था हमकों जिसका, वह गुल खिला नहीं!</title>
                                    <description><![CDATA[ ट्रांसपोर्ट नगर में जलभराव, महावीर नगर में सीवरेज चेंबर बने हादसों का खतरा; सुविधाओं के अभाव पर वार्डवासियों का फूटा गुस्सा]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/residents--anguish-surfaces-during-audit-of-seven-wards--%22the-dream-we-cherished-never-came-to-fruition-%22/article-163980"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/1200-x-60-px)-(youtube-thumbnail)-(5)2.png" alt=""></a><br /><p> कोटा। शहर के छह वार्डों की दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्टिंग में विकास के दावों और जमीनी हकीकत के बीच बड़ा अंतर सामने आया है। चुनाव के समय बेहतर सड़क, पर्याप्त पानी, सफाई व्यवस्था और अन्य मूलभूत सुविधाओं के जो सपने क्षेत्रवासियों को दिखाए गए थे, वे आज भी कई इलाकों में अधूरे नजर आ रहे हैं। लोगों का दर्द साफ शब्दों में सामने आया—“अरमान था जिसका, वह गुल खिला नहीं।” करोड़ों रुपए के विकास कार्यों के दावों के बावजूद वार्डों में लोग आज भी नल, पानी, सफाई और अन्य छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं के लिए परेशान हैं।</p>
<p>दैनिक नवज्योति की सात वार्डों में की गई जमीनी पड़ताल में सामने आया कि कई क्षेत्रों में पानी की समस्या लंबे समय से बनी हुई है। कहीं नलों में पर्याप्त पानी नहीं पहुंच रहा तो कहीं जलापूर्ति की व्यवस्था को लेकर लोगों में नाराजगी है। इसके साथ ही सफाई व्यवस्था भी वार्डवासियों के लिए बड़ी परेशानी बनी हुई है। कई स्थानों पर नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी फैली रहती है और लोगों को दुर्गंध व मच्छरों जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>ट्रांसपोर्ट नगर में नालियों के अभाव से जलभराव</strong><br />ट्रांसपोर्ट नगर क्षेत्र में नालियों का समुचित निर्माण नहीं होने से बरसात के दिनों में हालात और अधिक खराब हो जाते हैं। पानी निकासी की व्यवस्था कमजोर होने के कारण कई जगह पानी भर जाता है। लोगों का कहना है कि नालियों के निर्माण और रखरखाव पर गंभीरता से ध्यान नहीं दिया गया। कई नालियां जाम होने के कारण बारिश के दौरान गंदा पानी सड़कों और आसपास के इलाकों में फैल जाता है। इससे आवागमन प्रभावित होता है और क्षेत्रवासियों को भारी परेशानी उठानी पड़ती है। लोगों का कहना है कि हर वर्ष बारिश में यही स्थिति बनती है, लेकिन स्थायी समाधान के लिए प्रभावी कदम नहीं उठाए गए।</p>
<p><strong>महावीर नगर में सीवरेज चेंबर बने दुर्घटना का खतरा</strong><br />महावीर नगर क्षेत्र में सीवरेज लाइन बिछाने के कार्य में भी खामियां सामने आई हैं। क्षेत्रवासियों के अनुसार सीवरेज चेंबरों के ढक्कन सड़क की सतह के अनुरूप नहीं हैं। कहीं ढक्कन ऊपर हैं तो कहीं नीचे, जिससे वाहन चालकों और राहगीरों के लिए दुर्घटना का खतरा बना रहता है। दोपहिया वाहन चालकों को विशेष रूप से परेशानी होती है। लोगों का कहना है कि विकास कार्यों में केवल निर्माण ही पर्याप्त नहीं है, बल्कि उसकी गुणवत्ता और सुरक्षा भी उतनी ही जरूरी है। खराब तरीके से किए गए कार्य लोगों के लिए सुविधा के बजाय परेशानी का कारण बन रहे हैं।</p>
<p><strong>अनंतपुर थाने के पीछे नाले पर अतिक्रमण से बढ़ी परेशानी</strong><br />अनंतपुर थाने के पीछे स्थित नाले में लोगों द्वारा किए गए अतिक्रमण के कारण पानी की निकासी प्रभावित होने की बात भी सामने आई। नाले की चौड़ाई और जल निकासी क्षमता प्रभावित होने से क्षेत्र में जलभराव की समस्या बनी रहती है। बरसात के दौरान स्थिति और गंभीर हो जाती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि समय रहते अतिक्रमण हटाकर नाले की सफाई और उचित व्यवस्था की जाए तो जलभराव की समस्या से काफी हद तक राहत मिल सकती है।</p>
<p>वार्ड में सुविधाओं की कमी को लेकर लोगों का गुस्सा खुलकर सामने आया। कई क्षेत्रों में न तो सामुदायिक भवन है, न लोगों की जरूरत के अनुसार डिस्पेंसरी की व्यवस्था और न ही बच्चों व बुजुर्गों के लिए पर्याप्त पार्क। वार्डवासियों का कहना है कि जनप्रतिनिधियों को केवल बड़े विकास कार्यों के आंकड़े बताने के बजाय लोगों की रोजमर्रा की जरूरतों को समझना चाहिए। लोगों का सवाल है कि यदि पांच साल में वार्डों में पानी, सफाई, सड़क, नाली और अन्य मूलभूत सुविधाएं ही उपलब्ध नहीं कराई जा सकीं तो आखिर विकास किसका हुआ?</p>
<p><strong>करोड़ों के दावों के बीच बुनियादी सुविधाओं की तलाश</strong><br />जनप्रतिनिधि अक्सर करोड़ों रुपए के विकास कार्य करवाने के दावे करते हैं, लेकिन दैनिक नवज्योति की ग्राउंड रिपोर्टिंग में कई जगहों पर अलग तस्वीर दिखाई दी। क्षेत्रवासी आज भी छोटी-छोटी बुनियादी सुविधाओं के लिए तरस रहे हैं। लोगों का कहना है कि उन्हें आंकड़ों और घोषणाओं से ज्यादा जरूरत धरातल पर काम दिखने की है। साफ सड़क, बेहतर सफाई, सुचारू जलापूर्ति, मजबूत नालियां और सुरक्षित सीवरेज व्यवस्था उनकी प्राथमिक मांग है।<br />छह वार्डों की इस ऑडिट ने साफ कर दिया है कि विकास की तस्वीर केवल दावों से नहीं, बल्कि लोगों के जीवन में आने वाले बदलाव से तय होती है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद जरीना</strong><br />कार्यकाल में वार्ड में विकास कार्यों को प्राथमिकता दी गई और करीब 9 करोड़ रुपए के कार्य करवाए गए। वार्ड में सड़कों का निर्माण कराया गया, जिससे आवागमन की सुविधा बेहतर हुई है। क्षेत्र में सफाई व्यवस्था भी अच्छी बनी रहती है। हालांकि, अनंतपुर थाने के पीछे नाले की समस्या अभी भी बनी हुई है, जिसके समाधान के लिए प्रयास किए जा रहे हैं।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद कमल मीणा</strong><br />वार्ड की सबसे बड़ी समस्या जगपूरा नाले की है। नाले का आधा काम पूरा हो चुका है, जबकि शेष कार्य अभी प्रगति पर है। उन्होंने बताया कि कार्यकाल में खेल मैदान का निर्माण, पानी की पाइपलाइन सहित कई विकास कार्य करवाए गए। सफाई व्यवस्था में कर्मचारियों की कमी के कारण परेशानी आती है, जिसे दूर करने की जरूरत है।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद विनय कुमार</strong><br />पांच वर्षों के कार्यकाल में वार्ड में कई विकास कार्य करवाए गए और लोगों की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर बनाने का प्रयास किया गया। हालांकि, वार्ड के कुछ क्षेत्रों में धीमी गति से पानी आने की समस्या आज भी बनी हुई है। ट्रांसपोर्ट नगर में जलभराव और अन्य परेशानियों को देखते हुए जल्द ही नालियों के निर्माण का कार्य करवाया जाएगा।</p>
<p><strong>पूर्व पार्षद सुनील गौतम</strong></p>
<p>वार्ड की सबसे बड़ी समस्या सीवरेज लाइन को गलत तरीके से डालने के कारण बनी हुई है, जिससे लोगों को परेशानियों का सामना करना पड़ता है। नालों की समस्या भी क्षेत्र में बनी हुई है। उन्होंने बताया कि वार्ड के पांच कचरा पॉइंट में से चार को कचरा मुक्त कराया गया है और एक पर काम शेष है। साथ ही पार्क का निर्माण भी कराया गया।</p>
<p><strong>वार्डवासी मनीष नागर</strong><br />क्षेत्र में आज भी कई मूलभूत समस्याएं बनी हुई हैं। उनका कहना है कि पांच साल पहले लोगों से जो वादे किए गए थे, उनमें से कई आज तक पूरे नहीं हो पाए हैं। वार्ड में पानी और सफाई की समस्या लगातार बनी हुई है। कई अन्य समस्याओं का भी समाधान नहीं हुआ है, जिससे वार्डवासियों में जनप्रतिनिधियों और प्रशासन के प्रति नाराजगी है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर 22 से 28 तक के क्षेत्र</strong><br />वार्ड नंबर 22: टैगोर नगर, चाणक्य नगर, रानी लक्ष्मीबाई नगर, बोम्बे योजना, स्वामी विवेकानंद नगर, दीप श्री, शुभ अटलांटिस अपार्टमेंट्स, विवेकानंद नगर सहित आसपास के क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 23: विधायक कॉलोनी, विश्व नगर से नाले तक का क्षेत्र, रंगबाड़ी योजना सेक्टर-1 व 2, बालाजी नगर, कृष्णा नगर, नारकोटिक्स कार्यालय एवं पावर हाउस क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 24: गणपति ट्रेडर्स, रंगबाड़ी का संपूर्ण क्षेत्र, रंगबाड़ी बालाजी मंदिर, विनोबा भावे नगर, अजय आहूजा नगर, मुंबई योजना एवं उड़िया बस्ती शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 25: संपूर्ण बरड़ा बस्ती, क्रेशर बस्ती, ट्रक यूनियन के पीछे का क्षेत्र, मल्टीस्टोरी क्षेत्र, ट्रक यूनियन के सामने का क्षेत्र, बॉम्बे योजना, सुभाष नगर एवं श्मशान क्षेत्र शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 26: संपूर्ण तालाब गांव, घोसी मोहल्ला, अनंतपुरा कच्ची बस्ती, अमीन भाई फार्म हाउस, संपूर्ण सुभाष विहार, पुराना अनंतपुरा थाना, आमिर कॉलोनी, देव कॉलोनी एवं राजपूत कॉलोनी शामिल हैं।<br />वार्ड नंबर 27: दीनदयाल नगर, सुभाष नगर प्रथम व द्वितीय, ट्रांसपोर्ट नगर तथा गोबरिया बावड़ी कच्ची बस्ती का क्षेत्र शामिल है।<br />वार्ड नंबर 28: कॉमर्स कॉलेज चौराहा, झालावाड़ रोड, गोबरिया बावड़ी, रेलवे लाइन क्षेत्र, रेलवे लाइन अंडरपास, कोलीपाड़ा, ओम एनक्लेव, विज्ञान नगर, श्मशान नगर, इंदिरा कॉलोनी, पंचवटी कॉलोनी एवं राजीव गांधी स्पेशल क्षेत्र शामिल हैं।</p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 27 Aug 2026 14:08:10 +0530</pubDate>
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                <title>सड़क, सफाई और रोड लाइट बनी सबसे बड़ी समस्या, अतिक्रमण से संकरे हो रहे रास्ते</title>
                                    <description><![CDATA[पार्कों में सुविधाओं की कमी, तलवंडी में बढ़ता अतिक्रमण लोगों के लिए परेशानी]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/roads--sanitation--and-street-lighting-emerge-as-major-issues--encroachment-narrowing-pathways/article-163559"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(3)46.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के वार्ड नंबर 55, 56, 57, 58 और 59 की ग्राउंड रिपोर्ट में शहर की कई ऐसी समस्याएं सामने आईं, जिनसे स्थानीय लोग लंबे समय से जूझ रहे हैं। पांचों वार्डों में लोगों ने सबसे ज्यादा परेशानी सड़क, सफाई और रोड लाइट को लेकर बताई। कई क्षेत्रों में रोड लाइटें लगी होने के बावजूद जलती नहीं हैं, तो कुछ जगहों पर रोशनी की पर्याप्त व्यवस्था ही नहीं है। शाम ढलने के बाद अंधेरा होने से लोगों को आवागमन में परेशानी होती है। स्थानीय लोगों का कहना है कि अंधेरे वाले क्षेत्रों में असामाजिक और आपराधिक गतिविधियों का खतरा भी बना रहता है। महावीर नगर प्रथम क्षेत्र के पार्कों में लगी लाइटों की चोरी भी लोगों के लिए चिंता का विषय बनी हुई है। लोगों का कहना है कि पार्कों में रोशनी की व्यवस्था होने के बावजूद लाइटें चोरी हो जाने से शाम के समय पार्कों की सुरक्षा व्यवस्था कमजोर हो जाती है। ऐसे में पार्कों की नियमित निगरानी और चोरी रोकने के लिए ठोस व्यवस्था की जरूरत है।</p>
<p><strong>तलवंडी में थड़ियों-गुमटियों से बढ़ता अतिक्रमण, रास्ते हो रहे संकरे</strong><br />तलवंडी क्षेत्र में अतिक्रमण की समस्या ने भी गंभीर रूप ले लिया है। स्थानीय लोगों के अनुसार जगह-जगह थड़ियां और गुमटियां लगाकर सार्वजनिक स्थानों पर कब्जा किया जा रहा है। सड़क किनारे और रास्तों पर बढ़ते अतिक्रमण से आवागमन प्रभावित हो रहा है। लोगों का कहना है कि धीरे-धीरे अतिक्रमण बढ़ने के कारण कई स्थानों पर रास्ते संकरे होते जा रहे हैं। लोगों ने प्रशासन से अतिक्रमण की पहचान कर नियमित कार्रवाई करने और हटाए गए अतिक्रमण पर दोबारा कब्जा नहीं होने की व्यवस्था करने की मांग की है।</p>
<p><strong>पार्क हैं, लेकिन बच्चों के लिए झूले और सुविधाएं नदारद</strong><br />वार्डों में पार्कों की मौजूदगी के बावजूद कई जगह बच्चों के मनोरंजन के लिए पर्याप्त सुविधाएं नहीं हैं। लोगों का कहना है कि पार्कों में बच्चों के लिए झूले लगाए जाने चाहिए, ताकि वे सुरक्षित माहौल में खेल सकें। कई पार्कों में बैठने, रोशनी और रखरखाव की भी जरूरत है। स्थानीय लोगों की मांग है कि पार्कों को केवल विकसित करने तक सीमित नहीं रखा जाए, बल्कि उनकी नियमित देखरेख भी सुनिश्चित की जाए।</p>
<p><strong>वार्ड संख्या व क्षेत्र</strong><br />वार्ड संख्या 55 का क्षेत्र: सिटी पार्क, राजीव गांधी नगर, महावीर नगर प्रथम एवं पत्रकार कॉलोनी का क्षेत्र इस वार्ड में शामिल है।<br />वार्ड संख्या 56 का क्षेत्र: न्यू राजीव गांधी नगर, फ्रेंड्स बाजार, पीएमसी हॉस्पिटल, तलवंडी सेक्टर-1ए, आधा इंदिरा विहार एवं भाटिया बिल्डिंग का क्षेत्र इस वार्ड में शामिल है।<br />वार्ड संख्या 57 का क्षेत्र: संपूर्ण तलवंडी सेक्टर-4 एवं सेक्टर-5 तथा तलवंडी सेक्टर-ए और सेक्टर-बी का संपूर्ण भाग इस वार्ड में शामिल है।<br />वार्ड संख्या 58 का क्षेत्र: विज्ञान नगर आवासीय योजना के सेक्टर-2 एवं सेक्टर-3 की निर्धारित ब्लॉक संख्या, हरमीत मेडिकल, सुश्रुत मल्टीस्पेशलिटी अस्पताल, जायसवाल अस्पताल, राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय विज्ञान नगर एवं झूलेलाल पार्क का क्षेत्र इस वार्ड में शामिल है।<br />वार्ड संख्या 59 का क्षेत्र: पीएचईडी कॉलोनी, पीडब्ल्यूडी कॉलोनी, पी एंड टी कॉलोनी सहित विज्ञान नगर आवासीय योजना के सेक्टर-2 की निर्धारित ब्लॉक संख्या तथा सेक्टर-4 की ब्लॉक संख्या इस वार्ड में शामिल है।</p>
<p>वार्ड के विकास कार्यों को केवल कार्यकाल तक सीमित नहीं रखा गया है, बल्कि आज भी क्षेत्र की समस्याओं पर लगातार नजर रखी जाती है। समय-समय पर वार्ड का दौरा कर व्यवस्थाओं की स्थिति देखी जाती है और जरूरत के अनुसार संबंधित विभाग से समाधान करवाने का प्रयास किया जाता है।<br /><strong>-विवेक मित्तल,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्डवासियों की मूलभूत सुविधाओं को प्राथमिकता दी गई। इंदिरा विहार क्षेत्र में लंबे समय से बनी हुई पानी की समस्या को दूर करवाया गया, जिससे स्थानीय लोगों को राहत मिली। शिकायतों का जल्द से जल्द समाधान करवाने का प्रयास किया जाता है। खराब लाइट की सूचना मिलते ही संबंधित कर्मचारियों से संपर्क कर उसे दुरुस्त करवाया जाता है, ताकि रात के समय लोगों को परेशानी न हो।<br /><strong>-योगेश अहलूवालिया ,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्डवासियों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करवाना उनकी सबसे बड़ी प्राथमिकता रही। आवागमन सुगम हुआ और लंबे समय से खराब सड़कों की समस्या दूर हुई। उन्होंने बताया कि वार्ड की प्रत्येक गली में रोड लाइटें लगवाई गईं, ताकि रात के समय लोगों को पर्याप्त रोशनी मिल सके और सुरक्षा व्यवस्था भी बेहतर हो।<br /><strong>-योगेंद्र कुमार शर्मा,पूर्व पार्षद </strong></p>
<p>वार्ड क्षेत्र में अतिक्रमण का जाल लगातार फैलता जा रहा है। जगह-जगह लोगों ने सड़क किनारे और सार्वजनिक स्थानों पर कब्जे कर रखे हैं, लेकिन प्रशासन की ओर से इस समस्या को लेकर प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आती। अतिक्रमण के कारण आम लोगों को आवागमन में परेशानी होती है ।<br /><strong>-हितेश कुशाल सेन,वार्डवासी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 22 Aug 2026 12:00:19 +0530</pubDate>
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                <title>कहीं सफाई-रोशनी बेहाल, कहीं चंबल के शहर में पानी का इंतजार</title>
                                    <description><![CDATA[ जमीनी हकीकत में सामने आईं मूलभूत सुविधाओं की तस्वीरें ।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/sanitation-and-lighting-in-disarray-in-some-areas--a-wait-for-water-in-this-city-by-the-chambal/article-163409"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)-(4)27.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नए वार्डों की हकीकत जानने के लिए की गई ग्राउंड रिपोर्टिंग में अलग-अलग तस्वीरें सामने आईं। छह वार्डों में लोगों से बातचीत के दौरान सबसे ज्यादा शिकायतें सफाई, सड़क और स्ट्रीट लाइट से जुड़ी मिलीं। कई इलाकों में लोगों का कहना है कि जनप्रतिनिधि चुनाव के दौरान समस्याएं दूर करने के दावे तो करते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद वही समस्याएं जस की तस रह जाती हैं। वहीं कुछ वार्ड ऐसे भी मिले, जहां लोगों ने मूलभूत सुविधाओं को लेकर संतोष जताया और जनप्रतिनिधि के उपलब्ध रहने को बड़ी उपलब्धि बताया। छह वार्डों की जमीनी तस्वीर बताती है कि एक ही शहर में सुविधाओं को लेकर अलग-अलग तस्वीरें मौजूद हैं।</p>
<p><strong>वार्ड 35 में सफाई और लाइट की समस्या से परेशान लोग</strong><br />वार्ड नंबर 35 में आने वाले इलाकों में लोगों ने सबसे ज्यादा परेशानी सफाई व्यवस्था और स्ट्रीट लाइट को लेकर बताई। स्थानीय लोगों के अनुसार कई जगह नियमित सफाई नहीं होने से गंदगी की समस्या बनी रहती है। वहीं रात के समय कई स्थानों पर पर्याप्त रोशनी नहीं होने से लोगों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। स्थानीय लोगों की मांग है कि सफाई व्यवस्था नियमित की जाए और खराब पड़ी स्ट्रीट लाइट को समय पर दुरुस्त किया जाए, ताकि रात में आवागमन करने वालों को परेशानी नहीं हो।</p>
<p><strong>चंबल किनारे बसे शहर में पानी को तरस रही पूनम कॉलोनी</strong><br />वार्ड नंबर 37 की पूनम कॉलोनी में ग्राउंड रिपोर्टिंग के दौरान पानी की समस्या सबसे बड़ी चुनौती बनकर सामने आई। कॉलोनीवासियों का कहना है कि जिस शहर में चंबल नदी बहती है, उसी शहर की एक कॉलोनी के लोगों को आज तक चंबल का पानी नसीब नहीं हो पा रहा है। लोगों के मुताबिक कॉलोनी में अब तक पाइपलाइन तक नहीं डाली गई है। वर्षों से समस्या झेल रहे परिवार अब केवल आश्वासन नहीं, बल्कि स्थायी समाधान चाहते हैं।</p>
<p><strong>मूलभूत सुविधाएं व्यवस्थित, पार्षद से सीधे संवाद से लोग संतुष्ट</strong><br />छह वार्डों की ग्राउंड रिपोर्ट में वार्ड नंबर 40 की तस्वीर बाकी वार्डों से अलग नजर आई। यहां वार्डवासियों ने क्षेत्र की स्थिति को संतोषजनक बताया। लोगों के अनुसार वार्ड में सामुदायिक भवन, पार्क, सड़क, स्ट्रीट लाइट और सफाई व्यवस्था जैसी मूलभूत सुविधाएं व्यवस्थित हैं। स्थानीय लोगों ने सबसे सकारात्मक बात पार्षद की उपलब्धता को बताया। उनका कहना है कि जब भी पार्षद से मिलने का समय तय होता है, वे उस समय उपलब्ध रहते हैं और लोगों की समस्याएं सुनते हैं। वार्डवासियों के अनुसार समस्याओं के समाधान के लिए जनप्रतिनिधि तक सीधी पहुंच होना भी विकास का महत्वपूर्ण हिस्सा है।</p>
<p><strong>वार्ड नंबर व शामिल क्षेत्र</strong><br />-वार्ड नंबर 35| चित्रेश नगर, पार्वतीपुरम, महात्मा गांधी कॉलोनी, खारी बावड़ी, मण्दीपाड़ा, रेल विहार कॉलोनी, कृषि फार्म, सुमन नगर, श्रीजी विहार आदि क्षेत्र।<br />-वार्ड नंबर 36| रामदास नगर, लक्ष्मी नगर, गोपाल विहार, काला तालाब, रंग तालाब, चौथ माता मंदिर, बाबड़ी, लोको कॉलोनी, रजा नगर, श्रीराम विहार, कृष्ण विहार, पुरोहित नगर आदि क्षेत्र।<br />-वार्ड नंबर 37| पूनम कॉलोनी, छोटा सोगरिया, सोगरिया ग्राम पंचायत का भाग, गणपति नगर, दुर्गा नगर, प्रताप टाउनशिप आदि क्षेत्र।<br />-वार्ड नंबर 38| न्यू रेलवे कॉलोनी, सरस्वती कॉलोनी, रेलवे अस्पताल, रेलवे वर्कशॉप ग्राउंड, तुल्लापुरा, रेलवे कॉलोनी, पुरानी रेलवे कॉलोनी, वर्कशॉप, जेपी कॉलोनी, उड़िया बस्ती, हरिजन बस्ती, रेलवे प्लेटफॉर्म नंबर 4 के सामने का समस्त क्षेत्र, शिवाजी कॉलोनी, पुरोहित जी की टापरी, सुंदर नगर आदि क्षेत्र।<br />-वार्ड नंबर 39| जनकपुरी, इंदिरा कॉलोनी, आदर्श कॉलोनी, रेलवे सोसाइटी, सेंट पॉल स्कूल, माला फाटक, कच्ची बस्ती क्षेत्र, राम मंदिर, गुरुद्वारा स्कूल, डाक बंगला स्कूल, राज केसर होटल क्षेत्र आदि।<br />-वार्ड नंबर 40| महाराजा भीम सिंह कॉलोनी, चंबल कॉलोनी, दरबार की कोठी, संपूर्ण आर्मी क्षेत्र, जैन मंदिर क्षेत्र, पोस्ट ऑफिस रोड, मयूर कॉलोनी, रबर फैक्ट्री रोड, मंगलायतन, सनफ्लावर रेस्टोरेंट, उम्मेद भवन आदि क्षेत्र।</p>
<p>पहली बार पार्षद बनने के बाद पहली प्राथमिकता वार्ड की मूलभूत सुविधाओं को बेहतर करना रही। उन्होंने खारी बावड़ी स्थित प्राथमिक विद्यालय का जीर्णोद्धार करवाया। इसके साथ ही वार्ड में रोड़ लाइटें लगवाईं, सीसी रोड का निर्माण करवाया और नालियों का निर्माण कराया। वार्ड में सामुदायिक भवन या पार्क के लिए पर्याप्त भूमि नहीं है, जिसके चलते इन सुविधाओं का विकास संभव नहीं हो पाया।<br /><strong>- रचना शर्मा, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>वार्ड में सबसे बड़ी समस्या खराब सड़कों की थी। इसे दूर करने के लिए मेरे कार्यकाल में कई जगह सीसी रोड का निर्माण करवाया गया। श्मशान के पास और कब्रिस्तान के सामने बने कचरा पॉइंट को हटाना भी बड़ी चुनौती थी, जिसे मेनें हटवाया। वार्ड में रोड लाइट की समस्या भी लंबे समय से बनी हुई थी, जिसे दूर करते हुए नई रोड लाइटें लगवाई गई। वार्ड में सुविधाओं को बेहतर बनाने के लगातार प्रयास किए गए।<br /><strong>- हुकुमचंद, पूर्व पार्षद</strong></p>
<p>कांग्रेस शासन के दौरान वार्डवासियों की मूलभूत सुविधाओं का लगातार ध्यान रखा गया, लेकिन सरकार बदलने के बाद वार्ड में समस्याएं बढ़ने लगीं। अब वार्डवासियों को छोटे-छोटे कामों के लिए भी परेशानी उठानी पड़ रही है। किसी फार्म पर हस्ताक्षर करवाने जैसे सामान्य कार्य के लिए भी लोगों को नगर निगम के चक्कर लगाने पड़ते हैं। इसके बावजूद वहां भी उनकी समस्याओं की सुनवाई नहीं होती। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधि और प्रशासन के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा आमजन को भुगतना पड़ रहा है।<br /><strong>- साजिश खान, निवर्तमान पार्षद</strong></p>
<p>शहर को स्मार्ट सिटी के रूप में पहचान दिलाने की बात की जाती है, लेकिन हमारे वार्ड में स्मार्ट सिटी जैसी सुविधाएं नजर नहीं आतीं। वार्ड में ऐसा कोई पार्क नहीं है, जहां बच्चे खेल सकें और झूला झूल सकें या लोग सुबह-शाम सुकून से टहल सकें। इसी तरह सामुदायिक भवन का भी अभाव है। कई परिवार ऐसे हैं, जो निजी स्तर पर बड़े स्थान पर कार्यक्रम आयोजित करने में सक्षम नहीं हैं। ऐसे में सामुदायिक भवन की सुविधा उनके लिए बेहद जरूरी है।<br /><strong>- राहुल शर्मा, वार्डवासी</strong></p>
<p>भाजपा सरकार के कार्यकाल में वार्ड की सफाई व्यवस्था बदहाल हो गई है। नियमित सफाई नहीं होने से जगह-जगह कचरा जमा रहता है। कचरा संग्रहण के लिए दो वार्डों में एक ही गाड़ी लगा रखी है, जिसके कारण समय पर कचरा नहीं उठ पाता और लोगों को परेशानी होती है। वार्डवासी आज भी सड़क, सफाई और अन्य मूलभूत सुविधाओं के लिए जूझ रहे हैं। नगर निगम में शिकायत करने के बावजूद समस्याओं का समाधान नहीं हो रहा है।<br /><strong>- मोहम्मद शरीफ, वार्डवासी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 20 Aug 2026 15:05:43 +0530</pubDate>
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                <title>अस्पताल या तालाब! बारिश में डूबा अटरू चिकित्सालय परिसर</title>
                                    <description><![CDATA[ नगरपालिका निरीक्षण में खुलासा, बंद नालियां और खराब ड्रेनेज बनीं जलभराव की मुख्य वजह।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/hospital-or-pond--atru-hospital-complex-submerged-in-rainwater/article-162363"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-08/111200-x-600-px)41.png" alt=""></a><br /><p>अटरू। बरसात आते ही अटरू उपजिला चिकित्सालय में मरीजों के  लिए इलाज से पहले पानी से जूझने की  मजबूरी बन जाती है। अस्पताल परिसर में जमा बारिश का पानी व्यवस्था की ऐसी तस्वीर पेश कर रहा है, मानो चिकित्सालय नहीं बल्कि तालाब हो। हर वर्ष सामने आने वाली इस समस्या की पड़ताल में जलभराव की असली वजह सामने आई है। नगरपालिका के निरीक्षण में अस्पताल परिसर की नालियों कचरे, मिट्टी और मलबे से बंद मिलीं, जिसके कारण बारिश का पानी बाहर नहीं निकल पा रहा है। अस्पताल परिसर में पानी भरने से मरीजों, गर्भवती महिलाओं, बुजुर्गों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इलाज के लिए आने वाले लोगों को कई बार पानी भरे रास्तों से होकर अस्पताल तक पहुंचना पड़ता है। जलभराव के कारण संक्रमण फैलने और मच्छरों के पनपने का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>हर मानसून में दोहराती है समस्या</strong><br />स्थानीय लोगों के अनुसार अटरू उपजिला चिकित्सालय में जलभराव की समस्या कोई नई नहीं है। कई वर्षों से बारिश के मौसम में यही स्थिति बनती आ रही है। लोगों का कहना है कि क्षेत्र के प्रमुख सरकारी अस्पताल में जहां मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा  मिलनी चाहिए, वहीं बरसात के दिनों में परिसर में जमा पानी परेशानी का कारण बन जाता है। </p>
<p><strong>निरीक्षण में बंद मिलीं अस्पताल की नालियां</strong><br />जलभराव की शिकायत मिलने पर नगरपालिका के कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव को अस्पताल परिसर का निरीक्षण करने के निर्देश दिए। निरीक्षण के दौरान सामने आया कि अस्पताल परिसर के अंदर बनी कई नालियां कचरे, मिट्टी और मलबे के कारण पूरी तरह बंद पड़ी हैं। इसके चलते बारिश का पानी नालियों के माध्यम से बाहर नहीं निकल पा रहा है और परिसर में जमा हो रहा है। निरीक्षण में यह तथ्य भी सामने आया कि अस्पतालपरिसर का स्तर बाहरी सड़क की तुलना में काफी नीचा है, जबकि बाहर की नालियां ऊंची हो चुकी हैं। इसी वजह से बारिश का पानी बाहर निकलने के बजाय अस्पताल परिसर में ही रुक जाता है और जलभराव की स्थिति बन जाती है।</p>
<p><strong>बीसीएमओ ने बताई वर्षों पुरानी समस्या</strong><br />ब्लॉक चिक्रित्सा अधिकारी डॉ. केशवराज नागर ने बताया कि बरसात के दौरान अस्पताल परिसर में जलभराव की समस्या हर वर्ष सामने आती है। इस संबंध में कई बार नगरपालिका को अवगत कराया है, लेकिन अभी तक स्थायी समाधान नहीं हो पाया है। उन्होंने अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की सफाई कराने के साथ ही स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता बताई।</p>
<p><strong>सिर्फ सफाई नहीं, स्थायी समाधान की जरूरत</strong><br />कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी ने बताया कि अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पहले भी सफाई करवाई जा चुकी है। यदि जल निकासी की समस्या फिर भी बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य निरीक्षक की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने और बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है। समस्या के स्थायी समाधाम के लिए अस्पताल परिसर का स्तर ऊंचा करना होगा। साथ ही अंदर की नालियों का पुनर्निर्माण कर उन्हें बाहरी ड्रेनेज सिस्टम से वैज्ञानिक तरीके से जोड़ना जरूरी है।</p>
<p><strong>नागरिकों ने मांगा स्थायी ड्रेनेज सिस्टम</strong><br />स्थानीय नागरिकों ने जिला प्रशासन और नगरपालिका से मांग की है कि हर वर्ष होने वाली जलभराव की समस्या को केवल नालियों की सफाई तक सीमित न रखा जाए। अस्पताल परिसर में स्थायी जल निकासी व्यवस्था विकसित की जाए, ताकि मानसून के दौरान मरीजों और उनके परिजनों को परेशानी का सामना नहीं करना पड़े।</p>
<p><strong>इनका  कहना है </strong><br /> बरसात के मौसम में अस्पताल परिसर में हर वर्ष जलभराव की समस्या आती है। प्रत्येक वर्ष नगरपालिका को अवगत कराया जाता है, लेकिन अब तक पानी निकासी की स्थायी व्यवस्था नहीं हो सकी। अस्पताल के बाहर जाम पड़े बड़े नालों की सफाई कराने तथा अस्पताल के लिए स्थायी ड्रेनेज सिस्टम विकसित करने की आवश्यकता है ताकि हर मानसून में होने वाली इस समस्या का स्थायी समाधान हो सके।<br /><strong>- डॉ. केशवराज नागर, ब्लॉक चिकित्सा अधिकारी</strong></p>
<p> अस्पताल के बाहर स्थित बड़े नालों की पूर्व में सफाई करवाई जा चुकी है। यदि फिर भी जल निकासी की समस्या बनी हुई है तो दोबारा निरीक्षण कर आवश्यकतानुसार नालों की सफाई करवाई जाएगी। स्वास्थ्य निरीक्षक मदनमोहन भार्गव की रिपोर्ट में अस्पताल परिसर की आंतरिक नालियां बंद होने तथा बाहरी नालियों के ऊंचे स्तर के कारण जल निकासी प्रभावित होने की बात सामने आई है।<br /><strong>- योगेन्द्र प्रसाद त्रिवेदी, कार्यवाहक अधिशासी अधिकारी, नगरपालिका अटरू</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 08 Aug 2026 14:56:53 +0530</pubDate>
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                <title>जलकुंभी की चपेट में राणा प्रताप सागर बांध, फ्लोटर पंप और टरबाइनों पर बढ़ा खतरा</title>
                                    <description><![CDATA[कम वर्षा, बरसाती नालों की सफाई में देरी और अपस्ट्रीम से बहकर आई जलकुंभी ने बढ़ाई चिंता।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/rana-pratap-sagar-dam-is-plagued-by-water-hyacinth--risks-to-floating-pumps-and-turbines-have-increased/article-161426"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-07/111200-x-600-px)-(3)16.png" alt=""></a><br /><p>रावतभाटा । प्रदेश के प्रमुख जल स्रोतों में शामिल राणा प्रताप सागर बांध इन दिनों जलकुंभी (वॉटर हाईसिन्थ) के बढ़ते प्रकोप से जूझ रहा है। कम वर्षा, बरसाती नालों की समय पर सफाई नहीं होने और अपस्ट्रीम क्षेत्रों से बहकर आई जलकुंभी के कारण बांध का बड़ा क्षेत्र इसकी चपेट में आ गया है। इससे बांध की जल गुणवत्ता, जलीय जीव-जंतुओं के साथ-साथ फ्लोटर पंप, टरबाइन और पेयजल आपूर्ति व्यवस्था पर भी खतरा बढ़ गया है।</p>
<p>विशेषज्ञों के अनुसार जलकुंभी पानी की सतह पर तेजी से फैलने वाला पौधा है, जो पानी में घुलित ऑक्सीजन की मात्रा को कम कर देता है। इसके कारण मछलियों सहित अन्य जलीय जीवों के जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। वर्तमान में मत्स्य प्रजनन काल होने के कारण इसका असर और गंभीर माना जा रहा है। समय रहते नियंत्रण नहीं किया गया तो मत्स्य पालन से जुड़े लोगों की आजीविका भी प्रभावित हो सकती है।</p>
<p><strong>स्थानीय लोगों ने उठाई विशेष सफाई अभियान की मांग</strong><br />स्थानीय लोगों का कहना है कि यदि बरसात से पहले बरसाती नालों की नियमित सफाई और जलकुंभी हटाने के लिए विशेष अभियान चलाया जाता तो स्थिति इतनी गंभीर नहीं होती। समय रहते प्रभावी कदम नहीं उठाए गए तो जलकुंभी की समस्या पर्यावरण, जलीय जैव विविधता और शहर की पेयजल व्यवस्था के लिए बड़ी चुनौती बन सकती है।</p>
<p><strong>धीमे जल प्रवाह से बढ़ा फैलाव</strong><br />राणा प्रताप सागर बांध का वर्तमान जलस्तर 1139.34 फीट दर्ज किया गया है। 28 जुलाई 2026 तक राणा प्रताप सागर क्षेत्र में 235.20 मिमी, गांधी सागर में 199.00 मिमी, जवाहर सागर में 250.10 मिमी और कोटा बैराज क्षेत्र में 195.20 मिमी वर्षा दर्ज की गई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अपेक्षाकृत कम वर्षा और जल प्रवाह की धीमी गति के कारण जलकुंभी को फैलने का अनुकूल वातावरण मिला है।</p>
<p>अपस्ट्रीम क्षेत्रों के बरसाती नालों से बहकर जलकुंभी बांध क्षेत्र में पहुंचती है। यदि मानसून से पहले इन नालों की प्रभावी सफाई कर दी जाए तो जलकुंभी की समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। जलकुंभी के कारण फ्लोटर पंप और टरबाइनों की कार्यक्षमता प्रभावित होती है, जिससे इनके संचालन में बाधाएं उत्पन्न हो सकती हैं।<br /><strong>- आशीष जैन, अधिशासी अभियंता, राणा प्रताप सागर बांध</strong></p>
<p>जलकुंभी के कारण फ्लोटर पंपों के संचालन में परेशानी आती है। इससे पेयजल आपूर्ति व्यवस्था प्रभावित होने की आशंका बनी रहती है। विभाग की ओर से आवश्यकता के अनुसार सफाई और निगरानी की जाती है, ताकि जलापूर्ति व्यवस्था सुचारू बनी रहे।<br /><strong>- पवन शर्मा, अधिशासी अभियंता,जलदाय विभाग</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 30 Jul 2026 15:09:17 +0530</pubDate>
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                <title>कीचड़ भरी सड़क, राहगीरों की राह में बनी रोड़ा</title>
                                    <description><![CDATA[भीषण गर्मी और उमस  में क्षेत्र में मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप भी बढ़ रहा है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/jhalawar/mud-filled-roads-become-a-major-obstacle-for-commuters/article-155978"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)-(4).png" alt=""></a><br /><p>पनवाड़ । पनवाड़ क्षेत्र की ग्राम पंचायत पखराना के मुख्य गांव में इन दिनों स्वच्छता और विकास के दावों की जमीनी हकीकत कुछ और ही बयां कर रही है, क्योंकि गांव के मुख्य आम रास्ते पर लंबे समय से नालियों की सुध नहीं लिए जाने के कारण हालात बदतर हो चुके हैं। नालियों में भारी मात्रा में कचरा और गंदगी फंसी होने से वे पूरी तरह चोक हो चुकी हैं, जिसके चलते गंदे पानी की निकासी पूरी तरह बंद है और यही दूषित पानी ओवरफ्लो होकर मुख्य सड़क पर बह रहा है, जिसका नतीजा यह है कि पूरी सड़क अब कीचड़ के दलदल में तब्दील हो चुकी है और राहगीरों को भारी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। </p>
<p>इस गंभीर समस्या को लेकर ग्रामीण संजय गुर्जर, अभिषेक मेहता, नितेश मेहता, सोनू मेहता, मुकेश मेहता और भुवनेश मेहता ने बताया कि यह गांव का मुख्य आम रास्ता है जिससे होकर पूरे गांव की आवाजाही होती है और अभी दो दिन पूर्व हुई सामान्य बारिश के बाद से ही सड़क पर कीचड़ ही कीचड़ हो गया है जिससे ग्रामीणों का यहाँ से पैदल निकलना भी पूरी तरह दुश्वार हो गया है। ग्रामीणों ने प्रशासन का ध्यान इस ओर आकर्षित करते हुए कहा कि अगर समय रहते इस समस्या की सुध नहीं ली गई और नालियों की साफ-सफाई नहीं कराई गई तो आगामी बरसात का मुख्य मौसम आने वाला है जिसमें यहाँ की स्थिति और भी ज्यादा भयानक होने वाली है। राहगीर इस कीचड़ में फिसलकर गिर रहे हैं जिससे कई लोग चोटिल भी हो चुके हैं और इसमें सबसे ज्यादा परेशानी छोटे बच्चों, गर्भवती महिलाओं और बुजुर्गों को उठानी पड़ रही है। </p>
<p>सड़क पर लगातार गंदे और दूषित पानी का भराव रहने से जहां एक तरफ राहगीरों को गुजरना पड़ रहा है । वहीं दूसरी तरफ भीषण गर्मी और उमस के इस मौसम में क्षेत्र में मच्छरों और मक्खियों का प्रकोप बढ़ने लगा है जिससे ग्रामीणों में अब मलेरिया, डेंगू जैसी संक्रामक और गंभीर बीमारियां फैलने का बड़ा खतरा सता रहा है। इस पूरे मामले में जब ग्राम पंचायत प्रशासन से जानकारी ली गई तो बताया कि सफाई ठेकेदार को हर महीने नियमित रूप से भुगतान किया जा रहा था,उसके बावजूद भी ग्राम पंचायत क्षेत्र में साफ-सफाई दुरुस्त नहीं की जा रही थी। सफाई व्यवस्था को लेकर ग्रामीणों की तरफ से निरंतर आ रही शिकायतों को देखते हुए ग्राम पंचायत द्वारा पिछले लगभग 6 महीने से ठेकेदार का भुगतान रोक दिया गया है। ठेकेदार को ग्राम पंचायत द्वारा भुगतान देने के बावजूद वह सफाई कर्मचारियों को समय पर भुगतान नहीं कर रहा था और यदि भुगतान दिया भी जाता था तो वह अधूरा होता था, जिस कारण आर्थिक तंगी की वजह से सफाई कर्मचारी भी काम करने में असमर्थ थे और इसी खींचतान की वजह से गांव की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई।</p>
<p>ठेकेदार द्वारा पंचायत क्षेत्र में नियमित साफ-सफाई नहीं करने और घोर लापरवाही बरतने को लेकर विकास अधिकारी खानपुर को अवगत करा रखा है और उचित कार्रवाई की मांग की गई है। ग्रामीणों को इस समस्या से जल्द राहत दिलाने के प्रयास करेंगे।<br /><strong>- गोविंद मेहता प्रशासक ग्राम पंचायत पखराना</strong></p>
<p>वर्तमान में पखराना ग्राम पंचायत के विकास अधिकारी अवकाश पर चल रहे हैं। उनके ड्यूटी पर लौटते ही इस पूरे मामले को गंभीरता से लेते हुए नियमानुसार कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। समस्या का जल्द से जल्द स्थायी समाधान करवाया जाएगा।<br /><strong>- रविन्द्र शर्मा, विकास अधिकारी खानपुर </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>झालावाड़</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 04 Jun 2026 15:31:10 +0530</pubDate>
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                <title>एक करोड़ की लागत से लगे सीसीटीवी कैमरे एक वर्ष से  बंद, सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल</title>
                                    <description><![CDATA[पुलिस और व्यापारियों ने की जल्द मरम्मत की मांग]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/cctv-cameras-installed-at-a-cost-of-one-crore-rupees-have-been-non-functional-for-a-year/article-155720"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-06/1111200-x-600-px)5.png" alt=""></a><br /><p>इटावा। इटावा नगर पालिका क्षेत्र में करीब एक करोड़ रुपए की लागत से लगाए गए सीसीटीवी कैमरे पिछले लगभग एक वर्ष से बंद बंद पड़े हैं। नगर की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत बनाने के उद्देश्य से स्थापित किए गए ये कैमरे अब मरम्मत के अभाव में, शोपीस बनकर रह गए हैं। इससे पुलिस की निगरानी व्यवस्था प्रभावित होने के साथ ही अपराध नियंत्रण में भी कठिनाइयां आ रही हैं।</p>
<p>नगर की सुरक्षा व्यवस्था को सुदृढ़ बनाने के लिए लगभग तीन वर्ष पूर्व नगरपालिका द्वारा प्रमुख चौराहों एवं सार्वजनिक स्थलों पर सीसीटीवी कैमरे लगाए गए थे। करीब एक करोड़ रुपए की लागत से स्थापित इस प्रणाली को सीधे पुलिस थाने से जोड़ा गया था, ताकि नगर में होने वाली गतिविधियों पर निगरानी रखी जा सके। लेकिन वर्तमान में अधिकांश कैमरे बंद पड़े होने से यह व्यवस्था लगभग निष्प्रभावी हो गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि पिछले एक वर्ष से अधिक समय से अधिकांश कैमरे खराब हैं। कई स्थानों पर कैमरों की केबलें भी क्षतिग्रस्त हो चुकी हैं। इसके बावजूद अब तक मरम्मत कार्य नहीं हो पाया है। नागरिकों और पुलिस विभाग द्वारा कई बार नगरपालिका प्रशासन को लिखित एवं मौखिक रूप से अवगत कराने के बावजूद समस्या जस की तस बनी हुई है।</p>
<p><strong>मंडी परिसर के कैमरे भी बंद</strong><br />इटावा कृषि उपज मंडी में भी अधिकांश सीसीटीवी कैमरे खराब पड़े हैं। मंडी परिसर और विभिन्न याडों में लगे आधा दर्जन से अधिक कैमरों के बंद होने से चोरी की घटनाओं पर निगरानी नहीं हो पा रही है। मंड़ी व्यापारी नवीन मंगल ने बताया कि आए दिन किसानों और व्यापारियों की उपज चोरी होने की शिकायतें सामने आती हैं, लेकिन कैमरे बंद होने के कारण आरोपियों की पहचान नहीं हो पाती। उन्होंने मंडी प्रशासन से शीघ्र मरम्मत कराने की मांग की है।</p>
<p><strong>पुलिस ने कई बार लिखा पत्र</strong><br />इटावा थाना प्रभारी अजीत सिंह चौधरी ने बताया कि नगर के प्रमुख चौराहों एवं सार्वजनिक स्थलों पर लगे सीसीटीवी कैमरे उनके कार्यभार संभालने से पहले से ही खराब हैं। कैमरों के रखरखाव और मरम्मत की जिम्मेदारी, नगरपालिका की है। इस संबंध में नगरपालिका को कई बार लिखित रूप से पत्र भेजे जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि कैमरों के संचालन से अपराधों की रोकथाम और जांच में काफी सहायता मिलती है।</p>
<p><strong>कैमरे बंद होने से सुरक्षा व्यवस्था हुई प्रभावित</strong><br />नगर के व्यापारियों ने भी प्रमुख चौराहों और बाजार क्षेत्रों में लगे सीसीटीवी कैमरों को जल्द चालू करवाने की मांग की है। व्यापारी राकेश मित्तल, रिंकू जैन, मनीष अग्रवाल, विनोद सोनी और नरेंद्र नागर सहित अन्य व्यापारियों का कहना है कि कैमरों के संचालन से असामाजिक तत्वों पर अंकुश रहता था। कैमरे बंद होने से सुरक्षा व्यवस्था प्रभावित हुई है।</p>
<p>कैमरे लगाने वाली कंपनी की गारंटी अवधि समाप्त हो चुकी है। पूर्व में संवेदक के माध्यम से कैमरों की मरम्मत करवाई गई थी। अब पुनः कैमरों को चालू कराने के लिए संबंधित संवेदक को पत्र भेजा गया है और जल्द ही मरम्मत कराकर कैमरों को शुरू करवाया जाएगा।<br /><strong>-राजूलाल मीणा, अधिशासी अधिकारी, नगर पालिका, इटावा </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 02 Jun 2026 14:14:02 +0530</pubDate>
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                <title>असर का  खबर : झूलती 11 केवी लाइन का खतरा टला, नए पोल लगाकर ऊंचे किए तार </title>
                                    <description><![CDATA[प्रशासन के निर्देश पर विद्युत विभाग ने मौके पर समस्या का तुरंत समाधान कर दिया।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/impact-of-the-report--threat-posed-by-sagging-11-kv-line-averted--wires-raised-by-installing-new-poles/article-152632"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-05/1111200-x-600-px)-(3)6.png" alt=""></a><br /><p>सारथल। सारथल उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत गांगटी में मुख्य सड़क मार्ग पर झूल रही 11 केवी विद्युत लाइन से बना बड़ा खतरा अब टल गया है। 2 मई को दैनिक नवज्योति में “हाई वोल्टेज लाइन से खतरा” शीर्षक से खबर प्रकाशित होने के बाद प्रशासन हरकत में आया और गांगटी ग्राम पंचायत में झूल रही 11 केवी विद्युत लाइन की समस्या का त्वरित समाधान करते हुए तारों को ऊंचा कर आमजन के लिए मार्ग को सुरक्षित बना दिया। ग्रामीणों की शिकायत पर प्रशासन ने त्वरित संज्ञान लेते हुए विद्युत विभाग को आवश्यक निर्देश दिए, जिसके बाद मौके पर समस्या का समाधान कर दिया।</p>
<p><strong>उपखंड अधिकारी ने दिए शीघ्र कार्यवाही के निर्देश </strong><br />ग्रामीणों ने पूर्व में छीपाबड़ौद उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपकर गांगटी से पाडलिया जाने वाले मुख्य मार्ग पर झूलते बिजली तारों से उत्पन्न खतरे से अवगत कराया था। इस पर उपखंड अधिकारी अभिमन्यु सिंह कुंतल ने मामले को गंभीरता से लेते हुए विद्युत विभाग हरनावदाशाहजी के सहायक अभियंता को शीघ्र कार्रवाई के निर्देश दिए। सहायक अभियंता विकास कुमार महावर ने बताया कि आमजन की सुरक्षा से जुड़े इस मामले में तत्परता दिखाते हुए रविवार को कनिष्ठ अभियंता मदनलाल मीणा के नेतृत्व में विभागीय टीम मौके पर पहुंची। टीम ने मार्ग के दोनों ओर नए विद्युत पोल खड़े कराकर तारों को ऊंचा कराया, जिससे आवागमन सुरक्षित हो गया।</p>
<p><strong>पहले विद्युत लाइन नीचे झूलने से बना रहता था खतरा </strong><br />पीडब्ल्यूडी द्वारा मार्ग पर नई पुलिया निर्माण के कारण विद्युत लाइन की ऊंचाई कम हो गई थी। इस संबंध में विद्युत विभाग ने फरवरी माह में ही पीडब्ल्यूडी विभाग को पत्र लिखकर सचेत किया था, लेकिन समय पर ध्यान नहीं दिए जाने से समस्या उत्पन्न हुई। ग्रामीणों के अनुसार, पहले खाल के समीप विद्युत लाइन काफी नीचे झूल रही थी, जिससे ट्रैक्टर, स्कूल बस सहित बड़े वाहनों के गुजरने में खतरा बना रहता था। अब समस्या के समाधान के बाद गांगटी और पाडलिया के ग्रामीणों ने दैनिक नवज्योति का आभार जताया। </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Mon, 04 May 2026 15:17:25 +0530</pubDate>
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                <title>असर खबर का :  रोशनी से जगमगाया लिंक रोड, अनजाने डर से मिली निजात</title>
                                    <description><![CDATA[पॉलिटेक्निक कॉलेज से एयरपोर्ट लिंक रोड पर लगी एलईडी लाइटें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impacto-de-ia-noticia--link-road-iluminada--alivio-ante-un-miedo-desconocido/article-151938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/asar-khabar-ka---roshani-se-jagamagaya-link-road,-anajane-dar-se-mile-nijat...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डीसीएम रोड स्थित फल-सब्जीमंडी के सामने पॉलीटेक्निक कॉलेज से एयरपोर्ट लिंक रोड इन दिनों रोशनी से जगमगा रहा है। सड़क के बीच बने डिवाइडरों पर नई एलईडी लाइटें लगने से अब राहगीरों को अंधेरे से निजात मिल सकी। वहीं, दो किमी की नई डामर सड़क बनने से गड्ढ़ों से भी छुटकारा मिला। दैनिक नवज्योति ने सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कर केडीए व प्रशासन को राहगीरों व फल-सब्जी विक्रेताओं पीड़ा से रुबरू कराया। इसके बाद केडीए ने न केवल रोड लाइटें चालू करवाई बल्कि नई डामर सड़क बनाकर अंधेरे और गड्ढ़ों से निजात दिलाई।</p>
<p><strong>हाड़ौतीभर से आते हैं फ्रूट  व सब्जी विक्रेता</strong><br />फ्रूट विक्रेता घनश्याम वर्मा, सुरेंद्र धाकड़, राजेंद्र नागर का कहना है कि एयरोड्रम स्थित फल-सब्जीमंडी हाड़ौती की सबसे बड़ी मंडी है। यहां संभाग से ही नहीं बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से व्यापारी व किसान माल लेकर आते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी झालावाड़ से आने वाले किसानों व व्यापारियों को होती है। क्योंकि, लिंक रोड सीधा मंडी से मिलता है, इसलिए इसी मार्ग से व्यापारी गुजरते हैं लेकिन पहले यहां अंधेरा होने से लूटपाट सहित अन्य घटनाओं का डर बना रहता था। लेकिन अब लाइटें लगने व नया रोड बनने से काफी राहत मिली है।</p>
<p><strong>नवज्योति का जताया आभार</strong><br />संजय नगर व छत्रपुरा निवासी इरशाद, संजू, प्रवीण, महेश ने लिंक रोड पर अंधेरा व उधड़ी सड़कों की लगातार खबरें प्रकाशित कर राहगीरों व किसान और व्यापारियों की समस्याओं से अवगत कराकर समाधान करवाया। जबकि, पहले छत्रपुरा के लिए गुजर रहे मार्ग से लिंक रोड पर आने तक अंधेरा रहता था। जहां अनहोनी के डर से बाइक को स्पीड से दौड़ाना पड़ता है लेकिन कई बार गड्ढ़े व ब्रेकर दिखाई नहीं देते और वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते थे। दैनिक नवज्योति के प्रयासों से गंभीर समस्या का समाधान हो सका। इसके लिए नवज्योति का आभार प्रकट करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:32:21 +0530</pubDate>
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                <title> जनता जल योजना का इंतजार, प्यासे सीमलिया के बाशिंदे </title>
                                    <description><![CDATA[आजादी के 80 साल बाद भी गांव में नहीं पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-the-janta-jal-yojana--thirsty-residents-of-simaliya/article-146223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)10.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास उपखंड की ग्राम पंचायत बांस्याहेड़ी के सीमलिया गांव के ग्रामीण आजादी के लगभग 80 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इस बीच कई सरकारें आई और गई। हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधियों ने कई वादे और दावे किए। लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई वादा पूरा होता नहीं लग रहा। सरकार विकास और जल जीवन मिशन के तहत हर गांव में साफ पीने का पानी पहुंचाने के दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक इस गांव के लोग पेयजन की सुविधा से वंचित हैं। गांव में लंबे समय से पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमलिया गांव अब तक जनता जल योजना से नहीं जुड़ा है। पानी की किल्लत के चलते ग्रामीणों ने एक पुराने कुएं में सामूहिक रूप से अपनी मोटरें डाल रखी हैं और इन्हीं से किसी तरह पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। इस अस्थायी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ग्रामीणों को महंगी मोटर, पाइप, मिस्त्री की मजदूरी और बिजली बिल जैसे अतिरिक्त खर्च उठाने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>गर्मी के मौसम में बढ़ जाता है संकट</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी का संकट और गहरा जाता है। सीमित जलस्रोतों के कारण ग्रामीणों को रातभर पानी के लिए जागना पड़ता है। कई बार महिलाएं और बुजुर्ग देर रात तक पानी भरने के लिए कतार में खड़े रहते हैं। इससे गांव में रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।</p>
<p><strong>जनता जल योजना से जोड़ने की मांग</strong><br />ग्रामवासी मुकेश गुर्जर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सीमलिया को शीघ्र जनता जल योजना से जोड़ा जाए और स्थायी जल व्यवस्था की जाए। ताकि लोगों को पीने के पानी के लिए रातभर परेशान न होना पड़े।</p>
<p>ग्राम पंचायत बांस्याहेड़ी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सीमलिया का टेंडर जारी हो चुका है। जल्द ही हर घर नल योजना के तहत कार्य प्रारंभ किया जाएगा।<br /><strong>- राकेश मीणा, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:16:57 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अस्पताल में जलभराव बना खतरा, मरीजों को मुख्य रास्ते पर  फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने निकासी मार्गों की मरम्मत नहीं होने से बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-mbs-hospital-poses-a-threat--patients-have-to-wade-through-dirty-water-on-the-main-pathway/article-142047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडौती के सबसे बडे एमबीएस परिसर में सीवरेज का गंदा पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, यह समस्या खराब जल निकासी व्यवस्था, अवरुद्ध नालियों और सीवरेज चैम्बर के ओवर फ्लो के कारण उत्पन्न हुई है। दूषित सीवरेज के पानी में हानिकारक कीटाणु,बैक्टीरिया और औषधीय अवशेष मौजूद होते हैं, जो संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं। अस्पताल में भर्ती कमजोर रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है। लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि ओपीडी के बाहर और वार्डों के रास्तों में पानी भरे रहने से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो गया है। मुख्य रास्ते पर ही फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>50 से अधिक बैड संख्या वाले अस्पतालों में प्लांट की जरूरत</strong><br />स्वास्थ्य नियमों के तहत अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है, ताकि गंदे पानी को शुद्ध किए बिना खुले में न छोड़ा जाए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मरीजों और नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और सीवरेज के पानी से होने वाले संक्रमण के खतरे को रोका जाए।वर्तमान में कोटा एमबीबीएस के नई बिल्डिंग में संचालित लीफटो की क्या स्थिति है अस्पतालों में एसटीपी की अनिवार्यता मुख्य रूप से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आती है। उढउइ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिदेर्शों के अनुसार, सभी अस्पतालों को उनके अपशिष्ट जल (सीवरेज) को बाहर छोड़ने से पहले उपचारित करना अनिवार्य है। इसमें बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना भी शामिल है।</p>
<p><strong>बेसमेन्ट में सीवरेज का पानी</strong><br />अभी हाल ही में बने आईपीडी भवन के बेसमेंट पार्किंग के लिफ्ट एरिया में भरा हुआ पानी सडा़ंध मार रहा था। सवाल यह है कि हाल ही में तैयार हुए भवनों में यह हाल है तो जब यह इमारतें पुरानी होगीं तब क्या होगा।जानकारों के अनुसार, एमबीएस में सीवरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा पुराना हो चुका है। ऐसे में परिसर में नये भवन भी बन गये है जिससे इन की क्षमता कम  पड़ती जा रही है । वहीं पुराने निकासी मार्गों की पूरी मरम्मत नहीं की जाती, जिससे बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।</p>
<p><strong>अटी पडी गंदगी</strong><br />करीब महीने भर से जयपुर फुट और आक्सीजन स्टोर रूम वाली सड़क पर भी सीवरेज का पाईप  टूटा हुआ है जिससे यहां सड़क पर  गंदगी फैल गयी है। बडी बात यह है कि यह रास्ता रेजीडेन्ट हॉस्टल के साथ एएनएम जीएनएम सेन्टर के साथ मॉर्चरी की और जाने वाले एक मात्र रास्ता है ।</p>
<p>ओपीडी और नयी इमरजेन्सी के बाहर बरसात का पानी भरा हुआ है। यह मार्ग जेके लोन व एमबीएस के बीच मुख्य सडक पर होने से समस्या का कारण बना हुआ है। यहां एक और लेबोरेट?री के कारण दिनभर लोगों की भीड़ रहती है ऐसे में वहीं दूसरी और गाड़ियां खड़ी रहने के कारण रास्ता संकरा रहता है उपर से यहां जमा पानी के कारण पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।<br /><strong>- दुष्यंत कुमार सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>आज ही हमने जहां पर भी पानी और गंदगी की जानकारी मिली वहां पर स्टाफ को काम पर लगाया है। बडी़ समस्या पुरानी लाईनोें से है एसटीपी प्लांट लगने तक व्यवस्था निगम को कहकर करवा रहे है।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपअध्यक्ष एमबीएस हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:34:10 +0530</pubDate>
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                <title>फिटनेस आदेश से थमे व्यवसायिक वाहनों के पहिए</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकृत फिटनेस सेंटर से ही वाहनों की फिटनेस अनिवार्य की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/commercial-vehicles-grounded-due-to-fitness-order/article-142040"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। परिवहन कमिश्नर के हालिया आदेश ने बूंदी जिले के वाहन स्वामियों की मुश्किले बढ़ा दी हैं। जिला परिवहन कार्यालय में पिछले छह दिनों से व्यवसायिक वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र वाहन स्वामियों के लिए गले की फांस बन गया है। आदेश के अनुसार अब केवल अधिकृत फिटनेस सेंटर से ही वाहनों की फिटनेस अनिवार्य कर दी गई है, जबकि जिले में न तो कोई सरकारी और न ही अधिकृत फिटनेस सेंटर मौजूद है। ऐसे में वाहन स्वामी फिटनेस के लिए अन्य जिलों का रुख करने को मजबूर हैं। उन्हें 100 से 150 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे ईंधन खर्च बढ़ रहा है और समय की  बबार्दी हो रही है। दूसरी ओर, जिले से बाहर जाने पर आॅनलाइन चालान की कार्रवाई का भी डर बना हुआ है।</p>
<p>फिटनेस प्रमाणपत्र के अभाव में ट्रक, बस और आॅटो जैसे व्यवसायिक वाहनों का संचालन ठप पड़ा है। इससे वाहन स्वामियों और चालकों की रोजी-रोटी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों के सामने आर्थिक तंगी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।वाहन स्वामियों ने प्रशासन के प्रति रोष जताते हुए कहा कि जब तक जिले में फिटनेस सेंटर स्थापित नहीं किया जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वाहन स्वामी आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। परिवहन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई उच्च आदेशों के तहत की जा रही है, लेकिन बिना बुनियादी संसाधन विकसित किए ऐसे आदेश लागू करना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दशार्ता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सरकार द्वारा बिना सेन्टर संचालित के ही फरमान जारी कर दिया हैं। वाहन स्वामी के साथ दोहरी मार पड़ रही हैं। फिटनेस करवाने के लिए अन्य जिलों में जाने के लिए 100-200किलोमीटर की दूरी तय करना और टोल प्लाजा पार करने पर आॅनलाइन चालान कट रहे।<br /><strong>-राजू अरोड़ा, अध्यक्ष,  आल इंडिया मोटर व्यवसाय एसोसिएशन, बूंदी</strong></p>
<p> सरकार ने बिना फिटनेस सेन्टर खोले ही आदेश जारी कर दिया हैं, जिसके कारण आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ रहा हैं। इसके लिए सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करना चाहिए और अगर नहीं करते हैं तो सभी वाहन स्वामी मिलकर आंदोलन करेंगे।<br /><strong>-बुद्धिप्रकाश शर्मा, अध्यक्ष, मीरा गेट वेलफेयर सोसाइटी प्राइवेट बस स्टैंड </strong></p>
<p>हाई कोर्ट के आदेश की पालना करते हुए कार्यालय से फिटनेस करना बन्द किया है। लगभग दो महीने में एटीएस सेन्टर चालू हो जायेगा, तब तक वाहन स्वामी नजदीकी सेन्टर पर  ही फिटनेस करवाएं। वाहनों का समय पर ही फिटनेस करवाए जिससे चालान भी नहीं होंगे।<br /><strong>-सौम्या शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी, बूंदी  </strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:20:12 +0530</pubDate>
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