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                <title>असर खबर का :  रोशनी से जगमगाया लिंक रोड, अनजाने डर से मिली निजात</title>
                                    <description><![CDATA[पॉलिटेक्निक कॉलेज से एयरपोर्ट लिंक रोड पर लगी एलईडी लाइटें।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/impacto-de-ia-noticia--link-road-iluminada--alivio-ante-un-miedo-desconocido/article-151938"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-04/asar-khabar-ka---roshani-se-jagamagaya-link-road,-anajane-dar-se-mile-nijat...kota-news-28.04.2026.jpg" alt=""></a><br /><p>कोटा। डीसीएम रोड स्थित फल-सब्जीमंडी के सामने पॉलीटेक्निक कॉलेज से एयरपोर्ट लिंक रोड इन दिनों रोशनी से जगमगा रहा है। सड़क के बीच बने डिवाइडरों पर नई एलईडी लाइटें लगने से अब राहगीरों को अंधेरे से निजात मिल सकी। वहीं, दो किमी की नई डामर सड़क बनने से गड्ढ़ों से भी छुटकारा मिला। दैनिक नवज्योति ने सिलसिलेवार खबरें प्रकाशित कर केडीए व प्रशासन को राहगीरों व फल-सब्जी विक्रेताओं पीड़ा से रुबरू कराया। इसके बाद केडीए ने न केवल रोड लाइटें चालू करवाई बल्कि नई डामर सड़क बनाकर अंधेरे और गड्ढ़ों से निजात दिलाई।</p>
<p><strong>हाड़ौतीभर से आते हैं फ्रूट  व सब्जी विक्रेता</strong><br />फ्रूट विक्रेता घनश्याम वर्मा, सुरेंद्र धाकड़, राजेंद्र नागर का कहना है कि एयरोड्रम स्थित फल-सब्जीमंडी हाड़ौती की सबसे बड़ी मंडी है। यहां संभाग से ही नहीं बल्कि प्रदेश के विभिन्न जिलों से व्यापारी व किसान माल लेकर आते हैं। लेकिन सबसे ज्यादा परेशानी झालावाड़ से आने वाले किसानों व व्यापारियों को होती है। क्योंकि, लिंक रोड सीधा मंडी से मिलता है, इसलिए इसी मार्ग से व्यापारी गुजरते हैं लेकिन पहले यहां अंधेरा होने से लूटपाट सहित अन्य घटनाओं का डर बना रहता था। लेकिन अब लाइटें लगने व नया रोड बनने से काफी राहत मिली है।</p>
<p><strong>नवज्योति का जताया आभार</strong><br />संजय नगर व छत्रपुरा निवासी इरशाद, संजू, प्रवीण, महेश ने लिंक रोड पर अंधेरा व उधड़ी सड़कों की लगातार खबरें प्रकाशित कर राहगीरों व किसान और व्यापारियों की समस्याओं से अवगत कराकर समाधान करवाया। जबकि, पहले छत्रपुरा के लिए गुजर रहे मार्ग से लिंक रोड पर आने तक अंधेरा रहता था। जहां अनहोनी के डर से बाइक को स्पीड से दौड़ाना पड़ता है लेकिन कई बार गड्ढ़े व ब्रेकर दिखाई नहीं देते और वाहन अनियंत्रित होकर दुर्घटनाग्रस्त हो जाते थे। दैनिक नवज्योति के प्रयासों से गंभीर समस्या का समाधान हो सका। इसके लिए नवज्योति का आभार प्रकट करते हैं।</p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 28 Apr 2026 14:32:21 +0530</pubDate>
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                <title> जनता जल योजना का इंतजार, प्यासे सीमलिया के बाशिंदे </title>
                                    <description><![CDATA[आजादी के 80 साल बाद भी गांव में नहीं पहुंचीं बुनियादी सुविधाएं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waiting-for-the-janta-jal-yojana--thirsty-residents-of-simaliya/article-146223"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-03/1200-x-60-px)10.png" alt=""></a><br /><p>कनवास। कनवास उपखंड की ग्राम पंचायत बांस्याहेड़ी के सीमलिया गांव के ग्रामीण आजादी के लगभग 80 साल बाद भी बुनियादी सुविधाओं से वंचित हैं। इस बीच कई सरकारें आई और गई। हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधियों ने कई वादे और दावे किए। लेकिन जमीनी स्तर पर आज तक कोई वादा पूरा होता नहीं लग रहा। सरकार विकास और जल जीवन मिशन के तहत हर गांव में साफ पीने का पानी पहुंचाने के दावे करे, लेकिन हकीकत यह है कि आज तक इस गांव के लोग पेयजन की सुविधा से वंचित हैं। गांव में लंबे समय से पीने के पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणों का कहना है कि सीमलिया गांव अब तक जनता जल योजना से नहीं जुड़ा है। पानी की किल्लत के चलते ग्रामीणों ने एक पुराने कुएं में सामूहिक रूप से अपनी मोटरें डाल रखी हैं और इन्हीं से किसी तरह पीने के पानी की व्यवस्था की जा रही है। इस अस्थायी व्यवस्था को बनाए रखने के लिए ग्रामीणों को महंगी मोटर, पाइप, मिस्त्री की मजदूरी और बिजली बिल जैसे अतिरिक्त खर्च उठाने पड़ रहे हैं।</p>
<p><strong>गर्मी के मौसम में बढ़ जाता है संकट</strong><br />ग्रामीणों ने बताया कि गर्मी का मौसम शुरू होते ही पानी का संकट और गहरा जाता है। सीमित जलस्रोतों के कारण ग्रामीणों को रातभर पानी के लिए जागना पड़ता है। कई बार महिलाएं और बुजुर्ग देर रात तक पानी भरने के लिए कतार में खड़े रहते हैं। इससे गांव में रोजमर्रा की जिंदगी प्रभावित हो रही है।</p>
<p><strong>जनता जल योजना से जोड़ने की मांग</strong><br />ग्रामवासी मुकेश गुर्जर सहित अन्य ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि सीमलिया को शीघ्र जनता जल योजना से जोड़ा जाए और स्थायी जल व्यवस्था की जाए। ताकि लोगों को पीने के पानी के लिए रातभर परेशान न होना पड़े।</p>
<p>ग्राम पंचायत बांस्याहेड़ी के अंतर्गत आने वाले ग्राम सीमलिया का टेंडर जारी हो चुका है। जल्द ही हर घर नल योजना के तहत कार्य प्रारंभ किया जाएगा।<br /><strong>- राकेश मीणा, कनिष्ठ अभियंता, जन स्वास्थ्य अभियांत्रिकी विभाग </strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 12 Mar 2026 15:16:57 +0530</pubDate>
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                <title>एमबीएस अस्पताल में जलभराव बना खतरा, मरीजों को मुख्य रास्ते पर  फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ रहा</title>
                                    <description><![CDATA[पुराने निकासी मार्गों की मरम्मत नहीं होने से बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/waterlogging-at-mbs-hospital-poses-a-threat--patients-have-to-wade-through-dirty-water-on-the-main-pathway/article-142047"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(1)10.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। हाडौती के सबसे बडे एमबीएस परिसर में सीवरेज का गंदा पानी जमा होने से मरीजों और तीमारदारों को काफी परेशानी हो रही है। जानकारी के अनुसार, यह समस्या खराब जल निकासी व्यवस्था, अवरुद्ध नालियों और सीवरेज चैम्बर के ओवर फ्लो के कारण उत्पन्न हुई है। दूषित सीवरेज के पानी में हानिकारक कीटाणु,बैक्टीरिया और औषधीय अवशेष मौजूद होते हैं, जो संक्रमण फैलने का बड़ा कारण बन सकते हैं। अस्पताल में भर्ती कमजोर रोगियों के लिए यह स्थिति और भी खतरनाक मानी जा रही है। लोगों और मरीजों के परिजनों का कहना है कि ओपीडी के बाहर और वार्डों के रास्तों में पानी भरे रहने से स्ट्रेचर और व्हीलचेयर ले जाना मुश्किल हो गया है। मुख्य रास्ते पर ही फैले गंदे पानी से होकर गुजरना पड़ता है, जिससे अस्पताल की स्वच्छता व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।</p>
<p><strong>50 से अधिक बैड संख्या वाले अस्पतालों में प्लांट की जरूरत</strong><br />स्वास्थ्य नियमों के तहत अस्पतालों में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट होना अनिवार्य है, ताकि गंदे पानी को शुद्ध किए बिना खुले में न छोड़ा जाए। फिलहाल अस्पताल प्रशासन की ओर से इस समस्या के स्थायी समाधान को लेकर कोई स्पष्ट बयान सामने नहीं आया है। हालांकि मरीजों और नागरिकों ने मांग की है कि जल्द से जल्द जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त की जाए और सीवरेज के पानी से होने वाले संक्रमण के खतरे को रोका जाए।वर्तमान में कोटा एमबीबीएस के नई बिल्डिंग में संचालित लीफटो की क्या स्थिति है अस्पतालों में एसटीपी की अनिवार्यता मुख्य रूप से जल (प्रदूषण निवारण एवं नियंत्रण) अधिनियम, 1974 और पर्यावरण (संरक्षण) अधिनियम, 1986 के अंतर्गत आती है। उढउइ (केंद्रीय प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड के दिशानिदेर्शों के अनुसार, सभी अस्पतालों को उनके अपशिष्ट जल (सीवरेज) को बाहर छोड़ने से पहले उपचारित करना अनिवार्य है। इसमें बायो-मेडिकल वेस्ट मैनेजमेंट रूल्स का पालन करना भी शामिल है।</p>
<p><strong>बेसमेन्ट में सीवरेज का पानी</strong><br />अभी हाल ही में बने आईपीडी भवन के बेसमेंट पार्किंग के लिफ्ट एरिया में भरा हुआ पानी सडा़ंध मार रहा था। सवाल यह है कि हाल ही में तैयार हुए भवनों में यह हाल है तो जब यह इमारतें पुरानी होगीं तब क्या होगा।जानकारों के अनुसार, एमबीएस में सीवरेज से जुड़ा बुनियादी ढांचा पुराना हो चुका है। ऐसे में परिसर में नये भवन भी बन गये है जिससे इन की क्षमता कम  पड़ती जा रही है । वहीं पुराने निकासी मार्गों की पूरी मरम्मत नहीं की जाती, जिससे बारिश या सीवरेज का पानी जमा हो जाता है।</p>
<p><strong>अटी पडी गंदगी</strong><br />करीब महीने भर से जयपुर फुट और आक्सीजन स्टोर रूम वाली सड़क पर भी सीवरेज का पाईप  टूटा हुआ है जिससे यहां सड़क पर  गंदगी फैल गयी है। बडी बात यह है कि यह रास्ता रेजीडेन्ट हॉस्टल के साथ एएनएम जीएनएम सेन्टर के साथ मॉर्चरी की और जाने वाले एक मात्र रास्ता है ।</p>
<p>ओपीडी और नयी इमरजेन्सी के बाहर बरसात का पानी भरा हुआ है। यह मार्ग जेके लोन व एमबीएस के बीच मुख्य सडक पर होने से समस्या का कारण बना हुआ है। यहां एक और लेबोरेट?री के कारण दिनभर लोगों की भीड़ रहती है ऐसे में वहीं दूसरी और गाड़ियां खड़ी रहने के कारण रास्ता संकरा रहता है उपर से यहां जमा पानी के कारण पैदल चलना भी दुश्वार हो गया है।<br /><strong>- दुष्यंत कुमार सुमन, तीमारदार</strong></p>
<p>आज ही हमने जहां पर भी पानी और गंदगी की जानकारी मिली वहां पर स्टाफ को काम पर लगाया है। बडी़ समस्या पुरानी लाईनोें से है एसटीपी प्लांट लगने तक व्यवस्था निगम को कहकर करवा रहे है।<br /><strong>- डॉ. कर्नेश गोयल, उपअध्यक्ष एमबीएस हॉस्पिटल कोटा</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:34:10 +0530</pubDate>
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                <title>फिटनेस आदेश से थमे व्यवसायिक वाहनों के पहिए</title>
                                    <description><![CDATA[अधिकृत फिटनेस सेंटर से ही वाहनों की फिटनेस अनिवार्य की गई।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/commercial-vehicles-grounded-due-to-fitness-order/article-142040"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-02/(1200-x-600-px)-(2)8.png" alt=""></a><br /><p>नमाना रोड। परिवहन कमिश्नर के हालिया आदेश ने बूंदी जिले के वाहन स्वामियों की मुश्किले बढ़ा दी हैं। जिला परिवहन कार्यालय में पिछले छह दिनों से व्यवसायिक वाहनों का फिटनेस प्रमाण पत्र वाहन स्वामियों के लिए गले की फांस बन गया है। आदेश के अनुसार अब केवल अधिकृत फिटनेस सेंटर से ही वाहनों की फिटनेस अनिवार्य कर दी गई है, जबकि जिले में न तो कोई सरकारी और न ही अधिकृत फिटनेस सेंटर मौजूद है। ऐसे में वाहन स्वामी फिटनेस के लिए अन्य जिलों का रुख करने को मजबूर हैं। उन्हें 100 से 150 किलोमीटर तक की दूरी तय करनी पड़ रही है, जिससे ईंधन खर्च बढ़ रहा है और समय की  बबार्दी हो रही है। दूसरी ओर, जिले से बाहर जाने पर आॅनलाइन चालान की कार्रवाई का भी डर बना हुआ है।</p>
<p>फिटनेस प्रमाणपत्र के अभाव में ट्रक, बस और आॅटो जैसे व्यवसायिक वाहनों का संचालन ठप पड़ा है। इससे वाहन स्वामियों और चालकों की रोजी-रोटी पर सीधा संकट खड़ा हो गया है। कई परिवारों के सामने आर्थिक तंगी की स्थिति उत्पन्न हो गई है।वाहन स्वामियों ने प्रशासन के प्रति रोष जताते हुए कहा कि जब तक जिले में फिटनेस सेंटर स्थापित नहीं किया जाता, तब तक वैकल्पिक व्यवस्था की जानी चाहिए। यदि शीघ्र समाधान नहीं हुआ तो वाहन स्वामी आंदोलन करने को मजबूर होंगे, जिसकी जिम्मेदारी सरकार की होगी। परिवहन विभाग का कहना है कि यह कार्रवाई उच्च आदेशों के तहत की जा रही है, लेकिन बिना बुनियादी संसाधन विकसित किए ऐसे आदेश लागू करना प्रशासनिक संवेदनहीनता को दशार्ता है।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />सरकार द्वारा बिना सेन्टर संचालित के ही फरमान जारी कर दिया हैं। वाहन स्वामी के साथ दोहरी मार पड़ रही हैं। फिटनेस करवाने के लिए अन्य जिलों में जाने के लिए 100-200किलोमीटर की दूरी तय करना और टोल प्लाजा पार करने पर आॅनलाइन चालान कट रहे।<br /><strong>-राजू अरोड़ा, अध्यक्ष,  आल इंडिया मोटर व्यवसाय एसोसिएशन, बूंदी</strong></p>
<p> सरकार ने बिना फिटनेस सेन्टर खोले ही आदेश जारी कर दिया हैं, जिसके कारण आर्थिक नुक्सान उठाना पड़ रहा हैं। इसके लिए सरकार को वैकल्पिक व्यवस्था शुरू करना चाहिए और अगर नहीं करते हैं तो सभी वाहन स्वामी मिलकर आंदोलन करेंगे।<br /><strong>-बुद्धिप्रकाश शर्मा, अध्यक्ष, मीरा गेट वेलफेयर सोसाइटी प्राइवेट बस स्टैंड </strong></p>
<p>हाई कोर्ट के आदेश की पालना करते हुए कार्यालय से फिटनेस करना बन्द किया है। लगभग दो महीने में एटीएस सेन्टर चालू हो जायेगा, तब तक वाहन स्वामी नजदीकी सेन्टर पर  ही फिटनेस करवाएं। वाहनों का समय पर ही फिटनेस करवाए जिससे चालान भी नहीं होंगे।<br /><strong>-सौम्या शर्मा, जिला परिवहन अधिकारी, बूंदी  </strong> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Thu, 05 Feb 2026 15:20:12 +0530</pubDate>
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                <title>ईसाटोरी गांव आज भी पक्की सड़क से वंचित, इस रास्ते से जुड़े  हैं दर्जनों गांव </title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों ने दी चुनाव बहिष्कार की चेतावनी, गांव में नहीं पहुंच रही एम्बुलेंस।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/baran/isatori-village-still-lacks-a-paved-road--dozens-of-villages-are-connected-by-this-route/article-141449"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/85641.png" alt=""></a><br /><p>समरानियां। ग्राम पंचायत हाटरी के अंतर्गत आने वाले ग्राम ईसाटोरी सड़क बनी है और न ही ऐसा कोई वैकल्पिक मार्ग है, जिससे बरसात के समस्या से आक्रोशित मौसम में बीमार लोगों को अस्पताल तक सुरक्षित पहुंचाया जा सके। इस ग्रामीणों ने चेतावनी दी है कि यदि इस बार भी समाधान नहीं हुआ तो वे आगामी चुनाव का बहिष्कार करेंगे। ग्रामीणों ने बताया कि हर साल चुनाव के समय नेता गांव में आते हैं, बड़े-बड़े वादे करते हैं, लेकिन चुनाव खत्म होते ही सब वादे हवा हो जाते हैं और गांव की हालत जस की तस बनी रहती है। ग्रामीणों ने बताया कि ईसाटोरी गांव से होकर दर्जनों  गांवों का आवागमन होता है। यह रास्ता रोजमर्रा की जरूरतों के लिए बेहद महत्वपूर्ण है, लेकिन सड़क खराब होने से लोगों का समय भी अधिक लगता है और दुर्घटनाओं का खतरा भी बना रहता है।</p>
<p><strong>बारिश में हालात बद से बदतर</strong><br />बरसात के मौसम में स्थिति और ज्यादा गंभीर हो जाती है। यदि किसी व्यक्ति की तबीयत खराब हो जाए तो एम्बुलेंस गांव तक नहीं पहुंच पाती। मजबूरी में ग्रामीणों को मरीजों को मध्यप्रदेश के अस्पतालों में ले जाना पड़ता है। ग्राम पंचायत ने गांव के अंदर तक सीसी रोड नहीं बनवाई है। कच्चे रास्तों पर कीचड़ भर जाने से बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>हर चुनाव में वादे, लेकिन जमीन पर काम शून्य</strong><br />ग्रामीणों का कहना है कि हर चुनाव से पहले जनप्रतिनिधि गांव में पहुंचते हैं और सड़क निर्माण के बड़े-बड़े वादे करते लेकिन चुनाव समाप्त होते ही कोई सुध लेने नहीं आता। वर्षों से ग्रामीण कच्चे, कीचड़ भरे रास्तों पर चलने को मजबूर हैं ।</p>
<p><strong>ग्रामीणों की मांग: जल्द मिले स्थायी समाधान</strong><br />ग्रामीणों ने प्रशासन से मांग की है कि फॉरेस्ट विभाग से समन्वय कर जल्द एनओसी दिलवाई जाए और सड़क निर्माण कार्य तुरंत शुरू किया जाए। उनका कहना है कि सड़क केवल सुविधा नहीं बल्कि जीवन और मृत्यु का सवाल बन चुकी है।</p>
<p>इस रास्ते से दर्जनों गांव जुड़े हुए हैं और रोजाना लोग इसी मार्ग से आवागमन करते हैं, लेकिन सड़क न होने के कारण समय भी ज्यादा लगता है और परेशानी भी होती है।<br /><strong>-सुनील शिवहरे, ग्रामीण</strong></p>
<p>बरसात के दिनों में यदि कोई बीमार हो जाए, तो गांव से अस्पताल ले जाना बेहद मुश्किल हो जाता है। मजबूरी में कई बार लोगों को इलाज के लिए मध्यप्रदेश की ओर जाना पड़ता है।<br /><strong>- करण सहरिया, ग्रामीण</strong></p>
<p>ग्राम पंचायत द्वारा गांव के अंदर तक सीसी रोड तक नहीं बनवाई गई है, जिससे आमजन को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।<br /><strong>- मुरारी प्रजापति, ग्रामीण</strong></p>
<p>सहरिया बस्ती के रोड का कार्य जल्द ही शुरू किया जाएगा।<br /><strong>- सियाराम, वीडीओ</strong></p>
<p>सड़क निर्माण की स्वीकृति जारी हो चुकी है, लेकिन फॉरेस्ट विभाग की एनओसी अभी तक नहीं मिलने के कारण कार्य शुरू नहीं किया जा सका है।<br /><strong>-बसंत गुप्ता, एएक्सईएन, पीडब्ल्यूडी</strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बारां</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 17:02:08 +0530</pubDate>
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                <title>बिना गुजरे कट रहा टोल, धड़कनें बढ़ा रहा फास्टैग,  शिकायत के बावजूद समाधान नहीं </title>
                                    <description><![CDATA[आए दिन हो रही घटनाएं, एनएचएआई के सिस्टम पर उठे सवाल।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/toll-deducted-without-crossing-the-plaza--fastag-causing-anxiety--no-solution-despite-complaints/article-141442"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/(1200-x-600-px)11.png" alt=""></a><br /><p> कोटा । शहर में इन दिनों फास्टैग से जुड़े ऐसे चौंकाने वाले मामले सामने आ रहे हैं, जो वाहन मालिकों की सुरक्षा और सिस्टम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े कर रहे हैं। घर की पार्किंग में खड़ी गाड़ियों के फास्टैग से हजारों किलोमीटर दूर स्थित टोल प्लाजा पर टैक्स कटने के मैसेज लोगों के होश उड़ा रहे हैं। यह समस्या अब इक्का-दुक्का मामलों तक सीमित नहीं रही, बल्कि लगातार बढ़ती जा रही है। मामला, सिर्फ 50झ्र60 रुपए के टैक्स का नहीं, बल्कि उस रिकॉर्ड का है, जो गाड़ी के बिना चले ही एनएचएआई सिस्टम में उसकी मौजूदगी दर्ज कर देता है। ऐसे संदेश वाहन मालिकों को डर, उलझन और मानसिक तनाव में डाल रहे हैं। जहन में एक ही सवाल हैं, जब गाड़ी घर से बाहर निकली ही नहीं, तो टोल प्लाजा के रिकॉर्ड में वह कैसे गुजर गई?हालांकि लोग इसकी शिकायत एनएचएआई के टोल फ्री व वेबसाइट पर दिए गए नम्बरों पर कर रहे हैं लेकिन वहां से संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा और न ही बिना गुजरे टैक्स कटने का संतोषजनक कारण बता रहे।</p>
<p><strong>केस : 1 एक माह से घर में कार खड़ी और कट गया टोल</strong><br />10 जुलाई 2024: स्टेशन निवासी आसिफ बैग ने बताया कि टोल प्लाजा से 55 रुपए टैक्स कटने का मैसेज आया। जबकि, कॉलोनी में सीवरेज पाइप लाइन डलने का काम चलने से सड़क पूरी खुदी पड़ी थी। ऐसे में कार एक माह से घर में ही खड़ी थी। इसके बावजूद टोल कट गया।</p>
<p><strong>केस  : 2 गाड़ी गैराज में और कट गया टोल</strong><br />संजय नगर निवासी व्यवसायी पुष्पेंद्र सिंह ने बताया कि गत 17 अक्टूबर को कार सर्विस के लिए मैकेनिक के गैराज में खड़ी की थी। इसके अगले दिन रात को गजनपुरा टोल प्लाजा से टोल कटने का मैसेज आया। जिसे देखते ही कार चोरी का डर सताया। इस पर तुरंत मैकेनिक को फोन कर मामले की जानकारी दी तो वह भी सकते में आ गया और रात को ही वह गैराज पहुंचा तो ताला लगा मिला तो सांस आई। घटना को लेकर एनएचएआई के टोल फ्री नम्बर 1033 पर सम्पर्क कर कारण तलाशने का प्रयास किया लेकिन उन्होंने संतोषजनक जवाब नहीं मिलता।</p>
<p><strong>केस : 3 सात दिन में दो बार कटा</strong><br />रायपुरा निवासी ईरशाद अली ने बताया कि घर में खड़ी कार के दो बार टोल टैक्स कट गया। पहली बार 27 नवम्बर 2024 को सुबह 8.40 मिनट पर लिंगलापुर टोल प्लाजा से 50 रुपए टैक्स कटने का मोबाइल पर मैसेज आया। इसके बाद 4 दिसम्बर को सुबह 8.4 मिनट पर जहूर टोल प्लाजा से 35 रुपए टैक्स कटने का फिर से मैसेज आया। इस तरह घर में खड़ी गाड़ी का 7 दिन में दो बार टोल टैक्स कट गया। जब इसकी शिकायत एनएचएआई के हेल्पलाइन नम्बर 1033 पर की तो उन्होंने बैंक से सम्पर्क करने की बात कहकर फोन काट दिया।</p>
<p><strong> केस : 4 घर पर खड़ी गाड़ी का कटा टोल</strong></p>
<p>30 नवंबर 2025 को दादाबाड़ी निवासी एडवोकेट संजय पाटोदी की घर पर खड़ी आल्टो कार का 80 किमी दूर इंदरगढ़ टोल प्लाजा पर चालान कट गया था। जबकि गाड़ी घर से बाहर निकली ही नहीं, इसके बावजूद फास्टैग अकाउंट से 75 रुपए टोल टैक्स कट गया। इसकी शिकायत टोल फ्री नंबर 1033 पर की लेकिन समाधान नहीं हुआ।</p>
<p><strong>केस : 5 फ्लैट पर खड़ी गाड़ी का कटा टोल</strong><br />2 दिसंबर 2025 को कोटा निवासी रिटायर्ड टीचर हुकम चंद की कार बेटे के फ्लैट पर खड़ी थी। इसके बाद भी दो अलग-अलग जगहों पर टोल कट गया।</p>
<p><strong>केस 6 : 421 किमी दूर भिवाड़ी में कटा टोल</strong><br />26 जनवरी 2026 को नयापुरा स्थित दोस्तपुरा निवासी विष्णु की घर में खड़ी कार का टोल 421 किमी दूर भिवाडी टोल प्लाजा पर टोल कट गया। पीड़ित कार मालिक ने बताया कि मेरी कर घर पर खड़ी थी। शाम को मोबाइल पर फास्ट टैग अकाउंट से 60 रुपए कट गए। मैसेज आते ही गाड़ी चोरी होने का डर सताया। आॅनलाइन शिकायत दर्ज करवाई है।</p>
<p><strong>डर, उलझन और मानसिक तनाव में डाल रहा मैसेज</strong><br />डीसीएम निवासी शिक्षक जमना शंकर प्रजापति कहते हैं, फास्टेग लगा वाहन घर में खड़ा होने के बावजूद टोल काटने का मैसेज इस और इशारा करता है कि वाहन टोल प्लाजा से गुजरा है, ऐसे में वाहन मालिक के जहन में सबसे पहले वाहन के चोरी होने का ख्याल आता है। जिससे वह डर, उलझन और मानसिक तनाव से धिर जाता है। ऐसी स्थिति में वह वाहन घर में है या नहीं, यह पता करने को हड़बड़ी में मार्केट से भरे ट्रैफिक के बीच घर की और दौड़ता है। ऐसे में हादसे का खतरा बना रहता है।</p>
<p><strong>2021 में फास्टैग किया था अनिवार्य</strong><br />केंद्रीय सड़क परिवहन एवं राजमार्ग मंत्रालय ने गत 16 फरवरी 2021 से देशभर में टोल से गुजरने वाले वाहनों पर फास्टैग लगाना अनिवार्य कर दिया था। इसके पीछे कैशलेस लेन-देन के अलावा तय रकम से ज्यादा वसूली को रोकना था। वहीं, टोल प्लाजा पर टैक्स चुकाने में लगने वाले लंबे जाम से मुक्ति दिलाने के लिए भी यह व्यवस्था शुरू की थी। ऐसे में वाहन चालकों ने बैंकों और निजी कंपनियों से फास्टैग बनवाकर अपने चार पहिया वाहनों पर चस्पा करा लिए, लेकिन तकनीकी दिक्कतों के चलते वाहन चालकों के साथ समस्या शुरू हो गई।</p>
<p><strong>क्राइम हो जाए तो निर्दोष साबित करना चूनौतिपूर्ण</strong><br />मुस्लिम राष्ट्रीय मंच के क्षेत्रिय सह संयोजक ईरशाद अली का कहना है, बात टोल टैक्स के 50-60 रुपए की नहीं है। यदि, संबंधित टोल प्लाजा क्षेत्र में कोई क्राइम हो जाए और उसी दरमियान घर में खड़ी कार का टैक्स कट जाए।यानी टैक्स कटने का मैसेज आने का मतलब टोल रिकॉर्ड में गाड़ी संबंधित टोल प्लाजा से गुजरना दर्शा दिया जाएगा। ऐसे में वारदात में खुद को निर्दोष साबित करना ही पीड़ित के लिए चुनौति व संघर्षपूर्ण हो जाएगा। एनएचएआई को इस तरह के मामलों की रोकथाम के लिए सख्त कदम उठाने चाहिए।</p>
<p><strong>ऐसे वापस पा सकते हैं फास्टैग से कटा पैसा</strong><br />एनएचएआई के अधिकारियों के अनुसार, गलत तरीके से फास्टैग से कटी राशि वापस पाने के लिए वाहन चालकों के पास कई विकल्प मौजूद हैं।<br />- जिस बैंक या कंपनी से फास्टैग जारी हुआ है, वहां सबसे पहले शिकायत दर्ज कराएं।<br />- फास्टैग पोर्टल के हेल्प डेस्क पर आॅनलाइन शिकायत की जा सकती है।<br />- फास्टैग के पीछे कस्टमर केयर का नंबर होता है जिस पर तत्काल मामले की शिकायत दर्ज करनी चाहिए।<br />- एनएचएआई के टोल फ्री नंबर 1033 पर कॉल कर भी समस्या दर्ज कराई जा सकती है।<br />- यदि यहां से समाधान नहीं मिले, तो एनएचएआई की आधिकारिक वेबसाइट पर संबंधित मैनेजर के मोबाइल नंबर या ई-मेल आईडी पर शिकायत भेजी जा सकती है।<br />- इसके बाद भी मामला हल न होने पर संबंधित क्षेत्र के प्रोजेक्ट डायरेक्टर से सीधे शिकायत की जा सकती है।</p>
<p>इस तरह के मामलों में कोई एक कारण नहीं होता, इसके कई कारण हो सकते हैं। कई बार स्कैनर फास्टेग को रीड नहीं कर पाता। ऐसी स्थिति में टोल प्लाजा पर कार्यरत कर्मचारी मैन्युअल नंबर टाइप करते हैं, इस दौरान कोई नंबर ऊपर नीचे होने पर गलती हो सकती है। ऐसी घटना होने पर वाहन मालिक एनएचएआई के टोल फ्री नंबर 1033 व आॅफिशली वेबसाइट पर कंप्लेन कर सकते हैं।<br /><strong>- संदीप अग्रवाल, प्रोजेक्ट डायरेक्टर एनएचएआई कोटा डिवीजन</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 31 Jan 2026 16:03:28 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई करवाना जंग जीतने जैसा, मरीज हो रहे परेशान</title>
                                    <description><![CDATA[एमबीएस , जेके लोन और रामपुरा जैसे बड़े सरकारी अस्पतालों में भी एमआरआई सुविधा नहीं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/getting-an-mri-at-kota-medical-college-hospital-is-like-winning-a-battle/article-140714"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/ेलल्े्.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। संभाग के सबसे बड़े मेडिकल कॉलेज अस्पताल में मरीजों को एमआरआई जांच के लिए एक से 2 महीने तक का लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। स्थिति तब और बदतर हो जाती है, जब मरीजों को शहर के प्रमुख एमबीएस अस्पताल से करीब 10 किलोमीटर का सफर तय कर मेडिकल कॉलेज पहुंचना पड़ता है, लेकिन वहां भी तारीख एक महीने बाद की मिल रही है। शहर के सरकारी स्वास्थ्य क्षेत्र में केवल एक एमआरआई मशीन मेडिकल कॉलेज अस्पताल में ही उपलब्ध है, जबकि एमबीएस अस्पताल में यह सुविधा ही नहीं है। नतीजतन, मरीजों को निजी डायग्नोस्टिक केंद्रों पर 2000 से 4,000 रुपये खर्च कर एमआरआई करवानी पड़ रही है। ग्रामीण और गरीब तबके के मरीजों की इस पीड़ा को सुनने वाला कोई नहीं है।</p>
<p><strong>हाड़ौतीभर से आते मरीज, हो रहे परेशान</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एमआरआई मशीन की कमी और लंबी प्रतीक्षा सूची ने मरीजों को निजी केंद्रों की ओर धकेल दिया है। लंबी प्रतीक्षा और और अत्यधिक भीड़ के चलते मरीजो को मजबूरन निजी केंद्रो की ओर रुख करना पड़ रहा है, जहां 4 से 5 हजार की चपत लग रही है।</p>
<p><strong>प्रतिदिन 90 से ज्यादा होती है एमआरआई</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल से बाली जानकारी के अनुसार यहां प्रतिदिन 90 से ज्यादा मरी जांच की जाती है गत वर्ष 23 हजार 62 एमआरआई जांचे की गई है। हाडोतीभर से यहां बड़ी संख्या में मरीज आते हैं। निजी केन्द्रों पर महंगे दमों पर यह जांच होने से मरीजों का अत्यधिक भार मेडिकल कॉलेज अस्पताल पर पड़ता है। ऐसे में यहां एमआरआई करवाना चुनौती बना हुआ है।</p>
<p><strong>एक ही मशीन पर सारा भार</strong><br />सरकारी क्षेत्र में एमआरआई की नए अस्पताल में ही मशीन है। यहां कोटा संभागभर से मरीज इलाज के लिए पहुंचते है। सरकार की ओर से नि:शुल्क जांच की सुविधा देने की घोषणा के साथ ही मरीजों की संख्या भी बढ़ गई है। इससे एक ही मशीन पर सारा भार आ गया है।</p>
<p><strong>मरीज को झेलनी पड़ रही दोहरी मार</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में केवल एक एमआरआई मशीन होने के कारण मरीजों को समय पर जांच नहीं हो पा रही। इधर एमबीएस अस्पताल, जो कोटा का प्रमुख सरकारी अस्पताल होने के बावजूद एमआरआई मशीन की अनुपस्थिति मरीजों के लिए बड़ी समस्या बनी हुई है। इसके अलावा, ग्रामीण क्षेत्रों से आने वाले मरीजों को शहर में आने-जाने और निजी केंद्रों पर खर्च करने की दोहरी मार झेलनी पड़ रही है।<br /><strong>- एड. बीटा स्वामी</strong></p>
<p><strong>लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधाए बनी चुनौती</strong><br />ग्रामीण व आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के मरीज इस स्थिति से सबसे अधिक प्रभावित हैं। कोटा मेडिकल कॉलेज अस्पताल शहर में ही है, लेकिन लंबी प्रतीक्षा और सीमित सुविधायें मरीजों के लिए चुनौती बन गई है। स्थानीय निवासियों और सामाजिक कार्यकतार्ओं ने सरकार से मांग की है कि एमबीएस अस्पताल में एमआरआई मशीन स्थापित की जाए ।<br /><strong>- कुशाल सेन, समाजसेवी</strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />मेडिकल कॉलेज अस्पताल में एक ही एमआरआई मशीन है, जो काफी पुरानी है। ऐसे में उच्च गुणवत्तायुक्त मशीन स्थापित होनी चाहिए। हालांकि इसके लिए प्रपोजल दिया हुआ है। अस्पताल में मरीजों को बेहतर चिकित्सा सुविधा देने के लगातार प्रयास किया जा रहे हैं।<br /><strong>- डॉ. आशुतोष शर्मा, अधीक्षक मेडिकल कॉलेज अस्पताल</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 24 Jan 2026 17:22:15 +0530</pubDate>
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                <title>चंबल के किनारे बसी आबादी को नहीं मिल रहा पेयजल </title>
                                    <description><![CDATA[अवैध कनेक्शन से मोटर  जलने  और केबल चोरी की घटनाएं आम हो गई है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/population-living-along-the-chambal-river-banks-not-receiving-drinking-water/article-138584"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2026-01/1200-x-600-px13.png" alt=""></a><br /><p>भैंसरोड़गढ़। राणा प्रताप सागर बांध से पूरे प्रदेश में जलापूर्ति होने के बावजूद रावतभाटा नगरपालिका क्षेत्र की ग्राम पंचायत बाड़ोलिया में कई वर्षां से पानी की गंभीर समस्या बनी हुई है। ग्रामीणें का कहना है कि प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही और अवैध नल कनेक्शन के चलते पीने के पानी की आपूर्ति बूंद-बूंद तक सीमित हो गई है। जबकि निजी कनेक्शन के माध्यम से पानी की बबार्दी जारी है। ग्रामवासियों ने बताया कि नगर पालिका में विलय के बाद से उन्हें पानी के लिए लगातार टैंकरों पर निर्भर रहना पड़ रहा है। अवैध कनेक्शन से मोटर पर अत्यधिक लोड पड़ता है। जिसके बार-बार मोटर जल जाती है और केबल चोरी की घटनाएं आम बात हो गई है। इसके चलते न केवल पीने का पानी प्रभावित हुआ है,बल्कि ग्रामीणों पर आर्थिक और मानसिक बोझ भी बढ गया है।     </p>
<p><strong>मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग लगने से बढी परेशानी </strong><br />ग्रामवासियों ने यह भी आरोप लगाया कि  मोटर और पाइप लाइन में बार-बार आग और चोरी की घटनाएं हो रही है, बावजूद इसके पुलिस और नगर पालिका द्वारा कोई ठेोस कार्रवाई नहीं की जा रही। तहसीलदार और नगरपालिका प्रशासन द्वारा टेक्स्ट संदेश के माध्यम से शिकायतें तो प्राप्त हुई, लेकिन समाधान अब तक नहीं हो पाया। </p>
<p>कई स्थानों पर कर्मचारी अपने घर पर पानी का उपयोग खेती के लिए कर रहे है, जबकि निजी वाहन धोने के लिए भी पानी का उपयोग किया जा रहा है। <br /><strong>-अंजलि, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे घरों में तो पीने का पानी नहीं आ रहा, वहीं नगर पालिका द्वारा नियुक्त कर्मचारी चार महीने से भुगतान न मिलने के कारण समय पर नहीं खोलते।                                                             <br /><strong>-ममता, गृहणी।</strong></p>
<p>हमारे यहां जिस मोटर से पानी आता है वहां की कभी केबल चोरी हो जाती है तो कभी केबल में आग लगा दी जाती है।  पूर्व में ना तो किसी सचिव ने और वर्तमान में किसी कर्मचारी या नगर पालिका ने केबल चोरी की शिकायत पुलिस थाने में नहीं की।  जिसे चोरों के हौसले बुलंद है। <br /><strong>-मयंक, ग्रामवासी। </strong></p>
<p>समस्या का अतिशीघ्र समाधान किया जाएगा। जलापूर्ति की व्यवस्था सुचारू करने के लिए कदम उठाए जा रहे है। <br /><strong>- विवेक गरासिया, तहसीलदार। </strong></p>
<p> </p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 06 Jan 2026 16:00:38 +0530</pubDate>
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                            </item>
            <item>
                <title>मुख्य मार्ग पर अधूरे सड़क निर्माण से लोगों को हो रही परेशानी</title>
                                    <description><![CDATA[नई सीसी सड़क होने और दूसरी तरफ गड्डों व कच्चे हिस्से के कारण वाहन असंतुलित हो रहे हैं।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/incomplete-road-construction-on-the-main-road-is-causing-problems-for-people/article-136631"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(4)8.png" alt=""></a><br /><p>मोड़क गांव। कस्बे के मुख्य मार्ग की हालत दिनों काफी खराब है। बरसात का सम नहीं होने के बावजूद सड़क पर जगह-जगह गड्ढे हो गए हैं। उखड़ी सतह के कारण वाहन चालकों और राहगीरों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है। स्थानीय लोगों ने बताया कि कुछ न पूर्व सड़क के एक हिस्से में सीसी ड़क का निर्माण कर दिया गया। लेकिन दूसरी ओर सड़क को जस का तस छोड़ दिया गया। आधा-अधूरा निर्माण होने से समस्या और भी गंभीर हो गई है। एक तरफ नई सीसी सड़क होने और दूसरी तरफ गड्डों व कच्चे हिस्से के कारण वाहन असंतुलित हो रहे हैं।</p>
<p><strong>लोगों ने प्रशासन से लगाई गुहार</strong><br />निवासियों ने संबंधित विभाग और प्रशासन से मांग की है कि जल्द से जल्द पूरी सड़क का समुचित निर्माण कराया जाए। ताकि आमजन को राहत मिल सके और किसी बड़े हादसे की आशंका को टाला जा सके।</p>
<p><strong>पैदल राहगीरों को भी संभलकर चलना पड़ रहा</strong><br />दोपहिया वाहन चालकों के लिए यह मार्ग विशेष रूप से जोखिम भरा साबित हो रहा है। वहीं पैदल राहगीरों को भी संभलकर निकलना पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि जब निर्माण कार्य शुरू किया गया था तो पूरी सड़क को दुरुस्त किया जाना चाहिए था।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />इस रोड को अधूरा छोड़ने से विशेषकर स्कूली बच्चों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। इस रोड़ से बड़ी संख्या में वाहन निकलते हैं। जिससे हमेशा हादसों की आशंका बनी रहती है।<br /><strong>- ममता रेगर, जनप्रतिनिधि</strong></p>
<p>इस रोड़ पर ट्रैफिक का अधिक दबाव होने के कारण अभी सड़क को एक साइड से कंप्लीट किया जा रहा है। इसके कंप्लीट होने के बाद ट्रैफिक डायवर्ट कर 5 दिनों में दुबारा काम शुरू कर दिया जाएगा।<br /><strong>- राजकुमार राजोरिया, परियोजना निदेशक, आरएसआरडीसी</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 20 Dec 2025 16:38:30 +0530</pubDate>
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            <item>
                <title>इन्द्रगढ़-मोहनपुरा लिंक रोड की टूटी पुलिया से जनजीवन प्रभावित, बारिश में क्षतिग्रस्त पुलिया महीनों से बंद</title>
                                    <description><![CDATA[ग्रामीणों की मांग है कि मिट्टी डालकर अस्थायी रूप से मार्ग चालू किया जाए। ]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/bundi/a-broken-culvert-on-the-indragarh-mohanpura-link-road-has-disrupted-public-life--the-culvert--damaged-during-the-rains--has-been-closed-for-months/article-135319"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px)-(1200-x-600-px)-(1)3.png" alt=""></a><br /><p>इन्द्रगढ़। इन्द्रगढ़ से मोहनपुरा जाने वाले लिंक रोड पर इंद्राणी नदी पर बनी पुलिया बारिश के दौरान तेज बहाव में टूट गई थी, जिसका सुधार कार्य अब तक शुरू नहीं हो पाया है। पुलिया बंद होने से मोहनपुरा के ग्रामीणों और इन्द्रगढ़ नगरवासियों को  असुविधा का सामना करना पड़ रहा है। यह मार्ग पुराना बस स्टैंड के पास स्थित भट्टे से होते हुए सार्वजनिक निर्माण विभाग कार्यालय को जोड़ता हुआ आगे मोहनपुरा ग्राम तक जाता है। इसी रास्ते से ग्रामीण सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र इन्द्रगढ़ में उपचार के लिए जाते हैं और कई सब्जी विक्रेता अपनी उपज इन्द्रगढ़ और सुमेरगंजमंडी ले जाते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि पुलिया टूटने के कारण उन्हें दो किलोमीटर अतिरिक्त दूरी तय कर श्रीराम चौराहा होकर इन्द्रगढ़ पहुंचना पड़ता है, जिससे चौराहे पर अनावश्यक भीड़भाड़ बढ़ गई है। ग्रामीणों ने बताया कि जुलाई और अगस्त की भारी बारिश में पुलिया टूटने के बाद से स्थिति जस की तस बनी हुई है। कई विभागीय कार्यालयों जैसे तहसील, विद्युत, जलदाय तक पहुँचने के लिए भी लोगों को लंबा चक्कर लगाना पड़ रहा है, जिससे समय और श्रम दोनों की बबार्दीहो रही है।</p>
<p>ग्रामीणों की मांग है कि जब तक स्थायी पुलिया का निर्माण नहीं होता, तब तक मिट्टी डालकर अस्थायी रूप से मार्ग चालू किया जाए, ताकि आवागमन सुचारू हो सके। विभागीय अधिकारियों का कहना है कि जल्द ही टूटी हुई रपट के स्थान पर स्थायी पुलिया निर्माण की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। फिलहाल, स्थानीय लोगों को उम्मीद है कि अस्थायी समाधान उपलब्ध होने पर रोजमर्रा का आवागमन कुछ हद तक सहज हो सकेगा।</p>
<p><strong>संबंधित अधिकारी तुरंत पुलिया निर्माण का प्रस्ताव लें </strong><br />तेज बारिश होने से इंद्राणी नदी मे आए तेज बहाव से रपट पुलिया टूट गई है संबंधित अधिकारियों से मिलकर जल्द ही बड़ी पुलिया निर्माण का प्रस्ताव तैयार करवाने की मांग करेंगे ताकि इसका स्थाई समाधान हो सकें एवं आमजन को राहत मिले <br /><strong>-गिरिराज जैन, अध्यक्ष भाजपा शहर मंडल, इन्द्रगढ़</strong></p>
<p><strong>दो किमी चक्कर, मुश्किल सफर</strong><br />मोहनपुरा लिंक रोड की पुलिया टूटने से मोहनपुरा वासियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है ग्रामीणों को 2 किमी. अतिरिक्त चक्कर लगा कर सरकारी कार्यालयों में पहुंचना पड़ता है ।<br /><strong>-लोकेश कुमार सैनी, भाजपा नेता व निवासी ग्राम मोहनपुरा  </strong></p>
<p><strong> आवागमन बंद , आमजन परेशान </strong><br />मोहनपुरा लिंक रोड पुलिया पर आवागमन बंद होने से इन्द्रगढ़ सब्जी मंडी व कटला बाजार में आने वाले व्यापारी व ग्राहक को परेशानी हो रही है। इसका समस्या का जल्द ही समाधान होना चाहिए, जिससे व्यापारी, ग्राहक व आमजन को राहत मिले<br /><strong>-नवीन कुमार राठौर, भाजपा नेता व व्यापारी इन्द्रगढ़। </strong></p>
<p><strong>आखिर जाम से कब मिलेगी निजात</strong><br /> पुलिया टूटने से भारी परेशानी हो रही अतिरिक्त चक्कर के साथ-साथ कई बार चौराहा के जाम लगने से कई समस्या का सामना करना पड़ता है जिससे अतिरिक्त समय लगता है। इसका जल्द समाधान होना चाहिए ।<br /><strong>-सत्यनारायण बंसल, स्थानीय व्यापारी इन्द्रगढ़। </strong></p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />तेज बारिश के कारण मोहनपुरा रोड की रपट पुलिया टूट गई थी। इसके स्थान पर नई कॉलम वाली पुलिया का निर्माण कराया जाएगा, ताकि समस्या का स्थाई हल हो सके एवं कुछ दिनों में अस्थाई रूप से आवागमन शुरू करवा दिया जाएगा ।<br /><strong>-बृज भूषण शर्मा,अधिशाषी अधिकारी, नगर पालिका इन्द्रगढ़</strong></p>
<p> रपट पुलिया टूट जाने से मोहनपुरा से इन्द्रगढ़ में व्यापार करने आने वाले व्यापारियों के साथ सब्जी विक्रेताओ और ग्राहकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ता है जल्द ही नई पुलिया का निर्माण करवाने का प्रयास किया जाएगा ।<br /><strong>-नीलम भारती, चेयरमैन, नगर पालिका, इन्द्रगढ़।</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>बूंदी</category>
                                    

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                <pubDate>Tue, 09 Dec 2025 15:28:23 +0530</pubDate>
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                <title>गोपाल निवास बाग बदहाल : खुले बिजली बोर्ड, अंधेरा और अव्यवस्था से बढ़ा खतरा, पार्क में  लगे सोलर पैनल बने  शोपीस </title>
                                    <description><![CDATA[हरियाली और आकर्षक नर्सरी के लिए जाना जाने वाला पार्क हुआ जर्जर।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/gopal-niwas-bagh--a-dilapidated-park--dangers-exacerbated-by-open-electrical-wiring--darkness--and-clutter--solar-panels-in-the-park-become-mere-showpieces/article-134953"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/1200-x-600-px-(3)2.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। शहर के नयापुरा क्षेत्र में स्थित गोपाल निवास बाग इन दिनों अपनी बदहाल व्यवस्था के कारण लोगों की चिंता का विषय बना हुआ है। कभी इस क्षेत्र का आकर्षण रहा यह पार्क अब लापरवाही और अव्यवस्था की वजह से खतरों का गढ़ बनता जा रहा है। पार्क में खुले पड़े बिजली के बोर्ड लोगों की सुरक्षा के लिए गंभीर खतरा साबित हो सकते हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि बच्चों से लेकर बुजुर्ग तक इस पार्क में टहलने आते हैं, ऐसे में खुले बिजली बोर्ड किसी भी समय बड़ी दुर्घटना का कारण बन सकते हैं। वहीं जगह जगह फैला कचरा पार्क की सुन्दरता को दाग लगा रहा है।</p>
<p><strong>अंधेरे में डूबा पार्क, असामाजिक तत्वों का जमावड़ा बढ़ा</strong><br />शाम ढलते ही पार्क में अंधेरा छा जाता है। लाइट की कोई भी सुविधा उपलब्ध न होने से पार्क पूरी तरह काला हो जाता है। स्थानीय निवासियों का कहना है कि इस अंधेरे का फायदा उठाकर कई बार असामाजिक तत्वों द्वारा छीना-झपटी और लूट जैसी घटनाएं भी हो चुकी हैं। लोग भय के कारण शाम के बाद पार्क में जाना बंद कर रहे हैं।</p>
<p><strong>बच्चों के झूले टूटे, फव्वारे बंद,नर्सरी जर्जर</strong><br />गोपाल निवास बाग में बच्चों के लिए लगाए गए झूले लंबे समय से टूटे पड़े हैं। परिवार लेकर आने वाले लोगों को यहां बच्चों के मनोरंजन की कोई सुविधा नहीं मिलती। पार्क की शोभा बढ़ाने वाले फव्वारे भी बंद पड़े हैं, जिनके कारण पार्क की सुंदरता पूरी तरह फीकी पड़ चुकी है। पहले जो पार्क हरियाली और आकर्षक नर्सरी के लिए जाना जाता था, आज जर्जरता का प्रतीक बन गया है।</p>
<p> <strong>रखरखाव में शून्य व्यवस्था</strong><br />पार्क में ऊर्जा बचत के लिए लगाए गए सोलर पैनल भी अब केवल शोपीस बनकर रह गए हैं। न तो उनका रखरखाव हो रहा है और न ही उनसे पार्क को रोशनी मिल पा रही है। इससे साफ है कि पार्क की मरम्मत और देखरेख को लेकर जिम्मेदार विभाग गंभीर नहीं है।</p>
<p><strong>शहर के नागरिकों का कहना</strong><br />पार्क में सुरक्षा की कोई व्यवस्था नहीं होने से हादसों और आपराधिक गतिविधियों की आशंका लगातार बनी रहती है। स्थानीय लोगों ने पार्क प्रबंधन से मरम्मत, रोशनी की व्यवस्था, सुरक्षा गार्ड की नियुक्ति तथा बच्चों के खेल उपकरणों की पुनर्स्थापना की मांग की है। लोगों का कहना है, कि अगर समय रहते ध्यान नहीं दिया गया तो यह पार्क अपनी उपयोगिता और पहचान दोनों खो देगा।</p>
<p><strong>इनका कहना है</strong><br />विद्युत विभाग को सूचना प्रेषित कर दी गई है, जिसके अनुसार आगामी 2,3 दिनों में लाइटिंग व्यवस्था पूर्ण रूप से सुचारू का दी जाएगी । वहीं 10-15 दिनों के भीतर पार्क में संपूर्ण व्यवस्थाओं को दुरूस्त कर दिया जाएगा, ताकि आने वाले प्रत्येक आगंतुक को किसी भी प्रकार की असुविधा का सामना न करना पड़े।<br /><strong>- मनीष कुमार मीणा, अधिशासी अभियंता उद्यान, कोटा विकास प्राधिकरण</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 15:20:05 +0530</pubDate>
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                <title>कोटा दक्षिण वार्ड 26: नालियों में गंदगी और मनमर्जी के स्पीड ब्रेकर बने आमजन की परेशान </title>
                                    <description><![CDATA[सामुदायिक भवन नहीं होने की वजह से महंगी दर पर भवन की बुकिंग करवानी पड़ती है।]]></description>
                
                                    <content:encoded><![CDATA[<a href="https://dainiknavajyoti.com/rajasthan/kota/kota-south-ward-26--dirt-in-the-drains-and-arbitrary-speed-breakers-are-causing-inconvenience-to-the-public/article-134936"><img src="https://dainiknavajyoti.com/media/400/2025-12/963258.png" alt=""></a><br /><p>कोटा। नगर निगम दक्षिण के वार्ड 26 में वार्ड पार्षद द्वारा विकास कार्यों के तहत वार्ड में सीसी रोड व नालियों का निर्माण सहित अन्य कार्य किए गए हैं। वार्डवासी दिनेश कुमार व राधेश्याम ने बताया कि वार्ड में कचरा गाड़ी प्रतिदिन आती है, साथ ही साफ-सफाई भी होती है। पर वार्ड में नालियों की सफाई नहीं होने की वजह से नालियां गंदगी से अटी पड़ी रहती हैं, जिससे बदबू आती है।साथ ही कुछ जगहों पर सीसी रोड निर्माण के दौरान नालियों की गहराई तो बढ़ गई, पर चौड़ाई नहीं बढ़ने की वजह से परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं वार्ड में पार्क नहीं होने की वजह से भी परेशानी का सामना करना पड़ता है। बच्चों को खेलने के लिए पास ही स्थित दूसरे वार्ड के पार्क में जाना पड़ता है। बच्चों के परिजन प्रदीप व हेमंत कुमार ने बताया कि बच्चों को रोड पार कराके अन्य पार्क में ले जाना पड़ता है, जिससे कई बार हादसे होने का डर बना रहता है। वार्ड में सामुदायिक भवन नहीं होने की वजह से वार्डवासियों को अन्य जगहों पर जाकर महंगी दरों पर भवनों की बुकिंग करवानी पड़ती है।</p>
<p><strong>घरों के सामने बने स्पीड ब्रेकर</strong><br />वार्ड में कुछ लोगों ने अपने घरों के सामने मनमर्जी के स्पीड ब्रेकर बिना मापदंड के बना लिए हैं, जिसकी वजह से बाइक सवारों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वहीं आते-जाते बाइक सवारों को ये ब्रेकर दर्द भी दे रहे हैं। रमेश कुमार व मनीष ने बताया कि कई बार ये ब्रेकर रात्रि के समय दिखाई नहीं देते, जिससे लोग चोटिल हो जाते हैं।</p>
<p><strong>पार्क व सामुदायिक भवन का अभाव</strong><br />वार्ड में पार्क नहीं होने की वजह से वार्डवासियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है। वार्डवासी हितेश कुमार ने बताया कि बच्चों को खेलने के लिए दूसरे वार्ड के पार्क में जाना पड़ता है, जिससे परेशानी बढ़ जाती है, क्योंकि वहां जाने के लिए रोड पार करनी पड़ती है और दुर्घटना का अंदेशा बना रहता है। साथ ही निगम का सामुदायिक भवन नहीं होने की वजह से महंगी दरों पर अन्य जगहों पर जाकर मांगलिक कार्य सहित अन्य कार्यक्रम करने पड़ते हैं। इससे आयोजकों पर दोहरी आर्थिक मार पड़ती है और दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।</p>
<p><strong>नालियों की कम गहराई बनी परेशानी</strong><br />वार्ड में बनी नालियों की कम गहराई अब वार्डवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है। वार्डवासी प्रकाश कुमार व राजेंद्र ने बताया कि नालियों की गहराई कम होने से परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। वहीं नालियों की सफाई नहीं होने से वे गंदगी से अटी पड़ी रहती हैं।</p>
<p><strong>वार्ड का एरिया :-</strong> हनुमान नगर, हनुमान नगर कच्ची बस्ती, आरएसी कैंपस इत्यादी क्षेत्र।</p>
<p>वार्ड में टिपर आता है, लेकिन नालियों की सफाई न होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। साथ ही मनमर्जी के स्पीड ब्रेकर भी परेशानी बढ़ा रहे हैं।<br /><strong>- रामचरण</strong></p>
<p>नालियों की सफाई नहीं होने से परेशानी का सामना करना पड़ता है। वार्ड में पार्क नहीं होने की वजह से बच्चों सहित अन्य लोगों को दिक्कत आती है। सामुदायिक भवन नहीं होने की वजह से महंगी दर पर भवन की बुकिंग करवानी पड़ती है।<br /><strong>- मुकेश मीणा</strong></p>
<p>घरों के सामने स्थित नाले की चौड़ाई कम कर दी जाए और इस पर ढकान कर दी जाए तो कुछ हद तक परेशानी से राहत मिल सकती है। क्योंकि रात्रि के समय नाला खुला होने से लोग इसमें कचरा डाल देते हैं।<br /><strong>- हेमंत कुमार</strong></p>
<p>पार्षद को तीन बार कॉल किया गया उनके द्वारा कॉल रिसीव नहीं किया गया।<br /><strong>- योगेन्द्र खिंची, पार्षद</strong></p>]]></content:encoded>
                
                                                            <category>राजस्थान</category>
                                            <category>कोटा</category>
                                    

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                <pubDate>Sat, 06 Dec 2025 13:31:24 +0530</pubDate>
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